ऊष्मा Railway PYQ

 

Results

#1. मानव शरीर का औसत तापमान कितना होता है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) 37°C

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): मानव शरीर का सामान्य और स्वस्थ आंतरिक तापमान लगभग 37°C (डिग्री सेल्सियस) या 98.6°F (फ़ारेनहाइट) होता है। शरीर के तापमान को नियंत्रित करने का मुख्य कार्य मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) द्वारा किया जाता है।
  • अन्य पैमानों पर मान: सेल्सियस पैमाने पर 37°C, फ़ारेनहाइट में 98.6°F और केल्विन पैमाने पर यह लगभग 310 K होता है।
  • शारीरिक स्थिति: जब शरीर में कोई संक्रमण या बीमारी होती है (जैसे बुखार), तब इम्यून सिस्टम के सक्रिय होने से यह तापमान सामान्य से बढ़ जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) 40°C: गलत, यह अत्यधिक तेज बुखार (High Fever) की स्थिति का तापमान है, औसत या सामान्य शरीर का तापमान नहीं।
  • विकल्प (B) 32°C: गलत, यह हाइपोथर्मिया (Hypothermia) की गंभीर स्थिति को दर्शाता है, जिसमें शरीर का तापमान खतरनाक रूप से बहुत कम हो जाता है।
  • विकल्प (C) 42°C: गलत, यह मानव शरीर के लिए एक अत्यंत घातक और जानलेवा उच्च तापमान स्तर है।

#2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही ढंग से बताता है कि हवादार दिन में कपड़े तेजी से क्यों सूखते हैं?
(RRB JE CE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (B) वायु कपड़ों के आस-पास से जल वाष्प को हटा देती है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): वाष्पीकरण (Evaporation) एक सतही प्रक्रिया है जो तापमान, वायु की गति, आर्द्रता (Humidity) और सतह क्षेत्र पर निर्भर करती है।
  • हवादार दिन का प्रभाव: जब तेज हवा चलती है, तो वह गीले कपड़ों के ठीक चारों ओर जमा जल वाष्प (Water Vapor) के अणुओं को अपने साथ बहाकर दूर ले जाती है। इससे कपड़ों के आसपास नमी कम हो जाती है और वाष्पीकरण की दर काफी तेज हो जाती है, जिससे कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।
  • अन्य कारक: यदि तापमान अधिक हो और कपड़ों को फैलाकर (बड़ा सतह क्षेत्र देकर) सुखाया जाए, तो सूखने की प्रक्रिया और भी तीव्र हो जाती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) वायु पानी के अणुओं का तापमान कम कर देती है: गलत, हवा का मुख्य काम पानी के अणुओं के तापमान को कम करना नहीं, बल्कि वाष्पीकरण को बढ़ावा देना है।
  • विकल्प (C) वायु कपड़ों के सतह क्षेत्र को कम कर देती है: गलत, हवा का कपड़ों के भौतिक आकार या सतह क्षेत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • विकल्प (D) वायु कपड़ों के आस-पास की आर्द्रता बढ़ा देती है: गलत, हवा कपड़ों के आस-पास की आर्द्रता को बढ़ाती नहीं बल्कि उसे कम करती है (नमी को हटाती है), जिससे वाष्पीकरण तेज होता है।

#3. लगातार लंबे समय तक उपयोग किए जाने पर एक विद्युत पंखा गर्म हो जाता है। ऐसा किस कारण से होता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec, 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (A) पंखे से होकर प्रवाहित होने वाली धारा के तापन प्रभाव के कारण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब किसी चालक (जैसे पंखे के अंदर की कॉइल या वाइंडिंग) से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके प्रतिरोध (Resistance) के कारण विद्युत ऊर्जा का कुछ हिस्सा ऊष्मा (Heat) में परिवर्तित हो जाता है। इसे विद्युत धारा का तापन प्रभाव (Heating Effect of Electric Current / Joule’s Heating) कहते हैं।
  • लंबे समय तक उपयोग: जब पंखा लगातार लंबे समय तक चलता रहता है, तो लगातार धारा प्रवाहित होने के कारण कॉइल में ऊष्मा जमा (accumulate) होती जाती है, जिससे पंखा गर्म हो जाता है।
  • ऊर्जा रूपांतरण: यहाँ विद्युत ऊर्जा मुख्य रूप से गतिज ऊर्जा (यांत्रिक कार्य) और आंशिक रूप से ऊष्मीय ऊर्जा में बदलती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 18 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) पंखे के धीमी घूमने के कारण: गलत, पंखे के गर्म होने का संबंध उसकी गति से नहीं बल्कि उसके अंदर प्रवाहित हो रही धारा और वाइंडिंग के प्रतिरोध से है।
  • विकल्प (C) गर्मीयों के दौरान उच्च तापमान के कारण: गलत, हालांकि बाहरी गर्मी थोड़ा प्रभाव डाल सकती है, लेकिन पंखे के गर्म होने का मूल भौतिक कारण आंतरिक कॉइल में धारा का तापन प्रभाव ही है, चाहे मौसम कोई भी हो।
  • विकल्प (D) पंखे के तेज़ घूमने के कारण: गलत, पंखे का तेज घूमना उसकी मोटर द्वारा उत्पन्न यांत्रिक गति है, जो सीधे तौर पर इस तापन प्रभाव का मुख्य कारण नहीं है।

#4. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक वाष्पीकरण की दर को कम करता है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) आर्द्रता में वृद्धि

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): वाष्पीकरण (Evaporation) एक सतही प्रक्रिया है जिसमें द्रव, वाष्प में बदलता है। इसकी दर कई कारकों पर निर्भर करती है।
  • आर्द्रता का प्रभाव: आर्द्रता (Humidity) हवा में मौजूद जल वाष्प की मात्रा है। जब हवा में पहले से ही नमी या आर्द्रता अधिक होती है, तो जल वाष्प को ग्रहण करने की हवा की क्षमता कम हो जाती है। परिणामस्वरुप, वाष्पीकरण की दर धीमी या कम हो जाती है।
  • अन्य कारक: तापमान में वृद्धि, पृष्ठीय क्षेत्रफल में वृद्धि और वायु की चाल में वृद्धि—ये सभी वाष्पीकरण की दर को बढ़ाते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) वायु की चाल में वृद्धि: गलत, तेज हवा चलने से कपड़ों के पास की नमी हट जाती है, जिससे वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है (कम नहीं होती)।
  • विकल्प (C) पृष्ठीय क्षेत्रफल में वृद्धि: गलत, सतह क्षेत्र बढ़ाने से (जैसे कपड़े फैलाकर सुखाना) वाष्पीकरण के लिए अधिक स्थान मिलता है, जिससे दर बढ़ती है।
  • विकल्प (D) तापमान में वृद्धि: गलत, तापमान बढ़ने से पानी के अणुओं को अधिक गतिज ऊर्जा मिलती है, जिससे वाष्पीकरण की दर तेजी से बढ़ती है।

#5. एक प्रयोगशाला में एक छात्र ने पानी का तापमान केल्विन पैमाने पर 298K मापा। सेल्सियस पैमाने पर इस तापमान का सही रूपांतरण क्या है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) 25 डिग्री सेल्सियस

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): केल्विन पैमाने से सेल्सियस पैमाने में तापमान बदलने के लिए, केल्विन के मान में से 273 (या सटीक रूप से 273.15) घटाया जाता है। सूत्र:
    $^\circ\text{C} = \text{K} – 273$
  • गणना (Calculation):
    दिया गया तापमान = $298\text{ K}$
    सेल्सियस में मान = $298 – 273 = 25^\circ\text{C}$ (डिग्री सेल्सियस)।
  • साधारण तापमान: $25^\circ\text{C}$ कमरे का सामान्य मानक तापमान (Room Temperature) माना जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) 28 डिग्री सेल्सियस: गलत, यह गणना के अनुसार सही नहीं है (28 + 273 = 301K होगा)।
  • विकल्प (B) 30 डिग्री सेल्सियस: गलत, यह मान 303K के समकक्ष है।
  • विकल्प (C) 32 डिग्री सेल्सियस: गलत, यह मान 305K के समकक्ष है।



#6. विद्युत मापने वाले उपकरणों में निम्नलिखित में से कौन सी स्विचिंग त्रुटि है?
(RRB ALP-CBT-II Electronic Mechanic : 02 May, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (A) मीटर का गलत कनेक्शन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत मापने वाले उपकरणों में स्विचिंग त्रुटि (Switching Error) तब उत्पन्न होती है जब माप के दौरान मीटर या सर्किट का संयोजन (Connection), वायरिंग या मोड का चयन गलत तरीके से किया जाता है।
  • मीटर का गलत कनेक्शन: उपकरण को गलत टर्मिनलों से जोड़ना, ध्रुवता (Polarity) उलटना या गलत श्रेणी (Range) चुनना स्विचिंग त्रुटि का मुख्य कारण है।
  • सावधानी: ऐसे त्रुटियों से बचने के लिए सर्किट आरेख और यूजर मैनुअल के अनुसार ही सही वायरिंग और कनेक्शन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP-CBT-II Electronic Mechanic : 02 May, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) उपखंडों की गलत गणना के कारण त्रुटि: गलत, यह एनालॉग पैमाने के उपखंडों को पढ़ने में हुई मानवीय भूल से संबंधित है, स्विचिंग त्रुटि से नहीं।
  • विकल्प (C) गर्मी के कारण त्रुटि: गलत, तापमान या गर्मी के प्रभाव से उत्पन्न त्रुटियां वातावरणीय या प्रभाव त्रुटियों (Influence Errors) के अंतर्गत आती हैं।
  • विकल्प (D) कंपन के कारण त्रुटि: गलत, यांत्रिक कंपन के कारण रीडिंग में होने वाली अस्थिरता प्रभाव त्रुटि (Influence Error) का हिस्सा है।

#7. निम्नलिखित में से किसकी माप के लिए मोल (mol) का उपयोग किया जाता है?
(RPF Constable 2024 : 11 Mar, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) पदार्थ की मात्रा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): मोल (Mole) अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (SI) में पदार्थ की मात्रा (Amount of Substance) को मापने का मूल मात्रक (Base Unit) है। इसका प्रतीक mol है।
  • परिभाषा (Definition): एक मोल में किसी पदार्थ (परमाणु, अणु, आयन आदि) के कणों की संख्या निश्चित होती है, जिसे आवोगाद्रो संख्या (Avogadro Constant, $N_A$) कहा जाता है। इसका मान लगभग $6.022 \times 10^{23}$ प्रति मोल होता है।
  • एसआई मूल राशियाँ: कुल 7 मूल SI राशियों में से ‘पदार्थ की मात्रा’ के मापन के लिए मोल का उपयोग किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2024 : 11 Mar, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) किसी पदार्थ का तापमान: गलत, तापमान को मापने के लिए एसआई मात्रक केल्विन (Kelvin / K) का उपयोग किया जाता है।
  • विकल्प (B) किसी गैस का दाब: गलत, दाब (Pressure) को मापने का एसआई मात्रक पास्कल (Pascal / Pa) है।
  • विकल्प (C) किसी पदार्थ की चालकता: गलत, विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) का मात्रक सीमेंस प्रति मीटर ($\text{S/m}$) होता है।

#8. एक विद्युत बल्ब के तंतु से 5 मिनट के लिए 1 A की धारा प्रवाहित होती है। परिपथ से प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश की मात्रा ___ होगी।
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) 300 C

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत आवेश ($Q$), विद्युत धारा ($I$) और समय ($t$) के बीच संबंध का सूत्र निम्नलिखित है:
    $Q = I \times t$ (जहाँ $Q$ कूलॉम में आवेश है, $I$ एम्पियर में धारा है, और $t$ सेकंड में समय है)।
  • गणना (Calculation):
    दिया गया है:
    विद्युत धारा ($I$) = $1\text{ A}$
    समय ($t$) = $5\text{ मिनट} = 5 \times 60 = 300\text{ सेकंड}$
    आवेश ($Q$) = $1\text{ A} \times 300\text{ s} = 300\text{ C}$ (कूलॉम)।
  • महत्वपूर्ण बिंदु: समय हमेशा एसआई (SI) पद्धति में ‘सेकंड’ में ही गणना में लिया जाना चाहिए।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) 5 C: गलत, यह तब आता है जब छात्र समय को मिनट से सेकंड में बदले बिना सीधे 5 मिनट मान लेता है ($1 \times 5 = 5$)।
  • विकल्प (B) 150 C: गलत, यह गणना के नियमों के अनुसार सही नहीं है (यह 2.5 मिनट के बराबर का आवेश है)।
  • विकल्प (D) 10 C: गलत, यह मान भी सूत्र के सही अनुप्रयोग से मेल नहीं खाता है।

#9. जूल के तापन नियम के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा सही नहीं है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर (जो सही नहीं है): (D) किसी दिए गए प्रतिरोध के लिए, एक प्रतिरोधक में उत्पन्न उष्ण धारा के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जूल का तापन नियम (Joule’s Law of Heating) यह बताता है कि किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा ($H$) धारा ($I$), प्रतिरोध ($R$) और समय ($t$) पर कैसे निर्भर करती है। इसका सूत्र है:
    $H = I^2 R t$
  • नियम के मुख्य बिंदु:
    1. उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग के सीधे आनुपातिक होती है ($H \propto I^2$, जब $R$ और $t$नियत हों)।
    2. उत्पन्न ऊष्मा प्रतिरोध के सीधे आनुपातिक होती है ($H \propto R$, जब $I$ और $t$ नियत हों)।
    3. उत्पन्न ऊष्मा उस समय के सीधे आनुपातिक होती है जितने समय तक धारा बहती है ($H \propto t$, जब $I$ और $R$ नियत हों)।
  • निष्कर्ष: चूंकि ऊष्मा धारा के वर्ग के सीधे आनुपातिक होती है (व्युत्क्रमानुपाती नहीं), इसलिए विकल्प (D) इस नियम के अनुसार असत्य (गलत) कथन है और यही इस प्रश्न का सही उत्तर है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये कथन सही क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) धारा के वर्ग के सीधे आनुपातिक: यह बिल्कुल सही कथन है, क्योंकि $H \propto I^2$ होता है।
  • विकल्प (B) समय के सीधे आनुपातिक: यह भी सही कथन है, क्योंकि जितने अधिक समय तक धारा बहेगी, उतनी ही अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी ($H \propto t$)।
  • विकल्प (C) प्रतिरोध के सीधे आनुपातिक: यह भी सही कथन है, क्योंकि निश्चित धारा के लिए प्रतिरोध बढ़ने पर ऊष्मा भी बढ़ती है ($H \propto R$)।

#10. स्थिर तापमान पर अवस्था परिवर्तन के दौरान अवशोषित ऊर्जा को क्या कहते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) गुप्त ऊर्जा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब पदार्थ अपनी अवस्था परिवर्तित करता है (जैसे ठोस से द्रव या द्रव से गैस), तो उस प्रक्रिया के दौरान तापमान स्थिर रहता है। इस दौरान अवशोषित या मुक्त होने वाली ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा या गुप्त ऊर्जा (Latent Heat/Energy) कहते हैं।
  • तापमान में स्थिरता: यह ऊर्जा तापमान बढ़ाने के बजाय अणुओं के बीच के आकर्षण बल (Intermolecular forces) को कमजोर करने या तोड़ने में खर्च होती है, इसलिए इस दौरान थर्मामीटर में तापमान स्थिर रहता है।
  • उदाहरण: 0°C पर बर्फ का पिघलकर 0°C पर पानी बनना या 100°C पर पानी का भाप बनना गुप्त ऊर्जा के अवशोषण के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 26/12/2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) ऊष्मीय ऊर्जा: गलत, क्योंकि यह सामान्य तापमान परिवर्तन से जुड़ी होती है, जबकि अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान नियत रहता है।
  • विकल्प (B) गतिज ऊर्जा: गलत, क्योंकि गतिज ऊर्जा अणुओं की गति से संबंधित होती है और तापमान स्थिर रहने पर अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा नहीं बदलती।
  • विकल्प (D) विशिष्ट ऊर्जा: गलत, क्योंकि यह किसी पदार्थ के प्रति इकाई द्रव्यमान की ऊर्जा को दर्शाती है, न कि विशेष तौर पर अवस्था परिवर्तन के दौरान छिपी हुई ऊर्जा को।



#11. वाष्पीकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) यह केवल तरल की सतह पर होता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): वाष्पीकरण (Evaporation) एक सतही घटना (Surface phenomenon) है। इसमें तरल पदार्थ अपने क्वथनांक (Boiling point) से कम तापमान पर ही धीरे-धीरे वाष्प में परिवर्तित होने लगता है।
  • सतह पर प्रक्रिया: तरल की सतह पर मौजूद अणुओं के पास गतिज ऊर्जा अधिक होती है, जिससे वे आसपास के वातावरण से ऊर्जा लेकर सतह छोड़कर हवा में चले जाते हैं। इसलिए यह केवल सतह पर होती है।
  • तापमान की कोई सीमा नहीं: वाष्पीकरण हर तापमान पर संभव है, जबकि ‘क्वथन’ (Boiling) केवल एक निश्चित क्वथनांक पर और पूरे तरल के अंदर होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 30/12/2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) इसे किसी ऊष्मा की आवश्यकता नहीं होती: गलत, क्योंकि वाष्पीकरण के लिए गुप्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है, जिसे तरल पदार्थ अपने परिवेश (Surroundings) से अवशोषित करता है।
  • विकल्प (C) यह केवल क्वथनांक पर होता है: गलत, क्योंकि क्वथनांक पर होने वाली प्रक्रिया को ‘क्वथन’ (Boiling) कहते हैं, जबकि वाष्पीकरण किसी भी तापमान पर हो सकता है।
  • विकल्प (D) यह पूरे तरल में होता है: गलत, क्योंकि पूरे तरल के भीतर से बुलबुले बनकर उड़ने की प्रक्रिया ‘क्वथन’ (Boiling) कहलाती है, वाष्पीकरण केवल ऊपरी सतह पर होता है।

#12. जब समान लंबाई लेकिन अलग-अलग प्रतिरोध वाले दो तारों में समान धारा प्रवाहित होती है, तो उच्च प्रतिरोध वाला तार………………
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) अधिक ऊष्मा उत्पन्न करेगा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जूल के ऊष्मीय प्रभाव के नियम (Joule’s Law of Heating) के अनुसार, किसी चालक में उत्पन्न ऊष्मा का सूत्र H = I²Rt होता है। जहाँ I धारा, R प्रतिरोध और t समय है।
  • समान धारा की स्थिति: जब प्रवाहित धारा (I) और समय (t) नियत (समान) हों, तो उत्पन्न ऊष्मा सीधे प्रतिरोध (R) के समानुपाती होती है (H सीधे आनुपातिक है R के)।
  • निष्कर्ष: चूँकि उच्च प्रतिरोध वाले तार का प्रतिरोध अधिक होता है, इसलिए जूल के नियम के अनुसार वह समान धारा प्रवाहित होने पर अधिक ऊष्मा उत्पन्न करेगा।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 09/12/2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) कम ऊष्मा उत्पन्न करेगा: गलत, क्योंकि अधिक प्रतिरोध होने पर ऊष्मा कम नहीं बल्कि अधिक उत्पन्न होती है।
  • विकल्प (C) कोई ऊष्मा उत्पन्न नहीं करेगा: गलत, क्योंकि धारा प्रवाहित होने पर प्रतिरोधक तारों में ऊष्मा उत्पन्न होती ही है।
  • विकल्प (D) समान ऊष्मा उत्पन्न करेगा: गलत, क्योंकि दोनों तारों के प्रतिरोध अलग-अलग हैं, इसलिए ऊष्मा भी अलग-अलग मात्रा में उत्पन्न होगी।

#13. ठोसों का तापमान बढ़ाने पर क्या होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाएगी।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): तापमान किसी पदार्थ के कणों की औसत गतिज ऊर्जा (Average Kinetic Energy) का सीधा माप होता है। जब हम किसी ठोस का तापमान बढ़ाते हैं, तो उसके अणुओं या परमाणुओं को ऊष्मीय ऊर्जा मिलती है।
  • गतिज ऊर्जा में वृद्धि: ऊर्जा मिलने के कारण ठोस के कण अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर अधिक तेजी से कंपन (Vibrate) करने लगते हैं, जिससे उनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है।
  • ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion): गतिज ऊर्जा और कंपन बढ़ने से कणों के बीच की औसत दूरी थोड़ी बढ़ जाती है, जिससे ठोसों में ऊष्मीय प्रसार होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) कणों की गतिज ऊर्जा घट जाएगी: गलत, क्योंकि तापमान बढ़ाने पर कणों की गतिज ऊर्जा कम नहीं बल्कि बढ़ती है।
  • विकल्प (B) ठोस का आकार समान रहेगा: गलत, तापमान बढ़ने से ऊष्मीय प्रसार (Thermal expansion) के कारण ठोस के आकार और आयतन में थोड़ा बदलाव (प्रसार) होता है।
  • विकल्प (D) ठोसों पर तापमान का कोई प्रभाव नहीं पड़ता: गलत, तापमान का प्रभाव सभी पदार्थों की भौतिक अवस्था और उनके कणों की ऊर्जा पर पड़ता है।

#14. तांबे की विशिष्ट उष्ण क्या है, जिसका उपयोग अक्सर बर्तन और पैन के लिए किया जाता है क्योंकि यह जल्दी गर्म हो जाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 19 Aug, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) 386.4 J kg -1 K -1

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat) किसी पदार्थ के 1 किलोग्राम द्रव्यमान का तापमान 1 केल्विन बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को दर्शाती है.
  • तांबे का गुण: तांबे की विशिष्ट ऊष्मा 386.4 J kg⁻¹ K⁻¹ होती है. कम विशिष्ट ऊष्मा होने के कारण यह ऊष्मा को बहुत जल्दी अवशोषित कर लेता है और तेजी से गर्म होता है।
  • रसोई में उपयोग: इसी उत्कृष्ट ऊष्मीय चालकता और कम विशिष्ट ऊष्मा के कारण तांबे का उपयोग अक्सर कुकवेयर, बर्तन और पैन बनाने के लिए किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 19 Aug, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) 604.2 J kg⁻¹ K⁻¹: गलत, यह तांबे की सही विशिष्ट ऊष्मा का मान नहीं है।
  • विकल्प (B) 239.3 J kg⁻¹ K⁻¹: गलत, यह विकल्प तांबे के मानक विशिष्ट ऊष्मा डेटा से मेल नहीं खाता है।
  • विकल्प (C) 712.1 J kg⁻¹ K⁻¹: गलत, यह मान तांबे की विशिष्ट ऊष्मा के लिए अमान्य है।

#15. प्रायः द्रवों में ऊष्मा अंतरण का प्रक्रम क्या है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) संवहन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): द्रवों और गैसों (तरल पदार्थों) में ऊष्मा का स्थानांतरण मुख्य रूप से संवहन (Convection) विधि द्वारा होता है।
  • संवहन प्रक्रिया: इस प्रक्रिया में तरल के गर्म कण हल्के होकर ऊपर उठते हैं और ठंडे कण उनका स्थान लेने के लिए नीचे आते हैं, जिससे ऊष्मीय धाराओं (Convection currents) का निर्माण होता है और पूरा द्रव गर्म हो जाता है।
  • ठोसों से तुलना: जबकि ठोसों में ऊष्मा का अंतरण मुख्य रूप से ‘चालन’ (Conduction) द्वारा होता है, द्रवों में कणों की गतिशीलता के कारण संवहन प्रमुख प्रक्रम है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) केवल चालन: गलत, क्योंकि चालन मुख्य रूप से ठोस पदार्थों में होता है; द्रव ऊष्मा के बहुत अच्छे चालक नहीं होते हैं।
  • विकल्प (B) चालन और विकिरण दोनों: गलत, क्योंकि द्रवों में ऊष्मा का मुख्य संचरण संवहन के माध्यम से होता है न कि चालन और विकिरण के संयोजन से।
  • विकल्प (D) केवल विकिरण: गलत, क्योंकि विकिरण (Radiation) के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती (जैसे सूर्य की ऊष्मा), जो कि द्रवों के भीतर ऊष्मा अंतरण का मुख्य तरीका नहीं है।



#16. किसी पदार्थ की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता ______ होती है।
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (A) (1/μ) (ΔQ / ΔT)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी पदार्थ की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Molar Specific Heat Capacity) को उस पदार्थ के 1 मोल का तापमान 1 केल्विन (या 1°C) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • सूत्र (Formula): यदि किसी पदार्थ को दी गई ऊष्मा $\Delta Q$ हो, मोलों की संख्या $\mu$ हो, और तापमान में परिवर्तन $\Delta T$ हो, तो मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता का सूत्र (1/μ) (ΔQ / ΔT) होता है। इसकी SI इकाई J/(mol·K) है।
  • महत्व: यह गुण पदार्थ की मात्रा (मोल) के सापेक्ष ऊष्मा संचय की क्षमता को दर्शाता है, जिससे विभिन्न गैसों और पदार्थों के तापीय व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) μ (ΔQ / ΔT): गलत, क्योंकि यहाँ मोलों की संख्या से गुणा किया गया है जबकि सूत्र में प्रति मोल निकालने के लिए मोलों की संख्या से भाग ($\frac{1}{\mu}$) किया जाता है।
  • विकल्प (C) और (D): गलत, क्योंकि इनमें तापमान परिवर्तन ($\Delta T$) को अंश में और ऊष्मा ($\Delta Q$) को हर में रखा गया है, जो कि विशिष्ट ऊष्मा के व्युत्क्रम (Inverse) को दर्शाता है।

#17. जिंक का गलनांक कितना होता है?
(RRB JE ME 30 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (A) 787°F

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जिंक (जस्ता) एक नीले-सफेद रंग की संक्रमण धातु है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से गैल्वेनीकरण (Galvanization) और मिश्र धातु (जैसे पीतल) बनाने में किया जाता है।
  • गलनांक का मान: शुद्ध जिंक का गलनांक लगभग 419.5°C (यानि लगभग 787°F) होता है। इसका यह अपेक्षाकृत कम गलनांक इसे डाई-कास्टिंग (Die-casting) और मोल्डिंग के लिए बेहद उपयुक्त बनाता है।
  • औद्योगिक महत्व: कम गलनांक होने के कारण इसे पिघलाना आसान होता है, जिससे लोहे और स्टील को जंग से बचाने के लिए उन पर इसकी परत आसानी से चढ़ाई जाती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ME 30 Aug 2019 Shift 1 CBT 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) 2646°F: गलत, यह तापमान बहुत अधिक है (यह कई उच्च-गलनांक वाली धातुओं के आसपास है), जो जिंक के वास्तविक गलनांक से काफी अधिक है।
  • विकल्प (C) 621°F: गलत, यह सीसा (Lead) या अन्य कम गलनांक वाली मिश्र धातुओं के तापमान के करीब है, न कि शुद्ध जिंक का।
  • विकल्प (D) 1204°F: गलत, यह तापमान एल्यूमीनियम या अन्य धातुओं के गलनांक के आसपास बैठता है, जिंक का सटीक फारेनहाइट मान 787°F है।

#18. ऊष्मागतिक प्रणाली में एक डायथर्मिक दीवार का क्या कार्य है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 02 Sept, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) यह प्रणालियों के बीच ऊष्मा के प्रवाह की अनुमति देता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) में प्रणालियों को अलग करने वाली दीवारें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: डायथर्मिक दीवार (Diathermic Wall) और एडियाबेटिक दीवार (Adiabatic Wall)।
  • डायथर्मिक दीवार का कार्य: एक डायथर्मिक (ऊष्मीय सुचालक) दीवार अपने आर-पार ऊष्मा के संचरण या प्रवाह की अनुमति देती है, भले ही दोनों प्रणालियों के तापमान अलग-अलग हों, जब तक कि तापीय साम्यावस्था (Thermal equilibrium) प्राप्त न हो जाए।
  • पदार्थ का आदान-प्रदान: यह दीवार ऊर्जा (ऊष्मा) के प्रवाह की अनुमति तो देती है, लेकिन इसके माध्यम से पदार्थ (Matter) का आदान-प्रदान नहीं होता है (यह एक बंद प्रणाली की तरह कार्य करती है)।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 02 Sept, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) यह केवल कार्य के प्रवाह की अनुमति देता है: गलत, क्योंकि डायथर्मिक दीवार मुख्य रूप से ऊष्मा (Heat) के प्रवाह से संबंधित है, न कि केवल यांत्रिक कार्य से।
  • विकल्प (B) यह पदार्थ और ऊर्जा दोनों के आदान-प्रदान को रोकता है: गलत, यह विशेषता ‘रुद्धोष्म या एडियाबेटिक दीवार’ (Adiabatic wall) की है जो ऊष्मा के प्रवाह को रोकती है।
  • विकल्प (C) यह केवल पदार्थ के आदान-प्रदान की अनुमति देता है: गलत, यह दीवार पदार्थ को आर-पार जाने से रोकती है, केवल ऊष्मा ऊर्जा को गुजरने देती है।

#19. बर्फ के पिघलने के दौरान, ऊष्मा देने पर भी तापमान स्थिर क्यों रहता है?
(RRB JE 19/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (D) ऊष्मीय ऊर्जा का उपयोग बर्फ के कण के बीच आकर्षण को कम करने के लिए किया जाता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब कोई ठोस पदार्थ (जैसे बर्फ) पिघलता है, तो उसे लगातार ऊष्मा दी जाती है, फिर भी उसका तापमान 0°C पर तब तक स्थिर रहता है जब तक कि पूरी बर्फ पिघल नहीं जाती।
  • गुप्त ऊष्मा (Latent Heat): इस दी जाने वाली ऊष्मा को ‘संलयन की गुप्त ऊष्मा’ कहा जाता है। यह तापमान बढ़ाने के बजाय अणुओं (कणों) के बीच के मजबूत आकर्षण बलों (Intermolecular forces) को तोड़ने और उनकी अवस्था को ठोस से द्रव में बदलने में खर्च होती है।
  • तापमान की स्थिरता: चूंकि ऊर्जा अणुओं के बीच की दूरी बढ़ाने और आकर्षण को कमजोर करने में लग जाती है, इसलिए अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा नहीं बढ़ती और तापमान स्थिर बना रहता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 19/02/2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) ऊष्मीय ऊर्जा सीधे कार्य में परिवर्तित हो जाती है: गलत, यहाँ कोई यांत्रिक कार्य नहीं हो रहा है, बल्कि अवस्था परिवर्तन हो रहा है।
  • विकल्प (B) बर्फ से ऊष्मीय ऊर्जा परिवेश में स्थानांतरित हो जाती है: गलत, बर्फ पिघलने के लिए ऊष्मा को परिवेश से ‘अवशोषित’ करती है, न कि बाहर छोड़ती है।
  • विकल्प (C) ऊष्मीय ऊर्जा, गतिज ऊर्जा को तुरंत बढ़ाती है: गलत, यदि गतिज ऊर्जा बढ़ती तो तापमान में भी वृद्धि होती, जबकि अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर रहता है।

#20. वाष्पीकरण प्रक्रिया पर पृष्ठीय क्षेत्रफल का क्या प्रभाव होगा?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) पृष्ठीय क्षेत्रफल में वृद्धि के साथ वाष्पीकरण बढ़ता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): वाष्पीकरण (Evaporation) एक सतही परिघटना (Surface phenomenon) है, जिसका अर्थ है कि यह प्रक्रिया केवल तरल पदार्थ की खुली सतह पर होती है।
  • पृष्ठीय क्षेत्रफल का प्रभाव: जब तरल का पृष्ठीय क्षेत्रफल (Surface area) बढ़ाया जाता है, तो अधिक संख्या में अणु वायुमंडल के संपर्क में आते हैं। इससे वाष्पीकरण की दर तेज हो जाती है (जैसे- गीले कपड़ों को फैलाकर सुखाना)।
  • अन्य कारक: वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले अन्य प्रमुख कारकों में तापमान में वृद्धि, वायु की गति और आर्द्रता (Humidity) में कमी शामिल हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) पृष्ठीय क्षेत्रफल में कमी के साथ वाष्पीकरण बढ़ता है: गलत, क्षेत्रफल कम करने से वायु के संपर्क में आने वाले अणु कम हो जाते हैं, जिससे वाष्पीकरण घटता है न कि बढ़ता।
  • विकल्प (B) वाष्पीकरण पर पृष्ठीय क्षेत्रफल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है: गलत, पृष्ठीय क्षेत्रफल वाष्पीकरण की दर को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
  • विकल्प (D) पृष्ठीय क्षेत्रफल में वृद्धि के साथ वाष्पीकरण घटता है: गलत, क्षेत्रफल बढ़ने पर वाष्पीकरण की दर बढ़ती है, घटती नहीं है।



#21. एक उदासीन लवण विलयन का सन्निकट pH मान क्या होता है?
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (D) 7 के बराबर

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): एक उदासीन लवण विलयन (Neutral Salt Solution) तब बनता है जब एक प्रबल अम्ल (Strong Acid) और एक प्रबल क्षार (Strong Base) की आपस में उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization reaction) होती है।
  • pH मान: मानक तापमान (25°C) पर ऐसे उदासीन विलयनों का सन्निकट pH मान 7 के बराबर होता है, जिसका अर्थ है कि विलयन न तो अम्लीय होता है और न ही क्षारीय (जैसे सोडियम क्लोराइड NaCl या पोटेशियम नाइट्रेट KNO₃ का विलयन)।
  • जल-अपघटन (Hydrolysis): प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवणों के आयन जल के साथ जल-अपघटन नहीं करते हैं, जिससे विलयन में उदासीन pH (pH = 7) स्थिर बना रहता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) 7 से कम: गलत, क्योंकि 7 से कम pH मान अम्लीय विलयनों को दर्शाता है, जो तब बनते हैं जब प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार आपस में क्रिया करते हैं।
  • विकल्प (B) तापमान पर निर्भर करता है: गलत, हालांकि अत्यधिक तापमान में जल के आयनीकरण में हल्का बदलाव हो सकता है, लेकिन सामान्य और मानक परिस्थितियों में उदासीन लवण विलयन का pH निश्चित रूप से 7 होता है।
  • विकल्प (C) 7 से अधिक: गलत, क्योंकि 7 से अधिक pH मान क्षारीय (Basic) विलयनों को दर्शाता है, जो प्रबल क्षार और दुर्बल अम्ल से बनते हैं।

#22. कौन-सा ऊर्जा परिवर्तन सामान्यतः अपघटन अभिक्रियाओं से जुड़ा होता है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) ऊष्माशोषी ऊर्जा परिवर्तन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): अपघटन (या वियोजन) अभिक्रियाएँ वे रासायनिक प्रक्रियाएँ हैं जिनमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है।
  • ऊष्माशोषी प्रकृति: इन अभिक्रियाओं में अभिकारक के मजबूत रासायनिक बंधों को तोड़ने के लिए बाहरी ऊर्जा (ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत) की लगातार आवश्यकता होती है। चूँकि इसमें ऊर्जा का अवशोषण होता है, इसलिए यह ऊष्माशोषी (Endothermic) ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी होती हैं।
  • उदाहरण: कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) को गर्म करने पर उसका कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में टूटना एक तापीय अपघटन और ऊष्माशोषी प्रक्रिया है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 14/12/2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) कोई ऊर्जा परिवर्तन नहीं: गलत, क्योंकि रासायनिक बंधों को तोड़ने और नए पदार्थ बनाने के लिए ऊर्जा के आदान-प्रदान या परिवर्तन की आवश्यकता होती है।
  • विकल्प (C) ऊष्माक्षेपी ऊर्जा परिवर्तन: गलत, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में ऊर्जा बाहर निकलती है (जैसे दहन या संयोजन में), जबकि अपघटन में ऊर्जा अवशोषित होती है।
  • विकल्प (D) उत्क्रमणीय ऊर्जा परिवर्तन: गलत, यह ऊर्जा के प्रकार से संबंधित नहीं बल्कि अभिक्रिया की दिशा (उत्क्रमणीय या अनुत्क्रमणीय) से जुड़ा शब्द है।

#23. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) तांबा और एल्युमीनियम ऊष्मा के अच्छे संवाहक हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा और विद्युत की बहुत अच्छी सुचालक (Good conductors) होती हैं, क्योंकि उनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free electrons) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो ऊर्जा को तेजी से आगे स्थानांतरित करते हैं।
  • तांबा और एल्युमीनियम: तांबा (Copper) और एल्युमीनियम (Aluminium) उत्कृष्ट तापीय चालक हैं। इसी उच्च ऊष्मीय चालकता के कारण इनका उपयोग बर्तन, रेडिएटर और इलेक्ट्रिकल उपकरणों में किया जाता है।
  • कुचालक (Insulators): इसके विपरीत, लकड़ी, प्लास्टिक और शुष्क हवा ऊष्मा के कुचालक (Bad conductors) होते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) सभी धातुएँ ऊष्मा की खराब संवाहक होती हैं: गलत, क्योंकि धातुएँ ऊष्मा की अच्छी संवाहक होती हैं, खराब नहीं।
  • विकल्प (B) प्लास्टिक और लकड़ी ऊष्मा को आसानी से गुजरने देते हैं: गलत, प्लास्टिक और लकड़ी ऊष्मा के कुचालक हैं, वे ऊष्मा को आसानी से नहीं गुजरने देते।
  • विकल्प (C) शुष्क हवा ऊष्मा का एक अच्छा संवाहक है: गलत, शुष्क हवा ऊष्मा की खराब संवाहक (कुचालक) होती है।

#24. जब दो पिंड तापीय संपर्क में होते हैं, तब उनके बीच ऊष्मा का प्रवाह होगा, यदि वे ______ में भिन्न हों।
(RRB ALP CBT 2 Electrician Previous Paper : 22 Jan 2019 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) तापमान

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): ऊष्मागतिकी के zeroth law और ऊष्मा के प्रवाह के मूल नियम के अनुसार, दो वस्तुओं के बीच ऊष्मा ऊर्जा का स्थानांतरण हमेशा अधिक तापमान वाली वस्तु से कम तापमान वाली वस्तु की ओर होता है।
  • तापमान की भूमिका: ऊष्मा के प्रवाह के लिए केवल ‘तापमान का अंतर’ (Temperature difference) आवश्यक है। जब तक दोनों पिंडों का तापमान अलग-अलग है, तब तक उनके बीच ऊष्मा का प्रवाह होता रहेगा जब तक कि वे तापीय साम्यावस्था (Thermal Equilibrium) में न आ जाएं।
  • अन्य भौतिक राशियों का प्रभाव: घनत्व, द्रव्यमान या विशिष्ट ऊष्मा अलग होने के बावजूद यदि दोनों पिंडों का तापमान समान है, तो उनके बीच कोई ऊष्मा प्रवाह नहीं होगा।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 2 Electrician Previous Paper : 22 Jan 2019 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) घनत्व: गलत, घनत्व अलग होने से ऊष्मा का प्रवाह नहीं होता जब तक कि तापमान में अंतर न हो।
  • विकल्प (B) विशिष्ट ऊष्मा: गलत, विशिष्ट ऊष्मा पदार्थों का आंतरिक गुण है, जो केवल यह तय करती है कि तापमान बदलने के लिए कितनी ऊष्मा चाहिए, लेकिन ऊष्मा प्रवाह का कारण तापमान का अंतर ही है।
  • विकल्प (C) द्रव्यमान: गलत, अलग-अलग द्रव्यमान वाले दो पिंड समान तापमान पर होने पर भी ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं करते हैं।

#25. सर्दियों में, लोग जैकेट पहनते हैं क्योंकि ______。
(RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) जैकेट का कपड़ा ऊष्मा का कुचालक होता है इसलिए यह शरीर की गर्मी को रोकता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): सर्दियों के मौसम में हमारे शरीर का तापमान परिवेश (Environment) के तापमान से अधिक होता है। शरीर की अंदरूनी गर्मी को बाहर जाने से रोकने के लिए ऐसे वस्त्रों की आवश्यकता होती है जो ऊष्मा के कुचालक (Bad conductors/Insulators) हों।
  • कुचालक की भूमिका: जैकेट और ऊनी कपड़े ऊष्मा के कुचालक होते हैं। इसके अलावा, ये कपड़ों के रेशों के बीच हवा को रोककर रखते हैं (हवा भी ऊष्मा की कुचालक होती है), जिससे शरीर की ऊष्मा बाहर ठंडे वातावरण में नहीं जा पाती और हम गर्म महसूस करते हैं।
  • ऊष्मीय अवरोध: यह अवरोध (Insulation) शरीर से बाहर की ओर ऊष्मा के स्थानांतरण को धीमा कर देता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) यह अच्छा दिखता है: गलत, हालांकि फैशन एक पहलू है, लेकिन विज्ञान और भौतिकी के दृष्टिकोण से जैकेट पहनने का मुख्य कारण शरीर की गर्मी को बचाना है।
  • विकल्प (B) जैकेट का कपड़ा ऊष्मा का सुचालक होता है…: गलत, यदि कपड़ा सुचालक होता तो वह शरीर की सारी गर्मी को तेजी से बाहर जाने देता और हमें और अधिक ठंड लगती।
  • विकल्प (D) जैकेट हमारे शरीर से गर्मी को आसपास के वातावरण में प्रवाहित करने की अनुमति देता है: गलत, यह इसके विपरीत कार्य करता है यानी गर्मी के प्रवाह को रोकता है।



#26. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प आदर्श गैस नियम का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
(RPF Constable 2024 02 Mar, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (A) किसी निश्चित मात्रा में गैस के दाब (P), आयतन (V) और तापमान (T) समीकरण PV/T = स्थिरांक द्वारा संबंधित होते हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): आदर्श गैस समीकरण (Ideal Gas Equation) गैसों के दाब, आयतन और परम तापमान के बीच संबंध को दर्शाता है। इसे संयुक्त गैस नियम (Combined Gas Law) के रूप में भी जाना जाता है, जिसके अनुसार निश्चित मात्रा के लिए PV/T = स्थिरांक (Constant) या PV = nRT होता है।
  • नियम की मुख्य बातें: यह समीकरण बॉयल के नियम, चार्ल्स के नियम और गे-लुसैक के नियम का संयोजन है। इसमें दबाव (P), आयतन (V) और तापमान (T) एक साथ गैस की अवस्था को निर्धारित करते हैं।
  • चर (Variables): यहाँ P दाब, V आयतन, T केल्विन में तापमान और n मोल की संख्या को दर्शाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2024 02 Mar, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) स्थिर आयतन पर किसी गैस का दाब उसके आयतन के समानुपाती होता है: गलत, यह कथन तथ्यात्मक रूप से गलत है और गे-लुसैक के नियम (Gay-Lussac’s Law) को गलत तरीके से परिभाषित करता है, जिसके अनुसार स्थिर आयतन पर दाब तापमान के समानुपाती होता है।
  • विकल्प (C) गैसों के मिश्रण का कुल दाब व्यक्तिगत गैसों के आंशिक दबावों के योग के बराबर होता है: गलत, यह डाल्टन का आंशिक दाब का नियम (Dalton’s Law of Partial Pressures) है, न कि आदर्श गैस नियम।
  • विकल्प (D) स्थिर दाब पर किसी गैस का आयतन उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है: गलत, यह कथन अधूरा और तार्किक रूप से अशुद्ध है। स्थिर दाब पर गैस का आयतन तापमान के समानुपाती होता है (चार्ल्स का नियम)।

#27. गर्म धूप वाले दिन के बाद, लोग छत या खुले मैदान पर जल का छिड़काव करते हैं क्योंकि:
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) जल के वाष्पीकरण की उच्च गुप्त ऊष्मा गर्म सतह को ठंडा करने में मदद करती है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब गर्म धूप वाले दिन के बाद छत या खुले मैदान पर पानी का छिड़काव किया जाता है, तो पानी वाष्पीकृत (Evaporate) होने लगता है। इस प्रक्रिया में पानी गर्म सतह से आवश्यक गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Vaporization) अवशोषित कर लेता है।
  • गुप्त ऊष्मा की भूमिका: जल के वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा बहुत अधिक होती है, जिसके कारण यह सतह से भारी मात्रा में ऊष्मा खींच लेता है और वातावरण को ठंडक प्रदान करता है।
  • शीलन प्रभाव (Cooling Effect): सतह और आसपास की हवा से ऊष्मा के अवशोषित होने के कारण तापमान कम हो जाता है और राहत महसूस होती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) जल के वाष्पीकरण की उच्च गुप्त ऊष्मा ठंडी सतह को गर्म करने में मदद करती है: गलत, छिड़काव ठंडी करने के लिए किया जाता है न कि सतह को गर्म करने के लिए।
  • विकल्प (B) जल के वाष्पीकरण की उच्च गुप्त ऊष्मा गर्म सतह को ठंडा करने में मदद करती है, ठंडी नहीं करती: गलत, यह विकल्प विरोधाभासी और तार्किक रूप से अशुद्ध है।
  • विकल्प (D) जल के वाष्पीकरण की निम्न गुप्त ऊष्मा गर्म सतह को ठंडा करने में मदद करती है: गलत, जल के वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा निम्न नहीं बल्कि बहुत उच्च होती है, जो प्रभावी ठंडक प्रदान करती है।

#28. निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है जब एक ही तापमान पर दो वस्तुओं को एक दूसरे के संपर्क में रखा जाता है?
(RRB ALP-CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) कोई ऊष्मा स्थानांतरित नहीं होती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): ऊष्मा (Heat) का स्थानांतरण हमेशा उच्च तापमान वाली वस्तु से निम्न तापमान वाली वस्तु की ओर होता है। इसे ऊष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics) का मुख्य सिद्धांत माना जाता है।
  • तापीय संतुलन (Thermal Equilibrium): जब दो वस्तुओं का तापमान समान होता है, तो उनके बीच कोई तापमान अंतर (Temperature Difference) नहीं रहता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके बीच कोई शुद्ध ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता।
  • स्थानांतरण की शर्त: ऊष्मा के प्रवाह के लिए दोनों वस्तुओं के तापमान में भिन्नता का होना आवश्यक है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP-CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) दोनों वस्तुएं एक दूसरे को ऊष्मा स्थानांतरित करती हैं: गलत, तापमान समान होने पर ऊष्मा का स्थानांतरण नहीं होता है।
  • विकल्प (B) ऊष्मा वस्तु 2 से वस्तु 1 में स्थानांतरित होती है: गलत, बिना तापमान प्रवणता (Temperature Gradient) के ऊष्मा किसी एक दिशा में प्रवाहित नहीं हो सकती।
  • विकल्प (D) ऊष्मा वस्तु 1 से वस्तु 2 में स्थानांतरित होती है: गलत, यह कथन भी अमान्य है क्योंकि दोनों वस्तुएं तापीय संतुलन में हैं।

#29. प्रतिरोधकता के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) यह केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत प्रतिरोधकता (Electrical Resistivity या Specific Resistance) किसी पदार्थ का वह गुण है जो उसमें विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है। इसका मात्रक ओम-मीटर (ohm-meter) होता है।
  • निर्भरता (Dependence): प्रतिरोधकता चालक की लंबाई (Length) या अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (Cross-sectional Area) पर निर्भर नहीं करती है। यह केवल चालक के पदार्थ की प्रकृति (Material Type) और उसके तापमान (Temperature) पर निर्भर करती है।
  • प्रतिरोध बनाम प्रतिरोधकता: जहाँ किसी चालक का ‘प्रतिरोध’ (Resistance) उसकी लंबाई और मोटाई पर निर्भर करता है, वहीं ‘प्रतिरोधकता’ (Resistivity) एक आंतरिक गुण (Intrinsic property) है जो आकार-प्रकार बदलने पर अपरिवर्तित रहती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 17/12/2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) यह अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के साथ बढ़ता है: गलत, क्षेत्रफल बदलने से प्रतिरोध बदलता है लेकिन प्रतिरोधकता अपरिवर्तित रहती है।
  • विकल्प (B) यह लंबाई बढ़ने पर घटता है: गलत, यह कथन प्रतिरोध (Resistance) के संबंध में सही हो सकता है, प्रतिरोधकता के लिए नहीं।
  • विकल्प (D) यह चालक के आकार के साथ बदलता है: गलत, प्रतिरोधकता चालक के आकार (Shape) या माप (Dimensions) पर निर्भर नहीं करती है।

#30. बर्फ को पानी में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को कहते हैं-
(RPF Constable 2018 19 Feb 2019)

✨ सही उत्तर: (D) बर्फ के संलयन की गुप्त ऊष्मा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब किसी ठोस पदार्थ को उसके गलनांक (Melting Point) पर द्रव अवस्था में बदला जाता है, तो जितनी ऊष्मा की आवश्यकता होती है, उसे उस पदार्थ के संलयन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion) कहते हैं।
  • बर्फ का संलयन: बर्फ को पानी में बदलने की प्रक्रिया को संलयन (Fusion) कहा जाता है। इस दौरान तापमान में बिना कोई वृद्धि किए दी गई ऊष्मा बर्फ के अणुओं के बीच के अंतर-आणविक आकर्षण बल को तोड़ने में खर्च होती है।
  • मान: बर्फ के संलयन की गुप्त ऊष्मा का मान लगभग 3.34 × 10^5 जूल प्रति किलोग्राम होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 19 Feb 2019) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) बर्फ के संघनन की गुप्त ऊष्मा: गलत, संघनन (Condensation) गैस से द्रव में बदलने की प्रक्रिया है, न कि ठोस से द्रव में।
  • विकल्प (B) वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा: गलत, वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा द्रव को गैस (वाष्प) में बदलने के लिए आवश्यक होती है।
  • विकल्प (C) भाप आसवन की गुप्त ऊष्मा: गलत, यह एक रासायनिक पृथक्करण तकनीक है और इस प्रकार का कोई वैज्ञानिक ऊष्मा प्रकार यहाँ लागू नहीं होता।



#31. द्रव नाइट्रोजन का क्वथनांक क्या है?
(RRB NTPC CBT-I : 17 Feb 2021 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) -196 o C

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): नाइट्रोजन वायुमंडल में सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली गैस है। वायुमंडलीय दाब पर द्रव नाइट्रोजन (Liquid Nitrogen) का क्वथनांक (Boiling Point) बहुत कम यानी -196 डिग्री सेल्सियस (या 77 केल्विन) होता है।
  • क्रायोजेनिक गुण: अपने अत्यधिक कम तापमान के कारण द्रव नाइट्रोजन का उपयोग क्रायोजेनिक्स (Cryogenics), जैविक नमूनों के शीतलन (Preservation) और वैज्ञानिक प्रयोगों में किया जाता है।
  • अवस्था परिवर्तन: इस तापमान पर यह द्रव से गैस में परिवर्तित होना शुरू हो जाती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 17 Feb 2021 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) -27 o C: गलत, यह तापमान नाइट्रोजन के क्वथनांक से बहुत अधिक है।
  • विकल्प (B) -132 o C: गलत, यह मान द्रव नाइट्रोजन के क्वथनांक के अनुकूल नहीं है।
  • विकल्प (C) -273 o C: गलत, यह लगभग परम शून्य तापमान (Absolute Zero) है, जो -273.15 डिग्री सेल्सियस होता है।

#32. वाष्पन के दौरान, जब अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा घटती है, तो तापमान पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) यह घटता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): वाष्पन (Evaporation) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें द्रव सतह से उच्च गतिज ऊर्जा वाले अणु वाष्प बनकर उड़ जाते हैं। चूँकि अधिक ऊर्जा वाले अणु बाहर निकल जाते हैं, इसलिए बचे हुए अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा (Average Kinetic Energy) कम हो जाती है।
  • तापमान पर प्रभाव: किसी पदार्थ का तापमान उसकी औसत गतिज ऊर्जा के सीधा समानुपाती होता है। गतिज ऊर्जा घटने के कारण द्रव और उसके आसपास का तापमान कम हो जाता है, जिससे शीतलन (Cooling Effect) उत्पन्न होता है।
  • वाष्पीकरण जनित शीतलन: यही कारण है कि एसीटोन या पेट्रोल हथेली पर डालने पर ठंडक महसूस होती है क्योंकि वे वाष्पन के लिए शरीर से ऊष्मा लेते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 23/12/2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) यह समान रहता है: गलत, गतिज ऊर्जा में बदलाव होने पर तापमान स्थिर नहीं रह सकता।
  • विकल्प (C) यह बढ़ता है: गलत, तापमान तब बढ़ता जब गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती, जबकि वाष्पन में ऊर्जा की खपत होती है।
  • विकल्प (D) तापमान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है: गलत, वाष्पन की प्रक्रिया प्रत्यक्ष रूप से तापमान में गिरावट (शीतलन) का कारण बनती है।

#33. हिम नमक का तापमान ______ है।
(RPF Constable 2018 17 Jan 2019 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (A) 273.15 के

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): हिम नमक मिश्रण (Freezing Mixture या Ice-Salt Mixture) बर्फ और नमक को मिलाने पर बनता है। इसका उपयोग तापमान को शून्य से नीचे गिराने के लिए किया जाता है।
  • मानक संदर्भ: मानक स्थिति या बर्फ के गलनांक (Melting point of ice) के संदर्भ में, बर्फ का तापमान 0 डिग्री सेल्सियस यानी 273.15 केल्विन (K) होता है।
  • केल्विन पैमाना: वैज्ञानिक गणनाओं में तापमान को केल्विन में व्यक्त किया जाता है, जहाँ 0 डिग्री सेल्सियस = 273.15 K होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 17 Jan 2019 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) 273.15° फारेनहाइट: गलत, यह इकाई और मान दोनों रूप से गलत है।
  • विकल्प (C) 273.15° सेल्सियस: गलत, 273.15 सेल्सियस बहुत अधिक तापमान हो जाएगा; सही माप 0 डिग्री सेल्सियस या 273.15 केल्विन है।
  • विकल्प (D) 273.15° आर: गलत, ‘R’ रूमर (Réaumur) पैमाने को दर्शाता है और यह मान यहाँ प्रासंगिक नहीं है।

#34. ‘नाभिकीय संलयन’ दो या दो से अधिक हल्के नाभिकों के संयोजन की प्रक्रिया है। नाभिकीय संलयन के लिए आवश्यक तापमान (लगभग) क्या है?
(RRB NTPC CBT-I : 22 Feb 2021 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) 100 मिलियन K

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के नाभिक आपस में मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं, जिससे अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत यही प्रक्रिया है।
  • तापमान की आवश्यकता: इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए लगभग 100 मिलियन केल्विन (100 million K) तापमान की आवश्यकता होती है। इतना उच्च तापमान धनात्मक आवेशित नाभिकों के बीच होने वाले स्थिर वैद्युत प्रतिकर्षण (Electrostatic Repulsion) को दूर करने के लिए अनिवार्य होता है।
  • वैज्ञानिक अनुप्रयोग: हाइड्रोजन बम और भविष्य के ऊर्जा स्रोतों (जैसे ITER परियोजना) में नाभिकीय संलयन के लिए इसी अत्यधिक तापमान और दाब की स्थितियों को कृत्रिम रूप से उत्पन्न करने का प्रयास किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 22 Feb 2021 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) 810 मिलियन K: गलत, यह तापमान आवश्यकता से अधिक है और वैज्ञानिक रूप से सही मान नहीं है।
  • विकल्प (C) 812 मिलियन K: गलत, यह विकल्प भी मानक नाभिकीय संलयन तापमान के आँकड़े से मेल नहीं खाता।
  • विकल्प (D) 10 मिलियन K: गलत, हालांकि सूर्य के केंद्र का शुरुआती तापमान इसके आसपास हो सकता है, लेकिन प्रयोगशाला या नियंत्रित संलयन अभिक्रियाओं और सामान्य भौतिकी के संदर्भ में आवश्यक न्यूनतम प्रभावी तापमान 100 मिलियन K माना जाता है।

#35. निम्नलिखित में से कौन सा थर्मामीटर में तापमान का परास है?
(RRB NTPC CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (B) 35°C से 42°C

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): क्लिनिकल थर्मामीटर (Clinical Thermometer) का उपयोग मानव शरीर के तापमान को मापने के लिए किया जाता है। स्वस्थ मानव शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 डिग्री फारेनहाइट) होता है।
  • तापमान परास (Temperature Range): चूँकि मानव शरीर का तापमान सामान्यतः इस सामान्य बिंदु के आसपास ही ऊपर-नीचे होता है, इसलिए क्लिनिकल थर्मामीटर का परास विशेष रूप से 35°C से 42°C (या 94°F से 108°F) तक ही रखा जाता है।
  • उपयोग की सीमा: यह परास मानव शरीर के तापमान को सटीक रूप से मापने के लिए पूरी तरह पर्याप्त और सुरक्षित है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) 30°C से 43°C: गलत, यह मानक क्लिनिकल थर्मामीटर का सटीक और आधिकारिक परास नहीं है।
  • विकल्प (C) 10°C से 45°C: गलत, यह बहुत अधिक चौड़ा परास है, जो सामान्य प्रयोगशाला थर्मामीटर के लिए हो सकता है, क्लिनिकल के लिए नहीं।
  • विकल्प (D) 31°C से 44°C: गलत, यह मानक मेडिकल थर्मामीटर की माप सीमा से मेल नहीं खाता है।



#36. कैलोरी सिद्धांत (caloric theory) ने ऊष्मा और दहन के किस पुराने सिद्धांत को प्रतिस्थापित किया?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 16 Jun, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) फ़्लोजिस्टन सिद्धांत

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): कैलोरी सिद्धांत (Caloric Theory) के अनुसार ऊष्मा एक भारहीन और अदृश्य तरल पदार्थ (Caloric fluid) है जो गर्म वस्तुओं से ठंडी वस्तुओं की ओर बहता है. इस सिद्धांत ने 18वीं शताब्दी के अंत में दहन और ऊष्मा से जुड़े पुराने फ़्लोजिस्टन सिद्धांत (Phlogiston Theory) को प्रतिस्थापित किया था.
  • फ़्लोजिस्टन सिद्धांत: इस पुराने सिद्धांत के अनुसार किसी पदार्थ के जलने पर उसमें मौजूद ‘फ़्लोजिस्टन’ नामक काल्पनिक तत्व बाहर निकलता है। बाद में एंटोनी लैवोजियर और अन्य वैज्ञानिकों के प्रयोगों ने इसे गलत साबित किया और कैलोरी तथा ऑक्सीजन आधारित दहन की अवधारणा को आगे बढ़ाया।
  • अगला चरण: ऐतिहासिक रूप से, कैलोरी सिद्धांत स्वयं बाद में 19वीं शताब्दी में ऊष्मा के गतिज सिद्धांत (Kinetic Theory) और ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 16 Jun, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) गतिज सिद्धांत: गलत, गतिज सिद्धांत ने बाद में ‘कैलोरी सिद्धांत’ को प्रतिस्थापित किया था, न कि कैलोरी ने इसे।
  • विकल्प (B) ऊष्मागतिकी सिद्धांत: गलत, ऊष्मागतिकी के आधुनिक नियमों ने कैलोरी सिद्धांत के बाद के चरण में उसका स्थान लिया।
  • विकल्प (C) एन्ट्रॉपी सिद्धांत: गलत, एन्ट्रॉपी ऊष्मागतिकी का एक भाग है जिसका इस ऐतिहासिक प्रतिस्थापन से सीधा संबंध नहीं है।

#37. किसी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान प्रति इकाई द्रव्यमान में स्थानांतरित ऊष्मा की मात्रा को क्या कहते हैं?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 17/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (C) गुप्त ऊष्मा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब किसी पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन होता है (जैसे ठोस से द्रव, या द्रव से गैस), तो तापमान में बिना कोई परिवर्तन किए प्रति इकाई द्रव्यमान को दी जाने वाली या उससे ली जाने वाली ऊष्मा को उस पदार्थ की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) कहा जाता है।
  • गुप्त क्यों कहा जाता है?: इस ऊष्मा को ‘गुप्त’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह तापमान थर्मामीटर पर दिखाई नहीं देती है, बल्कि यह केवल अणुओं के बीच के बंधन को तोड़ने या बदलने (अवस्था परिवर्तन) में खर्च होती है।
  • प्रमुख प्रकार: इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं – संलयन की गुप्त ऊष्मा (Latent heat of fusion) और वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा (Latent heat of vaporization)।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC GRADUATE CBT 1 17/03/2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) विशिष्ट ऊष्मा: गलत, विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat) किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा होती है, न कि अवस्था परिवर्तन के लिए।
  • विकल्प (B) प्रेरित ऊष्मा: गलत, भौतिकी में इस नाम से कोई मानक ऊष्मा प्रकार परिभाषित नहीं है।
  • विकल्प (D) तापीय ऊष्मा: गलत, तापीय ऊष्मा (Thermal energy) सामान्य रूप से वस्तुओं की कुल ऊष्मीय ऊर्जा को दर्शाती है, विशेष रूप से प्रति इकाई द्रव्यमान अवस्था परिवर्तन की मात्रा को नहीं।

#38. फारेनहाइट और सेल्सियस पैमाने ______ पर अभिसारित होते हैं।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (B) -40°

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): सेल्सियस और फारेनहाइट तापमान पैमानों के बीच संबंध का सूत्र C / 5 = (F – 32) / 9 होता है।
  • गणितीय हल (Calculation): जब दोनों पैमानों का मान समान होता है (मान लीजिए C = F = x), तो समीकरण बनता है: x / 5 = (x – 32) / 9। इसे हल करने पर 9x = 5x – 160, यानी 4x = -160, जिससे x = -40° प्राप्त होता है।
  • अभिसरण बिंदु: इस प्रकार, -40 डिग्री एक ऐसा तापमान है जिस पर सेल्सियस और फारेनहाइट दोनों पैमानों के मान बिल्कुल एक समान होते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) -30°: गलत, इस मान पर दोनों पैमानों के पाठ्यांक मेल नहीं खाते हैं।
  • विकल्प (C) -50°: गलत, यह सूत्र के अनुसार सही तापमान मिलान बिंदु नहीं है।
  • विकल्प (D) -20°: गलत, -20 डिग्री सेल्सियस और फारेनहाइट पैमाने पर अलग-अलग मान देता है।

#39. एक कक्ष तापक (room heater) और एक विद्युत बल्ब दोनों विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित करते हैं, परंतु केवल बल्ब ही अधिक दृश्य प्रकाश क्यों उत्सर्जित करता है?
(RRB JE 20/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) बल्ब का फिलामेंट उच्च ताप पर पहुँचकर दृश्य प्रकाश उत्सर्जित करता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विद्युत बल्ब (Electric Bulb) और रूम हीटर दोनों ही धारा के ऊष्मीय प्रभाव (Heating effect of electric current) पर काम करते हैं। हालांकि, बल्ब का टंगस्टन फिलामेंट अत्यधिक उच्च तापमान (लगभग 2500°C से 3000°C) तक गर्म हो जाता है, जिससे वह तापदीप्ति (Incandescence) के कारण दृश्य प्रकाश (Visible light) उत्सर्जित करने लगता है।
  • तापमान और विकिरण: इसके विपरीत, कक्ष तापक (Room Heater) का तार कम तापमान पर संचालित होता है, जो मुख्य रूप से अवरक्त किरणें (Infrared rays/Heat) छोड़ता है, दृश्य प्रकाश नहीं।
  • ऊर्जा रूपांतरण: जैसे-जैसे किसी पिंड का तापमान बढ़ता है, उससे निकलने वाले विकिरण का स्पेक्ट्रम दृश्य प्रकाश की ओर शिफ्ट होता जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 20/02/2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) तापक, ताप प्रभाव की अपेक्षा चुंबकीय प्रभाव का उपयोग करता है: गलत, तापक भी विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव (Joule heating) का ही उपयोग करता है, चुंबकीय प्रभाव का नहीं।
  • विकल्प (C) तापक एक अलग पदार्थ से बना होता है: गलत, केवल पदार्थ का अलग होना मुख्य कारण नहीं है, बल्कि ऑपरेटिंग तापमान और प्रकाश उत्सर्जन की क्षमता मुख्य कारक है।
  • विकल्प (D) इनके परिपथ का डिज़ाइन अलग-अलग होता है: गलत, मुख्य अंतर प्रकाश उत्सर्जन के लिए आवश्यक उच्च ताप और विकिरण स्पेक्ट्रम का है, न कि परिपथ के बुनियादी डिज़ाइन का।

#40. समान परिस्थितियों के अंतर्गत, एक श्वेत पृष्ठ की तुलना में एक काला पृष्ठ ______ को अवशोषित करता है।
(RRB ALP Electronics Mechanic 21 Jan 2019 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) अधिक ऊष्मा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): विकिरण (Radiation) के अवशोषण के मामले में काले और गहरे रंग की सतहें ऊष्मा की अच्छी अवשोषक (Good absorbers) होती हैं, जबकि श्वेत या चमकीली सतहें अधिकांश प्रकाश और ऊष्मा को परावर्तित (Reflect) कर देती हैं।
  • किरचॉफ का नियम: अच्छे अवशोषक ही अच्छे उत्سर्जक भी होते हैं। इसी कारण समान परिस्थितियों में काला पृष्ठ श्वेत पृष्ठ की तुलना में अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है।
  • व्याहारिक उदाहरण: गर्मियों में सफेद कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि वे कम ऊष्मा अवशोषित करते हैं, जबकि सौर कुकर (Solar cooker) के अंदरूनी हिस्से को काला रंगा जाता है ताकि अधिकतम ऊष्मा अवशोषित हो सके।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Electronics Mechanic 21 Jan 2019 Shift 3) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) समान ऊष्मा: गलत, अलग-अलग रंगों की सतहों की ऊष्मा अवशोषण क्षमता भिन्न होती है।
  • विकल्प (B) नगण्य ऊष्मा: गलत, काला पृष्ठ नगण्य नहीं बल्कि सबसे अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है।
  • विकल्प (D) कम ऊष्मा: गलत, कम ऊष्मा अवशोषित करने का गुण श्वेत (सफेद) पृष्ठ का होता है, काले पृष्ठ का नहीं।



#41. अमोनियम सल्फेट किस तापमान पर लौहविद्युत बन जाता है?
(RRB JE CBT-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) -49.5°C

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): अमोनियम सल्फेट ((NH4)2SO4) एक ऐसा क्रिस्टलीय यौगिक है जो एक निश्चित संक्रमण तापमान (Curie Temperature) से नीचे आने पर लौहविद्युत (Ferroelectric) गुण प्रदर्शित करने लगता है।
  • तापमान सीमा: यह पदार्थ लगभग -49.5°C (या 223 K) के तापमान के नीचे लौहविद्युत बन जाता है। इस विशिष्ट तापमान से ऊपर यह पैराविद्युत (Paraelectric) अवस्था में रहता है।
  • संरचनात्मक परिवर्तन: इस तापमान पर क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) के भीतर आणविक व्यवस्था और प्रोटॉन के विन्यास में परिवर्तन होता है, जिसके कारण स्वतः ध्रुवीकरण (Spontaneous Polarization) उत्पन्न होता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) 0°C: गलत, इस तापमान पर अमोनियम सल्फेट लौहविद्युत में परिवर्तित नहीं होता है।
  • विकल्प (B) 100°C: गलत, यह उच्च तापमान इस संक्रमण से संबंधित नहीं है।
  • विकल्प (C) 25°C: गलत, सामान्य कमरे के तापमान (25°C) पर यह पदार्थ पैराविद्युत (paraelectric) प्रकृति का होता है।

#42. वाष्पीकरण किस तापमान पर होता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (D) किसी भी तापमान पर

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): वाष्पीकरण (Evaporation) एक सतही घटना (Surface phenomenon) है जिसमें द्रव के सतह पर मौजूद अणु किसी भी तापमान पर (क्थवनांक तक पहुँचे बिना भी) वाष्प में परिवर्तित होने लगते हैं।
  • वाष्पीकरण बनाम क्वथनांक: जहाँ क्वथनांक (Boiling) एक निश्चित तापमान पर होने वाली पूरी मात्रा की प्रक्रिया है, वहीं वाष्पीकरण कमरे के तापमान या किसी भी अन्य सामान्य तापमान पर निरंतर हो सकता है (जैसे गीले कपड़ों का सूखना)।
  • गतिज ऊर्जा: सतह के अणुओं के पास पर्याप्त गतिज ऊर्जा होती है कि वे आसपास के वातावरण से ऊष्मा लेकर वायुमंडल में मिल जाते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 05/02/2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) केवल हिमांक से नीचे: गलत, हिमांक (Freezing point) से नीचे द्रव जम जाता है, वाष्पीकरण उससे स्वतंत्र है।
  • विकल्प (B) केवल क्वथनांक पर: गलत, केवल क्वथनांक पर होने वाली प्रक्रिया को ‘क्वथलन’ (Boiling) कहते हैं, वाष्पीकरण किसी भी तापमान पर हो सकता है।
  • विकल्प (C) केवल 100°C पर: गलत, यह केवल पानी के उबलने का तापमान है, वाष्पीकरण के लिए यह बाध्यता नहीं है।

#43. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) सामान्य मानव शरीर का तापमान 98.6°F होता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): एक स्वस्थ मानव शरीर का सामान्य आंतरिक तापमान लगभग 37°C या 98.6°F होता है। फारेनहाइट पैमाने पर यह मान बिल्कुल सही है।
  • तापमान मापन: शरीर के तापमान को मापने के लिए विशेष रूप से क्लिनिकल थर्मामीटर (Clinical Thermometer) का उपयोग किया जाता है, जिसमें किंक (Kink) होती है ताकि पारे का स्तर अपने आप नीचे न गिरे।
  • पैमाने का रूपांतरण: तापमान को सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन पैमानों के बीच आसानी से गणितीय सूत्रों के माध्यम से बदला जा सकता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) मानव शरीर का तापमान मापने के लिए प्रयोगशाला थर्मामीटर का उपयोग किया जाता है: गलत, मानव शरीर के लिए क्लिनिकल थर्मामीटर का उपयोग होता है, प्रयोगशाला (Laboratory) थर्मामीटर का नहीं।
  • विकल्प (B) तापमान को एक ताप पैमाने से दूसरे ताप पैमाने में परिवर्तित करने की कोई विधि नहीं है: गलत, तापमान को सेल्सियस से फारेनहाइट या केल्विन में बदलने के लिए मानक सूत्र उपलब्ध हैं।
  • विकल्प (C) सामान्य मानव शरीर का तापमान 45°C होता है: गलत, 45 डिग्री सेल्सियस बहुत अधिक तापमान है जो मानव जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकता है; सामान्य तापमान 37°C होता है।

#44. बर्फ का आंतरिक तापमान मापने के लिए किस प्रकार के थर्मामीटर का उपयोग किया जाता है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) प्रयोगशाला थर्मामीटर

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): प्रयोगशाला थर्मामीटर (Laboratory Thermometer) का उपयोग विभिन्न वस्तुओं, पदार्थों, और द्रवों या बर्फ के आंतरिक तापमान को मापने के लिए किया जाता है, क्योंकि इसकी माप सीमा काफी विस्तृत होती है (सामान्यतः -10°C से 110°C तक)।
  • बर्फ का तापमान मापन: बर्फ या ठंडे पानी का सटीक तापमान ज्ञात करने के लिए क्लिनिकल थर्मामीटर का उपयोग नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसकी परास बहुत सीमित होती है। इसके लिए प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले थर्मामीटर उपयुक्त होते हैं।
  • संरचना: इसमें सुरक्षा के लिए क्लिनिकल थर्मामीटर की तरह ‘किंक’ (Kink) नहीं होती है, इसलिए इसे मापते समय ही पढ़ा जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) अंकीय थर्मामीटर: गलत, हालांकि डिजिटल थर्मामीटर आधुनिक हैं, लेकिन बर्फ के भीतर गहराई तक माप के लिए मानक प्रयोगशाला थर्मामीटर का उपयोग किया जाता है।
  • विकल्प (B) डॉक्टरी थर्मामीटर: गलत, डॉक्टरी या क्लिनिकल थर्मामीटर केवल मानव शरीर का तापमान (35°C से 42°C) मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • विकल्प (C) इंफ्रारेड थर्मामीटर: गलत, यह दूर से सतह का तापमान मापने के काम आता है, बर्फ के आंतरिक तापमान (Internal temperature) को मापने के लिए नहीं।

#45. निम्नलिखित में से कौन पर्यावरणीय संकेत कुछ सरीसृपों में निषेचित अंडे के लिंग का निर्धारण करता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) तापमान

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): कई सरीसृपों (जैसे कछुए, मगरमच्छ और कुछ छिपकलियाँ) में आनुवंशिक रूप से लिंग निर्धारित नहीं होता, बल्कि उनके अंडों के विकास के दौरान मिलने वाला पर्यावरणीय तापमान (Temperature-dependent sex determination – TSD) उनके लिंग का निर्धारण करता है।
  • तापमान की भूमिका: इन जीवों में घोंसले या मिट्टी का तापमान यह तय करता है कि निषेचित अंडे से नर (Male) बच्चा पैदा होगा या मादा (Female) बच्चा।
  • उदाहरण: उदाहरण के लिए, कई कछुए प्रजातियों में उच्च तापमान पर मादा और कम तापमान पर नर बच्चे विकसित होते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I 04/12/2025) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (B) जल: गलत, जल की उपलब्धता या आर्द्रता अंडों के विकास को प्रभावित कर सकती है, लेकिन सरीसृपों में लिंग निर्धारण का मुख्य पर्यावरणीय संकेत तापमान है।
  • विकल्प (C) स्पर्श: गलत, स्पर्श या भौतिक दबाव का निषेचित अंडे के लिंग निर्धारण से कोई संबंध नहीं है।
  • विकल्प (D) वायु वेग: गलत, वायु वेग सरीसृपों के भ्रूण विकास या लिंग निर्धारण में कोई कारक नहीं होता।



#46. जब हथेली पर एसीटोन डाला जाता है तो इसे शीतल क्यों महसूस होता है?
(RRB ALP CBT 1 18/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (B) कण हथेली से ऊर्जा अवशोषण करते हैं और वाष्पित हो जाते हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): जब एसीटोन (या पेट्रोल, परफ्यूम आदि) को हथेली पर रखा जाता है, तो इसके कण हथेली या आसपास के वातावरण से पर्याप्त ऊर्जा (ऊष्मा) अवशोषित कर लेते हैं और तेजी से वाष्पित (Evaporate) हो जाते हैं।
  • शीतलन का कारण: वाष्पीकरण के लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा हथेली से ली जाती है, जिससे हथेली की सतह पर ऊष्मा की कमी हो जाती है और हमें ठंडक (Cooling effect) महसूस होती है।
  • वाष्पीकरण की दर: एसीटोन एक अत्यधिक वाष्पशील (Volatile) द्रव है, इसलिए यह बहुत कम समय में हथेली की ऊष्मा को लेकर उड़ जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 18/02/2026) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) कण स्थिर रहते हैं और आसपास की ऊष्मा को परावर्तित करते हैं: गलत, द्रव के कण स्थिर नहीं रहते बल्कि गतिमान होते हैं और वे ऊष्मा को परावर्तित करने के बजाय अवशोषित करते हैं।
  • विकल्प (C) कण हथेली में ऊर्जा छोड़ते हैं और संघनित हो जाते हैं: गलत, यदि कण ऊर्जा छोड़ेंगे तो तापमान बढ़ेगा, जबकि वाष्पीकरण में ऊर्जा अवशोषित होती है और ठंडक महसूस होती है।
  • विकल्प (D) कण फैलते हैं और त्वचा की परतों के बीच वायु को फंसा लेते हैं: गलत, यह हथेली पर एसीटोन रखने की शीतलन घटना का वैज्ञानिक कारण नहीं है।

#47. किसी वस्तु का भार इसकी ______ के अनुक्रमानुपाती होता है।
(RRB JE CBT I – : 2 June 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (B) द्रव्यमान

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): किसी वस्तु का भार (Weight, $W$) उसके द्रव्यमान ($m$) और गुरुत्वीय त्वरण ($g$) के गुणनफल के बराबर होता है, जिसका सूत्र W = mg होता है।
  • अनुक्रमानुपाती संबंध: चूंकि किसी निश्चित स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण ($g$) का मान स्थिर रहता है, इसलिए वस्तु का भार सीधे तौर पर उसके द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती (Directly proportional) होता है (अर्थात द्रव्यमान बढ़ने पर भार भी उसी अनुपात में बढ़ता है)।
  • द्रव्यमान बनाम भार: द्रव्यमान एक अदिश राशि है जो किसी वस्तु में मौजूद पदार्थ की मात्रा को दर्शाती है और यह ब्रह्मांड में हर जगह स्थिर रहती है, जबकि भार एक बल है जो स्थान बदलने पर बदल सकता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I – : 2 June 2019 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) विशिष्ट ऊष्मा धारिता: गलत, विशिष्ट ऊष्मा धारिता का वस्तु के गुरुत्वीय भार से कोई सीधा संबंध नहीं होता है।
  • विकल्प (C) पारभासिता: गलत, पारभासिता (Translucency) प्रकाश के संचरण से संबंधित एक प्रकाशीय गुण है।
  • विकल्प (D) चुंबकीय शक्ति: गलत, चुंबकीय शक्ति पदार्थों के चुंबकीय गुणों को दर्शाती है, भार के अनुपात को नहीं।

#48. निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?(RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर (गलत कथन): (C) चालन ऊष्मा स्थानांतरण की वह प्रक्रिया है जिसमें ऊष्मा को स्थानांतरित करने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवधारणा (Concept): ऊष्मा स्थानांतरण की तीन मुख्य विधियाँ होती हैं – चालन (Conduction), संवहन (Convection) और विकिरण (Radiation)।
  • चालन (Conduction): चालन मुख्यतः ठोस पदार्थों में होती है, जिसमें ऊष्मा का स्थानांतरण कणों के आपस में टकराने से होता है। इस प्रक्रिया के लिए भौतिक माध्यम का होना अनिवार्य है। अतः कथन (C) वैज्ञानिक रूप से गलत है क्योंकि माध्यम की आवश्यकता न होना ‘विकिरण’ (Radiation) की विशेषता है।
  • अन्य विकल्प सत्य हैं: ठोसों में चालन होता है, गर्म रेत पर चलने पर पैर का जलना चालन का प्रत्यक्ष उदाहरण है, और ऊष्मा हमेशा उच्च तापमान से निम्न तापमान (गर्म से ठंडी वस्तु) की ओर प्रवाहित होती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) ठोस पदार्थों में, ऊष्मा का स्थानांतरण आमतौर पर चालन के माध्यम से होता है: यह कथन बिल्कुल सही है।
  • विकल्प (B) गर्म रेत पर पैर चलना चालन द्वारा उष्णता का स्थानांतरण का एक उदाहरण है: यह कथन भी सत्य है, क्योंकि सीधे संपर्क (Contact) से ऊष्मा का आदान-प्रदान होता है।
  • विकल्प (D) चालन ऊष्मा स्थानांतरण की वह प्रक्रिया है जिसमें ऊष्मा गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु में स्थानांतरित होती है: यह ऊष्मागतिकी का एक बुनियादी और सत्य नियम है।
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