#51. निम्नलिखित में से कौन-सा पोषक तत्व एक बृहत्पोषक (macronutrient) है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) पोटैशियम
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- बृहत्पोषक तत्व (Macronutrients): वे पोषक तत्व जिनकी पौधों को अपनी वृद्धि, विकास और उपापचय क्रियाओं के लिए अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है, बृहत्पोषक तत्व कहलाते हैं। इसके मुख्य उदाहरणों में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम (K), कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर शामिल हैं।
- मुख्य बिंदु:
- पोटैशियम पौधों के भीतर कोशिकाओं के परासरण दाब को नियंत्रित करने, स्टोमेटा के खुलने-बंद होने और प्रोटीन संश्लेषण में मुख्य भूमिका निभाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 22/12/2025) में जीव विज्ञान/पादप पोषण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) कॉपर, (B) आयरन और (D) जिंक: ये तीनों **सूक्ष्मपोषक तत्व (Micronutrients)** हैं, जिनकी पौधों को बहुत ही अल्प (कम) मात्रा में आवश्यकता होती है।
#52. निम्नलिखित में से कौन सा अणु, ओजोन के निर्माण के लिए उच्च ऊर्जा पराबैंगनी द्वारा विभक्त होता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) ऑक्सीजन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ओजोन का निर्माण (Formation of Ozone): वायुमंडल के उच्च स्तर पर, सूर्य के प्रकाश में मौजूद उच्च ऊर्जा वाली पराबैंगनी (UV) किरणें ऑक्सीजन के अणु ($\text{O}_2$) को तोड़कर स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु ($\text{O}$) बनाती हैं। ये स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु फिर ऑक्सीजन अणु ($\text{O}_2$) के साथ मिलकर ओजोन ($\text{O}_3$) का निर्माण करते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- रासायनिक समीकरण:
$\text{O}_2 \xrightarrow{\text{UV Radiation}} \text{O} + \text{O}$
$\text{O} + \text{O}_2 \rightarrow \text{O}_3$ (ओजोन)
- रासायनिक समीकरण:
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10/02/2026) में पर्यावरण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) सोडियम, (C) लोहा और (D) जिंक: ये सभी धातुएँ हैं और वायुमंडल में ओजोन परत के निर्माण की रासायनिक प्रक्रिया में सीधे पराबैंगनी किरणों द्वारा विभाजित होकर ओजोन नहीं बनाती हैं।
#53. निम्नलिखित में से कौन आवर्त सारणी के शीर्ष से दाईं ओर पाया जाता है?
(RRB JE CBT-I : 1 June 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) अधातुएँ
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आवर्त सारणी में स्थिति (Position in Periodic Table): आधुनिक आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर धातुओं का गुण कम होता जाता है और अधातुई गुण बढ़ता जाता है। आवर्त सारणी के शीर्ष से दाईं ओर (Top-right corner) मुख्य रूप से **अधातुएँ (Non-metals)** स्थित होती हैं (जैसे- हीलियम, नियॉन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फ्लोरिन आदि)।
- मुख्य बिंदु:
- आवर्त सारणी के बाईं ओर और मध्य में धातुएं पाई जाती हैं, जबकि दाईं ओर ऊपरी हिस्से में अधातुएं और निष्क्रिय गैसें (Noble Gases) स्थित होती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 1 June 2019 Shift 2) में आवर्त सारणी और तत्वों के वर्गीकरण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) धातु: धातुएँ मुख्य रूप से आवर्त सारणी के बाईं और मध्य भाग में स्थित होती हैं, शीर्ष के दाईं ओर नहीं।
- विकल्प (C) उपधातु: उपधातुएँ (Metalloids) धातु और अधातु के बीच एक तिरछी रेखा (Zig-zag line) के रूप में स्थित होती हैं, जो दोनों के गुणों को अलग करती है।
- विकल्प (D) धातु और अधातु दोनों: आवर्त सारणी के शीर्ष दाईं ओर केवल अधातुओं का आधिपत्य होता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
#54. निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ, चमकदार दिखाई देता है?
(RRB JE CBT-I : 1 June 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) एल्युमीनियम
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- धात्विक चमक (Metallic Luster): धातुओं की एक प्रमुख भौतिक विशेषता यह होती है कि उनकी सतह चमकदार होती है, जिसे ‘धात्विक चमक’ कहा जाता है। चूंकि एल्युमीनियम एक धातु है, इसलिए इसकी सतह अत्यधिक चमकदार होती है।
- मुख्य बिंदु:
- सामान्यतः सभी शुद्ध धातुएँ अपनी ठोस अवस्था में चमकदार (Lustrous) होती हैं और प्रकाश को परावर्तित करती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 1 June 2019 Shift 1) में धातु एवं अधातु के भौतिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) सल्फर: सल्फर एक अधातु है जो कि भंगुर और पीले रंग की होती है, इसमें धात्विक चमक नहीं पाई जाती है।
- विकल्प (C) कोयला और (D) कार्बन: कोयला कार्बन का रूप है (अधातु), जो आमतौर पर काले और चमकदारहीन (Dull) होते हैं (अपवादस्वरूप हीरा और ग्रेफाइट में चमक होती है, लेकिन सामान्य रूप में कोयला चमकदार नहीं माना जाता)।
#55. कौन-सी धातु आयरन सल्फेट विलयन से आयरन को विस्थापित करेगी?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) जिंक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में जो धातु अधिक अभिक्रियाशील होती है, वह अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देती है।
- मुख्य बिंदु:
- सक्रियता श्रेणी में जिंक (Zn), आयरन (Fe) से ऊपर स्थित है, यानी यह आयरन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होती है। इसलिए जिंक, आयरन सल्फेट विलयन से आयरन को आसानी से विस्थापित कर सकती है।
- रासायनिक समीकरण: Zn + FeSO4 -> ZnSO4 + Fe
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10/12/2025) में रासायनिक अभिक्रिया एवं धातु की सक्रियता के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) क्रोमियम, (B) तांबा और (C) चांदी: ये सभी धातुएँ सक्रियता श्रेणी में आयरन से नीचे या कम अभिक्रियाशील होती हैं, इसलिए ये आयरन सल्फेट विलयन से आयरन को विस्थापित नहीं कर सकती हैं।
#56. हरी खाद द्वारा मिट्टी में मुख्य रूप से कौन-से दो अवयव (elements) मिलाए जाते हैं?
(RRB JE 20/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) नाइट्रोजन और फास्फोरस
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- हरी खाद (Green Manure): फसलों की पैदावार बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता को सुधारने के लिए कुछ पौधों (जैसे ढaincha, सनई आदि) को खेतों में उगाकर फूल आने से पहले ही जोत दिया जाता है, जिसे हरी खाद कहते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- हरी खाद के सड़ने-गलने से मिट्टी में मुख्य रूप से **नाइट्रोजन (N)** और **फास्फोरस (P)** जैसे प्रमुख पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मिल जाते हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में कृषि विज्ञान और पाدप पोषण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) फॉस्फोरस और कैल्शियम, (B) नाइट्रोजन और पोटैशियम, तथा (C) पोटैशियम और मैग्नीशियम: यद्यपि इनमें से कुछ तत्व कम मात्रा में मौजूद हो सकते हैं, लेकिन हरी खाद द्वारा मुख्य रूप से जोड़े जाने वाले प्राथमिक दो प्रमुख अवयव नाइट्रोजन और फास्फोरस हैं।
#57. धातुओं की सक्रियता श्रेणी क्या दर्शाती है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) धातुओं की उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित सूची।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): सक्रियता श्रेणी वह सूची है जिसमें धातुओं को उनकी क्रियाशीलता (Reactiviity) के घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इस श्रेणी में सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु (जैसे पोटैशियम और सोडियम) सबसे ऊपर तथा सबसे कम अभिक्रियाशील धातु (जैसे सोना और प्लेटिनम) सबसे नीचे स्थित होती है।
- मुख्य बिंदु:
- श्रेणी में ऊपर से नीचे जाने पर धातुओं की रासायनिक अभिक्रियाशीलता कम होती जाती है।
- यह श्रेणी विस्थापन अभिक्रियाओं (Displacement Reactions) को समझने में बहुत मददगार होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 11/12/2025) में रासायनिक विज्ञान एवं धातुओं के गुणधर्म के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) गलनांक के बढ़ते क्रम: सक्रियता श्रेणी का संबंध धातुओं के गलनांक (Melting Point) से नहीं, बल्कि उनकी रासायनिक क्रियाशीलता से होता है।
- विकल्प (B) घनत्व के बढ़ते क्रम: यह श्रेणी घनत्व (Density) पर आधारित नहीं होती है।
- विकल्प (D) आयन निर्माण की क्षमता के अनुसार अधातुओं की सूची: यह धातुओं की क्रियाशीलता की सूची है, न कि अधातुओं की।
#58. हमारे आहार में अनाज, नट्स और चॉकलेट से कौन-सा तत्व अधिकांशतः प्राप्त होता है?
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) कॉपर (तांबा)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मानव आहार में कॉपर (Copper in Diet): कॉपर एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व (Trace mineral) है जो मानव शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। हमारे दैनिक आहार में साबुत अनाज, नट्स (मेवे), बीज, चॉकलेट, और शेलफिश कॉपर के मुख्य स्रोत माने जाते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- शरीर में कॉपर लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, आयरन के अवशोषण और तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 23 Jan 2019 Shift 2) में पोषण और मानव शरीर विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) क्लोराइड: क्लोराइड मुख्य रूप से नमक (सोडियम क्लोराइड) और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है।
- विकल्प (B) जिंक: जिंक मुख्य रूप से मांस, समुद्री भोजन, डेयरी उत्पादों और कद्दू के बीजों में पाया जाता है।
- विकल्प (C) आयोडीन: आयो디न का मुख्य स्रोत आयोडिन युक्त नमक, समुद्री मछलियाँ और समुद्री शैवाल हैं।
#59. जब किसी अधिक अभिक्रियाशील धातु को किसी कम अभिक्रियाशील धातु के लवण विलयन में रखा जाता है, तो वह ______ ।
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित कर देती है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): जब किसी अधिक अभिक्रियाशील धातु को किसी कम अभिक्रियाशील धातु के लवण विलयन (Salt solution) में डाला जाता है, तो अधिक सक्रिय धातु अपने से कम सक्रिय धातु को उसके विलयन से बाहर निकाल देती है, जिसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- उदाहरण के लिए, जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले रंग के विलयन में डुबोया जाता है, तो आयरन (जो कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है) कॉपर को विस्थापित कर देता है और विलयन का रंग हरा हो जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 26/12/2025) में रासायनिक अभिक्रिया एवं धातु की सक्रियता श्रेणी के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) अपचयित हो जाती है और (B) ऑक्सीकृत हो जाती है: यद्यपि इस पूरी प्रक्रिया में रेडॉक्स (ऑक्सीकरण-अपचयन) क्रिया होती है, परंतु मुख्य और प्रत्यक्ष प्रभाव यह है कि अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को ‘विस्थापित’ कर देती है।
- विकल्प (C) अभिक्रिया नहीं करती है: यह कथन गलत है क्योंकि अधिक सक्रिय धातु विलयन के संपर्क में आते ही विस्थापन अभिक्रिया संपन्न करती है।
#60. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु आसवन द्वारा शुद्ध की जाती है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) जस्ता (Zinc)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आसवन द्वारा धातु का शोधन (Purification by Distillation): जो धातुएँ कम क्वथनांक (Low boiling point) वाली होती हैं, उन्हें शुद्ध करने के लिए आसवन (Distillation) विधि का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में धातु को वाष्पित करके शुद्ध धातु को अलग संघनित कर लिया जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- जस्ता (Zinc) और पारा (Mercury) जैसी धातुओं का क्वथनांक कम होता है, इसलिए इन्हें आसवन विधि द्वारा प्रभावी ढंग से शुद्ध किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 28/11/2025) में धातुओं के निष्कर्षण और शोधन की विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) चाँदी और (C) ताँबा: ताँबे और चाँदी जैसी धातुओं को मुख्य रूप से विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic refining) विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है।
- विकल्प (D) लोहा: लोहे का शोधन बेसिमर प्रक्रम या धमन भट्टी (Blast furnace) द्वारा प्राप्त ढलवां लोहे को परिष्कृत करके किया जाता है, यह आसवन द्वारा शुद्ध नहीं होता।
#61. जस्ती लोहा क्या है?
(RRB NTPC Tier I : 22 Apr 2016 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) जस्ता लेपित लोहा
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- जस्ती लोहा (Galvanized Iron): जब लोहे या इस्पात पर जंग (रस्ट) लगने से बचाने के लिए उस पर पिघले हुए **जस्ते (Zinc)** की एक पतली परत चढ़ाई जाती है, तो इस प्रक्रिया को यशदलेपन (Galvanisation) कहते हैं और इस प्रकार प्राप्त लोहे को ‘जस्ती लोहा’ कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- जस्ते की परत लोहे को नमी और ऑक्सीजन के संपर्क में आने से रोकती है, जिससे लोहे में जंग नहीं लगती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 22 Apr 2016 Shift 2) में धातुओं के संरक्षण एवं संक्षारण (Corrosion) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) स्टील का एक रूप: स्टील लोहे और कार्बन का मिश्रधातु है, जबकि जस्ती लोहा लोहे पर जस्ते की परत चढ़ाने से बनता है।
- विकल्प (C) कच्चा लोहा और (D) लौह अयस्क: कच्चा लोहा (Pig iron) भट्टी से प्राप्त शुरुआती रूप है और लौह अयस्क वह खनिज है जिससे लोहा निकाला जाता है, इनका जस्तीकरण से सीधा संबंध नहीं है।
#62. कौन-सी धातु युग्म कमरे के तापमान पर पिघलना आरम्भ कर देती है?
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) गैलियम और सीज़ियम
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कम गलनांक वाली धातुएँ (Low Melting Point Metals): सामान्यतः धातुओं का गलनांक (Melting point) बहुत उच्च होता है, लेकिन **गैलियम (Gallium)** और **सीज़ियम (Cesium)** इसके अपवाद हैं। इन दोनों धातुओं का गलनांक इतना कम होता है कि ये हथेली पर रखते ही या कमरे के तापमान (Room temperature से थोड़ा अधिक, लगभग 29-30°C) पर पिघलना आरम्भ कर देती हैं।
- मुख्य बिंदु:
- गैलियम का गलनांक लगभग 29.8°C और सीज़ियम का लगभग 28.5°C होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2) में धातुओं के भौतिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) लोहा और निकल, (C) जस्ता और तांबा, तथा (D) तांबा और कोबाल्ट: ये सभी उच्च गलनांक वाली ठोस धातुएँ हैं जो कमरे के तापमान पर ठोस अवस्था में ही रहती हैं और पिघलती नहीं हैं।
#63. इनमें से कौन सा सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाने वाला वैद्युत’ चालक ( electrical conductor) है?
(RRB JE Electronics 01 Sep 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) तांबा
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- वैद्युत चालक (Electrical Conductor): वे पदार्थ जिनमें विद्युत धारा का प्रवाह आसानी से हो जाता है, चालक कहलाते हैं। चांदी के बाद **तांबा (Copper)** सबसे अच्छा और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला वैद्युत चालक है।
- मुख्य बिंदु:
- चांदी सर्वोत्तम चालक है, लेकिन महंगी होने के कारण इसका व्यापक उपयोग नहीं किया जाता। इसके विपरीत, तांबे की चालकता उच्च होती है और यह किफायती भी है, इसलिए घरेलू वायरिंग, ट्रांसफॉर्मर, मोटर और विद्युत उपकरणों में इसका सर्वाधिक उपयोग होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE Electronics : 01 Sep 2019 Shift 2) में बेसिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और पदार्थों के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) टिन: टिन का उपयोग मुख्य रूप से सोल्डरिंग (Solder wire) में किया जाता है, यह सामान्य विद्युत चालक के रूप में बड़े पैमाने पर उपयोग नहीं होता।
- विकल्प (C) पीतल: पीतल तांबे और जस्ते की एक मिश्रधातु है, जिसकी चालकता शुद्ध तांबे की तुलना में काफी कम होती है।
- विकल्प (D) लेड (सीसा): लेड विद्युत का एक बहुत ही खराब चालक (कुचालक जैसा) है और इसका उपयोग प्रतिरोधकता या विशेष कार्यों में होता है, सामान्य चालक के रूप में नहीं।
#64. गैल्वेनाइजेशन लोहे पर _______ की एक पतली परत की कोटिंग करके जंग से बचाने का एक तरीका है।
(RRB JE 23 May 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) जस्ता
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- गैल्वेनाइजेशन (यशदलेपन): लोहे और इस्पात को जंग (Corrosion) से सुरक्षित रखने के लिए उन पर पिघले हुए **जस्ते (Zinc)** की एक पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को गैल्वेनाइजेशन कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- जस्ता लोहे की सतह को सीधे हवा और नमी (ऑक्सीजन व जलवाष्प) के संपर्क में आने से रोकता है, जिससे लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया रुक जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 23 May 2019 Shift 2) में धातुओं के संक्षारण और उनके बचाव की विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) तांबा, (C) चांदी और (D) एल्युमीनियम: इन धातुओं का उपयोग लोहे पर गैल्वेनाइजेशन (यशदलेपन) के लिए कोटिंग करने हेतु नहीं किया जाता है; गैल्वेनाइजेशन के लिए विशेष रूप से जस्ते का ही उपयोग किया जाता है।
#65. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु पृथ्वी की पपड़ी में मुक्त अवस्था में पाई जाती है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (C) सोना
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मुक्त अवस्था में धातुएँ (Native State / Free State Metals): सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में जो धातुएँ सबसे नीचे यानी सबसे कम अभिक्रियाशील (Least reactive) होती हैं, वे वायु, जल या अन्य रसायनों से आसानी से प्रभावित नहीं होती हैं। यही कारण है कि वे पृथ्वी की पपड़ी (Earth’s crust) में **मुक्त (शुद्ध) अवस्था** में पाई जाती हैं।
- मुख्य बिंदु:
- सोना (Gold – Au), प्लेटिनम और चांदी (कुछ हद तक) अत्यधिक कम अभिक्रियाशील और उत्कृष्ट (Noble) धातुएँ हैं, जो प्रकृति में यौगिकों के रूप में नहीं बल्कि अपनी मूल, मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3) में धातु एवं अधातु तथा उनकी रासायनिक सक्रियता के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) जिंक, (B) सोडियम और (D) एल्युमीनियम: ये सभी धातुएँ अत्यधिक या मध्यम रूप से अभिक्रियाशील होती हैं, इसलिए ये प्रकृति में मुक्त अवस्था में न मिलकर अपने यौगिकों (जैसे ऑक्साइड, कार्बोनेट या सल्फाइड अयस्कों) के रूप में पाई जाती हैं।
#66. अभिक्रियाशीलता श्रेणी में, निम्नलिखित में से कौन-सी धातुएँ, क्रमशः सबसे अधिक अभिक्रियाशील और सबसे कम अभिक्रियाशील हैं?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) पोटैशियम, सोना
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): सक्रियता श्रेणी में धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इस श्रेणी में शीर्ष पर स्थित धातुएँ सबसे अधिक अभिक्रियाशील होती हैं जबकि नीचे स्थित धातुएँ सबसे कम अभिक्रियाशील होती हैं।
- मुख्य बिंदु:
- पोटैशियम (K) सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर और सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
- सोना (Au) सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे (या सबसे कम अभिक्रियाशील / उत्कृष्ट धातु) में आता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05/02/2026) में धातु एवं अधातु तथा उनकी रासायनिक सक्रियता के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) सोडियम, सोना: सोडियम भी अत्यधिक अभिक्रियाशील है, लेकिन सक्रियता श्रेणी में पोटैशियम (K) सोडियम (Na) से ऊपर स्थित है, अतः सबसे अधिक अभिक्रियाशील पोटैशियम है।
- विकल्प (B) मैग्नीशियम, सोना और (C) मैग्नीशियम, चांदी: मैग्नीशियम पोटैशियम और सोडियम की तुलना में कम अभिक्रियाशील है, इसलिए यह सबसे अधिक अभिक्रियाशील के रूप में सही नहीं है।
#67. किस सामग्री में सबसे अधिक विद्युत चालकता है?
(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) चांदी
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सर्वोत्तम विद्युत चालक (Best Electrical Conductor): वे पदार्थ जिनमें से विद्युत धारा का प्रवाह सबसे आसानी से और बिना किसी बाधा के होता है, वे उत्तम विद्युत चालक कहलाते हैं। सभी धातुओं में **चांदी (Silver – Ag)** की विद्युत चालकता सबसे अधिक होती है।
- मुख्य बिंदु:
- चांदी सर्वोत्तम चालक होने के बावजूद अत्यधिक महंगी होती है, इसलिए व्यावहारिक उपयोग (जैसे वायरिंग या उपकरण) में इसके स्थान पर तांबे (Copper) और एल्युमीनियम का व्यापक उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1) में बेसिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और पदार्थों के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) एल्युमीनियम: एल्युमीनियम एक अच्छा चालक है और इसका उपयोग बिजली के तारों में होता है, लेकिन इसकी चालकता चांदी और तांबे की तुलना में कम होती है।
- विकल्प (B) इस्पात (Steel): इस्पात मुख्य रूप से लोहे और कार्बन का मिश्रधातु है, जिसकी चालकता चांदी की तुलना में काफी कम होती है।
- विकल्प (D) सीसा (Lead): सीसा विद्युत का एक बहुत ही कमजोर चालक (कुचालक जैसा) है, इसकी चालकता सभी विकल्पों में न्यूनतम है।
#68. निम्नलिखित में से किसमें तुलनात्मक रूप से उच्च विद्युत प्रतिरोध होता है और परिपथ में विद्युत धारा को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (A) प्रतिरोधक (Resistor)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्रतिरोधक (Resistor): प्रतिरोधक एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक घटक है जिसका उपयोग विद्युत परिपथ (Electrical circuit) में विद्युत धारा के प्रवाह को नियंत्रित करने या कम करने के लिए किया जाता है। इसका विद्युत प्रतिरोध तुलनात्मक रूप से उच्च होता है।
- मुख्य बिंदु:
- ओहम के नियम ($V = IR$) के अनुसार, प्रतिरोध धारा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है, जिससे परिपथ में आवश्यक मात्रा में ही करंट प्रवाहित होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 25 May 2019 Shift 1 CBT 1) में बेसिक इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक घटकों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) अर्धचालक (Semiconductor): अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम) की चालकता चालकों और कुचालकों के बीच की होती है, इनका उपयोग मुख्य रूप से स्विचिंग और डायोड-ट्रांजिस्टर बनाने में होता है, न कि विशेष रूप से धारा को नियंत्रित करने वाले प्रतिरोधक के रूप में।
- विकल्प (C) विधुतरोधक (Insulator): विधुतरोधक में प्रतिरोध अत्यधिक उच्च होता है जो विद्युत धारा को बिल्कुल भी प्रवाहित नहीं होने देते (यह धारा को कम करने के लिए नियंत्रित रूप से परिपथ में उपयोग नहीं होते)।
- विकल्प (D) चालक (Conductor): चालकों का प्रतिरोध बहुत कम होता है ताकि उनमें से धारा आसानी से बह सके।
#69. जब एक लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है, तो कौन-सा पदार्थ विस्थापित होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) कॉपर
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के नीले रंग के विलयन में डुबोया जाता है, तो लोहा (Iron) कॉपर की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर सल्फेट विलयन से **कॉपर (तांबा)** को विस्थापित कर देता है।
- मुख्य बिंदु:
- इस अभिक्रिया के दौरान कॉपर सल्फेट का नीला रंग फीका पड़ जाता है या हरे रंग ($\text{FeSO}_4$) में बदल जाता है, और लोहे की कील पर भूरे रंग की कॉपर की परत जम जाती है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{Fe} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{FeSO}_4 + \text{Cu}$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 2) में रासायनिक अभिक्रियाओं एवं धातु की सक्रियता श्रेणी के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) कॉपर सल्फेट: कॉपर सल्फेट वह विलयन है जिसमें अभिक्रिया होती है, यह खुद विस्थापित नहीं होता बल्कि इससे कॉपर विस्थापित होता है।
- विकल्प (C) सल्फेट: सल्फेट मूल रूप से आयन के रूप में विलयन में बना रहता है, यह अलग से विस्थापित होने वाला पदार्थ नहीं है।
- विकल्प (D) लोहा: लोहा स्वयं अधिक सक्रिय होने के कारण विलयन में प्रवेश करता है और कॉपर को विस्थापित करता है, न कि लोहा खुद विस्थापित होता है।
#70. निम्नलिखित में से कौन-सा अधात्विक (non-metallic) प्राकृतिक संसाधन है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 22/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) चूना पत्थर
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अधात्विक खनिज संसाधन (Non-metallic Mineral Resource): वे प्राकृतिक संसाधन या खनिज जिनमें धातु का अंश नहीं पाया जाता है, अधात्विक खनिज कहलाते हैं। चूना पत्थर (Limestone) कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) से बनी एक तलछटी चट्टान है, जिसका उपयोग सीमेंट, इस्पात उद्योग और निर्माण कार्यों में मुख्य रूप से किया जाता है। यह एक प्रमुख अधात्विक खनिज संसाधन है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC GRADUATE CBT 1 : 22/03/2026) में सामान्य विज्ञान एवं खनिज संसाधनों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) सोना, (C) तांबा, और (D) लौह अयस्क: ये तीनों धात्विक खनिज (Metallic minerals) हैं क्योंकि इनसे धातुएँ प्राप्त होती हैं और इनमें धातु के गुण (जैसे विद्युत चालन, चमक, आघातवर्धकता) पाए जाते हैं।
#71. निम्नलिखित में से कौन-सा तांबा और जस्ता का मिश्र धातु है?
(RRB JE 28 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) पीतल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मिश्रधातु (Alloy): जब दो या दो से अधिक धातुएँ (या एक धातु और एक अधातु) निश्चित अनुपात में मिलकर एक समांगी मिश्रण बनाती हैं, तो उसे मिश्रधातु कहते हैं। पीतल (Brass) मुख्य रूप से तांबा (Copper – Cu) और जस्ता (Zinc – Zn) की एक प्रमुख मिश्रधातु है।
- मुख्य बिंदु:
- पीतल में सामान्यतः लगभग 70% तांबा और 30% जस्ता होता है। इसका उपयोग बर्तन, मूर्तियाँ, और सजावटी वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 28 May 2019 Shift 1 CBT 1) में धातुओं और मिश्रधातुओं के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) सोल्डर: सोल्डर मुख्य रूप से टिन (Sn) और लेड (Pb) की मिश्रधातु है जिसका उपयोग टांके लगाने (Soldering) में होता है।
- विकल्प (C) अलनिको (Alnico): यह एल्युमीनियम (Al), निकेल (Ni) और कोबाल्ट (Co) से मिलकर बनी एक मजबूत चुंबकीय मिश्रधातु है।
- विकल्प (D) काँसा (Bronze): काँसा मुख्य रूप से तांबे (Cu) और टिन (Sn) की मिश्रधातु है, न कि जस्ते की।
#72. ताँबे और टिन (Cu और Sn) के मिश्रण से बनने वाले मिश्रधातु का नाम बताइए
。(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (D) काँसा
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- काँसा (Bronze): जब ताँबे (Cu) और टिन (Sn) को एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है, तो बनने वाली प्रमुख मिश्रधातु को ‘काँसा’ कहा जाता है। यह शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत और संक्षारणरोधी होती है।
- मुख्य बिंदु:
- काँसे का उपयोग सिक्के, मूर्तियाँ, बर्तन और पदक (मेडल) बनाने में किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से इसका उपयोग औजार और हथियार बनाने के लिए भी बहुतायत में किया जाता रहा है (कांस्य युग)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3) में धातुओं और उनकी मिश्रधातुओं के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) सोल्डर: सोल्डर मुख्य रूप से टिन (Sn) और लेड (Pb) की मिश्रधातु है, जिसका उपयोग टांके लगाने (Soldering) के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) सोना: सोना एक मौलिक शुद्ध धातु है, न कि ताँबे और टिन का मिश्रण।
- विकल्प (C) पीतल: पीतल ताँबे (Cu) और जस्ते (Zn) की मिश्रधातु है, टिन की नहीं।
#73. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु, तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) जिंक (Zinc)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- तनु अम्ल के साथ धातुओं की अभिक्रिया (Reaction with Dilute Acids): सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित धातुएँ (जो हाइड्रोजन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होती हैं) तनु अम्लों (जैसे तनु $\text{HCl}$ या $\text{H}_2\text{SO}_4$) के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) विस्थापित करती हैं। जिंक (Zinc) हाइड्रोजन से अधिक सक्रिय है, अतः यह तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ तेजी से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है।
- मुख्य बिंदु:
- रासायनिक समीकरण: $\text{Zn} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{ZnCl}_2 + \text{H}_2\uparrow$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 22/12/2025) में धातु एवं अधातु तथा उनकी रासायनिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) सोना, (B) चांदी, और (C) तांबा: ये तीनों धातुएँ सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे (कम अभिक्रियाशील) स्थित हैं, इसलिए ये तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं करती हैं।
#74. ________ अमलगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण धातु है
。(RRB JE 24 May 2019 Shift 2 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) पारा (Mercury)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अमलगम (Amalgam): जब किसी धातु की पारे (Mercury – Hg) के साथ मिश्रधातु बनाई जाती है, तो उसे अमलगम कहा जाता है। अमलगम के निर्माण के लिए पारा एक अनिवार्य और सबसे महत्वपूर्ण घटक है।
- मुख्य बिंदु:
- सोना, चांदी, तांबा और जस्ता जैसी धातुएँ पारे के साथ आसानी से अमलगम बनाती हैं। दंत चिकित्सा (Dental fillings) में रजत अमलगम का उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 24 May 2019 Shift 2 CBT 1) में धातुओं और मिश्रधातुओं के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) टंगस्टन, (C) एल्युमीनियम और (D) लोहा: ये ऐसी धातुएँ हैं जो पारे के साथ अमलगम नहीं बनाती हैं (लोहा और टंगस्टन पारे में अघुलनशील होते हैं), इसलिए इन्हें अमलगम बनाने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है।
#75. विद्युत अपघटनी परिष्करण प्रक्रिया में कैथोड निम्नलिखित से बना होता है
:(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) शुद्ध धातु
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining): ताँबा, जस्ता, टिन, निकल, चाँदी और सोना जैसी कई धातुओं को शुद्ध करने के लिए इस विधि का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक विद्युत अपघटनी सेल का उपयोग होता है जिसमें दो इलेक्ट्रोड होते हैं: एनोड और कैथोड।
- मुख्य बिंदु:
- एनोड (Anode): यह **अशुद्ध धातु** की पट्टी से बना होता है।
- कैथोड (Cathode): यह उसी धातु की एक पतली पट्टी से बना **शुद्ध धातु** होता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से शुद्ध धातु घोल में जाती है और कैथोड (शुद्ध धातु) पर जाकर जमा हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2) में धातुओं के शोधन एवं विद्युत रसायन के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) अशुद्ध धातु: अशुद्ध धातु की पट्टी का उपयोग ‘एनोड’ (Anode) के रूप में किया जाता है, कैथोड के रूप में नहीं।
- विकल्प (C) मिश्र धातु और (D) धातु लवण: मिश्र धातु या धातु लवण का उपयोग कैथोड प्लेट बनाने के लिए नहीं किया जाता है; धातु लवण का उपयोग केवल विद्युत अपघट्य (Electrolyte solution) के रूप में किया जाता है।
#76. जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट ( ZnSO 4.7H 2 O) को आम तौर पर के नाम से जाना जाता है।
(RRB NTPC CBT-I : 30 Jan 2021 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) श्वेत तूतिया (White vitriol)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- श्वेत तूतिया (White Vitriol): जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट (ZnSO4 . 7H2O) को आमतौर पर श्वेत तूतिया (White Vitriol) के नाम से जाना जाता है। यह एक रंगहीन, क्रिस्टलीय यौगिक है।
- मुख्य बिंदु:
- इसका उपयोग मुख्य रूप से दवाओं (आंखों के कतरों/drops), त्वचा क्रीम, रेयान के निर्माण और जिंक की कमी को पूरा करने के लिए उर्वरक के रूप में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 30 Jan 2021 Shift 1) में रसायनों के सामान्य एवं रासायनिक नामों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) नीला तूतिया (Blue vitriol): कॉपर सल्फेट पेंटाहाइड्रेट (CuSO4 . 5H2O) को नीला तूतिया कहा जाता है।
- विकल्प (C) जिप्सम (Gypsum): कैल्शियम सल्फेट डिहाइड्रेट (CaSO4 . 2H2O) को जिप्सम कहा जाता है।
- विकल्प (D) एप्सम नमक (Epsom salt): मैग्नीशियम सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट (MgSO4 . 7H2O) को एप्सम नमक कहा जाता है।
#77. ऐनोडीकरण ( Anodising) सामान्यतः किस धातु पर किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) एल्युमीनियम
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऐनोडीकरण (Anodising): एल्युमीनियम पर एक मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया को ऐनोडीकरण कहते हैं। वायु के संपर्क में आने पर एल्युमीनियम पर ऑक्साइड की एक पतली परत बन जाती है, जिसे और अधिक मजबूत तथा संक्षारणरोधी बनाने के लिए विद्युत अपघटन के जरिए इस परत को मोटा किया जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- इस प्रक्रिया के दौरान एल्युमीनियम की वस्तु को एनोड बनाया जाता है और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ विद्युत अपघटन किया जाता है। इससे उस पर ऑक्साइड की मोटी परत चढ़ जाती है, जिसे आसानी से रंगा भी जा सकता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 15/12/2025) में धातुओं के संक्षारण और उनकी सुरक्षा विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) स्टील, (B) कॉपर, और (C) जिंक: इन धातुओं पर ऐनोडीकरण की प्रक्रिया सामान्यतः उस रूप में नहीं की जाती जिस प्रकार एल्युमीनियम पर की जाती है। जिंक के लिए गैल्वेनाइजेशन (यशदलेपन) का उपयोग होता है।
#78. गैल्वेनीकरण, धातु पर ______ के लेपन की प्रक्रिया है。
(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (D) जिंक (Zinc)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- गैल्वेनीकरण या यशदलेपन (Galvanization): लोहे और इस्पात को जंग (Rusting) से सुरक्षित रखने के लिए उन पर पिघले हुए जिंक (जस्ता) की एक पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को गैल्वेनीकरण कहते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- जिंक की यह परत लोहे को सीधे वायु और नमी के संपर्क में आने से रोकती है, जिससे लोहे में लंबे समय तक जंग नहीं लगती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ME : 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2) में धातुओं के संक्षारण और उनकी सुरक्षा विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) इनमल, (B) टिन, और (C) रेड ऑक्साइड: इन पदार्थों का लेपन गैल्वेनीकरण नहीं कहलाता है (जैसे टिन की परत चढ़ाने को टिनिंग कहते हैं, जबकि गैल्वेनीकरण विशेष रूप से जिंक के लेपन के लिए उपयोग होता है)।


