विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव PYQ

 

Results

#1. विद्युत धारा को __________ का प्रवाह माना जाता है।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) धनावेश

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी चालक में आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा (Electric Current) कहा जाता है।
  • पारंपरिक परिपाटी (Conventional Tradition): ऐतिहासिक रूप से जब विज्ञान में विद्युत की खोज हुई थी, तब यह माना गया था कि विद्युत धारा धनात्मक आवेशों (धनावेश) की गति के कारण बहती है। इसलिए पारंपरिक रूप से इसे धनावेश का प्रवाह माना जाता है।
  • वास्तविक स्थिति (Actual Situation): हालांकि धातु के तारों में असली प्रवाह मुक्त इलेक्ट्रॉनों (ऋणावेश) की गति से होता है, जो कि धारा की विपरीत दिशा में चलते हैं, फिर भी मानक वैज्ञानिक परिभाषा और रेलवे परीक्षा के उत्तर के अनुसार सही विकल्प ‘धनावेश’ ही है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 21 Jan, 2019 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (ऋणावेश): यद्यपि इलेक्ट्रॉनों पर ऋणावेश होता है और वे ही असल में गति करते हैं, किंतु पारंपरिक और सैद्धांतिक परिभाषा में विद्युत धारा की दिशा धनावेश के प्रवाह की दिशा मानी जाती है।
  • विकल्प (परावैद्युत): गलत, परावैद्युत (Dielectric) एक विद्युत रोधी पदार्थ है जो धारा का प्रवाह नहीं होने देता।
  • विकल्प (चुंबक के टुकड़ों): गलत, इसका विद्युत धारा के प्रवाह की मूल परिभाषा से कोई संबंध नहीं है।

#2. अनुचुंबकीय पदार्थ हैं –
(RRB JE EE 1 Sept 2019 Shift 1 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (C) चुंबक द्वारा दुर्बल रूप से आकर्षित

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): अनुचुंबकीय (Paramagnetic) पदार्थ वे पदार्थ होते हैं जो किसी बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की दिशा में दुर्बल रूप से आकर्षित (Weakly Attracted) होते हैं।
  • विशेषताएँ: इन पदार्थों के परमाणुओं या अणुओं में अयुग्मित (Unpaired) इलेक्ट्रॉन होते हैं। उदाहरण के लिए: एल्युमिनियम, ऑक्सीजन, सोडियम, प्लेटिनम आदि।
  • चुंबकीय प्रवृत्ति: इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) धनात्मक लेकिन छोटी होती है, और यह तापमान पर निर्भर करती है (क्यूरी नियम के अनुसार)।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE EE : 1 Sept, 2019 Shift 1 CBT 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) लोहे को क्यूरी बिंदु से ऊपर गर्म करने पर उत्पन्न होते हैं: यद्यपि क्यूरी तापमान के बाद लौहचुंबकीय लोहा अनुचुंबकीय बन जाता है, किंतु यह अनुचुंबकीय पदार्थों की सामान्य परिभाषा नहीं है।
  • विकल्प (B) चुंबक द्वारा दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित: गलत, चुंबक द्वारा दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होने वाले पदार्थों को ‘प्रतिचुंबकीय’ या ‘व्यास चुंबकीय’ (Diamagnetic) कहा जाता है।
  • विकल्प (D) व्यास चुंबकीय पदार्थों के समान: गलत, व्यास चुंबकीय पदार्थ चुंबक से दूर भागते हैं (प्रतिकर्षित होते हैं), जबकि अनुचुंबकीय पदार्थ उसकी ओर आकर्षित होते हैं।

#3. विद्युत मोटर में कम्यूटेटर का उपयोग किस लिए किया जाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) कुंडली से प्रवाहित होने वाली धारा की दिशा को उलटने के लिए

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत मोटर (DC Motor) में कम्यूटेटर (दिकपरिवर्तक) एक ऐसा उपकरण या वलय (Split Ring) होता है जिसका मुख्य कार्य आर्मेचर कुंडली में धारा की दिशा को नियंत्रित करना है।
  • कार्यप्रणाली (Working): मोटर के प्रत्येक आधे चक्कर (Half-rotation) के पूरा होने पर कम्यूटेटर कुंडली में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा की दिशा को उलट देता है (Reverse कर देता है)।
  • प्रभाव (Effect): धारा की दिशा हर आधे चक्कर पर उलटने से बल आघूर्ण (Torque) की दिशा एक ही बनी रहती है, जिसके परिणामस्वरूप मोटर लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 16 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) परिपथ में विभवांतर बनाए रखने के लिए: गलत, परिपथ में विभवांतर या वोल्टेज बनाए रखने का कार्य बैटरी या विद्युत स्रोत का होता है।
  • विकल्प (B) परिपथ में चुंबकीय क्षेत्र बनाए रखने के लिए: गलत, चुंबकीय क्षेत्र स्थायी चुंबक या फील्ड वाइंडिंग द्वारा उत्पन्न किया जाता है।
  • विकल्प (D) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बदलने के लिए: गलत, कम्यूटेटर का काम चुंबकीय क्षेत्र बदलना नहीं, बल्कि आर्मेचर की धारा की दिशा बदलना है।

#4. चुंबक के परितः चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिकतम कहाँ होती है?
(RRB JE CBT 2 Electronics Engineering ReExam : 04 Jun, 2025)

✨ सही उत्तर: (B) चुंबक के ध्रुवों पर

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी छड़ चुंबक (Bar Magnet) के चारों ओर उत्पन्न होने वाला चुंबकीय क्षेत्र सभी जगह एकसमान नहीं होता है। चुंबकीय बल रेखाएँ (Magnetic Field Lines) चुंबक के सिरों पर सबसे अधिक सघन (Dense) होती हैं।
  • चुंबकीय शक्ति: चुंबक के दोनों सिरों यानी उत्तरी ध्रुव (North Pole) और दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर चुंबकीय आकर्षण या विकर्षण की क्षमता सबसे अधिक होती है।
  • क्षेत्र की तीव्रता: ध्रुवों पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की सांद्रता अधिकतम होने के कारण वहाँ चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता भी अधिकतम होती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT 2 Electronics Engineering ReExam : 04 Jun, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) ध्रुवों से समदूरस्थ: गलत, ध्रुवों से समान दूरी पर यानी चुंबक के मध्य क्षेत्र में चुंबकीय तीव्रता कम होती है।
  • विकल्प (C) अनंत पर: गलत, अनंत दूरी पर जाने पर चुंबकीय क्षेत्र का मान शून्य हो जाता है।
  • विकल्प (D) चुंबक के केंद्र पर: गलत, चुंबक के ठीक केंद्र (Geometric Center) पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता न्यूनतम या लगभग शून्य होती है।

#5. जब एक प्रतिक्रिया अन्य प्रतिक्रिया की दर को प्रभावित करती है, जो सामान्य परिस्थितियों में नहीं होता है, तो इस घटना को __________ के रूप में जाना जाता है।
(RPF Constable 2018 05 Feb 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) प्रेरित प्रेरण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): रासायनिक गतिकी (Chemical Kinetics) में, जब एक रासायनिक अभिक्रिया (Reaction) किसी अन्य ऐसी अभिक्रिया की दर को प्रभावित करती है जो सामान्य परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से उस गति से नहीं होती, तो इस घटना को प्रेरित प्रेरण (Induced Induction) कहा जाता है।
  • रासायनिक व्यवहार: इसमें एक प्राथमिक प्रतिक्रिया दूसरी प्रतिक्रिया को प्रेरित या प्रभावित करती है, जिसके कारण वह प्रतिक्रिया घटित होती है जो सामान्यतः संभव नहीं होती।
  • उदाहरण: सोडियम आर्सिनाइट का वायु द्वारा ऑक्सीकरण सीधे तौर पर आसानी से नहीं होता, लेकिन जब इसके साथ सोडियम सल्फाइट का ऑक्सीकरण कराया जाता है, तो सोडियम आर्सिनाइट का भी ऑक्सीकरण होने लगता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 05 Feb, 2019 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) नकारात्मक प्रेरण: यह किसी प्रतिक्रिया की दर को कम करने या मंद करने से संबंधित है, न कि एक द्वारा दूसरी को असामान्य रूप से प्रभावित करने से।
  • विकल्प (B) सकारात्मक प्रेरण: यह रासायनिक प्रेरण का एक सामान्य प्रकार है जहाँ एक प्रतिक्रिया दूसरी की गति को बढ़ाती है, लेकिन ‘प्रेरित प्रेरण’ इस विशेष घटना के लिए सटीक वैज्ञानिक शब्द है।
  • विकल्प (D) स्व प्रेरण: यह शब्द मुख्य रूप से भौतिकी (विद्युत चुंबकत्व) में उपयोग होता है, रासायनिक प्रतिक्रियाओं में इसका यह अर्थ नहीं होता।



#6. निम्नलिखित में से कौन सा चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कण की चक्रोट्रॉन आवृत्ति का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करता है?
(RPF Constable 2024 : 11 Mar, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) वह आवृत्ति जिस पर आवेशित कण लौरेंत्ज़ बल के कारण चुंबकीय क्षेत्र में वृत्ताकार गति करता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब कोई आवेशित कण (Charged Particle) किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर चुंबकीय लौरेंत्ज़ बल (Magnetic Lorentz Force) कार्य करता है, जो आवश्यक अभिकेंद्र बल (Centripetal Force) प्रदान करता है।
  • साइक्लोट्रॉन आवृत्ति (Cyclotron Frequency): इस बल के प्रभाव से कण चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत तल में एक वृत्ताकार पथ पर चक्कर लगाता है। जिस आवृत्ति (Frequency) से वह यह वृत्ताकार चक्कर लगाता है, उसे ही ‘साइक्लोट्रॉन आवृत्ति’ कहते हैं। इसका सूत्र कण के आवेश, चुंबकीय क्षेत्र और उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
  • विशेषता: यह आवृत्ति कण के वेग या पथ की त्रिज्या पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि यह क्षेत्र की तीव्रता और कण के विशिष्ट आवेश (charge-to-mass ratio) पर निर्भर करती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2024 : 11 Mar, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) वह आवृत्ति जिस पर आवेशित कण अपने केंद्र से गुजरने वाले अक्ष के चारों ओर घूमता है: गलत, यह स्पिन या आंतरिक कोणीय गति से संबंधित है, न कि साइक्लोट्रॉन आवृत्ति से।
  • विकल्प (B) वह आवृत्ति जिस पर आवेशित कण विद्युत चुंबकीय विकिरण उत्सर्जित करता है: गलत, यह सिंच्रोट्रॉन विकिरण (Synchrotron Radiation) या सामान्य त्वरण से संबंधित हो सकता है, लेकिन साइक्लोट्रॉन आवृत्ति का सीधा संबंध वृत्ताकार गति की आवृत्ति से है।
  • विकल्प (C) वह आवृत्ति जिस पर आवेशित कण अन्य कणों के साथ टकराव का अनुभव करता है: गलत, इसका कण के संघट्ट (Collision) से कोई संबंध नहीं है।

#7. यदि एक उत्तल दर्पण अपने मुख्य फोकस पर एक बिंदु-साइज़ का प्रतिबिंब बनाता है, तो बिंब कहाँ स्थित है?
(RRB JE 19/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) अनंत पर

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): उत्तल दर्पण (Convex Mirror) एक अपसारी दर्पण है जो हमेशा आभासी और छोटे प्रतिबिंब बनाता है।
  • स्थिति नियम: जब बिंब (वस्तु) अनंत (Infinity) पर स्थित होती है, तो उससे आने वाली प्रकाश किरणें मुख्य अक्ष के समांतर होती हैं।
  • प्रतिबिंब का निर्माण: ये समांतर किरणें दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य फोकस ($F$) से अपसृत होती हुई (आती हुई) प्रतीत होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप फोकस पर अत्यधिक छोटा (बिंदु-साइज़ का), आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 19 Feb, 2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) F और ध्रुव के बीच में / (C) P और F के बीच में: जब बिंब अनंत और दर्पण के ध्रुव के बीच किसी निश्चित दूरी पर होता है, तो उसका प्रतिबिंब दर्पण के पीछे ध्रुव और फोकस के बीच बनता है, न कि फोकस पर।
  • विकल्प (D) ध्रुव पर: ध्रुव पर रखी वस्तु का आभासी प्रतिबिंब उसी स्थान पर बनता है, फोकस पर नहीं।

#8. किस वैज्ञानिक ने सुझाव दिया कि कोई चुंबक एक धारावाही चालक पर बराबर और विपरीत बल लगाता है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) एम्पीयर (Ampere)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ आंद्रे-मैरी एम्पीयर (André-Marie Ampère) ने यह महत्वपूर्ण अवधारणा प्रस्तुत की थी कि यदि एक चुंबक किसी धारावाही चालक पर बल लगाता है, तो न्यूटन के गति के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया नियम) के अनुसार वह धारावाही चालक भी चुंबक पर ठीक उतना ही और विपरीत दिशा में बल लगाता है।
  • योगदान: उन्होंने विद्युत चुंबकत्व (Electromagnetism) के क्षेत्र में आधारभूत कार्य किया तथा दो समांतर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले आकर्षण व प्रतिकर्षक बलों का अध्ययन किया।
  • मानक मात्रक: उनके इन्हीं महान वैज्ञानिक योगदानों के सम्मान में विद्युत धारा के एसआई (SI) मात्रक का नाम ‘एम्पीयर’ रखा गया है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 11 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) ओर्स्टेड (Oersted): इन्होंने यह खोज की थी कि किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है और पास रखी चुंबकीय सुई विक्षेपित होती है।
  • विकल्प (C) मैक्सवेल (Maxwell): इन्होंने विद्युत और चुंबकत्व को एकीकृत करते हुए प्रसिद्ध मैक्सवेल समीकरण (Maxwell Equations) प्रतिपादित किए।
  • विकल्प (D) फैराडे (Faraday): इन्होंने विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के नियमों की खोज की थी।

#9. एक अपरिवर्ती धारावाही वृत्तिय कुंडली में, निम्नलिखित में से कौन-सा कारक इसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण को प्रभावित नहीं करता है?
(Not found 12/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (C) कुंडली के वाइंडिंग की दिशा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी धारावाही वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें फेरे कितने हैं, धारा कितनी है, त्रिज्या कितनी है और कोर की पारगम्यता क्या है।
  • वाइंडिंग की दिशा का प्रभाव: कुंडली के वाइंडिंग की दिशा बदलने से केंद्र पर उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्र की केवल **दिशा (Direction)** बदलती है, उसका **परिमाण (Magnitude)** अपरिवर्तित रहता है।
  • सूत्र संबंध: चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण कोर की पारगम्यता, फेरों की संख्या और धारा के सीधे समानुपाती तथा त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न परीक्षा में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) कोर सामग्री की चुंबकीय पारगम्यता: यह कोर के माध्यम से चुंबकीय क्षेत्र को बढ़ाने या घटाने का कार्य करती है, इसलिए यह परिमाण को प्रभावित करती है।
  • विकल्प (B) कुंडली के फेरों की संख्या: फेरों की संख्या बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण बढ़ जाता है।
  • विकल्प (D) कुंडली की त्रिज्या: त्रिज्या जितनी अधिक होगी, केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण उतना ही कम होगा।

#10. स्व-प्रेरण क्या है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 03 Sept, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) एक कुंडली में उसकी अपनी धारा के परिवर्तन के कारण EMF का प्रेरण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): स्व-प्रेरण (Self-Induction) किसी एकल विद्युत परिपथ या कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह स्वयं में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के परिवर्तन का विरोध करती है।
  • कार्यप्रणाली: जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन होता है, तो उससे बद्ध चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) बदलता है, जिसके फलस्वरूप उसी कुंडली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF) उत्पन्न हो जाता है।
  • स्वप्रेरकतत्व (Inductance): इसे अक्षर L द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, और इसका एसआई (SI) मात्रक हेनरी (Henry) होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 03 Sept, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) एक कुंडली में धारा के कारण पास की कुंडली में EMF का प्रेरण: यह घटना **अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction)** कहलाती है, न कि स्व-प्रेरण।
  • विकल्प (B) चुंबकीय क्षेत्र में गति के कारण एक कुंडली में EMF का प्रेरण: यह सामान्य विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) या गतिक विद्युत वाहक बल (Motional EMF) से संबंधित है।
  • विकल्प (D) तापमान परिवर्तन के कारण एक कुंडली में धारा का उत्पादन: यह ताप-विद्युत (Thermoelectric) प्रभाव या सीबेक प्रभाव से संबंधित है।



#11. फ्लेミング का वाम हस्त नियम किसका निर्धारण करने के लिए प्रयोग किया जाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): फ्लेミング का वाम हस्त नियम (Flemming’s Left-Hand Rule) मुख्य रूप से विद्युत मोटरों में उपयोग किया जाता है।
  • नियम की बनावट: यदि हम अपने बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी (Forefinger) और मध्यमा (Middle finger) को एक-दूसरे के लंबवत फैलाएं, तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित धारा की दिशा को दर्शाती है।
  • दिशा का निर्धारण: इस स्थिति में अंगूठा (Thumb) चालक पर लगने वाले बल (Force / Motion) की दिशा को इंगित करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 18 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) धारावाही चालक पर लगने वाले बल का परिमाण: गलत, फ्लेミング का नियम बल के केवल ‘दिशा’ को बताता है, उसके परिमाण को ज्ञात करने के लिए $F = BIL \sin\theta$ सूत्र का उपयोग किया जाता है।
  • विकल्प (B) चालक से प्रवाहित होने वाली धारा की मात्रा: गलत, यह धारा की मात्रा या माप नहीं बताता।
  • विकल्प (D) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता: गलत, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता इस नियम से निर्धारित नहीं की जाती, बल्कि यह तर्जनी द्वारा पहले से निर्देशित होती है।

#12. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के बारे में कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) वे कभी भी एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines) चुंबक के चारों ओर बंद वक्र (Closed Loops) का निर्माण करती हैं। चुंबक के बाहर इनकी दिशा उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर होती है।
  • प्रतिच्छेदन का नियम: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटती (प्रतिच्छेद नहीं करती) हैं।
  • कारण: यदि दो रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, तो इसका अर्थ होगा कि कटान बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होंगी, जो कि भौतिक रूप से असंभव है क्योंकि किसी एक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की केवल एक ही निश्चित दिशा हो सकती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05 Feb, 2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) वे ध्रुवों पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं: गलत, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ ध्रुवों पर भी कभी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं।
  • विकल्प (C) वे दक्षिणी ध्रुव से शुरू होती हैं: गलत, चुंबक के बाहर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा उत्तरी ध्रुव से शुरू होकर दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।
  • विकल्प (D) वे यादृच्छिक चक्र बनाती हैं: गलत, वे नियमित और निरंतर बंद वक्र बनाती हैं, यादृच्छिक (Random) चक्र नहीं।

#13. एक सीधे धारावाही चालक को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारक, चालक पर कार्य करने वाले बल के परिमाण को प्रभावित करता है?
(Not found 11/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (D) चुंबकीय क्षेत्र सामर्थ्य

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब किसी धारावाही चालक को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर चुंबकीय बल कार्य करता है। इस बल का परिमाण चालक में प्रवाहित धारा, चुंबकीय क्षेत्र में स्थित चालक की लंबाई और चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य पर निर्भर करता है।
  • सूत्र संबंध: बल का परिमाण सूत्र F = I L B के अनुसार होता है, जहाँ I धारा, L लंबाई और B चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य (Magnetic Field Strength) है।
  • प्रभाव: चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता या सामर्थ्य (B) जितनी अधिक होगी, सीधे चालक पर कार्य करने वाला चुंबकीय बल भी उतना ही अधिक होगा।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न परीक्षा में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) चालक का प्रतिरोध: प्रतिरोध सीधे तौर पर बल के समीकरण का मुख्य घटक नहीं है (हालांकि यह धारा के मान को प्रभावित कर सकता है)।
  • विकल्प (B) चालक का रंग: गलत, चालक के बाहरी रंग का चुंबकीय बल से कोई संबंध नहीं है।
  • विकल्प (C) चालक की आकृति: यहाँ सीधे (Straight) चालक की बात की गई है, जहाँ उसकी लंबाई और चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य मुख्य रूप से बल को निर्धारित करती है।

#14. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल का परिमाण किस स्थानिक स्थिति में सर्वाधिक पाया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) जब धारा और क्षेत्र एक दूसरे के लंबवत हों।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले चुंबकीय बल का सूत्र $F = I L B \sin\theta$ होता है, जहाँ $\theta$ धारा की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है।
  • अधिकतम मान (Maximum Value): चूँकि $\sin\theta$ का अधिकतम मान $1$ होता है जो कि $\theta = 90^\circ$ (लंबवत होने पर) पर प्राप्त होता है, अतः इस स्थिति में चालक पर लगने वाला बल सर्वाधिक (अधिकतम) होता है।
  • प्रभाव: जब चालक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा जाता है, तो चुंबकीय बल पूर्ण रूप से कार्य करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10 Feb, 2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) जब धारा चुंबक के दक्षिणी ध्रुव की ओर प्रवाहित हो: गलत, बल की दिशा या तीव्रता ध्रुव की विशेष दिशा पर निर्भर नहीं करती बल्कि उनके बीच के कोण पर निर्भर करती है।
  • विकल्प (C) जब धारा में तात्कालिक परिवर्तन हो: गलत, यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण से संबंधित है, सीधे चुंबकीय बल के अधिकतम होने से नहीं।
  • विकल्प (D) जब धारा और क्षेत्र समानांतर हों: गलत, समानांतर होने पर कोण $\theta = 0^\circ$ होता है, जिससे $\sin 0^\circ = 0$ होने के कारण बल का मान शून्य हो जाता है।

#15. धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र __________ के अनुक्रमानुपाती होता है।
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) लूप से प्रवाहित धारा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी धारावाही वृत्ताकार लूप (Circular Loop) के केंद्र पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र B = (mu_0 * I) / (2r) होता है, जहाँ I लूप में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा है।
  • अनुक्रमानुपाती संबंध: इस सूत्र के स्पष्ट रूप से अनुसार, केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण लूप से प्रवाहित होने वाली धारा (Current) के सीधे अनुक्रमानुपाती (Directly Proportional) होता है, यानी धारा बढ़ाने पर चुंबकीय क्षेत्र भी बढ़ता है।
  • अन्य संबंध: यह फेरों की संख्या के समानुपाती और लूप की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) वृत्ताकार लूप की त्रिज्या के वर्ग: गलत, चुंबकीय क्षेत्र त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती नहीं होता, बल्कि यह साधारण रूप से त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  • विकल्प (C) लूप से प्रवाहित धारा के वर्ग: गलत, चुंबकीय क्षेत्र धारा के वर्ग पर निर्भर नहीं करता बल्कि सीधे धारा के मान पर निर्भर करता है।
  • विकल्प (D) लूप से प्रवाहित धारा के व्युत्क्रम: गलत, यह धारा के व्युत्क्रमानुपाती (Inverse) नहीं बल्कि अनुक्रमानुपाती (Direct) होता है।



#16. चुंबकों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) एक चुंबक उत्तर और दक्षिण ध्रुवों वाला द्विध्रुव होता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): चुंबक का यह एक सार्वभौमिक गुण है कि वे हमेशा चुंबकीय द्विध्रुव (Magnetic Dipole) के रूप में होते हैं, यानी इनमें हमेशा दो ध्रुव – उत्तरी ध्रुव (North Pole) और दक्षिणी ध्रुव (South Pole) – एक साथ जोड़े में पाए जाते हैं।
  • एकल ध्रुव का अस्तित्व नहीं: प्रकृति में चुंबकीय मोनोपोल (अकेला उत्तरी या अकेला दक्षिणी ध्रुव) का कोई अस्तित्व नहीं होता है। यदि आप किसी चुंबक को बीच से काट भी दें, तो उसके दोनों टुकड़े अपने आप नए स्वतंत्र चुंबक बन जाते हैं जिनमें अपने उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रुव होते हैं।
  • चुंबकीय क्षेत्र: एक साधारण चुंबक अपने चारों ओर केवल एक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) उत्पन्न करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) एक चुंबक, चुंबकीय और साथ ही विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है: गलत, एक स्थिर चुंबक केवल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, विद्युत क्षेत्र नहीं (विद्युत क्षेत्र स्थिर या गतिशील आवेशों द्वारा उत्पन्न होता है)।
  • विकल्प (C) एक चुंबक एक इलेक्ट्रॉन को आकर्षित कर सकता है: गलत, चुंबक मुख्य रूप से चुंबकीय पदार्थों (जैसे लोहा, निकिल, कोबाल्ट) को आकर्षित करता है, इलेक्ट्रॉनों पर सीधा इस तरह का आकर्षण नहीं होता।
  • विकल्प (D) एक चुंबक में या तो उत्तर या दक्षिण ध्रुव हो सकता है: गलत, चुंबकीय एकल ध्रुव (Magnetic Monopole) का भौतिक रूप से कोई अस्तित्व नहीं होता है; चुंबक में हमेशा दोनों ध्रुव एक साथ होते हैं।

#17. किसी दंड चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसका उपयोग करके नहीं खींची जा सकती हैं?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) लकड़ी के कण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं (Magnetic Field Lines) को देखने या खींचने के लिए ऐसे पदार्थों या उपकरणों की आवश्यकता होती है जो चुंबकीय प्रभाव के प्रति संवेदनशील हों या चुंबकीय बल का अनुभव कर सकें।
  • लकड़ी के कणों की प्रकृति: लकड़ी एक अचुंबकीय (Non-magnetic) पदार्थ है। इस पर चुंबकीय क्षेत्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, इसलिए लकड़ी के कणों का उपयोग करके दंड चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ नहीं खींची जा सकती हैं।
  • अन्य विधियाँ: लोहे के छोटे बुरादे, चुंबकीय दिक्सूचक (Compass) या दूसरे दंड चुंबक का उपयोग करके चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और रेखाओं को आसानी से दर्शाया जा सकता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) लोहे के बुरादे: लोहे के बुरादे चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर एक निश्चित पैटर्न या रेखाओं के रूप में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे क्षेत्र रेखाएँ दर्शाई जाती हैं।
  • विकल्प (B) चुंबकीय दिक्सूचक: कम्पास की सुई चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के अनुसार विक्षेपित होती है, जिसकी मदद से सटीक क्षेत्र रेखाएँ खींची जाती हैं।
  • विकल्प (D) दूसरा दंड चुंबक: एक अन्य चुंबक के माध्यम से भी चुंबकीय क्षेत्र के खिंचाव और रेखाओं के प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है।

#18. प्राक्षेपिक ( ballistic) गैल्वेनोमीटर को इसकी सुई को इसके चल कुंडली से गुजरने वाले __________ के समानुपाती विक्षेपित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
(RRB JE EE 1 Sept 2019 Shift 1 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (C) आवेश

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): प्राक्षेपिक गैल्वेनोमीटर (Ballistic Galvanometer) एक संवेदनशील उपकरण है जिसका उपयोग अल्प समय के लिए प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश (Charge) को मापने के लिए किया जाता है।
  • कार्यप्रणाली: इसमें धारा का प्रवाह बहुत कम समय (आवेग) के लिए होता है, जिससे इसकी चल कुंडली को एक तात्कालिक आघूर्ण मिलता है।
  • विक्षेप का संबंध: गैल्वेनोमीटर की सुई का अधिकतम विक्षेप (Deflection) उस कुंडली से गुजरने वाले कुल आवेश ($Q$) के सीधे समानुपाती होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE EE : 1 Sept, 2019 Shift 1 CBT 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) चुंबकीय बल: गलत, यह सीधे चुंबकीय बल को मापने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है।
  • विकल्प (B) दाब ऊर्जा / (D) ऊष्मा ऊर्जा: गलत, इनका प्राक्षेपिक गैल्वेनोमीटर के विक्षेप और विद्युत आवेश मापन से कोई संबंध नहीं है।

#19. विद्युत परिपथ में फ्यूज तार __________ के सिद्धांत पर काम करता है।
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) धारा के तापीय प्रभाव

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत परिपथ में उपयोग होने वाला फ्यूज तार (Electric Fuse) विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current / Joule Heating) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • कार्यप्रणाली (Working): जब किसी परिपथ में सुरक्षित सीमा से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो धारा के तापीय प्रभाव के कारण तार में अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
  • फ्यूज की विशेषता: फ्यूज तार का प्रतिरोध उच्च और गलनांक (Melting Point) बहुत कम होता है, जिसके कारण अधिक धारा बहने पर यह तुरंत पिघल कर टूट जाता है और परिपथ को सुरक्षित रखता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 15 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) धारा के चुंबकीय प्रभाव: गलत, विद्युत चुंबक, इलेक्ट्रिक मोटर और जनरेटर धारा के चुंबकीय प्रभाव पर काम करते हैं।
  • विकल्प (C) धारा के रासायनिक प्रभाव: गलत, इलेक्ट्रोप्लेटिंग (विद्युत लेपन) और जल के वैद्युत अपघटन जैसे कार्य रासायनिक प्रभाव पर आधारित हैं।
  • विकल्प (D) धारा के प्रेरण प्रभाव: गलत, ट्रांसफार्मर और जनरेटर विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर काम करते हैं।

#20. आधुनिक विद्युत जनित्र __________ के सिद्धांत पर काम करता है
।(RRB NTPC CBT-I : 11 Jan 2021 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (B) विद्युत चुम्बकीय प्रेरण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): आधुनिक विद्युत जनित्र (Electric Generator / AC & DC Generator) विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है जिसकी खोज माइकल फैराडे ने की थी।
  • कार्यप्रणाली (Working): जब किसी कुंडली को किसी मजबूत चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उससे बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में निरंतर परिवर्तन होता है, जिसके परिणामस्वरूप कुंडली में विद्युत वाहक बल (EMF) और विद्युत धारा प्रेरित होती है।
  • ऊर्जा रूपांतरण: यह जनित्र यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) को विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) में परिवर्तित करने का कार्य करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 11 Jan, 2021 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) चुंबकीय प्रेरण: यह आंशिक शब्द है, सही व सटीक वैज्ञानिक सिद्धांत ‘विद्युत चुंबकीय प्रेरण’ है।
  • विकल्प (C) विद्युत प्रेरण: गलत, यह जनित्र के कार्य करने का मूल भौतिक सिद्धांत नहीं है।
  • विकल्प (D) विद्युत ऊर्जा: गलत, विद्युत ऊर्जा जनित्र का आउटपुट (परिणाम) है, न कि वह सिद्धांत जिस पर वह काम करता है।



#21. विद्युत मोटर में धारावाही चालक पर बल की दिशा निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित में से किस नियम का उपयोग किया जाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत मोटर (Electric Motor) का मुख्य कार्य विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलना है। इसमें चुंबकीय क्षेत्र के बीच रखे धारावाही चालक पर बल लगता है।
  • नियम का प्रयोग: विद्युत मोटर में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा (Direction of Force) निर्धारित करने के लिए **फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम (Fleming’s Left-Hand Rule)** का उपयोग किया जाता है।
  • नियम की स्थिति: इसके अनुसार, यदि बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाया जाए, तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा धारा की दिशा बताएगी, जबकि अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को इंगित करेगा।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 16 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) एम्पीयर का नियम: यह चुंबकीय क्षेत्र और विद्युत धारा के परिमाण से संबंधित है, बल की दिशा ज्ञात करने के लिए इसका विशिष्ट रूप से मोटर में उपयोग नहीं होता।
  • विकल्प (B) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ का नियम: यह सीधे धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • विकल्प (C) फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम: यह विद्युत जनित्र (Generator) में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग होता है, मोटर के लिए नहीं।

#22. धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निम्नलिखित में से किसके द्वारा निर्धारित होती है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी धारावाही वृत्ताकार लूप (Circular Loop) के केंद्र पर उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को ज्ञात करने के लिए **दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-Hand Thumb Rule)** का उपयोग किया जाता है।
  • नियम का अनुप्रयोग: इसके अनुसार, यदि हम अपने दाहिने हाथ की उंगलियों को धारा के प्रवाह की दिशा में मोड़ें, तो सीधा अंगूठा केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (Magnetic Field Direction) को इंगित करता है।
  • वैकल्पिक नियम: इसे मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम (Maxwell’s Corkscrew Rule) या दक्षिण-हस्त हथेली का नियम भी कहा जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम: यह नियम विद्युत जनित्र (Generator) में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए होता है।
  • विकल्प (B) लेंज़ के नियम: यह प्रेरित विद्युत वाहक बल और प्रेरित धारा की दिशा का विरोध करने की प्रकृति को बताता है।
  • विकल्प (D) फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम: यह विद्युत मोटर में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।

#23. विद्युत धारावाही तार चुंबक के ध्रुवों के बीच रखा जाता है। इस पर अधिकतम बल तब लगता है जब यह __________।
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत होता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब किसी विद्युत धारावाही तार को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर लगने वाले चुंबकीय बल का सूत्र $F = I L B \sin\theta$ होता है, जहाँ $\theta$ तार (धारा की दिशा) और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है।
  • अधिकतम बल की स्थिति: चूँकि $\sin\theta$ का अधिकतम मान $1$ होता है, जो कि $\theta = 90^\circ$ (यानी लंबवत होने पर) पर प्राप्त होता है।
  • प्रभाव: जब तार चुंबकीय क्षेत्र के ठीक लंबवत स्थित होता है, तो उस पर कार्य करने वाला चुंबकीय बल सर्वाधिक (अधिकतम) होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09 Mar, 2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) चुंबकीय क्षेत्र के बाहर होता है: बाहर होने पर चुंबकीय बल शून्य हो जाएगा।
  • विकल्प (C) चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर होता है: समानांतर होने पर कोण $\theta = 0^\circ$ होता है, जिससे $\sin 0^\circ = 0$ होने के कारण बल का मान न्यूनतम (शून्य) हो जाता है।
  • विकल्प (D) चुंबकीय क्षेत्र से 45° के कोण पर होता है: इस कोण पर बल का मान अधिकतम नहीं बल्कि आंशिक होता है।

#24. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (D) चुंबक के बाहर, क्षेत्र रेखाएँ उत्तर से दक्षिण की ओर गमन करती हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines) चुंबक के चारों ओर लगातार बंद वक्र (Closed Loops) बनाती हैं।
  • चुंबक के बाहर दिशा: चुंबक के बाहरी हिस्से में चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा हमेशा उत्तरी ध्रुव (North Pole) से शुरू होकर दक्षिणी ध्रुव (South Pole) की ओर होती है।
  • चुंबक के भीतर दिशा: इसके विपरीत, चुंबक के अंदर इन रेखाओं की दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है ताकि एक बंद वक्र पूरा हो सके।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 01 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) चुंबक के अंदर, क्षेत्र रेखाएँ उत्तर से दक्षिण की ओर गमन करती हैं: गलत, चुंबक के अंदर इनकी दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है।
  • विकल्प (B) जहाँ रेखाएँ पास-पास होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल होता है: गलत, जहाँ क्षेत्र रेखाएँ जितनी अधिक पास या सघन होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र उतना ही अधिक प्रबल (Strong) होता है।
  • विकल्प (C) क्षेत्र रेखाएँ ध्रुवों पर प्रतिच्छेद करती हैं: गलत, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं।

#25. लेंज़ के नियम के अनुसार, प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि –
(RRB NTPC UG CBT-I : 08 Sept, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (B) यह चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): लेंज़ का नियम (Lenz’s Law) विद्युत चुंबकीय प्रेरण के दौरान उत्पन्न होने वाली प्रेरित धारा (Induced Current) की दिशा को निर्धारित करता है।
  • नियम का मुख्य कथन: इस नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल या प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण या परिवर्तन का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न हुई है (यानी चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध)।
  • ऊर्जा संरक्षण का नियम: लेंज़ का यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत (Law of Conservation of Energy) का पालन करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 08 Sept, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) यह चुंबकीय फ्लक्स को बदलने में मदद करता है: गलत, यह परिवर्तन में मदद नहीं करता बल्कि उसका विरोध करता है।
  • विकल्प (C) यह लागू चुंबकीय क्षेत्र को मजबूत करता है: गलत, यह क्षेत्र को मजबूत या कमजोर करने के बजाय केवल फ्लक्स परिवर्तन के विरोध की दिशा तय करता है।
  • विकल्प (D) यह चुंबकीय क्षेत्र को पूरी तरह से निष्क्रय कर देता है: गलत, यह चुंबकीय क्षेत्र को निष्क्रय नहीं करता, केवल परिवर्तन का विरोध करता है।



#26. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम में, मध्यमा उंगली किस भौतिक राशि को निरूपित करती है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (B) विद्युत धारा की दिशा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Fleming’s Left-Hand Rule) विद्युत मोटरों में चुंबकीय क्षेत्र के बीच रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा को ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • उंगलियों की स्थिति: यदि हम अपने बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी (Forefinger) और मध्यमा (Middle finger) को एक-दूसरे के परस्पर लंबवत फैलाएं:
    • तर्जनी (Forefinger): चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (Magnetic Field) को दर्शाती है।
    • मध्यमा (Middle finger): चालक में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा की दिशा (Electric Current) को निरूपित करती है।
    • अंगूठा (Thumb): चालक पर लगने वाले बल या गति की दिशा (Force / Motion) को इंगित करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा: यह तर्जनी (Forefinger) द्वारा दर्शाई जाती है, मध्यमा द्वारा नहीं।
  • विकल्प (C) बल की दिशा / (D) चालक की गति की दिशा: यह हाथ के अंगूठे (Thumb) द्वारा इंगित की जाती है।

#27. विद्युत मोटर में चुंबकीय क्षेत्र में रखे चालक पर बल किस दिशा में कार्य करता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (B) धारा और चुंबकीय क्षेत्र दोनों के लंबवत

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत मोटर (Electric Motor) में जब किसी धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक चुंबकीय बल कार्य करता है।
  • फ्लेमिंग का वामहस्त नियम: इस नियम के अनुसार, यदि बाएं हाथ की तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को दर्शाती है, तो अंगूठा इन दोनों के परस्पर लंबवत दिशा में लगने वाले बल को इंगित करता है।
  • निष्कर्ष: अतः चालक पर कार्य करने वाला चुंबकीय बल हमेशा विद्युत धारा की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा—दोनों के लंबवत (Perpendicular) होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 18 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) धारा की दिशा में: गलत, बल कभी भी धारा की दिशा के अनुदिश नहीं होता, बल्कि लंबवत होता है।
  • विकल्प (C) चुंबकीय क्षेत्र के विपरीत: गलत, यह क्षेत्र के विपरीत नहीं बल्कि उसके लंबवत कार्य करता है।
  • विकल्प (D) चुंबकीय क्षेत्र के अनुदिश: गलत, अनुदिश होने पर बल का मान शून्य हो जाता है।

#28. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक धारावाही वृत्तिय लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सामर्थ्य बढ़ाएगा?
(Not found 12/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) लूप के फेरों की संख्या में वृद्धि

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी धारावाही वृत्ताकार लूप के केंद्र पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का मान सूत्र B = (mu_0 * N * I) / (2r) के अनुसार होता है, जहाँ N फेरों की संख्या, I प्रवाहित धारा और r लूप की त्रिज्या है।
  • समानुपाती संबंध: चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य फेरों की संख्या (N) के सीधे अनुक्रमानुपाती होती है, यानी लूप के फेरों की संख्या बढ़ाने पर केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सामर्थ्य बढ़ जाता है।
  • प्रभाव: प्रत्येक अतिरिक्त फेरे से उत्पन्न होने वाला चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के प्रभाव को जोड़ देता है, जिससे कुल चुंबकीय क्षेत्र अधिक मजबूत हो जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चुंबकीय प्रभाव के अंतर्गत बहुतायत से पूछा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) लूप की त्रिज्या में वृद्धि: गलत, चुंबकीय क्षेत्र त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अतः त्रिज्या बढ़ाने से चुंबकीय क्षेत्र का सामर्थ्य कम हो जाता है।
  • विकल्प (C) लूप में प्रवाहित धारा में कमी: गलत, धारा घटाने से चुंबकीय क्षेत्र का सामर्थ्य कम हो जाता है, जबकि बढ़ाने पर बढ़ता है।
  • विकल्प (D) लूप के तल का क्षैतिज से ऊर्ध्वाधर में परिवर्तन: गलत, लूप के तल के ओरिएंटेशन को बदलने से केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण पर कोई असर नहीं पड़ता।

#29. दक्षिण हस्त अंगूठे के नियम के अनुसार, चालक के चारों ओर मुड़ी हुई अंगुलियां किस प्राचल को दर्शाती हैं?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (B) चुंबकीय क्षेत्र

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): दक्षिण हस्त अंगूठे का नियम (Right-Hand Thumb Rule) किसी सीधे धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को निर्धारित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • नियम की बनावट: इसके अनुसार, यदि आप अपने दाहिने हाथ से धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़ते हैं कि आपका अंगूठा विद्युत धारा की दिशा (Direction of Current) को इंगित करे, तो आपके हाथ की मुड़ी हुई अंगुलियां चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की रेखाओं की दिशा को दर्शाती हैं।
  • महत्वपूर्ण बिंदु: यहाँ अंगूठा धारा (Current) को और मुड़ी हुई अंगुलियां चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field Lines) को निरूपित करती हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) सुई का विक्षेपण: गलत, यह दिक्सूचक की सुई के विक्षेप से सीधे संबंधित नहीं है।
  • विकल्प (C) बल: गलत, बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम द्वारा ज्ञात की जाती है।
  • विकल्प (D) धारा: गलत, धारा को इस नियम में सीधा अंगूठा (Thumb) दर्शाता है, मुड़ी हुई अंगुलियां नहीं।

#30. फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम में अंगूठा किस दिशा को दर्शाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) गति की दिशा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Fleming’s Right-Hand Rule) विद्युत जनित्र (Electric Generator) में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • नियम की संरचना: यदि हम अपने दाहिने हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को इस प्रकार फैलाएं कि वे एक-दूसरे के परस्पर लंबवत हों:
    • तर्जनी (Forefinger): चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है।
    • मध्यमा (Middle finger): चालक में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा को दर्शाती है।
    • अंगूठा (Thumb): चालक की गति की दिशा (Direction of Motion / Force) को इंगित करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 18 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा: यह हाथ की तर्जनी (Forefinger) द्वारा दर्शाई जाती है, अंगूठे द्वारा नहीं।
  • विकल्प (B) प्रेरित धारा की दिशा: यह मध्यमा (Middle finger) द्वारा दर्शाई जाती है।
  • विकल्प (D) वोल्टता की दिशा: यह नियम सीधे वोल्टता की दिशा नहीं बल्कि प्रेरित धारा और गति की दिशा को आपस में संबंधित करता है।



#31. किसी परनालिका के भीतर समानांतर सीधी चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की उपस्थिति क्या दर्शाती है?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (D) परनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): परनालिका (Solenoid) एक बेलनाकार कुंडली होती है जिसमें इन्सुलेटेड तार के कई फेरे पास-पास लपेटे जाते हैं। जब इसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह एक दंड चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
  • एकसमान चुंबकीय क्षेत्र: परनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे के बिल्कुल समांतर और सीधी रेखाओं के रूप में होती हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि परनालिका के भीतर प्रत्येक बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का मान और दिशा एक समान (Uniform) होती है।
  • अनुप्रयोग: इसका उपयोग किसी निश्चित क्षेत्र में एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04 Feb, 2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) परनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र शून्य है: गलत, भीतर चुंबकीय क्षेत्र शून्य नहीं बल्कि प्रबल और एकसमान होता है।
  • विकल्प (B) चुंबकीय क्षेत्र असमान है और विभिन्न बिंदुओं पर बदलता रहता है: गलत, समांतर रेखाएँ असमानता को नहीं बल्कि एकसमानता को दर्शाती हैं।
  • विकल्प (C) परनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र अनंत है: गलत, चुंबकीय क्षेत्र का मान एक निश्चित और सीमित प्रबलता का होता है, अनंत नहीं।

#32. निम्नलिखित में से कौन-सा नियम, धारावाही वृत्ताकार लूप द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को निर्धारित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-Hand Thumb rule)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी धारावाही वृत्ताकार लूप (Circular Loop) या सीधे चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को निर्धारित करने के लिए **दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-Hand Thumb Rule)** का उपयोग किया जाता है।
  • नियम का अनुप्रयोग: इसके अनुसार, यदि आप अपने दाहिने हाथ की उंगलियों को वृत्ताकार लूप में धारा के प्रवाह की दिशा में मोड़ते हैं, तो सीधा अंगूठा केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (Direction of Magnetic Field) को इंगित करता है।
  • महत्वपूर्ण बिंदु: यह नियम मैक्सवेल के कॉर्कस्क्रू नियम पर आधारित है और चुंबकत्व अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 24 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम: यह नियम विद्युत मोटर में चुंबकीय क्षेत्र के बीच रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए होता है।
  • विकल्प (B) वाम-हस्त अंगुष्ठ नियम: यह पाठ्यक्रम में चुंबकीय क्षेत्र दिशा के मापन हेतु मानक प्राथमिक नियम के रूप में प्रयुक्त नहीं होता।
  • विकल्प (D) फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम: यह विद्युत जनित्र (Generator) में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।

#33. किसी आरेख में चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को एक-दूसरे के निकट खींचे जाने का क्या तात्पर्य है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) उस क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र प्रबल है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines) किसी चुंबक के चारों ओर के क्षेत्र में चुंबकीय बल की ताकत और दिशा को दर्शाने के लिए खींची जाती हैं।
  • सघनता और प्रबलता: जहाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे के बहुत पास (सघन) होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण सबसे अधिक होता है, अर्थात **चुंबकीय क्षेत्र प्रबल (Strong)** होता है (जैसे कि ध्रुवों के पास)।
  • विरलता: इसके विपरीत, जहाँ क्षेत्र रेखाएँ दूर-दूर होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल (Weak) होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10 Feb, 2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) यहाँ कोई चुंबकीय क्षेत्र मौजूद नहीं है: गलत, रेखाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि वहाँ चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है।
  • विकल्प (C) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बदल गई है: गलत, पास-पास होना क्षेत्र की प्रबलता को बताता है, दिशा परिवर्तन को नहीं।
  • विकल्प (D) उस क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र दुर्बल है: गलत, रेखाओं का पास होना दुर्बल नहीं बल्कि प्रबल क्षेत्र को प्रदर्शित करता है।

#34. प्रेरित धारा का दक्षिण-हस्त नियम किसने दिया था?
(RRB JE CBT-I 2024 : 09 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) फ्लेमिंग (Fleming)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): प्रेरित धारा का दक्षिण-हस्त नियम (Fleming’s Right-Hand Rule) प्रसिद्ध वैज्ञानिक **जॉन एम्ब्रोस फ्लेमिंग (John Ambrose Fleming)** द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
  • नियम का उद्देश्य: इस नियम का मुख्य उपयोग विद्युत जनित्र (Electric Generator) में चुंबकीय क्षेत्र के भीतर गतिमान चालक में उत्पन्न होने वाली प्रेरित धारा (Induced Current) की दिशा को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
  • नियम की बनावट: इसके अनुसार, दाहिने हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाने पर तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को, अंगूठा चालक की गति को और मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा को दर्शाती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 09 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) फैराडे (Faraday): इन्होंने विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के मौलिक नियमों की खोज की थी, लेकिन विशिष्ट “दक्षिण-हस्त नियम” फ्लेमिंग द्वारा दिया गया था।
  • विकल्प (C) ओर्स्टैंड (Oersted): इन्होंने धारा के चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect of Current) की खोज की थी।
  • विकल्प (D) एम्पीयर (Ampere): इन्होंने विद्युत चुंबकत्व के गणितीय संबंधों और चालकों के बीच लगने वाले बलों का अध्ययन किया था।

#35. चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) किसी धारावाही चालक पर लगने वाला बल चुंबकीय क्षेत्र में चालक की लंबाई के समानुपाती होता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब किसी धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर लगने वाले चुंबकीय बल का सूत्र $F = I L B \sin\theta$ होता है, जहाँ $I$ धारा, $L$ चालक की लंबाई, $B$ चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता और $\theta$ कोण है।
  • समानुपाती संबंध: इस सूत्र के अनुसार, चुंबकीय बल चालक में प्रवाहित धारा ($I$), चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता ($B$) और चालक की लंबाई ($L$) तीनों के सीधे समानुपाती (Directly Proportional) होता है।
  • निष्कर्ष: अतः चालक की लंबाई बढ़ाने पर उस पर लगने वाला चुंबकीय बल भी बढ़ जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 11 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) यह बल चालक में प्रवाहित धारा से स्वतंत्र होता है: गलत, बल सीधे धारा के समानुपाती होता है, स्वतंत्र नहीं।
  • विकल्प (C) बल चालक के प्रतिरोध पर निर्भर करता है: गलत, बल मुख्य रूप से धारा, लंबाई और क्षेत्र पर निर्भर करता है, प्रत्यक्ष तौर पर प्रतिरोध पर नहीं।
  • विकल्प (D) किसी चालक पर बल चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के अनुदिश होता है: गलत, बल हमेशा चुंबकीय क्षेत्र और धारा दोनों के लंबवत होता है, अनुदिश नहीं।



#36. जटिल आकृतियों वाली वस्तुओं के निर्मलन के लिए अल्ट्रासाउंड को क्यों वरीयता दी जाती है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) इनकी उच्च आवृत्ति से धूल के कण विस्थापित हो जाते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): अल्ट्रासाउंड (पराश्रव्य तरंगें) वे ध्वनि तरंगें हैं जिनकी आवृत्ति $20,000 \text{ Hz}$ से अधिक होती है। इनका उपयोग उद्योगों में जटिल आकृतियों, सर्पिल नलियों, और नाज़ुक भागों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक घटकों) की सफाई या निर्मलन (Cleaning) के लिए किया जाता है।
  • सफाई की प्रक्रिया: जिन वस्तुओं को साफ करना होता है उन्हें सफाई वाले विलयन में रखकर उनमें अल्ट्रासाउंड तरंगें प्रवाहित की जाती हैं।
  • उच्च आवृत्ति का प्रभाव: उच्च आवृत्ति और अधिक ऊर्जा के कारण इन तरंगों से उत्पन्न कंपकपी और कैविटेशन (गुहाओं का बनना-फूटना) प्रभाव से धूल, चिकनाई और गंदगी के कण अलग होकर नीचे गिर जाते हैं, जिससे वस्तुएँ पूरी तरह साफ हो जाती हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 12 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) इनसे चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न होता है: गलत, अल्ट्रासाउंड ध्वनि तरंगें हैं, इनसे कोई प्रत्यक्ष चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न नहीं होता।
  • विकल्प (B) द्रवों में इनकी चाल अत्यधिक तीव्र होती है: चाल अधिक होना सफाई का मुख्य कारण नहीं है, बल्कि उच्च आवृत्ति और ऊर्जा से कणों का विस्थापन होना मुख्य कारण है।
  • विकल्प (D) इससे विलयन के तापमान में वृद्धि हो जाती है: तापमान में आंशिक परिवर्तन हो सकता है, लेकिन यह जटिल आकृतियों की सफाई का वैज्ञानिक और मूल उद्देश्य नहीं है।

#37. एक सोलेनॉइड चुंबक की तरह व्यवहार करता है क्योंकि ………….|
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) इसके फेरों में प्रवाहित धारा एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): परनालिका (Solenoid) एक बेलनाकार कुंडली होती है जिसमें अछूते तांबे के तार के कई फेरे पास-पास लपेटे जाते हैं।
  • चुंबकीय व्यवहार का कारण: जब इस सोलेनॉइड के फेरों से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो प्रत्येक फेरे के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इन सभी फेरों के चुंबकीय क्षेत्र आपस में मिलकर एक मजबूत और संयुक्त चुंबकीय क्षेत्र बनाते हैं, जिससे यह एक दण्ड चुंबक (Bar Magnet) की तरह व्यवहार करने लगता है।
  • ध्रुव निर्माण: इसके एक सिरे पर उत्तर ध्रुव (North Pole) और दूसरे सिरे पर दक्षिण ध्रुव (South Pole) बन जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) इसका प्रतिरोध उच्च होता है: गलत, प्रतिरोध का चुंबकत्व उत्पन्न करने से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
  • विकल्प (B) यह बिजली संग्रहीत करता है: गलत, सोलेनॉइड विद्युत धारा का संचय (स्टोर) नहीं करता, बल्कि यह कैपेसिटर या बैटरी की तरह काम नहीं करता।
  • विकल्प (D) इसमें अंदर लोहा होता है: गलत, सामान्य वायु-क्रोड (Air-core) सोलेनॉइड के अंदर अनिवार्य रूप से लोहा नहीं होता (हालांकि लोहे की कोर डालने से चुंबकीय क्षेत्र और मजबूत हो जाता है, लेकिन इसके चुंबक की तरह व्यवहार करने का मूल कारण प्रवाहित धारा है)।

#38. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) किसी परनालिका में प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या बढ़ाने पर, परनालिका में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): परनालिका (Solenoid) के भीतर उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र $B = \mu_0 n I$ होता है, जहाँ $n$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या (Turns per unit length) और $I$ प्रवाहित धारा है।
  • समानुपाती संबंध: इस सूत्र से स्पष्ट है कि चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता ($B$) फेरों की संख्या ($n$) और प्रवाहित धारा ($I$) दोनों के सीधे समानुपाती होती है।
  • निष्कर्ष: यदि परनालिका में प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो उसके भीतर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता भी बढ़ जाती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 29 Dec, 2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) किसी परनालिका के अन्दर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं वृत्ताकार होती हैं: गलत, परनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ परस्पर समांतर और सीधी होती हैं, वृत्ताकार नहीं।
  • विकल्प (C) विद्युत धारा प्रवाहित करने वाली परनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र विद्युत धारा की तीव्रता पर निर्भर नहीं करता है: गलत, चुंबकीय क्षेत्र सीधे विद्युत धारा की तीव्रता पर निर्भर करता है ($B \propto I$)।
  • विकल्प (D) तार का प्रतिरोध बढ़ाने पर परनालिका में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है: गलत, प्रतिरोध बढ़ने से धारा का मान कम हो जाएगा, जिससे चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ नहीं बल्कि घट जाएगी।

#39. धारावाही परनालिका द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र पर विचार करें। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर (असत्य कथन): (C) परनालिका के बाहर लेकिन पास में चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण अत्यधिक बड़ा होता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): परनालिका (Solenoid) के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का पैटर्न एक दंड चुंबक (Bar Magnet) जैसा ही होता है।
  • चुंबकीय क्षेत्र की स्थिति: परनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र बहुत प्रबल और एकसमान (Uniform) होता है, लेकिन परनालिका के बाहर इसके आसपास के क्षेत्रों में चुंबकीय क्षेत्र का मान काफी कम (दुर्बल) होता है, अत्यधिक बड़ा नहीं। अतः विकल्प (C) में दिया गया कथन वैज्ञानिक रूप से गलत है और यही हमारा सही उत्तर है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सत्य कथन हैं, अतः उत्तर नहीं हैं):
  • विकल्प (A) परनालिका एक तरह से दंड चुंबक के समान कार्य करती है: यह कथन बिल्कुल सत्य है, क्योंकि इसका एक सिरा उत्तरी ध्रुव और दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव की तरह व्यवहार करता है।
  • विकल्प (B) लंबी परनालिका के केंद्र के पास चुंबकीय क्षेत्र लगभग स्थिर होता है: यह कथन भी सत्य है, क्योंकि भीतर क्षेत्र रेखाएँ समांतर होती हैं जिससे क्षेत्र एकसमान/स्थिर रहता है।
  • विकल्प (D) यदि हम घुमावों की संख्या बढ़ाते हैं तो चुंबकीय क्षेत्र की सामर्थ्य बढ़ जाती है: यह कथन भी सत्य है, क्योंकि $B \propto n$ होता है।

#40. किसी भी दिए गए बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा ज्ञात करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जा सकता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) चुंबकीय कम्पास

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): चुंबकीय कम्पास (Magnetic Compass) एक ऐसा यंत्र है जिसमें एक छोटी चुंबकीय सुई होती है जो स्वतंत्र रूप से घूम सकती है।
  • कार्यप्रणाली (Working): जब इस कम्पास को किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो इसकी सुई का उत्तर ध्रुव उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र रेखा की दिशा में संरेखित (Align) हो जाता है। इस प्रकार, इसका उपयोग किसी भी दिए गए बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) परनालिका: यह चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाली एक कुंडली है, दिशा मापने वाला उपकरण नहीं।
  • विकल्प (B) जनित्र: यह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने की एक युक्ति है।
  • विकल्प (D) विद्युत मोटर: यह विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।



#41. चुंबकीय क्षेत्र में किसी चालक पर लगने वाले बल का परिमाण तब बढ़ता है जब __________|
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (B) धारा बढ़ती है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब किसी धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर लगने वाले चुंबकीय बल का सूत्र $F = I L B \sin\theta$ होता है, जहाँ $I$ धारा, $L$ चालक की लंबाई और $B$ चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता है।
  • समानुपाती संबंध: इस सूत्र के अनुसार, चुंबकीय बल का परिमाण चालक में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा ($I$) के सीधे समानुपाती होता है।
  • निष्कर्ष: यदि चालक में प्रवाहित धारा का मान बढ़ाया जाता है, तो उस पर कार्य करने वाले चुंबकीय बल का परिमाण भी बढ़ जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09 Mar, 2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) चुंबकीय क्षेत्र घटता है: गलत, चुंबकीय क्षेत्र घटने से बल का मान घट जाता है, बढ़ता नहीं।
  • विकल्प (C) लंबाई घटती है: गलत, लंबाई घटने से बल कम हो जाता है (चूँकि बल लंबाई के समानुपाती होता है)।
  • विकल्प (D) धारा घटती है: गलत, धारा घटने से चुंबकीय बल कम हो जाता है।

#42. धारा को नियत रखते हुए परनालिका में फेरों की संख्या बढ़ाने पर __________|
(Not found 11/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (C) चुंबकीय क्षेत्र में वृद्धि होगी

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी परनालिका (Solenoid) के भीतर उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र $B = \mu_0 n I$ होता है, जहाँ $n$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या और $I$ प्रवाहित धारा है।
  • समानुपाती संबंध: इस सूत्र के अनुसार, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता ($B$) फेरों की संख्या ($n$) के सीधे समानुपाती (Directly Proportional) होती है।
  • निष्कर्ष: यदि विद्युत धारा ($I$) को नियत (Constant) रखा जाए और परनालिका में फेरों की संख्या बढ़ाई जाए, तो अधिक फेरों के कारण चुंबकीय प्रभाव जुड़ जाते हैं, जिससे चुंबकीय क्षेत्र में वृद्धि होती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न रेलवे (RRB) की परीक्षाओं में चुंबकत्व और परनालिका के सिद्धांतों पर आधारित एक महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) क्षेत्र की दिशा उत्क्रमित हो जाएगी: गलत, फेरों की संख्या बढ़ाने से धारा के प्रवाह की दिशा नहीं बदलती, इसलिए चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी वही रहती है, उलटती नहीं है।
  • विकल्प (B) क्षेत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा: गलत, फेरों की संख्या का सीधा प्रभाव चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता पर पड़ता है।
  • विकल्प (D) चुंबकीय क्षेत्र में कमी होगी: गलत, फेरे बढ़ाने से क्षेत्र घटता नहीं बल्कि बढ़ता है।

#43. उत्तक घनत्व में परिवर्तन वाले स्थान से गुजरने वाली पराश्रव्य तरंगे ( Ultrasonic waves) वापस परावर्तित होती हैं, जिन्हें विद्युत् सिम्गलों में परिवर्तित करके अंगों की छवियाँ प्राप्त की जाती हैं। इस तकनीक को क्या कहा जाता है?
(RRB JE ME 30 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (A) अल्ट्रासोनोग्राफी

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography / Ultrasound Scanning) एक चिकित्सा इमेजिंग तकनीक है जिसमें पराश्रव्य (Ultrasonic) तरंगों का उपयोग करके शरीर के आंतरिक अंगों की छवियाँ प्राप्त की जाती हैं।
  • कार्यप्रणाली (Working): जब उच्च आवृत्ति की ये ध्वनि तरंगें शरीर के ऊतकों (Tissues) से गुजरती हैं और अलग-अलग घनत्व वाले अंगों की सीमाओं से टकराकर वापस परावर्तित होती हैं, तो ट्रांसड्यूसर उन्हें विद्युत सिग्नलों में बदल देता है। कंप्यूटर इन सिग्नलों का विश्लेषण करके अंगों की स्पष्ट इमेज या सोनोग्राम तैयार करता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ME : 30 Aug, 2019 Shift 1 CBT 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) चुंबकीय अनुनाद (MRI): यह प्रबल चुंबकीय क्षेत्रों और रेडियो तरंगों पर आधारित इमेजिंग तकनीक है, पराश्रव्य तरंगों पर नहीं।
  • विकल्प (C) मैमोग्राफी (Mammography): यह मुख्य रूप से स्तनों (Breasts) की जाँच के लिए एक्स-रे (X-rays) तकनीक का उपयोग करती है।
  • विकल्प (D) कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT Scan): यह विभिन्न कोणों से ली गई एक्स-रे छवियों की एक श्रृंखला का उपयोग करके शरीर के अंगों के क्रॉस-sectional व्यू बनाती है।

#44. निम्न में से कौन सा सही है? ध्वनि तरंगें, __________ तरंगें हैं।
(RRB NTPC Tier I : 2 Apr 2016 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (B) अनुदैर्ध्य

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves) होती हैं, जिन्हें संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है।
  • अनुदैर्ध्य प्रकृति (Longitudinal Nature): ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) हैं क्योंकि इनमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर (Parallel) आगे-पीछे कंपन करते हैं, जिससे संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) बनते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 2 Apr 2016 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) दाब: गलत, ध्वनि तरंगों के दौरान दाब परिवर्तन होता है, लेकिन तरंगों का मूल भौतिक वर्गीकरण ‘अनुदैर्ध्य’ के रूप में किया जाता है।
  • विकल्प (C) विद्युत्-चुंबकीय: गलत, विद्युत-चुंबकीय तरंगों (जैसे प्रकाश या एक्स-रे) को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, जबकि ध्वनि को माध्यम चाहिए।
  • विकल्प (D) चुंबकीय: गलत, ध्वनि तरंगों का चुंबकत्व से कोई सीधा संबंध नहीं है।

#45. एक लंबे चालक तार में धारा प्रवाहित हो रही है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर (असत्य कथन): (B) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए हम फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम का उपयोग कर सकते हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): सीधे धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न होने वाले चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए **दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (Right-Hand Thumb Rule)** या मैक्सवेल के नियम का उपयोग किया जाता है, फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम का नहीं। अतः विकल्प (B) में दिया गया कथन असत्य है और यही हमारा सही उत्तर है।
  • फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम: इस नियम का उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले **बल की दिशा** ज्ञात करने के लिए किया जाता है, न कि केवल चुंबकीय क्षेत्र की दिशा मापने के लिए।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सत्य कथन हैं, अतः उत्तर नहीं हैं):
  • विकल्प (A) यदि हम धारा की दिशा उलट देते हैं, तो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी उलट जाएगी: यह कथन बिल्कुल सत्य है, क्योंकि दक्षिण-हस्त अंगूठे के नियम के अनुसार धारा की दिशा बदलने पर क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी बदल जाती है।
  • विकल्प (C) तार से दूर जाने पर चुंबकीय क्षेत्र कम होता जाता है: यह कथन भी सत्य है, क्योंकि सीधे चालक के पास क्षेत्र प्रबल और दूर जाने पर दुर्बल होता है।
  • विकल्प (D) यदि हम धारा बढ़ाते हैं, तो चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है: यह कथन भी सत्य है, क्योंकि चुंबकीय क्षेत्र धारा के समानुपाती होता है।



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