राजस्थान की समृद्ध और जीवंत लोक संस्कृति में राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहाँ के लोक संगीत, नृत्यों, त्यौहारों और धार्मिक अनुष्ठानों की आत्मा इनमें बसती है। थार के मरुस्थल की तान हो या मेवाड़ की घाटियों में गूंजते सुर, ये वाद्य यंत्र लोक गाथाओं को जीवंत बनाते हैं। यदि आप RPSC (जैसे RAS, SI, Lecturer) या RSMSSB (जैसे CET, Patwari, REET) परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो राजस्थान कला एवं संस्कृति खंड के तहत यह विषय बेहद महत्त्वपूर्ण है। इस लेख में हम राजस्थान के लोक वाद्य यंत्रों के चारों प्रकारों, उनकी विशेषताओं, प्रसिद्ध वादकों और परीक्षा-उपयोगी ट्रिक्स का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

राजस्थान के लोक वाद्य यंत्रों का वर्गीकरण

भारतीय संगीत शास्त्र और राजस्थान लोक संस्कृति के अनुसार वाद्य यंत्रों को निर्माण सामग्री तथा बजाने की शैली के आधार पर चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  1. तत् वाद्य (Tat Vadya): वे वाद्य यंत्र जिनमें तारों (strings/तांत) के माध्यम से स्वर उत्पन्न होते हैं।
  2. सुषिर वाद्य (Sushir Vadya): जिन्हें फूँक मारकर (हवा के दबाव से) बजाया जाता है।
  3. अवनद्ध वाद्य (Avanaddh Vadya): जो चमड़े (खाल) से मढ़े होते हैं और थप्पड़ या डंडे से बजाए जाते हैं।
  4. घन वाद्य (Ghan Vadya): जो धातु या लकड़ी के बने होते हैं और आपस में टकराने से ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

1. तत् वाद्य यंत्र (Chordophones)

ऐसे वाद्य यंत्रों में ध्वनि तारों में कंपन उत्पन्न करके निकाली जाती है। इन्हें गज (bow), मिजराफ (plectrum) या उंगलियों की सहायता से बजाया जाता है। Rajasthan Lok Vadya Yantra PDF

 

Results

#1. राजस्थान का राज्य वाद्य है- [BSTC Exam – 2015]

🎵 महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य

अलगोज़ा (Algooja):

  • संरचना: इसमें बाँसुरी की तरह दो नलियाँ (बांस/ईकड़ की) होती हैं। प्रत्येक नली में छिद्र होते हैं (प्रायः 4 से 7 छिद्र)।
  • डाक टिकट: वर्ष 2020 में अलगोज़ा पर ₹5 का डाक टिकट जारी किया जा चुका है।
  • प्रमुख वादक/जनजाति: इसे मुख्य रूप से भील व कालबेलिया जनजातियों तथा मेव जाति द्वारा बजाया जाता है। रामनाथ चौधरी (पाटोदी, जयपुर) अपनी नाक से अलगोज़ा बजाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं।

#2. कौनसा सुषिर वाद्य है? [JEN (Agri.) 10.09.2022]

🎵 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (2) अलगोज़ा (सही उत्तर):

यह फूँक मारकर (मुँह से) बजाया जाने वाला सुषिर वाद्य है। यह राजस्थान का राजकीय वाद्ययंत्र भी है।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) इकत्तारा

यह गलत है। यह एक तत् वाद्य (तारों वाला वाद्य) है, जिसे उँगलियों या मिज़राब की मदद से बजाया जाता है।

विकल्प (3) नौबत तथा (4) ताशा

ये दोनों विकल्प गलत हैं। ये दोनों अवनद्ध वाद्य (चमड़े से मढ़े हुए) की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें डंडों या हाथों से चोट मारकर/पीटकर बजाया जाता है।

#3. सुमेलित कीजिए- [कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर)-26.3.2019]
A. इकतारा      1. घन वाद्य
B. अलगोजा     2. तत् वाद्य
C. झांझ        3. सुषिर वाद्य
D. मांदल       4. अवनद्ध वाद्य

🎵 वाद्ययंत्रों का सही मिलान (Correct Matching)
A. इकत्तारा ➔ 2. तत् वाद्य

इसमें एक तार लगा होता है (अतः यह तारों की सहायता से बजने वाला तत् वाद्य है)।

B. अलगोज़ा ➔ 3. सुषिर वाद्य

यह फूँक मारकर (मुँह से) बजाया जाता है (अतः यह हवा के दबाव से बजने वाला सुषिर वाद्य है)।

C. झांझ ➔ 1. घन वाद्य

यह धातु (कांसा/पीतल) का बना ठोस वाद्य है, जो आपस में टकराने से बजता है (अतः यह घन वाद्य है)।

D. मांदल ➔ 4. अवनद्ध वाद्य

यह मिट्टी या लकड़ी के खोल पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाने वाला ताल वाद्य है, जिसे पीटकर बजाया जाता है (अतः यह अवनद्ध वाद्य है)।

#4. मुँह के द्वारा बजाए जाने वाले वाद्य यंत्रों में निम्नलिखित में से कौनसा नहीं है- [PSI – 13.09.2021]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (4) रवाज (सही उत्तर):

यह अन्य विकल्पों से भिन्न है क्योंकि रवाज एक तत् वाद्य (तारों वाला वाद्य) है।

  • विशेषता: इसे उँगलियों के नाखूनों या गज की सहायता से बजाया जाता है।
  • मुख्य वादक: यह वाद्ययंत्र मुख्य रूप से राव जाति के भाटों द्वारा उपयोग किया जाता है।
अन्य विकल्प एक समान क्यों हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) अलगोज़ा, (2) सतारा तथा (3) मशक

ये तीनों ही विकल्प गलत हैं। वर्गीकरण के आधार पर ये सभी सुषिर वाद्य की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें फूँक या मुँह से हवा देकर बजाया जाता है।

#5. निम्न में से कौनसा वाद्य अवनद्ध श्रेणी में आता है- [REET L-II (Re-Exam), 16.10.2021]

🎵 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (1) मांदल (सही उत्तर):

यह चमड़े से मढ़ा हुआ अवनद्ध (ताल) वाद्य है।

  • प्रमुख वादक: यह मुख्य रूप से भील-गरासिया जनजातियों द्वारा बजाया जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (2) मंजीरा

यह गलत है। यह धातु निर्मित घन वाद्य है, जो मुख्य रूप से कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा ‘तेरहताली’ नृत्य में प्रयुक्त होता है।

विकल्प (3) जंतर

यह गलत है। यह गुर्जर जाति के भोपों द्वारा देवनारायण जी की फड़ (पड़) बांचते समय बजाया जाने वाला एक तत् वाद्य है।

विकल्प (4) तंदूरा

यह गलत है। यह कामड़ जाति द्वारा रामदेव जी के आराधना में किए जाने वाले ‘तेरहताली’ नृत्य के समय तानपूरे की तरह बजाया जाने वाला तत् वाद्य है।



#6. निम्नलिखित में से कौनसा घन लोक वाद्य यंत्र नहीं है- [JEN (Civil) Diploma – 18.05.2022]

🎵 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (3) बाँकिया (सही उत्तर):

यह अन्य विकल्पों से भिन्न है क्योंकि बाँकिया एक सुषिर वाद्य (फूँक या मुँह से हवा देकर बजाया जाने वाला) है।

  • संरचना: यह मुख्य रूप से पीतल धातु का बना होता है और इसकी आकृति बिगुल या तुरही जैसी होती है।
  • प्रमुख वादक: इसे विशेष रूप से मांगलिक अवसरों पर सरगड़ा जाति के लोग ढोल के साथ प्रमुखता से बजाते हैं।
अन्य विकल्प एक समान क्यों हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) मंजीरा, (2) चींपिया (चिमटा) तथा (4) हांंकल

ये तीनों ही विकल्प गलत हैं। वर्गीकरण के आधार पर ये सभी धातु से निर्मित ठोस घन वाद्य की श्रेणी में आते हैं, जो आपस में या किसी चोट के माध्यम से टकराने पर स्वर उत्पन्न करते हैं।

#7. बांकिया, सिंगी और टोटा लोकवाद्य किस परम्परा से सम्बद्ध है- [Librarian Garde-II Exam – 02.08.2020]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

सुषिर वाद्य (सही उत्तर):

बाँकिया, सिंगी (सींग से बना), टोटा, नड़, मुरला, मोरचंग, और शहनाई आदि सभी फूँक (मुँह से हवा) मारकर बजाए जाने वाले सुषिर वाद्य की श्रेणी में आते हैं।

#8. ‘रमझोल’ किस प्रकार का लोक वाद्य यंत्र है? [JEN (Electric) Degree – 18.05.2022]

 परीक्षा के लिए वाद्ययंत्रों का वर्गीकरण (Quick Revision Chart)
वर्ग (Category) परिभाषा (Definition) मुख्य उदाहरण (Key Examples)
१. तत् वाद्य तार से ध्वनि उत्पन्न करने वाले रावणहत्था, सारंगी, जंतर, कामायचा, इकत्तारा, भपंग, दुकाको, रवाज।
२. सुषिर वाद्य फूँक मार कर बजाए जाने वाले अलगोज़ा, शहनाई, बाँसुरी, नड़, मोरचंग, मशक, बाँकिया, पोँगी, सिंगी।
३. अवनद्ध (ताल) चमड़े से ढके हुए वाद्य ढोल, मांदल, डमरू, चांग, ताशा, खंजरी, नौबत, नगाड़ा, मृदंग, पखावज।
४. घन वाद्य धातु या लकड़ी के बने ठोस वाद्य मंजीरा, झांझ, खड़ताल, चिमटा, रमझोल, घुँघरू, हांंकल, थाली, टंकोरा।

#9. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्य यंत्र नहीं है? [Asst. Testing Officer – 27.07.2021]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (4) कमायचा (सही उत्तर):

यह अन्य विकल्पों से भिन्न है क्योंकि कमायचा एक तत् वाद्य (तार वाला वाद्य) है।

  • मुख्य क्षेत्र व वादक: यह मुख्य रूप से जैसलमेर-बाड़मेर के मांगणियार गायकों का प्रमुख वाद्ययंत्र है।
  • संरचना: यह आम की लकड़ी से बनाया जाता है और इसमें कुल 17 तार होते हैं।
  • प्रसिद्ध वादक: साकर खाँ मांगणियार इसके सबसे प्रसिद्ध वादक रहे हैं (इन्हें कला के क्षेत्र में 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है)।
अन्य विकल्प एक समान क्यों हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) टोटो, (2) सतारा तथा (3) बाँकिया

ये तीनों ही विकल्प गलत हैं। वर्गीकरण के आधार पर ये सभी सुषिर वाद्य की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें फूँक (मुँह से हवा देकर) से बजाया जाता है।

#10. अधोलिखित में से (वाद्य यंत्र का प्रकार – वाद्य यंत्र) असंगत युग्म है- [House Keeper -9.7.2022]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (4) अवनद्ध वाद्य – जंतर (सही उत्तर):

यह युग्म असंगत (गलत) है, इसलिए यही इस प्रश्न का सही उत्तर है।

  • सुधार (Correction): जंतर अवनद्ध वाद्य नहीं, बल्कि एक तत् वाद्य (तार वाला वाद्य) है।
  • मुख्य उपयोग: इसे गुर्जर जाति के भोपों द्वारा देवनारायण जी की फड़ (पड़) बांचते समय गले में लटकाकर बजाया जाता है।
अन्य विकल्प (जो सही सुमेलित हैं):

विकल्प (1) तत् वाद्य – इकत्तारा

यह बिल्कुल सही सुमेलित है। यह एक तार की सहायता से बजने वाला वाद्य है।

विकल्प (2) सुषिर वाद्य – अलगोज़ा

यह सही सुमेलित है। यह फूँक (मुँह से हवा) मारकर बजाया जाने वाला राजस्थान का प्रसिद्ध सुषिर वाद्य है।

विकल्प (3) घन वाद्य – खड़ताल

यह सही सुमेलित है। यह लकड़ी या धातु के टुकड़ों से बना ठोस वाद्य है, जो आपस में टकराकर बजता है।



#11. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (वाद्ययंत्र-प्रकार) सुमेलित नहीं है? [Fireman Exam -29.1.2022]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (4) नड़ – घन (सही उत्तर):

यह युग्म असंगत (गलत) है, इसलिए यही इस प्रश्न का सही उत्तर है।

  • सुधार (Correction): नड़ घन वाद्य नहीं, बल्कि एक सुषिर वाद्य (फूँक से बजाया जाने वाला) है। यह कँगौर की लकड़ी से बनी एक नली होती है।
  • प्रसिद्ध वादक: जैसलमेर के कर्णा भील ‘नड़’ वाद्ययंत्र के विश्व प्रसिद्ध वादक थे।
अन्य विकल्प (जो सही सुमेलित हैं):

विकल्प (1) भपंग – तत्

यह बिल्कुल सही सुमेलित है। यह डमरू के आकार का एक तत् वाद्य है जिसमें तांत/चमड़े का प्रयोग होता है और इसे तारों की मदद से बजाया जाता है (जहूर खाँ मेवाती इसके प्रसिद्ध वादक हैं)।

विकल्प (2) सिंगी – सुषिर

यह सही सुमेलित है। यह हिरण या अन्य जानवरों के सींग से बना एक फूँक वाद्य (सुषिर) है, जिसे जोगी/नाथ संप्रदाय के लोग बजाते हैं।

विकल्प (3) ताशा – अवनद्ध

यह सही सुमेलित है। यह चपटे आकार का चमड़े से मढ़ा हुआ ताल वाद्य (अवनद्ध) है, जिसे मुख्य रूप से मुहर्रम के अवसर पर बाँस की खपच्चियों से बजाया जाता है।

#12. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्ययंत्र नहीं है- [II Grade (Sans. Dept.)-29.12.2024]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (1) भपंग (सही उत्तर):

भपंग एक प्रसिद्ध तत् वाद्य (तार वाला वाद्य) है। इसे डमरू की तरह बगल में दबाकर और इसके तार को खींचकर (चोट मारकर) बजाया जाता है। यह मुख्य रूप से मेवात क्षेत्र में लोकप्रिय है।

अन्य विकल्प एक समान क्यों हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (2) नड़, (3) मशक तथा (4) सतारा

ये तीनों ही विकल्प गलत हैं। वर्गीकरण के आधार पर ये सभी सुषिर वाद्य की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें फूँक मारकर या मुँह से हवा देकर बजाया जाता है।

#13. वाद्य यंत्रों के वर्गीकरण में ‘एकतारा’ किस घराने से संबंधित है- [पशु परिचर-3.12.2024 (S-II)]

 महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य

एकतारा (इकत्तारा):

  • वाद्ययंत्र की श्रेणी: यह केवल एक तार से निर्मित होने वाला एक अत्यंत प्राचीन और पारंपरिक तत् वाद्य (तारों की सहायता से बजने वाला वाद्य) है।
  • सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व: लोक-मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसे नारद जी, मीराबाई और साधु-संतों द्वारा प्रमुखता से बजाया जाता है। वे प्रायः एक हाथ में खड़ताल (घन वाद्य) और दूसरे हाथ में एकतारा लेकर भजन-कीर्तन करते हैं।

#14. निम्न में से कौन, तार वाला वाद्य यंत्र नहीं है? [वनरक्षक-11.12.2022(S-II)]

ताशा एक अवनद्ध (ताल) वाद्य है, जिसमें तांबे या मिट्टी के चपटे परांत पर चमड़ा मढ़ा होता है और इसे दो पतली बांस की खपच्चियों से बजाया जाता है।

#15. कौनसे सुषिर वाद्य नहीं हैं? [RAS-31.10.2015] 1. सुरनाई 2. अलगोजा 3. नागफणी 4. कमायचा

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (1) केवल 4 (सही उत्तर):

प्रश्न के अनुसार कमायचा सुषिर वाद्य नहीं है। यह एक प्रसिद्ध तत् वाद्य (तारों की सहायता से ध्वनि उत्पन्न करने वाला वाद्य) है।

अन्य विकल्प (जो सुषिर वाद्य हैं):

1. सुरनाई, 2. अलगोजा तथा 3. नागफणी

ये तीनों ही वाद्ययंत्र फूँक मारकर (मुँह से हवा देकर) बजाए जाते हैं, इसलिए वर्गीकरण के आधार पर ये सभी सुषिर वाद्य की श्रेणी में शामिल हैं।



#16. रबाब, चिकारा और चौतारा किस प्रकार के वाद्य यंत्र हैं? [JEN (Agri.) 10.09.2022]

तत् वाद्य: सही उत्तर। रबाब, चिकारा और चौतारा (तंदूरा) तीनों ही तारों की सहायता से ध्वनि उत्पन्न करने वाले तत् वाद्य हैं।

#17. तार से निर्मित वाद्ययंत्र कौनसा है? [कारापाल, 2012] [जेल प्रहरी- 2017] [Stenographer-30.05. 2013]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (1) रावण हत्था (सही उत्तर):

यह राजस्थान का सबसे प्राचीन और बहुप्रचलित तत् वाद्य (तारों वाला वाद्य) है।

  • संरचना: यह आधे कटे नारियल की कटोरी पर बकरे की खाल मढ़कर और उसे एक बाँस की छड़ के साथ जोड़कर बनाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से 9 तार होते हैं।
  • मुख्य उपयोग: इसे पाबूजी तथा रामदेव जी की फड़ (पड़) बांचते समय भोपों द्वारा प्रमुखता से बजाया जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (2) अलगोज़ा तथा (3) मोरचंग

ये दोनों विकल्प गलत हैं। वर्गीकरण के आधार पर ये दोनों सुषिर वाद्य की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें फूँक मारकर या मुँह से हवा देकर बजाया जाता है। इसमें अलगोज़ा राज्य वाद्य है और मोरचंग को ‘ज्यूज हार्प’ भी कहा जाता है।

विकल्प (4) चंग

यह गलत है। यह एक प्रसिद्ध अवनद्ध (ताल) वाद्य है। यह लकड़ी के एक गोल घेरे पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाता है, जिसे मुख्य रूप से होली के अवसर पर शेखावाटी क्षेत्र में बजाया जाता है।

#18. निम्न में से तत् वाद्य है – [सांख्यिकी अधिकारी-25.02.2024] 1. जन्तर 2. रवाज 3. भपंग

1. जंतर, 2. रवाज, 3. भपंग: ये तीनों ही तारों के माध्यम से बजाए जाने वाले तत् वाद्य हैं।

#19. सुमेलित कीजिए- [पशु परिचर- 1.12.2024 (S-I)]
वाद्ययंत्र              विशेषताएँ
(A) एकतारा             (1) इसको दो मोटी लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है।
(B) अलगोजा              (2) भोपों का प्रमुख वाद्य
(C) रावणहत्था            (3) यह वाद्ययंत्र मीराबाई बजाया करती थीं
(D) नगाड़ा               (4) बांसुरी जैसा वाद्ययंत्र
कूट : (A)    (B)    (C)    (D)

 वाद्ययंत्रों का सही मिलान (Correct Matching)
(A) एकतारा ➔ (3) यह वाद्ययंत्र मीराबाई बजाया करती थीं

एकतारा मुख्य रूप से साधु-संन्यासियों तथा मीराबाई द्वारा भक्ति संगीत के दौरान प्रयुक्त किया जाता है (यह एक तत् वाद्य है)।

(B) अलगोजा ➔ (4) बांसुरी जैसा वाद्ययंत्र

यह फूँक से बजाया जाने वाला दो नलियों वाला एक प्रसिद्ध सुषिर वाद्य है, जो राजस्थान का राज्य वाद्ययंत्र भी है।

(C) रावणहत्था ➔ (2) भोपों का प्रमुख वाद्य

पाबूजी, रामदेवजी आदि लोक देवताओं की पड़ (फड़) बांचते समय भोपा जाति द्वारा इसे मुख्य रूप से बजाया जाता है।

(D) नगाड़ा ➔ (1) इसको दो मोटी लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है

यह एक प्रसिद्ध अवनद्ध (ताल) वाद्य है जिसे चमड़े से मढ़ा जाता है और लकड़ी के डंडों की चोट से बजाया जाता है।

#20. एक तार वाला संगीत वाद्य यंत्र जो विभिन्न प्रकार की धुनें और राग उत्पन्न कर सकता है, कहलाता है- [पशु परिचर-1.12.2024 (S-I)]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (3) एकतारा (सही उत्तर):

यह एक प्रसिद्ध तत् वाद्य है। गोल तुम्बे में बाँस की खपच्ची फंसाकर इसमें केवल एक तार बाँधा जाता है, जो अंगुली के प्रहार (चोट) से धुन उत्पन्न करता है।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) पूंगी

यह गलत है। यह कालबेलिया जाति द्वारा फूँक से बजाया जाने वाला एक सुषिर वाद्य है।

विकल्प (2) रावणहत्था

यह गलत है। यह भी एक तत् वाद्य है, परंतु इसमें 9 तार होते हैं, एक तार नहीं।

विकल्प (4) खड़ताल

यह गलत है। यह लकड़ी की पट्टियों से बना एक ठोस घन वाद्य है, जो आपस में टकराने से स्वर उत्पन्न करता है।



#21. निम्नलिखित में से किस वाद्य यंत्र को ‘भेरी’ भी कहा जाता है? [CET -4.2.2023 (S-I)]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (2) भूँगल (सही उत्तर):

यह बिल्कुल सही विकल्प है। भूँगल को ‘रणभेरी’ या ‘भेरी’ भी कहा जाता है।

  • संरचना: यह पीतल धातु की लंबी नली से निर्मित एक सुषिर वाद्य होता है।
  • ऐतिहासिक उपयोग: प्राचीन काल में युद्ध प्रारंभ होने से पूर्व या गाँव में मुनादी करवाने (जनता को एकत्र करने) हेतु इसे प्रमुखता से बजाया जाता था।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) बाँकिया

यह गलत है। यह सरगड़ा जाति द्वारा विशेष अवसरों पर ढोल के साथ बजाया जाने वाला एक सुषिर वाद्य है।

विकल्प (3) मशक

यह गलत है। यह चमड़े के थैले जैसा दिखने वाला एक सुषिर वाद्य है, जो मुख्य रूप से भैरूंजी के भोपों द्वारा बजाया जाता है।

विकल्प (4) पूंगी

यह गलत है। यह कालबेलिया जाति द्वारा मुख्य रूप से सांपों को वश में करने हेतु प्रयुक्त किया जाने वाला सुषिर वाद्य है।

#22. वाद्य यंत्रों के संबंध में सही कथन है-[EEO-19.6.2024]
1. चौतारा को करताल, मंजीरा और चिमटे के साथ कामड़ जाति द्वारा बजाया जाता है।
2. कामायचा को माँगणियार बजाते हैं।
3. जंतर को मेवाड़ के राव तथा भाट, लोक देवता रामदेवजी की प्रशंसा में बजाते हैं।

 कथनों का विश्लेषण (Statements Analysis)
✅ कथन 1 (सही है)

चौतारा (तंदूरा) को रामदेवजी के ‘तेरहताली’ नृत्य के समय कामड़ जाति की महिलाओं/पुरुषों द्वारा मंजीरा और करताल के साथ बजाया जाता है।

✅ कथन 2 (सही है)

कामायचा पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर) के माँगणियार गायकों का मुख्य तत् वाद्य है।

❌ कथन 3 (गलत है)

  • गलत होने का कारण: जंतर वाद्ययंत्र गुर्जर जाति के भोपों द्वारा भगवान देवनारायण जी की पड़ (फड़) बांचते समय बजाया जाता है, न कि रामदेवजी के लिए।
  • सही तथ्य: रामदेवजी की पड़ (फड़) बांचते समय भोपों द्वारा रावणहत्था वाद्ययंत्र का प्रयोग किया जाता है।

#23. फड़ बाँचते समय पाबूजी के भोपों का वाद्ययंत्र है? [पशु परिचर-1.12.2024 (S-II)][Asst. Jailer Exam-15.03.2016]

 महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य

रावणहत्था (Rawanhattha):

  • बनावट: यह आधे कटे नारियल की कटोरी पर खाल मढ़कर और बाँस की छड़ जोड़कर बनाया जाता है।
  • तारों की संख्या: इसमें कुल 9 तार होते हैं।
  • गज (Bow): इसे बजाने वाली गज धनुष के समान होती है, जिस पर घोड़े की पूंछ के बाल और घुँघरू बंधे होते हैं।
  • प्रमुख वादक व उपयोग: पाबूजी, रामदेवजी तथा डूंगरजी-जवाहरजी के भोपे (नायक/थोरी जाति) उनकी गाथाएँ या पड़ (फड़) बांचते समय रावणहत्था का प्रमुखता से प्रयोग करते हैं।

#24. निम्नलिखित में से किस लोक वाद्य यंत्र में बाँस का लंबा तना होता है जिसमें बकरी के चमड़े की परत से ढका आधे नारियल का खोल जुड़ा होता है? [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-15.07.2018 (II)] [जेल प्रहरी परीक्षा 27-10-2018, Shift -III]

#25. देवनारायण जी की फड़ के वाचन के साथ किस वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है- [Assistant Archivist-03.08.2024] [CET : 07.01.2023 (S-II)]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (3) जंतर (सही उत्तर):

भगवान देवनारायण जी की फड़ (पड़) का वाचन करते समय गुर्जर जाति के भोपे मुख्य रूप से जंतर वाद्ययंत्र बजाते हैं।

  • संरचना: जंतर में 2 तुंबे (गोल कद्दू के फल) होते हैं और इसमें बाँस की डाँड लगी होती है।
  • विशेषता: यह प्रारंभिक वीणा का ही एक रूप माना जाता है (यह एक तत् वाद्य है)।
  • वादन शैली: इसे मुख्य रूप से गले में लटकाकर खड़े होकर बजाया जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) मंजीरा

यह गलत है। यह कामड़ जाति द्वारा मुख्य रूप से तेरहताली नृत्य में प्रयुक्त किया जाने वाला एक धातु निर्मित घन वाद्य है।

विकल्प (2) मांदल

यह गलत है। यह गरासिया/भील जनजाति द्वारा बजाया जाने वाला एक चमड़े से मढ़ा हुआ अवनद्ध (ताल) वाद्य है।

विकल्प (4) कुंडी

यह गलत है। यह मिट्टी के बर्तन या लकड़ी पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाने वाला एक छोटा अवनद्ध वाद्य है।



#26. निम्नलिखित में से किस संगीत का संबंध राजस्थान से नहीं है- [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-06.11.2020 (II)]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (1) बाउल (सही उत्तर):

यह अन्य विकल्पों से भिन्न है क्योंकि बाउल (Baul) मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल की एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक और रहस्यवादी लोक संगीत परंपरा है। इसका संबंध राजस्थान से नहीं है।

अन्य विकल्प एक समान क्यों हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (2) मांगणियार, (3) भोपा तथा (4) लंगा

ये तीनों ही विकल्प गलत हैं (क्योंकि ये राजस्थान से संबंधित हैं)। ये तीनों राजस्थान की पारंपारिक संगीत जीवी जातियाँ एवं प्रसिद्ध लोक गायक परंपराएँ हैं, जो पीढ़ियों से अपनी गायकी और वादन कला को सहेज कर रखे हुए हैं।

#27. कमायचा के बारे में असत्य है [Veterinary Offi – 2.8.2020]

#28. राजस्थान के किस लोक वाद्य को ज्यूज हार्प भी कहा जाता है- [संगणक परीक्षा 05.05.2018]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य – मोरचंग (Morchang)

परिचय एवं वादन शैली:

मोरचंग राजस्थान का एक प्रसिद्ध और अनोखा लोक वाद्य यंत्र है। यह लोहे या पीतल से बना छोटा-सा वाद्य होता है। इसे मुंह (होंठों और दांतों के बीच) के पास रखकर बजाया जाता है। इसे बजाते समय वादक की सांस और मुंह की बनावट से मधुर ध्वनि निकलती है। इसी कारण इसे पश्चिमी देशों में ‘यहूदी हार्प’ (Jew’s Harp) के नाम से भी जाना जाता है।

प्रमुख वादक: राजस्थान में इसे मुख्य रूप से भाट, लंगा, मांगणियार और अन्य लोक कलाकार प्रमुखता से बजाते हैं।

📌 महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points for Revision):
  • यह राजस्थान का एक विशिष्ट लोक वाद्य है।
  • इसे मुंह से (सांस के माध्यम से) बजाया जाता है।
  • संरचना की दृष्टि से यह लोहे अथवा पीतल धातु से बना होता है।
  • इसकी ध्वनि अनोखी, गूंजदार और झंकारदार होती है (इसे बजाने में कलाकार को सांस, ताल और लय पर बहुत अच्छा नियंत्रण रखना पड़ता है)।
  • लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों और आयोजनों में इसका विशेष स्थान है।

#29. ‘मोरचंग वाद्य’ के बारे में कौनसा/कौनसे कथन सही हैं- [शोध अध्येता परीक्षा-04.08.2024]
1. यह लोहे का बना छोटा-सा वाद्य है।
2. मोरचंग को होठों के बीच रखकर बजाया जाता है।
3. यह सुषिर वाद्य की श्रेणी में आता है।
4. इसमें 27 तार होते हैं।

, मोरचंग में कोई तार नहीं होता (अक्सर परीक्षार्थी भ्रमित होकर इसे ‘तत् वाद्य’ मान लेते हैं, जो कि गलत है)।

#30. ….एक लोहे और चमड़े से बना वाद्य है जो मंदिरों में प्रार्थना के समय तथा त्योहारों और धार्मिक उत्सवों के समय बजाया जाता है- [पटवार परीक्षा – 2011] [Asst. Professor- 7.1.2024]



#31. मुहर्रम के अवसर पर प्रयोग में लिया जाने वाला प्रसिद्ध वाद्ययंत्र कौन-सा है? [P.S.I. Exam, 2011]

 विस्तृत व्याख्या एवं महत्वपूर्ण तथ्य

विकल्प (2) ताशा (सही उत्तर):

  • संरचना: यह तांबे या मिट्टी की चपटी परात (कुंडी) पर बकरे की पतली खाल मढ़कर बनाया जाने वाला अवनद्ध (ताल) वाद्य है।
  • प्रमुख अवसर व वादन: इसे विशेष रूप से मुसलिम समुदाय द्वारा मुहर्रम के ताज़ियों के जुलूस में गले में लटकाकर दो पतली बांस की खपच्चियों से बजाया जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं? (विकल्पों का विश्लेषण):

विकल्प (1) नगाड़ा

यह गलत है। यह उत्सवों, नाटकों (विशेषकर ख्याल) और शादी-ब्याह के अवसर पर शहनाई के साथ बजाया जाने वाला प्रमुख अवनद्ध वाद्य है।

विकल्प (3) मांदल

यह गलत है। यह मुख्य रूप से गरासिया व भील जनजाति का एक प्रसिद्ध अवनद्ध वाद्य है।

विकल्प (4) मंजीरा

यह गलत है। यह पीतल या कांस्य धातु का बना एक घन वाद्य है (जिसे आपस में टकराकर स्वर उत्पन्न किया जाता है)।

#32. वाद्ययंत्र ‘टामक’ का संबंध ……क्षेत्र से है- [अन्वेषक परीक्षा – 27.12.2020] [PTI -30.09.2018]

#33. घूमर नृत्य के समय कौनसे वाद्य यंत्रों की आवश्यकता होती है- [Agriculture Officer: 29.01.2013]

#34. ‘तारपी’ वाद्ययंत्र का प्रयोग मुख्यतः किस जाति के द्वारा किया जाता है- [प्रवक्ता (तकनीकी शिक्षा) -12.3.2021]

#35. मंजीरा, तानपुरा, चौतारा वाद्य यंत्रों का प्रयोग किस नृत्य में किया जाता है? [वनरक्षक – 13.12.2022(S-I)]



#36. निम् में से कौन-सा यंत्र राजस्थान के तेरहताली नृत्य में काम नहीं आता? [कर सहायक परीक्षा-14.10.2018]

#37. ‘डेरू’ क्या है- [Research Officer-4.8.2024]

#38. वंशावलियों की पीढ़ी – दर- पीढ़ी लेखन करने वाला कौन वर्ग था? [जेल प्रहरी-27-10-2018, Shift -II]

#39. ‘भाट’ जाति के मुख्य कार्य हैं? [III Gr.Teacher-2004]

#40. लोक वाद्य यंत्र ‘भपंग’ राजस्थान के किस क्षेत्र से सम्बन्धित है? [कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर)- 26.03.2019]



#41. अलवर जिले के जोगी जाति के लोग निम्न में से किस वाद्य को बजाते हैं- [पटवार-24.10.2021 (Shift -I)]

#42. मारवाड़ के जोगियों द्वारा गोपीचन्द भर्तृहरि, निहालदे आदि के ख्याल गाते समय निम्नलिखित में से किस वाद्य का प्रयोग किया जाता है- [पटवारी परीक्षा 2013] [Food Safety Officer – 27.06.2023]

#43. अलवर-भरतपुर के जोगियों द्वारा किस प्रकार की सारंगी बजाई जाती है- [पटवार-23.10.2021 (Shift -II)]

#44. करणा भील किस वाद्य का प्रसिद्ध वादक था? [कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रीशियन) परीक्षा- 24.03.2019]

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वाद्य यंत्र निर्माण सामग्री / विशेषता प्रमुख प्रयोक्ता / जाति संबद्ध फड़ या लोकगाथा
सारंगी रोहिड़ा, कैर या सागवान की लकड़ी; बकरे की आंत के 27 तार; गज (घोड़े के बाल) से वादन लंगा, भाट, जोगी गोपीचंद, भरथरी, सुल्तान निहालदे के ख्याल
रावणहत्था आधा कटा नारियल, बांस की डांड, 9 तार भील, भोपे पाबूजी व रामदेवजी की फड़
कामायचा आम/शीशम की लकड़ी, चौड़ी तबली जिस पर खाल मढ़ी होती है, 12-17 तार मांगणियार जाति सिंध-मरुभूमि के लोकगीत
जंतर दो तुम्बे, बांस की डांड पर मोम से चिपकाए गए 22 पर्दे, 5-6 तार गुर्जर समाज के भोपे देवनारायण जी की फड़ (बगड़ावत गाथा)
भपंग कद्दू/तूंबे के एक सिरे पर चमड़ा, डमरू जैसी आकृति मेवाती जोगी (अलवर) पांडुन का कड़ा, पूरणमल गाथा
इकतारा गोल तूंबे में बांस की डंडी, बकरे की खाल, 1 या 2 तार नाथ, कालबेलिया, साधु निर्गुणी भजन व मीरां के पद
रबाब / रवाज सारंगी जैसा, नखों (नाखूनों) से बजाया जाता है, 12 तार भाट, रावल जाति मेवाड़ एवं मारवाड़ के लोकगायन

विशेष तथ्य:

  • सारंगी को सभी तत् वाद्यों में श्रेष्ठ और सबसे लचकदार स्वर वाला वाद्य माना जाता है। सिंधी सारंगी एवं गुजरातण सारंगी इसके मुख्य प्रकार हैं।
  • भपंग के जादूगर: ज़हूर खां मेवाती एवं उमर फारूक मेवाती।
  • कामायचा के सिरमौर: पद्मश्री साकर खां मांगणियार।

2. सुषिर वाद्य यंत्र (Aerophones)

हवा/फूँक के माध्यम से बजने वाले वाद्य यंत्र सुषिर वाद्य कहलाते हैं।

  • अलगोजा (State Instrument of Rajasthan):

    • यह राजस्थान का राज्य वाद्य यंत्र है। इसमें बांस की दो बंसुरियां एक साथ मुँह में रखकर बजाई जाती हैं। प्रत्येक बांसुरी में 4 से 6 छेद होते हैं।
    • प्रसिद्ध वादक: धोद खां, रामनाथ चौधरी (जयपुर के पद्मपुरा निवासी, जो नाक से अलगोजा बजाने के लिए प्रसिद्ध हैं)।

  • पूंगी / बीण:

    • तूंबे में दो बांस की नलियां लगाकर बनाया जाता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से कालबेलिया जाति द्वारा सर्प को वश में करने और नृत्य के दौरान किया जाता है।

  • शहनाई:

    • शीशम या सागवान की लकड़ी से निर्मित, मांगलिक अवसरों पर सुराहीदार वाद्य के रूप में बजाया जाता है।

  • नड़:

    • कगोर (एक प्रकार की झाड़ी) की लकड़ी से बनी लंबी खोखली नली। इसके प्रसिद्ध वादक कर्णा भील (जैसलमेर) थे, जो अपनी लंबी मूंछों के लिए भी जाने जाते थे।

  • बांकिया व तुरही:

    • पीतल के बने घुमावदार वाद्य यंत्र, जो सरगड़ा जाति द्वारा मांगलिक व युद्ध अवसरों पर बजाए जाते हैं।

  • मोरचंग (Jews Harp):

    • लोहे का बना छोटा सा वाद्य यंत्र जो होठों के बीच रखकर बजाया जाता है। इसे यूरोप के ‘ज्यूज हार्प’ के समतुल्य माना जाता है।

3. अवनद्ध वाद्य यंत्र (Membranophones)

इन वाद्यों का ढांचा लकड़ी या मिट्टी का होता है, जिसके मुख पर पशु की खाल (चमड़ा) मढ़ी जाती है।

  • मांदल: मिट्टी का बना ढोलक जैसा वाद्य। गरासिया जनजाति द्वारा मांदल नृत्य में और शिव-पार्वती की पूजा (गवरी नाट्य) में भील जनजाति द्वारा उपयोग।
  • रावण का ढोल / ढोल: मांगलिक अवसरों, ढोल नृत्य (जालौर) में प्रयुक्त।
  • चंग और ढप: लकड़ी के गोल घेरे पर बकरी की खाल। शेखावाटी क्षेत्र में होली के अवसर पर चंग नृत्य के साथ मुख्य रूप से बजाया जाता है।
  • नौबत: पीतल/तांबे के विशाल अर्ध-गोलाकार ढांचे पर भैंसे की खाल। यह मंदिरों व राजमहलों के मुख्य द्वार पर बजाया जाता है।
  • दमामा / टामक: धातु का बहुत बड़ा अवनद्ध वाद्य जो युद्ध के मैदान में बजाया जाता था।
  • खंजरी: आम की लकड़ी के गोल घेरे पर बनी छोटी ढपली, जिसे डफली की तरह हाथ से बजाया जाता है।

4. घन वाद्य यंत्र (Idiophones)

ये वाद्य यंत्र धातु (कांस्य, पीतल, लोहा) या कठोर लकड़ी से निर्मित होते हैं। इन्हें आपस में आघात (अटकाकर) करके बजाया जाता है।

  • मंजीरा: पीतल व कांसे के दो गोल कटोरीनुमा टुकड़े। तेरहताली नृत्य (रामदेवजी के मेले में कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा) का मुख्य वाद्य यंत्र।
  • झांझ: मंजीरे का बड़ा रूप, जो शेखावाटी के कच्छी घोड़ी नृत्य के दौरान बजाया जाता है।
  • खड़ताल: शीशम या सागवान की लकड़ी के छोटे टुकड़ों में पीतल की छोटी गोल प्लेटें लगी होती हैं। इसके प्रसिद्ध जादूगर सदीक खां मांगणियार हैं।
  • श्रीमंडल: लोहे की छड़ियों और घंटीनुमा ढांचों से बना वाद्य।
  • भरनी: मिट्टी के मटके के मुंह पर कांस्य की प्लेट रखकर तिल्ली की डंडियों से बजाया जाने वाला वाद्य (सर्पदंश के इलाज के समय जोगियों द्वारा प्रयुक्त)।

प्रमुख लोक वाद्य एवं उनके प्रसिद्ध कलाकार

वाद्य यंत्र प्रसिद्ध कलाकार पुरस्कार / पहचान
कामायचा साकर खां मांगणियार पद्मश्री (2012)
भपंग ज़हूर खां मेवाती, उमर फारूक मेवाती भपंग के जादूगर
खड़ताल सदीक खां मांगणियार खड़ताल के जादूगर
नड़ कर्णा भील जैसलमेर के प्रसिद्ध नड़ वादक
अलगोजा रामनाथ चौधरी नाक से अलगोजा वादन के लिए विश्व प्रसिद्ध

राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र याद करने की शॉर्ट ट्रिक्स

1. तत् वाद्य याद करने की ट्रिक:

“रामा का भपंग और जंतर, सारंगी पर इकतारा बजाए”

  • रा – रावणहत्था
  • मा – सुरिंदा / सुरमंडल
  • का – कामायचा
  • भपंग – भपंग
  • जंतर – जंतर
  • सारंगी – सारंगी
  • इकतारा – इकतारा

2. सुषिर वाद्य याद करने की ट्रिक:

“अलगोजा ने पूंगी और शहनाई बजाकर मोरचंग से नड़ मिलाया”

  • (अलगोजा, पूंगी, शहनाई, मोरचंग, नड़, सतारा, बांकिया)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs / People Also Ask)

Q1. राजस्थान का राज्य वाद्य यंत्र कौन सा है?

  • उत्तर: राजस्थान का राज्य वाद्य यंत्र अलगोजा है। यह सुषिर वाद्य श्रेणी में आता है और इसमें दो बांसुरियां एक साथ बजाई जाती हैं।

Q2. पाबूजी की फड़ वाचन में कौन सा वाद्य यंत्र प्रयोग किया जाता है?

  • उत्तर: पाबूजी की फड़ का वाचन करते समय नायक या भील जाति के भोपे रावणहत्था वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं।

Q3. देवनारायण जी की फड़ वाचन में किस वाद्य यंत्र का उपयोग होता है?

  • उत्तर: देवनारायण जी की फड़ गाते समय गुर्जर भोपे जंतर (तत् वाद्य) का प्रयोग करते हैं।

Q4. ‘भपंग का जादूगर’ किसे कहा जाता है?

  • उत्तर: अलवर के ज़हूर खां मेवाती को भपंग का जादूगर कहा जाता है।

Q5. तेरहताली नृत्य में मुख्य रूप से कौन सा वाद्य यंत्र बजाया जाता है?

  • उत्तर: तेरहताली नृत्य में कामड़ पंथ की महिलाओं द्वारा शरीर पर 13 मंजीरे बांधकर बजाए जाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र केवल संगीत उत्पन्न करने के साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि ये प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, लोक गाथाओं और जनजातीय जीवन की जीवन रेखा हैं। RPSC और RSMSSB परीक्षाओं के दृष्टिकोण से इन वाद्यों का वर्गीकरण, उनसे जुड़े लोकदेवता/नृत्य तथा प्रसिद्ध कलाकारों के नाम अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

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