1857 का विद्रोह (राजस्थान इतिहास)
1. क्रांति के समय प्रमुख पदाधिकारी
- ब्रिटेन की महारानी: विक्टोरिया
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री: लॉर्ड पामर्स्टन
- भारत के गवर्नर जनरल: लॉर्ड कैनिंग
- राजस्थान के A.G.G.: जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस
- क्रांति का तात्कालिक कारण: एनफील्ड राइफल (गाय व सूअर की चर्बी वाले कारतूस का प्रयोग)
- क्रांति का प्रतीक: कमल का फूल और रोटी (चपाती)
2. राजस्थान में 6 सैनिक छावनियाँ
| क्र.सं. | छावनी | मुख्यालय (जिला) | रेजीमेंट / सैनिक टुकड़ी |
| 1 | नसीराबाद | अजमेर | 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री |
| 2 | नीमच | मध्य प्रदेश (ग्वालियर) | बंगाल सैनिक ब्रिगेड |
| 3 | एरिनपुरा | पाली | जोधपुर लीजियन |
| 4 | देवली | टोंक | कोटा कन्टिनजेन्ट |
| 5 | ब्यावर | अजमेर | मेर/मेरवाड़ा रेजीमेंट |
| 6 | खेरवाड़ा | उदयपुर | मेवाड़ भील कोर (MBC) |
नोट: ब्यावर और खेरवाड़ा छावनियों ने 1857 की क्रांति के प्रत्यक्ष विद्रोह में भाग नहीं लिया था।
3. प्रमुख रियासतें, शासक एवं पॉलिटिकल एजेंट (P.A.)
| रियासत | शासक | पॉलिटिकल एजेंट (P.A.) |
| जयपुर | सवाई रामसिंह द्वितीय | विलियम ईडन |
| मारवाड़ी (जोधपुर) | तख्त सिंह | मैक मेसन |
| मेवाड़ (उदयपुर) | स्वरूप सिंह | मेजर शॉवर्स |
| कोटा | महाराव रामसिंह द्वितीय | मेजर बटन |
| भरतपुर | महाराजा जसवंत सिंह | मॉरिसन |
| सिरोही | शिवसिंह | जे. डी. हॉल |
4. प्रमुख युद्ध एवं घटनाक्रम
- राजस्थान में क्रांति की शुरुआत: 28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी से।
- बिथौड़ा का युद्ध (8 सितंबर 1857): आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत ने अंग्रेजों व जोधपुर की संयुक्त सेना को हराया।
- चेलावाास का युद्ध (18 सितंबर 1857): 'काला-गोरा का युद्ध' भी कहा जाता है। इसमें मैक मेसन का सिर काटकर आउवा के किले पर लटका दिया गया था।
- कोटा में विद्रोह (15 अक्टूबर 1857): लाला जयदयाल और मेहराब खाँ के नेतृत्व में जन-विद्रोह हुआ। मेजर बटन का सिर काटकर पूरे शहर में घुमाया गया।
5. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- अमरचंद बांठिया: बीकानेर निवासी जिन्हें 'राजस्थान का मंगल पांडे' और '1857 की क्रांति का भामाशाह' कहा जाता है। इन्हें ग्वालियर में फांसी दी गई थी।
- तांत्या टोपे: राजस्थान की लगभग सभी रियासतों (जैसलमेर को छोड़कर) में घूमकर सहायता मांगी। नरवर के मानसिंह नरूका के विश्वासघात के कारण पकड़े गए और 18 अप्रैल 1859 को फांसी दी गई।
- सुगाली माता: आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह की इष्टदेवी, जिन्हें 10 सिर व 54 हाथ वाली देवी कहा जाता है।