राजस्थान किसान आंदोलन pdf

Quiz 1

 

Results

#1. किसान आन्दोलन व उसके प्रारम्भ होने के वर्ष की कौनसी जोड़ी सही है- [JEN (Civil) Degree 12.09.2021]

  • व्याख्या: बेगूँ किसान आंदोलन 1921 में मेनाल (भीलवाड़ा) से शुरू हुआ था, जिसका नेतृत्व विजय सिंह पथिक के निर्देश पर रामनारायण चौधरी ने किया था।

  • अन्य विकल्पों की जानकारी: मारवाड़ किसान आंदोलन 1923 में, शेखावाटी किसान आंदोलन 1922 में और भरतपुर किसान आंदोलन 1931 में प्रमुखता से उभरे थे।

#2. रूपाजी और कृपाजी किस किसान आन्दोलन में गोलीबारी में मारे गए?[जेल प्रहरी-2017][PTI-30.9.2018] [Head Master-11.10.2021] [JEN (विद्युत) डिग्री-29.11.2020] [कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (सीरम) 15.9.2019] [JEN (Electric) Degree – 18.05.2022]

व्याख्या: 13 जुलाई 1923 को बेगूँ के गोविंदपुरा गाँव में किसानों पर पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें धाकड़ जाति के किसान रूपाजी और कृपाजी शहीद हो गए थे।

#3. 22 जून, 1880 ई. को चित्तौड़गढ़ में राश्मी परगना स्थित मातृकुण्डियाँ नामक स्थान पर कौनसा किसान आन्दोलन प्रारम्भ हुआ? [II Grade (Urdu) Exam. 2011]

व्याख्या: यह मेवाड़ के महाराणा फतेहसिंह के शासनकाल में नई भू-राजस्व व्यवस्था के विरोध में किया गया एक बड़ा प्रदर्शन था। मातृकुंडिया को ‘राजस्थान का हरिद्वार’ भी कहा जाता है।

#4. 1927 में कुँवर मदनसिंह के नेतृत्व में किसानों ने कहाँ आन्दोलन किया हैं? [I Grade Teacher, 2012] [वनपाल-06.11.2022(S-I)]

व्याख्या: करौली राज्य में बेगार प्रथा और बढ़ते लगान के विरोध में 1927 में कुँवर मदनसिंह के नेतृत्व में किसानों ने संगठित होकर आंदोलन किया था।

#5. ‘नीमूचाणा किसान आन्दोलन हत्याकाण्ड’ राजपूताना की किस रियासत में हुआ था ? [पटवार-23.10.2021 (Shift -II)][II Grade (Science) 2011]

व्याख्या: नीमूचाणा हत्याकांड 14 मई, 1925 को अलवर रियासत में हुआ था। इसे इतिहास में ‘राजस्थान का जलियांवाला बाग हत्याकांड’ कहा जाता है।



#6. नीमूचाणा कांड के समय अलवर का शासक कौन था-[क.वैज्ञानिक सहायक 15.9.2019] [CET : 8.1.2023 (II)]

व्याख्या: महाराजा जयसिंह द्वारा लगान की दरें बढ़ाने के विरोध में यह आंदोलन हुआ था। इनके शासनकाल में ही यह भीषण घटना घटी थी।

#7. निम्नलिखित में से कौन-सी घटना को महात्मा गाँधी ने ‘डायर के कृत्य से दुगुनी वीभत्स’ / ‘दोहरी डायरशाही’ काण्ड एवं ‘जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड से भी बढ़कर’ बताया [प्रयोगशाला सहायक 13.11.16] [Asst. Town Planner- 16.6.2023][JEN (Civil) Dip. – 18.5.2022] [PSI (मोटर वाहन) – 12.02.2022][II Grade (English). 2011]

व्याख्या: गांधीजी ने अपनी पत्रिका ‘यंग इंडिया’ में इस हत्याकांड की निंदा करते हुए इसे जलियांवाला बाग से भी अधिक वीभत्स बताया था।

#8. माधोसिंग व गोविन्द सिंह का सम्बन्ध किस किसान आन्दोलन से था? [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-15.07.2018(I)]

सारांश (Short Summary)

  • बेगूँ किसान आंदोलन (1921): रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में हुआ, रूपाजी-कृपाजी यहाँ शहीद हुए।

  • मातृकुंडिया (1880): चित्तौड़गढ़ में जाट किसानों ने भू-राजस्व के विरोध में आंदोलन किया।

  • करौली आंदोलन (1927): कुँवर मदनसिंह ने नेतृत्व किया।

  • नीमूचाणा हत्याकांड (1925): अलवर में हुआ, महाराजा जयसिंह के समय हुआ, इसे गांधीजी ने ‘दोहरी डायरशाही’ कहा।

  • प्रमुख नेता: अलवर आंदोलन से माधोसिंह, गोविंद सिंह, गंगासिंह और अमर सिंह जुड़े थे।

#9. निम्न में से कौन बूँदी राज्य में हुए बरड़ कृषक आन्दोलन का नेता था? [IInd Grade Spc. Edu. 2017] [III Grade (English)-27.02.2023][पशुधन सहायक 04.6.2022] [रा.पुलिस कॉन्स्टेबल-2.7.2022] [वनरक्षक-11.12.2022(S-II)]

  • व्याख्या: राजस्थान सेवा संघ और बिजोलिया किसान आंदोलन से प्रेरित होकर, अप्रैल 1922 में नयनू राम शर्मा के नेतृत्व में बरड़ (बूंदी) में आंदोलन शुरू हुआ।

  • अन्य विकल्प: साधु सीताराम दास का संबंध प्रमुख रूप से बिजोलिया किसान आंदोलन से था।

#10. डाबी के किसान आन्दोलन में ‘झण्डा गीत’ गाते हुए राज्य पुलिस की गोली से कौन शहीद हुआ था- [कृषि अधिकारी (कृषि विभाग)-19.1.2021] [JEN (यांत्रिकी) डिप्लोमा -13.12.2020]

व्याख्या: 2 अप्रैल 1923 को डाबी में हुई घटना के दौरान, नानक भील ‘झंडा गीत’ गाते हुए शहीद हो गए। माणिक लाल वर्मा ने उनकी याद में ‘अर्जी’ शीर्षक से गीत लिखा था।



#11. किस पुलिस सुपरिटेंडेंट के आदेश से नानक भील को डाबी में 1923 में आयोजित किसान सभा में गोली मारी गई- [शोध अध्येता परीक्षा-04.08.2024]

व्याख्या: बूंदी के पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन ने भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया था।

#12. वर्ष 1921 में किसानों का सूअर विरोधी आंदोलन किस राज्य में चला था? [जेल प्रहरी परीक्षा-2017]

व्याख्या: अलवर में जंगली सूअर फसलों को नष्ट कर देते थे, जिसके विरोध में 1921 में किसानों ने आंदोलन किया और अंततः उन्हें सूअर मारने की अनुमति मिली।

#13. सही कथन है- [CET-G (S-I) – 28.09.2024] कथन (1)-आजादी से पहले राजस्थान के कृषि आंदोलनों का नेतृत्व गैर-किसानों ने किया था। कथन(2)-गंगानगर क्षेत्र के आंदोलन का नेतृत्व एक कम्युनिस्ट नेता वाई.एन. हांडा के द्वारा किया गया। (1) दोनों कथन सही (2) कथन 1 सही एवं 2 गलत (3) दोनों कथन गलत (4) कथन 1 गलत एवं 2 सही

#14. निम्नलिखित में से किसने मेव कृषक आन्दोलन का नेतृत्व किया? [IInd Grade Spc. Edu. 2017] [II Grade-30.7.2023 (II)] [Asst. Town Planner- 16.6.2023]

अतिरिक्त जानकारी: यह आंदोलन 1932 में अलवर और भरतपुर रियासतों के मेवात क्षेत्र में शुरू हुआ था। मेव आंदोलन के प्रमुख नेताओं में अलवर के डॉ. मोहम्मद अली, गुडगाँव के यासीन खान और अम्बाला शहर के गुलाम-भीक-नारंग शामिल थे।

#15. निम्न में से कौन-सा स्थान 1920 के किसान आन्दोलनों के दौरान शेखावाटी के पंचपाणे ठिकानों में से एक नहीं था? [उद्योग प्रसार अधिकारी-22.08.2018]

व्याख्या: शेखावाटी की प्रमुख जागीरें जिन्हें ‘पंचपाणे’ कहा जाता है, वे हैं: बिसाऊ, डूँडलोद, मलसीसर, मंडावा और नवलगढ़



#16. निम्नलिखित में से कौन सीकर कृषक आन्दोलन से सम्बद्ध नहीं था- [Assistant Professor-22.9.2021]

व्याख्या: नैनूराम शर्मा का संबंध बूंदी किसान आंदोलन से था। रामनारायण चौधरी, हरि ब्रह्मचारी और मास्टर चंद्रभान सीकर आंदोलन से जुड़े थे। सीकर आंदोलन 1922 में शुरू हुआ था।

#17. किसान आन्दोलन एवं देशी रियासत के युग्म में सही सुमेलित नहीं है- [व्याख्याता आयुर्वेद विभाग-12.11.2021]

व्याख्या: डाबड़ा आंदोलन मारवाड़ रियासत (डीडवाना परगना) से संबंधित था। अन्य सही सुमेलित हैं: नीमूचाणा-अलवर, दूधवा-खारा-बीकानेर, और बरड़-बूंदी।

#18. सुमेलित कीजिए [स्कूल व्याख्याता परीक्षा-2014] सूची-1 (आन्दोलन/घटनाएं) सूची-II (आन्दोलन वर्ष) (i) बिजोलिया (a) 1945 (ii) सीकर (b) 1947 (iii) डाबड़ा (c) 1922 (iv) चन्डावल (d) 1897 कूट: i ii iii iv (1) (a) (b) (c) (d) (2) (d) (c) (b) (a) (3) (c) (d) (a) (b) (4) (d) (a) (b) (c)

#19. ‘कूदन’ की घटना किस किसान आन्दोलन से सम्बन्धित है? [II Grade (S-II) -29.1.2023]

व्याख्या: 25 अप्रैल, 1935 को सीकर के कूदण गांव में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में 4 किसान शहीद हुए थे।

#20. निम्न आंदोलनों के प्रारम्भ वर्ष में कौनसा सही नहीं है? [कॉलेज व्याख्याता (सास्त्री) परीक्षा 30.05.2019]

विकल्प 2, 4 गलत हैं

सीकर किसान आंदोलन (1922-1946) राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में जागीरदारों के अत्याचारों, भारी करों (लाग-बाग) और बेगार प्रथा के विरुद्ध हुआ एक प्रमुख ऐतिहासिक संघर्ष था। इसका नेतृत्व रामनारायण चौधरी, सरदार हरलाल सिंह और मास्टर चंद्रभान जैसे नेताओं ने किया था।

चण्डावल काण्ड (मार्च, 1942): सोजत (मारवाड़) में उत्तरदायी शासन दिवस मनाने के दौरान ठिकाने की पुलिस और राजपूतों ने लाठियों से कार्यकर्ताओं पर हमला किया था।

 



#21. घटनाओं का कालानुक्रम है? [द्वितीय श्रेणी अध्या.-26.4.2017] 1. डाबड़ा काण्ड 2. नीमूचाणा काण्ड 3. चन्डावल काण्ड 4. मानगढ़ पहाड़ी हत्याकाण्ड

  • 4. मानगढ़ पहाड़ी हत्याकाण्ड (17 नवंबर, 1913): यह बांसवाड़ा में हुआ था। गोविंद गुरु के नेतृत्व में भील समुदाय का शांतिपूर्ण सम्मेलन चल रहा था, जिस पर ब्रिटिश सेना ने गोलियां चला दीं। इसे ‘राजस्थान का जलियांवाला बाग’ भी कहा जाता है।

  • 2. नीमूचाणा काण्ड (14 मई, 1925): अलवर रियासत में लगान वृद्धि के विरोध में किसान नीमूचाणा गाँव में एकत्रित हुए थे। यहाँ सेना की फायरिंग में सैकड़ों किसान मारे गए। महात्मा गांधी ने इसे ‘जलियांवाला बाग से भी वीभत्स’ कहा था।

  • 3. चण्डावल काण्ड (मार्च, 1942): सोजत (मारवाड़) में उत्तरदायी शासन दिवस मनाने के दौरान ठिकाने की पुलिस और राजपूतों ने लाठियों से कार्यकर्ताओं पर हमला किया था।

  • डाबड़ा काण्ड (13 मार्च 1947)

#22. भरतपुर का जाट नेता जिसने शेखावाटी के किसानों को कृषक आन्दोलन के लिए प्रेरित किया-[स्कूल व्याख्याता-9.1.2020][खाद्य सुरक्षा अधिकारी-25.11.2019]

विस्तृत व्याख्या: ठाकुर देशराज भरतपुर के एक प्रमुख और प्रभावशाली जाट नेता थे। 1940 में वे ‘भरतपुर जाट सभा’ के मंत्री बने और आगरा से ‘जाट जगत’ नामक समाचार पत्र भी निकाला। शेखावाटी के किसानों में जाग्रति लाने के लिए इन्होंने सितंबर 1933 में पलथाना में एक बड़ी सभा का आयोजन किया था।

अन्य विकल्पों के बारे में जानकारी:

  • चंद्रभान, घासीराम, मूलाराम: ये सभी शेखावाटी किसान आंदोलन से जुड़े स्थानीय या अन्य महत्वपूर्ण नेता थे, लेकिन बाहरी रियासत (भरतपुर) से आकर मुख्य रूप से प्रेरित करने का श्रेय ठाकुर देशराज को जाता है।

#23. ‘अंजुमन-खादिम-उल-इस्लाम’ की स्थापना निम्न से किस रियासत में हुई थी? [उद्योग निरीक्षक-24.06.2018]

विस्तृत व्याख्या: वर्ष 1932 में डॉ. मोहम्मद हादी ने अलवर में ‘अंजुमन-खादिम-उल-इस्लाम’ नामक संस्था की स्थापना की थी। इसी संस्था ने ‘मेव किसान आंदोलन’ को संगठित रूप प्रदान किया था और मेव समुदाय की शिक्षा के लिए इस्लामिया स्कूल शुरू करने का फैसला लिया था।

#24. किसान पंचायतों को मजबूत बनाने की दृष्टि से किस वर्ष ‘पूर्वी मेवाड़ परिषद’ की स्थापना की गयी? [राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-14.07.2018 (II)]

पृष्ठभूमि (पारसोली समझौता): ‘पूर्वी मेवाड़ परिषद’ की स्थापना से ठीक कुछ दिन पहले, 2 फरवरी 1922 को पारसोली के रावल (ठिकानेदार) और वहाँ के किसानों के बीच एक समझौता हुआ था। मेवाड़ राज्य के इतिहास में किसानों और किसी ठिकाने के बीच होने वाला यह पहला समझौता था। इसी सफलता से प्रेरित होकर किसानों को एक स्थायी मंच देने के लिए इस परिषद का गठन किया गया।

#25. दुधवाखारा आन्दोलन किस रियासत से सम्बन्धित है? [III Grade (Sindhi) -01.03.2023][HM-11.10.2021]

विस्तृत व्याख्या:

दुधवाखारा किसान आन्दोलन (1944-1947) तत्कालीन बीकानेर रियासत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आंदोलन था। वर्तमान भौगोलिक स्थिति के अनुसार दुधवाखारा गाँव राजस्थान के चूरू जिले में स्थित है।

इस आंदोलन से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. कारण: यह आंदोलन बीकानेर के महाराजा गंगासिंह और जागीरदारों (विशेष रूप से ठाकुर सूरजमल) द्वारा किसानों पर किए जाने वाले अत्याचारों, जबरन बेगार और अत्यधिक लाग-बाग (करों) के विरोध में शुरू हुआ था।

  2. प्रमुख नेतृत्वकर्ता: इस आंदोलन के मुख्य नायक चौधरी हनुमान सिंह थे। उन्होंने जागीरदारों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया, जिसके कारण उन्हें जेल में अमानवीय यातनाएं दी गईं और उन्होंने जेल में लंबी भूख हड़ताल भी की।

  3. महिलाओं की भूमिका: इस आंदोलन में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया था, जिसमें खेतु बाई (मघाराम वैद्य की बहन) ने महिलाओं का नेतृत्व किया था।

  4. प्रजामंडल का समर्थन: बीकानेर राज्य प्रजामंडल के नेता मघाराम वैद्य और रघुवरदयाल गोयल ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया था।



#26. भोजि लम्बरदार किस किसान आन्दोलन से सम्बन्धित थे? [II Grade Teacher (GK) -11.10.2022]

भोजी लम्बरदार का संबंध भरतपुर किसान आन्दोलन (1931) से था। इस आंदोलन से जुड़े मुख्य ऐतिहासिक तथ्य निम्नलिखित हैं:

  1. पृष्ठभूमि: भरतपुर राज्य में खालसा (सीधे राज्य के अधीन) भूमि पर भू-राजस्व (लगान) की वसूली के लिए ‘लम्बरदार’ और ‘पटेल’ जिम्मेदार होते थे। 1931 में राज्य में नया भूमि बंदोबस्त (Land Settlement) लागू किया गया, जिसके तहत लगान में भारी वृद्धि कर दी गई।

  2. आंदोलन का कारण: उस समय अकाल और वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण कृषि उत्पादों की कीमतें बहुत गिर गई थीं, जिससे किसान बढ़ा हुआ लगान चुकाने में असमर्थ थे।

  3. मुख्य घटना: 23 नवम्बर 1931 को भोजी लम्बरदार के नेतृत्व में भरतपुर की विभिन्न तहसीलों के लगभग 500 किसान राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ एकत्रित हुए और लगान देने से मना कर दिया।

  4. आंदोलन का अंत: राज्य सरकार ने इस विरोध को सख्ती से कुचला और भोजी लम्बरदार को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके साथ ही यह लघु किसान आंदोलन समाप्त हो गया।

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