राजस्थानी चित्रकला pyq
#1. राजस्थान की किस चित्रकला शैली में ब्रश का उपयोग नहीं किया जाता है, केवल हाथ और कपड़े का उपयोग होता है- [राजस्थान पुलिस-13.5.2022 (S-II)]
-
कजली चित्रकारी (काजल से बनाई जाने वाली पेंटिंग) राजस्थान की एक बहुत ही अनूठी और दुर्लभ विधा है। इसमें ब्रश (कूची) का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता। चित्रकार काजल (काली स्याही) को हाथ की उंगलियों और कपड़े के टुकड़ों (मलमल या रुई) की मदद से पेपर या कैनवास पर फैलाकर अद्भुत शेडिंग और आकृतियाँ उभारते हैं।
-
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
-
(1) मिनिएचर पेंटिंग: इसमें गिलहरी के बालों से बने बेहद महीन ब्रशों का उपयोग होता है।
-
(2) किशनगढ़ पेंटिंग: बणी-ठणी जैसी बारीक पेंटिंग्स बिना ब्रश के संभव नहीं हैं।
-
(3) फड़ पेंटिंग: कपड़ों पर बड़े आकार में लोक देवताओं की गाथा गाई जाती है, जिसमें ब्रश और रंगों का भरपूर उपयोग होता है।
-
(A) तिजारा | (1) बलदेव, गुलाम अली
(B) अलवर | (2) साहिबराम, मुहम्मदशाह
(C) जयपुर | (3) नंदराम, जमुनादास
(D) किशनगढ़ | (4) मूलराज, भीकचन्द
#2. सुमेलित कीजिए-कृषि अधिकारी (कृषि विभाग)-19.1.2021
मिलान की विस्तृत व्याख्या व परीक्षा फैक्ट्स:
-
तिजारा (A ➔ 3): तिजारा उपशैली के प्रमुख चित्रकार नंदराम और जमुनादास थे।
-
अलवर (B ➔ 1): अलवर शैली के सबसे प्रसिद्ध चित्रकार बलदेव और गुलाम अली थे। इन्होंने राजा बख्तावर सिंह और विनय सिंह के काल में ‘गुलिस्तां’ ग्रंथ का अनूठा चित्रण किया था।
-
जयपुर (C ➔ 2): जयपुर शैली के प्रसिद्ध चित्रकार साहिबराम (जिन्होंने राजा ईश्वरी सिंह का आदमकद/Life-size पोर्ट्रेट बनाया था) और मुहम्मदशाह थे।
-
किशनगढ़ (D ➔ 4): किशनगढ़ शैली में निहालचंद के अलावा मूलराज, भीकचन्द, सीताराम और बदनसिंह जैसे चित्रकार भी सक्रिय थे।
#3. अजमेर लघु-चित्र को समृद्ध करने वाले चित्रकारों में एक स्त्री चित्रकार का प्रमुख स्थान है। वह कौन है? [Asst. Agriculture Officer Exam- 31.05.2019]
-
साहिबा अजमेर शैली की एक बेहद प्रसिद्ध महिला चित्रकार थीं, जिन्होंने कई सुंदर लघु चित्रों का निर्माण किया।
-
अतिरिक्त परीक्षा फैक्ट: इसी तरह नाथद्वारा शैली में दो महिला चित्रकारों के नाम प्रसिद्ध हैं – कमला और इलायची
#4. कमला और इलाइची किस चित्रकला शैली की अग्रगण्य महिला चित्रकार है-[VDO-27.12.2021 (S-I)][II Grade (S-I) -29.1.2023]
#5. चाँद, तैयब, रामसिंह भाटी, साहिबा एवं उस्ना चित्रकार किस चित्र शैली से सम्बन्धित हैं? [JEN (Agri.) 10.9.2022][JEN (Mech.)Degree- 20.05.2022]
-
चाँद, तैय्यब, रामसिंह भाटी, उस्ना और महिला चित्रकार साहिबा – ये सभी अजमेर शैली के प्रमुख कलाकार हैं। अजमेर शैली में राजपूत वैभव के साथ-साथ यहाँ की दरगाह और सूफी संस्कृति के कारण एक खास प्रकार का मिला-जुला प्रभाव (हिंदू-मुस्लिम समन्वय) देखने को मिलता है।
-
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
-
(1) देवगढ़: चोखा, बगता, बैजनाथ
-
(3) शाहपुरा: यहाँ मुख्य रूप से श्रीलाल जोशी, शांतिलाल जोशी (फड़ चित्रकार) प्रसिद्ध हैं।
-
(4) जैसलमेर: यहाँ मुमल का प्रसिद्ध चित्र बना था, जिस पर बाहरी शैलियों का प्रभाव न के बराबर है।
-
#6. सुरजन, अहमद अली, रामलाल, श्री किशन और साधुराम किस शैली के प्रमुख चित्रकार थे? [Asst. Town Planner- 16.06.2023]
बूँदी शैली के सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा फैक्ट्स:
-
इसे “पशु-पक्षियों की चित्रशैली” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्राकृतिक दृश्यों, नाचते हुए मोरों, बंदरों और बत्तखों का बेहतरीन चित्रण हुआ है।
-
बूँदी के राजा उम्मेद सिंह का काल इस शैली का स्वर्णकाल माना जाता है।
-
उम्मेद सिंह के समय निर्मित बूँदी किले का ‘चित्रशाला’ (Chitrashala) भित्ति चित्रों का स्वर्ग कहलाता है।
-
इस शैली में सुनहरे, लाल और हरे रंग का अद्भुत प्रयोग देखने को मिलता है।
#7. श्रीधर अंधारे को किस चित्रशैली को प्रकाश में लाने का श्रेय दिया जाता है? [CET: 07.01.2023 (S-1)]
देवगढ़ शैली के मुख्य तथ्य (जो परीक्षा में आते हैं):
-
इस शैली की शुरुआत 1680 ई. में महाराणा जयसिंह के काल में रावत द्वारिकादास चूँडावत द्वारा देवगढ़ ठिकाना स्थापित करने के साथ हुई।
-
यहाँ के सामंतों को ‘सोलहवें उमराव’ कहा जाता था।
-
यह शैली मेवाड़, मारवाड़ और जयपुर शैली का समन्वित (मिश्रित) रूप है।
-
प्रमुख चित्रकार: बगता, कँवला (प्रथम व द्वितीय), हरचंद, नंगा, चोखा और बैजनाथ।
-
प्रमुख भित्ति चित्र: ‘अजारा की ओवरी’ और ‘मोती महल’ के भित्ति चित्र इसी शैली के बेजोड़ उदाहरण हैं।
#8. ‘अजारा की ओवरी’ किस शैली का भित्ति चित्र है? [PTI (Grade-III)-25.9.2022]
-
‘अजारा की ओवरी’ और ‘मोती महल’ देवगढ़ के महलों में बने प्रसिद्ध भित्ति चित्र (Frescoes) हैं जो देवगढ़ शैली की अनूठी विशेषता हैं।
-
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
-
(1) जोधपुर: यहाँ ढोला-मारू, मूमल और युद्ध के दृश्यों के भित्ति चित्र मिलते हैं।
-
(2) नाथद्वारा: यह ‘पिच्छवाई’ (Pichwai) कला के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ श्रीनाथजी के पीछे कपड़ों पर चित्र बनाए जाते हैं।
-
(3) किशनगढ़: यह अपनी महीन रेखाओं और राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक प्रेम के चित्रों के लिए जाना जाता है, भित्ति चित्रों के लिए नहीं।
-
#9. निम्नलिखित में से कौनसी चित्रकला शैली राजस्थान से संबंधित नहीं थी-[राज.पुलिस कॉन्स्टेबल-6.11.2020 (II)]
-
कांगड़ा चित्रशैली का संबंध राजस्थान से नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी चित्रकला (Pahari School of Art) से है। यह राजा संसार चंद के संरक्षण में विकसित हुई थी।
-
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं (ये राजस्थान की शैलियाँ हैं):
-
(1) शेखावाटी: इसे “ओपन एयर आर्ट गैलरी” कहा जाता है क्योंकि यहाँ की हवेलियों में बहुत सुंदर भित्ति चित्र बने हैं।
-
(2) हाड़ौती: इसके अंतर्गत बूँदी और कोटा शैलियाँ आती हैं, जो पशु-पक्षियों के शिकार और प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध हैं।
-
(4) मारवाड़: इसके अंतर्गत जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर आदि शैलियाँ आती हैं, जिनमें पीले रंग की प्रधानता होती है।
-
#10. लघु चित्रकारी (Miniature painting) की कला को भारत भूमि पर सर्वप्रथम ….द्वारा पेश किया गया था? [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-15.05.2022 (II)]
छोटी वस्तुओं या हाथी दाँत पर बारीक चित्रण) को एक व्यवस्थित रूप में स्थापित करने और लोकप्रिय बनाने का श्रेय मुगल शासकों (विशेषकर हुमायूँ और अकबर) को जाता है। उन्होंने फारस (इरान) से चित्रकारों को बुलाकर इस कला की नींव रखी थी। राजस्थान में जयपुर, जोधपुर और किशनगढ़ शैलियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
1.आमेर 2. बैराठ 3. मोजमाबाद 4. भावपुरा
#11. ढूँढाड़ी के भित्ति चित्र मिलते हैं ? [Research Off.-4.8.2024]
ढूँढाड़ स्कूल ऑफ आर्ट्स (जयपुर और आसपास का क्षेत्र) के प्रारंभिक भित्ति चित्र आमेर के महलों, बैराठ (विराट नगर) के मुगल गार्डन/छतरियों, मोजमाबाद और भावपुरा की छतरियों में प्रचुर मात्रा में देखने को मिलते हैं। ये सभी स्थान पूर्ववर्ती जयपुर राज्य/ढूँढाड़ क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं और इन सभी में अकबर कालीन (मुगल प्रभाव युक्त) ढूँढाड़ शैली के चित्र मौजूद हैं। इसलिए चारों विकल्प सही हैं।


