Rajasthan ke lokgeet Natak
#1. ‘होलार’ राजस्थानी लोक गीत में जो … के अवसर पर गाए जाते हैं।[राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल-15.7.2018 (II)]
विकल्प (2) शिशु का जन्म होने (सही उत्तर): बालक/शिशु जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला मंगल गीत ‘जच्चा’ या ‘होलार’ कहलाता है।
- अन्य गीत: पुत्र/शिशु जन्मोत्सव पर ‘जच्चा/होलार’ गीत के साथ-साथ ‘धाय’ और ‘कांस्यो’ जैसे रीति-रिवाजों से जुड़े गीत भी गाए जाते हैं।
- विशेष परंपरा: राजस्थान में पुत्र जन्म के समय ‘पीला पोमचा’ (एक प्रकार की ओढ़नी) ननिहाल पक्ष की ओर से भेंट किया जाता है।
विकल्प (1) विवाह के लिए प्रस्ताव देने
यह गलत है। इसके लिए ‘सगाई’ या अन्य संबंधित लोकगीत गाए जाते हैं।
विकल्प (3) गणगौर उत्सवों
यह गलत है। गणगौर के अवसर पर ‘गणगौर’ या ‘घूमर’ आदि गीत गाए जाते हैं।
विकल्प (4) विवाह के समापन
यह गलत है। विवाह के समापन/विदाई पर ‘ओल्यूं’ (याद आना) या ‘कांगसियो’ आदि गीत गाए जाते हैं।
#2. निम्नलिखित में से कौनसी गायकी लोकगायकी की श्रेणी में सम्मिलित नहीं है? [LDC- 16.09.2018]
विकल्प (3) ध्रुपद (सही उत्तर):
यह अन्य तीन विकल्पों से भिन्न है क्योंकि ध्रुपद एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायन (Classical Singing) की परंपरा है, न कि लोकगायकी।
विकल्प (1) ढोला, (2) आल्हा तथा (4) बारहमासा
ये तीनों ही विकल्प गलत हैं। ये सभी लोकगायकी (Folk Singing) की विधाएँ, शैलियाँ या गीत हैं जो आम जनमानस में पारंपरिक रूप से गाए जाते हैं।
#3. ध्रुपद गायकी का आरंभ किसके शासनकाल में हुआ- [पटवारी परीक्षा 2011]
विकल्प (1) राजा मानसिंह तोमर (सही उत्तर): ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर (15वीं शताब्दी) के शासनकाल में ध्रुपद गायकी का बीजारोपण और विकास हुआ।
- राजस्थान में प्रचार: राजस्थान में सर्वप्रथम बहराम खाँ (महाराजा रामसिंह द्वितीय के दरबारी गायक) ने ध्रुपद गायकी का प्रचार-प्रसार किया और प्रसिद्ध ‘डागर घराने’ को स्थापित किया।
- अकबर का काल: तानसेन, उनके गुरु स्वामी हरिदास, नायक बैजू और गोपाल आदि अकबर के समय के प्रख्यात ध्रुपद गायक थे।
विकल्प (2) मिर्जा राजा जयसिंह, (3) राजा भगवन्त दास, (4) उक्त कोई नहीं
ये सभी विकल्प इस प्रश्न के संदर्भ में गलत हैं।
#4. किसका संबंध ‘ध्रुपद’ से है? [पुलिस कॉन्स्टेबल-02.07.2022]
स्वामी हरिदास: सही उत्तर। स्वामी हरिदास प्रसिद्ध ध्रुपद गायक और तानसेन के गुरु थे।
#5. राजस्थान की प्रथम ध्रुपद गायिका थी?[संगणक-3.3.2024]
मधु भट्ट तैलंग: सही उत्तर। डॉ. मधु भट्ट तैलंग राजस्थान की प्रथम एवं एकमात्र महिला ध्रुपद गायिका हैं।
#6. राजस्थान के उमर फारूक मेवाती का सम्बन्ध किस क्षेत्र से था? [LDC Exam -19.08.2018]
उमर फारूक मेवाती अलवर (मेवात क्षेत्र) के प्रसिद्ध भपंग वादक (लोक वाद्ययंत्र संगीतकार) थे।
#7. राजस्थान कबीर यात्रा का संबंध निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से है? [कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा – 03.03.2019]
इसका आयोजन राजस्थान पुलिस, पर्यटन विभाग तथा लोकायन संस्था के सहयोग से राज्य में सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
#8. गौहरहारी, डागुरी, खण्डारी का संबंध किससे है- [JEN Degree (TSP) Exam – 16.10.2016]
विकल्प (1) ध्रुपद गायकी (सही उत्तर): ध्रुपद गायकी की प्रमुख 4 शैलियों (वाणियों) के नाम और उनके प्रवर्तक इस प्रकार हैं:
- गौहरहारी वाणी: इसके प्रवर्तक तानसेन हैं (इसकी उत्पत्ति ग्वालियर से मानी जाती है)।
- डागुरवाणी: इसके प्रवर्तक ब्रजनंद डागर / बहराम खाँ डागर हैं।
- खंडारवाणी: इसके प्रवर्तक राजा सम्मोखन सिंह हैं (उनियारा, राजस्थान के पास)।
- नौहारवाणी: इसके प्रवर्तक श्रीचंद नौहार हैं।
विकल्प (2) चित्रकला स्कूल, (3) हस्तकला केन्द्र, (4) नील उद्योग
ये सभी विकल्प इस प्रश्न के संदर्भ में गलत हैं। प्रश्न में दी गई चारों वाणियाँ केवल ध्रुपद गायन शैली से ही संबंधित हैं।
#9. ‘ओल्यूं’ राजस्थानी लोक जीवन के किस अवसर से सम्बन्धित है- [JEN (Electric) Degree – 18.05.2022] [Veterinary Officer – 02.08.2020]
विकल्प (2) पुत्री विवाह की विदाई गीत (सही उत्तर):
‘ओल्यूं’ का राजस्थानी में शाब्दिक अर्थ “याद” होता है। बेटी की विदाई के समय उसकी याद में यह करुण रस प्रधान लोकगीत गाया जाता है।
विकल्प (1) पुत्र जन्मोत्सव गीत
यह गलत है। पुत्र जन्मोत्सव के अवसर पर गाया जाने वाला मंगल गीत ‘जच्चा’ या ‘होलार’ होता है।
विकल्प (3) होली पर किया जाने वाला लोक नृत्य
यह गलत है। होली के अवसर पर शेखावाटी क्षेत्र में मुख्य रूप से ‘चंग’ या ‘गेंदड़’ नृत्य किया जाता है।
विकल्प (4) बारात की अगवानी का गीत
यह गलत है। वधु पक्ष द्वारा बारात का स्वागत करते (अगवानी) समय ‘सामेला’ या ‘जला’ गीत गाया जाता है।
#10. ‘जला’ गीत स्त्रियों द्वारा कब गाया जाता है- [खाद्य सुरक्षा अधिकारी-25.11.2019]
विकल्प (3) वर की बारात का डेरा देखने जाने पर (सही उत्तर):
विवाह के अवसर पर जब वधू पक्ष की स्त्रियाँ वर (दूल्हे) की बारात की अगवानी करने या उनका डेरा देखने जाती हैं, तब उनके द्वारा ‘जला’ या ‘जलो’ गीत गाया जाता है।
विकल्प (1) कुँआ पूजन के समय
यह गलत है। शिशु जन्म के कुछ दिन बाद होने वाले इस संस्कार के समय ‘जलवा’ या ‘कुआं पूजन गीत’ गाए जाते हैं।
विकल्प (2) जलझूलनी एकादशी पर
यह गलत है। यह एक धार्मिक उत्सव का अवसर है, इसका ‘जला’ गीत से संबंध नहीं है।
विकल्प (4) तीज पूजन के अवसर पर
यह गलत है। श्रावण मास में तीज के त्योहार पर विशेष रूप से महिलाओं द्वारा ‘तीज’ के ही लोकगीत गाए जाते हैं।
#11. सुमेलित नहीं है- [ARO (Entomology) 28.8.2022]
विकल्प (3) जला गीत – बालक के जन्म के पश्चात् कुआं पूजन के समय (सही उत्तर):
यह युग्म असुमेलित (गलत) है, इसलिए यही इस प्रश्न का सही उत्तर है।
- सुधार: ‘जला’ (या जलो) गीत विवाह के अवसर पर वधू पक्ष की महिलाओं द्वारा वर की बारात का डेरा देखने जाने के प्रसंग में गाया जाता है।
- कुआं पूजन: बालक जन्मोत्सव पर कुआं पूजन के समय ‘जलवा’ या ‘कुआं पूजन’ गीत गाया जाता है।
विकल्प (1) घोड़ी गीत – वर निकासी पर घुड़चढ़ी रस्म के समय
यह बिल्कुल सही सुमेलित है। विवाह के दौरान जब दूल्हा घोड़ी पर चढ़ता है (वर निकासी), तब ‘घोड़ी गीत’ गाए जाते हैं।
विकल्प (2) जच्चा गीत – परिवार में बालक के जन्म के समय
यह सही सुमेलित है। पुत्र/शिशु जन्मोत्सव पर मंगल कामना के लिए ‘जच्चा/होलार’ गीत गाए जाते हैं।
विकल्प (4) रसिया गीत – होलिकाोत्सव पर
यह सही सुमेलित है। भरतपुर-धौलपुर (ब्रज/मेवात क्षेत्र) में होली एवं अन्य उत्सवों पर ‘रसिया’ गीत गाए जाते हैं।
#12. इंडोणी लोकगीत गाया जाता है।[वनरक्षक-13.12.2022(1)]
कालबेलिया नृत्य: ‘इंडोणी’ राजस्थान के कालबेलिया जनजाति का एक प्रसिद्ध युगल नृत्य व गीत भी है।
#13. कौनसा एक लोकगीत राजस्थान के पर्वतीय क्षेत्र का नहीं है? [कॉलेज व्याख्याता (सारंगी) परीक्षा 30.05.2019]
विकल्प (2) कुरजाँ (सही उत्तर):
यह पर्वतीय क्षेत्र का नहीं, बल्कि मरुस्थलीय क्षेत्र (पश्चिमी राजस्थान) का एक अत्यंत प्रसिद्ध विरह गीत है।
- तथ्य: इसमें प्रोषितपतिका (जिसका पति परदेस गया हो) स्त्री ‘कुरजाँ’ (प्रवासी पक्षी – डेमोइसेल क्रेन) को माध्यम बनाकर अपने पति को संदेश भेजती है।
- मुख्य बोल: इसके प्रमुख बोल हैं — “कूर्जां एक म्हारों भंवर मिलाद्यो ए।”
विकल्प (1) पटेल्या, (3) बिच्छीयो तथा (4) लालर
ये तीनों ही विकल्प गलत हैं। ये तीनों राजस्थान के पर्वतीय / मेवाड़-वागड़ क्षेत्र (आदिवासी अंचल) के अत्यधिक लोकप्रिय और पारंपरिक लोकगीत हैं।
#14. ‘लोकगीत किसी संस्कृति के मुँह बोले चित्र हैं।’ यह किसका कथन है- [पटवारी परीक्षा 2011]
विकल्प (1) देवेन्द्र सत्यार्थी (सही उत्तर):
प्रसिद्ध लोकयात्री एवं लोकगीत अध्येता देवेंद्र सत्यार्थी (मूल नाम: रेविंदर बत्ता) ने लोकगीतों के महत्व को रेखांकित करते हुए यह कथन कहा था।
विकल्प (2) सत्येन्द्र त्रिपाठी
यह इस प्रश्न के संदर्भ में गलत विकल्प है।
विकल्प (3) महात्मा गाँधी
यह गलत है। महात्मा गाँधी जी ने लोकगीतों के बारे में कहा था कि — “लोकगीत जनता की भाषा हैं, वे हमारी संस्कृति के पहरेदार/संरक्षक हैं।”
विकल्प (4) डॉ. जेतनारायण शास्त्री
यह भी इस प्रश्न के लिए एक गलत विकल्प है।
#15. रतवाई लोक गीत किस क्षेत्र में गाए जाते हैं? [कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रीशियन)- 24.03.2019] [संगणक-03.03.2024]
मेवात क्षेत्र (अलवर-भरतपुर) में वर्षा ऋतु/फसल कटाई के दौरान मेवाती (मेव जाति) महिलाओं एवं पुरुषों द्वारा ‘रतवाई’ गीत व नृत्य किया जाता है।
#16. घूघरी, केवड़ा आदि लोकगीत किस क्षेत्र से सम्बन्धित है- [Librarian Garde-II Exam – 02.08.2020]
विकल्प (3) मरुस्थलीय क्षेत्र (सही उत्तर):
यह राजस्थान के पश्चिमी थार मरुस्थल (जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर आदि) में गाए जाने वाले प्रसिद्ध लोकगीत हैं।
- मरुस्थलीय क्षेत्र के अन्य मुख्य लोकगीत: घूघरी, केवड़ा, सूंपणा, कुरंजा, पीपली, कागा, मूमल, ढोला-मारू, इंडोणी और कांगसियो।
विकल्प (1) पर्वतीय क्षेत्र
यह गलत है। राजस्थान के पर्वतीय / मेवाड़-वागड़ (आदिवासी अंचल) क्षेत्र के प्रमुख लोकप्रिय लोकगीत पटेल्या, बिछियो, और लालर हैं।
विकल्प (2) मैदानी क्षेत्र तथा (4) मेवात क्षेत्र
ये इस प्रश्न के संदर्भ में पूर्णतः गलत विकल्प हैं।
#17. राजपूताना के रियासती आन्दोलन के दौरान प्रसिद्ध लोकनायक गायक कौन था।[पशु परिचर-2.12.2024 (II)]
विकल्प (1) गणेशीलाल व्यास (सही उत्तर):
इन्हें राजस्थान के इतिहास में ‘उस्ताद’ के नाम से जाना जाता था। रियासती प्रजामंडल आंदोलनों के दौरान इन्होंने अपनी देशभक्ति कविताओं और लोकगीतों के माध्यम से जन-जागृति फैलाई थी।
विकल्प (2) राणा बाई
यह गलत है। ये राजस्थान की प्रसिद्ध संत एवं कवयित्री थीं, जिन्हें ‘राजस्थान की दूसरी मीरा’ के नाम से जाना जाता है।
विकल्प (3) चंदबरदाई
यह गलत है। ये अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय के दरबारी कवि और मित्र थे, जिन्होंने प्रसिद्ध महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ की रचना की थी।
विकल्प (4) पी. के. मिश्रा
यह इस प्रश्न के संदर्भ में एक गलत विकल्प है।
#18. गणगौर पर्व के दौरान गाए जाने वाले गीत में ‘गिन्दोली’ का नाम प्रयुक्त होता है। यह ‘गिन्दोली’ कौन थी? [Assist. Professor-8.9.2024]
गिंदोली (मारवाड़ का ऐतिहासिक प्रसंग व लोकगीत):
- ऐतिहासिक प्रसंग: अहमदाबाद के सूबेदार महमूद बेग की पुत्री गिंदोली का विवाह/प्रेम संबंध मालाणी (बाड़मेर) के प्रसिद्ध शासक राव मल्लिनाथ के पुत्र जगमाल से हुआ था।
- सांस्कृतिक महत्व: इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आज भी मारवाड़ क्षेत्र में गणगौर उत्सव के दौरान ‘गिंदोली’ नामक लोकगीत गाया जाता है और इससे जुड़ी परंपरा निभाई जाती है।
#19. राजस्थान का वह संगीतज्ञ जिसके विषय में किंवदन्ती है कि उसने एक राग से पत्थर को पिघला दिया था- [पटवारी परीक्षा 2011]
हरिसिंह (सही उत्तर):
- अद्भुत राग साधना: राजस्थान के संगीत इतिहास में यह किंवदंती (प्रचलित लोक-मान्यता) है कि संगीतज्ञ हरिसिंह अपनी अद्भुत राग साधना और गायकी से पाषाण (पत्थर) को भी पिघला देने की क्षमता रखते थे।
Quiz 2 I


