राजस्थान की प्राचीन सभ्यता और अभिलेख

 

Results

#1. निम्नलिखित में से ओझियाना के उत्खनन में कौन शामिल था / थे?
A. आर. सी. अग्रवाल (ताम्रपाषाण युगीन)
B. बी. आर. मीणा
C. आलोक त्रिपाठी
(RAS Pre – 2025)

व्याख्या: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के जयपुर मंडल द्वारा वर्ष 2000 में बी. आर. मीणा और आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में यहाँ उत्खनन कार्य कराया गया था।
R. C. Agarwal (आर. सी. अग्रवाल) का नाम गणेश्वर (सीकर) और आहाड़ (उदयपुर) के उत्खनन से मुख्य रूप से जुड़ा हुआ है, ओझियाना के उत्खनन से नहीं।

#2. “बालाथल सभ्यता” का पुरातत्व स्थल कहाँ स्थित है? (CET Graduation – 2024)

बालाथल (Balathal) राजस्थान के उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील में स्थित एक प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक एवं ऐतिहासिक पुरास्थल है।

🔍 खोज एवं उत्खनन:
  • इसकी खोज वी. एन. मिश्रा (V. N. Misra) ने की थी।
  • इसका उत्खनन 1993 में वी. एन. मिश्रा और वसंत शिंदे के नेतृत्व में किया गया।

✨ प्रमुख अवशेष व विशेषताएँ:
  • 11 कमरों वाला विशाल भवन/दुर्ग नुमा संरचना: यहाँ से एक बड़ा कच्ची ईंटों और पत्थरों का बना ढांचा मिला है।
  • सूती कपड़ा: यहाँ से बुने हुए सूती कपड़े के अवशेष मिले हैं (बैराठ के बाद बालाथल दूसरी ऐसी जगह है जहाँ से कपड़ा मिला)
  • कुष्ठ रोग का सबसे प्राचीन प्रमाण: यहाँ मानव कंकाल से कुष्ठ रोग (Leprosy) के भारत में सबसे पुराने साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
  • यहाँ से तांबे के औजार, छल्ले और सिक्के भी बड़ी संख्या में मिले हैं।

#3. किस सभ्यता में अच्छी विकसित प्राचीर युक्त किलेबंदी के अवशेष मिले हैं?[CET – 5.2.2023 (S-I)] [कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक 14.9.2019]

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) द्वारा आयोजित परीक्षाओं (जैसे CET 2023) में इस प्रश्न का आधिकारिक उत्तर
कालीबंगा
माना गया है।

📌 अन्य मुख्य बिंदु:

  • कालीबंगा:
    जूते हुए खेत के विश्व में सबसे प्राचीन साक्ष्य, अग्नि वेदियाँ (सात हवन कुंड), अलंकृत ईंटें, और लकड़ी की नालियाँ।

  • बालाथल:
    यदि विकल्प में ताम्रपाषाण कालीन (आहाड़ संस्कृति) के अंतर्गत “विशाल दीवार/दुर्ग जैसी कच्ची ईंटों की किलेबंदी” पूछी जाए, तो वहाँ भी किलेबंदी के साक्ष्य मिले हैं, लेकिन “विकसित प्राचीर युक्त किलेबंदी” का प्रसिद्ध प्रश्न कालीबंगा से ही संबंधित है।

#4. कालीबंगा से निम्न में से किस फसल के अवशेष प्राप्त हुए हैं- [व्याख्याता आयुर्वेद विभाग-13.11.2021]

सही उत्तर: (1) जौ

व्याख्या: कालीबंगा (हनुमानगढ़) के प्राक्-हड़प्पा कालीन (Pre-Harappan) स्तरों के उत्खनन से जौ और गेहूं की खेती के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। यहाँ एक ही खेत में एक साथ दो फसलें (चना और सरसों) उगाने के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।

#5. किसके साक्ष्य कालीबंगा के पुरास्थल के उत्खनन से प्राप्त नहीं हुए हैं? [स्कूल व्याख्याता (Coach)-20.10.2022]

सही उत्तर: (3) चावल

व्याख्या: कालीबंगा से मुख्य रूप से गेहूं, जौ, चना और सरसों के साक्ष्य मिले हैं। सैंधव सभ्यता में चावल के प्रसिद्ध साक्ष्य लोथल और रंगपुर (गुजरात) से मिले हैं, कालीबंगा से नहीं। हाथीदाँत की कंगी भी कालीबंगा से प्राप्त हुई है।



#6. राजस्थान के किस स्थल से प्राप्त मृदभाण्डों को लाल धरातल पर काले रंगों की सुन्दर ज्यामितिक डिज़ाइनों से सजाया गया है? [उद्योग प्रचार अधिकारी-22.08.2018]

सही उत्तर: (4) कालीबंगा

व्याख्या: कालीबंगा से प्राप्त मृद्भाण्डों (Black on Red Ware) की मुख्य विशेषता यह है कि इनका धरातल लाल या हल्का गुलाबी होता था और उस पर काले रंग से ज्यामितीय आकृतियाँ (त्रिभुज, वृत्त, समानांतर रेखाएँ आदि), पशु-पक्षी तथा वनस्पति के चित्र बनाए जाते थे।

#7. कालीबंगा से हड़प्पा पूर्व की सभ्यता से मिलते-जुलते अवशेष पाकिस्तान में किस स्थान पर मिले हैं-
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) सीधी भर्ती परीक्षा- 20.03.2019]

सही उत्तर: (3) कोटदीजी

व्याख्या: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित कोटदीजी (Kot Diji) पुरास्थल के प्राक्-हड़प्पा कालीन अवशेष कालीबंगा के प्रथम चरण (प्राक्-हड़प्पा स्तर) से अत्यधिक मेल खाते हैं। यहाँ की किलेबंदी और मृद्भाण्ड शैली कालीबंगा जैसी ही है।

#8. किसने कालीबंगा को सिन्धु घाटी साम्राज्य व तृतीय राजधानी कहा है? [द्वितीय श्रेणी शिक्षक-2014]

सही उत्तर: (3) दशरथ शर्मा

व्याख्या: प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. दशरथ शर्मा ने अपनी पुस्तक ‘राजस्थान थ्रू एजेस’ में विशालता और पुरातात्विक महत्व के आधार पर कालीबंगा को ‘सिंधु घाटी साम्राज्य की तीसरी राजधानी’ (Third Capital) कहा था। (प्रथम दो राजधानियाँ हड़प्पा और मोहनजोदड़ो मानी जाती हैं)।

#9. कालीबंगा की सभ्यता किस सभ्यता से संबंधित है- [Stenographer-15.10.2024]

सही उत्तर: (2) सिंधु घाटी सभ्यता

व्याख्या: कालीबंगा भारतीय उपमहाद्वीप में स्थित सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता का एक अति महत्वपूर्ण और प्रमुख नगर/पुरास्थल है।

#10. आहड़ का प्राचीन नाम था-[संगणक- 03.03.2024] [P. C. Exam-2007(III)]

सही उत्तर: (1) ताम्रवती नगरी

व्याख्या: प्राचीन शिलालेखों और ग्रंथों में आहड़ को ताम्रवती नगरी (ताँबे की अत्यधिक उपलब्धता व उद्योगों के कारण) और आघाटपुर/आघाटदुर्ग कहा गया है। (10वीं-11वीं शताब्दी के अभिलेखों में इसे आघाटपुर कहा गया)।



#11. किस सभ्यता को धूलकोट भी कहते हैं ?
[CET(10+2) : 24.10.2024 (S-I)][JEN (Civil) Dip.6.12.2020] [II Grade (S-I) -29.1.2023]

सही उत्तर: (4) आहड़

व्याख्या: आहड़ सभ्यता उदयपुर शहर के पास स्थित है। स्थानीय लोग इस प्राचीन टीले को ‘धूलकोट’ (धूल का टीला) के नाम से पुकारते हैं।

#12. आहड़ में खुदाई के बाद एक 4000 साल पुरानी ताम्रपाषाणयुगीन संस्कृति की खोज की गई थी, जिसे…..नामक एक टीले के नीचे दबा दिया गया था- [EO & RO – 14.05.2023 (S-II)]

सही उत्तर: (2) धूलकोट

व्याख्या: आहड़ का पुरातात्विक टीला स्थानीय भाषा में धूलकोट के नाम से जाना जाता है। इसी टीले के नीचे 4000 वर्ष पुरानी आहाड़/बनास ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति दबी हुई प्राप्त हुई थी।

#13. आहड़ सभ्यता किस अन्य नाम से भी जानी जाती है- [JEN (यांत्रिकी/विद्युत) डिग्री -26.12.2020]

सही उत्तर: (3) आघाटपुर

व्याख्या: आहड़ को मध्यकालीन अभिलेखों में आघाटपुर या आघाटदुर्ग के नाम से जाना जाता था।

#14. निम्न में से किस स्थल को ताम्रवती नगरी के नाम से भी जाना जाता था?
[कनिष्ठ अनुदेशक 2022] [कनिष्ठ अनुदेशक 2019] [Lab Assistent 2022] [वनरक्षक2022(S-II)] [I Grade Teacher 2022][II Grade GK2018]

सही उत्तर: (2) आहड़

व्याख्या: ताँबा गलाने की भट्टियाँ और ताँबे के ढेरों उपकरण (कुल्हाड़ियाँ, छल्ले, चूड़ियाँ) मिलने के कारण आहड़ को प्राचीन काल में ‘ताम्रवती नगरी’ कहा जाता था।

#15. किस सभ्यता के लोग अपने मृतकों को आभूषणों के साथ दफनाते थे-[CET (10+2) : 22.10.2024 (S-I)]

सही उत्तर: (3) आहड़

व्याख्या: आहड़ में समाधान (अंतिम संस्कार) की परंपरा में शवों को सिर उत्तर दिशा में करके दफनाया जाता था। मृतक के साथ उसके कपड़े, मिट्टी के बर्तन और ताँबे व पत्थर के आभूषण/मनके भी गाड़े जाते थे, जो पुनर्जन्म में उनके विश्वास को दर्शाता है।



#16. आहड़ सभ्यता का उत्खनन कार्य 1953 में सर्वप्रथम किसके निर्देशन में हुआ था?
[III Gra. (Eng.)2023] [कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 2019] [II Grade (Sans.) 2023 (S-II)]

सही उत्तर: (4) अक्षयकीर्ति व्यास

व्याख्या: आहड़ टीले (धूलकोट) की सबसे पहली खोज और उत्खनन का कार्य 1953 में पंडित अक्षयकीर्ति व्यास ने किया था। इसके बाद 1956 में आर. सी. अग्रवाल और 1961-62 में एच. डी. सांकलिया ने उत्खनन कराया।

#17. निम्न में से कौनसा ( प्राचीन स्थल उत्खननकर्ता ) सुमेलित नहीं है? [JEN (Civil) Degree – 18.05.2022]

सही उत्तर: (2) आहड़-एस.पी. जैन

व्याख्या:

बैराठ – दयाराम साहनी (सही)

कालीबंगा – ए. घोष (अमलानंद घोष) (सही)

बागौर – वी. एन. मिश्रा (सही)

आहड़ – एस. पी. जैन (गलत) <br/> आहड़ के मुख्य उत्खननकर्ता अक्षयकीर्ति व्यास, आर. सी. अग्रवाल और एच. डी. सांकलिया थे।

#18. आहड़ का उत्खनन कार्य किसके नेतृत्व में निष्पादित हुआ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (फिटर) 2019] [CET -4.2.2023 (S-II)][CET – 5.2.2023 (S-I)]

सही उत्तर: (1) एच. डी. सांकलिया

व्याख्या: दिए गए विकल्पों में से डॉ. हसमुख धीरजलाल सांकलिया (H. D. Sankalia) ने 1961-62 में पुणे विश्वविद्यालय के सौजन्य से आहड़ का सबसे व्यापक और व्यवस्थित उत्खनन करवाया था।

#19. आहड़ सभ्यता स्थित है- [II Grade (English) . 2011]

सही उत्तर: (2) बनास

व्याख्या: आहड़ सभ्यता उदयपुर में आयड़ (बेड़च) नदी के किनारे विकसित हुई थी, जो कि आगे चलकर बनास नदी तंत्र की ही सहायक नदी है। इसीलिए इसे ‘बनास संस्कृति’ भी कहा जाता है।

#20. पुरास्थल ‘आहड़’ से प्राप्त प्राचीन अवशेष संबंधित हैं- [PSI – 15.09.2021]

सही उत्तर: (3) ताम्रपाषाण युग से

व्याख्या: आहड़ सभ्यता भारत की एक प्रमुख ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति (Chalcolithic Culture) का केंद्र थी, जहाँ ताँबे के उपकरणों के साथ-साथ सूक्ष्म पाषाण उपकरणों (Microliths) का प्रयोग होता था।



#21. राजस्थान की कौनसी सभ्यता बनास, बेड़च, गंभीरी और कोठारी नदियों के तटों और घाटियों में फैली हुई थी? [III Grade (SST) -26.02.2023]

सही उत्तर: (3) आहड़

व्याख्या: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में बनास और उसकी सहायक नदियों (बेड़च/आयड़, गंभीरी, कोठारी) की घाटियों में फैली ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति को सामूहिक रूप से आहड़/बनास संस्कृति कहा जाता है।

#22. निम्नलिखित जिलों में से किस जिले से आहड़ संस्कृति के अवशेष मिले हैं? [PTI – 2015][Stenographer-30.5.2013]

सही उत्तर: (3) उदयपुर

व्याख्या: आहड़ पुरास्थल मुख्य रूप से उदयपुर जिले में बेड़च नदी के तट पर स्थित है।

#23. किस संस्कृति को ‘बनास संस्कृति’ भी कहा जाता है?
[CET 2023 (S-II)] [II Grade (Hindi)- 2011] [JEN (विद्युत) डिप्लोमा 2020]

सही उत्तर: (4) आहड़

व्याख्या: इतिहासकार वी. एन. मिश्रा ने आहड़ संस्कृति के प्रसार क्षेत्र को देखते हुए इसे ‘बनास संस्कृति’ (Banas Culture) नाम दिया।

#24. कौनसा राजस्थान की आहड़-बनास संस्कृति का प्रमुख स्थल नहीं है-
[JEN (Civil) Degree 12.09.2021] [Librarian III Grade 11.09.2022]

सही उत्तर: (4) लोथल

व्याख्या:

गिलुण्ड (राजसमंद), ओझियाना (भीलवाड़ा) और बालाथल (उदयपुर) — ये तीनों राजस्थान में बनास/आहड़ संस्कृति के प्रमुख केंद्र हैं।

लोथल गुजरात में स्थित सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता का एक प्रसिद्ध बंदरगाह नगर है।

#25. कौन-सा कथन सही है? [द्वितीय श्रेणी शिक्षक परीक्षा-2014]

सही उत्तर: (4) आहड़वासियों का महत्त्वपूर्ण व्यवसाय अयस्क तांबे को गलाना तथा ताम्र वस्तुएँ बनाना था।

व्याख्या:

कथन (1) गलत है — गणेश्वर एक प्रसिद्ध ताम्रयुगीन उत्खनन स्थल है।

कथन (2) गलत है — बैराठ एक नगरीय/मौर्यकालीन व मत्स्य जनपद केंद्र था।

कथन (3) गलत है — कालीबंगा कांस्ययुगीन/हड़प्पाकालीन सभ्यता थी, लौह-युगीन नहीं।

कथन (4) पूर्णतः सही है — आहड़ में ताँबा गलाने की भट्टियाँ और औजार मिले हैं, जिससे सिद्ध होता है कि ताँबा गलाना व ताम्र उपकरण बनाना उनका प्रमुख व्यवसाय था।



#26. आहड़ सभ्यता के बारे में सही कथन का चयन कीजिए-
1. आहड़वासी ताँबा गलाना जानते थे।
2. ये लोग चावल से परिचित नहीं थे।
3. धातु का काम आहड़वासियों की अर्थव्यवस्था का एक साधन था।
4. यहाँ से काले-लाल रंग के मृद्भाण्ड मिले हैं, जिन पर सामान्यतः सफेद रंग से ज्यामितीय आकृतियाँ उकेरी गई हैं। [R.A.S. -27.10.2021]

सही उत्तर: (1) 1, 3 एवं 4 सही हैं

व्याख्या:

    1. आहड़वासी ताँबा गलाना जानते थे $\rightarrow$ सही (भट्टियाँ मिली हैं)।

    2. ये लोग चावल से परिचित नहीं थे $\rightarrow$ गलत (आहड़वासी चावल से अच्छी तरह परिचित थे और यह उनका मुख्य खाद्यान्न था)।

    3. धातु का काम आहड़वासियों की अर्थव्यवस्था का एक साधन था $\rightarrow$ सही

    4. यहाँ से काले-लाल रंग के मृद्भाण्ड मिले हैं, जिन पर सामान्यतः सफेद रंग से ज्यामितीय आकृतियाँ उकेरी गई हैं $\rightarrow$ सही

#27. आहड़ को ताम्रवती नाम से भी जाना जाता था क्योंकि – [EO & RO – 14.05.2023 (S-II)]

सही उत्तर: (1) बड़ी संख्या में ताँबे के औजार व उपकरण मिले हैं।

व्याख्या: आहड़ से अत्यधिक मात्रा में ताँबे की कुल्हाड़ियाँ, चूड़ियाँ, चादरें और गलाने की भट्टियाँ मिली हैं, जिसके कारण इस स्थल का नाम ‘ताम्रवती नगरी’ पड़ा।

#28. आहड़ के विषय में निम्न कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है? [द्वितीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा-01.05.2017]

सही उत्तर: (3) मिट्टी अथवा कच्ची ईंटों से निर्मित भवन अब उपलब्ध नहीं हैं।

व्याख्या:

आहड़ में आवासीय भवनों के निर्माण में कच्ची ईंटों और पत्थरों का व्यापक प्रयोग होता था, जिनके अवशेष उत्खनन में स्पष्ट रूप से प्राप्त हुए हैं। इसलिए यह कथन कि “भवन अब उपलब्ध नहीं हैं”, असत्य है।

आहड़वासी दीवारों को मजबूत करने के लिए मिट्टी में क्वार्ट्ज (स्फटिक) के टुकड़े मिलाते थे, जिससे दीवारें टिकाऊ और सुंदर बनती थीं।

#29. अनाज रखने के बड़े मृद्भाण्ड जिन्हें ‘गोरे बंकोठ’ कहा जाता था, किस प्राचीन सभ्यता से प्राप्त हुए? [ARO (Entomology) 2022] [पटवार मुख्य 2016]

सही उत्तर: (4) आहड़

व्याख्या: आहड़ से मिट्टी के विशालकाय मटके/कोठियाँ प्राप्त हुई हैं, जिनका उपयोग अन्न/अनाज का भंडारण करने के लिए किया जाता था। स्थानीय भाषा में इन्हें ‘गोरे’ या ‘कोट/बंकोठ’ कहा जाता है।

#30. कौनसी वस्तु आहड़ सभ्यता के स्थलों से संबंधित नहीं है? [द्वितीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा-26.04.2017]

सही उत्तर: (4) चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (PGW)

व्याख्या:

आहड़ की पहचान कृष्ण-लोहित मृद्भाण्ड (Black and Red Ware), चावल और ताँबे की वस्तुओं से है।

चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (Painted Grey Ware – PGW) का संबंध उत्तर-वैदिक काल एवं लौह-युगीन सभ्यताओं (जैसे – विराटनगर/बैराठ, जोधपुरा, सुनारी आदि) से है, ताम्रपाषाण कालीन आहड़ से नहीं।



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