Rajasthan ki Hastkala Quiz

 

Results

#1. ……अपने काले-लाल प्रिंट के लिए प्रसिद्ध है जिसमें फूलों, पत्तियों, जानवरों और पक्षियों को मटिया (मिट्टी) रंग के आधार पर लाल और काले रंग में बनाया जाता है- [Assistant Engineer-Civil -21.05.23]

राजस्थान की प्रमुख हस्तकलाएं

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(3) बगरू प्रिंट (जयपुर)
Natural Dyeing

यह छपाई की एक प्राकृतिक रंग प्रणाली (Natural Dyeing) है। इसमें बेल-बूटों, पशु-पक्षियों तथा प्राकृतिक आकृतियों का प्रयोग किया जाता है। इसका आधार मटिया (Hued Clay) होता है तथा मुख्य रूप से लाल और काले रंगों का प्रयोग किया जाता है। इसमें छपाई के लिए ‘दाबू’ तकनीक का प्रयोग होता है।

(1) सांगानेरी प्रिंट (जयपुर)
मलमल छपाई

सांगानेरी प्रिंट अपने सफेद या हल्के पृष्ठभूमि पर लाल व काले रंग के सूक्ष्म (बारीक) बेल-बूटों के लिए जानी जाती है। इसमें ‘मलमल’ वस्त्र पर अति सुंदर व आकर्षक छपाई की जाती है।

(2) कैथून (कोटा)
कोटा डोरिया

कैथून स्थान अपने ‘कोटा डोरिया’ (मसूरिया मलमल) साड़ियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, न कि छपाई कार्य के लिए

(4) अकोला (चित्तौड़गढ़)
दाबू व जाजम प्रिंट

चित्तौड़गढ़ का अकोला क्षेत्र मुख्य रूप से ‘दाबू प्रिंट’ तथा ‘जाजम प्रिंट’ के लिए प्रसिद्ध है।

परीक्षा उपयोगी मुख्य तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु
GI Tag & Awards
  • GI Tag: बगरू प्रिंट और सांगानेरी प्रिंट दोनों को ही GI Tag (भौगोलिक संकेतक) प्राप्त है।
  • पद्मश्री पुरस्कार: ‘रामकिशोर छीपा’ को बगरू प्रिंट के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

 

#2. राजस्थान का कौनसा जिला बंधेज साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है? [EO & RO – 14.05.2023 (S – I)]

 

राजस्थान की प्रमुख हस्तकलाएं

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(1) जोधपुर
बंधेज कला (Tie & Dye)

बंधेज कला के अंतर्गत कपड़ों को बांधकर रंगा जाता है। जोधपुर की बंधेज साड़ियाँ, बंधेज के साफे और चुनरी पूरे राजस्थान में अत्यंत प्रसिद्ध हैं।

(2) कोटा
कोटा डोरिया व मसूरिया

कोटा क्षेत्र मुख्य रूप से कोटा डोरिया तथा मसूरिया साड़ियों के उत्पादन का राजस्थान में प्रमुख केंद्र माना जाता है।

(3) शाहपुरा (भीलवाड़ा/शाहपुरा जिला)
फड़ चित्रकारी (Phad Painting)

शाहपुरा कपड़ों पर की जाने वाली पारंपरिक ‘फड़ चित्रकारी’ के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। इस कला को जीवंत रखने में वहाँ का जोशी परिवार मुख्य रूप से संलग्न है।

(4) उदयपुर
मेवाड़ हस्तकला

उदयपुर में ‘पोमचा’ और ‘लहरिया’ के साथ-साथ पारंपरिक मेवाड़ शैली की हस्तकलाएं व्यापक रूप से प्रचलित हैं।

परीक्षा उपयोगी मुख्य तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु
Important Notes
  • बंधेज की सबसे बड़ी मंडी: यह जोधपुर में स्थित है, जबकि बंधेज का सर्वाधिक बारीक (सूक्ष्म) काम जयपुर और शेखावाटी क्षेत्र में किया जाता है।
  • लहरिया और पोमचा: जयपुर का ‘लहरिया’ और ‘पोमचा’ (विशेषकर पीला व गुलाबी पोमचा) पूरे प्रदेश में अत्यधिक प्रसिद्ध है।

 

#3. राजस्थान की कौनसी पारम्परिक कपड़ा रंगाई तकनीक से लम्बे समय तक सुगंधित रहने वाले कपड़े/वस्त्र का उत्पादन किया जाता था- [सांख्यिकी अधिकारी- 20.12.2021]

 

राजस्थान के प्रमुख वस्त्र एवं ओढ़नियां

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(2) मलागिरि (मलयगिरि)
सुगंधित एवं भूरा वस्त्र

इसमें कपड़ों की रंगाई में चंदन की लकड़ी/सार तथा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता था। इससे वस्त्र में भूरा/बादामी रंग चढ़ने के साथ-साथ लंबी अवधि तक सुगंध बनी रहती थी

(1) अमोवा
शिकारी वस्त्र

अमोवा एक खास खाकी रंग का वस्त्र होता है, जिसे विशेषकर शिकारी या राजपूत वर्ग द्वारा शिकार के समय पहना जाता था।

(3) पोमचा
प्रसूता की ओढ़नी

नवजात शिशु के जन्म पर प्रसूता को पहनाई जाने वाली ओढ़नी। पुत्र जन्म पर पीला पोमचा और पुत्री जन्म पर गुलाबी पोमचा दिया जाता है।

(4) लहरिया
धारीदार ओढ़नी

सावन के महीने में महिलाओं द्वारा ओढ़ी जाने वाली धारीदार वस्त्र ओढ़नी। राजस्थान में जयपुर का लहरिया अत्यधिक प्रसिद्ध है।

 

#4. वस्त्र रंगने की मलयगिरी पद्धति में किस रंग की प्रधानता होती है- [II Grade (Sans..)-12.2.2023 (S-I)]

 

राजस्थान के पारंपरिक रंग एवं हस्तकलाएं

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

मुख्य विकल्प व्याख्या

(2) भूरा (Brown)
मलयगिरी रंगाई तकनीक

मलयगिरी (मलागिरि) रंगाई तकनीक में मुख्य रूप से भूरे / कट्ठई रंग की प्रधानता होती है। यह रंग मुख्य रूप से चंदन और विभिन्न पेड़ों की छालों के प्राकृतिक घटकों द्वारा विशेष रूप से तैयार किया जाता है।

अन्य रंगों का हस्तकला में प्रयोग

विभिन्न रंगों का विश्लेषण
कला एवं रंग

 काला रंग

मुख्य रूप से ‘अजरक प्रिंट’ एवं ‘बगरू प्रिंट’ में बहुतायत से प्रयुक्त होता है।

 नीला रंग

जयपुर की प्रसिद्ध ‘ब्लू पॉटरी’ एवं बाड़मेर की ‘अजरक प्रिंट’ में प्रयुक्त किया जाता है।

 पीला रंग

मांगलिक ओढ़नी ‘पोमचा’ एवं जयपुर की ‘सांगानेरी प्रिंट’ में प्रमुखता से दिखता है।

 

#5. निम्न में से असत्य कथन है-[II Grade (Urdu). 2011]

 

राजस्थान की प्रमुख हस्तकलाएं एवं केंद्र

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

उत्तर एवं असत्य कथन का विश्लेषण

(2) बाँसवाड़ा का तलवाड़ा गाँव (असत्य कथन)
❌ असत्य कथन

कथन: काष्ठ पर कलात्मक मूर्तियाँ बनाने के लिए बाँसवाड़ा का तलवाड़ा गाँव प्रसिद्ध है।

वास्तविक तथ्य: बांसवाड़ा का तलवाड़ा गाँव ‘संगीन कला’ (संगमर्मर/सोपस्टोन की मूर्तियों) के लिए जाना जाता है, न कि काष्ठ मूर्तियों के लिए। राजस्थान में काष्ठ (लकड़ी) कला के लिए मुख्य केंद्र बस्सी (चित्तौड़गढ़) है।

अन्य महत्वपूर्ण (सत्य) कथनों का विश्लेषण

(1) डूंगरपुर का देवल क्षेत्र
✓ सत्य कथन

डूंगरपुर के देवल क्षेत्र की खानों से विशेष ‘पारेवा पत्थर’ (Soft Stone) निकाला जाता है। इस पत्थर का उपयोग सुंदर मूर्तियाँ और विभिन्न प्रकार के कलात्मक बर्तन बनाने में किया जाता है।

(3) चन्द्रजी का गढ़ा व बोडीगामा गाँव
✓ सत्य कथन

बांसवाड़ा का ‘चन्द्रजी का गढ़ा’ और डूंगरपुर का ‘बोडीगामा गाँव’ राजस्थान में पारम्परिक ‘तीर-कमान’ निर्माण के लिए संपूर्ण भारत में प्रसिद्ध हैं।

(4) हस्तकलाओं का आगार / अजायबघर
✓ सत्य कथन

राजस्थान में मिलने वाली विविध हस्तशिल्प विधाओं, बारीक कारीगरी और अत्यंत समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के कारण ही पूरे राज्य को ‘हस्तकलाओं का आगार या अजायबघर’ की संज्ञा दी जाती है।



#6. सोमपुरा शैली जानी जाती है- [ARO-29.8.2022]

 

राजस्थान की कला, संस्कृति एवं शैलियाँ

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(4) स्थापत्य / मूर्तिकला
सोमपुरा ज्ञाति शैली

‘सोमपुरा ज्ञाति/शैली’ मुख्य रूप से मंदिर स्थापत्य और पत्थर की बारीक नक्काशीदार मूर्तिकला के लिए जगप्रसिद्ध है।

गुजरात तथा दक्षिण-पश्चिम राजस्थान (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) के सोमपुरा ब्राह्मण/शिल्पी प्राचीन भव्य और ऐतिहासिक मंदिरों (जैसे सोमनाथ मंदिर) का निर्माण करने वाले मास्टर आर्किटेक्ट माने जाते हैं।

(1) मिट्टी के बर्तन (मृण्मय कला)
टेराकोटा व पॉटरी

मिट्टी के कलात्मक बर्तनों और मूर्तियों के लिए राजसमंद का ‘मोलेला’ गाँव (टेराकोटा हस्तशिल्प) और कोटा की ‘ब्लैक पॉटरी’ पूरे राजस्थान में अत्यंत प्रसिद्ध हैं।

(3) चित्रकला
राजस्थानी चित्रशैलियाँ

राजस्थान का चित्रकला संसार बहुत समृद्ध है। यहाँ मुख्य रूप से चार बड़े स्कूलों/शैलियों में इसे बाँटा गया है: मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती, और ढूंढाड़ शैली। ये सभी अपनी अनूठी रंग संगति और विषयों के लिए जानी जाती हैं।

 

#7. कुदरतसिंह को राजस्थान की किस हस्तकला में योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया है? [I Grade Teacher (GK) -15.10.2022] [Industry Inspector-24.6.2018] [प्रयोगशाला सहायक-3.2.2019]

 

राजस्थान की हस्तकलाएं एवं पद्मश्री पुरस्कार

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(3) मीनाकारी (जयपुर)
पद्मश्री 1988

सोने-चांदी के गहनों पर अत्यंत बारीक मीनाकारी वर्क करने के लिए प्रसिद्ध शिल्पी सरदार कुदरतसिंह (Kudrat Singh) को वर्ष 1988 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

(1) पॉटरी (ब्लू पॉटरी)
पद्मश्री 1974

जयपुर की प्रसिद्ध ‘ब्लू पॉटरी’ को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और इसके विकास के लिए कृपाल सिंह शेखावत को वर्ष 1974 में पद्मश्री से अलंकृत किया गया था।

(2) कपड़े की छपाई (बगरू प्रिंट)
पद्मश्री पुरस्कार

प्राकृतिक रंगों से की जाने वाली कपड़ों की पारंपरिक छपाई ‘बगरू प्रिंट’ के लिए उत्कृष्ट योगदान देने हेतु रामकिशोर छीपा को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया।

(4) पीतल पर मुरादाबादी काम
जयपुर व अलवर

पीतल के बर्तनों और कलाकृतियों पर बारीक नक्काशी का ‘मुरादाबादी काम’ मुख्य रूप से राजस्थान के जयपुर तथा अलवर जिलों में अत्यधिक प्रसिद्ध है।

#8. राजस्थान में कहाँ पर प्रसिद्ध मीनाकारी गहने बनाये जाते हैं ? [R.A.S. Pre Exam. 2003]

 

राजस्थान की प्रमुख हस्तकलाएं एवं शहर

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(1) जयपुर
मीनाकारी (Enamelling)

जयपुर को मीनाकारी का अंतरराष्ट्रीय केंद्र माना जाता है। यहाँ सोने के आभूषणों पर लाल, हरे और नीले रंगों से अत्यंत सुंदर व बारीक मीनाकारी का कार्य किया जाता है।

(2) उदयपुर
सीसा, जस्ता व चांदी

उदयपुर क्षेत्र अपनी समृद्ध धातुओं जैसे सीसे, जस्ते तथा चांदी के विविध पारंपरिक एवं कलात्मक कार्यों के लिए जाना जाता है।

(3) जोधपुर
जस्ते के बादले

जोधपुर अपने जस्ता (Zinc) निर्मित ठंडा पानी रखने की बोतलों ‘बादले’ (Badle) के लिए संपूर्ण राजस्थान में प्रसिद्ध है।

(4) अजमेर
गोटा-पट्टी व टेकरा

अजमेर (विशेष रूप से खंडेला व आसपास के क्षेत्र) अपने पारंपरिक ‘गोटा-पट्टी’ कार्य और टेकरा काम के लिए पहचाना जाता है।

#9. मीनाकारी की कला राजस्थान में सर्वप्रथम किसके द्वारा लाई गई? [JEN (यांत्रिकी) डिप्लोमा -13.12.2020] [महिला पर्यवेक्षक- 29.11.2015 ] [Asst. Jailer -15.03.2016]

 

राजस्थान का इतिहास एवं हस्तकला विकास

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

मुख्य विकल्प व्याख्या

(2) मानसिंह-I (आमेर / जयपुर राजा)
मीनाकारी के प्रणेता

आमेर के प्रतापी राजा मानसिंह-प्रथम 16वीं शताब्दी में लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) से मीनाकारी कला के सर्वश्रेष्ठ कारीगरों को अपने साथ आमेर (जयपुर) लेकर आए थे। उन्हीं के प्रयासों से जयपुर में इस सुंदर कला की नींव पड़ी।

अन्य महत्वपूर्ण शासकों का विश्लेषण

अन्य विकल्प विश्लेषण
इतिहास एवं शासक

विकल्पों में दिए गए अन्य शासक भी राजस्थान के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं:

👑 राजा जयसिंह द्वितीय (सवाई जयसिंह)

इन्होंने भारत के सबसे सुव्यवस्थित ऐतिहासिक शहर जयपुर की स्थापना (18 नवंबर 1727) की थी तथा खगोलीय वेधशालाओं (जंतर-मंतर) का निर्माण करवाया था।

👑 महाराजा जसवंतसिंह

यह मारवाड़ (जोधपुर) के अत्यंत प्रतापी, कुशल रणनीतिकार और वीर राठौड़ शासक थे, जो अपनी वीरता और स्वाभिमान के लिए जाने जाते हैं।

#10. राजा मानसिंह आमेर में मीनाकारी की कला को प्रारम्भ करने के लिए पाँच कारीगर किस स्थान से लाया? [Agri. Officer-29.1.2013][क.वैज्ञानिक सहायक- 22.9.2019] [III Grade (Maths-Science) -25.02.2023][वनपाल-06.11.2022(II)]

 

 

 

राजस्थान का इतिहास एवं हस्तकला विकास

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

मुख्य विकल्प व्याख्या

(2) मानसिंह-I (आमेर / जयपुर राजा)
मीनाकारी के प्रणेता

आमेर के प्रतापी राजा मानसिंह-प्रथम 16वीं शताब्दी में लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) से मीनाकारी कला के सर्वश्रेष्ठ कारीगरों को अपने साथ आमेर (जयपुर) लेकर आए थे। उन्हीं के प्रयासों से जयपुर में इस सुंदर कला की नींव पड़ी।

अन्य महत्वपूर्ण शासकों का विश्लेषण

अन्य विकल्प विश्लेषण
इतिहास एवं शासक

विकल्पों में दिए गए अन्य शासक भी राजस्थान के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं:

👑 राजा जयसिंह द्वितीय (सवाई जयसिंह)

इन्होंने भारत के सबसे सुव्यवस्थित ऐतिहासिक शहर जयपुर की स्थापना (18 नवंबर 1727) की थी तथा खगोलीय वेधशालाओं (जंतर-मंतर) का निर्माण करवाया था।

👑 महाराजा जसवंतसिंह

यह मारवाड़ (जोधपुर) के अत्यंत प्रतापी, कुशल रणनीतिकार और वीर राठौड़ शासक थे, जो अपनी वीरता और स्वाभिमान के लिए जाने जाते हैं।

 



#11. टेराकोटा पद्धति से विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाई जाने वाला स्थल मोलेला किस जिले में स्थित है ? [वनरक्षक परीक्षा – 2013]

 

राजस्थान में मीनाकारी का आगमन एवं केंद्र

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

मुख्य विकल्प व्याख्या

(4) लाहौर
मीनाकारी का मूल मार्ग

मुगल दरबार व लाहौर में उस समय पारसी कला से प्रभावित मीनाकारी का स्वर्ण दौर चल रहा था।

आमेर के प्रतापी शासक राजा मानसिंह प्रथम इस कला को लाहौर (मूल रूप से मुल्तान/फ़ारस) से 5 दक्ष कारीगरों के साथ अपने साथ आमेर (जयपुर) लेकर आए थे, जिन्होंने इसे राजस्थान में प्रतिष्ठित किया।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण

बुरहानपुर, दिल्ली, वाराणसी
मुग़लकालीन कला केंद्र

ये सभी स्थान भी मुग़लकाल के दौरान राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बड़े केंद्र थे, लेकिन इनका महत्व अलग था:

📍 बुरहानपुर

मुग़लकालीन सैन्य अभियानों का एक बेहद प्रमुख बेस और दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार था।

📍 दिल्ली व वाराणसी

ये क्षेत्र मुख्य रूप से रेशम उद्योग तथा पारंपरिक सदोरी कला के देशव्यापी प्रमुख केंद्र थे।

💡 परीक्षा नोट: यद्यपि ये शहर समृद्ध थे, परंतु राजस्थान में मीनाकारी का आगमन स्पष्ट रूप से ‘लाहौर’ से ही हुआ था।

#12. राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मोहनलाल किस शिल्प से सम्बन्धित हैं? [AEN -16.5.2014][JEN (Civil)- 18.5.2022]

 

राजस्थान की प्रमुख हस्तकलाएं एवं सिद्धहस्त कलाकार

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(1) मृण्मय मूर्तिकला (Terracotta)
मोहनलाल कुम्हार

मोलेला (राजसमंद) के प्रसिद्ध शिल्पकार मोहनलाल कुम्हार पक्की मिट्टी (टेराकोटा) से लोक-देवताओं की सुंदर पट्टिकाएँ (Relief Plaques) और मूर्तियाँ बनाने में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारंगत थे।

(2) काष्ठ कला (Wood Craft)
प्रभातजी सुथार

बस्सी (चित्तौड़गढ़) के प्रसिद्ध कलाकार ‘प्रभातजी सुथार’ राजस्थान में पारंपरिक काष्ठ कला (लकड़ी के बेवाण, कावड़, गणगौर आदि बनाने) के लिए विख्यात हैं।

(4) हस्तनिर्मित कागज (Handmade Paper)
सांगानेर व घोसुंडा

राजस्थान में सांगानेर (जयपुर) और घोसुंडा (चित्तौड़गढ़) हस्तनिर्मित कागज़ (Handmade Paper Industry) के सबसे प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।

#13. निम्न दस्तकारों में से किसे टेराकोटा ऑफ मोलेला के लिए पद्मश्री पुरस्कार दिया गया है? [CET – 5.2.2023 (S-I)]

 

 

राजस्थान के पद्मश्री सम्मानित महान शिल्पकार

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(1) मोहनलाल कुम्हार
पद्मश्री 2012 (टेराकोटा)

मोलेला (राजसमंद) के सिद्धहस्त टेराकोटा शिल्पकार मोहनलाल कुम्हार को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने हेतु वर्ष 2012 में पद्मश्री से अलंकृत किया गया था।

(2) महेश सोनी
थेवा कला (प्रतापगढ़)

इन्हें प्रतापगढ़ की विश्वप्रसिद्ध ‘थेवा कला’ (हरे कांच पर सोने की बारीक व सूक्ष्म कलात्मक कारीगरी) में उत्कृष्ट शिल्पकारिता के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

(3) अर्जुन प्रजापति
जयपुर मूर्तिकला

जयपुर की प्रसिद्ध ‘संगमरमर मूर्तिकला’ (Marble Sculpting) तथा विशेष रूप से प्रसिद्ध चित्र ‘बनी-ठनी’ की जीवंत पत्थर मूर्ति बनाने के लिए इन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

(4) श्री लाल जोशी
पद्मश्री 2006 (फड़ चित्रकारी)

भीलवाड़ा की पारंपरिक ‘फड़ चित्रकारी’ (Phad Painting) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रसिद्ध चित्रकार श्री लाल जोशी को वर्ष 2006 में पद्मश्री से अलंकृत किया गया।

#14. टेराकोटा से उन्नत मर्तियों या देवताओं की मूर्तियाँ बनाने की मोलेला कला में, मिट्टी को मजबूत करने और उसे कड़ा बनाने के लिए उसमें निम्न में से कौनसी सामग्री मिलाई जाती है? [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-15.05.2022 (II)]

 

विकल्प विश्लेषण

(2) चावल की भूसी और गधे की लीद
सोलहंडा मिट्टी मिश्रण

मोलेला (राजसमंद) की प्रसिद्ध टेराकोटा कला में प्रयुक्त होने वाली ‘सोलहंडा मिट्टी’ में विशेष रूप से धान (चावल) की भूसी तथा गधे की लीद (Dung) मिलाई जाती है।

🌾 आवश्यक सामग्री

सोलहंडा स्थानीय मिट्टी चावल की भूसी गधे की लीद का सटीक जैविक मिश्रण।

💡 मुख्य उद्देश्य / वैज्ञानिक कारण

यह मिश्रण पकाने के दौरान मिट्टी को चटकने/टूटने से बचाता है तथा मूर्तियों को आवश्यक दृढ़ता व मजबूती प्रदान करता है।

#15. राजसमन्द जिले में स्थित मोलेला गाँव किस लोक कला के लिए विख्यात है? [Lab Assistent (Geography)-30.06.2022] [III Grade (Punjabi) -28.02.2023]

 

 

राजस्थान की विश्वप्रसिद्ध हस्तकलाएं

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(1) मोलेला मृण्मूर्ति शिल्प (Terracotta)
राजसमंद (नाथद्वारा)

मोलेला गाँव मिट्टी की पकी मूर्तियों (टेराकोटा) व विशेष प्रकार की धार्मिक देव-पट्टिकाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ मुख्य रूप से लोकदेवता देवनारायण जी और धर्मराज जी की कलात्मक मृण्मूर्तियां बनाई जाती हैं।

(2) थेवा कला
प्रतापगढ़

कांच (विशेषकर बेल्जियम के हरे कांच) पर सोने की अत्यंत बारीक, गुप्त और उत्कृष्ट नक्काशी करने की यह अनूठी कला संपूर्ण विश्व में केवल प्रतापगढ़ (सोनी परिवार) की पहचान है।

(3) ब्लू पॉटरी
जयपुर

चीनी मिट्टी (Quartz/कैओलिन) के सफेद बर्तनों पर नीले और अन्य आकर्षक रंगों से चित्र उकेरने की अनूठी विधा है। यह कला मुख्य रूप से जयपुर की विश्वप्रसिद्ध हस्तकला है।

(4) हाथी दांत कला (Ivory Craft)
जयपुर व जोधपुर

हाथी के दांतों पर बारीक नक्काशी, आभूषण (जैसे हाथी दांत की चूड़ियाँ) और कलात्मक खिलौने व वस्तुएं बनाने के लिए राजस्थान के जयपुर और जोधपुर जिले देश भर में प्रसिद्ध हैं।



#16. वह स्थान, जो अपने मृदा शिल्प (टेराकोटा) के लिए प्रसिद्ध है- [पशुधन सहायक परीक्षा – 21.10.2018] [RAS Exam – 2015]

 

 

राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक व हस्तशिल्प केंद्र

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(1) मोलेला (राजसमंद)
टेराकोटा / मृदा शिल्प

राजसमंद जिले का मोलेला गाँव पूरे राजस्थान में **टेराकोटा (मृदा शिल्प / मिट्टी की पकी हुई मूर्तियाँ)** बनाने का मुख्य और विश्वप्रसिद्ध केंद्र है। यहाँ की देव-पट्टिकाएँ देश-विदेश में पहचानी जाती हैं।

(2) कैथून (कोटा)
कोटा डोरिया साड़ी

कोटा जिले का कैथून कस्बा विशेष रूप से अपनी **’कोटा डोरिया’ (मसूरिया मलमल) साड़ियों** के बेहतरीन और कलात्मक उत्पादन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

(3) बगरू (जयपुर)
बगरू प्रिंट

जयपुर ग्रामीण का बगरू क्षेत्र हाथ से की जाने वाली **ब्लाक प्रिंटिंग (बगरू प्रिंट)** के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें मुख्य रूप से प्राकृतिक रंगों (Natural Dyes) और ‘दाबू’ तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

(4) सांगानेर (जयपुर)
हस्तशिल्प व परिवहन केंद्र

जयपुर का सांगानेर क्षेत्र दो प्रमुख कारणों से विख्यात है: प्रथम, यहाँ की बारीक और मलमल पर की जाने वाली सांगानेरी प्रिंट तथा हस्तनिर्मित कागज़ उद्योग। द्वितीय, यहाँ राज्य का एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (एयर-पोर्ट) स्थित है।

#17. मोलेला ग्राम किस हस्तशिल्प कला के लिए प्रसिद्ध है। [III Grade (Urdu) -28.02.2023][ ग्राम सेवक-18.12.2016]

विस्तृत व्याख्या: टेराकोटा कला का अर्थ होता है – मिट्टी से बर्तन, मूर्तियाँ अथवा खिलौने बनाकर उन्हें आग में पकाना।

#18. टेराकोटा मूर्तियाँ निम्नलिखित में से किससे बनायी जाती है? [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-14.07.2018 (II)]

 

 

 

मोलेला मृदा शिल्प (Terracotta)

मिट्टी शोधन, निर्माण एवं पकाने की पारम्परिक विधि

विस्तृत तकनीकी व्याख्या

मोलेला गाँव की विश्वप्रसिद्ध टेराकोटा कला में मिट्टी तैयार करने से लेकर उसके अंतिम रूप में पकने तक की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होती है:

1

मिट्टी का चयन एवं शोधन (Clay Selection & Cleaning)

सर्वप्रथम स्थानीय सोलहंडा तालाब की विशिष्ट मिट्टी को लाया जाता है। इसे अच्छी तरह छाना और साफ किया जाता है ताकि इसमें से कंकड़-पत्थर और अशुद्धियाँ पूरी तरह दूर हो सकें।

2

प्राकृतिक रेशों का सम्मिश्रण (Adding Natural Fibers)

साफ की गई मिट्टी में लचीलापन और मजबूती लाने के लिए प्राकृतिक रेशे (जैसे धान की भूसी और गधे की लीद) मिलाए जाते हैं। यह मिश्रण सुखाते और पकाते समय कलाकृतियों को फटने से बचाता है।

3

हस्तशिल्प आकार देना (Shaping the Art)

तैयार मिट्टी के लोंदे से कुशल शिल्पी अपने हाथों की नक्काशी द्वारा सुंदर देव-पट्टिकाओं (Relief Plaques) और मूर्तियों को जीवंत आकार देते हैं

4

भट्टी में उच्च तापन (Baking in the Thaw)

अंत में इन कच्ची आकृतियों को पारम्परिक स्थानीय भट्टी (Thaw) में

#19. नागौर का ‘बू’ गाँव किसलिए प्रसिद्ध हुआ करता था- [पटवार-24.10.2021 (Shift -I)] [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-14.05.2022][JEN- 21.8.2016]

#20. काली मिट्टी के बर्तनों के लिए कौनसा स्थान प्रसिद्ध है? [CET -4.2.2023 (S-II)]

 

 

राजस्थान की हस्तकला: विभिन्न पॉटरी शिल्प

विस्तृत व्याख्या एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य

मुख्य विकल्प व्याख्या

⚫ ब्लैक पॉटरी (Black Pottery)
कोटा व सवाई माधोपुर

यह कला मुख्य रूप से राजस्थान के कोटा और सवाई माधोपुर जिलों की प्रसिद्ध है।

विशेषता: इसमें मिट्टी के बर्तनों पर ऊपर से बिना किसी अतिरिक्त पेंट या कृत्रिम रंग का उपयोग किए, मिट्टी को एक विशेष पारंपरिक तकनीक व भट्टी प्रसंस्करण द्वारा सुंदर चमकदार काला रंग दिया जाता है।

परीक्षा उपयोगी मुख्य तथ्य (पॉटरी के प्रकार)

📋 राजस्थान के अन्य प्रमुख पॉटरी शिल्प
Quick Revision

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले पॉटरी के अन्य प्रमुख प्रकार व उनके संबंधित केंद्र निम्नलिखित हैं:

पॉटरी का प्रकार संबंधित प्रसिद्ध केंद्र/जिला
ब्लू पॉटरी (Blue Pottery) जयपुर
कागजी पॉटरी (Paper Fine Pottery) अलवर
सुनहरी पॉटरी (Golden Pottery) बीकानेर
सफेद / पोकरण पॉटरी जैसलमेर (पोकरण)

 



#21. हस्तकला-स्थान में सुमेलित नहीं है? [JEN (Diploma)- 21.8.2016]

 

 

राजस्थान की लोक कलाएं एवं हस्तशिल्प केंद्र

विस्तृत व्याख्या एवं विकल्प विश्लेषण

विकल्प विश्लेषण

(1) मामाजी के घोड़े (मृण्मय कला)
हरजी गाँव (जालौर)

मिट्टी के बने प्रसिद्ध लोक आस्था के प्रतीक **मामाजी के घोड़े** जालौर जिले के हरजी गाँव के प्रसिद्ध हैं।

⚠️ परीक्षा सतर्कता: परीक्षा में अक्सर भ्रमित करने के लिए इसे बसंतगढ़ (सिरोही) लिखा जाता है, जो कि असत्य है।

(2) दाबू प्रिंट
आकोला (चित्तौड़गढ़)

प्रतिरोधक छपाई (Resist Printing) की पारंपरिक हस्तशिल्प विधा ‘दाबू प्रिंट’ के लिए चित्तौड़गढ़ जिले का आकोला गाँव संपूर्ण भारत में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।

(3) लाख का काम (Lac Work)
प्रमुख बहु-केंद्र

लाख की चूड़ियाँ, खिलौने और आभूषण बनाने का काम राजस्थान के कई अंचलों में फैला हुआ है। इसके प्रमुख केंद्रों में जयपुर व जोधपुर के साथ-साथ सीकर का लक्ष्मणगढ़ तथा बूंदी का इन्द्रगढ़ भी विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

 

#22. राजस्थान में लेटा, मांगरोल एवं सालावास जाने जाते है ? [R.A.S. Pre Exam, 2007]

#23. गेहूँ के बींधण का प्रयोग दाबू के लिए कहाँ होता है? [वनरक्षक परीक्षा – 2013]

#24. दाबू प्रिन्ट के लिए प्रसिद्ध है-[Asst. Jailer -15.03.2016] [CET – 11.2.2023 (S-I)][कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर)- 26.03.2019]

#25. तोड़ियों (ऊँट के बच्चे ) के मुलायम बालों के सूतों के साथ धागा मिलाकर जो बढ़िया कपड़ा तैयार किया जाता है, वह कहलाता है- [Police Constable Exam- 2007]



#26. ‘कागजी टैराकोटा’ के लिए प्रसिद्ध है-[पटवार-2011]

#27. निम्नांकित में कौन सा शासक है जिसने राजस्थान में गलीचा बनाने में पहल की-[Agriculture Officer-29.1.13]

#28. गलीचा निर्माण हेतु प्रसिद्ध है- [Asst. Agriculture Officer : 29.01.2013]

#29. कठपुतलियों का निर्माण मुख्य रूप से होता है- [Asst. Agriculture Officer : 29.01.2013]

#30. चन्दूजी का गढ़ा तथा बोडीगामा स्थल किसके लिए विख्यात है? [जेल प्रहरी परीक्षा 29-10-2018, Shift -I] [Librarian III Grade 11.09.2022]



#31. सही सुमेलित हैं?(राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-15.7.2018 (II)]

#32. राजस्थान में मूर्तिकला के लिये कौन-सा शहर विख्यात हैं? [RPSC LDC Exam, 2012]

#33. सही युग्म है-[प्रवक्ता (तकनीकी शिक्षा विभाग)-12.3.2021]

#34. राजस्थान में कोफ्तगिरी के काम के लिए कौन-से शहर प्रसिद्ध है? [संगणक परीक्षा 05.05.2018]

#35. कोफ्तगिरी, राजस्थान का पारंपरिक शिल्प, एक प्रकार की सजावट है जिसकी उत्पत्ति भारत में… के साथ हुई है। [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-15.05.2022 (II)]



#36. निम्नलिखित में से कौनसा राज्य कुंदन गहनों के लिए प्रसिद्ध है?[राज. पुलिस कॉन्स्टेबल-16.05.2022 (II)]

#37. जिरोही, भाकला, गंदहा किस उद्योग के नाम है? [L.S.A. 2016]

#38. सुमेलित नहीं है? [JEN (Mechanical) Degree – 20.05.2022]

#39. बकरी के बालों से जूट की पट्टियाँ बनाने का मुख्य केन्द्र कहाँ है-[राज. पुलिस कॉन्स्टेबल-14.6.2024(II)]

Previous
Finish

Quiz 1  | Quiz 3 

Leave a Comment