🎨 राजस्थान की चित्रकला
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📌 सामान्य परिचय एवं मुख्य तथ्य
- राजस्थान चित्रकला का प्रारम्भ 15वीं सदी में हुआ था।
- चित्रशैली का प्रारम्भ मध्य पाषाण (10000-4000 ई.पू.) काल में हुआ था।
- भारत में चित्रकला का स्वर्णकाल जहाँगीर (1605-1627 ई.) का समय था।
- भारत में चित्रकारी के पितामह रवि वर्मा (केरल) हैं, जिन्होंने प्रताप का चित्र बनाया था।
- कार्ल खण्डेलवाल ने राजस्थान चित्रकला का स्वर्णकाल 17-18वीं सदी माना है।
- बारहमासा का सर्वप्रथम चित्रण 1377-78 ई. में मुल्ला दाऊद की रचना चंदायन में हुआ था।
- राजस्थानी चित्रकला का सर्वप्रथम वैज्ञानिक विभाजन 1916 ईस्वी आनन्द कुमार स्वामी ने 'राजपूत पेन्टिंग' ग्रंथ में किया।
विशेष नोट: राजस्थानी चित्रकला के आधुनिक जनक कुन्दन लाल मििस्त्री हैं।
🏛️ राजस्थान में चित्रकला के प्रमुख संग्रहालय एवं संस्थाएँ
| संग्रहालय का नाम | स्थान | संस्था / अकादमी | स्थान |
|---|---|---|---|
| पोथीखाना | जयपुर | कलावृत्त | जयपुर |
| जैन भंडार | जैसलमेर | राजस्थान ललित कला अकादमी | जयपुर |
| पुस्तकालय प्रकाश | जोधपुर | जवाहर कला केन्द्र | जयपुर |
| सरस्वती भण्डार | उदयपुर | पश्चिम सांस्कृतिक केन्द्र | उदयपुर |
👑 राजस्थान चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ (Schools)
राजस्थानी चित्रकला को मुख्य रूप से 4 प्रमुख स्कूलों में बांटा गया है:
- 1. मेवाड़ स्कूल: यह चित्र शैली की सबसे प्राचीन व प्रमुख केंद्र है। इस पर अजंता शैली का प्रभाव पड़ा। (प्रमुख उपशैलियाँ: उदयपुर, नाथद्वारा, देवगढ़, बूँदी, शाहपुरा आदि)।
- 2. मारवाड़ स्कूल: मारूप्रदेश/मारवाड़ में शृंगधर नामक चित्रकार का उल्लेख मिलता है जो राजस्थान का प्रथम चित्रकार माना जाता है। (प्रमुख उपशैलियाँ: जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, जैसलमेर, नागौर आदि)।
- 3. ढूंढाड़ स्कूल: इस शैली पर सर्वाधिक मुगल प्रभाव पड़ा। (प्रमुख उपशैलियाँ: आमेर, जयपुर, अलवर, उनियारा, शेखावाटी आदि)।
- 4. हाड़ौती स्कूल: (प्रमुख उपशैलियाँ: बूँदी और कोटा चित्रशैली)।
🌟 विशेष चित्र शैलियाँ एवं उनकी विशेषताएँ
✨ बणी-ठणी (किशनगढ़ शैली)
- किशनगढ़ के शासक सावंत सिंह की प्रेमिका रसिक प्रिया (नागरी दास) थीं।
- सावंत सिंह ने अपने दरबारी चित्रकार मोरध्वज निहालचंद से 'बणी-ठणी' का चित्र बनवाया।
- एरिक डिक्सन ने इस चित्र को भारत की 'मोनालिसा' कहा है।
- 5 मई, 1973 को बणी-ठणी पर 20 पैसे का डाक टिकट जारी किया गया।
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✨ अल्ला गीला पद्धति (आराइस पद्धति)
- यह पद्धति गीली दीवार पर चित्रकारी की जाती है।
- यह पद्धति इटली से भारत आई थी।
- अकबर व जहाँगीर के समय इसका सर्वाधिक विकास हुआ।