आपदा प्रबन्धन एवं जलवायु परिवर्तन

आपदा प्रबन्धन एवं जलवायु परिवर्तन

परिचय (Introduction)

आपदा (Disaster) प्राकृतिक या मानव निर्मित वह अप्रत्याशित घटना है जो व्यापक स्तर पर जन-धन, संपत्ति और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाती है, जिससे उबरना समाज के सामान्य संसाधनों के वश में नहीं होता। आपदा से निपटने की संपूर्ण प्रक्रिया को आपदा प्रबंधन (Disaster Management) कहा जाता है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) प्राकृतिक आपदाओं (जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवात) की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ाने का सबसे बड़ा कारक बन गया है। अतः आपदा न्यूनीकरण के लिए जलवायु परिवर्तन को समझना और इसके शमन (Mitigation) के उपाय करना अनिवार्य हो गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दोनों जुड़े हुए विषयों से प्रचुर मात्रा में प्रश्न पूछे जाते हैं।

📌 एक नजर में

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act): 2005 में पारित हुआ।
  • NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण): स्थापना 2006, इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
  • NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल): 2006 में गठित (विश्व का सबसे बड़ा समर्पित आपदा प्रतिक्रिया बल)।
  • जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPCC): 2008 में जारी (8 राष्ट्रीय मिशन शामिल)।
  • सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework): 2015-2030 (आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए वैश्विक समझौता)।
  • पेरिस समझौता (Paris Agreement): 2015 (वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C या 2°C से नीचे रखने का लक्ष्य)।

1. आपदाओं का वर्गीकरण (Classification of Disasters)

आपदाओं को मुख्य रूप से उनकी उत्पत्ति के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है:

क्र. प्रकार उप-प्रकार / उदाहरण भारत के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र
1. भू-भौतिकीय (Geophysical) भूकंप, ज्वालामुखी, सुनामी, भूस्खलन हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व भारत, अंडमान एवं निकोबार
2. जल-मौसम विज्ञान (Hydro-Meteorological) बाढ़, चक्रवात (Cyclone), सूखा, बादल फटना, लू (Heat wave) तटीय राज्य (ओडिशा, आंध्र), बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड
3. जैविक (Biological) महामारी (Covid-19, प्लेग), कीट हमला (टिड्डी दल) संपूर्ण देश
4. मानव निर्मित (Man-made) औद्योगिक दुर्घटनाएँ, परमाणु रिसाव, रासायनिक गैस रिसाव, आग, भगदड़ औद्योगिक क्षेत्र एवं बड़े शहर

2. भारत में आपदा प्रबंधन तंत्र (Institutional Framework)

भारत में आपदा प्रबंधन के लिए त्रि-स्तरीय (Three-tier) ढांचा स्थापित किया गया है:

  • राष्ट्रीय स्तर (National Level): राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) — अध्यक्ष: प्रधानमंत्री
  • राज्य स्तर (State Level): राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) — अध्यक्ष: मुख्यमंत्री
  • जिला स्तर (District Level): जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) — अध्यक्ष: जिलाधिकारी (DM / Collector)

⚠️ आपदा प्रबंधन चक्र (Disaster Management Cycle)

आपदा प्रबंधन केवल राहत कार्य नहीं है, यह एक चक्रीय प्रक्रिया है। इसके 4 प्रमुख चरण होते हैं:

  1. न्यूनीकरण (Mitigation): आपदा के प्रभाव को कम करने के स्थायी उपाय (जैसे- भूकंप रोधी भवन बनाना)।
  2. तैयारी (Preparedness): चेतावनी प्रणाली, मॉक ड्रिल, और आवश्यक सामग्री का भंडारण।
  3. अनुक्रिया (Response / Relief): आपदा आते ही तत्काल बचाव, भोजन, चिकित्सा उपलब्ध कराना।
  4. पुनर्निर्माण/पुनर्वास (Recovery/Rehabilitation): जीवन को पुनः सामान्य स्थिति में लाना।

3. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) एवं ग्रीन हाउस प्रभाव

जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) है, जो ग्रीन हाउस प्रभाव (Green House Effect) के कारण होता है।

🧠 याद रखने की ट्रिक

प्रमुख ग्रीन हाउस गैसों (GHG) को याद रखने की शानदार ट्रिक:

"ओ मीना का जलवा"

  • = ओजोन (O₃)
  • मी = मीथेन (CH₄) - धान के खेतों और पशुओं की जुगाली से निकलती है।
  • ना = नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) - (हंसाने वाली गैस / लाफिंग गैस)
  • का = कार्बन डाईऑक्साइड (CO₂) - (ग्लोबल वार्मिंग के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी)
  • जलवा = जलवाष्प (Water Vapour) - (मात्रा के आधार पर सबसे अधिक ग्रीन हाउस प्रभाव डालती है)
  • * इनके अलावा क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFCs) भी प्रमुख GHG है।

4. जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक प्रयास (International Conventions)

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण सम्मेलन हुए हैं:

सम्मेलन / प्रोटोकॉल वर्ष महत्वपूर्ण तथ्य एवं उद्देश्य
पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit) 1992 रियो डी जनेरियो (ब्राज़ील) में आयोजित। यहीं से UNFCCC (संरा जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन) का जन्म हुआ।
क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) 1997 जापान में अपनाया गया। इसका मुख्य लक्ष्य ग्रीन हाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन को कम करना है। (यह 2005 में लागू हुआ)।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) 1987 यह ओजोन परत के संरक्षण (CFC पर रोक) से संबंधित है। (16 सितंबर - ओजोन दिवस)।
पेरिस समझौता (Paris Agreement - COP 21) 2015 वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2°C के काफी नीचे (संभव हो तो 1.5°C तक) सीमित रखने का ऐतिहासिक लक्ष्य।
सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) 2015 जापान के सेंडाई में अपनाया गया। यह आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए 2015 से 2030 तक की वैश्विक कार्ययोजना है।

5. जलवायु परिवर्तन पर भारत की राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPCC)

भारत सरकार ने 2008 में जलवायु परिवर्तन के लिए 8 राष्ट्रीय मिशन शुरू किए थे। परीक्षा में सीधे पूछा जाता है कि इनमें से कौन सा मिशन शामिल है या नहीं:

  1. राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission)
  2. राष्ट्रीय संवर्धित ऊर्जा बचत मिशन
  3. राष्ट्रीय सतत पर्यावास मिशन (Sustainable Habitat)
  4. राष्ट्रीय जल मिशन (National Water Mission)
  5. राष्ट्रीय हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र परिरक्षण मिशन
  6. राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (Green India Mission)
  7. राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (Sustainable Agriculture)
  8. जलवायु परिवर्तन हेतु राष्ट्रीय रणनीतिक ज्ञान मिशन

📊 तुलना तालिका: शमन (Mitigation) vs अनुकूलन (Adaptation)

आधार शमन (Mitigation) अनुकूलन (Adaptation)
अर्थ जलवायु परिवर्तन के कारणों को कम करना या रोकना। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुसार स्वयं को ढालना।
उदाहरण जीवाश्म ईंधन (कोयला/पेट्रोल) का कम उपयोग, सौर ऊर्जा अपनाना, वनीकरण (Afforestation)। सूखा-प्रतिरोधी फसलें उगाना, समुद्र किनारे ऊँची दीवारें बनाना, बाढ़ चेतावनी प्रणाली।
दृष्टिकोण यह एक दीर्घकालिक (Long-term) और वैश्विक प्रयास है। यह एक अल्पकालिक/मध्यम और स्थानीय (Local) प्रयास है।

🎯 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य (Top Exam Facts)

1 भोपाल गैस त्रासदी: 2-3 दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था (भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदा)।

2 चेरनोबिल आपदा: 26 अप्रैल 1986 को यूक्रेन (तत्कालीन USSR) में हुई विश्व की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना

3 फुकुशिमा परमाणु आपदा: 2011 में जापान में भूकंप और सुनामी के कारण हुई परमाणु दुर्घटना।

4 अम्लीय वर्षा (Acid Rain): उद्योगों से निकलने वाले सल्फर डाईऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) के कारण होती है। (मार्बल कैंसर का कारण)।

5 COP (Conference of Parties): UNFCCC की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। COP-28 (2023) दुबई में और COP-27 शर्म अल-शेख (मिस्र) में आयोजित हुआ था।

⚡ Quick Revision

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम पारित हुआ: 2005 में
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का अध्यक्ष: प्रधानमंत्री
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) का अध्यक्ष: मुख्यमंत्री
  • NDRF (National Disaster Response Force) की स्थापना: 2006
  • भूकंप की तीव्रता मापने का पैमाना: रिक्टर स्केल (भूकंप विज्ञान - Seismology)
  • सुनामी (Tsunami) किस भाषा का शब्द है: जापानी (बंदरगाह की लहरें)
  • सर्वाधिक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन करने वाला देश: चीन (वर्तमान में)
  • ओजोन परत को सर्वाधिक नुकसान पहुँचाने वाली गैस: CFC (क्लोरोफ्लोरो कार्बन)
  • क्योटो प्रोटोकॉल का मुख्य उद्देश्य: ग्रीन हाउस गैसों में कमी लाना
  • 'सेंडाई फ्रेमवर्क' और 'ह्योगो फ्रेमवर्क' संबंधित हैं: आपदा जोखिम न्यूनीकरण से
  • COP-21 (2015) कहाँ आयोजित हुआ था: पेरिस (फ्रांस)
  • 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) की स्थापना: 2010 (अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज)
  • भारत में सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र कहाँ स्थापित है: हैदराबाद (INCOIS)
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का मुख्यालय: नई दिल्ली
  • भारत का कितने प्रतिशत भू-भाग भूकंप संभावित क्षेत्र है: लगभग 59%

🚀 Exam Booster

  1. भूकंपीय जोन: भारत को 4 भूकंपीय जोनों (Zone II, III, IV, V) में बाँटा गया है। Zone V सबसे अधिक खतरे वाला क्षेत्र है (उत्तर-पूर्व भारत, कश्मीर, कच्छ, अंडमान)। (Zone I अब अस्तित्व में नहीं है)।
  2. सुनामी की चेतावनी: समुद्र तल में 7.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप आने पर सुनामी की संभावना होती है।
  3. एल नीनो (El Nino): इसके कारण भारत में मानसून कमजोर होता है और सूखा पड़ता है।
  4. ला नीना (La Nina): इसके कारण भारत में मानसून सामान्य से अधिक मजबूत होता है और बाढ़ का खतरा रहता है।
  5. कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit): इस अवधारणा का उद्भव 'क्योटो प्रोटोकॉल' से हुआ था। एक कार्बन क्रेडिट 1 टन कार्बन डाईऑक्साइड के बराबर होता है।
  6. कार्बन सिंक (Carbon Sink): वन और महासागर पृथ्वी के सबसे बड़े कार्बन सिंक हैं, जो CO₂ को सोख लेते हैं।
  7. आपदा जोखिम सूचकांक: भारत विश्व में जलवायु परिवर्तन और आपदाओं के प्रति सबसे संवेदनशील देशों (शीर्ष 10) में गिना जाता है।
  8. चक्रवातों का नामकरण: हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों का नामकरण 13 देशों के समूह द्वारा वर्णमाला (Alphabetical) और क्रमानुसार किया जाता है (जैसे- बिपरजॉय, मोचा, तौकते)।
  9. ब्लू कार्बन (Blue Carbon): तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र (जैसे मैंग्रोव) द्वारा अवशोषित कार्बन को 'ब्लू कार्बन' कहा जाता है।
  10. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM): नई दिल्ली में स्थित है, जो आपदा प्रबंधन पर प्रशिक्षण और अनुसंधान का कार्य करता है।