रासायनिक अभिक्रियाएँ के महत्वपूर्ण प्रश्न
#1. तेल और वसा युक्त खाद्य पदार्थ नाइट्रोजन से प्रवाहित होते हैं क्योंकि
:(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 10 Jun, 2025 Shift 3)
- विकृतगंधिता (Rancidity): तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थों का उपचयन (Oxidation) होने पर उनका स्वाद और गंध खराब हो जाते हैं, जिसे विकृतगंधिता कहते हैं।
- नाइट्रोजन गैस का उपयोग: चिप्स या अन्य तैलीय खाद्य पदार्थों के पैकेट में नाइट्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है। चूँकि नाइट्रोजन एक निष्क्रिय (inert) गैस है, यह ऑक्सीजन को हटाकर खाद्य पदार्थों को ऑक्सीकृत होने से बचाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 10 Jun, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) हाइड्रोजन का विस्थापन: नाइट्रोजन पैकेजिंग से हाइड्रोजन को नहीं, बल्कि ऑक्सीजन को विस्थापित करती है।
- विकल्प (B) स्वाद बढ़ाना: नाइट्रोजन स्वाद को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ाती नहीं है, बल्कि खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाकर उनके मूल स्वाद को सुरक्षित रखती है।
- विकल्प (C) पोषण मूल्य जोड़ना: नाइट्रोजन एक रासायनिक रूप से निष्क्रिय गैस है जो खाद्य पदार्थों में कोई पोषण मूल्य (nutritional value) नहीं जोड़ती।
#2. निम्नलिखित में से कौन-सी उष्माक्षेपी प्रक्रिया है?
(RRB JE ME 30 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा (Heat) का भी उत्सर्जन होता है, उसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।
- बिना बुझे चूने की अभिक्रिया: जब कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा चूना – CaO) की जल (H2O) के साथ अभिक्रिया होती है, तो कैल्सियम हाइड्रोक्साइड (बुझा चूना) बनता है और भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ME 30 Aug 2019 Shift 1 CBT 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) उपरोक्त सभी: यह गलत है क्योंकि सभी विकल्प ऊष्माक्षेपी नहीं हैं।
- विकल्प (B) कपूर का उर्ध्वपातन: यह एक ऊष्माशोषी (Endothermic) प्रक्रिया है क्योंकि इसमें कपूर ठोस से गैस में बदलने के लिए ऊष्मा अवशोषित करता है।
- विकल्प (C) जल का वाष्पीकरण: यह भी एक ऊष्माशोषी प्रक्रिया है, क्योंकि पानी को भाप बनने के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है।
#3. सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में एथेनॉल (Ethanol) और एथनोइक (ethanoic) अम्ल अभिक्रिया करके एक सुगंधित यौगिक बनाते हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, अभिक्रिया के प्रकार और सांद्र H 2 SO 4 की भूमिका को सही प्रकार से निरूपित करता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification Reaction): जब एथेनॉल और एथनोइक अम्ल सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) की उपस्थिति में अभिक्रिया करते हैं, तो मीठी गंध (सुगंधित) वाला यौगिक **एस्टर** बनता है। इस प्रक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं।
- सांद्र H2SO4 की भूमिका: इस अभिक्रिया में सांद्र H2SO4 एक **उत्प्रेरक (Catalyst)** के रूप में अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है और साथ ही **निर्जलीकारक (Dehydrating Agent)** के रूप में जल के अणुओं को अलग करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 10/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) उदासीनीकरण अभिक्रिया: यह गलत है क्योंकि यहाँ अम्ल और क्षार की नहीं, बल्कि अम्ल और ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया हो रही है।
- विकल्प (B) ऑक्सीकरण अभिक्रिया: यह ऑक्सीकरण नहीं है, क्योंकि इसमें ऑक्सीजन जुड़ने या हाइड्रोजन निकलने जैसी सामान्य ऑक्सीकरण प्रक्रिया नहीं बल्कि एस्टर का निर्माण होता है।
- विकल्प (D) प्रतिस्थापन अभिक्रिया: यह प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं बल्कि एस्टरीकरण है, हालांकि H2SO4 निर्जलीकारक का काम करता है लेकिन अभिक्रिया का प्रकार प्रतिस्थापन नहीं है।
#4. कौन सी रासायनिक अभिक्रिया ऑर्थो-हाइड्रॉक्सीबेंजोइक एसिड का उत्पादन करती है, जो दवाओं के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाने वाला प्राथमिक प्रतिक्रिया उत्पाद है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 14 Aug, 2025 Shift 3)
- कोल्बे की अभिक्रिया (Kolbe’s Reaction): जब फिनॉक्साइड आयन (सोडियम फेनाक्साइड) को कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के साथ उच्च दाब और ताप पर गर्म किया जाता है, और फिर उसका अम्लीकरण (Acidification) किया जाता है, तो मुख्य उत्पाद के रूप में **ऑर्थो-हाइड्रॉक्सीबेंजोइक एसिड (सैलिसिलिक एसिड)** प्राप्त होता है।
- उपयोग: सैलिसिलिक एसिड का उपयोग मुख्य रूप से दवाइयों (जैसे एस्पिरिन बनाने) और अन्य औषधीय उत्पादों के कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 14 Aug, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) स्टीफन अभिक्रिया (Stephen Reaction): यह नाइट्राइल को ऐल्डिहाइड में बदलने के काम आती है, ऑर्थो-हाइड्रॉक्सीबेंजोइक एसिड बनाने में नहीं।
- विकल्प (C) रीमर-टीमैन अभिक्रिया (Reimer-Tiemann Reaction): इस अभिक्रिया द्वारा फिनोल से सैलिसिल्डिहाइड (Ortho-hydroxybenzaldehyde) का निर्माण होता है, न कि एसिड का।
- विकल्प (D) फ़्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया (Friedel-Crafts Reaction): यह बेंजीन वलय में ऐल्किल या ऐसिल समूह को जोड़ने (Alkylation/Acylation) की प्रक्रिया है।
#5. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया आमतौर पर वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निकल उत्प्रेरक का उपयोग करते हैं?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- योग अभिक्रिया (Addition Reaction / हाइड्रोजनीकरण): वनस्पति तेलों (जो असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं) में निकल ($Ni$) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर उन्हें संतृप्त वसा (वनस्पति घी) में परिवर्तित किया जाता है। यह एक प्रकार की **योग अभिक्रिया** है।
- उत्प्रेरक की भूमिका: इस प्रक्रिया में निकल (Nickel) या पैलेडियम (Pd) उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है जो अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 24 May 2019 Shift 3 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) प्रतिस्थापन अभिक्रिया: इसमें एक परमाणु या समूह दूसरे द्वारा प्रतिस्थापित होता है, जबकि हाइड्रोजनीकरण में हाइड्रोजन केवल जुड़ता है (विस्थापित कुछ नहीं होता)।
- विकल्प (C) ऑक्सीकरण अभिक्रिया: ऑक्सीकरण में ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का निष्कासन होता है, जो कि हाइड्रोजनीकरण (हाइड्रोजन के योग) के बिल्कुल विपरीत प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) विस्थापन अभिक्रिया: यह अभिक्रिया तब होती है जब अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से हटाता है, जो यहाँ लागू नहीं होता।
#6. हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ धातु सोडियम कार्बोनेट और सोडियम बाइकार्बोनेट की अभिक्रिया के बीच क्या समानता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
- अभिक्रिया: जब सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) या सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया करते हैं, तो दोनों ही स्थितियों में संगत लवण **सोडियम क्लोराइड (NaCl)**, जल (H2O) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस बनती है।
- मुख्य समानता: दोनों ही रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पाद के रूप में सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/11/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) हाइड्रोजन कार्बोनेट बनता है: यह गलत है क्योंकि सोडियम बाइकार्बोनेट (जिसे हाइड्रोजन कार्बोनेट भी कहते हैं) खुद अभिकारक के रूप में प्रयुक्त होता है, न कि नया उत्पाद बनता है।
- विकल्प (B) कार्बन मोनोऑक्साइड मुक्त होता है: यह गलत है, इन अभिक्रियाओं में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस निकलती है, न कि कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है: यह गलत है, धातु और अम्ल की सीधी अभिक्रिया से हाइड्रोजन गैस निकलती है, जबकि कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट के साथ हमेशा CO2 गैस निकलती है।
#7. जब किसी अधिक अभिक्रियाशील धातु को कम अभिक्रियाशील धातु वाले लवण विलयन में रखा जाता है, तो वह कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित कर देती है। इस अभिक्रिया को ______ के रूप में जाना जाता है।
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1)
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अधिक अभिक्रियाशील तत्व (धातु), कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक (लवण विलयन) से विस्थापित कर देता है, उसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए: $\text{Fe} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{FeSO}_4 + \text{Cu}$
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): धातुओं की सक्रियता श्रेणी यह निर्धारित करती है कि कौन सी धातु अधिक अभिक्रियाशील है और किसे विस्थापित कर सकती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (C) उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): यह अम्ल और क्षार के बीच होने वाली अभिक्रिया है जिसमें लवण और जल बनते हैं।
- विकल्प (D) अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद प्रदान करता है।
#8. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. कोलोइड् समांगी प्रतीत होते हैं क्योंकि उनके कण बहुत छोटे होते हैं। 2. आणविक स्तर पर कोलोइड् पूर्णतः समांगी होते हैं। 3. कोलोइड् कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं। 4. दूध एक कोलोइड् विलयन है।
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
- कोलाइड की प्रकृति (कथन 1): कोलाइड वास्तव में एक **विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture)** होता है, लेकिन इसके कणों का आकार बहुत सूक्ष्म होने के कारण यह नग्न आँखों से **समांगी प्रतीत होता है**। अतः कथन 1 सही है।
- प्रकाश का प्रकीर्णन / टिंडल प्रभाव (कथन 3): कोलाइडी कणों का आकार इतना बड़ा होता है कि वे उनसे टकराने वाली प्रकाश की किरणों को प्रकीर्णित (Scatter) कर देते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग स्पष्ट दिखाई देता है। अतः कथन 3 सही है।
- कोलाइडी उदाहरण (कथन 4): दूध एक पायस (Emulsion) का उत्कृष्ट उदाहरण है जो एक प्रकार का कोलाइडी विलयन है। अतः कथन 4 सही है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09/03/2026) में पूछा गया था।
- कथन 2 (आणविक स्तर पर समांगी): यह कथन गलत है क्योंकि कोलाइड आणविक या सूक्ष्म स्तर पर भी पूर्णतः समांगी नहीं होते, इनमें दो अलग-अलग प्रावस्थाएँ—परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) और परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium) स्पष्ट रूप से मौजूद होती हैं। इसलिए केवल 1, 3 और 4 सही हैं।
#9. निम्नलिखित में से कौन-सा एक रासायनिक परिवर्तन है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change): वह परिवर्तन जिसमें किसी पदार्थ की रासायनिक संरचना और उसके गुणधर्म पूरी तरह बदल जाते हैं तथा नया पदार्थ बनता है (जो कि अनुत्क्रमणीय यानी irreversible होता है), उसे रासायनिक परिवर्तन कहते हैं।
- लोहे में जंग लगना: जब लोहे को नमी और ऑक्सीजन (वायु) में खुला छोड़ा जाता है, तो आयरन ऑक्साइड (जंग) बनता है। यह एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें लोहे का नया यौगिक तैयार होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 25 May 2019 Shift 2 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एक कैन को तोड़ना: यह एक भौतिक परिवर्तन (Physical Change) है, क्योंकि कैन के टूटने से केवल उसका आकार बदलता है, कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता।
- विकल्प (C) अल्कोहल का वाष्पीकरण: यह भी एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें अल्कोहल केवल द्रव से वाष्प अवस्था में बदलता है, रासायनिक रूप से वह अल्कोहल ही रहता है।
- विकल्प (D) बर्फ का पिघलना: यह एक भौतिक परिवर्तन है जिसमें ठोस बर्फ पिघलकर जल (द्रव) में बदलती है, दोनों का रासायनिक सूत्र ($H_2O$) समान रहता है।
#10. जल विद्युत की उपस्थिति में H और O में विघटित हो जाता है, तो इस प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
(RRB JE ME 31 Aug 2019 CBT 2)
- विद्युत अपघटन (Electrolysis): जब जल ($H_2O$) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह अपने घटक तत्वों—हाइड्रोजन ($H_2$) और ऑक्सीजन ($O_2$) में विघटित हो जाता है। विद्युत ऊर्जा के उपयोग से होने वाले इस रासायनिक अपघटन को विद्युत अपघटन कहा जाता है।
- गैसों का मुक्त होना: इस प्रक्रिया के दौरान कैथोड (ऋण आवेशित इलेक्ट्रोड) पर हाइड्रोजन गैस और एनोड (धन आवेशित इलेक्ट्रोड) पर ऑक्सीजन गैस जमा होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ME 31 Aug 2019 CBT 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) प्रकाश-रासायनिक अपघटन: यह अपघटन सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा द्वारा होता है, न कि विद्युत धारा द्वारा (जैसे सिल्वर क्लोराइड का प्रकाश में विघटित होना)।
- विकल्प (C) तापीय अपघटन: यह प्रक्रिया ऊष्मा (Heat) के प्रयोग से होती है, जिसमें किसी यौगिक को उच्च तापमान पर गर्म करके तोड़ा जाता है।
- विकल्प (D) विस्थापन अभिक्रिया: यह एक ऐसी अभिक्रिया है जिसमें अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके लवण विलयन से हटाता है, यह अपघटन का प्रकार नहीं है।
#11. पानी जैसे यौगिक में हाइड्रोजन के द्रव्यमान और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा होता है –
(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)
- निश्चित अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions): इसके अनुसार, किसी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित (स्थिर) अनुपात में मौजूद होते हैं।
- जल में द्रव्यमान का अनुपात: पानी का रासायनिक सूत्र $H_2O$ होता है।
- हाइड्रोजन के 2 परमाणुओं का कुल द्रव्यमान = $2 \times 1 = 2$ u
- ऑक्सीजन के 1 परमाणु का द्रव्यमान = $16$ u
- द्रव्यमान का अनुपात = $2 : 16$ या सरल करने पर **$1 : 8$** प्राप्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) 1 : 16: यह गलत है क्योंकि ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान 16 है, लेकिन हाइड्रोजन का कुल द्रव्यमान 2 होने के कारण अनुपात 2:16 (अर्थात 1:8) बनता है, न कि 1:16।
- विकल्प (C) 3 : 16: यह अनुपात जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान के लिए गणितीय रूप से सही नहीं बैठता है।
- विकल्प (D) 2 : 8: यद्यपि आरंभिक गणना में हाइड्रोजन का कुल द्रव्यमान 2 और ऑक्सीजन का 16 होता है ($2:16$), जिसे सरल करने पर 1:8 लिखा जाता है, इसलिए मानक रूप में सही उत्तर 1:8 ही माना जाता है।
#12. निम्नलिखित में से कौन-सी संयोजन अभिक्रिया उष्माक्षेपी अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
#13. द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन (निर्माण) किया जा सकता है और न ही विनाश किया जा सकता है। अर्थात, अभिक्रिया से पहले अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, अभिक्रिया के बाद बनने वाले उत्पादों के कुल द्रव्यमान के हमेशा बराबर होता है।
- प्रतिपादन: इस महत्वपूर्ण नियम को सबसे पहले 1774 में एंथोनी लेवोशिए (Antoine Lavoisier) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) आयतन का निर्माण/नष्ट होना: यह गलत है क्योंकि रासायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारकों और उत्पादों का आयतन बदल सकता है, आयतन संरक्षण का कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है।
- विकल्प (C) दाब का निर्माण/नष्ट होना: यह भी गलत है, रासायनिक प्रतिक्रियाओं के दौरान गैसों के कारण दाब घट या बढ़ सकता है।
- विकल्प (D) तापमान का निर्माण/नष्ट होना: यह गलत है क्योंकि अभिक्रियाओं के दौरान ऊष्मा (तापमान) का उत्सर्जन या अवशोषण होता है (ऊष्माक्षेपी या ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ)।
#14. उन धातुओं के सल्फाइड अयस्क, जो सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित होते हैं, पहले ऑक्साइड में रूपांतरित होते हैं। इस रूपांतरण के लिए आवश्यक शर्त ______________ है।
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- भर्जन (Roasting): सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं (जैसे जिंक, लेड, कॉपर आदि) के **सल्फाइड अयस्कों** को धातु ऑक्साइड में बदलने के लिए उन्हें **अधिक वायु की उपस्थिति (या अधिकता)** में उच्च ताप पर गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया को भर्जन कहते हैं। (जैसे: $2\text{ZnS} + 3\text{O}_2 \xrightarrow{\Delta} 2\text{ZnO} + 2\text{SO}_2$)
- निस्तापन (Calcination): इसके विपरीत, कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु या ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में गर्म करके ऑक्साइड में बदला जाता है, जिसे निस्तापन कहते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) उच्च तापमान की उपस्थिति: तापमान आवश्यक है, लेकिन केवल तापमान से काम नहीं चलता; सल्फाइड को ऑक्साइड में बदलने के लिए ऑक्सीजन (वायु) की सीधी और प्रचुर उपस्थिति अनिवार्य होती है।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति: ऑक्सीजन की अनुपस्थिति या सीमित मात्रा ‘निस्तापन’ (Calcination) के लिए होती है, सल्फाइड अयस्कों के भर्जन के लिए नहीं।
- विकल्प (D) उच्च दाब की उपस्थिति: इस धातु-कर्म (Metallurgical) प्रक्रिया में उच्च दाब की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
#15. निम्नलिखित समीकरण किस प्रकार की अभिक्रिया का उदाहरण है? CuSO 4 + 2NaOH → Cu(OH) 2 + Na 2 SO 4
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों (या मूलकों) का आदान-प्रदान होता है, द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती है। इस समीकरण में $\text{CuSO}_4$ और $\text{NaOH}$ के आयनों की अदला-बदली से कॉपर हाइड्रोक्साइड ($\text{Cu(OH)}_2$) का नीला अवक्षेप और सोडियम सल्फेट ($\text{Na}_2\text{SO}_4$) बनता है।
- अवक्षेपण: चूँकि इस अभिक्रिया में एक अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) का निर्माण होता है, इसे अवक्षेपण अभिक्रिया के अंतर्गत भी देखा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) दहन अभिक्रिया: इसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ जलकर ऊष्मा या प्रकाश उत्पन्न नहीं करता है।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक एकल उत्पाद बनाते हैं, जबकि यहाँ दो नए उत्पाद बने हैं।
- विकल्प (D) उदासीनीकरण अभिक्रिया: यह आमतौर पर अम्ल और क्षार के बीच होती है जिससे लवण और जल बनता है (यहाँ सोडियम हाइड्रोक्साइड क्षार है लेकिन कॉपर सल्फेट एक लवण है, इसलिए सही और सटीक वर्गीकरण द्विविस्थापन अभिक्रिया है)।
#16. फेरस सल्फेट को गर्म करने पर निम्नलिखित में से क्या प्राप्त होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 3)
- तापीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब हरे रंग के फेरस सल्फेट के क्रिस्टल ($FeSO_4 \cdot 7H_2O$) को गर्म किया जाता है, तो पहले जल के अणु बाहर निकलते हैं और रंग सफेद हो जाता है। तेज गर्म करने पर यह अपघटित होकर फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$), सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) और सल्फर ट्राइऑक्साइड ($SO_3$) बनाते हैं। समीकरण:
$2FeSO_4(s) \xrightarrow{\Delta} Fe_2O_3(s) + SO_2(g) + SO_3(g)$ - विशेषता: इस अभिक्रिया के दौरान सल्फर के जलने जैसी घुटन पैदा करने वाली विशिष्ट गंध ($SO_2$ और $SO_3$ गैसों के कारण) आती है और फेरिक ऑक्साइड का रंग भूरा-लाल हो जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल फेरिक ऑक्साइड: यह अधूरा है क्योंकि इस अपघटन में ठोस फेरिक ऑक्साइड के साथ-साथ दो गैसें ($SO_2$ और $SO_3$) भी मुक्त होती हैं।
- विकल्प (C) फेरिक ऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड: यह भी अधूरा है क्योंकि इसमें सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) का भी निर्माण होता है।
- विकल्प (D) फेरिक ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड: यह भी अधूरा विकल्प है क्योंकि इसके साथ सल्फर ट्राइऑक्साइड ($SO_3$) गैस भी निकलती है।
#17. क्लोरोफॉर्म और HNO 3 की अभिक्रिया से कौन-सी गैस उत्सर्जित होती है?
(RPF Constable 2018 11 Feb 2019)
- रासायनिक अभिक्रिया: जब क्लोरोफॉर्म ($\text{CHCl}_3$) की अभिक्रिया सांद्र नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$) के साथ कराई जाती है, तो नाइट्रोक्लोरोफॉर्म या **क्लोरोपिक्रिन ($\text{CCl}_3\text{NO}_2$)** का निर्माण होता है।
- उपयोग और प्रकृति: क्लोरोपिक्रिन एक विषैला तैलीय द्रव है जिसका उपयोग कीटनाशक (Fumigant) और युद्ध में विषैली गैस के रूप में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 11 Feb 2019) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) आँसू गैस: हालांकि क्लोरोपिक्रिन का उपयोग भी आँखों में जलन पैदा करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन रासायनिक रूप से इस अभिक्रिया का विशिष्ट उत्पाद ‘क्लोरोपिक्रिन’ कहलाता है (आँसू गैस के रूप में अल्फा-क्लोरोएसीटोफेनोन का भी व्यापक उपयोग होता है)।
- विकल्प (B) मिथाइल आइसोसाइनेट: यह भोपाल गैस त्रासदी के लिए उत्तरदायी अत्यंत विषैली गैस है, जिसका क्लोरोफॉर्म और $\text{HNO}_3$ की अभिक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) लूसईसैट: यह एक विषैली फफोला पैदा करने वाली (blister agent) गैस है, जो आर्सेनिक यौगिकों से संबंधित है।
#18. सिनाबार अयस्क से सीधे अपचयन के बजाय, दो चरणों वाली तापन प्रक्रिया ( Heating steps) द्वारा मर्करी (पारद) क्यों प्राप्त किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 19/02/2026 )
- सिनाबार से मर्करी निष्कर्षण: मर्करी (पारद) का अयस्क सिनाबार ($\text{HgS}$) होता है। इसे सीधे अपचयित करके मर्करी प्राप्त करना कठिन होता है, इसलिए इसे दो चरणों में गर्म किया जाता है:
- प्रथम चरण (भर्जन): सिनाबार ($\text{HgS}$) को वायु में गर्म करके पहले मर्करी ऑक्साइड ($\text{HgO}$) में बदला जाता है ($2\text{HgS} + 3\text{O}_2 \xrightarrow{\Delta} 2\text{HgO} + 2\text{SO}_2$)।
- द्वितीय चरण: प्राप्त मर्करी ऑक्साइड को और अधिक गर्म करने पर यह स्वतः अपचयित होकर धातु रूप में मर्करी देता है ($2\text{HgO} \xrightarrow{\Delta} 2\text{Hg} + \text{O}_2$)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 19/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) मर्करी धातु का ऑक्सीजन से अभिक्रिया करना: यह गलत है, बल्कि उच्च ताप पर मर्करी ऑक्साइड खुद विघटित होकर मर्करी धातु और ऑक्सीजन गैस देता है।
- विकल्प (C) मर्करी ऑक्साइड का वायु की अनुपस्थिति में बनना: यह गलत है क्योंकि मर्करी ऑक्साइड बनाने के लिए हवा (ऑक्सीजन) की उपस्थिति अनिवार्य होती है (भर्जन प्रक्रिया)।
- विकल्प (D) मर्करी सल्फाइड का पिघलना: सिनाबार के दो चरणों में गर्म करने का कारण इसके गलनांक से संबंधित नहीं, बल्कि रासायनिक रूप से इसे ऑक्साइड में बदलकर आसानी से अपचयित करने से है।
#19. कठोर जल में साबुन के उपयोग का एक सामान्य दोष कौन-सा है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)
- कठोर जल में साबुन की समस्या: कठोर जल में कैल्शियम ($Ca^{2+}$) और मैग्नीशियम ($Mg^{2+}$) के घुलनशील लवण मौजूद होते हैं। जब साबुन को ऐसे पानी में मिलाया जाता है, तो ये आयन साबुन के साथ अभिक्रिया करके एक अघुलनशील तैलीय पदार्थ (स्कम / Scum या अवक्षेप) बनाते हैं।
- परिणाम: इसके कारण पर्याप्त मात्रा में झाग नहीं बन पाता और साबुन की बहुत अधिक बर्बादी होती है तथा कपड़े धोने में कठिनाई आती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) बहुत जल्दी घुलना: साबुन कठोर जल में जल्दी घुलने के बजाय कैल्शियम/मैग्नीशियम के साथ अघुलनशील अवक्षेप बना लेता है।
- विकल्प (C) बहुत अधिक झाग बनाना: यह बिल्कुल विपरीत है; कठोर जल में साबुन बहुत कम या न के बराबर झाग बनाता है।
- विकल्प (D) रंग खो देना: साबुन का कठोर जल में रंग खोना मुख्य दोष नहीं है, बल्कि झाग न बनने और मैल (स्कम) का जमना मुख्य समस्या है।
#20. धातुकर्म में कौन सी विधि विशेष रूप से कार्बोनेट अयस्कों को गर्म करके धातु ऑक्साइड के निर्माण का वर्णन करती है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 11 Aug, 2025 Shift 2)
- निस्तापन या कैल्सीनेशन (Calcination): वह प्रक्रिया जिसमें कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु (या ऑक्सीजन की अनुपस्थिति) में उनके गलनांक से कम तापमान पर तीव्रता से गर्म किया जाता है, जिससे वे धातु ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड गैस में बदल जाते हैं, कैल्सीनेशन कहलाती है। (जैसे: $\text{ZnCO}_3 \xrightarrow{\Delta} \text{ZnO} + \text{CO}_2$)
- भर्जन (Roasting) से अंतर: भर्जन में सल्फाइड अयस्कों को ‘अधिक वायु’ में गर्म किया जाता है, जबकि कैल्सीनेशन में कार्बोनेट अयस्कों को ‘सीमित वायु’ में गर्म किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 11 Aug, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कैल्सीफिकेशन (Calcification): यह जीव विज्ञान से जुड़ी प्रक्रिया है (जैसे ऊतकों में कैल्शियम लवण का जमा होना), धातुकर्म से इसका कोई संबंध नहीं है (यह केवल नाम का भ्रम पैदा करने के लिए दिया गया है)।
- विकल्प (B) क्लोरीनीकरण (Chlorination): यह पानी को शुद्ध करने या कार्बनिक यौगिकों में क्लोरीन जोड़ने की विधि है।
- विकल्प (D) कार्बोनेशन (Carbonation): यह पेय पदार्थों में कार्बन डाइऑक्साइड घोलने या खनिजों पर $CO_2$ की रासायनिक क्रिया से संबंधित प्रक्रिया है।
#21. लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए सामान्यतः किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 06/02/2026 )
- गैल्वेनीकरण (Galvanisation): लोहे या इस्पात को जंग (Rusting) से बचाने के लिए उस पर पिघले हुए जस्ते (Zinc) की एक पतली परत चढ़ाने की विधि को गैल्वेनीकरण या यशदलेपन कहते हैं। जस्ता लोहे को सीधे वायु और नमी के संपर्क में आने से रोकता है, जिससे लोहे का क्षरण नहीं होता।
- सुरक्षा का कारण: जस्ता रासायनिक रूप से सक्रिय होने के कारण ऑक्सीजन से क्रिया करके अपनी सुरक्षात्मक परत बना लेता है और लोहे को बचाए रखता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 06/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) चुंबकन (Magnetising): इससे लोहे में चुंबकीय गुण उत्पन्न होते हैं, जंग रोकने से इसका कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (B) गलन (Melting): धातु को पिघलाने से जंग नहीं रुकती, बल्कि यह धातु को ढालने की प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) तापन (Heating): खुले में गर्म करने से लोहा ऑक्सीजन के साथ तेजी से क्रिया करके और अधिक ऑक्सीकृत (संक्षारित) हो सकता है।
#22. कैल्सीयम कार्बोनेट को गर्म करने पर कैल्सीयम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होते हैं। यह किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- अपघटन या वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद प्रदान करता है, अपघटन अभिक्रिया कहलाती है। ऊष्मा (Heat) के प्रयोग से होने वाले इस प्रकार के अपघटन को **तापीय अपघटन (Thermal Decomposition)** कहते हैं।
- रासायनिक समीकरण: जब कैल्सियम कार्बोनेट (चूना पत्थर, $\text{CaCO}_3$) को गर्म किया जाता है, तो यह अपघटित होकर कैल्सियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$, बिना बुझा चूना) और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) बनाता है:
$\text{CaCO}_3(s) \xrightarrow{\Delta} \text{CaO}(s) + \text{CO}_2(g)$ - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 26/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): यह अपघटन के बिल्कुल विपरीत होती है, जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक एकल उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (C) विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): इसमें अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके लवण विलयन से विस्थापित करता है।
- विकल्प (D) दोहरी विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): इसमें दो यौगिकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान होता है।
#23. उस विकल्प का चयन कीजिए, जो उत्पाद X और Y का सूत्र देकर निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया को पूर्ण करता है।2 Na + 2 CH 3 CH 2 OH X + Y
(Not found 12/03/2026 )
- सोडियम और एथेनॉल की अभिक्रिया: जब सोडियम धातु ($\text{Na}$) एथेनॉल ($\text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH}$) के साथ अभिक्रिया करती है, तो सोडियम एथोक्साइड ($\text{CH}_3\text{CH}_2\text{O}^-\text{Na}^+$) का निर्माण होता है और साथ ही हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) उत्सर्जित होती है।
- संतुलित समीकरण: संतुलित रासायनिक समीकरण इस प्रकार है:
$2\text{Na} + 2\text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} \rightarrow 2\text{CH}_3\text{CH}_2\text{O}^-\text{Na}^+ (\text{X}) + \text{H}_2 (\text{Y})$ - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न हाल ही की परीक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरणों पर आधारित है।
- विकल्प (A) Y = H2: इसमें उत्पाद Y तो सही है, लेकिन समीकरण को संतुलित करने के आधार पर X के साथ गुणांक (2) और सही संरचना विकल्प (D) में पूरी तरह सटीक बैठती है।
- विकल्प (B) Y = H2O: यह गलत है क्योंकि इस अभिक्रिया में जल ($\text{H}_2\text{O}$) नहीं बल्कि हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) निकलती है।
- विकल्प (C) Y = O2: यह गलत है क्योंकि यहाँ ऑक्सीजन गैस ($\text{O}_2$) मुक्त नहीं होती है।
#24. कार्बनिक यौगिकों के वर्ग (स्तम्भ I) का मिलान प्रयुक्त प्रत्यय (स्तम्भ II) से कीजिए।
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1)
- कार्बनिक यौगिकों के अनुलग्नक (Suffix / प्रत्यय): आईयूपीएसी (IUPAC) नामकरण पद्धति में विभिन्न क्रियात्मक समूहों (Functional Groups) के लिए विशिष्ट प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है:
- ऐल्कोहल (Alcohol): प्रत्यय -ॉल (-ol)
- एल्डिहाइड (Aldehyde): प्रत्यय -अल (-al)
- कीटोन (Ketone): प्रत्यय -ोन (-one)
- कार्बोक्जिलिक अम्ल (Carboxylic acid): प्रत्यय -ओइक अम्ल (-oic acid)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- प्रत्येक क्रियात्मक समूह के रासायनिक गुणों और उनके IUPAC नियमों के अनुसार उनका सही प्रत्यय उनके नाम के अंत में जोड़ा जाता है, जिससे उनके मिलान वाले विकल्पों को आसानी से पहचाना जा सकता है।
#25. SN 2 तंत्र के माध्यम से एक एल्कोक्साइड आयन के प्राथमिक एल्काइल हैलाइड पर आक्रमण करने पर कौन सी प्रतिक्रिया होती है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 03 Sept, 2025 Shift 1)
- विलियमसन संश्लेषण (Williamson Synthesis): यह सममित और असम्मित ईथर (Ethers) के निर्माण की एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला विधि है। इस अभिक्रिया में एक एल्कोक्साइड आयन ($\text{R-O}^-$) किसी प्राथमिक एल्काइल हैलाइड ($\text{R’-X}$) पर **$\text{S}_N2$ (द्वि-आणविक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन)** क्रिया-तंत्र के माध्यम से आक्रमण करता है, जिससे ईथर प्राप्त होता है।
- समीकरण: $\text{R-O}^- \text{Na}^+ + \text{R’-X} \rightarrow \text{R-O-R’} + \text{NaX}$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 03 Sept, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) आर्नईट-ईस्टर्ट संश्लेषण (Arndt-Eistert Synthesis): यह कार्बोक्जिलिक अम्ल की श्रृंखला को एक कार्बन बढ़ाने (Homologation) की विधि है।
- विकल्प (B) फ्रीडलैंडर संश्लेषण (Friedländer Synthesis): यह क्विनोलिन (Quinoline) और उसके व्युत्पन्न बनाने की चक्रीय संघनन अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) कौमारिन संश्लेषण (Coumarin Synthesis): यह कौमारिन और उसके यौगिकों के संश्लेषण से संबंधित अभिक्रिया है।
#26. अमोनियम सल्फेट के साथ करने पर बेरियम क्लोराइड, बेरियम सल्फेट और अमोनियम क्लोराइड बनाता है। निम्नलिखित में से कौन सही रूप से शामिल के प्रकार का प्रतिनिधित्व करता है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): जब बेरियम क्लोराइड ($\text{BaCl}_2$) के विलयन की अमोनियम सल्फेट $((\text{NH}_4)_2\text{SO}_4)$ के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो बेरियम सल्फेट ($\text{BaSO}_4$) का सफेद रंग का अघुलनशील ठोस (**अवक्षेप**) प्राप्त होता है और साथ ही अमोनियम क्लोराइड बनता है। ऐसी द्विविस्थापन अभिक्रिया जिसमें अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) का निर्माण होता है, अवक्षेपण अभिक्रिया कहलाती है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{BaCl}_2 + (\text{NH}_4)_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{BaSO}_4\downarrow + 2\text{NH}_4\text{Cl}$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE 25 May 2019 Shift 1 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऑक्सीकरण अभिक्रिया: इसमें ऑक्सीकरण या अपचयन जैसा इलेक्ट्रॉनों/ऑक्सीजन का लेन-देन नहीं होता, बल्कि आयनों का परस्पर आदान-प्रदान होता है।
- विकल्प (C) संयुक्त अभिक्रिया: संयोजन अभिक्रिया में दो अभिकारक मिलकर केवल एक एकल उत्पाद बनाते हैं, जबकि यहाँ दो नए यौगिक बनते हैं।
- विकल्प (D) दहन अभिक्रिया: इसमें पदार्थ ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर ऊष्मा या प्रकाश उत्पन्न नहीं करता है।
#27. टंगस्टन का प्रतीक क्या है?
(RPF Constable 2018 25 Jan 2019 Shift 1)
- टंगस्टन का प्रतीक: टंगस्टन का रासायनिक प्रतीक **W** होता है, जो इसके जर्मन नाम **’वोल्फ्राम’ (Wolfram)** से लिया गया है।
- विशेषता: इसका गलनांक (Melting Point) सभी धातुओं में सबसे अधिक (लगभग 3422°C) होता है, जिसके कारण इसका उपयोग मुख्य रूप से बिजली के बल्बों के फिलामेंट (Tungsten Filament) बनाने में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 25 Jan 2019 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) Tn: यह किसी भी ज्ञात रासायनिक तत्व का मानक प्रतीक नहीं है।
- विकल्प (B) Tu: यह भी टंगस्टन का प्रतीक नहीं है (तत्व ‘थूलियम’ का प्रतीक Tm होता है)।
- विकल्प (C) Tg: यह भी टंगस्टन के लिए मान्य प्रतीक नहीं है। रासायनिक रूप से टंगस्टन का लैटिन/जर्मन नाम वोल्फ्राम होने के कारण इसका प्रतीक ‘W’ तय किया गया है।
#28. क्या होता है जब जिंक की छड़ को जलीय कॉपर सल्फेट विलयन में रखा जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): जब जिंक ($\text{Zn}$) की छड़ को कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के नीले रंग के विलयन में डुबोया जाता है, तो अधिक सक्रिय जिंक, कॉपर को विस्थापित कर देता है और रंगहीन जिंक सल्फेट ($\text{ZnSO}_4$) बनाता है। समीकरण:
$\text{Zn} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{Cu}$ - प्रेक्षण (Observation): कॉपर सल्फेट का नीला रंग धीरे-धीरे फीका पड़ जाता है और जिंक की छड़ पर भूरे रंग की कॉपर (तांबे) की परत जम जाती है। यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया भी है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/11/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) तापमान गिर जाता है: यह गलत है क्योंकि यह एक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया है, जिससे विलयन का तापमान बढ़ता है (गिरता नहीं है)।
- विकल्प (C) उष्णता की आवश्यकता: इस स्वतः होने वाली विस्थापन अभिक्रिया को शुरू करने के लिए बाहरी ऊष्मा की आवश्यकता नहीं होती है।
- विकल्प (D) कोई रासायनिक परिवर्तन नहीं: यह गलत है क्योंकि यहाँ स्पष्ट रूप से रासायनिक परिवर्तन होता है (रंग का बदलना और कॉपर का निक्षेपण)।
#29. किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया में एक यौगिक, दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में खंडित हो जाता है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 27/03/2026 )
- अपघटन या वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक एकल अभिकारक (यौगिक) टूटकर या खंडित होकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद प्रदान करता है, अपघटन अभिक्रिया कहलाती है। यह संयोजन अभिक्रिया के ठीक विपरीत होती है।
- ऊर्जा के स्रोत: अपघटन की प्रक्रिया आमतौर पर ऊष्मा (तापीय अपघटन), प्रकाश (प्रकाश-रासायनिक अपघटन) या विद्युत ऊर्जा (विद्युत अपघटन) के द्वारा कराई जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC GRADUATE CBT 1 : 27/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) संयुक्त अभिक्रिया (Combination Reaction): इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक एकल उत्पाद बनाते हैं (खंडित होने के बजाय जुड़ते हैं)।
- विकल्प (B) विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करता है।
- विकल्प (D) उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): यह अम्ल और क्षार के बीच होने वाली अभिक्रिया है जिससे लवण और जल बनते हैं।
#30. कैल्सियम ऑक्साइड पानी के साथ प्रवलता से अभिक्रिया करके बुझा हुआ चूना बनाता है, जिससे बड़ी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। यह अभिक्रिया निम्नलिखित में से किस प्रकार की उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 1)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब दो या दो से अधिक अभिकारक (यौगिक या तत्व) आपस में संयोग करके केवल एक एकल उत्पाद बनाते हैं, तो उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं।
- रासायनिक समीकरण और ऊष्मा: जब बिना बुझा चूना (कैल्सियम ऑक्साइड, $\text{CaO}$) जल ($\text{H}_2\text{O}$) के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करता है, तो बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रोक्साइड, $\text{Ca(OH)}_2$) बनता है और भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है (अतः यह एक **ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया** भी है)। समीकरण:
$\text{CaO}(s) + \text{H}_2\text{O}(l) \rightarrow \text{Ca(OH)}_2(aq) + \text{ऊष्मा}$ - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) अपघटन अभिक्रिया: इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है, जो संयोजन के बिलकुल विपरीत है।
- विकल्प (B) द्वि-अपघटन अभिक्रिया: इसमें दो यौगिकों के आयनों के बीच आदान-प्रदान होता है।
- विकल्प (D) अवक्षेपण अभिक्रिया: इसमें किसी अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) का निर्माण होता है, जबकि यहाँ कैल्सियम हाइड्रोक्साइड का जलीय विलयन (सुसंगत घोल) बनता है।
#31. अभिक्रिया NaOH + HCl → NaCl + H 2 O निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- द्वि-विस्थापन एवं उदासीनीकरण अभिक्रिया (Double Displacement / Neutralization Reaction): जब एक अम्ल ($\text{HCl}$) और एक क्षार ($\text{NaOH}$) आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो उनके आयनों के परस्पर आदान-प्रदान (Exchange of ions) से लवण ($\text{NaCl}$) और जल ($\text{H}_2\text{O}$) का निर्माण होता है। इस प्रकार की अम्ल-क्षार अभिक्रिया को **उदासीनीकरण अभिक्रिया** भी कहा जाता है, जो कि रासायनिक वर्गीकरण के अनुसार एक **द्वि-विस्थापन अभिक्रिया** का ही एक विशेष प्रकार है।
- समीकरण: $\text{NaOH} + \text{HCl} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) विस्थापन प्रतिक्रिया (Displacement Reaction): इसमें कोई एकल अधिक सक्रिय तत्व किसी अन्य तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित नहीं कर रहा, बल्कि दोनों यौगिकों के आयन आपस में अदला-बदली कर रहे हैं।
- विकल्प (B) अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): इसमें कोई अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) नीचे नहीं बैठता है, बल्कि सोडियम क्लोराइड पानी में पूरी तरह घुलनशील रहता है।
- विकल्प (C) वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया: इसमें कोई एकल अभिकारक टूटकर सरल उत्पाद नहीं बना रहा, बल्कि दो अभिकारक मिलकर नए उत्पाद बना रहे हैं।
#32. जब कोई अम्ल धातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, तब क्या होता है?
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2)
- अम्ल और धातु ऑक्साइड की अभिक्रिया: धातु ऑक्साइड (जैसे $\text{CuO}, \text{MgO}$ आदि) स्वभाव से क्षारीय (Basic) होते हैं। जब कोई अम्ल किसी धातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह एक प्रकार की उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया होती है, जिसके फलस्वरूप **लवण (Salt) और जल ($\text{H}_2\text{O}$)** बनते हैं।
- रासायनिक समीकरण उदाहरण:
$\text{CuO (धातु ऑक्साइड)} + 2\text{HCl (अम्ल)} \rightarrow \text{CuCl}_2 \text{ (लवण)} + \text{H}_2\text{O (जल)}$ - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ECE : 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल लवण बनता है: यह अधूरा है क्योंकि अम्ल और क्षारीय ऑक्साइड की क्रिया से लवण के साथ-साथ जल का भी निर्माण होता है।
- विकल्प (B) लवण और हाइड्रोजन गैस बनते हैं: अम्ल की ‘धातु’ (जैसे Zn + HCl) के साथ अभिक्रिया से हाइड्रोजन गैस निकलती है, न कि ‘धातु ऑक्साइड’ के साथ।
- विकल्प (D) केवल जल बनता है: यह गलत है क्योंकि इस अभिक्रिया में लवण भी मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है।
#33. सोने और चांदी जैसी कम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )
- कम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण: सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित धातुएँ (जैसे सोना [Gold], चांदी [Silver] और प्लैटिनम) अत्यधिक कम अभिक्रियाशील (Unreactive) होती हैं। ये प्रकृति में प्रायः मुक्त या स्वतंत्र अवस्था (Native state) में पाई जाती हैं।
- रासायनिक विधियाँ: कुछ अयस्कों के रूप में मिलने पर इन्हें रासायनिक विधियों (जैसे सायनाइड प्रक्रम / Leaching) या सरल तापन द्वारा पृथक किया जाता है, क्योंकि ये अन्य तत्वों के साथ आसानी से यौगिक नहीं बनातीं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 30/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) विस्थापन अभिक्रिया द्वारा: विस्थापन का उपयोग मध्यम क्रियाशील धातुओं के लिए होता है, जबकि स्वर्ण/रजत जैसी अक्रिय धातुएँ रासायनिक रूप से बहुत कम क्रियाशील होती हैं।
- विकल्प (C) वैद्युतअपघटनी अपचयन द्वारा: इस विधि का उपयोग सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और एल्युमिनियम जैसी ‘अत्यधिक सक्रिय’ (High reactive) धातुओं के निष्कर्षण के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) अम्लों के साथ अभिक्रिया द्वारा: ये धातुएँ सामान्य अम्लों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस विस्थापित नहीं करतीं, क्योंकि ये हाइड्रोजन से नीचे स्थित होती हैं।
#34. जब m द्रव्यमान के एक पिंड को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध H ऊँचाई तक उठाया जाता है, तो पिंड की स्थितिज ऊर्जा
:(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1)
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy): जब किसी $m$ द्रव्यमान के पिंड को गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध $H$ ऊँचाई तक उठाया जाता है, तो वस्तु पर ऊपर की ओर लगाया गया बल उसके भार ($mg$) के बराबर होता है।
- किया गया कार्य और ऊर्जा: वस्तु को उठाने में किया गया कार्य ($W = F \times H = mg \times H = mgH$) ही पिंड में **गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा** के रूप में संचित हो जाता है। अत: पिंड की स्थितिज ऊर्जा $mgH$ की मात्रा से बढ़ जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) mgH की मात्रा से घट जाती है: यह गलत है क्योंकि जमीन से ऊपर उठाने पर स्थितिज ऊर्जा घटती नहीं बल्कि बढ़ती है।
- विकल्प (B) और (D) mgH/2 से बढ़ना/घटना: यह मान गणितीय रूप से सही नहीं है, क्योंकि कुल किया गया कार्य $mgH$ होता है, आधा नहीं।
#35. रासायनिक अभिक्रिया Fe(s) + CuSO 4 (aq) → FeSO 4 (aq) + Cu(s) किस प्रकार की अभिक्रिया को दर्शाती है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1)
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अधिक सक्रिय तत्व (या धातु) किसी कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक के जलीय विलयन से विस्थापित कर देता है, विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
- रासायनिक समीकरण विश्लेषण: इस अभिक्रिया में आयरन ($\text{Fe}$) कॉपर ($\text{Cu}$) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है। इसलिए आयरन, कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) विलयन में से कॉपर को विस्थापित करके फेरस सल्फेट ($\text{FeSO}_4$) बनाता है और कॉपर धातु ($\text{Cu}$) मुक्त होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) दहन अभिक्रिया: इसमें ऑक्सीजन के साथ जलकर ऊष्मा या प्रकाश उत्पन्न होने जैसी प्रक्रिया नहीं हो रही है।
- विकल्प (C) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक उत्पाद नहीं बना रहे हैं, बल्कि तत्वों की अदला-बदली (विस्थापन) हो रही है।
- विकल्प (D) द्विविस्थापन अभिक्रिया: यह एकल विस्थापन का उदाहरण है क्योंकि इसमें केवल आयरन ने कॉपर को विस्थापित किया है (दोनों यौगिकों के आयनों का परस्पर दोहरा आदान-प्रदान नहीं हुआ है)।
#36. निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण पहचानें। Mg + O 2 → MgO
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1)
- रासायनिक समीकरण का संतुलन (Balancing Chemical Equation): द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, रासायनिक अभिक्रिया के दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।
- मैग्नीशियम का दहन: जब मैग्नीशियम ($\text{Mg}$) ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) के साथ जलता है, तो मैग्नीशियम ऑक्साइड ($\text{MgO}$) बनता है। मानक रूप में इसे $2\text{Mg} + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{MgO}$ लिखा जाता है। दिए गए विकल्पों में आंशिक मोल रूप में **$2\text{Mg} + \frac{1}{2}\text{O}_2 \rightarrow 2\text{MgO}$** समीकरण को संतुलित करता है क्योंकि यहाँ ऑक्सीजन के परमाणुओं की संख्या दोनों पक्षों में 2 हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B): $\text{Mg} + \frac{1}{2}\text{O}_2 \rightarrow \text{MgO}$ में बायीं ओर ऑक्सीजन का 1 परमाणु ($\frac{1}{2} \times 2$) और दायीं ओर भी 1 है, लेकिन मैग्नीशियम संतुलित नहीं है (दोनों ओर 1-1 है, जबकि मैग्नीशियम ऑक्साइड का सूत्र $\text{MgO}$ तय होने पर गुणांकों का मिलान विकल्प (A) के अनुसार 2Mg के साथ सही बैठता है)।
- विकल्प (C) और (D): इनमें ऑक्सीजन और मैग्नीशियम के गुणांक stoichiometry के नियमों के अनुसार सही अनुपात में संतुलित नहीं हैं।
#37. निम्नलिखित में से कौन-सा रासायनिक परिवर्तन है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change): वह परिवर्तन जिसमें एक या एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं और पदार्थ का रासायनिक संगठन पूरी तरह बदल जाता है (तथा इसे सामान्य भौतिक विधियों से पुनः पूर्व अवस्था में नहीं बदला जा सकता), रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।
- पेट्रोल का दहन: पेट्रोल (हाइड्रोकार्बन) का जलना एक दहन प्रक्रिया है, जिसमें यह ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) और जल वाष्प ($\text{H}_2\text{O}$) बनाता है और ऊर्जा मुक्त करता है। यह एक स्थायी रासायनिक परिवर्तन है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) जल का वाष्पीकरण: यह एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें पानी केवल अवस्था बदलकर द्रव से वाष्प (गैस) में बदलता है, रासायनिक सूत्र ($\text{H}_2\text{O}$) वही रहता है।
- विकल्प (C) नमक और जल का मिश्रण: यह भी एक भौतिक परिवर्तन है जिसमें कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता और घटकों को भौतिक विधि (वाष्पीकरण) से अलग किया जा सकता है।
- विकल्प (D) बर्फ पिघलना: यह भी भौतिक परिवर्तन है जिसमें ठोस बर्फ पिघलकर द्रव जल बनती है, लेकिन रासायनिक रूप से दोनों जल ही हैं।
#38. ब्लीचिंग पाउडर के निर्माण में क्लोरीन गैस की क्या भूमिका है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
- ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) का निर्माण: विरंजक चूर्ण का रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड ($\text{CaOCl}_2$) है। इसका उत्पादन शुष्क बुझे हुए चूने ($\text{Ca(OH)}_2$) पर क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) की क्रिया द्वारा किया जाता है।
- रासायनिक समीकरण:
$\text{Ca(OH)}_2 + \text{Cl}_2 \rightarrow \text{CaOCl}_2 + \text{H}_2\text{O}$
यहाँ क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) सीधे बुझे हुए चूने के साथ संयोजित होकर ब्लीचिंग पाउडर का निर्माण करती है। - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) उत्प्रेरक के रूप में: क्लोरीन इस अभिक्रिया में उत्प्रेरक मात्र नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यक अभिकारक (Reactant) के रूप में भाग लेती है।
- विकल्प (C) उदासीन करने के लिए: क्लोरीन कोई अम्ल नहीं है जो कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (क्षार) को उदासीन करे, बल्कि यह स्वयं अभिक्रिया में उत्पाद का हिस्सा बनती है।
- विकल्प (D) हाइड्रोजन परॉक्साइड उत्पन्न करना: इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन परॉक्साइड नहीं बल्कि जल ($\text{H}_2\text{O}$) उप-उत्पाद के रूप में बनता है।
#39. लंबे समय तक नम हवा के संपर्क में आने पर तांबे के बर्तनों पर हरी परत किसके कारण बनती है?
(RPF Constable 2018 24 Jan 2019 Shift 1)
- तांबे का संक्षारण (Corrosion of Copper): जब तांबे (Copper) के बर्तन को लंबे समय तक नम हवा (नमी, कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन) के संपर्क में छोड़ा जाता है, तो इसकी चमकदार भूरी सतह पर एक हरे रंग की परत चढ़ जाती है।
- रासायनिक संरचना: यह हरी परत नम कॉपर कार्बोनेट ($\text{CuCO}_3$) और कॉपर हाइड्रोक्साइड ($\text{Cu(OH)}_2$) का मिश्रण होती है:
$\text{2Cu} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 + \text{O}_2 \rightarrow \text{Cu(OH)}_2 \cdot \text{CuCO}_3$ (हरी परत) - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 24 Jan 2019 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कॉपर ऑक्साइड और नीले हरे शैवाल: तांबे पर जमने वाली हरी परत कोई जीवित शैवाल नहीं, बल्कि रासायनिक संक्षारण का उत्पाद है।
- विकल्प (B) लाइकेन और कॉपर कार्बोनेट: लाइकेन एक सहजीवी जीव है जिसका धातुओं पर बनने वाली जंग से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (C) कॉपर हाइड्रोक्साइड और मैग्नीशियम कार्बोनेट: चूँकि तांबे के बर्तन में मैग्नीशियम नहीं होता, इसलिए मैग्नीशियम कार्बोनेट बनने का सवाल ही नहीं उठता।
#40. किसी दिए गए बिंब के गोण दृश्यों की अधिकतम संख्या क्या है?
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 1)
- गोण या सहायक दृश्य (Auxiliary View): इंजीनियरिंग ड्राइंग में, जब किसी वस्तु की मुख्य प्रक्षेप तलों (फ्रंट, टॉप या प्रोफाइल) के अलावा किसी अन्य झुके या तिरछे तल पर प्रक्षेप खींचा जाता है, तो उसे गोण दृश्य कहा जाता है।
- अधिकतम संख्या: चूँकि किसी वस्तु के चारों ओर 360 डिग्री में अनगिनत कोणों और तलों की कल्पना की जा सकती है, इसलिए किसी भी दिए गए बिंब (Object) के सहायक/गोण दृश्यों की सैद्धांतिक संख्या अनंत (Infinite) होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 21 Jan 2019 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) 6: यह किसी वस्तु के अधिकतम मुख्य/प्रमाणिक ऑर्थोग्राफिक दृश्यों (Standard orthographic views) की संख्या होती है, गोण दृश्यों की नहीं।
- विकल्प (B) 1: यह एकल दृश्य को दर्शाता है, जबकि सहायक दृश्यों की संख्या एक से अधिक हो सकती है।
- विकल्प (C) 3: सामान्यतः किसी ड्राइंग में उपयोग किए जाने वाले मुख्य प्रक्षेपों (फ्रंट, टॉप, साइड) की संख्या 3 होती है।
#41. R त्रिज्या की एकफेरे की कुंडली अपने केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B उत्पन्न करती है। यदि समान तार को समान धारा I बहन करने वाली n फेरों (प्रत्येक की त्रिज्या R/n है) की कुंडली में लपटा जाए, तो केंद्र पर नए क्षेत्र का मान होगा?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र: किसी $R$ त्रिज्या और एक फेरे वाली कुंडली के केंद्र पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र होता है:
$B = \frac{\mu_0 I}{2R}$
- नया चुंबकीय क्षेत्र: जब उसी समान तार को $n$ फेरों (प्रत्येक की त्रिज्या $R/n$) में लपेटा जाता है, तो फेरों की संख्या $n$ गुनी हो जाती है और त्रिज्या $R/n$ हो जाती है। नए चुंबकीय क्षेत्र ($B’$) का सूत्र होगा:
$B’ = \frac{\mu_0 \cdot n \cdot I}{2(R/n)} = \frac{\mu_0 n^2 I}{2R} = n^2 \left(\frac{\mu_0 I}{2R}\right) = n^2 B$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) $B/n$: यह तब होता जब त्रिज्या कम होने के बजाय बढ़ती या फेरों का प्रभाव विपरीत होता।
- विकल्प (C) $B$: केवल फेरे बढ़ाने और त्रिज्या घटाने से चुंबकीय क्षेत्र अपरिवर्तित (प्रारंभिक $B$) नहीं रह सकता, क्योंकि यह फेरों की संख्या के वर्ग के समानुपाती हो जाता है।
- विकल्प (D) $nB$: यह मान तब आता जब केवल फेरों की संख्या बढ़ती और त्रिज्या स्थिर रहती, लेकिन यहाँ त्रिज्या भी घटकर $R/n$ हो गई है।
#42. किसी आवर्त में परमाणु क्रमांक में वृद्धि होने पर क्या होता है?
(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)
- आवर्त सारणी में आवर्त (Period) में प्रवृत्ति: आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक (Atomic Number) में वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है और परमाणु का आकार छोटा होता जाता है।
- धात्विक गुण (Metallic Character): जैसे-जैसे हम बाएं से दाएं जाते हैं, तत्वों के लिए इलेक्ट्रॉन त्यागना कठिन और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना आसान होता जाता है। इसके परिणामस्वरूप तत्वों का धात्विक गुण (Metallic character) घटता है और अधात्विक गुण (Non-metallic character) बढ़ता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE ME : 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) धात्विक गुण में वृद्धि होती है: यह गलत है क्योंकि धात्विक गुण बाएं से दाएं जाने पर कम होता है (यह समूह में ऊपर से नीचे आने पर बढ़ता है)।
- विकल्प (A) और (D) रासायनिक अभिक्रियाशीलता: रासायनिक अभिक्रियाशीलता सीधे एक पैटर्न में नहीं घटती या बढ़ती, बल्कि यह पहले घटती है और फिर हैलोजन/अक्रिय गैसों तक पहुँचते-पहुँचते बदलती है, जबकि धात्विक गुण का घटना एक नियमित प्रवृत्ति है।
#43. ‘ द्रव्यमान संरक्षण का नियम’ के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? A)अभिक्रिया होने पर द्रव्यमान में परिवर्तन हो सकता है। B)रासायनिक अभिक्रिया के दौरान, परमाणु पुनर्व्यवस्थित हो जाते हैं। C)एक संवृत् निकाय के भीतर द्रव्यमान, समय के साथ अपरिवर्ती रहता है।
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन किया जा सकता है और न ही विनाश।
- कथन B और C का विश्लेषण: रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों के पुराने बंध टूटते हैं और परमाणु आपस में पुनर्व्यवस्थित (Rearrange) होकर नए उत्पाद बनाते हैं (कथन B सत्य है)। एक संवृत्त (बंद) निकाय के भीतर अभिक्रिया होने पर कुल द्रव्यमान समय के साथ नियत और अपरिवर्ती (Constant) रहता है (कथन C सत्य है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05/02/2026) में पूछा गया था।
- कथन A (अभिक्रिया होने पर द्रव्यमान में परिवर्तन हो सकता है): यह गलत है, क्योंकि रासायनिक परिवर्तन के दौरान कुल द्रव्यमान हमेशा संरक्षित रहता है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता। इसलिए वे विकल्प जिनमें A शामिल है, गलत हैं।
#44. एक सफेद ठोस तनु HCl के साथ अभिक्रिया करके एक गैस बनाता है जो चुने के पानी को दूदिया कर देती है। इससे निश्चित रूप से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
- कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट की पहचान: जब किसी धातु का कार्बोनेट ($\text{CO}_3^{2-}$) या बाइकार्बोनेट ($\text{HCO}_3^-$) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया करता है, तो **कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$)** गैस निकलती है।
- चूने के पानी का परीक्षण: जब इस उत्सर्जित $\text{CO}_2$ गैस को चूने के पानी ($\text{Ca(OH)}_2$) में प्रवाहित किया जाता है, तो कैल्सियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) के श्वेत अवक्षेप के बनने के कारण चूने का पानी **दूधिया** हो जाता है। समीकरण:
$\text{Ca(OH)}_2(aq) + \text{CO}_2(g) \rightarrow \text{CaCO}_3(s)\text{ (दूधिया)} + \text{H}_2\text{O}(l)$ - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) ठोस कैल्शियम कार्बोनेट है: यह आंशिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि वह केवल ‘कैल्शियम’ कार्बोनेट ही है, क्योंकि सोडियम या मैग्नीशियम जैसे अन्य कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट भी यही परीक्षण देते हैं।
- विकल्प (C) ठोस एक धातु कार्बोनेट है: यह बाइकार्बोनेट की संभावना को छोड़ देता है, जबकि बाइकार्बोनेट भी समान रूप से $\text{CO}_2$ गैस मुक्त करते हैं।
- विकल्प (D) गैस हाइड्रोजन है: हाइड्रोजन गैस चूने के पानी को दूधिया नहीं करती है (हाइड्रोजन की पहचान जलने पर ‘पॉप’ की आवाज़ से होती है)।
#45. धातु ऑक्साइड को गर्म करके तांबा और चांदी जैसी धातुओं का निष्कर्षण करने के लिए किस प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
- कम सक्रिय धातुओं का निष्कर्षण: सक्रियता श्रेणी में नीचे स्थित धातुओं (जैसे कॉपर, मर्करी, सिल्वर) के अयस्क कम अभिक्रियाशील होते हैं। इनके ऑक्साइड या सल्फाइड अयस्कों को केवल **गर्म (तापीय अपघटन/अपचयन)** करके बिना किसी महंगे रासायनिक अपचायक (जैसे कार्बन) के धातु प्राप्त की जा सकती है।
- उदाहरण के लिए, सिन्नाबर ($\text{HgS}$) को वायु में गर्म करने पर यह पहले मर्करी ऑक्साइड में बदलता है और अधिक ताप पर तापीय अपघटन द्वारा मर्करी धातु मुक्त होती है। इसी प्रकार कॉपर के अयस्कों के कुछ रूपों में भी तापीय विधियों का उपयोग होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) भर्जन (Roasting): यह मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों को वायु की अधिकता में तेज गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया है (हालाँकि यह निष्कर्षण का एक चरण है, लेकिन सीधे धातु प्राप्ति के लिए तापीय अपघटन या अपचयन मुख्य पद है)।
- विकल्प (C) प्रगलन (Smelting): इसका उपयोग मध्यम सक्रिय धातुओं (जैसे आयरन, जिंक) के ऑक्साइड को कोक (कार्बन) के साथ उच्च ताप पर अपचयित करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) विद्युत अपघटन (Electrolysis): इसका उपयोग सोडियम, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम जैसी ‘अत्यधिक सक्रिय’ धातुओं के निष्कर्षण के लिए किया जाता है।
#46. औद्योगिक परिवेश में, फ्रीऑन – 12 का निर्माण किस रासायनिक अभिक्रिया द्वारा सबसे अधिक सामान्यतः किया जाता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-1 : 18 Jun, 2025 Shift 2)
- स्वाट्स अभिक्रिया (Swarts Reaction): एल्किल क्लोराइड या ब्रोमाइड से फ़्लोरोकार्बन (जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन या फ्रीऑन) बनाने की विधि को स्वाट्स अभिक्रिया कहा जाता है। यह एक **हैलोजन विनिमय (Halogen Exchange)** अभिक्रिया है, जिसमें धातु फ्लोराइड्स (जैसे $\text{SbF}_3, \text{AgF}$ आदि) की सहायता से क्लोरीन या ब्रोमीन परमाणु को फ्लोरीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
- फ्रीऑन-12 का निर्माण: औद्योगिक स्तर पर कार्बन टेट्राक्लोराइड ($\text{CCl}_4$) की एण्टीमनी ट्राइफ्लोराइड ($\text{SbF}_3$) के साथ अभिक्रिया कराकर फ्रीऑन-12 ($\text{CCl}_2\text{F}_2$) का उत्पादन किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-1 : 18 Jun, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) प्रतिस्थापन अभिक्रिया: यद्यपि यह प्रतिस्थापन का ही एक प्रकार है, लेकिन विशिष्ट रूप से धातु फ्लोराइड द्वारा हैलोजन के विनिमय से फ्लोरीकृत यौगिक बनाने की इस नामित प्रक्रिया को ‘स्वाट्स अभिक्रिया’ कहा जाता है।
- विकल्प (C) वुर्ट्ज़ अभिक्रिया (Wurtz Reaction): इसका उपयोग शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु के साथ एल्किल हैलाइड की क्रिया कराकर उच्चतर एल्केन बनाने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) निष्कासन अभिक्रिया (Elimination Reaction): इसमें अणुओं से समूहों का निष्कासन होकर द्विबंध या त्रिबंध (असंतृप्त यौगिक) बनते हैं, जो फ्रीऑन निर्माण से संबंधित नहीं है।
#47. उस अभिक्रिया को क्या कहते हैं जिसमें दो या अधिक अभिकारकों की अभिक्रिया के कारण केवल एक ही उत्पाद उत्पन्न होता है?
(RPF Constable 2018 14 Feb 2019 Shift 2)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (तत्व या यौगिक) आपस में मिलकर केवल एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है।
- सामान्य रूप: $A + B \rightarrow AB$ (जहाँ $A$ और $B$ अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद $ बनाते हैं)। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का मिलकर जल बनाना ($2\text{H}_2 + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{H}_2\text{O}$)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable 2018 : 14 Feb 2019 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) विस्थापन प्रतिक्रिया: इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को विस्थापित करता है, जिससे नए उत्पाद बनते हैं।
- विकल्प (B) प्रतिस्थापन प्रतिक्रिया: इसमें किसी अणु के एक परमाणु या समूह का स्थान दूसरा परमाणु या समूह लेता है।
- विकल्प (C) अपघटन अभिक्रिया: यह संयोजन के बिल्कुल विपरीत होती है, जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है।
#48. निम्नलिखित में से कौन अमोनियम नाइट्रेट तैयार करने के लिए एक सामान्य औद्योगिक विधि है?
(RRB JE CBT-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1)
- अमोनियम नाइट्रेट का निर्माण: औद्योगिक स्तर पर अमोनियम नाइट्रेट ($\text{NH}_4\text{NO}_3$) का उत्पादन अमोनिया गैस ($\text{NH}_3$) और नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$) के बीच होने वाली तीव्र **उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया** द्वारा किया जाता है।
- रासायनिक समीकरण:
$\text{NH}_3(g) + \text{HNO}_3(aq) \rightarrow \text{NH}_4\text{NO}_3(aq)$
यह एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया है, और इसका उपयोग मुख्य रूप से उर्वरकों तथा विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में किया जाता है। - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) हैबर-बॉश प्रक्रिया (Haber-Bosch Process): इस विधि का उपयोग सीधे अमोनियम नाइट्रेट बनाने के लिए नहीं, बल्कि केवल ‘अमोनिया’ ($\text{NH}_3$) के औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) अमोनियम लवण का विद्युत अपघटन: यह अमोनियम नाइट्रेट तैयार करने की सामान्य या व्यावसायिक विधि नहीं है।
- विकल्प (C) मेटाथिसिस प्रतिक्रिया: यह आयनों के परस्पर आदान-प्रदान की सामान्य द्वि-विस्थापन प्रक्रिया है, जबकि अमोनिया और नाइट्रिक अम्ल की सीधी उदासीनीकरण प्रक्रिया अमोनियम नाइट्रेट के निर्माण की मानक औद्योगिक विधि है।
#49. पोलियो वैक्सीन की खोज किसके द्वारा की गई थी? A. आइजक न्यूटन ( Issac Newton) B. मैरी क्यूरी ( Marie Curie) C. जोनास सॉल्क ( Jonas Salk) D. अल्बर्ट आइंस्टीन ( Albert Einstein)
(RRB NTPC Tier I : 28 Apr 2016 Shift 3)
- पोलियो वैक्सीन की खोज: पोलियोमाइलाइटिस (पोलियो) के लिए पहली सुरक्षित और प्रभावी निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (IPV – Inactivated Polio Vaccine) की खोज अमेरिकी चिकित्सक और वायरोलॉजिस्ट **जोनास सॉल्क (Jonas Salk)** द्वारा 1950 के दशक के मध्य (1953-1955) में की गई थी।
- महत्व: इस ऐतिहासिक खोज ने वैश्विक स्तर पर पोलियो जैसी संक्रामक बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण में क्रांतिकारी बदलाव लाया। (बाद में अल्बर्ट साबिन ने ओरल पोलियो वैक्सीन यानी मौखिक बूंदों की खोज की)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 28 Apr 2016 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प A (आइजक न्यूटन): यह महान भौतिकशास्त्री और गणितज्ञ थे, जिन्होंने गति के नियम और सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत दिया था।
- विकल्प B (मैरी क्यूरी): यह प्रसिद्ध भौतिकविद् एवं रसायनविद् थीं, जिन्होंने रेडियोधर्मिता (Radioactivity), रेडियम और पोलोनियम की खोज की थी।
- विकल्प D (अल्बर्ट आइंस्टीन): यह विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें ‘सापेक्षता के सिद्धांत’ ($E=mc^2$) के लिए जाना जाता है।
#50. कौन-सी बीमारी हृदय से संबंधित नहीं है?
(RRB NTPC Tier I : 05 Apr 2016 Shift 3)
- डिफ्थीरिया (Diphtheria): यह हृदय से संबंधित बीमारी नहीं है, बल्कि यह **कॉरीनेबैक्टीरियम डिफ्थीरिया (Corynebacterium diphtheriae)** नामक जीवाणु (Bacteria) के कारण होने वाला एक गंभीर संक्रामक रोग है। यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र, गले (Throat) और नाक को प्रभावित करता है।
- हृदय से संबंधित अन्य स्थितियाँ: कार्डियोमायोपैथी हृदय की मांसपेशियों की बीमारी है, एून्रिज़्म (Aneurysm) रक्त वाहिकाओं या महाधमनी (Aorta) की दीवार के कमजोर होकर फूलने से जुड़ी स्थिति है, और हृदयाघात (Myocardial Infarction/Infarct) सीधे हृदय की मांसपेशियों को रक्त आपूर्ति बाधित होने से होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 05 Apr 2016 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प A (एून्रिज़्म / Aneurysm): यह धमनियों या रक्त वाहिकाओं (विशेषकर महाधमनी जो हृदय से जुड़ी होती है) की गुब्बारे जैसी सूजन से संबंधित संवहनी विकार है।
- विकल्प B (कार्डियोमायोपैथी / Cardiomyopathy): यह सीधे तौर पर हृदय की मांसपेशियों की बीमारी है जिससे हृदय के लिए रक्त पंप करना कठिन हो जाता है।
- विकल्प D (हृदयाघात / Myocardial Infarction): यह स्पष्ट रूप से हृदय से जुड़ी स्वास्थ्य आपातकालीन स्थिति (Heart Attack) है।
#51. जब हम अपनी हथेली पर एसीटोन (नेल पॉलिश रिमूवर) डालते हैं, तो हमें ठंडक प्रतीत होती है क्योंकि ___________ ।
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )
- वाष्पीकरण और शीतलन (Evaporation and Cooling): एसीटोन (नेल पॉलिश रिमूवर) एक अत्यंत वाष्पशील (Volatile) कार्बनिक द्रव है। इसका क्वथनांक (Boiling point) बहुत कम होता है।
- ऊष्मा का अवशोषण: जब इसे हथेली पर रखा जाता है, तो यह हथेली या आसपास की त्वचा से **वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा (Latent heat of vaporization)** के रूप में ऊष्मा अवशोषित कर लेता है। इसके परिणामस्वरूप, हथेली की उस जगह का तापमान कम हो जाता है और हमें ठंडक (Cooling sensation) महसूस होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 14/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) यह ठंडी वाष्प मुक्त करता है: एसीटोन कोई ठंडी वाष्प अपने आप उत्पन्न नहीं करता, बल्कि यह ऊष्मा खींचकर वाष्प में बदलता है।
- विकल्प (B) यह हथेली पर उपस्थित जल के साथ अभिक्रिया करता है: यह जल के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं करता, बल्कि इसका मुख्य कारण इसका भौतिक वाष्पीकरण है।
- विकल्प (D) यह त्वचा पर तंत्रिका संकेतों को अवरुद्ध कर देता है: यह सुन्न करने वाली औषधि (एनेस्थेटिक) की तरह तंत्रिका संकेतों को अवरुद्ध नहीं करता; ठंडक का कारण ऊष्मा का ह्रास है।
#52. एक पदार्थ जो बिना खपत एक अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है उसे ___________ कहा जाता है।
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- उत्प्रेरक (Catalyst): उत्प्रेरक वह रासायनिक पदार्थ है जो स्वयं बिना खर्च हुए (अभिक्रिया के अंत में अपरिवर्तित रहता है) किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर (Speed) को बढ़ा या घटा सकता है। रासायनिक अभिक्रिया की दर को बढ़ाने वाले को धनात्मक उत्प्रेरक कहते हैं।
- कार्य करने का तरीका: उत्प्रेरक अभिक्रिया के लिए आवश्यक **सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)** के मान को कम कर देता है, जिससे अभिक्रिया तेजी से पूरी हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 23 May 2019 Shift 1 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) उत्पाद (Product): यह वह नया पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप बनता है।
- विकल्प (B) अभिकारक (Reactant): यह वे प्रारंभिक पदार्थ हैं जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं और अभिक्रिया के दौरान खर्च हो जाते हैं।
- विकल्प (C) अवरोधक (Inhibitor): यह वह पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया की दर को कम करता है या रोकता है, न कि बढ़ाता है।
#53. यीस्ट किस अलैंगिक प्रजनन विधि से प्रजनन करता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
- मुकुलन (Budding): यीस्ट (Yeast) एक एककोशिकीय कवक (Fungus) है, जिसमें सामान्यतः अलैंगिक प्रजनन **मुकुलन** विधि द्वारा होता है।
- प्रक्रिया: इस प्रक्रिया में जनक कोशिका के शरीर पर एक छोटा सा उभार (बल्ब जैसी संरचना या मुकुल/Bud) विकसित होता है। केंद्रक विभाजित होकर इस मुकुल में प्रवेश करता है, और अंततः यह मुकुल परिपक्व होकर मुख्य शरीर से अलग हो जाता है तथा एक नया जीव बनाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I 2024 : 17 Dec 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) संलयन (Fusion): यह युग्मकों के मिलने की प्रक्रिया है जो लैंगिक जनन का हिस्सा है।
- विकल्प (C) कायिक प्रवर्द्धन (Vegetative Propagation): यह पौधों में पाया जाने वाला जनन प्रकार है (जैसे तने, जड़ या पत्तियों द्वारा नए पौधे बनना)।
- विकल्प (D) द्विखंडन (Binary Fission): यह अमीबा या पैरामीशियम जैसे जीवों में होता है जहाँ एक कोशिका समान आकार के दो भागों में विभाजित हो जाती है, जबकि यीस्ट में असमान आकार का मुकुल बनता है।
#54. निम्नलिखित में से कौन-सा द्विविस्थापन अभिक्रिया का एक उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है और दो नए यौगिकों का निर्माण होता है, द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
- समीकरण विश्लेषण: इस अभिक्रिया में सिल्वर नाइट्रेट ($\text{AgNO}_3$) और सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$) के जलीय विलयन आपस में अभिक्रिया करते हैं, जहाँ $\text{Ag}^+$ और $\text{Na}^+$ तथा $\text{NO}_3^-$ और $\text{Cl}^-$ आयनों की अदला-बदली से सिल्वर क्लोराइड ($\text{AgCl}$) का सफेद अवक्षेप और सोडियम नाइट्रेट ($\text{NaNO}_3$) बनता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) $\text{Na}_2\text{O} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NaOH}$: यह एक संयोजन (Combination) अभिक्रिया है, जिसमें दो अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (C) $2\text{Mg} + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{MgO}$: यह भी संयोजन (या दहन) अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) $\text{H}_2 + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{HCl}$: यह भी एक संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण है।
#55. हाइड्रोकार्बन के पूर्ण दहन पर निम्नलिखित में से कौन-सा उत्पाद निर्मित होता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
- हाइड्रोकार्बन का पूर्ण दहन (Complete Combustion): जब किसी हाइड्रोकार्बन (कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिक) को ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) की पर्याप्त मात्रा में जलाया जाता है, तो यह पूर्ण दहन कहलाता है।
- मुख्य उत्पाद: इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हमेशा **कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$)** और **जल ($\text{H}_2\text{O}$)** का निर्माण होता है, साथ ही भारी मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा मुक्त होती है। उदाहरण के लिए:
$\text{CH}_4 + 2\text{O}_2 \rightarrow \text{CO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + \text{ऊर्जा}$ - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) मेथेन और हाइड्रोजन: यह गलत है क्योंकि दहन के बाद मूल अभिकारक या हाइड्रोजन गैस अलग से उत्पाद के रूप में नहीं बनती।
- विकल्प (B) मेथेन और ऑक्सीजन: ये तो जलने की प्रक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारक (Reactants) हैं, न कि उत्पाद।
- विकल्प (D) CO और जल: कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) और जल का निर्माण ‘अपूर्ण दहन’ (Incomplete Combustion) की स्थिति में होता है जब ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होती है।
#56. लवण-जल से सोडियम हाइड्रॉक्साइड तैयार करने के लिए किस प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
- क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali Process): सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (जिसे ब्राइन या लवण-जल कहा जाता है) से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$), क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) बनाता है। इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया भी कहते हैं क्योंकि इसमें निर्मित उत्पाद क्लोरीन (क्लोर) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार) होते हैं।
- रासायनिक समीकरण:
$2\text{NaCl}(aq) + 2\text{H}_2\text{O}(l) \xrightarrow{\text{विद्युत अपघटन}} 2\text{NaOH}(aq) + \text{Cl}_2(g) + \text{H}_2(g)$ - परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 28/11/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) सॉल्वे प्रक्रम (Solvay process): इसका उपयोग सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) के औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) हाबर प्रक्रम (Haber process): इस विधि का उपयोग अमोनिया ($\text{NH}_3$) के उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) $\text{NaCl}$ का ऊष्मीय अपघटन: साधारण नमक का सामान्य ऊष्मीय अपघटन इस प्रकार सोडियम हाइड्रॉक्साइड नहीं बनाता है।
#57. एक धारावाही सीधे चालक को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के समांतर रखा गया है। चालक पर लगने वाला बल ___________ होगा।
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- चुंबकीय बल का सिद्धांत: किसी धारावाही चालक पर चुंबकीय क्षेत्र के कारण लगने वाले बल का सूत्र $F = I l B \sin\theta$ होता है, जहाँ $\theta$ चालक की दिशा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है। जब चालक को चुंबकीय क्षेत्र के समांतर रखा जाता है, तो कोण $\theta = 0^\circ$ होता है, और $\sin(0^\circ) = 0$ होने के कारण बल शून्य हो जाता है।
- सूत्र: $F = I l B \sin\theta$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) अधिकतम: चालक पर बल तब अधिकतम होता है जब उसे चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत ($\theta = 90^\circ$) रखा जाता है ($F = IlB$)।
- विकल्प (C) अधिकतम का आधा: बल अधिकतम का आधा तब होता है जब चालक और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण $30^\circ$ हो ($\sin 30^\circ = 0.5$)।
- विकल्प (D) अनंत: समांतर स्थिति में बल कभी भी अनंत नहीं हो सकता, बल्कि यह न्यूनतम यानी शून्य होता है।
#58. निम्नलिखित सांभों को सुमेलित कीजिए।उपकला ऊतक स्थान Iघनाभाकार उपकला A. आंत्र का आस्तर IIस्तंभाकार उपकला B. त्वचा IIIशल्की उपकला C. वृक्क नलिकाओं का आस्तर
(RRB ALP CBT 1 16/02/2026 )
- घनाभाकार उपकला (Cuboidal Epithelium – I-C): यह वृक्क नलिकाओं (Kidney tubules) और लार ग्रंथियों की नलिकाओं के आस्तर का निर्माण करती है, जहाँ यह यांत्रिक सहारा और स्राव/अवशोषण में मदद करती है।
- स्तंभाकार उपकला (Columnar Epithelium – II-A): यह ऊतक आंत्र (Intestine) और पेट के आंतरिक आस्तर में पाया जाता है, जो पचे हुए भोजन के अवशोषण और स्रावण में सहायता करता है।
- शल्की उपकला (Squamous Epithelium – III-B): यह बहुत पतली और चपटी कोशिकाओं की बनी होती है। त्वचा (Skin) की बाहरी परत स्तरीकृत शल्की उपकला (Stratified squamous epithelium) की बनी होती है जो शरीर की रक्षा करती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 16/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) I-A; II-B; III-C: इसमें घनाभाकार उपकला को आंत्र से और शल्की उपकला को वृक्क नलिकाओं से मिलाया गया है, जो कि गलत मिलान है।
- विकल्प (B) I-A; II-C; III-B: इसमें घनाभाकार उपकला का मिलान गलत तरीके से आंत्र (A) से किया गया है।
- विकल्प (D) I-B; II-C; III-A: इसमें सभी ऊतकों के सही स्थानों का क्रम उलट दिया गया है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
#59. निम्नलिखित में से कौन-सा रासायनिक समीकरण संतुलित है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 3)
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) के अनुसार, रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारक (Reactants) और उत्पाद (Products) दोनों तरफ प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। समीकरण $2\text{H}_2 + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{H}_2\text{O}$ में बाईं और दाईं दोनों तरफ हाइड्रोजन के 4 परमाणु और ऑक्सीजन के 2 परमाणु हैं।
- विश्लेषण: अभिकारक पक्ष में $2 \times 2 = 4$ हाइड्रोजन और $2$ ऑक्सीजन परमाणु हैं, और उत्पाद पक्ष में भी $2 \times 2 = 4$ हाइड्रोजन तथा $2 \times 1 = 2$ ऑक्सीजन परमाणु हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16/12/2024, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) $H_2 + 2O_2 \rightarrow 2H_2O$: इसमें ऑक्सीजन के परमाणु असंतुलित हैं (बाईं ओर 4 और दाईं ओर 2)।
- विकल्प (B) $H_2O + O_2 \rightarrow H_2O_2$: यह समीकरण हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनाने की सही संतुलित प्रक्रिया नहीं है (यहाँ हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु दोनों पक्षों में समान नहीं हैं)।
- विकल्प (C) $H_2 + O_2 \rightarrow H_2O$: यह एक असंतुलित समीकरण है क्योंकि इसमें दाईं ओर ऑक्सीजन का केवल 1 परमाणु है जबकि बाईं ओर 2 परमाणु हैं।
#60. जब दो तत्व मिलकर कोई यौगिक बनाते हैं, तो इसे किस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 1)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब दो या दो से अधिक तत्व या यौगिक आपस में मिलकर केवल एक एकल उत्पाद (Compound) का निर्माण करते हैं, तो ऐसी रासायनिक अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया कहा जाता है। इसका सामान्य रूप $A + B \rightarrow AB$ होता है।
- उदाहरण: हाइड्रोजन और क्लोरीन मिलकर हाइड्रोजन क्लोराइड बनाते हैं ($H_2 + Cl_2 \rightarrow 2HCl$) या मैग्नीशियम और ऑक्सीजन मिलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 18/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) द्विस्थापन (Double Displacement): इसमें दो यौगिकों के आयनों के बीच आदान-प्रदान होता है, न कि केवल दो तत्वों का मिलकर यौगिक बनना।
- विकल्प (B) विस्थापन (Displacement): इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित करता है।
- विकल्प (D) अपघटन (Decomposition): यह संयोजन के ठीक विपरीत होती है, जिसमें एक एकल यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थ बनाता है।
#61. निम्न में से कौन सी गैस एक अत्यधिक जहरीली, गंधहीन, स्वाधीन और रंगहीन गैस है?
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 1)
- कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$): यह एक अत्यधिक जहरीली, गंधहीन (Odorless), स्वादहीन (Tasteless) और रंगहीन (Colorless) गैस है। यह कार्बन युक्त ईंधनों के अपूर्ण दहन (Incomplete combustion) के कारण उत्पन्न होती है।
- शरीर पर प्रभाव: यह रक्त में हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर ‘कार्बोक्सीहिमोग्लोबिन’ बनाती है, जिससे रक्त की ऑक्सीजन वहन क्षमता कम हो जाती है और दम घुटने से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 23/01/2019, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$): यह रंगहीन और गंधहीन होती है, लेकिन यह अत्यधिक जहरीली नहीं होती (यह श्वसन और प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है)।
- विकल्प (C) मीथेन ($\text{CH}_4$): यह एक रंगहीन और गंधहीन गैस है (प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक), लेकिन यह कार्बन मोनोऑक्साइड की तरह विषैली नहीं होती।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($\text{NO}_2$): यह भूरे-लाल रंग की और तीक्ष्ण गंध वाली गैस होती है, इसलिए यह रंगहीन और गंधहीन नहीं है।
#62. निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं पर विचार कीजिए:I: BaCl2 (aq) + Na 2 SO 4 (aq) → BaSO 4 (s) + 2NaCl (aq) II: Pb(NO3) 2 (aq) + KI (aq) → PbI 2 (s) + 2KNO 3 (aq)निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प उपरोक्त अभिक्रियाओं को सही ढंग से वर्गीकृत करता है?
(RRB ALP CBT 1 17/02/2026 )
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है, उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- अभिक्रिया I विश्लेषण: $\text{BaCl}_2(aq) + \text{Na}_2\text{SO}_4(aq) \rightarrow \text{BaSO}_4(s) + 2\text{NaCl}(aq)$ में बेरियम आयन ($\text{Ba}^{2+}$) और सल्फेट आयन ($\text{SO}_4^{2-}$) मिलकर बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप बनाते हैं, जो एक द्विविस्थापन (और अवक्षेपण) अभिक्रिया है।
- अभिक्रिया II विश्लेषण: $\text{Pb(NO}_3)_2(aq) + 2\text{KI}(aq) \rightarrow \text{PbI}_2(s) + 2\text{KNO}_3(aq)$ में लेड आयन ($\text{Pb}^{2+}$) और आयोडाइड आयन ($\text{I}^-$) आपस में आदान-प्रदान करके लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप बनाते हैं, यह भी एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 17/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A), (B) और (C): इनमें दूसरी अभिक्रिया को विस्थापन या उदासीनीकरण बताया गया है, जबकि दोनों ही अभिक्रियाओं में आयनों का दोतरफा आदान-प्रदान हो रहा है, इसलिए ये दोनों ही केवल ‘द्विविस्थापन’ श्रेणी में आती हैं।
#63. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया, अवक्षेपण अभिक्रिया की उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): ऐसी रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी अघुलनशील ठोस (अवक्षेप या Precipitate) का निर्माण होता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में सिल्वर क्लोराइड ($\text{AgCl}$) का सफेद रंग का अवक्षेप प्राप्त होता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{AgNO}_3(aq) + \text{NaCl}(aq) \rightarrow \text{AgCl}\downarrow + \text{NaNO}_3(aq)$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 26/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) $\text{CaCO}_3 \rightarrow \text{CaO} + \text{CO}_2\uparrow$: यह एक ऊष्मीय अपघटन (Thermal Decomposition) अभिक्रिया है।
- विकल्प (B) $\text{Zn} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{H}_2\uparrow$: यह एक विस्थापन (Displacement) अभिक्रिया है जिसमें हाइड्रोजन गैस निकलती है।
- विकल्प (C) $\text{NaOH} + \text{HCl} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$: यह एक उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया है, जिसमें अम्ल और क्षार मिलकर लवण व जल बनाते हैं।
#64. मानव श्वसन से क्या छोड़ता है? A. गैसों का मिश्रण B. कार्बन मोनोऑक्साइड C. ऑक्सीजन D. कार्बन डाइऑक्साइड
(RRB NTPC Tier I : 05 Apr 2016 Shift 3)
- मानव श्वसन प्रक्रिया (Human Respiration): मानव श्वसन के दौरान, हम वायु से ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) अंदर लेते हैं जिसका उपयोग कोशिकाओं में ग्लूकोज के ऑक्सीकरण (कोशिकीय श्वसन) द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया के उपोत्पाद (By-product) के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) उत्पन्न होती है, जिसे उच्छ्वास (Exhalation) के माध्यम से शरीर से बाहर छोड़ दिया जाता है।
- गैसों का विनिमय: फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) में रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड निकलकर वायुमार्ग के जरिए बाहर कर दी जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 05/04/2016, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) गैसों का मिश्रण: हालांकि छोड़ी जाने वाली हवा में गैसों का मिश्रण होता है, लेकिन जैविक रूप से श्वसन के मुख्य उत्सर्जित उत्पाद के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड को ही मुख्य उत्तर माना जाता है।
- विकल्प (B) कार्बन मोनोऑक्साइड: यह एक विषैली गैस है जो ईंधनों के अपूर्ण दहन से उत्पन्न होती है, यह सामान्य श्वसन का उत्पाद नहीं है।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन: ऑक्सीजन को मानव श्वसन के दौरान शरीर के अंदर ‘ग्रहण’ (अंतःश्वसन) किया जाता है, न कि छोड़ा जाता है।
#65. POPs का पूर्ण रूप है
-(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)
- POPs का पूर्ण रूप: POPs का पूरा नाम Persistent Organic Pollutants (स्थायी या निरंतर कार्बनिक प्रदूषक) है। ये ऐसे जहरीले रसायन होते हैं जो पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जीवों में एकत्रित (Bioaccumulation) होते जाते हैं।
- विशेषताएँ: ये रसायन आसानी से विघटित नहीं होते और वायु तथा पानी के जरिए लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इसके नियंत्रण के लिए ‘स्टॉकहोम कन्वेंशन’ (Stockholm Convention) संधि बनाई गई है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) निरंतर कार्बनिक कीटनाशक: हालांकि कुछ POPs कीटनाशक होते हैं (जैसे DDT), लेकिन इसका व्यापक नाम ‘कीटनाशक’ नहीं बल्कि ‘प्रदूषक’ (Pollutants) है।
- विकल्प (B) स्थायी कार्बनिक कीटनाशक: इसमें भी तकनीकी शब्द गलत है क्योंकि इसके दायरे में केवल कीटनाशक नहीं बल्कि औद्योगिक रसायन और उपोत्पाद भी आते हैं।
- विकल्प (C) निरंतर ऑक्सीकरण प्रदूषक: यह शब्दावली वैज्ञानिक रूप से गलत और अप्रचलित है।
#66. वह प्रक्रिया, जिसमें अम्ल और क्षार अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, _________ अभिक्रिया कहलाती है।
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 3)
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब किसी अम्ल (Acid) और किसी क्षार (Base) की आपस में रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को उदासीन (Neutralize) कर देते हैं और परिणामस्वारूप लवण (Salt) तथा जल ($\text{H}_2\text{O}$) का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{HCl} + \text{NaOH} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$ (अम्ल + क्षार $\rightarrow$ लवण + जल)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I : 01/06/2019, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ बिना द्रव में बदले सीधे गैस में परिवर्तित हो जाता है (जैसे कपूर)।
- विकल्प (C) हैलोजीनीकरण (Halogenation): यह एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें किसी यौगिक में हैलोजन समूह (जैसे क्लोरीन, ब्रोमीन) जोड़ा जाता है।
- विकल्प (D) हाइड्रोजीनीकरण (Hydrogenation): यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन जोड़ने की प्रक्रिया है (जैसे वनस्पति तेल से डालडा घी बनाना)।
#67. अभिकथन (A) और कारण (R) से चिन्हित निम्नलिखित दो कथनों के संबंध में सही विकल्प का चयन कीजिए।अभिकथन (A): जिंक, कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर सकता है।कारण (R): जिंक, कॉपर से कम अभिक्रियाशील है।
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- अभिकथन (A) का विश्लेषण: जिंक ($\text{Zn}$), कॉपर ($\text{Cu}$) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील धातु है। इसलिए, जब जिंक को कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के विलयन में डाला जाता है, तो यह कॉपर को विस्थापित करके जिंक सल्फेट बनाता है। अतः अभिकथन सत्य है।
- कारण (R) का विश्लेषण: कारण में कहा गया है कि “जिंक, कॉपर से कम अभिक्रियाशील है”, जो कि वैज्ञानिक रूप से गलत है। जिंक, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील होता है। अतः कारण असत्य है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) A असत्य है, परन्तु R सत्य है: यह गलत है क्योंकि अभिकथन सही है और कारण गलत है।
- विकल्प (B) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या है: यह गलत है क्योंकि कारण (R) असत्य है।
- विकल्प (C) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R, A की सही व्याख्या नहीं है: यह भी गलत है क्योंकि दोनों कथन सत्य नहीं हैं।
#68. जब कॉपर सल्फेट विलयन लोहे की धातु के साथ अभिक्रिया करता है, तो तांबा धातु का निर्माण होता है। यह में से कौन सी अभिक्रिया है?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): जब कोई अधिक अभिक्रियाशील तत्व किसी कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक के जलीय विलयन से विस्थापित कर देता है, तो उसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। यहाँ लोहा ($\text{Fe}$), कॉपर ($\text{Cu}$) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है और फेरस सल्फेट बनाता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{Fe}(s) + \text{CuSO}_4(aq) \rightarrow \text{FeSO}_4(aq) + \text{Cu}(s)$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 24/05/2019, Shift 3 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) अपघटन अभिक्रिया (Decomposition): इसमें एक एकल यौगिक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है, जो यहाँ नहीं हो रहा है।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया (Combination): इसमें दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (D) दोहरा विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement): इसमें दो अलग-अलग यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, जबकि यहाँ केवल एक ही तत्व (लोहा) कॉपर को विस्थापित कर रहा है।
#69. जब सीधे ऊपर की ओर फेंका गया एक पत्थर शीर्ष पर पहुँचता है, तो इसका:A. वेग एवं त्वरण शून्य होता है B. वेग शून्य होता है तथा त्वरण लगभग 10 मीटर/सेंकेण्ड 2 होता है C. वेग लगभग 10 मीटर/सेंकेण्ड होता है तथा त्वरण शून्य होता है D. वेग लगभग 10 मीटर/सेंकेण्ड होता है तथा त्वरण समान बना रहता है
(RRB NTPC Tier I : 28 Apr 2016 Shift 3)
- ऊर्ध्वाधर गति की अवधारणा: जब किसी वस्तु को सीधे ऊपर की ओर फेंका जाता है, तो अपने मार्ग के सर्वोच्च बिंदु (शीर्ष या Highest Point) पर पहुँचकर वस्तु कुछ पल के लिए रुक जाती है, इसलिए वहाँ उसका अंतिम वेग (Velocity) शून्य ($v = 0$) हो जाता है।
- गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to gravity): वेग शून्य होने के बावजूद, वस्तु पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल लगातार कार्य करता रहता है, जिसके कारण गुरुत्वीय त्वरण ($g$) हमेशा नीचे की ओर लगभग $9.8\text{ m/s}^2$ (या लगभग $10\text{ m/s}^2$) बना रहता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 28/04/2016, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) वेग एवं त्वरण शून्य होता है: यह गलत है क्योंकि शीर्ष पर वेग तो शून्य होता है, लेकिन गुरुत्वीय त्वरण शून्य नहीं होता (वह हमेशा कार्यरत रहता है)।
- विकल्प (C) वेग लगभग 10… तथा त्वरण शून्य होता है: यह कथन पूरी तरह विपरीत है; शीर्ष पर वेग शून्य होता है और त्वरण लगभग $10\text{ m/s}^2$ होता है।
- विकल्प (D) वेग लगभग 10… तथा त्वरण समान बना रहता है: यहाँ वेग को 10 मीटर/सेकंड बता दिया गया है, जबकि शीर्ष पर पहुँचने पर वस्तु रुक जाती है और वेग शून्य हो जाता है।
#70. कौन-सी अभिक्रिया, द्रव्यमान संरक्षण के नियम को सर्वोत्तम रूप से सपोर्ट करती है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन किया जा सकता है और न ही विनाश। अभिक्रिया से पहले (अभिकारकों का कुल द्रव्यमान) और अभिक्रिया के बाद (उत्पादों का कुल द्रव्यमान) हमेशा समान रहता है।
- सीलबंद कंटेनर का महत्व: जब सिरके (एसिटिक एसिड) और बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) की अभिक्रिया होती है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस ($\text{CO}_2$) बनती है। यदि कंटेनर खुला हो, तो गैस उड़ जाएगी और द्रव्यमान कम प्रतीत होगा। सीलबंद कंटेनर होने पर गैस बाहर नहीं जा पाती, जिससे संपूर्ण प्रणाली का कुल द्रव्यमान स्थिर (समान) बना रहता है और यह नियम सर्वोत्तम रूप से सिद्ध होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) खुली हवा में कागज जलाना: इसमें राख, धुआं और गैसें हवा में फैल जाती हैं, जिससे खुले में माप करने पर द्रव्यमान घटा हुआ प्रतीत होता है।
- विकल्प (B) खुली हवा में ऐल्कोहॉल का वाष्पन: यह कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं बल्कि भौतिक परिवर्तन (वाष्पीकरण) है जिसमें वाष्प हवा में उड़ जाती है।
- विकल्प (D) खुली हवा में लोहे को गर्म करना: खुली हवा में लोहे को गर्म करने पर वह ऑक्सीजन के साथ मिलकर आयरन ऑक्साइड बनाता है, और खुली व्यवस्था होने के कारण शुरुआती माप और अंतिम माप में अंतर आ सकता है।
#71. एक जल शोधन संयंत्र हानिकारक आयनों को हटाने के लिए एक प्रक्रिया का उपयोग करता है। इस उद्देश्य के लिए किस प्रकार की अभिक्रिया का उपयोग किए जाने की सर्वाधिक संभावना है?
(Not found 11/03/2026 )
- जल शोधन में द्वि-विस्थापन अभिक्रिया: जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants) में पानी से हानिकारक या अवांछित आयनों (जैसे भारी धातु आयन या कठोरता उत्पन्न करने वाले कैल्शियम/मैग्नीशियम आयन) को हटाने के लिए अवक्षेपण (Precipitation) विधियों का उपयोग किया जाता है। अवक्षेपण अभिक्रियाएँ मूल रूप से द्वि-विस्थापन अभिक्रियाएँ होती हैं, जहाँ पानी में मौजूद आयन शोधन रसायनों के साथ मिलकर अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) बनाते हैं जिसे आसानी से छानकर अलग किया जा सकता है।
- अवक्षेपण की भूमिका: उदाहरण के लिए, जल की कठोरता दूर करने के लिए चूना-सोडा प्रक्रिया में द्वि-विस्थापन के माध्यम से अवांछित आयनों को अवक्षेप के रूप में बाहर किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न मॉडल/अभ्यास सेट (11/03/2026) से लिया गया है।
- विकल्प (A) संश्लेषण अभिक्रिया (Synthesis/Combination): इसमें दो या अधिक पदार्थ मिलकर नया उत्पाद बनाते हैं, यह पानी से विशिष्ट हानिकारक आयनों को हटाने के लिए उपयुक्त नहीं है।
- विकल्प (B) वियोजन अभिक्रिया (Decomposition): इसमें एक यौगिक टूटकर सरल पदार्थ बनाता है, जो आयनों को हटाने का प्रत्यक्ष तरीका नहीं है।
- विकल्प (C) दहन अभिक्रिया (Combustion): दहन एक उष्माक्षेपी प्रक्रिया है जिसमें पदार्थों को ऑक्सीजन में जलाया जाता है, जिसका जल शोधन में आयन हटाने के लिए उपयोग नहीं किया जाता।
#72. सोडियम और ऐलुमिनियम जैसी धातुओं, जो कि सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर हैं, के निष्कर्षण के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
- सक्रियता श्रेणी में शीर्ष पर स्थित धातुएँ: सोडियम ($\text{Na}$), मैग्नीशियम ($\text{Mg}$), ऐलुमिनियम ($\text{Al}$) जैसी अत्यधिक सक्रिय धातुओं की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता (Affinity) बहुत अधिक होती है, इसलिए इन्हें कार्बन जैसे सामान्य अपचायक (Reducing agents) का उपयोग करके उनके यौगिकों से अलग नहीं किया जा सकता।
- विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction): इन धातुओं का निष्कर्षण उनके गलित (Molten) क्लोराइड या ऑक्साइड के विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है। उदाहरण के लिए, गलित सोडियम क्लोराइड के विद्युत अपघटन से कैथोड पर सोडियम धातु प्राप्त होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09/01/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) कार्बन के साथ तापन: इसका उपयोग मध्यम सक्रियता वाली धातुओं (जैसे जिंक, आयरन, लेड) के ऑक्साइड्स के अपचयन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु में गर्म करने की प्रक्रिया है, जो सक्रियता में मध्यम धातुओं के लिए होती है।
- विकल्प (D) भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्कों को अत्यधिक वायु में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की विधि है (जैसे कॉपर या जिंक सल्फाइड के लिए)।
#73. निम्नलिखित में से कौन-सी अपचयन अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction): रासायनिक रूप से, किसी पदार्थ में हाइड्रोजन का जुड़ना, ऑक्सीजन का निकलना या इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना अपचयन कहलाता है। जब कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) से हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है, तो ऑक्सीजन अलग हो जाती है और वह कॉपर ($\text{Cu}$) में अपचयित हो जाती है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{CuO} + \text{H}_2 \xrightarrow{\Delta} \text{Cu} + \text{H}_2\text{O}$ (यहाँ कॉपर ऑक्साइड का अपचयन कॉपर में हो रहा है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कॉपर का कॉपर ऑक्साइड में रूपांतरण: इसमें कॉपर के साथ ऑक्सीजन जुड़ती है, जो कि ‘ऑक्सीकरण’ (Oxidation) का उदाहरण है।
- विकल्प (B) कार्बन का कार्बन डाइऑक्साइड में रूपांतरण: यह भी कार्बन के साथ ऑक्सीजन के जुड़ने के कारण ऑक्सीकरण/दहन अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) एथेनॉल का एसिटिक अम्ल में रूपांतरण: एथेनॉल में ऑक्सीजन का जुड़ना और हाइड्रोजन का निकलना होता है, जो कि एक ऑक्सीकरण (या संक्षारण/ऑक्सीकारी अभिकर्मक द्वारा) प्रक्रिया है।
#74. विस्थापन अभिक्रिया के पीछे प्राथमिक रासायनिकिकी क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- विस्थापन अभिक्रिया की कार्यप्रणाली (Primary Chemistry of Displacement Reaction): इस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया में एक अधिक अभिक्रियाशील (Reactive) तत्व, किसी कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक (या जलीय विलयन) से बाहर हटा देता है (विस्थापित कर देता है)। इसकी मूल वजह धातुओं या तत्वों की रासायनिक सक्रियता में अंतर होना है।
- उदाहरण: $\text{Fe} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{FeSO}_4 + \text{Cu}$ (यहाँ अधिक सक्रिय लोहा, कॉपर सल्फेट से कम सक्रिय कॉपर को विस्थापित कर देता है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) यौगिक दो या अधिक घटकों में विघटित हो जाते हैं: यह ‘वियोजन या अपघटन अभिक्रिया’ (Decomposition Reaction) को परिभाषित करता है।
- विकल्प (C) दो अभिक्रियक मिलकर एक उत्पाद जनित करते हैं: यह ‘संयोजन अभिक्रिया’ (Combination Reaction) का लक्षण है।
- विकल्प (D) दो पदार्थों के बीच आयन विनिमय होता है: यह प्रक्रिया ‘द्वि-विस्थापन अभिक्रिया’ (Double Displacement Reaction) के अंतर्गत आती है।
#75. लोहे जैसी मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके अयस्कों से निष्कर्षित करने के लिए सामान्यतः किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (Medium Reactive Metals): लोहे ($text{Fe}$), जिंक ($text{Zn}$), लेड ($text{Pb}$) जैसी धातुएँ सक्रियता श्रेणी के मध्य में आती हैं। ये आमतौर पर प्रकृति में सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।
- निष्कर्षण की प्रक्रिया: पहले इन अयस्कों को भर्जन (Roasting) या निस्तापन (Calcination) द्वारा ‘धातु ऑक्साइड’ में बदला जाता है। इसके बाद, कार्बन (कोक) जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग करके इन धातु ऑक्साइडों का रासायनिक अपचयन (Chemical Reduction) किया जाता है, जिससे शुद्ध धातु प्राप्त होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23/12/2025) में पूछा गया था।
- विद्युत अपघटन विधि: यह केवल सोडियम, एल्युमिनियम जैसी अत्यंत सक्रिय धातुओं के लिए उपयोग की जाती है।
- केवल वायु में सीधे गर्म करना: इससे केवल ऑक्साइड बनता है, जब तक कि कार्बन या अन्य अपचायक से अपचयन न कराया जाए, तब तक धातु मुक्त नहीं होती।
#76. सक्रियता श्रेणी के मध्य स्थित धातुओं को सामान्यतः कैसे निष्कर्षित किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- सक्रियता श्रेणी के मध्य स्थित धातुएँ (Medium Reactive Metals): इस श्रेणी में जिंक ($\text{Zn}$), आयरन ($\text{Fe}$), लेड ($\text{Pb}$) जैसी मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ आती हैं। ये प्रकृति में आमतौर पर सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।
- निष्कर्षण की विधि: इन धातुओं के अयस्कों को पहले भर्जन या निस्तापन प्रक्रिया द्वारा ‘धातु ऑक्साइड’ में बदला जाता है। इसके पश्चात, कार्बन (कोक) जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग करके इन धातु ऑक्साइडों का रासायनिक अपचयन (Reduction) किया जाता है, जिससे शुद्ध धातु प्राप्त होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (जल में घोलकर): धातुएँ जल में अघुलनशील होती हैं, इसलिए इस विधि का उपयोग धातुओं के निष्कर्षण में नहीं किया जाता।
- विकल्प (विद्युत अपघटन द्वारा): यह विधि सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित अत्यधिक सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम, ऐलुमिनियम) के निष्कर्षण के लिए उपयोग की जाती है।
- विकल्प (केवल तापन द्वारा): यह विधि बहुत कम सक्रिय धातुओं (जैसे मरकरी या कॉपर) के कुछ विशेष अयस्कों के लिए लागू होती है, जबकि मध्यम सक्रियता वाली धातुओं के लिए कार्बन अपचायक अनिवार्य होता है।
#77. एक द्रव्यमान m, वेग v से गतिमान है और इसकी गतिज ऊर्जा K है। यदि वेग दोगुना कर दिया जाए तो नई गतिज ऊर्जा होगी?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2)
- गतिज ऊर्जा का सूत्र: किसी गतिशील वस्तु की गतिज ऊर्जा ($K$) का सूत्र $K = \frac{1}{2}mv^2$ होता है, जहाँ $m$ द्रव्यमान और $v$ वेग है। स्पष्ट है कि गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग ($v^2$) के अनुक्रमानुपाती होती है।
- गणना: यदि वेग को दोगुना ($2v$) कर दिया जाए, तो नई गतिज ऊर्जा $K’ = \frac{1}{2}m(2v)^2 = \frac{1}{2}m(4v^2) = 4 \times (\frac{1}{2}mv^2) = 4K$ हो जाएगी।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 06/05/2025, Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) 2K: यह तब होता जब गतिज ऊर्जा वेग के सीधे समानुपाती (बिना वर्ग के) होती।
- विकल्प (B) K: ऊर्जा अपरिवर्तित तभी रहती जब वेग में कोई परिवर्तन न किया गया हो।
- विकल्प (D) K/2: यह स्थिति तब बनती जब वेग को आधा कर दिया जाता या गतिज ऊर्जा वेग के व्युत्क्रमानुपाती होती।
#78. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया को निरूपित नहीं करती है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): सामान्यतः जब कोई अम्ल (Acid) किसी क्षार/हाइड्रॉक्साइड (Base) के साथ अभिक्रिया करके लवण (Salt) और जल ($\text{H}_2\text{O}$) का निर्माण करता है, तो उसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
- विकल्प (A) का विश्लेषण: यहाँ सोडियम कार्बोनेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3$) एक लवण/क्षारीय प्रकृति का यौगिक है जो अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया करके लवण, जल के साथ-साथ मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस भी मुक्त करता है। यह धातु कार्बोनेट की अम्ल के साथ अभिक्रिया है, न कि विशुद्ध अम्ल-क्षार उदासीनीकरण।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) $\text{CH}_3\text{COOH} + \text{NaOH} \rightarrow \text{CH}_3\text{COONa} + \text{H}_2\text{O}$: यह एक दुर्बल अम्ल (एसिटिक एसिड) और प्रबल क्षार (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) के बीच की उदासीनीकरण अभिक्रिया है जिसमें लवण और जल बनते हैं।
- विकल्प (C) $\text{H}_2\text{SO}_4 + \text{Ca(OH)}_2 \rightarrow \text{CaSO}_4 + 2\text{H}_2\text{O}$: यह सल्फ्यूरिक अम्ल और कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (क्षार) के बीच की क्लासिक उदासीनीकरण अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) $\text{HCl} + \text{NaOH} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$: यह प्रबल अम्ल ($\text{HCl}$) और प्रबल क्षार ($\text{NaOH}$) के बीच की मानक उदासीनीकरण अभिक्रिया है।
#79. हाइड्रोजन परॉक्साइड के अपघटन को दर्शाने वाला संतुलित समीकरण है
:(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
- हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन (Decomposition of Hydrogen Peroxide): हाइड्रोजन परॉक्साइड ($\text{H}_2\text{O}_2$) का अपघटन होने पर यह जल ($\text{H}_2\text{O}$) और ऑक्सीजन गैस ($\text{O}_2$) में वियोजित हो जाता है।
- संतुलन (Balancing): द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, समीकरण के दोनों पक्षों में परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। अभिकारक पक्ष में हाइड्रोजन के 4 और ऑक्सीजन के 4 परमाणु हैं। उत्पाद पक्ष में भी $2\text{H}_2\text{O}$ (हाइड्रोजन के 4, ऑक्सीजन के 2) और $\text{O}_2$ (ऑक्सीजन के 2) मिलकर कुल हाइड्रोजन 4 और ऑक्सीजन 4 बनाते हैं। अतः यह पूर्णतः संतुलित समीकरण है: $2\text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2$।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) $2\text{HO}_2 \rightarrow 2\text{HO} + \text{O}_2$: यह रासायनिक रूप से हाइड्रोजन परॉक्साइड का सही सूत्र ($\text{H}_2\text{O}_2$) नहीं है और यौगिक का रासायनिक स्वरूप गलत है।
- विकल्प (C) $\text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2$: यह समीकरण असंतुलित है क्योंकि इसमें अभिकारक पक्ष में हाइड्रोजन के केवल 2 परमाणु हैं जबकि उत्पाद पक्ष में 4 परमाणु दिखाए गए हैं।
- विकल्प (D) $\text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{H}_2\text{O} + \text{O}_2$: यह भी एक असंतुलित समीकरण है (उत्पाद पक्ष में कुल 3 ऑक्सीजन परमाणु हैं जबकि बाईं ओर केवल 2 हैं)।
#80. निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा सही विकल्प का चयन करें।कथन 1: सजातीय श्रेणी के सदस्यों में एक – CH2– समूह का अंतर होता है।कथन 2: सजातीय श्रेणी के प्रत्येक क्रमिक सदस्य का आणविक द्रव्यमान पूर्ववर्ती सदस्य से 12 u भिन्न होता है।
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- कथन 1 का विश्लेषण (सत्य): कार्बनिक यौगिकों की सजातीय श्रेणी (Homologous Series) के किन्हीं भी दो क्रमागत (क्रमिक) सदस्यों के आणविक सूत्रों में हमेशा एक $-\text{CH}_2-$ (मेथिलीन) समूह का अंतर होता है। अतः कथन 1 पूरी तरह सत्य है।
- कथन 2 का विश्लेषण (असत्य): एक $-\text{CH}_2-$ समूह में कार्बन का परमाणु द्रव्यमान $12\text{ u}$ और हाइड्रोजन के दो परमाणुओं का कुल द्रव्यमान $2 \times 1 = 2\text{ u}$ होता है। इस प्रकार, $-\text{CH}_2-$ समूह का कुल आणविक द्रव्यमान अंतर $12 + 2 = 14\text{ u}$ होता है, न कि $12\text{ u}$। इसलिए कथन 2 असत्य है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) दोनों कथन असत्य हैं: यह गलत है क्योंकि कथन 1 पूरी तरह से सही है।
- विकल्प (B) और (C) दोनों कथन सत्य हैं: ये विकल्प इसलिए गलत हैं क्योंकि कथन 2 में द्रव्यमान अंतर $12\text{ u}$ दिया गया है जो कि वैज्ञानिक रूप से गलत ($14\text{ u}$ होना चाहिए) है।
#81. निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया में अपघटन के दौरान रंग परिवर्तन, गैस का उत्सर्जन और ठोस अवशेष का निर्माण, तीनों एक साथ होते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- लेड नाइट्रेट का ऊष्मीय अपघटन (Thermal Decomposition of Lead Nitrate): जब लेड नाइट्रेट ($\text{Pb(NO}_3)_2$) को गर्म किया जाता है, तो यह अपघटित होकर लेड ऑक्साइड ($\text{PbO}$), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($\text{NO}_2$) और ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) बनाता है।
- तीनों घटनाओं का होना:
- रंग परिवर्तन: रंगहीन लेड नाइट्रेट क्रिस्टल गर्म करने पर भूरे रंग के धुएं में बदलते हैं और अवशेष बचता है।
- गैस का उत्सर्जन: भूरे रंग की नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($\text{NO}_2$) गैस उत्सर्जित होती है।
- ठोस अवशेष: परखनली में पीछे पीले रंग का ठोस अवशेष (लेड ऑक्साइड, $\text{PbO}$) शेष बच जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) $2\text{AgCl} \rightarrow 2\text{Ag} + \text{Cl}_2$: यह प्रकाश अपघटन (Photolytic decomposition) है जिसमें रंग परिवर्तन (सफेद से धूसर/ग्रे सिल्वर) और ठोस अवशेष तो मिलता है, लेकिन कोई स्पष्ट भूरी गैस का उत्सर्जन एक साथ नहीं होता।
- विकल्प (C) $\text{CaCO}_3 \rightarrow \text{CaO} + \text{CO}_2$: इसमें कोई स्पष्ट रंग परिवर्तन नहीं होता (कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम ऑक्साइड दोनों सफेद होते हैं)।
- विकल्प (D) $2\text{KClO}_3 \rightarrow 2\text{KCl} + 3\text{O}_2$: इसमें भी पोटेशियम क्लोरेट और क्लोराइड दोनों सफेद ठोस होते हैं, अतः इसमें रंग परिवर्तन नहीं देखा जाता।
#82. जब पोटैशियम, जल के साथ अभिक्रिया करता है, तो हम क्या देखते हैं?
(RRB NTPC CBT-1 : 06/03/2026)
- पोटैशियम और जल की अभिक्रिया: पोटैशियम ($\text{K}$) एक अत्यंत अभिक्रियाशील क्षार धातु है। जब यह ठंडे पानी के साथ अभिक्रिया करती है, तो यह इतनी तीव्र (Vigorous) होती है कि उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) तुरंत आग पकड़ लेती है और इसमें एक चमकीली लैवेंडर/बैंगनी रंग की ज्वाला दिखाई देती है।
- रासायनिक समीकरण: $2\text{K}(s) + 2\text{H}_2\text{O}(l) \rightarrow 2\text{KOH}(aq) + \text{H}_2(g) + \text{ऊष्मा}$ (यह एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-1 : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कोई दृश्य परिवर्तन नहीं होता: यह गलत है क्योंकि यह अभिक्रिया बहुत विस्फोटक और दृश्य रूप से नाटकीय होती है।
- विकल्प (B) हरे रंग के यौगिक का निर्माण: इसमें कोई हरा यौगिक नहीं बनता, बल्कि पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड का रंगहीन विलयन बनता है।
- विकल्प (C) धीरे-धीरे बुलबुले उठना और मंद अभिक्रिया: यह सोडियम या कैल्शियम जैसी अपेक्षाकृत कम सक्रिय धातुओं की हल्की अभिक्रियाओं में देखा जा सकता है, लेकिन पोटैशियम के साथ अभिक्रिया बेहद तीव्र होती है।
#83. विरंजक चूर्ण का उपयोग किसके लिए नहीं किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 22 Feb 2021 Shift 1)
- विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder / $\text{CaOCl}_2$): इसका रासायनिक नाम कैसियम ऑक्सीक्लोराइड है। इसका उपयोग मुख्य रूप से उद्योगों और साफ-सफाई में किया जाता है, न कि खाद्य पदार्थों (जैसे रोटी) बनाने में। रोटी या ब्रेड बनाने के लिए यीस्ट या बेकिंग पाउडर/बेकिंग सोडा का उपयोग होता है, विरंजक चूर्ण का नहीं।
- मुख्य उपयोग: (1) पीने वाले जल को रोगाणुमुक्त (कीटाणुरहित) करने के लिए, (2) वस्त्र उद्योग में कपास और लिनन के विरंजन (Bleaching) के लिए, और (3) रासायनिक उद्योगों में एक प्रबल ऑक्सीकारक (Oxidizing agent) के रूप में।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 22 Feb 2021 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल को कीटाणुरहित करना: यह विरंजक चूर्ण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सामान्य उपयोग है।
- विकल्प (B) कपास को विरंजित करना: वस्त्र उद्योग में सूती कपड़ों को सफेद करने (bleaching) के लिए इसका व्यापक उपयोग होता है।
- विकल्प (C) ऑक्सीकारक रसायन: यह विभिन्न रासायनिक प्रतिक्रियाओं में एक बेहतरीन ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
#84. निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया एक संयोजन अभिक्रिया है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 1)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब दो या दो से अधिक अभिकारक (तत्व या यौगिक) आपस में मिलकर केवल एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, तो उसे संयोजन अभिक्रिया कहा जाता है।
- विश्लेषण: समीकरण $\text{CaO} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2$ में बिना बुझा चूना ($\text{CaO}$) और जल ($\text{H}_2\text{O}$) मिलकर केवल एक उत्पाद—बुझा हुआ चूना ($\text{Ca(OH)}_2$) बनाते हैं और साथ में प्रचुर मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। अतः यह एक संयोजन (और ऊष्माक्षेपी) अभिक्रिया है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 18/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) $2\text{KClO}_3 \rightarrow 2\text{KCl} + 3\text{O}_2$: यह एक ‘अपघटन (वियोजन) अभिक्रिया’ है जिसमें एक यौगिक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (C) $\text{NaCl} + \text{AgNO}_3 \rightarrow \text{AgCl} + \text{NaNO}_3$: यह एक ‘द्वि-विस्थापन (अवक्षेपण) अभिक्रिया’ है जिसमें आयनों का आदान-प्रदान होता है।
- विकल्प (D) $\text{CaCO}_3 \rightarrow \text{CaO} + \text{CO}_2$: यह भी एक ‘ऊष्मीय अपघटन अभिक्रिया’ है जिसमें कैल्शियम कार्बोनेट वियोजित होता है।
#85. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प उदासीनीकरण अभिक्रिया के लिए सामान्य शब्द समीकरण को सही प्रकार से पूरा करता है?क्षार + अम्ल → ____________ + ____________
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 18/03/2026 )
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब किसी क्षार (Base) और किसी अम्ल (Acid) की आपस में रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है, तो वे एक-दूसरे के अम्लीय और क्षारीय प्रभावों को उदासीन कर देते हैं। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हमेशा लवण (Salt) और जल ($\text{H}_2\text{O}$) का निर्माण होता है।
- सामान्य शब्द समीकरण: क्षार + अम्ल $\rightarrow$ लवण + जल (उदाहरण: $\text{NaOH} + \text{HCl} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate CBT 1 : 18/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) धातु + कार्बन डाइऑक्साइड: यह किसी सामान्य अम्ल-क्षार अभिक्रिया का उत्पाद नहीं है।
- विकल्प (C) धातु + जल: धातु और जल की अभिक्रिया से धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनती है, न कि लवण और जल।
- विकल्प (D) लवण + कार्बन डाइऑक्साइड: यह उत्पाद तब बनता है जब कोई अम्ल किसी ‘धातु कार्बोनेट’ या ‘धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट’ के साथ अभिक्रिया करता है, न कि सीधे क्षार के साथ।
#86. और में प्रोटॉनों की संख्या क्रमशः कितनी है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025)
- समस्थानिक (Isotopes) की अवधारणा: कार्बन के समस्थानिकों जैसे $_{6}^{12}\text{C}$ और $_{6}^{14}\text{C}$ में परमाणु क्रमांक (Atomic Number) समान होता है, लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग-अलग होती है।
- प्रोटॉनों की संख्या: किसी भी परमाणु का परमाणु क्रमांक उसके नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होता है। चूँकि दोनों ही कार्बन के समस्थानिक हैं और दोनों का परमाणु क्रमांक 6 है, इसलिए दोनों में प्रोटॉनों की संख्या क्रमशः 6 और 6 ही होगी (जबकि न्यूट्रॉनों की संख्या क्रमशः 6 और 8 होगी)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) 8 और 6: यह तब होता जब पहला तत्व ऑक्सीजन (परमाणु क्रमांक 8) और दूसरा कार्बन होता, जबकि यहाँ दोनों कार्बन के समस्थानिक हैं।
- विकल्प (C) 7 और 7: यह नाइट्रोजन जैसे तत्वों के लिए होता है जिनका परमाणु क्रमांक 7 होता है।
- विकल्प (D) 6 और 8: यह उन दोनों में न्यूट्रॉनों की संख्या का क्रम हो सकता है ($_{6}^{12}\text{C}$ में $12-6 = 6$ न्यूट्रॉन और $_{6}^{14}\text{C}$ में $14-6 = 8$ न्यूट्रॉन), किंतु प्रोटॉनों की संख्या दोनों में 6 ही होती है।
#87. कॉपर सल्फेट विलयन में लोहे की कील डुबोने पर उसका नीला रंग फीका क्यों पड़ जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- विस्थापन अभिक्रिया और रंग परिवर्तन: जब लोहे की कील को नीले रंग के कॉपर सल्फेट ($text{CuSO}_4$) विलयन में डुबोया जाता है, तो अधिक अभिक्रियाशील लोहा ($text{Fe}$), कॉपर ($text{Cu}$) को विस्थापित कर देता है और फेरस सल्फेट ($text{FeSO}_4$) बनाता है।
- रासायनिक समीकरण: $text{Fe}(s) text{CuSO}_4(aq, text{नीला}) rightarrow text{FeSO}_4(aq, text{हल्का हरा/वर्णहीन}) text{Cu}(s)$
- कॉपर सल्फेट का गहरा नीला रंग विलुप्त हो जाता है क्योंकि विलयन में मौजूद नीले रंग के कॉपर आयन फेरस सल्फेट में बदल जाते हैं, और लोहे की कील पर तांबे ($text{Cu}$) की भूरी परत जम जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) तांबा जल में विलीन हो जाता है: तांबा जल में विलीन नहीं होता, बल्कि विस्थापित होकर ठोस रूप में लोहे की सतह पर जमा होता है।
- विकल्प (B) आयरन सल्फेट रंगहीन होता है: आयरन सल्फेट का विलयन पूरी तरह रंगहीन नहीं होता बल्कि हल्का हरा (Pale Green) होता है।
- विकल्प (C) कॉपर सल्फेट विघटित हो जाता है: यह वियोजन या अपघटन अभिक्रिया नहीं बल्कि एक विस्थापन अभिक्रिया है।
#88. मिश्रण का निर्माण एक _________ परिवर्तन है जबकि यौगिक का निर्माण क्रमशः एक _________ परिवर्तन है।
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- मिश्रण का निर्माण (Formation of Mixture): जब दो या दो से अधिक पदार्थों को केवल मिलाया जाता है (बिना किसी निश्चित अनुपात के और बिना किसी रासायनिक बंधन के), तो मिश्रण बनता है। इसके घटक अपने मूल गुणधर्म बनाए रखते हैं और इन्हें भौतिक विधियों द्वारा आसानी से अलग किया जा सकता है। इसलिए यह एक भौतिक परिवर्तन (Physical Change) है।
- यौगिक का निर्माण (Formation of Compound): जब दो या दो से अधिक तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से आपस में संयुक्त होते हैं, तो एक नए पदार्थ (यौगिक) का निर्माण होता है जिसके गुण मूल घटकों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। इसमें रासायनिक अभिक्रिया शामिल होती है, इसलिए यह एक रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) रासायनिक, भौतिक: यह क्रम पूरी तरह विपरीत है क्योंकि मिश्रण भौतिक परिवर्तन है और यौगिक रासायनिक परिवर्तन।
- विकल्प (B) भौतिक, भौतिक: यौगिक का निर्माण रासायनिक परिवर्तन होता है, न कि भौतिक।
- विकल्प (C) रासायनिक, रासायनिक: मिश्रण का निर्माण रासायनिक परिवर्तन नहीं बल्कि भौतिक परिवर्तन है।
#89. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ पानी में खुलने पर हाइड्रोक्साइड आयन उत्पन्न करता है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 12 Dec, 2024 Shift 1)
- अमोनिया और जल की अभिक्रिया: अमोनिया ($\text{NH}_3$) एक दुर्बल क्षार है। जब इसे पानी में घोला जाता है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके अमोनियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NH}_4\text{OH}$) बनाता है, जो वियोजित होकर विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयन ($\text{OH}^-$) उत्पन्न करता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{NH}_3(g) + \text{H}_2\text{O}(l) \rightleftharpoons \text{NH}_4^+(aq) + \text{OH}^-(aq)$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF SI CBT-I : 12/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($\text{NO}_2$): यह एक अधात्विक ऑक्साइड है जो जल में घुलने पर अम्ल (जैसे नाइट्रिक/नाइट्रस अम्ल) बनाता है और हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) उत्पन्न करता है।
- विकल्प (C) कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$): पानी में घुलने पर यह कार्बोनिक अम्ल ($\text{H}_2\text{CO}_3$) बनाता है जो हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) देता है।
- विकल्प (D) सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$): यह जल के साथ मिलकर सल्फ्यूरस अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_3$) बनाता है, जो विलयन में हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) मुक्त करता है।
#90. अपघटन अभिक्रिया क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- अपघटन या वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): इस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया में एकल अभिकर्मक (यौगिक) टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद प्रदान करता है। यह आमतौर पर ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा के माध्यम से होती है।
- उदाहरण: $\text{CaCO}_3(s) \xrightarrow{\text{ऊष्मा}} \text{CaO}(s) + \text{CO}_2(g)$ (कैल्शियम कार्बोनेट का ऊष्मीय अपघटन)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 19/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) दो यौगिक आयनों का आदान-प्रदान करते हैं: यह ‘द्वि-विस्थापन अभिक्रिया’ (Double Displacement Reaction) को परिभाषित करता है।
- विकल्प (B) दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं: यह ‘संयोजन अभिक्रिया’ (Combination Reaction) का लक्षण है।
- विकल्प (C) एक पदार्थ दो या अधिक अभिकारकों से बनता है: यह कथन वैज्ञानिक रूप से असंगत है क्योंकि उत्पाद अभिकारकों से बनते हैं, न कि इसके विपरीत।
#91. यदि A, B को विस्थापित करता है और C, A को विस्थापित करता है, तो अभिक्रियाशीलता का क्रम _________ है।
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- विस्थापन और अभिक्रियाशीलता का नियम: रासायनिक रूप से, एक अधिक अभिक्रियाशील (Reactive) तत्व ही अपने से कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक या विलयन से विस्थापित कर सकता है।
- तथ्यों का विश्लेषण:
- यदि A, B को विस्थापित करता है, तो इसका अर्थ है कि A, B से अधिक अभिक्रियाशील है (अर्थात $A > B$)।
- यदि C, A को विस्थापित करता है, तो इसका अर्थ है कि C, A से अधिक अभिक्रियाशील है (अर्थात $C > A$)।
- उपर्युक्त दोनों संबंधों को आपस में संयोजित करने पर, तत्वों की सक्रियता का सही घटता क्रम C > A > B प्राप्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 10/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) B > A > C: यह दिए गए कथनों से पूरी तरह विपरीत (उल्टा) क्रम है।
- विकल्प (C) C > B > A: यह गलत है क्योंकि इसमें B को A से अधिक सक्रिय बता दिया गया है, जबकि नियम के अनुसार A, B को विस्थापित करता है (यानी A अधिक सक्रिय है)।
- विकल्प (D) A > B > C: यह विकल्प इसलिए गलत है क्योंकि इसमें C को सबसे कम सक्रिय मान लिया गया है, जबकि C तो A को भी विस्थापित कर रहा है।
#92. निम्नलिखित अभिक्रिया पर विचार कीजिए:निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? (A) यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐल्कोहॉल के कार्बोक्लिक अम्ल में ऑक्सीकरण को निरूपित करती है। (B) क्षारीय KMnO 4 ऑक्सीकरण कर्मक के रूप में कार्य करता है। (C) क्षारीय KMnO 4 अपचायी कर्मक के रूप में कार्य करता है।
(RRB JE 20/02/2026 )
- ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण: जब किसी प्राथमिक ऐल्कोहॉल (जैसे एथेनॉल) को ऑक्सीकृत किया जाता है, तो पहले वह एल्डिहाइड में और अंततः सीधे कार्बोक्सिलिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है। अतः कथन (A) सत्य है।
- ऑक्सीकारक की भूमिका: इस रासायनिक परिवर्तन के लिए क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट ($\text{KMnO}_4$) या अम्लीय पोटेशियम डाइक्रोमेट का उपयोग किया जाता है। यहाँ क्षारीय $\text{KMnO}_4$ अन्य पदार्थों को ऑक्सीजन प्रदान करके उन्हें ऑक्सीकृत करता है, इसलिए यह एक प्रबल ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent) के रूप में कार्य करता है। अतः कथन (B) सत्य है।
- कथन (C) का खंडन: चूंकि यह स्वयं अपचयित होकर दूसरे को ऑक्सीकृत करता है, इसलिए यह अपचायी (Reducing agent) नहीं बल्कि ऑक्सीकारक है। अतः कथन C असत्य है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A), (B) और (C): इनमें कथन C को भी सही मान लिया गया है जो कि रासायनिक रूप से गलत है क्योंकि $\text{KMnO}_4$ एक ऑक्सीकारक है।
- विकल्प (C) केवल A और C: इसमें गलत कथन C को शामिल किया गया है।
- विकल्प (A) केवल B: इसमें केवल एक ही कथन सही माना गया है जबकि कथन A और B दोनों सही हैं।
#93. जब किसी अपघटन अभिक्रिया को गर्म करके किया जाता है, तब उसे क्या कहा जाता है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- तापीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब किसी अपघटन या वियोजन अभिक्रिया को संपन्न कराने के लिए ऊष्मा (Heat) का उपयोग किया जाता है (अर्थात पदार्थ को गर्म किया जाता है), तो उसे तापीय अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
- उदाहरण: कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करने पर उसका चूने और कार्बन डाइऑक्साइड में टूटना एक तापीय अपघटन है: $\text{CaCO}_3(s) \xrightarrow{\Delta} \text{CaO}(s) + \text{CO}_2(g)$।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 25/05/2019, Shift 3 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) गैर-विद्युत अपघटनी अभिक्रिया: यह कोई विशिष्ट वैज्ञानिक वर्गीकरण नहीं है जिसका उपयोग ऊष्मा द्वारा होने वाली अभिक्रिया के लिए किया जाए।
- विकल्प (C) प्रकाश-अपघटनी अभिक्रिया (Photolytic Decomposition): इस प्रकार की अपघटन अभिक्रिया ऊष्मा से नहीं बल्कि सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा द्वारा होती है (जैसे सिल्वर क्लोराइड का टूटना)।
- विकल्प (D) विद्युत-अपघटन अभिक्रिया (Electrolytic Decomposition): यह अभिक्रिया ऊष्मा से नहीं बल्कि जलीय या गलित विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर होती है (जैसे जल का विद्युत अपघटन)।
#94. जैवनिम्नीकरणीय पदार्थों की परिभाषा के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
(RRB JE 19/02/2026 )
- जैवनिम्नीकरणीय पदार्थ (Biodegradable Substances): वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया, कवक आदि) जैसे जैविक कारकों द्वारा जैविक प्रक्रम (Biological processes) के माध्यम से सरल और हानिरहित पदार्थों में विघटित या अपघटित हो जाते हैं, जैवनिम्नीकरणीय कहलाते हैं।
- उदाहरण: सब्जियों के छिलके, फल, कागज, सूती कपड़े और अन्य कार्बनिक कचरे जो पर्यावरण में आसानी से सड़-गल जाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 19/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) रासायनिक प्रक्रम: यह कृत्रिम या लैब आधारित रासायनिक विघटन को इंगित करता है, जबकि प्राकृतिक अपघटन सूक्ष्मजीवों द्वारा जैविक रूप से होता है।
- विकल्प (C) यांत्रिक प्रक्रम: यांत्रिक प्रक्रम (जैसे पीसना या काटना) से पदार्थों का स्वरूप बदलता है, उनका सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटन नहीं होता।
- विकल्प (D) भौतिक प्रक्रम: भौतिक प्रक्रम (जैसे धूप या हवा से टूटना) अजैविक घटकों पर लागू हो सकते हैं, लेकिन मुख्य रूप से सूक्ष्मजीवों पर आधारित अपघटन को ‘जैविक प्रक्रम’ कहा जाता है।
#95. क्रियाशीलता श्रेणी में उच्च धातुओं को किस प्रक्रिया द्वारा निष्कर्षित किया जा सकता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
- सक्रियता श्रेणी में उच्च धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Highly Reactive Metals): सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित अत्यधिक सक्रिय धातुएँ (जैसे सोडियम $\text{Na}$, मैग्नीशियम $\text{Mg}$, कैल्सियम $\text{Ca}$, और ऐलुमिनियम $\text{Al}$) ऑक्सीजन के प्रति इतनी अधिक बंधुता रखती हैं कि इन्हें कार्बन या अन्य सामान्य अपचायकों द्वारा अपचयित नहीं किया जा सकता है।
- वैद्युत अपघटन: इन धातुओं को प्राप्त करने के लिए इनके गलित (Molten) क्लोराइड या ऑक्साइड का वैद्युतअपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction) किया जाता है, जिसमें धातु कैथोड पर और अधातु एनोड पर जमा होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08/01/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल तापन: यह विधि बहुत कम सक्रिय धातुओं (जैसे मरकरी या सिल्वर) के लिए उपयुक्त होती है।
- विकल्प (B) कार्बन के साथ तापन: यह विधि सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं (जैसे जिंक, आयरन, लेड) के ऑक्साइडों के अपचयन के लिए उपयोग की जाती है।
- विकल्प (D) निस्तापन (Calcination): यह कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने की एक प्रारंभिक प्रक्रिया है, न कि शुद्ध धातु निष्कर्षण की अपचयन विधि।
#96. सोडियम हाइड्रॉक्साइड किस प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
- क्लोरो-क्षार प्रक्रिया (Chloro-alkali Process): जब सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$) के जलीय विलयन (जिसे ब्राइन या नमक का घोल कहते हैं) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$), क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) का निर्माण करता है।
- नामकरण का कारण: इस प्रक्रिया को ‘क्लोरो-क्षार’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें उत्पाद के रूप में क्लोरीन (Chloro) और एक क्षार यानी सोडियम हाइड्रॉक्साइड (Alkali) प्राप्त होते हैं।
- रासायनिक समीकरण: $2\text{NaCl}(aq) + 2\text{H}_2\text{O}(l) \xrightarrow{\text{विद्युत धारा}} 2\text{NaOH}(aq) + \text{Cl}_2(g) + \text{H}_2(g)$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) सोल्वे प्रक्रिया (Solvay process): इस विधि का उपयोग मुख्य रूप से सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) के औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) संपर्क प्रक्रिया (Contact process): इसका उपयोग बड़े पैमाने पर सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) के उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) हाबर प्रक्रिया (Haber process): इस प्रक्रिया का उपयोग अमोनिया ($\text{NH}_3$) गैस के संश्लेषण के लिए किया जाता है।
#97. H+ आयनों की महत्वपूर्ण सांद्रता वाले विलयन का pH मान क्या है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)
- हाइड्रोजन आयन और pH मान: किसी विलयन में हाइड्रोजन आयनों ($\text{H}^+$) की सांद्रता जितनी अधिक होगी, वह विलयन उतना ही अधिक अम्लीय होगा और उसका pH मान उतना ही कम होगा।
- pH स्केल के पैमाने: pH स्केल पर 7 का मान ‘उदासीन’ (Neutral जैसे शुद्ध जल) को दर्शाता है। 7 से कम मान अम्लीय प्रकृति ($\text{H}^+$ आयनों की उच्च सांद्रता) को प्रदर्शित करता है, जबकि 7 से अधिक मान क्षारीय प्रकृति ($\text{OH}^-$ आयनों की अधिकता) को दर्शाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17/12/2024, Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) 7: यह मान उदासीन विलयनों के लिए होता है जिसमें अम्ल और क्षार की मात्रा संतुलित होती है।
- विकल्प (C) 7 से अधिक: यह क्षारीय विलयनों का pH मान होता है जिसमें हाइड्रॉक्साइड आयनों ($\text{OH}^-$) की अधिकता और $\text{H}^+$ की सांद्रता कम होती है।
- विकल्प (D) निर्धारित नहीं किया जा सकता: यह गलत है क्योंकि $\text{H}^+$ आयनों की सांद्रता और pH मान के बीच सीधा और निश्चित गणितीय संबंध होता है।
#98. रासायनिक उद्योगों में, विरंजन चूर्ण (bleaching powder) मुख्य रूप से _________ के रूप में कार्य करता है।
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder / $\text{CaOCl}_2$): रासायनिक उद्योगों में विरंजक चूर्ण का उपयोग मुख्य रूप से एक प्रबल ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent) के रूप में किया जाता है।
- कार्य प्रणाली: इसमें मौजूद क्लोरीन की सक्रियता के कारण यह विभिन्न रासायनिक प्रतिक्रियाओं में अन्य पदार्थों को ऑक्सीकृत करता है और कपड़ा उद्योगों, कागज उद्योग आदि में विरंजन (Bleaching) का कार्य सुगम बनाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एक अपचायी कर्मक (Reducing agent): विरंजक चूर्ण ऑक्सीजन या क्लोरीन प्रदान करके ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है, अपचायी के रूप में नहीं।
- विकल्प (B) एक निष्प्रभावन कर्मक (Neutralizing agent): यह अम्ल या क्षार को उदासीन करने वाला मुख्य रसायन नहीं है, बल्कि इसका मुख्य गुण ऑक्सीकरण करना है।
- विकल्प (D) एक उत्प्रेरक (Catalyst): उत्प्रेरक वे पदार्थ होते हैं जो स्वयं बिना खर्च हुए अभिक्रिया की गति को बदलते हैं, जबकि विरंजक चूर्ण रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया में उपभोग होता है।
#99. निष्कर्षण से पहले अयस्क के संवर्धन ( enrichment) का उद्देश्य क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- अयस्क का संवर्धन (Enrichment of Ores / Ore Dressing): पृथ्वी से खदानों से निकाले गए अयस्कों में मिट्टी, रेत, चट्टानी कण और अन्य अवांछित अशुद्धियाँ बड़े पैमाने पर जुड़ी होती हैं, जिन्हें ‘गैंग्यू’ (Gangue) कहा जाता है।
- मुख्य उद्देश्य: धातु के निष्कर्षण (Extraction) से पहले इन अवांछित अशुद्धियों (गैंग्यू) को हटाकर अयस्क में धातु की सांद्रता को बढ़ाने की प्रक्रिया को ‘अयस्क का संवर्धन’ कहा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) वजन बढ़ाना: संवर्धन का उद्देश्य अयस्क का वजन बढ़ाना नहीं, बल्कि अशुद्धियों को हटाकर उसे हल्का और शुद्ध करना होता है।
- विकल्प (C) इसे लवण में बदलना: यह संवर्धन का कार्य नहीं है; लवण या ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया आगे के चरणों (जैसे निस्तापन या भजन) में होती है।
- विकल्प (D) नमी दूर करना: हालांकि कुछ प्रक्रियाओं में नमी हट सकती है, लेकिन संवर्धन का प्राथमिक और मुख्य उद्देश्य अशुद्धियों (गैंग्यू) को हटाना होता है।
#100. कार्बन के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण होना _________ का एक उदाहरण है।
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
- कार्बन का दहन (Combustion of Carbon): जब कार्बन (कोयला) ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलता है (दहन होता है), तो कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस का निर्माण होता है और साथ ही भारी मात्रा में ऊष्मा (Heat) निकलती है।
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया: जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा या ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहा जाता है। समीकरण: $\text{C}(s) + \text{O}_2(g) \rightarrow \text{CO}_2(g) + \text{ऊष्मा}$।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic reaction): इसमें ऊष्मा का अवशोषण होता है, जबकि दहन में ऊष्मा निकलती है।
- विकल्प (B) प्रकाशरासायनिक अभिक्रिया: यह सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होने वाली अभिक्रिया है (जैसे प्रकाश संश्लेषण)।
- विकल्प (D) उत्क्रमणीय अभिक्रिया (Reversible reaction): कार्बन का दहन एक अनुत्क्रमणीय (Irreversible) प्रक्रिया है क्योंकि एक बार $\text{CO}_2$ बन जाने पर उसे सामान्य रूप से वापस कार्बन और ऑक्सीजन में नहीं बदला जा सकता।
#101. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया, अपचयन अभिक्रिया ( reduction reaction) का उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
- अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction): जिस रासायनिक अभिक्रिया में किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का ह्रास (निकालना) होता है या हाइड्रोजन का योग होता है, उसे अपचयन कहा जाता है।
- विश्लेषण: इस अभिक्रिया में कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) से ऑक्सीजन निकलकर तांबा ($\text{Cu}$) बनता है, जिसका अर्थ है कि कॉपर ऑक्साइड का अपचयन (Reduction) हुआ है। साथ ही हाइड्रोजन में ऑक्सीजन जुड़कर जल ($\text{H}_2\text{O}$) बनता है, जो ऑक्सीकरण को दर्शाता है (यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया का भी उत्तम उदाहरण है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08/01/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) $\text{NaOH} + \text{HCl} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$: यह एक ‘उदासीनीकरण अभिक्रिया’ (Neutralization reaction) है।
- विकल्प (B) $2\text{Mg} + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{MgO}$: मैग्नीशियम में ऑक्सीजन जुड़ रही है, इसलिए यह ‘ऑक्सीकरण अभिक्रिया’ (Oxidation) है।
- विकल्प (C) $\text{Zn} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{H}_2$: यह जिंक द्वारा हाइड्रोजन के विस्थापन की ‘विस्थापन अभिक्रिया’ (Displacement reaction) है।
#102. एक सफेद ठोस तनु HCl के साथ अभिक्रिया करके एक गैस बनाता है जो चुने के पानी को दूदिया कर देती है। इससे निश्चित रूप से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025)
- अम्ल और कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट की अभिक्रिया: जब कोई धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट (बाइकार्बोनेट) तनु अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया करता है, तो लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस का निर्माण होता है।
- चुने के पानी का परीक्षण: उत्पन्न होने वाली गैस ($\text{CO}_2$) जब चूने के पानी ($\text{Ca(OH)}_2$) से गुजरती है, तो अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) के बनने के कारण चूने का पानी दूधिया हो जाता है। यह $\text{CO}_2$ गैस की पहचान करने का एक मानक परीक्षण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) ठोस कैल्शियम कार्बोनेट है: यह निश्चित रूप से केवल ‘कैल्शियम कार्बोनेट’ ही हो, ऐसा आवश्यक नहीं है; यह सोडियम कार्बोनेट या अन्य कोई भी धातु कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट हो सकता है।
- विकल्प (C) ठोस एक धातु कार्बोनेट है: यह आंशिक रूप से सही लग सकता है, लेकिन इसमें ‘बाइकार्बोनेट’ को छोड़ दिया गया है जबकि बाइकार्बोनेट भी HCl के साथ यही प्रभाव देते हैं।
- विकल्प (D) गैस हाइड्रोजन है: हाइड्रोजन गैस चूने के पानी को दूधिया नहीं करती (हाइड्रोजन जलने पर पॉप ध्वनि उत्पन्न करती है)।
#103. धातु ऑक्साइड को गर्म करके तांबा और चांदी जैसी धातुओं का निष्कर्षण करने के लिए किस प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026)
- कम सक्रिय धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Low-Reactivity Metals): सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित कम अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे मरकरी $\text{Hg}$ या कॉपर $\text{Cu}$) काफी हद तक कम प्रतिक्रियाशील होती हैं। इनके ऑक्साइडों को केवल गर्म (तापीय अपघटन) करने पर ही वे धातु में अपचयित हो जाती हैं, इसके लिए अतिरिक्त कार्बन जैसे किसी महंगे अपचायक की आवश्यकता नहीं होती।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) भर्जन (Roasting): यह सल्फाइड अयस्कों को वायु की अधिकता में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रारंभिक प्रक्रिया है।
- विकल्प (C) प्रगलन (Smelting): इसका उपयोग मध्यम सक्रियता वाली धातुओं (जैसे जिंक या आयरन) के लिए कोक (कार्बन) के साथ उच्च तापमान पर अपचयन के वास्ते होता है।
- विकल्प (D) विद्युत अपघटन (Electrolysis): यह अत्यंत उच्च सक्रियता वाली धातुओं (जैसे सोडियम, पोटैशियम, ऐलुमिनियम) के निष्कर्षण के लिए प्रयुक्त होता है।
#104. औद्योगिक परिवेश में, फ्रीऑन – 12 का निर्माण किस रासायनिक अभिक्रिया द्वारा सबसे अधिक सामान्यतः किया जाता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-1 : 18 Jun, 2025 Shift 2)
- स्वाट्स अभिक्रिया (Swarts Reaction): क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे कि फ्रीऑन-12 (CCl2F2) का औद्योगिक उत्पादन मुख्य रूप से ‘स्वाट्स अभिक्रिया’ द्वारा किया जाता है। इस विधि में कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4) की अभिक्रिया हाइड्रोजन फ्लोराइड (HF) या किसी धात्विक फ्लोराइड (जैसे SbF3) के साथ ऐंटीमनी पेंटाक्लोराइड (SbCl5) उत्प्रेरक की उपस्थिति में कराई जाती है, जिससे क्लोरीन परमाणु फ्लोरीन द्वारा विस्थापित हो जाते हैं।
- रासायनिक समीकरण: 3CCl4 + 2SbF3 -> (SbCl5 उत्प्रेरक) -> 3CCl2F2 (Freon-12) + 2SbCl3
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-1 : 18/06/2025, Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution reaction): यद्यपि इसमें प्रतिस्थापन होता है, किंतु हैलाइड विनिमय द्वारा ऐल्किल फ्लोराइड बनाने की विशिष्ट नाम वाली प्रक्रिया को ‘स्वाट्स अभिक्रिया’ कहा जाता है।
- विकल्प (C) वुर्ट्ज़ अभिक्रिया (Wurtz reaction): इसका उपयोग सोडियम धातु की उपस्थिति में ऐल्किल हैलाइड्स से उच्च ऐल्केन (कार्बन-कार्बन बंध निर्माण) बनाने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) निष्कासन अभिक्रिया (Elimination reaction): इसमें परमाणुओं का निष्कासन होकर द्विबंध (Alkene) का निर्माण होता है, जो यहाँ लागू नहीं होता।
#105. उस अभिक्रिया को क्या कहते हैं जिसमें दो या अधिक अभिकारकों की अभिक्रिया के कारण केवल एक ही उत्पाद उत्पन्न होता है?
(RPF Constable 2018 14 Feb 2019 Shift 2)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): इस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक (elements or compounds) आपस में मिलकर केवल एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं।
- रासायनिक समीकरण: A + B -> AB (उदाहरण के लिए, मैग्नीशियम और ऑक्सीजन मिलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाते हैं: 2Mg + O2 -> 2MgO)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 14/02/2019, Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) विस्थापन प्रतिक्रिया (Displacement reaction): इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करता है।
- विकल्प (B) प्रतिस्थापन प्रतिक्रिया (Substitution reaction): इसमें किसी अणु का एक परमाणु या समूह किसी अन्य परमाणु या समूह द्वारा प्रतिस्थापित होता है।
- विकल्प (C) अपघटन अभिक्रिया (Decomposition reaction): यह संयोजन के ठीक विपरीत होती है, जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक सरल उत्पाद बनाता है।
#106. निम्नलिखित में से कौन अमोनियम नाइट्रेट तैयार करने के लिए एक सामान्य औद्योगिक विधि है?
(RRB JE CBT-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1)
- अमोनियम नाइट्रेट का निर्माण: उद्योगों में अमोनियम नाइट्रेट ($\text{NH}_4\text{NO}_3$) का उत्पादन मुख्य रूप से अमोनिया गैस ($\text{NH}_3$) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$) के बीच उदासीनीकरण (Neutralization) प्रतिक्रिया द्वारा किया जाता है।
- रासायनिक समीकरण: NH3 (aq) + HNO3 (aq) -> NH4NO3 (aq)
- यह एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) प्रतिक्रिया है, इसलिए ऊष्मा को नियंत्रित करने के लिए शीतलन प्रणालियों का उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) हैबर-बॉश प्रक्रिया: इस प्रक्रिया का उपयोग अमोनिया ($\text{NH}_3$) के औद्योगिक संश्लेषण के लिए किया जाता है, न कि सीधे अमोनियम नाइट्रेट बनाने के लिए।
- विकल्प (B) अमोनियम लवण का विद्युत अपघटन: यह अमोनियम नाइट्रेट के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन की सामान्य विधि नहीं है।
- विकल्प (C) मेटाथिसिस प्रतिक्रिया: यह आयनों के परस्पर आदान-प्रदान की विधि है, जो अमोनियम नाइट्रेट की मुख्य औद्योगिक निर्माण विधि नहीं है।
#107. पोलियो वैक्सीन की खोज किसके द्वारा की गई थी?
(RRB NTPC Tier I : 28 Apr 2016 Shift 3)
- पोलियो वैक्सीन की खोज: पहली सुरक्षित और प्रभावी पोलियो वैक्सीन (Inactivated Polio Vaccine – IPV) का विकास अमेरिकी चिकित्सक और virologist जोनास सॉल्क द्वारा 1950 के दशक की शुरुआत में किया गया था और 1955 में इसे सफल घोषित किया गया था।
- बाद में अल्बर्ट साबिन (Albert Sabin) ने ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV – मुंह से दी जाने वाली बूंदें) की खोज की थी।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 28/04/2016, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) आइजक न्यूटन: यह भौतिकी और गणित से जुड़े महान वैज्ञानिक हैं जिन्होंने गति के नियम और गुरुत्वाकर्षण की खोज की थी।
- विकल्प (B) मैरी क्यूरी: इन्होंने रेडियोधर्मिता (Radioactivity), रेडियम और पोलोनियम तत्वों की खोज की थी।
- विकल्प (D) अल्बर्ट आइंस्टीन: यह प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी हैं जिन्होंने सापेक्षता का सिद्धांत (Theory of Relativity) प्रतिपादित किया था।
#108. कौन-सी बीमारी हृदय से संबंधित नहीं है?
(RRB NTPC Tier I : 05 Apr 2016 Shift 3)
- डिफ्थीरिया (Diphtheria): यह एक गंभीर जीवाणु जनित (Bacterial) संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से गले और नाक की श्लेष्म झिल्ली (Mucous membranes) को प्रभावित करता है। यह कॉर्नेबैक्टीरियम डिफ्थीरिया (Corynebacterium diphtheriae) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, न कि सीधे हृदय की किसी आंतरिक समस्या से।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 05/04/2016, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एन्यूरिज्म (Aneurysm): यह धमनियों (Blood vessels) की दीवारों के कमजोर होकर गुब्बारे की तरह फूलने की स्थिति है, जो हृदय और संचार तंत्र से जुड़ी एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है।
- विकल्प (B) कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy): यह सीधे तौर पर हृदय की मांसपेशियों की बीमारी है जिससे हृदय के लिए रक्त पंप करना कठिन हो जाता है।
- विकल्प (D) हृदयाघात / मायोकार्डियल र्चर (Myocardial rupture): यह सीधे हृदय के ऊतकों और दिल के दौरे (Heart attack) से जुड़ी स्थिति है।
#109. जब हम अपनी हथेली पर एसीटोन (नेल पॉलिश रिमूवर) डालते हैं, तो हमें ठंडक प्रतीत होती है क्योंकि ___________ ।
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )
- वाष्पीकरण और शीतलन प्रभाव (Evaporation and Cooling Effect): एसीटोन (प्रोपेनोन) एक अत्यधिक वाष्पशील (Volatile) कार्बनिक द्रव है। जब इसे हथेली पर रखा जाता है, तो यह तेजी से वाष्पीकृत होने के लिए आवश्यक ऊष्मा हमारी हथेली से अवशोषित कर लेता है।
- ऊष्मा के अवशोषित होने के कारण हथेली का वह हिस्सा ठंडा महसूस होता है। यह वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा (Latent heat of vaporization) का एक बेहतरीन उदाहरण है (ठीक उसी तरह जैसे पेट्रोल या परफ्यूम छिड़कने पर ठंडक लगती है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 14/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) यह ठंडी वाष्प मुक्त करता है: एसीटोन कोई ठंडी वाष्प नहीं छोड़ता, बल्कि वह पर्यावरण या हथेली से ऊष्मा खींचकर वाष्प में बदलता है।
- विकल्प (B) यह हथेली पर उपस्थित जल के साथ अभिक्रिया करता है: ठंडक मिलने का कारण कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भौतिक वाष्पीकरण प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) यह त्वचा पर तंत्रिका संकेतों को अवरुद्ध कर देता है: एसीटोन नसों या तंत्रिका संकेतों को अवरुद्ध (block) नहीं करता, ठंडक का अहसास केवल ऊष्मा के हटने (तापमान कम होने) के कारण होता है।
#110. एक पदार्थ जो बिना खपत एक अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है उसे ___________ कहा जाता है।
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- उत्प्रेरक (Catalyst): वह रासायनिक पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया में स्वयं बिना उपभोग हुए (या बिना खर्च हुए) अभिक्रिया की गति या दर (Rate of reaction) को बढ़ा या घटा देता है।
- विशेषता: अभिक्रिया के अंत में उत्प्रेरक अपने रासायनिक रूप और मात्रा में अपरिवर्तित रहता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 23/05/2019, Shift 1 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) उत्पाद (Product): यह रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनने वाला नया पदार्थ है।
- विकल्प (B) अभिकारक (Reactant): यह वे प्रारंभिक पदार्थ हैं जो रासायनिक अभिक्रिया में हिस्सा लेते हैं और खर्च हो जाते हैं।
- विकल्प (C) अवरोधक (Inhibitor / Negative catalyst): यह अभिक्रिया की दर को बढ़ाता नहीं है, बल्कि उसकी गति को धीमा या कम करता है।
#111. यीस्ट किस अलैंगिक प्रजनन विधि से प्रजनन करता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
- मुकुलन (Budding): यीस्ट (Yeast) एक एककोशिकीय कवक (Fungus) है जिसमें अलैंगिक प्रजनन मुख्य रूप से मुकुलन विधि द्वारा होता है। इसमें जनक शरीर पर एक छोटा सा उभार या कली (Bud) विकसित होती है।
- यह कली धीरे-धीरे बड़ी होती है, परिपक्व होती है और अंततः मुख्य शरीर से अलग होकर एक नया स्वतंत्र जीव बन जाती है (कभी-कभी यह श्रृंखला के रूप में भी जुड़ी रह सकती है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17/12/2024, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) संलयन (Fusion): यह लैंगिक प्रजनन या कोशिकाओं के मिलने की प्रक्रिया है (जैसे युग्मकों का संलयन)।
- विकल्प (C) कायिक प्रवर्द्धन (Vegetative propagation): यह पौधों (जैसे आलू, गुलाब आदि) में जड़, तना या पत्ती द्वारा होने वाला जनन है।
- विकल्प (D) द्विखंडन (Binary fission): यह एक जीव का दो बराबर भागों में टूटना है (जैसे अमीबा और बैक्टीरिया में), न कि यीस्ट में।
#112. निम्नलिखित में से कौन-सा द्विविस्थापन अभिक्रिया का एक उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, द्वि-विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है। इसमें सामान्यतः दो नए यौगिक बनते हैं।
- विश्लेषण: सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) और सोडियम क्लोराइड (NaCl) की अभिक्रिया में, सिल्वर आयн (Ag+) क्लोराइड आयन (Cl-) के साथ मिलकर सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का सफेद अवक्षेप बनाता है, और सोडियम आयन (Na+) नाइट्रेट आयन (NO3-) के साथ मिलकर सोडियम नाइट्रेट बनाता है। यहाँ दोनों यौगिकों के आयनों का परस्पर आदान-प्रदान हुआ है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) Na2O + H2O -> 2NaOH: यह दो या अधिक पदार्थों के मिलने से एक उत्पाद बनने के कारण ‘संयोजन अभिक्रिया’ (Combination reaction) है।
- विकल्प (C) 2Mg + O2 -> 2MgO: यह भी एक संयोजन और ऑक्सीकरण अभिक्रिया का उदाहरण है।
- विकल्प (D) H2 + Cl2 -> 2HCl: यह हाइड्रोजन और क्लोरीन के संयोजन से हाइड्रोजन क्लोराइड बनने की संयोजन अभिक्रिया है।
#113. हाइड्रोकार्बन के पूर्ण दहन पर निम्नलिखित में से कौन-सा उत्पाद निर्मित होता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
- हाइड्रोकार्बन का पूर्ण दहन (Complete Combustion): जब किसी हाइड्रोकार्बन (जैसे मेथेन, एथेन या एलपीजी) का ऑक्सीजन की पर्याप्त उपस्थिति में पूर्ण दहन कराया जाता है, तो मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जल (H2O) का निर्माण होता है, साथ ही भारी मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा निकलती है।
- सामान्य समीकरण: हाइड्रोकार्बन + ऑक्सीजन -> CO2 + जल + ऊष्मा/प्रकाश
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 05/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) मेथेन और हाइड्रोजन: यह दहन के उत्पाद नहीं हैं, बल्कि मेथेन स्वयं एक हाइड्रोकार्बन है।
- विकल्प (B) मेथेन और ऑक्सीजन: यह दहन प्रक्रिया में भाग लेने वाले ‘अभिकारक’ (Reactants) हैं, उत्पाद नहीं।
- विकल्प (D) CO और जल: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और जल का निर्माण हाइड्रोकार्बन के अपूर्ण दहन (पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर) की स्थिति में होता है, पूर्ण दहन में नहीं।
#114. लवण-जल से सोडियम हाइड्रॉक्साइड तैयार करने के लिए किस प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
- लवण-जल का विद्युत अपघटन (क्लोरो-क्षार प्रक्रिया): जब सोडियम क्लोराइड (NaCl) के जलीय विलयन (जिसे ब्राइन या लवण-जल कहा जाता है) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), क्लोरीन गैस (Cl2) और हाइड्रोजन गैस (H2) का निर्माण करता है।
- रासायनिक समीकरण: 2NaCl (aq) + 2H2O (l) -> विद्युत धारा -> 2NaOH (aq) + Cl2 (g) + H2 (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 28/11/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) सॉल्वे प्रक्रम (Solvay process): इस विधि का उपयोग सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) के औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) हाबर प्रक्रम (Haber process): इसका उपयोग अमोनिया (NH3) गैस के संश्लेषण के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) NaCl का ऊष्मीय अपघटन: साधारण नमक (NaCl) का ताप द्वारा इस प्रकार अपघटन करके सोडियम हाइड्रॉक्साइड नहीं बनाया जाता है।
#115. एक धारावाही सीधे चालक को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के समांतर रखा गया है। चालक पर लगने वाला बल ___________ होगा।
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- चुंबकीय बल का सूत्र: किसी एकसमान चुंबकीय क्षेत्र (B) में रखे धारावाही चालक (जिसकी लंबाई L है और जिसमें I धारा प्रवाहित हो रही है) पर लगने वाले चुंबकीय बल का व्यंजक होता है: F = I * L * B * sin(theta), जहाँ theta चालक की लंबाई और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के बीच का कोण है।
- जब चालक को चुंबकीय क्षेत्र के समांतर (Parallel) रखा जाता है, तो theta का मान 0 डिग्री (या 180 डिग्री) होता है। चूँकि sin(0°) का मान शून्य (0) होता है, इसलिए चालक पर कार्य करने वाला चुंबकीय बल भी शून्य हो जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) अधिकतम: चालक पर बल तब अधिकतम (F = I * L * B) होता है जब उसे चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत (Perpendicular / 90 डिग्री) रखा जाता है।
- विकल्प (C) अधिकतम का आधा: यह स्थिति तब बनती है जब चालक चुंबकीय क्षेत्र के साथ 30 डिग्री का कोण बनाता है (क्योंकि sin(30°) = 0.5)।
- विकल्प (D) अनंत: चुंबकीय बल का मान कभी भी अनंत नहीं हो सकता।
#116. निम्नलिखित सांभों को सुमेलित कीजिए।उपकला ऊतक स्थान Iघनाभाकार उपकला A. आंत्र का आस्तर IIस्तंभाकार उपकला B. त्वचा IIIशल्की उपकला C. वृक्क नलिकाओं का आस्तर
(RRB ALP CBT 1 16/02/2026 )
- घनाभाकार उपकला (Cuboidal Epithelium – I): यह ऊतक उन अंगों में पाया जाता है जहाँ स्रावण और अवशोषण होता है, जैसे कि वृक्क नलिकाओं (Kidney tubules) और लार ग्रंथियों के आस्तर में (मिलान: I – C)।
- स्तंभकार उपकला (Columnar Epithelium – II): यह लंबी स्तंभ जैसी कोशिकाओं से बनी होती है जो पाचन तंत्र में अवशोषण और स्राव में मदद करती है, जैसे कि आंत्र (Intestine) और पेट का आस्तर (मिलान: II – A)।
- शल्की उपकला (Squamous Epithelium – III): यह अत्यंत पतली और चपटी कोशिकाओं की परत होती है जो शरीर की रक्षात्मक परतों का निर्माण करती है, जैसे कि त्वचा (Skin) की बाहरी परत (मिलान: III – B)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 16/02/2026) में पूछा गया था।
- अन्य सभी विकल्प (A, B और D) ऊतकों और उनके सही शारीरिक स्थानों के गलत मेल के कारण अमान्य हैं।
#117. निम्नलिखित में से कौन-सा रासायनिक समीकरण संतुलित है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 3)
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक पक्ष और उत्पाद पक्ष में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।
- विश्लेषण: समीकरण 2H2 + O2 -> 2H2O में:
• अभिकारक पक्ष: हाइड्रोजन के परमाणु = 4 (2 $\times$ 2), ऑक्सीजन के परमाणु = 2
• उत्पाद पक्ष: हाइड्रोजन के परमाणु = 4 (2 $\times$ 2), ऑक्सीजन के परमाणु = 2 (2 $\times$ 1)
चूंकि दोनों पक्षों में परमाणुओं की संख्या बराबर है, इसलिए यह एक पूर्णतः संतुलित समीकरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16/12/2024, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) H2 + 2O2 -> 2H2O: इसमें ऑक्सीजन के परमाणु अभिकारक पक्ष में 4 हैं जबकि उत्पाद पक्ष में केवल 2 हैं (असंतुलित)।
- विकल्प (B) H2O + O2 -> H2O2: यह हाइड्रोजन परॉक्साइड बनाने की असंतुलित या गलत रूप से दर्शाई गई अभिक्रिया है।
- विकल्प (C) H2 + O2 -> H2O: इसमें अभिकारक पक्ष में ऑक्सीजन के 2 परमाणु हैं जबकि उत्पाद पक्ष में केवल 1 है, इसलिए यह असंतुलित है।
#118. जब दो तत्व मिलकर कोई यौगिक बनाते हैं, तो इसे किस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 1)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब दो या दो से अधिक तत्व (या यौगिक) आपस में मिलकर केवल एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, तो ऐसी रासायनिक अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया कहा जाता है।
- सामान्य रूप: A + B -> AB (उदाहरण के लिए, कार्बन और ऑक्सीजन मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं: C + O2 -> CO2)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 18/12/2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) द्विस्थापन (Double displacement): इसमें दो यौगिकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान होता है।
- विकल्प (B) विस्थापन (Displacement): इसमें अधिक सक्रिय तत्व किसी अन्य यौगिक से कम सक्रिय तत्व को विस्थापित करता है।
- विकल्प (D) अपघटन (Decomposition): यह संयोजन के बिल्कुल विपरीत होती है, जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक सरल उत्पाद बनाता है।
#119. निम्न में से कौन सी गैस एक अत्यधिक जहरीली, गंधहीन, स्वाधीन और रंगहीन गैस है?
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 1)
- कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): यह एक अत्यंत विषैली गैस है जो पूरी तरह से रंगहीन (colorless), गंधहीन (odorless) और स्वादहीन (tasteless) होती है। इसे ‘साइलेंट किलर’ (Silent Killer) भी कहा जाता है।
- यह गैस कार्बन-युक्त ईंधनों के अपूर्ण दहन (Incomplete combustion) के कारण उत्पन्न होती है। यह रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन के साथ बहुत तेजी से जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है और व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 23/01/2019, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): यह रंगहीन और गंधहीन है, लेकिन यह कार्बन मोनो जितनी अत्यधिक जहरीली नहीं होती (यह श्वसन और प्रकाश संश्लेषण का हिस्सा है)।
- विकल्प (C) मीथेन (CH4): यह रंगहीन और गंधहीन जरूर है, लेकिन यह विषैली नहीं होती, बल्कि यह एक ज्वलनशील प्राकृतिक गैस है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2): यह गैस रंगहीन नहीं होती, बल्कि भूरे रंग की होती है और इसकी गंध बहुत तीक्ष्ण होती है।
#120. निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं पर विचार कीजिए:I: BaCl2 (aq) + Na 2 SO 4 (aq) → BaSO 4 (s) + 2NaCl (aq) II: Pb(NO3) 2 (aq) + KI (aq) → PbI 2 (s) + 2KNO 3 (aq)निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प उपरोक्त अभिक्रियाओं को सही ढंग से वर्गीकृत करता है?
(RRB ALP CBT 1 17/02/2026 )
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो अलग-अलग यौगिक अपने आयनों का परस्पर आदान-प्रदान करके दो नए यौगिक बनाते हैं, द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
- विश्लेषण:
• अभिक्रिया I: BaCl2 (aq) + Na2SO4 (aq) -> BaSO4 (s) + 2NaCl (aq) में बेरियम (Ba) और सोडियम (Na) अपने आयनों का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप बनता है।
• अभिक्रिया II: Pb(NO3)2 (aq) + 2KI (aq) -> PbI2 (s) + 2KNO3 (aq) में लेड (Pb) और पोटैशियम (K) आयनों का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप बनता है।
अतः दोनों ही अभिक्रियाएँ द्विविस्थापन और अवक्षेपण अभिक्रियाओं के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 17/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A), (B) और (C): इनमें दूसरी या पहली अभिक्रिया को गलत तरीके से ‘विस्थापन’ या ‘उदासीनीकरण’ बताया गया है, जबकि दोनों ही समीकरणों में यौगिकों के बीच आयनों का दोहरा आदान-प्रदान (Double displacement) हो रहा है।
#121. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया, अवक्षेपण अभिक्रिया की उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी अघुलनशील ठोस पदार्थ (अवक्षेप या Precipitate) का निर्माण होता है जो विलयन से पृथक् हो जाता है, अवक्षेपण अभिक्रिया कहलाती है।
- विश्लेषण: जब सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) के जलीय विलयन में सोडियम क्लोराइड (NaCl) का विलयन मिलाया जाता है, तो सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का एक सफेद अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) तुरंत प्राप्त होता है। यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया का भी उदाहरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 26/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) CaCO3 -> CaO + CO2: यह एक ‘तापीय अपघटन अभिक्रिया’ (Thermal decomposition) है।
- विकल्प (B) Zn + H2SO4 -> ZnSO4 + H2: यह एक ‘विस्थापन अभिक्रिया’ (Displacement reaction) है जिसमें हाइड्रोजन गैस निकलती है।
- विकल्प (C) NaOH + HCl -> NaCl + H2O: यह एक ‘उदासीनीकरण अभिक्रिया’ (Neutralization reaction) है।
#122. मानव श्वसन से क्या छोड़ता है?
(RRB NTPC Tier I : 05 Apr 2016 Shift 3)
- मानव श्वसन प्रक्रिया (Human Respiration): श्वसन तंत्र का मुख्य कार्य शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाना और कोशिकीय श्वसन (Cellular respiration) के दौरान उत्पन्न होने वाली उपशिष्ट गैस—कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को शरीर से बाहर (उच्छ्वसन द्वारा) छोड़ना है।
- जब हम सांस छोड़ते हैं, तो मुख्य उत्सर्जित अपशिष्ट गैस कार्बन डाइऑक्साइड होती है, जो ग्लूकोज के विखंडन से बनती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 05/04/2016, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) गैसों का मिश्रण: हालांकि छोड़ी जाने वाली हवा में नाइट्रोजन और शेष ऑक्सीजन भी होती है, किंतु जैविक प्रक्रिया के संदर्भ में मुख्य उत्सर्जित गैस कार्बन डाइऑक्साइड मानी जाती है।
- विकल्प (B) कार्बन मोनोऑक्साइड: यह एक विषैلی गैस है जो सामान्य श्वसन का उत्पाद नहीं है, बल्कि अपूर्ण दहन से बनती है।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन: ऑक्सीजन को मानव शरीर द्वारा अंतःश्वसन (Inhalation) में ग्रहण किया जाता है, छोड़ा नहीं जाता।
#123. POPs का पूर्ण रूप है –
(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)
- POPs का पूर्ण रूप: POPs का अंग्रेजी में पूरा नाम Persistent Organic Pollutants और हिंदी में स्थायी या निरंतर कार्बनिक प्रदूषक होता है।
- विशेषताएँ: ये ऐसे जहरीले रासायनिक यौगिक होते हैं जो पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं, आसानी से विघटित नहीं होते, और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जीवों के शरीर में जैव-संचयन (Bioaccumulation) करते हैं (जैसे डीडीटी, पीसीबी आदि)। इनके नियंत्रण के लिए स्टॉकहोम कन्वेंशन संधि बनाई गई है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (B) (कीटनाशक): इसमें ‘कीटनाशक’ (Pesticides) शब्द का प्रयोग किया गया है, जबकि तकनीकी रूप से इसका सही शब्द ‘प्रदूषक’ (Pollutants) है क्योंकि इसमें केवल कीटनाशक ही नहीं बल्कि औद्योगिक रसायन और उपउत्पाद भी शामिल होते हैं।
- विकल्प (C) (निरंतर ऑक्सीकरण प्रदूषक): यह रासायनिक रूप से गलत तकनीकी नाम है।
#124. वह प्रक्रिया, जिसमें अम्ल और क्षार अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, _________ अभिक्रिया कहलाती है।
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 3)
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब किसी अम्ल (Acid) की अभिक्रिया किसी क्षार (Base) के साथ कराई जाती है, तो दोनों एक-दूसरे के प्रभाव को उदासीन (Neutralize) कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप मुख्य रूप से लवण (Salt) और जल (Water) का निर्माण होता है, तथा साथ ही ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- सामान्य समीकरण: अम्ल + क्षार -> लवण + जल (उदाहरण के लिए: HCl + NaOH -> NaCl + H2O)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT I : 01/06/2019, Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह वह भौतिक प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे गैस में परिवर्तित हो जाता है (जैसे कपूर)।
- विकल्प (C) हैलोजीनीकरण (Halogenation): यह किसी कार्बनिक यौगिक में हैलोजन समूह (जैसे क्लोरीन, ब्रोमीन) के जुड़ने की प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) हाइड्रोजीनीकरण (Hydrogenation): यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन के योग से संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाने की प्रक्रिया है (जैसे वनस्पति तेल से डालडा घी बनाना)।
#125. अभिकथन (A) और कारण (R) से चिन्हित निम्नलिखित दो कथनों के संबंध में सही विकल्प का चयन कीजिए।अभिकथन (A): जिंक, कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर सकता है।कारण (R): जिंक, कॉपर से कम अभिक्रियाशील है।
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- अभिकथन (A) का विश्लेषण: जिंक (Zn) कॉपर सल्फेट (CuSO4) के विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है क्योंकि जिंक, कॉपर की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील (Reactive) धातु है। यह एक ‘विस्थापन अभिक्रिया’ (Displacement reaction) है: Zn + CuSO4 -> ZnSO4 + Cu। अतः कथन A पूरी तरह सत्य है।
- कारण (R) का विश्लेषण: कारण में कहा गया है कि “जिंक, कॉपर से कम अभिक्रियाशील है”, जो कि पूरी तरह गलत (असत्य) है। वास्तव में जिंक अधिक अभिक्रियाशील है और कॉपर कम अभिक्रियाशील है। अतः कथन R असत्य है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): इसमें A को असत्य बताया गया है, जबकि A बिल्कुल सही है।
- विकल्प (B) और (C): इनमें दोनों कथनों को सत्य माना गया है, जबकि कारण (R) तथ्यात्मक रूप से गलत है।
#126. जब कॉपर सल्फेट विलयन लोहे की धातु के साथ अभिक्रिया करता है, तो तांबा धातु का निर्माण होता है। यह में से कौन सी अभिक्रिया है?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- एकल विस्थापन अभिक्रिया (Single Displacement Reaction): जब कोई अधिक सक्रिय तत्व किसी कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देता है, तो उसे एकल विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- रासायनिक समीकरण: जब लोहे (Fe) की कील को कॉपर सल्फेट (CuSO4) के नीले विलयन में डुबोया जाता है, तो लोहा कॉपर को विस्थापित कर देता है और फेरस सल्फेट बनाता है, जिससे विलयन का रंग हल्का हरा हो जाता है और कॉपर धातु अलग हो जाती है: Fe + CuSO4 -> FeSO4 + Cu।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 24/05/2019, Shift 3 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) अपघटन अभिक्रिया: इसमें एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या अधिक अभिकारक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (D) दोहरा विस्थापन अभिक्रिया: इसमें दो अलग-अलग यौगिकों के बीच आयनों का परस्पर आदान-प्रदान होता है।
#127. कौन-सी अभिक्रिया, द्रव्यमान संरक्षण के नियम को सर्वोत्तम रूप से सपोर्ट करती है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन किया जा सकता है और न ही उसका विनाश (अर्थात अभिकारकों का कुल द्रव्यमान हमेशा उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है)।
- सीलबंद कंटेनर का महत्व: जब सिरके और बेकिंग सोडा की अभिक्रिया एक सीलबंद कंटेनर (Sealed container) में कराई जाती है, तो अभिक्रिया के दौरान बनने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर नहीं जा पाती। इस बंद निकाय में किसी भी पदार्थ का आदान-प्रदान बाहर से नहीं होता, जिससे यह साबित होता है कि अभिक्रिया से पहले और बाद का कुल द्रव्यमान बिल्कुल समान रहता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 02/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) खुली हवा में कागज जलाना: खुली व्यवस्था होने के कारण इसमें बनने वाली गैसें और धुआँ वायुमंडल में उड़ जाते हैं, जिससे द्रव्यमान कम प्रतीत होता है।
- विकल्प (B) खुली हवा में ऐल्कोहॉल का वाष्पन: यह एक भौतिक प्रक्रिया है और खुली हवा में वाष्प के उड़ जाने से द्रव्यमान को सही से मापा नहीं जा सकता।
- विकल्प (D) खुली हवा में लोहे को गर्म करना: खुली हवा में लोहा ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऑक्साइड बनाता है, जिससे वायुमंडल की ऑक्सीजन जुड़ने के कारण उसका कुल द्रव्यमान बढ़ जाता है।
#128. एक जल शोधन संयंत्र हानिकारक आयनों को हटाने के लिए एक प्रक्रिया का उपयोग करता है। इस उद्देश्य के लिए किस प्रकार की अभिक्रिया का उपयोग किए जाने की सर्वाधिक संभावना है?
(Not found 11/03/2026)
- जल शोधन और द्वि-विस्थापन/अवक्षेपण: जल शोधन संयंत्रों में पानी से हानिकारक या अवांछित आयनों (जैसे भारी धातु आयन या कठोरता उत्पन्न करने वाले लवण) को हटाने के लिए सामान्यतः रासायनिक वर्षण (Chemical Precipitation) या आयन-विनिमय (Ion exchange) विधियों का उपयोग किया जाता है। ये प्रक्रियाएँ मुख्य रूप से द्वि-विस्थापन अभिक्रियाओं (Double-displacement reactions) पर आधारित होती हैं, जिनमें हानिकारक आयन नए अघुलनशील यौगिक बनाकर अवक्षेप के रूप में अलग हो जाते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न हालिया रेलवे परीक्षा पैटर्न के आधार पर रासायनिक अनुप्रयोगों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न है।
- विकल्प (A) संश्लेषण अभिक्रिया (Synthesis reaction): इसमें दो या अधिक पदार्थ मिलकर नया यौगिक बनाते हैं, जो आयनों को हटाने के लिए उपयुक्त नहीं है।
- विकल्प (B) वियोजन अभिक्रिया (Decomposition reaction): इसमें कोई यौगिक टूटता है, जो आयनिक शोधन की मुख्य विधि नहीं है।
- विकल्प (C) दहन अभिक्रिया (Combustion reaction): यह ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करने वाली ऑक्सीकरण प्रक्रिया है, जिसका जल शोधन में हानिकारक आयनों को हटाने से सीधा संबंध नहीं है।
#129. सोडियम और ऐलुमिनियम जैसी धातुओं, जो कि सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर हैं, के निष्कर्षण के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
- सक्रियता श्रेणी में शीर्ष पर स्थित धातुओं का निष्कर्षण: सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और ऐलुमिनियम जैसी अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ (Highly reactive metals) ऑक्सीजन और कार्बन के प्रति इतनी प्रबल बंधुता (Affinity) रखती हैं कि इन्हें कार्बन या अन्य अपचायक एजेंटों द्वारा उनके यौगिकों से अलग नहीं किया जा सकता।
- इसलिए, इन धातुओं को प्राप्त करने के लिए उनके गलित क्लोराइड या ऑक्साइड (Molten chlorides or oxides) का विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic reduction) किया जाता है, जिसमें धातु कैथोड पर जमा होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09/01/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) कार्बन के साथ तापन: इस विधि का उपयोग मध्यम सक्रियता वाली धातुओं (जैसे जिंक, आयरन, लेड) के ऑक्साइड्स के अपचयन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) निस्तापन (Calcination): यह कार्बोनेट अयस्कों को सीमित वायु में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) भर्जन (Roasting): यह सल्फाइड अयस्कों को अतिरिक्त वायु में तीव्रता से गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की विधि है।
#130. निम्नलिखित में से कौन-सी अपचयन अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction): रासायनिक परिभाषा के अनुसार, वह प्रक्रिया जिसमें किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का ह्रास (Removal of oxygen), हाइड्रोजन का योग, या इलेक्ट्रॉनों का लाभ होता है, अपचयन कहलाती है।
- विश्लेषण: जब कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) को हाइड्रोजन गैस के साथ गर्म किया जाता है, तो कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन हट जाती है और केवल कॉपर ($\text{Cu}$) शेष बचता है: CuO + H2 -> Cu + H2O। चूँकि यहाँ ऑक्सीजन की हानि हो रही है, यह एक स्पष्ट अपचयन अभिक्रिया है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कॉपर का कॉपर ऑक्साइड में रूपांतरण: ऑक्सीजन के जुड़ने के कारण यह ‘ऑक्सीकरण’ (Oxidation) का उदाहरण है।
- विकल्प (B) कार्बन का कार्बन डाइऑक्साइड में रूपांतरण: यह भी कार्बन का ऑक्सीकरण है।
- विकल्प (D) एथेनॉल का एसिटिक अम्ल में रूपांतरण: यह भी ऑक्सीजन के जुड़ने और हाइड्रोजन के हटने के कारण ऑक्सीकरण प्रक्रिया है।
#131. विस्थापन अभिक्रिया के पीछे प्राथमिक रासायनिकिकी क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- विस्थापन अभिक्रिया की रासायनिकिकी (Chemistry of Displacement Reaction): इस प्रकार की अभिक्रिया में सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में अधिक ऊपर स्थित कोई अधिक सक्रिय धातु या तत्व, किसी कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक के जलीय विलयन से बाहर निकाल देता है (यानी विस्थापित कर देता है)।
- उदाहरण: Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu (यहाँ अधिक सक्रिय लोहा, कॉपर सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर देता है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) यौगिक दो या अधिक घटकों में विघटित हो जाते हैं: यह ‘वियोजन या अपघटन अभिक्रिया’ (Decomposition reaction) की विशेषता है।
- विकल्प (C) दो अभिक्रियक मिलकर एक उत्पाद जनित करते हैं: यह ‘संयोजन अभिक्रिया’ (Combination reaction) को दर्शाता है।
- विकल्प (D) दो पदार्थों के बीच आयन विनिमय होता है: यह ‘द्वि-विस्थापन अभिक्रिया’ (Double displacement reaction) का मूल आधार है।
#132. लोहे जैसी मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके अयस्कों से निष्कर्षित करने के लिए सामान्यतः किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण: सक्रियता श्रेणी के बीच में स्थित धातुएँ (जैसे जिंक, आयरन, लेड, कॉपर आदि) मध्यम अभिक्रियाशील होती हैं। प्रकृति में ये आमतौर पर सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।
- इन अयस्कों को पहले भर्जन (Roasting) या निस्तापन (Calcination) द्वारा उनके धातु ऑक्साइड में बदला जाता है। इसके पश्चात, इन धातु ऑक्साइडों का कार्बन (जैसे कोक) का उपयोग करके रासायनिक अपचयन (Chemical reduction) किया जाता है, जिससे शुद्ध धातु प्राप्त होती है (उदाहरण: $\text{ZnO + C} \rightarrow \text{Zn + CO}$)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): केवल सीधे गर्म करने से धातु ऑक्साइड का अपचयन संभव नहीं है जब तक कि उपयुक्त अपचायक न हो।
- विकल्प (B): सांद्र अम्ल में अयस्क को घोलना सामान्य धातुकर्म (Metallurgy) की प्राथमिक निष्कर्षण विधि नहीं है।
- विकल्प (C): विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic reduction) का उपयोग केवल अत्यधिक सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम, पोटैशियम, ऐलुमिनियम) के लिए किया जाता है, मध्यम सक्रिय धातुओं के लिए नहीं।
#133. सक्रियता श्रेणी के मध्य स्थित धातुओं को सामान्यतः कैसे निष्कर्षित किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- मध्यम सक्रियता वाली धातुओं का निष्कर्षण: सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) के ठीक बीच में स्थित धातुएँ (जैसे जिंक, आयरन, लेड, कॉपर आदि) मध्यम अभिक्रियाशील होती हैं।
- इन धातुओं के अयस्कों (जो सामान्यतः सल्फाइड या कार्बोनेट रूप में होते हैं) को पहले भर्जन या निस्तापन द्वारा उनके धातु ऑक्साइड में बदला जाता है। इसके पश्चात, इन धातु ऑक्साइडों को कार्बन (जैसे कोक) के साथ गर्म करके उनका रासायनिक अपचयन किया जाता है, जिससे शुद्ध धातु प्राप्त होती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) जल में घोलकर: यह धातुओं के निष्कर्षण की कोई विधि नहीं है।
- विकल्प (C) विद्युत अपघटन द्वारा: इस विधि का उपयोग केवल अत्यधिक सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम, पोटैशियम, ऐलुमिनियम) के निष्कर्षण के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) केवल तापन द्वारा: बिना किसी उपयुक्त अपचायक (जैसे कार्बन) के केवल गर्म करने से धातु ऑक्साइडों का अपचयन संभव नहीं है।
#134. एक द्रव्यमान m, वेग v से गतिमान है और इसकी गतिज ऊर्जा K है। यदि वेग दोगुना कर दिया जाए तो नई गतिज ऊर्जा होगी?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2)
- गतिज ऊर्जा का सूत्र: किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा ($K$) उसके द्रव्यमान ($m$) और वेग ($v$) के वर्ग के गुणनफल की आधी होती है, यानी $K = \frac{1}{2}mv^2$।
- गणना: यदि वेग को दोगुना ($2v$) कर दिया जाए, तो नई गतिज ऊर्जा ($K’$) होगी:
• $K’ = \frac{1}{2}m(2v)^2$
• $K’ = \frac{1}{2}m(4v^2) = 4 \times \left(\frac{1}{2}mv^2\right) = 4K$
अतः वेग दोगुना करने पर गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 06 May, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) 2K: गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग ($v^2$) के समानुपाती होती है, इसलिए वेग दोगुना करने पर ऊर्जा 2 गुना नहीं बल्कि $2^2 = 4$ गुना बढ़ती है।
- विकल्प (B) K: यह स्थिति तब होती है जब वेग में कोई परिवर्तन न किया जाए।
- विकल्प (D) K/2: वेग को आधा ($\frac{v}{2}$) करने पर गतिज ऊर्जा एक-चौथाई ($\frac{K}{4}$) हो जाती है।
#135. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया को निरूपित नहीं करती है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): सामान्यतः जब कोई प्रबल या दुर्बल अम्ल किसी प्रबल या दुर्बल क्षार के साथ अभिक्रिया करता है, तो उनके बीच आयनों के विनिमय से केवल लवण और जल का निर्माण होता है (उदा. Acid + Base → Salt + Water)।
- विश्लेषण: विकल्प (A) में सोडियम कार्बोनेट (या संबंधित यौगिक) और अम्ल की अभिक्रिया से लवण और जल के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस भी निकलती है, जो कि कार्बोनेट/बाइकार्बोनेट की अम्लीय प्रतिक्रिया की विशेषता है, न कि विशुद्ध अम्ल-क्षार उदासीनीकरण की।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16 Dec 2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O: यह दुर्बल अम्ल (एसिटिक अम्ल) और प्रबल क्षार (NaOH) के बीच की एक मानक उदासीनीकरण अभिक्रिया है।
- विकल्प (C) H2SO4 + Ca(OH)2 → CaSO4 + 2H2O: यह सल्फ्यूरिक अम्ल और कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (क्षार) के बीच की उदासीनीकरण अभिक्रिया है जिसमें लवण और जल बनते हैं।
- विकल्प (D) HCl + NaOH → NaCl + H2O: यह सबसे प्रसिद्ध और आदर्श प्रबल अम्ल (HCl) व प्रबल क्षार (NaOH) की उदासीनीकरण अभिक्रिया है।
#136. हाइड्रोजन परॉक्साइड के अपघटन को दर्शाने वाला संतुलित समीकरण है:
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
- हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन: हाइड्रोजन परॉक्साइड ($\text{H}_2\text{O}_2$) एक अस्थिर यौगिक है जो धीरे-धीरे या उत्प्रेरक (जैसे मैंगनीज डाइऑक्साइड) की उपस्थिति में जल ($\text{H}_2\text{O}$) और ऑक्सीजन गैस ($\text{O}_2$) में अपघटित हो जाता है।
- समीकरण का संतुलन:
• अभिकारक पक्ष ($\text{2H}_2\text{O}_2$): हाइड्रोजन = 4, ऑक्सीजन = 4
• उत्पाद पक्ष ($\text{2H}_2\text{O} + \text{O}_2$): हाइड्रोजन = 4, ऑक्सीजन = ($2 \times 1 + 2$) = 4
चूंकि दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान है, इसलिए यह पूरी तरह संतुलित समीकरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec 2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) 2HO2 → 2HO + O2: यह हाइड्रोजन परॉक्साइड का सही रासायनिक सूत्र या अपघटन नहीं है।
- विकल्प (C) H2O2 → 2H2O + O2: यह एक असंतुलित समीकरण है (इसमें अभिकारकों में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु उत्पादों से मेल नहीं खाते)।
- विकल्प (D) H2O2 → H2O + O2: इसमें उत्पाद पक्ष में ऑक्सीजन के कुल 3 परमाणु हैं जबकि अभिकारक पक्ष में केवल 2 हैं, इसलिए यह भी असंतुलित है।
#137. निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा सही विकल्प का चयन करें।कथन 1: सजातीय श्रेणी के सदस्यों में एक – CH2– समूह का अंतर होता है।कथन 2: सजातीय श्रेणी के प्रत्येक क्रमिक सदस्य का आणविक द्रव्यमान पूर्ववर्ती सदस्य से 12 u भिन्न होता है।
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- सजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें सभी सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह होता है और दो क्रमागत सदस्यों के बीच हमेशा $-\text{CH}_2-$ समूह का अंतर होता है (कथन 1 सत्य है)।
- आणविक द्रव्यमान में अंतर: चूँकि एक $-\text{CH}_2-$ समूह में कार्बन का परमाणु द्रव्यमान 12 u और हाइड्रोजन के दो परमाणुओं का कुल द्रव्यमान $2 \times 1 = 2$ u होता है, इसलिए क्रमिक सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में हमेशा $12 + 2 = 14\text{ u}$ का अंतर होना चाहिए।
(नोट: यहाँ प्रश्न में कथन 2 में 12 u दिया गया है जो कि एक मुद्रण त्रुटि या विशिष्ट परीक्षा प्रारूप हो सकता है, परंतु रेलवे की आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार दोनों कथनों को सही मानते हुए सही व्याख्या के रूप में विकल्प (C) को चुना गया है।)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A), (B) और (D): आयोग के आधिकारिक मूल्यांकन के आधार पर दोनों कथनों के मध्य तार्किक और संरचनात्मक संबंध होने के कारण ये विकल्प अमान्य हैं।
#138. निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया में अपघटन के दौरान रंग परिवर्तन, गैस का उत्सर्जन और ठोस अवशेष का निर्माण, तीनों एक साथ होते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- लेड नाइट्रेट का तापीय अपघटन (Thermal Decomposition of Lead Nitrate): जब सफेद रंग के लेड नाइट्रेट ($\text{Pb(NO}_3\text{)}_2$) चूर्ण को परखनली में गर्म किया जाता है, तो निम्नलिखित तीन मुख्य परिवर्तन एक साथ होते हैं:
1. रंग परिवर्तन व ठोस अवशेष: परखनली में मौजूद सफेद ठोस पदार्थ गर्म होने पर पीले रंग के लेड ऑक्साइड ($\text{PbO}$) के ठोस अवशेष में बदल जाता है।
2. गैस का उत्सर्जन: इस अभिक्रिया के दौरान भूरे रंग की नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($\text{NO}_2$) गैस और ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) गैस उत्सर्जित होती है।
- रासायनिक समीकरण: 2Pb(NO3)2 (s) → 2PbO (s) + 4NO2 (g) + O2 (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 04/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) 2AgCl → 2Ag + Cl2: यह सूर्य के प्रकाश द्वारा होने वाला अपघटन (प्रकाशीय अपघटन) है, जिसमें सिल्वर क्लोराइड (सफेद से धूसर/ग्रे) में बदलता है, लेकिन यह लेड नाइट्रेट जैसी क्लासिक तापीय अपघटन विशेषता को पूरी तरह प्रदर्शित नहीं करता।
- विकल्प (C) CaCO3 → CaO + CO2: इसमें कैसियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है, लेकिन इसमें स्पष्ट विशिष्ट रंग परिवर्तन (जैसे भूरी गैस का निकलना) नहीं होता।
- विकल्प (D) 2KClO3 → 2KCl + 3O2: पोटैशियम क्लोरेट के अपघटन में ऑक्सीजन गैस निकलती है और सफेद ठोस अवशेष ($\text{KCl}$) बचता है, परंतु इसमें लेड नाइट्रेट की तरह भूरे रंग की गैस या स्पष्ट रंग परिवर्तन का एक साथ संयोजन नहीं होता।
#139. जब पोटैशियम, जल के साथ अभिक्रिया करता है, तो हम क्या देखते हैं?
(RRB NTPC CBT-1 : 06/03/2026 )
- पोटैशियम की जल के साथ अभिक्रिया: पोटैशियम ($\text{K}$) एक अत्यंत अभिक्रियाशील क्षार धातु है। जब यह जल ($\text{H}_2\text{O}$) के साथ अभिक्रिया करती है, तो यह अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है।
- इस अभिक्रिया के दौरान निकलने वाली हाइड्रोजन गैस तुरंत आग पकड़ लेती है, जिसके कारण यह एक चमकीली बैंगनी/पीली ज्वाला के साथ बहुत तीव्र गति से जलती है और धमाके के साथ क्रिया संपन्न होती है: 2K + 2H2O → 2KOH + H2 + ऊष्मा।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-1 : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): यह कहना गलत है क्योंकि इसमें तीव्र ध्वनि, ऊष्मा और गैस का स्पष्ट दृश्य परिवर्तन होता है।
- विकल्प (B): इसमें पोटैशियम हाइड्रोक्साइड बनता है जो रंगहीन विलयन देता है, हरा यौगिक नहीं।
- विकल्प (C) धीरे-धीरे बुलबुले उठना: यह कैल्शियम या मैग्नीशियम जैसी कम सक्रिय धातुओं की ठंडे पानी के साथ मंद अभिक्रिया की विशेषता है, पोटैशियम की नहीं।
#140. विरंजक चूर्ण का उपयोग किसके लिए नहीं किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 22 Feb 2021 Shift 1)
- विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder – $\text{CaOCl}_2$): इसका रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड है। यह एक हल्के पीले रंग का चूर्ण होता है जिसमें क्लोरीन की तेज गंध आती है।
- प्रमुख उपयोग:
• वस्त्र उद्योग में सूती एवं लिनेन के विरंजन (Bleaching) के लिए।
• कागज की फैक्ट्रियों में लकड़ी की लुगदी के विरंजन के लिए।
• पीने वाले जल को रोगाणुमुक्त (Disinfection) करके कीटाणुरहित बनाने के लिए।
• कई रासायनिक उद्योगों में एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक (Oxidizing agent) के रूप में।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 22 Feb 2021 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल को कीटाणुरहित करना: यह विरंजक चूर्ण का एक बहुत आम और महत्वपूर्ण उपयोग है।
- विकल्प (B) कपास को विरंजित करना: कपड़ा उद्योगों में इसका उपयोग कपड़ों के रंग को साफ करने/विरंजित करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) ऑक्सीकारक रसायन: यह रासायनिक अभिक्रियाओं में एक अच्छे ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
(अतः ‘रोटी तैयार करना’ इसके उपयोग से संबंधित नहीं है, इसीलिए यही इस प्रश्न का सही उत्तर है।)
#141. निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया एक संयोजन अभिक्रिया है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 1)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (तत्व या यौगिक) परस्पर मिलकर केवल एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है।
- विश्लेषण: समीकरण CaO + H2O → Ca(OH)2 में कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा हुआ चूना) और जल आपस में मिलकर एकल उत्पाद के रूप में कैल्सियम हाइड्रोक्साइड (बुझा हुआ चूना) बनाते हैं और प्रचुर मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 18 Dec 2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) 2KClO3 → 2KCl + 3O2: यह एक ‘अपघटन अभिक्रिया’ (Decomposition reaction) है जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद देता है।
- विकल्प (C) NaCl + AgNO3 → AgCl + NaNO3: यह आयनों के आदान-प्रदान पर आधारित ‘द्वि-विस्थापन अभिक्रिया’ (Double displacement reaction) है।
- विकल्प (D) CaCO3 → CaO + CO2: यह कैल्सियम कार्बोनेट का तापीय ‘अपघटन’ है।
#142. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प उदासीनीकरण अभिक्रिया के लिए सामान्य शब्द समीकरण को सही प्रकार से पूरा करता है?क्षार + अम्ल → ____________ + ____________
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 18/03/2026 )
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब कोई अम्ल और क्षार आपस में रासायनिक अभिक्रिया करते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त (उदासीन) कर देते हैं।
- इस रासायनिक प्रक्रिया का सामान्य शब्द समीकरण इस प्रकार होता है:
क्षार + अम्ल → लवण + जल (साथ ही कुछ मात्रा में ऊष्मा भी उत्पन्न होती है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate CBT-1 : 18/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B), (C) और (D): अम्ल और क्षार की सीधी अभिक्रिया से धातु या कार्बन डाइऑक्साइड का इस रूप में निर्माण नहीं होता है (हालाँकि कार्बोनेटेड अम्लीय अभिक्रियाओं में $\text{CO}_2$ निकलती है, लेकिन सामान्य उदासीनीकरण का मानक उत्पाद हमेशा लवण और जल ही होता है)।
#143. और में प्रोटॉनों की संख्या क्रमशः कितनी है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक): किसी भी तत्व के परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की कुल संख्या उस तत्व की परमाणु संख्या (Atomic Number) के बराबर होती है।
- कार्बन (Carbon – C): कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 होता है, अतः इसके नाभिक में 6 प्रोटॉन होते हैं।
- ऑक्सीजन (Oxygen – O): ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक 8 होता है, अतः इसके नाभिक में 8 प्रोटॉन होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) 8 और 6: यह क्रम उल्टा (ऑक्सीजन और कार्बन का) है, जबकि प्रश्न में तत्वों का सही क्रम कार्बन और ऑक्सीजन के अनुसार दिया गया है।
- विकल्प (B) 7 और 7: 7 प्रोटॉन नाइट्रोजन (N) के नाभिक में होते हैं, इन तत्वों के लिए नहीं।
- विकल्प (C) 6 और 6: दोनों के लिए प्रोटॉनों की संख्या समान नहीं हो सकती क्योंकि दोनों अलग-अलग तत्व हैं।
#144. कॉपर सल्फेट विलयन में लोहे की कील डुबोने पर उसका नीला रंग फीका क्यों पड़ जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- विस्थापन अभिक्रिया और रंग परिवर्तन: जब लोहे ($\text{Fe}$) की कील को कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के नीले रंग के विलयन में डुबोया जाता है, तो लोहा कॉपर की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर को विस्थापित कर देता है।
- इसके परिणामस्वरूप कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) विलयन, आयरन सल्फेट ($\text{FeSO}_4$) में परिवर्तित हो जाता है। आयरन सल्फेट विलयन का रंग हल्का हरा होता है, जिसके कारण मूल नीले विलयन का रंग फीका पड़कर हरा हो जाता है और विस्थापित कॉपर लोहे की कील पर भूरी परत के रूप में जमा हो जाता है: Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): तांबा जल में विलीन नहीं होता, बल्कि ठोस रूप में अलग होकर लोहे की कील पर जमा हो जाता है।
- विकल्प (B): यद्यपि आयरन सल्फेट का जलीय विलयन हल्का हरा होता है, किंतु रंग फीका पड़ने का मुख्य रासायनिक कारण कॉपर सल्फेट का आयरन सल्फेट में बदलना है।
- विकल्प (C): कॉपर सल्फेट का केवल विघटन नहीं होता, बल्कि यह लोहे के साथ रासायनिक रूप से विस्थापित होकर नया यौगिक बनाता है।
#145. मिश्रण का निर्माण एक _________ परिवर्तन है जबकि यौगिक का निर्माण क्रमशः एक _________ परिवर्तन है।
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- मिश्रण का निर्माण (Formation of a Mixture): जब दो या दो से अधिक पदार्थों को किसी भी अनुपात में मिलाया जाता है, तो मिश्रण बनता है। इस प्रक्रिया में घटक पदार्थों के रासायनिक गुणों में कोई परिवर्तन नहीं होता और न ही कोई नया रासायनिक पदार्थ बनता है, इसलिए यह एक भौतिक परिवर्तन (Physical change) है।
- यौगिक का निर्माण (Formation of a Compound): जब दो या दो से अधिक तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से आपस में संयुक्त होते हैं, तो एक नए पदार्थ (यौगिक) का निर्माण होता है जिसके गुण मूल घटकों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। इसमें रासायनिक बंधन बनते हैं, इसलिए यह एक रासायनिक परिवर्तन (Chemical change) है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): मिश्रण के निर्माण को रासायनिक और यौगिक के निर्माण को भौतिक बताना पूरी तरह विपरीत (गलत) है।
- विकल्प (B): दोनों को भौतिक परिवर्तन मानना गलत है क्योंकि यौगिक का बनना रासायनिक प्रक्रिया है।
- विकल्प (C): दोनों को रासायनिक परिवर्तन मानना गलत है क्योंकि मिश्रण बनाना एक भौतिक प्रक्रिया है।
#146. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ पानी में खुलने पर हाइड्रोक्साइड आयन उत्पन्न करता है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 12 Dec, 2024 Shift 1)
- क्षार और हाइड्रोक्साइड आयन: वे पदार्थ जो जल में घुलने पर हाइड्रॉक्साइड आयन ($\text{OH}^-$) उत्पन्न करते हैं, क्षार (Bases) कहलाते हैं।
- अमोनिया की जल के साथ अभिक्रिया: जब अमोनिया ($\text{NH}_3$) को पानी में घोला जाता है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके अमोनियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NH}_4\text{OH}$) बनाता है, जो वियोजित होकर जलीय विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयन ($\text{OH}^-$) मुक्त करता है: NH3 + H2O → NH4+ + OH-।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF SI CBT-I 2024 : 12 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($\text{NO}_2$): यह एक अम्लीय ऑक्साइड है जो जल में घुलने पर अम्ल (नाइट्रिक/नाइट्रस अम्ल) बनाता है और हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) देता है।
- विकल्प (C) कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$): जल में घुलकर यह कार्बोनिक अम्ल ($\text{H}_2\text{CO}_3$) बनाता है, जिससे हाइड्रोजन आयन उत्पन्न होते हैं।
- विकल्प (D) सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$): यह भी एक अधात्विक ऑक्साइड है जो जल के साथ मिलकर सल्फरस अम्ल बनाता है और $\text{H}^+$ आयन देता है।
#147. अपघटन अभिक्रिया क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- अपघटन या वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक एकल अभिकारक (Compound) टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद प्रदान करता है, अपघटन अभिक्रिया कहलाती है।
- इस प्रकार की अभिक्रियाओं को संपन्न कराने के लिए सामान्यतः ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो ऊष्मा (तापीय अपघटन), प्रकाश (प्रकाशीय अपघटन), या विद्युत (विद्युत अपघटन) के रूप में दी जाती है। उदाहरण: CaCO3 → CaO + CO2
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 19/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): दो यौगिकों द्वारा आयनों का आदान-प्रदान ‘द्वि-विस्थापन अभिक्रिया’ (Double displacement reaction) को दर्शाता है।
- विकल्प (B): दो या दो से अधिक पदार्थों का मिलकर एक उत्पाद बनाना ‘संयोजन अभिक्रिया’ (Combination reaction) है।
- विकल्प (C): एक पदार्थ का दो या दो से अधिक अभिकारकों से बनना अपघटन की परिभाषा के विपरीत है (यह संयोजन प्रक्रिया को दर्शाता है)।
#148. यदि A, B को विस्थापित करता है और C, A को विस्थापित करता है, तो अभिक्रियाशीलता का क्रम _________ है।
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- विस्थापन और अभिक्रियाशीलता का नियम: सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) के अनुसार, अधिक अभिक्रियाशील तत्व अपने से कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देता है।
- तार्किक विश्लेषण:
1. दिया गया है कि “A, B को विस्थापित करता है”, जिसका अर्थ है कि A की अभिक्रियाशीलता B से अधिक है (A > B)।
2. यह भी दिया गया है कि “C, A को विस्थापित करता है”, जिसका अर्थ है कि C की अभिक्रियाशीलता A से अधिक है (C > A)।
3. इन दोनों कथनों को मिलाने पर संपूर्ण अभिक्रियाशीलता का घटता हुआ क्रम C > A > B बनता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 10/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) B > A > C: यह दिए गए कथनों के बिल्कुल विपरीत है।
- विकल्प (C) C > B > A: इसमें B को A से अधिक सक्रिय बताया गया है जो कि गलत है क्योंकि A, B को विस्थापित करता है।
- विकल्प (D) A > B > C: इसमें C को सबसे कम सक्रिय माना गया है जबकि C, A को विस्थापित करता है।
(A) यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐल्कोहॉल के कार्बोक्लिक अम्ल में ऑक्सीकरण को निरूपित करती है।
(B) क्षारीय KMnO 4 ऑक्सीकरण कर्मक के रूप में कार्य करता है।
(C) क्षारीय KMnO 4 अपचायी कर्मक के रूप में कार्य करता है।
#149. निम्नलिखित अभिक्रिया पर विचार कीजिए:निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
(RRB JE 20/02/2026 )
- प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण: जब किसी प्राथमिक ऐल्कोहॉल (Primary Alcohol) को क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट ($\text{Alkaline KMnO}_4$) या अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट के साथ गर्म किया जाता है, तो यह ऑक्सीकृत होकर सीधे कार्बोक्सिलिक अम्ल ($\text{Carboxylic acid}$) में परिवर्तित हो जाता है। अतः कथन (A) सत्य है।
- ऑक्सीकारक के रूप में कार्य: क्षारीय $\text{KMnO}_4$ एक बहुत ही प्रबल ऑक्सीकारक (Strong Oxidizing Agent) है जो अभिक्रिया के दौरान अन्य पदार्थों को ऑक्सीजन प्रदान करता है और स्वयं अपचत हो जाता है। अतः कथन (B) सत्य है।
- कथन (C) का खंडन: चूंकि $\text{KMnO}_4$ एक ऑक्सीकारक है, यह अपचायी कर्मक (Reducing Agent) के रूप में कार्य नहीं कर सकता। अतः कथन (C) असत्य है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल B: इसमें कथन A को छोड़ दिया गया है जो कि रासायनिक रूप से पूरी तरह सही है।
- विकल्प (B) A, B और C: इसमें असत्य कथन C को भी सही मान लिया गया है।
- विकल्प (C) केवल A और C: इसमें कथन B को छोड़ दिया गया है और असत्य कथन C को शामिल किया गया है।
#150. जब किसी अपघटन अभिक्रिया को गर्म करके किया जाता है, तब उसे क्या कहा जाता है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- तापीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब किसी अपघटन या वियोजन अभिक्रिया को संपन्न कराने के लिए ऊष्मा (Heat) का उपयोग किया जाता है (अर्थात यौगिक को गर्म करके दो या अधिक सरल पदार्थों में तोड़ा जाता है), तो उसे तापीय अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
- उदाहरण: कैल्सियम कार्बोनेट का गर्म करने पर कैल्सियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में टूटना (CaCO3 → CaO + CO2)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 25 May 2019, Shift 3 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) गैर-विद्युत अपघटनी अभिक्रिया: यह कोई मानक वर्गीकरण नहीं है।
- विकल्प (C) प्रकाश-अपघटनी अभिक्रिया: जब अपघटन अभिक्रिया सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा द्वारा होती है (जैसे सिल्वर क्लोराइड का टूटना), तब उसे प्रकाशीय अपघटन कहते हैं।
- विकल्प (D) विद्युत-अपघटन अभिक्रिया: जब अपघटन विद्युत धारा प्रवाहित करके किया जाता है (जैसे जल का विद्युत अपघटन), तब उसे विद्युत-अपघटन कहते हैं।
#151. जैवनिम्नीकरणीय पदार्थों की परिभाषा के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
(RRB JE 19/02/2026 )
- जैवनिम्नीकरणीय पदार्थ (Biodegradable Substances): वे पदार्थ जो जैविक कारकों (जैसे सूक्ष्मजीवों, बैक्टीरिया, कवक आदि) के जैव रासायनिक प्रक्रमों (Biological processes) द्वारा सरल और हानिरहित पदार्थों में विघटित कर दिए जाते हैं, जैवनिम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं (उदाहरण: सब्जियों के छिलके, कागज, लकड़ी आदि)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 19/02/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B), (C) और (D): रासायनिक, यांत्रिक या भौतिक प्रक्रमों द्वारा प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाले पदार्थों को जैविक परिभाषा के अंतर्गत नहीं रखा जाता, क्योंकि जैवनिम्नीकरणीयता मुख्य रूप से सजीव सूक्ष्मजीवों और जैविक प्रक्रमों पर आधारित होती है।
#152. क्रियाशीलता श्रेणी में उच्च धातुओं को किस प्रक्रिया द्वारा निष्कर्षित किया जा सकता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
- धातुओं का निष्कर्षण और सक्रियता श्रेणी: सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में सबसे ऊपर स्थित अत्यधिक सक्रिय धातुएँ (जैसे सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम) ऑक्सीजन या अन्य तत्वों के प्रति बहुत अधिक बंधुता रखती हैं, इसलिए इन्हें साधारण अपचायक (जैसे कार्बन) द्वारा अपचयनित नहीं किया जा सकता।
- इन अत्यधिक सक्रिय धातुओं को उनके गलित क्लोराइड या ऑक्साइड के वैद्युतअपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction) द्वारा शुद्ध रूप में निष्कर्षित किया जाता है (जैसे कैथोड पर धातु का जमा होना)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08/01/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) कार्बन के साथ तापन: इस विधि का उपयोग सक्रियता श्रेणी के मध्य में आने वाली मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं (जैसे जिंक, आयरन, लेड आदि) के ऑक्साइड्स को अपचयनित करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (A) केवल तापन: सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित अत्यंत कम सक्रिय धातुओं (जैसे पारा या कॉपर के कुछ अयस्क) के लिए इसका उपयोग होता है।
- विकल्प (D) निस्तापन (Calcination): यह कार्बोनेट अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया है, न कि सीधे धातु निष्कर्षण की अपचयन विधि।
#153. सोडियम हाइड्रॉक्साइड किस प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
- क्लोरो-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali Process): जब सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन – Brine) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$), क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) का निर्माण करता है।
- इस प्रक्रिया को ‘क्लोरो-क्षार’ नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इसमें बनने वाले उत्पाद क्लोरीन (Chloro) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड एक क्षार (Alkali) हैं:
2NaCl (aq) + 2H2O (l) → 2NaOH (aq) + Cl2 (g) + H2 (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16 Dec 2024, Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) सोल्वे प्रक्रिया (Solvay process): इस विधि का उपयोग बड़े पैमाने पर सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) के उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) संपर्क प्रक्रिया (Contact process): इसका उपयोग व्यावसायिक स्तर पर सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) के निर्माण के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) हाबर प्रक्रिया (Haber process): इस विधि द्वारा नाइट्रोजन और हाइड्रोजन गैस से अमोनिया ($\text{NH}_3$) का निर्माण किया जाता है।
#154. H+ आयनों की महत्वपूर्ण सांद्रता वाले विलयन का pH मान क्या है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)
- हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) सांद्रता और pH मान: pH स्केल (pH Scale) किसी विलयन की अम्लता या क्षारकता को मापने का पैमाना है।
- जिस विलयन में $\text{H}^+$ आयनों की सांद्रता अधिक होती है, वह विलयन अम्लीय (Acidic) प्रकृति का होता है। अम्लीय विलयनों का pH मान हमेशा 7 से कम होता है (जितना कम pH मान होगा, अम्ल उतना ही अधिक प्रबल होगा)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec 2024, Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) 7: यह मान उदासीन (Neutral) विलयन (जैसे शुद्ध जल) का होता है, जहाँ $\text{H}^+$ और $\text{OH}^-$ आयनों की सांद्रता समान होती है।
- विकल्प (C) 7 से अधिक: यह मान क्षारीय (Basic) विलयनों का होता है, जिनमें हाइड्रॉक्साइड आयनों ($\text{OH}^-$) की सांद्रता अधिक होती है।
- विकल्प (D): pH स्केल के माध्यम से इसे स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जा सकता है, अतः यह विकल्प अमान्य है।
#155. रासायनिक उद्योगों में, विरंजन चूर्ण (bleaching powder) मुख्य रूप से _________ के रूप में कार्य करता है।
(RRB Technician Grade III 06/03/2026)
- ऑक्सीकरण कर्मक के रूप में विरंजक चूर्ण: विरंजक चूर्ण (कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड – $\text{CaOCl}_2$) रासायनिक उद्योगों में एक शक्तिशाली ऑक्सीकरण कर्मक (Oxidizing Agent) के रूप में मुख्य भूमिका निभाता है।
- यह अपनी उच्च ऑक्सीकरण क्षमता के कारण ही कपड़ा उद्योगों में सूती कपड़ों, लुगदी आदि को विरंजित (Bleach) करने तथा कई रासायनिक संश्लेषण प्रक्रमों में उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एक अपचायी कर्मक: विरंजक चूर्ण स्वयं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है और अन्य पदार्थों को ऑक्सीकृत करता है, इसलिए यह अपचायी नहीं बल्कि ऑक्सीकारक है।
- विकल्प (B) एक निष्प्रभावन कर्मक: निष्प्रभावन का कार्य अम्ल और क्षार द्वारा एक-दूसरे के प्रभाव को खत्म करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) एक उत्प्रेरक: उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया की दर को प्रभावित करते हैं, जबकि विरंजक चूर्ण अभिक्रिया में सीधे रासायनिक रूप से भाग लेकर ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
#156. निष्कर्षण से पहले अयस्क के संवर्धन ( enrichment) का उद्देश्य क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- अयस्क का संवर्धन (Enrichment/Concentration of Ores): पृथ्वी से निकाले गए खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत, चट्टानी कण और अवांछित अशुद्धियाँ (जिन्हें ‘मैट्रिक्स’ या ‘गैंग – Gangue’ कहा जाता है) प्रचुर मात्रा में जुड़ी होती हैं।
- धातुओं के निष्कर्षण से ठीक पहले इन अवांछित अशुद्धियों को हटाने और अयस्क में धातु की मात्रा के अनुपात को बढ़ाने की प्रक्रिया को अयस्क का संवर्धन कहा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 27/12/2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) वजन बढ़ाना: संवर्धन का उद्देश्य अयस्क से अशुद्धियाँ हटाकर उसका भार कम करना और शुद्धता बढ़ाना होता है, वजन बढ़ाना नहीं।
- विकल्प (C) इसे लवण में बदलना: यह संवर्धन का प्राथमिक कार्य नहीं है, बल्कि रासायनिक प्रक्रियाओं का भाग है।
- विकल्प (D) नमी दूर करना: यद्यपि कुछ हद तक नमी हट सकती है, परंतु संवर्धन का मुख्य और व्यापक उद्देश्य अवांछित गैंग (Gangue) अशुद्धियों को दूर करना होता है।
#157. कार्बन के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण होना _________ का एक उदाहरण है।
(RRB Technician Grade III 09/03/2026)
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में ऊष्मा (Heat) या ऊर्जा भी उत्पन्न होती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती है।
- कार्बन का दहन: जब कार्बन (कोयला) को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस बनती है और भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है: C (s) + O2 (g) → CO2 (g) + ऊष्मा। दहन प्रक्रियाएं सामान्यतः ऊष्माक्षेपी प्रकृति की होती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 09/03/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऊष्माशोषी अभिक्रिया: इसमें ऊष्मा का अवशोषण होता है, जबकि दहन में ऊष्मा निकलती है।
- विकल्प (B) प्रकाशरासायनिक अभिक्रिया: यह सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होने वाली अभिक्रिया है (जैसे प्रकाशसंश्लेषण)।
- विकल्प (D) उत्क्रमणीय अभिक्रिया: कार्बन का दहन एक अनुत्क्रमणीय (Irreversible) परिवर्तन है क्योंकि एक बार $\text{CO}_2$ बन जाने पर सामान्य परिस्थितियों में इसे वापस कार्बन और ऑक्सीजन में नहीं बदला जा सकता।
#158. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया, अपचयन अभिक्रिया ( reduction reaction) का उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026)
- अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का निष्कासन (Removal of oxygen) होता है, हाइड्रोजन का योग होता है, या इलेक्ट्रॉनों की प्राप्ति होती है, उसे अपचयन कहते हैं।
- विश्लेषण: समीकरण CuO + H2 → Cu + H2O में कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) से ऑक्सीजन अलग होकर तांबा ($\text{Cu}$) बनाता है, अतः यहाँ क्यूप्रिक ऑक्साइड का तांबे में अपचयन हो रहा है (साथ ही हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण होकर जल बनना इसे एक रेडॉक्स/Redox अभिक्रिया बनाता है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08/01/2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) NaOH + HCl → NaCl + H2O: यह एक उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया है।
- विकल्प (B) 2Mg + O2 → 2MgO: इसमें मैग्नीशियम के साथ ऑक्सीजन जुड़ रही है, जो कि एक ऑक्सीकरण (Oxidation) अभिक्रिया है।
- विकल्प (C) Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2: यह विस्थापन अभिक्रिया है जिसमें जिंक का ऑक्सीकरण होता है।


