Oxidation & Reduction Railway PYQ
#1. निम्नलिखित में से कौन-सा, रेडॉक्स अभिक्रिया में अपचयन को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (C) हाइड्रोजन का ग्रहण या ऑक्सीजन का हास
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अपचयन (Reduction) की परिभाषा: रासायनिक अभिक्रियाओं में अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ द्वारा हाइड्रोजन का ग्रहण किया जाता है या ऑक्सीजन का हास (निकलना) होता है।
- इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा: आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत के अनुसार, किसी परमाणु, अणु या आयन द्वारा इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने (Gain of electrons) की प्रक्रिया को भी अपचयन कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- रेडॉक्स (Redox) अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ संपन्न होती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09/03/2026) में रासायनिक अभिक्रियाओं और रेडॉक्स प्रक्रिया के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) केवल इलेक्ट्रॉनों का हास: इलेक्ट्रॉनों का हास (Loss of electrons) ऑक्सीकरण (Oxidation) कहलाता है, अपचयन नहीं।
- विकल्प (B) ऑक्सीजन का ग्रहण या हाइड्रोजन का हास: यह ऑक्सीकरण (Oxidation) की परिभाषा है, अपचयन की नहीं।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन और इलेक्ट्रॉन दोनों का ग्रहण: ऑक्सीजन का ग्रहण ऑक्सीकरण से संबंधित होता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
#2. अम्ल और क्षार के बीच अभिक्रिया का सामान्य नाम क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) उदासीनीकरण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब किसी अम्ल (Acid) और किसी क्षार (Base) की आपस में अभिक्रिया कराई जाती है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को उदासीन कर देते हैं। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप मुख्य रूप से लवण (Salt) और जल (Water) का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण का उदाहरण: अम्ल + क्षार $\rightarrow$ लवण + जल (जैसे: $HCl + NaOH \rightarrow NaCl + H_2O$)
- मुख्य बिंदु:
- यह एक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया होती है, जिसमें ऊर्जा (ऊष्मा) निकलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09/02/2026) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार और अम्ل-क्षार के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) अपघटन (Decomposition): यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है, जो अम्ल-क्षार अभिक्रिया नहीं है।
- विकल्प (B) ऑक्सीकरण (Oxidation): इसमें ऑक्सीजन का ग्रहण या हाइड्रोजन का हास होता है, यह अम्ल और क्षार के बीच होने वाली उदासीनीकरण प्रक्रिया से संबंधित नहीं है।
- विकल्प (C) दहन (Combustion): यह किसी पदार्थ का ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलना और ऊष्मा/प्रकाश उत्पन्न करना है, जो कि अम्ल-क्षार अभिक्रिया नहीं है।
#3. रेडॉक्स विस्थापन अभिक्रिया में, यदि तत्व X इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है और तत्व Y इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) X का ऑक्सीकरण होता है और Y का अपचयन होता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऑक्सीकरण (Oxidation): जब कोई तत्व या परमाणु इलेक्ट्रॉन का त्याग (Loss of electrons) करता है, तो उसका ऑक्सीकरण होता है (यहाँ तत्व X इलेक्ट्रॉन त्याग रहा है, अतः X ऑक्सीकृत होता है)।
- अपचयन (Reduction): जब कोई तत्व या परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण (Gain of electrons) करता है, तो उसका अपचयन होता है (यहाँ तत्व Y इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर रहा है, अतः Y अपचयित होता है)।
- मुख्य बिंदु:
- रेडॉक्स (Redox) अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन का त्याग और ग्रहण साथ-साथ (समानांतर) चलता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 30/12/2025) में रासायनिक अभिक्रियाओं और रेडॉक्स विस्थापन की अवधारणा के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) दोनों अपचयित होते हैं: इलेक्ट्रॉन त्यागने वाले तत्व का ऑक्सीकरण होता है, इसलिए यह कथन गलत है।
- विकल्प (C) X का अपचयन होता है और Y का ऑक्सीकरण होता है: यह दी गई स्थिति से बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि X इलेक्ट्रॉन त्याग रहा है (ऑक्सीकरण) और Y ग्रहण कर रहा है (अपचयन)।
- विकल्प (D) दोनों ऑक्सीकृत होते हैं: चूँकि Y इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर रहा है, उसका अपचयन होगा, ऑक्सीकरण नहीं।
#4. निम्नलिखित में से कौन सा रासायनिक अपक्षय का हिस्सा नहीं है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 02 Sept, 2025 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) तुषार क्रिया
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- तुषार क्रिया (Frost Wedging / Frost Action): यह एक भौतिक (यांत्रिक) अपक्षय (Physical Weathering) की प्रक्रिया है, न कि रासायनिक अपक्षय। इसमें चट्टानों के दरारों में भरा पानी ठंड के कारण बर्फ में बदल जाता है, जिससे आयतन बढ़ने के कारण चट्टानें टूट जाती हैं।
- रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering): इसके अंतर्गत चट्टानों के खनिजों में रासायनिक परिवर्तन होते हैं, जैसे ऑक्सीकरण, कार्बोनेशन, जलयोजन (हाइड्रेशन) और घोल (Solution)।
- मुख्य बिंदु:
- जलवायुजन, ऑक्सीकरण और कार्बोनेशन सभी रासायनिक अपक्षय के प्रमुख प्रकार हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 02 Sept, 2025 Shift 2) में भूगोल और पृथ्वी की आंतरिक व बाह्य प्रक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) जलवायुजन (Hydration / जल योजन): यह खनिजों द्वारा जल को सोखने की प्रक्रिया है, जो रासायनिक अपक्षय का एक हिस्सा है।
- विकल्प (C) ऑक्सीकरण (Oxidation): खनिजों का ऑक्सीजन के साथ संयोजन होना रासायनिक अपक्षय का मुख्य भाग है।
- विकल्प (D) कार्बोनेशन (Carbonation): कार्बन डाइऑक्साइड और जल की प्रतिक्रिया से खनिजों का अप Nचय होना रासायनिक अपक्षय के अंतर्गत आता है।
#5. नीचे दिखाई गई कौन-सी भर्जन प्रक्रिया सल्फाइड अयस्क से सल्फर का दाह कर देती है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) ऑक्सीकरण (Oxidising)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऑक्सीकरण भर्जन (Oxidising Roasting): यह एक ऐसी धातुकर्म प्रक्रिया है जिसमें सल्फाइड अयस्कों को अत्यधिक मात्रा में वायु या ऑक्सीजन की उपस्थिति में उनके गलनांक से कम तापमान पर गर्म किया जाता है।
- सल्फर का दाह (निष्कासन): इस प्रक्रिया के दौरान अयस्क में मौजूद सल्फर ऑक्सीजन के साथ मिलकर सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) गैस के रूप में बाहर निकल जाता है, जिससे अयस्क ऑक्साइड में बदल जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों (जैसे जिंक ब्लेंड $ZnS$) के सांद्रण और शोधन के लिए उपयोग की जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08/01/2026) में धातुओं के निष्कर्षण और रासायनिक प्रक्रम के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) प्रगलन (Smelting): यह भर्जन का प्रकार नहीं है, बल्कि यह एक बाद की प्रक्रिया है जिसमें भुने हुए अयस्क को कोक और फ्लक्स के साथ उच्च तापमान पर पिघलाया जाता है।
- विकल्प (B) वाष्पीभवन (Volatilising): इसका उपयोग वाष्पशील अशुद्धियों (जैसे आर्सेनिक या एंटीमनी) को हटाने के लिए किया जाता है, न कि विशेष रूप से सल्फर का दाह करने के लिए।
- विकल्प (C) क्लोराइडीकरण (Chloridising): इसमें अयस्क को क्लोरीनीकरण कारक (जैसे $NaCl$) के साथ गर्म किया जाता है ताकि धातु क्लोराइड प्राप्त हो सके।
#6. एक तनु फेरस सल्फेट विलयन को अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट के विलयन वाले बीकर में धीरे-धीरे मिलाया गया। विलयन का हल्का बैंगनी रंग फीका हो जाता है और अंत में गायब हो जाता है। प्रेक्षण के लिए निम्नलिखित में से कौन सा सही स्पष्टीकरण है?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (D) पोटैशियम परमैंगनेट एक ऑक्सीकारक अभिकर्मक है, यह फेरस सल्फेट का ऑक्सीकरण करता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अभिक्रिया की प्रकृति: जब अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$) के बैंगनी रंग के विलयन में फेरस सल्फेट ($FeSO_4$) मिलाया जाता है, तो $KMnO_4$ एक प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
- रंग का गायब होना: यह $KMnO_4$ फेरस (Fe2+) आयनों को फेरिक (Fe3+) आयनों में ऑक्सीकृत कर देता है। इस प्रक्रिया में परमैंगनेट आयन ($MnO_4^-$) रंगहीन मैंगनीज आयनों ($Mn^{2+}$) में बदल जाते हैं, जिससे विलयन का बैंगनी रंग फीका पड़कर अंततः गायब हो जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह एक प्रसिद्ध रेडॉक्स (Redox) titration का उदाहरण है जिसमें $KMnO_4$ स्वयं अपचयित होता है और दूसरे पदार्थ ($FeSO_4$) को ऑक्सीकृत करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1) में ऑक्सीकरण-अपचयन और रासायनिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) तनुकरण की वजह से रंग गायब हो जाता है: रंग रासायनिक अभिक्रिया (ऑक्सीकरण) के कारण गायब होता है, केवल पानी मिलाने या तनु करने से रंग स्वतः गायब नहीं होता।
- विकल्प (B) पोटैशियम परमैंगनेट एक अस्थिर यौगिक है: $KMnO_4$ एक स्थिर यौगिक और एक बहुत ही सशक्त ऑक्सीकारक अभिकर्मक है।
- विकल्प (C) फेरस सल्फेट एक ऑक्सीकारक अभिकर्मक के रूप में कार्य करता है और पोटैशियम परमैंगनेट का ऑक्सीकरण करता है: यहाँ फेरस सल्फेट खुद एक अपचायक (Reducing agent) की तरह कार्य करता है और ऑक्सीकृत होता है, न कि पोटैशियम परमैंगनेट का ऑक्सीकरण करता है।
#7. भोजन को वायुरोधी पात्र में रखने पर क्या लाभ होता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 16 Jun, 2025 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) यह ऑक्सीजन को धीमा करता है (या वसा के ऑक्सीकरण को रोकता है)।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विकृतगंधिता (Rancidity) से बचाव: जब तैलीय या वसायुक्त खाद्य पदार्थों को खुले में रखा जाता है, तो वे हवा की ऑक्सीजन के साथ ऑक्सीकृत हो जाते हैं, जिससे उनका स्वाद और गंध खराब हो जाती है (जिसे विकृतगंधिता कहते हैं)।
- वायुरोधी पात्र (Air-tight Container) का लाभ: भोजन को वायुरोधी पात्र में रखने से हवा (ऑक्सीजन) का संपर्क बहुत कम या धीमा हो जाता है, जिससे ऑक्सीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और भोजन लंबे समय तक ताजा रहता है।
- मुख्य बिंदु:
- चिप्स आदि की थैलियों में भी ऑक्सीजन हटाकर नाइट्रोजन गैस ($N_2$) भरी जाती है ताकि विकृतगंधिता को रोका जा सके।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 16 Jun, 2025 Shift 1) में दैनिक जीवन में ऑक्सीकरण के प्रभाव और खाद्य संरक्षण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) यह भोजन का रंग बदल देता है: वायुरोधी पात्र का मुख्य उद्देश्य रंग बदलना नहीं, बल्कि भोजन को खराब होने (ऑक्सीकरण) से बचाना है।
- विकल्प (B) यह अवायवीय जीवाणुओं के विकास को बढ़ाता है: यह जीवाणुओं को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उनके विकास और ऑक्सीकरण को रोकने के लिए होता है।
- विकल्प (C) यह भोजन के स्वाद को बढ़ाता है: यह भोजन का नया स्वाद पैदा नहीं करता, बल्कि उसके मूल स्वाद और गुणवत्ता को सुरक्षित रखता है।
#8. एक प्रयोगशाला प्रयोग में, एक विद्यार्थी हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड का मिश्रण करता है। ऐसा करने पर किस प्रकार की अभिक्रिया होती है?
(Not found 12/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) उदासीनीकरण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब कोई प्रबल अम्ल (जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, HCl) और कोई प्रबल क्षार (जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड, NaOH) आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को पूरी तरह उदासीन कर देते हैं।
- उत्पाद का निर्माण: इस रासायनिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप सोडियम क्लोराइड (लवण/Salt) और जल ($H_2O$) का निर्माण होता है। समीकरण: $HCl + NaOH \rightarrow NaCl + H_2O$
- मुख्य बिंदु:
- यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है जिसमें प्रचुर मात्रा में ऊष्मा निकलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (Laboratory Experiment / सामान्य विज्ञान) में अम्ल, क्षार और लवण के रासायनिक गुणों के अंतर्गत पूछा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) ऑक्सीकरण (Oxidation): यह ऑक्सीजन के ग्रहण या हाइड्रोजन/इलेक्ट्रॉन के हास से संबंधित है, जबकि $HCl$ और $NaOH$ की अभिक्रिया उदासीनीकरण होती है।
- विकल्प (C) अपघटन (Decomposition): इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है, जो कि इस संयोजन और उदासीनीकरण प्रक्रिया के विपरीत है।
- विकल्प (D) अवक्षेपण (Precipitation): इस अभिक्रिया में कोई अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) का निर्माण नहीं होता, बल्कि लवण पानी में घुला रहता है।
#9. जब बेरियम क्लोराइड, सोडियम सल्फेट के साथ अभिक्रिया करता है तो किस प्रकार की अभिक्रिया होती है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) दोहरा विस्थापन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): जब बेरियम क्लोराइड ($BaCl_2$) और सोडियम सल्फेट ($Na_2SO_4$) के विलयनों को मिलाया जाता है, तो दोनों यौगिकों के आयनों के बीच आपसी आदान-प्रदान (Interchange of ions) होता है।
- रासायनिक समीकरण और उत्पाद: $BaCl_2 + Na_2SO_4 \rightarrow BaSO_4 \downarrow + 2NaCl$
इस अभिक्रिया में बेरियम सल्फेट ($BaSO_4$) का एक सफेद रंग का अघुलनशील अवक्षेप प्राप्त होता है। - मुख्य बिंदु:
- चूँकि इस अभिक्रिया में आयनों का आदान-प्रदान होता है और अवक्षेप बनता है, इसे अवक्षेपण अभिक्रिया भी कहा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 28/11/2025) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) ऑक्सीकरण (Oxidation): यह ऑक्सीजन, हाइड्रोजन या इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान से जुड़ी प्रक्रिया है, जो इस आयनिक विस्थापन से संबंधित नहीं है।
- विकल्प (B) संयोजन (Combination): इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं, जबकि यहाँ दो नए यौगिक बन रहे हैं।
- विकल्प (D) अपघटन (Decomposition): इसमें एक अकेला अभिकारक टूटकर सरल उत्पाद बनाता है, जो कि इस विस्थापन के विपरीत है।
#10. एथेनॉल ( Ethanol) को सांद्र सल्फरिक अम्ल की अधिकता में 443 K पर गर्म करने पर एथीन ( ethene) प्राप्त होता है। होने वाला रासायनिक परिवर्तन _______ होगा।
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) निर्जलीकरण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- निर्जलीकरण (Dehydration): जब एथेनॉल ($CH_3CH_2OH$) को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल ($H_2SO_4$) की अधिकता में 443 K तापमान पर गर्म किया जाता है, तो सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल एक निर्जलीकारक (Dehydrating agent) के रूप में कार्य करता है और एथेनॉल के अणु से पानी के अणु ($H_2O$) को अलग कर देता है।
- उत्पाद का निर्माण: इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप असंतृप्त हाइड्रोकार्बन एथीन ($C_2H_4$) प्राप्त होता है। रासायनिक समीकरण: $CH_3CH_2OH \xrightarrow{Conc. H_2SO_4, 443K} C_2H_4 + H_2O$
- मुख्य बिंदु:
- सांद्र $H_2SO_4$ यहाँ पानी खींचने (निर्जलीकरण करने) का मुख्य कार्य करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 28/11/2025) में कार्बन और उसके यौगिक (एथेनॉल के रासायनिक गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) हैलोजनन (Halogenation): यह हैलोजन तत्वों के जुड़ने की प्रक्रिया है, जो यहाँ लागू नहीं होती।
- विकल्प (C) ऑक्सीकरण (Oxidation): यह ऑक्सीजन के जुड़ने या हाइड्रोजन के निकलने से संबंधित है (जैसे क्षारीय $KMnO_4$ द्वारा एथेनॉल का एथेनोइक अम्ल में बदलना), न कि जल का निकलना।
- विकल्प (D) अपचयन (Reduction): यह हाइड्रोजन के जुड़ने या ऑक्सीजन के हटने की प्रक्रिया है, जो इस अभिक्रिया से भिन्न है।
#11. जब कॉपर ऑक्साइड को हाइड्रोजन के साथ गर्म किया जाता है, तो तांबा धातु और पानी बनता है। इस अभिक्रिया में कॉपर ऑक्साइड का क्या होता है?
(RRB JE CBT I – : 31 May 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) अपचयन (Reduction)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अपचयन (Reduction) की प्रक्रिया: जब कॉपर ऑक्साइड ($CuO$) को हाइड्रोजन के साथ गर्म किया जाता है, तो कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन का हास (निकलना) होता है और वह कॉपर धातु ($Cu$) में बदल जाता है। ऑक्सीजन के हटने की इस प्रक्रिया को अपचयन कहते हैं।
- रासायनिक समीकरण: $CuO + H_2 \xrightarrow{\text{Heat}} Cu + H_2O$
- मुख्य बिंदु:
- इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन ($H_2$) का ऑक्सीकरण होकर जल ($H_2O$) बनता है, और यह एक रेडॉक्स (Redox) अभिक्रिया का क्लासिक उदाहरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I : 31 May 2019 Shift 1) में रासायनिक अभिक्रियाओं (ऑक्सीकरण और अपचयन) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) ऑक्सीकरण (Oxidation): ऑक्सीजन का जुड़ना ऑक्सीकरण कहलाता है, जबकि यहाँ कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन निकल रही है (इसलिए कॉपर ऑक्साइड का अपचयन होता है, न कि ऑक्सीकरण)।
- विकल्प (B) अपघटन (Decomposition): यह किसी एकल अभिकारक का दो या दो से अधिक उत्पादों में टूटना है, जबकि यह एक विस्थापन/रेडॉक्स अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) अपचयन और ऑक्सीकरण दोनों: यद्यपि पूरी समग्र अभिक्रिया रेडॉक्स (ऑक्सीकरण-अपचयन दोनों) है, लेकिन प्रश्न में विशेष रूप से ‘कॉपर ऑक्साइड का क्या होता है?’ पूछा गया है, इसलिए व्यक्तिगत रूप से कॉपर ऑक्साइड का केवल **अपचयन** होता है।
#12. इस्पात और लोहे को संक्षारण से बचाने के लिए जिंक की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(RPF Constable 2018 08 Feb 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) गैल्vanीकरण (Galvanisation / यसलेपन)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- गैल्vanीकरण (Galvanisation): यह लोहे और इस्पात (Steel) को जंग (संक्षारण/Rusting) से बचाने की एक बहुत ही लोकप्रिय विधि है। इस प्रक्रिया में लोहे या इस्पात की वस्तु पर पिघले हुए जिंक (जस्ता) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है।
- सुरक्षा का कारण: जिंक की परत लोहे को सीधे हवा और नमी के संपर्क में आने से रोकती है, जिससे लोहे का ऑक्सीकरण और संक्षारण नहीं होता है।
- मुख्य बिंदु:
- यदि जिंक की परत में थोड़ी खरोंच भी आ जाए, तब भी जिंक का बलिदानी संक्षारण (Sacrificial protection) लोहे को जंग लगने से बचाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 08 Feb 2019 Shift 2) में धातुओं के संक्षारण और उनके निवारण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) आयनीकरण (Ionisation): यह उदासीन परमाणुओं या अणुओं से आयनों के बनने की प्रक्रिया है, संक्षारण से बचाने की विधि नहीं।
- विकल्प (B) ऑक्सीकरण (Oxidation): यह ऑक्सीजन का जुड़ना या इलेक्ट्रॉनों का हास है, जो कि लोहे पर जंग लगने (संक्षारण) का मुख्य कारण बनता है, बचाव का तरीका नहीं।
- विकल्प (C) अपचयन (Reduction): यह हाइड्रोजन का जुड़ना या इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण करना है, जो जिंक की परत चढ़ाने से संबंधित नहीं है।
#13. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया अधुलनशील लवण पैदा करती है?
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) अवक्षेपण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो विलयनों को मिलाने पर एक अघुलनशील ठोस पदार्थ का निर्माण होता है, जो विलयन से नीचे बैठ जाता है, उसे अवक्षेप (Precipitate) कहते हैं और इस प्रक्रिया को अवक्षेपण अभिक्रिया कहा जाता है।
- उदाहरण: जब बेरियम क्लोराइड ($BaCl_2$) और सोडियम सल्फेट ($Na_2SO_4$) के विलयन मिलाए जाते हैं, तो बेरियम सल्फेट ($BaSO_4$) का अघुलनशील सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है।
- मुख्य बिंदु:
- अधिकांश अवक्षेपण अभिक्रियाएँ द्वि-विस्थापन (Double Displacement) अभिक्रियाओं का ही रूप होती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1) में रासायनिक अभिक्रियाओं के वर्गीकरण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) अपचयन (Reduction): यह इलेक्ट्रॉनों या हाइड्रोजन के ग्रहण और ऑक्सीजन के हास से जुड़ी प्रक्रिया है, अघुलनशील लवण बनाने से संबंधित नहीं है।
- विकल्प (C) ऑक्सीकरण (Oxidation): यह ऑक्सीजन के जुड़ने या इलेक्ट्रॉनों के निकलने की प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) उदासीनीकरण (Neutralization): यह अम्ल और क्षार के बीच की अभिक्रिया है जिससे घुलनशील लवण और जल बनते हैं, अघुलनशील लवण (अवक्षेप) पैदा करना इसका मुख्य लक्षण नहीं है।
#14. अभिक्रिया MnO 2 + 4HCl -> MnCl 2 + 2H 2 O + Cl 2 में कौन-सा पदार्थ ऑक्सीकृत होता है तथा कौन-सा पदार्थ अपचित होता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) MnO 2 अपचित होता है, HCl ऑक्सीकृत होता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अभिक्रिया का विश्लेषण: दी गई रासायनिक समीकरण $MnO_2 + 4HCl \rightarrow MnCl_2 + 2H_2O + Cl_2$ है।
- अपचयन (Reduction): मैंगनीज डाइऑक्साइड ($MnO_2$) से ऑक्सीजन निकलकर यह $MnCl_2$ में बदल जाता है, अतः $MnO_2$ का अपचयन होता है।
- ऑक्सीकरण (Oxidation): हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) से हाइड्रोजन निकलकर यह क्लोरीन गैस ($Cl_2$) में बदल जाता है (हाइड्रोजन का हास ऑक्सीकरण कहलाता है), अतः $HCl$ ऑक्सीकृत होता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह एक रेडॉक्स (Redox) अभिक्रिया का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन एक साथ होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में रासायनिक अभिक्रियाओं और रेडॉक्स प्रक्रिया के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) MnO 2 ऑक्सीकृत होता है, HCl अपचित होता है: यह कथन बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि $MnO_2$ का अपचयन होता है और $HCl$ का ऑक्सीकरण।
- विकल्प (B) MnCl 2 ऑक्सीकृत होता है, Cl 2 अपचित होता है: उत्पाद पक्ष के यौगिकों के संबंध में यह कथन गलत है, अभिकारकों का ऑक्सीकरण और अपचयन देखा जाता है।
- विकल्प (C) MnO 2 अपचित होता है, MnCl 2 ऑक्सीकृत होता है: यहाँ दूसरा हिस्सा गलत है क्योंकि $MnCl_2$ उत्पाद है, ऑक्सीकरण $HCl$ का होता है।
#15. कौन-सी रासायनिक अभिक्रिया में पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊष्मा उत्पन्न करता है?
(RPF Constable 2018 16 Feb 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) दहन (Combustion)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- दहन अभिक्रिया (Combustion Reaction): यह एक प्रकार की रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन ($O_2$) के साथ तेजी से अभिक्रिया करता है और इसके फलस्वरूप बड़ी मात्रा में ऊष्मा (Heat) और प्रकाश (Light) उत्पन्न होते हैं।
- मुख्य विशेषता: दहन को अनिवार्य रूप से एक तीव्र ऊष्माक्षेपी (Exothermic) ऑक्सीकरण प्रक्रिया माना जाता है, जिसमें ईंधन (जैसे लकड़ी, कोयला, एलपीजी आदि) ऑक्सीजन से संयोग करता है।
- मुख्य बिंदु:
- दहन के लिए तीन चीजें आवश्यक हैं: दहनशील पदार्थ, हवा (ऑक्सीकरण के लिए ऑक्सीजन) और प्रज्वलन तापमान।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 16 Feb 2019 Shift 2) में रासायनिक अभिक्रियाओं और ऊर्जा परिवर्तन के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (B) विस्फोट (Explosion): यह अत्यधिक तीव्र गति से होने वाला दहन या अपघटन है जिसमें अचानक गैस और तीव्र आवाज/ऊष्मा निकलती है, लेकिन सामान्य रासायनिक श्रेणी में ऑक्सीजन से लगातार ऊष्मा उत्पन्न करने वाली मुख्य अभिक्रिया ‘दहन’ कहलाती है।
- विकल्प (C) ऑक्सीकरण (Oxidation): यह एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन का जुड़ना या इलेक्ट्रॉन का निकलना शामिल है (जैसे लोहे पर जंग लगना, जो बहुत धीमी गति से होती है और ऊष्मा महसूस नहीं होती), जबकि दहन विशेष रूप से ऊष्मा उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) अपसेट (Upsetting): यह धातुकर्म (Metallurgy) में फोर्जिंग की एक प्रक्रिया है जिसमें धातु की लंबाई कम और मोटाई बढ़ाई जाती है, यह रासायनिक अभिक्रिया नहीं है।
#16. CH 3 COONa की उपस्थिति में CH 3 COOH की विलेयता घटती है, इसका कारण है:
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 06 Jun, 2025 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) सम आयन प्रभाव
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सम आयन प्रभाव (Common Ion Effect): जब किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य (जैसे एसिटिक अम्ल, $CH_3COOH$) के विलयन में कोई प्रबल विद्युत अपघट्य (जैसे सोडियम एसिटेट, $CH_3COONa$) मिलाया जाता है, जिसमें एक आयन (यहाँ एसिटेट आयн, $CH_3COO^-$) उभयनिष्ठ (Common) होता है, तो ली शातेलिए के नियम के अनुसार दुर्बल अम्ल का वियोजन कम हो जाता है और उसकी विलेयता/सांद्रता प्रभावित होती है।
- रासायनिक कारण: $CH_3COONa$ से प्राप्त अतिरिक्त $CH_3COO^-$ आयनों की उपस्थिति साम्यावस्था को पीछे की ओर धकेलती है, जिससे $CH_3COOH$ की विलेयता घट जाती है।
- मुख्य बिंदु:
- यह रासायनिक साम्य (Chemical Equilibrium) और आयनिक संतुलन का एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 06 Jun, 2025 Shift 3) में भौतिक रसायन विज्ञान (रासायनिक साम्य और सम आयन प्रभाव) के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) ऑक्सीकरण (Oxidation): यह इलेक्ट्रॉन या ऑक्सीजन के आदान-प्रदान से संबंधित है, विलयन में आयनों के प्रभाव से नहीं।
- विकल्प (C) आयन युग्मन (Ion Pairing): यह विपरीत आवेशित आयनों के आकर्षण से संबंधित है, लेकिन यहाँ मुख्य कारण उभयनिष्ठ आयन की उपस्थिति है।
- विकल्प (D) तापमान में वृद्धि (Increase in temperature): विलेयता आमतौर पर तापमान परिवर्तन से प्रभावित होती है, परंतु यहाँ मुख्य कारण सोडियम एसिटेट द्वारा उत्पन्न सम आयन प्रभाव है।
#17. जब जिंक ( Zn) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( HCl) के साथ अभिक्रिया करता है तो क्या होता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (C) जिंक ऑक्सीकृत होता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अभिक्रिया की प्रकृति: जब जिंक (Zn) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया करता है, तो जिंक क्लोराइड ($ZnCl_2$) बनता है और हाइड्रोजन गैस ($H_2$) विस्थापित होती है। रासायनिक समीकरण: $Zn + 2HCl \rightarrow ZnCl_2 + H_2$
- जिंक का ऑक्सीकरण: इस प्रक्रिया में जिंक धातु अपने दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर $Zn^{2+}$ आयन में बदल जाती है। इलेक्ट्रॉनों का यह त्याग (Loss of electrons) ऑक्सीकरण कहलाता है, अतः जिंक ऑक्सीकृत होता है।
- मुख्य बिंदु:
- इस अभिक्रिया में अम्ल से मिलने वाले हाइड्रोजन आयन ($H^+$) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके हाइड्रोजन गैस बनाते हैं, जिसका अपचयन होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec 2024 Shift 3) में धातुओं की अम्लों के साथ अभिक्रिया और रेडॉक्स प्रक्रिया के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) जिंक अपचयित होता है: जिंक इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है, इसलिए इसका ऑक्सीकरण होता है, अपचयन नहीं।
- विकल्प (B) हाइड्रोजन ऑक्सीकृत होता है: हाइड्रोजन आयन ($H^+$) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित होते हैं और $H_2$ गैस बनाते हैं, ऑक्सीकृत नहीं होते।
- विकल्प (D) जिंक और हाइड्रोजन दोनों ऑक्सीकृत होते हैं: चूँकि हाइड्रोजन का अपचयन होता है, इसलिए यह कथन गलत है।
#18. अंग्रेजी रसायनज्ञ हम्फ्री डेवी ने किस विधि को अपनाकर अत्यधिक अभिक्रियाशील क्षार धातुओं, विशेष रूप से सोडियम और पोटैशियम की खोज और पृथक्करण किया?
(RPF Constable 2024 06 Mar, 2025 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) विधुत अपघटन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत अपघटन (Electrolysis) विधि: 1807 में अंग्रेजी रसायनज्ञ सर हम्फ्री डेवी (Sir Humphry Davy) ने पिघले हुए पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड ($KOH$) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($NaOH$) का विद्युत अपघटन करके पहली बार पोटैशियम और सोडियम धातुओं को सफलतापूर्वक पृथक् किया था।
- उच्च अभिक्रियाशीलता: चूँकि सोडियम और पोटैशियम अत्यधिक अभिक्रियाशील (Reactive) धातुएँ हैं, इसलिए इन्हें साधारण रासायनिक अपचायक एजेंटों (जैसे कार्बन) द्वारा उनके यौगिकों से अलग नहीं किया जा सकता, इसके लिए विद्युत अपघटन ही एकमात्र प्रभावी विधि है।
- मुख्य बिंदु:
- इस तकनीक से उन्होंने कैल्शियम, मैग्नीशियम, बोरॉन और बेरियम जैसी अन्य प्रतिक्रियाशील धातुओं की भी खोज की थी।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2024 : 06 Mar, 2025 Shift 2) में धातुओं के निष्कर्षण और रसायन विज्ञान के इतिहास के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) कार्बन के साथ अपचयन: कार्बन का उपयोग मध्यम सक्रियता वाली धातुओं (जैसे जिंक, आयरन, लेड) के ऑक्साइड्स को अपचयित करने के लिए किया जाता है, अत्यधिक सक्रिय क्षार धातुओं के लिए नहीं।
- विकल्प (B) गलन (Smelting): यह अयस्कों को पिघलाकर धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया है, जो सोडियम/पोटैशियम जैसे अत्यधिक प्रतिक्रियाशील तत्वों के लिए उपयुक्त नहीं है।
- विकल्प (C) भर्जन और निस्तापन (Roasting and Calcination): इनका उपयोग मुख्य रूप से सल्फाइड और कार्बोनेट अयस्कों को उनके ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है।
#19. चिप पैकेटों ( chip packets) में नाइट्रोजन गैस की क्या भूमिका होती है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) यह ऑक्सीकरण को रोकता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विकृतगंधिता (Rancidity) से बचाव: चिप्स या अन्य वसायुक्त खाद्य पदार्थों को खुले में छोड़ने पर हवा की ऑक्सीजन के कारण उनका ऑक्सीकरण हो जाता है, जिससे उनका स्वाद और गंध खराब हो जाती है।
- नाइट्रोजन गैस ($N_2$) की भूमिका: चिप्स के पैकेटों में ऑक्सीजन को हटाकर अक्रिय (Inert) नाइट्रोजन गैस भरी जाती है। नाइट्रोजन एक निष्क्रिय गैस है जो खाद्य पदार्थों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करती, जिससे वसा और तेल का ऑक्सीकरण रुक जाता है और चिप्स लंबे समय तक ताजे और क्रिस्पी बने रहते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- यह खाद्य पदार्थों को नमी और खराब गंध से बचाने की एक बेहद प्रभावी औद्योगिक तकनीक है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05/12/2025) में दैनिक जीवन में ऑक्सीकरण के प्रभाव और खाद्य संरक्षण के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) यह नमी को अवशोषित करता है: नाइट्रोजन नमी को अवशोषित नहीं करती, बल्कि यह ऑक्सीजन को बाहर रखकर ऑक्सीकरण से बचाती है।
- विकल्प (C) यह कुरकुरापन बढ़ाता है: यह चिप्स का अपना प्राकृतिक कुरकुरापन बनाए रखती है, नया कुरकुरापन पैदा नहीं करती।
- विकल्प (D) यह स्वाद बढ़ाता है: नाइट्रोजन गैस स्वाद को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि स्वाद को बिगड़ने (ऑक्सीडाइज होने) से बचाने के लिए भरी जाती है।
#20. खाद्य उत्पादों में विकृतगंधिता ( rancidity) का कारण क्या है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 19/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) ऑक्सीकरण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विकृतगंधिता (Rancidity): जब वसा (Fats) और तेल से युक्त खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक हवा या ऑक्सीजन के संपर्क में खुला छोड़ दिया जाता है, तो उनका ऑक्सीकरण हो जाता है।
- परिणाम: ऑक्सीकरण के कारण खाद्य पदार्थों का स्वाद और गंध अप्रिय हो जाते हैं, जिसे विकृतगंधिता कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- इसे रोकने के लिए खाद्य पदार्थों में प्रति ऑक्सीकारक (Antioxidants) मिलाए जाते हैं या उन्हें वायुरोधी पात्रों/नाइट्रोजन गैस से भरे पैकेटों में रखा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC GRADUATE CBT 1 : 19/03/2026) में दैनिक जीवन में ऑक्सीकरण के प्रभावों के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) किण्वन (Fermentation): यह सूक्ष्मजीवों द्वारा शर्करा का अल्कोहल या अम्ल में बदलना है, जो विकृतगंधिता का रासायनिक कारण नहीं है।
- विकल्प (B) अपचयन (Reduction): यह हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का निकलना है, जबकि खाद्य पदार्थों के खराब होने का कारण ऑक्सीकरण है।
- विकल्प (C) वाष्पीकरण (Evaporation): यह तरल का गैस में बदलना है, जो वसायुक्त भोजन के स्वाद और गंध बिगड़ने का मुख्य कारण नहीं है।
#21. ब्लीचिंग पाउडर की प्रकृति क्या है?
(RRB JE CBT-I : 22 May, 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) ऑक्सीकरण कारक (Oxidising Agent)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) की प्रकृति: रासायनिक रूप से ब্লিचिंग पाउडर का सूत्र $CaOCl_2$ (कैल्शियम ऑक्सीchloride) है। यह एक प्रबल ऑक्सीकारक कारक के रूप में कार्य करता है।
- कार्य करने का तरीका: यह जल या अम्लों के साथ अभिक्रिया करके नवजात ऑक्सीजन ($O$) उत्पन्न करता है, जो रंगीन पदार्थों को ऑक्सीकृत करके उन्हें रंगहीन (विंरचित) बना देती है।
- मुख्य बिंदु:
- इसकी ऑक्सीकरण क्षमता के कारण ही इसका उपयोग कपड़ों की ब्लीचिंग और पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 22 May, 2019 Shift 2) में महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिकों के गुणों और उनके उपयोग के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) अपचायक कारक (Reducing Agent): ब्लीचिंग पाउडर स्वयं दूसरों का ऑक्सीकरण करता है और खुद अपचयित होता है, इसलिए यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है न कि अपचायक।
- विकल्प (B) ब्लिस्टेरिंग कारक: यह त्वचा पर छाले डालने वाला विशिष्ट रासायनिक कारक नहीं है, बल्कि इसका मुख्य गुण विरंजन और ऑक्सीकरण है।
- विकल्प (C) सल्फोनेटिंग कारक: यह कार्बनिक यौगिकों में सल्फोनिक समूह ($-$SO3H) जोड़ने वाला कारक नहीं है।
#22. अभिक्रिया Zn + CuSO 4 -> ZnSO 4 + Cu में, जिंक के साथ क्या होता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) जिंक ऑक्सीकृत होता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): दी गई रासायनिक समीकरण $Zn + CuSO_4 \rightarrow ZnSO_4 + Cu$ में, अधिक अभिक्रियाशील धातु जिंक ($Zn$), कॉपर सल्फेट विलयन से तांबे ($Cu$) को विस्थापित कर देती है।
- ऑक्सीकरण की प्रक्रिया: इस अभिक्रिया के दौरान जिंक धातु ($Zn$) इलेक्ट्रॉन त्यागकर जिंक आयन ($Zn^{2+}$) में परिवर्तित होती है। इलेक्ट्रॉनों के इस त्याग को ऑक्सीकरण (Oxidation) कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- साथ ही, विलयन में मौजूद कॉपर आयन ($Cu^{2+}$) उन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके तांबे धातु ($Cu$) के रूप में अपचयित हो जाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec 2024 Shift 1) में विस्थापन और रेडॉक्स अभिक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) जिंक अपचयित होता है: जिंक इलेक्ट्रॉन त्यागता है इसलिए इसका ऑक्सीकरण होता है, अपचयन कॉपर आयनों का होता है।
- विकल्प (C) जिंक में कोई परिवर्तन नहीं होता है: जिंक अभिक्रिया करके $ZnSO_4$ बनाता है, अतः इसमें रासायनिक परिवर्तन होता है।
- विकल्प (D) जिंक इलेक्ट्रॉन त्यागता है: यद्यपि जिंक इलेक्ट्रॉन त्यागता है (जो कि सत्य है), लेकिन इस प्रक्रिया का रासायनिक रूप से सटीक और व्यापक मुख्य नाम ‘ऑक्सीकरण’ (विकल्प B) है।
#23. निम्नलिखित अभिक्रिया Fe + CuSO 4 -> FeSO 4 + Cu में, लोहा _______ ।
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) ऑक्सीकृत हो जाता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): दी गई रासायनिक समीकरण $Fe + CuSO_4 \rightarrow FeSO_4 + Cu$ में, लोहा (Iron/Fe) कॉपर की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह कॉपर सल्फेट विलयन से तांबे ($Cu$) को विस्थापित कर देता है।
- ऑक्सीकरण (Oxidation): इस प्रक्रिया के दौरान लोहा ($Fe$) अपने दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर फेरस आयन ($Fe^{2+}$) में बदल जाता है। इलेक्ट्रॉनों के इस त्याग को ऑक्सीकरण कहा जाता है, अतः लोहा ऑक्सीकृत हो जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- इस अभिक्रिया में कॉपर आयन ($Cu^{2+}$) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके तांबे धातु के रूप में अपचयित होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03/12/2025) में धातुओं की सक्रियता और रेडॉक्स अभिक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
- विकल्प (A) अपरिवर्तित रहता है: लोहा कॉपर सल्फेट के साथ अभिक्रिया करके $FeSO_4$ बनाता है, अतः इसमें रासायनिक परिवर्तन होता है।
- विकल्प (B) उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है: लोहा यहाँ एक अभिकारक (Reactant) के रूप में भाग लेता है, न कि केवल उत्प्रेरक के रूप में।
- विकल्प (D) अपचयित हो जाता है: लोहा इलेक्ट्रॉन त्यागता है इसलिए इसका ऑक्सीकरण होता है, अपचयन कॉपर आयनों का होता है।
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