रासायनिक अभिक्रियाएँ Railway PYQ
#1. निम्नलिखित में से किस यौगिक के निर्माण के लिए क्लोर-क्षार प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 1)
- क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali Process): जब सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन गैस और हाइड्रोजन गैस बनाता है।
- नाम का कारण: इस प्रक्रिया को ‘क्लोर-क्षार’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें क्लोरीन (Chlor) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (जो कि एक क्षार/Alkali है) का निर्माण होता है।
- रासायनिक अभिक्रिया: 2NaCl + 2H2O $\rightarrow$ 2NaOH + Cl2 + H2 (यहाँ एनोड पर क्लोरीन गैस और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है, जबकि विलयन में NaOH बनता है)।
- विकल्प (B) NaHCO3: यह सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (बेकिंग सोडा) है, जिसे सॉल्वे विधि (Solvay process) द्वारा बनाया जाता है।
- विकल्प (C) Na2CO3: यह सोडियम कार्बोनेट (धोने का सोडा) है।
- विकल्प (D) NaCl: यह सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) है, जिसका उपयोग इस प्रक्रिया में कच्चे माल (Reactant) के रूप में किया जाता है, न कि इसके उत्पाद के रूप में।
#2. अभिकथन और कारण नामक निम्नलिखित दो कथनों के संबंध में सही विकल्प का चयन कीजिए।अभिकथन : ध्वनि तरंगें, अयांत्रिक तरंगें हैं।कारण : ध्वनि तरंगों के संचरण के लिए एक भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है
。(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
- ध्वनि तरंगों की प्रकृति: ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves) होती हैं, अयांत्रिक (Non-mechanical) तरंगें नहीं।
- माध्यम की आवश्यकता: चूँकि ध्वनि तरंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरण के लिए ठोस, द्रव या गैस जैसे किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है, इसलिए ये निर्वात (Vacuum) में यात्रा नहीं कर सकतीं।
- निष्कर्ष: यहाँ अभिकथन (Assertion) गलत है क्योंकि ध्वनि तरंगें अयांत्रिक नहीं बल्कि यांत्रिक होती हैं, जबकि कारण (Reason) बिल्कुल सत्य है कि इन्हें माध्यम की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (A): यह गलत है क्योंकि अभिकथन असत्य है और कारण सत्य है, विपरीत स्थिति नहीं।
- विकल्प (B): यह गलत है क्योंकि कारण (Reason) पूरी तरह से सत्य है।
- विकल्प (D): यह गलत है क्योंकि दोनों कथन सत्य नहीं हैं (अभिकथन असत्य है)।
#3. वाहनों में कौन सा उपकरण पेट्रोल या डीजल में जहरीली गैसों को हानिरहित गैसों में परिवर्तित करता है?
(RRB JE 26 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- उत्प्रेरक परिवर्तक (Catalytic Converter): यह वाहनों के निकास तंत्र (Exhaust system) में लगाया जाने वाला एक उपकरण है।
- कार्य प्रणाली: यह इंजन से निकलने वाली जहरीली गैसों जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड्स ($NO_x$) और अनजली हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons) को हानिरहित गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), नाइट्रोजन ($N_2$) और जल वाष्प ($H_2O$) में परिवर्तित कर देता है।
- उत्प्रेरक का उपयोग: इसमें प्लैटिनम (Platinum), पैलेडियम (Palladium) और रोडियम (Rhodium) जैसी महंगी धातुओं का उपयोग उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है।
- विकल्प (A) रेडियेटर: इसका मुख्य कार्य इंजन को ठंडा रखना (Cooling system का हिस्सा) है, न कि गैसों को बदलना।
- विकल्प (C) कार्बोरेटर: यह पेट्रोल इंजन में हवा और ईंधन (Fuel) को मिलाने का काम करता है।
- विकल्प (D) इन्वेर्टर: यह डीसी (DC) करंट को एसी (AC) करंट में बदलने का एक विद्युत उपकरण है, जिसका वाहनों के निकास से कोई संबंध नहीं है।
#4. निम्नलिखित में से कौन-सा एथेनॉल का उपयोग है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- एथेनॉल (Ethanol – C2H5OH): यह एक महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक है जिसका उपयोग विभिन्न उद्योगों और उत्पादों में व्यापक रूप से किया जाता है।
- मादक पेय पदार्थ: इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के एल्कोहॉलिक ड्रिंक्स (जैसे बियर, वाइन, व्हिस्की) के निर्माण में मुख्य घटक के रूप में किया जाता है।
- औषधियाँ और सिरप: कई प्रकार की औषधियों, खाँसी के सिरप (Cough syrups), और टिंचर आयोडीन में एथेनॉल का उपयोग एक अच्छे विलायक (Solvent) के रूप में किया जाता है।
- पेंट और रसायन उद्योग: पेंट, वार्निश और विभिन्न कार्बनिक यौगिकों के विनिर्माण में भी इसका उपयोग विलायक के रूप में होता है।
- विकल्प (A), (B) और (C): ये तीनों ही एथेनॉल के सत्य उपयोग हैं। चूँकि अलग-अलग विकल्पों में दिए गए सभी कार्य एथेनॉल द्वारा किए जाते हैं, इसलिए केवल किसी एक विकल्प को चुनना सही नहीं होगा। अतः सही विकल्प (D) सभी विकल्प है।
#5. कौन-सा समीकरण, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ एल्युमिनियम की अभिक्रिया को सही ढंग से दर्शाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
- रासायनिक अभिक्रिया: जब एल्युमिनियम (Al) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह एल्युमिनियम क्लोराइड (AlCl3) और हाइड्रोजन गैस (H2) मुक्त करता है।
- सूत्र का निर्धारण: एल्युमिनियम की संयोजकता +3 होती है और क्लोरीन की -1, इसलिए बनने वाले यौगिक का रासायनिक सूत्र AlCl3 होता है।
- संतुलित समीकरण: द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार समीकरण को संतुलित करने पर सही रूप प्राप्त होता है:
2Al + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2
- विकल्प (A): यह रासायनिक समीकरण असंतुलित (Unbalanced) है, क्योंकि इसमें हाइड्रोजन और क्लोरीन के परमाणु दोनों तरफ समान नहीं हैं।
- विकल्प (B): इसमें अभिकारक पक्ष में 3 क्लोरिन परमाणु हैं जबकि उत्पाद पक्ष में 6 क्लोरिन परमाणु हैं, जिससे यह भी असंतुलित है।
- विकल्प (C): इसमें एल्युमिनियम क्लोराइड का गलत सूत्र (AlCl) दिया गया है, जबकि एल्युमिनियम की संयोजकता 3 होने के कारण सही सूत्र AlCl3 होता है।
#6. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया, उदासीनीकरण अभिक्रिया है?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब कोई अम्ल (Acid) किसी क्षार (Base) के साथ अभिक्रिया करता है, तो लवण और जल का निर्माण होता है (उदा. $HCl + NaOH \rightarrow NaCl + H_2O$)।
- दोहरा विस्थापन के रूप में वर्गीकरण: इस अभिक्रिया में अम्ल का $H^+$ आयन और क्षार का $OH^-$ आयन आपस में मिलकर जल बनाते हैं, जबकि शेष आयन परस्पर विनिमय (Exchange) करके लवण बनाते हैं। आयनों के इस आदान-प्रदान के कारण इसे दोहरा विस्थापन अभिक्रिया की श्रेणी में रखा जाता है।
- विकल्प (A) अपघटन (Decomposition): इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (B) दहन (Combustion): इसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करता है।
- विकल्प (D) एकल विस्थापन (Single displacement): इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करता है।
#7. पोटैशियम की परमाणु त्रिज्या सोडियम _______ है I
(RRB JE CBT I – : 31 May 2019 Shift 3)
- आवर्त सारणी में प्रवृत्ति (Periodic Trend): आवर्त सारणी में किसी समूह (Group) में ऊपर से नीचे जाने पर कक्षकों (Shells) की संख्या बढ़ती है, जिसके कारण परमाणु का आकार या परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) बढ़ती जाती है।
- सोडियम और पोटैशियम की स्थिति: सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) दोनों आवर्त सारणी के समूह 1 (क्षारीय धातुएँ) के सदस्य हैं। सोडियम तीसरी आवर्त में जबकि पोटैशियम चौथी आवर्त में आता है।
- निष्कर्ष: नीचे आने के कारण पोटैशियम (K) में कोशों की संख्या अधिक होती है, अतः पोटैशियम की परमाणु त्रिज्या सोडियम (Na) की तुलना में अधिक होती है।
- विकल्प (A) से आधी: समूह में नीचे जाने पर आकार बढ़ता है, घटता नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- विकल्प (B) के बराबर: अलग-अलग आवर्त के तत्वों के परमाणु आकार समान नहीं हो सकते।
- विकल्प (C) से कम: कोश बढ़ने के कारण परमाणु त्रिज्या कम होने के बजाय बढ़ जाती है।
#8. कपड़े धोते समय पानी में वाशिंग सोडा क्यों मिलाया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
- वाशिंग सोडा (धोने का सोडा): इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Chemical formula: $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) है।
- कठोरता दूर करना: पानी की स्थायी कठोरता मुख्य रूप से कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड तथा सल्फेट्स के कारण होती है। वाशिंग सोडा इन अशुद्धियों को अघुलनशील कार्बोनेट के रूप में अवक्षेपित करके जल को मृदु (Soft) बना देता है।
- सफाई प्रक्रिया: जब जल मृदु हो जाता है, तो साबुन या डिटर्जेंट पानी के साथ आसानी से झाग बनाते हैं और कपड़ों की मैल व चिकनाई प्रभावी ढंग से साफ हो जाती है।
- विकल्प (A) खुशबू लाना: कपड़ों में खुशबू लाने का कार्य डिटर्जेंट में मिलाए जाने वाले सुगंधित एजेंटों (Fragrance additives) का होता है।
- विकल्प (B) सिलवटें रोकना: कपड़ों को सिलवटों से बचाने या सुखाने से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
- विकल्प (D) ब्लीच करना: कपड़ों को ब्लीच करने या उनके रंग को निखारने के लिए ब्लीचिंग पाउडर ($\text{CaOCl}_2$) का उपयोग किया जाता है।
#9. किसी एंजाइम का माइकालिस-मेंटेन स्थिरांक (Km) किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 12 Jun, 2025 Shift 1)
- माइकालिस-मेंटेन स्थिरांक (Km): यह एंजाइम कैनेटीक्स (Enzyme kinetics) में एक बहुत ही महत्वपूर्ण पैरामीटर है जो एंजाइम और सबस्ट्रेट की परस्पर क्रिया को समझाता है।
- मानक परिभाषा: Km उस क्रियाधार या सबस्ट्रेट (Substrate) की सांद्रता है जिस पर एंजाइम-उत्प्रेरित अभिक्रिया की गति (Velocity, V) अपनी अधिकतम गति ($V_{max}$) की ठीक आधी होती है (अर्थात जब $V = \frac{V_{max}}{2}$)।
- महत्व (Affinity): Km का मान एंजाइम की अपने सबस्ट्रेट के प्रति बंधुता (Affinity) को दर्शाता है। जितना कम Km का मान होता है, एंजाइम की सबस्ट्रेट के प्रति affinity उतनी ही अधिक होती है।
- विकल्प (A): यह एंजाइम की सांद्रता नहीं बल्कि क्रियाधार (Substrate) की सांद्रता से संबंधित है।
- विकल्प (B): यह अधिकतम अभिक्रिया दर को दर्शाता है, जिसे $V_{max}$ कहा जाता है, न कि Km स्थिरांक।
- विकल्प (C): यह किसी अवरोधक (Inhibitor) की सांद्रता ($IC_{50}$) को परिभाषित करता है जो एंजाइम की गतिविधि को आधा कर देता है।
#10. परमाणु के आकार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए。कथन 1: परमाणु का आकार लगभग 0.1 nm से 0.5 nm के परास में होता है।कथन 2: आवर्त सारणी के एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता जाता है।कथन 3: हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या लगभग 10−10 मीटर होती है।उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- कथन 1 (सत्य): परमाणुओं का आकार अत्यंत सूक्ष्म होता है। सामान्यतः परमाणुओं की त्रिज्या का परास $10^{-10}\text{ m}$ (या लगभग 0.1 nm से 0.5 nm) की कोटि का होता है।
- कथन 2 (असत्य): आवर्त सारणी के किसी आवर्त (Period) में बाएं से दाएं जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर खिंचते हैं और परमाणु का आकार घटता जाता है (बढ़ता नहीं है)।
- कथन 3 (सत्य): हाइड्रोजन परमाणु ब्रह्मांड का सबसे छोटा परमाणु है, जिसकी त्रिज्या लगभग $10^{-10}\text{ मीटर}$ (अर्थात 0.1 nm) होती है।
- विकल्प (A), (B) और (C): इन सभी विकल्पों में कथन 2 को शामिल किया गया है, जो कि वैज्ञानिक रूप से गलत है (क्योंकि आवर्त में आकार घटता है), इसलिए ये सभी विकल्प अमान्य हैं।
#11. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन कार्बन की बहुमुखी प्रकृति का वर्णन करता है/करते हैं?a. अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ आबंध बनाकर बड़े अणुओं का निर्माण करने की क्षमता।b. अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ दोहरा आबंध बनाने की क्षमता।c. ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, हाइड्रोजन आदि जैसे अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की क्षमता।
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- कार्बन की बहुमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon): कार्बन में दो मुख्य गुणधर्म—शृंखलन (Catenation) और चतुःसंयोजकता (Tetravalency)—होते हैं, जिसके कारण यह अत्यधिक संख्या में यौगिक बनाता है।
- कथन a (शृंखलन): कार्बन में अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक आबंध बनाकर लंबी श्रृंखलाओं, शाखित श्रृंखलाओं या वलयों (Rings) वाले बड़े अणुओं का निर्माण करने की अद्भुत क्षमता होती है।
- कथन b (बहु-आबंध निर्माण): कार्बन की छोटी साइज के कारण यह अन्य कार्बन परमाणुओं या दूसरे तत्वों के साथ न केवल एकल (Single), बल्कि दोहरा (Double) और त्रिआबंध (Triple) भी आसानी से बना सकता है।
- कथन c (अन्य तत्वों से संयोग): कार्बन हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर और हैलोजन जैसे कई अन्य तत्वों के साथ मजबूत आबंध बनाकर स्थिर यौगिकों का निर्माण करता है।
- विकल्प (A), (C) और (D): ये विकल्प अधूरे हैं क्योंकि इनमें से किसी एक या दो कथनों को ही सही माना गया है, जबकि NCERT के अनुसार कार्बन की बहुमुखी प्रकृति में ये तीनों गुण (शृंखलन, बहु-आबंध और अन्य तत्वों के साथ आबंध) शामिल होते हैं। अतः विकल्प (B) पूरी तरह सही है।
#12. लोहे में जंग लगना _______ का एक उदाहरण है।
(RRB JE 23 May 2019 Shift 2)
- लोहे में जंग लगना: जब लोहे की वस्तु को नम वायु (oxygen और moisture) में खुला छोड़ा जाता है, तो उसकी सतह पर भूरे रंग की परत जम जाती है जिसे जंग (Rust) कहते हैं। इसका रासायनिक सूत्र $\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$ होता है।
- रेडॉक्स अभिक्रिया (उपचयन-अपचयन): यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है क्योंकि इसमें लोहे (Fe) का ऑक्सीजन द्वारा **उपचयन (Oxidation)** होता है और ऑक्सीजन का **अपचयन (Reduction)** होता है।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया: यद्यपि इसमें पदार्थ आपस में जुड़ते हैं, लेकिन मुख्य रूप से यह ऑक्सीकरण और अपचयन यानी रेडॉक्स प्रक्रिया के अंतर्गत आती है।
- विकल्प (C) उदासीनीकरण अभिक्रिया: यह अम्ल और क्षार के बीच होने वाली अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) वियोजन अभिक्रिया: इसमें कोई एकल यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है।
#13. सोडियम हाइड्रोक्साइड की जिंक (zinc) के साथ अभिक्रिया के फलस्वरूप _______ उत्पन्न होता है।
(RRB JE CBT I – : 31 May 2019 Shift 3)
- रासायनिक अभिक्रिया: जब जिंक (Zn) धातु को सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) के विलयन के साथ गर्म किया जाता है, तो यह अभिक्रिया करके सोडियम जिंकेट ($\text{Na}_2\text{ZnO}_2$) और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) का निर्माण करता है।
- संतुलित समीकरण: $\text{Zn} + 2\text{NaOH} \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2 + \text{H}_2\uparrow$
- विशेषता: सभी धातुएँ क्षारों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस नहीं बनाती हैं, लेकिन जिंक जैसी उभयधर्मी (Amphoteric) धातुएँ सोडियम हाइड्रोक्साइड जैसे प्रबल क्षारों के साथ अभिक्रिया कर लवण (सोडियम जिंकेट) और हाइड्रोजन गैस देती हैं।
- विकल्प (A) जिंक ऑक्साइड: यह इस अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद नहीं है।
- विकल्प (B) अभिक्रिया संभव नहीं है: यह कथन गलत है क्योंकि जिंक धातु NaOH के साथ आसानी से प्रतिक्रिया करती है।
- विकल्प (D) जिंक हाइड्रोक्साइड: यह सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ सीधी प्रतिक्रिया में नहीं बनता है।
#14. भारी हाइड्रोकार्बन को हल्के हाइड्रोकार्बन में तोड़ने के लिए किस प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है?
(RRB JE CBT-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1)
- भंजन प्रक्रिया (Cracking): यह एक ऐसी रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें उच्च तापमान, दबाव और उत्प्रेरक (Catalyst) की उपस्थिति में उच्च आणविक द्रव्यमान वाले भारी हाइड्रोकार्बन (जैसे भारी तेल या केरोसिन) को छोटे और हल्के हाइड्रोकार्बन (जैसे पेट्रोल या डीजल) में तोड़ा जाता है।
- पेट्रोलियम उद्योग में उपयोग: कच्चे तेल के प्रभाجی आसवन (Fractional distillation) के दौरान प्राप्त भारी अंशों को उपयोगी गैसोलीन (पेट्रोल) में बदलने के लिए क्रैकिंग या भंजन का व्यापक उपयोग किया जाता है।
- विकल्प (A) एल्किलीकरण (Alkylation): यह छोटे अणुओं को आपस में जोड़कर बड़े व उच्च ऑक्टane वाले हाइड्रोकार्बन बनाने की प्रक्रिया है, तोड़ने की नहीं।
- विकल्प (B) सुधार (Reforming): इसमें हाइड्रोकार्बन की संरचना को पुनर्व्यवस्थित (Rearrange) करके साखित (Branched) या एरोमैटिक यौगिकों में बदला जाता है।
- विकल्प (C) आसवन (Distillation): यह मिश्रण के क्वथनांक (Boiling points) के आधार पर विभिन्न घटकों को अलग करने की भौतिक विधि है, इसमें रासायनिक बंधों को तोड़ा नहीं जाता।
#15. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन द्विविस्थापन अभिक्रिया में होने वाली घटना का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है, उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- रासायनिक उदाहरण: जब बेरियम क्लोराइड ($\text{BaCl}_2$) के विलयन को सोडियम सल्फेट ($\text{Na}_2\text{SO}_4$) के विलयन में मिलाया जाता है, तो बेरियम सल्फेट ($\text{BaSO}_4$) का सफेद अवक्षेप और सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$) बनता है, जिसमें आयन परस्पर बदल जाते हैं।
- विकल्प (A): यह ‘संयोजन अभिक्रिया’ (Combination reaction) को परिभाषित करता है।
- विकल्प (B): यह ‘वियोजन अभिक्रिया’ (Decomposition reaction) की विशेषता है।
- विकल्प (C): यह सामान्यतः ‘रेडॉक्स या आयनिक बंधन’ से संबंधित प्रक्रिया है, न कि विशेष रूप से द्विविस्थापन का मुख्य विवरण।
#16. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प मिश्रणों के लिए सही है किंतु यौगिकों के लिए नहीं?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- मिश्रण (Mixture): मिश्रण में दो या दो से अधिक पदार्थ केवल भौतिक रूप से मिले होते हैं (कोई नया रासायनिक बंध नहीं बनता)। इसके घटकों को छानने, वाष्पीकरण, चुंबकीय पृथक्करण जैसी भौतिक विधियों द्वारा आसानी से अलग किया जा सकता है।
- यौगिक (Compound): इसके विपरीत, यौगिकों में तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं, और उनके घटकों को केवल साधारण भौतिक विधियों से अलग नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए रासायनिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (A): घटक निश्चित अनुपात में यौगिकों (Compounds) में होते हैं, मिश्रणों में नहीं (मिश्रण अनिश्चित अनुपात में हो सकते हैं)।
- विकल्प (C) और (D): नए पदार्थों का बनना और घटकों द्वारा अपने गुण खो देना यह यौगिकों की विशेषता है, मिश्रणों की नहीं।
#17. संयोजन अभिक्रिया का सामान्य रूप क्या है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 2)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वैसी रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (Reactants) परस्पर संयुक्त होकर केवल एक एकल उत्पाद (Single product) का निर्माण करते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है।
- सामान्य समीकरण: इसे प्रतीकात्मक रूप से इस प्रकार दर्शाया जाता है: A + B → AB (जैसे कोयلے का जलना: $\text{C} + \text{O}_2 \rightarrow \text{CO}_2$, या बिना बुझे चूने की पानी से क्रिया)।
- विकल्प (A) A → B + C: यह ‘वियोजन अभिक्रिया’ (Decomposition reaction) का रूप है जिसमें एक अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (B) AB → A + B: यह भी वियोजन या अपघटन अभिक्रिया को ही दर्शाता है।
- विकल्प (C) AB + CD → AC + BD: यह ‘द्विविस्थापन अभिक्रिया’ (Double displacement reaction) का सामान्य रूप है।
#18. संतुलित रासायनिक समीकरण द्वारा किस जानकारी को व्यक्त किया जाता है?
(RRB JE CBT I – : 2 June 2019 Shift 2)
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): एक संतुलित रासायनिक समीकरण हमें रासायनिक अभिक्रिया से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ देता है।
- सूत्र और पदार्थ: यह अभिकारकों (Reactants) और उत्पादों (Products) के रासायनिक सूत्रों और उनके भौतिक अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) को दर्शाता है।
- अणुओं/परमाणुओं की संख्या: समीकरण के गुणांक (Stoichiometric coefficients) प्रक्रिया में भाग लेने वाले अणुओं और परमाणुओं की कुल संख्या की जानकारी देते हैं।
- द्रव्यमान संबंध: द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, यह अभिकारकों और उत्पादों के बीच के सापेक्ष द्रव्यमान (Relative masses) को भी व्यक्त करता है। अतः सभी कथन सही हैं।
- विकल्प (A), (B) और (C): ये तीनों ही विकल्प सही हैं क्योंकि एक संतुलित समीकरण से ये सभी जानकारियाँ मिलती हैं। इसलिए केवल किसी एक को चुनना अधूरा होगा, और सही उत्तर (D) विकल्पों में से सभी होगा।
#19. एक रासायनिक अभिक्रिया में, अभिक्रिया शुरू होने से पहले शुरू में मौजूद पदार्थों को _______ कहा जाता है।
(RRB NTPC UG CBT-I : 01 Sept, 2025 Shift 3)
- अभिकारक (Reactants): रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले या अभिक्रिया शुरू होने से पहले शुरू में मौजूद मूल पदार्थों को अभिकारक कहा जाता है। इन्हें रासायनिक समीकरण में हमेशा बाईं ओर (Left-hand side) लिखा जाता है।
- उत्पाद (Products): इसके विपरीत, रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप जो नए पदार्थ बनकर तैयार होते हैं, उन्हें उत्पाद कहा जाता है और इन्हें समीकरण में दाईं ओर (Right-hand side) लिखा जाता है।
- विकल्प (B) उत्पाद: यह अभिक्रिया के बाद बनने वाले नए पदार्थ होते हैं, न कि शुरुआत में मौजूद रहने वाले।
- विकल्प (C) मध्यवर्ती: यह वे अस्थाई यौगिक होते हैं जो जटिल अभिक्रियाओं के दौरान बीच के चरणों (steps) में निर्मित होते हैं।
- विकल्प (D) उत्प्रेरक: यह वे बाहरी पदार्थ हैं जो रासायनिक अभिक्रिया की गति को बढ़ाते या घटाते हैं, लेकिन स्वयं अभिक्रिया में उपभोग नहीं होते।
#20. निर्वात में प्रकाश की चाल का किसी माध्यम से अनुपात क्या है?
(RRB NTPC Tier I : 22 Apr 2016 Shift 3)
- अपवर्तक सूचकांक (Refractive Index): किसी माध्यम का अपवर्तक सूचकांक निर्वात में प्रकाश की चाल और उस माध्यम में प्रकाश की चाल का अनुपात होता है। इसे सामान्यतः n या μ से दर्शाया जाता है।
- सूत्र: n = c / v (जहाँ c निर्वात में प्रकाश की चाल और v माध्यम में प्रकाश की चाल है)। यह एक मात्रकहीन राशि है।
- विकल्प (A) परावर्तक सूचकांक: यह प्रकाश के परावर्तन से संबंधित है, न कि चाल के अनुपात से।
- विकल्प (C) मेडिवेक सूचकांक: यह इस संदर्भ में कोई मान्य वैज्ञानिक शब्द नहीं है।
- विकल्प (D) वायु गुणवत्ता सूचकांक: यह वायु प्रदूषण और उसकी गुणवत्ता को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
#21. निम्नलिखित में से कौन सी असमानुपातन अभिक्रिया है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 23 Jun, 2025 Shift 1)
- असमानुपातन अभिक्रिया (Disproportionation Reaction): वह रेडॉक्स अभिक्रिया जिसमें एक ही तत्व का एक ही रासायनिक प्रजाति में بیک وقت (साथ-साथ) ऑक्सीकरण और अपचयन (Oxidation and Reduction) दोनों होता है, असमानुपातन अभिक्रिया कहलाती है।
- विश्लेषण: अभिक्रिया Cl2 + H2O → HCl + HOCl में क्लोरीन ($Cl_2$) की मूल ऑक्सीकरण अवस्था $0$ होती है। $HCl$ में क्लोरीन की ऑक्सीकरण अवस्था घटकर $-1$ (अपचयन) हो जाती है, जबकि $HOCl$ में यह बढ़कर $+1$ (ऑक्सीकरण) हो जाती है। चूँकि एक ही तत्व ($Cl$) का ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों हुआ है, इसलिए यह असमानुपातन अभिक्रिया है।
- विकल्प (A) Cu + HNO3: यह एक सामान्य रेडॉक्स अभिक्रिया है जिसमें अलग-अलग तत्व (Cu का ऑक्सीकरण और N का अपचयन) भाग लेते हैं।
- विकल्प (C) Zn + HCl: यह एक एकल विस्थापन (Single Displacement) अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) 2Na + Cl2: यह एक संयोजन (Combination) या योगात्मक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
#22. निम्नलिखित में से कौन-सा अपघटन अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )
- अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें कोई एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद प्रदान करता है, अपघटन अभिक्रिया कहलाती है।
- विश्लेषण: इस अभिक्रिया में कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) को गर्म करने पर यह टूटकर कैल्शियम ऑक्साइड ($CaO$) और कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) गैस बनाता है। चूँकि एक पदार्थ टूटकर दो नए पदार्थ बना रहा है, यह एक अपघटन (विशेषकर ऊष्मीय अपघटन) अभिक्रिया का उदाहरण है।
- विकल्प (A) H2 + O2 → H2O: यह एक संयोजन (Combination) अभिक्रिया है, जिसमें दो अभिकारक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (B) Mg + O2 → MgO: यह भी एक संयोजन अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) Na + Cl2 → NaCl: यह भी दो तत्वों के संयोजन से बनने वाला यौगिक है (संयोजन अभिक्रिया)।
#23. निम्न में से किस अभिक्रिया के माध्यम से नाइट्राइल्स और एस्टर से एल्डिहाइड का निर्माण किया जाता है?
(RPF SI Previous Paper : 5 Jan 2019 Shift 3)
- स्टीफन अभिक्रिया (Stephen Reaction): इस विधि में नाइट्राइल्स ($R-CN$) को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) की उपस्थिति में स्टैनस क्लोराइड ($SnCl_2$) द्वारा संगत इमीन में अपचयित किया जाता है, जिसका जल-अपघटन करने पर एल्डिहाइड प्राप्त होता है। इसी खंड के अंतर्गत एस्टरों का भी एल्डिहाइड में अपचयन अध्ययन किया जाता है।
- महत्वपूर्ण बिंदु: वैकल्पिक रूप से नाइट्राइलों और एस्टरों को DIBAL-H (डाइआइसोब्यूटिलएल्यूमिनियम हाइड्राइड) द्वारा भी चयनात्मक रूप से एल्डिहाइड में अपचयित किया जाता है।
- विकल्प (A): यह इस रासायनिक प्रक्रिया से संबंधित कोई मानक वैज्ञानिक नाम नहीं है।
- विकल्प (B) एटार्ड अभिक्रिया: इसके द्वारा टॉलूईन (Toluene) से बेंज़ल्डिहाइड का निर्माण किया जाता है।
- विकल्प (C) रोजेनमंड अभिक्रिया: इसके द्वारा एसिल क्लोराइड (Acid Chloride) से एल्डिहाइड का निर्माण किया जाता है।
#24. चिप्स-निर्माता पेकिंग से पहले चिप्स के बैगों (पैकेट) को नाइट्रोजन से क्यों भरते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
- विकृतगंधिता (Rancidity): तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थ जब हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में आते हैं, तो ऑक्सीकृत होकर अपनी गंध और स्वाद को बदल लेते हैं, इसे ही विकृतगंधिता कहते हैं।
- नाइट्रोजन गैस का उपयोग: नाइट्रोजन एक निष्क्रिय (अक्रिय) गैस है। चिप्स निर्माताओं द्वारा पैकेट में नाइट्रोजन भरने से ऑक्सीजन बाहर निकल जाती है, जिससे चिप्स का ऑक्सीकरण नहीं होता और वे लंबे समय तक ताज़ा व कुरकुरे बने रहते हैं।
- विकल्प (A): नाइट्रोजन तेल के ‘ऑक्सीकरण’ को रोकती है, न कि अपचयन (Reduction) को।
- विकल्प (B): नाइट्रोजन कोई रासायनिक परिरक्षक (Preservative) नहीं है, बल्कि यह एक अक्रिय वातावरण तैयार करती है।
- विकल्प (D): यह स्वाद संवर्द्धिकर (Flavor enhancer) नहीं है, बल्कि यह केवल भोजन को खराब होने से बचाती है।
#25. निम्नलिखित में से कौन सी रासायनिक अभिक्रिया संतुलित समीकरण का प्रतिनिधित्व नहीं करती है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 13 Aug, 2025 Shift 1)
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों (Reactants) और उत्पादों (Products) के दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।
- विकल्प (B) का विश्लेषण: इस समीकरण में बाएँ पक्ष (Reactants) में आयरन (Fe) के 4 परमाणु हैं, जबकि दाएँ पक्ष ($Fe_3O_4$) में Fe के केवल 3 परमाणु हैं। साथ ही, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के परमाणु भी दोनों तरफ समान नहीं हैं, इसलिए यह एक असंतुलित समीकरण है।
- विकल्प (A): $3Fe + 4H_2O → Fe_3O_4 + 4H_2$ एक संतुलित समीकरण है (Fe = 3, H = 8, O = 4 दोनों पक्षों में)।
- विकल्प (C): $Fe + H_2O → FeO + H_2$ एक संतुलित समीकरण है (Fe = 1, H = 2, O = 1 दोनों पक्षों में)।
- विकल्प (D): $2Fe + 3H_2O → Fe_2O_3 + 3H_2$ एक संतुलित समीकरण है (Fe = 2, H = 6, O = 3 दोनों पक्षों में)।
#26. ओजोन के एक अणु में ऑक्सीजन के कितने परमाणु होते हैं?
(RRB NTPC CBT-I : 5 Jan 2021 Shift 2)
- ओजोन ($O_3$): ओजोन ऑक्सीजन का एक अपरूप (Allotrope) है। इसके एक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु आपस में सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े होते हैं, इसलिए इसका रासायनिक सूत्र $O_3$ होता है।
- महत्वपूर्ण बिंदु: यह वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में पाई जाती है और सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है।
- विकल्प (B) 1: यह ऑक्सीजन के एक एकल परमाणु (Atomic oxygen) को दर्शाता है।
- विकल्प (C) 4: यह चार परमाणुओं वाले अणुओं (जैसे फास्फोरस, $P_4$) की परमाणुकता को दर्शाता है।
- विकल्प (D) 2: यह सामान्य ऑक्सीजन गैस ($O_2$) के एक अणु में उपस्थित परमाणुओं की संख्या है (जो एक द्विपरमाणुक अणु है)।
#27. अभिकथन-कारण कथन के संबंध में कृपया सही विकल्प का चयन कीजिए।अभिकथन: कॉन्फ्रेंस हॉल की छतें वक्रित बनाई जाती हैं।कारण: वक्रित छतें हॉल में ध्वनि को समान रूप से प्रसारित करने में सहायता करती हैं।
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- अभिकथन और कारण की सत्यता: कॉन्फ्रेंस हॉल, सिनेमा हॉल या बड़े सभागारों की छतें आमतौर पर वक्रित (Curved) बनाई जाती हैं ताकि ध्वनि परावर्तन के नियमों का पालन करते हुए हॉल के हर कोने तक आसानी से पहुँच सके।
- कार्यप्रणाली: वक्रित छत से टकराने के बाद ध्वनि तरंगें हॉल के विभिन्न हिस्सों में समान रूप से परावर्तित (Reflected) होती हैं, जिससे श्रोताओं को स्पष्ट आवाज़ सुनाई देती है। इसलिए कारण, अभिकथन की बिल्कुल सही व्याख्या करता है।
- विकल्प (B): इसमें अभिकथन को असत्य बताया गया है जो कि गलत है, क्योंकि छतें वास्तव में वक्रित बनाई जाती हैं।
- विकल्प (C): इसमें कारण को असत्य बताया गया है, जबकि वक्रित छत का मुख्य उद्देश्य ध्वनि का समान प्रसारण ही होता है।
- विकल्प (D): इसमें दोनों कथनों को असत्य माना गया है, जो वैज्ञानिक रूप से गलत है।
#28. पानी के घनत्व की तुलना में बर्फ का घनत्व _______ होता है。
(RRB ALP CBT 2 Electrician Previous Paper : 22 Jan 2019 Shift 3)
- घनत्व (Density): पानी का घनत्व बर्फ की तुलना में अधिक होता है। यही कारण है कि बर्फ पानी पर तैरती है।
- संरचनात्मक कारण: जब पानी जमता है, तो हाइड्रोजन आबंधों (Hydrogen bonds) के कारण इसकी आणविक संरचना पिंजरे जैसी (Caged structure) हो जाती है, जिससे अणुओं के बीच की दूरी बढ़ जाती है और आयतन बढ़ जाता है, फलस्वरूप घनत्व कम हो जाता है (लगभग $0.917\text{ g/cm}^3$)।
- विकल्प (B) अधिक: यदि बर्फ का घनत्व पानी से अधिक होता, तो बर्फ पानी में डूब जाती।
- विकल्प (C) नगण्य: बर्फ का घनत्व शून्य या नगण्य नहीं होता, बल्कि यह ठोस अवस्था में निश्चित मान रखता है।
- विकल्प (D) बराबर: पानी और बर्फ दोनों का घनत्व अलग-अलग होता है (पानी का अधिकतम घनत्व $4^\circ C$ पर सबसे अधिक होता है)।
#29. यौगिक सोडियम कार्बोनेट का रासायनिक सूत्र _______ होता है。
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )
- सोडियम कार्बोनेट ($Na_2CO_3$): इसे आमतौर पर ‘धोने का सोडा’ (Washing Soda) कहा जाता है। इसका रासायनिक सूत्र $Na_2CO_3$ होता है (सामान्यतः यह डेकाहाइड्रेट $Na_2CO_3 \cdot 10H_2O$ के रूप में पाया जाता है)।
- रासायनिक संयोजन: इसमें सोडियम ($Na^+$) की संयोजकता +1 और कार्बोनेट आयन ($CO_3^{2-}$) की संयोजकता -2 होती है, जिसके क्रॉस-संयोजन से यह सूत्र बनता है।
- विकल्प (A) $Na_3CO_2$: यह सोडियम कार्बोनेट का रासायनिक रूप से मान्य सूत्र नहीं है।
- विकल्प (B) $Na_3CO_4$: यह सोडियम और कार्बोनेट का कोई मानक यौगिक नहीं है।
- विकल्प (D) $Na_3CO_3$: यह सोडियम की गलत संयोजकता के कारण अमान्य सूत्र है।
#30. Hf प्रतीक वाले तत्व हैफ्नियम का नाम निम्नलिखित में से किस स्थान पर दिया गया है। A. जर्मनी B. कोपेनहेगन C. स्वीडन D. फ्रांस
(RRB NTPC Tier I : 18 Apr 2016 Shift 2)
- हैफ्नियम (Hafnium – Hf): यह परमाणु क्रमांक 72 वाला एक संक्रमण धातु (Transition Metal) है।
- नामकरण का आधार: इस तत्व का नाम ‘हैफ्निया’ (Hafnia) के नाम पर रखा गया है, जो डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन (Copenhagen) का लैटिन नाम है। इसी शहर में वैज्ञानिकों द्वारा इसकी खोज की गई थी।
- विकल्प (A) C (स्वीडन): यहाँ हैफ्नियम का नाम नहीं रखा गया था (हालाँकि इसके खोज में स्वीडन के वैज्ञानिकों का योगदान रहा है, पर नामकरण कोपेनहेगन के लैटिन नाम पर है)।
- विकल्प (B) D (फ्रांस): फ्रांस से इस तत्व के नामकरण का कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) A (जर्मनी): जर्मनी इस तत्व के नामकरण का स्थान नहीं है। (ध्यान दें कि परीक्षा के ऑप्शन में (C) विकल्प ‘B’ के रूप में दिया गया है)।
#31. धात्विक ऑक्साइड और अम्ल के बीच अभिक्रिया के लिए सही और संतुलित रासायनिक समीकरण कौन-सा विकल्प दर्शाता है? CuO + HCl → _______ + _______
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1)
- धात्विक ऑक्साइड और अम्ल की अभिक्रिया: धातु के ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय प्रकृति के होते हैं। जब कोई धात्विक ऑक्साइड किसी अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तो लवण और जल बनते हैं (यह एक प्रकार की उदासीनीकरण अभिक्रिया है)।
- समीकरण विश्लेषण: कॉपर ऑक्साइड ($CuO$, काले रंग का) जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) के साथ अभिक्रिया करता है, तो कॉपर क्लोराइड ($CuCl_2$) बनता है जिससे विलयन का रंग नीला-हरा हो जाता है, और साथ में जल ($H_2O$) निकलता है।
- विकल्प (B): इसमें उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन गैस ($O_2$) दिखाई गई है, जो इस अभिक्रिया में उत्पन्न नहीं होती।
- विकल्प (C): यह समीकरण असंतुलित होने के साथ-साथ गलत रासायनिक उत्पादों को दर्शाता है।
- विकल्प (D): इसमें हाइड्रोजन गैस ($H_2$) और गलत लवण ($CuCl$) दिखाया गया है, जबकि सही उत्पाद जल और कॉपर(II) क्लोराइड है।
#32. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन स्थिर अनुपात के नियम का सर्वोत्तम रूप से वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions): इस नियम का प्रतिपादन जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने किया था। इसके अनुसार, किसी भी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा निश्चित द्रव्यमान के अनुपात में संयुक्त होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो (जैसे पानी $H_2O$ में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात हमेशा $1:8$ होता है)।
- विकल्प (B): यह कथन परमाणु के विभाज्य होने या रासायनिक अभिक्रियाओं से संबंधित अन्य अवधारणाओं की ओर संकेत करता है, स्थिर अनुपात का नहीं।
- विकल्प (C): यह कथन बिल्कुल गलत है क्योंकि यौगिकों में तत्व हमेशा एक ‘निश्चित’ अनुपात में होते हैं, ‘यादृच्छिक’ (Random) अनुपात में नहीं।
- विकल्प (D): यह कथन ‘द्रव्यमान संरक्षण के नियम’ (Law of Conservation of Mass) का वर्णन करता है, न कि स्थिर अनुपात के नियम का।
#33. NaCl और NH4Cl के मिश्रण को अलग करने के लिए निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग किया जा सकता है?
(RRB NTPC CBT-I : 19 Jan 2021 Shift 1)
- उर्ध्वपातन (Sublimation): यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रव (liquid) अवस्था में बदले सीधे वाष्प (gas) में परिवर्तित हो जाता है और ठंडा होने पर वापस ठोस बन जाता है।
- मिश्रण का पृथक्करण: अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$) एक उर्ध्वपातनशील (sublimable) पदार्थ है, जबकि सोडियम क्लोराइड ($NaCl$) नहीं है। जब इस मिश्रण को गर्म किया जाता है, तो $NH_4Cl$ वाष्प बनकर उड़ जाता है और पात्र में केवल $NaCl$ शेष बच जाता है।
- विकल्प (A) क्रिस्टलीकरण (Crystallization): इसका उपयोग विलायक से विलेय ठोस को क्रिस्टल के रूप में शुद्ध करने के लिए किया जाता है, इस ठोस मिश्रण को अलग करने के लिए नहीं।
- विकल्प (B) केंद्रापसरण (Centrifugation): इसका उपयोग कोलाइडियल या निलंबित कणों (जैसे दूध से क्रीम) को अलग करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) क्रोमैटोग्राफी (Chromatography): इसका उपयोग एक ही विलायक में घुले हुए विभिन्न विलेय पदार्थों (जैसे रंगों या पिग्मेंट) को अलग करने के लिए किया जाता है।
#34. जब कोई अम्ल किसी अभिक्रियाशील धातु के साथ अभिक्रिया करता है, तो किन उत्पादों का निर्माण होता है?
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )
- अम्ल और धातु की अभिक्रिया: जब कोई सक्रिय धातु (जैसे जिंक, आयरन, मैग्नीशियम आदि) किसी तनु अम्ल (जैसे $HCl$ या $H_2SO_4$) के साथ अभिक्रिया करती है, तो संगत लवण (Salt) का निर्माण होता है और हाइड्रोजन गैस ($H_2$) मुक्त होती है।
- रासायनिक समीकरण उदाहरण: $\text{Zn} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{ZnCl}_2 + \text{H}_2\uparrow$ (यहाँ जिंक क्लोराइड एक लवण है और हाइड्रोजन गैस बाहर निकलती है, जिसकी पुष्टि जलती हुई तीली ले जाने पर ‘पॉप’ (Pop) की आवाज़ आने से होती है)।
- विकल्प (A): अम्ल और धातु की अभिक्रिया से क्षार या हाइड्रोजन परॉक्साइड नहीं बनते।
- विकल्प (B): कार्बन डाइऑक्साइड गैस तब निकलती है जब कोई अम्ल धातु कार्बोनेट या हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करता है, न कि केवल सक्रिय धातु के साथ।
- विकल्प (D): इस अभिक्रिया में धातु ऑक्साइड और नाइट्रोजन गैस नहीं बनती है।
#35. बर्फ को पिघलाने के लिए निम्नलिखित में से किस का प्रयोग किया जाता है?
(RRB NTPC Tier I : 18 Apr 2016 Shift 2)
- बर्फ पिघलाने में नमक का उपयोग (Salting of Ice): ठंडे देशों में बर्फीली सड़कों या रास्तों से बर्फ हटाने के लिए साधारण नमक ($NaCl$) या कैल्शियम क्लोराइड का छिड़काव किया जाता है।
- हिमांक अवनमन (Freezing Point Depression): जब बर्फ पर नमक डाला जाता है, तो यह घुल जाता है जिससे विलयन का हिमांक बिंदु $0^\circ C$ से नीचे गिर जाता है। इस प्रक्रिया को हिमांक अवनमन कहते हैं, जिसके कारण बर्फ जल्दी पिघल जाती है और दोबारा आसानी से जमती नहीं है।
- विकल्प (A) C (कॉस्टिक सोडा): यह सोडियम हाइड्रोक्साइड ($NaOH$) है, जिसका उपयोग बर्फ पिघलाने के लिए नहीं किया जाता।
- विकल्प (C) D (साइड्रिक एसिड): यह नीबू या खट्टे फलों में पाया जाने वाला साइट्रिक अम्ल है, जो बर्फ पिघलाने में प्रभावी नहीं है।
- विकल्प (D) B (हाइड्रोजन): हाइड्रोजन गैस का बर्फ पिघलाने से कोई संबंध नहीं है। (ध्यान दें कि परीक्षा के विकल्पों में सही उत्तर ‘A’ विकल्प B के रूप में दिया गया है)।
#36. उपयुक्त विकल्प के साथ रिक्त स्थान भरिए: _______ नीले लिटमस को लाल कर देता है और एक _______ लिटमस को नीला कर देता है। I. AB.
(RRB NTPC Tier I : 29 Apr 2016 Shift 2)
- लिटमस पेपर परीक्षण (Litmus Paper Test): लिटमस एक प्राकृतिक सूचक (Indicator) है जो अम्लीय और क्षारीय माध्यम की पहचान करने के काम आता है।
- नियम:
- अम्ल (Acid): नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है।
- क्षार (Base): लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है।
इस प्रकार रिक्त स्थान में क्रमशः **अम्ल** और **क्षार** शब्द आएंगे।
- विकल्प (A) C: इसमें क्षार और अम्ल का उल्टा क्रम दिया गया है जो गलत है।
- विकल्प (B) A: इसमें भी गलत क्रम और रंग का मेल दिया गया है।
- विकल्प (D) B: इसमें ‘हरा’ जैसे अमान्य रंग का उल्लेख है, जो लिटमस परीक्षण में नहीं होता। (ध्यान दें कि परीक्षा के विकल्पों में सही क्रम ‘D’ विकल्प C के रूप में दिया गया है)।
#37. निम्नलिखित अभिक्रिया के संतुलित उत्पाद क्या हैं? Na2SO4 (aq) + BaCl2 (aq) → _______ + _______
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 3)
- द्विविस्थापन और अवक्षेपण अभिक्रिया (Double Displacement & Precipitation Reaction): जब सोडियम सल्फेट ($Na_2SO_4$) और बेरियम क्लोराइड ($BaCl_2$) के विलयन को मिलाया जाता है, तो आयनों का आदान-प्रदान होता है।
- उत्पाद: इस अभिक्रिया में बेरियम सल्फेट ($BaSO_4$) का सफेद रंग का अघुलनशील अवक्षेप प्राप्त होता है, जो नीचे बैठ जाता है, और सोडियम क्लोराइड ($NaCl$) विलयन में ही रहता है। संतुलित समीकरण: $\text{Na}_2\text{SO}_4(aq) + \text{BaCl}_2(aq) \rightarrow \text{BaSO}_4(s)\downarrow + 2\text{NaCl}(aq)$
- विकल्प (B) और (C): इनमें गलत रासायनिक सूत्र ($BaSO_2$) और अवांछित गैसों ($O_2$) का निर्माण दिखाया गया है, जो इस अभिक्रिया में नहीं बनती हैं।
- विकल्प (D): यह विकल्प (A) के बिल्कुल समान है (परीक्षा में टाइपिंग त्रुटि के कारण दोनों एक जैसे हो सकते हैं), और रासायनिक रूप से यह भी सही संयोजन है।
#38. जब सोडियम हाइड्रोक्साइड कॉपर ( II ) सल्फेट विलयन के साथ अभिक्रिया करता है, तो क्या होता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)
- क्षार और लवण की अभिक्रिया: जब सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$) कॉपर (II) सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के नीले रंग के विलयन के साथ अभिक्रिया करता है, तो आयनों का आदान-प्रदान होता है।
- रासायनिक समीकरण और अवक्षेप: $\text{CuSO}_4(aq) + 2\text{NaOH}(aq) \rightarrow \text{Cu(OH)}_2(s)\downarrow + \text{Na}_2\text{SO}_4(aq)$। इस अभिक्रिया में कॉपर (II) हाइड्रोक्साइड ($\text{Cu(OH)}_2$) का नीले रंग का अवक्षेप बनता है जो नीचे बैठ जाता है।
- विकल्प (B) सोडियम सल्फेट बनता है: सोडियम सल्फेट भी बनता है, लेकिन मुख्य और विशिष्ट उत्पाद के रूप में कॉपर हाइड्रोक्साइड का अवक्षेपित होना इस अभिक्रिया की मुख्य पहचान है (यदि विकल्पों में एक चुनना हो तो मुख्य अवक्षेप वाला विकल्प प्राथमिकता पाता है)।
- विकल्प (C) कोई अभिक्रिया नहीं होती है: यह गलत है क्योंकि इनके बीच तीव्र रासायनिक अभिक्रिया होती है।
- विकल्प (D) कॉपर धातु निक्षेपत होती है: यहाँ कॉपर धातु नहीं बल्कि कॉपर का यौगिक (हाइड्रॉक्साइड) बनता है।
#39. जिंक ऑक्साइड की कार्बन के साथ अभिक्रिया से निम्नलिखित में से क्या उत्पन्न होता है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 3)
- कार्बन द्वारा अपचयन (Reduction by Carbon): जब जिंक ऑक्साइड ($\text{ZnO}$) को कार्बन ($\text{C}$) के साथ गर्म किया जाता है, तो कार्बन एक अपचायक (Reducing agent) के रूप में कार्य करता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{ZnO}(s) + \text{C}(s) \rightarrow \text{Zn}(s) + \text{CO}(g)$। इस अभिक्रिया में जिंक ऑक्साइड, जिंक धातु में अपचयित हो जाता है और कार्बन, कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) में ऑक्सीकृत हो जाता है।
- विकल्प (A) केवल CO: इसमें केवल कार्बन मोनोऑक्साइड दिखाई गई है जबकि जिंक धातु भी उत्पन्न होती है।
- विकल्प (B) केवल Zn: इसमें केवल जिंक दिखाया गया है जबकि उप-उत्पाद के रूप में CO गैस भी निकलती है।
- विकल्प (D) Zn और $CO_2$: इस अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) नहीं बल्कि कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) बनती है।
#40. उस अभिक्रिया का नाम क्या है जिसमें अम्ल और क्षार की अभिक्रिया से लवण और जल उत्पन्न होते हैं?
(RPF Constable 2018 16 Feb 2019)
- उदासीनीकरण या निराकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब कोई अम्ल (Acid) किसी क्षार (Base) के साथ अभिक्रिया करता है, तो दोनों एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त (उदासीन) कर देते हैं, जिससे परिणाम स्वरूप लवण (Salt) और जल ($H_2O$) का निर्माण होता है।
- सामान्य समीकरण: $\text{अम्ल} + \text{क्षार} \rightarrow \text{لवण (Salt)} + \text{जल (Water)}$ (उदाहरण के लिए: $\text{HCl} + \text{NaOH} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O}$).
- विकल्प (A) योगात्मक अभिक्रिया (Addition/Combination Reaction): इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं।
- विकल्प (C) विस्थापन प्रतिक्रिया (Displacement Reaction): इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करता है।
- विकल्प (D) अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): इसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है।
#41. वे अभिक्रियाएं जिनमें उत्पादों के साथ ऊष्मा उत्सर्जित होती है, उनको क्या कहा जाता है?
(RRB JE 23 May 2019 Shift 3)
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ भारी मात्रा में ऊष्मा (Heat) या ऊर्जा भी उत्सर्जित होती है, उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहा जाता है।
- प्रमुख उदाहरण: प्राकृतिक गैस का दहन, श्वसन (Respiration) की प्रक्रिया, और बिना बुझे चूने ($\text{CaO}$) की पानी के साथ अभिक्रिया, जिसमें ऊष्मा निकलती है।
- विकल्प (A) संयोजन अभिक्रियाएं (Combination Reactions): इसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया यौगिक बनाते हैं (हालाँकि कई संयोजन अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी भी हो सकती हैं, पर यह परिभाषा ऊष्मा उत्सर्जन पर आधारित है)।
- विकल्प (C) विस्थापन अभिक्रियाएं (Displacement Reactions): इसमें एक तत्व दूसरे तत्व का स्थान लेता है।
- विकल्प (D) ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ (Endothermic Reactions): ये वे अभिक्रियाएँ होती हैं जिनमें अभिक्रिया संपन्न होने के लिए ऊष्मा या ऊर्जा का ‘अवशोषण’ होता है (न कि उत्सर्जन)।
#42. I’ धारा वहन करने वाली एक परनालिका के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र ‘B’ है। यदि परनालिका से प्रवाहित होने वाली धारा को आधा कर दिया जाए, तो परनालिका के कारण उत्पन्न चुंबकीय (अन्य सभी प्राचलों को समान रखते हुए) कितना होगा?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- परनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field inside a Solenoid): परनालिका के भीतर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र ($B$) का सूत्र होता है: $B = \mu_0 n I$, जहाँ $\mu_0$ निर्वात की पारगम्यता, $n$ प्रति एकांक लंबाई में फेरों की संख्या, और $I$ प्रवाहित धारा है।
- संबंध: इस सूत्र से स्पष्ट है कि चुंबकीय क्षेत्र ($B$), परनालिका में बहने वाली धारा ($I$) के सीधे समानुपाती ($B \propto I$) होता है। अतः यदि धारा को आधा ($I/2$) कर दिया जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र भी घटकर आधा ($B/2$) हो जाएगा।
- विकल्प (A) B/4: यह मान तब होता जब चुंबकीय क्षेत्र धारा के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती या किसी अन्य द्वितीयक प्रभाव पर निर्भर करता, जो यहाँ लागू नहीं होता।
- विकल्प (B) 2B: यह स्थिति तब होती जब धारा को दोगुना किया जाता, न कि आधा।
- विकल्प (D) B: यदि धारा परिवर्तित की जा रही है, तो चुंबकीय क्षेत्र अपरिवर्तित नहीं रह सकता क्योंकि यह सीधे धारा पर निर्भर करता है।
#43. कौन-सा कथन, यौगिक जल के स्थिर अनुपात के नियम का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026)
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions): इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक यौगिक (जैसे जल, $H_2O$) में तत्व हमेशा भार या द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में ही आपस में जुड़े होते हैं।
- जल ($H_2O$) का उदाहरण: पानी चाहे किसी भी स्रोत (नल, नदी, समुद्र या वर्षा) से लिया जाए, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा $1:8$ ही रहता है (चूँकि 2 H परमाणु का द्रव्यमान $2\text{u}$ और O का द्रव्यमान $16\text{u}$ होता है, अनुपात $2:16 = 1:8$)।
- विकल्प (A): यह कथन द्रव्यमान संरक्षण के नियम के विरुद्ध है, क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान हमेशा संरक्षित रहता है (अधिक नहीं होता)।
- विकल्प (B): यौगिकों के गुणधर्म (Properties) उनके घटक तत्वों के मूल गुणधर्मों से पूरी तरह भिन्न होते हैं (जैसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस हैं, जबकि पानी तरल और आग बुझाने वाला है)।
- विकल्प (D): यह कथन गलत है क्योंकि तत्व कभी भी ‘यादृच्छिक या किसी भी’ अनुपात में मिलकर निश्चित यौगिक नहीं बनाते, बल्कि उनका अनुपात हमेशा फिक्स होता है।
#44. निम्नलिखित में से किस खतरनाक पदार्थ से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है?
(RRB ALP Fitter 23 Jan 2019 Shift 1)
- ऐस्बेस्टस (अदह) और फेफड़ों का कैंसर: ऐस्बेस्टस एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला खनिज रेशा है जिसका उपयोग निर्माण सामग्री और इन्सुलेशन में किया जाता है। इसके अतिसूक्ष्म कण हवा में फैलकर सांस के जरिए फेफड़ों में चले जाते हैं।
- स्वास्थ्य प्रभाव: फेफड़ों में ये रेशे जमा होकर गंभीर बीमारियों जैसे फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer), मीसोथेलियोमा (Mesothelioma) और ऐस्बेस्टोसिस (Asbestosis) का कारण बनते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार ऐस्बेस्टस एक प्रमुख कैंसरकारक (Carcinogen) पदार्थ है।
- विकल्प (A) बेंजीन वाष्प: बेंजीन मुख्य रूप से ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) और अस्थि मज्जा से जुड़ी समस्याओं के लिए जिम्मेदार होता है।
- विकल्प (C) शाकनाशी (Herbicides): इनका संबंध मुख्य रूप से त्वचा संबंधी समस्याएं, तंत्रिका तंत्र या अन्य प्रकार के विषैले प्रभावों से होता है।
- विकल्प (D) आर्सेनिक: यह मुख्य रूप से त्वचा, मूत्राशय और फेफड़ों के कैंसर से जुड़ा है, लेकिन औद्योगिक जोखिमों और विशिष्ट फेफड़ों के कैंसर के संदर्भ में ऐस्बेस्टस कणों को सबसे प्रमुखता से उत्तर माना जाता है।
#45. रात में पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए, क्योंकि उससे _______ I
(RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- पौधों की श्वसन प्रक्रिया (Respiration in Plants): दिन के समय पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के दौरान सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- रात की स्थिति: रात के समय सूर्य का प्रकाश न होने के कारण प्रकाश संश्लेषण बंद हो जाता है, लेकिन पौधे सभी जीवों की तरह श्वसन क्रिया जारी रखते हैं और वातावरण में **कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$)** गैस छोड़ते हैं। इस कारण पेड़ के नीचे ऑक्सीजन की कमी और $\text{CO}_2$ की अधिकता के कारण घुटन महसूस हो सकती है।
- विकल्प (A) कार्बन मोनोऑक्साइड: यह जहरीली गैस वाहनों के धुएं या अधूरे दहन से निकलती है, पेड़ों द्वारा स्वाभाविक रूप से नहीं।
- विकल्प (B) नाइट्रोजन गैस: पौधे श्वसन के दौरान नाइट्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं करते।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन गैस: पौधे रात में ऑक्सीजन नहीं बल्कि केवल दिन में प्रकाश संश्लेषण के दौरान छोड़ते हैं।
#46. तांबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण में निम्नलिखित में से किस विद्युत अपघट्य का उपयोग किया जाता है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2)
- तांबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining of Copper): इस प्रक्रिया में अशुद्ध तांबे को एनोड (Anode) और शुद्ध तांबे की पतली पट्टी को कैथोड (Cathode) बनाया जाता है।
विद्युत अपघट्य (Electrolyte): इस प्रक्रिया में अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन ($\text{CuSO}_4$ में थोड़ा सा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल मिला हुआ) का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में किया जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से शुद्ध तांबा घुलकर विलयन में आता है और कैथोड पर निक्षेपित ( जमा) हो जाता है।
- विकल्प (A) CuO (कॉपर ऑक्साइड): यह एक धात्विक ऑक्साइड है, जिसका उपयोग विद्युत अपघटनी परिष्करण में घोल के रूप में नहीं किया जाता।
- विकल्प (B) $\text{Cu}_2\text{Cl}_2$: यह कॉपर का क्लोराइड यौगिक है, जो तांबे के शोधन के लिए मानक विद्युत अपघट्य नहीं है।
- विकल्प (D) $\text{Na}_2\text{SO}_4$ (सोडियम सल्फेट): यह सोडियम का लवण है, जिसमें तांबे के आयन नहीं होते हैं, अतः यह तांबे के परिष्करण में उपयोगी नहीं है।
#47. मछलियों के हृदयों में _______ कक्ष होते हैं और उनका रक्त एक पूर्ण चक्र में केवल _______ हृदय से होकर गुजरता है।
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- मछलियों का हृदय (Heart of Fishes): मछलियों का हृदय द्विकक्षीय (2-chambered) होता है, जिसमें एक आलिंद (Atrium) और एक निलय (Ventricle) पाया जाता है।
- एकल परिसंचरण (Single Circulation): इनमें एकल रक्त परिसंचरण होता है; अर्थात, शरीर का पूरा चक्कर लगाने के दौरान रक्त हृदय से केवल एक बार (Once) ही होकर गुजरता है (गलफड़ों से ऑक्सीजनित होकर सीधे शरीर के अंगों में प्रवाहित होता है)।
- विकल्प (A) तीन; दो बार: तीन कक्षों वाला हृदय उभयचरों (Amphibians) और अधिकांश सरीसृपों में होता है।
- विकल्प (B) चार; एक बार: चार कक्षीय हृदय पक्षियों (Birds) और स्तनधारियों (Mammals) में पाया जाता है, जिनमें दोहरा परिसंचरण होता है।
- विकल्प (C) दो; दो बार: कक्ष तो दो होते हैं, लेकिन रक्त चक्र के दौरान हृदय से दो बार नहीं बल्कि केवल एक बार गुजरता है।
#48. वसा और तेल के ऑक्सीकृत होने पर निम्नलिखित में से कौन-सा परिवर्तन होता है?
(RRB JE EE 1 Sept 2019 Shift 1 CBT 2)
- विकृतगंधिता (Rancidity): जब वसा और तेलयुक्त खाद्य पदार्थ लंबे समय तक हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में रहते हैं, तो उनका ऑक्सीकरण हो जाता है, जिससे वे विकृतगंधित या बासी (Rancid) हो जाते हैं।
- मुख्य प्रभाव: ऑक्सीकरण के कारण इनके प्राकृतिक गंध और स्वाद में परिवर्तन आ जाता है, जिससे खाद्य पदार्थ खाने योग्य नहीं रहते।
- विकल्प (A): ऑक्सीकरण के बाद खाद्य पदार्थ ‘अच्छी गंध’ नहीं बल्कि खराब और अरुचिकर गंध देते हैं।
- विकल्प (B): वे अप्रभावित नहीं रहते, बल्कि रासायनिक रूप से परिवर्तित होकर खराब हो जाते हैं।
- विकल्प (D): इससे स्वाद बेहतर नहीं होता बल्कि खराब हो जाता है।
#49. एल्यूमीनियम की ऐनोडीकरण प्रक्रिया में सल्फ्यूरिक अम्ल की क्या भूमिका होती है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025)
- एल्यूमीनियम का ऐनोडीकरण (Anodizing of Aluminium): यह एल्यूमीनियम पर एल्यूमीनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$) की एक मोटी और मजबूत परत बनाने की एक प्रक्रिया है ताकि इसे संक्षारण (Corrosion/जंग) से बचाया जा सके।
- सल्फ्यूरिक अम्ल की भूमिका: इस प्रक्रिया में एल्यूमीनियम की वस्तु को एनोड बनाया जाता है और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) का उपयोग वैद्युत-अपघट्य (Electrolyte) के रूप में किया जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर ऑक्सीजन गैस उत्पन्न होती है जो एनोड (एल्यूमीनियम) के साथ मिलकर ऑक्साइड की एक सुंदर और टिकाऊ परत का निर्माण करती है।
- विकल्प (A): सल्फ्यूरिक अम्ल के उपयोग से एल्यूमीनियम क्लोराइड नहीं बनता (क्लोराइड के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल चाहिए)।
- विकल्प (B): यह ऑक्सीकरण को रोकता नहीं है, बल्कि नियंत्रित तरीके से ऑक्सीकरण को बढ़ावा देकर ऑक्साइड परत बनाता है।
- विकल्प (C): यह एल्यूमीनियम को पूरी तरह विघटित नहीं करता, बल्कि उसकी सतह को और अधिक सुरक्षित व मजबूत बनाता है।
#50. जब कैल्शियिम कार्बोनेट को गर्म किया जाता है, तो यह अपघटित होकर _______ और _______ देता है।
(RRB JE CE 29 Aug 2019 Shift 2 CBT 2)
- ऊष्मीय अपघटन अभिक्रिया (Thermal Decomposition Reaction): जब कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$, चूना पत्थर) को गर्म किया जाता है, तो यह ऊष्मा पाकर विघटित हो जाता है।
रासायनिक समीकरण: $\text{CaCO}_3(s) \xrightarrow{\text{Heat}} \text{CaO}(s) + \text{CO}_2(g)$। इस प्रक्रिया में कैल्शियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$, जिसे बिना बुझा चूना या क्विकलाइम कहते हैं) ठोस अवशेष के रूप में और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस बाहर निकलती है। इस अभिक्रिया का उपयोग सीमेंट उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
- विकल्प (A) $\text{Ca}_2\text{O}_2, \text{CO}_2$: यह कैल्शियम ऑक्साइड का रासायनिक रूप से अमान्य सूत्र है (सही सूत्र $\text{CaO}$ है)।
- विकल्प (C) $\text{CaO}, \text{CO}$: इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) दिखाई गई है, जबकि इस अपघटन में कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) उत्पन्न होती है।
- विकल्प (D) $\text{Ca}_2\text{O}, \text{CO}$: यह कैल्शियम ऑक्साइड का गलत सूत्र और गलत गैस को दर्शाता है।
#51. जब एथेनॉल वायु में पूर्ण रूप से जलता है तो उससे बनने वाले मुख्य उत्पाद क्या हैं?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- एथेनॉल का दहन (Combustion of Ethanol): अधिकांश कार्बन यौगिकों (जैसे अल्कोहल या हाइड्रोकार्बन) का वायु (ऑक्सीजन) में पूर्ण दहन (Complete combustion) होने पर मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) और जल ($\text{H}_2\text{O}$) बनते हैं, साथ ही प्रचुर मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश उत्सर्जित होते हैं।
- रासायनिक समीकरण: $\text{C}_2\text{H}_5\text{OH} + 3\text{O}_2 \rightarrow 2\text{CO}_2 + 3\text{H}_2\text{O} + \text{ऊष्मा और प्रकाश}$
- विकल्प (A): कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का निर्माण ‘अपूर्ण दहन’ (Incomplete combustion) की स्थिति में हो सकता है, पूर्ण दहन में नहीं।
- विकल्प (B): ऑक्सीजन और मेथेन एथेनॉल के जलने के उत्पाद नहीं हैं।
- विकल्प (D): एथेन और जल इस रासायनिक अभिक्रिया के सही उत्पाद नहीं हैं।
#52. बेकिंग सोडा का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
- बेकिंग सोडा (Baking Soda): इसे रासायनिक रूप से **सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट** या **सोडियम बाइकार्बोनेट** ($\text{NaHCO}_3$) कहा जाता है।
- गुण और उपयोग: यह एक हल्का, गैर-संक्षारक क्षारीय लवण है। इसका उपयोग मुख्य रूप से बेकिंग पाउडर बनाने, रसोई में खाद्य पदार्थों को तेजी से पकाने, एंटासिड (अम्लपित्तनाशक) के रूप में पेट की अम्लता को दूर करने और सोडा-एसिड अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।
- विकल्प (A) NaCl: यह साधारण नमक (Sodium Chloride) का रासायनिक सूत्र है।
- विकल्प (C) $\text{Na}_2\text{CO}_3$: यह धोने के सोडे (Washing Soda – सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट का anhydrous रूप) का सूत्र है।
- विकल्प (D) $\text{NaOH}_3$: यह रासायनिक रूप से एक अमान्य और गलत सूत्र है।
#53. निम्नलिखित में से किस प्रकार की अभिक्रिया में अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है?
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2)
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है और नए यौगिकों का निर्माण होता है, उसे द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
- उदाहरण: सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड की अभिक्रिया ($\text{Na}_2\text{SO}_4 + \text{BaCl}_2 \rightarrow \text{BaSO}_4\downarrow + 2\text{NaCl}$), जिसमें $\text{Ba}^{2+}$ और $\text{SO}_4^{2-}$ तथा $\text{Na}^+$ और $\text{Cl}^-$ आयनों का परस्पर विनिमय होता है।
- विकल्प (A) अपघटन (Decomposition): इसमें एक अकेला अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (C) विषमाअनुपातन अभिक्रिया (Disproportionation): यह एक विशेष प्रकार की रेडॉक्स अभिक्रिया है जिसमें एक ही तत्व का एक ही समय पर ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों होता है।
- विकल्प (D) योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction): इसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं।
#54. इनमें से कौन सा सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है?
(RRB JE CBT I – : 31 May 2019 Shift 3)
- सोडियम का परमाणु क्रमांक (Atomic Number): सोडियम ($\text{Na}$) का परमाणु क्रमांक 11 होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें कुल 11 इलेक्ट्रॉन और 11 प्रोटॉन होते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration): बोर-बरी योजना के अनुसार कक्षकों (Shells) में इलेक्ट्रॉनों का वितरण इस प्रकार होता है:
- K कोष (पहला शैल): अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन
- L कोष (दूसरा शैल): अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन
- M कोष (तीसरा शैल): शेष 1 इलेक्ट्रॉन ($11 – 2 – 8 = 1$)
अतः सोडियम का सही विन्यास **2, 8, 1** होता है।
- विकल्प (A) 2, 8: यह कुल 10 इलेक्ट्रॉनों को दर्शाता है, जो कि नियॉन ($\text{Ne}$) गैस का विन्यास है।
- विकल्प (C) 2, 7, 8: यह विन्यास नियमों के विपरीत है क्योंकि L कोष पूरा भरे बिना M कोष में इलेक्ट्रॉन नहीं जा सकते (और कुल योग भी 17 है, जो क्लोरीन का है)।
- विकल्प (D) 2, 8, 7: यह कुल 17 इलेक्ट्रॉनों को दर्शाता है, जो कि क्लोरीन ($\text{Cl}$) तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है।
#55. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प संक्षारण को दर्शाता है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- संक्षारण (Corrosion): जब कोई धातु अपने आसपास मौजूद अम्ल, नमी (आर्द्रता), या ऑक्सीजन आदि के संपर्क में आती है, जिससे उसकी ऊपरी सतह धीरे-धीरे क्षय होने लगती है या खराब होने लगती है, तो इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।
- लोहे पर जंग लगना: लोहे पर जंग लगना संक्षारण का सबसे बेहतरीन और मुख्य उदाहरण है। इसमें नमी और ऑक्सीजन की उपस्थिति के कारण लोहे की सतह पर हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड ($text{Fe}_2text{O}_3 cdot xtext{H}_2text{O}$) की भूरे रंग की परत जम जाती है।
- विकल्प (A) पानी का उबलना: यह एक भौतिक परिवर्तन (Physical Change) है, जिसमें अवस्था परिवर्तन होता है, संक्षारण नहीं।
- विकल्प (B) पानी में चीनी का घुलना: यह एक विलयन बनने की प्रक्रिया (भौतिक परिवर्तन) है।
- विकल्प (D) LPG का जलना: यह एक दहन (Combustion) और रासायनिक परिवर्तन है, जो संक्षारण से संबंधित नहीं है।
#56. जब एक लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के घोल में रखा जाता है, तो क्या देखा जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026)
#57. निम्नलिखित में से कौन-सी विधि सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली मर्करी और कॉपर जैसी धातुओं को उनके अयस्क से निष्कर्षण करने के लिए सामान्यतः उपयोग की जाती है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026)
- धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals): सक्रियता श्रेणी (Activity Series) में नीचे आने वाली धातुएँ (जैसे मर्करी/पारद और कॉपर) कम अभिक्रियाशील होती हैं। इनके अयस्क सामान्यतः सल्फाइड अयस्क (जैसे सिनेबार $\text{HgS}$ या कॉपर ग्लांस $\text{Cu}_2\text{S}$) के रूप में पाए जाते हैं।
- भर्जन प्रक्रिया (Roasting): सल्फाइड अयस्कों को वायु (ऑक्सीजन) की अधिकता में तेज गर्म करके उनके ऑक्साइड में बदला जाता है, जिसे **भर्जन** कहते हैं। उदाहरण के लिए, मर्करी सल्फाइड को गर्म करने पर पहले मर्करी ऑक्साइड बनता है, जो बाद में गर्म करने पर अपने आप मर्करी धातु में अपचयित हो जाता है:
$2\text{HgS} + 3\text{O}_2 \xrightarrow{\text{Heat}} 2\text{HgO} + 2\text{SO}_2$
$2\text{HgO} \xrightarrow{\text{Heat}} 2\text{Hg} + \text{O}_2$
- विकल्प (A) कार्बन मोनोऑक्साइड द्वारा विस्थापन: इसका उपयोग मुख्य रूप से मध्यम सक्रियता वाली धातुओं (जैसे आयरन या जिंक ऑक्साइड) के प्रगलन में होता है।
- विकल्प (B) एल्युमिनियम पाउडर के साथ अपचयन: इसे ऐलुमियोथर्मी (Aluminothermy) कहा जाता है, जिसका उपयोग अत्यधिक सक्रिय धातुओं द्वारा मैंगनीज या क्रोमियम जैसी धातुओं के ऑक्साइड को अपचयित करने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) गलित अयस्क का विद्युत-अपघटन: यह विधि सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर आने वाली अत्यधिक सक्रिय धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और एल्युमिनियम) के निष्कर्षण के लिए उपयोग की जाती है।
#58. कोशिका विभाजन के बाद, बच्चे कोशिकाओं में मूल कोशिका की तुलना में _______ होता है।
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 2)
- समसूत्री कोशिका विभाजन (Mitosis): शरीर की अधिकांश कायिक कोशिकाओं में होने वाले समसूत्री विभाजन के दौरान, जब एक मूल (जनक) कोशिका विभाजित होती है, तो उससे बनने वाली नई (संतति या बच्चे) कोशिकाओं में गुणसूत्रों (Chromosomes) और आनुवंशिक सामग्री की संख्या मूल कोशिका के बिल्कुल बराबर होती है।
- महत्व: यह प्रक्रिया जीवों में शारीरिक वृद्धि, विकास और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक है, जिससे कोशिकाओं में आनुवंशिक स्थिरता बनी रहती है।
- विकल्प (A) दोगुना: सामान्य कोशिका विभाजन के बाद बनने वाली संतति कोशिकाओं में गुणसूत्र मूल कोशिका से दोगुने नहीं होते।
- विकल्प (C) कम: गुणसूत्रों की संख्या आधी (कम) केवल ‘अर्धसूत्री विभाजन’ (Meiosis) के माध्यम से बनने वाली जनन कोशिकाओं (युग्मकों) में होती है, सामान्य विभाजन में नहीं।
- विकल्प (D) अधिक: संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों या सामग्री की मात्रा मूल कोशिका की तुलना में अधिक नहीं होती है।
A. उच्च गलनांक
B. अध्रुवीय विलायकों में विलेय
C. ठोस अवस्था में विद्युत चालक
D. प्रकृति में भंगुर
#59. निम्नलिखित में से कौन-से, आयनिक यौगिकों के गुणधर्म हैं?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- कथन A (उच्च गलनांक): आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं, क्योंकि इनके धनायन और ऋणायन के बीच बेहद मजबूत स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Strong electrostatic force) पाया जाता है, जिसे तोड़ने के लिए अत्यधिक तापीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- कथन D (प्रकृति में भंगुर): आयनिक यौगिक ठोस और थोड़े कठोर होने के साथ-साथ प्रकृति में **भंगुर (Brittle)** होते हैं; यानी बाहरी बल या दबाव डालने पर ये आसानी से छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं।
- कथन B (अध्रुवीय विलायकों में घुलनशील): यह गलत है, क्योंकि आयनिक यौगिक जल जैसे ध्रुवीय विलायकों में घुलनशील होते हैं, जबकि पेट्रोल, केरोसीन और बेंजीन जैसे अध्रुवीय विलायकों में अघुलनशील होते हैं।
- कथन C (ठोस अवस्था में विद्युत संचालन): यह गलत है, क्योंकि ठोस अवस्था में आयन एक निश्चित जालक (Lattice) में बंधे होते हैं और गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते। आयनिक यौगिक केवल **गलित अवस्था या जलीय विलयन** में ही विद्युत का चालन करते हैं।
#60. द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या बताता है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025)
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इस नियम का प्रतिपादन एंटोनी लवाज़िए (Antoine Lavoisier) ने किया था। इसके अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन (निर्माण) किया जा सकता है और न ही विनाश।
- मुख्य निष्कर्ष: एक रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों (Reactants) का कुल द्रव्यमान हमेशा उत्पादों (Products) के कुल द्रव्यमान के ठीक बराबर होता है; अर्थात अभिक्रिया के दौरान कुल द्रव्यमान पूरी तरह **अपरिवर्तित** रहता है।
- विकल्प (A): रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों का द्रव्यमान नष्ट नहीं होता, बल्कि वह नए उत्पादों में बदल जाता है।
- विकल्प (C): यह आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E=mc^2$) से संबंधित है, जो रासायनिक अभिक्रियाओं के सामान्य द्रव्यमान संरक्षण के दायरे से अलग है।
- विकल्प (D): उत्पादों का द्रव्यमान हमेशा अधिक नहीं होता, बल्कि वह अभिकारकों के कुल द्रव्यमान के बिल्कुल बराबर होता है।
#61. क्लोरीन की एल्केन के साथ तीव्र अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति आवश्यक है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- एल्केन का क्लोरीनीकरण (Chlorination of Alkanes): जब एल्केन (जैसे मीथेन) की अभिक्रिया क्लोरीन के साथ कराई जाती है, तो यह एक प्रतिस्थापन (Substitution) अभिक्रिया होती है।
- सूर्य के प्रकाश की भूमिका: यह अभिक्रिया अंधेरे में बहुत धीमी होती है, लेकिन सूर्य के प्रकाश (या पराबैंगनी किरणों – UV Light) की उपस्थिति में यह अत्यधिक तीव्र और विस्फोटी गति से होती है। प्रकाश ऊर्जा क्लोरीन अणु ($\text{Cl}_2$) को तोड़कर अत्यधिक सक्रिय क्लोरीन मुक्त मूलक (Chlorine free radicals) बनाती है जो श्रृंखला अभिक्रिया को शुरू करते हैं।
- विकल्प (A) उच्च ताप / (B) उच्च दाब: इस विशिष्ट प्रतिस्थापन अभिक्रिया के आरंभ होने के लिए ऊष्मा या उच्च दाब की प्राथमिक आवश्यकता नहीं होती, बल्कि प्रकाश ऊर्जा (फोटॉन) की जरूरत होती है।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन की उपस्थिति: ऑक्सीजन इस प्रकार की मुक्त मूलक श्रृंखला अभिक्रिया में अवरोधक (Inhibitor) का काम करती है, अतः इसकी उपस्थिति आवश्यक नहीं है।
A. ये पदार्थ जैविक प्रक्रियाओं द्वारा अपघटित नहीं होते हैं।
B. ये पदार्थ पर्यावरण में कम समय के लिए बने रहते हैं।
C. ये पदार्थ पारिस्थितिक तंत्र के विभिन्न सदस्यों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
#62. निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थों के बारे में सही है/हैं?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)
- अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थ (Non-biodegradable Substances): वे पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं (जैसे बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीवों की क्रिया) द्वारा सरल और हानिरहित पदार्थों में अपघटित (Decompose) नहीं किए जा सकते, अजैवनिम्नीकरणीय कहलाते हैं।
- मुख्य विशेषताएँ: ये पदार्थ लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं, आसानी से नष्ट नहीं होते और मृदा तथा जल प्रदूषण का मुख्य कारण बनते हैं। इसके प्रमुख उदाहरण प्लास्टिक, पॉलीथीन, कांच और सिंथेटिक रसायन हैं।
- विकल्प (A) केवल B: यह अधूरा विकल्प है क्योंकि अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थों के संबंध में केवल एक सही कथन शामिल नहीं करता।
- विकल्प (B) B और C दोनों: इसमें एक गलत कथन शामिल होने के कारण यह विकल्प मान्य नहीं है।
- विकल्प (D) A, B और C: इसमें सभी कथनों को सही माना गया है, जबकि इनमें से कुछ कथन अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थों की वास्तविक प्रकृति के विपरीत हो सकते हैं।
#63. ______ का उपयोग आइसक्रीम में स्टेबलाइजर के रूप में किया जाता है।
(RRB NTPC Tier I : 19 Apr 2016 Shift 2)
- जिलेटिन और आइसक्रीम स्टेबलाइजर: जिलेटिन पशुओं के कोलेजन से प्राप्त होने वाला एक प्राकृतिक प्रोटीन है, जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से आइसक्रीम और अन्य फ्रोजन डेसर्ट में स्टेबलाइजर (Stabilizer) के रूप में किया जाता है।
- मुख्य कार्य: यह आइसक्रीम में बड़े बर्फ के क्रिस्टल (Ice crystals) के निर्माण को रोकता है और जल के अणुओं को बांधकर रखता है, जिससे आइसक्रीम की बनावट चिकनी, मलाईदार बनी रहती है तथा यह लंबे समय तक पिघलने से सुरक्षित रहती है।
- विकल्प (B) चीनी: इसका उपयोग मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों में मिठास (Sweetener) बढ़ाने के लिए किया जाता है, न कि स्थिरता प्रदान करने के लिए।
- विकल्प (C) दूध: यह आइसक्रीम का मुख्य आधार या तरल बेस (Base) है, जो डेयरी घटक के रूप में प्रयुक्त होता है।
- विकल्प (D) स्ट्राबेरी: यह एक फ्लेवरिंग एजेंट (Flavoring agent) है जिसका उपयोग आइसक्रीम को विशिष्ट स्वाद और रंग देने के लिए किया जाता है।
#64. मेयोनेज (Mayonnaise) को निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 18/03/2026 )
- पायसीकरण (Emulsification) और मेयोनेज: मेयोनेज मुख्य रूप से तेल (Oil), अंडे की जर्दी (Egg yolk), और सिरका या नींबू के रस का एक स्थायी पायस (Emulsion) होता है।
- प्रक्रिया: पायसीकरण वह प्रक्रिया है जिसके तहत दो ऐसे तरल पदार्थों को मिलाया जाता है जो सामान्यतः आपस में घुलते नहीं हैं (जैसे तेल और पानी)। अंडे की जर्दी में मौजूद **लेसिथिन (Lecithin)** एक प्राकृतिक पायसीकारी (Emulsifier) के रूप में कार्य करता है, जो तेल की बूंदों को पानी के साथ जोड़े रखता है और उन्हें अलग होने से रोकता है।
- विकल्प (A) ऑक्सीकरण: यह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन का जुड़ना होता है; इसका संबंध मेयोनेज तैयार करने की मूल विधि से नहीं है।
- विकल्प (C) मैलाई अभिक्रिया (Maillard Reaction): यह शर्करा और अमीनो अम्ल के बीच की ऊष्मीय प्रतिक्रिया है जो पके हुए भोजन (जैसे बिस्कुट या भुना मांस) को भूरा रंग और विशिष्ट स्वाद देती है।
- विकल्प (D) कैरामैलीकरण: यह शर्करा का तापीय अपघटन है जिसके द्वारा कैरेमल तैयार किया जाता है।
#65. कपड़े प्रेस, इलेक्ट्रिक टोस्टर, इलेक्ट्रिक ओवन, इलेक्ट्रिक केतली और इलेक्ट्रिक हीटर जैसे विद्युत उपकरण विद्युत धारा के किस प्रभाव पर आधारित हैं?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 1)
- विद्युत धारा का तापन प्रभाव (Heating Effect of Electric Current): जब किसी उच्च प्रतिरोध वाले चालक (जैसे नाइक्रोम के तार) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक प्रतिरोध के कारण गर्म हो जाता है और विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा ऊर्जा में रूपांतरण होता है। इसे जूल का तापन नियम (Joule’s Law of Heating) भी कहा जाता है।
- उपयोग: कपड़े की प्रेस (Iron), इलेक्ट्रिक हीटर, टोस्टर, ओवन और केतली जैसे उपकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
- विकल्प (A) रासायनिक प्रभाव: यह विद्युत अपघटन (Electrolysis) और इलेक्ट्रोप्लेटिंग जैसी प्रक्रियाओं से संबंधित है।
- विकल्प (B) चुंबकीय प्रभाव: यह विद्युत चुम्बक, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर जैसे उपकरणों में प्रयुक्त होता है।
- विकल्प (C) शारीरिक प्रभाव: यह विद्युत झटके या चिकित्सा विज्ञान में मांसपेशियों की उत्तेजना से जुड़ा है।
#66. हाइड्रोजन क्षय वाली अभिक्रियाओं को क्या कहा जाता है?
(RRB JE CBT-I :- 1 June 2019 Shift 2)
- ऑक्सीकरण (Oxidation): वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें किसी पदार्थ से **हाइड्रोजन का निष्कासन (क्षय/हानि)** होता है अथवा ऑक्सीजन या किसी अन्य विद्युत-ऋणी तत्व का योग होता है, उसे ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहा जाता है।
- इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना: रासायनिक दृष्टिकोण से, किसी परमाणु या आयन द्वारा इलेक्ट्रॉनों का त्याग (Loss of electrons) करना भी ऑक्सीकरण ही कहलाता है।
- विकल्प (C) अपचयन अभिक्रिया (Reduction): यह ऑक्सीकरण के बिल्कुल विपरीत प्रक्रिया है, जिसमें हाइड्रोजन का योग (Addition) या ऑक्सीजन का ह्रास होता है।
- विकल्प (A) अपघटन अभिक्रिया: इसमें एक अकेला अभिकारक टूटकर दो या अधिक सरल उत्पाद बनाता है।
- विकल्प (B) संयोजन अभिक्रिया: इसमें दो या अधिक अभिकारक आपस में मिलकर एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं।
#67. विटामिन A किससे संबंधित है?
(RRB NTPC Tier I : 22 Apr 2016 Shift 3)
- विटामिन A का रासायनिक नाम: विटामिन A का रासायनिक नाम रेटिनॉल (Retinol) है। यह एक वसा में घुलनशील (Fat-soluble) विटामिन है जो आँखों की दृष्टि, स्वस्थ त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- कमी का प्रभाव: इसकी कमी से रतौंधी (Night blindness) और जीरोफथैल्मिया (आँखों का सूखापन) जैसी बीमारियाँ होती हैं। गाजर, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दूध और मछली इसके प्रमुख स्रोत हैं।
- विकल्प (A) कोबालामिन (Cobalamin): यह विटामिन B₁₂ का रासायनिक नाम है, जिसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है।
- विकल्प (C) एस्कॉर्बिक एसिड (Ascorbic acid): यह विटामिन C का रासायनिक नाम है, जो मुख्य रूप से खट्टे फलों में पाया जाता है।
- विकल्प (D) एमिनो एसिड (Amino acid): यह प्रोटीन की मूल निर्माण इकाइयाँ (Building blocks) हैं, न कि कोई विटामिन।
#68. सक्रियता श्रृंखला में सबसे नीचे पाई जाने वाली धातुएं (जैसे, सोना, चांदी, प्लेटिनम) आमतौर पर प्रकृति में किस अवस्था में पाई जाती हैं?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
- सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे की धातुएँ: सक्रियता श्रेणी (Activity Series) में जो धातुएँ सबसे नीचे स्थित होती हैं (जैसे सोना, चांदी, प्लैटिनम और तांबा), वे अत्यंत कम अभिक्रियाशील (Least reactive) होती हैं।
- मुक्त अवस्था (Free State): कम अभिक्रियाशीलता के कारण ये धातुएँ वायु की ऑक्सीजन, नमी या अन्य रसायनों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं। यही कारण है कि प्रकृति में ये आमतौर पर किसी अन्य तत्व के साथ यौगिक बनाने के बजाय अपनी मुक्त अवस्था (Native or Free state) में पाई जाती हैं।
- विकल्प (B) और (C) सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में: मध्यम सक्रियता वाली धातुएँ (जैसे जिंक, आयरन, लेड) सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं, जिन्हें भर्जन या निस्तापन की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (D) अत्यधिक अभिक्रियाशील ऑक्साइड: अत्यधिक सक्रिय धातुएँ (जैसे सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम) बहुत अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं, न कि स्वर्ण या रजत जैसी कम सक्रिय धातुएँ।
#69. CaO और H 2 O के बीच अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है और Ca(OH) 2 बनाती है। इसका एक उदाहरण …………….. है।
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब कैल्शियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$, जिसे बिना बुझा चूना या Quicklime कहते हैं) की अभिक्रिया जल ($\text{H}_2\text{O}$) के साथ कराई जाती है, तो कैल्शियम हाइड्रोक्साइड ($\text{Ca(OH)}_2$, जिसे बुझा हुआ चूना या Slaked lime कहते हैं) बनता है और साथ ही भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है।
- विशेषता: चूंकि इस अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक एकल उत्पाद बनाते हैं और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, इसलिए यह एक **संयोजन अभिक्रिया** के साथ-साथ एक **ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic reaction)** भी है।
- विकल्प (B) दोहरा विस्थापन अभिक्रिया: इसमें दो यौगिकों के आयनों का आदान-प्रदान होता है, जो यहाँ नहीं हो रहा है।
- विकल्प (C) पुनर्व्यवस्था अभिक्रिया: यह अणुओं के भीतर संरचनात्मक परिवर्तन से जुड़ी होती है।
- विकल्प (D) विस्थापन अभिक्रिया: इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को उसके विलयन से हटाता है, जबकि यहाँ दोनों अभिकारक मिलकर एक नया यौगिक बना रहे हैं।
#70. लेड ब्रोमाइड का लेड और ब्रोमीन में टूटना ____________ का एक उदाहरण है।
(RRB JE 28 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक एकल अभिकारक (Reactant) टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद (Products) बनाता है, उसे अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
- लेड ब्रोमाइड का अपघटन: जब गलित लेड ब्रोमाइड ($\text{PbBr}_2$) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है या इसे गर्म किया जाता है, तो यह अपने अवयवी तत्वों—लेड ($\text{Pb}$) और ब्रोमीन ($\text{Br}_2$) गैस—में विघटित हो जाता है:
$\text{PbBr}_2 \rightarrow \text{Pb} + \text{Br}_2$
- विकल्प (A) विस्थापन अभिक्रिया: इसमें अधिक सक्रिय तत्व कम सक्रिय तत्व को हटाता है, जबकि यहाँ टूटने की प्रक्रिया हो रही है।
- विकल्प (B) संश्लेषण (संयोजन) अभिक्रिया: इसमें दो या अधिक अभिकारक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं (जो अपघटन के ठीक विपरीत है)।
- विकल्प (D) उदासीनीकरण अभिक्रिया: यह अम्ल और क्षार के बीच होने वाली अभिक्रिया है जिससे लवण और जल बनते हैं।
#71. निम्नलिखित में से किसमें ऑक्सीकरण अभिक्रिया शामिल नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
- जल में नमक का घुलना: जल में साधारण नमक ($text{NaCl}$) का घुलना एक **भौतिक परिवर्तन (Physical Change)** और विलयन बनने की प्रक्रिया है। इसमें किसी प्रकार का ऑक्सीकरण या रासायनिक अभिक्रिया शामिल नहीं होती है, बल्कि नमक के आयन केवल पानी के अणुओं के बीच वियोजित होते हैं।
- विकल्प (A) जल का विद्युत अपघटन: इस प्रक्रिया में जल टूटता है और एनोड पर ऑक्सीजन गैस निकलती है, जो एक ऑक्सीकरण प्रतिक्रिया है।
- विकल्प (C) लकड़ी जलाना: यह एक तीव्र दहन (Combustion) प्रक्रिया है, जो मूल रूप से एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
- विकल्प (D) लोहे में जंग लगना: यह लोहे का वायु की ऑक्सीजन और नमी के साथ缓慢 (धीमी) ऑक्सीकरण होता है जिससे हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड बनता है।
#72. लोहे पर जंग कब लगती है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
- लोहे पर जंग लगना (Rusting of Iron): लोहे की सतह पर जंग लगने के लिए मुख्य रूप से **नमी (जल/आर्द्रता)** और **ऑक्सीजन ($\text{O}_2$)** दोनों का एक साथ होना अनिवार्य है।
- रासायनिक प्रक्रिया: इन दोनों की उपस्थिति में लोहा ऑक्सीजन और जल के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करके हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड ($\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$) बनाता है, जिसे सामान्य भाषा में जंग कहा जाता है।
- विकल्प (B) कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया: लोहे पर जंग लगने की मूल प्रक्रिया में मुख्य घटक ऑक्सीजन और नमी हैं, न कि केवल कार्बन डाइऑक्साइड।
- विकल्प (C) केवल ऊष्मा के संपर्क में आना: केवल ऊष्मा मिलने से लोहे में जंग नहीं लगती, जब तक कि नमी और ऑक्सीजन मौजूद न हों।
- विकल्प (D) शुष्क हवा के संपर्क में आना: शुष्क हवा (जिसमें नमी या जलवाष्प नहीं होती) में लोहे पर जंग नहीं लगती है, क्योंकि जंग के लिए नमी का होना आवश्यक है।
#73. ऊँटों द्वारा उत्पन्न की जाने वाली आवाज़ को क्या कहा जाता है?
(RRB NTPC Tier I : 12 Apr 2016 Shift 2)
- ऊँट की आवाज़ (Camel Sound): ऊँटों द्वारा निकाली जाने वाली मुख्य गहरी और भारी ध्वनि को अंग्रेजी में ‘ग्रांट’ (Grunt) और हिंदी में गुरुरगाहट (या घुरघुराना) कहा जाता है।
- व्यवहार: ऊँट थकान, नाराजगी, भूख या अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए इस प्रकार की गुरुरगाहट भरी आवाज निकालते हैं।
- विकल्प (A) भौंकना (Howl): यह मुख्य रूप से कुत्तों, भेड़ियों या सियारों द्वारा निकाली जाने वाली ध्वनि है।
- विकल्प (C) मिमियाना (Bleat): यह भेड़, बकरियों या मेमनों की बोली या आवाज होती है।
- विकल्प (D) बड़बड़ाना (Gibber): यह बंदरों या वानरों द्वारा की जाने वाली आवाज़ से संबंधित है।
आप इस [एनिमल साउंड्स वीडियो](https://www.youtube.com/watch?v=QcYVsF49rao) के माध्यम से विभिन्न जानवरों द्वारा निकाली जाने वाली आवाज़ों के बारे में और अधिक जान सकते हैं।
http://googleusercontent.com/youtube_content/1
(i) श्वेत प्रकाश विक्षेपित होता है।
(ii) जब प्रकाश वायु से प्रिज्म में प्रवेश करता है तो उसकी चाल नियत बनी रहती है।
(iii) जब प्रकाश वायु से प्रिज्म में प्रवेश करता है तो उसकी चाल घट जाती है।
#74. जब श्वेत प्रकाश का किरणपुंज कांच के प्रिज्म पर आपतित होता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026)
- प्रकाश का विक्षेपण (Dispersion of Light): जब श्वेत प्रकाश का किरणपुंज किसी कांच के प्रिज्म से गुजरता है, तो यह अपने सात घटक रंगों (VIBGYOR) में विभाजित हो जाता है।
- विचलन का कारण: विभिन्न रंगों की तरंगदैर्ध्य (Wavelength) अलग-अलग होती है। लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होने के कारण यह सबसे कम झुकता है (कथन i सत्य है), जबकि बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होने के कारण यह सबसे अधिक झुकता है (कथन ii सत्य है)। अतः दोनों कथन सही हैं।
- अन्य विकल्प या तो केवल एक ही सही कथन को दर्शाते हैं या ऐसे कथनों को सही मानते हैं जिसमें सभी रंगों का विचलन एक समान बताया गया हो (जो कि तरंगदैर्ध्य भिन्न होने के कारण गलत है)।
#75. 3500) CaO(s) + H 2 O(l) → Ca(OH) 2 (aq) + उष्णता, इस अभिक्रिया को क्या कहते हैं?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)
- संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब दो या दो से अधिक अभिकारक (जैसे कैल्शियम ऑक्साइड $\text{CaO}$ और जल $\text{H}_2\text{O}$) आपस में मिलकर केवल एक एकल उत्पाद (कैल्शियम हाइड्रोक्साइड $\text{Ca(OH)}_2$) का निर्माण करते हैं, तो ऐसी अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया कहा जाता है।
- ऊष्माक्षेपी प्रकृति: इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है, इसलिए इसे ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया भी माना जाता है।
- विकल्प (A) वुर्ट्ज़ फिटिंग अभिक्रिया / (D) वुर्ट्ज़ अभिक्रिया: ये दोनों एल्किल हैलाइड्स से जुड़े कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry) की नाम वाली अभिक्रियाएँ हैं, जिनका उपयोग उच्च एल्केन बनाने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) अपघटन अभिक्रिया: यह संयोजन के बिल्कुल विपरीत होती है, जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पाद बनाता है।
#76. अभिक्रिया Al 2 (SO 4 ) 3 + BaCl 2 → AlCl 3 + BaSO 4 के लिए सही संतुलित समीकरण चुनिए।
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 2)
- रासायनिक समीकरण का संतुलन (Balancing Chemical Equations): किसी भी रासायनिक समीकरण को संतुलित करने के लिए दोनों पक्षों (अभिकारकों और उत्पादों) में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या बराबर होनी चाहिए (द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार)।
- चरण-दर-चरण विश्लेषण:
• समीकरण: $\text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 + 3\text{BaCl}_2 \rightarrow 2\text{AlCl}_3 + 3\text{BaSO}_4$
• बाएँ पक्ष (Reactants) में एल्युमिनियम ($\text{Al}$) के 2 परमाणु हैं, तो दाहिने पक्ष में $\text{AlCl}_3$ के आगे ‘2’ लगाकर इसे संतुलित किया गया है।
• सल्फेट समूह ($\text{SO}_4^{2-}$) के 3 अणु हैं, अतः दाहिने पक्ष में $\text{BaSO}_4$ के आगे ‘3’ लगाया गया है।
• इसके बाद बेरियम ($\text{Ba}$) और क्लोरीन ($\text{Cl}$) के परमाणु स्वचालित रूप से दोनों पक्षों में 3-3 और 6-6 हो जाते हैं।
- विकल्प (A): इसमें एल्युमिनियम परमाणु असंतुलित हैं (बाएँ पक्ष में 2 और दाहिने पक्ष में 3)।
- विकल्प (B): इसमें अभिकारकों और उत्पादों के गुणांक आवश्यकता से अधिक और गलत अनुपात में हैं।
- विकल्प (C): इसमें क्लोरीन और बेरियम के परमाणुओं की संख्या दोनों पक्षों में मेल नहीं खाती है।
#77. ताजे पानी का घनत्व नमक के पानी के घनत्व से ________ है।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 3)
- घनत्व (Density) पर विलेय का प्रभाव: जब शुद्ध जल (ताजे पानी) में नमक ($\text{NaCl}$) घोला जाता है, तो पानी का आयतन बहुत कम बढ़ता है जबकि उसका द्रव्यमान काफी बढ़ जाता है।
- निष्कर्ष: चूंकि घनत्व द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन ($\text{Density} = \frac{\text{Mass}}{\text{Volume}}$) होता है, इसलिए नमक का पानी अधिक सघन हो जाता है। परिणामस्वरूप, ताजे पानी का घनत्व नमक के पानी के घनत्व से **कम** होता है (यही कारण है कि अत्यधिक खारे पानी में वस्तुएँ आसानी से तैरती हैं)।
- विकल्प (A) से ज्यादा: ताजे पानी का घनत्व नमक के पानी से अधिक नहीं होता, बल्कि कम होता है।
- विकल्प (C) के बराबर: अशुद्धियाँ मिलाने पर विलायक के भौतिक गुण (जैसे घनत्व और क्वथनांक) बदल जाते हैं, अतः यह बराबर नहीं हो सकता।
- विकल्प (D) नगण्य है: घनत्व का अंतर नगण्य नहीं होता, यह वैज्ञानिक रूप से मापने योग्य और महत्वपूर्ण अंतर है।
#78. चार टेस्ट ट्यूबों में CuSO 4, MgSO 4, ZnSO 4 और AgNO 3 के विलयन हैं। एक विद्यार्थी प्रत्येक टेस्ट ट्यूब में जिंक धातु मिलाता है। किस टेस्ट ट्यूब/ट्यूबों में अभिक्रिया होगी?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- सक्रियता श्रेणी (Activity Series): धातुओं की सक्रियता श्रेणी में जो धातु ऊपर होती है, वह अपने से नीचे स्थित कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है। जिंक ($\text{Zn}$), कॉपर ($\text{Cu}$) और सिल्वर ($\text{Ag}$) की तुलना में अधिक सक्रिय है।
- अभिक्रिया की स्थिति:
• जब जिंक को कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) में मिलाया जाता है, तो जिंक कॉपर को विस्थापित कर देता है ($\text{Zn} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{Cu}$).
• जब जिंक को सिल्वर नाइट्रेट ($\text{AgNO}_3$) में मिलाया जाता है, तो जिंक सिल्वर को विस्थापित कर देता है ($\text{Zn} + 2\text{AgNO}_3 \rightarrow \text{Zn(NO}_3)_2 + 2\text{Ag}$).
- मैग्नीशियम सल्फेट ($\text{MgSO}_4$): मैग्नीशियम, जिंक से अधिक सक्रिय धातु है, इसलिए जिंक मैग्नीशियम को विस्थापित नहीं कर सकता (कोई प्रतिक्रिया नहीं होगी)।
- जिंक सल्फेट ($\text{ZnSO}_4$): जिंक पहले से ही इस विलयन में मौजूद है, इसलिए यहाँ कोई विस्थापन संभव नहीं है।
#79. ऑक्सीजन (O 2 ) के अणु की परमाणुक्ता क्या है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 27/03/2026 )
- परमाणुक्ता (Atomicity): किसी तत्व के एक अणु में जितने परमाणु विद्यमान होते हैं, वह संख्या उस तत्व की परमाणुक्ता कहलाती है।
- ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) की परमाणुक्ता: ऑक्सीजन का सामान्य अणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं से मिलकर बनता है, इसलिए इसकी परमाणुक्ता 2 होती है (यह एक द्विपरमाणुक गैस है)।
- विकल्प (A) 1: यह एकपरमाणुक (Monoatomic) गैसों (जैसे हीलियम, नियॉन आदि) की परमाणुक्ता होती है।
- विकल्प (B) 4: यह फास्फोरस ($\text{P}_4$) जैसे अणुओं की परमाणुक्ता होती है।
- विकल्प (C) 3: यह ओजोन ($\text{O}_3$) जैसे त्रिपरमाणुक अणुओं की परमाणुक्ता होती है।
#80. समुद्री जल के विलवणीकरण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों में से एक है:
(RRB NTPC Tier I : 19 Apr 2016 Shift 2)
- समुद्री जल का विलवणीकरण (Desalination): समुद्री जल से नमक और अन्य घुले हुए खनिजों को अलग करके उसे पीने योग्य बनाने की प्रक्रिया को विलवणीकरण कहते हैं।
- आसवन विधि (Distillation): इस प्रक्रिया में समुद्री जल को उबाला जाता है जिससे पानी वाष्प (Steam) बनकर उड़ जाता है और पीछे नमक छूट जाता है। इस जलवाष्प को ठंडा करके पुनः शुद्ध जल में संघनित (Condense) कर लिया जाता है, जो पीने के काम आता है।
- विकल्प (A) निस्पंदन (Filtration): इसके द्वारा केवल अघुलनशील ठोस कणों को अलग किया जा सकता है, पानी में घुले हुए नमक को नहीं।
- विकल्प (C) वाष्पीकरण: इसमें पानी उड़ जाता है और नमक नीचे बैठ जाता है, लेकिन यदि शुद्ध पानी प्राप्त करना हो तो वाष्पीकरण के साथ संघनन (आसवन) आवश्यक है।
- विकल्प (D) संघनन: यह आसवन प्रक्रिया का ही एक चरण है (जिसमें वाष्प ठंडी होती है), न कि पूरी विलवणीकरण तकनीक।
#81. मधुमक्खी के सामान्य नाम को उसके वैज्ञानिक नाम से सुमेलित कीजिए।
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025)
- मधुमक्खी के वैज्ञानिक नाम (Scientific Names of Honeybees): जीव विज्ञान में मधुमक्खियों को ‘एपिस’ (Apis) वंश के अंतर्गत रखा जाता है। इनकी प्रमुख प्रजातियों के वैज्ञानिक नाम निम्नलिखित हैं:
• भारतीय मधुमक्खी: Apis cerana indica
• रॉकबी या विशाल मधुमक्खी: Apis dorsata (इसे सारंग या भंवर भी कहते हैं)
• यूरोपीय मधुमक्खी: Apis mellifera
• छोटी मधुमक्खी: Apis florea
- आर्थिक महत्व: मधुमक्खी पालन को **एपीकल्चर (Apiculture)** कहा जाता है। ये शहद, मोम और फसलों में परागण (Pollination) के लिए अत्यंत उपयोगी होती हैं।
- अन्य विकल्पों (A, B और D) में विभिन्न मधुमक्खी प्रजातियों और उनके सामान्य नामों का मिलान गलत क्रम में दिया गया है, जिससे वैज्ञानिक वर्गीकरण मेल नहीं खाता।
#82. कौन-सा गुण समांगी मिश्रण को विषमांगी मिश्रण से विभेदित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture): वह मिश्रण जिसमें उसके घटक पूरे आयतन में एक-दूसरे में पूरी तरह मिले होते हैं और इसका संघटन पूरे मिश्रण में **एकसमान (Uniform)** होता है (जैसे- पानी में नमक या चीनी का घोल)। इसमें अलग-अलग घटकों को आँखों से या सूक्ष्मदर्शी से अलग नहीं देखा जा सकता।
- विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture): इसके विपरीत, विषमांगी मिश्रण का संघटन एकसमान नहीं होता और इसके विभिन्न भागों को अलग-अलग देखा जा सकता है (जैसे- तेल और पानी का मिश्रण, रेत और नमक का मिश्रण)। अतः ‘एकसमान संघटन’ ही वह मुख्य गुण है जो दोनों में भेद करता है।
- विकल्प (A) स्थिर क्वथनांक: यह समांगी मिश्रणों (जैसे कुछ विलयनों या ऐजोट्रोप्स) की एक विशेष स्थिति हो सकती है, लेकिन यह दोनों के बीच बुनियादी विभेदक गुण नहीं है।
- विकल्प (B) रासायनिक अभिक्रिया: मिश्रण का निर्माण एक भौतिक परिवर्तन है; न तो समांगी और न ही विषमांगी मिश्रण के बनने में कोई रासायनिक अभिक्रिया शामिल होती है।
- विकल्प (D) उच्च घनत्व: घनत्व मिश्रण में मौजूद पदार्थों की प्रकृति पर निर्भर करता है, न कि इस बात पर कि वह समांगी है या विषमांगी।
#83. गन्ने में पाया जाता है-
(RRB JE 23 May 2019 Shift 3)
- गन्ने में शर्करा (Sugarcane Sugar): गन्ने में मुख्य रूप से **सुक्रोज (Sucrose)** नामक डिसैकेराइड (द्वि-शर्करा) पाई जाती है। रासायनिक रूप से सुक्रोज दो सरल शर्कराओं यानी **ग्लूकोज** और **फ्रूक्टोज** के अणुओं के संयोजन से मिलकर बनता है।
- संरचना: जब सुक्रोज का जल-अपघटन (Hydrolysis) किया जाता है, तो यह ग्लूकोज और फ्रूक्टोज इकाइयों में टूट जाता है।
- विकल्प (A) ग्लूकोज + माल्टोज: ग्लूकोज और ग्लूकोज के मिलने से ‘माल्टोज’ (अनाज में मिलने वाली शर्करा) बनती है।
- विकल्प (C) ग्लूकोज + सुक्रोज: सुक्रोज स्वयं गन्ने में पाया जाने वाला यौगिक है, न कि इसके घटक का यह युग्म।
- विकल्प (D) ग्लूकोज + गैलैक्टोज: ग्लूकोज और गैलैक्टोज के मिलने से ‘लैक्टोज’ (दूध में पाई जाने वाली शर्करा) बनती है।
#84. ब्रेड किण्वनीकरण के लिए कौन-सी रासायनिक अभिक्रिया उत्तरदायी होती है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन होता है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 22/03/2026 )
- किण्वन प्रक्रिया (Fermentation Process): ब्रेड बनाने की प्रक्रिया में यीस्ट (Yeast) का उपयोग किया जाता है। यीस्ट में मौजूद एंजाइम आटे में मौजूद शर्करा को तोड़ते हैं और अवायवीय श्वसन (Anaerobic respiration) के जरिए इसे अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस में बदल देते हैं।
- ब्रेड का फूलना: किण्वन के दौरान उत्पन्न होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस ब्रेड के आटे में फंस जाती है, जिससे ब्रेड स्पंजी, नरम और फूल जाती है (बेकिंग के दौरान यह गैस बाहर निकल जाती है)।
- विकल्प (A) ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया: यद्यपि किण्वन में रेडॉक्स प्रतिक्रियाएं शामिल होती हैं, लेकिन विशेष रूप से ब्रेड के फूलने और गैस बनने की जैव-रासायनिक प्रक्रिया को मुख्य रूप से किण्वन कहा जाता है।
- विकल्प (B) एन्जाइमी अभिक्रिया: एंजाइम इस प्रक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं, लेकिन समग्र प्रक्रिया का नाम ‘किण्वन’ है।
- विकल्प (C) अम्ल-क्षार अभिक्रिया: इसका अम्ल और क्षार के उदासीनीकरण से कोई सीधा संबंध नहीं है।
#85. चूने के पत्थर का त्वरित चूने और कार्बन डाइऑक्साइड में अपघटन निम्नलिखित में से किस प्रकार की अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 3)
- तापीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब किसी यौगिक का अपघटन (टूटना) ऊष्मा (Heat) देने पर होता है, तो उसे तापीय अपघटन अभिक्रिया कहा जाता है।
- रासायनिक समीकरण: जब चूने के पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट, $\text{CaCO}_3$) को गर्म किया जाता है, तो यह त्वरित चूने (कैल्शियम ऑक्साइड, $\text{CaO}$) और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) में विघटित हो जाता है:
$\text{CaCO}_3 \xrightarrow{\Delta} \text{CaO} + \text{CO}_2$
- विकल्प (A) प्रकाश रासायनिक अपघटन: यह वह अपघटन है जो ऊष्मा से नहीं बल्कि सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा से होता है (जैसे सिल्वर क्लोराइड का टूटना)।
- विकल्प (B) और (D) अपचयन और ऑक्सीकरण: ये इलेक्ट्रॉन या ऑक्सीजन के आदान-प्रदान से जुड़ी रेडॉक्स अभिक्रियाएँ हैं, जबकि यहाँ केवल ऊष्मा द्वारा पदार्थ का वियोजन हो रहा है।
#86. यदि आपको प्रयोगशाला में लवण-जल के विलयन से लवण पुनर्प्राप्त करना हो, तो आपको किस प्रक्रिया का उपयोग करना होगा?
(Not found 13/03/2026 )
- आसवन विधि (Distillation): जब प्रयोगशाला में लवण-जल के विलयन से लवण (या विलायक दोनों को) पुनर्प्राप्त करना हो और विकल्पों में वाष्पीकरण न दिया गया हो, तो **आसवन** सही वैज्ञानिक विधि है। इसमें विलयन को गर्म करके वाष्प बनाई जाती है और फिर उस वाष्प को ठंडा (संघनित) करके शुद्ध जल अलग कर लिया जाता है, जबकि लवण पात्र में शेष रह जाता है।
- उपयोग: यह विधि वाष्पीकरण से एक कदम आगे है क्योंकि इसमें विलायक (जल) को भी नष्ट होने से बचाया जा सकता है।
- विकल्प (A) निस्यंदन (Filtration): इसका उपयोग केवल अघुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव से अलग करने के लिए किया जाता है, जबकि नमक पानी में पूरी तरह घुलनशील है।
- विकल्प (B) निस्तारण (Decantation): यह विधि तलछट वाले मिश्रणों या अमिश्रणीय द्रवों के लिए होती है।
- विकल्प (D) वर्णलेखिकी (Chromatography): इसका उपयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक करने के लिए किया जाता है जो बहुत कम मात्रा में एक ही विलायक में घुले हों (जैसे रंगों या पिगमेंट को अलग करना)।
(i) यह प्रतिकर्षी प्रकृति का है।
(ii) इसका परिणाम पूरे ब्रह्मांड में समान है।
(iii) यह पिंडों के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती है।
(iv) इस बल के कारण पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।
#87. दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं:
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2)
- गुरुत्वाकर्षण बल की प्रकृति (Nature of Gravitational Force): गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा आकर्षक (Attractive) प्रकृति का होता है, प्रतिकर्षी नहीं; अतः कथन (i) असत्य है।
- परिमाण और ब्रह्मांड में स्थिति: गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण पिंडों के द्रव्यमान और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है, यह पूरे ब्रह्मांड में एक समान नहीं रहता; अतः कथन (ii) असत्य है।
- द्रव्यमान के साथ संबंध (कथन iii): न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार, दो पिंडों के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है ($F \propto m_1 m_2$); अतः यह कथन सत्य है।
- खगोलीय गति (कथन iv): सूर्य और पृथ्वी के बीच लगने वाला यही गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में घूमने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल प्रदान करता है; अतः यह कथन भी सत्य है।
- विकल्प (A), (B) और (C): इन विकल्पों में कथनों (i) और (ii) को सम्मिलित किया गया है जो कि वैज्ञानिक रूप से गलत हैं, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल प्रतिकर्षी नहीं होता और न ही इसका परिमाण हर जगह समान रहता है।
#88. नाइट्रोजन से हाइड्रोजन में अभिक्रिया करके अमोनिया प्राप्त करने की विधि क्या है?
(RPF SI 2018 : 13 Jan 2019 Shift 2)
- हेबर प्रक्रम (Haber Process): औद्योगिक पैमाने पर अमोनिया (NH₃) के उत्पादन के लिए हेबर विधि का उपयोग किया जाता है।
- रासायनिक अभिक्रिया: इस विधि में नाइट्रोजन (N₂) और हाइड्रोजन (H₂) को 1:3 के आयतन अनुपात में मिलाकर उच्च दाब (लगभग 200-300 वायुमंडलीय दाब) और लगभग 450°C-500°C तापमान पर, लोहे (Fe) के उत्प्रेरक तथा मोलिब्डेनम (Mo) संवर्धक की उपस्थिति में अभिकृत कराया जाता है जिससे अमोनिया गैस बनती है:
N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ + ऊष्मा
- विकल्प (B) कैलग्नॉत की विधि: यह जल की कठोरता (Hardness of water) को दूर करने की एक रासायनिक विधि है।
- विकल्प (C) भस्मीकरण (Calcination): यह अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में उनके गलनांक से कम ताप पर गर्म करने की प्रक्रिया है (विशेषकर कार्बोनेट अयस्कों के लिए)।
- विकल्प (D) गर्मा-शावर विधि: यह अमोनिया उत्पादन से संबंधित कोई वैज्ञानिक विधि नहीं है।
#89. भारत में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम कब शुरू किया गया था?
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 3)
- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme – UIP): भारत सरकार द्वारा इस महत्त्त्वपूर्ण लोक स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत **1985** में की गई थी, जिसका उद्देश्य देश के सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीका-रोकथाम योग्य गंभीर बीमारियों से मुफ्त सुरक्षा प्रदान करना है।
- क्रमिक विकास: वर्ष 1978 में शुरू किए गए ‘विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम’ (EPI) को चरणबद्ध तरीके से विस्तारित करते हुए 1985 में इसे ‘सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम’ (UIP) के रूप में देशव्यापी स्तर पर लागू किया गया।
- विकल्प (A) 1980: इस वर्ष तक विश्व स्तर पर चेचक (Smallpox) के उन्मूलन की घोषणा की गई थी, लेकिन सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम 1985 में शुरू हुआ।
- विकल्प (B) 1974: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वैश्विक स्तर पर ‘Expanded Programme on Immunization (EPI)’ की शुरुआत 1974 में हुई थी (जिसे भारत में 1978 में अपनाया गया)।
- विकल्प (D) 1991: इस वर्ष से जुड़ा टीकाकरण कार्यक्रम का कोई मुख्य स्थापना वर्ष नहीं है (हालाँकि 1992 में इसे बाल उत्तरजीविता एवं सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम में शामिल किया गया था)।
#90. एक विशिष्ट क्रम में इंट्रॉन को हटाने और शेष एक्सॉन को जोड़ने की प्रक्रिया, ताकि एक परिपक्व mRNA अणु बन सके, ________ के रूप में जानी जाती है।
(RPF Constable 2024 : 18 Mar, 2025 Shift 2)
- RNA स्प्लिसिंग (RNA Splicing): यूकेरियोटिक जीवों में अनुलेखन (Transcription) के बाद बनने वाले प्रारंभिक RNA (जिसे hnRNA कहते हैं) में कोड न करने वाले अवांछित हिस्से **’इंट्रॉन’ (Introns)** और कोड करने वाले उपयोगी हिस्से **’एक्सॉन’ (Exons)** दोनों होते हैं।
- प्रक्रिया: परिपक्व mRNA बनाने के लिए इंट्रॉन को एक निश्चित क्रम में काटा जाता है और एक्सॉन को आपस में जोड़ा जाता है। इस जैव-रासायनिक प्रक्रिया को **स्प्लिसिंग** कहा जाता है।
- विकल्प (B) कैपिंग (Capping): इसमें hnRNA के 5′ सिरे पर एकMethylated guanosine triphosphate जोड़ा जाता है, न कि इंट्रॉन हटाए जाते हैं।
- विकल्प (C) टेलिंग (Tailing): इसके तहत mRNA के 3′ सिरे पर एडेनाइलेट अवशेषों ($\text{poly-A}$ पूंछ) को जोड़ा जाता है।
- विकल्प (A) विभाजन (Splitting): यह आणविक जीवविज्ञान में इस विशिष्ट अनुलेखीय प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होने वाला मानक वैज्ञानिक शब्द नहीं है।
#91. जब किसी हाइड्रोकार्बन को वायु की अधिकता में जलाया जाता है, तो अंतिम उत्पाद सदैव ________ बनता है।
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )
- हाइड्रोकार्बन का पूर्ण दहन (Complete Combustion): जब किसी हाइड्रोकार्बन (जैसे मीथेन, एथेन आदि) को **वायु या ऑक्सीजन की पर्याप्त/अधिकता** में जलाया जाता है, तो उसका पूर्ण दहन होता है।
- अंतिम उत्पाद: इस तीव्र ऑक्सीकरण अभिक्रिया के फलस्वरूप सदैव मुख्य रूप से **कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$)** और **जल ($\text{H}_2\text{O}$)** के साथ भारी मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, मीथेन का दहन:
$\text{CH}_4 + 2\text{O}_2 \rightarrow \text{CO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + \text{ऊष्मा}$
- विकल्प (B) और (C) [कार्बन मोनोऑक्साइड वाले विकल्प]: कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) का उत्पादन तब होता है जब हाइड्रोकार्बन का **अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion)** ऑक्सीजन की सीमित मात्रा में होता है, न कि वायु की अधिकता में।
- विकल्प (A): दहन के दौरान हाइड्रोजन स्वतंत्र रूप से नहीं बचती, बल्कि ऑक्सीजन के साथ मिलकर जल ($\text{H}_2\text{O}$) बनाती है।
#92. निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण नहीं है?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 1)
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): कॉपर सल्फेट विलयन में आयरन (लोहा) मिलाने पर आयरन, कॉपर को विस्थापित करके आयरन सल्फेट ($\text{FeSO}_4$) और कॉपर बनाता है ($\text{Fe} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{FeSO}_4 + \text{Cu}$)। यह एक **विस्थापन अभिक्रिया** का उदाहरण है, न कि संयोजन अभिक्रिया का।
- विकल्प (A) जल का निर्माण: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर जल बनाते हैं ($2\text{H}_2 + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{H}_2\text{O}$) – संयोजन अभिक्रिया।
- विकल्प (B) कोयले का जलना: कार्बन और ऑक्सीजन मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं ($\text{C} + \text{O}_2 \rightarrow \text{CO}_2$) – संयोजन अभिक्रिया।
- विकल्प (D) बिना बुझा चूना से बुझे चूने का निर्माण: $\text{CaO}$ और $\text{H}_2\text{O}$ मिलकर $\text{Ca(OH)}_2$ बनाते हैं – संयोजन अभिक्रिया।
#93. ऐलुमिनियम धातुओं के ऐनोडीकरण करने का उद्देश्य क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- ऐनोडीकरण (Anodizing): एल्युमिनियम धातु पर वायु के संपर्क में आने से प्राकृतिक रूप से एक पतली ऑक्साइड परत बन जाती है, जो इसे और अधिक संक्षारण (Corrosion) से बचाती है। इस परत को और अधिक मोटा और मजबूत बनाने के लिए एक विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया की जाती है, जिसे ऐनोडीकरण कहते हैं।
- मुख्य उद्देश्य: इस प्रक्रिया के दौरान एल्युमिनियम पर एल्युमिनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$) की एक **मोटी सुरक्षात्मक परत** बनाई जाती है ताकि धातु को जंग और घिसाव से सुरक्षित रखा जा सके।
- विकल्प (A) विद्युत चालकता बढ़ाना: एल्युमिनियम ऑक्साइड की यह परत विद्युत की कुचालक होती है, इसलिए इसका उद्देश्य चालकता बढ़ाना नहीं है।
- विकल्प (B) अधिक अभिक्रियाशील बनाना: इसका उद्देश्य धातु को सुरक्षित करना है, न कि उसे वायु के प्रति अधिक अभिक्रियाशील बनाना।
- विकल्प (D) गलनांक को कम करना: ऐनोडीकरण का धातु के गलनांक (Melting point) से कोई संबंध नहीं है।
#94. निम्नलिखित में से कौन सा विचार है कि नई प्रजातियां उनके परिभाषित लक्षणों में परिवर्तन के अचानक और अप्रत्याशित उद्भव से बनती हैं?(RRB NTPC Tier I : 28 Apr 2016 Shift 2)
- उत्परिवर्तन सिद्धांत (Mutation Theory): ह्यूगो डी व्रीस (Hugo de Vries) ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया था कि नई जातियों (प्रजातियों) का उद्भव क्रमिक और धीमी परिवर्तनों द्वारा नहीं, बल्कि जीवों के लक्षणों में अचानक होने वाले बड़े परिवर्तनों (जिसे **उत्परिवर्तन या साल्टेशन/Saltation** कहते हैं) के कारण होता है।
- मुख्य विशेषता: यह अचानक होने वाली वंशागत भिन्नताएँ होती हैं जो सीधे तौर पर नई प्रजातियों के निर्माण का कारण बनती हैं।
- विकल्प (A) प्राकृतिक चयन (Natural Selection): डार्विन के अनुसार यह एक धीमी, क्रमिक और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, न कि अचानक होने वाला परिवर्तन।
- विकल्प (C) पुनरसंयोजन (Recombination): यह लैंगिक जनन के दौरान जीन के नए संयोजन बनाता है लेकिन अचानक बड़ी प्रजाति परिवर्तन का मुख्य कारक नहीं है।
- विकल्प (D) गैर-यादृच्छिक संभोग: यह आबादी में एलील आवृत्तियों को प्रभावित करता है, लेकिन सीधे तौर पर अचानक प्रजाति उद्भव का सिद्धांत नहीं है।
#95. दिए गए कथन (A) और कारण (R) को पढ़ें और सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन करें। (A): महिलाओं में यौवन की शुरुआत पुरुषों की तुलना में पहले होती है, लेकिन दोनों 18-20 वर्ष की आयु तक अपनी अंतिम ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं। (R): यद्यपि पुरुषों में यौवन देर से शुरू होता है, लेकिन उनकी वृद्धि महिलाओं की तुलना में अधिक तीव्र होती है।
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025)
- कथन (A) का विश्लेषण: बालिकाओं (महिलाओं) में यौवनारंभ (Puberty) प्रायः 10 से 12 वर्ष की आयु में शुरू हो जाता है, जो कि बालकों की तुलना में लगभग 1-2 वर्ष पहले होता है। इसके बावजूद, लगभग 18 से 20 वर्ष की आयु तक आते-आते लड़के और लड़कियां दोनों अपनी अधिकतम ऊंचाई (Maximum height) तक पहुँच जाते हैं। अतः यह कथन **सत्य** है।
- कारण (R) का विश्लेषण और सही व्याख्या: लड़कों में किशोरावस्था के दौरान होने वाली वृद्धि की गति (Growth spurt) लड़कियों की तुलना में अधिक तीव्र होती है। चूँकि लड़कों में यौवन थोड़ा देर से शुरू होता है लेकिन विकास की यह तेज़ गति उनकी लंबाई को लड़कियों के लगभग बराबर या उससे अधिक तक पहुँचा देती है, जिससे दोनों अंततः एक ही आयु सीमा (18-20 वर्ष) में अपनी पूर्ण लंबाई प्राप्त कर लेते हैं। अतः कारण (R), कथन (A) की **सही व्याख्या** करता है।
- विकल्प (B), (C) और (D): चूँकि जैविक और शारीरिक वृद्धि के दृष्टिकोण से कथन और कारण दोनों तथ्य पूर्णतः सही हैं और कारण इस बात का स्पष्टीकरण भी देता है कि दोनों समान आयु तक अपनी अंतिम ऊंचाई पर कैसे पहुँच जाते हैं, इसलिए अन्य सभी विकल्प अमान्य हैं।
#96. व्यतिकरण (interference) और विवर्तन (diffraction) में प्रकाश ऊर्जा का क्या होता है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 27/03/2026 )
- ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Energy): प्रकाश का व्यतिकरण (Interference) और विवर्तन (Diffraction) दोनों ही तरंग प्रकृति (Wave nature) की घटनाएँ हैं। इन दोनों ही प्रक्रियाओं में प्रकाश ऊर्जा का न तो सृजन होता है और न ही विनाश।
- पुनर्वितरण (Redistribution): व्यतिकरण और विवर्तन के कारण प्रकाश ऊर्जा केवल **पुनर्वितरित** होती है—यानी जहाँ संपोषी व्यतिकरण (Constructive interference) या उच्चिष्ठ (Maxima) बनता है, वहाँ ऊर्जा बढ़ जाती है (चमकीली फ्रिंज), और जहाँ विनाशी व्यतिकरण (Destructive interference) या निम्निष्ठ (Minima) बनता है, वहाँ ऊर्जा घट जाती है (अंधेरी फ्रिंज)। कुल ऊर्जा हमेशा संरक्षित रहती है।
- विकल्प (A) यह घटती है / (B) यह बढ़ती है: संपूर्ण पैटर्न की कुल ऊर्जा में न तो समग्र कमी होती है और न ही वृद्धि, बल्कि यह केवल स्थानों के बीच स्थानांतरित/पुनर्वितरित होती है।
- विकल्प (D) इसका अपचयन हो जाता है: अपचयन (Reduction) रसायन विज्ञान की एक अवधारणा है जिसका प्रकाश तरंगों की भौतिक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है।
#97. यदि 9 g जल में 1 g हाइड्रोजन और 8 g ऑक्सीजन है, तो 36 g जल में क्या होगा?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions): इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक यौगिक (जैसे जल, $\text{H}_2\text{O}$) में उसके तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित और स्थिर अनुपात में संयुक्त होते हैं, चाहे स्रोत कोई भी हो।
- गणना (Calculation):
• प्रश्न के अनुसार, 9 g जल में 1 g हाइड्रोजन और 8 g ऑक्सीजन होती है।
• यदि जल की कुल मात्रा को बढ़ाकर 36 g कर दिया जाए (जो कि 9 g का 4 गुना है, क्योंकि $36 \div 9 = 4$), तो उसके घटक भी उसी अनुपात (4 गुना) में बढ़ जाएंगे:
– हाइड्रोजन की मात्रा = $1\text{ g} \times 4 = 4\text{ g}$
– ऑक्सीजन की मात्रा = $8\text{ g} \times 4 = 32\text{ g}$
- विकल्प (B), (C) और (D): इन विकल्पों में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की मात्राओं का वह अनुपात (1:8) नहीं बनता जो स्थिर अनुपात के नियम के अनुसार 36 g जल के लिए आवश्यक है ($4\text{ g} : 32\text{ g} = 1:8$)।
#98. सिल्वर क्लोराइड को कुछ समय तक धूप में रखने पर उसका रंग बदल जाता है, इसका क्या कारण है?
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )
- प्रकाश रासायनिक अपघटन (Photochemical Decomposition): जब सिल्वर क्लोराइड ($\text{AgCl}$) को सूर्य के प्रकाश में रखा जाता है, तो यह सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित करके अपने घटक तत्वों—चांदी ($\text{Ag}$) और क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) में वियोजित (अपघटित) हो जाता है।
- रंग परिवर्तन: इस प्रक्रिया में श्वेत रंग का सिल्वर क्लोराइड धीरे-धीरे **धूसर (Grey)** रंग के सिल्वर में बदल जाता है:
$2\text{AgCl}(s) \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}} 2\text{Ag}(s) + \text{Cl}_2(g)$
- विकल्प (A) ऊष्मीय अपघटन: यह ऊष्मा (Heat) देने पर होता है, न कि सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा द्वारा।
- विकल्प (C) विस्थापन अभिक्रिया: यह किसी अधिक सक्रिय धातु द्वारा कम सक्रिय धातु को हटाने की प्रतिक्रिया है, यहाँ ऐसा नहीं हो रहा।
- विकल्प (D) संयोजन अभिक्रिया: यह दो या दो से अधिक पदार्थों के मिलने की प्रक्रिया है, जबकि यहाँ यौगिक टूट रहा है (अपघटन हो रहा है)।
#99. प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा औपचारिक रूप से भारत के पहले परमाणु रिएक्टर का उद्घाटन किस वर्ष किया गया था?
(RRB NTPC CBT-I : 5 Jan 2021 Shift 1)
- भारत का पहला परमाणु रिएक्टर (‘अप्सरा’): भारत और पूरे एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर **’अप्सरा’ (Apsara)** था। इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), ट्रॉम्बे (मुंबई) में स्थापित किया गया था।
- उद्घाटन: देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा इसका औपचारिक रूप से उद्घाटन **20 जनवरी 1957** को किया गया था।
- विकल्प (A) 1955: इस वर्ष (1955) में ‘अप्सरा’ रिएक्टर की नींव रखी गई या इसके निर्माण की शुरुआत हुई थी, लेकिन इसका औपचारिक उद्घाटन 1957 में हुआ था।
- विकल्प (B) और (C) [1967 और 1965]: ये वर्ष भारत के बाद के अन्य परमाणु रिएक्टरों (जैसे साइरस आदि) की स्थापना या उनके विकास के चरण से संबंधित हैं, पहले रिएक्टर के उद्घाटन के लिए नहीं।
#100. किसी विलयन में धातु ‘A’ और धातु ‘B’ की अभिक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है, जिसमें धातु ‘A’ द्वारा धातु ‘B’ को विस्थापित किया जाता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): रासायनिक सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) के नियमों के अनुसार, अधिक अभिक्रियाशील धातु अपनी से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक या लवण के जलीय विलयन से विस्थापित कर सकती है।
- निष्कर्ष: चूँकि प्रश्न में दिया गया है कि धातु ‘A’ द्वारा धातु ‘B’ को उसके विलयन से विस्थापित किया जाता है, अतः यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि **धातु ‘A’, धातु ‘B’ की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील (More reactive)** है।
- विकल्प (B): यदि ‘B’ अधिक अभिक्रियाशील होती, तो वह ‘A’ को विस्थापित करती, न कि ‘A’ द्वारा ‘B’ को।
- विकल्प (C): समान अभिक्रियाशीलता वाले तत्व एक-दूसरे को उनके विलयनों से विस्थापित नहीं कर सकते।
- विकल्प (D): यह एक स्वतः होने वाली मान्य रासायनिक विस्थापन अभिक्रिया है, अतः यह संभव है।
#101. जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के घोल में रखा जाता है तो क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction): जब लोहे की कील ($\text{Fe}$) को कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के नीले रंग के विलयन में डुबोया जाता है, तो लोहा कॉपर की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर को विस्थापित कर देता है और आयरन सल्फेट ($\text{FeSO}_4$) बनाता है:
$\text{Fe}(s) + \text{CuSO}_4(aq) \rightarrow \text{FeSO}_4(aq) + \text{Cu}(s)$
- दृश्य परिवर्तन:
• कॉपर सल्फेट के नीले घोल से तांबा ($\text{Cu}$) विस्थापित होकर लोहे की कील पर भूरे रंग की परत के रूप में जमा हो जाता है, जिससे कील **भूरे रंग की** हो जाती है।
• विलयन में आयरन सल्फेट बनने के कारण कॉपर सल्फेट का मूल **नीला रंग फीका पड़कर हल्का हरा/रंगहीन** होने लगता है।
- विकल्प (A): इसमें कील के रंग में बदलाव न होने की बात कही गई है, जबकि कॉपर जमा होने से कील भूरी हो जाती है।
- विकल्प (C): इसमें कॉपर सल्फेट का नीला रंग वैसा ही रहने की बात कही गई है, जबकि कॉपर के हटने और $\text{FeSO}_4$ बनने से नीला रंग फीका पड़ता है।
- विकल्प (D): विलयन का रंग बदलकर पीला नहीं बल्कि हल्का हरा या फीका होता है।
#102. प्लास्टर ऑफ पेरिस किसके कारण कठोर होता है?
(RRB JE 26 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris – POP): इसका रासायनिक नाम **कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट** ($\text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O}$) है।
- कठोर होने की प्रक्रिया: जब प्लास्टर ऑफ पेरिस में पानी मिलाया जाता है, तो यह पानी के साथ रासायनिक संयोजन (जलयोजन) करके पुनः **जिप्सम** ($\text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O}$) में बदल जाता है। यह एक ठोस, कठोर द्रव्यमान के रूप में जम जाता है:
$\text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} + 1\frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O} \text{ (जिप्सम – कठोर ठोस)}$
- विकल्प (A) कार्बन डाइऑक्साइड देकर: कार्बन डाइऑक्साइड का निकलना या देना इस अभिक्रिया से संबंधित नहीं है।
- विकल्प (B) $\text{CaCO}_3$ में परिवर्तन: कैल्सियम कार्बोनेट का बनना चूने के पानी में $\text{CO}_2$ प्रवाहित करने पर होता है, न कि POP के जमने पर।
- विकल्प (C) पानी देकर: इसमें पानी छोड़ा नहीं जाता, बल्कि पानी को अवشोषित करके (संयोजन द्वारा) जिप्सम का क्रिस्टल बनाया जाता है।
#103. ______ कहलाती है।
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 1)
- ऊर्ध्वपातन (Sublimation): यह वह भौतिक प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ तरल (द्रव) अवस्था में आए बिना सीधे ठोस अवस्था से गैसीय (वाष्प) अवस्था में बदल जाता है, और ठंडा करने पर गैस से सीधे ठोस में परिवर्तित हो जाता है।
- प्रमुख उदाहरण: कपूर (Camphor), अमोनियम क्लोराइड (नौसादर), शुष्क बर्फ (ठोस कार्बन डाइऑक्साइड) और आयोडीन इसके मुख्य उदाहरण हैं।
- विकल्प (B) आसवन (Distillation): यह द्रवों को वाष्पित करके और फिर संघनित करके शुद्ध करने या अलग करने की विधि है।
- विकल्प (C) किण्वन (Fermentation): यह सूक्ष्मजीवों द्वारा शर्करा या कार्बोहाइड्रेट को अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदलने की रासायनिक प्रक्रिया है।
- विकल्प (D) निसादन (Sintering): यह चूर्णित पदार्थों को उनके गलनांक से नीचे के तापमान पर दबाकर या गर्म करके ठोस पिंड बनाने की तकनीकी प्रक्रिया है।
#104. ठोस के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से सत्य हैं? a. निश्चित आकार b. स्थिर दृढ़ता c. आयतन
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025)
- ठोसों के गुण (Properties of Solids): पदार्थ की तीनों अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) में से ठोसों की भौतिक विशेषताएँ निम्नलिखित होती हैं:
• a. निश्चित आकार (Definite Shape): ठोसों के कणों के बीच अंतर-आणविक बल बहुत मजबूत होता है, जिससे इनका आकार निश्चित होता है।
• b. स्थिर दृढ़ता (Fixed Rigidity): ठोस अत्यधिक कठोर और दृढ़ (Rigid) होते हैं, और बाहरी बल लगाने पर भी इनका आकार आसानी से नहीं बदलता।
• c. निश्चित आयतन (Volume): इनका आयतन भी पूरी तरह निश्चित होता है (ये लगभग असम्पीड्य होते हैं)।
- निष्कर्षतः दिए गए तीनों कथन ($\text{a}$, $\text{b}$ और $\text{c}$) ठोस अवस्था के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं।
- विकल्प (A), (C) और (D): चूँकि आयतन, आकार और दृढ़ता तीनों ही ठोसों के मौलिक और अनिवार्य गुण हैं, इसलिए इनमें से किसी एक या दो गुणों को छोड़कर अन्य विकल्पों का चयन करना गलत है।
#105. बेकिंग सोडा निम्नलिखित में से किस प्रक्रम का उपयोग करके तैयार किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )
- सॉल्वे प्रक्रम (Solvay Process): औद्योगिक पैमाने पर बेकिंग सोडा यानी **सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{NaHCO}_3$)** और धोने का सोडा ($\text{Na}_2\text{CO}_3$) तैयार करने के लिए सॉल्वे विधि का उपयोग किया जाता है।
- रासायनिक प्रक्रिया: इस विधि में सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) के सांद्र जलीय विलयन (ब्राइन) में अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है, जिसके फलस्वरूप बेकिंग सोडा प्राप्त होता है:
$\text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 + \text{NH}_3 \rightarrow \text{NH}_4\text{Cl} + \text{NaHCO}_3$
- विकल्प (A) हाबर प्रक्रम: इसका उपयोग अमोनिया ($\text{NH}_3$) के औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) क्लोर-क्षार प्रक्रम: यह सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन के विद्युत अपघटन द्वारा सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$), क्लोरीन और हाइड्रोजन गैस बनाने की विधि है।
- विकल्प (D) डीकन प्रक्रम: इस विधि का उपयोग हाइड्रोजन क्लोराइड से क्लोरीन गैस के उत्पादन के लिए किया जाता है।
#106. निम्नलिखित में से कौन-सा द्विविस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच **आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions)** होता है, द्विविस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
- विश्लेषण: इस अभिक्रिया में सोडियम सल्फेट ($\text{Na}_2\text{SO}_4$) और बेरियम क्लोराइड ($\text{BaCl}_2$) के जलीय विलयन आपस में अभिक्रिया करते हैं, जिसमें बेरियम आयन ($\text{Ba}^{2+}$) और सल्फेट आयन ($\text{SO}_4^{2-}$) मिलकर बेरियम सल्फेट ($\text{BaSO}_4$) का सफेद अवक्षेप बनाते हैं, जबकि सोडियम आयन और क्लोराइड आयन मिलकर सोडियम क्लोराइड बनाते हैं।
- विकल्प (A) $\text{Fe} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{FeSO}_4 + \text{Cu}$: यह एक **विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)** है, क्योंकि इसमें केवल एक तत्व (आयरन) ने दूसरे तत्व (कॉपर) को विस्थापित किया है।
- विकल्प (B) $2\text{H}_2 + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{H}_2\text{O}$: यह एक **संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)** है।
- विकल्प (C) $\text{CaCO}_3 \rightarrow \text{CaO} + \text{CO}_2$: यह एक **अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)** है।
#107. अभिक्रियाशीलता श्रृंखला, जिसे सक्रियता श्रृंखला के रूप में भी जाना जाता है, धातुओं की एक सूची है जो उनकी ________ के क्रम में व्यवस्थित होती है।
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- सक्रियता श्रृंखला (Reactivity Series): यह धातुओं को उनकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता के आधार पर व्यवस्थित करने की एक मानक सूची है।
- व्यवस्था का क्रम: इस श्रृंखला में सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातुओं (जैसे पोटैशियम, सोडियम आदि) को **शीर्ष (Top)** पर रखा जाता है, और जैसे-जैसे हम नीचे की ओर बढ़ते हैं, धातुओं की अभिक्रियाशीलता कम होती जाती है और अंत में सबसे कम अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे सोना, चांदी आदि) आती हैं। अतः यह पूरी सूची **घटते हुए क्रम** में व्यवस्थित होती है।
- विकल्प (A): बढ़ती अभिक्रियाशीलता के क्रम में धातुओं को नीचे से ऊपर की ओर रखा जाता है, न कि मानक सक्रियता सूची के पढ़ने के पारंपरिक क्रम में।
- विकल्प (C) और (D): सक्रियता श्रृंखला कोई ऐसी मिश्रित सूची नहीं है जिसमें अभिक्रियाशीलता पहले घटे और फिर बढ़े, बल्कि यह क्रमिक रूप से ऊपर से नीचे घटती जाती है।
#108. एक काँच के गिलास में 1.7 ग्राम अमोनिया गैस होती है। काँच के गिलास में मौजूद मोल की संख्या की गणना कीजिए।
(RRB JE EE 1 Sept 2019 Shift 1 CBT 2)
- मोल की गणना का सूत्र: मोलों की संख्या ($\text{n}$) ज्ञात करने का सूत्र होता है:
$$\text{मोलों की संख्या (n)} = \frac{\text{दिया गया द्रव्यमान (m)}}{\text{मोलर द्रव्यमान (M)}}$$
- चरणबद्ध हल:
1. **अमोनिया ($\text{NH}_3$) का मोलर द्रव्यमान:**
नाइट्रोजन ($\text{N}$) का परमाणु द्रव्यमान = $14\text{ g/mol}$
हाइड्रोजन ($\text{H}$) का परमाणु द्रव्यमान = $1\text{ g/mol}$ (चूंकि 3 परमाणु हैं, अतः $3 \times 1 = 3$)
$\text{NH}_3$ का कुल मोलर द्रव्यमान = $14 + 3 = 17\text{ g/mol}$
2. **दिया गया द्रव्यमान:** $1.7\text{ g}$
3. **मोलों की संख्या की गणना:**
$$\text{n} = \frac{1.7\text{ g}}{17\text{ g/mol}} = 0.1\text{ mol}$$
- विकल्प (A) 0.01 मोल: यह तब आता जब दिया गया द्रव्यमान $0.17\text{ g}$ होता।
- विकल्प (B) 1 मोल: 1 मोल अमोनिया का द्रव्यमान ठीक $17\text{ g}$ होता है, न कि $1.7\text{ g}$।
- विकल्प (D) 0.2 मोल: यह गलत गणना का परिणाम है।
#109. जब स्याही की एक बूंद को जल में डाला जाता है, तो वह बिना हिलाए समान रूप से फैल जाती है। इससे क्या सिद्ध होता है?
(RRB ALP CBT 1 16/02/2026 )
- विसरण (Diffusion): जब स्याही की एक बूंद को जल में डाला जाता है, तो बिना हिलाए भी वह धीरे-धीरे पूरे पानी में समान रूप से फैल जाती है। इस प्रक्रिया को विसरण कहा जाता है।
- निहित सिद्धांत: यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि **पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं** और उनमें गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) होती है, जिसके कारण वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्वतः फैल जाते हैं।
- विकल्प (A) कण विश्राम अवस्था में हैं: यदि कण स्थिर (विश्राम अवस्था में) होते, तो स्याही अपने स्थान पर ही रहती और कभी भी जल में नहीं फैलती।
- विकल्प (B) कण भारी होते हैं और नीचे बैठ जाते हैं: विसरण के कारण स्याही नीचे बैठने के बजाय पूरे विलयन में एकसमान रूप से घुल जाती है।
- विकल्प (D) जल स्याही के साथ अभिक्रिया करता है: यह कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं है, बल्कि एक विशुद्ध भौतिक प्रक्रिया (विसरण) है।


