प्रजनन Railway MCQ
#1. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1)
- शारीरिक वृद्धि और परिपक्वता (Maturation and Growth): जब मानव शरीर किशोरावस्था से होते हुए परिपक्वता (Puberty/Adulthood) की अवस्था में पहुँचता है, तो सामान्य शारीरिक लंबाई और वृद्धि की दर क्रमिक रूप से धीमी होने लगती है। इसके विपरीत, इस दौरान जनन ऊतक (Reproductive tissues) सक्रिय और परिपक्व होना शुरू होते हैं।
- विकल्प 1: लैंगिक प्रजनन में दो अलग-अलग व्यक्तियों (नर और मादा) की जनन कोशिकाओं का संलयन होता है, न कि केवल एक ही व्यक्ति की कोशिकाओं का।
- विकल्प 3: परिपक्वता आने पर सामान्य शरीर की वृद्धि की दर तेज नहीं, बल्कि धीमी हो जाती है।
- विकल्प 4: परिपक्वता के समय ही प्रजनन ऊतक परिपक्व होना शुरू होते हैं, बंद नहीं होते।
#2. पुष्प में स्त्रीकेसर के शीर्ष भाग को क्या कहा जाता है?
(RRB JE CBT I – : 2 June 2019 Shift 2)
- स्त्रीकेसर का शीर्ष भाग (Stigma): पुष्प के मादा जनन अंग (स्त्रीकेसर या कारपेल) के तीन मुख्य भाग होते हैं—वर्तिकाग्र (Stigma), वर्तिका (Style), और अंडाशय (Ovary)। इसमें सबसे ऊपरी और शीर्ष भाग वर्तिकाग्र कहलाता है, जो परागकणों को ग्रहण करने का कार्य करता है।
- विकल्प 2 (पुंकेसर / Stamen): यह पुष्प का नर जनन अंग होता है, मादा अंग का भाग नहीं।
- विकल्प 3 (पराग / Pollen): यह परागकोश में बनने वाले परागकण होते हैं।
- विकल्प 4 (बीजांड / Ovule): यह अंडाशय के भीतर स्थित होता है जिसमें मादा युग्मक (अंड कोशिका) का विकास होता है।
#3. मध्यवर्ती पट्टिका पर कोशिका के केंद्र में गुणसूत्रों का संरेखण समसूत्रण की किस अवस्था का निर्माण करता है?
(RRB NTPC CBT-I : 19 Jan 2021 Shift 1)
- मध्यावस्था (Metaphase): समसूत्रण (Mitosis या सूत्री विभाजन) की इस अवस्था में गुणसूत्र पूरी तरह से संघनित हो जाते हैं और कोशिका के मध्य भाग में स्थित **मध्यवर्ती पट्टिका (Metaphase plate / Equator)** पर व्यवस्थित या संरेखित (Align) हो जाते हैं। तर्गु तंतु (Spindle fibers) गुणसूत्रों के काइनेटकोअर (Kinetochore) से जुड़ जाते हैं।
- विकल्प 1 (अंत्यावस्था / Telophase): यह विभाजन की अंतिम अवस्था है, जिसमें गुणसूत्र पुनः क्रोमैटिन जाल में बदलने लगते हैं और नए केंद्रक का निर्माण होता है।
- विकल्प 2 (पश्चावस्था / Anaphase): इस अवस्था में गुणसूत्रों के सेंट्रोमियर विभाजित होते हैं और संतति क्रोमैटिड्स विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं।
- विकल्प 3 (पूर्ववस्था / Prophase): यह समसूत्रण की पहली अवस्था है, जिसमें क्रोमैटिन धागे संघनित होकर गुणसूत्रों का रूप लेने लगते हैं।
#4. महिलाओं के शरीर में मुख्य गर्भनिरोधक गोलियों का क्या प्रभाव होता है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- गर्भनिरोधक गोलियाँ (Oral Contraceptive Pills): महिलाओं द्वारा ली जाने वाली इन गोलियों में मुख्य रूप से हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) होते हैं।
- कार्यप्रणाली: ये हार्मोन शरीर में हार्मोनल संतुलन को इस प्रकार बदलते हैं कि अंडाशय (Ovary) से अंडों का मोचन (Ovulation या अंडक की परिपक्वता) रुक जाता है। जब अंडा परिपक्व होकर बाहर ही नहीं आता, तो निषेचन की संभावना समाप्त हो जाती है।
- विकल्प 1: गर्भनिरोधक गोलियाँ शुक्राणुओं के लिए सीधे तौर पर विषैली नहीं होती हैं।
- विकल्प 3: डिम्बवाहिनी नली (Fallopian tube) में भौतिक रोध उत्पन्न करने का कार्य ‘ट्यूबेक्टमी’ (Tubectomy) शल्य प्रक्रिया या बैरियर तरीकों (जैसे कंडोम) द्वारा किया जाता है।
- विकल्प 4: योनि में मार्ग को अवरुद्ध करने का कार्य डायफ्राम या सर्वाइकल कैप जैसे बैरियर साधन करते हैं।
#5. पुनर्जनन के बारे में गलत कथन की पहचान करें
。(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1)
- अमीबा में जनन: यह कथन गलत है क्योंकि अमीबा मुख्य रूप से **द्वि-खंडन (Binary Fission)** द्वारा अलैंगिक जनन करता है, न कि पुनर्जनन (Regeneration) द्वारा।
- पुनर्जनन (Regeneration): हाइड्रा और प्लेनेरिया जैसे जीवों में यह क्षमता पाई जाती है कि यदि उनका शरीर किसी कारणवश कई टुकड़ों में कट जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा विकसित होकर एक नया पूर्ण जीव बना लेता है। यह विशेष कोशिकाओं द्वारा तीव्र गुणन (Proliferation) के कारण होता है।
- विकल्प 2: पुनर्जनन के दौरान शरीर की विशेष कोशिकाएँ तेजी से विभाजित होकर बड़ी संख्या में नई कोशिकाएँ बनाती हैं (सत्य)।
- विकल्प 3: इस प्रक्रिया के लिए शरीर में विशेष प्रकार की कोशिकाएँ उत्तरदायी होती हैं (सत्य)।
- विकल्प 4: हाइड्रा और प्लेनेरिया पुनर्जनन (Regeneration) की विधि द्वारा प्रजनन दर्शाते हैं (सत्य)।
#6. गन्ना, गुलाब या अंगूर जैसे कई पौधों को कृषि उद्देश्यों के लिए उगान के लिए स्तरीकरण या रोपण जैसी विधियों में प्रजनन की विधि क्या है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 3)
- कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): गन्ना, गुलाब, अंगूर और केला जैसे पौधों में बीज उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती या उनका प्रवर्धन आसान बनाने के लिए कायिक प्रवर्धन (जैसे कर्तन/Cutting,दाब लगाना/Layering या स्तरीकरण) विधियों का उपयोग किया जाता है।
- प्रक्रिया: इस विधि में पौधे के कायिक भागों जैसे जड़, तना या पत्तियों से नए पौधे उगाए जाते हैं। यह अलैंगिक जनन (Asexual reproduction) का ही एक रूप है, जिससे उगाई गई फसलें आनुवंशिक रूप से अपने जनक पौधे के समान होती हैं।
- विकल्प 1 (पुनर्जनन / Regeneration): यह कटे हुए अंगों या ऊतकों से पूरे जीव के विकसित होने की प्रक्रिया है (जैसे हाइड्रा और प्लेनेरिया)।
- विकल्प 2 (खंडन / Fragmentation): इसमें बहुकोशिकीय जीव सरल रूप से छोटे-छोटे टुकड़ों में खंडित हो जाते हैं और प्रत्येक टुकड़ा नया जीव बनता है (जैसे स्पाइरोगायरा)।
- विकल्प 4 (बीजाणु निर्माण / Spore formation): यह राइजोपस जैसे कवकों में पाई जाने वाली विधि है।
#7. यदि अंडा निषेचित नहीं हो तो क्या होगा?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- अंड कोशिका का जीवनकाल (Lifespan of Egg): जब अंडाशय से अंडा (अंडक) निर्मुक्त होकर अंडवाहिनी (Fallopian tube) में पहुँचता है, तो यदि उसकी शुक्राणु से भेंट नहीं होती (अर्थात निषेचन नहीं होता), तो वह केवल लगभग **एक दिन (24 घंटे)** तक ही जीवित रह पाता है।
- विघटन: निषेचन न होने की स्थिति में यह अंडा धीरे-धीरे विघटित हो जाता है और इसके साथ ही गर्भाशय का आंतरिक आस्तर टूटकर मासिक धर्म (Menstruation) के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।
- विकल्प 2 और 4: अंडा भ्रूण तभी बनता है और गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है जब उसका शुक्राणु द्वारा सफल **निषेचन (Fertilization)** हो जाता है।
- विकल्प 3: निषेचित न होने पर अंडा एक सप्ताह तक जीवित नहीं रहता, बल्कि एक दिन के भीतर ही निष्क्रिय या विघटित होने लगता है।
#8. यदि किसी पुष्प का वर्तिकाग्र क्षतिग्रस्त हो जाए, तो कौन-सी प्रक्रिया सर्वाधिक प्रभावित होगी?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- वर्तिकाग्र (Stigma) की भूमिका: वर्तिकाग्र पुष्प के मादा जनन अंग (स्त्रीकेसर) का सबसे ऊपरी भाग होता है, जिसका मुख्य कार्य परागकणों (Pollen grains) को ग्रहण करना और उनके अंकुरण के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करना है।
- प्रभाव: यदि वर्तिकाग्र क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो परागकण उस पर ठीक से स्थापित या अंकुरित नहीं हो पाएंगे। परिणामस्वरूप, न तो परागण (Pollination) की प्रक्रिया पूरी होगी और न ही परागनलिका के माध्यम से होने वाला निषेचन (Fertilization) संभव हो पाएगा।
- विकल्प 2: पंखुड़ियों और बाह्यदलों का निर्माण पुष्प के शुरुआती विकास से जुड़ा है, जिसका वर्तिकाग्र की क्षति से सीधा संबंध नहीं है।
- विकल्प 3: बीज प्रकीरोपण (Seed dispersal) निषेचन और फल-बीज बनने के बाद की प्रक्रिया है।
- विकल्प 4: फल परिपक्वन (Fruit maturation) भी निषेचन के बाद अंडाशय में होने वाला परिवर्तन है। (जब निषेचन ही नहीं होगा, तो फल या बीज का निर्माण ही नहीं होगा)।
#9. निम्नलिखित में से कौन-सा, महिलाओं से उसी प्रकार संबंधित है जिस प्रकार शुक्रवाहिका-उच्छेदन (vasectomy) पुरुषों से संबंधित है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
- नसबंदी (Sterilization) विधियाँ: यह स्थायी गर्भनिरोधक शल्य क्रियाएँ (Surgical methods) हैं:
- पुरुषों में (Vasectomy / शुक्रवाहिका-उच्छेदन): इसमें पुरुषों की शुक्रवाहिकाओं (Vas deferens) को काटकर या बांधकर रास्ता बंद कर दिया जाता है ताकि शुक्राणु बाहर न आ सकें।
- महिलाओं में (Tubectomy / ट्यूबेक्टोमी): इसमें महिलाओं की अंडवाहिनी नली या फेलोपियन ट्यूब (Fallopian tube) के एक छोटे हिस्से को काटकर या बांध दिया जाता है ताकि अंडाणु (Ovum) गर्भाशय तक न पहुँच सके और निषेचन न हो।
- विकल्प 1 (कोट्रेस इंटरप्टस): यह एक प्राकृतिक और अस्थायी गर्भनिरोधक विधि है।
विकल्प 2 और 3 (कॉपर-टी और सरवाइकल कैप्स): ये अस्थायी गर्भनिरोधक साधन (आईयूडी या बैरियर मेथड) हैं, स्थायी शल्य क्रिया नहीं।
#10. हार्मोनल और शल्य-चिकित्सा दोनों विधियों से बचने की इच्छा रखने वाले दंपत्ति के लिए कौन-सी गर्भनिरोधक विधि सबसे उपयुक्त है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
- अवरोधक विधियाँ (Barrier Methods): कंडोम (Condoms) एक प्रकार की भौतिक या अवरोधक विधि है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके प्रयोग में किसी भी प्रकार के हार्मोन (Hormones) का उपयोग नहीं होता है और न ही इसमें किसी प्रकार की शल्य-चिकित्सा (Surgery) की आवश्यकता पड़ती है।
- लाभ: यह शुक्राणु और अंडाणु को मिलने से भौतिक रूप से रोकता है तथा यौन संचारित रोगों (STIs) से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
- विकल्प 1 (कॉपर-टी): यह एक गर्भाशय-भीतरी युक्ति (IUD) है, जिसे लगाने के लिए चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता होती है।
- विकल्प 3 (प्राकृतिक विधियाँ): यद्यपि इसमें हार्मोन या सर्जरी नहीं होती, लेकिन इनकी विफलता की दर (Failure rate) बहुत अधिक होती है, इसलिए कंडोम जैसी अवरोधक विधियों को अधिक सुरक्षित और उपयुक्त माना जाता है।
विकल्प 2 (मुख से ली जाने वाली पिल्स): ये पूरी तरह से हार्मोनल गोलियाँ होती हैं जो शरीर के हार्मोन संतुलन को बदलती हैं।
#11. निम्नलिखित में से क्या, बिना किसी युग्मक के, केवल एक जनक के द्वारा प्रजनन का वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): अमीबा में होने वाला द्विखंडन (Binary Fission) अलैंगिक जनन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के युग्मकों (Gametes) का निर्माण या संलयन नहीं होता है और इसमें केवल एक ही जनक (Single parent) भाग लेता है, जो विभाजित होकर दो नए संतति जीवों का निर्माण करता है।
- विकल्प 2 (मेंढकों में निषेचन): यह लैंगिक प्रजनन का भाग है, जिसमें नर और मादा युग्मकों का मिलन होता है।
- विकल्प 3 (पुष्पीय पौधों में बीज निर्माण): बीज का निर्माण सामान्यतः परागण और निषेचन (लैंगिक जनन) के पश्चात होता है।
- विकल्प 4 (स्तनधारियों में आंतरिक निषेचन): यह भी लैंगिक प्रजनन की एक प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा दोनों जनकों की आवश्यकता होती है।
#12. आधुनिक मत्स्य-पालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
- आधुनिक मत्स्य-पालन (Modern Aquaculture/Pisiculture): मिश्रित मछली संवर्धन (Composite fish culture) और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों में अधिक मात्रा में वांछित गुणवत्ता वाले बीज (डिंभ/फिंगरलिंग) प्राप्त करने के लिए प्रेरित प्रजनन (Induced breeding) में हार्मोन (Hormones) का उपयोग किया जाता है। इससे मछलियों को बिना प्राकृतिक पर्यावरण के भी कृत्रिम रूप से अंडे देने के लिए प्रेरित किया जाता है।
- विकल्प 2: मछलियों को बड़ा करने के लिए मुख्य रूप से संतुलित आहार और खाद्यान्न का उपयोग किया जाता है, न कि सामान्य रूप से एंजाइमों का।
- विकल्प 4: आधुनिक मत्स्य पालन में सभी डिंभ नदियों से एकत्र नहीं किए जाते, बल्कि इन्हें कृत्रिम रूप से हैचरी (Hatcheries) में भी तैयार किया जाता है।
विकल्प 3: तालाबों, पोखरों और कृत्रिम जलाशयों में बड़े पैमाने पर मत्स्य-पालन किया जाता है (जैसे मिश्रित मत्स्य पालन)।
#13. किसी एक डीएनए में से आरएनए पर आनुवंशिक जानकारी की प्रतिलिपि बनाने की प्रक्रिया को ________ कहा जाता है।
(RPF SI Previous Paper : 6 Jan 2019 Shift 2)
- अनुलेखन (Transcription): किसी एक डीएनए (DNA) रज्जूक से आरएनए (RNA) पर आनुवंशिक सूचना या जानकारी की प्रतिलिपि (Copying) तैयार करने की प्रक्रिया को अनुलेखन कहा जाता है। यह आणविक जीवविज्ञान के ‘केंद्रीय डोग्मा’ (Central Dogma) का एक मुख्य चरण है, जिसमें डीएनए से आरएनए का निर्माण होता है।
- विकल्प 4 (स्थानांतरण / Translation): आरएनए (mRNA) से प्रोटीन के संश्लेषण की प्रक्रिया को स्थानांतरण या अनुवाद कहा जाता है।
- विकल्प 3 (रूपांतरण / Transformation): यह कोशिकाओं द्वारा बाहरी डीएनए को ग्रहण करने की प्रक्रिया है (जैसे ग्रिफिथ का प्रयोग)।
- विकल्प 2 (ट्रांसकोपिंग): यह इस प्रक्रिया के लिए एक अमान्य और काल्पनिक शब्द है।
#14. निम्नलिखित में से कौन-सा निषेचन के बाद पुष्प के भागों में होने वाले परिवर्तनों का सर्वोत्तम रूप से वर्णन करता है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- निषेचन के पश्चात परिवर्तन (Post-fertilization changes): पुष्प में निषेचन (Fertilization) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव होते हैं:
- अंडाशय (Ovary): परिपक्व होकर फल (Fruit) का निर्माण करता है।
- बीजांड (Ovule): विकसित होकर बीज (Seed) बन जाता है।
- इसके अलावा, पुष्प के अन्य भाग जैसे बाह्यदल, पंखुड़ियाँ, वर्तिका और वर्तिकाग्र प्रायः सूखकर झड़ जाते हैं।
- विकल्प 1: वर्तिकाग्र फल में नहीं बदलता, बल्कि केवल अंडाशय ही फल का रूप लेता है।
- विकल्प 4: यह विकल्प बिल्कुल विपरीत (उल्टा) दिया गया है (बीजांड फल नहीं बनता, बल्कि बीज बनता है)।
विकल्प 2: पुष्प के सभी भाग बने नहीं रहते; अधिकांश भाग (जैसे पंखुड़ियाँ और पुंकेसर) मुरझाकर गिर जाते हैं।
#15. मानव मादा प्रजनन तंत्र में निषेचन के बाद क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- निषेचन और रोपण प्रक्रिया (Fertilization & Implantation): जब मादा के डिंबवाहिनी नली (Fallopian tube) में शुक्राणु और अंडाणु का संलयन होता है, तो युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है।
- यह युग्मनज लगातार विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) में बदलता हुआ गर्भाशय की ओर बढ़ता है। गर्भाशय में पहुँचने पर यह वहाँ के मोटे और स्पंजी आस्तर में आरोपित (Implant) हो जाता है, जहाँ से उसे आगे का पोषण और विकास मिलता है।
- विकल्प 1: निषेचित अंडा डिंबवाहिनी नली में ही विकसित नहीं होता, बल्कि वह गर्भाशय में आता है (नली में रहने से एक्टोपिक प्रेगनेंसी जैसी जटिलता हो सकती है)।
- विकल्प 4: युग्मनज तुरंत गर्भ नहीं बनता, बल्कि कोशिका विभाजन के बाद गर्भाशय में रोपण की प्रक्रिया पूरी होती है।
विकल्प 2: भ्रूण अंडाशय में नहीं, बल्कि गर्भाशय (Uterus) में विकसित होता है।
#16. भ्रूण विकास की वह अवस्था जिसमें बच्चे के सभी अंगों की पहचान की जा सकती है, कौन-सी है?
(RPF Constable 2018 12 Feb 2019 Shift 2)
- गर्भ या भ्रूण (Foetus): गर्भावस्था के विकास की वह अवस्था जिसमें शरीर के सभी मुख्य अंगों (जैसे हाथ, पैर, सिर, आँखें आदि) की स्पष्ट पहचान की जा सकती है, उसे ‘फोएтус’ या ‘भ्रूण’ कहा जाता है। (प्रारंभिक अवस्था को Embryo कहते हैं, जबकि विकसित अवस्था जिसमें अंग स्पष्ट हो जाते हैं उसे Foetus कहा जाता है)।
- विकल्प 1 (अंडा / Ovum): यह निषेचन से पूर्व मादा जनन कोशिका है।
- विकल्प 4 (नली): यह डिंबवाहिनी नली (Fallopian tube) को संदर्भित करता है।
विकल्प 3 (युग्मनज / Zygote): यह निषेचन के तुरंत बाद बनने वाली एकल कोशिका है।
#17. हाइड्रा की मुकुलन प्रक्रिया में चरणों का अनुक्रम क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
- हाइड्रा में मुकुलन (Budding in Hydra): हाइड्रा में अलैंगिक जनन की यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
- मुकुल आरंभ (Bud initiation): शरीर की कोशिकाओं के लगातार विभाजन से जनक हाइड्रा के शरीर पर एक उभार या कली (Bud) बनना शुरू होती है।
- मुकुल परिपक्वता (Bud maturation): यह उभार धीरे-धीरे बढ़ता है, जिसमें छोटे मुख और स्पर्शक (Tentacles) विकसित हो जाते हैं और यह पूरी तरह परिपक्व हो जाता है।
- मुकुल वियोजन (Bud detachment): परिपक्व होने के बाद यह नया मुकुल जनक हाइड्रा के शरीर से अलग (वियोजित) हो जाता है।
- नई व्यष्टि (New individual): अलग होने के बाद यह नया मुकुल स्वतंत्र रूप से एक नए जीव (व्यष्टि) के रूप में जीवन व्यतीत करता है।
- अन्य सभी विकल्पों में चरणों का सही क्रम नहीं दिया गया है, क्योंकि प्रक्रिया हमेशा ‘मुकुल के आरंभ’ (शुरुआत) से शुरू होकर ‘परिपक्वता’ और ‘वियोजन’ के बाद ‘नई व्यष्टि’ के रूप में समाप्त होती है।
#18. किस प्रक्रिया द्वारा संतति कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2)
- अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): यह एक विशेष प्रकार का कोशिका विभाजन है जो जनन कोशिकाओं (Germ cells) में होता है। इस प्रक्रिया में गुणसूत्रों की संख्या मूल (जनक) कोशिका से आधी हो जाती है, जिससे अगुणित (Haploid) युग्मकों का निर्माण होता है। जब निषेचन के दौरान नर और मादा युग्मक मिलते हैं, तो जीवों में गुणसूत्रों की संख्या स्थिर बनी रहती है।
- विकल्प 1 (समसूत्री विभाजन / Mitosis): इस विभाजन में संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका के समान (द्विगुणित) ही बनी रहती है, संख्या आधी नहीं होती।
- विकल्प 4 (द्विखंडन / Binary Fission): यह अलैंगिक जनन की एक विधि है (जैसे अमीबा में), जिसमें कोशिका दो समान भागों में बंट जाती है।
विकल्प 2 (असूत्रीविभाजन / Amitosis): यह एक प्रत्यक्ष कोशिका विभाजन है जो आमतौर पर अविकसित जीवों में होता है।
#19. नर जननांग, लिंग, किसके स्थानांतरण में मदद करता है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 2)
- लिंग या शिश्न (Penis): यह मानव नर का एक प्रमुख बाह्य जननांग है। इसका मुख्य कार्य मैथुन (Copulation) के दौरान वीर्य (Semen) को मादा के जनन मार्ग (योनि) में स्थानांतरित करना है, जिसमें नर युग्मक यानी शुक्राणु (Sperm) मौजूद होते हैं।
- विकल्प 2 (युग्मनज / Zygote): यह निषेचन के बाद बनने वाली कोशिका है जो मादा के शरीर के भीतर बनती है।
- विकल्प 4 (ध्रुवीय पिंड / Polar body): यह अंडजनन (Oogenesis) के दौरान बनने वाली एक छोटी कोशिका है।
विकल्प 3 (अंडे / Eggs): अंडे या अंडाणु मादा जनन कोशिकाएं हैं, जो मादा शरीर में उत्पन्न होती हैं।
#20. पौधों में निषेचन के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- पौधों में निषेचन (Fertilization in Plants): जब परागकण (Pollen grain) किसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो वे अंकुरित होकर पराग नलिका (Pollen tube) का निर्माण करते हैं। इस पराग नलिका के माध्यम से परागकण द्वारा उत्पादित नर जनन कोशिका वर्तिका से होती हुई अंडाशय के भीतर स्थित बीजांड (Ovule) तक पहुँचती है और वहाँ मौजूद मादा युग्मक (अंड कोशिका) के साथ संलयित (जुड़) जाती है।
- विकल्प 1 और 4: नर जनन कोशिका का उत्पादन परागकणों द्वारा होता है, न कि अंडाशय द्वारा (अंडाशय मादा जनन अंग का भाग है)।
- विकल्प 2: मादा युग्मक वर्तिकाग्र में नहीं, बल्कि बीजांड के भीतर स्थित होता है।
#21. एककोशिकीय जीव का समान आनुवंशिक सामग्री वाले दो बराबर संतति कोशिकाओं में विभाजन को निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
- बाइनरी विखंडन (Binary Fission): यह एककोशिकीय जीवों (जैसे अमीबा, पैरामीशियम आदि) में होने वाली अलैंगिक जनन की एक सामान्य विधि है। इस प्रक्रिया में एक परिपक्व जीव का शरीर समान आनुवंशिक सामग्री (DNA) के साथ दो बराबर संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाता है।
- विकल्प 1 (संयुगमन / Conjugation): यह दो जीवों के बीच आनुवंशिक सामग्री के आदान-प्रदान की एक लैंगिक जैसी प्रक्रिया है।
- विकल्प 3 (बीजाणु निर्माण / Spore formation): यह राइजोपस जैसे कवकों में पाई जाने वाली विधि है जिसमें बीजाणुओं का निर्माण होता है।
विकल्प 2 (मुकुलन / Budding): इसमें जनक के शरीर पर एक उभार (कली) बनता है जो बाद में अलग होकर नया जीव बनता है (जैसे हाइड्रा और यीस्ट)।
#22. मानव में, जब Y गुणसूत्र युक्त शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है, तो युग्मज का रूप क्या होता है?
(RPF Constable 2018 19 Jan 2019 Shift 3)
- लिंग निर्धारण (Sex Determination): मानव में लिंग निर्धारण पूरी तरह से शुक्राणु के गुणसूत्र पर निर्भर करता है:
- मादा (स्त्री) के सभी अंडे (Ovum) केवल X गुणसूत्र वाले होते हैं ($44 + XX$)।
- नर (पुरुष) के शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं—एक X गुणसूत्र वाला और दूसरा Y गुणसूत्र वाला ($44 + XY$)।
- परिणाम: जब Y गुणसूत्र युक्त शुक्राणु, अंडे ($X$) को निषेचित करता है, तो बनने वाला युग्मनज XY ($\text{XY}$) प्रकृति का होता है। यह संयोजन एक नर शिशु (लड़का) के रूप में विकसित होता है। इसके विपरीत, यदि X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करे तो XX संयोजन से मादा शिशु का जन्म होता है।
- विकल्प 4 (मादा शिशु): यह तब बनता है जब X गुणसूत्र युक्त शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है (XX संयोजन)।
- विकल्प 2 और 3 (जुड़वाँ आदि): जुड़वाँ बच्चों का जन्म एक से अधिक युग्मकों के निषेचन या एक युग्मनज के दो भागों में विभाजित होने के कारण होता है, जिसका सीधा संबंध केवल Y गुणसूत्र से नहीं है।
#23. हाइड्रा किसके लिए पुनर्योगी कोशिकाओं का उपयोग करता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
- पुनर्योगी या पुनरुद्भवन कोशिकाएं (Regenerative cells): हाइड्रा जैसे जीवों में विशेष प्रकार की पुनरुद्भवन क्षमता वाली कोशिकाएँ होती हैं। हाइड्रा अलैंगिक जनन के अंतर्गत मुकुलन (Budding) की प्रक्रिया के लिए इन्हीं पुनर्योगी कोशिकाओं का उपयोग करता है, जहाँ एक ही स्थान पर कोशिकाओं के लगातार विभाजन से मुकुल (Bud) का विकास होता है।
- विकल्प 1 (बीजाणु निर्माण): हाइड्रा में बीजाणु निर्माण (Spore formation) द्वारा प्रजनन नहीं होता है।
- विकल्प 4 (लैंगिक प्रजनन): मुकुलन एक प्रकार का अलैंगिक प्रजनन है, न कि लैंगिक प्रजनन।
विकल्प 2 (विखंडन): हालांकि हाइड्रा में पुनरुद्भवन (Regeneration) की क्षमता होती है, लेकिन इसका मुख्य अलैंगिक प्रजनन तरीका मुकुलन ही है।
#24. कोशिका विभाजन के दौरान एक जीव केवल दो समान भागों में विभाजित हो जाता है। इसे क्या कहा जाता है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)
- द्विखंडन (Binary Fission): यह एककोशिकीय जीवों (जैसे अमीबा, पैरामीशियम, लेस्मानिया आदि) में होने वाली अलैंगिक जनन की एक प्रमुख विधि है। इस प्रक्रिया के दौरान कोशिका विभाजन के माध्यम से एक पूर्ण विकसित जीव ठीक दो समान भागों में विभाजित हो जाता है, और प्रत्येक भाग एक नए संतति जीव के रूप में विकसित होता है।
- विकल्प 1 (पुनर्जनन / Regeneration): इसमें कटे हुए या क्षतिग्रस्त शरीर के अंगों से नए जीव का विकास होता है (जैसे प्लेनेरिया या हाइड्रा में)।
- विकल्प 4 (मुकुलन / Budding): इसमें जनक के शरीर पर एक छोटा उभार या कली (Bud) बनती है जो बाद में अलग होती है (जैसे हाइड्रा और यीस्ट)।
विकल्प 2 (बीजाणु निर्माण / Spore formation): यह राइजोपस (कवक) जैसी प्रजातियों में होता है जहाँ बीजाणु बनते हैं।
#25. लूप अथवा कॉपर- T जैसी गर्भनिरोधक युक्तियों को मानव शरीर के किस हिस्से में स्थापित किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- गर्भाशय-भीतरी युक्ति (IUDs – Intrauterine Devices): कॉपर-टी (Copper-T) और लूप (Loop) जैसी गर्भनिरोधक युक्तियाँ अंतर्गर्भ गर्भाशय युक्तियाँ होती हैं। इन्हें महिला के गर्भाशय (Uterus) के भीतर चिकित्सीय रूप से स्थापित किया जाता है।
- कार्यप्रणाली: गर्भाशय में स्थापित होने के बाद ये शुक्राणुओं की गतिशीलता और निषेचन क्षमता को कम कर देती हैं, जिससे शुक्राणु और अंडाणु का मिलन नहीं हो पाता है और गर्भधारण से बचाव होता है।
- विकल्प 2 (वृक्क / Kidney): यह उत्सर्जन तंत्र का अंग है, प्रजनन से इसका संबंध नहीं है।
- विकल्प 4 (हृदय / Heart): यह परिसंचरण तंत्र का मुख्य अंग है।
विकल्प 3 (डिंबग्रंथ्री / Ovary): यह अंडाणु उत्पन्न करने वाली मादा ग्रंथि है, जहाँ कॉपर-टी स्थापित नहीं की जाती।
#26. पौधों में नर और मादा युग्मकों के संल्यन की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 2)
- निषेचन (Fertilization): पौधों (तथा जंतुओं) में नर युग्मक (परागकण द्वारा निर्मित) और मादा युग्मक (बीजांड के भीतर स्थित अंड कोशिका) के पूर्ण संलयन (Fusion) की प्रक्रिया को निषेचन कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है, जो आगे चलकर बीज में विकसित होता है।
- विकल्प 2 (परागण / Pollination): यह परागकणों के परागकोष से वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया है (यह निषेचन से ठीक पहले की घटना है)।
- विकल्प 4 (अंकुरण / Germination): यह बीज से नए पौधे के उगने की प्रारंभिक प्रक्रिया है।
विकल्प 3 (प्रवर्धन / Propagation): यह पौधों के वर्धी या अन्य भागों से नए पौधे तैयार करने की विधि है (जैसे कायिक प्रवर्धन)।
#27. फूल का कौन-सा भाग बीजांड की रक्षा करता है और बाद में फल में परिवर्तित हो जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026)
- अंडाशय (Ovary): यह पुष्प के मादा जनन अंग (स्त्रीकेशर/कार्पेल) का सबसे निचला और फूला हुआ भाग होता है। इसके भीतर बीजांड (Ovule) सुरक्षित रूप से स्थित होते हैं। निषेचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यही अंडाशय परिपक्व होकर फल (Fruit) में बदल जाता है, जबकि इसके अंदर के बीजांड बीज (Seed) बन जाते हैं।
- विकल्प 1 (वर्तिकाग्र / Stigma): यह परागकणों को ग्रहण करने वाला ऊपरी चिपचिपा भाग है, जो फल में परिवर्तित नहीं होता।
- विकल्प 4 (बाह्यदल / Sepal): यह कली अवस्था में फूल की रक्षा करने वाला हरा भाग है।
विकल्प 2 (दल / Petals): यह फूल का रंगीन भाग (पंखुड़ी) है जो कीटों को आकर्षित करता है और निषेचन के बाद प्रायः झड़ जाता है।
#28. हाइड्रा और प्लेनेरिया जैसे जानवरों को किसी भी संख्या में टुकड़ों में काटा जा सकता है और प्रत्येक टुकड़ा एक पूर्ण जीव में विकसित होता है। इसे किस रूप में जाना जाता है
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- पुनर्जनन (Regeneration): हाइड्रा और प्लेनेरिया जैसे सरल जीवों में विशेष प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं जो किसी भी चोट या शरीर के टुकड़ों में कट जाने पर उनमें तेजी से विभाजन करती हैं। यदि इन जीवों को किसी भी संख्या में टुकड़ों में काट दिया जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा विकसित होकर एक नया पूर्ण जीव बन जाता है। इस क्षमता को पुनर्जनन या पुनरुद्भवन कहा जाता है।
- विकल्प 1 (मुकुलन / Budding): यह वह प्रक्रिया है जिसमें जनक के शरीर पर कली (Bud) बनती है (जैसे हाइड्रा में सामान्यतः होता है)।
- विकल्प 4 (द्विखंडन / Binary Fission): यह एककोशिकीय जीवों (जैसे अमीबा) में होता है जिसमें कोशिका ठीक दो बराबर भागों में बंटती है।
विकल्प 3 (विखंडन / Fragmentation): यद्यपि यह भी बहुकोशिकीय जीवों में टुकड़ों से बढ़ने की प्रक्रिया है, लेकिन जीवों (जैसे हाइड्रा और प्लेनेरिया) की इस विशेष और पूर्णतः विकसित क्षमता को वैज्ञानिक रूप से ‘पुनर्जनन’ (Regeneration) कहा जाता है।
#29. गर्भाशय आस्तर प्रत्येक माह मोटी और स्पंजी क्यों हो जाती है?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- गर्भाशय आस्तर का कार्य (Uterine Lining Function): मादा शरीर में हर महीने गर्भाशय का आंतरिक आस्तर (Endometrium) निषेचित अंडे (भ्रूण) को प्राप्त करने और उसके रोपण (Implantation) के लिए खुद को तैयार करता है।
- यह आस्तर रक्त वाहिकाओं से समृद्ध होकर मोटा और स्पंजी हो जाता है ताकि यदि निषेचन हो जाए, तो विकासशील भ्रूण को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व और ऑक्सीजन मिल सके। यदि निषेचन नहीं होता है, तो यह आस्तर टूटकर रक्त और बलगम के रूप में मासिक धर्म (Menstruation) के माध्यम से बाहर निकल जाता है।
- विकल्प 1 (अंडे के विकास में सहायता): अंडे का विकास अंडाशय और डिंबवाहिनी नली में होता है, गर्भाशय आस्तर का मुख्य काम भ्रूण को संभालना है।
- विकल्प 4 (ऋतुस्राव को रोकना): आस्तर के मोटा होने का उद्देश्य ऋतुस्राव रोकना नहीं, बल्कि गर्भधारण की तैयारी करना होता है (आस्तर के टूटने पर ही ऋतुस्राव होता है)।
विकल्प 3 (पोषक तत्वों को अवशोषित करना): यह इसका प्राथमिक कार्य नहीं है।
#30. मादा जनन तंत्र में अंड का सही मार्ग क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- मादा जनन तंत्र में अंडे का मार्ग (Pathway of Egg):
- अंडाशय (Ovary): यहाँ अंडों (अंडाणुओं) का निर्माण और परिपक्वता होती है। हर महीने एक अंडाशय से अंडा निकलता है (अंडोत्सर्जन / Ovulation)।
- फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tube / डिंबवाहिनी नली): अंडाशय से निकलने के बाद अंडा फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश करता है। सामान्यतः यहीं पर शुक्राणु के साथ अंडे का निषेचन होता है।
- गर्भाशय (Uterus): निषेचन के बाद या बिना निषेचन के, अंडा आगे बढ़कर गर्भाशय में पहुँचता है, जहाँ भ्रूण का रोपण होता है या फिर यह मासिक धर्म के रूप में बाहर निकल जाता है।
- विकल्प 2 और 4: इनमें अंगों का क्रम गलत दिया गया है क्योंकि अंडे की यात्रा हमेशा अंडाशय से शुरू होती है।
- विकल्प 3: इसमें सीधे अंडाशय से योनि का जिक्र है, जबकि बीच की मुख्य कड़ी फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय छूट जाते हैं।
#31. निषेचन के बाद, युग्मनज कई बार विभाजित होकर बीजांड के भीतर किस संरचना का निर्माण करता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 3)
- पौधों में निषेचन के पश्चात विकास: जब पुष्प में नर और मादा युग्मकों का संलयन होता है, तो सबसे पहले युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है।
- यह युग्मनज बीजांड के भीतर लगातार कई बार विभाजित (Mitosis) होकर एक बहुकोशिकीय संरचना में विकसित हो जाता है, जिसे भ्रूण (Embryo) कहा जाता है। इसके पश्चात पूरा बीजांड कड़े आवरण से घिरकर बीज (Seed) में बदल जाता है।
- विकल्प 3 (बीज / Seed): बीजांड स्वयं विकसित होकर बीज बनता है, न कि युग्मनज के विभाजन से केवल बीज बनता है (युग्मनज उसके अंदर भ्रूण बनाता है)।
- विकल्प 1 (वर्तिका / Style): यह मादा जनन अंग का एक नालीनुमा भाग है, जिसका निषेचन के बाद कोई सीधा योगदान नहीं होता और यह सूखकर झड़ जाता है।
विकल्प 4 (फल / Fruit): फल का निर्माण संपूर्ण अंडाशय (Ovary) के परिपक्व होने से होता है।
#32. निम्नलिखित में से कौन-सी गर्भनिरोधक युक्ति सगर्भता के रोकथाम के लिए गर्भाशय में स्थापित की जाती है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- कॉपर-टी (Copper-T): यह एक अंतर्गर्भ गर्भाशय युक्ति (IUD – Intrauterine Device) है जिसे चिकित्सक द्वारा महिला के गर्भाशय (Uterus) के भीतर स्थापित किया जाता है। यह शुक्राणुओं की गतिशीलता और निषेचन क्षमता को रोककर गर्भधारण को प्रभावी रूप से रोकती है।
- विकल्प 1 (हार्मोनल पैच): इसे त्वचा पर लगाया जाता है, गर्भाशय में स्थापित नहीं किया जाता।
- विकल्प 4 (कंडोम / Condom): यह एक बैरियर विधि है जिसे संभोग के दौरान लिंग या योनि पर पहना जाता है, इसे गर्भाशय के भीतर स्थापित नहीं किया जाता।
विकल्प 2 (मौखिक गोलियां / Oral pills): ये हार्मोनल गोलियां होती हैं जिन्हें मुंह के जरिए खाया जाता है (ये अंडोत्सर्जन को रोकती हैं)।
#33. मलेरिया परजीवी किस प्रकार के अलैंगिक जनन को दर्शाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 2)
- बहुखंडन (Multiple Fission): मलेरिया परजीवी (प्लाज्मोडियम / Plasmodium) अलैंगिक जनन की इस विधि को दर्शाता है। इसमें प्रतिकूल या अनुकूल परिस्थितियों में एक ही जनक कोशिका के भीतर केंद्रक कई बार विभाजित होता है, जिससे एक साथ कई संतति कोशिकाएं (या बीजाणु) बन जाती हैं। बाद में जनक कोशिका की दीवार फट जाती है और ये सभी संतति कोशिकाएं बाहर निकलकर नए जीवों में विकसित हो जाती हैं।
- विकल्प 1 (द्विखंडन / Binary Fission): इसमें कोशिका ठीक दो बराबर भागों में बंटती है (जैसे अमीबा और लेस्मानिया में)।
- विकल्प 3 (मुकुलन / Budding): इसमें शरीर पर कली या उभार बनता है (जैसे यीस्ट और हाइड्रा)।
विकल्प 2 (पुनर्जनन / Regeneration): इसमें शरीर के कटे हुए टुकड़ों से नया जीव बनता है (जैसे हाइड्रा और प्लेनेरिया)।
#34. निम्नलिखित में से कौन सा पुष्पों का मादा प्रजनन अंग है?
(RPF SI 2018 : 12 Jan 2019 Shift 3)
- जायांग (Gynoecium / स्त्रीकेशर): यह फूलों का मा मादा प्रजनन अंग होता है। यह तीन प्रमुख भागों से मिलकर बनता है:
- वर्तिकाग्र (Stigma): परागकणों को ग्रहण करने वाला ऊपरी भाग।
- वर्तिका (Style): एक लंबी नली जो वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ती है।
- अंडाशय (Ovary): सबसे निचला फूला हुआ भाग जिसमें बीजांड (Ovule) स्थित होते हैं।
- विकल्प 4 (पुंकेसर / Stamen): यह फूल का नर प्रजनन अंग होता है, जो परागकोष और तंतु से मिलकर बनता है।
- विकल्प 3 (परागकेश्वर रखनेवाला फूल का नाग): यह एक भ्रामक या अशुद्ध अनुवादित विकल्प है जो पुंकेसर से संबंधित है।
विकल्प 1 (मोनोईकियम / Monoecious): यह उन पौधों को कहा जाता है जिनमें नर और मादा दोनों प्रकार के फूल एक ही पौधे पर पाए जाते हैं।
#35. स्टारफिश जैसे एकाइनोडर्म में जल वाहिकीय प्रणाली (water vascular system) का प्राथमिक कार्य क्या है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 16/03/2026 )
- जल वाहिकीय प्रणाली (Water Vascular System): यह इचिनोडर्मेटा (Echinodermata) संघ के जीवों (जैसे स्टारफिश, समुद्री अर्चिन आदि) की एक अनूठी और मुख्य विशेषता है। इस हाइड्रोलिक प्रणाली का प्राथमिक कार्य जीव को पानी में चलाने (गमन / Locomotion), समुद्र तल पर पकड़ बनाने तथा भोजन पकड़ने (Feeding) में मदद करना है। इसके अलावा यह श्वसन और उत्सर्जन में भी थोड़ी बहुत सहायता करती है, लेकिन इसका मुख्य और प्राथमिक कार्य गमन और भोजन से जुड़ा है।
- विकल्प 1 (जनन / Reproduction): जनन के लिए इनमें अलग जननांग होते हैं, इसका जल प्रणाली से सीधा संबंध नहीं है।
- विकल्प 4 (गैस विनिमय / Gas exchange): यद्यपि जल परिसंचरण से कुछ हद तक श्वसन में मदद मिलती है, लेकिन यह इस प्रणाली का प्राथमिक (मुख्य) कार्य नहीं है।
विकल्प 2 (इंद्रीय प्रत्यक्षलीकरण / Sensory perception): संवेदी कार्य मुख्य रूप से इनकी त्वचा पर मौजूद तंत्रिकाओं और नेत्र बिंदुओं द्वारा होते हैं।
#36. मादा प्रजनन तंत्र के किस भाग से होकर अंडा अंडाशय से गर्भाशय तक जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tube): मादा जनन तंत्र में अंडाशय (Ovary) से परिपक्व होने के बाद अंडा निकलकर इस नली में प्रवेश करता है। अंडाशय से गर्भाशय तक अंडे की यात्रा फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से ही पूरी होती है। सामान्यतः शुक्राणु और अंडे का निषेचन (Fertilization) भी इसी नली के अंदर होता है।
- विकल्प 1 (गर्भाशय ग्रीवा / Cervix): यह गर्भाशय का निचला संकरा भाग है जो योनि में खुलता है।
- विकल्प 4 (मूत्रवाहिनी / Ureter): यह उत्सर्जन तंत्र का भाग है जो मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक ले जाता है, प्रजनन से इसका संबंध नहीं है।
विकल्प 2 (योनि / Vagina): यह शरीर के बाहर की ओर खुलने वाली नली है जिसके माध्यम से शुक्राणु शरीर में प्रवेश करते हैं।
#37. एककोशिकीय जीव किस प्रकार के प्रजनन का उपयोग करते हैं?
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 1)
- एककोशिकीय जीवों में प्रजनन (Reproduction in Unicellular Organisms): विभिन्न एककोशिकीय और सरल जीव अपनी प्रजाति और शारीरिक संरचना के अनुसार अलग-अलग अलैंगिक जनन विधियों का उपयोग करते हैं:
- विखंडन (Fission): जैसे अमीबा और पैरामीशियम में द्विखंडन या प्लाज्मोडियम में बहुखंडन।
- मुकुलन (Budding): जैसे यीस्ट (Yeast) एक एककोशिकीय कवक है जो मुकुलन द्वारा प्रजनन करता है।
- पुनर्जनन (Regeneration): कुछ सरल जीव इसके द्वारा भी अपने अंगों या टुकड़ों से नए जीवों का विकास कर सकते हैं।
- चूँकि अलग-अलग एककोशिकीय या सरल जीव इन सभी विधियों (मुकुलन, पुनर्जनन और विखंडन) का उपयोग करते हैं, इसलिए यह व्यापक विकल्प सही है।
- विकल्प 1, 2 और 3: इनमें केवल एक ही विधि (जैसे केवल मुकुलन, केवल पुनर्जनन या केवल विखंडन) को सही बताया गया है, जबकि सभी एककोशिकीय जीव केवल एक ही विधि का उपयोग नहीं करते, बल्कि अलग-अलग जीव अलग-अलग विधियों अपनाते हैं।
#38. परागण का वह प्रकार जिसमें परागकण वायु के माध्यम से एक ही प्रजाति के एक पुष्प से दूसरे पुष्प तक स्थानांतरित होते हैं, ________ कहलाता है
。(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
- वायुपरागण (Anemophily / एनिमोफिली): जब पौधों में परागण की प्रक्रिया हवा या वायु के माध्यम से होती है, यानी परागकण उड़कर एक पुष्प से दूसरे पुष्प तक पहुँचते हैं, तो इसे वायुपरागण कहा जाता है। इस प्रकार के फूलों में आमतौर पर परागकण हल्के, सूखे और अधिक संख्या में होते हैं (जैसे मक्का, घास आदि में)।
- विकल्प 2 (पक्षीपरागण / Ornithophily): जब पक्षियों के माध्यम से परागण होता है।
- विकल्प 4 (कीटपरागण / Entomophily): जब कीटों (जैसे मधुमक्खी, तितली) के माध्यम से परागण होता है।
विकल्प 3 (जलपरागण / Hydrophily): जब जल के माध्यम से परागण होता है (मुख्यतः जलीय पौधों में)।
#39. बीजांड का कौन-सा भाग पराग नलिका (शुक्राणु केन्द्रक युक्त) को मादा युग्मक की ओर निर्देशित करने में सहायता करता है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- सहाय कोशिकाएं (Synergids): आवृतबीजी (Angiosperm) पौधों के बीजांड के भीतर भ्रूणकोष (Embryo sac) में अंड कोशिका के आसपास दो विशेष कोशिकाएं होती हैं जिन्हें सहायक कोशिकाएं कहा जाता है। इन कोशिकाओं के पास एक विशेष तंतुमय समुच्चय (Filiform apparatus) होता है, जो पराग नलिका को सही दिशा में आगे बढ़ने और नर युग्मकों को मादा युग्मक तक पहुँचाने में मार्गदर्शन और सहायता करता है।
- विकल्प 1 (भ्रूणपोष / Endosperm): यह निषेचन के बाद विकसित होने वाला वह ऊतक है जो विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।
- विकल्प 4 (वर्तिका / Style): यह स्त्रीकेशर की नली है जो पराग नलिका को अंडाशय तक पहुँचने का सामान्य मार्ग देती है, लेकिन बीजांड के भीतर उसका सटीक मार्गदर्शन सहायक कोशिकाएं करती हैं।
विकल्प 3 (प्रतिव्यासांत कोशिकाएं / Antipodal cells): ये भ्रूणकोष के चालाजल छोर (Chalazal end) पर स्थित तीन कोशिकाएं होती हैं, जो निषेचन से पहले या बाद में लुप्त हो जाती हैं।
#40. एक जीवविज्ञानी एक हाइड्रा को दो असमान भागों में काटता है। एक भाग में पूर्ण रूप से विकसित मुकुल है। मुकुल के साथ सर्वाधिक क्या हो
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- हाइड्रा में मुकुलन (Budding in Hydra): हाइड्रा में अलैंगिक जनन के दौरान शरीर पर कोशिकाओं के लगातार विभाजन से एक छोटा उभार या मुकुल (Bud) बनता है, जो धीरे-धीरे विकसित होकर एक पूर्ण मुकुल का रूप ले लेता है।
- चूँकि उस कटे हुए भाग पर पहले से ही पूर्ण रूप से विकसित मुकुल मौजूद है, इसलिए उसमें उच्च पुनरुद्भवन (Regeneration) क्षमता और अपनी स्वतंत्र कोशिकाओं के कारण यह मुकुल अलग होकर या उसी भाग के साथ विकसित होकर एक नए स्वतंत्र हाइड्रा में परिपक्व हो जाएगा।
- विकल्प 2 (हाइड्रा जीवित नहीं रहेगा): हाइड्रा में अद्भुत पुनरुद्भवन (Regeneration) क्षमता होती है, इसलिए वह तुरंत नष्ट या मृत नहीं होता।
- विकल्प 4 (तुरंत नष्ट हो जाएगा): विकसित मुकुल अपनी कोशिकाओं की सक्रियता के कारण नष्ट नहीं होता, बल्कि वृद्धि करता है।
विकल्प 1 (बीजाणु में परिवर्तन): हाइड्रा बीजाणु निर्माण (Spore formation) द्वारा प्रजनन नहीं करता है।
#41. निषेचन के बाद, निम्नलिखित में से कौन एक मोटा आवरण विकसित करता है, धीरे-धीरे बीज में परिवर्तित हो जाता है और युग्मनज इसके भीतर एक भ्रूण बनाने के लिए कई बार विभाजित होता है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)
- बीजांड (Ovule): पुष्प में निषेचन (Fertilization) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अंडाशय के भीतर स्थित बीजांड एक कड़ा या मोटा आवरण विकसित कर लेता है। इसके अंदर मौजूद युग्मनज (Zygote) लगातार विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) का निर्माण करता है और अंततः यह पूरा बीजांड परिपक्व होकर बीज (Seed) में परिवर्तित हो जाता है।
- विकल्प 2 (अंडाशय / Ovary): निषेचन के बाद संपूर्ण अंडाशय विकसित होकर फल (Fruit) बनाता है, न कि बीज।
- विकल्प 3 (जायांग / Gynoecium): यह स्त्रीकेसरों का समूह या संपूर्ण मादा जनन तंत्र है।
विकल्प 1 (स्त्रीकेसर / Pistil): यह फूल का पूरा मादा जनन अंग है जिसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय शामिल होते हैं।
#42. अलैंगिक प्रजनन के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)
- अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction): यह प्रजनन की वह विधि है जिसमें नए जीव का निर्माण केवल एक ही जनक (Single Parent) द्वारा होता है। चूँकि इसमें युग्मकों (Gametes) का संलयन नहीं होता, इसलिए उत्पन्न होने वाली संततियां आनुवंशिक और शारीरिक रूप से अपने माता-पिता की एकदम हूबहू प्रतिलिपि (Clone) होती हैं।
- विकल्प 2 (निषेचन की आवश्यकता): निषेचन (Fertilization) केवल लैंगिक प्रजनन की विशेषता है, अलैंगिक प्रजनन में इसकी आवश्यकता नहीं होती।
- विकल्प 4 (जटिल प्रजनन अंगों की आवश्यकता): इसके लिए किसी जटिल या विशिष्ट जनन अंगों की आवश्यकता नहीं होती, यह सरल जीवों में आसानी से होता है।
विकल्प 3 (दो जनक शामिल होना): अलैंगिक प्रजनन में केवल एक ही जनक भाग लेता है (दो जनकों की आवश्यकता लैंगिक प्रजनन में होती है)।
#43. अलैंगिक जनन, लैंगिक जनन से भिन्न होता है। निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, अलैंगिक जनन को निरूपित नहीं करता है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- लैंगिक बनाम अलैंगिक जनन (Sexual vs Asexual Reproduction):
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): इसमें केवल एक ही जनक भाग लेता है और इसमें नर तथा मादा दोनों जनन अंगों या युग्मकों की आवश्यकता नहीं होती।
- प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सा विकल्प अलैंगिक जनन को निरूपित नहीं करता है? चूँकि “नर और मादा दोनों जनन भागों का शामिल होना” लैंगिक जनन की विशेषता है, इसलिए यह अलैंगिक जनन को निरूपित नहीं करता है।
- विकल्प 2 (खंडन / Fragmentation): यह बहुकोशिकीय जीवों (जैसे स्पाइरोगाइरा) में पाया जाने वाला अलैंगिक जनन है।
- विकल्प 4 (पुनर्जनन / Regeneration): यह हाइड्रा और प्लेनेरिया जैसे जीवों में पाई जाने वाली अलैंगिक जनन/पुनरुद्भवन की क्षमता है।
विकल्प 3 (द्वि-खंडन / Binary Fission): यह एककोशिकीय जीवों (जैसे अमीबा) में होने वाला अलैंगिक जनन है।
#44. प्रजनन के दौरान DNA प्रतिकृतियों में लघु परिवर्तन महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि वे ________ ।
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
- DNA प्रतिकृति (DNA Replication) और विविधता: प्रजनन के दौरान जब DNA की प्रतिकृतियां बनती हैं, तो जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में कुछ सूक्ष्म त्रुटियां या भिन्नताएं रह जाती हैं, जिन्हें ‘विभिन्नताएं’ (Variations) कहा जाता है।
- यह विविधताएँ जीवों की प्रजातियों को बदलते पर्यावरण (जैसे तापमान परिवर्तन, पानी की उपलब्धता या अन्य पर्यावरणीय संकट) में जीवित रहने (Survival) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। यदि किसी जीव में थोड़ी बहुत विविधता नहीं होगी, तो पर्यावरण के अचानक बदलने पर पूरी प्रजाति के नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है।
- विकल्प 1 और 2: DNA में होने वाले ये सूक्ष्म परिवर्तन प्रजनन या निषेचन को रोकते नहीं हैं, बल्कि यह विकास और जीवन को आगे बढ़ाते हैं।
विकल्प 3 (सदैव हानिकारक प्रभाव): सभी परिवर्तन हानिकारक नहीं होते; अधिकांश तटस्थ या लाभकारी होते हैं जो जीव को अनुकूलन (Adaptation) में मदद करते हैं।
#45. किसी पुरुष की एक ऐसी मामूली सर्जिकल प्रक्रिया की गई जिसमें उसके शुक्राणुओं को वीर्य में मिश्रित होने से रोका जा सके। किस संरचना में सर्वाधिक परिवर्तन होने की संभावना है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
- नसबंदी (Vasectomy): पुरुषों में की जाने वाली इस गर्भनिरोधक सर्जिकल प्रक्रिया को ‘वैसैकटॉमी’ (Vasectomy) कहा जाता है। इसमें दोनों शुक्रवाहिकाओं (Vas deferens) को काटकर या बांधकर उनके मार्ग को अवरुद्ध कर दिया जाता है।
- चूँकि शुक्राणु वृषण (Testis) में बनते हैं और शुक्रवाहिका के माध्यम से ही आगे बढ़ते हैं, इस मार्ग के बंद हो जाने के कारण शुक्राणु वीर्य (Semen) में मिश्रित नहीं हो पाते हैं। अतः इसी संरचना में सर्वाधिक परिवर्तन या सर्जिकल हस्तक्षेप होता है।
- विकल्प 2 (मूत्रमार्ग / Urethra): यह वह नली है जिससे होकर मूत्र और वीर्य दोनों शरीर से बाहर आते हैं, पर मुख्य सर्जिकल रुकावट शुक्रवाहिका पर की जाती है।
- विकल्प 4 (शिश्न / Penis): यह बाह्य जनन अंग है, वैसैकटॉमी प्रक्रिया में इसमें कोई सर्जिकल बदलाव नहीं किया जाता।
विकल्प 3 (वृषण / Testis): यह वह अंग है जहाँ शुक्राणुओं का निर्माण होता है, नसबंदी से इसमें कोई संरचनात्मक परिवर्तन नहीं होता (शुक्राणु बनते रहते हैं लेकिन आगे नहीं बढ़ पाते)।
#46. शुक्राणुओं का परिवहन आसान बनाने और पोषण प्रदान करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रंथि अपना स्राव मिश्रित करती है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- नर जनन सहायक ग्रंथियाँ: पुरुषों में शुक्राणुओं के परिवहन को आसान बनाने और उन्हें पोषण प्रदान करने के लिए प्रमुख रूप से दो मुख्य ग्रंथियां अपने स्राव को वीर्य (Semen) में मिलाती हैं:
- शुक्राशय (Seminal vesicles): यह तरल पदार्थ स्रावित करता है जो शुक्राणुओं को ऊर्जा (पोषण) प्रदान करता है और उनके परिवहन को सुगम बनाता है।
- प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate gland): यह भी अपना स्राव वीर्य में मिलाती है जो शुक्राणुओं को सक्रिय रखता है और उनके संचलन में मदद करता है।
- इन दोनों ग्रंथियों (शुक्राशय और प्रोस्टेट) के स्राव मिलने से ही वीर्य बनता है, जिससे शुक्राणुओं को तरलता, पोषण और आसान परिवहन मिलता है।
- विकल्प 2 और 3 (केवल शुक्राशय / केवल प्रोस्टेट): दोनों ग्रंथियां अलग-अलग या अकेली यह कार्य नहीं करतीं, बल्कि दोनों मिलकर शुक्राणुओं को पोषण और परिवहन में सहायता प्रदान करती हैं।
- विकल्प 1 (पिनियल / Pineal): यह मस्तिष्क में स्थित एक अंतःस्रावी ग्रंथि (Endocrine gland) है जो मेलाटोनिन हार्मोन बनाती है, इसका प्रजनन तंत्र और वीर्य निर्माण से कोई सीधा संबंध नहीं है।
#47. पुष्पी पादपों में परागकण की नर जनन-कोशिका का जब मादा युग्मक के साथ संलयन होता है, तो क्या बनता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- निषेचन और युग्मनज निर्माण (Fertilization & Zygote Formation): पुष्पी पादपों में जब परागकण नर जनन-कोशिका को लेकर मादा युग्मक (अंड कोशिका) के साथ संलयन (Fusion) करता है, तो इस प्रक्रिया को निषेचन (Fertilization) कहा जाता है। इस संलयन के परिणामस्वरूप जिस पहली कोशिका का निर्माण होता है, उसे युग्मनज (Zygote) कहते हैं। यही युग्मनज आगे चलकर विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) में विकसित होता है।
- विकल्प 1 (परागकण / Pollen grain): यह नर युग्मक को वहन करने वाली संरचना है, न कि संलयन का उत्पाद।
- विकल्प 4 (बीजांड / Ovule): यह अंडाशय के भीतर स्थित वह संरचना है जिसके अंदर मादा युग्मक और निषेचन की प्रक्रिया संपन्न होती है।
विकल्प 3 (वर्तिकाग्र / Stigma): यह स्त्रीकेसर का वह ऊपरी भाग है जिस पर परागकण गिरते हैं।
#48. मादा मानव में, जब अंडा निषेचित नहीं होता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रिया होती है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
- रजोधर्म (Menstruation / मासिक धर्म): मादा मानव में प्रत्येक माह अंडाशय से एक अंडा निकलता है। यदि इस अंडे का निषेचन शुक्राणु द्वारा नहीं होता है, तो गर्भाशय की वह मोटी और स्पंजी आंतरिक परत (Endometrium) जो संभावित भ्रूण के लिए तैयार हुई थी, धीरे-धीरे टूटने लगती है।
- यह टूटी हुई परत, अनिषेचित अंडा और रक्त वाहिकाएं शरीर से योनि मार्ग के द्वारा बाहर निकल जाती हैं। इसी प्रक्रिया को रजोधर्म (मासिक चक्र) कहते हैं, जो आमतौर पर 28 से 30 दिनों के अंतराल पर होता है।
- विकल्प 1 (भ्रूण विकास / Embryo development): यह प्रक्रिया केवल तभी शुरू होती है जब अंडा सफलतापूर्वक निषेचित हो जाता है।
विकल्प 2 (युग्मनज निर्माण / Zygote formation): शुक्राणु और अंडे के संलयन (निषेचन) के तुरंत बाद युग्मनज बनता है; निषेचन न होने पर युग्मनज का निर्माण संभव नहीं है।
- विकल्प 3 (प्रसव / Parturition): यह गर्भावस्था (Pregnancy) के पूर्ण होने पर शिशु के जन्म की प्रक्रिया है।


