padarth ki avastha PYQ
#1. इनमें से कोन सी गैस सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ अम्ल वर्षा का कारण होती है?
(RRB JE 27 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- नाइट्रोजन ऑक्साइड (Nitrogen Oxides): अम्ल वर्षा (Acid Rain) मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के वायुमंडल में मिलने के कारण होती है। जब ये गैसें बादलों की नमी और जलवाष्प के साथ प्रतिक्रिया करती हैं, तो सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल का निर्माण करती हैं, जो वर्षा के साथ नीचे गिरते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- इन गैसों का मुख्य स्रोत थर्मल पावर प्लांट, कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ है।
- अम्ल वर्षा के कारण ऐतिहासिक इमारतों (जैसे ताजमहल का पीला पड़ना) और जलीय जीवन को भारी नुकसान पहुँचता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 27 May 2019 Shift 1 CBT-I) में पर्यावरण एवं प्रदूषण विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) हाइड्रोजन: यह एक हल्की और ज्वलनशील गैस है, जो अम्ल वर्षा का प्रत्यक्ष कारण नहीं है।
- विकल्प (B) ऑक्सीजन: यह प्रकृति में प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली जीवनदायिनी गैस है, जो सीधे तौर पर अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी नहीं है।
- विकल्प (D) कार्बन डाइऑक्साइड: यह मुख्य रूप से ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) और ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए जिम्मेदार गैस है, न कि प्राथमिक अम्ल वर्षा के लिए।
#2. निम्नलिखित में से कौन जैवनिम्नीकरणीय है?
(RRB NTPC CBT-I : 22 Jan 2021 Shift 1)
- जैवनिम्नीकरणीय (Biodegradable): वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया और कवक) द्वारा प्राकृतिक रूप से सरल और हानिरहित पदार्थों में विघटित या अपघटित किए जा सकते हैं, जैवनिम्नीकरणीय कहलाते हैं। पादप (पौधे और उनके अवशेष) जैविक होते हैं, इसलिए वे आसानी से सड़-गलकर मिट्टी में मिल जाते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और प्रदूषण नहीं फैलाते हैं।
- इनसे खाद (Compost) का निर्माण भी किया जा सकता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 22 Jan 2021 Shift 1) में पर्यावरण अध्ययन एवं प्रदूषण के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) काँच: यह अजैवनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) है, क्योंकि यह सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होता और सदियों तक सुरक्षित रहता है।
- विकल्प (C) पॉलीथीन: यह प्लास्टिक का एक रूप है जो अजैवनिम्नीकरणीय है और पर्यावरण में लंबे समय तक प्रदूषण का कारण बनता है।
- विकल्प (D) एल्युमिनियम के डिब्बे: यह धातु से बने होते हैं और अजैवनिम्नीकरणीय श्रेणी में आते हैं (हालांकि इन्हें रीसायकल किया जा सकता है)।
#3. कौन-सा कथन वाष्पीकरण की प्रक्रिया को सही ढंग से परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- वाष्पीकरण (Evaporation): यह एक सतही परिघटना (Surface Phenomenon) है जिसमें द्रव के खुले पृष्ठ से अणु क्वथनांक (Boiling Point) से कम तापमान पर भी वाष्प (गैस) में बदलने लगते हैं। सतह पर मौजूद कणों की गतिज ऊर्जा अधिक होने के कारण वे वायुमंडल में वाष्पित हो जाते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- वाष्पीकरण के कारण हमेशा ठंडक (Cooling) उत्पन्न होती है।
- यह तापमान, सतह के क्षेत्रफल, आर्द्रता (Humidity) और हवा की गति पर निर्भर करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23 Dec 2025) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) तेजी से गर्म करने पर यह ठोस को सीधे वाष्प में बदलना: यह प्रक्रिया **उर्ध्वपातन (Sublimation)** कहलाती है, न कि वाष्पीकरण।
- विकल्प (B) यह केवल द्रव के क्वथनांक पर ही होता है: क्वथनांक पर होने वाली प्रक्रिया को ‘कथन (Boiling)’ कहते हैं, जबकि वाष्पीकरण किसी भी तापमान पर सतह से हो सकता है।
- विकल्प (D) गैसीय रूप में परिवर्तित होने से पूर्व द्रव का जमना: वाष्पीकरण के लिए द्रव का जमना (Solidification) आवश्यक नहीं है, यह तरल अवस्था से सीधे गैस में होता है।
#4. मैग्नीशियम और मैंगनीज के नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करने पर कौन-सी गैस उत्सर्जित होती है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2)
- रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction): सामान्यतः नाइट्रिक अम्ल (HNO3) एक प्रबल ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent) है, जो धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करता (बल्कि नाइट्रोजन के ऑक्साइड बनाता है)। लेकिन **मैग्नीशियम (Mg)** और **मैंगनीज (Mn)** बहुत ही तनु (Very Dilute) नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस ($H_2$) उत्सर्जित करते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- मैग्नीशियम और मैंगनीज इस मामले में अपवादस्वरूप व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।
- यह अभिक्रिया धातुओं की रासायनिक सक्रियता और अम्ल की प्रकृति पर आधारित है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2) में रसायन विज्ञान (धातुओं और अम्लों की अभिक्रिया) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऑक्सीजन गैस: यह धातु और नाइट्रिक अम्ल की इस विशेष अभिक्रिया में मुख्य रूप से उत्सर्जित नहीं होती।
- विकल्प (B) हीलियम गैस: यह एक अक्रिय (Inert) गैस है, जो इस प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग नहीं लेती।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन गैस: सांद्र या सामान्य नाइट्रिक अम्ल की अधिकांश धातुओं के साथ अभिक्रिया में नाइट्रोजन के ऑक्साइड बनते हैं, लेकिन Mg और Mn के साथ विशेष रूप से हाइड्रोजन गैस निकलती है।
#5. एक गैसीय कंडक्टर का उदाहरण ____________ है।
(RPF Constable 2024 : 18 Mar, 2025 Shift 3)
- गैसीय कंडक्टर (Gaseous Conductor): सामान्यतः गैसें विद्युत की कुचालक (Insulators) होती हैं क्योंकि उनमें स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन या आयन नहीं होते। हालांकि, **नम हवा (Humid Air या Damp Air)** में जलवाष्प और घुले हुए लवण/अशुद्धियाँ मौजूद होती हैं, जो आयनीकरण के माध्यम से थोड़ी मात्रा में विद्युत चालन (Conduction) करने में सक्षम होती हैं। इसके अलावा, अत्यधिक वोल्टेज या डिस्चार्ज की स्थिति में गैसें भी आयनित होकर चालक बन सकती हैं।
- मुख्य बिंदु:
- शुष्क वायु (Dry Air) विद्युत की कुचालक होती है।
- वायुमंडल में नमी (Humidity) बढ़ने पर विद्युत उपकरणों में शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि नम हवा विद्युत का चालन कर सकती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2024 : 18 Mar, 2025 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (विद्युत धारा और चालकों) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) नाइट्रोजन: शुद्ध और सूखी नाइट्रोजन गैस एक उत्कृष्ट विद्युत रोधी (Insulator) है।
- विकल्प (C) आर्गन: यह एक निष्क्रिय (Noble) गैस है, जो सामान्य परिस्थितियों में विद्युत का चालन नहीं करती।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन: यह एक सामान्य गैस है जो सूखी अवस्था में विद्युत की कुचालक होती है।
#6. नाइट्रोजन परमाणुओं के 0.5 मोल का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
(RRB JE CE 28 Aug 2019 Shift 2 CBT 2)
- गणना (Calculation): नाइट्रोजन परमाणु (N) का मोलर द्रव्यमान (Atomic Mass) 14 ग्राम प्रति मोल (g/mol) होता है।
द्रव्यमान = मोलों की संख्या × परमाणु द्रव्यमान
द्रव्यमान = 0.5 मोल × 14 ग्राम/मोल = 7 ग्राम
- मुख्य बिंदु:
- यदि यहाँ नाइट्रोजन गैस ($N_2$) के अणुओं का द्रव्यमान पूछा जाता, तो इसका मोलर द्रव्यमान 28 ग्राम होता और 0.5 मोल का द्रव्यमान 14 ग्राम होता।
- यहाँ विशेष रूप से ‘नाइट्रोजन परमाणुओं’ (Nitrogen atoms) के लिए पूछा गया है, इसलिए एक परमाणु का भार 14 ग्राम ही लिया जाएगा।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CE 28 Aug 2019 Shift 2 CBT 2) में रसायन विज्ञान (मोल संकल्पना / Mole Concept) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) 14 ग्राम: यह 1 मोल नाइट्रोजन परमाणु का द्रव्यमान होता है (0.5 मोल का नहीं)।
- विकल्प (C) 70 ग्राम: यह 5 मोल नाइट्रोजन परमाणुओं का द्रव्यमान होगा (5 × 14 = 70)।
- विकल्प (D) 21 ग्राम: यह गणना के अनुसार सही मान नहीं है।
#7. जब चीनी को जल में विलीन किया जाता है तो चीनी के कण, ____________ ।
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
- पदार्थ के कणों के गुण (Characteristics of Particles of Matter): जब हम चीनी को पानी में घोलते हैं, तो चीनी के कण पूरी तरह से गायब नहीं होते बल्कि वे पानी के अणुओं (Particles) के बीच मौजूद रिक्त स्थानों (Intermolecular Spaces) में समा जाते हैं। यही कारण है कि चीनी घुलने के बाद भी पानी के कुल आयतन में कोई खास वृद्धि नहीं होती है।
- मुख्य बिंदु:
- यह प्रयोग यह साबित करता है कि पदार्थ के कणों के बीच पर्याप्त रिक्त स्थान होता है।
- पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 11 Dec 2025) में रसायन विज्ञान (पदार्थ की प्रकृति और संरचना) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) अधिक स्थान घेरते हैं: चीनी के कण पानी के रिक्त स्थानों में व्यवस्थित हो जाते हैं, इसलिए वे अलग से कोई अतिरिक्त बड़ा आयतन या स्थान नहीं घेरते।
- विकल्प (C) स्थायी रूप से गायब हो जाते हैं: कण नष्ट या गायब नहीं होते, बल्कि वे इतने सूक्ष्म आकार में विभाजित हो जाते हैं कि नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते (पानी का मीठा स्वाद बना रहता है)।
- विकल्प (D) केवल छोटे टुकड़ों में विच्छेदित होते हैं: वे केवल टुकड़ों में ही नहीं टूटते, बल्कि अणुओं के स्तर पर अलग होकर पानी के अंतर-आणविक स्थानों में घुल-मिल जाते हैं।
#8. ओजोन का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RPF Constable 2018 17 Feb 2019)
- ओजोन (Ozone): ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप (Allotrope) है, जिसका रासायनिक सूत्र $O_3$ होता है। इसके एक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु आपस में जुड़े होते हैं। वायुमंडल की समताप मंडल (Stratosphere) परत में ओजोन गैस पाई जाती है, जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet) किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है।
- मुख्य बिंदु:
- ओजोन परत की मोटाई को ‘डॉब्सन यूनिट’ (Dobson Unit) में मापा जाता है।
- क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) गैस ओजोन परत के क्षरण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 17 Feb, 2019) में पर्यावरण एवं रसायन विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) O 2: यह सामान्य ऑक्सीजन गैस (Dioxygen) का रासायनिक सूत्र है, जिससे हम सांस लेते हैं।
- विकल्प (D) O: यह ऑक्सीजन का एक स्वतंत्र परमाणु (Oxygen atom) है, जो अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होता है।
- विकल्प (A) O 5: ऑक्सीजन का ऐसा कोई सामान्य और स्थायी अणु रासायनिक रूप से अस्तित्व में नहीं होता।
#9. मध्यवर्ती तरल अवस्था से गुजरे बिना सीधे ठोस से गैस अवस्था में पदार्थ का परिवर्तन ____________ कहलाता है।
(RRB NTP01C Tier I : 11 Apr 26 Shift 1)
- ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ ठोस अवस्था से बिना तरल (द्रव) अवस्था में बदले सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाता है (या गैस से सीधे ठोस में बदल जाता है)। उदाहरण के लिए: कपूर (Camphor), अमोनियम क्लोराइड, और सूखी बर्फ (Dry Ice)।
- मुख्य बिंदु:
- इस प्रक्रिया में मध्यवर्ती तरल अवस्था नहीं आती है।
- यह पदार्थों के भौतिक गुणों और अवस्था परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 11 Apr 2026 Shift 1) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ की अवस्थाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) वाष्पीकरण: इसमें द्रव अवस्था से गैस में परिवर्तन होता है, न कि ठोस से सीधे गैस में।
- विकल्प (C) संक्षेपण (Condensation): इसमें गैस या वाष्प ठंडी होकर वापस द्रव अवस्था में बदलती है।
- विकल्प (D) तरलीकरण (Liquefaction): यह गैस से द्रव में बदलने की प्रक्रिया है।
#10. निम्नलिखित में से किसमें फॉर्मल्डिहाइड का उपयोग किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 31 July 2021 Shift 2)
- फॉर्मल्डिहाइड (Formaldehyde): यह सबसे सरल एल्डिहाइड ($CH_2O$) है, जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के उपभोक्ता उत्पादों जैसे कि **इत्र (Perfumes)**, सौंदर्य प्रसाधन, एंटीसेप्टिक्स और रेजिन के निर्माण में किया जाता है। इसके अलावा इसका जलीय घोल (फॉर्मेलिन) जैव नमूनों के संरक्षण और कीटाणुनाशक के रूप में उपयोग होता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह एक तीक्ष्ण गंध वाली और रंगहीन गैस है।
- इसका उपयोग बैकेलाइट जैसे प्लास्टिक और रेजिन बनाने में भी किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 31 July 2021 Shift 2) में रसायन विज्ञान एवं दैनिक जीवन में प्रयुक्त रसायनों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) एयर कंडीशनर: इसमें शीतलन के लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) या हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) जैसे प्रशीतक (Refrigerants) का उपयोग होता है, फॉर्मल्डिहाइड का नहीं।
- विकल्प (C) अग्निशामक: इसमें कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), फोम या सोडियम बाइकार्बोनेट जैसे यौगिकों का प्रयोग किया जाता है।
- विकल्प (D) रेफ्रिजरेटर: इसमें तापमान को नियंत्रित करने के लिए अमोनिया या फ्रियॉन (CFCs/HFCs) जैसे प्रशीतक गैसों का उपयोग किया जाता है।
#11. यदि किसी पिंड का विशिष्ट गुरुत्व 1 से कम है, तो यह ____________ में/पर तैरता रहेगा।
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 3)
- विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity): किसी पदार्थ का विशिष्ट गुरुत्व उसके घनत्व और पानी के घनत्व का अनुपात होता है। यदि किसी वस्तु का विशिष्ट गुरुत्व 1 से कम है, तो इसका अर्थ है कि उस वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से कम है। आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, पानी के घनत्व से कम घनत्व वाली वस्तुएं पानी की सतह पर तैरती रहती हैं।
- मुख्य बिंदु:
- विशिष्ट गुरुत्व 1 से अधिक होने पर वस्तु पानी में डूब जाती है।
- बर्फ का विशिष्ट गुरुत्व 1 से कम होता है, इसलिए वह पानी पर तैरती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 23 Jan, 2019 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (यांत्रिकी / Fluid Mechanics) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) हवा: विशिष्ट गुरुत्व मुख्य रूप से पानी (या मानक द्रव) के संदर्भ में मापा जाता है, यहाँ संदर्भ पानी का होता है।
- विकल्प (C) तरल: यह एक सामान्य शब्द है, जबकि विशिष्ट गुरुत्व का मानक संदर्भ विशेष रूप से पानी होता है।
- विकल्प (D) पारा: पारे का घनत्व पानी की तुलना में बहुत अधिक होता है (लगभग 13.6), इसलिए पारे के संदर्भ में नियम अलग होता है।
#12. वायुमंडल के उच्च स्तर पर, निम्नलिखित में से कौन पृथ्वी की सतह को पराबैंगनी विकिरण से परिरक्षित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
- ओजोन परत (Ozone Layer): वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) के ऊपरी स्तर पर ओजोन ($O_3$) गैस की एक परत पाई जाती है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet / UV) किरणों को अवशोषित कर लेती है और उन्हें पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रोकती है, जिससे त्वचा के कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से बचाव होता है।
- मुख्य बिंदु:
- ओजोन गैस ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनती है।
- सीएफसी (CFCs) जैसी गैसों के कारण ओजोन परत में क्षरण (Ozone Depletion) हो रहा है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 28 Nov 2025) में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) नाइट्रोजन: यह वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है, लेकिन यह पराबैंगनी किरणों को रोकने में मुख्य भूमिका नहीं निभाती।
- विकल्प (B) हाइड्रोजन: यह ब्रह्मांड में प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली सबसे हल्की गैस है, जो इस सुरक्षात्मक परत का हिस्सा नहीं है।
- विकल्प (D) कार्बन: यह एक प्रमुख तत्व है जो विभिन्न यौगिकों के रूप में पाया जाता है, लेकिन पराबैंगनी विकिरण से परिरक्षण का कार्य ओजोन करती है।
#13. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक का अणु है?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- यौगिक का अणु (Molecule of a Compound): जब दो या दो से अधिक अलग-अलग तत्वों के परमाणु एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित होते हैं, तो बनने वाले कण को यौगिक का अणु कहा जाता है। जल ($H_2O$) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के निश्चित अनुपात (2:1) से मिलकर बना एक यौगिक है।
- मुख्य बिंदु:
- यौगिक के गुणों उसके घटक तत्वों (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) के गुणों से पूरी तरह भिन्न होते हैं।
- जल जीवन के लिए एक आवश्यक यौगिक है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (परमाणु एवं अणु) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) He: यह हीलियम का एक एकल परमाणु (Atom) है, यौगिक नहीं।
- विकल्प (B) N 2: यह नाइट्रोजन गैस का अणु है, लेकिन यह एक ही तत्व के परमाणुओं से बना है, इसलिए यह **तत्व का अणु (Molecule of an element)** है, यौगिक का नहीं।
- विकल्प (C) O 2: यह ऑक्सीजन गैस का अणु है, जो केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बनता है।
#14. निम्नलिखित में से कौन सा शुद्ध पदार्थ केवल एक प्रकार के परमाणु से बना है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )
- तत्व / शुद्ध पदार्थ (Element): सोडियम (Sodium – Na) एक रासायनिक तत्व है। प्रत्येक तत्व केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है। सोडियम एक अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु है जो प्रकृति में शुद्ध रूप में तत्वों की श्रेणी में आती है।
- मुख्य बिंदु:
- तत्वों को भौतिक या रासायनिक विधियों द्वारा अन्य सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता।
- सोडियम को मिट्टी के तेल (केरोसिन) में डुबोकर रखा जाता है क्योंकि यह हवा और पानी के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 29 Dec 2025) में रसायन विज्ञान (पदार्थ के प्रकार, तत्व और यौगिक) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल ($H_2O$): यह एक यौगिक है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन (दो प्रकार के परमाणुओं) से मिलकर बनता है।
- विकल्प (B) हवा: यह विभिन्न गैसों (जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन आदि) का एक समांगी **मिश्रण (Mixture)** है।
- विकल्प (D) दूध: यह एक कोलाइडियल विलयन (मिश्रण) है जिसमें वसा, प्रोटीन और पानी जैसे कई घटक होते हैं।
#15. निम्नलिखित में से कौन सबसे कमजोर चालक है?
(RPF Constable 2018 19 Jan 2019 Shift 2)
- बैकेलाइट (Bakelite): बैकेलाइट एक सिंथेटिक थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (पॉलिमर) है, जो विद्युत का एक अत्यंत खराब चालक (यानी एक बेहतरीन विद्युत रोधी / Insulator) होता है। यही कारण है कि इसका उपयोग बिजली के स्विच, प्लग और उपकरणों के हैंडल बनाने में किया जाता है ताकि करंट न लगे।
- मुख्य बिंदु:
- इसे लियो बैकेलैंड द्वारा विकसित किया गया था।
- यह ऊष्मा और विद्युत दोनों का कुचालक होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 19 Jan, 2019 Shift 2) में भौतिकी / रसायन विज्ञान (विद्युत चालन और पदार्थों के गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) पीतल: यह तांबे और जस्ते की एक मिश्रधातु है, जो विद्युत की अच्छी चालक (Good Conductor) होती है।
- विकल्प (C) डायमंड (हीरा): हालांकि यह सामान्यतः विद्युत का कुचालक है, लेकिन अन्य विकल्पों (विशेषकर स्पष्ट इंसुलेटर बैकेलाइट) की तुलना में प्रश्न में इसे सही चालकता श्रेणी में नहीं रखा जाता (बैकेलाइट एक पूर्ण विद्युत रोधी के रूप में प्रसिद्ध है)।
- विकल्प (D) तरल हीलियम: कुछ विशेष अत्यधिक ठंडी स्थितियों (सुपरकंडक्टिविटी) में इसकी चालकता भिन्न हो सकती है, लेकिन बैकेलाइट सबसे प्रमुख और मानक विद्युत रोधी है।
#16. कोक के जलने पर मुख्य रूप से कौन सी गैस उत्पन्न होती है?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 3)
- कोक का जलना (Burning of Coke): कोक कार्बन का लगभग शुद्ध रूप होता है। जब कोक को हवा या ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है, तो यह जलकर मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) गैस उत्पन्न करता है। रासायनिक समीकरण के अनुसार: $C + O_2 \rightarrow CO_2$ + ऊष्मा।
- मुख्य बिंदु:
- कोक का उपयोग धातुओं के निष्कर्षण (प्रभलन / Smelting) में एक अपचायक (Reducing Agent) के रूप में भी किया जाता है।
- यह कोयला के भंजन आसवन (Destructive Distillation) से प्राप्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 3) में रसायन विज्ञान (कार्बन और उसके यौगिक / दहन प्रक्रिया) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड: यह मुख्य रूप से वाहनों या उद्योगों से निकलने वाले धुएँ और नाइट्रोजन के ऑक्साइड्स से जुड़ी गैस है, कोक के जलने से नहीं बनती।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन: ऑक्सीजन दहन में **सहायक** होती है, न कि कोक के जलने पर उत्पाद के रूप में मुख्य रूप से उत्पन्न होती है।
- विकल्प (D) सल्फर डाइऑक्साइड: यह सल्फर युक्त ईंधनों के जलने पर उत्पन्न होती है, जबकि कोक कार्बन का शुद्ध रूप होने के कारण मुख्य रूप से $CO_2$ देता है।
#17. किसी संवृत तंत्र में, यदि 15 gm पदार्थ A, 10 gm पदार्थ B के साथ अभिक्रिया करता है, तो उत्पादों का कुल द्रव्यमान कितना होना चाहिए?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन किया जा सकता है और न ही विनाश। इसलिए, एक संवृत तंत्र (Closed System) में अभिकारकों (Reactants) का कुल प्रारंभिक द्रव्यमान, बनने वाले उत्पादों (Products) के कुल द्रव्यमान के हमेशा बराबर होता है।
उत्पादों का कुल द्रव्यमान = पदार्थ A का द्रव्यमान + पदार्थ B का द्रव्यमान
उत्पादों का कुल द्रव्यमान = 15 gm + 10 gm = 25 gm
- मुख्य बिंदु:
- यह नियम रसायन विज्ञान के मूलभूत नियमों में से एक है, जिसे एंटोनी लेवोमियैर (Antoine Lavoisier) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
- संवृत तंत्र होने के कारण कोई भी गैसीय उत्पाद बाहर नहीं जा सकता, जिससे कुल द्रव्यमान स्थिर रहता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23 Dec 2025) में रसायन विज्ञान (रासायनिक संयोजन के नियम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) 15 gm: यह केवल अकेले पदार्थ A का द्रव्यमान है, दोनों अभिकारकों का योग नहीं।
- विकल्प (C) 0 gm: रासायनिक अभिक्रिया होने पर उत्पादों का कुछ न कुछ द्रव्यमान अवश्य बनता है, यह शून्य नहीं हो सकता।
- विकल्प (D) 10 gm: यह केवल अकेले पदार्थ B का द्रव्यमान है।
#18. एस्टर ____________ वाले पदार्थ होते हैं।
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
- एस्टर (Esters): एस्टर कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग है जो कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल की प्रतिक्रिया से बनते हैं। एस्टर अपनी फल जैसी **मीठी और मनमोहक गंध (Sweet Smell / Fruity Odor)** के लिए जाने जाते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- इनका उपयोग मुख्य रूप से इत्र (Perfumes), कृत्रिम सुगंध (Artificial Flavourings) और खाद्य पदार्थों में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।
- एस्टर के क्षारीय जलअपघटन की प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08 Jan 2026) में कार्बनिक रसायन विज्ञान (Organic Chemistry / Functional Groups) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) तिक्क-गंध: एस्टर की गंध तीखी या कड़वी नहीं बल्कि मीठी और फल जैसी होती है।
- विकल्प (C) खट्टी-गंध: खट्टापन मुख्य रूप से अम्लों (जैसे एसिटिक अम्ल) की विशेषता होती है, जबकि एस्टर सुगंधित होते हैं।
- विकल्प (D) तीखी-गंध: तीखी या चुभने वाली गंध अमोनिया या कुछ विशेष गैसों/अम्लों की होती है, एस्टर की नहीं।
#19. सभी अम्ल धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर ____________ गैस का उत्पादन करते हैं।
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- अम्ल और धातु की अभिक्रिया (Reaction of Acids with Metals): सामान्यतः अधिकांश सक्रिय धातुएं (जैसे जिंक, आयरन, एल्युमिनियम आदि) तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके संगत लवण (Salt) बनाती हैं और साथ ही **हाइड्रोजन गैस ($H_2$)** उत्सर्जित करती हैं। उदाहरण के लिए: $Zn + 2HCl \rightarrow ZnCl_2 + H_2 \uparrow$
- मुख्य बिंदु:
- उत्सर्जित होने वाली हाइड्रोजन गैस के पास जब जलती हुई तीली लाई जाती है, तो यह ‘पॉप’ (Pop) की ध्वनि के साथ जलती है।
- नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) इस मामले में एक अपवाद है क्योंकि यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है और अधिकांश धातुओं के साथ हाइड्रोजन गैस के बजाय पानी और नाइट्रोजन के ऑक्साइड बनाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षारक और लवण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऑक्सीजन: यह सामान्य धातु-अम्ल अभिक्रिया में उत्पाद के रूप में उत्पन्न नहीं होती।
- विकल्प (C) कार्बन डाइऑक्साइड: यह तब उत्पन्न होती है जब अम्ल किसी धातु कार्बोनेट या हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करता है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन: यह सामान्य अम्लों की धातुओं के साथ अभिक्रिया में मुख्य रूप से उत्सर्जित नहीं होती।
#20. लेड नाइट्रेट के अपघटन अभिक्रिया के दौरान, जो भूरे रंग का धूँआ देखा जाता है, वह किस गैस का होता है?
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2)
- लेड नाइट्रेट का तापीय अपघटन (Thermal Decomposition of Lead Nitrate): जब लेड नाइट्रेट [$Pb(NO_3)_2$] को गर्म किया जाता है, तो यह अपघटित होकर लेड ऑक्साइड (PbO), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($NO_2$) और ऑक्सीजन ($O_2$) बनाता है। इस अभिक्रिया के दौरान निकलने वाली **नाइट्रोजन डाइऑक्साइड** गैस गहरे भूरे रंग के धुएँ के रूप में दिखाई देती है।
- मुख्य बिंदु:
- यह ऊष्मीय वियोजन (Thermal Decomposition) अभिक्रिया का एक बहुत प्रसिद्ध उदाहरण है।
- नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($NO_2$) एक तीक्ष्ण गंध वाली भूरे रंग की गैस है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2) में रसायन विज्ञान (रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) नाइट्रोजन गैस: यह रंगहीन और गंधहीन गैस होती है, जिससे भूरा धूँआ उत्पन्न नहीं होता।
- विकल्प (C) ओजोन गैस: यह हल्के नीले रंग की गैस होती है, जो इस अपघटन में नहीं निकलती।
- विकल्प (D) हाइड्रोजन गैस: यह एक ज्वलनशील, रंगहीन और गंधहीन गैस है।
#21. निम्नलिखित में से कौन सा रसायन ‘ एक्वा फोर्टिस ‘ (कठोर जल) के नाम से जाना जाता है?
(RPF Constable 2018 12 Feb 2019)
- एक्वा फोर्टिस (Aqua Fortis): लैटिन भाषा में ‘एक्वा फोर्टिस’ का अर्थ **’स्ट्रॉन्ग वाटर’ (Strong Water / मजबूत पानी)** होता है। यह **सांद्र नाइट्रिक एसिड ($HNO_3$)** का ऐतिहासिक और प्राचीन नाम है। इसे यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह अधिकांश धातुओं को घोलने की क्षमता रखता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह एक अत्यधिक संक्षारक (Corrosive) और प्रबल खनिज अम्ल है।
- इसका उपयोग उर्वरक, विस्फोटक (जैसे नाइट्रोग्लिसरीन) और प्रयोगशाला के कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 12 Feb, 2019) में रसायन विज्ञान (रासायनिक यौगिकों के सामान्य एवं ऐतिहासिक नाम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) बेंजीन: यह एक सुगंधित कार्बनिक यौगिक ($C_6H_6$) है, जिसका ‘एक्वा फोर्टिस’ से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (B) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट: इसे बेकिंग सोडा कहा जाता है, जो एक क्षारीय लवण है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन: यह एक गैस है, न कि ‘एक्वा फोर्टिस’ (नाइट्रिक अम्ल)।
#22. द्रव्य (matter) की किस अवस्था में कणों के बीच का स्थान अधिकतम होता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
- पदार्थ की अवस्थाएँ (States of Matter – Gaseous State): पदार्थ की **गैसीय अवस्था** में कणों के बीच का अंतर-आणविक स्थान (Intermolecular Space) सबसे अधिक होता है, और उनके बीच लगने वाला आकर्षण बल बहुत कम होता है। इसी कारण गैसें किसी भी बर्तन को पूरी तरह भर लेती हैं और उनका न तो निश्चित आकार होता है और न ही निश्चित आयतन।
- मुख्य बिंदु:
- ठोसों में कणों के बीच स्थान न्यूनतम होता है।
- द्रवों में यह स्थान ठोसों से अधिक लेकिन गैसों से कम होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Feb 2026) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस: इसमें कण बहुत पास-पास और मजबूती से बंधे होते हैं, इसलिए इनके बीच स्थान न्यूनतम होता है।
- विकल्प (B) द्रव: इसमें कणों के बीच ठोस की तुलना में स्थान अधिक होता है, लेकिन गैसों की तुलना में काफी कम होता है।
- विकल्प (D) सभी में समान स्थान होता है: यह कथन बिल्कुल गलत है, क्योंकि अलग-अलग अवस्थाओं में अंतर-आणविक दूरियाँ भिन्न होती हैं।
#23. निम्नलिखित में से किस पर स्थिर अनुपात का नियम लागू नहीं होता है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions): इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित और स्थिर अनुपात में मौजूद होते हैं। यह नियम केवल **शुद्ध यौगिकों** पर लागू होता है। **मिश्रण (Mixtures)** में घटकों का अनुपात निश्चित नहीं होता है, इसलिए यह नियम मिश्रणों पर लागू नहीं होता है।
- मुख्य बिंदु:
- इस नियम को जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
- यौगिक (चाहे वह आयनिक हो या सहसंयोजक) इस नियम का पालन करते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 29 Dec 2025) में रसायन विज्ञान (रासायनिक संयोजन के नियम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) यौगिकों: रासायनिक यौगिक हमेशा स्थिर अनुपात के नियम का कड़ाई से पालन करते हैं।
- विकल्प (C) तत्वों: तत्व स्वयं केवल एक ही प्रकार के परमाणु से बने शुद्ध पदार्थ होते हैं, जिन पर यह नियम लागू होता है।
- विकल्प (D) आयनिक यौगिक: ये भी एक निश्चित रासायनिक सूत्र और अनुपात वाले यौगिक होते हैं, जो इस नियम के अंतर्गत आते हैं।
#24. 1 मोल ( 6.022 x 10 23 पानी के अणु) से कितने ग्राम जल बनता है?
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 1)
- मोल संकल्पना (Mole Concept): जल ($H_2O$) के एक अणु का मोलर द्रव्यमान निकालने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु द्रव्यमान को जोड़ा जाता है:
हाइड्रोजन का द्रव्यमान = 2 × 1 = 2 ग्राम
ऑक्सीजन का द्रव्यमान = 1 × 16 = 16 ग्राम
कुल मोलर द्रव्यमान = 2 + 16 = 18 ग्राम/मोल।
अतः 1 मोल जल ($6.022 \times 10^{23}$ अणु) का द्रव्यमान 18 ग्राम होता है।
- मुख्य बिंदु:
- किसी भी पदार्थ के 1 मोल में उपस्थित कणों (अणुओं या परमाणुओं) की संख्या को आवोगाद्रो संख्या ($6.022 \times 10^{23}$) कहा जाता है।
- 1 मोल किसी भी पदार्थ का द्रव्यमान उसके ग्राम-आणविक द्रव्यमान के बराबर होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 20 Jan, 2019 Shift 1) में रसायन विज्ञान (मोल अवधारणा / Mole Concept) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) 20 ग्राम: यह जल का सही मोलर द्रव्यमान नहीं है (यह गलत गणना पर आधारित है)।
- विकल्प (C) 12 ग्राम: यह कार्बन-12 के एक मोल का द्रव्यमान होता है, पानी का नहीं।
- विकल्प (D) 24 ग्राम: यह मान जल के आणविक द्रव्यमान से मेल नहीं खाता।
#25. प्रशीतक निम्नलिखित में से किस सिद्धांत पर काम करता है?
(RRB NTPC Tier I : 28 Apr 2016 Shift 2)
- प्रशीतक (Refrigerator / Cooling System): प्रशीतक या रेफ्रिजरेटर मुख्य रूप से **वाष्पीकरण (Evaporation)** के सिद्धांत पर कार्य करता है। रेफ्रिजरेटर के भीतर एक वाष्पीकरण कुण्डली (Evaporator coil) होती है जिसमें तरल प्रशीतक (Refrigerant fluid) प्रवाहित होता है। यह तरल आसपास की ऊष्मा को अवशोषित करके वाष्पित हो जाता है, जिससे अंदर की ठंडक बनी रहती है।
- मुख्य बिंदु:
- वाष्पीकरण की प्रक्रिया हमेशा ठंडक (Cooling) उत्पन्न करती है क्योंकि यह परिवेश से गुप्त ऊष्मा (Latent heat) अवशोषित करती है।
- यह ऊष्मागतिकी के सिद्धांतों और शीतलन चक्र (Refrigeration Cycle) पर आधारित है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 28 Apr, 2016 Shift 2) में भौतिक विज्ञान एवं दैनिक जीवन के अनुप्रयोगों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) परासरण (Osmosis): यह मुख्य रूप से जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान में झिल्लियों के माध्यम से विलायक के प्रवाह से संबंधित प्रक्रिया है।
- विकल्प (B) अपकेंद्रण (Centrifugation): यह दूध से क्रीम अलग करने या लैब में नमूनों को घुमाने की विधि है (घनत्व के आधार पर)।
- विकल्प (C) विक्षेपण (Dispersion): यह प्रकाश के फैलने या कोलाइडियल प्रणालियों से संबंधित है।
#26. ठोस से गैस अवस्था में परिवर्तन पर कणों के बीच का स्थान किस प्रकार बदलता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
- पदार्थ की अवस्थाओं में अंतर-आणविक स्थान (Intermolecular Space): ठोस अवस्था में कण एक-दूसरे के बेहद करीब होते हैं और उनके बीच का स्थान न्यूनतम होता है। जब कोई पदार्थ ठोस से सीधे गैस (या ऊर्ध्वपातन और सामान्य अवस्था परिवर्तन द्वारा) में बदलता है, तो उसे ऊष्मा मिलने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे उनके बीच का अंतर-आणविक स्थान और दूरियाँ लगातार **बढ़ती जाती हैं**।
- मुख्य बिंदु:
- गैसीय अवस्था में कणों के बीच का स्थान सबसे अधिक होता है।
- अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान और ऊष्मा का आदान-प्रदान कणों की दूरियों को प्रभावित करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Feb 2026) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सदैव बराबर स्थान होता है: यह गलत है क्योंकि ठोस और गैस में कणों के बीच की दूरियाँ बहुत भिन्न होती हैं।
- विकल्प (C) स्थान अपरिवर्तित रहता है: अवस्था बदलने पर कणों के बीच का स्थान स्थिर नहीं रहता, बल्कि बढ़ता या घटता है।
- विकल्प (D) स्थान कम होता जाता है: ठोस से गैस बनने पर स्थान कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता है (संपीडन या गैस से ठोस बनने पर घटता है)।
#27. निम्नलिखित में से कौन सा आयनिक यौगिक का गुण है?
(RRB NTPC CBT-I : 20 Jan 2021 Shift 2)
- आयनिक यौगिकों के गुण (Properties of Ionic Compounds): आयनिक यौगिक (जैसे सोडियम क्लोराइड) विपरीत आवेशित आयनों के बीच मजबूत स्थिर वैद्युत आकर्षण बल (Strong Electrostatic Force) से बने होते हैं। इस मजबूत बंधन को तोड़ने के लिए अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके कारण इनका **गलनांक (Melting Point) और क्वथनांक (Boiling Point) बहुत उच्च** होता है।
- मुख्य बिंदु:
- ये यौगिक आमतौर पर ठोस और थोड़े कठोर होते हैं, लेकिन दबाव पड़ने पर आसानी से टूट जाते हैं (भंगुर / Brittle प्रकृति)।
- ये जल जैसे ध्रुवीय विलायकों में घुलनशील होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 20 Jan 2021 Shift 2) में रसायन विज्ञान (धातु एवं अधातु / रासायनिक बंधन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस अवस्था में विद्युत का संचालन: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, क्योंकि आयन स्थिर होते हैं। वे केवल पिघली हुई अवस्था (Molten state) या जलीय विलयन में विद्युत चालन करते हैं।
- विकल्प (B) कठोर होता है और आसानी से टूटता नहीं है: ये क्रिस्टलीय ठोस होते हैं और बल लगाने पर भंगुरता के कारण आसानी से टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं (टूट जाते हैं)।
- विकल्प (D) मिट्टी के तेल और पेट्रोल में घुलनशील: आयनिक यौगिक केरोसिन और पेट्रोल जैसे कार्बनिक विलायकों में अघुलनशील होते हैं, बल्कि वे पानी में घुलते हैं।
#28. आयोडीन ठोस के ऊर्ध्वपातन पर बनने वाले वाष्प का रंग क्या है?
(RRB JE 26 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- आयोडीन का ऊर्ध्वपातन (Sublimation of Iodine): आयोडीन एक ऐसा ठोस पदार्थ है जो गर्म करने पर बिना द्रव में बदले सीधे वाष्प (गैस) में परिवर्तित हो जाता है। जब आयोडीन के ठोस क्रिस्टल का ऊर्ध्वपातन होता है, तो उससे निकलने वाली वाष्प का रंग **गहरा बैंगनी (Violet / Purple)** होता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह प्रयोगशाला में ऊर्ध्वपातन (Sublimation) प्रक्रिया को समझाने और प्रदर्शित करने का एक बहुत ही लोकप्रिय उदाहरण है।
- ठोस आयोडीन स्वयं बैंगनी-काले रंग का चमकता हुआ क्रिस्टल होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 26 May 2019 Shift 2 CBT 1) में रसायन विज्ञान (पदार्थ के भौतिक गुण एवं अवस्था परिवर्तन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) पीला: आयोडीन की वाष्प पीली नहीं होती।
- विकल्प (B) नारंगी: यह रंग आयोडीन वाष्प की विशेषता नहीं है।
- विकल्प (C) रंगहीन: आयोडीन वाष्प रंगहीन नहीं होती, बल्कि यह स्पष्ट रूप से बैंगनी रंग की दिखाई देती है।
#29. ऊंट अपने कुबड़ में क्या संग्रहित करते हैं?
(RRB NTPC Tier I : 16 Apr 2016 Shift 1)
- ऊँट का कुबड़ (Camel’s Hump): लोकप्रिय धारणा के विपरीत, ऊँट अपने कुबड़ में पानी स्टोर नहीं करते हैं, बल्कि वे **वसा (Adipose tissue / Fat)** का संचयन करते हैं। यह संचित वसा ऊँट को भोजन और पानी की कमी के समय ऊर्जा प्रदान करती है। आवश्यकता पड़ने पर इस वसा का ऑक्सीकरण होने पर चयापचय जल (Metabolic water) भी उत्पन्न होता है।
- मुख्य बिंदु:
- वसा को शरीर में एक केंद्रीय स्थान (कुबड़) पर केंद्रित रखने से ऊँट के शरीर से गर्मी आसानी से बाहर निकल जाती है, जो मरुस्थल के गर्म वातावरण में उसके लिए फायदेमंद है।
- जब वसा समाप्त हो जाती है, तो कुबड़ खाली होकर एक तरफ झुक जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 16 Apr, 2016 Shift 1) में जीव विज्ञान (मानव एवं पशु शरीर क्रिया विज्ञान / Animal Physiology) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल: यद्यपि यह आम भ्रांति है कि कुबड़ में पानी भरा होता है, लेकिन विज्ञान के अनुसार इसमें केवल वसा होती है (पानी ऊँट के रक्त और अन्य ऊतकों में सामान्य रूप से होता है)।
- विकल्प (C) स्टार्च: स्टार्च पौधों में ऊर्जा संचय का रूप है, जंतुओं में ग्लाइकोजन होता है, और ऊँट के कुबड़ में वसा संचित होती है।
- विकल्प (D) प्रोटीन: प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों और ऊतकों के निर्माण एवं मरम्मत का कार्य करते हैं, ऊर्जा के लिए मुख्य रूप से कुबड़ में वसा जमा होती है।
#30. निम्नलिखित में से कौन सा कार्बन का अपररूप है?
(RRB NTPC CBT-I : 30 Jan 2021 Shift 2)
- कार्बन के अपररूप (Allotropes of Carbon): कार्बन विभिन्न रूपों में प्रकृति में पाया जाता है, जिन्हें अपररूप कहा जाता है। **हीरा (Diamond)** कार्बन का एक क्रिस्टलीय अपररूप है, जिसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु अन्य चार कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है, जिससे इसकी त्रि-विमीय (3D) कठोर संरचना बनती है।
- मुख्य बिंदु:
- हीरा प्रकृति में पाया जाने वाला सबसे कठोर पदार्थ है।
- कार्बन के अन्य प्रमुख अपररूप ग्रेफाइट और फुलरीन (Fullerenes) हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 30 Jan 2021 Shift 2) में रसायन विज्ञान (कार्बन और उसके यौगिक) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) चाक: यह कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) का एक रूप है, जो कार्बन का शुद्ध अपररूप नहीं है।
- विकल्प (C) जिप्सम: यह कैल्सियम सल्फेट का हाइड्रेटेड रूप ($CaSO_4 \cdot 2H_2O$) है।
- विकल्प (D) संगमरमर: यह भी कैल्सियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) का ही एक संगति रूप है।
#31. किसी कार्बनिक यौगिक में ‘प्रकारात्मक समूह’ की प्राथमिक भूमिका क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- प्रकारात्मक समूह / कार्यात्मक समूह (Functional Group): कार्बनिक रसायन में प्रकारात्मक समूह परमाणुओं का वह विशिष्ट समूह होता है जो किसी कार्बनिक यौगिक के रासायनिक गुणों (Chemical Properties) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होता है। चाहे कार्बन श्रृंखला कितनी भी लंबी क्यों न हो, विशिष्ट प्रकारात्मक समूह (जैसे एल्कोहॉल -OH, कार्बोक्सिलिक अम्ल -COOH, आदि) ही उस यौगिक के रासायनिक व्यवहार को तय करता है।
- मुख्य बिंदु:
- एक ही प्रकारात्मक समूह वाले सभी यौगिकों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं।
- यह कार्बन श्रृंखला के आकार से स्वतंत्र होकर अपने विशिष्ट गुण प्रदर्शित करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 16 Dec 2025) में कार्बनिक रसायन विज्ञान (Functional Groups in Organic Compounds) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) यौगिक का आणविक द्रव्यमान बढ़ाना: प्रकारात्मक समूह का मुख्य कार्य द्रव्यमान बढ़ाना नहीं है, हालांकि इसका अणुभार होता है, लेकिन इसकी प्राथमिक भूमिका रासायनिक गुणधर्म तय करना है।
- विकल्प (C) यौगिक की भौतिक अवस्था निर्धारित करना: भौतिक अवस्था मुख्य रूप से अंतराआणविक बलों और तापमान/दाบ पर निर्भर करती है, रासायनिक गुण प्रकारात्मक समूह तय करता है।
- विकल्प (D) कार्बन श्रृंखला को ऋजु से शाखित में बदलना: श्रृंखला का ऋजु (Straight) या शाखित (Branched) होना कार्बन कंकाल की संरचना पर निर्भर करता है, न कि प्रकारात्मक समूह पर।
#32. समजातीय श्रेणी में यौगिकों के भौतिक गुणों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
- समजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें समान प्रकारात्मक समूह होता है और दो क्रमिक सदस्यों के बीच हमेशा $CH_2$ इकाई का अंतर होता है। जैसे-जैसे इस श्रेणी में आणविक द्रव्यमान बढ़ता है, भौतिक गुणों (जैसे गलनांक, क्वथनांक और घुलनशीलता) में एक **नियमित gradational (क्रमिक) परिवर्तन** देखा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ अंतराआणविक आकर्षण बल मजबूत होते हैं, जिससे क्वथनांक और गलनांक नियमित रूप से **बढ़ते** जाते हैं।
- इनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं क्योंकि इनमें क्रियात्मक समूह एक ही होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec 2024 Shift 1) में कार्बनिक रसायन विज्ञान (समजातीय श्रेणी / Homologous Series) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) उनके गलनांक और क्वथनांक समान होते हैं: सभी सदस्यों के आणविक भार अलग होने के कारण इनके गलनांक और क्वथनांक भी भिन्न होते हैं, समान नहीं।
- विकल्प (C) कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने पर उनके क्वथनांक घटते हैं: जैसे-जैसे अणु का आकार और कार्बन परमाणु बढ़ते हैं, क्वथनांक घटते नहीं बल्कि **बढ़ते** हैं।
- विकल्प (D) उनके भौतिक गुण नहीं बदलते हैं: आणविक भार बदलने के साथ भौतिक गुण (जैसे क्वथनांक, घनत्व आदि) नियमित रूप से बदलते हैं।
#33. निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग निलंबन से कणों को अलग करने के लिए किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
- निलंबन और पृथक्करण (Suspension and Separation): निलंबन (Suspension) एक विषमांगी मिश्रण है जिसमें विलेय पदार्थ के कण घुलते नहीं हैं बल्कि माध्यम में निलंबित रहते हैं और कुछ समय बाद नीचे बैठ जाते हैं। निलंबन के अघुलनशील ठोस कणों को द्रव से अलग करने के लिए **निस्त्यदन (Decantation)** या निस्पंदन (Filtration) विधि का उपयोग किया जाता है। निस्त्यदन में बिना तली में बैठे ठोस कणों को डिस्टर्ब किए ऊपर के साफ द्रव को सावधानीपूर्वक दूसरे बर्तन में उड़ेल लिया जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- निलंबन के कणों का आकार बड़ा होने के कारण इन्हें नग्न आँखों से देखा जा सकता है।
- यह भारी अघुलनशील अशुद्धियों को हटाने की एक सरल भौतिक विधि है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Jan 2026 Shift 1) में रसायन विज्ञान ( mixtures and separation techniques / पदार्थों का पृथक्करण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) वाष्पीकरण: इस विधि का उपयोग किसी द्रव में घुले हुए ठोस (विलयन) को अलग करने के लिए किया जाता है (जैसे नमक और पानी के घोल से नमक प्राप्त करना)।
- विकल्प (C) क्रिस्टलीकरण: इसका उपयोग अशुद्ध ठोस पदार्थों को शुद्ध करने और उनके क्रिस्टल प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) आसवन: इस विधि का उपयोग घुलनशील और आपस में मिलने वाले द्रवों (Miscible liquids) के मिश्रण को अलग करने के लिए किया जाता है।
#34. निम्नलिखित में से कौन-सा, घ्राण सूचक नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
- घ्राण सूचक (Olfactory Indicators): ऐसे पदार्थ जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है, उन्हें घ्राण सूचक कहा जाता है। **लिटमस (Litmus)** एक घ्राण सूचक नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक **रंग परिवर्तन सूचक (Acid-Base Indicator)** है जो अम्ल के साथ लाल और क्षार के साथ नीला रंग देता है।
- मुख्य बिंदु:
- लिटमस को लाइकेन (Lichen) पौधों से प्राप्त किया जाता है।
- प्याज, वैनिला और लवंग का तेल घ्राण सूचकों के क्लासिक उदाहरण हैं जिनकी गंध से माध्यम की पहचान की जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षारक और लवण / सूचक) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) लवंग तेल: यह एक प्रसिद्ध घ्राण सूचक है, जिसकी विशिष्ट गंध क्षारीय माध्यम में गायब हो जाती है।
- विकल्प (C) प्याज: इसकी तीखी गंध अम्लीय और क्षारीय माध्यमों में अलग-अलग व्यवहार करती है, इसलिए यह भी घ्राण सूचक है।
- विकल्प (D) वैनिला: इसकी मीठी खुशबू क्षार मिलाने पर समाप्त हो जाती है, जो इसे एक प्रभावी घ्राण सूचक बनाती है।
#35. निम्नलिखित में से कौन-सा, विषमांगी मिश्रण का सर्वोत्तम रूप से वर्णन करता है?
(RRB ALP CBT 1 13/02/2026 )
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture): विषमांगी मिश्रण वह मिश्रण होता है जिसमें इसके घटक पूरे मिश्रण में समान रूप से वितरित नहीं होते हैं। इस प्रकार के मिश्रण में विभिन्न घटकों या पदार्थों को नग्न आँखों से या स्पष्ट रूप से अलग-अलग देखा जा सकता है (जैसे तेल और पानी का मिश्रण, या रेत और नमक का मिश्रण)।
- मुख्य बिंदु:
- इसके विपरीत, समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) का संगठन पूरे आयतन में एक समान होता है (जैसे पानी में घुला हुआ नमक)।
- विषमांगी मिश्रण के भौतिक गुणों में एकरूपता नहीं होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 13 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (पदार्थ के प्रकार और मिश्रण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) इसका एक ही संघटन है: एक समान और एक ही संघटन होना समांगी मिश्रण की विशेषता है, विषमांगी की नहीं।
- विकल्प (C) यह एक शुद्ध पदार्थ है: मिश्रण कभी भी शुद्ध पदार्थ नहीं होते, बल्कि वे अशुद्ध या दो या दो से अधिक पदार्थों के संयोजन होते हैं।
- विकल्प (D) इसे भौतिक रूप से पृथक नहीं किया जा सकता है: मिश्रणों के घटकों को छानने या अन्य भौतिक विधियों द्वारा आसानी से अलग किया जा सकता है।
#36. निम्नलिखित में से क्या द्रव पदार्थों की विशेषता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )
- द्रव पदार्थों के गुण (Properties of Liquids): पदार्थ की द्रव अवस्था (Liquid state) की मुख्य विशेषता यह होती है कि इनका **आयतन तो निश्चित (Fixed volume)** होता है, लेकिन इनका **आकार निश्चित नहीं (No fixed shape)** होता। ये जिस भी बर्तन में रखे जाते हैं, उसी बर्तन का आकार ले लेते हैं क्योंकि इनके कणों के बीच अंतराआणविक आकर्षण बल ठोसों से कम और गैसों से अधिक होता है।
- मुख्य बिंदु:
- द्रव बहने का गुण (Fluidity) प्रदर्शित करते हैं।
- तापमान बदलने पर इनके आयतन में बहुत कम परिवर्तन होता है (ये लगभग असह्य / Incompressible होते हैं)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05 Feb 2026) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ के भौतिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) निश्चित आकार और आयतन: यह विशेषता **ठोस (Solids)** पदार्थों की होती है, द्रवों की नहीं।
- विकल्प (B) निश्चित आकार लेकिन परिवर्तनशील आयतन: यह किसी भी सामान्य पदार्थ की अवस्था के लिए सत्य नहीं है।
- विकल्प (D) कोई निश्चित आकार या आयतन नहीं: यह विशेषता पूरी तरह से **गैसों (Gases)** के लिए होती है, जिनका न तो निश्चित आकार होता है और न ही निश्चित आयतन।
#37. निम्नलिखित में से कौन-सी गैस ग्रीनहाउस गैस नहीं है?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases): वे गैसें जो पृथ्वी के वायुमंडल में ऊष्मा को रोककर ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करती हैं, उनमें कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, जल वाष्प, नाइट्रस ऑक्साइड और ओजोन शामिल हैं। **कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)** एक प्रत्यक्ष ग्रीनहाउस गैस नहीं है, हालांकि यह वायुमंडल में अन्य रासायनिक प्रतिक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।
- मुख्य बिंदु:
- कार्बन मोनोऑक्साइड एक अत्यधिक विषैली गैस है जो वाहनों और अधूरे ईंधन जलने से निकलती है और हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन परिवहन को रोकती है।
- प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों में $CO_2$, $CH_4$, $N_2O$ और जलवाष्प आते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 29 May 2019 Shift 2 CBT 1) में पर्यावरण एवं प्रदूषण (Environment) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) कार्बन डाइऑक्साइड: यह ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए सबसे प्रमुख रूप से जिम्मेदार गैस है।
- विकल्प (C) ओजोन: यह भी वायुमंडल की निचली परतों में एक ग्रीनहाउस गैस के रूप में कार्य करती है।
- विकल्प (D) नाइट्रस ऑक्साइड: यह एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है जो कृषि गतिविधियों और उर्वरकों से उत्पन्न होती है।
#38. कौन-सा प्रक्रम सर्वोत्तम रूप से इसकी व्याख्या करता है कि गर्म दिन के दौरान ठंडे गिलास के बाह्य पृष्ठ पर पानी की बूंदें कैसे बनती है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026)
- संघनन (Condensation): जब हवा में मौजूद जलवाष्प (Water vapor) किसी ठंडी सतह (जैसे ठंडे पानी से भरे गिलास की बाहरी दीवार) के संपर्क में आती है, तो वह अपनी ऊष्मा खो देती है और द्रव अवस्था में बदल जाती है। इस प्रक्रिया को **संघनन** कहा जाता है, जिसके कारण गिलास के बाहर पानी की छोटी-छोटी बूंदें जमा हो जाती हैं।
- मुख्य बिंदु:
- यह वाष्पीकरण के ठीक विपरीत प्रक्रिया है।
- हवा में उपस्थित अदृश्य नमी ठंडी सतह से टकराकर दृश्य बूंदों का रूप ले लेती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10 Feb 2026) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ के अवस्था परिवर्तन के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) हिमीकरण (Freezing): यह द्रव से ठोस बनने की प्रक्रिया है (जैसे पानी का बर्फ बनना)।
- विकल्प (C) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह ठोस से सीधे गैस (या इसके विपरीत) में बदलने की प्रक्रिया है, जिसमें द्रव अवस्था नहीं आती।
- विकल्प (D) वाष्पन (Evaporation): यह द्रव से गैस बनने की प्रक्रिया है (जैसे पानी का भाप बनकर उड़ना)।
#39. 373 K पर जिप्सम को गर्म करने पर निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक प्राप्त होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 1)
- प्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण (Preparation of Plaster of Paris): जब जिप्सम (Calcium Sulphate Dihydrate) को **373 K (100°C)** पर गर्म किया जाता है, तो यह अपने क्रिस्टलन जल के अणुओं का त्याग कर देता है और **कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (Plaster of Paris)** बनाता है। इसका रासायनिक सूत्र $CaSO_4 \cdot \frac{1}{2}H_2O$ होता है।
- मुख्य बिंदु:
- इसे प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) कहा जाता है जिसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने, मूर्तियाँ बनाने और पीओपी प्लास्टर में किया जाता है।
- यदि जिप्सम को इससे अधिक तापमान पर गर्म किया जाए, तो संपूर्ण क्रिस्टलन जल समाप्त हो जाता है और मृत तप्त प्लास्टर (Dead burnt plaster) बनता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 1) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षारक और लवण / महत्वपूर्ण लवणों के यौगिक) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) CaO: यह बिना बुझा हुआ चूना (Quicklime) है, जो इस अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद नहीं है।
- विकल्प (C) CaSO4·2H2O: यह स्वयं **जिप्सम** का रासायनिक सूत्र है (यानी गर्म करने से पहले की प्रारंभिक अवस्था)।
- विकल्प (D) CaSO4·5H2O: यह कॉपर सल्फेट पेंटाहाइड्रेट (नीला थोथा / Blue Vitriol) का सूत्र है, जिप्सम का नहीं।
#40. पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए प्रायः किस गैस की फ्लशिंग (Flushing) को प्राथमिकता दी जाती है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
- खाद्य संरक्षण और नाइट्रोजन फ्लशिंग (Nitrogen Flushing): चिप्स और अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के पैकेटों में **नाइट्रोजन गैस ($N_2$)** भरी जाती है। ऑक्सीजन अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होती है, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद वसा और तेल को ऑक्सीकृत (Oxidize) करके उन्हें बासी (Rancid) और खराब कर देती है। नाइट्रोजन एक निष्क्रिय (Unreactive / Inert) गैस है जो ऑक्सीजन को विस्थापित कर देती है और खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखती है।
- मुख्य बिंदु:
- यह खाद्य पदार्थों को पैकेजिंग या परिवहन के दौरान टूटने-फूटने से बचाने के लिए एक कुशन (Cushion) का भी काम करती है।
- नाइट्रोजन गंधहीन, स्वादहीन और सुरक्षित गैस है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 12 Dec 2025) में रसायन विज्ञान (दैनिक जीवन में रासायनिक अभिक्रियाएँ / ऑक्सीकरण और अपचयन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($NO_2$): यह एक भूरे रंग की जहरीली और संक्षारक गैस है, जिसका उपयोग खाद्य पैकेटों में नहीं किया जा सकता।
- विकल्प (C) नाइट्रिक ऑक्साइड (NO): यह एक प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन ऑक्साइड है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
- विकल्प (D) डाइनाइट्रोजन ट्राइऑक्साइड ($N_2O_3$): यह एक अस्थिर यौगिक है जो कम तापमान पर ही अस्तित्व में रहता है, खाद्य संरक्षण में इसका उपयोग नहीं होता।
#41. निम्नलिखित में से कौन सा तत्व आमतौर पर अणु नहीं बनाता है और अपने परमाणु रूप में पाया जाता है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)
- उत्कृष्ट गैसें (Noble Gases): आवर्त सारणी के समूह 18 के तत्वों को उत्कृष्ट या अक्रिय गैसें कहा जाता है (जैसे हीलियम, नियॉन, आर्गन आदि)। **हीलियम (He)** का बाह्यतम कोश पूरी तरह से भरा होता है (द्विक पूर्ण होता है), जिसके कारण यह रासायनिक रूप से अत्यधिक स्थिर और अक्रिय होती है। इसे अणु बनाने की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए यह प्रकृति में स्वतंत्र रूप से **एकपरमाणुक (Monoatomic)** यानी अपने परमाणु रूप में पाई जाती है।
- मुख्य बिंदु:
- हीलियम का परमाणु क्रमांक 2 है।
- यह हल्की और अज्वलनशील गैस है, जिसका उपयोग गुब्बारों और वायुयानों में तथा गोताखोरों के सांस लेने के सिलेंडर में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3) में रसायन विज्ञान (आवर्त सारणी एवं रासायनिक बंधन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) हाइड्रोजन: यह द्विपरमाणुक अणु ($H_2$) के रूप में पाई जाती है क्योंकि इसके बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होता है और यह साझा करके स्थिरता प्राप्त करती है।
- विकल्प (B) ऑक्सीजन: यह भी एक द्विपरमाणुक गैस ($O_2$) के रूप में पाई जाती है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन: वायुमंडल में नाइट्रोजन त्रि-आबंध युक्त द्विपरमाणुक अणु ($N_2$) के रूप में मौजूद होती है।
#42. उस घटना को क्या कहते हैं जब एक तार बर्फ के एक टुकड़े से बिना उसे तोड़े गुजरता है और तार के गुजरने के बाद पानी फिर से जम जाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 11 Aug, 2025 Shift 3)
- पुनर्रहिमायन (Regelation): यह वह अद्भुत घटना है जिसमें बर्फ पर दबाव डालने से उसका गलनांक कम हो जाता है और वह पिघल जाती है (जैसे तार के नीचे की बर्फ का पिघलना)। जब तार बर्फ में से गुजर जाता है और दबाव हट जाता है, तो पानी का गलनांक वापस सामान्य हो जाता है और वह पुनः जम जाता है। इस प्रक्रिया को **पुनर्रहिमायन** कहते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- यह इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि दबाव बढ़ाने पर बर्फ का गलनांक 0° से नीचे चला जाता है।
- स्केटिंग (Ice skating) के दौरान भी बर्फ की सतह पर दबाव पड़ने से पानी की पतली परत बनती है जो घर्षण को कम करती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 11 Aug, 2025 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (ऊष्मा और पदार्थ के गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) संलयन (Fusion): यह ठोस से द्रव में बदलने की सामान्य प्रक्रिया (गलना) है, जिसमें केवल पिघलना शामिल होता है, दोबारा जमना नहीं।
- विकल्प (B) संघनन (Condensation): यह गैस (वाष्प) से द्रव में बदलने की प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह ठोस से सीधे गैस में बदलने की प्रक्रिया है, जिसमें द्रव अवस्था नहीं आती।
#43. लाल और नीले इन प्राथमिक रंगों को मिला कर हम कौन सा द्वितीयक रंग प्राप्त कर सकते हैं?
(RRB NTPC Tier I : 27 Apr 2016 Shift 3)
- प्रकाश के प्राथमिक और द्वितीयक रंग (Primary and Secondary Colors of Light): प्रकाश के वर्ण-संश्लेषण (Additive Color Mixing) मॉडल के अनुसार, प्रकाश के तीन प्राथमिक रंग **लाल (Red), हरा (Green) और नीला (Blue)** होते हैं। जब इनमें से **लाल और नीले** रंगों को आपस में मिलाया जाता है, तो **म्जंटा (Magenta)** नामक द्वितीयक रंग प्राप्त होता है।
- मुख्य बिंदु:
- लाल + हरा = पीला (Yellow)
- हरा + नीला = सियान (Cyan)
- लाल + नीला = म्जंटा (Magenta)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 27 Apr 2016 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (प्रकाशिकी / Optics) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सफेद: सफेद रंग प्रकाश के तीनों प्राथमिक रंगों (लाल, हरा और नीला) को समान मात्रा में एक साथ मिलाने पर प्राप्त होता है।
- विकल्प (B) पीला: यह द्वितीयक रंग लाल और हरे प्रकाश को मिलाने से बनता है।
- विकल्प (D) सियान: यह द्वितीयक रंग हरे और नीले प्रकाश को आपस में मिलाने से बनता है।
#44. निम्नलिखित में से किसका विसरण वायु में सबसे धीरे होगा?
(RRB JE 20/02/2026 )
- गैसों का विसरण और ग्राहम का नियम (Graham’s Law of Effusion/Diffusion): ग्राहम के विसरण के नियम के अनुसार, किसी गैस के विसरण की दर ($r$) उसके आणविक द्रव्यमान ($M$) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($r \propto \frac{1}{\sqrt{M}}$)। इसका अर्थ यह है कि जिस गैस का आणविक द्रव्यमान जितना अधिक होगा, वायु में उसका विसरण (फैलाव) उतना ही **धीमा** होगा।
- विभिन्न गैसों के आणविक द्रव्यमान:
- हाइड्रोजन ($H_2$) = 2 g/mol (सबसे तेज विसरण)
- अमोनिया ($NH_3$) = 17 g/mol
- ऑक्सीजन ($O_2$) = 32 g/mol
- क्लोरीन ($Cl_2$) = 71 g/mol (सबसे अधिक आणविक भार होने के कारण सबसे धीरे विसरण)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (गैसों के गुण एवं ग्राहम का नियम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऑक्सीजन: इसका आणविक भार (32) क्लोरीन से बहुत कम है, इसलिए इसका विसरण क्लोरीन की तुलना में तेज होता है।
- विकल्प (B) हाइड्रोजन: यह सबसे हल्की गैस है (आणविक भार 2), इसलिए सभी विकल्पों में इसका विसरण सबसे **तेज** होता है।
- विकल्प (C) अमोनिया: इसका आणविक भार 17 है, जो क्लोरीन से काफी कम है, अतः इसका विसरण भी क्लोरीन से तेज गति से होता है।
#45. नामकरण में “पूर्वलग्न ( prefix)” या “अनुलग्न ( suffix)” के साथ मूल संशोधन किसका सूचक है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
- आईयूपीएसी नामकरण (IUPAC Nomenclature): कार्बनिक रसायन में यौगिकों के आईयूपीएसी (IUPAC) नामकरण के दौरान उपयोग किए जाने वाले **पूर्वलग्न (Prefix)** या **अनुलग्न (Suffix)** (जैसे प्रीफिक्स के रूप में क्लोरो-, ब्रोमो- या सफिक्स के रूप में -ऑल, -ओइक अम्ल आदि) मुख्य रूप से यौगिक में मौजूद **प्रकार्यत्मक समूह (Functional Group)** या प्रतिस्थापी की प्रकृति को दर्शाते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- प्राथमिक अनुलग्न (Primary Suffix) कार्बन श्रृंखला में बंधों की प्रकृति (सिंगल, डबल, ट्रिपल) को बताता है।
- द्वितीयक अनुलग्न (Secondary Suffix) और पूर्वलग्न प्रकार्यत्मक समूह की उपस्थिति और उसकी स्थिति को दर्शाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10 Dec 2025) में कार्बनिक रसायन विज्ञान (कार्बनिक यौगिकों के नामकरण एवं प्रकार्यत्मक समूह) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) गलनांक की प्रकृति: नामकरण के शब्द गलनांक से संबंधित नहीं होते।
- विकल्प (B) पृष्ठ क्षेत्र की प्रकृति: इसका रसायन विज्ञान के नामकरण नियमों से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (C) क्वथनांक की प्रकृति: क्वथनांक केवल आणविक संरचना और अंतराआणविक बलों पर निर्भर करता है, नाम के पूर्वलग्न-अनुलग्न सीधे इसे नहीं दर्शाते।
#46. कौन-सा गुणधर्म सबसे अच्छी तरह से यह बताता है कि ठोस पदार्थों का एक निश्चित आकार और आयतन क्यों होता है?
(RRB Level 01 Stage I 06/02/2026 )
- ठोस पदार्थों की संरचना (Structure of Solids): ठोस अवस्था में पदार्थ के कण अत्यधिक प्रबल अंतर-आणविक बलों (Intermolecular forces) द्वारा बंधे होते हैं और वे एक **निश्चित नियमित विन्यास में सघन रूप से पैक (Closely packed)** रहते हैं। कणों का अपने स्थान पर बंधे रहने और अपनी जगह न छोड़ पाने के कारण ही ठोसों का आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- ठोसों के कण केवल अपनी माध्य स्थिति के इर्द-गिर्द कंपन (Vibration) कर सकते हैं, गति नहीं।
- यही कारण है कि ठोस असंपीड्य (Incompressible) और कठोर होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 06 Feb 2026) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ की अवस्थाओं के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कण एक दूसरे के ऊपर स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं: यह विशेषता द्रवों और गैसों (तरल पदार्थों) की है, ठोसों की नहीं।
- विकल्प (B) इन कणों के बीच पर्याप्त रिक्त स्थान होता है: ठोसों में कणों के बीच रिक्त स्थान न्यूनतम होता है, पर्याप्त नहीं।
- विकल्प (D) कण यादृच्छिक रूप से विन्यासित होते हैं: कणों का यादृच्छिक (Random) विन्यास गैसों में पाया जाता है।
#47. निम्नलिखित में से कौन सा रसायन शुष्क बर्फ के नाम से जाना जाता है?
(RPF Constable 2018 19 Feb 2019)
- शुष्क बर्फ (Dry Ice): ठोस कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) को **’शुष्क बर्फ’** कहा जाता है। इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह सामान्य बर्फ की तरह पिघलने पर तरल (liquid) अवस्था में बदले बिना सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है (ऊर्ध्वपातन / Sublimation)।
- मुख्य बिंदु:
- इसका उपयोग मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, जैविक नमूनों और आइसक्रीम को कम तापमान पर सुरक्षित रखने और परिवहन (Refrigeration) के लिए किया जाता है।
- इसका तापमान अत्यधिक कम (लगभग $-78.5^\circ C$ या $-109.3^\circ F$) होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 19 Feb, 2019) में रसायन विज्ञान (रासायनिक यौगिकों के सामान्य एवं ऐतिहासिक नाम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) लेड सल्फेट: यह एक अकार्बनिक यौगिक ($PbSO_4$) है जिसका शुष्क बर्फ से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (B) नाइट्रोजन: यह वायुमंडल में प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली एक गैस है (द्रव नाइट्रोजन का उपयोग शीतलन में होता है, पर यह शुष्क बर्फ नहीं है)।
- विकल्प (C) सांद्र नाइट्रिक एसिड: इसे ‘एक्वा फोर्टिस’ कहा जाता है, जैसा कि हमने पिछले प्रश्नों में पढ़ा है।
#48. कमरे के तापमान और वायुमंडलीय दाब पर निम्नलिखित में से किसकी विशिष्ट ऊष्मा धारिता सबसे अधिक होती है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 03 Dec, 2024 Shift 3)
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Specific Heat Capacity): किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का तापमान $1^\circ C$ (या $1 K$) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उसकी विशिष्ट ऊष्मा धारिता कहते हैं। **जल** की विशिष्ट ऊष्मा धारिता सभी सामान्य पदार्थों में सबसे अधिक (लगभग $4184 \, J/kg^\circ C$) होती है। इसका अर्थ यह है कि जल को गर्म होने में और ठंडे होने में दोनों ही स्थितियों में बहुत अधिक ऊष्मा की आवश्यकता होती है।
- मुख्य बिंदु:
- उच्च विशिष्ट ऊष्मा के कारण ही जल का उपयोग कार रेडिएटर में शीतलक (Coolant) के रूप में और सिकाई वाली हॉट वाटर बैग में किया जाता है।
- समुद्र के किनारे की जलवायु मध्यम (न अधिक गर्म न अधिक ठंडी) रहती है क्योंकि जल तापमान में बदलाव का विरोध करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF SI CBT-I : 03 Dec, 2024 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (ऊष्मा और ऊष्मागतिकी / Thermal Physics) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) काँच: काँच की विशिष्ट ऊष्मा धारिता जल की तुलना में बहुत कम होती है, इसलिए यह जल्दी गर्म और ठंडा हो जाता है।
- विकल्प (C) पारा: पारे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता भी जल से काफी कम होती है (यही वजह है कि यह थर्मामीटर में जल्दी से तापमान परिवर्तन दर्शाता है)।
- विकल्प (D) लोहा: धातुओं की विशिष्ट ऊष्मा धारिता आमतौर पर कम होती है, और लोहे का तापमान बहुत तेजी से बढ़ता-घटता है।
#49. निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 1)
- चिकित्सीय ऑक्सीजन सिलेंडर (Medical Oxygen Cylinders): अस्पतालों में गंभीर रोगियों को आपूर्ति की जाने वाली ऑक्सीजन वास्तव में **संपीडित गैस (Compressed gas)** या उच्च दाब पर द्रवीकृत रूप में धातु के सिलेंडरों में भरी जाती है ताकि कम आयतन में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन स्टोर की जा सके। अतः विकल्प (B) एक असत्य (गलत) कथन है, और चूँकि प्रश्न में गलत कथन ही पूछा गया है, इसलिए यही सही विकल्प है।
- मुख्य बिंदु:
- गैसों की संपीड्यता (Compressibility) बहुत अधिक होती है, जिसके कारण इन्हें उच्च दाब पर आसानी से छोटे सिलेंडरों में संपीडित किया जा सकता है।
- पदार्थ के गैसीय कणों में गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है, जिससे वे तीव्र गति से अनियमित (Random) दिशाओं में विचरण करते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 1) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं और उनके गुणों) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): यह कथन बिल्कुल सत्य है कि आजकल पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक वाहनों और कारों में संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।
- विकल्प (C): यह कथन सत्य है कि अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली ऑक्सीजन उच्च दाब पर संपीडित गैस होती है (जो विकल्प B का विरोधाभास है)।
- विकल्प (D): यह कथन भी पूरी तरह सत्य है कि गैसीय अवस्था में कणों के बीच रिक्त स्थान बहुत अधिक और आकर्षण बल नगण्य होने के कारण वे अत्यधिक चाल से अनियमित रूप से घूमते हैं।
#50. जब एथेनॉल सोडियम के साथ अभिक्रिया करता है तो निम्नलिखित में से कौन-सी गैस बनती है?
(RRB JE 23 May 2019 Shift 3)
- एथेनॉल और सोडियम की अभिक्रिया (Reaction of Ethanol with Sodium): जब एथेनॉल ($CH_3CH_2OH$) सोडियम धातु ($Na$) के साथ अभिक्रिया करता है, तो सोडियम एथोक्साइड ($CH_3CH_2ONa$) का निर्माण होता है और साथ में **हाइड्रोजन गैस ($H_2$)** निकलती है।
रासायनिक समीकरण: $2CH_3CH_2OH + 2Na \rightarrow 2CH_3CH_2ONa + H_2 \uparrow$
- मुख्य बिंदु:
- यह अभिक्रिया एथेनॉल (अल्कोहल) के अम्लीय स्वभाव को दर्शाती है क्योंकि यह सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम) के साथ हाइड्रोजन गैस विस्थापित करती है।
- निकलने वाली हाइड्रोजन गैस के पास जलती हुई तीली ले जाने पर यह ‘फट-फट’ (pop sound) की आवाज के साथ जलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 23 May 2019 Shift 3) में कार्बनिक रसायन विज्ञान (अल्कोहल के रासायनिक गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऑक्सीजन: सोडियम और एथेनॉल की इस विस्थापन अभिक्रिया में ऑक्सीजन गैस मुक्त नहीं होती है।
- विकल्प (B) क्लोरीन: एथेनॉल और सोडियम के यौगिक में क्लोरीन का कोई तत्व ही मौजूद नहीं है, अतः इसका बनना असंभव है।
- विकल्प (D) मीथेन: मीथेन एक अलग हाइड्रोकार्बन (एल्केन) है, जो इस रासायनिक प्रक्रिया का उत्पाद नहीं है।
#51. निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव निर्मित पदार्थ है और जो बैक्टीरिया की क्रिया द्वारा विघटित नहीं होगा?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- जैवकण/जैव-अनिम्नीकरणीय पदार्थ (Non-biodegradable substances): **प्लास्टिक** एक मानव निर्मित (Synthetic) बहुलक (Polymer) है। यह प्रकृति में जैव-अनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) होता है, जिसका अर्थ है कि बैक्टीरिया, कवक या अन्य सूक्ष्मजीव प्राकृतिक रूप से इसे विघटित (Decompose) नहीं कर सकते हैं। यही कारण है कि प्लास्टिक पर्यावरण प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनता है।
- मुख्य बिंदु:
- जैव-अनिम्नीकरणीय होने के कारण प्लास्टिक सदियों तक पर्यावरण में ज्यों का त्यों बना रहता है।
- इसके विपरीत, जैविक पदार्थ आसानी से सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित हो जाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 15 Dec 2025) में पर्यावरण एवं प्रदूषण / सामान्य विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) चावल: यह एक प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है जो बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से विघटित (Biodegradable) हो जाता है।
- विकल्प (C) मक्खन: यह जैविक वसा आधारित पदार्थ है, जिसे बैक्टीरिया द्वारा अपघटित किया जा सकता है।
- विकल्प (D) रोटी: यह कार्बोहाइड्रेट युक्त जैविक खाद्य पदार्थ है जो नमी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर सड़कर जल्दी विघटित हो जाता है।
#52. बायोगैस एक उत्कृष्ट ईंधन है क्योंकि इसमें 75% तक ____________ होता है।
(RRB NTPC CBT-I : 13 Jan 2021 Shift 1)
- बायोगैस (Biogas): बायोगैस एक पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छ ईंधन है, जिसका निर्माण ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैविक कचरे (जैसे गोबर, पौधों के अवशेष आदि) के अवायवीय अपघटन (Anaerobic decomposition) द्वारा होता है। इसमें लगभग 75% तक **मेथेन ($CH_4$)** गैस पाई जाती है, जो इसका मुख्य ज्वलनशील घटक है।
- मुख्य बिंदु:
- मेथेन की उच्च मात्रा के कारण बायोगैस बिना धुआँ छोड़े उच्च ऊष्मा के साथ जलती है।
- बायोगैस संयंत्र से निकलने वाला अपशिष्ट एक उत्कृष्ट उर्वरक (Manure) के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 13 Jan 2021 Shift 1) में रसायन विज्ञान एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सल्फाइड: सल्फाइड यौगिक बायोगैस का मुख्य घटक नहीं होते (हालांकि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की बहुत कम मात्रा अशुद्धता के रूप में हो सकती है)।
- विकल्प (B) हाइड्रोजन: बायोगैस में हाइड्रोजन गैस काफी कम मात्रा में होती है, 75% हिस्सा मेथेन का होता है।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन: बायोगैस का उत्पादन ही ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, अतः इसमें ऑक्सीजन की मात्रा नहीं होती।
#53. निम्नलिखित में से कौन-सा गैसों का एक अभिलक्षण है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
- गैसों के अभिलक्षण (Characteristics of Gases): पदार्थ की गैसीय अवस्था (Gaseous state) की मुख्य विशेषता यह होती है कि इनका **न तो कोई निश्चित आकार (No fixed shape)** होता है और **न ही कोई निश्चित आयतन (No fixed volume)** होता है। गैसों के कणों के बीच अंतराआणविक आकर्षण बल नगण्य होता है और रिक्त स्थान बहुत अधिक होता है, जिसके कारण ये जिस भी बर्तन में रखी जाती हैं, उसके पूरे आयतन और आकार को पूरी तरह से घेर लेती हैं।
- मुख्य बिंदु:
- गैसों की संपीड्यता (Compressibility) ठोसों और द्रवों की तुलना में अत्यधिक उच्च होती है।
- इनमें उच्च गतिज ऊर्जा के कारण तीव्र विसरण (Diffusion) का गुण पाया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27 Nov 2025) में भौतिक विज्ञान एवं पदार्थ की अवस्थाओं के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) संपीड़्य, लेकिन द्रव नहीं: यह कथन गैसों के बारे में अधूरा और अपर्याप्त है।
- विकल्प (C) निश्चित आकार और आयतन: यह विशेषता पूरी तरह से **ठोस (Solids)** पदार्थों की होती है।
- विकल्प (D) कोई निश्चित आकार नहीं, लेकिन आयतन निश्चित: यह विशेषता **द्रवों (Liquids)** की होती है, गैसों की नहीं।
#54. सात रंगों वाले प्रकाश में से कौन-सा रंग प्रिज्म पर पड़ने के बाद सबसे अधिक विचलित होता है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 2)
- प्रकाश का विक्षेपण और विचलन (Dispersion and Deviation of Light): जब श्वेत प्रकाश का कोई पुंज किसी कांच के प्रिज्म से गुजरता है, तो यह अपने सात घटक रंगों (VIBGYOR) में विभाजित हो जाता है। प्रकाश के विचलन (bending) का संबंध उसकी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) से होता है। जिस रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है, उसका अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है और प्रिज्म से गुजरने पर वह **सबसे अधिक विचलित (Deviate)** होती है। **बैंगनी रंग** की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होने के कारण यह सबसे अधिक झुकती है।
- मुख्य बिंदु:
- बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम और आवृत्ति (Frequency) सबसे अधिक होती है।
- इसके विपरीत, लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होने के कारण उसका विचलन **सबसे कम** होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 2) में भौतिक विज्ञान (प्रकाशिकी / Optics) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) नीला: नीले रंग का विचलन बैंगनी से कम और अन्य रंगों से अधिक होता है, लेकिन यह अधिकतम विचलित होने वाला रंग नहीं है।
- विकल्प (B) पीला: पीले रंग का विचलन स्पेक्ट्रम के बीच में आता है।
- विकल्प (C) लाल: लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होती है, जिसके कारण प्रिज्म से गुजरने पर यह **सबसे कम** विचलित होता है।
#55. कौन-सा गुण बताता है कि जब एक किरण पुंज एक वास्तविक विलयन (True solution) से गुजरती है तो प्रकाश का मार्ग क्यों दिखाई नहीं देता है?
(RRB JE 20/02/2026 )
- वास्तविक विलयन और प्रकाश का मार्ग (True Solution and Tyndall Effect): वास्तविक विलयन (True Solution) एक समांगी मिश्रण होता है जिसमें विलेय के कणों का आकार **1 नैनोमीटर ($10^{-9}$ मीटर) से भी छोटा** होता है। इतने अत्यंत सूक्ष्म आकार के कारण ये कण प्रकाश की किरणों को फैलाते (scatter) नहीं हैं। यही कारण है कि जब प्रकाश पुंज वास्तविक विलयन से गुजरता है, तो टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) उत्पन्न नहीं होता और प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता है।
- मुख्य बिंदु:
- इसके विपरीत, कोलाइडी विलयन (Colloidal solution) के कणों का आकार बड़ा होने के कारण वे प्रकाश के मार्ग को दृश्यमान बनाते हैं (टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं)।
- वास्तविक विलयन के कणों को नग्न आँखों या साधारण सूक्ष्मदर्शी से नहीं देखा जा सकता।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (विलयन और कोलाइड के गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) कणों को निस्पंदन द्वारा हटाया जा सकता है: वास्तविक विलयन के कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें फिल्टर पेपर से छानकर (निस्पंदन द्वारा) अलग नहीं किया जा सकता।
- विकल्प (C) कण विलायक अणुओं से भारी होते हैं: कणों का भारी होना प्रकाश के मार्ग के अदृश्य होने का मुख्य कारण नहीं है, बल्कि उनका अत्यंत सूक्ष्म आकार (1 nm से कम) होना है।
- विकल्प (D) स्थिर रहने पर कण नीचे बैठ जाते हैं: वास्तविक विलयन बेहद स्थायी होते हैं और इन्हें खुला छोड़ने पर भी इनके कण नीचे नहीं बैठते हैं।
#56. वे कौन-से दो भौतिक गुण हैं जो धातुओं को क्रमशः खींचकर पतले तार बनाने और पीटकर पतली चादरों के रूप में परिवर्तित करने की अनुमति देते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- धातुओं के विशिष्ट भौतिक गुण (Physical Properties of Metals):
- तन्यता (Ductility): धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं (जैसे 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबी तार बनाई जा सकती है)।
- आघातवर्धनीयता (Malleability): धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें हथौड़े से पीटकर पतली चादरों (Sheets) के रूप में बदला जा सकता है (जैसे सोना और चांदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएं हैं)।
- मुख्य बिंदु: यही दोनों प्रमुख गुण धातुओं को अत्यधिक उपयोगी और संरचनात्मक रूप से मजबूत बनाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21 Dec 2025) में रसायन विज्ञान (धातु और अधातु के भौतिक गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ध्वनिक और चालकता: ध्वनिकता (Sonorous) से आवाज उत्पन्न होती है और चालकता से ऊष्मा या बिजली प्रवाहित होती है, तार या चादर बनाना इनसे संबंधित नहीं है।
- विकल्प (B) द्युति और कठोरता: द्युति (Lustre) चमक का और कठोरता मजबूती का गुण है।
- विकल्प (C) उच्च गलनांक और ठोस अवस्था: ये तापमान और भौतिक अवस्था से जुड़े गुण हैं, तार खींचने या चादर पीटने से नहीं।
#57. निम्नलिखित में से कौन-सा, ठोस सोल (solid sol) का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
- ठोस सोल (Solid Sol): यह कोलाइड (Colloid) का एक प्रकार है जिसमें **परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase)** ठोस होती है और **परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium)** भी ठोस ही होता है। इसका सर्वोत्तम उदाहरण **रंगीन रत्न (जैसे माणिक्य/Ruby)** या दुधिया काँच हैं, जिनमें ठोस कण ठोस कांच या खनिज के अंदर फैले होते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- कोलाइडी तंत्र में विभिन्न अवस्थाओं के संयोजन से एरोसोल, इमल्शन, जेल और सोल बनते हैं।
- ठोस सोल में ठोस में ठोस (Solid in Solid) का मिश्रण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09 Mar 2026) में रसायन विज्ञान (कोलाइडी विलयन और उनके प्रकार) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) जेली: यह ‘जेल’ (Gel) का उदाहरण है, जिसमें द्रव, ठोस माध्यम में फैला होता है (द्रव में ठोस नहीं)।
- विकल्प (C) पनीर: पनीर भी ‘जेल’ (Gel) का ही एक अन्य प्रसिद्ध उदाहरण है।
- विकल्प (D) धुआँ: धुआँ ‘एरोसोल’ (Aerosol) का उदाहरण है, जिसमें ठोस कण गैस (वायु) माध्यम में फैले होते हैं।
#58. निम्नलिखित में से कौन सा अणु, एक ही तत्व के दो परमाणुओं से मिलकर बना है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
- समपरमाणुक द्विपरमाणुक अणु (Homoatomic Diatomic Molecule): हाइड्रोजन गैस ($H_2$) एक ही तत्व (हाइड्रोजन) के **दो परमाणुओं** से मिलकर बना एक द्विपरमाणुक अणु है। जब हाइड्रोजन के दो परमाणु आपस में सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ते हैं, तो $H_2$ अणु का निर्माण होता है।
- मुख्य बिंदु:
- ऐसे अणु जिनमें केवल एक ही प्रकार के तत्व के परमाणु होते हैं, उन्हें समपरमाणुक (Homoatomic) कहा जाता है (जैसे $O_2, N_2, H_2$ आदि)।
- इसके विपरीत, यौगिकों के अणुओं में भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु शामिल होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09 Mar 2026) में रसायन विज्ञान (परमाणु और अणु / Chemical Bonding and Molecules) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) $H_2O$: यह जल का अणु है, जो दो अलग-अलग तत्वों (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) के तीन परमाणुओं (2 हाइड्रोजन + 1 ऑक्सीजन) से मिलकर बनता है।
- विकल्प (C) $CO$: यह कार्बन मोनोऑक्साइड है, जो कार्बन और ऑक्सीजन दो अलग-अलग तत्वों के परमाणुओं से बना है।
- विकल्प (D) $O_3$: यह ओजोन का अणु है, हालांकि इसमें केवल एक ही तत्व (ऑक्सीजन) है, लेकिन यह दो के बजाय **तीन** परमाणुओं से मिलकर बनता है (त्रिपरमाणुक / Triatomic)।
#59. घर्षण कम करने के लिए किसी मशीन के गतिशील भागों के बीच क्या रखा जा सकता है?
(RRB JE CBT I -: 31 May 2019 Shift 3)
- घर्षण कम करने के उपाय (Reduction of Friction): मशीनों के गतिशील (Moving) भागों के बीच घर्षण (Friction) को कम करने और टूट-फूट को रोकने के लिए स्नेहक (Lubricants जैसे ग्रीस, तेल) या **एयर कुशन (Air cushion)** का उपयोग किया जाता है। एयर कुशन गतिशील सतहों के बीच हवा की एक पतلی परत बना देता है, जिससे संपर्क में आने वाली सतहें एक-दूसरे से सीधे नहीं टकरातीं और घर्षण लगभग नगण्य हो जाता है (जैसे होवरक्राफ्ट या बुलेट ट्रेनों में)।
- मुख्य बिंदु:
- घर्षण बल ऊर्जा का ह्रास करता है और मशीनों को गर्म करता है।
- बॉल बेयरिंग, ग्रीस, ऑयल और एयर कुशन घर्षण को कम करने की प्रभावी तकनीकें हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 31 May 2019 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (बल, गति और घर्षण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) रेज़िन: यह एक चिपचिपा कार्बनिक पदार्थ है, जिसका उपयोग मशीनों में घर्षण घटाने के लिए नहीं किया जाता।
- विकल्प (C) अपघर्षक (Abrasives): इनका उपयोग सतहों को घिसने, साफ करने या चमकाने के लिए किया जाता है (यह घर्षण को बढ़ाता है, कम नहीं करता)।
- विकल्प (D) खुरदरी सामग्री: खुरदरी सतहें संपर्क में आने पर घर्षण को और अधिक बढ़ा देती हैं।
#60. पृष्ठीय क्षेत्रफल उद्वाष्पन की दर को कैसे प्रभावित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- वाष्पीकरण या उद्वाष्पन की दर (Rate of Evaporation): वाष्पीकरण एक सतही परिघटना (Surface phenomenon) है। जब किसी द्रव का **पृष्ठीय क्षेत्रफल (Surface Area) बढ़ाया जाता है**, तो हवा के संपर्क में आने वाली सतह का दायरा बढ़ जाता है, जिससे अधिक संख्या में द्रव के अणु वाष्प में परिवर्तित हो पाते हैं। यही कारण है कि बड़े पृष्ठीय क्षेत्रफल से वाष्पीकरण की दर तेज हो जाती है (उदाहरण के लिए: गीले कपड़ों को फैलाकर सुखाना)।
- मुख्य बिंदु:
- वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले अन्य कारक: तापमान में वृद्धि, वायु की गति में वृद्धि, और आर्द्रता (Humidity) में कमी।
- वाष्पीकरण के कारण हमेशा ठंडक उत्पन्न होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 16 Dec 2025) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं और वाष्पीकरण के नियम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) उद्वाष्पन केवल बंद पात्रों में द्रव पदार्थों के साथ होता है: यह गलत है, वाष्पीकरण खुली सतहों पर अधिक प्रभावी ढंग से होता है।
- विकल्प (C) छोटा पृष्ठीय क्षेत्रफल उद्वाष्पन को बढ़ाता है: छोटा क्षेत्रफल संपर्क को कम करता है, जिससे वाष्पीकरण की दर धीमी हो जाती है।
- विकल्प (D) पृष्ठीय क्षेत्रफल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है: यह वैज्ञानिक रूप से असत्य है क्योंकि वाष्पीकरण एक प्रत्यक्ष रूप से सतही क्षेत्रफल पर निर्भर करने वाली प्रक्रिया है।
#61. निम्नलिखित में से किस कथन द्वारा संघनन की प्रक्रिया को सबसे अच्छी तरह से वर्णित किया गया है?
(RPF Constable 2024 : 12 Mar, 2025 Shift 3)
- संघनन (Condensation): वह प्रक्रिया जिसमें कोई गैस या वाष्प अपनी ऊष्मा का त्याग करके ठंडी होती है और **द्रव अवस्था (Liquid state)** में परिवर्तित हो जाती है, उसे संघनन कहते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान गैस के अणुओं की गतिज ऊर्जा कम हो जाती है और उनके बीच आकर्षण बल बढ़ जाता है।
- मुख्य उदाहरण:
- ठंडे पानी से भरे गिलास की बाहरी सतह पर पानी की छोटी-छोटी बूंदों का दिखाई देना (वायुमंडल की जलवाष्प का संघनित होना)।
- सुबह के समय ओस (Dew) का पड़ना और बादलों से वर्षा होना।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 12 Mar 2025 Shift 3) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस को पिघलाकर द्रव बनाना: इस प्रक्रिया को गलन या **संलयन (Melting / Fusion)** कहा जाता है।
- विकल्प (C) द्रव अवस्था से गुजरे बिना गैस का सीधे ठोस में परिवर्तन: इस प्रक्रिया को निक्षेपण या **डिपोजिशन (Deposition)** कहते हैं।
- विकल्प (D) द्रव अवस्था से गुजरे बिना ठोस का सीधे गैस में परिवर्तन: इस प्रक्रिया को **ऊर्ध्वपातन (Sublimation)** कहा जाता है (जैसे कपूर या शुष्क बर्फ का बदलना)।
#62. जब मैग्नीशियम रिबन को हवा में जलाया जाता है, तो जो राख बनती है वह है-
(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)
- मैग्नीशियम रिबन का दहन (Burning of Magnesium Ribbon): जब चमकदार मैग्नीशियम रिबन को वायु (ऑक्सीजन) में जलाया जाता है, तो यह तीव्र सफेद प्रकाश के साथ जलता है और रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप **मैग्नीशियम ऑक्साइड ($MgO$)** का निर्माण करता है। पीछे जो अवशेष या राख बचती है, उसका रंग **सफेद** होता है।
रासायनिक समीकरण: $2Mg + O_2 \xrightarrow{\Delta} 2MgO$
- मुख्य बिंदु:
- मैग्नीशियम ऑक्साइड प्रकृति में क्षारीय (Basic) होता है, जो लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है।
- यह संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) और ऑक्सीकरण (Oxidation) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-II : 31 Aug, 2019 Shift 1) में रसायन विज्ञान (रासायनिक अभिक्रियाएं और समीकरण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) गुलाबी: मैग्नीशियम के जलने पर गुलाबी रंग की राख नहीं बनती।
- विकल्प (B) काला: काले रंग की राख आमतौर पर कार्बनिक पदार्थों (जैसे लकड़ी या कागज) के अधूरे दहन से बनती है, मैग्नीशियम ऑक्साइड से नहीं।
- विकल्प (D) पीला: मैग्नीशियम ऑक्साइड का रंग सफेद होता है, पीला नहीं।
#63. तापमान बढ़ाने पर किस पदार्थ की अवस्था में सबसे अधिक प्रसार होता है?
(RRB JE CE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)
- पदार्थों में तापीय प्रसार (Thermal Expansion in States of Matter): जब तापमान बढ़ाया जाता है, तो पदार्थों के कणों की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) बढ़ जाती है। **गैसों** में कणों के बीच अंतराआणविक आकर्षण बल नगण्य और रिक्त स्थान अत्यधिक होता है, जिसके कारण तापमान में थोड़ी सी भी वृद्धि होने पर गैसों के आयतन और दाब में सबसे अधिक प्रसार (Expansion) होता है (चार्ल्स के नियम के अनुसार)।
- मुख्य बिंदु:
- ठोसों और द्रवों की तुलना में गैसों की तापीय प्रसार क्षमता (Thermal expansion coefficient) सबसे अधिक होती है।
- ठोसों में प्रसार सबसे कम होता है क्योंकि उनके कण अपनी जगह पर दृढ़ता से बंधे होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CE : 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2) में भौतिक विज्ञान (ऊष्मा और पदार्थ के गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस: ठोसों के कण अत्यधिक पास और बंधे होते हैं, इसलिए तापमान बढ़ाने पर इनमें प्रसार बहुत कम (न्यूनतम) होता है।
- विकल्प (B) द्रव: द्रवों में प्रसार ठोसों से अधिक लेकिन गैसों की तुलना में काफी कम होता है।
- विकल्प (C) प्लाज्मा: हालांकि प्लाज्मा उच्च ऊर्जा वाली आयनित अवस्था है, लेकिन सामान्य तापमान परिवर्तन पर तापीय प्रसार के मामले में गैसीय अवस्था का प्रसार सबसे व्यापक रूप से देखा जाता है।
#64. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक संक्षारण के लिए उत्तरदायी नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- संक्षारण और उसके कारक (Corrosion and its Factors): धातुओं का वायु, नमी (जल) और रासायनिक पदार्थों (जैसे अम्ल) के प्रभाव से धीरे-धीरे नष्ट होना **संक्षारण (Corrosion)** कहलाता है (जैसे लोहे पर जंग लगना)। इसके लिए मुख्य रूप से वायु (ऑक्सीजन), नमी/जल और अम्ल उत्तरदायी होते हैं।
- मिश्रधातु की भूमिका: **मिश्रधातु (Alloy)** दो या दो से अधिक धातुओं (या धातु और अधातु) का समांगी मिश्रण होती है। धातुओं को मिश्रधातु में बदलने से उनकी संक्षारण प्रतिरोधक क्षमता (Corrosion resistance) बढ़ जाती है (उदाहरण के लिए: स्टेनलेस स्टील पर जंग नहीं लगती)। अतः मिश्रधातु संक्षारण का कारण नहीं, बल्कि संक्षारण से बचाव का एक तरीका है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04 Dec 2025) में रसायन विज्ञान (धातु, अधातु एवं संक्षारण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल: नमी या जल संक्षारण की प्रक्रिया के लिए सबसे मुख्य और प्राथमिक कारकों में से एक है।
- विकल्प (B) अम्ल: अम्लीय माध्यम या प्रदूषित वातावरण में मौजूद अम्ल संक्षारण की दर को बहुत तेज कर देते हैं।
- विकल्प (D) वायु: वायु में मौजूद ऑक्सीजन धातु की सतह के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड बनाती है, जिससे संक्षारण होता है।
#65. द्रवों में, पृष्ठ पर कणों का वह लघु अंश जिसकी गतिज ऊर्जा उच्च होती है और अन्य कणों के आकर्षण बलों से अलग होने में सक्षम होता है, अंततः किस अवस्था में परिवर्तित हो जाएगा?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
- वाष्पीकरण की प्रक्रिया (Process of Evaporation): द्रवों में, सतह (पृष्ठ) पर मौजूद जिन कणों की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) उच्च होती है, वे अन्य अणुओं के बीच लगने वाले अंतराआणविक आकर्षण बलों को पार करके स्वतंत्र होने में सक्षम होते हैं। द्रव के पृष्ठ का यह अंश अंततः **वाष्प (Vapor)** या गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, जिसे वाष्पीकरण कहा जाता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह एक सतही परिघटना (Surface phenomenon) है जो क्वथनांक से कम तापमान पर भी हर समय होती रहती है।
- उच्च गतिज ऊर्जा वाले कणों के वाष्प बनकर उड़ जाने के कारण शेष द्रव में औसत गतिज ऊर्जा कम हो जाती है, जिससे ठंडक उत्पन्न होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 12 Dec 2025) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं और वाष्पीकरण के नियम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ बिना द्रव में बदले सीधे गैस में परिवर्तित होता है।
- विकल्प (B) निक्षेप (Deposition): यह गैसीय अवस्था से सीधे ठोस अवस्था में बदलने की प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) ठोस (Solid): यह अवस्था तापमान कम करने (जमने) पर प्राप्त होती है, जबकि उच्च गतिज ऊर्जा वाले कणों के पलायन से वाष्प बनती है।
#66. निम्नलिखित में से किस विकल्प में SI आधार इकाई नहीं है?
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 3)
- एसआई आधार इकाइयाँ (SI Base Units): अंतर्राष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (SI) में कुल **7 मूल (आधार) इकाइयाँ** होती हैं, जो निम्नलिखित हैं:
- लंबाई (मीटर – m)
- द्रव्यमान (किलोग्राम – kg)
- समय (सेकंड – s)
- विद्युत धारा (एम्पीयर – A)
- ऊष्मागतिक तापमान (केल्विन – K)
- ज्योति तीव्रता (कैंडेला – cd)
- पदार्थ की मात्रा (मोल – mol)
- आवृत्ति (Frequency): आवृत्ति एक व्युत्पन्न राशि (Derived quantity) है, जिसकी एसआई इकाई हर्ट्ज (Hz या $s^{-1}$) होती है। अतः यह एसआई आधार इकाई नहीं है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 23 Jan 2019 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (मापन और मात्रक / Units and Measurements) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) पदार्थ की मात्रा: यह 7 मूल SI राशियों में शामिल है, जिसका मात्रक ‘मोल’ (mol) होता है।
- विकल्प (C) ज्योति तीव्रता: यह भी मूल SI राशियों में से एक है, जिसका मात्रक ‘कैंडेला’ (cd) है।
- विकल्प (D) विद्युत धारा: यह भी मूल SI राशियों में शामिल है, जिसका मात्रक ‘एम्पीयर’ (A) होता है।
#67. निम्नलिखित में से किसे आमतौर पर’ उच्च दाब पर संग्रहित’ किया जाता है?
(RRB JE 25/02/2026 )
- ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (Solid $CO_2$): ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (जिसे ‘शुष्क बर्फ’ या ‘ड्राई आइस’ भी कहा जाता है) को **उच्च दाब (High Pressure)** पर संग्रहीत किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सामान्य वायुमंडलीय दाब पर यह द्रव अवस्था में बदले बिना सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है (ऊर्ध्वपातन)। इसे ठोस रूप में बनाए रखने और सुरक्षित भंडारण के लिए उच्च दाब की आवश्यकता होती है।
- मुख्य बिंदु:
- यदि दाब घटाकर 1 वायुमंडल कर दिया जाए, तो ठोस $CO_2$ सीधे गैसीय अवस्था में बदल जाती है।
- इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रशीतन (Refrigeration) और खाद्य सामग्री के परिवहन में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 25 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं और उनके गुणों) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) $N_2$ (नाइट्रोजन): यह एक सामान्य द्विपरमाणुक गैस है, जिसे दाब के अंतर्गत ठोस के रूप में संग्रहित नहीं किया जाता (तरल नाइट्रोजन को कम तापमान पर रखा जाता है)।
- विकल्प (B) $H_2$ (हाइड्रोजन): यह भी एक हल्की गैस है, जो सामान्य परिस्थितियों में गैसीय रूप में रहती है।
- विकल्प (D) $NaCl$ (सोडियम क्लोराइड): यह साधारण नमक है, जो कमरे के तापमान पर एक स्थिर आयनिक क्रिस्टलीय ठोस होता है और इसे भंडारण के लिए उच्च दाब की आवश्यकता नहीं होती।
#68. दही से मक्खन अलग करने की तकनीक का नाम बताइए
。(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)
- अपकेंद्रनीकरण (Centrifugation): दही से मक्खन अलग करने की इस तकनीक को अपकेंद्रनीकरण कहा जाता है। इस विधि में मिश्रण को तेजी से घुमाया जाता है, जिससे सघन (heavy) कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण (जैसे मक्खन/मलाई) केंद्र की ओर या ऊपर की तरफ आ जाते हैं, जिससे उन्हें आसानी से पृथक्करण किया जा सकता है।
- मुख्य बिंदु:
- यह तकनीक मुख्य रूप से उन मिश्रणों के लिए उपयोग की जाती है जहाँ बहुत बारीक ठोस कण या हल्के द्रव, तरल में तैरते रहते हैं।
- इसका उपयोग दूध से क्रीम (मक्खन) निकालने, वाशिंग मशीन में कपड़े सुखाने के ड्रायर और पैथोलॉजी लैब में ब्लड टेस्ट (Centrifuge machine) के दौरान भी किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-II : 31 Aug, 2019 Shift 1) में रसायन विज्ञान (मिश्रणों का पृथक्करण / Separation of Mixtures) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह ठोस पदार्थों को सीधे गैस में बदलने की विधि है, मक्खन निकालने से इसका कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (C) वाष्पीकरण (Evaporation): यह द्रवों को वाष्प में बदलकर अलग करने की प्रक्रिया है (जैसे समुद्र के पानी से नमक बनाना)।
- विकल्प (D) निस्यंदन (Filtration): यह छानने की प्रक्रिया है जिसके द्वारा अघुलनशील ठोस पदार्थों को द्रवों से अलग किया जाता है, लेकिन दही से मक्खन निकालने के लिए यह उपयुक्त नहीं है।
#69. रामू को जल से भरा एक टब दिया गया है जिसका अपवर्तनांक 1.33 है, तेल का एक मग जिसका अपवर्तनांक 1.46 है, ग्लिसरीन की एक बोतल जिसका अपवर्तनांक 1.5 है और एक काँच की पट्टी जिसका अपवर्तनांक 1.65 है। प्रकाश सबसे तेज़ किसमें गति करेगाः
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1)
- अपवर्तनांक और प्रकाश की चाल (Refractive Index and Speed of Light): किसी माध्यम का अपवर्तनांक ($n$) निर्वात में प्रकाश की चाल ($c$) और उस माध्यम में प्रकाश की चाल ($v$) का अनुपात होता है, यानी $n = \frac{c}{v}$। इससे स्पष्ट है कि प्रकाश की चाल अपवर्तनांक के **व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional)** होती है:
सूत्र: $v = \frac{c}{n}$ (अर्थात जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना कम होगा, उसमें प्रकाश की चाल उतनी ही अधिक होगी)।
- मानों की तुलना:
- जल का अपवर्तनांक = $1.33$ (सबसे कम)
- तेल का अपवर्तनांक = $1.46$
- ग्लिसरीन का अपवर्तनांक = $1.50$
- काँच की पट्टी का अपवर्तनांक = $1.65$ (सबसे अधिक)
चूंकि दिए गए विकल्पों में जल का अपवर्तनांक सबसे कम है, इसलिए प्रकाश सबसे तेज **जल** में गति करेगा।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1) में भौतिक विज्ञान (प्रकाशिकी / Optics – अपवर्तन और अपवर्तनांक) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) तेल (1.46): इसका अपवर्तनांक जल से अधिक है, इसलिए इसमें प्रकाश की चाल जल की तुलना में कम होगी।
- विकल्प (C) ग्लिसरीन (1.5): अधिक अपवर्तनांक होने के कारण इसमें प्रकाश की गति जल से धीमी होगी।
- विकल्प (D) काँच की पट्टी (1.65): काँच का अपवर्तनांक सबसे अधिक है, जिसका अर्थ है कि यह सबसे सघन माध्यम है और इसमें प्रकाश की चाल सबसे कम होगी।
#70. CuO + H 2 → Cu + H 2 O अभिक्रिया में, निम्न में से कौन-सा पदार्थ ऑक्सीकृत होता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- ऑक्सीकरण और अपचयन (Oxidation and Reduction): दी गई समीकरण $CuO + H_2 \rightarrow Cu + H_2O$ में:
- हाइड्रोजन ($H_2$) का ऑक्सीकरण होता है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन का योग (Addition of oxygen) होता है, जिससे यह जल ($H_2O$) में बदल जाता है।
- वहीं, कॉपर ऑक्साइड ($CuO$) का अपचयन (Reduction) होता है क्योंकि इससे ऑक्सीजन का ह्रास होता है और यह कॉपर ($Cu$) में परिवर्तित हो जाता है।
- मुख्य बिंदु: यह अभिक्रिया रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction) का एक क्लासिक उदाहरण है, जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन साथ-साथ होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (रासायनिक अभिक्रियाएं और समीकरण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल: जल इस अभिक्रिया का उत्पाद है, यह स्वयं ऑक्सीकृत नहीं होता।
- विकल्प (B) कॉपर ऑक्साइड: कॉपर ऑक्साइड का ऑक्सीजन हटने के कारण **अपचयन** होता है, ऑक्सीकरण नहीं।
- विकल्प (D) कॉपर: कॉपर इस अभिक्रिया में अपचयित होकर प्राप्त होने वाला उत्पाद है।
#71. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन और उसकी संगत प्रक्रिया का सही मिलान नहीं करता है?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1)
- गलत युग्म का स्पष्टीकरण: गैस से द्रव अवस्था में परिवर्तन को **संघनन (Condensation)** कहा जाता है, न कि ऊर्ध्वपातन। चूंकि विकल्प (A) में इसे ‘ऊर्ध्वपातन’ बताया गया है, इसलिए यह मिलान गलत है और यही प्रश्न का सही उत्तर है।
- मुख्य बिंदु (पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन):
- ऊर्ध्वपातन (Sublimation): ठोस से सीधे गैस में परिवर्तन (जैसे कपूर या शुष्क बर्फ)।
- संघनन (Condensation): गैस से द्रव में परिवर्तन।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं के अंतःरूपांतरण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) गैस से ठोस: निक्षेपण (Deposition): यह बिल्कुल सही मिलान है, क्योंकि गैसीय अवस्था से सीधे ठोस बनने की प्रक्रिया निक्षेपण कहलाती है।
- विकल्प (C) ठोस से गैस: ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह भी एक सत्य मिलान है।
- विकल्प (D) द्रव से गैस: वाष्पीकरण (Evaporation/Vaporization): यह भी सही मिलान है, क्योंकि द्रव का गैस में बदलना वाष्पीकरण या क्वथन कहलाता है।
#72. वात्या भट्टी में, लोहे के ऑक्साइड को ____________ द्वारा कम किया जाता है।
(RRB JE 27 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- वात्या भट्टी में अपचयन (Reduction in Blast Furnace): वात्या भट्टी (Blast Furnace) में हेमेटाइट ($Fe_2O_3$) जैसे लोहे के ऑक्साइड का निष्कर्षण किया जाता है। यहाँ कोक के जलने से बनी **कार्बन मोनोऑक्साइड ($CO$)** गैस मुख्य अपचायक (Reducing agent) के रूप में कार्य करती है और लोहे के ऑक्साइड को पिघले हुए लोहे में अपचयित (reduce) कर देती है।
रासायनिक समीकरण: $Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2$
- मुख्य बिंदु:
- भट्टी के निचले हिस्से में कोक (कार्बन) जलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है, जो ऊपर उठते हुए और अधिक कार्बन से मिलकर कार्बन मोनोऑक्साइड में बदल जाती है।
- यह कार्बन मोनोऑक्साइड ही लोहे के विभिन्न ऑक्साइड्स ($Fe_2O_3, Fe_3O_4, FeO$) से ऑक्सीजन को हटाकर उन्हें शुद्ध लोहे में बदलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 27 May 2019 Shift 2 CBT 1) में धातु कर्म (Metallurgy) और रासायनिक प्रक्रमों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सिलिका ($SiO_2$): यह अयस्क में मौजूद मुख्य अम्लीय अशुद्धता (Gangue) है, न कि अपचायक।
- विकल्प (B) कार्बन: यद्यपि कोक (कार्बन) भट्टी में ऊष्मा उत्पन्न करता है और $CO$ बनाता है, लेकिन लोहे के ऑक्साइड को मुख्य रूप से गैसीय अवस्था में **कार्बन मोनोऑक्साइड** द्वारा अपचयित किया जाता है।
- विकल्प (D) चूना पत्थर ($CaCO_3$): इसका उपयोग गालक (Flux) के रूप में किया जाता है जो अशुद्धियों (सिलिका) के साथ मिलकर धातुमल (Slag – $CaSiO_3$) का निर्माण करता है, यह अपचयन का कार्य नहीं करता।
#73. निम्नलिखित में से कौन सा त्रि-परमाणुक अणु का एक उदाहरण है?
(RRB JE CBT I -: 30 May 2019 Shift 1)
- त्रि-परमाणुक अणु (Triatomic Molecule): ऐसा अणु जो एक ही तत्व या भिन्न तत्वों के **तीन परमाणुओं** से मिलकर बनता है, उसे त्रि-परमाणुक अणु कहते हैं। **ओजोन ($O_3$)** ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बना एक समपरमाणुक त्रि-परमाणुक अणु है।
- मुख्य बिंदु:
- परमाणुकता (Atomicity) किसी अणु में मौजूद कुल परमाणुओं की संख्या को दर्शाती है।
- ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I : 30 May 2019 Shift 1) में रसायन विज्ञान (परमाणु और अणु / Atomicity and Molecules) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) नाइट्रोजन ($N_2$): यह नाइट्रोजन का एक द्विपरमाणुक (Diatomic) अणु है, जिसमें दो परमाणु होते हैं।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन ($H_2$): यह भी एक द्विपरमाणुक अणु है।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन ($O_2$): सामान्य ऑक्सीजन गैस का अणु भी दो परमाणुओं से मिलकर बनता है (द्विपरमाणुक)।
#74. निम्नलिखित में से कौन-सा सॉल का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)
- सॉल (Sol): सॉल एक प्रकार का कोलाइडी विलयन (Colloidal solution) है जिसमें **ठोस कण (Dispersed phase)** किसी द्रव माध्यम (Dispersion medium) में परिक्षिप्त होते हैं। **मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया** (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड का जलीय निलंबन/सॉल) इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें ठोस मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड के कण पानी में फैले होते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- सॉल के अन्य प्रसिद्ध उदाहरणों में कीचड़ (Mud), पेंट और स्याही (Ink) शामिल हैं।
- इसका उपयोग आमतौर पर पेट की अम्लता (Acidity) को दूर करने के लिए एंटासिड के रूप में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2) में रसायन विज्ञान (कोलाइडी विलयन के प्रकार और उनके उदाहरण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) फेस क्रीम: फेस क्रीम ‘पायस’ या ‘इमल्शन’ (Emulsion) का उदाहरण है, जिसमें द्रव में द्रव फैला होता है।
- विकल्प (C) झाग (Foam): यह ‘फोम’ का उदाहरण है, जिसमें किसी द्रव या ठोस माध्यम में गैस के बुलबुले परिक्षिप्त होते हैं।
- विकल्प (D) रबर: प्राकृतिक रबर एक प्रकार का ‘लैटेक्स’ (इमल्शन या बहुलक कोलाइड) है, जो ठोस सॉल की श्रेणी में नहीं आता।
#75. कौन से जैव अणु जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने के लिए जिम्मेदार हैं?
(RRB NTPC UG CBT-I : 13 Aug, 2025 Shift 2)
- जैव उत्प्रेरक / एंजाइम (Enzymes as Biological Catalysts): एंजाइम मुख्य रूप से प्रोटीन से बने जैव अणु (Biomolecules) होते हैं, जो सजीवों के शरीर के भीतर होने वाली विभिन्न जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं (Biochemical reactions) की गति को तेज करने या उन्हें उत्प्रेरित करने का कार्य करते हैं। ये प्रतिक्रिया के दौरान स्वयं खर्च नहीं होते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- लगभग सभी एंजाइम प्रोटीन होते हैं (कुछ विशेष RNA अणु जैसे रिबोज़ाइम इसके अपवाद हैं)।
- पाचन क्रिया, श्वसन और डीएनए प्रतिकृति (DNA replication) जैसी सभी महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाएं एंजाइमों के बिना संभव नहीं हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 13 Aug, 2025 Shift 2) में सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान / जैव रसायन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) पॉलिसैकराइड (Polysaccharides): ये कार्बोहाइड्रेट के जटिल रूप हैं (जैसे स्टार्च, ग्लाइकोजन), जो मुख्य रूप से ऊर्जा भंडारण और संरचनात्मक कार्य करते हैं।
- विकल्प (C) न्यूक्लियोटाइड (Nucleotides): ये न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) की मूल इकाइयाँ हैं, जो आनुवंशिक सूचनाओं को संग्रहीत और स्थानांतरित करती हैं।
- विकल्प (D) फॉस्फोलिपिड (Phospholipids): ये कोशिका झिल्ली (Cell membrane) के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाने वाले लिपिड हैं।
#76. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प द्रवों के गुण का प्रतिनिधित्व नहीं करता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 2)
- द्रवों के भौतिक गुण (Physical Properties of Liquids): द्रवों (Liquids) का **आयतन निश्चित (Fixed volume)** होता है, लेकिन उनका **आकार अनिश्चित** होता है। वे जिस भी बर्तन या पात्र में रखे जाते हैं, उसी का आकार ग्रहण कर लेते हैं और बहने का गुण (Fluidity) प्रदर्शित करते हैं। चूंकि कथन (C) में यह कहा गया है कि द्रवों का आयतन निश्चित नहीं होता, यह कथन गलत है और यही इस प्रश्न का सही उत्तर है।
- मुख्य बिंदु:
- ठोस: निश्चित आकार और निश्चित आयतन।
- द्रव: अनिश्चित आकार लेकिन निश्चित आयतन।
- गैस: अनिश्चित आकार और अनिश्चित आयतन दोनों।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I : 29 Nov, 2024 Shift 2) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं के गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) द्रवों का कोई निश्चित आकार नहीं होता है: यह द्रवों का एक सत्य गुण है।
- विकल्प (B) द्रव बहते हैं और अपना आकार बदलते हैं: यह भी द्रवों का सही गुण है (इनमें तरलता होती है)।
- विकल्प (D) द्रव जिस पात्र में रखे जाते हैं, उसका आकार ग्रहण करते हैं: यह भी द्रवों की एक मुख्य विशेषता है।
#77. निम्नलिखित में से किस तापमान पर द्रव पदार्थ ठंडा होने पर ठोस में परिवर्तित हो जाता है?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1)
- हिमांक (Freezing Point): वह निश्चित तापमान जिस पर कोई द्रव पदार्थ ठंडा होने पर अपनी अवस्था बदलकर ठोस (Solid) में परिवर्तित हो जाता है, उस पदार्थ का हिमांक कहलाता है। इस प्रक्रिया के दौरान द्रव के कणों की गतिज ऊर्जा कम हो जाती है और वे एक निश्चित संरचना में बंध जाते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- सामान्यतः किसी शुद्ध पदार्थ का हिमांक और उसका गलनांक (Melting point) तापमान मान के मामले में समान होते हैं (अंतर केवल ऊष्मा के अवशोषण या उत्सर्जन का होता है)।
- उदाहरण के लिए, पानी का हिमांक 0°C होता है, जिस पर वह बर्फ (ठोस) में बदल जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) गलनांक (Melting Point): यह वह तापमान है जिस पर कोई ठोस पिघलकर द्रव बनता है (गर्म करने की स्थिति में)।
- विकल्प (B) संघनन बिंदु (Condensation Point): यह वह तापमान है जिस पर गैस या वाष्प ठंडी होकर द्रव में बदलती है।
- विकल्प (C) क्वथनांक (Boiling Point): यह वह तापमान है जिस पर कोई द्रव उबलकर गैस या वाष्प में परिवर्तित होता है।
#78. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कैल्शियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करवाने पर कौन-सी गैस मोचित होती है?
(RRB Level 01 Stage I 06/02/2026 )
- अम्ल और धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया (Reaction of Acid with Metal Carbonate): जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के साथ अभिक्रिया करता है, तो कैल्शियम क्लोराइड ($CaCl_2$), जल ($H_2O$) और **कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$)** गैस का निर्माण होता है। इस अभिक्रिया के दौरान तेजी से बुलबुले (Effervescence) के साथ $CO_2$ गैस निकलती है।
रासायनिक समीकरण: $CaCO_3 + 2HCl \rightarrow CaCl_2 + H_2O + CO_2 \uparrow$
- मुख्य बिंदु:
- उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान यह है कि जब इसे चूने के पानी (Lime water) में प्रवाहित किया जाता है, तो चूने का पानी दूधिया (Milky) हो जाता है।
- यह धातु कार्बोनेट की अम्लों के साथ होने वाली एक मानक रासायनिक विशेषता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 06 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षारक एवं लवण / Chemical Reactions) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) हाइड्रोजन: जब कोई अम्ल किसी **सक्रिय धातु** (जैसे जिंक या मैग्नीशियम) के साथ अभिक्रिया करता है, तब हाइड्रोजन गैस निकलती है, कार्बोनेट के साथ नहीं।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन: इस अभिक्रिया में ऑक्सीजन गैस का मोचन नहीं होता है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन: नाइट्रोजन इस रासायनिक प्रतिक्रिया का हिस्सा नहीं है।
#79. निम्नलिखित में से किसे “ड्राई आइस” के रूप में जाना जाता है?
(RPF ConstableAncillary 2018 30 Mar 2019 Shift 1)
- शुष्क बर्फ / ड्राई आइस (Dry Ice): ठोस कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) को सामान्यतः **“ड्राई आइस”** या शुष्क बर्फ के रूप में जाना जाता है। इसे उच्च दाब पर ठोस अवस्था में संग्रहित किया जाता है। जब इसका दाब घटाकर 1 वायुमंडल किया जाता है, तो यह बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है (ऊर्ध्वपातन)।
- मुख्य बिंदु:
- इसे ‘ड्राई आइस’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पिघलने पर पीछे कोई तरल या गीलापन नहीं छोड़ती है।
- इसका उपयोग मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, दवाओं और जैविक नमूनों के परिवहन के दौरान कम तापमान और प्रशीतन (Refrigeration) बनाए रखने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable Ancillary : 30 Mar 2019 Shift 1) में रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं और उनके सामान्य नामों) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) तरल कार्बन डाइऑक्साइड: यह द्रव रूप में होती है, जिसे ‘ड्राई आइस’ नहीं कहा जाता।
- विकल्प (D) गैसीय कार्बन डाइऑक्साइड: यह वायुमंडल में पाई जाने वाली सामान्य गैस है, जो शुष्क बर्फ नहीं है।
- विकल्प (A) कोई भी विकल्प नहीं: चूंकि विकल्प (C) पूरी तरह सही है, इसलिए यह विकल्प अमान्य है।
#80. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक, जल में विलीन होने पर एक विलयन बनाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
- विलयन (Solution): विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का एक समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture) होता है। जब **सोडियम क्लोराइड ($NaCl$)** यानी साधारण नमक को जल में घोला जाता है, तो इसके आयन पानी के अणुओं के साथ मिलकर पूरी तरह घुल जाते हैं और एक पारदर्शी, समांगी विलयन का निर्माण करते हैं।
- मुख्य बिंदु:
- सच्चे विलयन (True solutions) में कणों का आकार $1$ नैनोमीटर से छोटा होता है, इसलिए वे प्रकाश की किरण को फैलाते नहीं हैं (टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते)।
- नमक का जलीय विलयन विद्युत का चालन भी करता है क्योंकि इसमेंजलीय रूप में स्वतंत्र आयन ($Na^+$ और $Cl^-$) मौजूद होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02 Feb 2026) में रसायन विज्ञान (विलयन और उनके प्रकार / Solutions and Mixtures) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) लोहे का बुरादा: यह जल में अघुलनशील है और एक निलंबन (Suspension) या विषमंग मिश्रण बनाता है, विलयन नहीं।
- विकल्प (B) रेत: रेत पानी में घुलती नहीं है बल्कि कुछ समय बाद नीचे बैठ जाती है (निलंबन)।
- विकल्प (D) तेल: तेल पानी में अमिश्रणीय (Immiscible) है और घुलने के बजाय पानी की सतह पर एक अलग परत बना लेता है (या इमल्शन बनाता है)।
#81. पेरिस प्लास्टर (प्लास्टर ऑफ़ पेरिस) में कितने जल के अणु उपस्थित होते हैं?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1)
- प्लास्टर ऑफ़ पेरिस (Plaster of Paris): इसका रासायनिक नाम **कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट** (Calcium sulfate hemihydrate) है। इसका रासायनिक सूत्र CaSO4 · 1/2 H2O होता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसमें क्रिस्टलन जल के रूप में **आधे जल के अणु** (1/2 H2O) उपस्थित होते हैं (अर्थात कैल्शियम सल्फेट के दो अणुओं के लिए पानी का एक अणु)।
- मुख्य बिंदु:
- इसे जिप्सम (CaSO4 · 2H2O) को 373 K (100°C) पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है।
- इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्लास्टर करने में, मूर्तियों और खिलौनों के निर्माण में तथा दीवारों को चिकना करने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1) में रसायन विज्ञान (यौगिकों के रासायनिक सूत्र और उनके गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) तीन जल के अणु: यह रासायनिक रूप से प्लास्टर ऑफ़ पेरिस के लिए अमान्य है।
- विकल्प (C) एक जल का अणु: कुछ अन्य यौगिकों (जैसे मोनोहाइड्रेट लवण) में एक जल का अणु होता है, लेकिन प्लास्टर ऑफ़ पेरिस में आधा अणु होता है।
- विकल्प (D) शून्य जल के अणु: शून्य जल के अणु ‘निर्जल कैल्शियम सल्फेट’ (CaSO4) में होते हैं, जिसे ‘डेड बर्न प्लास्टर’ (Dead burnt plaster) कहा जाता है, जो पानी मिलाने पर जमता नहीं है।
#82. जब जिप्सम को 373 K पर गर्म किया जाता है, तो यह क्रिस्टलन जल का त्याग कर देता है और ______ बनाता है।
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )
- रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction): जब जिप्सम (CaSO4 · 2H2O) को 373 K (100°C) पर गर्म किया जाता है, तो यह अपने क्रिस्टलन जल के अणुओं का आंशिक त्याग करता है और **कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट** बनाता है, जिसे सामान्यतः **प्लास्टर ऑफ़ पेरिस** कहा जाता है।
- रासायनिक सूत्र:
- जिप्सम: CaSO4 · 2H2O
- प्लास्टर ऑफ़ पेरिस: CaSO4 · 1/2 H2O (या 2CaSO4 · H2O)
- मुख्य उपयोग: इसका उपयोग डॉक्टरों द्वारा टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में स्थिर रखने के लिए प्लास्टर करने, खिलौने बनाने, सजावटी सामान और सतहों को चिकना करने में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03/12/2025) में रसायन विज्ञान (अकार्बनिक यौगिक एवं उनके निर्माण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कैल्शियम सल्फेट पेंटाहाइड्रेट: पेंटाहाइड्रेट का अर्थ 5 जल के अणु होता है (जैसे कॉपर सल्फेट पेंटाहाइड्रेट / नीला थोथा – CuSO4 · 5H2O), जिप्सम को गर्म करने पर यह नहीं बनता।
- विकल्प (C) कैल्शियम क्लोराइड पेंटाहाइड्रेट: इसमें कैल्शियम के साथ क्लोराइड और 5 जल के अणु होते हैं, जो इस अभिक्रिया से संबंधित नहीं है।
- विकल्प (D) कैल्शियम क्लोराइड हेमीहाइड्रेट: यह यौगिक जिप्सम को गर्म करने से प्राप्त उत्पाद के रासायनिक नाम से मेल नहीं खाता है।
#83. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन पृथक्ककरण के संबंध में मिश्रण और यौगिकों के बीच महत्वपूर्ण अंतर का सटीक वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- मिश्रण और यौगिक में अंतर (Separation & Properties):
- मिश्रण (Mixture): इसमें दो या दो से अधिक पदार्थ केवल भौतिक रूप से मिले होते हैं। इसके घटकों को **भौतिक विधियों** (जैसे छानना, वाष्पीकरण, आसवन, चुंबकीय पृथक्करण आदि) द्वारा आसानी से अलग किया जा सकता है और इसके घटक अपने मूल गुण व पहचान बनाए रखते हैं।
- यौगिक (Compound): इसमें घटक रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं और उन्हें भौतिक विधियों द्वारा अलग नहीं किया जा सकता।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 26/12/2025) में रसायन विज्ञान (पदार्थ की प्रकृति, मिश्रण एवं यौगिक) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) इनका गलनांक और क्वथनांक तीव्र होता है: यह कथन यौगिकों (Compounds) की एक निश्चित भौतिक विशेषता है, न कि मिश्रण और यौगिक के पृथक्करण के अंतर का सटीक वर्णन।
- विकल्प (C) मूल पदार्थों की पहचान खो जाती है: यह विशेषता **यौगिक** की है (क्योंकि नए पदार्थ का निर्माण होता है), जबकि मिश्रण में मूल पदार्थों की पहचान बनी रहती है।
- विकल्प (D) वे सदैव ऊष्मा के अवशोषण से बनते हैं: यह गलत है, क्योंकि यौगिकों या मिश्रणों के निर्माण के समय ऊष्मा का अवशोषण या उत्सर्जन (दोनों) हो सकता है।
#84. निम्नलिखित में से किसका संघटन परिवर्ती होता है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
- संघटन की प्रकृति (Nature of Composition):
- मिश्रण और मिश्रधातु (Mixture & Alloy): जैसे **पीतल** (जो तांबा और जस्ते का एक मिश्रण है), इनका संघटन **परिवर्ती (Variable)** होता है क्योंकि इन्हें बनाने वाले घटकों की मात्रा निश्चित नहीं होती है।
- यौगिक (Compounds): जल, मेथेन और हाइड्रोजन क्लोराइड जैसे यौगिकों का संघटन हमेशा **निश्चित अनुपात** में होता है।
- पीतल के बारे में मुख्य बिंदु: पीतल तांबा (Cu) और जस्ता (Zn) की एक समांगी मिश्रधातु है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 11/12/2025) में रसायन विज्ञान (पदार्थ के प्रकार, मिश्रण व यौगिक) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl): यह एक रासायनिक यौगिक है, जिसमें हाइड्रोजन और क्लोरीन का अनुपात सदैव निश्चित होता है।
- विकल्प (C) मेथेन (CH4): यह एक निश्चित संघटन वाला हाइड्रोकार्बन (यौगिक) है।
- विकल्प (D) जल (H2O): यह एक यौगिक है जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन द्रव्यमान के अनुसार हमेशा एक निश्चित अनुपात में होते हैं।
#85. कौन सा कोशिकांग केवल पादप कोशिकाओं में पाया जाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 2)
- हरितलवक (Chloroplast): यह एक प्रकार का प्लास्टिड (Plastid) है जो केवल **पादप कोशिकाओं** और कुछ शैवाल (Algae) में पाया जाता है। इसमें पर्णहरित (Chlorophyll) नामक वर्णक होता है, जो पौधों को प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा अपना भोजन बनाने में सहायता करता है।
- मुख्य बिंदु: पादप और जंतु कोशिकाओं के बीच मुख्य अंतर यह है कि पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति (Cell Wall) और प्लेस्टिड (जैसे हरितलवक) पाए जाते हैं, जो जंतु कोशिकाओं में अनुपस्थित होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I : 26 Nov, 2024 Shift 2) में जीव विज्ञान (कोशिका विज्ञान – Cell Biology) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सूत्रकणिका (Mitochondria): इसे कोशिका का पावरहाउस कहा जाता है, और यह पादप एवं जंतु दोनों प्रकार की कोशिकाओं में पाया जाता है।
- विकल्प (C) लयनकाय (Lysosome): इसे ‘आत्मघाती थैली’ (Suicide bag) कहा जाता है। यह मुख्य रूप से जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है (कुछ पादप कोशिकाओं में भी यह अलग रूप में हो सकता है, लेकिन हरितलवक विशेष रूप से केवल पादप कोशिकाओं का मुख्य लक्षण है)।
- विकल्प (D) केन्द्रक (Nucleus): केन्द्रक पादप और जंतु दोनों प्रकार की यूकेरियोटिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में उपस्थित होता है।
#86. यदि मशीन के पुर्जों में स्नेहक का उपयोग किया जाता है, तो गति कैसी हो जाती है?
(RRB JE CBT I -: 2 June 2019 Shift 1)
- स्नेहक (Lubricant) का कार्य: मशीन के पुर्जों के बीच घर्षण (Friction) को कम करने के लिए स्नेहक (जैसे ग्रीस, तेल आदि) का उपयोग किया जाता है। जब पुर्जों के बीच घर्षण कम हो जाता है, तो उनकी **गति चिकनी (smooth) और सुगम** हो जाती है तथा ऊर्जा का ह्रास कम होता है।
- मुख्य बिंदु: स्नेहक सतहों के बीच एक पतली परत बना लेते हैं जिससे सीधे संपर्क से होने वाला घर्षण रुक जाता है और पुर्जे जल्दी घिसते नहीं हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I : 2 June 2019 Shift 1) में भौतिक विज्ञान (घर्षण और उसके प्रभाव) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) अनियमित: स्नेहक गति को अनियंत्रित या अनियमित नहीं बनाते, बल्कि उसे नियंत्रित और सुचारू बनाते हैं।
- विकल्प (C) कठिन: स्नेहक के प्रयोग से गति कठिन होने के बजाय आसान हो जाती है।
- विकल्प (D) खुरदरी: खुरदरापन घर्षण को बढ़ाता है, जबकि स्नेहक खुरदरेपन को कम करके सतह को चिकना करता है।
#87. किसी द्रव के क्वथनांक पर क्या होता है?
(RRB ALP CBT 1 16/02/2026 )
- क्वथनांक (Boiling Point): किसी द्रव का वह तापमान जिस पर द्रव उबलने लगता है और वायुमंडलीय दाब के बराबर वाष्प दाब बनाते हुए गैसीय (वाष्प) अवस्था में परिवर्तित होने लगता है, उसका क्वथनांक कहलाता है। इस तापमान पर द्रव के कणों को इतनी पर्याप्त ऊष्मीय ऊर्जा मिल जाती है कि वे अंतराणुक आकर्षण बलों को पार करके **वाष्प में बदल जाते हैं**।
- मुख्य बिंदु: क्वथन एक समष्टिगत (Bulk) परिघटना है, जिसमें पूरे द्रव से बुलबुले बनकर वाष्प निकलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 16/02/2026) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाएँ और ऊष्मा) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कण स्थिर रहते हैं और किसी भी प्रकार का संचलन नहीं करते: तापमान बढ़ने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, वे स्थिर नहीं रहते बल्कि उनका संचलन बढ़ जाता है।
- विकल्प (B) कण तरल रूप में रहते हुए थोड़ा सा प्रसार करते हैं: यह क्वथनांक पर होने वाली मुख्य अवस्था परिवर्तन प्रक्रिया को पूरी तरह स्पष्ट नहीं करता, क्योंकि यहाँ तरल वाष्प में बदलने लगता है।
- विकल्प (C) कण ऊर्जा का ह्रास करते हैं और एक-दूसरे के नजदीक आ जाते हैं: क्वथनांक पर तापमान देने से कण ऊर्जा का ह्रास नहीं बल्कि ‘ग्रहण’ करते हैं और दूर होते हैं (गैस बनते हैं)।
#88. ठोस पदार्थ के लिए कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1)
- ठोस अवस्था (Solid State): पदार्थ की इस अवस्था में कण बहुत करीब होते हैं और उनके बीच का अंतराणुक आकर्षण बल बहुत मजबूत होता है। इसके कारण **ठोसों का निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएँ और निश्चित आयतन** होता है। इन पर बाहरी बल लगाने पर भी इनका आकार बदलता नहीं है (यह कठोर होते हैं)।
- मुख्य बिंदु: इसके विपरीत, द्रवों का आयतन निश्चित होता है लेकिन आकार निश्चित नहीं होता, और गैसों का न तो निश्चित आकार होता है और न ही निश्चित आयतन।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) ठोसों का केवल निश्चित आकार होता है, लेकिन निश्चित आयतन नहीं होता है: यह कथन गलत है क्योंकि ठोसों का आयतन भी निश्चित होता है।
- विकल्प (C) ठोसों का केवल निश्चित आकार होता है, लेकिन स्पष्ट सीमा नहीं होती है: ठोस पदार्थों की अपनी स्पष्ट सीमाएँ (boundaries) होती हैं।
- विकल्प (D) ठोसों का न तो निश्चित आकार होता है, न ही स्पष्ट सीमा और न ही निश्चित आयतन होता है: यह गुण गैसों (Gases) या प्लाज्मा से संबंधित है, ठोसों से नहीं।
#89. कौन-सा क्रियाकलाप दर्शाता है कि पदार्थ के कण निरंतर गतिमान रहते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- पदार्थ के कणों की गतिशीलता (Motion of Particles): पदार्थ के कणों में निरंतर गतिज ऊर्जा होती है, जिसके कारण वे लगातार गतिमान रहते हैं। **कमरे में इत्र (परफ्यूम) की खुशबू का फैलना** विसरण (Diffusion) का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि गैस के कण तेजी से गति करते हुए हवा के कणों के बीच फैल जाते हैं।
- मुख्य बिंदु: तापमान बढ़ने पर कणों की गति और तेज हो जाती है क्योंकि उनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 15/12/2025) में रसायन विज्ञान / भौतिक विज्ञान (पदार्थ के अभिलाषाणिक गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) जल को उसके क्वथनांक तक गर्म किया जा रहा है: यह ऊष्मा देने पर अवस्था परिवर्तन (उबलने) की प्रक्रिया को दर्शाता है, सीधे तौर पर कणों की निरंतर गतिशीलता का सबसे सामान्य व प्रत्यक्ष उदाहरण विसरण (इत्र की खुशबू) से कम स्पष्ट है।
- विकल्प (C) कक्ष तापमान पर बर्फ पिघल रही है: यह ठोस से द्रव में अवस्था परिवर्तन (गलने) को दर्शाता है।
- विकल्प (D) जल से भरे गिलास के तल में चीनी जम रही है: यह विलीन होने या अवसादन की स्थिति को दर्शाता है, जबकि कणों की निरंतर यादृच्छिक गति का प्रत्यक्ष प्रमाण विसरण प्रक्रिया से मिलता है।
#90. निक्षेप प्रक्रिया के दौरान, किस प्रकार का अवस्था परिवर्तन होगा?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- निक्षेप (Deposition): यह एक ऐसी ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ अपनी **गैसीय अवस्था से सीधे ठोस अवस्था में** परिवर्तित हो जाता है, बिना बीच में द्रव अवस्था में आए (इसे ऊर्ध्वपातन की उल्टी प्रक्रिया भी कहा जाता है)। इसका सबसे अच्छा उदाहरण वायुमंडल में जलवाष्प का सीधे बर्फ (पाले या तुषार) में बदलना है।
- मुख्य बिंदु:
- ऊर्ध्वपातन (Sublimation): ठोस से सीधे गैस में बदलना (जैसे कपूर)।
- निक्षेप (Deposition): गैस से सीधे ठोस में बदलना।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस से गैसीय अवस्था में: इस प्रक्रिया को ‘ऊर्ध्वपातन’ (Sublimation) कहते हैं।
- विकल्प (B) द्रव से ठोस अवस्था में: इस प्रक्रिया को ‘हिमीकरण’ या जमना (Freezing) कहते हैं।
- विकल्प (D) ठोस से द्रव अवस्था में: इस प्रक्रिया को ‘गलना’ या संगलन (Melting) कहते हैं।
#91. किस पोषक तत्व की कमी से खांसी से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं?
(RPF Constable 2018 17 Feb 2019 Shift 2)
- आयोडीन की कमी और प्रभाव: आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है जिसे **घेंघा या गोइटर (Goiter)** कहा जाता है। जब गले में यह ग्रंथि अत्यधिक बढ़ जाती है, तो यह श्वास नली (Trachea) पर दबाव डालती है। इस दबाव के कारण सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश, आवाज बैठना और लगातार **खांसी (Cough)** से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- मुख्य बिंदु: आयोडीन थायराइड हार्मोन (थायरोक्सिन) के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। इसकी कमी से बच्चों में मानसिक विकास रुक सकता है जिसे क्रेटीनिज्म कहते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 17 Feb 2019 Shift 2) में मानव शरीर रचना विज्ञान एवं पोषण (पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोग) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कैल्शियम: कैल्शियम की कमी से हड्डियां और दांत कमजोर होते हैं (जैसे रिकेट्स या ऑस्टियोपोरोसिस), श्वसन या खांसी से इसका सीधा संबंध नहीं है।
- विकल्प (B) प्रोटीन: प्रोटीन की कमी से बच्चों में क्वाशियोकोर (Kwashiorkor) और मेरेस्मस (Marasmus) जैसे गंभीर कुपोषण रोग होते हैं।
- विकल्प (D) कार्बोहाइड्रेट: कार्बोहाइड्रेट की कमी से शरीर में ऊर्जा की कमी और अत्यधिक कमजोरी आ जाती है।
#92. उस प्रक्रिया का नाम क्या है जिसमें ठोस सीधे गैस में परिवर्तित हो जाता है?
(RRB NTPC Tier I : 16 Apr 2016 Shift 3)
- ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह एक ऐसी भौतिक/रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे गैसीय (वाष्प) अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, और ठंडा करने पर वापस सीधे ठोस में बदल सकता है। इसके सामान्य उदाहरण कपूर (Camphor), अमोनियम क्लोराइड (Sal ammoniac), नेफ़थलीन की गोलियाँ (Naphthalene balls) और शुष्क बर्फ (Solid CO2) हैं।
- मुख्य बिंदु: यह प्रक्रिया अंतराणुक बलों को पार करने के लिए पर्याप्त ऊष्मा मिलने पर होती है जहाँ मध्यवर्ती द्रव अवस्था विलुप्त हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 16 Apr 2016 Shift 3) में रसायन विज्ञान / भौतिक विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) निक्षेप (Deposition): यह ऊर्ध्वपातन की उल्टी प्रक्रिया है, जिसमें गैस सीधे ठोस में बदलती है।
- विकल्प (C) संक्षेपण (Condensation): इस प्रक्रिया में गैस या वाष्प ठंडी होकर द्रव अवस्था में बदलती है।
- विकल्प (D) वाष्पीकरण (Evaporation): इस प्रक्रिया में द्रव धीरे-धीरे वाष्प या गैस में बदलता है।
#93. ऊष्मा हस्तांतरण की चालकत्व और संवहन प्रणाली ______ द्वारा विभाजित निकायों के बीच संचालित नहीं होती है।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 3)
- ऊष्मा हस्तांतरण के तरीके (Modes of Heat Transfer):
- चालन (Conduction): इसके लिए माध्यम के कणों के सीधे संपर्क की आवश्यकता होती है (मुख्य रूप से ठोस पदार्थों में)।
- संवहन (Convection): इसमें ऊष्मा का प्रवाह कणों की वास्तविक गति द्वारा होता है (द्रव और गैसों में)।
- निर्वात (Vacuum): चूँकि चालन और संवहन दोनों विधियों के लिए **माध्यम (Medium / पदार्थ के कण)** की आवश्यकता होती है, इसलिए जहाँ कोई माध्यम नहीं होता यानी **निर्वात** होता है, वहाँ ये दोनों प्रणालियाँ काम नहीं करती हैं। निर्वात में ऊष्मा केवल **विकिरण (Radiation)** विधि द्वारा प्रवाहित हो सकती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 21 Jan 2019 Shift 3) में ऊष्मागतिकी और भौतिक विज्ञान (Heat Transfer) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल: जल एक तरल माध्यम है, जिसमें संवहन और चालन द्वारा ऊष्मा का हस्तांतरण आसानी से हो सकता है।
- विकल्प (B) एल्यूमीनियम: यह एक ठोस धातु है, जो चालन (Conduction) के लिए एक उत्कृष्ट माध्यम है।
- विकल्प (D) बर्फ: बर्फ एक ठोस माध्यम है, जिसके द्वारा चालन प्रक्रिया संभव है।
#94. सहसंयोजक अणुओं का गलनांक और क्वथनांक कम होता है क्योंकि:
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 3)
- सहसंयोजक यौगिकों के गुण (Properties of Covalent Compounds): सहसंयोजक अणुओं (Covalent Molecules) में परमाणुओं के बीच के आंतरिक आबंध (जैसे सहसंयोजक आबंध) तो बहुत प्रबल होते हैं, लेकिन **अणुओं के बीच के अंतराअणुक बल (Intermolecular forces / वानडरवाल बल)** बहुत दुर्बल होते हैं। इन्हें तोड़ने के लिए बहुत कम ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, यही कारण है कि इनका गलनांक और क्वथनांक कम होता है।
- मुख्य बिंदु: इसके विपरीत, आयनिक यौगिकों में प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic forces) होते हैं, जिसके कारण उनके गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 16 Dec 2024 Shift 3) में रसायन विज्ञान (रासायनिक बंधन और यौगिकों के गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) उनमें प्रबल स्थिरवैद्युत अंतराअणुक बल होते हैं: यह आयनिक यौगिकों की विशेषता है, सहसंयोजक यौगिकों की नहीं।
- विकल्प (C) वे सामान्यतः गैसीय प्रकृति के होते हैं: यद्यपि कुछ सहसंयोजक यौगिक गैस होते हैं (जैसे CO2, CH4), लेकिन कई द्रव या ठोस भी होते हैं (जैसे जल, ग्लूकोज), इसलिए यह उनका मुख्य कारण नहीं है।
- विकल्प (D) उनमें अणु के भीतर प्रबल आबंध होते हैं: अणु के भीतर प्रबल आबंध होने के बावजूद, गलने या उबलने पर अणुओं के बीच के अंतराअणुक बल टूटते हैं न कि आंतरिक आबंध।
#95. निम्नलिखित में से कौन सा सूक्ष्म पोषक तत्व है?
(RRB JE CBT-I : 28 June 2019 Shift 3)
- सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): मानव शरीर को पोषक तत्वों की आवश्यकता के आधार पर दो भागों में बांटा जाता है:
- बृहत् पोषक तत्व (Macronutrients): जिनकी आवश्यकता शरीर को अधिक मात्रा में होती है, जैसे—कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, और वसा।
- सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): जिनकी आवश्यकता शरीर को बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन ये शारीरिक क्रियाओं के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं, जैसे—विटामिन और **खनिज पदार्थ (Minerals)**।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 28 June 2019 Shift 3) में मानव पोषण एवं स्वास्थ्य (Nutrients and Deficiency Diseases) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) वसा (Fat): यह एक वृहत् पोषक तत्व (Macronutrient) है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
- विकल्प (B) कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate): यह भी एक वृहत् पोषक तत्व है जो शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
- विकल्प (D) प्रोटीन (Protein): यह शरीर के निर्माण और मरम्मत के लिए आवश्यक एक प्रमुख वृहत् पोषक तत्व है।
#96. निम्नलिखित में से किस तत्व में धात्विक और गैर-रूपक दोनों गुण उपस्थित होते हैं?
(RPF SI 2018 : 11 Jan 2019 Shift 3)
- उपधातु (Metalloids): ऐसे तत्व जिनमें धातु (Metallic) और अधातु / गैर-धात्विक (Non-metallic) दोनों के गुण पाए जाते हैं, उन्हें उपधातु कहा जाता है। आवर्त सारणी में इन्हें धातुओं और अधातुओं के बीच रखा गया है। इसके प्रमुख उदाहरण बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), और आर्सेनिक (As) हैं।
- मुख्य बिंदु: उपधातुओं की विद्युत चालकता धातुओं से कम लेकिन अधातुओं से अधिक होती है, इसलिए इनका उपयोग अर्धचालक (Semiconductors) के रूप में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF SI : 11 Jan 2019 Shift 3) में रसायन विज्ञान (आवर्त सारणी – तत्वों के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कोलाइड: यह किसी तत्व का प्रकार नहीं है, बल्कि यह दो या दो से अधिक पदार्थों का एक विषमांगी मिश्रण (Colloidal solution) होता है।
- विकल्प (C) ग्लॉकोन: यह इस संदर्भ में रासायनिक तत्वों के वर्गीकरण से संबंधित कोई प्रामाणिक शब्द नहीं है।
- विकल्प (D) ज़ियोन: यह विकल्प इस प्रश्न के संदर्भ में अमान्य है (संभवतः यह जीन या अन्य किसी शब्द से भ्रमित करने के लिए दिया गया है)।
#97. लैसेन परीक्षण में, आयरन (II) सल्फेट विलयन की उपस्थिति में विलयन के भाग को ऊष्मा देने पर प्रशियन नीले के अवक्षेप के निर्माण से कौन-सा तत्व प्रकट होता है?(RRB NTPC UG CBT-I : 20 Aug, 2025 Shift 3)
- लैसेन परीक्षण (Lassaigne’s Test): इस परीक्षण का उपयोग कार्बनिक यौगिकों में उपस्थित तत्वों (जैसे नाइट्रोजन, सल्फर और हैलोजन) की पहचान करने के लिए किया जाता है। जब किसी कार्बनिक यौगिक में **नाइट्रोजन** उपस्थित होती है और उसके सोडियम निष्कर्ष (Sodium extract) में आयरन (II) सल्फेट मिलाया जाता है, तो प्रतिक्रिया के फलस्वरूप फेरोसाइनाइड बनता है जो ताज़ा तैयार फेरिक आयनों के साथ मिलकर **प्रशियन नीला (Prussian blue)** रंग या अवक्षेप बनाता है।
- मुख्य बिंदु: यह परीक्षण कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन की उपस्थिति का एक निश्चित और पुष्ट परीक्षण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 20 Aug, 2025 Shift 3) में रसायन विज्ञान (कार्बनिक यौगिकों का गुणात्मक विश्लेषण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऑक्सीजन: ऑक्सीजन की उपस्थिति की जाँच के लिए लैसेन परीक्षण में आयरन सल्फेट का उपयोग नहीं किया जाता है।
- विकल्प (B) कार्बन: कार्बन सभी कार्बनिक यौगिकों का मुख्य घटक है, और इसके परीक्षण के लिए अलग विधियाँ (जैसे कॉपर ऑक्साइड परीक्षण) होती हैं।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन: हाइड्रोजन की पहचान आमतौर पर पानी के निर्माण या अन्य दहन परीक्षणों द्वारा की जाती है, प्रशियन नीला अवक्षेप इससे संबंधित नहीं है।
#98. किस पदार्थ का आणविक द्रव्यमान 44 u है?
(RRB JE 19/02/2026 )
- आणविक द्रव्यमान की गणना (Molecular Mass Calculation):
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का सूत्र होता है। इसमें 1 कार्बन परमाणु और 2 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
- कार्बन (C) का परमाणु द्रव्यमान = 12 u
- ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान = 16 u (चूंकि दो परमाणु हैं, इसलिए 16 × 2 = 32 u)
- कुल आणविक द्रव्यमान = 12 + 32 = 44 u
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 19/02/2026) में रसायन विज्ञान (मोल संकल्पना और आणविक द्रव्यमान) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): इसका आणविक द्रव्यमान 12 (C) + 16 (O) = 28 u होता है।
- विकल्प (C) मेथेन (CH4): इसका आणविक द्रव्यमान 12 (C) + 4 (H) = 16 u होता है।
- विकल्प (D) अमोनिया (NH3): इसका आणविक द्रव्यमान 14 (N) + 3 (H) = 17 u होता है।
#99. ठोसों को कठोर प्रकृति के रूप में क्यों वर्णित किया जाता है?
(RRB JE 20/02/2026)
- ठोसों की कठोरता (Rigidity of Solids): ठोस पदार्थों के कणों के बीच अंतराणुक आकर्षण बल (Intermolecular force of attraction) बहुत अधिक मजबूत होता है। इसके कारण इनके कण अपनी निश्चित स्थिति पर स्थिर रहते हैं और स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर पाते, जिससे ठोस अपनी आकृति बनाए रखते हैं और **कठोर (Rigid)** प्रकृति के होते हैं।
- मुख्य बिंदु: बाहरी बल लगाने पर भी ठोसों का आकार आसानी से नहीं बदलता (ये असम्पीड्य / Incompressible होते हैं)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) बाहरी बल आरोपित होने पर इनके कण आसानी से फिसल जाते हैं: यह विशेषता द्रवों और गैसों (तरल पदार्थों) की है, जिसके कारण वे बह सकते हैं (द्रव्यता/Fluidity), ठोसों की नहीं।
- विकल्प (B) इनके कणों का द्रव्यमान और आयतन बहुत कम होता है: यह कथन वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है और कठोरता से इसका सीधा संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) इनके कण दुर्बल पारस्परिक आकर्षण के साथ स्वतंत्र रूप से गति करते रहते हैं: यह गुण गैसों (Gases) से संबंधित है।
#100. निम्नलिखित में से कौन-सा एक तत्व है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )
- तत्व (Element): तत्व पदार्थ का वह शुद्ध रूप है जो केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है और जिसे रासायनिक या भौतिक विधियों द्वारा अन्य सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता। **ऑक्सीजन (O2)** एक रासायनिक तत्व है।
- मुख्य बिंदु: प्रकृति में तत्व ठोस (जैसे लोहा, सोना), द्रव (जैसे ब्रोमीन) या गैस (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन) अवस्था में पाए जा सकते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 30/12/2025) में रसायन विज्ञान (पदार्थ के वर्गीकरण – तत्व, यौगिक और मिश्रण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सोडियम क्लोराइड (NaCl): यह सोडियम और क्लोरीन का एक रासायनिक **यौगिक** (Compound) है।
- विकल्प (C) वायु (Air): वायु विभिन्न गैसों (जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, ऑर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड) का एक **मिश्रण** (Mixture) है।
- विकल्प (D) जल (H2O): जल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का एक निश्चित अनुपात में बना **यौगिक** है।
#101. सात्विक आहार में विशेष रूप से किस प्रकार के अन्न को शामिल किया जाता है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 17/03/2026 )
- सात्विक आहार (Satvic Diet): आयुर्वेद और योग परंपरा के अनुसार सात्विक आहार वह भोजन है जो शरीर को ऊर्जा, शुद्धता, शांति और हल्कापन प्रदान करता है। इसमें प्राकृतिक, ताजे, और न्यूनतम प्रसंस्कृत (minimally processed) अनाजों को प्राथमिकता दी जाती है, जैसे **लाल चावल, बिना पॉलिश किए हुए चावल, और साबुत अनाज (Whole grains)**, जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
- मुख्य बिंदु: सात्विक भोजन में तामसिक और राजसिक खाद्य पदार्थों (जैसे अत्यधिक मसालेदार, प्रसंस्कृत, या बासी भोजन) से बचा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate CBT-1 : 17/03/2026) में सामान्य विज्ञान / स्वास्थ्य एवं पोषण (Traditional Diet & Health) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) पॉलिश किए हुए सफेद चावल: पॉलिशिंग प्रक्रिया के दौरान चावल के कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व और फाइबर नष्ट हो जाते हैं, इसलिए इन्हें सात्विक आहार में विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाती।
- विकल्प (B) अत्यधिक परिष्कृत आटा: अत्यधिक परिष्कृत (Refined) चीजें और मैदा स्वास्थ्य की दृष्टि से सात्विक श्रेणी में नहीं आते।
- विकल्प (C) शर्करा युक्त ब्रेकफास्ट सीरियल: कृत्रिम रूप से शर्करा युक्त और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ सात्विक आहार के सिद्धांतों के विपरीत होते हैं।
#102. निम्नलिखित में से कौन सा दो प्राथमिक रंगों के संयोजन से निर्मित रंग नहीं है?
(RRB NTPC CBT-I : 30 Jan 2021 Shift 1)
- प्राथमिक रंग (Primary Colors): प्रकाश के प्राथमिक रंग **लाल (Red), हरा (Green) और नीला (Blue)** हैं। **नीला** स्वयं एक प्राथमिक रंग है, इसलिए यह अन्य दो प्राथमिक रंगों के मिलने से नहीं बनता, बल्कि यह मूल रंगों में से एक है।
- मुख्य बिंदु:
- लाल + हरा = नारंगी/पीला (द्वितीयक रंग)
- लाल + नीला = बैंगनी / मैजेंटा (द्वितीयक रंग)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 30 Jan 2021 Shift 1) में भौतिक विज्ञान (प्रकाशिकी – प्रकाश के रंग) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) बैंगनी: यह लाल और नीले (प्राथमिक रंगों) के संयोजन से बनता है।
- विकल्प (B) हरा: यह स्वयं प्रकाश का एक प्राथमिक रंग है। (हालांकि पेंट या पिगमेंट के संदर्भ में यह पीला और नीला मिलाकर बनता है, लेकिन भौतिकी में यह प्राथमिक रंग है)।
- विकल्प (C) नारंगी: यह लाल और पीले या अन्य प्राथमिक/द्वितीयक रंगों के मिश्रण से बनता है।
#103. निम्नलिखित में से कौन-सा, कणों के मध्य प्रबलतम आकर्षण बल दर्शाता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025)
- कणों के मध्य आकर्षण बल (Intermolecular Force): पदार्थ की तीनों अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) में **ठोस पदार्थों** (जैसे लोहे की छड़) के कणों के बीच सबसे प्रबल अंतराणुक आकर्षण बल होता है। इसके कारण इसके कण अपनी जगह पर दृढ़ता से बंधे रहते हैं और यह अत्यधिक कठोर व निश्चित आकार वाला होता है।
- मुख्य बिंदु: द्रवों (जैसे जल और ऐल्कोहॉल) में आकर्षण बल ठोसों से कम और गैसों से अधिक होता है, जबकि गैसों (जैसे ऑक्सीजन) में यह बल सबसे कमजोर होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09/12/2025) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऐल्कोहॉल: यह एक द्रव (Liquid) है, जिसके कणों के बीच आकर्षण बल ठोस की तुलना में कम होता है।
- विकल्प (B) जल: जल भी एक द्रव है, जिसमें बहने का गुण होता है क्योंकि इसके कणों के बीच आकर्षण बल ठोस जितना मजबूत नहीं होता।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन गैस: यह एक गैस है, जिसके कणों के बीच अंतराणुक आकर्षण बल नगण्य या बहुत दुर्बल होता है और वे स्वतंत्र रूप से गति करते हैं।
#104. तापमान बढ़ाने पर किस पदार्थ की अवस्था में सबसे अधिक प्रसार होता है?
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2)
- ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion): जब किसी पदार्थ का तापमान बढ़ाया जाता है, तो उसके कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। **गैसों** में कणों के बीच अंतराणुक आकर्षण बल नगण्य और खाली स्थान बहुत अधिक होता है, जिसके कारण तापमान बढ़ाने पर गैसों में प्रसार (आयतन में वृद्धि) सबसे अधिक होता है।
- मुख्य बिंदु: पदार्थों में प्रसार का क्रम सामान्यतः इस प्रकार होता है: गैस > द्रव > ठोस।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ECE : 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2) में भौतिक विज्ञान (ऊष्मा और पदार्थ के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस: ठोसों के कण बहुत कसकर बंधे होते हैं, इसलिए तापमान बढ़ाने पर इनमें प्रसार बहुत कम होता है।
- विकल्प (C) द्रव: द्रवों में प्रसार ठोसों से अधिक होता है, लेकिन गैसों की तुलना में काफी कम होता है।
- विकल्प (D) प्लाज्मा: प्लाज्मा आयनित गैस की अवस्था है, लेकिन मानक भौतिकी में सामान्य तापमान वृद्धि पर सबसे अधिक आयतन प्रसार गैसों में देखा जाता है।
#105. जब धातु अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है तो प्रायः कौन सी गैस उत्पन्न होती है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction): जब कोई सक्रिय धातु (जैसे जिंक, आयरन, मैग्नीशियम आदि) किसी तनु अम्ल (जैसे तनु HCl या H2SO4) के साथ अभिक्रिया करती है, तो वह संगत लवण का निर्माण करती है और प्रायः **हाइड्रोजन गैस (H2)** विस्थापित करती है। इस गैस की उपस्थिति की जाँच के लिए इसके पास जलती हुई तीली ले जाने पर यह ‘पॉप’ (pop) की ध्वनि के साथ जलती है।
- मुख्य बिंदु:
- धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
- उदाहरण: Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2 ↑
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 25 May 2019 Shift 1 CBT 1) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षार और लवण तथा धातुओं के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कार्बन डाइऑक्साइड: यह गैस तब उत्पन्न होती है जब धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट किसी अम्ल के साथ अभिक्रिया करते हैं, सामान्य धातुओं और अम्लों की सीधी अभिक्रिया से नहीं।
- विकल्प (B) ऑक्सीजन: धातुओं की सामान्य अम्लों के साथ अभिक्रिया में ऑक्सीजन गैस विस्थापित नहीं होती है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन: नाइट्रोजन गैस इस प्रकार की सामान्य अम्ल-धातु अभिक्रियाओं के दौरान नहीं निकलती है।
#106. गैस कणों की निरंतर गति के कारण निम्नलिखित में से क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- विसरण (Diffusion): गैसों के कणों में बहुत अधिक गतिज ऊर्जा होती है और वे निरंतर यादृच्छिक रूप से गतिमान रहते हैं। जब अलग-अलग गैसों या पदार्थों के कण आपस में अपनी निरंतर गति के कारण स्वतः मिल जाते हैं, तो इस प्रक्रिया को **विसरण** कहा जाता है (जैसे कमरे में अगरबत्ती या इत्र की खुशबू का फैलना)।
- मुख्य बिंदु: तापमान बढ़ने पर कणों की गति और तेज हो जाती है, जिससे विसरण की दर भी बढ़ जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 24/12/2025) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की गतिशीलता और कणों के गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) गलन (Melting): यह ठोस से द्रव में बदलने की प्रक्रिया है, जो ऊष्मा देने पर होती है।
- विकल्प (C) वाष्पीकरण (Evaporation): यह द्रव सतह से वाष्प बनने की परिघटना है।
- विकल्प (D) संघनन (Condensation): यह गैस या वाष्प के ठंडा होकर द्रव में बदलने की प्रक्रिया है।
#107. एक कणपुंज ( micelle) के जलविरागी छोर कहाँ निर्देशित होते हैं?
(RRB JE 20/02/2026 )
- कणपुंज या मिसेल (Micelle): साबुन या डिटर्जेंट के अणु ऐसे विशेष यौगिक होते हैं जिनके दो भाग होते हैं:
- जलरागी सिरा (Hydrophilic end): जो जल से स्नेह रखता है (आयनी सिरा, बाहर की ओर)।
- जलविरागी सिरा (Hydrophobic end): जो जल से दूर भागता है (हाइड्रोकार्बन श्रृंखला, अंदर की ओर)।
जब साबुन को पानी में घोला जाता है, तो इसके **जलविरागी छोर जल से दूर केंद्र की ओर** (अंदर की तरफ) निर्देशित होते हैं और तेल या मैल को अपने अंदर समेट लेते हैं, जबकि जलरागी छोर बाहर पानी की ओर रहते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में रसायन विज्ञान (कार्बनिक रसायन – साबुन और अपमार्जक / मिसेल निर्माण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सीधे जल अणुओं की ओर: जल अणुओं की ओर जलरागी (Hydrophilic) छोर निर्देशित होते हैं, जलविरागी नहीं।
- विकल्प (B) यादृच्छिक रूप से सभी संभावित दिशाओं में: मिसेल बनने पर अणु एक निश्चित व्यवस्थित गोलाकार संरचना लेते हैं, यादृच्छिक नहीं।
- विकल्प (C) बाहर की ओर हाइड्रोजन आबन्ध बनाते हुए: यह गुण बाहर की ओर मौजूद आयनिक जलरागी सिरों का होता है।
#108. 250° C पर जल की भौतिक स्थिति क्या होती है?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- जल की भौतिक अवस्था (Physical State of Water): सामान्य वायुमंडलीय दाब पर जल का क्वथनांक (Boiling Point) 100°C (373 K) होता है। चूँकि 250°C का तापमान 100°C से काफी अधिक है, इसलिए इस तापमान पर जल पूरी तरह से उबलकर गैसीय अवस्था यानी **वाष्प (Gas)** में परिवर्तित हो चुका होता है।
- मुख्य बिंदु:
- 0°C से कम तापमान पर: ठोस (बर्फ)
- 0°C से 100°C के बीच: द्रव (पानी)
- 100°C से अधिक तापमान पर: गैस (जलवाष्प)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 24 May 2019 Shift 1 CBT 1) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं और तापमान का प्रभाव) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस: यह स्थिति 0°C या उससे कम तापमान पर होती है (जैसे बर्फ)।
- विकल्प (B) द्रव: यह स्थिति 0°C और 100°C के बीच के तापमान पर होती है।
- विकल्प (C) प्लाज्मा: यह अत्यधिक उच्च तापमान (हजारों डिग्री सेल्सियस) पर आयनित गैस की अवस्था है, 250°C सामान्य तापमान पर जल गैस रूप में रहता है।
#109. निम्नलिखित में से कौन-सी घटना, भौतिक परिवर्तन नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change): **मोमबत्ती का जलना** एक रासायनिक परिवर्तन है, क्योंकि इसमें मोम जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न होती है तथा एक नया पदार्थ बनता है जिसे पुनः वापस मूल मोम में नहीं बदला जा सकता।
- मुख्य बिंदु: भौतिक परिवर्तन (Physical Change) में कोई नया पदार्थ नहीं बनता और यह उत्क्रमणीय (reversible) होते हैं (जैसे पानी का भाप बनना, बर्फ का पिघلنا आदि), जबकि रासायनिक परिवर्तन अनुत्क्रमणीय और स्थायी होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/12/2025) में रसायन विज्ञान (भौतिक और रासायनिक परिवर्तन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल का क्वथन: यह एक भौतिक परिवर्तन है जिसमें जल द्रव से वाष्प में बदलता है, रासायनिक संघटन वही रहता है।
- विकल्प (B) बर्फ का पिघलना: यह भी एक भौतिक परिवर्तन है जिसमें ठोस बर्फ द्रव जल में परिवर्तित होती है।
- विकल्प (D) जल का जमना: यह भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है जिसमें पानी बर्फ बनता है।
#110. जब कॉपर ऑक्साइड को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में मिलाया जाता है, तो नीला-हरा विलयन बनता है, उस समय कॉपर ऑक्साइड का रंग कैसा होता है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )
- रासायनिक अभिक्रिया और रंग परिवर्तन: जब कॉपर ऑक्साइड (CuO) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के साथ मिलाया जाता है, तो कॉपर सल्फेट (CuSO4) बनता है। कॉपर सल्फेट के निर्माण के कारण ही विलयन का रंग नीला-हरा (Blue-green) हो जाता है, जबकि अभिक्रिया में प्रयुक्त होने वाला **कॉपर ऑक्साइड पाउडर काले रंग का होता है**।
- मुख्य समीकरण:
CuO (काला) + H2SO4 (तनु) → CuSO4 (नीला-हरा विलयन) + H2O
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 29/12/2025) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षार और लवण तथा उनकी धातुओं के ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सफेद: कॉपर ऑक्साइड का रंग सफेद नहीं होता है।
- विकल्प (B) धूसर (Grey): यह कॉपर ऑक्साइड का वास्तविक वर्ण नहीं है।
- विकल्प (D) हरा: विलयन बनने के बाद उसका रंग नीला-हरा होता है, लेकिन शुरुआती कॉपर ऑक्साइड स्वयं काले रंग का होता है।
#111. एक ______ दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है।
(RRB NTPC CBT-I : 10 Jan 2021 Shift 2)
- विलयन (Solution): विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का एक **समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture)** होता है। इसका मतलब यह है कि इसमें घटक कण पूरे मिश्रण में समान रूप से वितरित रहते हैं (जैसे पानी में चीनी या नमक का घुलना)।
- मुख्य बिंदु: विलयन के कण बहुत सूक्ष्म (1 नैनोमीटर से छोटे) होते हैं, इसलिए वे प्रकाश की किरण को फैलाते नहीं हैं और न ही छनकर अलग होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 10 Jan 2021 Shift 2) में रसायन विज्ञान (विलयन और मिश्रण के प्रकार) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) अवयव (Component): यह मिश्रण या यौगिक को बनाने वाले अलग-अलग पदार्थ या हिस्से होते हैं।
- विकल्प (C) अणु (Molecule): यह किसी पदार्थ का वह सूक्ष्मतम कण है जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है, दो या अधिक पदार्थों का मिश्रण नहीं।
- विकल्प (D) कण (Particle): यह पदार्थ की एक सामान्य इकाई है, न कि समांगी मिश्रण।
#112. ध्वनि के संचरण के लिए आवश्यक माध्यम ______ अवस्था में होना चाहिए।
(RRB JE CBT I -: 2 June 2019 Shift 3)
- ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound): ध्वनि एक यांत्रिक तरंग (Mechanical wave) है, जिसके गमन या संचरण के लिए किसी न किसी **भौतिक माध्यम** (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। यह माध्यम किसी भी अवस्था में हो सकता है। ध्वनि निर्वात (Vacuum) में गमन नहीं कर सकती।
- मुख्य बिंदु: ध्वनि की चाल सबसे अधिक **ठोसों** में, उससे कम **द्रवों** में और सबसे कम **गैसों** में होती है, लेकिन संचरण यह तीनों माध्यमों में कर सकती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 2 June 2019 Shift 3) में भौतिक विज्ञान (ध्वनि तरंगें और उनके संचरण के माध्यम) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B), (C) और (D) (द्रव, गैस, ठोस): ये तीनों ही माध्यम ध्वनि के संचरण के लिए सक्षम हैं, इसलिए केवल एक को चुनना अधूरा होगा क्योंकि ‘इनमें से सभी’ विकल्प सही है।
#113. यदि किसी वस्तु को तारों के रूप में डाला जा सकता है, तो उसे क्या कहा जाएगा?
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 2)
- तन्यता (Ductility): धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें खींचकर पतले तारों के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है, **तन्यता** कहलाता है और ऐसे पदार्थों को **तन्य (Ductile)** कहा जाता है। सोना (Gold) और चांदी (Silver) सबसे अधिक तन्य धातुएं होती हैं। उदाहरण के लिए, 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबी तार खींची जा सकती है।
- मुख्य बिंदु: यह धातुओं (Metals) का एक प्रमुख भौतिक गुण है, जबकि अधिकांश अधातुएं तन्य नहीं होतीं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 20 Jan 2019 Shift 2) में रसायन विज्ञान / भौतिक विज्ञान (धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) भंगुर (Brittle): यह उन पदार्थों का गुण है जो हथौड़े से पीटने पर या बल लगाने पर सीधे छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं (जैसे सल्फर या कोयला), इनसे तार नहीं बनाए जा सकते।
- विकल्प (C) नाजुक (Fragile): यह आसानी से टूटने वाले या कमजोर पदार्थों की विशेषता है, तार खींचने के गुण से इसका संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) लचीला (Flexible): लचीलापन वह गुण है जिससे कोई वस्तु मुड़ सकती है बिना टूटे, लेकिन इसे सीधे तौर पर तारों के रूप में खींचने की क्षमता (तन्यता) नहीं कहा जाता।
#114. अचानक शारीरिक गतिविधि के दौरान हमारी पेशियों में किस पदार्थ के जमा होने से ऐंठन होती है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 3)
- पेशियों में ऐंठन (Muscle Cramps): जब हम अचानक या अत्यधिक तीव्र शारीरिक गतिविधि (जैसे दौड़ना या कसरत) करते हैं, तो हमारी पेशियों की कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। इस स्थिति में पेशियाँ अवायवीय श्वसन (Anaerobic respiration) करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप ग्लूकोज विखंडित होकर **लैैक्टिक अम्ल** में बदल जाता है। इस लैैक्टिक अम्ल के मांसपेशियों में जमा होने के कारण ऐंठन (cramps) या दर्द होता है।
- मुख्य बिंदु: कुछ समय तक आराम करने या मालिश करने से रक्त संचार सुधरता है और लैैक्टिक अम्ल का विघटन हो जाता है, जिससे ऐंठन ठीक हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 3) में जीव विज्ञान / मानव शरीर क्रिया विज्ञान (श्वसन तंत्र और पेशीय प्रणाली) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सुक्रोज: यह एक प्रकार की शर्करा (कार्बोहाइड्रेट) है, जिसका सीधा संबंध मांसपेशियों की ऐंठन से नहीं है।
- विकल्प (C) ग्लूकोज: यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाला सरल कार्बोहाइड्रेट है, जो श्वसन के लिए ईंधन का काम करता है।
- विकल्प (D) पाइरूविक अम्ल: यह ग्लाइकोलिसिस प्रक्रिया का एक मध्यवर्ती उत्पाद है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी होने पर यह मांसपेशियों में अंततः लैैक्टिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है।
#115. निम्नलिखित में से कौन-सी द्रव्याँए अत्यधिक संपीड़्य हैं?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 2)
- संपीड्यता (Compressibility): संपीड्यता किसी पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण बाहरी दाब (Pressure) लगाने पर उसका आयतन कम किया जा सकता है। **गैसों** में कणों के बीच बहुत अधिक रिक्त स्थान होता है और अंतराणुक आकर्षण बल नगण्य होता है, इसलिए गैसीय अवस्था **अत्यधिक संपीड़्य (Highly compressible)** होती है (उदाहरण के लिए—CNG और LPG गैसों को उच्च दाब पर सिलेंडरों में संपीड़ित करके भरा जाता है)।
- मुख्य बिंदु: इसके विपरीत, ठोस और द्रव बहुत कम संपीड़्य (लगभग असम्पीड्य) होते हैं क्योंकि उनके कणों के बीच की दूरी बहुत कम होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 2) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ठोस अवस्था और द्रव अवस्था दोनों: ठोस और द्रव दोनों ही अत्यधिक संपीड़्य नहीं होते हैं।
- विकल्प (B) ठोस अवस्था: ठोसों के कण अत्यधिक निकट और दृढ़ होते हैं, इसलिए वे संपीड़ित नहीं किए जा सकते।
- विकल्प (D) द्रव अवस्था: द्रवों में संपीड्यता बहुत कम होती है, वे लगभग असम्पीड्य होते हैं।
#116. रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा सरल पदार्थों में विघटित नहीं होने वाला पदार्थ क्या कहलाता है?
(RRB JE CBT I -: 2 June 2019 Shift 1)
- तत्व की परिभाषा (Definition of Element): रसायन शास्त्र के अनुसार **तत्व** पदार्थ का वह मूल और शुद्ध रूप होता है जिसे रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा या ऊर्जा (ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत) देकर किसी भी अन्य सरल पदार्थों में विघटित या विभाजित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बनता है (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, लोहा आदि)।
- मुख्य बिंदु: इसके विपरीत, यौगिकों को रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा उनके घटक तत्वों में तोड़ा जा सकता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 2 June 2019 Shift 1) में रसायन विज्ञान (पदार्थ का वर्गीकरण – तत्व, यौगिक और मिश्रण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) यौगिक (Compound): यह दो या दो से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बनता है, और इसे रासायनिक विधियों द्वारा सरल पदार्थों (तत्वों) में विघटित किया जा सकता है।
- विकल्प (C) मिश्रण (Mixture): मिश्रण को भौतिक विधियों द्वारा उसके घटकों में अलग किया जा सकता है।
- विकल्प (D) शुद्ध पदार्थ: इसके अंतर्गत तत्व और यौगिक दोनों आते हैं, लेकिन जो पदार्थ रासायनिक अभिक्रियाओं से और सरल रूपों में न टूटे, उसके लिए सबसे सटीक शब्द ‘तत्व’ है।
#117. एक पदार्थ X लाल लिटमस को नीला कर देता है, और यह नारंगी मिथाइल को ______ रंग में बदल देगा।
(RRB JE 24 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- सूचकों के गुण (Properties of Indicators):
- चूँकि पदार्थ ‘X’ लाल लिटमस को नीला कर देता है, इससे स्पष्ट होता है कि यह प्रकृति में **क्षार (Base)** है।
- मिथाइल ऑरेंज (Methyl Orange): यह एक अम्लीय-क्षारीय सूचक है। अम्लीय माध्यम में यह लाल रंग देता है, जबकि **क्षारीय माध्यम** में इसका रंग बदलकर **पीला (Yellow)** हो जाता है।
- मुख्य बिंदु: क्षार लाल लिटमस को नीला करते हैं और फेनोलफथैलीन सूचक को गुलाबी बनाते हैं, जबकि मिथाइल ऑरेंज को पीले रंग में बदलते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 24 May 2019 Shift 1 CBT 1) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षार और लवण – सूचकों के रंग परिवर्तन) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) रंगहीन: यह फेनोलफथैलीन सूचक का अम्लीय माध्यम में रंग होता है, मिथाइल ऑरेंज का नहीं।
- विकल्प (C) लाल: मिथाइल ऑरेंज अम्लीय माध्यम में लाल रंग देता है, क्षारीय माध्यम में नहीं।
- विकल्प (D) गुलाबी: यह फेनोलफथैलीन के क्षारीय माध्यम में होने वाला रंग परिवर्तन है।
#118. जिप्सम का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RRB JE CBT I -: 1 June 2019 Shift 1)
- जिप्सम (Gypsum): जिप्सम का रासायनिक नाम **कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट** है और इसका रासायनिक सूत्र **CaSO4.2H2O** होता है। इसमें कैल्शियम सल्फेट के एक सूत्र इकाई के साथ जल के 2 क्रिस्टलन के अणु जुड़े होते हैं।
- महत्वपूर्ण उपयोग: जिप्सम को लगभग 373 K पर गर्म करने पर यह अपने क्रिस्टलन जल के अणुओं का त्याग कर देता है और **प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris – CaSO4.1/2H2O)** बनाता है। इसका उपयोग सीमेंट उद्योग, उर्वरक और प्लास्टर बनाने में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 1 June 2019 Shift 1) में रसायन विज्ञान (महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिक और उनके सूत्र) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) CaSO4.3H2O: यह जिप्सम का सही रासायनिक सूत्र नहीं है (जल के 3 अणु नहीं होते)।
- विकल्प (B) Na2CO3.8H2O: यह सोडियम कार्बोनेट का अष्टहाइड्रेट रूप है, जिप्सम नहीं।
- विकल्प (C) Na2CO3.10H2O: यह **धावन सोडा (Washing Soda)** का रासायनिक सूत्र है, जिसे सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट कहते हैं।
#119. स्कूल कैम्पस की सफाई करते समय, विद्यार्थियों को जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट को पृथक करने के लिए कहा जाता है। निम्नलिखित में से किसे जैव-निम्नीकरणीय बिन में डाला जाना चाहिए?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )
- जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट (Biodegradable Waste): वे अपशिष्ट पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया और कवक) द्वारा प्राकृतिक रूप से सरल और हानिरहित पदार्थों में सरलता से विघटित (decompose) हो जाते हैं, **जैव-निम्नीकरणीय** कहलाते हैं। **लकड़ी की पेंसिल की छलन (Wood shavings)** जैविक पदार्थ (सेल्युलोज) से बनी होने के कारण इसी श्रेणी में आती है।
- मुख्य बिंदु: इसके विपरीत, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी वस्तुएँ अजैव-निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) होती हैं क्योंकि वे लंबे समय तक पर्यावरण में बनी रहती हैं और आसानी से नष्ट नहीं होतीं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08/12/2025) में पर्यावरण अध्ययन / सामान्य विज्ञान (अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) पॉलीथीन बैग: पॉलीथीन एक सिंथेटिक प्लास्टिक है जो अजैव-निम्नीकरणीय है और यह पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बनी रहती है।
- विकल्प (C) एक क्रश किया हुआ कोल्ड ड्रिंक कैन: यह एल्युमिनियम या धातु का बना होता है, जो जैव-निम्नीकरणीय नहीं है (इसे रिसाइकिल किया जा सकता है)।
- विकल्प (D) कांच की बोतल: कांच प्राकृतिक रूप से सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित नहीं होता, अतः यह भी अजैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट है।
#120. निम्नलिखित में से किस अवस्था में अति ऊर्जावान और अति उत्तेजित कण मौजूद होते हैं?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- प्लाज्मा अवस्था (Plasma State): पदार्थ की चौथी अवस्था **प्लाज्मा** में कण अत्यधिक ऊर्जावान (energetic) और अत्यधिक उत्तेजित (excited) होते हैं। यह अवस्था उच्च तापमान पर आयनित गैस के रूप में पाई जाती है, जिसमें गैस के परमाणु अपने इलेक्ट्रॉनों को खो देते हैं (जैसे सूर्य और तारों के अंदर चमकता हुआ पदार्थ, तथा नियॉन साइन बल्ब)।
- मुख्य बिंदु: ब्रह्मांड में अधिकांश पदार्थ प्लाज्मा अवस्था में ही मौजूद हैं क्योंकि तारे अत्यधिक उच्च तापमान पर प्लाज्मा से बने होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 29 May 2019 Shift 3 CBT 1) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की विभिन्न अवस्थाओं) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) द्रव: द्रवों में कणों की ऊर्जा ठोसों से अधिक होती है, लेकिन प्लाज्मा जितनी अत्यधिक ऊर्जा और उत्तेजना नहीं होती।
- विकल्प (B) गैस: गैसों में कण स्वतंत्र रूप से गति करते हैं, किंतु प्लाज्मा की तरह वे उच्च आयनित, अति ऊर्जावान और उत्तेजित अवस्था में नहीं होते।
- विकल्प (D) ठोस: ठोसों के कण बहुत कम ऊर्जा वाले और अपनी निश्चित स्थिति पर स्थिर होते हैं।
#121. एक मिश्रधातु को समांगी मिश्रण माना जाता है क्योंकि:
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)
- मिश्रधातु (Alloy): मिश्रधातु (जैसे पीतल, कांसा, स्टेनलेस स्टील) दो या दो से अधिक धातुओं या एक धातु और एक अधातु का **समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture)** होती है। इसे समांगी इसलिए माना जाता है क्योंकि इसके घटक पदार्थ पूरे मिश्रण में एक समान रूप से वितरित रहते हैं और इसकी संरचना (Composition) हर जगह एक जैसी होती है।
- मुख्य बिंदु: हालांकि मिश्रधातु धातुओं का मिश्रण है, फिर भी इसे भौतिक विधि से अलग नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके गुण इसके मूल घटकों से मिलते-जुलते रहते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ECE : 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2) में रसायन विज्ञान (मिश्रण और मिश्रधातु के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) इसमें दो या दो से अधिक प्रावस्थाएँ होती हैं: समांगी मिश्रण में केवल एक ही प्रावस्था (Phase) होती है, दो या अधिक नहीं।
- विकल्प (C) इसके घटकों को निस्यंदन द्वारा अलग किया जा सकता है: समांगी मिश्रण के घटकों को छानने (निस्यंदन) की सामान्य विधि से अलग नहीं किया जा सकता।
- विकल्प (D) इसके घटक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयुक्त होते हैं: यह विशेषता यौगिकों (Compounds) की होती है, मिश्रण या मिश्रधातुओं की नहीं, क्योंकि मिश्रण में घटक किसी निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से नहीं बंधे होते।
#122. स्थिर अनुपात के नियम के अनुसार, जिस यौगिक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन 1:8 के निश्चित द्रव्यमान अनुपात में विद्यमान होते हैं, वह क्या कहलाता है?
(RRB JE 20/02/2026 )
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions): इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित (अपरिवर्तनीय) अनुपात में मौजूद होते हैं। **जल (H2O)** में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा 1:8 होता है (चूँकि हाइड्रोजन का द्रव्यमान 2 और ऑक्सीजन का 16 होता है, यानी 2:16 = 1:8)।
- मुख्य बिंदु: जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) द्वारा प्रतिपादित यह नियम बताता है कि स्रोत चाहे कोई भी हो (जैसे कुएं का पानी, नदी का पानी या वर्षा का जल), जल में तत्वों का द्रव्यमान अनुपात हमेशा समान रहता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में रसायन विज्ञान (रासायनिक संयोजन के नियम और यौगिकों की संरचना) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) मेथेन (CH4): इसमें कार्बन और हाइड्रोजन का द्रव्यमान अनुपात 3:1 होता है, 1:8 नहीं।
- विकल्प (B) अमोनिया (NH3): इसमें नाइट्रोजन और हाइड्रोजन का द्रव्यमान अनुपात 14:3 होता है।
- विकल्प (D) हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2): इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात 2:32 यानी 1:16 होता है, न कि 1:8।
#123. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करने पर निम्नलिखित में से कोन- सी गैस निकलती है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction): जब कोई तनु अम्ल (जैसे तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, HCl) किसी धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट (जैसे सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट, NaHCO3) के साथ अभिक्रिया करता है, तो संगत लवण, जल और **कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO2)** उत्पन्न होती है। इस गैस को जब ताजे बने चूने के पानी (Calcium hydroxide) में प्रवाहित किया जाता है, तो चूने का पानी दूधिया हो जाता है।
- मुख्य समीकरण:
NaHCO3 + HCl → NaCl + H2O + CO2 ↑
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/12/2025) में रसायन विज्ञान (अम्ल, क्षार और लवण तथा उनकी रासायनिक गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) नाइट्रोजन: यह गैस अम्ल और हाइड्रोजनकार्बोनेट की अभिक्रिया के दौरान नहीं निकलती है।
- विकल्प (B) ऑक्सीजन: इस प्रकार की सामान्य अम्ल-क्षार या कार्बोनेट अभिक्रियाओं में ऑक्सीजन गैस मुक्त नहीं होती।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन: हाइड्रोजन गैस तब निकलती है जब कोई सक्रिय धातु किसी तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया करती है, न कि धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट।
#124. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प ठोसों के गुण को नहीं दर्शाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 1)
- ठोसों के प्रमुख गुण (Properties of Solids): ठोस पदार्थों का एक निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएँ और निश्चित आयतन होता है। इनके कणों के बीच अंतराणुक बल बहुत मजबूत होते हैं, जिसके कारण **इनका आकार बदलना कठिन होता है** (सरल नहीं)। अत: विकल्प (A) ठोसों के गुण को नहीं दर्शाता है और यही सही उत्तर है।
- मुख्य बिंदु: ठोस अत्यधिक कठोर (rigid) और लगभग असम्पीड्य होते हैं। बाहरी बल लगाने पर भी वे अपने आकार को बनाए रखने का प्रयास करते हैं और बल अधिक होने पर वे टूट सकते हैं लेकिन आसानी से दबते या मुड़ते नहीं हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I : 29 Nov, 2024 Shift 1) में भौतिक विज्ञान / रसायन विज्ञान (पदार्थ की अवस्थाओं और उनके अभिलाक्षणिक गुण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) इनकी सीमाएँ स्पष्ट होती हैं और आयतन निश्चित होता है: यह ठोसों का एक सत्य गुण है।
- विकल्प (C) इनका एक निश्चित आकार होता है: यह भी ठोसों की एक मूलभूत विशेषता है।
- विकल्प (D) बाहरी बल के प्रभाव में आने पर भी वे अपना आकार बनाए रखने की प्रवृत्ति रखते हैं: यह ठोसों के दृढ़ता (Rigidity) के गुण को दर्शाता है।
#125. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इस अवधारणा का सबसे अच्छे से समर्थन करता है कि पदार्थ कणों से मिलकर बना होता है?
(RRB JE 20/02/2026 )
- पदार्थ के कणों की प्रकृति: यह अवधारणा कि “पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है”, विसरण (Diffusion) जैसी परिघटनाओं से सबसे अच्छे से समर्थित होती है। जब पानी में स्याही की एक बूंद डाली जाती है, तो स्याही के अतिसूक्ष्म कण जल के अणुओं के बीच के रिक्त स्थानों में स्वतः और समान रूप से फैल जाते हैं।
- मुख्य बिंदु: यह प्रयोग न केवल यह सिद्ध करता है कि पदार्थ कणों से बना है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ये कण निरंतर गतिशील होते हैं और उनके बीच अंतराणुक स्थान (intermolecular spaces) होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में रसायन विज्ञान / भौतिक विज्ञान (पदार्थ की प्रकृति और कणों के गुणधर्म) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) जल 100°C पर उबलता है: यह जल के क्वथनांक (Boiling Point) और तापमान के प्रभाव को दर्शाता है, जो अवस्था परिवर्तन से जुड़ा है।
- विकल्प (C) बर्फ पिघलकर जल बनाती है: यह पदार्थ की भौतिक अवस्था में परिवर्तन (ठोस से द्रव) को प्रदर्शित करता है।
- विकल्प (D) धातुएँ विद्युत की चालक हैं: यह धातुओं के उस भौतिक गुण को स्पष्ट करता है जो मुक्त इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है।
#126. माणिक रत्न की रासायनिक संरचना क्या है:
(RRB NTPC CBT-I : 27 Jan 2021 Shift 1)
- माणिक रत्न (Ruby): माणिक (Ruby) खनिज कोरंडम (Corundum) का एक रूप है, जिसकी रासायनिक संरचना **एल्यूमीनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$)** होती है। इसका लाल रंग इसमें मौजूद क्रोमियम ($\text{Cr}$) की थोड़ी मात्रा के कारण होता है।
- मुख्य बिंदु: यह प्राकृतिक रूप से मिलने वाले सबसे कठोर खनिजों में से एक है (मोह्स कठोरता पैमाने पर इसका मान 9 होता है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 27 Jan 2021 Shift 1) में रसायन विज्ञान / खनिज विज्ञान (महत्वपूर्ण खनिजों और रत्नों की रासायनिक संरचना) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कार्बन: कार्बन शुद्ध रूप में हीरा (Diamond) या ग्रेफाइट बनाता है, माणिक नहीं।
- विकल्प (B) पोटैशियम: यह एक सक्रिय क्षार धातु है, जो विभिन्न लवणों में पाई जाती है।
- विकल्प (D) सोडियम क्लोराइड: यह साधारण नमक ($\text{NaCl}$) का रासायनिक नाम है।
#127. निम्नलिखित में से कौन सा एक कोलाइड (एरोसोल) प्रकार है?
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 2)
- एरोसोल (Aerosol): एरोसोल एक ऐसा कोलाइड है जिसमें **परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) द्रव या ठोस** होती है और **परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium) गैस** होती है। उदाहरण के लिए—**कोहरा (Fog)**, बादल और धुआँ। कोहरे में पानी की सूक्ष्म बूंदें (द्रव) हवा (गैस) में फैली होती हैं।
- मुख्य बिंदु: कोलाइडल विलयन में कणों का आकार वास्तविक विलयन और निलंबन के बीच (1 से 100 नैनोमीटर के बीच) होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 20 Jan 2019 Shift 2) में रसायन विज्ञान (विलयन, निलंबन और कोलाइड के प्रकार) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) मक्खन: यह एक ‘जेल’ (Gel) का प्रकार है जिसमें ठोस में द्रव परिक्षिप्त होता है।
- विकल्प (B) मिट्टी: यह मुख्य रूप से एक निलंबन (Suspension) या जटिल मिश्रण के रूप में पाई जाती है।
- विकल्प (D) प्यूमिस (Pumice stone): यह ‘ठोस फोम’ (Solid foam) का उदाहरण है जिसमें ठोस में गैस परिक्षिप्त होती है।
#128. निम्नलिखित में से कौन-सी मक्खन की परिक्षिप्त प्रावस्था है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- कोलाइड और मक्खन (Butter as a Colloid): मक्खन एक प्रकार का ‘जेल’ (Gel) या कोलाइडी विलयन है। इसमें परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium) ठोस वसा होती है, जबकि **परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) द्रव** (पानी की सूक्ष्म बूंदें) होती है। इसका अर्थ है कि इसमें द्रव कण ठोस माध्यम में फैले होते हैं।
- मुख्य बिंदु: जैल (जैसे मक्खन, पनीर, जेली) में ठोस अवस्था माध्यम का काम करती है और द्रव अवस्था परिक्षिप्त प्रावस्था के रूप में मौजूद होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1) में रसायन विज्ञान (कोलाइडल विलयन और उनके प्रकार) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल गैस: गैस परिक्षिप्त प्रावस्था वाले कोलाइड को फोम (Foam) कहा जाता है (जैसे फेंटी हुई मलाई या शेविंग क्रीम)।
- विकल्प (B) केवल ठोस: जब ठोस कण परिक्षिप्त होते हैं, तो उसे सॉल (Sol) या ठोस सॉल कहा जाता है।
- विकल्प (C) ठोस और द्रव दोनों: मक्खन में परिक्षिप्त प्रावस्था के रूप में केवल द्रव (जल) ही फैला होता है, ठोस और द्रव दोनों एक साथ परिक्षिप्त प्रावस्था नहीं बनाते।


