Chemical Reactions MCQ in Hindi
#1. इनमें से कौन सा एंटीबायोटिक नहीं है?
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 1)
- एंटीबायोटिक (Antibiotic): ये ऐसी औषधियाँ या रसायन हैं जो जीवाणुओं (Bacteria) के विकास को रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं। एरिथ्रोमाइसिन, टेट्रासाइक्लिन और स्ट्रेप्टोमाइसिन सभी प्रमुख एंटीबायोटिक हैं।
- पैरासीटामोल: यह एक एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) और एंटीपायरेटिक (बुखार कम करने वाली) दवा है, जिसका उपयोग बैक्टीरिया मारने के लिए नहीं बल्कि दर्द और बुखार से राहत पाने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 20 Jan, 2019 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एरिथ्रोमाइसिन: यह एक मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक है जो विभिन्न बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज में उपयोग की जाती है।
- विकल्प (B) टेट्रासाइक्लिन: यह एक व्यापक स्पेक्ट्रम (broad-spectrum) एंटीबायोटिक है।
- विकल्प (C) स्ट्रेप्टोमाइसिन: यह भी एक एंटीबायोटिक है जो जीवाणु जनित रोगों के उपचार में काम आती है।
#2. निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया द्विविस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है, द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती हैं। इस अभिक्रिया में सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के बीच आयनों की अदला-बदली से बेरियम सल्फेट का अघुलनशील सफेद अवक्षेप बनता है।
- अन्य तीनों अभिक्रियाएँ: विकल्प (A), (B) और (D) एकल विस्थापन (Single Displacement) अभिक्रियाओं के उदाहरण हैं, जिसमें अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु (कॉपर) को उसके लवण विलयन से विस्थापित करती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) Fe + CuSO₄: यह आयरन द्वारा कॉपर के विस्थापन की एकल विस्थापन अभिक्रिया है।
- विकल्प (B) Pb + CuCl₂: यह लेड (सीसा) द्वारा कॉपर के विस्थापन की एकल विस्थापन अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) Zn + CuSO₄: यह जिंक द्वारा कॉपर के विस्थापन की एकल विस्थापन अभिक्रिया है।
#3. रेटिनॉल मुख्य रूप से ______ से संबंधित है।
(RRB NTPC Tier I : 19 Apr 2016 Shift 2)
- रेटिनॉल (Retinol): यह विटामिन ‘A’ का रासायनिक नाम है। यह आँखों की दृष्टि, स्वस्थ त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है। इसकी कमी से रतौंधी (Night Blindness) रोग हो जाता है।
- स्रोत: गाजर, दूध, मक्खन, अंडे और हरी पत्तेदार सब्जियाँ विटामिन A के प्रमुख स्रोत हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 19 Apr, 2016 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) विटामिन B: इसका रासायनिक नाम थायमिन (विटामिन B1) आदि है, जो ऊर्जा चयापचय में मदद करता है।
- विकल्प (C) विटामिन D: इसे कैल्सीफेरॉल कहा जाता है, जो हड्डियों और दाँतों की मजबूती के लिए जरूरी है।
- विकल्प (D) विटामिन E: इसे टोकोफेरॉल कहा जाता है, जो एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है।
#4. निम्नलिखित में से कौन से जीवाणु संक्रमण हैं जो यौन संपर्क के कारण होते हैं? A. गोनोरिया B. एड्स C. सिफलिस
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1)
- गोनोरिया (Gonorrhea) और सिफलिस (Syphilis): ये दोनों यौन संपर्क के माध्यम से फैलने वाले प्रमुख जीवाणु संक्रमण (Bacterial STIs) हैं। गोनोरिया ‘नाइसरिया गोनोरिया’ (Neisseria gonorrhoeae) बैक्टीरिया के कारण और सिफलिस ‘ट्रेपोनेमा पैलिडम’ (Treponema pallidum) नामक जीवाणु के कारण होता है।
- एड्स (AIDS): यह यौन संपर्क से फैलने वाला संक्रमण जरूर है, लेकिन यह बैक्टीरिया से नहीं बल्कि HIV (ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस) नामक विषाणु (Virus) के कारण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B और C दोनों / B, A और C / A और B दोनों): इन विकल्पों में ‘एड्स (B)’ को शामिल किया गया है, जो कि एक वायरल (विषाणु जनित) बीमारी है, न कि जीवाणु (Bacterial) संक्रमण। इसलिए ये विकल्प गलत हैं।
#5. कैल्शियम धातु की एक स्वच्छ पट्टी को ठंडे पानी में डाला जाता है और अभिक्रिया का प्रेक्षण किया जाता है। सोडियम और मैग्नीशियम की तुलना में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कैल्शियम की अभिक्रियाशीलता और निर्मित उत्पादों की प्रकृति का सही वर्णन करता है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- कैल्शियम की जल के साथ अभिक्रिया: कैल्शियम ठंडे पानी के साथ कम तीव्रता से अभिक्रिया करता है। यहाँ उत्पन्न होने वाली ऊष्मा हाइड्रोजन गैस को प्रज्वलित करने के लिए पर्याप्त नहीं होती, लेकिन हाइड्रोजन गैस के बुलबुले धातु की सतह पर चिपक जाते हैं जिससे कैल्शियम पानी में तैरने लगता है।
- अभिक्रियाशीलता का क्रम: सोडियम (Na) अत्यधिक अभिक्रियाशील है जो ठंडे पानी से बहुत तेज़ी से (विस्फोटक रूप से) क्रिया करता है। कैल्शियम (Ca) की अभिक्रियाशीलता सोडियम से कम लेकिन मैग्नीशियम (Mg) से अधिक होती है (मैग्नीशियम ठंडे पानी से नहीं बल्कि केवल गर्म/उबलते पानी या भाप से क्रिया करता है)।
- निर्मित उत्पाद: इस अभिक्रिया में कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)₂] और हाइड्रोजन गैस (H₂) का निर्माण होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 06 Mar, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B): कैल्शियम सोडियम की तरह विस्फोटक रूप से अभिक्रिया नहीं करता है; सोडियम की तुलना में इसकी तीव्रता कम होती है।
- विकल्प (C): इसमें उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन गैस और कैल्शियम ऑक्साइड बताया गया है, जबकि सही उत्पाद कैल्शियम हाइड्रोक्साइड और हाइड्रोजन गैस हैं।
- विकल्प (D): यह कथन गलत है क्योंकि कैल्शियम ठंडे जल के साथ अभिक्रिया कर सकता है (भाप के साथ केवल मैग्नीशियम या एल्युमिनियम जैसी कम सक्रिय धातुएँ करती हैं)।
#6. खालीलपैकी कोणत्या प्रक्रियेद्वारे बेकिंग सोड्यापासून वॉशिंग सोडा प्राप्त केला जातो?
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )
- वॉशिंग सोड्याची निर्मिती: बेकिंग सोडा (NaHCO3) ला उष्णता दिल्यावर सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) प्राप्त होतो. या मिळवलेल्या सोडियम कार्बोनेटचे पुन्हा पाण्यासोबत स्फटिकीकरण (Recrystallization) केल्यावर वॉशिंग सोडा म्हणजेच सोडियम कार्बोनेट डेकाहायड्रेट (Na2CO3 · 10H2O) मिळतो.
- रासायनिक प्रक्रिया:
1. 2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2
2. Na2CO3 + 10H2O → Na2CO3 · 10H2O
- परीक्षा संदर्भ: हा प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 03 Dec, 2025) मध्ये विचारण्यात आला होता.
- विकल्प (A) लिंबाच्या पाण्यात बेकिंग सोडा मिसळणे: यामुळे रासायनिक अभिक्रिया होऊन कार्बन डायऑक्साइड वायू बाहेर पडतो, पण वॉशिंग सोडा तयार होत नाही.
- विकल्प (B) सूर्यप्रकाशात बाष्पीभवन: या प्रक्रियेमुळे बेकिंग सोड्याचे वॉशिंग सोड्यामध्ये रूपांतर होत नाही.
- विकल्प (D) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल घालणे: बेकिंग सोड्यामध्ये ऍसिड मिसळल्यास मीठ (NaCl), पाणी आणि CO2 वायू तयार होतो.
#7. अमोनियम डाइक्रोमेट को गर्म करने पर क्या बनता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 2)
- अमोनियम डाइक्रोमेट का तापीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब अमोनियम डाइक्रोमेट [(NH4)2Cr2O7] को गर्म किया जाता है, तो यह अपघटित होकर क्रोमियम (III) ऑक्साइड (Cr2O3), नाइट्रोजन गैस (N2) और जल वाष्प (H2O) देता है। इस अभिक्रिया को अक्सर “ज्वालामुखी जैसा प्रभाव” (Volcano effect) भी कहा जाता है।
- रासायनिक समीकरण:
(NH4)2Cr2O7 (s) → Cr2O3 (s) + N2 (g) + 4H2O (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) क्रोमियम ऑक्साइड और जल: इसमें नाइट्रोजन गैस को छोड़ दिया गया है, जबकि यह इस अपघटन का एक मुख्य उत्पाद है।
- विकल्प (B) क्रोमियम और ऑक्सीजन: यह रासायनिक रूप से गलत है क्योंकि इसमें क्रोमियम का ऑक्साइड बनता है न कि शुद्ध क्रोमियम या मुक्त ऑक्सीजन।
- विकल्प (C) क्रोमियम ऑक्साइड और नाइट्रोजन: इसमें जल वाष्प (या ऑक्सीजन) को शामिल नहीं किया गया है, जो कि इस अभिक्रिया का हिस्सा है।
#8. निम्नलिखित में से कौन-सा, योग अभिक्रिया ( addition reaction) का एक उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026)
- योग अभिक्रिया (Addition Reaction): वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे एल्कीन या एल्काइन) हाइड्रोजन या अन्य अणुओं के साथ जुड़कर संतृप्त यौगिक बनाते हैं, योग अभिक्रिया कहलाती हैं।
- एथीन का हाइड्रोजनीकरण: निकेल (Ni) या पैलेडियम (Pd) उत्प्रेरक की उपस्थिति में एथीन (C2H4) हाइड्रोजन (H2) के साथ जुड़कर एथेन (C2H6) का निर्माण करती है, जो योग अभिक्रिया का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Feb, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एल्कोहॉल का निर्जलन: यह एक विलोपन (Elimination) अभिक्रिया है जिसमें एल्कोहॉल से जल का अणु निष्कासित होता है।
- विकल्प (B) ऐसीटिक अम्ल का जल अपघटन: यह जल अपघटन से जुड़ी प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) मेथेन का क्लोरीनीकरण: यह एक प्रतिस्थापन (Substitution) अभिक्रिया है जिसमें मेथेन के हाइड्रोजन परमाणु क्लोरीन द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं।
#9. जब सोडियम क्लोराइड और सिल्वर नाइट्रेट को एक द्विविस्थापन अभिक्रिया में मिलाया जाता है, तो क्या परिणाम होता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)
- द्विविस्थापन और अवक्षेपण अभिक्रिया: जब सोडियम क्लोराइड (NaCl) के जलीय विलयन को सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) के जलीय विलयन में मिलाया जाता है, तो आयनों का आदान-प्रदान होता है। इसके परिणामस्वरूप सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का एक अघुलनशील सफेद अवक्षेप (Precipitate) प्राप्त होता है।
- रासायनिक समीकरण:
NaCl (aq) + AgNO3 (aq) → AgCl (s)↓ + NaNO3 (aq)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) जल का निर्माण: इस रासायनिक अभिक्रिया में जल का निर्माण नहीं होता है, बल्कि लवण और अवक्षेप बनते हैं।
- विकल्प (C) गैस का निर्माण: इस अभिक्रिया में किसी भी प्रकार की गैस का उत्सर्जन नहीं होता है।
- विकल्प (D) लवण का निर्माण: हालांकि सोडियम नाइट्रेट (NaNO3) एक लवण बनता है, लेकिन इस अभिक्रिया की सबसे मुख्य और विशिष्ट विशेषता ‘सफेद अवक्षेप (AgCl) का बनना’ है, जिसे प्राथमिकता दी जाती है।
#10. जल विद्युत क्या परिवर्तित करता है
(RRB NTPC Tier I : 12 Apr 2016 Shift 2)
- जल विद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power): जल विद्युत संयंत्रों में बाँध से गिरते हुए पानी की ऊर्जा का उपयोग टरबाइन को घुमाने के लिए किया जाता है। टरबाइन का घूमना एक **यांत्रिक (Mechanical) ऊर्जा** है, जिसे जनरेटर (Generator) की मदद से **विद्युतीय (Electrical) ऊर्जा** में बदला जाता है।
- ऊर्जा रूपांतरण चरण: पहले पानी की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) में बदलती है, और टरबाइन के घूमने पर वह यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है (व्यापक रूप से इसे यांत्रिक से विद्युत ऊर्जा का रूपांतरण माना जाता है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 12 Apr, 2016 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) गतिज ऊर्जा से विद्युतीय ऊर्जा: यद्यपि गतिज ऊर्जा इसमें शामिल होती है, लेकिन टरबाइन के जरिए यह मुख्य रूप से यांत्रिक ऊर्जा में बदलकर फिर विद्युत ऊर्जा बनती है।
- विकल्प (C) रासायनिक ऊर्जा से विद्युतीय ऊर्जा: यह प्रक्रिया बैटरी या ईंधन सेल (Fuel Cell) में होती है, जल विद्युत में नहीं।
- विकल्प (D) वायु ऊर्जा से विद्युतीय ऊर्जा: यह पवन ऊर्जा (Wind Energy) से संबंधित है, जल विद्युत से नहीं।
a. हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है, जिसका उपयोग अम्ल-क्षारक अनुमापन के लिए किया जाता है।
b. फिनॉolph्थेलिन (Phenolphthalein), क्षारीय माध्यम में रंगहीन होता है तथा अम्लीय माध्यम में गुलाबी रंग उत्पन्न करता है।
c. लौंग के तेल को घ्राण ( olfactory) सूचक के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
#11. सूचक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? a. हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है, जिसका उपयोग अम्ल-क्षारक अनुमापन के लिए किया जाता है। b. फिनॉolph्थेलिन (Phenolphthalein), क्षारीय माध्यम में रंगहीन होता है तथा अम्लीय माध्यम में गुलाबी रंग उत्पन्न करता है। c. लौंग के तेल को घ्राण ( olfactory) सूचक के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- कथन (a) सत्य है: हल्दी एक प्राकृतिक सूचक (Natural Indicator) है। इसका उपयोग अम्ल-क्षारक अनुमापन (Acid-Base Titration/पहचान) के लिए किया जाता है क्योंकि यह क्षारीय माध्यम में लाल/भूरा रंग देती है।
- कथन (b) असत्य क्यों है?: फिनॉफ्थेलिन (Phenolphthalein) अम्लीय माध्यम में रंगहीन होता है और क्षारीय माध्यम में गुलाबी (Pink) रंग उत्पन्न करता है (यहाँ कथन में इसका उल्टा दिया गया है)।
- कथन (c) असत्य क्यों है?: लौंग का तेल एक घ्राण (Olfactory) सूचक है, लेकिन इस विशिष्ट परीक्षा प्रश्न और बोर्ड की आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार केवल कथन a को ही सही माना गया है। (नोट: घ्राण सूचक वे होते हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 15 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (केवल b): फिनॉफ्थेलिन के रंगों का क्रम कथन में विपरीत दिया गया है, इसलिए यह गलत है।
- विकल्प (a और c) एवं (b और c): चूँकि कथन b और c तथ्यात्मक रूप से अमान्य/गलत माने गए हैं, इसलिए वे संयोजन वाले विकल्प भी गलत हैं।
#12. ज़ीग्लर-नाटा उत्प्रेरक का उपयोग ____________ के लिए किया जाता है
।(RPF Constable 2024 02 Mar, 2025 Shift 2)
- ज़ीग्लर-नाटा उत्प्रेरक (Ziegler-Natta Catalyst): यह टाइटेनियम ट्राइक्लोराइड ($TiCl_3$) और ट्राइऐथिलएल्युमिनियम $[Al(C_2H_5)_3]$ का मिश्रण होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से एल्कीन (जैसे एथीन और प्रोपीन) के बहुलकीकरण (Polymerization) के लिए किया जाता है, जिससे उच्च घनत्व वाले पॉलीथीन (HDPE) का निर्माण होता है।
- महत्व: इस उत्प्रेरक की खोज के लिए कार्ल ज़ीग्लर और जूलियो नाटा को 1963 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला था।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 02 Mar, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) अपचयन अभिक्रिया: अपचयन के लिए आमतौर पर निकल, पैलेडियम या प्लेटिनम जैसे उत्प्रेरकों का उपयोग किया जाता है।
- विकल्प (B) निष्कर्षान (निष्कर्षण) अभिक्रिया: यह धातुओं के शोधन या अयस्क से जुड़ी प्रक्रिया है, बहुलकीकरण से नहीं।
- विकल्प (C) प्रतिस्थापन अभिक्रिया: प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में उत्प्रेरक के रूप में अलग अभिकर्मकों का उपयोग होता है (जैसे सूर्य का प्रकाश या लुईस अम्ल)।
#13. प्लास्टर ऑफ़ पेरिस के समायोजन के दौरान-
(RRB JE 27 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- प्लास्टर ऑफ पेरिस का समायोजन (Setting of Plaster of Paris): जब प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO4·½H2O) में पानी मिलाया जाता है, तो यह हाइड्रेशन (जलयोजन) प्रक्रिया के माध्यम से जिप्सम (CaSO4·2H2O) में बदल जाता है और कठोर हो जाता है।
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, जिसके कारण इस प्रक्रिया के दौरान ऊष्मा मुक्त होती है।
- आयतन/द्रव्यमान में विस्तार: जिप्सम के क्रिस्टल बनने के दौरान इसके आयतन/संरचना में हल्का सा विस्तार (Expansion) होता है, जिससे यह साँचे को पूरी तरह भर लेता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 27 May, 2019 Shift 1 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल द्रव्यमान का विस्तार: इसमें ऊष्मा मुक्ति को शामिल नहीं किया गया है, जबकि यह एक मुख्य विशेषता है।
- विकल्प (C) केवल ऊष्मा मुक्त होती है: इसमें विस्तार (Expansion) वाले पहलू को छोड़ दिया गया है।
- विकल्प (D) दहन होता है: दहन एक अलग ऑक्सीकरण प्रक्रिया है, जबकि यह एक जलयोजन (Hydration) प्रतिक्रिया है।
#14. संयोजन अभिक्रिया को किस प्रकार दर्शाया जा सकता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 2)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (Reactants) मिलकर केवल एक एकल उत्पाद (Single Product) का निर्माण करते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है। इसे सामान्य रूप से $A + B \rightarrow C$ या $AB + C \rightarrow ABC$ (दो अभिकारकों के जुड़कर एक उत्पाद बनने के रूप में) दर्शाया जाता है।
- उदाहरण: कोयले का दहन ($C + O_2 \rightarrow CO_2$) या जल का निर्माण ($2H_2 + O_2 \rightarrow 2H_2O$) इसके क्लासिक उदाहरण हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) ABC → AB + C: यह वियोजन या अपघटन (Decomposition) अभिक्रिया को दर्शाता है, जिसमें एक यौगिक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (C) AB + CD → AD + CD: यह द्विविस्थापन (Double Displacement) अभिक्रिया का रूप है।
- विकल्प (D) AB + C → CB + A: यह एकल विस्थापन (Single Displacement) अभिक्रिया का उदाहरण है।
#15. निकल धातु के शोधन के लिए निम्नलिखित में से कौन सी विधि का उपयोग किया जाता है?
(RPF Constable 2018 18 Feb 2019)
- मॉंडे विधि (Mond Process): यह निकल धातु के शोधन (Refining) की एक प्रसिद्ध वाष्प प्रावस्था शोधन (Vapour phase refining) विधि है। इस प्रक्रिया में अशुद्ध निकल को कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के साथ गर्म करके वाष्शील निकल टेट्राकार्बोनिड बनाया जाता है, जिसे बाद में उच्च तापमान पर विघटित करके अत्यधिक शुद्ध निकल प्राप्त किया जाता है।
- अन्य शोधन विधियाँ: अतिशुद्ध धातुओं के लिए वॉन अर्केल विधि और ज़ोन परिष्करण (Zone refining) जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 18 Feb, 2019) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) मतदान: यह धातुओं के शोधन से संबंधित कोई वैज्ञानिक या रासायनिक विधि नहीं है।
- विकल्प (B) पृथक्करण: यह एक सामान्य भौतिक प्रक्रिया है, विशिष्ट निकल शोधन प्रक्रिया ‘मॉंडे विधि’ कहलाती है।
- विकल्प (C) हैंबर विधि: यह अमोनिया ($NH_3$) के औद्योगिकी उत्पादन की एक विधि है, न कि धातु शोधन की।
#16. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन अपचयन के बारे में सही है/हैं? a) ऑक्सीजन का क्षय b) हाइड्रोजन का लाभ c) ऑक्सीजन का लाभ d) हाइड्रोजन का क्षय
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 3)
- अपचयन (Reduction): वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का ह्रास/क्षय (Loss of oxygen) होता है अथवा उसमें हाइड्रोजन का योग/लाभ (Gain of hydrogen) होता है, अपचयन कहलाती है। (इसके अलावा इलेक्ट्रॉनों का लाभ भी अपचयन कहलाता है)।
- ऑक्सीकरण (Oxidation): इसके विपरीत, ऑक्सीजन का लाभ होना या हाइड्रोजन का क्षय होना ऑक्सीकरण कहलाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (केवल a और d): इसमें हाइड्रोजन का क्षय दिया गया है, जो कि ऑक्सीकरण की विशेषता है न कि अपचयन की।
- विकल्प (केवल b और c): इसमें ऑक्सीजन का लाभ (c) दिया गया है, जो ऑक्सीकरण से संबंधित है।
- विकल्प (केवल d): यह अधूरा और गलत संयोजन है।
( A) और एक कारण ( R) दिया गयां हैं। अभिकथन (A): बिजली के तार आम तौर पर तांबे से बने होते हैं। कारण (R): तांबा एक सुचालक है। सही विकल्प का चयन कीजिए। A. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
B. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
C. A सही है, लेकिन R गलत है।
D. A गलत है, लेकिन R सही है।
#17. नीचे एक अभिकथन
(RRB NTPC Tier I : 19 Apr 2016 Shift 2)
- अभिकथन (A) और कारण (R) का विश्लेषण: बिजली के तार तांबे (Copper) से बनाए जाते हैं क्योंकि तांबा विद्युत का एक बहुत अच्छा सुचालक (Good Conductor) होता है और इसका प्रतिरोध (Resistance) कम होता है। इसलिए कारण (R) पूरी तरह से अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 19 Apr, 2016 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प B, C और D: चूँकि तांबे का सुचालक होना ही इस बात का मुख्य कारण है कि उसके तार बनाए जाते हैं, इसलिए R, A की सही व्याख्या है। अतः अन्य सभी विकल्प अमान्य हैं।
#18. MnO 2 + 4HCl → MnCl 2 + 2H 2 O + Cl 2 ______ का एक उदाहरण है
(RRB JE 26 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण (Oxidation) और अपचयन (Reduction) दोनों एक साथ (एक ही समय पर) होते हैं, उसे रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
- इस अभिक्रिया में विश्लेषण:
• MnO2 का MnCl2 में अपचयन (Reduction) होता है क्योंकि इसमें से ऑक्सीजन का ह्रास होता है।
• HCl का Cl2 में ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है क्योंकि इसमें से हाइड्रोजन का ह्रास होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 26 May, 2019 Shift 1 CBT 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) दहन अभिक्रिया: इसमें मुख्य रूप से किसी पदार्थ का ऑक्सीजन के साथ जलकर ऊष्मा व प्रकाश देना शामिल होता है।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं, जबकि यहाँ एक से अधिक उत्पाद बन रहे हैं।
- विकल्प (C) अवक्षेपण अभिक्रिया: इस अभिक्रिया में कोई अघुलनशील ठोस अवक्षेप का निर्माण नहीं होता है।
#19. कोयले का जलना किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- कोयले का जलना (Burning of Coal): जब कोयला (कार्बन, C) ऑक्सीजन (O2) की उपस्थिति में जलता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस का निर्माण होता है। चूँकि इसमें दो अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं, इसलिए यह संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) का एक प्रमुख उदाहरण है।
- रासायनिक समीकरण: C (s) + O2 (g) → CO2 (g) (+ ऊष्मा)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) द्विविस्थापन अभिक्रिया: इसमें आयनों का आदान-प्रदान होता है, जो यहाँ लागू नहीं होता।
- विकल्प (C) अपघटन अभिक्रिया: इसमें एक पदार्थ टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है, जबकि यहाँ दो अभिकारक जुड़ रहे हैं।
- विकल्प (D) अपचयन अभिक्रिया: इसमें हाइड्रोजन का लाभ या ऑक्सीजन का ह्रास होता है (यह मुख्य रूप से संयोजन अभिक्रिया है)।
#20. यदि ऐलुमिनियम का एक टुकड़ा आयरन (II) सल्फेट ( FeSO 4 ) के विलयन में मिला दिया जाए, तो क्या होगा?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) में एल्युमिनियम (Al), आयरन (Fe) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील धातु है। इसलिए, जब एल्युमिनियम के टुकड़े को आयरन (II) सल्फेट (FeSO4) के विलयन में डाला जाता है, तो एल्युमिनियम आयरन को उसके विलयन से विस्थापित कर देता है और एल्युमिनियम सल्फेट बनाता है।
- लोहे का निक्षेपण: इस प्रक्रिया के दौरान विलयन से लोहा (Fe) मुक्त होकर ठोस रूप में अलग (निक्षेपित/डिपाजिट) हो जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) नीला विलयन बन जाएगा: नीला विलयन कॉपर सल्फेट की उपस्थिति में बनता है, न कि आयरन सल्फेट में।
- विकल्प (B) कोई अभिक्रिया नहीं होगी: यह गलत है क्योंकि एल्युमिनियम आयरन से अधिक सक्रिय है, इसलिए अभिक्रिया अवश्य होगी।
- विकल्प (C) एल्युमिनियम निक्षेपत हो जाएगा: एल्युमिनियम अधिक सक्रिय होने के कारण विलयन में घुल जाएगा (आयनों के रूप में), न कि निक्षेपित होगा।
#21. साम्यावस्था CH 3 COOH ⇌ CH 3 COO – + H + में H + आयनों के योग से क्या होगा?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 17 Jun, 2025 Shift 3)
- ला शातेलिए का नियम (Le Chatelier’s Principle): इस नियम के अनुसार, यदि किसी साम्यावस्था वाले निकाय पर कोई प्रभाव (जैसे सांद्रता, ताप या दाब में परिवर्तन) डाला जाए, तो निकाय उस प्रभाव को कम करने या निरस्त करने की दिशा में विस्थापित हो जाता है।
- H+ आयनों का योग: दी गई अभिक्रिया (CH3COOH ⇌ CH3COO– + H+) में जब उत्पाद पक्ष में H+ आयनों की सांद्रता बढ़ाई जाती है, तो साम्यावस्था अतिरिक्त H+ आयनों की खपत करने के लिए पीछे की ओर यानी बाईं (Left) ओर विस्थापित हो जाती है, जिससे अधिक मात्रा में CH3COOH बनता है (सम आयन प्रभाव / Common Ion Effect)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 17 Jun, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) दाईं ओर विस्थापित होगी: उत्पाद (H+) बढ़ाने पर साम्यावस्था दाईं ओर नहीं, बल्कि उसे कम करने के लिए बाईं ओर जाती है।
- विकल्प (C) अभिक्रिया रुक जाएगी: साम्यावस्था एक गतिशीलता (Dynamic) प्रक्रिया है, यह रुकती नहीं है बल्कि अपनी दिशा बदलती है।
- विकल्प (D) कोई परिवर्तन नहीं होगा: ला शातेलिए के नियम के अनुसार सांद्रता बदलने पर साम्यावस्था में परिवर्तन (विस्थापन) अवश्य होता है।
#22. रासायनिक अभिक्रिया की दर को मंद करने वाले पदार्थ को किस नाम से जाना जाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 18 Aug, 2025 Shift 2)
- संदमक या ऋणात्मक उत्प्रेरक (Inhibitor / Negative Catalyst): वे रासायनिक पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया की गति को धीमा (मंद) कर देते हैं, उन्हें संदमक या निरोधक कहा जाता है।
- अन्य महत्वपूर्ण शब्दावली: उत्प्रेरक (Catalyst) आमतौर पर अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं, अभिकारक (Reactants) वे पदार्थ हैं जो भाग लेते हैं, और उत्पाद (Products) अभिक्रिया के बाद बनने वाले नए पदार्थ हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 18 Aug, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) उत्प्रेरक: यह सामान्यतः अभिक्रिया की दर को बढ़ाने के लिए जाना जाता है।
- विकल्प (B) अभिकारक: ये वे प्रारंभिक पदार्थ हैं जिन पर अभिक्रिया होती है।
- विकल्प (C) उत्पाद: यह अभिक्रिया के फलस्वरूप बनने वाला अंतिम परिणाम है।
#23. वह अभिक्रिया जिसमें दो आयनिक यौगिकों के धनात्मक और ऋणात्मक आयन आपस में स्थान बदलकर दो नए यौगिक बनाते हैं, किसका उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 06/02/2026 )
- दोहरी विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो अलग-अलग यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है तथा नए यौगिकों का निर्माण होता है, उसे द्विविस्थापन या दोहरी विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- विशेषता: इस प्रकार की अभिक्रियाओं में अक्सर किसी अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) का निर्माण होता है, इसलिए इन्हें अवक्षेपण अभिक्रिया भी कहा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 06 Feb, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) विस्थापन अभिक्रिया: इसमें एक अधिक सक्रिय तत्व किसी यौगिक से कम सक्रिय तत्व को विस्थापित करता है (केवल एक बार विस्थापन)।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (D) अपघटन अभिक्रिया: इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद प्रदान करता है।
#24. चांदी के आभूषण कुछ समय के बाद काले हो जाते हैं क्योंकि:
(RRB NTPC CBT-I : 22 Jan 2021 Shift 2)
- चांदी का काला पड़ना (Tarnishing of Silver): जब चांदी (Ag) के आभूषण खुले में हवा के संपर्क में आते हैं, तो वायुमंडल में मौजूद सल्फर यौगिकों (जैसे हाइड्रोजन सल्फाइड गैस) के साथ अभिक्रिया करके चांदी की सतह पर सिल्वर सल्फाइड (Ag₂S) की एक काली परत बना लेते हैं, जिससे आभूषण काले दिखाई देने लगते हैं।
- रासायनिक संक्षारण (Corrosion): यह धातुओं के संक्षारण (Corrosion) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो तांबे पर हरी परत और लोहे पर जंग लगने की तरह ही होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 22 Jan, 2021 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) सिल्वर कार्बाइड: हवा में कार्बन के साथ चांदी की ऐसी कोई सामान्य प्रतिक्रिया नहीं होती जिससे यह बने।
- विकल्प (C) सिल्वर नाइट्राइड: नाइट्रोजन के साथ चांदी की प्रतिक्रिया से यह आभूषण काले नहीं पड़ते।
- विकल्प (D) सिल्वर हाइड्राइड: हाइड्रोजन के साथ प्रतिक्रिया कर चांदी हाइड्राइड नहीं बनाती है।
a. जल में, हाइड्रोजन के द्रव्यमान और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा 1 : 8 होता है।
b. कार्बन डाइऑक्साइड में कार्बन और ऑक्सीजन का अनुपात हमेशा द्रव्यमान के अनुसार 3 : 8 होता है।
c. अमोनिया में, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन हमेशा द्रव्यमान के अनुसार 14 : 1 के अनुपात में विद्यमान होते हैं।
#25. निम्नलिखित में से कौन-सा, स्थिर अनुपात के नियम के अनुसार है? a. जल में, हाइड्रोजन के द्रव्यमान और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा 1 : 8 होता है। b. कार्बन डाइऑक्साइड में कार्बन और ऑक्सीजन का अनुपात हमेशा द्रव्यमान के अनुसार 3 : 8 होता है। c. अमोनिया में, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन हमेशा द्रव्यमान के अनुसार 14 : 1 के अनुपात में विद्यमान होते हैं।
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions): इस नियम का प्रतिपादन जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने किया था। इसके अनुसार, किसी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में संयोजित होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो।
- कथन (a) का विश्लेषण: जल (H2O) में हाइड्रोजन (2u) और ऑक्सीजन (16u) के द्रव्यमान का अनुपात = 2 : 16 यानी 1 : 8 होता है, जो कि बिल्कुल सही है।
- कथन (b) का विश्लेषण: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) में कार्बन (12u) और ऑक्सीजन (2 × 16 = 32u) के द्रव्यमान का अनुपात = 12 : 32 यानी 3 : 8 होता है, जो कि सही है।
- कथन (c) का विश्लेषण: अमोनिया (NH3) में नाइट्रोजन (14u) और हाइड्रोजन (3 × 1 = 3u) का अनुपात 14 : 3 होता है; किंतु इस प्रश्न और आधिकारिक बोर्ड उत्तर कुंजी के अनुसार इन तीनों कथनों को स्थिर अनुपात के नियम के अंतर्गत सत्य माना गया है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 01 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (केवल a, केवल a और b, केवल b और c): चूँकि तीनों कथन रासायनिक यौगिकों में स्थिर द्रव्यमान अनुपात के नियम की पुष्टि करते हैं, इसलिए केवल कुछ चुनिंदा विकल्पों वाले उत्तर गलत हो जाते हैं।
#26. फ्रीऑन के औद्योगिक उपयोग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 13 Jun, 2025 Shift 1)
- फ्रीऑन (Freon): यह क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) का एक व्यापारिक नाम है। इनका उपयोग बड़े पैमाने पर प्रशीतन (Refrigeration) और एयर कंडीशनिंग सिस्टम में शीतलक (Coolant) के रूप में तथा एरोज़ोल स्प्रे (Aerosol propellants) के उत्पादन में किया जाता था।
- पर्यावरणीय प्रभाव: फ्रीons ओजोन परत के क्षरण (Ozone layer depletion) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं, जिसके कारण मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत इनके उपयोग को काफी हद तक प्रतिबंधित किया गया है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 13 Jun, 2025 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) खाद्य प्रसंस्करण और परिक्षक: इनका उपयोग खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने या परिक्षक के रूप में नहीं किया जाता है।
- विकल्प (C) कीटनाशक: फ्रीऑन कीटनाशकों के निर्माण में इस्तेमाल नहीं होते।
- विकल्प (D) कपड़ा रंगाई: कपड़ा रंगाई के लिए अलग रसायनों और रंगों का उपयोग किया जाता है, न कि फ्रीऑन का।
#27. जब एस्टर की अभिक्रिया सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ कराई जाती है, तो कार्बोक्जिलिक अम्ल का सोडियम लवण और ऐल्कोहॉल बनता है। इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
- साबुनीकरण (Saponification): जब किसी एस्टर (विशेषकर वसा या तेल, जो उच्च वसीय अम्लों के एस्टर होते हैं) की अभिक्रिया सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) या पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) जैसे क्षਾਰ के साथ कराई जाती है, तो कार्बोक्जिलिक अम्ल का सोडियम लवण (यानी साबुन) और ऐल्कोहॉल (ग्लिसरॉल) का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं।
- रासायनिक महत्व: इस अभिक्रिया का उपयोग मुख्य रूप से व्यावसायिक स्तर पर साबुन बनाने के लिए किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एस्ट्रीकरण (Esterification): यह अम्ल और ऐल्कोहॉल की परस्पर अभिक्रिया से एस्टर और जल बनाने की प्रक्रिया है, जो साबुनीकरण के विपरीत होती है।
- विकल्प (B) हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation): यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन जोड़ने की प्रक्रिया है (जैसे तेल से डालडा/वनस्पति घी बनाना)।
- विकल्प (D) अम्लन (Acidification): यह किसी विलयन में अम्ल मिलाने या अम्लीय माध्यम तैयार करने की प्रक्रिया है।
(i) अवतल दर्पण सदैव वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे बिंब की स्थिति कुछ भी हो।
(ii) जब बिंब को अवतल दर्पण के फोकस और वक्रता केंद्र के बीच रखा जाता है, तो दर्पण वास्तविक, उल्टा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
(iii) जब बिंब को अनंत पर रखा जाता है, तो अवतल दर्पण अपने फोकस पर वास्तविक, उल्टा और बिंदु साइज प्रतिबिंब बनाता है।
#28. अवतल दर्पण द्वारा निर्मित प्रतिबिंब के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
- कथन (i) असत्य क्यों है?: अवतल दर्पण हमेशा वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब नहीं बनाता। जब बिंब (वस्तु) को दर्पण के ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो यह आभासी (Virtual) और सीधा (Erect) प्रतिबिंब बनाता है।
- कथन (ii) असत्य क्यों है?: जब बिंब को फोकस (F) और वक्रता केंद्र (C) के बीच रखा जाता है, तो प्रतिबिंब वक्रता केंद्र से परे बनता है और यह वास्तविक, उल्टा तथा बड़ा (Magnified/Enlarged) होता है, न कि छोटा।
- कथन (iii) सत्य है: जब बिंब को अनंत (Infinity) पर रखा जाता है, तो अवतल दर्पण द्वारा उसका वास्तविक, उल्टा और अत्यधिक छोटा (बिंदु के आकार का / Point-sized) प्रतिबिंब इसके फोकस (F) पर बनता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08 Jan, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प ((ii) और (iii) दोनों) एवं ((i) और (ii) दोनों): चूँकि कथन (i) और (ii) दोनों गलत हैं, इसलिए वे संयोजन वाले विकल्प भी अमान्य हैं।
- विकल्प (केवल (i)): कथन (i) गलत है क्योंकि अवतल दर्पण आभासी प्रतिबिंब भी बना सकता है।
#29. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया एथेनोइक अम्ल की अम्लीय प्रकृति को प्रदर्शित करती है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
- अम्लीय प्रकृति का प्रदर्शन: एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल, CH3COOH) एक दुर्बल अम्ल है। अम्ल की यह सामान्य विशेषता होती है कि वे सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम, जिंक आदि) के साथ अभिक्रिया करके लवण बनाते हैं और हाइड्रोजन गैस (H2) का विस्थापन करते हैं।
- रासायनिक समीकरण:
2CH3COOH + 2Na → 2CH3COONa (सोडियम एथेनोएट) + H2 (गैस)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 11 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) एथेनोइक अम्ल + एथेनॉल → एस्टर + जल: यह एस्ट्रीकरण (Esterification) अभिक्रिया है, जो अम्ल और ऐल्कोहॉल के बीच होती है, न कि अम्लीय प्रकृति को प्रदर्शित करने वाली धातु अभिक्रिया।
- विकल्प (C) एथेनोइक अम्ल + मेथेनॉल: यह रासायनिक रूप से एक अमान्य और गलत संयोजन है।
- विकल्प (D) एथेनोइक अम्ल + सोडियम हाइड्रोक्साइड: यद्यपि यह उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया है जो अम्ल के गुण को दर्शाती है, किंतु बोर्ड द्वारा इस विशिष्ट बहुविकल्पीय प्रश्न में सक्रिय धातु के साथ हाइड्रोजन गैस का निकलना ही अम्लीय प्रकृति का मुख्य प्रमाण माना गया है।
#30. वाशिंग सोडे के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB JE 19/02/2026 )
- वाशिंग सोडा (धोवन सोडा): इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट है और इसका अणुसूत्र Na2CO3·10H2O होता है। यह एक महत्वपूर्ण यौगिक है जिसका उपयोग कांच, साबुन और कागज उद्योग में तथा घरों में साफ-सफाई के लिए किया जाता है।
- कठोरता निवारण: यह जल की स्थायी कठोरता (Permanent hardness) को दूर करने में बहुत प्रभावी होता है। यह क्षारीय प्रकृति का होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 19 Feb, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B): सोडियम बाइकार्बोनेट को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है, लेकिन वाशिंग सोडा सीधे इस तरह नहीं बनता (इसके लिए क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया होती है)।
- विकल्प (C): यह कथन गलत है क्योंकि वाशिंग सोडा जल की स्थायी कठोरता को दूर करता है।
- विकल्प (D): वाशिंग सोडा अम्लीय नहीं, बल्कि एक क्षारीय (Basic) लवण होता है।
#31. द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहता है:
(RPF Constable 2024 : 12 Mar, 2025 Shift 2)
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम का प्रतिपादन एंटोनी लव्वाजियेश (Antoine Lavoisier) ने 1789 में किया था। इसके अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान (Matter/Mass) का न तो सृजन किया जा सकता है और न ही विनाश। यानी, रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों (Reactants) का कुल द्रव्यमान, उत्पादों (Products) के कुल द्रव्यमान के हमेशा बराबर होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 12 Mar, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प 1 (गैस का आयतन और दाब): यह बॉयल के नियम (Boyle’s Law) को परिभाषित करता है, द्रव्यमान संरक्षण के नियम को नहीं।
- विकल्प 2 (ऊर्जा संरक्षित रहती है): यह ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) का कथन है।
- विकल्प 4 (अभिकारकों का द्रव्यमान उत्पादों के बराबर नहीं होता): यह नियम के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान हमेशा संरक्षित रहता है (बराबर होता है)।
#32. अम्लीय माध्यम में, MnO 4 – + Fe 2+ → Mn 2+ + Fe 3+ के लिए संतुलित अपचोपचय अभिक्रिया है:
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 11 Jun, 2025 Shift 2)
- संतुलित रेडॉक्स अभिक्रिया (Balanced Redox Reaction): अम्लीय माध्यम में परमैंगनेट आयन (MnO4–) फेरस आयन (Fe2+) को फेरिक आयन (Fe3+) में ऑक्सीकृत करता है और स्वयं मैंगनीज आयन (Mn2+) में अपचयित हो जाता है।
- संतुलन प्रक्रिया: आवेश और द्रव्यमान संरक्षण के नियमों के अनुसार दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं को संतुलित करने पर सही समीकरण प्राप्त होता है:
MnO4– + 5Fe2+ + 8H+ → Mn2+ + 5Fe3+ + 4H2O
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 11 Jun, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- अन्य विकल्प: इन विकल्पों में गुणांक (Coefficients) सही ढंग से संतुलित नहीं किए गए हैं, जिसके कारण परमाणु और कुल आवेश (Charge) दोनों पक्षों में समान नहीं रहते हैं।
#33. सोडियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण किस प्रकार किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
- क्लोरो-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali Process): सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) का निर्माण सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (जिसे ब्राइन या लवण-जल / Brine कहा जाता है) से विद्युत धारा प्रवाहित करके किया जाता है। इस प्रक्रिया में विद्युत अपघटन (Electrolysis) के कारण सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनता है, साथ ही ऐनोड पर क्लोरीन गैस और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।
- रासायनिक समीकरण:
2NaCl (aq) + 2H2O (l) → 2NaOH (aq) + Cl2 (g) + H2 (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Jan, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) एथेनॉल में सोडियम का विघटन: इससे सोडियम एथॉक्साइड बनता है, सोडियम हाइड्रॉक्साइड नहीं।
- विकल्प (C) क्लोरीन को जल के माध्यम से प्रवाहित करना: इससे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और हाइपोक्लोरस अम्ल का निर्माण होता है।
- विकल्प (D) सोडियम की कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया: यह सोडियम कार्बोनेट या अन्य यौगिक बना सकती है, न कि सोडियम हाइड्रॉक्साइड।
#34. अम्ल-क्षारक अभिक्रिया किस प्रकार की अभिक्रिया है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब किसी अम्ल (Acid) और क्षारक (Base) के बीच अभिक्रिया होती है, तो वे एक-दूसरे کے प्रभाव को समाप्त कर लवण (Salt) और जल (Water) का निर्माण करते हैं।
- ऊष्मा का उत्सर्जन: यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) है क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान रासायनिक ऊर्जा के रूपांतरण के फलस्वरूप प्रचुर मात्रा में ऊष्मा बाहर निकलती है, जिससे विलयन का तापमान बढ़ जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 15 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) ऊष्माशोषी अभिक्रिया: इसमें ऊष्मा का अवशोषण होता है, जबकि अम्ल-क्षारक अभिक्रिया में ऊष्मा मुक्त होती है।
- विकल्प (B) वियोजन अभिक्रिया: इसमें कोई यौगिक टूटकर सरल पदार्थों में विभाजित होता है।
- विकल्प (D) रेडॉक्स अभिक्रिया: यह ऑक्सीकरण और अपचयन से जुड़ी होती है, जो प्रत्येक उदासीनीकरण अभिक्रिया का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।
#35. बेरियम क्लोराइड की सोडियम सल्फेट के साथ अभिक्रिया से क्या बनता है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): जब बेरियम क्लोराइड (BaCl2) के जलीय विलयन को सोडियम सल्फेट (Na2SO4) के जलीय विलयन में मिलाया जाता है, तो दोनों के बीच दोहरी विस्थापन अभिक्रिया होती है।
- उत्पाद: इस अभिक्रिया के फलस्वरूप बेरियम सल्फेट (BaSO4) का एक अघुलनशील सफेद अवक्षेप (White precipitate) प्राप्त होता है, साथ ही सोडियम क्लोराइड (NaCl) बनता है।
- रासायनिक समीकरण: BaCl2 (aq) + Na2SO4 (aq) → BaSO4 (s) ↓ + 2NaCl (aq)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- भूरा, पीला या काला अवक्षेप: बेरियम सल्फेट (BaSO4) का अवक्षेप हमेशा सफेद रंग का होता है; इसलिए अन्य रंगों (भूरा, पीला, काला) वाले विकल्प अमान्य हैं।
#36. किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 3)
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो अलग-अलग यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है और नए यौगिकों का निर्माण होता है, उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- मुख्य विशेषता: इस प्रकार की अभिक्रियाओं में अक्सर एक अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) प्राप्त होता है, इसीलिए इन्हें अवक्षेपण अभिक्रिया भी कहा जाता है (जैसे बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट की अभिक्रिया)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-I : 29 Nov, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प अपघटन अभिक्रिया: इसमें एक एकल अभिकारक ऊर्जा पाकर दो या अधिक उत्पादों में वियोजित (टूट) जाता है।
- विकल्प विस्थापन अभिक्रिया: इसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक से कम क्रियाशील तत्व को विस्थापित करता है (केवल एक बार विस्थापन होता है)।
- विकल्प संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक नया उत्पाद बनाते हैं।
#37. जब कोई अम्ल किसी धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करता है, तो किन उत्पादों का निर्माण होता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )
- अम्ल और धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट की अभिक्रिया: जब कोई अम्ल किसी धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट (बाइकार्बोनेट) के साथ अभिक्रिया करता है, तो हमेशा संगत लवण (Salt), जल (Water) और कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide) गैस का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण (उदाहरण):
HCl (अम्ल) + NaHCO3 (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) → NaCl (लवण) + H2O (जल) + CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड गैस)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 08 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (लवण + ऑक्सीजन + कार्बन): इसमें कार्बन और ऑक्सीजन अलग-अलग न मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के रूप में निकलते हैं।
- विकल्प (लवण + हाइड्रोजन गैस): हाइड्रोजन गैस केवल सक्रिय धातुओं और अम्लों की अभिक्रिया से मुक्त होती है, धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट से नहीं।
- विकल्प (क्षार + हाइड्रोजन गैस): यह रासायनिक रूप से गलत संयोजन है क्योंकि अम्ल कभी क्षार का निर्माण नहीं करते।
a. फ्लोएम मिट्टी से खनिज और जल के अवशोषण में मदद करता है।
b. रोम जल और खनिज अवशोषण के लिए जड़ के सतही क्षेत्र को बढ़ाते हैं।
c. पौधों में विशेष संवेहन ऊतक मिट्टी से जल और पोषक तत्वों का परिवहन करते हैं।
d. जड़ें और पत्तियाँ जाइलम नलिकाओं के एक सतत तंत्र द्वारा जुड़ी होती हैं।
#38. पौधों में परिवहन से संबंधित गलत कथन की पहचान करें।
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)
- कथन (a) गलत क्यों है?: फ्लोएम (Phloem) मिट्टी से खनिज और जल का अवशोषण नहीं करता है, बल्कि यह पौधों की पत्तियों द्वारा तैयार भोजन (शर्करा और पोषक तत्वों) को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाने का कार्य करता है। जल और खनिजों का परिवहन जाइलम (Xylem) द्वारा होता है।
- कथन (b), (c) और (d) सत्य क्यों हैं?:
• मूलरोम (Root hairs) जल और खनिजों के अवशोषण के लिए जड़ के सतही क्षेत्रफल को बढ़ाते हैं।
• जाइलम जैसे विशेष संवहन ऊतक मिट्टी से जल और खनिजों का परिवहन करते हैं।
• जड़ें और पत्तियाँ जाइलम नलिकाओं के एक सतत तंत्र के माध्यम से आपस में जुड़ी होती हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A), (B) और (D): इन विकल्पों में दिए गए कथन (b, c, और d) वैज्ञानिक रूप से बिल्कुल सही हैं, इसलिए वे गलत कथनों की श्रेणी में नहीं आते।
#39. colloids को स्थिर क्यों माना जाता है?
(RRB ALP CBT 1 17/02/2026 )
- कोलाइड (Colloid) की स्थिरता: कोलाइड एक विषमांगी मिश्रण होता है, जिसके कणों का आकार वास्तविक विलयन से बड़ा लेकिन निलंबन (Suspension) से छोटा होता है। कोलाइड के कण परिक्षेपण माध्यम में लगातार गति (ब्राउनियन गति) करते रहते हैं और आपस में आवेश के कारण प्रतिकर्षित होते हैं।
- स्थिरता का कारण: जब कोलाइड विलयन को कुछ समय के लिए शांत (अविक्षुब्ध / Undisturbed) छोड़ दिया जाता है, तो इसके कण नीचे तली में नहीं बैठते हैं (यानी अवक्षेपित नहीं होते हैं), जिसके कारण कोलाइड को स्थिर माना जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 17 Feb, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): कोलाइड के कण परिक्षेपण माध्यम में पूरी तरह विलीन (Dissolve) नहीं होते, बल्कि वे परीक्षित प्रावस्था के रूप में तैरते रहते हैं।
- विकल्प (B): कोलाइड के कणों को सामान्य निस्पंदन (Filtration) विधि द्वारा अलग नहीं किया जा सकता (इसके लिए अपकेंद्रण यानी Centrifugation की आवश्यकता होती है)।
- विकल्प (D): कोलाइड के कण परिक्षेपण माध्यम के साथ स्थायी रासायनिक अभिक्रिया नहीं करते हैं।
#40. नियत अनुपात का नियम कहता है:
(RPF Constable 2024 04 Mar, 2025 Shift 3)
- नियत अनुपात का नियम (Law of Constant / Definite Proportions): इस नियम का प्रतिपादन फ्रांसीसी रसायनज्ञ जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने किया था। इसके अनुसार, किसी भी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित और स्थिर अनुपात में आपस में संयोजित होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो (जैसे शुद्ध जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात हमेशा 1 : 8 होता है)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RPF Constable : 04 Mar, 2025 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प 1 (अभिकारकों का कुल द्रव्यमान उत्पादों के बराबर): यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) को परिभाषित करता है।
- विकल्प 2 (ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है…): यह ऊर्जा संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Energy) से संबंधित है।
- विकल्प 3 (नियत आयतन पर गैस का दाब तापमान के समानुपाती): यह भौतिकी में गे-लुसैक के नियम (Gay-Lussac’s Law) या दाब के नियम को दर्शाता है।
#41. सूर्य से पराबैंगनी ( UV) विकिरण से पृथ्वी की सतह को ओजोन परत डालती है और निम्नलिखित में से किस संश्लेषित रसायन के कारण वायुमंडल में ओजोन की मात्रा तेजी से कम होने लगती है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 1)
- ओजोन परत का क्षरण (Ozone Layer Depletion): समताप मंडल (Stratosphere) में मौजूद ओजोन (O3) परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरणों को पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रोकती है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), जिसे आमतौर पर ‘फ्रीऑन’ भी कहा जाता है, एक संश्लेषित रसायन है जो रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और एरोज़ोल स्प्रे में प्रयुक्त होता है। वायुमंडल में पहुँचकर यह क्लोरीन मुक्त मूलक (Chlorine free radicals) उत्पन्न करता है, जो ओजोन के अणुओं को तेज़ी से नष्ट करते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) कीटनाशक: ये कृषि में कीटों को नियंत्रित करने के काम आते हैं, ओजोन क्षरण में इनकी मुख्य भूमिका नहीं होती।
- विकल्प (B) जंतुनाशक: यह ओजोन परत के ह्रास का कारण नहीं है।
- विकल्प (C) कार्बन मोनोऑक्साइड: यह एक विषैली गैस है जो वाहनों के धुएँ और अधूरे दहन से निकलती है, जो मुख्य रूप से रक्त की ऑक्सीजन वहन क्षमता को प्रभावित करती है, न कि ओजोन परत को तेजी से कम करने के लिए जानी जाती है।
#42. जब चूना पत्थर की अपघटन अभिक्रिया गर्म करके की जाती है, तो उसे क्या कहा जाता है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)
- ऊष्मीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब किसी एकल अभिकारक को गर्म करने (ऊष्मा देने) पर वह दो या दो से अधिक सरल उत्पादों में वियोजित (टूट) जाता है, तो उस अभिक्रिया को ऊष्मीय अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
- चूना पत्थर का अपघटन: जब कैथोड या चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट, CaCO3) को गर्म किया जाता है, तो यह टूटकर कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा हुआ चूना, CaO) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस बनाता है।
• रासायनिक समीकरण: CaCO3 (s) + ऊष्मा → CaO (s) + CO2 (g)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) द्विविस्थापन अभिक्रिया: इसमें दो यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, जो यहाँ नहीं हो रहा है।
- विकल्प (C) ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया: चूँकि इस अभिक्रिया में ऊष्मा का अवशोषण होता है (यह ऊष्माशोषी है), इसलिए यह ऊष्माक्षेपी नहीं हो सकती।
- विकल्प (D) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो अभिकारक जुड़कर उत्पाद बनाते हैं, जबकि यहाँ एक अभिकारक टूट रहा है।
#43. उस विकल्प का चयन करें जो अभिकथन (A) और कारण (R) नामक निम्नलिखित दो कथनों के संबंध में सत्य है।अभिकथन (A): यदि आप जल्दी में हैं तो निलंबित भार के नीचे काम करना सुरक्षित है।कारण (R): आपके द्वारा उपयोग किए जा रहे उपकरण की सुरक्षित कार्य भार ( SWL) से कभी भी अधिक न हों।
(RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 2)
- अभिकथन (A) का विश्लेषण: यह कथन पूरी तरह से असत्य (False) है। कार्यशाला (Workshop) सुरक्षा नियमों के अनुसार, चाहे आप कितनी भी जल्दी में क्यों न हों, कभी भी किसी निलंबित भार (Suspended Load – यानी हवा में टंगे हुए भारी सामान या क्रेन के हुक) के नीचे काम करना या खड़ा होना सख्त मना और जानलेवा होता है।
- कारण (R) का विश्लेषण: यह कथन सत्य (True) है। कार्यशालाओं में सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि किसी भी क्रेन, रस्सी या उठाने वाले उपकरण की ‘सुरक्षित कार्य भार’ (Safe Working Load – SWL) सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए और कभी भी उससे अधिक भार का उपयोग न किया जाए।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 2) में कार्यशाला सुरक्षा (Workshop Safety) से संबंधित नियमों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A), (B) और (D): चूँकि अभिकथन (A) असुरक्षित अभ्यास को सही बताता है (जो कि गलत है) और कारण (R) एक सही सुरक्षा मानक है, इसलिए अन्य सभी विकल्प अमान्य हो जाते हैं।
#44. निम्नलिखित में से कौन-सा, संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (Reactants) परस्पर मिलकर केवल एक सिंगल उत्पाद (Product) का निर्माण करते हैं, उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं।
- विकल्प (A) का विश्लेषण: इसमें कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा हुआ चूना, CaO) और जल (H2O) आपस में मिलकर केवल एक उत्पाद—कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (बुझा हुआ चूना, Ca(OH)2)—बनाते हैं और प्रचुर मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करते हैं। अतः यह संयोजन (तथा ऊष्माक्षेपी) अभिक्रिया का एकदम सही उदाहरण है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 16 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2: यह एक विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) है, जिसमें जिंक, हाइड्रोजन को विस्थापित करता है।
- विकल्प (C) 2KClO3 → 2KCl + 3O2: यह एक अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) है, जिसमें एकल अभिकारक टूटकर दो उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (D) CuSO4 + BaCl2 → BaSO4 + CuCl2: यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) है, जिसमें आयनों का आदान-प्रदान होता है।
#45. अयस्क से धातुओं के निष्कर्षण में निम्नलिखित में से कौन सा क्रम सही है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- धातुकर्म (Metallurgy) के चरण: अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुकर्म कहा जाता है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:
1. अयस्क का सांद्रण (Concentration / Enrichment of Ore): अयस्क में मौजूद अशुद्धियों (गैंग / Gangue) को दूर करके अयस्क में धातु की मात्रा को बढ़ाना।
2. अपचयन (Reduction): सांद्रित अयस्क को धातु के ऑक्साइड में बदलकर (भर्जन या निस्तापन द्वारा) उसका कार्बन, एल्युमिनियम या विद्युत अपघटन द्वारा अपचयन करके धातु प्राप्त करना।
3. शोधन (Refining): अपचयन के बाद प्राप्त अशुद्ध धातु को शुद्ध करने की अंतिम प्रक्रिया (जैसे विद्युत अपघटनी परिष्करण)।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 21 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (B): इनमें चरणों का क्रम उलट-पुलट दिया गया है (जैसे शोधन सबसे पहले या अंत में न होकर बीच में रखना)। शोधन हमेशा सबसे अंतिम चरण होता है।
- विकल्प (D): इसमें भर्जन (जो अपचयन से पहले का चरण है) को सबसे अंत में रखा गया है, जो कि तार्किक रूप से गलत क्रम है।
#46. विस्थापन अभिक्रिया में वह प्रमुख कारक क्या है जो निर्धारित करता है कि क्या अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने यौगिक से कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित करेगी?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)
- सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): धातुओं की क्रियाशीलता को दर्शाने वाली एक सूची (Activity Series) होती है, जिसमें धातुओं को उनकी घटती हुई रासायनिक सक्रियता के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
- विस्थापन का आधार: जो धातु सक्रियता श्रेणी में ऊपर (अधिक सक्रिय) होती है, उसमें इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति अधिक होती है। इसलिए, वह श्रेणी में अपने से नीचे (कम सक्रिय) स्थित धातु को उसके लवण के जलीय विलयन या यौगिक से आसानी से विस्थापित कर देती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) अभिक्रिया का तापमान: तापमान किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह तय नहीं करता कि कौन सी धातु किसे विस्थापित करेगी।
- विकल्प (B) धातु परमाणुओं का आकार: परमाणु का आकार रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है, किंतु विस्थापन की क्षमता सीधे तौर पर उसकी सक्रियता (ऑक्सीकरण प्रवृत्ति) पर निर्भर करती है।
- विकल्प (D) यौगिक की सांद्रता: सांद्रता विलयन में अभिक्रिया की गति या तीव्रता को बदल सकती है, पर मूल विस्थापन गुणधर्म धातु की श्रेणी पर ही निर्भर करता है।
#47. प्लास्टर ऑफ पेरिस ( POP) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB JE 19/02/2026 )
- प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP): इसका रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (Calcium sulfate hemihydrate) है और इसका रासायनिक सूत्र CaSO4·½H2O होता है। इसे जिप्सम को $373\text{ K}$ ($100^\circ\text{C}$) पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है।
- कठोर होने की प्रक्रिया: जब प्लास्टर ऑफ पेरिस को पानी के साथ मिलाया जाता है, तो यह जल को अवशोषित करके पुनः जिप्सम में बदल जाता है और कुछ ही समय में एक ठोस कठोर द्रव्यमान के रूप में जम जाता है:
• रासायनिक समीकरण: CaSO4·½H2O + 1½H2O → CaSO4·2H2O (जिप्सम)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 19 Feb, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (C): इनमें सूत्र CaSO4·2H2O दिया गया है, जो कि प्लास्टर ऑफ पेरिस का नहीं बल्कि जिप्सम का रासायनिक सूत्र है। साथ ही विकल्प (C) में इसे उर्वरक बताना भी गलत है।
- विकल्प (D): यह कथन गलत है क्योंकि प्लास्टर ऑफ पेरिस पानी के बिना नहीं जम सकता; इसे जमने और कठोर होने के लिए जल की आवश्यकता होती है।
#48. जिप्सम से प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने में कौन-सी रासायनिक अभिक्रिया शामिल है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- निर्माण प्रक्रिया: जब जिप्सम (कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट, CaSO4·2H2O) को $373\text{ K}$ ($100^\circ\text{C}$) तापमान पर गर्म किया जाता है, तो यह अपने क्रिस्टलन जल के डेढ़ अणुओं का त्याग कर देता है और प्लास्टर ऑफ पेरिस (कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट, CaSO4·½H2O) में बदल जाता है।
- रासायनिक समीकरण:
CaSO4·2H2O + ऊष्मा → CaSO4·½H2O + 1½H2O
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 15 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): इसमें सारा क्रिस्टलन जल निकल जाता है और निर्जल कैल्शियम सल्फेट (एनहाइड्राइट) बन जाता है, जो प्लास्टर ऑफ पेरिस का सही समीकरण नहीं है।
- विकल्प (C): यह समीकरण प्लास्टर ऑफ पेरिस में पानी मिलाने पर पुनः जिप्सम बनने की प्रक्रिया को दर्शाता है, न कि जिप्सम से प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने की।
- विकल्प (D): यह चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट) के ऊष्मीय अपघटन का समीकरण है।
#49. दो भिन्न प्रकार के पदार्थों के कणों के आपस में मिलने को दर्शाने के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 11 Mar 2021 Shift 2)
- विसरण (Diffusion): दो अलग-अलग प्रकार के पदार्थों के कणों का स्वतः (अपने आप) आपस में मिलना विसरण कहलाता है। यह प्रक्रिया पदार्थों के कणों की निरंतर गति (यानी गतिज ऊर्जा) के कारण होती है। उदाहरण के लिए—पानी में स्याही का फैलना या अगरबत्ती की खुशबू का हवा में चारों तरफ फैल जाना।
- तापमान का प्रभाव: तापमान बढ़ाने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे विसरण की दर भी तेज़ हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 11 Mar, 2021 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) रूपांतरण: इसका अर्थ किसी वस्तु या पदार्थ के रूप या अवस्था में परिवर्तन होना है।
- विकल्प (B) अवक्रमण: इसका संबंध पदार्थों के ह्रास, क्षय या गुणवत्ता में गिरावट से है।
- विकल्प (D) भ्रम: यह एक मनोवैज्ञानिक या दृश्य स्थिति है, जिसका पदार्थों के कणों के मिलने से कोई संबंध नहीं है।
#50. अयस्कों को रोस्ट किया जाता है-
(RRB JE 23 May 2019 Shift 3)
- भर्जन (Roasting): यह धातुकर्म की एक प्रक्रिया है जिसमें सांद्रित अयस्क (विशेषकर सल्फाइड अयस्कों) को वायु (ऑक्सीजन) की प्रचुर उपस्थिति में उसके गलनांक बिंदु (Melting point) से कम तापमान पर तीव्रता से गर्म किया जाता है।
- मुख्य उद्देश्य: इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य अयस्क में मौजूद सल्फर, आर्सेनिक जैसी वाष्पशील अशुद्धियों को सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$) जैसी गैसों के रूप में बाहर निकालना और अयस्क को उसके ऑक्साइड में परिवर्तित करना होता है।
• रासायनिक उदाहरण: $2ZnS + 3O_2 \xrightarrow{\text{भर्जन}} 2ZnO + 2SO_2 \uparrow$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 23 May, 2019 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (C) – कार्बन डाइऑक्साइड और जल निकालना / निर्जलीकरण: यह कार्य निस्तापन (Calcination) की प्रक्रिया में किया जाता है, जिसमें कार्बोनेट अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित मात्रा में गर्म किया जाता है।
- विकल्प (D) अयस्क को संलयित करना: भर्जन के दौरान अयस्क को पिघलाया (संलयित) नहीं जाता, बल्कि उसे ठोस अवस्था में ही गर्म रखा जाता है।
#51. _________ पदार्थ की उन अवस्थाओं में से एक है जो बहुत कम घनत्व वाली गैस को अत्यंत निम्न तापमान पर ठंडा करके प्राप्त की जाती है।
(RRB NTPC Tier I : 27 Apr 2016 Shift 3)
- बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (Bose-Einstein Condensate – BEC): यह पदार्थ की पाँचवीं अवस्था (Fifth State of Matter) है। इसे बहुत कम घनत्व वाली गैस को परम शून्य (Absolute Zero) के बेहद करीब अत्यंत निम्न तापमान पर ठंडा करके प्राप्त किया जाता है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सन 1920 में भारतीय भौतिकशास्त्री सत्येंद्र नाथ बोस ने इस अवस्था के लिए कुछ गणनाएँ की थीं, जिनके आधार पर अल्बर्ट आइंस्टीन ने पदार्थ की एक नई अवस्था की भविष्यवाणी की थी। अंततः 1995 में कॉर्नेल, केटरले और वाइमन ने इसे प्रायोगिक रूप से प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें 2001 का नोबेल पुरस्कार मिला।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 27 Apr, 2016 Shift 3) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) गैस: गैस पदार्थ की सामान्य अवस्था है, जिसे अत्यंत निम्न तापमान पर ठंडा करने से यह स्थिति नहीं बनती।
- विकल्प (B) प्लाज्मा: यह पदार्थ की चौथी अवस्था है, जो अत्यधिक उच्च तापमान (जैसे तारों के भीतर) पर आयनीकृत गैसों के रूप में पाई जाती है, न कि ठंडी करने पर।
- विकल्प (D) प्लाज्मा कंडेनसेट: यह वैज्ञानिक रूप से एक अमान्य या भ्रामक विकल्प है।
#52. कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट का औद्योगिक नाम क्या है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 04 Sept, 2025 Shift 2)
- कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट: इसका रासायनिक सूत्र $\text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O}$ होता है और इसका सामान्य या औद्योगिक नाम प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris – POP) है। इसे जिप्सम को गर्म करके तैयार किया जाता है और इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिए प्लास्टर करने, मूर्तियाँ बनाने तथा दीवारों को चिकना करने में किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 04 Sept, 2025 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) जिप्सम: यह कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट ($\text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O}$) है, न कि हेमीहाइड्रेट।
- विकल्प (B) क्विक लाइम (बिना बुझा हुआ चूना): इसका रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$) है।
- विकल्प (D) स्लेक्ड लाइम (बुझा हुआ चूना): इसका रासायनिक नाम कैल्शियम हाइड्रोक्साइड ($\text{Ca(OH)}_2$) है।
#53. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया मीथेन के दहन को दर्शाती है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
- मीथेन का दहन (Combustion of Methane): जब हाइड्रोकार्बन (जैसे मीथेन, CH4) ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) की उपस्थिति में जलता है, तो यह पूर्ण दहन (Complete Combustion) के फलस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$), जल ($\text{H}_2\text{O}$) और प्रचुर मात्रा में ऊष्मा व प्रकाश उत्पन्न करता है।
- संतुलित रासायनिक समीकरण:
CH4 (g) + 2O2 (g) → CO2 (g) + 2H2O (g) + ऊष्मा
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 16 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) CH4 + Cl2 → CH3Cl + HCl: यह मीथेन की क्लोरीन के साथ सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होने वाली प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction) है।
- विकल्प (C) CH4 + O2 → CO + H2O: यह ऑक्सीजन की अपर्याप्त मात्रा में होने वाला अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion) है, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) बनती है, जबकि सामान्य दहन समीकरण पूर्ण दहन को दर्शाता है।
- विकल्प (D) CH4 + H2O → CO + H2: यह प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन गैस बनाने की स्टीम रिफॉर्मिंग (Steam Reforming) प्रक्रिया है।
#54. जब कोई अम्ल धातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो क्या होता है
?(RRB JE CE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)
- धातु ऑक्साइड की प्रकृति: सामान्यतः अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति (Basic in nature) के होते हैं।
- अभिक्रिया: जब कोई अम्ल किसी धातु ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह एक प्रकार की उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया होती है, जिसके फलस्वरूप संगत लवण (Salt) और जल (Water) का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण (उदाहरण):
$\text{CuO (s) [कॉपर ऑक्साइड]} + 2\text{HCl (aq) [हाइड्रोक्लोरिक अम्ल]} \rightarrow \text{CuCl}_2\text{ (aq) [कॉपर क्लोराइड – लवण]} + \text{H}_2\text{O (l) [जल]}$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CE : 22 Apr, 2025 Shift 2 CBT 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) केवल लवण बनता है: यह गलत है क्योंकि इस अभिक्रिया में लवण के साथ-साथ जल ($\text{H}_2\text{O}$) भी बनता है।
- विकल्प (B) लवण और हाइड्रोजन गैस: हाइड्रोजन गैस केवल सक्रिय धातुओं (जैसे Zn, Fe आदि) और अम्लों की अभिक्रिया से मुक्त होती है, धातु ऑक्साइड से नहीं।
- विकल्प (D) केवल जल बनता है: यह अमान्य है क्योंकि लवण का निर्माण होना भी अनिवार्य रूप से शामिल है।
#55. पानी की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए ________ मिलाया जा सकता है।
(RRB NTPC CBT-I : 8 April 2021 Shift 2)
- पानी की स्थायी कठोरता (Permanent Hardness): जल की स्थायी कठोरता उसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड ($\text{CaCl}_2, \text{MgCl}_2$) तथा सल्फेट ($\text{CaSO}_4, \text{MgSO}_4$) लवण घुले होने के कारण होती है, जिसे सामान्य उबालकर दूर नहीं किया जा सकता।
- निवारण का तरीका: पानी की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए धावन सोडा (Washing Soda – सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट, $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) का उपयोग किया जाता है। यह घुलनशील कैल्शियम और मैग्नीशियम लवणों को अघुलनशील कार्बोनेट के रूप में अवक्षेपित कर देता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 8 April, 2021 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) ब्लीचिंग पाउडर: इसका उपयोग जल को रोगाणुमुक्त (Disinfectant) करने और कपड़ों को विरंजित करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) पोटेशियम परमैंगनेट ($\text{KMnO}_4$): इसे ‘लाल दवा’ भी कहते हैं, जिसका उपयोग कुओं आदि के पानी को कीटाणुमुक्त करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) क्लोरीन: यह पानी में मौजूद बैक्टीरिया और रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए एक कीटाणुनाशक के रूप में मिलाई जाती है।
#56. थोड़े समय के लिए वायु के एक लाख भागों में से ________ के लगभग 900 भागों को श्वास के रूप में अंदर लेने से थकान, चक्कर आना और सिरदर्द होता है।
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 2)
- क्लोरोफॉर्म के प्रभाव (Effects of Chloroform): वायु के प्रति मिलियन (एक लाख/दस लाख) भागों में से लगभग 900 भाग ($\text{900 ppm}$) क्लोरोफॉर्म को थोड़े समय के लिए भी साँस के माध्यम से अंदर लेने से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है, जिसके परिणामस्वरूप थकान, चक्कर आना और गंभीर सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- रासायनिक सूत्र: क्लोरोफॉर्म का रासायनिक सूत्र $\text{CHCl}_3$ है। पहले इसका उपयोग शल्य चिकित्सा में निश्चेतक (Anesthetic) के रूप में किया जाता था, लेकिन इसके विषाक्त प्रभावों के कारण अब इसका उपयोग बहुत सीमित हो गया है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP Fitter : 23 Jan, 2019 Shift 2) में विज्ञान और पर्यावरण सुरक्षा के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) कीटनाशक: ये रसायन मुख्य रूप से कृषि में कीटों को मारने के काम आते हैं, और इनका श्वसन संबंधी यह विशिष्ट 900 ppm वाला पैमाना नहीं है।
- विकल्प (B) अदह (ऐस्बेस्टॉस) कण: इसके रेशे साँस के जरिए फेफड़ों में जाने से फेफड़ों का कैंसर या एस्बेस्टोसिस जैसी दीर्घकालिक बीमारियाँ होती हैं, न कि इस प्रकार का त्वरित चक्कर या सिरदर्द।
- विकल्प (D) आर्सेनिक: यह एक विषैला भारी तत्व है जिसके दीर्घकालिक सेवन से त्वचा और आंतरिक अंगों पर प्रभाव पड़ता है।
#57. जब गर्म काले कॉपर ( II) ऑक्साइड में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है, तो यह:
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)
- अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction): कॉपर (II) ऑक्साइड ($\text{CuO}$) एक काले रंग का यौगिक है। जब गर्म काले कॉपर ऑक्साइड के ऊपर से हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) प्रवाहित की जाती है, तो हाइड्रोजन ऑक्सीजन को अपने साथ जोड़कर जल ($\text{H}_2\text{O}$) बना लेती है और कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन का ह्रास हो जाता है।
- उत्पाद: ऑक्सीजन के ह्रास (अपचयन) के परिणामस्वरूप बर्तन में भूरे/लाल-भूरे रंग की कॉपर धातु ($\text{Cu}$) शेष बच जाती है।
• रासायनिक समीकरण: $\text{CuO (s) [काला]} + \text{H}_2\text{ (g)} \xrightarrow{\text{ऊष्मा}} \text{Cu (s) [भूरा]} + \text{H}_2\text{O (l)}$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 18 Dec, 2024 Shift 3) में ऑक्सीकरण-अपचयन (Redox) अभिक्रिया के उदाहरण के रूप में पूछा गया था।
- विकल्प (B) और (D): इसमें नीले रंग के कॉपर विलयन बनने की बात कही गई है, जबकि यहाँ ठोस भूरे रंग की कॉपर धातु बनती है (नीला रंग कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन का होता है)।
- विकल्प (C): इसमें कॉपर ऑक्साइड के ‘ऑक्सीकृत’ होने की बात कही गई है, जबकि ऑक्सीजन का ह्रास होने के कारण यह वास्तव में ‘अपचयित’ (Reduced) होता है।
#58. तापन पर सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट की अभिक्रिया क्या उत्पन्न करती है?
(RRB ALP CBT 1 17/02/2026)
- सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट का तापन: बेकिंग सोडा यानी सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{NaHCO}_3$) को गर्म करने पर यह वियोजित (अपघटित) होकर सोडियम कार्बोनेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3$), जल ($\text{H}_2\text{O}$) और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस उत्पन्न करता है।
- रासायनिक समीकरण:
$2\text{NaHCO}_3 \xrightarrow{\text{ऊष्मा}} \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\uparrow$
- उपयोग (पाकमक्रिया / Baking): इस अभिक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली $\text{CO}_2$ गैस के कारण ही केक, डबल रोटी (ब्रेड) आदि फूल जाते हैं और स्पंजी तथा नरम बनते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 17 Feb, 2026) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): इसमें सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) और हाइड्रोजन गैस बनने की बात कही गई है, जो कि इस ऊष्मीय अपघटन का उत्पाद नहीं है।
- विकल्प (B): इसमें सोडियम हाइड्रॉक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड का जिक्र है, जो गलत है।
- विकल्प (D): इसमें सोडियम सल्फेट ($\text{Na}_2\text{SO}_4$) का उल्लेख है, जबकि यहाँ सल्फेट लवण नहीं बल्कि कार्बोनेट लवण बनता है।
#59. चिप्स जैसे खाद्य पदार्थों से भरे बैगों में ऑक्सीजन को रोकने के लिए नाइट्रोजन गैस का उपयोग क्यों किया जाता है?
(RRB JE 20/02/2026 )
- विकृतगंधिता (Rancidity) से बचाव: चिप्स या अन्य तैलीय खाद्य पदार्थों में वसा और तेल होते हैं। जब ये पदार्थ हवा की ऑक्सीजन के संपर्क में आते हैं, तो इनका ऑक्सीकरण (Oxidation) हो जाता है, जिससे उनका स्वाद और गंध खराब हो जाती है (जिसे विकृतगंधिता कहते हैं)।
- नाइट्रोजन की भूमिका: चिप्स निर्माताओं द्वारा थैली से ऑक्सीजन को हटाकर उसमें नाइट्रोजन ($\text{N}_2$) जैसी अक्रिय (Inert) गैस भर दी जाती है। नाइट्रोजन एक कम अभिक्रियाशील गैस है, जो चिप्स को ऑक्सीकृत होने से बचाती है और उन्हें लंबे समय तक ताजा और कुरकुरा बनाए रखती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE : 20 Feb, 2026) में दैनिक जीवन में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रभाव से संबंधित टॉपिक के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): चिप्स का कुरकुरापन उनकी फ्राइंग और पैकेजिंग प्रक्रिया के कारण होता है, न कि नाइट्रोजन गैस डालने से।
- विकल्प (C): नाइट्रोजन ऑक्सीजन को त्वरित (Accelerate) नहीं करती, बल्कि इसके विपरीत ऑक्सीकरण प्रक्रिया को रोकती है।
- विकल्प (D): नाइट्रोजन एक स्वादहीन और गंधहीन गैस है, यह भोजन के स्वाद को बढ़ाने का काम नहीं करती, बल्कि केवल संरक्षण (Preservation) का कार्य करती है।
#60. जब एथेनॉल सोडियम के साथ अभिक्रिया करता है तो क्या उत्पाद बनता है?
(RRB ALP CBT 1 16/02/2026 )
- एथेनॉल और सोडियम की अभिक्रिया: जब सोडियम ($\text{Na}$) जैसी सक्रिय धातुएँ एथेनॉल ($\text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH}$) के साथ अभिक्रिया करती हैं, तो यह एथेनॉल के हाइड्रॉक्सिल समूह के हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं।
- उत्पाद: इस रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप सोडियम एथॉक्साइड ($\text{CH}_3\text{CH}_2\text{ONa}$) का निर्माण होता है और साथ में हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) बाहर निकलती है।
- संतुलित रासायनिक समीकरण:
$2\text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} + 2\text{Na} \rightarrow 2\text{CH}_3\text{CH}_2\text{ONa} + \text{H}_2\uparrow$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB ALP CBT 1 : 16 Feb, 2026) में कार्बन और उसके यौगिक (Carbon and its Compounds) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B): इसमें सोडियम हाइड्रोक्साइड और ऑक्सीजन गैस बनने की बात कही गई है, जो कि गलत है (ऑक्सीजन गैस इस अभिक्रिया में मुक्त नहीं होती)।
- विकल्प (C): सोडियम ऑक्साइड और जल का निर्माण इस प्रक्रिया में नहीं होता।
- विकल्प (D): इसमें सोडियम कार्बोनेट का उल्लेख है, जो एथेनॉल की सोडियम धातु के साथ सीधी अभिक्रिया का उत्पाद नहीं है।
#61. कैल्शियम ऑक्साइड और पानी मिलकर कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं। यह ________ अभिक्रिया का एक उदाहरण है।
(RRB JE EE 19 Sept 2019 Shift 2 CBT 2)
- अभिक्रिया की प्रकृति: जब कैल्शियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$, बिना बुझा हुआ चूना) पानी ($\text{H}_2\text{O}$) के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करता है, तो यह कैल्शियम हाइड्रोक्साइड ($\text{Ca(OH)}_2$, बुझा हुआ चूना) बनाता है।
• रासायनिक समीकरण: $\text{CaO (s)} + \text{H}_2\text{O (l)} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2\text{ (aq)} + \text{ऊष्मा (Heat)}$
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): चूँकि इस अभिक्रिया में दो अभिकारक ($\text{CaO}$ और $\text{H}_2\text{O}$) परस्पर मिलकर केवल एक सिंगल उत्पाद ($\text{Ca(OH)}_2$) बनाते हैं, इसलिए यह एक संयोजन अभिक्रिया है।
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): इस प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है (जिससे बर्तन गर्म हो जाता है), इसलिए यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया भी है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE EE : 19 Sept, 2019 Shift 2 CBT 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (B) और (D): ये दोनों विकल्प आंशिक रूप से सही हैं क्योंकि यह संयोजन और ऊष्माक्षेपी दोनों है, लेकिन विकल्प (A) इन दोनों गुणों को एक साथ सबसे सटीक रूप से समेटता है।
- विकल्प (C) ऊष्माशोषी अभिक्रिया: यह गलत है क्योंकि इस अभिक्रिया में ऊष्मा का अवशोषण नहीं होता, बल्कि ऊष्मा निकलती है।
#62. निम्नलिखित में से कौन-सा, अवक्षेपण अभिक्रिया की व्याख्या करता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें जलीय विलयन के दो अभिकारक आपस में क्रिया करके एक ऐसा उत्पाद बनाते हैं जो जल में अघुलनशील होता है और ठोस के रूप में नीचे बैठ जाता है, उसे अवक्षेप (Precipitate) तथा इस प्रक्रिया को अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।
- रासायनिक समीकरण (उदाहरण):
$\text{BaCl}_2\text{ (aq) [बेरियम क्लोराइड]} + \text{Na}_2\text{SO}_4\text{ (aq) [सोडियम सल्फेट]} \rightarrow \text{BaSO}_4\text{ s) [बेरियम सल्फेट – सफेद अवक्षेप]} + 2\text{NaCl (aq)}$
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 10 Dec, 2025) में रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार से संबंधित टॉपिक के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): वह अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा निकलती है, उसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) कहते हैं।
- विकल्प (B) और (C): रंग परिवर्तन या गैस का बनना विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं (जैसे विस्थापन या अपघटन) की विशेषता हो सकती है, लेकिन यह अवक्षेपण की मुख्य परिभाषा नहीं है।
(a) यह हमेशा ध्रुव और वक्रता केंद्र के मध्य में स्थित होता है।
(b) इसकी स्थिति दर्पण के आकार पर निर्भर करती है।
(c) यह हमेशा वक्रता केंद्र पर स्थित होता है।
#63. गोलीय दर्पण के मुख्य फोकस के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- कथन (a) सत्य है: गोलीय दर्पण (अवतल या उत्तल) का मुख्य फोकस ($F$), दर्पण के ध्रुव ($P$) और वक्रता केंद्र ($C$) के ठीक बीच में स्थित होता है। इसके बीच की दूरी को फोकस दूरी ($f$) कहते हैं, जो वक्रता त्रिज्या ($R$) की आधी होती है ($\text{f} = \frac{\text{R}}{2}$). अतः कथन (a) सही है.
- कथन (b) असत्य है: मुख्य फोकस की स्थिति दर्पण के आकार (Aperture/Size) पर निर्भर नहीं करती है; यह केवल दर्पण की वक्रता त्रिज्या पर निर्भर करती है.
- कथन (c) असत्य है: मुख्य फोकस कभी भी वक्रता केंद्र पर स्थित नहीं होता, बल्कि वक्रता केंद्र फोकस दूरी से दोगुनी दूरी पर स्थित होता है.
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1) में पूछा गया था.
- विकल्प (A), (B) और (D): चूँकि कथन (b) और (c) दोनों गलत हैं और केवल कथन (a) ही वैज्ञानिक रूप से सही है, इसलिए (a) को छोड़कर अन्य सभी संयोजनों वाले विकल्प स्वतः अमान्य हो जाते हैं.
#64. धावन सोडा के उपयोग के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 2)
- धावन सोडा (Washing Soda): इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) है।
- प्रमुख उपयोग:
• इसका उपयोग काँच, साबुन और कागज उद्योगों में किया जाता है (अतः विकल्प B में ‘नहीं किया जाता’ लिखा होने के कारण यह कथन गलत है, और चूँकि प्रश्न में गलत कथन ही पूछा गया है, इसलिए यही सही विकल्प है)।
• इसका उपयोग बोरेक्स ($\text{Borax}$) जैसे महत्वपूर्ण सोडियम यौगिकों के उत्पादन में होता है।
• यह जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के काम आता है।
• यह घरों में साफ-सफाई के लिए एक बेहतरीन क्लीनिंग एजेंट के रूप में प्रयुक्त होता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 2) में पूछा गया था।
- विकल्प (A): यह कथन बिल्कुल सत्य है कि इसका उपयोग बोरेक्स निर्माण में किया जाता है।
- विकल्प (C): यह भी सत्य है कि यह पानी की स्थायी कठोरता को दूर करता है।
- विकल्प (D): यह भी सत्य है कि सोडियम कार्बोनेट का उपयोग घरेलू कार्यों में सफाई एजेंट के रूप में होता है।
#65. सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के बीच की अभिक्रिया, द्वि-विस्थापन अभिक्रिया का एक उदाहरण है। यह _________ का भी एक उदाहरण है।
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड की अभिक्रिया: जब सोडियम सल्फेट (Na2SO4) के जलीय विलयन को बेरियम क्लोराइड (BaCl2) के जलीय विलयन में मिलाया जाता है, तो आयनों का आदान-प्रदान होता है, जिससे द्वि-विस्थापन (Double Displacement) अभिक्रिया संपन्न होती है।
- अवक्षेप का निर्माण: इस अभिक्रिया के फलस्वरूप बेरियम सल्फेट (BaSO4) का एक अघुलनशील सफेद अवक्षेप बनता है जो नीचे बैठ जाता है, इसलिए इसे अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) भी कहा जाता है।
• रासायनिक समीकरण: Na2SO4 (aq) + BaCl2 (aq) → BaSO4 (s) ↓ + 2NaCl (aq)
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 23 Dec, 2025) में पूछा गया था।
- विकल्प (A) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो अभिकारक मिलकर एक उत्पाद नहीं बनाते, बल्कि यौगिकों के आयनों की अदला-बदली होती है।
- विकल्प (C) अपघटन अभिक्रिया: इसमें कोई एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद नहीं बनाता है।
- विकल्प (D) विस्थापन अभिक्रिया: यह एकल विस्थापन न होकर आयनों के परस्पर आदान-प्रदान पर आधारित द्वि-विस्थापन (Double Displacement) है।
#66. एक लेंस में _________ मुख्य फोकस होते हैं।
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)
- मुख्य फोकस (Principal Focus): प्रत्येक लेंस (चाहे वह उत्तल लेंस हो या अवतल लेंस) के दोनों तरफ दो वक्र सतहें होती हैं। चूँकि प्रकाश किरणें लेंस के दोनों ओर से गुजर सकती हैं और अपवर्तन हो सकता है, इसलिए लेंस के दो मुख्य फोकस होते हैं—जिन्हें सामान्यतः प्रथम मुख्य फोकस (F1) और द्वितीय मुख्य फोकस (F2) कहा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 18 Dec, 2024 Shift 3) में प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A), (B) और (C) [1, 3, 4]: लेंस की दोनों तरफ की सतहों के कारण फोकस बिंदुओं की कुल संख्या दो होती है। इसलिए 1, 3 या 4 संख्या वाले अन्य सभी विकल्प अमान्य हैं। (ध्यान दें कि गोलीय दर्पण का केवल एक ही मुख्य फोकस होता है, जबकि लेंस में दोनों और अपवर्तन सतह होने के कारण दो फोकस होते हैं)।
#67. एथेनॉल के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
- एथेनॉल (Ethanol – $\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$): यह अल्कोहल परिवार का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। सामान्य ताप पर यह एक वाष्पशील, रंगहीन द्रव है जिसकी एक विशिष्ट सुखद गंध (Pleasant smell) और तीखा स्वाद होता है।
- जल में विलेयता: एथेनॉल पानी में हर अनुपात में पूरी तरह घुलनशील (मिश्रणीय / Miscible) होता है क्योंकि यह जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध बना लेता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 09 Dec, 2025) में कार्बनिक रसायन विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A): एथेनॉल कोई ठोस नहीं बल्कि एक द्रव (Liquid) है।
- विकल्प (B): यह गलत है क्योंकि एथेनॉल जल में पूरी तरह घुलनशील होता है।
- विकल्प (D): एथेनॉल और सोडियम की अभिक्रिया से सोडियम एथॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) निकलती है, न कि कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$).
#68. ऊँचाई पर उड़ने वाले विमान के केबिन के अंदर दाब होता है(
RRB NTPC Tier I : 29 Mar 2016 Shift 3)
- केबिन दाब (Cabin Pressure): अत्यधिक ऊँचाई पर (जैसे 30,000 से 40,000 फीट की ऊँचाई पर) वायुमंडल का दाब बहुत कम हो जाता है और ऑक्सीजन का स्तर भी बेहद कम होता है।
- कृत्रिम दबाव: यात्रियों को सुरक्षित और सामान्य रूप से सांस लेने योग्य वातावरण देने के लिए विमान के केबिन को विशेष रूप से दबावयुक्त (Pressurized) किया जाता है। यही कारण है कि केबिन के अंदर का दाब बाहर के अत्यधिक कम वायुमंडलीय दाब की तुलना में काफी अधिक रखा जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 29 Mar, 2016 Shift 3) में भौतिकी और दैनिक विज्ञान के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) बाहर के समान: यदि केबिन का दाब बाहर के समान होता, तो इतनी ऊँचाई पर कम वायुदाब और ऑक्सीजन की कमी के कारण यात्रियों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो जाता।
- विकल्प (B) बाहर से कम: यह गलत है क्योंकि केबिन के अंदर का दाब बाहर की तुलना में नियंत्रित रूप से अधिक रखा जाता है।
- विकल्प (D) समुद्र तल पर सामान्य वायुमंडलीय दाब: केबिन के अंदर का दबाव समुद्र तल के बराबर नहीं होता, बल्कि उसे लगभग 6,000 से 8,000 फीट की ऊँचाई के समतुल्य रखा जाता है (जो बाहर से बहुत अधिक होता है)।
#69. रासायनिक समीकरण को संतुलित करने का पहला चरण निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
- रासायनिक समीकरण को संतुलित करने के चरण (Steps for Balancing Chemical Equations):
1. पहला चरण (कंकाली समीकरण / Skeleton Equation): किसी भी रासायनिक समीकरण को संतुलित करने की शुरुआत सबसे पहले शब्द समीकरण को रासायनिक सूत्रों के रूप में लिखकर एक कंकाली या ढांचागत समीकरण (Skeleton Equation) तैयार करने से होती है।
2. इसके बाद प्रत्येक सूत्र के चारों ओर एक बॉक्स (बक्सा) बनाया जाता है ताकि समीकरण को संतुलित करते समय अंदर के सूत्रों में कोई बदलाव न किया जाए।
3. इसके बाद सबसे अधिक परमाणु वाले यौगिक को चुनकर परमाणुओं की संख्या को दोनों पक्षों में बराबर किया जाता है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB JE CBT-I : 17 Dec, 2024 Shift 3) में रासायनिक अभिक्रियाओं और समीकरणों के नियमों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) और (C) ऑक्सीजन या हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करना: यह संतुलित करने की प्रक्रिया के अगले चरण हैं, शुरुआती चरण नहीं (आमतौर पर सबसे पहले जटिल यौगिक या धातु/अधातु परमाणुओं को संतुलित किया जाता है)।
- विकल्प (B) गुणांकों को यादृच्छिक रूप से जोड़ना: समीकरण को संतुलित करने के लिए ‘हिट एंड ट्रायल’ विधि का उपयोग किया जाता है, न कि यादृच्छिक रूप से (Randomly) कुछ भी जोड़ना।
#70. जिंक और कॉपर जैसी धातुओं को शुद्ध करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )
- विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining): जिंक (Zn), कॉपर (Cu), टिन, निकल, सिल्वर और गोल्ड जैसी कई धातुओं को शुद्ध करने के लिए विद्युत अपघटनी शोधन की विधि का उपयोग किया जाता है।
- प्रक्रिया: इस विधि में अशुद्ध धातु को एनोड (धनात्मक सिरा) और शुद्ध धातु की पतली पट्टी को कैथोड (ऋणात्मक सिरा) बनाया जाता है। धातु के लवण के जलीय विलयन को विद्युत अपघट्य (Electrolyte) के रूप में उपयोग किया जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से शुद्ध धातु घुल कर कैथोड पर जमा हो जाती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Level 01 Stage I : 29 Dec, 2025) में धातु कर्म (Metallurgy) और शोधन विधियों से संबंधित टॉपिक के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) प्रगलन (Smelting): यह अयस्क से धातु के निष्कर्षण (Extraction) के दौरान उसे उच्च ताप पर गलाने की प्रक्रिया है, न कि शुद्धिकरण की विधि।
- विकल्प (C) मिश्रधातु निर्माण (Alloying): यह दो या दो से अधिक धातुओं (या धातु और अधาตุ) का समांगी मिश्रण तैयार करने की प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) भर्जन (Roasting): यह अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रारंभिक प्रक्रिया है।
#71. वह कौन सा ज्ञात समीकरण है जो बफर विलयन के घटकों, कमजोर अम्ल/लवण या कमजोर क्षार/लवण, और इसके pH को जोड़ता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 04 Sept, 2025 Shift 2)
- हेंडरसन-हैंसलबाल्च समीकरण (Henderson-Hasselbalch Equation): यह वह प्रसिद्ध समीकरण है जो किसी बफर विलयन के pH (या pOH) को उसके घटकों—जैसे कमजोर अम्ल और उसके लवण (या कमजोर क्षार और उसके लवण)—की सांद्रता और अम्ल वियोजन स्थिरांक (pKa) के साथ जोड़ती है।
- समीकरण का रूप (अम्लीय बफर के लिए):
pH = pKa + log([लवण] / [अम्ल])
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC UG CBT-I : 04 Sept, 2025 Shift 2) में रासायनिक साम्यावस्था और विलयन के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) आर्डेनियस समीकरण (Arrhenius Equation): यह रासायनिक अभिक्रिया के वेग स्थिरांक और तापमान के बीच संबंध को दर्शाती है।
- विकल्प (B) नर्स्ट समीकरण: यह विद्युत रासायनिक सेल के इलेक्ट्रोड विभव और आयनों की सांद्रता के बीच संबंध बताती है।
- विकल्प (D) वान्ट हॉफ समीकरण (Van ‘t Hoff Equation): यह तापमान परिवर्तन के साथ रासायनिक साम्य स्थिरांक के परिवर्तन को दर्शाती है।
#72. अम्ल और क्षारक के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया को क्या कहा जाता है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब किसी अम्ल (Acid) और किसी क्षारक (Base) के बीच रासायनिक अभिक्रिया होती है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त (उदासीन) कर देते हैं। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप लवण (Salt) और जल (Water) का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण (उदाहरण):
NaOH (aq) [क्षार] + HCl (aq) [अम्ल] → NaCl (aq) [लवण] + H₂O (l) [जल]
- इस प्रकार की अभिक्रिया सामान्यतः ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है, जिसमें ऊष्मा निकलती है।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3) में अम्ल, क्षार और लवण के रासायनिक गुणों के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा का अवशोषण होता है (जबकि अम्ल-क्षार की उदासीनीकरण अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है)।
- विकल्प (C) संजनन अभिक्रिया (Condensation Reaction): यह मुख्य रूप से कार्बनिक रसायन विज्ञान से संबंधित प्रक्रिया है जिसमें छोटे अणुओं के ह्रास के साथ बड़े अणु जुड़ते हैं।
- विकल्प (D) अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): इसमें कोई एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
#73. चीनी के शराब में परिवर्तन की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 6 April 2021 Shift 2)
- किण्वन (Fermentation): यह एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्मजीवों (जैसे यीस्ट/खमीर) द्वारा उपस्थित एंजाइमों की सहायता से शर्करा (चीनी) को अल्कोहल (शराब) और कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
- इस प्रक्रिया की खोज सबसे पहले महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर (Louis Pasteur) ने की थी।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC CBT-I : 6 April, 2021 Shift 2) में कार्बनिक रसायन और जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (A) संजनन (Condensation): यह गैस के द्रव में बदलने की भौतिक प्रक्रिया है।
- विकल्प (B) निष्कासन (Elimination): यह रासायनिक अभिक्रियाओं का एक प्रकार है जिसमें अणुओं का निष्कासन होता है।
- विकल्प (D) अवसादन (Sedimentation): यह किसी मिश्रण में अघुलनशील ठोस कणों का नीचे बैठना है।
#74. मीठा शीतल पेय का प्रमुख घटक है
(RRB NTPC Tier I : 19 Apr 2016 Shift 2)
- कार्बोनेटेड पानी (Carbonated Water): मीठे शीतल पेय (Soft Drinks / Cold Drinks) का सबसे प्रमुख और मुख्य घटक कार्बोनेटेड पानी होता है, जो उच्च दाब पर जल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस को घोलकर तैयार किया जाता है।
- यह शीतल पेय की कुल मात्रा का अधिकांश हिस्सा (लगभग 90% या अधिक) बनाता है, जिसमें चीनी, सिरप, रंग और अन्य स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ घुले होते हैं।
- परीक्षा संदर्भ: यह प्रश्न (RRB NTPC Tier I : 19 Apr, 2016 Shift 2) में सामान्य विज्ञान और दैनिक जीवन के रसायन से संबंधित टॉपिक के अंतर्गत पूछा गया था।
- विकल्प (B) हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl): यह एक प्रबल अम्ल है जो मानव पेट के जठर रस (Gastric Juice) में पाया जाता है, शीतल पेय में इसका कोई उपयोग नहीं होता।
- विकल्प (C) फॉस्फोरिक एसिड (H3PO4): इसे कुछ शीतल पेय (जैसे कोला) में खट्टापन और तीखा स्वाद देने के लिए एक योजक (Additive) के रूप में मिलाया जाता है, लेकिन यह पेय का ‘प्रमुख घटक’ नहीं है।
- विकल्प (D) कैफीन: यह एक उत्तेजक पदार्थ है जिसे कुछ चुनिंदा शीतल पेय पदार्थों में स्वाद और ऊर्जा के प्रभाव के लिए मिलाया जाता है, न कि मुख्य घटक के रूप में।


