Rajasthan Sthapatya avm Chitrakala

राजस्थान की गौरवशाली स्थापत्य एवं चित्रकला

1. राजस्थान स्थापत्य कला (Architecture)

राजस्थान की स्थापत्य कला को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है: दुर्ग, मंदिर, और हवेलियाँ।

दुर्ग स्थापत्य: राजस्थान को 'दुर्गों की भूमि' कहा जाता है। 2013 में यूनेस्को ने राजस्थान के 6 प्रमुख दुर्गों (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, आमेर, जैसलमेर, और गागरोन) को 'विश्व विरासत' घोषित किया है। कुंभलगढ़ दुर्ग की दीवार चीन की दीवार के बाद दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती है।

मंदिर स्थापत्य: यहाँ की मंदिर निर्माण शैली में 'महामारू शैली' प्रमुख है। दिलवाड़ा के जैन मंदिर अपनी संगमरमर की नक्काशी के लिए पूरे विश्व में विख्यात हैं। आमेर का जगत शिरोमणि मंदिर और उदयपुर का जगदीश मंदिर वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं।

2. राजस्थान की चित्रकला (Paintings)

राजस्थानी चित्रकला का वैज्ञानिक विभाजन सर्वप्रथम 'आनंद कुमार स्वामी' ने 1916 में अपनी पुस्तक 'राजपूत पेंटिंग्स' में किया था।

प्रमुख स्कूल और उनकी विशेषताएँ:

  • मेवाड़ स्कूल: यह सबसे प्राचीन शैली है। इसमें लाल और पीले रंगों का अधिक प्रयोग होता है।
  • किशनगढ़ शैली (मारवाड़ स्कूल): बनी-ठनी पेंटिंग विश्व प्रसिद्ध है, जिसे 'एरिक डिक्सन' ने 'भारत की मोनालिसा' कहा है।
  • बूंदी शैली: इसे 'पशु-पक्षियों की शैली' कहा जाता है। इसमें प्रकृति का सुंदर चित्रण मिलता है।
  • ढूँढाड़ शैली: जयपुर के राजदरबारों में मुगल प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य:

चित्रकला में 'पोथीखाना' (जयपुर) और 'पुस्तक प्रकाश' (जोधपुर) प्रमुख चित्र संग्रह केंद्र हैं। बीकानेर शैली में चित्रकार अपने चित्रों पर अपना नाम और तिथि लिखते थे, जो अन्य शैलियों में कम देखने को मिलता है।

राजस्थान स्थापत्य एवं चित्रकला

Hard Level - Statement Based MCQs

  • 📝 कुल प्रश्न: 50
  • कुल समय: 20 मिनट
  • सही उत्तर: +2.00
  • गलत उत्तर: -0.67
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