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#1. निम्नलिखित में से कौन-सा अल्ट्रासाउंड का अनुप्रयोग नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (D) खाना पकाना

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अल्ट्रासाउंड (पराव्रध्वनि): अल्ट्रासाउंड 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति वाली उच्च-आवृत्ति ध्वनि तरंगें होती हैं। मानव कान इन्हें सुन नहीं सकता, लेकिन इनका उपयोग विभिन्न उद्योगों, चिकित्सा और वैज्ञानिक कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • चिकित्सा क्षेत्र: आंतरिक अंगों (जैसे हृदय, यकृत, गर्भस्थ शिशु) की इमेजिंग (Ultrasonography) के लिए इसका उपयोग होता है।
    • औद्योगिक क्षेत्र: धातु के ब्लॉकों या बड़ी संरचनाओं में छिपी आंतरिक दरारों और दोषों का पता लगाने (Ultrasonic Flaw Detection) में इसका उपयोग किया जाता है। इसके अलावा नाजुक मशीनरी भागों या सर्पिल ट्यूबों की सफाई के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है।
    • खाना पकाना अल्ट्रासाउंड का अनुप्रयोग नहीं है, बल्कि यह तापीय ऊर्जा (थर्मल एनर्जी) पर आधारित प्रक्रिया है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 14/12/2025) में भौतिकी (सामान्य विज्ञान) के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये अल्ट्रासाउंड के अनुप्रयोग क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) धातु ब्लॉकों में दरारों का पता लगाना: यह अल्ट्रासाउंड का एक मानक औद्योगिक अनुप्रयोग है, जिसमें तरंगों के परावर्तन से दोषों का पता चलता है।
  • विकल्प (B) आंतरिक अंगों की इमेजिंग: यह चिकित्सा विज्ञान में अल्ट्रासाउंड का सबसे प्रसिद्ध और व्यापक उपयोग है।
  • विकल्प (C) नाजुक मशीनरी भागों की सफाई: उच्च आवृत्ति की तरंगें सफाई वाले घोल में धूल और गंदगी के कणों को हटा देती हैं, जो इसका एक मान्य अनुप्रयोग है।

#2. निम्नलिखित में से किसमें CFC का उपयोग नहीं किया जाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (B) ग्राइंडर

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन): सीएफसी कार्बन, क्लोरीन और फ्लोरीन से मिलकर बना एक सिंथेटिक रासायनिक यौगिक है। इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रशीतन (Refrigeration), एयर कंडीशनिंग और एरोसोल प्रॉपेलेंट के रूप में किया जाता है। यह ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार प्रमुख गैसों में से एक है।
  • मुख्य बिंदु:
    • ग्राइंडर (Grinder) एक यांत्रिक उपकरण है जिसका उपयोग पीसने के लिए किया जाता है; इसमें किसी भी रासायनिक शीतलक या प्रोपेलेंट के रूप में CFC का उपयोग नहीं होता है।
    • ऐतिहासिक रूप से रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर में कूलेंट (जैसे फ्रीऑन) के रूप में CFC का व्यापक उपयोग किया जाता रहा है।
    • अग्निशामक यंत्रों (विशेषकर पुराने प्रकारों में हैलोन/CFC) और एरोसोल स्प्रे के छिड़काव में भी इसका उपयोग होता था।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I : 26 Nov, 2024 Shift 2) में पर्यावरण एवं रसायन विज्ञान के अनुप्रयोग के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (इनमें CFC का उपयोग क्यों होता है?):
  • विकल्प (A) अग्निशामक यंत्र: कुछ विशेष प्रकार के अग्निशामक यंत्रों (जैसे हैलोन या गैस आधारित) में आग बुझाने वाले रसायन के रूप में सीएफसी यौगिकों का उपयोग किया जाता है।
  • विकल्प (C) एरोज़ोल स्प्रे: स्प्रे के डिब्बों में सामग्री को बाहर धकेलने के लिए प्रोपेलेंट (Propellant) के रूप में पारंपरिक रूप से CFC का उपयोग किया जाता था।
  • विकल्प (D) रेफ्रिजरेटर: रेफ्रिजरेटर और कूलिंग प्रणालियों में प्रशीतक (Refrigerant) के रूप में CFC (जैसे फ्रिऑन) का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता रहा है।

#3. आजकल खाद्य पदार्थों में नाइट्रोजन और प्रोटीन की मात्रा निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित में से किस विधि का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 09 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) केल्डाल विधि

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • केल्डाल विधि (Kjeldahl Method): यह खाद्य पदार्थों, उर्वरकों, और विभिन्न जैविक नमूनों में नाइट्रोजन और कुल प्रोटीन की मात्रा निर्धारित करने के लिए सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विश्लेषणात्मक रासायनिक विधि है। इसकी खोज जोहान केल्डाल (Johan Kjeldahl) ने 1883 में की थी।
  • मुख्य बिंदु:
    • इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन चरण शामिल होते हैं: पाचन (Digestion), आसवन (Distillation), और अनुमापन (Titration)।
    • नमूनों में मौजूद नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित किया जाता है, जिसके आधार पर प्रोटीन की कुल मात्रा की गणना की जाती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF SI CBT-I : 09 Dec, 2024 Shift 2) में रसायन विज्ञान एवं खाद्य परीक्षण पद्धतियों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) पराडकर विधि: गलत, खाद्य पदार्थों में प्रोटीन निर्धारण के लिए इस नाम की कोई प्रमुख मानक विधि नहीं है।
  • विकल्प (C) बारफोर्ड विधि (Barfoed’s Test): गलत, यह विधि कार्बोहाइड्रेट (विशेषकर मोनोसैकेराइड और डिस्केराइड्स की पहचान) का परीक्षण करने के लिए उपयोग की जाती है, न कि नाइट्रोजन या प्रोटीन के लिए।
  • विकल्प (D) नेस्लर विधि (Nessler’s Reagent): गलत, नेस्लर अभिकर्मक का उपयोग मुख्य रूप से अमोनिया या अमोनियम आयनों की उपस्थिति का पता लगाने या उनकी सूक्ष्म मात्रा मापने के लिए किया जाता है, न कि खाद्य पदार्थों में कुल प्रोटीन निर्धारण के लिए।

#4. निम्नलिखित में से कौन-सा धावन सोडा के एक सामान्य औद्योगिक उपयोग का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) काँच निर्माण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • धावन सोडा (Washing Soda): इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट ($\mathrm{Na_2CO_3 \cdot 10H_2O}$) है। यह एक महत्वपूर्ण अकार्बनिक यौगिक है जिसका उपयोग उद्योगों और घरेलू कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • काँच उद्योग: सोडियम कार्बोनेट का सबसे बड़ा औद्योगिक उपयोग काँच (Glass), साबुन और कागज़ के निर्माण में होता है। यह सिलिका के साथ मिलकर कांच के निर्माण के तापमान को कम करने में मदद करता है।
    • अन्य प्रमुख उपयोगों में पानी की स्थायी कठोरता (Permanent Hardness) को दूर करना और घरेलू साफ-सफाई शामिल है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec, 2024 Shift 1) में रसायन विज्ञान एवं औद्योगिक यौगिकों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) उर्वरक निर्माण: गलत, उर्वरक निर्माण में मुख्य रूप से यूरिया, अमोनिया, और फॉस्फेट यौगिकों का उपयोग होता है, न कि धावन सोडा का।
  • विकल्प (B) सीमेंट उत्पादन: गलत, सीमेंट के उत्पादन में मुख्य रूप से चूना पत्थर (Limestone), क्ले और जिप्सम का उपयोग किया जाता है।
  • विकल्प (D) सिरका उत्पादन: गलत, सिरके (Vinegar) में एसिटिक अम्ल ($\mathrm{CH_3COOH}$) होता है, जिसके निर्माण में किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है।

#5. भ्रूण के विकास की निगरानी करने के लिए, ______ की नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जाता है।
(RRB JE CBT I -: 1 June 2019 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (B) पराश्रव्य (Ultrasound)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • पराश्रव्य तरंगें (Ultrasound): गर्भस्थ शिशु (भ्रूण) के विकास, स्वास्थ्य और उसकी गतिविधियों की निगरानी करने के लिए सोनोग्राफी (Ultrasonography) में उच्च आवृत्ति की पराश्रव्य ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक पूरी तरह सुरक्षित होती है क्योंकि इसमें हानिकारक विकिरण (Radiation) का उपयोग नहीं होता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • यह तकनीक ध्वनि तरंगों के परावर्तन (Echo) के सिद्धांत पर काम करती है, जो शरीर के आंतरिक अंगों और भ्रूण की स्पष्ट छवि स्क्रीन पर बनाती है।
    • गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में शिशु की वृद्धि की जांच के लिए यह चिकित्सा क्षेत्र में सबसे मानक और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I : 1 June 2019 Shift 3) में सामान्य विज्ञान एवं चिकित्सा तकनीक के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) कीमोथेरेपी: गलत, यह कैंसर के इलाज में उपयोग की जाने वाली औषधीय चिकित्सा है, जिसका भ्रूण की निगरानी से कोई संबंध नहीं है।
  • विकल्प (C) CAT स्कैन: गलत, इसमें एक्स-रे (X-rays) का उपयोग होता है जो भ्रूण के लिए हानिकारक हो सकते हैं, इसलिए सामान्य गर्भावस्था की निगरानी के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाता।
  • विकल्प (D) गैस परिमापन: गलत, यह गैसों के मापन से संबंधित विधि है, जो इस चिकित्सा संदर्भ में प्रासंगिक नहीं है।



#6. निम्न में से कौन तृतीय श्रेणी के उत्तोलक का उदाहरण है?
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) बर्फ चिमटा (Ice Tongs)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • तृतीय श्रेणी का उत्तोलक (Third Class Lever): इस प्रकार के उत्तोलक में आलंब (Fulcrum) एक छोर पर होता है, भार (Load) दूसरे छोर पर होता है, और प्रयास (Effort / बल) बीच में लगाया जाता है। इसमें यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) हमेशा 1 से कम होता है, लेकिन इसका उपयोग गति या दूरी बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • बर्फ का चिमटा या सामान्य चिमटा (Tongs) तृतीय श्रेणी के उत्तोलक का उत्कृष्ट उदाहरण है, क्योंकि इसमें हम बीच से बल लगाते हैं और एक सिरे पर बर्फ को पकड़ते हैं।
    • अन्य उदाहरण: मनुष्य का हाथ, चिमटी (Tweezers), स्टेपलर, और मछली पकड़ने का रॉड।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 21 Jan, 2019 Shift 2) में इंजीनियरिंग मैकेनिक्स एवं सरल मशीनों (Simple Machines) के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये किस श्रेणी के उत्तोलक हैं?):
  • विकल्प (A) नट क्रैकर (सुपारी काटने की मशीन): यह द्वितीय श्रेणी (Second Class) का उत्तोलक है, क्योंकि इसमें बीच में भार होता है और आलंब एक किनारे पर होता है।
  • विकल्प (B) आरा (See-saw) / कैंची: यह प्रथम श्रेणी (First Class) का उत्तोलक है, जिसमें आलंब (Fulcrum) बीच में स्थित होता है।
  • विकल्प (D) पहिया ठेला (Wheelbarrow): यह भी द्वितीय श्रेणी (Second Class) का उत्तोलक है, जिसमें पहिया आलंब होता है और भार बीच में रखा जाता है।

#7. निम्नलिखित में से कौन-सा इलेक्ट्रोप्लेटिंग का व्युत्क्रम है?
(RRB JE ME 30 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (B) इलेक्ट्रोपोलिशिंग (Electropolishing)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • इलेक्ट्रोपोलिशिंग (Electropolishing): इसे इलेक्ट्रोप्लेटिंग का व्युत्क्रम (Inverse/Reverse of Electroplating) माना जाता है। इलेक्ट्रोप्लेटिंग में किसी वस्तु की सतह पर धातु की परत चढ़ाई जाती है (पदार्थ जोड़ा जाता है), जबकि इलेक्ट्रोपोलिशिंग में एनोडिक विघटन (Anodic Dissolution) के माध्यम से धातु की सतह से सूक्ष्म परत को हटाया जाता है ताकि उसे चिकना और चमकदार बनाया जा सके।
  • मुख्य बिंदु:
    • इस प्रक्रिया में धातु के हिस्से को एनोड के रूप में एक रासायनिक इलेक्ट्रोलाइट बाथ में डुबोया जाता है, जिससे सतह की अशुद्धियाँ और खुरदरापन हट जाता है।
    • इसे अक्सर “इलेक्ट्रोकेमिकल डिबरिंग” या रिवर्स प्लेटिंग भी कहा जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ME : 30 Aug, 2019 Shift 1 CBT 2) में निर्माण तकनीक (Manufacturing Technology) एवं सतही परिष्करण (Surface Finishing) के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) लैपिंग (Lapping): यह एक यांत्रिक (Abrasive) प्रक्रिया है जिसका उपयोग दो सतहों के बीच अपघर्षक कणों का उपयोग करके अत्यधिक सटीकता और फ्लैटनेस प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
  • विकल्प (C) सुपरफिनिशिंग (Superfinishing): यह एक मेटल-फिनिशिंग प्रक्रिया है जो सतह के खुरदरेपन को कम करती है, लेकिन यह विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया नहीं है।
  • विकल्प (D) होनिंग (Honing): यह मुख्य रूप से सिलिंडर बोर (जैसे इंजन ब्लॉक) के आंतरिक व्यास को परिष्कृत करने की एक यांत्रिक अपघर्षक प्रक्रिया है।

#8. फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी सादी कार्नोट ने किस वर्ष में कार्नोट इंजन बनाया, जो एक आदर्श उष्ण इंजन के रूप में कार्य करने के लिए ऊष्मागतिकी सिद्धांतों का उपयोग करता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 19 Aug, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) 1824

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कार्नोट इंजन (Carnot Engine): फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी निकोला लियोनार्ड सादी कार्नोट (Nicolas Léonard Sadi Carnot) ने वर्ष 1824 में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Reflections on the Motive Power of Fire’ में इस सैद्धांतिक ऊष्मा इंजन का प्रस्ताव दिया था। इसे ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के विकास में एक मील का पत्थर माना जाता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • यह एक आदर्श (Ideal) ऊष्मा इंजन है जो अधिकतम संभव दक्षता (Efficiency) प्रदान करता है।
    • कार्नोट चक्र (Carnot Cycle) चार उत्क्रमणीय प्रक्रियाओं (दो समतापीय और दो रुद्धोष्म) से मिलकर बनता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 19 Aug, 2025 Shift 1) में ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) एवं इतिहास के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) 1830: गलत, इस वर्ष के आसपास सादी कार्नोट का निधन (1832) हो गया था और उनका प्रसिद्ध शोधपत्र इससे पहले प्रकाशित हुआ था।
  • विकल्प (B) 1820: गलत, यह कार्नोट के इंजन के प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
  • विकल्प (D) 1813: गलत, यह वर्ष उनके इंजन के आविष्कार या प्रकाशन से संबंधित नहीं है।

#9. निम्नलिखित में से किन पुर्जों को अल्ट्रासाउंड का उपयोग करके साफ किया जाता है?
(RRB JE CBT I -: 2 June 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) कठिन पहुँच वाले पुर्जे

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अльтраसाउंड सफाई (Ultrasonic Cleaning): उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों (अльтраसाउंड) का उपयोग करके उन पुर्जों और घटकों की सफाई की जाती है जहाँ हाथ या सामान्य उपकरणों से पहुँचना कठिन होता है (जैसे सर्पिल ट्यूब, विषम आकार के हिस्से, और सूक्ष्म मशीनरी भाग)।
  • मुख्य बिंदु:
    • सफाई वाले घोल में अल्ट्रासाउंड तरंगें भेजने पर सूक्ष्म बुलबुले बनते और फूटते हैं (कैविटेशन प्रक्रिया), जो गहराई में छिपी धूल, तेल और गंदगी को आसानी से बाहर निकाल देते हैं।
    • यही कारण है कि जटिल और कठिन पहुँच वाले (Hard-to-reach) पुर्जों की सफाई के लिए इस तकनीक का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I : 2 June, 2019 Shift 2) में सामान्य विज्ञान एवं औद्योगिक तकनीकों के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) साधारण पुर्जे: गलत, सामान्य या खुले पुर्जों को हाथ से या सामान्य विधियों द्वारा आसानी से साफ किया जा सकता है, जिनके लिए महंगी अल्ट्रासाउंड तकनीक की आवश्यकता नहीं होती।
  • विकल्प (B) आसान पहुँच वाले पुर्जे: गलत, जिन हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है, उनकी सफाई पारंपरिक तरीकों से हो जाती है।
  • विकल्प (D) बड़े आकार के पुर्जे: गलत, आकार बड़ा होना सफाई की कठिनाई का एकमात्र पैमाना नहीं है; मुख्य कारक पुर्जों की बनावट की जटिलता और छिपे हुए कोने (कठिन पहुँच) होते हैं।

#10. कॉलॉइडी कणों के पृथक्करण के लिए कौन-सी तकनीक उपयोगी है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (B) अपकेंद्रण तकनीक (Centrifugation)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अपकेंद्रण तकनीक (Centrifugation): कॉलॉइडी विलयन के कण इतने छोटे होते हैं कि वे साधारण फिल्टर पेपर से आसानी से निकल जाते हैं, इसलिए सामान्य निस्यंदन (Filtration) द्वारा उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। इन्हें अलग करने के लिए अपकेंद्रण मशीन (Centrifuge) का उपयोग किया जाता है, जिसमें उच्च गति पर घोल को घुमाने पर भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण ऊपर रह जाते हैं।
  • मुख्य बिंदु:
    • इसका उपयोग मुख्य रूप से दूध से क्रीम अलग करने, रक्त परीक्षण (Blood Tests) में प्लाज्मा और कोशिकाओं को पृथक करने, और वाशिंग मशीन में कपड़ों से पानी निचोड़ने में किया जाता है।
    • यह सेंट्रीफ्यूगल फोर्स (अपकेंद्रीय बल) के सिद्धांत पर कार्य करती है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2) में रसायन विज्ञान एवं मिश्रणों के पृथक्करण (Separation Techniques) के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) ऊर्ध्वपातन तकनीक (Sublimation): गलत, इसका उपयोग ठोस से सीधे गैस में बदलने वाले पदार्थों (जैसे कपूर, अमोनियम क्लोराइड) को अलग करने के लिए किया जाता है।
  • विकल्प (C) निस्यंदन तकनीक (Filtration): गलत, कॉलॉइडी कणों का आकार इतना सूक्ष्म होता है कि वे फिल्टर पेपर के छिद्रों से पार निकल जाते हैं, इसलिए सादा निस्यंदन यहाँ प्रभावी नहीं होता।
  • विकल्प (D) पुनः क्रिस्टलीकरण तकनीक (Recrystallization): गलत, इसका उपयोग मुख्य रूप से ठोस अशुद्धियों को दूर करके किसी विलेय पदार्थ के शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करने के लिए किया जाता है।



#11. पेट्रोलियम से पेट्रोल, पेट्रोलियम गैस, डीजल, केरोसिन और ईंधन तेल प्राप्त करने के लिए किस प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
(RRB JE CE 19 Sept 2019 Shift 1 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (C) आंशिक आसवन (Fractional Distillation)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आंशिक आसवन (Fractional Distillation): पेट्रोलियम (कच्चा तेल) विभिन्न हाइड्रोकार्बन का एक जटिल मिश्रण होता है। चूँकि इसके विभिन्न घटकों (जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एलपीजी आदि) के क्वथनांक (Boiling Points) में थोड़ा अंतर होता है, इसलिए इन्हें एक ‘फ्रैक्शनेटिंग टॉवर’ (Fractionating Column) में आंशिक आसवन विधि द्वारा अलग किया जाता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • भट्टी में कच्चे तेल को गर्म करके वाष्पीकृत किया जाता है और टॉवर में भेजा जाता है, जहाँ तापमान ऊपर की ओर कम होता जाता है।
    • कम क्वथनांक वाले घटक (जैसे पेट्रोलियम गैस/LPG और पेट्रोल) ऊपर की तरफ वाष्प के रूप में अलग होते हैं, जबकि अधिक क्वथनांक वाले भारी घटक (जैसे डीजल और ईंधन तेल) नीचे एकत्र होते हैं।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CE : 19 Sept, 2019 Shift 1 CBT 2) में रसायन विज्ञान एवं पेट्रोलियम परिशोधन (Petroleum Refining) के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) निर्वात आसवन (Vacuum Distillation): गलत, इसका उपयोग उन भारी तेलों को कम तापमान पर उबालकर अलग करने के लिए किया जाता है जो सामान्य दबाव पर उच्च तापमान पर विघटित (decompose) हो जाते हैं, न कि संपूर्ण कच्चे तेल के प्राथमिक पृथक्करण के लिए।
  • विकल्प (B) आंचलिक आसवन: गलत, यह विज्ञान में कोई मानक या प्रचलित आसवन विधि नहीं है।
  • विकल्प (D) सरल आसवन (Simple Distillation): गलत, इसका उपयोग केवल ऐसे दो द्रवों के मिश्रण को अलग करने के लिए किया जाता है जिनके क्वथनांक में बहुत अधिक अंतर होता है (जैसे पानी और एसीटोन), जबकि पेट्रोलियम में कई घटक एक साथ होते हैं।

#12. निम्नलिखित में से कौन सी विधि लोहे को जंग लगने से रोकने के लिए उपयोग नहीं की जाती है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) हीटिंग़ (Heating)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • लोहे में जंग (Rusting of Iron): लोहे को जंग (आयरन ऑक्साइड) से बचाने के लिए उसकी सतह को हवा (ऑक्सीजन) और नमी (पानी) के संपर्क में आने से रोकना होता है। इसके लिए विभिन्न सुरक्षात्मक विधियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन केवल गर्म करना (Heating) जंग को रोकने की कोई विधि नहीं है। बल्कि उच्च तापमान पर लोहा आसानी से ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऑक्साइड बना सकता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • जंग लगने की प्रक्रिया एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसके लिए नमी और ऑक्सीजन दोनों का होना अनिवार्य है।
    • धातु की सतह पर लेप या आवरण चढ़ाकर इसे रोका जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 2) में रसायन विज्ञान एवं धातुओं के संक्षारण (Corrosion) के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये जंग रोकने की विधियाँ क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) क्रोम प्लेटिंग: यह लोहे या स्टील की सतह पर क्रोमियम की परत चढ़ाने की विधि है, जो संक्षारण और जंग से बचाती है।
  • विकल्प (B) पेंटिंग: लोहे की सतह पर पेंट करने से वह हवा और नमी के सीधे संपर्क में आने से बच जाती है।
  • विकल्प (C) गैल्वेनाइजिंग (Galvanizing): यह लोहे या इस्पात पर जस्ते (Zinc) की पतली परत चढ़ाने की एक प्रभावी प्रक्रिया है जो जंग को रोकती है।

#13. विनिर्माण में टेट्राक्लोरोमेथेन का मुख्यतः किस लिए उपयोग किया जाता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 09 Jun, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (C) रेफ्रिजरेटर और एरोज़ोल प्रनोदक का उत्पादन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • टेट्राक्लोरोमेथेन (Tetrachloromethane): इसे कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4) के नाम से भी जाना जाता है। विनिर्माण क्षेत्र में इसका मुख्य उपयोग क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे रेफ्रिजरेटर और एरोज़ोल कैन के लिए प्रनोदक (Propellants) के उत्पादन में किया जाता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • यह यौगिक प्रशीतन (Refrigeration) प्रणालियों और एयर कंडीशनिंग में काम आने वाले रसायनों के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण रासायनिक मध्यवर्ती (Intermediate) के रूप में कार्य करता है।
    • इसका उपयोग विलायक (Solvent), अग्निशामक और धातु संदूषण हटाने (Degreasing) के लिए भी किया जाता रहा है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 09 Jun, 2025 Shift 3) में रसायन विज्ञान एवं औद्योगिक रसायनों के उपयोग के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) उनी कपड़ों की वस्त्र रंगाई और रंगाई: वस्त्रों की रंगाई और उनी कपड़ों के उपचार के लिए विशिष्ट रंगों और mordants का उपयोग होता है, न कि टेट्राक्लोरोमेथेन का।
  • विकल्प (B) उर्वरक उत्पादन और कीटनाशक शोधन: उर्वरकों के उत्पादन में अमोनिया, यूरिया और नाइट्रेट्स का उपयोग होता है, इस प्रक्रिया से इसका संबंध नहीं है।
  • विकल्प (D) काँच निर्माण और सिरेमिक उपचार: काँच और सिरेमिक उद्योग सिलिका, फेल्डस्पार और एलुमिना जैसी सामग्रियों पर निर्भर करते हैं।

#14. धातुकान्तून अपखनिज काढून टाकण्यासाठी वापरल्या जाणाऱ्या प्रक्रियेला त्यांच्या रासायनिक किंवा भौतिक गुणधर्मातील फरकाच्या आधारावर कार्य केले जाते आणि त्याला धातुकचे ______ म्हणतात
.(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) समृद्धून (इन्चिरमेंट)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • धातुक समृद्धीकरण (Ore Enrichment / Beneficiation): खनिजों से अवांछित अशुद्धियों (गैंग या अपखनिज) को हटाने की प्रक्रिया को ‘धातुक समृद्धीकरण’ या ‘सांद्रण’ (Concentration/Enrichment) कहा जाता है। यह प्रक्रिया धातुक और अपखनिज के भौतिक या रासायनिक गुणों (जैसे चुंबकत्व, घनत्व या गीलापन) में अंतर के आधार पर की जाती है।
  • मुख्य बिंदु:
    • पृथ्वी से निकाले गए अयस्क (Ore) में मिट्टी, रेत और चट्टानों के अवांछित कण होते हैं जिन्हें गैंग (Gangue) कहा जाता है।
    • इसे हटाने के लिए फेन प्लवन विधि (Froth Flotation), गुरुत्व पृथक्करण और चुंबकीय पृथक्करण जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।
  • परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03 Dec, 2025) में धातु कर्म (Metallurgy) एवं अयस्कों के सांद्रण के अंतर्गत पूछा गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • विकल्प (A) उजाळणं (पॉलिशिंग): यह धातु की सतह को चमकाने की प्रक्रिया है, जिससे अशुद्धियाँ दूर नहीं होतीं।
  • विकल्प (B) रंजक (कलरींग): यह वस्तुओं या धातुओं पर रंग करने से संबंधित है।
  • विकल्प (D) तोलन (वेईंग): यह केवल वस्तुओं के भार (वजन) को मापने की प्रक्रिया है।
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