रासायनिक समीकरण Railway Questions
#1. जब प्लास्टर ऑफ पेरिस को पानी में मिलाया जाता है, तो निम्नलिखित में से किस परिवर्तन से गुजरता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
- प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris): जब प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO4 · 1/2H2O) में पानी मिलाया जाता है, तो यह पुनः जल योजित (re-hydrated) होकर एक कठोर ठोस पदार्थ यानी जिप्सम (CaSO4 · 2H2O) में बदल जाता है।
- रासायनिक समीकरण (उदाहरण): CaSO4 · 1/2H2O + 1 1/2H2O → CaSO4 · 2H2O [जिप्सम]
- इस सेटिंग प्रक्रिया का उपयोग प्लास्टर कास्ट (टूटी हड्डियों को जोड़ने), मूर्तियां और सजावटी सामान बनाने में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec, 2024 Shift 3) में रासायनिक यौगिकों और उनके गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) यह एक गैस उत्पन्न करता है: गलत, इस रासायनिक अभिक्रिया में किसी भी प्रकार की गैस का उत्सर्जन नहीं होता है।
- विकल्प (B) यह अपने सभी जल अणुओं को खो देता है: गलत, बल्कि प्लास्टर ऑफ पेरिस पानी को अवशोषित करके क्रिस्टलन जल (Water of crystallization) को बढ़ाता है।
- विकल्प (D) यह पूरी तरह से घुल जाता है: गलत, यह पानी में घुलकर गायब नहीं होता, बल्कि रासायनिक प्रतिक्रिया करके एक कठोर ठोस द्रव्यमान (जिप्सम) का निर्माण करता है।
#2. CuO + NH 3 → Cu + N 2 + H 2 O के लिए सही संतुलित अभिक्रिया का चयन करें।
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 1)
- रासायनिक समीकरण का संतुलन (Balancing Chemical Equation): किसी भी रासायनिक समीकरण को संतुलित करने के लिए दोनों पक्षों (अभिकारकों और उत्पादों) में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।
- संतुलित समीकरण: 3CuO + 2NH3 → 3Cu + N2 + 3H2O
- परमाणुओं का मिलान:
• Cu: दोनों तरफ 3 परमाणु
• O: दोनों तरफ 3 परमाणु
• N: दोनों तरफ 2 परमाणु
• H: दोनों तरफ 6 परमाणु (2 × 3 = 6)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 1) में रासायनिक अभिक्रियाओं और समीकरणों को संतुलित करने के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): इसमें Cu, O और अन्य तत्वों के गुणांक सही नहीं हैं, जिससे दोनों तरफ परमाणु असंतुलित रहते हैं।
- विकल्प (B): इसमें नाइट्रोजन (N2) के आगे 2 लगा दिया गया है, जिससे दाईं ओर नाइट्रोजन के 4 परमाणु हो जाते हैं जबकि बाईं ओर अमोनिया से केवल 2 ही मिलते हैं।
- विकल्प (D): इसमें जल (H2O) के आगे 4 लगा है जिससे हाइड्रोजन के 8 परमाणु हो जाते हैं, जो कि असंतुलित है।
#3. श्रेणी क्रम में जुडे प्रतिरोधों का समतुल्य प्रतिरोध अलग-अलग प्रतिरोधों का ________ होता है।
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 3)
- श्रेणी क्रम संयोजन (Series Combination): जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि पहले प्रतिरोध का दूसरा सिरा, दूसरे प्रतिरोध के पहले सिरे से जुड़ा हो, तो इसे श्रेणी क्रम संयोजन कहते हैं।
- समतुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance): श्रेणी क्रम में जुड़े प्रतिरोधों का कुल या समतुल्य प्रतिरोध ($R_s$) परिपथ में जुड़े सभी अलग-अलग प्रतिरोधों के बीजगणितीय योगफल के बराबर होता है।
- सूत्र: $R_s = R_1 + R_2 + R_3 + \dots$
- इस संयोजन की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें प्रत्येक प्रतिरोध से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (Current) का मान समान रहता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 3) में विद्युत धारा के प्रभावों और प्रतिरोधों के संयोजन के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) अन्तर (Difference): गलत, प्रतिरोधों को श्रेणी क्रम में जोड़ने पर उनका कुल मान घटता नहीं है बल्कि बढ़ता है, इसलिए अन्तर नहीं होता।
- विकल्प (C) वर्गों का योगफल (Sum of Squares): गलत, यह भौतिकी के नियमों के अनुसार प्रतिरोधों के संयोजन का सही गणितीय संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) गुणनफल (Product): गलत, गुणनफल का उपयोग समांतर क्रम (Parallel Combination) के विशेष मामलों या आंशिक सूत्रों में किया जाता है, कुल समतुल्य प्रतिरोध में नहीं।
#4. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सर्वोत्तम रूप से यह बताता है कि संयोजन अभिक्रियाएँ प्रायः ऊष्माक्षेपी क्यों होती हैं?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब दो या दो से अधिक अभिकारक (elements or compounds) आपस में मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं, तो उसे संयोजन अभिक्रिया कहा जाता है।
- ऊष्माक्षेपी प्रकृति (Exothermic Nature): इन अभिक्रियाओं के दौरान नए रासायनिक आबंधों (Bonds) का निर्माण होता है जिसके फलस्वरूप अधिक स्थायी उत्पादों की प्राप्ति होती है और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा (ऊष्मा) बाहर निकलती है।
- उदाहरण: बिना बुझे चूने की पानी के साथ अभिक्रिया (CaO + H2O → Ca(OH)2 + ऊष्मा)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03 Feb, 2026) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार और ऊष्मीय परिवर्तनों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B): आबंधों का टूटना एक ऊष्माशोषी (Endothermic) प्रक्रिया है, जबकि संयोजन अभिक्रियाओं में मुख्य रूप से आबंधों का निर्माण होता है।
- विकल्प (C): रासायनिक आबंधों के निर्माण के समय ऊर्जा हमेशा मुक्त (उत्सर्जित) होती है, न कि अवशोषण होता है।
- विकल्प (D): सभी संयोजन अभिक्रियाओं के लिए प्रकाश या सनलाइट की आवश्यकता नहीं होती, अधिकांश सामान्य तापमान और परिस्थितियों में भी संपन्न होती हैं।
#5. एक ही ईंधन स्रोत से बिजली और तापीय ऊर्जा के एक साथ उत्पादन को क्या कहा जाता है?
(RPF Constable 2018 24 Jan 2019 Shift 3)
- सह-उत्पादन (Cogeneration / Combined Heat and Power – CHP): यह एक ऐसी उच्च-दक्षता वाली प्रक्रिया है जिसमें एक ही ईंधन स्रोत से एक साथ विद्युत ऊर्जा (बिजली) और उपयोगी तापीय ऊर्जा (उष्मा) दोनों का उत्पादन किया जाता है।
- इस प्रणाली में पारंपरिक ऊर्जा संयंत्रों की तुलना में ईंधन की बर्बादी कम होती है क्योंकि सामान्य उत्पादन में बेकार जाने वाली ऊष्मा का उपयोग हीटिंग या अन्य कार्यों के लिए कर लिया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 24 Jan, 2019 Shift 3) में ऊर्जा स्रोतों और आधुनिक तकनीकी के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) हाइब्रिड तकनीक (Hybrid Technology): यह दो या दो से अधिक ऊर्जा स्रोतों (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) के संयोजन को संदर्भित करता है।
- विकल्प (C) परासरण (Osmosis): यह एक जैविक और रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें विलायक के अणु अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर गुजरते हैं।
- विकल्प (D) रीवर्स इंजीनियरिंग (Reverse Engineering): यह किसी उत्पाद के डिजाइन या सॉफ्टवेयर को डिकोड करके उसका विश्लेषण करने की तकनीक है।
#6. निम्नलिखित में से किसे लाफिंग गैस कहा जाता है?
(RRB NTPC Tier I : 3 Apr 2016 Shift 1)
- लाफिंग गैस (Laughing Gas): नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) को आमतौर पर लाफिंग गैस या हंसाने वाली गैस कहा जाता है।
- इसका रासायनिक सूत्र N2O है। इसे पहली बार अंग्रेजी वैज्ञानिक जोसेफ प्रीस्टले द्वारा 1772 में तैयार किया गया था।
- चिकित्सा और दंत चिकित्सा (Dental Surgery) में इसका उपयोग संवेदनाहारी (Anesthetic) और सुन्न करने वाले एजेंट के रूप में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 3 Apr, 2016 Shift 1) में रासायनिक यौगिकों और उनके सामान्य नामों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) नाइट्रिक ऑक्साइड (NO): यह एक रंगहीन गैस है जो शरीर में कई शारीरिक और संकेतों के आदान-प्रदान में मदद करती है, लेकिन यह लाफिंग गैस नहीं है।
- विकल्प (B) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2): यह एक भूरे रंग की जहरीली गैस है जो वायु प्रदूषण (स्मॉग) का एक प्रमुख घटक है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन पेरोक्साइड: यह नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का एक अन्य यौगिक है जिसका उपयोग लाफिंग गैस के रूप में नहीं किया जाता है।
#7. सोडियम बाईकार्बोनेट से धावन सोडा तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका पहचानें।
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2)
- धावन सोडा का निर्माण (Preparation of Washing Soda): बेकिंग सोडा यानी सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (Sodium Bicarbonate – NaHCO3) को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) प्राप्त होता है, और इसके पुनः क्रिस्टलीकरण (Recrystallization) से धावन सोडा (Na2CO3 · 10H2O) बनता है।
- रासायनिक समीकरण:
• 2NaHCO3 + ऊष्मा → Na2CO3 + H2O + CO2
• Na2CO3 + 10H2O → Na2CO3 · 10H2O (धावन सोडा)
- धावन सोडा (Sodium Carbonate Decahydrate) का उपयोग मुख्य रूप से कांच, साबुन और कागज उद्योग में तथा घरों में पानी की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2) में महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिकों और उनके निर्माण की विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सोडियम बाईकार्बोनेट को फ्रीज करके: गलत, तापमान कम करने या फ्रीज करने से धावन सोडा का निर्माण नहीं होता, इसके लिए तापीय अपघटन (Heating) की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (B) सोडियम बाईकार्बोनेट को सिरके में मिलाकर: गलत, सिरके (एसिटिक एसिड) के साथ मिलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस और लवण बनता है, लेकिन धावन सोडा प्राप्त नहीं होता।
- विकल्प (C) सोडियम बाईकार्बोनेट को पानी में मिलाकर: गलत, केवल पानी में घोलने से सोडियम कार्बोनेट या धावन सोडा नहीं बनता, इसके लिए पहले सोडियम बाईकार्बोनेट को गर्म करके सोडियम कार्बोनेट में बदलना जरूरी है।
#8. जब लोहे के बुरादे के साथ मिलाया जाता है और मिश्रण को गर्म किया जाता है, तो आयरन सल्फाइड नामक एक काला पदार्थ बनता है। परिवर्तन से सबसे सटीक वर्णन इनमें से किस कथन में मिलता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change): जब लोहे के चूर्ण (Iron filings) और गंधक या सल्फर (Sulphur powder) के मिश्रण को गर्म किया जाता है, तो दोनों के बीच रासायनिक अभिक्रिया होती है, जिसके फलस्वरूप एक नया पदार्थ आयरन सल्फाइड (FeS) बनता है।
- विशेषताएँ: इस प्रक्रिया में नए गुणों वाला नया पदार्थ बनता है, इसके संगठन में स्थायी बदलाव होता है, और यह एक अनुत्क्रमणीय (Irreversible) परिवर्तन है जिसे आसानी से भौतिक विधियों से वापस नहीं बदला जा सकता।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10 Feb, 2026) में भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B): लोहा सल्फर में घुलता नहीं है, बल्कि गर्म करने पर उनके बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से एक नया यौगिक बनता है।
- विकल्प (C): केवल मिलाने और गर्म करने की प्रक्रिया से नया रासायनिक यौगिक (आयरन सल्फाइड) बनना रासायनिक परिवर्तन है, न कि केवल भौतिक परिवर्तन।
- विकल्प (D): यह एक अनुत्क्रमणीय (Irreversible) परिवर्तन है, इसलिए यह उत्क्रमणीय भौतिक परिवर्तन नहीं हो सकता।
#9. स्थिर तापमान और दबाव पर एक स्वतःस्फूर्त प्रक्रिया के लिए, गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन ________ होता है।
(RRB NTPC UG CBT-I : 28 Aug, 2025 Shift 2)
- गिब्स मुक्त ऊर्जा (Gibbs Free Energy – G): यह किसी ऊष्मागतिकीय निकाय (Thermodynamic system) द्वारा उपयोगी कार्य करने के लिए उपलब्ध ऊर्जा की माप है।
- स्वतःस्फूर्त प्रक्रिया (Spontaneous Process): स्थिर तापमान और दबाव पर कोई भी प्रक्रिया अपने आप (स्वतःस्फूर्त) तभी संपन्न होती है जब गिब्स मुक्त ऊर्जा में परिवर्तन (ΔG) ऋणात्मक होता है, अर्थात ΔG < 0।
- संबंध: ΔG = ΔH – TΔS (जहाँ ΔH एन्थैल्पी परिवर्तन, T तापमान और ΔS एंट्रॉपी परिवर्तन है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 28 Aug, 2025 Shift 2) में ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) और रासायनिक ऊर्जा के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) ΔG = 0: यह मान तब होता है जब निकाय रासायनिक साम्यावस्था (Equilibrium) में होता है।
- विकल्प (B) ΔG > 0: धनात्मक मान यह दर्शाता है कि प्रक्रिया स्वतःस्फूर्त नहीं है (यह एक असंभाव्य या गैर-स्वतःस्फूर्त प्रक्रिया है)।
- विकल्प (D) ΔG = ΔH + TΔS: यह गिब्स-हेलहोल्ट्ज़ समीकरण का गलत स्वरूप है; सही समीकरण ΔG = ΔH – TΔS होता है।
#10. निम्नलिखित में से कौन-सी द्विविस्थापन अभिक्रिया है?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है और नए यौगिक बनते हैं, उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- विश्लेषण: इस अभिक्रिया में सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) और सोडियम क्लोराइड (NaCl) के बीच आयनों (Ag+ और Na+, Cl- और NO3-) का परस्पर आदान-प्रदान होता है, जिससे सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का सफेद अवक्षेप और सोडियम नाइट्रेट (NaNO3) प्राप्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03 Feb, 2026) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) 2Mg + O2 → 2MgO: यह एक संयोजन (Combination) या ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
- विकल्प (B) CaCO3 → CaO + CO2: यह एक अपघटन (Decomposition) अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu: यह एक एकल विस्थापन (Single Displacement) अभिक्रिया है, जिसमें जिंक ने कॉपर को विस्थापित किया है।
#11. मछली के हृदय में कितने कक्ष होते हैं?
(RPF Constable 2018 14 Feb 2019)
- मछली का हृदय (Fish Heart): मछलियों के हृदय में केवल 2 कक्ष (चैंबर) होते हैं, जिसमें एक आलिंद (Atrium) और एक निलय (Ventricle) शामिल होता है।
- रक्त परिसंचरण (Single Circulation): मछली के हृदय में अशुद्ध रक्त पंप होता है जो गिल्स (Gills) में जाकर शुद्ध होता है और फिर पूरे शरीर में संचारित होता है, इसे एकल परिसंचरण तंत्र कहते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 14 Feb, 2019) में जीव विज्ञान (जंतु जगत और अंग तंत्र) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) 3: तीन कक्षीय हृदय उभयचरों (जैसे मेंढक) और अधिकांश सरीसृपों में पाया जाता है।
- विकल्प (B) 5: यह जंतुओं के हृदय के कक्षों की कोई मानक संख्या नहीं है।
- विकल्प (C) 4: चार कक्षीय हृदय स्तनधारियों (जैसे मनुष्य) और पक्षियों में पाया जाता है।
#12. वह रासायनिक अभिक्रिया, जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं, ________ कहलाती है।
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (तत्व या यौगिक) आपस में मिलकर केवल एक एकल उत्पाद बनाते हैं, उसे संयोजन अभिक्रिया कहा जाता है।
- सामान्य रूप (General Form): A + B → AB
- उदाहरण: कोयले का दहन (C + O2 → CO2) या पानी का निर्माण (2H2 + O2 → 2H2O)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 24 Dec, 2025) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है (संयोजन का बिल्कुल विपरीत)।
- विकल्प (C) द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): इसमें दो यौगिकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान होता है।
- विकल्प (D) विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): इसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व दूसरे कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करता है।
#13. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया होने पर निम्नलिखित में से कौन-सा प्रेक्षण सही है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
- रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction): जब तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) की सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट या बेकिंग सोडा (NaHCO3) के साथ अभिक्रिया होती है, तो सोडियम क्लोराइड (लवण), जल ($\text{H}_2\text{O}$) और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{NaHCO}_3 \text{ (aq)} + \text{HCl \ (aq)} \rightarrow \text{NaCl \ (aq)} + \text{H}_2\text{O \ (l)} + \text{CO}_2 \text{ (g)}$
- प्रेक्षण (Observation): इस प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस तेजी से बुदबुदाहट (Effervescence) के साथ निकलती है, और जब इस गैस को चूने के पानी (Calcium Hydroxide) में प्रवाहित किया जाता है, तो वह कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) बनने के कारण दूधिया हो जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05 Dec, 2025) में अम्ल, क्षार और लवण के रासायनिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): लवण और जल के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड गैस का भी निर्माण होता है, इसलिए यह अधूरा कथन है।
- विकल्प (C): नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का भूरा धुआँ लैड नाइट्रेट को गर्म करने पर निकलता है, इस अभिक्रिया में नहीं।
- विकल्प (D): पॉप ध्वनि के साथ हाइड्रोजन गैस तब निकलती है जब धातु (जैसे जिंक) की तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।
#14. निम्नलिखित में से कौन सा उदाहरण दर्शाता है कि पदार्थ के कणों के बीच पर्याप्त स्थान होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 3)
- पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान (Space between particles of matter): पदार्थ के कणों के बीच अंतर-आणविक स्थान (Intermolecular space) होता है। जब किसी पदार्थ (जैसे पोटेशियम परमैंगनेट या चीनी/नमक) को पानी में घोला जाता है, तो उसके कण पानी के अणुओं के बीच मौजूद रिक्त स्थानों में समा जाते हैं।
- उदाहरण: पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO4) को पानी में मिलाने पर क्रिस्टल के कण छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटकर पूरे पानी में समान रूप से फैल जाते हैं, जिससे पूरा पानी गुलाबी या बैंगनी हो जाता है। यह दर्शाता है कि तरल पदार्थों के कणों के बीच पर्याप्त स्थान होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 3) में पदार्थ की प्रकृति और उसके कणों के अभिलाक्षणिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) पानी का उबलना: यह पानी के अवस्था परिवर्तन (द्रव से वाष्प) और कणों की गतिज ऊर्जा में वृद्धि को दर्शाता है।
- विकल्प (C) लोहे की कील का टूटना: यह ठोस पदार्थों के कणों के बीच अत्यधिक मजबूत आकर्षण बल और उनकी कठोरता को दर्शाता है।
- विकल्प (D) अगरबत्ती जलाना: यह गैस के कणों के विसरण (Diffusion) और उनकी तीव्र गति को मुख्य रूप से प्रदर्शित करता है।
#15. जिंक के एक टुकड़े को तीन अलग-अलग विलयनों में रखा जाता है: लेड नाइट्रेट, एल्युमीनियम सल्फेट और सिल्वर नाइट्रेट। कौन-से विलयन में जिंक धातु को उसके विलयन से विस्थापित कर पाएगा?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): धातुओं की सक्रियता श्रेणी में जो धातु जितनी ऊपर होती है, वह उतनी ही अधिक अभिक्रियाशील होती है। अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है।
- तत्वों का क्रम: एल्युमीनियम (Al) > जिंक (Zn) > लेड (Pb) > सिल्वर (Ag)।
- विश्लेषण: जिंक (Zn), लेड (Pb) और सिल्वर (Ag) से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह लेड नाइट्रेट और सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से लेड और सिल्वर को विस्थापित कर देता है। लेकिन जिंक, एल्युमीनियम (Al) से कम अभिक्रियाशील है, इसलिए यह एल्युमीनियम सल्फेट से एल्युमीनियम को विस्थापित नहीं कर सकता।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec, 2024 Shift 1) में धातुओं की सक्रियता और विस्थापन अभिक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (D): गलत, क्योंकि एल्युमीनियम सल्फेट में जिंक, एल्युमीनियम को विस्थापित नहीं कर सकता क्योंकि एल्युमीनियम जिंक की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है।
- विकल्प (C) केवल सिल्वर नाइट्रेट: अधूरा है, क्योंकि जिंक लेड नाइट्रेट से भी लेड को विस्थापित कर सकता है।
#16. खमीर में अवायवीय श्वसन के दौरान, पायरुवेट निम्नलिखित में से किस पदार्थ में परिवर्तित होता है?
(Not found 12/03/2026 )
- अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration / Fermentation): खमीर (Yeast) में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाले अवायवीय श्वसन के दौरान ग्लूकोज के विघटन से बनने वाला पायरुवेट एथेनॉल (C2H5OH) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) में परिवर्तित हो जाता है।
- इस प्रक्रिया को किण्वन (Fermentation) भी कहा जाता है, जिसका उपयोग बेकरी उद्योग (ब्रेड बनाने) और अल्कोहल के निर्माण में मुख्य रूप से किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न जीव विज्ञान (श्वसन तंत्र और जैव रासायनिक प्रक्रियाएं) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) लैक्टिक अम्ल और जल: लैक्टिक अम्ल का निर्माण हमारी अपनी मांसपेशियों (Muscle cells) में भारी व्यायाम के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने पर होता है, खमीर में नहीं।
- विकल्प (B) ग्लूकोज और ऑक्सीजन: ग्लूकोज इस प्रक्रिया का अभिकारक होता है न कि उत्पाद, और यह अवायवीय प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन का उपयोग नहीं होता।
- विकल्प (C) कार्बन डाइऑक्साइड और जल: कार्बन डाइऑक्साइड तो बनती है, लेकिन जल के स्थान पर एथेनॉल का निर्माण होता है; जल और कार्बन डाइऑक्साइड मुख्य रूप से वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration) के उत्पाद हैं।
#17. धृतिमान कार्बन का उपयोग करके मैग्नीशियम ऑक्साइड से मैग्नीशियम का निष्कर्षण करने का प्रयास करता है। यह प्रयास असफल रहता है। इसका कारण क्या है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- धातुओं का निष्कर्षण और सक्रियता श्रेणी: अत्यधिक सक्रिय धातुएं जैसे मैग्नीशियम (Mg), एल्युमिनियम (Al), कैल्शियम, सोडियम आदि ऑक्सीजन के प्रति अत्यधिक आकर्षण रखती हैं और सक्रियता श्रेणी में कार्बन से ऊपर स्थित होती हैं.
- चूँकि कार्बन, मैग्नीशियम की तुलना में कम अभिक्रियाशील है, इसलिए कार्बन (कोक) मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) से ऑक्सीजन को विस्थापित (अपचयित) करने में असमर्थ रहता है.
- मैग्नीशियम जैसी अत्यधिक सक्रिय धातुओं का व्यावसायिक निष्कर्षण उनके पिघले हुए क्लोराइड (जैसे MgCl2) के विद्युत अपघटन (Electrolytic reduction) द्वारा किया जाता है.
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06 March, 2026) में धातुओं के निष्कर्षण और रासायनिक सक्रियता के अंतर्गत पूछा गया था.
- विकल्प (A) कार्बन, ऑक्सीजन के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करता है: यह कथन अपने आप में सही है, लेकिन यह मैग्नीशियम ऑक्साइड के अपचयन न हो पाने का मुख्य कारण नहीं है।
- विकल्प (B) इस अभिक्रिया से केवल कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होती है: यह इस असफलता का रासायनिक और मुख्य कारण नहीं है।
- विकल्प (C) मैग्नीशियम के साथ वाष्पशील यौगिक बनाता है: यह कथन इस संदर्भ में सही नहीं है, क्योंकि मुख्य बाधा धातुओं की relative reactivity है।
#18. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया अवक्षेपण अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 1)
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो विलयनों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है और एक अघुलनशील ठोस पदार्थ (अवक्षेप) बनता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं। यह मुख्य रूप से द्वि-विस्थापन अभिक्रिया का ही एक रूप है।
- विश्लेषण: जब सोडियम क्लोराइड (NaCl) के जलीय विलयन की सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) के विलयन के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का सफेद रंग का अघुलनशील अवक्षेप प्राप्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 18 Dec, 2024 Shift 1) में रासायनिक अभिक्रियाओं और अवक्षेपण प्रक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) HCl + NaOH → NaCl + H2O: यह एक उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया है जिसमें अम्ल और क्षार मिलकर लवण और जल बनाते हैं।
- विकल्प (B) CaCO3 → CaO + CO2: यह एक अपघटन (Decomposition) अभिक्रिया है।
- विकल्प (C) 2H2 + O2 → 2H2O: यह एक संयोजन (Combination) या ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
#19. जस्ता जैसी धातुओं को उनके सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों से निष्कर्षित करने की सही प्रक्रिया क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )
- सल्फाइड और कार्बोनेट अयस्कों का निष्कर्षण: जस्ता (Zinc) जैसी मध्यम सक्रियता वाली धातुओं के अयस्क मुख्य रूप से सल्फाइड (जैसे जिंक ब्लेड) या कार्बोनेट (जैसे कैलामाइन) रूप में पाए जाते हैं।
- चरणबद्ध प्रक्रिया:
1. भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्क को वायु की अधिकता में तेज गर्म करके ऑक्साइड में बदला जाता है।
2. निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में गर्म करके ऑक्साइड में बदला जाता है।
3. अपचयन (Reduction): प्राप्त धातु ऑक्साइड का कार्बन (कोक) द्वारा अपचयन करके शुद्ध धातु प्राप्त की जाती है।
4. शुद्धीकरण (Refining): अंत में धातु को electrolytic refining या अन्य विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 30 Dec, 2025) में धातुओं के निष्कर्षण और धातुकर्म (Metallurgy) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): प्रत्यक्ष तापन से सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्क सीधे धातु में नहीं बदले जा सकते, पहले उन्हें ऑक्साइड में परिवर्तित करना आवश्यक होता है।
- विकल्प (B): विद्युत अपघटन का उपयोग जिंक जैसी मध्यम सक्रियता वाली धातुओं के लिए नहीं, बल्कि अत्यधिक सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C): अम्ल में विघटन और निस्पंदन सामान्य धातुकर्म की मानक व्यावसायिक प्रक्रिया नहीं है।
#20. ब्लीचिंग पाउडर के उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले अभिकारक हैं:
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)
- ब्लीचिंग पाउडर का उत्पादन (Production of Bleaching Powder): विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder या कैथरीन ऑक्सीक्लोराइड) का रासायनिक सूत्र CaOCl2 होता है। इसका उत्पादन शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस की क्रिया द्वारा किया जाता है।
- रासायनिक समीकरण: Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O
- यहाँ Ca(OH)2 शुष्क बुझा हुआ चूना (Dry slaked lime) है और Cl2 क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali process) से प्राप्त क्लोरीन गैस है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 18 Dec, 2024 Shift 3) में महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिकों और उनके निर्माण के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) CaO + Cl2: बिना बुझे चूने (CaO) के साथ क्लोरीन सीधे बलीचिंग पाउडर नहीं बनाती, इसके लिए बुझे हुए चूने की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (B) CaOH + Cl2: यह रासायनिक रूप से गलत सूत्र है क्योंकि कैल्शियम की संयोजकता 2 होती है, इसलिए सूत्र Ca(OH)2 होता है।
- विकल्प (D) CaO + Cl: क्लोरीन प्राकृतिक रूप से द्विपरमाणुक अणु (Cl2) के रूप में प्रयुक्त होती है, न कि एकल परमाणु (Cl) के रूप में।
#21. दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उसके आधार पर सही विकल्प का चयन कीजिए。(A):ध्वनि तरंगें, अनुप्रस्थ तरंगें हैं। (R):ध्वनि तरंगों को उनके प्रसार के लिए एक भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है।
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- ध्वनि तरंगों की प्रकृति (Nature of Sound Waves): ध्वनि तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse waves) नहीं बल्कि अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal waves) होती हैं, क्योंकि इनमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर कंपन करते हैं। अत: अभिकथन (A) असत्य है।
- माध्यम की आवश्यकता (Requirement of Medium): ध्वनि एक यांत्रिक तरंग (Mechanical wave) है, जिसके संचरण के लिए ठोस, द्रव या गैस जैसे किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है। यह निर्वात (Vacuum) में गमन नहीं कर सकती। अत: कारण (R) सत्य है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03 Feb, 2026) में तरंग गति और ध्वनि के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (D): गलत हैं क्योंकि अभिकथन असत्य है, जबकि कारण पूर्णतः सत्य है।
- विकल्प (C): गलत है क्योंकि इसमें अभिकथन को सत्य बताया गया है जो कि गलत है (ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं)।
#22. निम्नलिखित में से कौन से उत्पाद बनते हैं जब सोडियम सल्फेट बेरियम क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 2)
- द्वि-विस्थापन और अवक्षेपण अभिक्रिया (Double Displacement & Precipitation Reaction): जब सोडियम सल्फेट (Na2SO4) के जलीय विलयन की बेरियम क्लोराइड (BaCl2) के जलीय विलयन के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो बेरियम सल्फेट (BaSO4) और सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण: Na2SO4 (aq) + BaCl2 (aq) → BaSO4 (s) [सफेद अवक्षेप] + 2NaCl (aq)
- इस अभिक्रिया में बेरियम सल्फेट (BaSO4) एक अघुलनशील ठोस के रूप में नीचे बैठ जाता है, जो सफेद रंग का अवक्षेप (White precipitate) होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 2) में रासायनिक अभिक्रियाओं और अवक्षेपण के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B): गलत, क्योंकि बेरियम सल्फेट का अवक्षेप पीला नहीं बल्कि सफेद होता है।
- विकल्प (C): गलत, भूरा अवक्षेप इस अभिक्रिया में नहीं बनता है।
- विकल्प (D): गलत, काला अवक्षेप नहीं बनता तथा अंत में (A) लिखना तकनीकी रूप से गलत है क्योंकि यह जलीय विलयन (aq) को दर्शाता है।
#23. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया अपघटन अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 2)
- अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद प्रदान करता है, उसे अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
- विश्लेषण: जब सफेद रंग के सिल्वर क्लोराइड (AgCl) को सूर्य के प्रकाश में रखा जाता है, तो यह प्रकाश की ऊर्जा के कारण वियोजित होकर धूसर (ग्रे) रंग की चांदी (Ag) और क्लोरीन गैस (Cl2) में अपघटित हो जाता है। यह प्रकाशीय अपघटन (Photolytic decomposition) का एक प्रमुख उदाहरण है।
- रासायनिक समीकरण: 2AgCl (s) –[सूर्य का प्रकाश]–> 2Ag (s) + Cl2 (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 2) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) प्राकृतिक गैस का जलना: यह एक दहन और ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, न कि अपघटन।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से जल का निर्माण: यह एक संयोजन (Combination) अभिक्रिया है जिसमें दो पदार्थ मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (D) कोयले का जलना: यह भी कार्बन का ऑक्सीजन के साथ दहन यानी संयोजन और ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
#24. निम्नलिखित में से कौन सा एक शाकनाशी है?
(RRB NTPC CBT-I : 17 Feb 2021 Shift 2)
- शाकनाशी (Herbicide / Weedicide): 2,4-D (2,4-डाइक्लोरोफेनोक्सीएसिटिक अम्ल) एक व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला सिंथेटिक प्लांट हार्मोन या शाकनाशी है, जिसका उपयोग फसलों को नुकसान पहुँचाए बिना चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
- यह कृषि क्षेत्र में अवांछित पौधों (खरपतवारों) के नियंत्रण में बहुत प्रभावी माना जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 17 Feb 2021 Shift 2) में कृषि रसायन और पर्यावरण विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) एल्ड्रिन (Aldrin): यह एक क्लोरीनेटेड हाइड्रोकार्बन है जिसका उपयोग मुख्य रूप से कीटिनाशक (Insecticide) के रूप में किया जाता है।
- विकल्प (B) BHC (Benzene Hexachloride): यह भी एक प्रसिद्ध कीटनाशक (Insecticide) है जिसे लिंडेन के नाम से भी जाना जाता है।
- विकल्प (C) DDT (Dichlorodiphenyltrichloroethane): यह एक सिंथेटिक कीटनाशक है जिसका उपयोग कृषि और मलेरिया नियंत्रण में कीटों को मारने के लिए किया जाता है।
#25. एथेनॉल के ऑक्सीकरण के दौरान क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- एथेनॉल का ऑक्सीकरण (Oxidation of Ethanol): जब एथेनॉल (C2H5OH) को क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO4) या अम्लीय पोटेशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7) जैसे ऑक्सीकारक एजेंटों की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो यह ऑक्सीजन जोड़कर एथेनोइक अम्ल (एसिटिक एसिड – CH3COOH) में परिवर्तित हो जाता है।
- रासायनिक समीकरण: CH3CH2OH + 2[O] –[क्षारीय KMnO4 / अम्लीय K2Cr2O7]–> CH3COOH + H2O
- इस अभिक्रिया में ऑक्सीकारक अभिकारकों का उपयोग पदार्थों में ऑक्सीजन जोड़ने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 22 Dec, 2025) में कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणों (ऑक्सीकरण) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) एथीन में परिवर्तित होना: एथेनॉल को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर निर्जलीकरण (Dehydration) के कारण एथीन बनती है, ऑक्सीकरण से नहीं।
- विकल्प (B) एस्टर बनाना: एथेनॉल की कार्बोक्सिलिक अम्ल के साथ सांद्र अम्ल की उपस्थिति में अभिक्रिया से एस्टर का निर्माण (एस्टरीकरण) होता है।
- विकल्प (C) मीथेन में परिवर्तित होना: मीथेन एक अलग हाइड्रोकार्बन है, जो इस ऑक्सीकरण प्रक्रिया से नहीं बनता है।
#26. मेथेन ( methane) के पूर्ण और अपूर्ण दहन से उत्पन्न उत्पादों की तुलना कीजिए
。(RRB JE 19/02/2026 )
- मेथेन का दहन (Combustion of Methane): मेथेन (CH4) एक मुख्य हाइड्रोकार्बन (प्राकृतिक गैस का घटक) है, जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा उत्पन्न करता है।
- पूर्ण दहन (Complete Combustion): पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की उपलब्धता होने पर मेथेन का पूर्ण दहन होता है, जिसके परिणामस्वरूप मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जल (H2O) का निर्माण होता है। समीकरण: CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O
- अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion): ऑक्सीजन की अपर्याप्त आपूर्ति होने पर मेथेन का अपूर्ण दहन होता है, जिससे जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस और जल (H2O) उत्पन्न होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 19/02/2026) में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के दहन रासायनिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): इसमें उत्पादों की स्थिति को उल्टा कर दिया गया है, क्योंकि पूर्ण दहन से कार्बन डाइऑक्साइड बनती है न कि कार्बन मोनोऑक्साइड।
- विकल्प (C): यह अधूरा है क्योंकि इसमें पानी और कार्बन डाइऑक्साइड दोनों के बनने की सही स्थिति को स्पष्ट नहीं किया गया है।
- विकल्प (D): इसमें अपूर्ण दहन के उत्पाद के रूप में कार्बन (काजल) दिखाया गया है, लेकिन मानक रासायनिक वर्गीकरण के अनुसार विकल्प (B) सही और सबसे उपयुक्त उत्तर है।
#27. संहति संरक्षण के नियम में बताया गया है कि ________ ।
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
- संहति संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन (उत्पन्न) किया जा सकता है और न ही विनाश (नष्ट) किया जा सकता है।
- इसका अर्थ यह है कि रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, उत्पादों के कुल द्रव्यमान के सदैव बराबर होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Feb, 2026) में रासायनिक संयोजन के मूलभूत नियमों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (B): ये दोनों कथन संरक्षण के नियम के विपरीत हैं, क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया में पदार्थ न तो नष्ट होता है और न ही नया उत्पन्न होता है, केवल उसका रूप बदलता है।
- विकल्प (C): यह गलत है क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया के दौरान द्रव्यमान घटता या बढ़ता नहीं है, बल्कि संरक्षित रहता है।
#28. निम्नलिखित में से कौन-सा संयोजन अवक्षेपण उत्पन्न करेगा?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 1)
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो विलयनों के मिलने से एक अघुलनशील ठोस पदार्थ (अवक्षेप) का निर्माण होता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।
- विश्लेषण: जब सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) की फेरिक क्लोराइड (FeCl3) के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो आयरन (III) हाइड्रॉक्साइड [Fe(OH)3] का भूरे रंग का अवक्षेप और सोडियम क्लोराइड (NaCl) प्राप्त होता है।
- रासायनिक समीकरण: 3NaOH + FeCl3 → Fe(OH)3 (भूरा अवक्षेप) + 3NaCl
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 18 Dec, 2024 Shift 1) में रासायनिक अभिक्रियाओं और अवक्षेपण के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) NaCl + KNO3: ये दोनों घुलनशील लवण हैं, इनके बीच आयनों के आदान-प्रदान से कोई अघुलनशील अवक्षेप नहीं बनता।
- विकल्प (B) NaOH + Na2SO4: इनमें समान आयन (सोडियम) होने के कारण कोई नया अवक्षेप उत्पन्न नहीं होता।
- विकल्प (C) NaOH + NaCl: ये दोनों समान आयन वाले यौगिक हैं, इनके बीच कोई अवक्षेपण अभिक्रिया नहीं होती।
A) जिंक और लेड, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील तत्व हैं।
B) जिंक और लेड, कॉपर से कम अभिक्रियाशील तत्व हैं।
C) एक लोहे की कील कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोने पर पीले रंग की हो जाती है।
#29. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1)
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): धातुओं की सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित धातुएं अधिक अभिक्रियाशील होती हैं। जिंक (Zn) और लेड (Pb) दोनों ही कॉपर (Cu) से ऊपर स्थित हैं, इसलिए जिंक और लेड कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील तत्व हैं। अतः कथन A सत्य है।
- कथन C का विश्लेषण: जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में डुबोया जाता है, तो आयरन कॉपर को विस्थापित कर देता है और फेरस सल्फेट बनाता है जिससे विलयन का रंग हरा हो जाता है तथा लोहे की कील पर भूरे (reddish-brown) रंग की कॉपर की परत जम जाती है, पीले रंग की नहीं। अतः कथन C असत्य है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1) में धातुओं की अभिक्रियाशीलता और विस्थापन अभिक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल C: गलत है क्योंकि कथन C असत्य है।
- विकल्प (B) केवल A और C: गलत है क्योंकि इसमें कथन C (जो कि गलत है) को सम्मिलित किया गया है।
- विकल्प (C) केवल A और B: गलत है क्योंकि कथन A और B एक-दूसरे के विपरीत हैं; जिंक और लेड कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील हैं, अतः B असत्य है।
#30. हमारी हथेली पर एसीटोन या पेट्रोल डालने पर हथेलियाँ ठंडा क्यों महसूस करती हैं?
(RRB JE 25/02/2026 )
- वाष्पीकरण और शीतलन (Evaporation and Cooling): एसीटोन, पेट्रोल या नेल पॉलिश रिमूवर जैसे पदार्थ अत्यधिक वाष्पशील (Volatile) द्रव होते हैं, जिनका क्वथनांक (Boiling point) कम होता है।
- जब इन्हें हथेली पर रखा जाता है, तो ये द्रव हथेली की सतह से वाष्पीकरण के लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा (Latent heat) अवशोषित कर लेते हैं।
- ऊष्मा के इस प्रकार अवशोषण के कारण हथेली की उस जगह का तापमान कम हो जाता है, जिससे हमें ठंडक (Cooling effect) महसूस होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 25/02/2026) में पदार्थ की अवस्थाओं और वाष्पीकरण के प्रभावों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): यह ऊष्मा के प्रवाह को अवरुद्ध नहीं करता, बल्कि त्वचा से ऊष्मा खींचकर वाष्प बनता है।
- विकल्प (B): यह त्वचा पर सामान्य नमी नहीं बढ़ाता, बल्कि तेजी से उड़ जाता है (वाष्पीकृत हो जाता है)।
- विकल्प (D): यह त्वचा के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं करता, यह पूरी तरह से एक भौतिक प्रक्रिया (Physical process) है।
#31. प्रिज्म (Prism) क्या करता है?
(RRB NTPC Tier I : 18 Apr 2016 Shift 2)
- प्रिज्म का कार्य (Function of a Prism): कांच का प्रिज्म एक पारदर्शी अपवर्तक माध्यम होता है जो प्रकाश की किरणों को अपने मार्ग से विचलित यानी अपवर्तित (Refract) कर देता है।
- जब प्रकाश की किरणें प्रिज्म के एक पृष्ठ से प्रवेश करती हैं और दूसरे पृष्ठ से बाहर निकलती हैं, तो अपवर्तन (Refraction) के कारण वे अपने मूल मार्ग से मुड़ जाती हैं। श्वेत प्रकाश के गुजरने पर यह वर्ण विक्षेपण (Dispersion) की घटना भी प्रदर्शित करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 18 Apr 2016 Shift 2) में प्रकाशिकी (Optics) और प्रिज्म के गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) प्रकाश को प्रतिबिंबित करता है: दर्पण प्रकाश को परावर्तित (Reflect) करता है, जबकि प्रिज्म पारदर्शी होने के कारण अपवर्तन करता है।
- विकल्प (B) यह प्रकाश को गुजरने से रोकता है: कांच पारदर्शी होता है, इसलिए यह प्रकाश को रोकता नहीं बल्कि अपने अंदर से गुजरने देता है।
- विकल्प (C) प्रकाश को तितर-बितर करता है: यह प्रकीर्णन (Scattering) से संबंधित है, जबकि प्रिज्म का मुख्य कार्य प्रकाश का अपवर्तन करना है।
#32. निम्नलिखित में से कौन सी रासायनिक अभिक्रिया विस्थापन अभिक्रिया को दर्शाती है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अधिक अभिक्रियाशील तत्व अपने से कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देता है, उसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- विश्लेषण: इस अभिक्रिया में जिंक (Zn) कॉपर सल्फेट (CuSO4) के विलयन से कॉपर को विस्थापित करके जिंक सल्फेट (ZnSO4) बनाता है और कॉपर (Cu) धातु अलग हो जाती है। चूँकि जिंक, कॉपर की तुलना में अधिक सक्रिय है, यह विस्थापन अभिक्रिया का एक सटीक उदाहरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) C(s) + O2(g) → CO2(g): यह एक संयोजन (Combination) या ऑक्सीकरण/दहन अभिक्रिया है।
- विकल्प (B) CaO(s) + H2O(l) → Ca(OH)2(aq): यह भी एक संयोजन अभिक्रिया है जिसमें दो पदार्थ मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (C) 2AgCl(s) → 2Ag(s) + Cl2(g): यह एक अपघटन (Decomposition) अभिक्रिया है।
#33. निम्नलिखित में से कौन सा एक रासायनिक परिवर्तन है?
(RRB JE CBT-I :- 2 June 2019 Shift 3)
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change): वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ का रासायनिक संगठन बदल जाता है और एक या एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। यह आमतौर पर एक अनुत्क्रमणीय (Irreversible) प्रक्रिया होती है।
- विश्लेषण: LPG (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) के दहन के दौरान इसके घटक (जैसे ब्यूटेन और प्रोपेन) ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड, जल वाष्प, ऊष्मा और प्रकाश का निर्माण करते हैं। चूँकि इसमें नए रासायनिक गुणों वाले पदार्थ बनते हैं, यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 2 June 2019 Shift 3) में भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) बर्फ का पिघलकर पानी बनना: यह केवल पदार्थ की अवस्था का बदलना है, जो एक भौतिक परिवर्तन (Physical Change) है।
- विकल्प (B) जल का उबलकर वाष्प बनना: यह भी भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता है।
- विकल्प (D) पानी में नमक का विघटन: यह एक भौतिक प्रक्रिया है जिसमें घोलने के बाद वाष्पीकरण विधि द्वारा नमक को पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
#34. निम्नलिखित में से किस प्रकार की अभिक्रिया में अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 1)
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है और नए यौगिक बनते हैं, उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहा जाता है।
- उदाहरण: जब बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट के विलयनों को मिलाया जाता है, तो उनके आयनों के आदान-प्रदान से बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 1) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) अपघटन (Decomposition): इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (B) योग अभिक्रिया (Addition / Combination): इसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (D) असमानुपातन अभिक्रिया (Disproportionation): यह एक विशेष प्रकार की रेडॉक्स अभिक्रिया है जिसमें एक ही तत्व का एक साथ ऑक्सीकरण और अपचयन होता है।
#35. निम्नलिखित में से कौन-सी विघटन अभिक्रिया का उदाहरण है जो विद्युत धारा के प्रयोग से होती है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
- विद्युत अपघटन अभिक्रिया (Electrolytic Decomposition Reaction): वह विघटन या अपघटन अभिक्रिया जिसमें किसी यौगिक के जलीय विलयन या गलित रूप में विद्युत धारा प्रवाहित करके उसे सरल घटकों में वियोजित किया जाता है, उसे विद्युत अपघटन कहते हैं।
- विश्लेषण: जब अम्लीय जल में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो जल (H2O) हाइड्रोजन (H2) और ऑक्सीजन (O2) गैस में वियोजित हो जाता है।
- रासायनिक समीकरण: 2H2O (l) –[विद्युत धारा]–> 2H2 (g) + O2 (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec, 2024 Shift 3) में रासायनिक अभिक्रियाओं और अपघटन के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म करना: यह ऊष्मा के प्रयोग से होने वाला ऊष्मीय अपघटन (Thermal decomposition) है, विद्युत धारा से नहीं।
- विकल्प (C) ऊष्मा द्वारा सोडियम बाईकार्बोनेट का अपघटन: यह भी ऊष्मीय अपघटन का ही एक उदाहरण है।
- विकल्प (D) ऊष्मा द्वारा पोटेशियम परमैंगनेट का अपघटन: यह भी ऊष्मा (heat) के प्रयोग से घटित होता है, न कि विद्युत धारा के उपयोग से।
A. पौधे वाष्पोत्सर्जन द्वारा अतिरिक्त पानी से छुटकारा पाते हैं।
B. अपशिष्ट उत्पादों को उन पत्तियों में संग्रहीत किया जा सकता है जो झड़ जाती हैं।
C. अपशिष्ट उत्पादों को रेजिन और गोंड के रूप में संग्रहीत किया जाता है, विशेष रूप से पुराने जाइलम में।
#36. पौधों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों से छुटकारा पाने की तकनीक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से सही है/हैं?
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 1)
- पौधों में अपशिष्ट निष्कासन (Waste Disposal in Plants): पौधों में जंतुओं की तरह कोई विशेष उत्सर्जी अंग नहीं होते हैं, इसलिए वे विभिन्न तरीकों से अपशिष्ट पदार्थों से छुटकारा पाते हैं:
- कथन A (वाष्पोत्सर्जन): पौधे वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) प्रक्रिया के माध्यम से अतिरिक्त पानी और गैसीय अपशिष्टों को बाहर निकालते हैं।
- कथन B (पत्तियों का झड़ना): कई अपशिष्ट उत्पाद पुरानी पत्तियों में संचित हो जाते हैं और समय आने पर वे पत्तियाँ झड़ जाती हैं।
- कथन C (रेजिन और गोंद): कुछ अपशिष्ट पदार्थ जैसे रेजिन (Resins) और गोंद (Gums) पुराने जाइलम (Old xylem) ऊतकों में संचित किए जाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 1) में पादप शरीर क्रिया विज्ञान (Plant Physiology) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A), (C) और (D): ये विकल्प आंशिक रूप से सही हैं क्योंकि इनमें से किसी एक या दो कथनों को ही सही माना गया है, जबकि पौधे उपर्युक्त तीनों विधियों (A, B और C) का उपयोग अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन और संग्रहण के लिए करते हैं।
#37. एस्टर में ________ गंध होती है।
(RRB JE CBT-I: 22 May, 2019 Shift 2)
- एस्टर की गंध (Smell/Odor of Esters): एस्टर (Esters) कार्बनिक यौगिक होते हैं जो कार्बोक्सिलिक एसिड और अल्कोहल की अभिक्रिया (एस्टरीकरण) से बनते हैं।
- इनकी विशेषता यह होती है कि अधिकांश एस्टर में बहुत ही मीठी और फलों जैसी (Fruity smell) खुशबू होती है।
- अपने इस विशेष गुण के कारण एस्टर का उपयोग मुख्य रूप से इत्र (Perfumes), सुगंधित पदार्थों और खाद्य पदार्थों में फ्लेवर (कृत्रिम स्वाद और गंध) देने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 22 May, 2019 Shift 2) में कार्बनिक रसायन और क्रियात्मक समूहों (Functional Groups) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सड़ी हुई: सड़ी हुई गंध हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) या सड़े हुए अंडों जैसी गैसों की होती है, एस्टर की नहीं।
- विकल्प (B) कड़वी: कड़वी गंध या स्वाद आमतौर पर कुछ क्षारों या एल्केलाइड्स (Alkaloids) का होता है।
- विकल्प (C) रासायनिक: यह कोई विशिष्ट वैज्ञानिक गंध नहीं है; एस्टर प्राकृतिक रूप से कई फलों में पाए जाते हैं और इनकी खुशबू सुगंधित होती है।
#38. उदासीनीकरण अभिक्रिया किस प्रकार की अभिक्रिया है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब कोई अम्ल किसी क्षार के साथ अभिक्रिया करता है, तो परस्पर प्रभाव को समाप्त करके लवण और जल बनाते हैं (जैसे: HCl + NaOH → NaCl + H2O)।
- इस प्रक्रिया में अम्ल और क्षार के आयनों के बीच परस्पर आदान-प्रदान होता है, इसलिए रासायनिक रूप से यह द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) का ही एक विशेष प्रकार है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 18 Dec, 2024 Shift 3) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) अपघटन अभिक्रिया: इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (C) विस्थापन अभिक्रिया: इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को उसके विलयन से विस्थापित करता है।
- विकल्प (D) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं।
#39. विश्व स्तर पर फिनोल उत्पादन की प्राथमिक औद्योगिक प्रक्रम क्या है और इस प्रक्रम में किस मध्यवर्ती का उपयोग किया जाता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 13 Jun, 2025 Shift 3)
- फिनोल उत्पादन का औद्योगिक प्रक्रम (Industrial Production of Phenol): विश्व स्तर पर फिनोल के व्यावसायिक और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए सबसे प्रमुख एवं महत्वपूर्ण विधि क्यूमीन प्रक्रम (Cumene Process) है, जिसे ‘हॉक प्रक्रम’ (Hock Process) के नाम से भी जाना जाता है।
- मध्यवर्ती (Intermediate): इस प्रक्रिया में बेंजीन और प्रोपलीन से क्यूमीन (आइसोप्रोपिलबेंजीन) बनाया जाता है, जिसके ऑक्सीकरण से क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड (Cumene Hydroperoxide) नामक मध्यवर्ती यौगिक प्राप्त होता है। इसके बाद इसके अम्लीय अपघटन से फिनोल और एसीटोन का निर्माण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 13 Jun, 2025 Shift 3) में उन्नत कार्बनिक रसायन और औद्योगिक प्रक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) रैशिंग प्रक्रम, क्लोरोबेंजीन: रैशिंग प्रक्रम फिनोल बनाने की एक पुरानी विधि है, लेकिन यह वर्तमान में विश्व स्तर पर प्राथमिक या सबसे व्यापक प्रक्रम नहीं है।
- विकल्प (B) हॉक प्रक्रम, बेंजीन: यद्यपि हॉक प्रक्रम सही है, लेकिन इसमें मध्यवर्ती के रूप में बेंजीन नहीं बल्कि ‘क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड’ का उपयोग/निर्माण होता है।
- विकल्प (D) डॉ प्रक्रम, टॉलूइन: डॉ प्रक्रम (Dow Process) क्लोरोबेंजीन से फिनोल बनाने की एक अन्य विधि है, जो इस संदर्भ में सही नहीं है।
#40. निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सी, संयोजन अभिक्रिया (combination reaction) नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (तत्व या यौगिक) मिलकर केवल एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, उसे संयोजन अभिक्रिया कहा जाता है।
- विश्लेषण: विकल्पों (A), (B), और (C) में दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक नया एकल उत्पाद बना रहे हैं, जो संयोजन अभिक्रिया के उदाहरण हैं। इसके विपरीत, विकल्प (D) एक उदासीनीकरण (Neutralization) या द्वि-विस्थापन अभिक्रिया है, जिसमें अम्ल (HCl) और क्षार (NaOH) आपस में अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, न कि संयोजन अभिक्रिया।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 24 Dec, 2025) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) C + O2 → CO2: कार्बन और ऑक्सीजन मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं (संयोजन अभिक्रिया)।
- विकल्प (B) 2Mg + O2 → 2MgO: मैग्नीशियम और ऑक्सीजन मिलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाते हैं (संयोजन अभिक्रिया)।
- विकल्प (C) N2 + 3H2 → 2NH3: नाइट्रोजन और हाइड्रोजन मिलकर अमोनिया बनाते हैं (संयोजन अभिक्रिया)।
#41. किसी संतुलित रासायनिक समीकरण में, प्रत्येक तत्व के परमाणु की कुल संख्या ________ होती है।
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, एक संतुलित रासायनिक समीकरण में अभिकारकों (Reactants) और उत्पादों (Products) दोनों पक्षों पर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या समान (बराबर) होती है।
- रासायनिक समीकरण को संतुलित करना इसलिए आवश्यक है ताकि यह संहित संरक्षण के नियम को पूरी तरह संतुष्ट कर सके।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Dec, 2025) में रासायनिक समीकरणों के संतुलन और मूलभूत नियमों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) सदैव परिवर्ती: रासायनिक अभिक्रिया में परमाणुओं की संख्या निश्चित और संरक्षित रहती है, वह बदलती (परिवर्ती) नहीं है।
- विकल्प (C) अभिक्रियक पक्ष पर अधिक: यह एक असंतुलित समीकरण की स्थिति हो सकती है, लेकिन संतुलित समीकरण में दोनों पक्षों के परमाणु हमेशा बराबर होते हैं।
- विकल्प (D) उत्पाद पक्ष पर अधिक: यह भी असंतुलित समीकरण को दर्शाता है, संतुलित समीकरण में ऐसा नहीं होता।
#42. अभिक्रियाशीलता श्रेणी के अनुसार, कौन-सी रासायनिक अभिक्रिया संभव है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- धातुओं की अभिक्रियाशीलता (Reactivity of Metals): सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) के अनुसार, अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के जलीय विलयन से विस्थापित कर देती है।
- विश्लेषण: जिंक (Zn) कॉपर (Cu) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील धातु है। इसलिए जब जिंक की अभिक्रिया कॉपर क्लोराइड (CuCl2) विलयन के साथ कराई जाती है, तो जिंक कॉपर को विस्थापित करके जिंक क्लोराइड (ZnCl2) बनाता है और कॉपर धातु मुक्त होती है। यह विस्थापन अभिक्रिया का एक सही उदाहरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1) में सक्रियता श्रेणी और विस्थापन अभिक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): सिल्वर (Ag), एल्युमिनियम (Al) की तुलना में कम सक्रिय है, इसलिए सिल्वर एल्युमिनियम को विस्थापित नहीं कर सकता।
- विकल्प (B): कॉपर (Cu), आयरन (Fe) से कम अभिक्रियाशील है, अतः कॉपर लोहे को विस्थापित नहीं कर पाएगा।
- विकल्प (C): कॉपर (Cu), जिंक (Zn) से कम अभिक्रियाशील है, इसलिए कॉपर जिंक क्लोराइड से जिंक को विस्थापित नहीं कर सकता।
#43. किसी ठोस को गर्म करने पर कणों का क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- ठोसों को गर्म करने का प्रभाव (Effect of Heating Solids): जब किसी ठोस पदार्थ को गर्म किया जाता है, तो उसे ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal energy) प्राप्त होती है।
- यह ऊर्जा ठोस के कणों (अणुओं या परमाणुओं) की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) को बढ़ा देती है, जिससे वे अपनी माध्य स्थितियों (mean positions) के चारों ओर अधिक ऊर्जा और तीव्रता के साथ कंपन करने लगते हैं।
- ऊर्जा में और अधिक वृद्धि होने पर वे अपने आकर्षण बलों को पार करके पिघलने (गलने) लगते हैं और द्रव अवस्था में बदल जाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 22 Dec, 2025) में पदार्थ के कणों के गुणों और ऊष्मा के प्रभावों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): सामान्य ताप पर गर्म करने से कण टूटकर अन्य तत्वों में परिवर्तित नहीं होते (यह नाभिकीय या रासायनिक अपघटन की स्थिति है)।
- विकल्प (C): गर्म करने पर कण स्थिर होने के बजाय और अधिक गतिशील या सक्रिय हो जाते हैं।
- विकल्प (D): कणों के बीच की अन्योन्यक्रिया पूरी तरह बंद नहीं होती, बल्कि तापमान बढ़ने पर उनका कंपन बढ़ता है।
#44. निम्नलिखित में से कौन सी रासायनिक अभिक्रिया हमेशा प्रकृति में ऊष्माशोषी होती है?
(RRB NTPC Tier I : 29 Apr 2016 Shift 2)
- वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): इस प्रकार की अभिक्रिया में किसी एकल अभिकारक को तोड़ने के लिए ऊष्मा (Heat), प्रकाश (Light) या विद्युत ऊर्जा (Electricity) के रूप में ऊर्जा की लगातार आवश्यकता होती है।
- चूँकि बंधों को तोड़ने और पदार्थों को वियोजित करने के लिए ऊर्जा का अवशोषण होता है, इसलिए सभी वियोजन अभिक्रियाएँ प्रकृति से सदैव ऊष्माशोषी (Endothermic) होती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 29 Apr 2016 Shift 2) में रासायनिक अभिक्रियाओं और ऊर्जा परिवर्तन के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) दहन अभिक्रिया: दहन एक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया है जिसमें भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- विकल्प (C) विस्थापन अभिक्रिया: अधिकांश विस्थापन अभिक्रियाएं ऊष्माक्षेपी होती हैं क्योंकि इनमें ऊर्जा मुक्त होती है।
- विकल्प (D) संयोजन अभिक्रिया: अधिकांश संयोजन अभिक्रियाएं (जैसे कोयले का जलना या चूने में पानी मिलाना) ऊष्माक्षेपी होती हैं।
#45. निम्नलिखित में से कौन-सी परिष्करण विधियाँ व्यावसायिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- विद्युत रासायनिक विधियां (Electrochemical Methods / Electrolytic Refining): धातुओं के परिष्करण (शोधन) के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण सबसे व्यापक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण विधि है।
- इस तकनीक का उपयोग कॉपर (तांबा), जिंक (जस्ता), टिन, निकल, सिल्वर (चांदी) और गोल्ड (सोना) जैसी महत्वपूर्ण औद्योगिक धातुओं के बड़े पैमाने पर उच्च शुद्धता (लगभग 99.9 प्रतिशत) प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
- इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु का एनोड, शुद्ध धातु का कैथोड और उसी धातु के लवण का जलीय विलयन विद्युत अपघट्य के रूप में उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 26 Dec, 2025) में धातुकर्म (Metallurgy) और धातु परिष्करण की विधियों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) भौतिक विधियां: जैसे आसवन (Distillation) और द्रवीकरण (Liquation), इनका उपयोग कुछ विशिष्ट और कम क्वथनांक/गलनांक वाली धातुओं तक ही सीमित होता है।
- विकल्प (C) रासायनिक विधियां: रासायनिक विधियों (जैसे मंडल परिष्करण या वाष्प प्रावस्था शोधन) का उपयोग मुख्य रूप से अर्धचालकों या विशिष्ट अति-शुद्ध धातुओं के लिए किया जाता है, लेकिन सामान्य और वृहद व्यावसायिक उपयोग विद्युत रासायनिक विधि का है।
- विकल्प (D) आयनिक विधियां: यह धातुकर्म में परिष्करण का कोई मानक या मुख्य व्यावसायिक वर्गीकरण नहीं है।


