संक्षारण और जंग लगना,Corrosion PYQ,Railway PYQ के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित पढ़ें। RRB NTPC, Group D और अन्य Railway Exams के लिए Chemistry के उपयोगी प्रश्न।

 

Results

#1. कौन सी रासायनिक प्रक्रिया तांबे पर पट्टिका के निर्माण, लोहे में जंग लगने और चांदी के काले पड़ने का कारण बनती है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 22 Aug, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) संक्षारण (Corrosion)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संक्षारण (Corrosion): जब धातुएं अपने आसपास की नमी, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य गैसों और अम्लों के संपर्क में आती हैं, तो उनकी सतह पर एक अवांछित परत जम जाती है जिससे धातु धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है, इसे संक्षारण कहते हैं।
  • प्रमुख उदाहरण:
    • लोहे में जंग लगना: लोहे पर नमी और ऑक्सीजन के कारण भूरे रंग की परत जमना।
    • तांबे का हरा होना (पट्टिका/पैटिना): तांबा हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और नमी के साथ अभिक्रिया करके हरे रंग की परत बनाता है।
    • चांदी का काला पड़ना: चांदी हवा में मौजूद सल्फर यौगिकों के साथ प्रतिक्रिया करके सिल्वर सल्फाइड बनाती है जिससे वह काली पड़ जाती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 22 Aug, 2025 Shift 3) में रासायनिक प्रक्रियाओं एवं धातुओं के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) ऊर्णन (Flocculation): गलत, यह जल शोधन या रासायनिक विलयन में कणों के एक साथ मिलकर बड़े गुच्छे बनाने की प्रक्रिया है।
  • विकल्प (B) बहिर्िवेशन (Extrusion): गलत, यह एक विनिर्माण प्रक्रिया है जिसमें किसी धातु को एक निश्चित आकार दिया जाता है।
  • विकल्प (D) संपुटन (Encapsulation): गलत, यह किसी वस्तु या पदार्थ को पूरी तरह से घेरने या ढंकने की प्रक्रिया है।

#2. एल्युमीनियम एनोडीकरण ( anodising) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) इसका संक्षारण प्रतिरोध और दिखावट (appearance) को बढ़ाना

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • एल्युमीनियम एनोडीकरण (Anodising): यह एक विद्युत रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें एल्युमीनियम धातु पर उसकी सतह पर ऑक्साइड की एक मोटी, टिकाऊ और सुरक्षात्मक परत (एल्युमीनियम ऑक्साइड) जमा की जाती है।
  • मुख्य उद्देश्य: एनोडीकरण का प्राथमिक उद्देश्य एल्युमीनियम के संक्षारण प्रतिरोध (corrosion resistance) को बढ़ाना और उसकी दिखावट (appearance) में सुधार करना है ताकि उस पर आकर्षक रंग भी चढ़ाए जा सकें।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 27/12/2025) में धातुओं के गुणों और संक्षारण से बचाव की तकनीकों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) इसे बेहतर चालक बनाना: गलत, एनोडीकरण से बनने वाली ऑक्साइड परत विद्युत की कुचालक (Insulator) होती है।
  • विकल्प (B) इसे नरम और अधिक लचीला बनाना: गलत, यह प्रक्रिया धातु की सतह को और अधिक कठोर (Hard) बनाती है, नरम नहीं।
  • विकल्प (D) अम्लों के साथ इसकी अभिक्रियाशीलता बढ़ाना: गलत, यह धातु को संक्षारण से बचाने और सुरक्षित करने के लिए की जाती है, न कि उसकी अभिक्रियाशीलता बढ़ाने के लिए।

#3. धातुओं के निष्कर्षण से पहले अयस्कों के संवर्धन का मुख्य कारण क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) बालू और अवांछित चट्टानों जैसी मृत्तिकामय अशुद्धियों को दूर करना

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अयस्कों का संवर्धन (Concentration of Ores): पृथ्वी से खनिजों के रूप में निकाले गए अयस्कों में मिट्टी, बालू, कंकड़ और अन्य अवांछित अशुद्धियाँ (जिन्हें गैंग/Gangue या मैट्रिक्स कहते हैं) मिली होती हैं। धातु के निष्कर्षण (Extraction) से पहले इन अशुद्धियों को हटाकर अयस्क में धातु की मात्रा को बढ़ाना ही ‘संवर्धन’ कहलाता है।
  • प्रमुख विधियाँ: अयस्क के संवर्धन के लिए गुरुत्व पृथक्करण (Gravity separation), फेन प्लवन विधि (Foam flotation), और चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic separation) जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 16/12/2025) में धातुओं के निष्कर्षण और धातु कर्म (Metallurgy) के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) परिष्करण के लिए खनिज सामग्री के गलनांक को बढ़ाना: गलत, संवर्धन का उद्देश्य गलनांक बढ़ाना नहीं बल्कि अनावश्यक अशुद्धियों को हटाना है।
  • विकल्प (C) रूपांतरण के लिए अयस्क की आंतरिक क्रिस्टल संरचना को बदलना: गलत, संवर्धन एक भौतिक प्रक्रिया है, इसका उद्देश्य क्रिस्टल संरचना बदलना नहीं है।
  • विकल्प (D) अंतिम धातु की संक्षारण और जंग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाना: गलत, यह धातु के निष्कर्षण और शुद्धिकरण के बाद के गुण या मिश्रधातु बनाने से संबंधित है, अयस्क के संवर्धन से इसका सीधा संबंध नहीं है।

#4. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति, लोहे के संक्षारण को सबसे प्रभावी रूप से तीव्र करेगी?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) घुले हुए लवणों वाली आर्द्र वायु के संपर्क में लोहे का पृष्ठ

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • लोहे का संक्षारण (जंग लगना): लोहे में जंग लगने के लिए ऑक्सीजन (O2) और नमी (जल वाष्प) दोनों का होना अनिवार्य है।
  • संक्षारण की तीव्रता: जब हवा में नमी (आर्द्रता) के साथ-साथ घुले हुए लवण (जैसे समुद्री पानी या नमक युक्त जल) मौजूद होते हैं, तो वे एक इलेक्ट्रोलाइट (विद्युत अपघट्य) के रूप में कार्य करते हैं। इससे रासायनिक अभिक्रिया की गति बहुत तेज हो जाती है और संक्षारण तीव्र गति से होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 09/12/2025) में धातुओं के संक्षारण और रासायनिक कारकों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) शुद्ध जल में डूबा हुआ लोहा, खुली हुई ऑक्सीजन से मुक्त: गलत, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया या तो बंद हो जाती है या बेहद धीमी होती है।
  • विकल्प (C) जस्ता की एक पतली परत से लेपित (गैल्वेनीकृत) लोहा: गलत, गैल्वेनीकरण (Galvanisation) लोहे को जंग से बचाने की एक तकनीक है, इससे संक्षारण तीव्र नहीं बल्कि रुकता है।
  • विकल्प (D) शुद्ध वायु में बिना किसी अशुद्धता के लोहे का पृष्ठ: गलत, केवल शुद्ध वायु और नमी में संक्षारण सामान्य गति से होता है, लवणों की उपस्थिति इसे और अधिक तीव्र कर देती है।

#5. ऑक्सीकरण के कारण समय के साथ एक चमकदार धातु की चमक मंद पड़ जाती है। इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(RRB JE 19/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) संक्षारण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संक्षारण (Corrosion): जब कोई चमकदार धातु ऑक्सीजन, नमी या वायुमंडल में मौजूद अन्य गैसों के संपर्क में आती है, तो उसका ऑक्सीकरण होने लगता है। इस रासायनिक अभिक्रिया के कारण धातु की सतह पर ऑक्साइड या अन्य यौगिकों की एक परत बन जाती है, जिससे धातु अपनी चमक खो देती है और उसकी चमक मंद (dull) पड़ जाती है।
  • प्रमुख उदाहरण: चांदी का काला पड़ना, तांबे पर हरे रंग की परत का जमना और लोहे पर जंग लगना संक्षारण के ही मुख्य रूप हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 19/02/2026) में धातुओं के रासायनिक गुणों और ऑक्सीकरण-संक्षारण प्रक्रिया के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): गलत, यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ सीधे गैस में बदल जाता है (बिना द्रव में बदले), धातु की चमक मंद पड़ने से इसका संबंध नहीं है।
  • विकल्प (C) निस्यंदन (Filtration): गलत, यह किसी मिश्रण से ठोस अशुद्धियों को छानकर अलग करने की एक भौतिक विधि है।
  • विकल्प (D) वाष्पन (Evaporation): गलत, यह वह प्रक्रिया है जिसमें द्रव धीरे-धीरे वाष्प (गैस) में परिवर्तित होता है।



#6. जस्ता लेपित लोहे की वस्तु में, जस्ते की परत पर खरोंच ( scratch) लगने पर भी जंग से क्यों सुरक्षित रहती है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (B) जस्ता, लोहे की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होता है और अधिमान्य ऑक्सीकरण से गुजरता है, जो लोहे को जंग लगने से बचाता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गैल्वेनीकरण (Galvanisation): लोहे या इस्पात को जंग से बचाने के लिए उस पर जस्ते (Zinc) की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को गैल्वेनीकरण कहते हैं।
  • बलिदानी सुरक्षा (Sacrificial Protection): जस्ता, लोहे की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील (Reactive) धातु है। जब गैल्वेनीकृत वस्तु पर खरोंच लग जाती है, तब भी जस्ता लोहे की तुलना में पहले खुद ऑक्सीकृत (oxidise) हो जाता है और लोहे को जंग लगने से बचाए रखता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 02/02/2026) में धातुओं की अभिक्रियाशीलता और संक्षारण से बचाव की विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) जस्ता, लोहे के साथ अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड की एक रक्षी परत बनाता है: गलत, जस्ता स्वयं जिंक ऑक्साइड या कार्बोनेट की परत बनाता है, आयरन ऑक्साइड नहीं।
  • विकल्प (C) लोहे पर जंग की एक पतली परत बन जाती है जो जंग लगने से रोकती है: गलत, लोहे पर बनने वाली जंग (आयरन ऑक्साइड) एक रक्षी परत नहीं है बल्कि यह धातु को और कमजोर करती है।
  • विकल्प (D) खरोंचों से तेल अंदर रिस सकता है, जो जंग लगने से रोकता है: गलत, गैल्वेनीकृत लोहे में खरोंच आने पर तेल रिसने जैसी कोई बात नहीं होती।

#7. एक वैज्ञानिक ने देखा कि समुद्र के पास लगी लोहे की रेलिंग में शुष्क प्रदेश में लगी उसी प्रकार की रेलिंग की तुलना में अधिक तेजी से जंग लगता है। इसका मुख्य कारण क्या हो सकता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) समुद्री वायु में नमक और नमी होती है, जिससे जंग लगने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समुद्री वायु और संक्षारण (Rusting in Coastal Areas): समुद्र के तटीय क्षेत्रों की हवा में नमी (जलवाष्प) की मात्रा बहुत अधिक होती है और साथ ही हवा में सूक्ष्म लवण (नमक / NaCl के कण) भी घुले होते हैं।
  • अभिक्रिया की तीव्रता: नमी और नमक मिलकर एक मजबूत इलेक्ट्रोलाइट (विद्युत अपघट्य) का निर्माण करते हैं, जिससे लोहे की सतह पर इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन (विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया) की गति काफी तेज हो जाती है और शुष्क प्रदेशों की तुलना में लोहा बहुत तेजी से जंग खाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III 10/03/2026) में पर्यावरणीय कारकों और धातुओं के संक्षारण के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) समुद्री वायु अधिक आर्द्र होती है, जिससे जंग लगने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है: गलत, अधिक आर्द्रता और लवण की उपस्थिति से जंग लगने की प्रक्रिया धीमी नहीं बल्कि बहुत तेज हो जाती है।
  • विकल्प (C) समुद्र के पास लगी लोहे की रेलिंग सूर्य के प्रकाश के संपर्क में अधिक आती है: गलत, सूर्य का प्रकाश लोहे के तेजी से जंग लगने का मुख्य कारण नहीं है, बल्कि नमी और नमक इसके मुख्य कारक हैं।
  • विकल्प (D) प्रदेश की वायु में ऑक्सीजन कम है, जिससे जंग नहीं लगती: गलत, वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग हर जगह समान रूप से उपलब्ध होती है; मुख्य अंतर नमी और लवण का होता है।

#8. संक्षारण सामान्यतः किस रूप में देखा जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) लोहे की वस्तुओं पर जंग लगना

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संक्षारण (Corrosion): जब धातुएं हवा में मौजूद ऑक्सीजन, नमी, कार्बन डाइऑक्साइड आदि के संपर्क में आती हैं, तो रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण उनकी ऊपरी सतह नष्ट होने लगती है या खराब होने लगती है। इसे संक्षारण कहा जाता है।
  • सामान्य उदाहरण: दैनिक जीवन में संक्षारण का सबसे आम और प्रमुख उदाहरण लोहे की वस्तुओं पर लाल-भूरे रंग की परत (जंग) का लगना है। इसके अलावा तांबे पर हरी परत और चांदी का काला होना भी इसी के अंतर्गत आता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 09/12/2025) में रासायनिक परिवर्तनों और संक्षारण की मूल अवधारणा के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) गरम करने पर धातु का पिघलना: गलत, यह एक भौतिक परिवर्तन (अवस्था परिवर्तन) है, संक्षारण नहीं।
  • विकल्प (C) केतली में जल का उबलना: गलत, यह जल का वाष्पीकरण और तापमान में वृद्धि की सामान्य प्रक्रिया है।
  • विकल्प (D) बल्ब का चमकना: गलत, यह विद्युत धारा के प्रभाव से प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न होने की घटना है।

#9. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रक्रम एक भौतिक परिवर्तन है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) क्रिस्टलीकरण (Crystallization)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • भौतिक परिवर्तन (Physical Change): वह परिवर्तन जिसमें किसी पदार्थ के केवल भौतिक गुणों (जैसे आकार, रंग, अवस्था आदि) में बदलाव होता है, कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता है और मूल पदार्थ को आसानी से पुनः प्राप्त किया जा सकता है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है।
  • क्रिस्टलीकरण (Crystallization): यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी विलेय के घोल से शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं (जैसे समुद्र के पानी से नमक प्राप्त करना)। यह एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें पदार्थ की रासायनिक संरचना में कोई बदलाव नहीं होता।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 09/01/2026) में भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) जंग लगना (Rusting): गलत, यह एक रासायनिक परिवर्तन है जिसमें लोहे पर नमी और ऑक्सीजन की उपस्थिति में नया पदार्थ (आयरन ऑक्साइड) बनता है।
  • विकल्प (C) दहन (Combustion): गलत, यह एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ जलकर ऊष्मा, प्रकाश और नए रासायनिक उत्पाद बनाता है।
  • विकल्प (D) किण्वन (Fermentation): गलत, यह एक रासायनिक परिवर्तन है जिसमें सूक्ष्मजीवों द्वारा जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदला जाता है (जैसे शर्करा का अल्कोहल में बदलना)।

#10. निम्नलिखित में से कौन-सी तटीय क्षेत्रों में लोहे के संक्षारण को रोकने की एक सर्वोत्तम विधि है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (C) गैल्वेनीकरण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गैल्वेनीकरण (Galvanisation): तटीय क्षेत्रों में हवा में अत्यधिक नमी और नमक (लवण) की उपस्थिति के कारण लोहे में बहुत तेजी से संक्षारण (जंग) होता है। इस समस्या से निपटने के लिए लोहे या इस्पात पर जस्ते (Zinc) की एक सुरक्षात्मक परत चढ़ाई जाती है, जिसे गैल्वेनीकरण कहते हैं।
  • बलिदानी सुरक्षा: जस्ता लोहे की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होता है, इसलिए यह लोहे को ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आने से रोकता है और खुद ऑक्सीकृत होकर लोहे की रक्षा करता है। यही कारण है कि यह तटीय क्षेत्रों के लिए सर्वोत्तम विधि है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III 09/03/2026) में धातुओं के संक्षारण से बचाव की तकनीकों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) ठंडे जल में निमज्जित करना: गलत, पानी और नमी स्वयं जंग लगने की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं।
  • विकल्प (B) तेल आधारित पेंट से पेंट करना: गलत, पेंट कुछ समय के लिए सुरक्षा देता है लेकिन तटीय क्षेत्रों की कठोर जलवायु और नमक के प्रभाव से पेंट जल्दी उखड़ जाता है, जबकि गैल्वेनीकरण अधिक टिकाऊ होता है।
  • विकल्प (D) लोहे को आवधिक रूप से गर्म करना: गलत, लोहे को गर्म करने से संक्षारण रुकता नहीं है बल्कि यह जंग लगने की प्रक्रिया को और प्रभावित कर सकता है।



#11. अम्लों या नमी की उपस्थिति में धातुओं का ऑक्सीकरण क्या कहलाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (B) संक्षारण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संक्षारण (Corrosion): जब धातुएं अपने आसपास की नमी, ऑक्सीजन या अम्लों के संपर्क में आती हैं, तो उनका ऑक्सीकरण होने लगता है जिसके कारण उनकी सतह पर अवांछित यौगिकों की परत जम जाती है और धातु धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। इसे संक्षारण कहा जाता है।
  • यह प्रक्रिया सभी धातुओं (जैसे तांबा, चांदी, लोहा आदि) पर लागू होती है जब वे वायुमंडल के संपर्क में आती हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec, 2024 Shift 3) में रासायनिक परिवर्तनों और धातुओं के संक्षारण के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) उदासीनीकरण (Neutralisation): गलत, यह अम्ल और क्षार के बीच होने वाली अभिक्रिया है जिससे लवण और जल बनते हैं।
  • विकल्प (C) विकृतगंधिता (Rancidity): गलत, यह वसा और तेल युक्त खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से संबंधित है जिससे उनका स्वाद और गंध खराब हो जाती है।
  • विकल्प (D) जंग लगना (Rusting): गलत, यह विशेष रूप से केवल ‘लोहे’ के संक्षारण के लिए प्रयुक्त होने वाला विशिष्ट शब्द है, जबकि प्रश्न में सभी ‘धातुओं’ के सामान्य ऑक्सीकरण की बात की गई है जिसके लिए संक्षारण व्यापक शब्द है।

#12. संक्षारण या जंग लगना ____________ से रोका जा सकता है।
(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (B) सभी विकल्पों

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संक्षारण से बचाव (Prevention of Corrosion): धातुओं (विशेषकर लोहे) को नमी और ऑक्सीजन के संपर्क में आने से बचाकर संक्षारण या जंग लगने से रोका जा सकता है। इसके लिए विभिन्न प्रभावी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  • प्रमुख विधियाँ:
    • पेंट करना (Painting): धातु की सतह पर पेंट की परत चढ़ाने से हवा और नमी सीधे धातु के संपर्क में नहीं आ पाती।
    • तेल या ग्रीस लगाना (Oiling/Greasing): मशीनों के पुर्जों पर तेल या ग्रीस लगाकर नमी के प्रभाव को रोका जाता है।
    • विद्युत लेपन या गैल्वेनीकरण (Electroplating/Galvanisation): एक धातु की सतह पर दूसरी कम अभिक्रियाशील या सुरक्षात्मक धातु की परत चढ़ाना।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1) में धातुओं के संरक्षण और संक्षारण रोकने की विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) विद्युत लेपन प्रक्रिया: यह संक्षारण रोकने की एक सही विधि है, लेकिन अन्य विकल्प भी सही होने के कारण यह अकेला सही उत्तर नहीं है।
  • विकल्प (C) धातु की सतह को चित्रित करने: यह भी संक्षारण रोकने की एक मानक विधि है।
  • विकल्प (D) धातु की सतह पर तेल लगाने: यह भी जंग से बचाने की एक सामान्य और प्रभावी विधि है।

#13. कोई मैकेनिक साइकिल या मोटर के चलने वाले भागों के बीच तेल क्यों लगाता है?
(RRB JE 26 May 2019 Shift 1 CBT 1)

✨ सही उत्तर: (C) घर्षण को कम करने के लिए स्नेहक के रूप में

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • स्नेहक (Lubricant) का कार्य: साइकिल, मोटर या अन्य मशीनों के चलने वाले (गतिशील) भागों के बीच धातु की सतहें आपस में रगड़ खाती हैं। इस घर्षण (Friction) को कम करने, ऊर्जा की बर्बादी रोकने और पुर्जों को घिसने से बचाने के लिए उन पर तेल या ग्रीस (स्नेहक) लगाया जाता है।
  • तेल लगाने से सतहों के बीच एक पतली परत बन जाती है, जिससे पुर्जे आसानी से और बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से गति करते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 26 May 2019 Shift 1 CBT 1) में बल और घर्षण (Friction & Lubrication) के दैनिक जीवन से जुड़े अनुप्रयोगों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) भागों को साफ करने के लिए: गलत, तेल लगाने से मशीन के पुर्जे साफ नहीं होते, बल्कि चिकने होते हैं।
  • विकल्प (B) भागों को चमकदार बनाने के लिए: गलत, इसका मुख्य उद्देश्य चमक बढ़ाना नहीं बल्कि घर्षण को कम करना है।
  • विकल्प (D) जंग हटाने के लिए: गलत, तेल या ग्रीस मुख्य रूप से घर्षण कम करने के लिए और भविष्य में नमी से बचाने के लिए लगाया जाता है, यह पहले से लगी हुई जंग को हटाने का प्रमुख साधन नहीं है।

#14. निम्नलिखित में से किस विधि में जंग लगने से बचाने के लिए इस्पात और लोहे पर जिंक की परत का विलेपन शामिल है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025)

✨ सही उत्तर: (D) गैल्वेनीकरण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गैल्वेनीकरण (Galvanisation): लोहे या इस्पात को जंग (संक्षारण) से बचाने के लिए उन पर पिघले हुए जस्ते (Zinc) की एक पतली और सुरक्षात्मक परत चढ़ाने की रासायनिक प्रक्रिया को गैल्वेनीकरण कहा जाता है।
  • कार्यप्रणाली: जस्ता लोहे की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होता है, जिसके कारण यह लोहे को नमी और ऑक्सीजन के सीधे संपर्क में आने से रोकता है। यदि सतह पर खरोंच भी आ जाए, तब भी जस्ता पहले स्वयं ऑक्सीकृत होकर लोहे की रक्षा करता है (बलिदानी सुरक्षा)।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 27/11/2025) में धातुओं के संक्षारण से बचाव की विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) कैथोडी रक्षण (Cathodic Protection): गलत, यह धातु को बचाने की एक अलग विद्युत-रासायनिक विधि है जिसमें किसी अन्य अधिक सक्रिय धातु को एनोड बनाया जाता है, लेकिन जिंक की परत चढ़ाने की विशिष्ट विधि को गैल्वेनीकरण कहते हैं।
  • विकल्प (B) विद्युत-लेपन (Electroplating): गलत, यह विद्युत धारा का उपयोग करके किसी धातु की सतह पर दूसरी धातु की परत चढ़ाने की व्यापक प्रक्रिया है, जबकि लोहे पर विशेष रूप से जिंक की परत चढ़ाने को गैल्वेनीकरण कहा जाता है।
  • विकल्प (C) निक्षेपण (Deposition): गलत, यह किसी गैस, द्रव या ठोस कणों के सतह पर जमा होने की एक सामान्य भौतिक या रासायनिक प्रक्रिया है।

#15. लोहे की कीलों को जंग लगने से बचाने के लिए उन पर जिंक का लेपन किया जाता है। जिंक की परत खुरच जाने के बाद भी कीलों पर जंग क्यों नहीं लगती है?
(RRB JE 19/02/2026)

✨ सही उत्तर: (A) जिंक एक उत्सर्जी एनोड की तरह कार्य करता है और लोहे के स्थान पर स्वयं खुरच जाता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • बलिदानी या उत्सर्जी एनोड (Sacrificial Anode): गैल्वेनीकरण में लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाई जाती है। चूंकि जस्ता लोहे की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील (Reactive) होता है, इसलिए यह ‘बलिदानी एनोड’ के रूप में कार्य करता है।
  • यदि जिंक की परत पर खरोंच भी आ जाए, तब भी जस्ता लोहे की तुलना में पहले खुद ऑक्सीकृत (खुरच या नष्ट) हो जाता है और लोहे को ऑक्सीजन व नमी के संपर्क में आने से बचाकर रखता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 19/02/2026) में धातुओं की अभिक्रियाशीलता और संक्षारण से सुरक्षा के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) जिंक नमी के साथ अभिक्रिया करके एक सुरक्षात्मक पतली परत बनाता है: गलत, हालांकि जिंक ऑक्साइड की परत बनती है, लेकिन खरोंच के बावजूद लोहे को सुरक्षित रखने का मुख्य कारण इसका अत्यधिक अभिक्रियाशील और बलिदानी होना है।
  • विकल्प (C) जिंक की उपस्थिति में लोहा जंगरोधी बन जाता है: गलत, लोहा अपने रासायनिक गुण से जंगरोधी नहीं बनता, बल्कि जिंक की उपस्थिति उसे सुरक्षा प्रदान करती है।
  • विकल्प (D) जिंक एक कठोर ऑक्साइड परत बनाता है: गलत, यह खरोंच लगने के बाद लोहे की रक्षा करने की मुख्य क्रियाविधि (Sacrificial mechanism) को स्पष्ट नहीं करता।



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