Rajasthan ke Nritya or Natak
राजस्थान के लोक नृत्य और नाट्य कला
1. राजस्थान के प्रसिद्ध लोक नृत्य
राजस्थान के नृत्यों को उनकी उत्पत्ति और प्रदर्शन के आधार पर दो भागों में बांटा जा सकता है:
क) व्यावसायिक नृत्य: ये नृत्य आजीविका के लिए किए जाते हैं।
- भवाई नृत्य: सिर पर कई मटके रखकर किया जाने वाला चमत्कारिक नृत्य।
- कालबेलिया नृत्य: इसे 'सपेरा नृत्य' भी कहते हैं। 2010 में यूनेस्को ने इसे अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल किया।
ख) क्षेत्रीय नृत्य:
- घूमर: राजस्थान का राज्य नृत्य, जिसे 'नृत्यों का सिरमौर' कहा जाता है।
- गीदड़ नृत्य: शेखावाटी क्षेत्र में होली के अवसर पर किया जाता है।
- अग्नि नृत्य: बीकानेर के कतरियासर गाँव में जसनाथी संप्रदाय द्वारा धधकते अंगारों पर किया जाता है।
2. राजस्थान के लोक नाट्य (Folk Drama)
राजस्थान की नाट्य परंपरा अत्यंत समृद्ध है, जो समाज को मनोरंजन के साथ शिक्षा भी प्रदान करती है।
प्रमुख नाट्य शैलियाँ:
- ख्याल (Khayal): यह राजस्थान का सबसे लोकप्रिय लोक नाट्य है। 'जयपुरी ख्याल' और 'शेखावाटी ख्याल' बहुत प्रसिद्ध हैं।
- गवरी (Gavri): यह मेवाड़ के भीलों का सबसे प्राचीन लोक नाट्य है, जो शिव-भस्मासुर की कथा पर आधारित है। इसे 'मेरु नाट्य' भी कहते हैं।
- तमाशा: जयपुर का प्रसिद्ध नाट्य, जिसे महाराजा प्रताप सिंह के समय संरक्षण मिला।
- रम्मत: बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय नाट्य, जो खुले मंचों पर खेला जाता है।
राजस्थान के नृत्य और नाटक
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