Electrochemistry Railway Questions
#1. जिंक के विद्युत अपघटनी शोधन के दौरान, यह ____________ ।
(RRB JE 29 May 2019 Shift 2 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (C) कैथोड पर जमा हो जाता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- जिंक का विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining of Zinc): धातुओं के शोधन की इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु का एनोड और शुद्ध धातु की पतली चादर का कैथोड बनाया जाता है। विद्युत अपघट्य के रूप में धातु के लवण का विलयन उपयोग किया जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर, अशुद्ध धातु एनोड से घुलकर विलयन में आती है और शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य से कैथोड पर जमा हो जाती है।
- प्रमुख प्रक्रिया:
- एनोड पर: जिंक एनोड से ऑक्सीकृत होकर $\text{Zn}^{2+}$ आयनों के रूप में विलयन में जाता है।
- कैथोड पर: विलयन से $\text{Zn}^{2+}$ आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित होते हैं और शुद्ध जिंक के रूप में कैथोड पर जमा हो जाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 29 May, 2019 Shift 2 CBT 1) में धातुओं के निष्कर्षण एवं शोधन (Metallurgy) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एनोड पर जमा हो जाता है: गलत, एनोड पर अशुद्ध धातु घुलती है (ऑक्सीकरण होता है) और एनोड मड (अशुद्धियाँ) नीचे बैठती है, धातु यहाँ जमा नहीं होती।
- विकल्प (B) कैथोड के साथ-साथ एनोड पर भी जमा हो जाता है: गलत, शुद्ध धातु केवल कैथोड पर ही जमा होती है।
- विकल्प (D) विलयन में रह जाता है: गलत, विलयन केवल आयनों को एनोड से कैथोड तक पहुँचाने का माध्यम (मध्यस्थ) का काम करता है, शुद्ध धातु कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है।
#2. ऐनोड पंख ( anode mud) क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) वैद्युतअपघटनी परिष्करण में एनोड पर निक्षेपित अविलेय अशुद्धियाँ
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एनोड पंख (Anode Mud): धातुओं के वैद्युतअपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) के दौरान, जब अशुद्ध धातु के एनोड से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो विलेय अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं और जो अविलेय (Insoluble) अशुद्धियाँ एनोड के नीचे पेंदे में जमा हो जाती हैं, उन्हें एनोड मड या एनोड पंख कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु व उदाहरण:
- इस तलछट में अक्सर सोना (Gold), चांदी (Silver), एंटीमनी, सेलेनियम और टेल्यूरियम जैसी कीमती और भारी धातुएं शामिल होती हैं।
- यह प्रक्रिया मुख्य रूप से तांबा (Copper), जिंक (Zinc) और निकेल जैसी धातुओं के शोधन में देखने को मिलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 14/12/2025) में धातु कर्म एवं रासायनिक प्रक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) मृदा और जल का विलयन: गलत, इसका वैद्युत अपघटन या धातु शोधन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (B) वैद्युतअपघटनी परिष्करण में कैथोड पर निक्षेपित अविलेय अशुद्धियाँ: गलत, कैथोड पर हमेशा शुद्ध धातु जमा होती है, अविलेय अशुद्धियाँ नहीं।
- विकल्प (C) वैद्युतअपघटनी परिष्करण में विलयन में विलेय अशुद्धियाँ: गलत, जो अशुद्धियाँ विलयन में घुल जाती हैं उन्हें विलेय अशुद्धियाँ कहा जाता है, एनोड पंख (Anode Mud) अविलेय अशुद्धियों को कहते हैं जो नीचे बैठती हैं।
#3. किस प्रकार की परिष्करण विधि में परिष्करण कर्मक मिलाकर अशुद्धियों को यौगिकों में परिवर्तित किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) रासायनिक विधि
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक परिष्करण (Chemical Refining): इस विधि में अशुद्ध धातु के साथ उपयुक्त अभिकर्मक (Reagent/Flux) या परिष्करण कर्मक मिलाया जाता है, जो अशुद्धियों के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके उन्हें वाष्पशील या आसानी से अलग होने वाले यौगिकों (जैसे स्लैग या तलछट) में बदल देता है।
- प्रमुख उदाहरण:
- मॉन्ड प्रक्रम (Mond Process): निकेल के शोधन के लिए (कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ)।
- वैन अरकल विधि (Van Arkel Method): जिरकोनियम या टाइटेनियम के शोधन के लिए।
- कूपेलैशन (Cupellation) या प्रहलन: धातुओं में मौजूद अशुद्धियों को रासायनिक रूप से ऑक्सीकृत करना।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21/12/2025) में धातु कर्म एवं परिष्करण विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) विद्युत-रासायनिक विधि: गलत, इसमें विद्युत धारा प्रवाहित करके (जैसे वैद्युत अपघटन) धातु का शोधन किया जाता है, न कि रासायनिक अभिकर्मक मिलाकर यौगिकों में बदला जाता है।
- विकल्प (C) आयनिक विधि: गलत, यह धातु कर्म में परिष्करण की कोई मुख्य मानक श्रेणी नहीं है।
- विकल्प (D) भौतिक विधि: गलत, भौतिक विधियों (जैसे आसवन या द्रवण) में भौतिक गुणों के अंतर का उपयोग होता है, रासायनिक कर्मक का नहीं।
#4. लवण जल के विद्युत अपघटन के दौरान, निम्नलिखित में से कौन-सा, प्रत्येक इलेक्ट्रोड और विलयन में निर्मित होने वाले उत्पादों से सुमेलित है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) एनोड – Cl 2 , कैथोड – H 2 , विलयन – NaOH
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोरो-क्षार प्रक्रिया (Chlor-Alkali Process): जब सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (जिसे ब्राइन या लवण जल कहा जाता है) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रोक्साइड $(\text{NaOH})$, क्लोरीन गैस $(\text{Cl}_2)$ और हाइड्रोजन गैस $(\text{H}_2)$ बनाता है।
- उत्पादों की स्थिति:
- एनोड पर: क्लोराइड आयन $(\text{Cl}^-)$ ऑक्सीकृत होकर क्लोरीन गैस $(\text{Cl}_2)$ बनाते हैं।
- कैथोड पर: जल के अणु अपचयित होकर हाइड्रोजन गैस $(\text{H}_2)$ मुक्त करते हैं।
- विलयन में: कैथोड के पास सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(\text{NaOH})$ का निर्माण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 30/12/2025) में रासायनिक अभिक्रियाओं एवं विद्युत अपघटन के अनुप्रयोगों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B), (C) और (D): गलत, इनमें इलेक्ट्रोड (एनोड और कैथोड) पर मुक्त होने वाली गैसें तथा विलयन में बचने वाले उत्पाद $(\text{NaOH})$ का सही सुमेल नहीं दिया गया है। क्लोरीन हमेशा एनोड पर और हाइड्रोजन हमेशा कैथोड पर ही बनती है।
#5. क्लोर-क्षारीय प्रक्रिया के दौरान, निम्नलिखित में से कौन सा उत्पाद सीधे लवण के विद्युत अपघटन से प्राप्त नहीं होता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025)
✨ सही उत्तर: (D) कैथोड पर निक्षेपित सोडियम धातु (Sodium metal deposited at the cathode)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-Alkali Process): इस प्रक्रिया में सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) का विद्युत अपघटन किया जाता है। चूँकि यह विलयन जलीय होता है, इसलिए कैथोड पर सोडियम धातु ($\text{Na}$) जमा होने के बजाय जल का अपचयन होकर हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) मुक्त होती है।
- मुख्य उत्पाद:
- एनोड पर: क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) प्राप्त होती है।
- कैथोड पर: हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) प्राप्त होती है।
- विलयन में: सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$) का निर्माण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08/12/2025) में रासायनिक प्रक्रियाओं एवं विद्युत अपघटन के सिद्धांतों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कैथोड पर हाइड्रोजन गैस: सही है, यह प्रक्रिया के दौरान कैथोड पर सीधे प्राप्त होती है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता।
- विकल्प (B) सोडियम हाइड्रोक्साइड विलयन: सही है, यह इलेक्ट्रोड प्रक्रिया के बाद विलयन में सीधे निर्मित होता है।
- विकल्प (C) एनोड पर क्लोरीन गैस: सही है, यह एनोड पर सीधे प्राप्त होने वाला उत्पाद है।
#6. धातुओं के वैद्युतअपघटनी परिष्करण की प्रक्रिया के दौरान, विद्युतअपघट्य से धारा प्रवाहित करने पर, ____________ से अशुद्ध धातु, विद्युत अपघट्य में विलीन हो जाती है।
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) एनोड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- वैद्युतअपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining): इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को धनात्मक इलेक्ट्रोड यानी एनोड (Anode) बनाया जाता है और शुद्ध धातु की पतली चादर को ऋणात्मक इलेक्ट्रोड यानी कैथोड (Cathode) बनाया जाता है।
- प्रक्रिया की कार्यप्रणाली:
- जब विद्युत अपघट्य (electrolyte) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो अशुद्ध धातु एनोड से घुलकर आयनों के रूप में विद्युत अपघट्य (विलयन) में आ जाती है।
- उतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु विलयन से कैथोड पर जाकर जमा हो जाती है, जबकि अशुद्धियाँ नीचे एनोड मड के रूप में बैठ जाती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 01/12/2025) में धातुओं के परिष्करण एवं विद्युत रसायन के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) लवण सेतु (Salt Bridge): गलत, लवण सेतु का उपयोग गैल्वेनिक/वोल्टीय सेल में आयनों का संतुलन बनाए रखने के लिए होता है, न कि धातु के शोधन या विलीन होने के लिए।
- विकल्प (B) एनोड और कैथोड दोनों: गलत, केवल एनोड (अशुद्ध धातु) से धातु विलीन होती है, कैथोड पर धातु जमा होती है।
- विकल्प (C) कैथोड: गलत, कैथोड पर धातु विलयन से आकर निक्षेपित (जमा) होती है, न कि वहाँ से धातु विलीन होकर विलयन में जाती है।
#7. विद्युत अपघटनी परिष्करण में शुद्ध धातु का उपयोग ………… के रूप में किया जाता है।
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025)
✨ सही उत्तर: (C) एक कैथोड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining): धातुओं के शोधन की इस प्रक्रिया में शुद्ध धातु और अशुद्ध धातु दोनों का एक निश्चित सेटअप होता है, जिसमें इलेक्ट्रोड की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
- इलेक्ट्रोड की व्यवस्था:
- एनोड (Anode): यह अशुद्ध धातु की एक मोटी छड़ या प्लेट होती है, जो विद्युत धारा प्रवाहित होने पर विलयन में घुलती है।
- कैथोड (Cathode): यह उसी धातु की शुद्ध और पतली चादर होती है, जिस पर विद्युत अपघट्य से शुद्ध धातु आकर जमा (निक्षेपित) होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21/12/2025) में धातु कर्म एवं विद्युत अपघटन के सिद्धांतों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सल्फर: गलत, सल्फर का विद्युत अपघटनी परिष्करण में इलेक्ट्रोड के रूप में कोई उपयोग नहीं है।
- विकल्प (B) एक एनोड: गलत, एनोड के रूप में हमेशा अशुद्ध धातु का उपयोग किया जाता है, शुद्ध धातु का नहीं।
- विकल्प (D) एक इलेक्ट्रोलाइट: गलत, इलेक्ट्रोलाइट धातु के लवण का विलयन होता है, न कि ठोस शुद्ध धातु।
#8. निम्नलिखित में से कौन-सी विधि अशुद्ध धातुओं को शोधित करने के लिए उपयोग की जाती है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) विद्युत अपघटनी शोधन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining): कॉपर, जिंक, टिन, निकेल, सिल्वर और गोल्ड जैसी कई धातुओं को शुद्ध (शोधित) करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली प्रमुख औद्योगिक विधि है।
- प्रक्रिया के मुख्य चरण:
- इसमें अशुद्ध धातु का एनोड और शुद्ध धातु की पतली चादर का कैथोड बनाया जाता है।
- धातु के लवण के जलीय विलयन को विद्युत अपघट्य के रूप में उपयोग किया जाता है।
- धारा प्रवाहित करने पर अशुद्ध धातु एनोड से घुलती है और शुद्ध धातु कैथोड पर जाकर जमा हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1) में धातुओं के निष्कर्षण एवं शोधन (Metallurgy) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) चित्रकारी (Painting): गलत, यह धातुओं को जंग या संक्षारण से बचाने की एक सतह सुरक्षा विधि है, शोधन विधि नहीं।
- विकल्प (C) तैलीकरण (Oiling): गलत, यह भी धातुओं को नमी और संक्षारण से सुरक्षित रखने का एक तरीका है।
- विकल्प (D) यशदीकरण (Galvanization): गलत, यह लोहे या स्टील को जंग से बचाने के लिए उन पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाने की प्रक्रिया है।
#9. CH 3 OH, C 2 H 5 OH, C 3 H 7 OH और C 4 H 9 OH यौगिक लगभग समान रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं क्योंकि वे ______ से संबंधित हैं।
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) एक समजातीय श्रेणी
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- समजातीय श्रेणी (Homologous Series): यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें एक ही क्रियात्मक समूह (Functional Group) मौजूद होता है और क्रमिक सदस्यों के बीच $-\text{CH}_2-$ इकाई का अंतर होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- दिए गए यौगिक ($\text{CH}_3\text{OH}$, $\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$, $\text{C}_3\text{H}_7\text{OH}$, $\text{C}_4\text{H}_9\text{OH}$) एल्कोहॉल श्रेणी के सदस्य हैं, जिनमें $-\text{OH}$ क्रियात्मक समूह समान है।
- एक ही श्रेणी के होने के कारण इनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, जबकि आणविक द्रव्यमान बढ़ने से इनके भौतिक गुणों (जैसे क्वथनांक) में क्रमिक परिवर्तन होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 1) में कार्बन यौगिक एवं समजातीय श्रेणी के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एक आवर्त श्रेणी: गलत, आवर्त श्रेणी आवर्त सारणी के तत्वों से संबंधित है, कार्बनिक यौगिकों की इस श्रृंखला से नहीं।
- विकल्प (C) एक विषमजातीय श्रेणी: गलत, यह कार्बनिक रसायन में कोई मानक या सही श्रेणीबद्ध नाम नहीं है।
- विकल्प (D) एक विद्युत रासायनिक श्रेणी: गलत, यह धातुओं की अभिक्रियाशीलता और उनके मानक अपचयन विभव पर आधारित होती है।
#10. सक्रियता श्रृंखला के मध्य में धातुएँ, जैसे लोह और जिंक, सामान्यतः ______ द्वारा निष्कर्षित की जाती हैं।
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) कार्बन या कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ उनके ऑक्साइड के अपचयन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सक्रियता श्रेणी के मध्य की धातुएँ (Metals in the Middle of Activity Series): जिंक (Zn), आयरन (Fe), लेड (Pb), कॉपर (Cu) जैसी मध्यम अभिक्रियाशीलता वाली धातुएँ प्रकृति में आमतौर पर सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।
- निष्कर्षण की प्रक्रिया:
- सबसे पहले इन अयस्कों को भर्जन (Roasting) या निस्तापन (Calcination) द्वारा धातु ऑक्साइड में बदला जाता है।
- इसके बाद इन धातु ऑक्साइडों का कार्बन (कोक) या कार्बन मोनोऑक्साइड का उपयोग करके अपचयन (Reduction) किया जाता है, जिससे शुद्ध धातु प्राप्त होती है (जैसे जिंक ऑक्साइड को कोक के साथ गर्म करना)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09/03/2026) में धातु कर्म एवं धातुओं के निष्कर्षण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) बिना अपचायी कर्मक के तापन: गलत, यह केवल बहुत कम सक्रिय धातुओं (जैसे पारे या कॉपर के कुछ अयस्कों) के लिए लागू होता है, मध्य सक्रिय धातुओं के ऑक्साइडों के लिए अपचायक (कार्बन) की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (C) गलित लवणों के विद्युत-अपघटन: गलत, इस विधि का उपयोग सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर आने वाली अत्यधिक सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम) के निष्कर्षण के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) जलीय विलयन से विस्थापन: गलत, यह धातुओं की सक्रियता की तुलना करने के लिए प्रयोगशाला या रासायनिक परीक्षणों में उपयोग होता है, औद्योगिक निष्कर्षण का मुख्य तरीका नहीं है।
#11. सोडियम हाइड्रॉक्साइड ( NaOH) के उत्पादन के लिए आमतौर पर किस औद्योगिक विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) लवण जल के विद्युत अपघटन द्वारा
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड का उत्पादन (Production of Sodium Hydroxide): सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(\text{NaOH})$ का बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-Alkali Process) यानी लवण जल के विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है।
- प्रक्रिया विवरण:
- जब सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है।
- इस प्रक्रिया के दौरान कैथोड पर हाइड्रोजन गैस, एनोड पर क्लोरीन गैस तथा विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(\text{NaOH})$ प्राप्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16 Dec, 2024 Shift 2) में रासायनिक यौगिकों के औद्योगिक निर्माण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) कैस्ट्रनर-केल्नर प्रक्रम: यद्यपि यह भी सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनाने की एक विधि है (जो क्लोर-क्षार सेल का ही एक प्रकार है), लेकिन इस प्रकार के बहुविकल्पीय प्रश्नों में सामान्य एवं व्यापक औद्योगिक नाम **’लवण जल के विद्युत अपघटन द्वारा’** को प्राथमिक एवं सही मानक उत्तर माना जाता है।
- विकल्प (C) संपर्क प्रक्रम (Contact Process): गलत, इसका उपयोग सल्फ्यूरिक अम्ल $(\text{H}_2\text{SO}_4)$ के उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) हाबर प्रक्रम (Haber Process): गलत, इसका उपयोग अमोनिया $(\text{NH}_3)$ के औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है।
#12. निम्नलिखित में से किसे वोल्टेक सेल कहा जाता है?
(RPF Constable 2018 25 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) गैल्वानी सेल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- वोल्टेक सेल / गैल्वानी सेल (Voltaic Cell / Galvanic Cell): यह एक ऐसा वैद्युत रासायनिक सेल है जो स्वतः होने वाली रेडॉक्स (Redox) अभिक्रियाओं के माध्यम से रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। इसे वैज्ञानिक अलेक्सांद्रो वोल्टा के सम्मान में ‘वोल्टेक सेल’ भी कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- गैल्वानी सेल और वोल्टेक सेल मूल रूप से एक ही प्रकार के ऊर्जा रूपांतरक उपकरणों के दो नाम हैं।
- इसमें एनोड पर ऑक्सीकरण और कैथोड पर अपचयन की प्रक्रिया होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 25 Jan, 2019 Shift 1) में विद्युत रसायन (Electrochemistry) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) क्लार्क सेल: गलत, यह एक विशेष प्रकार का प्राथमिक मानक सेल है जिसका उपयोग मुख्य रूप से विद्युत विभव (Voltage) के सटीक मानक संदर्भ के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) इलेक्ट्रोलाइट सेल (वैद्युत अपघटनी सेल): गलत, यह सेल विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके गैर-स्वतः (Non-spontaneous) रासायनिक अभिक्रियाओं को संपन्न कराता है, जो गैल्वानी सेल के ठीक विपरीत कार्य करता है।
- विकल्प (C) आयनिक सेल: गलत, यह रसायन विज्ञान में किसी मानक या मुख्य सेल का नाम नहीं है।
#13. वैद्युतअपघटनी परिष्करण में, अशुद्ध धातु का उपयोग ____________ के रूप में किया जाता है।
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) एनोड ( anode)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- वैद्युतअपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining): कॉपर, जिंक, टिन, निकेल आदि धातुओं को शुद्ध करने की इस औद्योगिक प्रक्रिया में इलेक्ट्रोड की एक निश्चित व्यवस्था होती है।
- इलेक्ट्रोड की भूमिका:
- एनोड (Anode): इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु की मोटी छड़ या प्लेट को धनात्मक इलेक्ट्रोड (एनोड) बनाया जाता है, जो विद्युत धारा प्रवाहित करने पर धीरे-धीरे घुलकर विलयन में चली जाती है।
- कैथोड (Cathode): उसी धातु की शुद्ध और पतली चादर को ऋणात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) बनाया जाता है, जिस पर शुद्ध धातु आकर जमा होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09/02/2026) में धातुओं के शोधन एवं विद्युत रसायन के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) पृथक्चित्र (Separator): गलत, यह बैटरी या कुछ विशिष्ट सेलों में धनात्मक और ऋणात्मक इलेक्ट्रोड को अलग रखने वाली पर्दा नुमा संरचना होती है, शोधन में अशुद्ध धातु के रूप में प्रयुक्त नहीं होती।
- विकल्प (C) कैथोड (Cathode): गलत, कैथोड के रूप में हमेशा शुद्ध धातु की चादर का उपयोग किया जाता है, अशुद्ध धातु का नहीं।
- विकल्प (D) वैद्युतअपघट्य (Electrolyte): गलत, वैद्युतअपघट्य धातु के लवण का जलीय विलयन होता है, न कि ठोस अशुद्ध धातु।
#14. विद्युत अपघटनी परिष्करण प्रक्रिया में, धारा प्रवाहित करने पर अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं, उन अशुद्धियों को ____________ के रूप में जाना जाता है।
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) एनोड पंक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एनोड पंक (Anode Mud / Anode Pank): धातुओं के विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining) के दौरान, जब अशुद्ध धातु के एनोड से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो विलेय अशुद्धियाँ विलयन में घुल जाती हैं और अविलेय (Insoluble) अशुद्धियाँ एनोड के नीचे पेंदे में तलछट के रूप में जमा हो जाती हैं, जिन्हें एनोड पंक कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- इस तलछट में अक्सर सोना (Gold), चांदी (Silver), और प्लेटिनम जैसी कीमती धातुएं शामिल होती हैं।
- यह तांबा, जिंक और निकेल जैसी औद्योगिक धातुओं के शोधन में सामान्य रूप से पाया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2) में धातु कर्म एवं रासायनिक प्रक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कैथोड पंक: गलत, कैथोड पर हमेशा शुद्ध धातु जमा होती है, वहाँ किसी प्रकार का पंक या तलछट जमा नहीं होता।
- विकल्प (B) विद्युतअपघटनी पंक: गलत, यह रसायन विज्ञान में कोई मानक तकनीकी नाम नहीं है, सही शब्द एनोड पंक है।
- विकल्प (C) गैंग (Gangue): गलत, अयस्क में मौजूद अवांछित मिट्टी, रेत और rocky अशुद्धियों को गैंग (मैट्रिक्स) कहा जाता है, जो शोधन के बाद नीचे बैठने वाली तलछट से भिन्न है।
#15. क्लोर-क्षार प्रक्रिया के दौरान, विभिन्न इलेक्ट्रोडों पर निर्मित होने वाले उत्पादों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB ALP CBT 1 18/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) कैथोड पर हाइड्रोजन गैस तथा ऐनोड पर क्लोरीन गैस विमुक्त होती है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोरो-क्षार प्रक्रिया (Chlor-Alkali Process): सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर महत्वपूर्ण उत्पाद बनाता है। इसे क्लोर-क्षार प्रक्रिया इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें क्लोरीन (Chlor) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (Alkali/क्षार) प्राप्त होते हैं।
- इलेक्ट्रोड उत्पाद:
- एनोड (Anode): इस धनात्मक इलेक्ट्रोड पर क्लोराइड आयन ऑक्सीकृत होकर क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) मुक्त करते हैं।
- कैथोड (Cathode): इस ऋणात्मक इलेक्ट्रोड पर जल के अपचयन से हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) विमुक्त होती है।
- विलयन में: कैथोड के पास सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$) का निर्माण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 18/02/2026) में विद्युत अपघटन एवं रासायनिक प्रक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) कैथोड पर क्लोरीन गैस तथा ऐनोड पर हाइड्रोजन गैस: गलत, गैसों के इलेक्ट्रोड स्थान परस्पर विपरीत लिखे गए हैं (क्लोरीन हमेशा एनोड पर और हाइड्रोजन हमेशा कैथोड पर बनती है)।
- विकल्प (C) ऐनोड पर सोडियम हाइड्रोक्साइड और कैथोड पर क्लोरीन: गलत, सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में बनता है न कि एनोड पर, और क्लोरीन एनोड पर निकलती है कैथोड पर नहीं।
- विकल्प (D) ऐनोड पर सोडियम हाइड्रोक्साइड और हाइड्रोजन गैस: गलत, ये दोनों उत्पाद एनोड पर नहीं बल्कि हाइड्रोजन कैथोड पर और सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में बनता है।
#16. विद्युत अपघटनी शोधन में अशुद्ध धातु का उपयोग निम्नलिखित में से किसके रूप में किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025)
✨ सही उत्तर: (D) एनोड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining): तांबा, जिंक, टिन, निकेल और चांदी जैसी धातुओं को शुद्ध करने की इस औद्योगिक प्रक्रिया में इलेक्ट्रोडों की एक विशेष व्यवस्था होती है।
- इलेक्ट्रोड की स्थिति:
- एनोड (Anode): इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु की मोटी छड़ या प्लेट को धनात्मक इलेक्ट्रोड (एनोड) के रूप में उपयोग किया जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह धीरे-धीरे घुलकर विलयन में चली जाती है।
- कैथोड (Cathode): उसी धातु की शुद्ध और पतली चादर को ऋणात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) बनाया जाता है, जिस पर शुद्ध धातु आकर जमा होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में धातुओं के परिष्करण एवं विद्युत रसायन के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) लवण: गलत, लवण का उपयोग धातु के रूप में इलेक्ट्रोड पर नहीं किया जाता।
- विकल्प (B) इलेक्ट्रोलाइट: गलत, इलेक्ट्रोलाइट धातु के लवण का जलीय विलयन होता है, न कि ठोस अशुद्ध धातु।
- विकल्प (C) कैथोड: गलत, कैथोड के रूप में हमेशा शुद्ध धातु की चादर का उपयोग किया जाता है, अशुद्ध धातु का नहीं।
#17. धातुओं के संक्षारण को रोकने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी विधि प्रभावी नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025)
✨ सही उत्तर: (B) नमी के संपर्क में आना
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संक्षारण और उसके बचाव (Corrosion and Prevention): धातुओं का संक्षारण (जैसे लोहे में जंग लगना) तब होता है जब धातुें हवा, ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आती हैं। इसलिए, नमी के संपर्क में आना संक्षारण को रोकने की विधि नहीं, बल्कि संक्षारण को बढ़ावा देने वाला मुख्य कारण है।
- संक्षारण रोकने की प्रभावी विधियाँ:
- पेंटिंग (Painting): सतह को हवा और नमी से बचाने के लिए पेंट करना।
- गैल्वेनीकरण (Galvanization): लोहे पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाना।
- उत्सर्जी एनोड लगाना (Sacrificial Anode / कैथोडिक सुरक्षा): अधिक सक्रिय धातु को एनोड के रूप में उपयोग करके मुख्य धातु की रक्षा करना।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/12/2025) में धातुओं के संक्षारण एवं उनकी सुरक्षा के उपायों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) पेंटिंग: यह संक्षारण रोकने की एक प्रभावी विधि है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता।
- विकल्प (C) उत्सर्जी एनोड लगाना: यह भी भूमिगत पाइपों और जहाजों को जंग से बचाने की एक अत्यधिक प्रभावी तकनीक है।
- विकल्प (D) गैल्वेनीकरण: यह लोहे और स्टील को संक्षारण से बचाने की सबसे लोकप्रिय और प्रभावी विधियों में से एक है।
#18. उच्च अभिक्रियाशीलता श्रेणी वाली धातुओं को निष्कर्षित करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) इलेक्ट्रोलिटिक अपचयन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उच्च अभिक्रियाशीलता वाली धातुएँ (High Reactivity Metals): सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर आने वाली धातुएँ (जैसे सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम) ऑक्सीजन के प्रति अत्यधिक आत्मीयता रखती हैं, इसलिए कार्बन जैसे साधारण अपचायक इनके ऑक्साइडों से ऑक्सीजन को अलग नहीं कर सकते।
- निष्कर्षण की विधि (Electrolytic Reduction): इन धातुओं को उनके शुद्ध रूप में प्राप्त करने के लिए उनके गलित क्लोराइडों या ऑक्साइडों का विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction) किया जाता है, जिसमें धातु कैथोड पर जमा होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 30/12/2025) में धातु कर्म एवं धातुओं के निष्कर्षण के सिद्धांतों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) निस्तापन (Calcination): गलत, इसका उपयोग कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) कार्बन के साथ गर्म करना: गलत, इसका उपयोग सक्रियता श्रेणी के मध्य में आने वाली मध्यम अभिक्रियाशीलता वाली धातुओं (जैसे जिंक, आयरन, लेड) के निष्कर्षण के लिए होता है।
- विकल्प (C) भर्जन (Roasting): गलत, इसका उपयोग सल्फाइड अयस्कों को वायु की अधिकता में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है।
#19. तांबे के विद्युत अपघटनी शोधन में, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इलेक्ट्रोड की भूमिका का सही वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026)
✨ सही उत्तर: (C) अशुद्ध तांबे का उपयोग एनोड के रूप में और शुद्ध तांबे का उपयोग कैथोड के रूप में किया जाता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- तांबे का विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining of Copper): तांबे जैसी धातुओं को अत्यधिक शुद्ध रूप में प्राप्त करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण की विधि का उपयोग किया जाता है।
- इलेक्ट्रोड की व्यवस्था:
- एनोड (Anode): इस प्रक्रिया में अशुद्ध तांबे की मोटी प्लेट को धनात्मक इलेक्ट्रोड (एनोड) बनाया जाता है, जो विद्युत धारा प्रवाहित होने पर घुलकर विलयन में चली जाती है।
- कैथोड (Cathode): शुद्ध तांबे की एक पतली चादर को ऋणात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) बनाया जाता है, जिस पर विलयन से शुद्ध तांबा आकर जमा होता है।
- विद्युत अपघट्य: अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन $(\text{CuSO}_4 + \text{H}_2\text{SO}_4)$ का उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/02/2026) में धातुओं के शोधन एवं विद्युत रसायन के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) शुद्ध तांबे का उपयोग एनोड और अशुद्ध का कैथोड: गलत, यह भूमिकाओं के बिल्कुल विपरीत है (अशुद्ध धातु हमेशा एनोड होती है और शुद्ध धातु कैथोड)।
- विकल्प (B) और (D): गलत, यदि दोनों इलेक्ट्रोड एक ही तरह (या तो शुद्ध या दोनों अशुद्ध) के होंगे, तो धातु का स्थानांतरण और शोधन संभव नहीं हो पाएगा।
#20. कॉपर की वैद्युतअपघटनी परिष्करण प्रक्रिया में, निम्नलिखित में से कौन-सा सुमेलित है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) वैद्युतअपघट्य – अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कॉपर का वैद्युतअपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining of Copper): इस औद्योगिक प्रक्रिया में कॉपर के शोधन के लिए एक निश्चित रासायनिक और भौतिक सेटअप तैयार किया जाता है।
- घटकों का सही मिलान:
- विद्युत अपघट्य (Electrolyte): इसमें अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन ($\text{CuSO}_4 + \text{H}_2\text{SO}_4$) का उपयोग किया जाता है, जो आयनों के आदान-प्रदान में मदद करता है।
- एनोड (Anode): अशुद्ध तांबे की मोटी प्लेट।
- कैथोड (Cathode): शुद्ध तांबे की पतली चादर।
- एनोड मड (Anode Mud): एनोड के नीचे बैठने वाली अविलेय अशुद्धियाँ (जैसे सोना, चांदी आदि)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09/03/2026) में धातुओं के शोधन एवं विद्युत रसायन के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कैथोड – अशुद्ध कॉपर: गलत, कैथोड हमेशा शुद्ध कॉपर की चादर होती है, अशुद्ध कॉपर नहीं।
- विकल्प (C) कैथोड पंक – शुद्ध कॉपर के क्रिस्टल: गलत, कैथोड पर शुद्ध कॉपर जमा होता है, जबकि पंक (तलछट) एनोड के नीचे अविलेय अशुद्धियों के रूप में बैठता है जिसे एनोड पंक कहते हैं।
- विकल्प (D) एनोड – शुद्ध कॉपर: गलत, एनोड के रूप में ہمیشہ अशुद्ध कॉपर की प्लेट का उपयोग किया जाता है।
#21. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा का सही वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) सेल के धनात्मक टर्मिनल से ऋणात्मक टर्मिनल तक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- पारंपरिक विद्युत धारा (Conventional Current): ऐतिहासिक रूप से जब विद्युत धारा की खोज हुई थी, तब वैज्ञानिकों (जैसे बेंजामिन फ्रैंकलिन) ने यह माना था कि विद्युत धारा धनात्मक आवेशों के प्रवाह की दिशा में चलती है। इसलिए पारंपरिक रूप से धारा की दिशा सेल के धनात्मक टर्मिनल से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर मानी जाती है।
- इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से संबंध:
- वास्तविक रूप में किसी चालक तार में विद्युत धारा का प्रवाह मुक्त इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण होता है।
- चूंकि इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक रूप से आवेशित होते हैं, इसलिए उनका प्रवाह हमेशा ऋणात्मक टर्मिनल से धनात्मक टर्मिनल की ओर होता है, जो पारंपरिक धारा की दिशा के ठीक विपरीत है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 16/12/2025) में विद्युत धारा एवं उसके बुनियादी सिद्धांतों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सेल के ऋणात्मक टर्मिनल से धनात्मक टर्मिनल तक: गलत, यह इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा है, पारंपरिक विद्युत धारा की नहीं।
- विकल्प (B) दिशा यादृच्छिक होती है: गलत, बंद परिपथ में विद्युत धारा एक निश्चित और निश्चित दिशा में प्रवाहित होती है।
- विकल्प (C) इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के समान: गलत, पारंपरिक धारा हमेशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत दिशा में मानी जाती है।
#22. बॉक्साइट से ऐलुमिनियम निष्कर्षण के लिए किस प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) पिघले हुए ऐलुमिनियम ऑक्साइड का विद्युत अपचटन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऐलुमिनियम का निष्कर्षण (Extraction of Aluminium): ऐलुमिनियम एक अत्यधिक सक्रिय धातु है (सक्रियता श्रेणी में ऊपर आती है), इसलिए इसके मुख्य अयस्क बॉक्साइट ($\text{Al}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$) से ऐलुमिनियम प्राप्त करने के लिए साधारण रासायनिक अपचयन (कार्बन द्वारा) का उपयोग नहीं किया जा सकता।
- हॉल-हेरोल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult Process):
- इस विधि में शुद्ध ऐलुमिनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($\text{Na}_3\text{AlF}_6$) और फ्लुאָरस्पार में घोला जाता है ताकि इसकी चालकता बढ़ सके।
- इसके बाद इस पिघले हुए मिश्रण का **विद्युत अपघटन (Electrolytic Reduction)** किया जाता है, जिससे शुद्ध ऐलुमिनियम कैथोड पर जमा हो जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02/02/2026) में धातु कर्म एवं धातुओं के निष्कर्षण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) निस्तापन के बाद कार्बन अपचयन: गलत, कार्बन ऐलुमिनियम ऑक्साइड से ऑक्सीजन को अलग नहीं कर सकता क्योंकि ऐलुमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति आत्मीयता बहुत अधिक होती है।
- विकल्प (B) भर्जन के बाद अपचयन: गलत, यह विधि मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों और मध्यम सक्रिय धातुओं के लिए होती है।
- विकल्प (C) जस्ता द्वारा विस्थापन: गलत, जस्ता ऐलुमिनियम की तुलना में कम सक्रिय धातु है, इसलिए यह विस्थापन अभिक्रिया संभव नहीं है।
#23. विद्युत अपघटन द्वारा धातुओं के शोधन के दौरान प्रयुक्त विद्युत अपघट्य का आवश्यक गुण क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) यह किसी उपयुक्त धातु लवण का जलीय या पिघला हुआ घोल होना चाहिए
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत अपघट्य (Electrolyte): धातुओं के विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining) में विद्युत अपघट्य वह माध्यम होता है जो एनोड से धातु के आयनों को कैथोड तक पहुँचाने का काम करता है।
- आवश्यक गुण:
- विद्युत अपघट्य हमेशा उस धातु के लवण का जलीय विलयन या पिघला हुआ रूप होना चाहिए जिसे शोधित किया जाना है (जैसे कॉपर के शोधन के लिए अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन)।
- यह आयनों के स्वतंत्र संचालन द्वारा विद्युत धारा का सुचालक होना चाहिए ताकि अपचयन और ऑक्सीकरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10/02/2026) में विद्युत रसायन एवं धातुओं के परिष्करण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) पूरी तरह गैर-प्रतिक्रियाशील रहना चाहिए: गलत, विद्युत अपघट्य को आयनों के आदान-प्रदान और रासायनिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना पड़ता है, यह पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हो सकता।
- विकल्प (C) ऊष्मा का चालन करना चाहिए: गलत, मुख्य आवश्यकता विद्युत (आवेश) का चालन करना है, न कि ऊष्मा का चालन करना।
- विकल्प (D) जल और उदासीन तेल की परत: गलत, इसका विद्युत अपघटनी शोधन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
#24. यौगिक के माध्यम से बिजली पास करके एक यौगिक के रासायनिक अपघटन के उत्पादन की प्रक्रिया को ________ कहा जाता है。
(RRB JE Electronics 01 Sep 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) विद्युत-अपघटन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत-अपघटन (Electrolysis): जब किसी रासायनिक यौगिक के जलीय विलयन या गलित (Molten) अवस्था में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह यौगिक अपने आयनों में अपघटित (वियोजित) हो जाता है। विद्युत ऊर्जा के प्रभाव से होने वाले इस रासायनिक अपघटन की प्रक्रिया को विद्युत-अपघटन कहते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- इस प्रक्रिया में विद्युत ऊर्जा का रूपांतरण रासायनिक ऊर्जा में होता है।
- इसमें धनात्मक इलेक्ट्रोड (एनोड) पर ऑक्सीकरण और ऋणात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) पर अपचयन की क्रिया होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE Electronics : 01 Sep, 2019 Shift 2) में विद्युत रसायन (Electrochemistry) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) विद्युत-अपघट्य (Electrolyte): गलत, यह वह पदार्थ या विलयन है जिससे होकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, न कि अपघटन की पूरी प्रक्रिया।
- विकल्प (C) विद्युतलेपन (Electroplating): गलत, यह विद्युत धारा का उपयोग करके किसी धातु की सतह पर अन्य धातु की परत चढ़ाने की विधि है।
- विकल्प (D) वैद्युतकणसंचलन (Electrophoresis): गलत, यह किसी विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में कोलाइडियल कणों या अणुओं की गति से संबंधित तकनीक है।
#25. क्लोर-क्षार प्रक्रिया के बारे में सही कथन की पहचान कीजिए
。(RRB JE 20/02/2026)
✨ सही उत्तर: (B) कैथोड पर हाइड्रोजन गैस और एनोड पर क्लोरीन गैस बनती है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोरो-क्षार प्रक्रिया (Chlor-Alkali Process): सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर महत्वपूर्ण उत्पाद बनाता है। इसे यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि इससे क्लोरीन (Chlor) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड यानी क्षार (Alkali) प्राप्त होते हैं।
- इलेक्ट्रोड उत्पाद और स्थिति:
- एनोड (Anode): इस धनात्मक इलेक्ट्रोड पर क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) विमुक्त होती है।
- कैथोड (Cathode): इस ऋणात्मक इलेक्ट्रोड पर हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) विमुक्त होती है।
- विलयन में: कैथोड के पास सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$) का निर्माण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में रासायनिक प्रक्रियाओं एवं विद्युत अपघटन के अनुप्रयोगों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) Na2CO3 विलयन तैयार करना: गलत, इस प्रक्रिया से सोडियम कार्बोनेट नहीं बल्कि सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$) तैयार किया जाता है।
- विकल्प (C) एनोड के पास सोडियम हाइड्रोक्साइड: गलत, सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में और मुख्य रूप से कैथोड के पास बनता है, एनोड पर नहीं।
- विकल्प (D) एनोड में NaOH और कैथोड में क्लोरीन: गलत, उत्पाद और उनके इलेक्ट्रोड स्थान पूरी तरह विपरीत दिए गए हैं (क्लोरीन एनोड पर और NaOH विलयन में बनता है)।
#26. कॉपर, जिंक और सिल्वर जैसी धातुओं का परिष्करण करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (C) विद्युत अपघटनी परिष्करण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining): कॉपर (Cu), जिंक (Zn), सिल्वर (Ag), गोल्ड (Au), टिन और निकेल जैसी कई महत्वपूर्ण धातुओं को अत्यधिक उच्च शुद्धता में प्राप्त करने के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण सबसे प्रमुख और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली औद्योगिक विधि है।
- प्रक्रिया का स्वरूप:
- इस विधि में अशुद्ध धातु को एनोड और शुद्ध धातु की पतली चादर को कैथोड बनाया जाता है।
- धातु के लवण के विलयन को विद्युत अपघट्य के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 10/03/2026) में धातु कर्म एवं परिष्करण विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आसवन (Distillation): गलत, इसका उपयोग मुख्य रूप से कम क्वथनांक वाली वाष्पशील धातुओं (जैसे जिंक और पारा) के शोधन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) निष्कर्षण (Extraction): गलत, यह अयस्क से धातु को बाहर निकालने की प्रारंभिक प्रक्रिया है, शुद्ध करने की परिष्करण विधि नहीं।
- विकल्प (D) प्रगलन (Smelting): गलत, यह अयस्क को उसके ऑक्साइड से पिघलाकर धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया है (जैसे भट्टी में कोक के साथ गर्म करना)।
#27. निम्नलिखित में से किसमें एक निश्चित प्रतिरूप में चांदी के तारों के साथ बड़ी संख्या में जुड़े सौर सेल शामिल हैं?
(RRB JE CE 28 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (D) सौर सेल पैनल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सौर सेल पैनल (Solar Cell Panel): जब कई सारे सौर सेलों (Solar Cells) को एक निश्चित क्रम या प्रतिरूप में आपस में जोड़ा जाता है, तो इस पूरी व्यवस्था को सौर पैनल कहा जाता है। सौर सेलों को आपस में जोड़ने के लिए विशेष रूप से चांदी के तारों (Silver Interconnects/Wires) का उपयोग किया जाता है क्योंकि चांदी विद्युत की अत्यधिक सुचालक होती है।
- मुख्य विशेषताएँ:
- एक अकेले सौर सेल से बहुत कम मात्रा में विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है, इसलिए व्यावहारिक उपयोग के लिए पैनल में कई सेलों को जोड़ा जाता है।
- यह सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CE : 28 Aug, 2019 Shift 1 CBT 2) में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों एवं भौतिक विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) लेड अम्ल बैटरी: गलत, यह एक रिचार्जेबल केमिकल बैटरी है जिसमें सीसा (Lead) और सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग होता है, सौर सेल नहीं।
- विकल्प (B) शुष्क सेल: गलत, यह साधारण टॉर्च या घड़ियों में इस्तेमाल होने वाला प्राथमिक सेल (जैसे जिंक-कार्बन सेल) है।
- विकल्प (C) क्षारीय सेल: गलत, यह भी एक प्रकार की रासायनिक बैटरी है जिसमें क्षारीय इलेक्ट्रोलाइट (जैसे पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड) होता है।
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