MGNREGA एवं रोजगार गारंटी मिशन - प्रतियोगी परीक्षा नोट्स

महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) एवं रोजगार गारंटी मिशन

परिचय (Introduction)

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने और न्यूनतम मजदूरी के साथ अकुशल शारीरिक श्रम की कानूनी गारंटी प्रदान करने में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की ऐतिहासिक भूमिका रही है। इसे मूल रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) के रूप में वर्ष 2005 में अधिनियमित किया गया था।

समय की मांग और ग्रामीण रोजगार की नई चुनौतियों के अनुरूप आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास के विभिन्न आयामों को समाहित किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RAS, REET, CET, UPSC आदि) की दृष्टि से इस योजना के प्रावधान, वित्तीय अनुपात, और प्रशासनिक संरचना से जुड़े प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

📌 एक नजर में (At a Glance)

  • अधिनियम पारित: वर्ष 2005 (संख्या 42)
  • प्रभावी तिथि: 2 फरवरी 2006 (बंदरपल्ली, जिला बांदा, आंध्र प्रदेश से शुभारंभ)
  • नाम परिवर्तन: 2 अक्टूबर 2009 को NREGA का नाम बदलकर MGNREGA किया गया।
  • गारंटी: वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कम से कम 100 दिन का अकुशल शारीरिक रोजगार।

1. MGNREGA की मुख्य विशेषताएं एवं प्रावधान

यह दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा और रोजगार गारंटी कार्यक्रमों में से एक है:

  • कानूनी अधिकार: यह रोजगार की मांग करने वाले ग्रामीण नागरिकों के लिए एक वैधानिक अधिकार (Legal Right) है। यदि आवेदन के 15 दिन के भीतर काम नहीं मिला, तो बेरोजगारी भत्ता देय होता है।
  • महिला सहभागिता: योजना के तहत कुल कामगारों में कम से कम 33 प्रतिशत महिलाएं होना अनिवार्य किया गया है।
  • मजदूरी भुगतान: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में भुगतान किया जाता है।
  • सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए ग्राम सभा स्तर पर सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य है।

2. वित्तीय पोषण और लागत सहभागिता (Funding Pattern)

घटक केंद्र सरकार का हिस्सा राज्य सरकार का हिस्सा
अकुशल श्रम लागत (Unskilled Wages) 100% 0%
सामग्री लागत (Material Cost) 75% 25% (विशेष राज्यों में 90:10)
प्रशासनिक व्यय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीमा राज्य द्वारा वहन

3. पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका

MGNREGA के क्रियान्वयन में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है:

  • ग्राम पंचायत स्तर: कार्य की मांग का पंजीकरण, जॉब कार्ड जारी करना, कार्य प्रस्ताव तैयार करना और अधिकांश कार्यों (कम से कम 50%) का निष्पादन करना।
  • पंचायत समिति स्तर: विभिन्न ग्राम पंचायतों से प्राप्त प्रस्तावों की संवीक्षा करना और तकनीकी अनुमोदन देना।
  • जिला परिषद स्तर: योजना की समग्र मॉनिटरिंग, समन्वय, और जिला स्तर पर सामाजिक अंकेक्षण की देखरेख करना।

⚠️ विशेष तथ्य (Critical Note)

राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सूखा, आपदा या विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए MGNREGA के तहत केंद्रीय निर्धारित 100 दिनों के अतिरिक्त राज्य अपने संसाधनों से अतिरिक्त दिनों (जैसे 25 दिन या विशेष श्रेणियों के लिए) का रोजगार देने के प्रावधान करती है, जो परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।

4. तुलना तालिका: MGNREGA और अन्य रोजगार गारंटी पहल

आधार MGNREGA (ग्रामीण रोजगार) शहरी रोजगार गारंटी योजना (जैसे इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी)
कार्यक्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र शहरी निकाय क्षेत्र
लक्षित वर्ग ग्रामीण अकुशल श्रमिक परिवार शहरी बेरोजगार परिवार
गारंटीकृत दिवस न्यूनतम 100 दिन प्रति परिवार शहरी निकायों के लिए निर्धारित दिवस

🎯 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  1. 1. नरेगा (NREGA) अधिनियम को संसद द्वारा सितंबर 2005 में पारित किया गया था।
  2. 2. इस योजना का देशव्यापी शुभारंभ 2 फरवरी 2006 को हुआ था।
  3. 3. महात्मा गांधी के नाम पर इस योजना का नामकरण 2 अक्टूबर 2009 को किया गया था।
  4. 4. जॉब कार्ड धारक परिवार को आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
  5. 5. योजना के तहत कार्यों का चयन मुख्य रूप से ग्राम सभा की बैठकों में अनुमोदित प्रस्तावों के आधार पर किया जाता है।

🧠 याद रखने की ट्रिक

MGNREGA की महत्वपूर्ण तिथियां याद रखने की ट्रिक: "शुरुआत 2006, नाम बदला 2009" (2 फरवरी 2006 को शुरुआत और 2 अक्टूबर 2009 को महात्मा गांधी के नाम पर परिवर्तन)।

⚡ Quick Revision

  1. MGNREGA अधिनियम 2005 में पारित हुआ।
  2. योजना की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को हुई।
  3. यह ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रम की कानूनी गारंटी देता है।
  4. वर्ष में न्यूनतम 100 दिन के रोजगार का प्रावधान है।
  5. श्रमिकों को भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से होता है।
  6. योजना में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है।
  7. ग्राम पंचायत स्तर पर जॉब कार्ड निःशुल्क जारी किए जाते हैं।
  8. सामग्री लागत में केंद्र और राज्य का अनुपात 75:25 है।
  9. अकुशल श्रम का 100% खर्च केंद्र सरकार उठाती है।
  10. सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) इसकी मुख्य पारदर्शिता विशेषता है।

🚀 Exam Booster

  1. रोजगार का अधिकार: यह नागरिकों को मांग आधारित (Demand-driven) रोजगार प्रदान करता है।
  2. मस्टर्ड रोल (Muster Roll): उपस्थिति और मजदूरी गणना के लिए कार्यस्थल पर रखा जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज।
  3. जिम्मेदारी: केंद्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) इसका सर्वोच्च नियामक है।
  4. प्रतियोगी परीक्षाओं में योजना की शुरुआत की तिथि, नाम बदलने का वर्ष, और श्रम व सामग्री लागत के वित्तीय अनुपात के आंकड़े सबसे अधिक बार पूछे जाते हैं।