DECE Exam Question Paper 2026
#1. भोजन के कार्यों में सम्मिलित नहीं है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- भोजन के प्रमुख कार्य:
- शारीरिक कार्य (Physiological Functions): शरीर को ऊर्जा प्रदान करना, ऊतकों का निर्माण व मरम्मत करना, और शारीरिक प्रतिरक्षा व नियमन करना।
- मनोवैज्ञानिक कार्य (Psychological Functions): भोजन भावनाओं को संतुष्ट करता है, सुरक्षा की भावना देता है और मानसिक प्रसन्नता से जुड़ा होता है।
- सामाजिक कार्य (Social Functions): त्योहारों, मेल-मिलाप, पारिवारिक समारोहों और आतिथ्य सत्कार में भोजन सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बनता है।
- निष्कर्ष: ‘आनुवंशिक कार्य’ (Genetic Function) भोजन का प्रत्यक्ष कार्य नहीं है, क्योंकि आनुवंशिक गुण (Genetics) माता-पिता से डीएनए के माध्यम से स्थानांतरित होते हैं, भोजन से नहीं। इसलिए यह भोजन के कार्यों में सम्मिलित नहीं है।
#2. पोषण में, ‘संतुलन’ शब्द से आशय है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- संतुलित आहार की विशेषताएँ:
- इसमें ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज लवण और जल सभी आवश्यक पोषक तत्व सही अनुपात और समुचित मात्रा में शामिल होते हैं।
- यह व्यक्ति की आयु, लिंग, स्वास्थ्य और शारीरिक श्रम की माँग के अनुसार निर्धारित होता है।
- निष्कर्ष: चूँकि ‘संतुलन’ शब्द का संबंध सभी पोषक तत्वों के सटीक संतुलन और सही अनुपातिक आपूर्ति से है, इसलिए सही विकल्प दूसरा वाला है।
#3. कैल्शियम और फॉस्फोरस की अंतःक्रिया, मुख्य रूप से किसको प्रभावित करती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कार्य प्रणाली:
- हमारे शरीर के कुल कैल्शियम का लगभग 99% हिस्सा और फॉस्फोरस का बड़ा भाग हड्डियों तथा दाँतों में पाया जाता है।
- ये दोनों खनिज मिलकर हाइड्रॉक्सीपैटाइट (Hydroxyapatite) क्रिस्टल का निर्माण करते हैं, जो कंकाल तंत्र को संरचनात्मक कठोरता, घनत्व और मजबूती प्रदान करता है।
- निष्कर्ष: चूँकि कैल्शियम और फॉस्फोरस की अंतःक्रिया का मुख्य और प्रत्यक्ष प्रभाव हड्डियों व दाँतों के स्वास्थ्य एवं मजबूती पर पड़ता है, इसलिए सही विकल्प ‘हड्डियों एवं दाँतों की मजबूती’ है।
#4. कुपोषण से तात्पर्य है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कुपोषण के मुख्य रूप:
- अल्पपोषण (Undernutrition): जब शरीर को आवश्यक मात्रा में कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन या खनिज लवण नहीं मिल पाते (जैसे- दुबलापन, बौनापन या पोषक तत्वों की कमी)।
- अतिपोषण (Overnutrition): जब कोई व्यक्ति आवश्यकता से अधिक मात्रा में कैलोरी या पोषक तत्व ग्रहण करता है, जिससे मोटापा या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- निष्कर्ष: चूँकि कुपोषण के दायरे में पोषण की कमी (अल्पपोषण) और पोषण की अधिकता या असंतुलन (अतिपोषण) दोनों शामिल होते हैं, इसलिए सही विकल्प ‘अल्पपोषण एवं अतिपोषण दोनों’ है।
#5. स्वास्थ्य की जैवचिकित्सीय (biomedical) संकल्पना स्वास्थ्य को …………. के रूप में परिभाषित करती है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- मुख्य अवधारणा:
- इस पारंपरिक दृष्टिकोण के अनुसार, यदि शरीर में कोई बीमारी, संक्रमण, चोट या शारीरिक असामान्यता मौजूद नहीं है, तो व्यक्ति को स्वस्थ माना जाता है।
- अर्थात, यह अवधारणा मुख्य रूप से “रोग या विकृति की अनुपस्थिति” (Absence of disease or infirmity) पर केंद्रित होती है।
- निष्कर्ष: चूँकि जैवचिकित्सीय मॉडल पूरी तरह से शारीरिक रोगों की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर आधारित है, इसलिए सही विकल्प ‘किसी रोग का न होना’ है।
#6. “एक अनुकूल परिवार तथा अच्छे परिवेश में स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क” स्वास्थ्य की …………. संकल्पना को दर्शाता है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- समग्र संकल्पना की विशेषताएँ:
- यह संकल्पना इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति का स्वास्थ्य केवल शारीरिक बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि उसके संपूर्ण परिवेश, परिवार, समाज और मानसिक स्थिति से जुड़ा हुआ है।
- पारंपरिक और पौराणिक दृष्टिकोण के अनुसार भी “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क” का निवास तभी संभव माना गया है जब व्यक्ति को एक अनुकूल परिवार और सकारात्मक सामाजिक-भौतिक परिवेश (Good Environment) प्राप्त हो।
- निष्कर्ष: चूँकि यह दृष्टिकोण शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और पर्यावरणीय सभी घटकों को एक साथ जोड़कर देखता है, इसलिए इसे स्वास्थ्य की ‘समग्र’ (Holistic) संकल्पना कहा जाता है।
#7. आत्महत्या, किशोर अपराधवृत्ति और नशीले पदार्थों का सेवन किसके उदाहरण हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- स्वास्थ्य सूचकों का वर्गीकरण:
- सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य के सूचक (Social and Mental Health Indicators): आत्महत्या (Suicide), किशोर अपराधवृत्ति (Juvenile Delinquency), नशीले पदार्थों का सेवन (Substance Abuse), घरेलू हिंसा और मदिरापान जैसी प्रवृत्तियाँ समाज के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के स्तर को दर्शाती हैं। ये इस बात का संकेत देती हैं कि समाज में मानसिक तनाव, कुसमायोजन या सामाजिक विघटन कितना अधिक है।
- अन्य विकल्प (जैसे आर्थिक सूचक या स्वास्थ्य देखभाल वितरण सूचक) स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता या आर्थिक स्थिति से संबंधित होते हैं, न कि सीधे इन मानसिक-सामाजिक समस्याओं से।
- निष्कर्ष: चूँकि आत्महत्या, अपराध और नशीली दवाओं की लत व्यक्ति के मानसिक विकारों और सामाजिक कुसमायोजन से जुड़े नकारात्मक पहलू हैं, इसलिए इन्हें ‘सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य के सूचक’ माना जाता है।
#8. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा दर्शाती है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- इसकी परिभाषा व अर्थ:
- इसका मतलब यह औसत आयु है जो जन्म लेने वाले नवजात शिशु के जीने की उम्मीद की जाती है, बशर्ते जन्म के समय मौजूदा मृत्यु दर (Mortality Rates) उसके जीवनकाल के दौरान यथावत बनी रहे।
- यह किसी देश या क्षेत्र की चिकित्सा सुविधाओं, पोषण स्तर और समग्र जीवन स्तर को दर्शाती है।
- निष्कर्ष: चूँकि जीवन प्रत्याशा जन्म के समय से ही औसत संभावित जीवन वर्षों को व्यक्त करती है, इसलिए सही विकल्प दूसरा वाला है।
#9. बड़े शहरों के अस्पताल, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के …………. स्तर से संबंधित हैं?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर:
- प्राथमिक स्तर (Primary Care): यह स्वास्थ्य सेवा का पहला संपर्क बिंदु है, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या उप-केंद्र।
- द्वितीयक स्तर (Secondary Care): इसमें जिला अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आते हैं, जहाँ प्राथमिक स्तर से थोड़ी अधिक उन्नत और विशेषज्ञ सेवाएँ मिलती हैं।
- तृतीयक स्तर (Tertiary Care): यह स्वास्थ्य देखभाल का सबसे उच्च और विशेष स्तर है। बड़े शहरों में स्थित बड़े मेडिकल कॉलेज, सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल और अनुसंधान संस्थान इसके अंतर्गत आते हैं, जो अत्यंत जटिल बीमारियों के इलाज, उन्नत शल्य चिकित्सा (Surgeries) और विशिष्ट उपचार के लिए जाने जाते हैं।
- निष्कर्ष: चूँकि बड़े शहरों के अस्पताल अत्यधिक विशिष्टीकृत और उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करते हैं, इसलिए वे स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के ‘तृतीयक’ (Tertiary) स्तर से संबंधित हैं।
#10. जल में घुलनशील विटामिन है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- विटामिनों का वर्गीकरण:
- जल में घुलनशील विटामिन (Water-soluble Vitamins): इसके अंतर्गत विटामिन ‘बी’ कॉम्प्लेक्स (Vitamin B complex) और विटामिन ‘सी’ आते हैं। ये शरीर में संचित (Store) नहीं होते और मूत्र के रास्ते बाहर निकल जाते हैं, इसलिए इन्हें प्रतिदिन आहार में लेना आवश्यक होता है।
- वसा में घुलनशील विटामिन (Fat-soluble Vitamins): इसके अंतर्गत विटामिन ‘ए’, ‘डी’, ‘ई’ और ‘के’ आते हैं, जो यकृत (Liver) और वसा ऊतकों में जमा रहते हैं।
- निष्कर्ष: चूँकि विटामिन ‘ए’, ‘डी’ और ‘ई’ वसा में घुलनशील हैं, जबकि विटामिन ‘बी’ जल में घुलनशील है, इसलिए सही विकल्प विटामिन ‘बी’ है।
#11. सूक्ष्म पोषक तत्व का एक उदाहरण है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- पोषक तत्वों का वर्गीकरण:
- स्थूल पोषक तत्व या वृहद पोषक तत्व (Macronutrients): इन्हें शरीर को बड़ी मात्रा में ऊर्जा और निर्माण के लिए आवश्यक होता है। इसके अंतर्गत कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा आते हैं।
- सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): इन्हें शरीर को बहुत कम मात्रा (मिलीग्राम या माइक्रोग्राम) में आवश्यकता होती है, लेकिन शारीरिक कार्यों के नियमन के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसके अंतर्गत विटामिन और खनिज तत्व (Minerals) आते हैं।
- निष्कर्ष: चूँकि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा स्थूल पोषक तत्व हैं, जबकि खनिज तत्व सूक्ष्म पोषक तत्वों की श्रेणी में आते हैं, इसलिए सही विकल्प ‘खनिज तत्व’ है।
#12. ‘विटामिन’ शब्द में ‘विटा’ से तात्पर्य है-
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- शब्द की उत्पत्ति:
- यह शब्द ‘Vita’ (जिसका अर्थ जीवन / Life होता है) और ‘Amine’ (नाइट्रोजन युक्त यौगिक) से मिलकर बना है।
- इसका शाब्दिक अर्थ है—”जीवन के लिए आवश्यक तत्व”। चूँकि ये यौगिक शरीर के सुचारू संचालन और जीवन रक्षा के लिए अनिवार्य हैं, इसलिए इन्हें यह नाम दिया गया।
- निष्कर्ष: चूँकि ‘विटा’ (Vita) का सीधा तात्पर्य ‘जीवन’ से है, इसलिए सही विकल्प ‘जीवन’ है।
#13. वह भोजन जो कार्बोहाइड्रेट का मुख्य खाद्य स्रोत नहीं है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- विश्लेषण:
- गेहूँ, चावल और मिलेट (ज्वार-बाजरा): ये सभी अनाज (Cereals and Millets) की श्रेणी में आते हैं, जो हमारे आहार में कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत (Primary Sources) माने जाते हैं। इनसे शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा मिलती है।
- अंडा (Egg): यह एक पशु-आधारित खाद्य पदार्थ है जो मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और वसा (Protein and Fat) का स्रोत है। अंडे में कार्बोहाइड्रेट नगण्य मात्रा में होता है।
- निष्कर्ष: चूँकि अंडा कार्बोहाइड्रेट का मुख्य खाद्य स्रोत नहीं बल्कि प्रोटीन का स्रोत है, इसलिए सही विकल्प ‘अंडा’ है।
#14. भोजन की प्रोटीन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए, निम्नलिखित का मिला-जुला इस्तेमाल किया जा सकता है-
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- सिद्धांत और कार्यप्रणाली:
- अनाज (Cereals): जैसे गेहूँ, चावल, मक्का आदि में ‘लाइसिन’ (Lysine) नामक आवश्यक अमीनो एसिड की कमी होती है, लेकिन इनमें ‘मेथियोनीन’ (Methionine) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
- दालें (Pulses): इनमें इसके विपरीत ‘मेथियोनीन’ की कमी होती है, लेकिन ‘लाइसिन’ प्रचुर मात्रा में होता है।
- जब अनाज और दालों को एक साथ (जैसे दाल-चावल, खिचड़ी, इडली या मिस्सी रोटी) खाया जाता है, तो दोनों एक-दूसरे के कमियों वाले अमीनो एसिड की पूर्ति कर देते हैं। इससे शरीर को सभी आवश्यक अमीनो एसिड संतुलित मात्रा में मिल जाते हैं और भोजन की प्रोटीन गुणवत्ता (Biological Value) कई गुना बढ़ जाती है।
- निष्कर्ष: चूँकि अनाज और दालों का मेल प्रोटीन की गुणवत्ता को सर्वोत्तम रूप से सुधारता है, इसलिए सही विकल्प ‘अनाज-दालें’ है।
#15. कार्बोज़ (कार्बोहाइड्रेट्स) की एक भूमिका है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- मुख्य कार्य:
- कार्बोहाइड्रेट का मुख्य काम शरीर को त्वरित ऊर्जा (Energy) प्रदान करना है ताकि शरीर की दैनिक गतिविधियाँ और आंतरिक अंग सुचारू रूप से कार्य कर सकें।
- शरीर निर्माण (Body building) का कार्य मुख्य रूप से प्रोटीन करता है, जबकि अवरोधक या इंसुलेशन (Insulation) का कार्य मुख्य रूप से वसा (Fats) द्वारा किया जाता है।
- निष्कर्ष: चूँकि कार्बोज़ का प्रमुख उद्देश्य शरीर को ऊर्जा देना है, इसलिए सही विकल्प ‘ऊर्जा प्रदान करना’ है।
#16. एक ग्राम वसा से, …………. ऊर्जा प्राप्त होती है।
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- विभिन्न पोषक तत्वों से ऊर्जा मान:
- कार्बोहाइड्रेट: लगभग 4 किलोकैलोरी प्रति ग्राम
- प्रोटीन: लगभग 4 किलोकैलोरी प्रति ग्राम
- वसा (Fat): लगभग 9 किलोकैलोरी प्रति ग्राम (वसा ऊर्जा का सबसे सान्द्र या कंसंट्रेटेड स्रोत है)।
- निष्कर्ष: चूँकि 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से शरीर को सर्वाधिक (लगभग 9 किलोकैलोरी) ऊर्जा प्राप्त होती है, इसलिए सही विकल्प ‘9 किलोकैलोरी’ है।
#17. आर. डी. ए. का पूरा नाम है –
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- आर.डी.ए. का अर्थ एवं उपयोग:
- यह विभिन्न आयु वर्ग, लिंग और शारीरिक श्रम करने वाले स्वस्थ व्यक्तियों के लिए प्रतिदिन आवश्यक पोषक तत्वों (जैसे प्रोटीन, विटामिन, खनिज आदि) की वह प्रस्तावित दैनिक मात्रा है, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरी तरह सुरक्षित रूप से संतुष्ट करती है।
- इसे भारत में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा निर्धारित किया जाता है।
- निष्कर्ष: आर.डी.ए. का अंग्रेजी पूरा नाम ‘Recommended Dietary Allowances’ है, जिसे हिंदी में ‘प्रस्तावित दैनिक मात्रा’ के रूप में व्यक्त किया जाता है। अत: सही विकल्प दूसरा वाला है।
#18. खाद्य पदार्थ, जो विटामिन ‘ए’ का एक घना स्रोत नहीं है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- विटामिन ‘ए’ के स्रोत:
- गाजर, आम और मछली (विशेषकर मछली के यकृत का तेल) विटामिन ‘ए’ या उसके पूर्ववर्ती (Beta-carotene) के बहुत अच्छे और समृद्ध स्रोत हैं।
- गाजर और आम में कैरोटीन पाया जाता है जो शरीर में जाकर विटामिन ‘ए’ में बदल जाता है।
- आंवला की स्थिति:
- आंवला मुख्य रूप से विटामिन ‘सी’ (Vitamin C) और एंटीऑक्सीडेंट्स का एक अत्यंत घना स्रोत है, न कि विटामिन ‘ए’ का।
- निष्कर्ष: चूंकि आंवला विटामिन ‘सी’ के लिए जाना जाता है और अन्य तीनों विकल्प विटामिन ‘ए’ के अच्छे स्रोत हैं, इसलिए सही उत्तर ‘आंवला’ है।
#19. शालापूर्व बच्चे (प्रीस्कूलर) के लिए एक अच्छा पौष्टिक अल्पाहार है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- आटे और मूंगफली के लड्डू का पोषण मूल्य:
- आटा और मूंगफली दोनों ही ऊर्जा, प्रोटीन, स्वस्थ वसा (Healthy Fats), आयरन और विटामिन से भरपूर होते हैं।
- यह बच्चों के शारीरिक विकास और ऊर्जा की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक आदर्श और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- आलू से बना कटलेट (विशेषकर तला हुआ) और जैम ब्रेड मुख्य रूप से कैलोरी और रिफाइंड शुगर या कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं, जिनमें आवश्यक पोषक तत्वों (प्रोटीन, खनिज) की कमी होती है।
- चॉकलेट बार में अत्यधिक मात्रा में चीनी और कृत्रिम सामग्रियां होती हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि आटे और मूंगफली के लड्डू में प्रोटीन, ऊर्जा और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, इसलिए यह प्रीस्कूलर बच्चों के लिए सबसे अच्छा पौष्टिक अल्पाहार है।
#20. बाजू के ऊपरी भाग पर निशान, बच्चे को कौन-सा टीका लगा होना दर्शाता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- बीसीजी का टीका और निशान:
- बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती दिनों में तपेदिक (Tuberculosis / टी.बी.) से बचाव के लिए BCG (Bacille Calmette-Guérin) का टीका लगाया जाता है।
- यह टीका आमतौर पर बाएं बाजू के ऊपरी हिस्से (Upper Arm) पर intradermal रूप से दिया जाता है, जिसके ठीक होने के बाद वहां एक स्थायी छोटा सा निशान (Scar) बन जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- टायफॉयड, हैपेटाइटिस बी और खसरा (मीजल्स) के टीके लगाए जाने पर आमतौर पर त्वचा पर इस तरह का कोई विशिष्ट या स्थायी निशान नहीं बनता है।
- निष्कर्ष: बाजू के ऊपरी भाग पर बना निशान बच्चे को तपेदिक (टी.बी.) से बचाव के लिए लगाए गए बीसीजी (BCG) टीके की उपस्थिति को दर्शाता है।
#21. निम्नलिखित में से किसे, जन्म के समय ‘उच्च जोखिम’ श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया जायेगा ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- समय पूर्व (Preterm) जन्म और उच्च जोखिम:
- सामान्य गर्भावस्था लगभग 37 से 40 सप्ताह की होती है। जो शिशु 37 सप्ताह से पहले (जैसे 32वें हफ्ते में) पैदा होते हैं, उन्हें ‘समय पूर्व जन्मे शिशु’ (Preterm babies) कहा जाता है।
- इनका शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता है, जिससे इनके अंगों (विशेषकर फेफड़े और मस्तिष्क) की परिपक्वता में कमी, कम वजन, संक्रमण का खतरा और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताएं होने की संभावना बहुत अधिक होती है। इसलिए इन्हें ‘उच्च जोखिम’ श्रेणी में रखा जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- 2.6 किलोग्राम वजन वाला शिशु सामान्य और स्वस्थ वजन की श्रेणी के करीब है (सामान्यतः 2.5 किग्रा से अधिक वजन स्वस्थ माना जाता है)।
- कुशल डॉक्टर/दाई की देखरेख में सामान्य रूप से बिना जटिलता के जन्मा शिशु और जन्म लेते ही तेजी से रोने वाला (स्वस्थ श्वसन क्रिया दर्शाने वाला) नवजात शिशु सामान्य श्रेणी में आते हैं।
- निष्कर्ष: 32वें हफ्ते में समय से पहले जन्म लेने वाला शिशु विकास की अपरिपक्वता के कारण ‘उच्च जोखिम’ श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
#22. बच्चों में विटामिन ‘डी’ की कमी से पनपने वाला रोग है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- विटामिन ‘डी’ की कमी और रिकेट्स:
- विटामिन ‘डी’ (Vitamin D) शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है, जो हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक है।
- बच्चों में विटामिन ‘डी’ की कमी के कारण हड्डियां नरम और कमजोर हो जाती हैं, जिससे रिकेट्स (Rickets) नामक रोग हो जाता है, जिसमें पैरों की हड्डियां मुड़ सकती हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- रात्रि में अंधापन (रतौंधी): यह विटामिन ‘ए’ की कमी से होता है।
- पोलियो: यह एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो पोलियोवाइरस के कारण होती है (पोषण की कमी से नहीं)।
- स्कर्वी: यह विटामिन ‘सी’ की कमी से होने वाला रोग है।
- निष्कर्ष: चूंकि रिकेट्स बच्चों में विटामिन ‘डी’ की कमी का मुख्य लक्षण है, इसलिए सही विकल्प ‘रिकेट्स’ है।
#23. निम्नलिखित में से कौन-सा श्वसन-तंत्र के निचले हिस्से के संक्रमण का लक्षण नहीं है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- श्वसन-तंत्र के निचले हिस्से के संक्रमण (Lower Respiratory Tract Infection) के लक्षण:
- नासाद्वार के किनारों का फूलना (Nasal flaring): सांस लेते समय नाक के छिद्रों का फूलना यह दर्शाता है कि बच्चे को सांस लेने में अधिक जोर लगाना पड़ रहा है, जो गंभीर श्वसन संक्रमण का लक्षण है।
- बच्चे का नीला पड़ जाना (Cyanosis): ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण होंठ या त्वचा का नीला पड़ना निचले श्वसन तंत्र के गंभीर संक्रमण (जैसे निमोनिया) का एक प्रमुख लक्षण है।
- साँस में घरघराहट (Wheezing): वायुमार्ग में सूजन या संकीर्णता के कारण सांस लेते समय घरघराहट होना निचले श्वसन तंत्र (जैसे ब्रोन्किओलाइटिस या दमा) से जुड़ा होता है।
- बिना बलगम की सूखी खाँसी की स्थिति:
- सूखी खांसी आमतौर पर ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण (जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम या गले का संक्रमण) से जुड़ी होती है, और यह अकेले निचले श्वसन तंत्र के गंभीर संक्रमण का विशिष्ट या मुख्य लक्षण नहीं मानी जाती है।
- निष्कर्ष: बिना बलगम की सूखी खाँसी ऊपरी श्वसन मार्ग या सामान्य सर्दी से संबंधित हो सकती है, इसलिए यह निचले हिस्से के संक्रमण का विशिष्ट लक्षण नहीं है।
#24. यदि बच्चे को प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण हो, तो बच्चे को सर्वाधिक क्या दिया जाना चाहिए ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण (PEM) और इसका उपचार:
- जैसा कि नाम से स्पष्ट है, प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण शरीर में प्रोटीन और कैलोरी (ऊर्जा) की गंभीर कमी के कारण होता है।
- इस स्थिति से उबरने के लिए बच्चे के आहार में उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थों का होना सबसे आवश्यक है।
- दालें (प्लांट-आधारित प्रोटीन और फाइबर का स्रोत) और दूध (उच्च श्रेणी का एनिमल प्रोटीन, कैल्शियम और वसा का स्रोत) प्रोटीन के बेहतरीन और सुलभ स्रोत हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- सेब, केले, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और फलों का रस विटामिन, खनिज और फाइबर तो प्रदान करते हैं, लेकिन इनमें प्रोटीन और मुख्य ऊर्जा की मात्रा बहुत कम होती है, जो कुपोषण की मूल समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए प्रोटीन युक्त आहार की आवश्यकता होती है, इसलिए ‘दालें और दूध’ सबसे उचित विकल्प हैं।
#25. ज़ीरोफ्थैलमिया (शुष्काक्षिपাক), किस विटामिन की कमी से होता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- ज़ीरोफ्थैलमिया (Xerophthalmia) और विटामिन ‘ए’:
- ज़ीरोफ्थैलमिया एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जिसमें आँखें शुष्क (सूखी) हो जाती हैं, कॉर्निया पर प्रभाव पड़ता है, और यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह अंधेपन का कारण भी बन सकती है।
- यह रोग शरीर में विटामिन ‘ए’ (Vitamin A) की लंबी और गंभीर कमी के कारण उत्पन्न होता है। रतौंधी (Night Blindness) भी इसी की शुरुआती अवस्था है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- विटामिन ‘डी’: इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स (सूखा रोग) होता है।
- विटामिन ‘के’: इसकी कमी से रक्त का थक्का जमने में समस्या होती है (रक्तस्राव का खतरा बढ़ता है)।
- विटामिन ‘सी’: इसकी कमी से स्कर्वी (मसूड़ों से खून आना) रोग होता है।
- निष्कर्ष: चूंकि ज़ीरोफ्थैलमिया सीधे तौर पर आँखों के स्वास्थ्य और विटामिन ‘ए’ की कमी से जुड़ा है, इसलिए सही विकल्प ‘विटामिन ‘ए” है।
#26. मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा में मौजूद दो खनिज तत्व हैं?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कैल्शियम और फॉस्फोरस की भूमिका:
- मानव शरीर में कुल खनिजों (Minerals) का सबसे बड़ा हिस्सा कैल्शियम और फॉस्फोरस से मिलकर बनता है।
- शरीर का लगभग 99% कैल्शियम और लगभग 85% फॉस्फोरस हमारी हड्डियों और दांतों (Bones and Teeth) की संरचना में पाया जाता है, जो उन्हें मजबूती प्रदान करता है। इसके अलावा ये दोनों तत्व शरीर की कोशिकीय गतिविधियों और चयापचय (Metabolism) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- सोडियम, पोटैशियम, आयरन, आयोडीन, जिंक और कॉपर शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्म और दीर्घ खनिज (Macronutrients/Micronutrients) हैं, लेकिन इनकी कुल मात्रा शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस की तुलना में काफी कम होती है।
- निष्कर्ष: चूंकि हड्डियों और दांतों के निर्माण के कारण कैल्शियम और फॉस्फोरस मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा में मौजूद खनिज हैं, इसलिए सही विकल्प ‘कैल्शियम और फॉस्फोरस’ है।
#27. कैल्शियम का उत्कृष्ट स्रोत है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- रागी में कैल्शियम की मात्रा:
- रागी (Finger Millet) पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों में कैल्शियम का सबसे उत्कृष्ट और समृद्ध स्रोत माना जाता है।
- लगभग 100 ग्राम रागी में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए बेहद फायदेमंद है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- बंदगोभी: इसमें विटामिन और फाइबर होते हैं, लेकिन यह कैल्शियम का बहुत बड़ा स्रोत नहीं है।
- चावल: यह मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है।
- गुड़: यह आयरन और ऊर्जा का स्रोत है, न कि कैल्शियम का प्रमुख स्रोत।
- निष्कर्ष: चूंकि रागी में अन्य विकल्पों की तुलना में कैल्शियम की मात्रा अत्यधिक उच्च होती है, इसलिए ‘रागी’ सबसे सही उत्तर है।
#28. शरीर में हीमोग्लोबिन का कार्य है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) का मुख्य कार्य:
- हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में पाया जाने वाला एक आयरन युक्त प्रोटीन है।
- इसका मुख्य कार्य फेफड़ों से ऑक्सीजन को अवशोषित करके रक्त के माध्यम से शरीर के सभी ऊतकों और कोशिकाओं तक पहुँचाना है, तथा वहां से कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक लाना है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- तरल पदार्थों का संतुलन: यह मुख्य रूप से गुर्दों और इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम-पोटैशियम) द्वारा नियंत्रित होता है।
- गलमंड (घेंघा/Goitre) से बचाना: यह कार्य आयोडीन द्वारा किया जाता है।
- भूख बढ़ाना: यह पाचन एंजाइमों और हार्مون से संबंधित है।
- निष्कर्ष: चूंकि हीमोग्लोबिन का प्राथमिक और मुख्य कार्य ऑक्सीजन का परिवहन करना है, इसलिए सही विकल्प ‘शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन को पहुँचाना’ है।
#29. शरीर में लौह तत्वों के अवशोषण में सहायक खाद्य पदार्थ है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- विटामिन ‘सी’ और लौह तत्व (Iron) का अवशोषण:
- संतरा और अन्य खट्टे फल विटामिन ‘सी’ (Ascorbic Acid) के बेहतरीन स्रोत होते हैं।
- विटामिन ‘सी’ शरीर में आयरन (विशेषकर प्लांट-आधारित नॉन-हीम आयरन) के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे शरीर लौह तत्वों को आसानी से उपयोग में ला पाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- चाय: इसमें टैनिन (Tannins) और पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो शरीर में आयरन के अवशोषण को कम करते हैं (बाधा डालते हैं)।
- गेहूँ: इसमें फाइटेट्स (Phytates) पाए जाते हैं जो आयरन के अवशोषण को घटाते हैं।
- तेल: यह वसा का स्रोत है, जो सीधे तौर पर आयरन के अवशोषण में सहायक नहीं होता।
- निष्कर्ष: चूंकि संतरा विटामिन ‘सी’ से भरपूर होता है और विटामिन ‘सी’ आयरन के अवशोषण में सबसे प्रमुख रूप से सहायक होता है, इसलिए सही विकल्प ‘संतरा’ है।
#30. संतुलित आहार में पोषक तत्वों की मात्रा, सामान्य आवश्यकता की दृष्टि से थोड़ी अधिक (अतिरिक्त) होती है ताकि ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- अतिरिक्त पोषक तत्वों का उद्देश्य:
- दैनिक जीवन में कई बार ऐसा समय आ सकता है जब किसी कारणवश व्यक्ति को पर्याप्त भोजन या उचित पोषक तत्वों से भरपूर आहार नहीं मिल पाता (जैसे बीमारी, यात्रा, या भोजन की अल्पकालिक उपलब्धता)।
- आहार में थोड़ी अतिरिक्त मात्रा होने से शरीर अपने संचित भंडार (Reserves) का उपयोग करके ऐसी अल्पकालिक कमियों को आसानी से सहन कर लेता है और कुपोषण या पोषक तत्वों की कमी से बचा रहता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- भोजन की मात्रा को केवल इसलिए नहीं बढ़ाया जाता ताकि अगले दिन खाना न बनाना पड़े या सिर्फ अधिक खाने की भरपाई हो सके, बल्कि यह शरीर की जैव-रासायनिक सुरक्षा और आपातकालीन भंडार के लिए होता है।
- निष्कर्ष: संतुलित आहार में पोषक तत्वों की मात्रा थोड़ी अधिक रखने का मुख्य कारण यह सुनिश्चित करना है कि अल्पकालिक रूप से भोजन पर्याप्त न मिलने पर भी शरीर को आवश्यक पोषण मिलता रहे।
#31. एक गर्भवती महिला के लिए ऊर्जा की प्रस्तावित दैनिक मात्रा (आर. डी. ए.) है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- गर्भावस्था में ऊर्जा की आवश्यकता:
- गर्भवती महिला को भ्रूण के विकास, प्लेसेंटा के निर्माण और अपने शारीरिक बदलावों के लिए सामान्य महिला की तुलना में अतिरिक्त ऊर्जा (कैलोरी) की आवश्यकता होती है।
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के मानकों के अनुसार, गर्भवती महिला के सामान्य दैनिक सक्रियता स्तर (SED / Moderate / Heavy) की आरडीए में अतिरिक्त 350 किलोकैलोरी प्रतिदिन जोड़ने की संस्तुति की जाती है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- स्तनपान (Lactation) के पहले 6 महीनों के दौरान अतिरिक्त 600 किलोकैलोरी की आवश्यकता होती है (न कि गर्भावस्था में)।
- केवल भारी कामकाज वाली श्रेणी मानना या सभी के लिए एक निश्चित 2250 किलोकैलोरी तय करना सही पैमाना नहीं है, क्योंकि यह महिला के मूल शारीरिक सक्रियता स्तर पर निर्भर करता है।
- निष्कर्ष: आईसीएमआर की गाइडलाइंस के अनुसार सही विकल्प महिला के दैनिक सक्रियता स्तर की आर. डी. ए. तथा अतिरिक्त 350 किलोकैलोरी है।
#32. अल्प श्रम करने वाले एक पुरुष की प्रोटीन की जरूरत हेतु आर. डी. ए. है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- पुरुषों के लिए प्रोटीन की आवश्यकता:
- ICMR के मानकों के अनुसार, एक सामान्य वयस्क पुरुष (चाहे वह अल्प श्रम, मध्यम श्रम या भारी श्रम करने वाला हो) के लिए प्रोटीन की संस्तुति दैनिक मात्रा लगभग 60 ग्राम प्रतिदिन निर्धारित की गई है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- 55 ग्राम: यह सामान्यतः एक वयस्क महिला के लिए प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता (RDA) होती है।
- 51.9 ग्राम और 55.5 ग्राम मानक आरडीए के सीधे पूर्णांक आंकड़े नहीं हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि प्रश्न में अल्प श्रम करने वाले पुरुष के बारे में पूछा गया है, इसलिए आईसीएमआर के अनुसार सही उत्तर ’60 ग्राम’ है।
#33. गर्भावस्था के तीसरे त्रिमास में होने वाली एक आम समस्या जिससे रेशे और पानी से भरपूर आहार के सेवन से बचा जा सकता है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कब्ज़ की समस्या और उसका निवारण:
- गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोनल बदलावों (विशेषकर प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ना) और बढ़ते हुए गर्भाशय द्वारा आंतों पर दबाव पड़ने के कारण पाचन गति धीमी हो जाती है, जिससे तीसरी तिमाही में कब्ज़ (Constipation) की समस्या बेहद आम हो जाती है।
- इस समस्या से बचने और राहत पाने के लिए आहार में फाइबर (रेशे) और पर्याप्त मात्रा में पानी (तरल पदार्थ) का सेवन करना सबसे प्रभावी उपाय है, क्योंकि फाइबर मल को मुलायम बनाता है और आंतों की गतिशीलता को सुधारता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- सुबह उठने के बाद होने वाली परेशानी (Morning Sickness): यह मुख्य रूप से गर्भावस्था के पहले त्रिमास (शुरुआती महीनों) में होती है।
- सीने में जलन (Heartburn): यह भी अंतिम महीनों में पेट के ऊपरी हिस्से पर दबाव के कारण होती है, जिसके लिए छोटे आहार और एंटीएसिड की आवश्यकता होती है।
- खून की कमी (Anemia): यह शरीर में हीमोग्लोबिन या आयरन की कमी से जुड़ी होती है।
- निष्कर्ष: चूंकि रेशे और पानी का सेवन विशेष रूप से पाचन तंत्र को सुचारू रखकर कब्ज़ की समस्या से बचाता है, इसलिए सही विकल्प ‘कब्ज़’ है।
#34. गर्भावस्था के दौरान खून की कमी होने का कारण है, शरीर में …………. की कमी?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- फोलिक एसिड और खून की कमी:
- गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के तीव्र विकास, कोशिकाओं के विभाजन और रक्त की कुल मात्रा (Blood Volume) में वृद्धि के कारण महिला को फोलिक एसिड (विटामिन B9) की आवश्यकता अत्यधिक बढ़ जाती है।
- फोलिक एसिड की कमी से लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण बाधित होता है, जिससे मेग्लोब्लास्टिक एनीमिया (Megaloblastic Anemia) जैसी खून की कमी की समस्या हो जाती है। यही कारण है कि गर्भधारण के दौरान आयरन के साथ-साथ फोलिक एसिड के सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- थायमिन (विटामिन B1), रिबोफ्लेविन (विटामिन B2), और नाइसिन (विटामिन B3): ये ऊर्जा चयापचय और सामान्य शारीरिक कार्यों के लिए आवश्यक हैं, लेकिन गर्भावस्था में विशिष्ट रूप से खून की कमी का प्रमुख कारण फोलिक एसिड (और आयरन) की कमी को माना जाता है।
- निष्कर्ष: चूंकि गर्भावस्था में रक्त की कमी (एनीमिया) का मुख्य संबंध फोलिक एसिड की कमी से है, इसलिए सही विकल्प ‘फोलिक एसिड’ है।
#35. गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य का एक अच्छा सूचक है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- गर्भावस्था में वजन बढ़ना (Gestational Weight Gain):
- गर्भावस्था के दौरान माँ के वजन में होने वाली कुल वृद्धि गर्भ में पल रहे शिशु की वृद्धि, प्लेसेंटा, एम्नियोटिक द्रव, और माँ के ऊतकों के विकास का सबसे भरोसेमंद और प्रमुख सूचक होती है।
- नियमित रूप से माँ के वजन की निगरानी करके यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि शिशु का विकास सामान्य रूप से हो रहा है या नहीं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- माँ द्वारा खाए गए भोजन की मात्रा, व्यायाम या सोने की अवधि व्यक्तिगत आदतें हैं, जो सीधे तौर पर शिशु के स्वास्थ्य का निश्चित पैमाना नहीं हैं क्योंकि पोषण का अवशोषण और भ्रूण का विकास शरीर की आंतरिक स्थिति पर निर्भर करता है।
- निष्कर्ष: चूंकि गर्भावस्था के दौरान माँ के वजन में वृद्धि भ्रूण और गर्भस्थ स्वास्थ्य का सबसे स्पष्ट और प्रमाणित पैमाना है, इसलिए सही विकल्प ‘माँ का वजन कितना बढ़ा है, उसकी मात्रा’ है।
#36. एक गर्भवती महिला के आहार के संबंध में निम्नलिखित में से गलत कथन की पहचान कीजिए?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- गलत कथन की पहचान:
- गर्भावस्था के दौरान एक ही समय में बहुत अधिक (बड़ी मात्रा में) भोजन करना अनुचित और गलत माना जाता है।
- कारण: जैसे-जैसे गर्भ का आकार बढ़ता है, गर्भाशय पेट के अंगों पर दबाव डालता है, जिससे एक बार में ज्यादा खाने पर अपच, सीने में जलन (Heartburn), भारीपन और गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए डॉक्टरों द्वारा यह सलाह दी जाती है कि भरपेट एक बार खाने के बजाय दिन में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा करके पौष्टिक आहार लें।
- अन्य विकल्पों की स्थिति (जो कि सही कथन हैं):
- अनाज और प्रोटीन का अधिक समावेश: यह भ्रूण के विकास और माँ के पोषण के लिए आवश्यक है।
- आयोडीनयुक्त नमक का इस्तेमाल: यह बच्चे के मानसिक विकास और थायराइड के संतुलन के लिए जरूरी है।
- तले आहार कम खाना: यह पाचन को ठीक रखने और अत्यधिक वजन बढ़ने से रोकने के लिए सही आदत है।
- निष्कर्ष: चूंकि एक समय में भारी मात्रा में भोजन करना गर्भावस्था के दौरान पाचन संबंधी समस्याएं पैदा करता है, इसलिए यह कथन गलत है और यही हमारा सही उत्तर है।
#37. प्रसवोपरांत देखभाल प्रदान की जाती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रसवोपरांत देखभाल (Postnatal Care) का दायरा:
- प्रसव (Delivery) के तुरंत बाद और शुरुआती कुछ हफ्तों (प्यूर्पेरियम अवधि) में माँ और बच्चे दोनों को विशेष चिकित्सीय और पोषण संबंधी देखभाल की आवश्यकता होती है।
- इस दौरान नवजात शिशु के स्वास्थ्य, टीकाकरण, फीडिंग और वजन की निगरानी की जाती है, साथ ही माँ के शारीरिक स्वास्थ्य रिकवरी, स्तनपान (Lactation), और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- देखभाल केवल माँ या केवल शिशु तक सीमित नहीं होती, क्योंकि दोनों एक-दूसरे के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े होते हैं।
- परिवार के अन्य सदस्यों को इस विशेष प्रसवोपरांत मेडिकल देखभाल में शामिल नहीं किया जाता है।
- निष्कर्ष: चूंकि प्रसव के बाद का समय माँ और नवजात शिशु दोनों के लिए ही अत्यंत संवेदनशील होता है, इसलिए यह देखभाल ‘नवजात शिशु और माँ दोनों को’ प्रदान की जाती है।
#38. प्रसवपूर्व दौरों (Visits) के दौरान, गर्भवती महिला को दी जाती है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- गर्भावस्था में टिटनेस का टीका (Tetanus Vaccine):
- गर्भावस्था के दौरान महिला और होने वाले बच्चे दोनों को टिटनेस (धनुष्टकार) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए प्रसवपूर्व दौरों में टिटनेस का टीका (या टिटनेस-डिफ्थीरिया / Td वैक्सीन) लगाया जाता है।
- यह टीकाकरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का एक अनिवार्य हिस्सा है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- पोलियो, खसरा और हैपेटाइटिस के टीके आमतौर पर जन्म के बाद नवजात शिशु को दिए जाने वाले टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा होते हैं, न कि गर्भावस्था के दौरान माँ को प्रसवपूर्व दौरों में लगाए जाने वाले मुख्य टीके।
- निष्कर्ष: चूंकि प्रसवपूर्व दौरों के दौरान माँ और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से टिटनेस का टीका दिया जाता है, इसलिए सही विकल्प ‘टिटनेस वैक्सीन’ है।
#39. प्रसव के पहले चरण में सम्मिलित है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रसव का प्रथम चरण (First Stage of Labour):
- प्रसव का पहला चरण नियमित गर्भाशय संकुचन (Uterine contractions) की शुरुआत से शुरू होता है और गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के 10 सेंटीमीटर तक पूरी तरह फैलने (Dilation) या खुलने पर समाप्त होता है।
- यह चरण प्रसव प्रक्रिया का सबसे लंबा चरण होता है, जिसमें बच्चे के जन्म के लिए मार्ग तैयार होता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- गर्भाशय ग्रीवा के पूरी तरह खुलने से लेकर शिशु के जन्म तक का समय प्रसव का **दूसरा चरण** होता है।
- शिशु के जन्म के बाद प्लेसेंटा (आल) के बाहर आने तक का समय प्रसव का **तीसरा चरण** कहलाता है।
- निष्कर्ष: चूंकि प्रसव के पहले चरण की परिभाषा गर्भाशय के संकुचन शुरू होने से लेकर सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) के पूर्ण रूप से खुलने तक की होती है, इसलिए सही विकल्प दूसरा वाला है।
#40. शिशु को हल्के (Mild) साबुन और गर्म पानी से स्नान कराना चाहिए?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- नवजात शिशु को स्नान कराने का सही समय:
- जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु के शरीर पर वर्निक्स केसियोसा (Vernix caseosa – एक सफेद मलाईदार परत) होती है, जो बच्चे की नाजुक त्वचा की रक्षा करती है, संक्रमण से बचाती है और उसके शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
- इसलिए WHO और बाल चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान कम होने) के खतरे को रोकने और वर्निक्स के संरक्षण के लिए बच्चे को जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि कम से कम 12 से 24 घंटे के बाद (या कम से कम 6 घंटे बाद) हल्के साबुन और गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- जन्म के तुरंत बाद या कुछ ही घंटों के भीतर नहलाने से शिशु का शरीर अत्यधिक ठंडा हो सकता है और त्वचा की सुरक्षात्मक परत नष्ट हो सकती है।
- निष्कर्ष: चूंकि नवजात शिशु के शरीर के तापमान और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए प्रारंभिक घंटों में स्नान से बचना चाहिए, इसलिए सही विकल्प ‘जन्म के 12-24 घंटों के बाद’ है।
#41. “नवदुग्ध” या कोलोस्ट्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कोलोस्ट्रम (Colostrum) का महत्व:
- प्रसव के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक माँ के स्तनों से निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध ‘कोलोस्ट्रम’ कहलाता है।
- यह पोषक तत्वों और विशेष रूप से **इम्युनोग्लोबुलिन (IgA)** एंटीबॉडीज से भरपूर होता है, जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को मजबूत करता है और उसे विभिन्न संक्रमणों, बीमारियों और रोगाणुओं से बचाता है। इसे शिशु का ‘पहला टीका’ भी कहा जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- यद्यपि यह पोषण देता है, लेकिन इसका मुख्य और विशिष्ट कार्य शिशु को शुरुआती जीवन में बीमारियों और संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करना है।
- निष्कर्ष: चूंकि कोलोस्ट्रम में भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज और प्रतिरक्षा गुण होते हैं, इसलिए सही विकल्प ‘यह शिशु को संक्रमण से बचाता है’ है।
#42. 10 माह के शिशु के आहार में शामिल हो सकता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- 10 माह के शिशु की पोषण संबंधी आवश्यकताएं:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और बाल पोषण गाइडलाइंस के अनुसार, 6 महीने की उम्र के बाद केवल माँ का दूध या तरल पदार्थ बच्चे की बढ़ती हुई ऊर्जा और पोषक तत्वों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होते।
- 10 महीने की उम्र तक आते-आते शिशु मसूड़ों से चबाना या भोजन को मुँह में संभालना सीख जाता है। इसलिए उसके आहार में मसला हुआ, बारीक कटा हुआ (chopped) अर्ध-ठोस या छोटे ठोस आहार (जैसे मैश किए हुए फल, खिचड़ी, दलिया, उबला हुआ मैश किया हुआ आलू आदि) को शामिल किया जाना चाहिए।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- केवल तरल पदार्थ, केवल पतला तरल आहार या केवल माँ का दूध 10 माह के बच्चे के लिए पोषण की दृष्टि से अपर्याप्त है, क्योंकि इस उम्र में उसे अधिक कैलोरी, आयरन और विभिन्न पोषक तत्वों की ठोस आवश्यकता होती है।
- निष्कर्ष: चूंकि 10 माह का शिशु अर्ध-ठोस और बारीक कटे हुए ठोस आहार को पचाने और खाने में सक्षम हो जाता है, इसलिए सही विकल्प ‘बारीक कटा हुआ (chopped) अर्ध-ठोस या ठोस आहार’ है।
#43. एक छह माह का शिशु अनाज (गेहूँ, चावल आदि) व दूध से बना पतला व तरल अर्ध ठोस दलिया आसानी से खा लेता है। शिशु के लिए आहार संबंधी अगला कदम होना चाहिए?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- पूरक आहार का अगला चरण (Progression in Weaning):
- जब 6 महीने का शिशु साधारण तरल दलिया आसानी से खाने लगता है, तो पोषण की गुणवत्ता (विशेषकर प्रोटीन, आयरन और ऊर्जा) को बढ़ाने के लिए आहार में विविधता लानी आवश्यक होती है।
- केवल एक ही प्रकार का अनाज लगातार खिलाते रहने के बजाय, उसमें दालों (जैसे चना, मूंग आदि) को शामिल करना चाहिए। अनाज और दाल का संयोजन (Cereal-Pulse Combination) देने से शिशु को संपूर्ण प्रोटीन (Complete Proteins) और अधिक पोषक तत्व मिलने लगते हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- 9 माह तक केवल एक ही प्रकार का दलिया खिलाते रहना कुपोषण या पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है।
- 6 महीने के तुरंत बाद सीधे सख्त और बारीक कटे हुए ठोस टुकड़े देना बच्चे के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
- केवल फलों का रस और सूप देने से ऊर्जा और प्रोटीन की आवश्यकताएं पूरी नहीं होतीं।
- निष्कर्ष: चूंकि 6 महीने के बाद बच्चे को संपूर्ण पोषण देने के लिए अनाज के साथ दालों या अन्य पौष्टिक तत्वों को जोड़ना जरूरी होता है, इसलिए सही विकल्प अनाज-दाल से बने आहार देना शुरू करना है।
#44. प्रसवोपरांत महिला को टाँकों में दर्द, बुखार और चक्कर की शिकायत है। उसके लिए सबसे उचित सलाह है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रसवोपरांत खतरे के लक्षण (Postnatal Danger Signs):
- प्रसव के पश्चात यदि किसी महिला को टाँकों में गंभीर दर्द, तेज बुखार और चक्कर आने जैसी शिकायतें होती हैं, तो यह शरीर में किसी संक्रमण (Infection जैसे प्यूर्पेरल सेप्सिस) या अन्य चिकित्सीय जटिलता का संकेत हो सकता है।
- ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की देरी या केवल घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य कार्यकर्ता (Health Worker / ANM / ASHA) से संपर्क करना और उन्हें सूचित करना चाहिए ताकि समय पर उचित इलाज मिल सके।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- इसे आम बात मानकर अनदेखा करना जानलेवा साबित हो सकता है।
- केवल घरेलू उपचार से गंभीर संक्रमण का इलाज संभव नहीं है।
- संक्रमण या कमजोरी की स्थिति में सामान्यतः स्तनपान बंद करने की सलाह नहीं दी जाती, बल्कि उचित चिकित्सीय सलाह के साथ स्तनपान जारी रखा जाता है।
- निष्कर्ष: चूंकि बुखार, चक्कर और टाँकों में दर्द संक्रमण के गंभीर लक्षण हैं, इसलिए सबसे उचित सलाह ‘स्वास्थ्य कार्यकर्ता को तुरंत बताना’ है।
#45. बेरी-बेरी रोग होने का कारण है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- बेरी-बेरी (Beriberi) रोग और विटामिन B1:
- बेरी-बेरी मुख्य रूप से विटामिन ‘बी 1’ (थायमिन / Thiamine) की कमी के कारण होने वाला एक गंभीर रोग है।
- यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और हृदय प्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और पैरों में सुन्नपन जैसी समस्याएं होती हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- विटामिन ‘के’: इसकी कमी से रक्त का थक्का जमने में समस्या होती है।
- विटामिन ‘डी’: इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स (सूखा रोग) और वयस्कों में ओस्टियोमलेशिया होता है।
- विटामिन ‘ई’: इसकी कमी से जनन क्षमता प्रभावित हो सकती है और मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि बेरी-बेरी रोग थायमिन यानी विटामिन B1 की कमी से होता है, इसलिए सही विकल्प ‘विटामिन ‘बी 1′ की कमी’ है।
#46. बच्चों में मुँह पकना (फफूंदी होना) के प्राथमिक लक्षण हैं?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- मुँह पकना (फफूंदी संक्रमण / Oral Thrush) के लक्षण:
- यह संक्रमण मुख्य रूप से कैंडिडा अल्बिकांस (Candida albicans) नामक यीस्ट (फंगस) के बढ़ने के कारण होता है।
- इसके प्राथमिक और सबसे स्पष्ट लक्षण में बच्चे की जीभ, मसूड़ों, तालू या गाल के अंदरूनी हिस्से पर दूध के थक्के जैसी सफेद परत या धब्बे जम जाते हैं, जिन्हें आसानी से हटाया नहीं जा सकता (यदि हटाने की कोशिश की जाए तो हल्की ब्लीडिंग हो सकती है)।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- होंठों में दरारें (Angular Cheilitis): यह मुख्य रूप से विटामिन बी-कॉम्पलेक्स (विशेषकर राइबोफ्लेविन) की कमी का लक्षण होता है।
- लाल मसूड़े या साँस में बदबू: ये मसूड़ों की सूजन (Gingivitis) या दंत स्वास्थ्य से जुड़े अन्य लक्षण हो सकते हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि बच्चों में फफूंदी (कैंडिडा) के संक्रमण के कारण मुँह पकने पर मुख्य रूप से जीभ और मुँह के अंदर सफेद परत जम जाती है, इसलिए सही विकल्प ‘जीभ पर सफेद परत’ है।
#47. आहार तंत्र में समस्याओं का आरंभिक सूचक है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- आहार तंत्र और पाचन से जुड़े शुरुआती संकेत:
- शरीर में पाचन तंत्र (Gastrointestinal / Alimentary tract) या पोषण संबंधी कोई असंतुलन या गड़बड़ी होने पर उसका सबसे पहला प्रभाव पाचन नली के शुरुआती छोर यानी मुख (Oral cavity) पर दिखाई देता है।
- जीभ पर सफेद या पीली परत जमना (Coated tongue) पाचन की मंदता, आंतों में अपच, या पोषक तत्वों के असंतुलन का एक प्रमुख और प्रारंभिक सूचक माना जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- गले में खराश: यह मुख्य रूप से सर्दी-जुकाम, संक्रमण या श्वसन तंत्र की समस्या से जुड़ी होती है।
- मसूड़ों में दर्द और दाँतों में सड़न: ये मुख्य रूप से दंत स्वच्छता (Dental Hygiene) और कैविटी से संबंधित स्थानीय समस्याएं हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि जीभ पर परत जमना आंतरिक पाचन और आहार तंत्र की गड़बड़ी का सबसे आम और शुरुआती नैदानिक संकेत माना जाता है, इसलिए सही विकल्प ‘जीभ पर परत जमना’ है।
#48. शिशुओं का अपने कानों को बेचैनी से रगड़ने का कारण होता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कान रगड़ने और दाँत निकलने (Teething) का संबंध:
- जब शिशुओं के दूध के दाँत निकलना शुरू होते हैं, तो मसूड़ों में सूजन, खुजली और तेज दर्द होता है।
- मसूड़ों से यह दर्द और बेचैनी तंत्रिकाओं (Nerves) के माध्यम से अक्सर जबड़े, गाल और कानों तक फैल जाती है। चूंकि छोटे बच्चे अपनी इस असहजता या दर्द को बोलकर नहीं बता पाते, इसलिए वे बेचैनी में बार-बार अपने कानों को या गालों को रगड़ते या खींचते हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- गहरी भूख: भूख लगने पर बच्चा रोता है या मुँह चलाता है, कान नहीं रगड़ता।
- अकेलापन महसूस करना: यह मनोवैज्ञानिक स्थिति है, शारीरिक प्रतिक्रिया नहीं।
- सिरदर्द: शिशुओं में सीधे तौर पर इस प्रकार सिरदर्द होना आम नहीं है, बल्कि यह मसूड़ों के दर्द का रिफ्लेक्टेड पेन (Reflected Pain) होता है।
- निष्कर्ष: चूंकि दाँत निकलते समय होने वाला मसूड़ों का दर्द कानों तक महसूस होता है और शिशु बेचैनी में कान रगड़ते हैं, इसलिए सही विकल्प ‘दाँत निकलने का दर्द’ है।
#49. आंतरिक कान में …………., शारीरिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक होती हैं?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- आंतरिक कान और शारीरिक संतुलन (Semicircular Canals):
- आंतरिक कान (Inner Ear) में वेस्टिबुलर तंत्र (Vestibular system) का एक मुख्य भाग अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ (Semicircular Canals) होती हैं।
- ये नलिकाएँ तरल पदार्थ से भरी होती हैं और सिर की स्थिति तथा गति का पता लगाती हैं, जिससे मस्तिष्क को संकेत मिलते हैं और शरीर का संतुलन (Balance and Posture) बना रहता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- कान का पर्दा (Tympanic Membrane): यह ध्वनि तरंगों को ग्रहण करके कंपन पैदा करने का कार्य करता है (सुनने में सहायक)।
- तंत्रिकाएँ और झिल्ली: ये संकेतों को ले जाने या सुरक्षा का सामान्य कार्य करती हैं, लेकिन संतुलन के लिए विशेष रूप से अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ जिम्मेदार होती हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि आंतरिक कान की अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ शरीर के संतुलन को नियंत्रित करती हैं, इसलिए सही विकल्प ‘अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ’ है।
#50. गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की कमी का सर्वाधिक घोर परिणाम है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- गर्भावस्था में आयोडीन की कमी और क्रेटीनता:
- गर्भावस्था के दौरान थायराइड हॉर्मोन्स के सामान्य निर्माण के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है, जो भ्रूण के मस्तिष्क और शारीरिक विकास में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
- यदि इस अवधि में गर्भवती महिला में गंभीर आयोडीन की कमी हो जाती है, तो होने वाले शिशु में क्रेटीनता (Cretinism) जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके लक्षणों में जन्मजात बौद्धिक दिव्यांगता (Mental Retardation), गंभीर शारीरिक विकास का रुकना, गूंगापन और बहरापन शामिल हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- सिरदर्द या बुखार आयोडीन की कमी के विशिष्ट या सबसे गंभीर परिणाम नहीं हैं।
- हाई ब्लड शुगर मुख्य रूप से इंसुलिन या गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) से संबंधित है, न कि सीधे आयोडीन की कमी से।
- निष्कर्ष: चूंकि गर्भावस्था में आयोडीन की भारी कमी से बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर सबसे विनाशकारी प्रभाव पड़ता है, इसलिए सही विकल्प ‘बच्चे में क्रेटीनता (Cretinism)’ है।
#51. भारत “राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल कार्यक्रम” मूलरूप से लक्षित है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल (NIPI) का लक्ष्य:
- भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया यह कार्यक्रम देश में आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया (खून की कमी) की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति है।
- इसके तहत मुख्य रूप से बच्चों, किशोरियों (Adolescent girls), गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को आयु-समूह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (IFA) के सप्लीमेंट्स प्रदान किए जाते हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- यह कार्यक्रम केवल शिशुओं या केवल अस्पताल के रोगियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के बड़े वर्ग को कवर करता है।
- निष्कर्ष: चूंकि इस राष्ट्रीय पहल का मुख्य केंद्र बिंदु महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की रोकथाम करना है, इसलिए सही विकल्प ‘महिलाओं और बच्चों पर’ है।
#52. लौह तत्वों की घोर कमी का लक्षण (पीलेपन के अलावा) है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- आयरन की घोर कमी (Severe Iron Deficiency / Anemia) के लक्षण:
- शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन की अत्यधिक कमी होने पर सामान्य पीलेपन (फिकापन या Pallor) के अलावा कुछ विशिष्ट नैदानिक लक्षण दिखाई देते हैं।
- इनमें सबसे प्रमुख लक्षण कोयलोनीचिया (Koilonychia) है, जिसमें नाखून कमजोर होकर भुर-भुरे हो जाते हैं, आसानी से टूटने लगते हैं और उनका आकार चम्मच जैसा (Spoon-shaped nails) हो जाता है। इसके अलावा जीभ का चिकना होना (Atrophic glossitis) भी इसका मुख्य लक्षण है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- त्वचा पर लाल धब्बे: यह मुख्य रूप से प्लेटलेट्स की कमी (थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया) या विटामिन ‘सी’ / ‘के’ की कमी से जुड़ा हो सकता है।
- पेट सूज जाना: यह गंभीर प्रोटीन कुपोषण (क्वाशियोकोर) या अन्य पेट संबंधी समस्याओं का लक्षण है।
- उच्च रक्तचाप: यह हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्या है।
- निष्कर्ष: चूंकि आयरन की गंभीर कमी का एक क्लासिक नैदानिक लक्षण चम्मच के आकार के नाखून (Koilonychia) होना है, इसलिए सही विकल्प ‘नाखूनों का टूटना और चमचे जैसे आकार के हो जाना’ है।
#53. राइबोफ्लोविनहीनता किसकी कमी से होता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- राइबोफ्लेविन (Riboflavin) और विटामिन बी2:
- राइबोफ्लेविन रासायनिक रूप से विटामिन ‘बी 2’ (Vitamin B2) का ही नाम है।
- इसकी कमी से होने वाली स्थिति को ‘राइबोफ्लेविनहीनता’ (Ariboflavinosis) कहा जाता है, जिसके मुख्य लक्षणों में मुँह के कोनों पर दरारें आना (Angular cheilitis), जीभ में सूजन (Glossitis), और आँखों में जलन या सूजन शामिल हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- विटामिन बी1: इसका रासायनिक नाम थायमिन (Thiamine) है, जिसकी कमी से बेरी-बेरी रोग होता है।
- विटामिन सी: इसका रासायनिक नाम एस्कॉर्बिक एसिड है, जिसकी कमी से स्कर्वी होता है।
- विटामिन डी: इसकी कमी से रिकेट्स या ऑस्टियोमलेशिया होता है।
- निष्कर्ष: चूंकि ‘राइबोफ्लेविन’ सीधे तौर पर विटामिन बी2 का वैज्ञानिक नाम है, इसलिए सही विकल्प ‘विटामिन बी2’ है।
#54. रिकेट्स के लक्षणों में क्या सम्मिलित नहीं है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- रिकेट्स (Rickets) के प्रमुख लक्षण:
- यह मुख्य रूप से बच्चों में विटामिन डी, कैल्शियम या फॉस्फोरस की कमी के कारण होता है, जिससे हड्डियां कमजोर और नरम हो जाती हैं।
- इसके क्लासिक लक्षणों में टाँगों का धनुषाकार होना (बो लेग्ज़ – Bow legs), घुटनों का आपस में टकराना (नॉक नीज़ – Knock knees), और छाती की हड्डी का बाहर की ओर उभरना (पिजन चेस्ट – Pigeon chest) शामिल हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति (जो रिकेट्स में शामिल नहीं है):
- मसूड़ों में सूजन: यह मुख्य रूप से विटामिन ‘सी’ की कमी (स्कर्वी रोग) या खराब मौखिक स्वच्छता (Oral Hygiene) का लक्षण है, न कि रिकेट्स का।
- निष्कर्ष: चूंकि मसूड़ों में सूजन विटामिन सी की कमी से जुड़ी होती है और रिकेट्स की हड्डी संबंधी विकृतियों का हिस्सा नहीं है, इसलिए सही विकल्प ‘मसूड़ों में सूजन’ है।
#55. मिड डे मील योजना के अंतर्गत, …………. कक्षा तक के बच्चे सम्मिलित हैं?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- मिड डे मील योजना (PM Poshan Scheme) का दायरा:
- इस योजना के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गर्म पका हुआ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
- इसके अंतर्गत सरकारी, स्थानीय निकाय और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की **कक्षा I से VIII (कक्षा 1 से 8वीं)** तक के सभी बच्चे (लगभग 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के) शामिल होते हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- विकल्प ‘I से V’ केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित था, जबकि योजना का विस्तार उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 8वीं) तक किया जा चुका है।
- अन्य विकल्प (VI से X या IX से XII) इस योजना के निर्धारित शैक्षणिक दायरे से मेल नहीं खाते हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि मिड डे मील योजना पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाई जाती है, इसलिए सही विकल्प ‘I से VIII’ है।
#56. अतिरिक्त विटामिन ‘ए’ …………. में भंडारित होता है।DCE paper 2june26
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- विटामिन ‘ए’ का भंडारण (Storage of Vitamin A):
- विटामिन ‘ए’ (रेटिनॉल) एक वसा में घुलनशील विटामिन है।
- शरीर में जब इसकी मात्रा आवश्यकता से अधिक होती है, तो यह मुख्य रूप से यकृत यानी लीवर (Liver) में भंडारित (Store) हो जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर शरीर इसका उपयोग कर सके।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- किडनी, मांसपेशियों और हड्डियों में विटामिन ए का मुख्य भंडारण नहीं होता है। हालांकि हड्डियों और मांसपेशियों में अन्य पोषक तत्व जैसे कैल्शियम या ग्लाइकोजन आदि संचित होते हैं, लेकिन विटामिन ‘ए’ का प्राथमिक भंडार लीवर ही है।
- निष्कर्ष: चूंकि शरीर में अतिरिक्त विटामिन ‘ए’ यकृत (लीवर) में संचित होता है, इसलिए सही विकल्प ‘लीवर’ है।
#57. बच्चों में भैंगापन (Squint) का कारण, आँख के किस भाग की कमजोरी है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- भैंगापन (Squint / Strabismus) का कारण:
- भैंगापन वह स्थिति है जिसमें दोनों आँखें एक ही बिंदु पर केंद्रित नहीं होती हैं, बल्कि अलग-अलग दिशाओं में देखती हैं।
- यह समस्या मुख्य रूप से नेत्र गोलक (Eyeball) को नियंत्रित करने वाली बाहरी बाह्य नेत्र पेशियों (Extraocular Muscles / आँख की मांसपेशियों) में संतुलन की कमी या उनकी कमजोरी के कारण उत्पन्न होती है, जिससे आँखें ठीक से संरेखित (Aligned) नहीं रह पातीं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- कॉर्निया: यह प्रकाश को अपवर्तित करने का काम करता है।
- रेटिना: यह प्रकाश-संवेदनशील पर्दा है जो छवि (Image) बनाने में मदद करता है।
- कंजंक्टिवा: यह आँख की सुरक्षा करने वाली पतली झिल्ली है।
- निष्कर्ष: चूंकि आँखों की दिशा को नियंत्रित और संतुलित रखने का कार्य उनकी पेशियां करती हैं, इसलिए भैंगापन आँख की मांसपेशियों की कमजोरी या असंतुलन के कारण होता है।
#58. रेटिना की कोशिकाएँ किसके माध्यम से मस्तिष्क को संदेश भेजती हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- रेटिना से मस्तिष्क तक संदेश भेजना (Optic Nerve):
- आँख के पिछले हिस्से में मौजूद रेटिना (Retina) पर प्रकाश पड़ने से एक छवि (Image) बनती है, जिसे रेटिना की प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएं (रॉड और कोन) विद्युत संकेतों में बदलती हैं।
- इन संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाने का मुख्य कार्य ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve / नेत्र तंत्रिका) करती है, जिसके माध्यम से मस्तिष्क उन संकेतों को संसाधित करता है और हमें वस्तुएं दिखाई देती हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- आइरिस (परतारिका) और पुतली (Pupil): ये आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करते हैं।
- कॉर्निया: यह प्रकाश को अपवर्तित (Refract) करके आँख के अंदर प्रवेश कराने में मदद करता है।
- निष्कर्ष: चूंकि रेटिना पर बनने वाले दृश्य संदेशों को मस्तिष्क तक पहुँचाने वाली मुख्य तंत्रिका ऑप्टिक नर्व होती है, इसलिए सही विकल्प ‘नेत्र तंत्रिका (ऑप्टिक नर्व)’ है।
#59. त्वचा का एक संक्रमण है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- पित्ती (शीतपित्त / Urticaria):
- यह त्वचा पर होने वाली एक आम प्रतिक्रिया या संक्रमण/एलर्जी है, जिसमें त्वचा पर अचानक लाल, उभरे हुए चकत्ते (Welts) और तेज खुजली की समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह किसी संक्रमण, दवा, खाद्य पदार्थ या एलर्जी के कारण हो सकती है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- मुख के दोनों ओर के किनारों का फटना (Angular Cheilitis): यह मुख्य रूप से विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन) की कमी का लक्षण है।
- स्कर्वी (Scurvy): यह विटामिन ‘सी’ की कमी से होने वाला रोग है।
- पेलेग्रा (Pellagra): यह विटामिन बी3 (नियासिन) की कमी के कारण होता है।
- निष्कर्ष: चूंकि पित्ती (शीतपित्त) सीधे तौर पर त्वचा से जुड़ी संक्रमण या एलर्जी की स्थिति है, जबकि अन्य तीनों मुख्य रूप से विटामिनों की कमी से होने वाले विकार हैं, इसलिए सही विकल्प ‘पित्ती (शीतपित्त)’ है।
#60. ब्रूज (नील पड़ने) का कारण है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- ब्रूज या नील पड़ना (Bruise / Contusion):
- जब शरीर के किसी हिस्से पर कोई गहरी चोट या आघात (Impact) लगता है, तो त्वचा के ठीक नीचे स्थित छोटी रक्त वाहिकाएँ (Capillaries) फट जाती हैं।
- इन फटी हुई वाहिकाओं से खून रिसकर आसपास के ऊतकों (Tissues) में एकत्र हो जाता है, जिससे त्वचा का रंग नीला, बैंगनी या काला पड़ जाता है। इसे ही ‘ब्रूज’ या ‘नील पड़ना’ कहा जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- हड्डियों को चोट लगना: इससे फ्रैक्चर या अस्थि चोट होती है, जो नील पड़ने से अलग स्थिति है।
- विषाक्तता या कीड़े का काटना: इनके कारण सूजन या चकत्ते हो सकते हैं, लेकिन ‘ब्रूज’ का प्रत्यक्ष कारण रक्त वाहिकाओं के फटने से त्वचा के नीचे रक्त का जमा होना है।
- निष्कर्ष: चूंकि ब्रूज मुख्य रूप से त्वचा के नीचे रक्त वाहिकाओं से खून रिसकर एकत्र होने के कारण बनता है, इसलिए सही विकल्प ‘त्वचा में खून एकत्र होना’ है।
#61. यदि इसका इलाज ना हो तो इससे अँधापन हो सकता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कैरेटोमलेशिया (Keratomalacia):
- यह विटामिन ‘ए’ की घोर और गंभीर कमी के कारण होने वाली एक बहुत ही खतरनाक स्थिति है, जिसमें कॉर्निया (Cornea) मखमली या मुलायम होकर गलने लगता है (Corneal melting/softening)।
- यदि समय रहते इसका इलाज या उपचार न किया जाए, तो यह कॉर्निया के स्थायी विनाश और पूर्ण व अपूरणीय अंधेपन (Permanent Blindness) का कारण बन जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- कंजंक्टिवाइटिस: यह कंजंक्टिवा में होने वाला संक्रमण या सूजन है, जो सामान्य उपचार से ठीक हो जाता है।
- स्टाई (Billni/Stye): यह पलक की ग्रंथियों का एक आम संक्रमण है जो आमतौर पर खुद ठीक हो जाता है।
- कॉर्नियल अल्सर: यह भी गंभीर है, लेकिन विशेष रूप से विटामिन ए की कमी से उत्पन्न होने वाली और तेजी से कॉर्निया को गलाने वाली स्थिति ‘कैरेटोमलेशिया’ कहलाती है।
- निष्कर्ष: चूंकि विटामिन ‘ए’ की कमी से होने वाला कैरेटोमलेशिया कॉर्निया को पूरी तरह नष्ट कर सकता है और इलाज न मिलने पर अंधापन आ सकता है, इसलिए सही विकल्प ‘कैरेटोमलेशिया’ है।
अधिक जानकारी के लिए आप यह [4 Stages of Vitamin A Deficiency Explained](https://www.youtube.com/watch?v=iSEyZdwlQVs) वीडियो देख सकते हैं, जिसमें विटामिन ए की कमी और उससे जुड़े नेत्र विकारों के चरणों को समझाया गया है。
#62. बच्चे में हल्की/मध्यम रुग्णता (बीमारी) का एक सामान्य लक्षण है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- हल्की या मध्यम बीमारी के सामान्य लक्षण:
- जब बच्चा किसी हल्की या मध्यम बीमारी (जैसे वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम या पेट की असुविधा) से ग्रसित होता है, तो उसकी ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है।
- वह सुस्त (Lethargic) महसूस करता है, उसकी खेलकूद में रुचि घट जाती है और वह सामान्य रूप से अपने आस-पास के वातावरण, खिलौनों या लोगों में रुचि रखना बंद कर देता है या कम कर देता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- निरंतर खेलते रहना और अतिसक्रियता (Hyperactivity): ये स्वस्थ और ऊर्जावान बच्चे के लक्षण हैं, बीमारी के नहीं।
- भूख का बढ़ना: बीमारी के दौरान आमतौर पर बच्चों की भूख कम (अरुचि) हो जाती है, बढ़ती नहीं है।
- निष्कर्ष: चूंकि बीमारी की स्थिति में बच्चे की सक्रियता और आसपास के परिवेश के प्रति जिज्ञासा कम हो जाती है, इसलिए सही विकल्प ‘आस-पास के वातावरण में रुचि न रखना’ है।
#63. बच्चे की बीमारी के बारे में माँ से जानकारी प्राप्त करने का लक्ष्य है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- माता से जानकारी प्राप्त करने का उद्देश्य:
- चूंकि छोटे बच्चे अपनी बीमारी, लक्षणों या तकलीफों को खुद बोलकर पूरी तरह समझाने में असमर्थ होते हैं, इसलिए उनकी देखभाल करने वाली माँ (या प्राथमिक देखभालकर्ता) से विस्तृत जानकारी ली जाती है।
- इसका मुख्य लक्ष्य बच्चे के लक्षणों के उभरने का समय, उसकी गंभीरता और पिछले व्यवहार से जुड़े बदलावों का सही ब्योरा स्वास्थ्य कर्मियों या डॉक्टर को प्रदान करना होता है, ताकि सटीक निदान (Diagnosis) और उपचार किया जा सके।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- चिकित्सीय उपचार को बदलना या डॉक्टर को बुलाने से परहेज करना: ये गलत दृष्टिकोण हैं; जानकारी लेने का उद्देश्य डॉक्टर के काम में बाधा डालना या इलाज बदलना नहीं, बल्कि सही उपचार में मदद करना है।
- माता को शांत रखना: हालांकि संवाद से तसल्ली मिलती है, लेकिन नैदानिक रूप से इसका मुख्य उद्देश्य सही चिकित्सा इतिहास (History taking) जुटाना होता है।
- निष्कर्ष: चूंकि माँ से बच्चे की बीमारी की सही जानकारी लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को सटीक विवरण देना ही प्रभावी इलाज का आधार है, इसलिए सही विकल्प ‘स्वास्थ्य कर्मियों को सही ब्योरा प्रदान करना’ है।
#64. बच्चे में घोर बीमारी का सूचक है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- घोर या गंभीर बीमारी (Severe Illness) के सूचक:
- बच्चों में गंभीर संक्रमण, तंत्रिका तंत्र की समस्या (जैसे मैनिंजाइटिस या एन्सेफलाइटिस) या अत्यधिक तेज बुखार के कारण दौरे पड़ना (Convulsions / Seizures) एक बेहद खतरनाक और आपातकालीन लक्षण माना जाता है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बच्चे की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ चुकी है और उसे तुरंत चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- हल्की सी थकान, एक समय का भोजन न करना या कभी-कभी रोना: ये लक्षण हल्की-फुल्की असुविधा, मामूली सुस्ती या सामान्य दिनों की अस्थिरता (Minor illness/upset) को दर्शाते हैं, जिन्हें गंभीर या घोर बीमारी की श्रेणी में नहीं रखा जाता है।
- निष्कर्ष: चूंकि दौरे पड़ना बच्चों में तंत्रिका तंत्र की गंभीर गड़बड़ी या अत्यंत गंभीर बीमारी का प्रत्यक्ष और खतरनाक संकेत है, इसलिए सही विकल्प ‘दौरे पड़ना’ है।
#65. मध्यम निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन; शरीर में पानी की कमी) के लक्षणों में क्या सम्मिलित नहीं है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- मध्यम निर्जलीकरण (Moderate Dehydration) के लक्षण:
- शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे को बहुत अधिक और बार-बार प्यास लगती है, वह बेचैन या चिड़चिड़ा हो जाता है, और त्वचा की लोच (Skin turgor) कम होने लगती है (यानी त्वचा को खींचकर छोड़ने पर वह धीरे-धीरे अपनी सामान्य स्थिति में आती है)।
- अन्य विकल्पों की स्थिति (जो मध्यम डिहाइड्रेशन में शामिल नहीं है):
- सामान्य मात्रा में मूत्र आना: डिहाइड्रेशन (विशेषकर मध्यम से गंभीर) होने पर शरीर पानी को बचाने का प्रयास करता है, जिससे किडनी द्वारा मूत्र का उत्पादन बहुत कम हो जाता है या पेश आना बंद/अल्प हो जाता है (Oliguria)। इसलिए ‘सामान्य मात्रा में मूत्र आना’ डिहाइड्रेशन का नहीं, बल्कि सामान्य जलयोजन (Hydration) का लक्षण है।
- निष्कर्ष: चूंकि डिहाइड्रेशन होने पर पेशाब की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए ‘सामान्य मात्रा में मूत्र आना’ इसके लक्षणों में शामिल नहीं है।
#66. मल में खून किसका लक्षण है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- पेचिश (Dysentery):
- यह आंतों का एक गंभीर संक्रमण है, जिसके मुख्य लक्षणों में पेट में ऐंठन, बार-बार दस्त आना और मल में खून तथा बलगम (Mucus) का आना शामिल है। यह आमतौर पर जीवाणु (जैसे शिगेला) या परजीवियों के कारण होता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- अतिसार (सामान्य दस्त): इसमें पानी जैसे पतले दस्त बार-बार आते हैं, लेकिन सामान्य अतिसार में मल के साथ खून नहीं आता है।
- टायफॉयड और हैजा: ये भी पानी और भोजन से फैलने वाले गंभीर रोग हैं, लेकिन मल में खून आना विशेष रूप से ‘पेचिश’ का क्लासिक लक्षण है।
- निष्कर्ष: चूंकि मल के साथ खून आना पेचिश (Dysentery) की प्रमुख पहचान है, इसलिए सही विकल्प ‘पेचिश’ है।
#67. श्वसन संकट में साँस में घरघराहट की आवाज (Wheezing sound) मुख्य रूप से कब आती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- घरघराहट की आवाज (Wheezing) और इसका कारण:
- घरघराहट (Wheezing) एक प्रकार की सीटी जैसी आवाज होती है जो तब उत्पन्न होती है जब श्वास नग्निकाएं (Bronchioles) संकुचित या अवरुद्ध हो जाती हैं (जैसा कि दमा या अस्थमा, ब्रोन्कियोलाइटिस आदि में होता है)।
- चूंकि साँस बाहर छोड़ते समय (Exhalation / Expiration) वायुमार्ग प्राकृतिक रूप से थोड़ा और सिकुड़ जाता है, इसलिए संकुचित रास्तों से हवा बाहर निकलते समय यह घरघराहट की आवाज मुख्य रूप से साँस बाहर छोड़ते समय सबसे स्पष्ट रूप से सुनाई देती है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- खाना निगलते समय, बात करते समय या मूत्र करते समय: ये गतिविधियाँ श्वसन मार्ग के संकुचन या घरघराहट की इस विशिष्ट शारीरिक प्रक्रिया से संबंधित नहीं हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि घरघराहट की आवाज मुख्य रूप से श्वास छोड़ते समय वायुमार्ग के अवरुद्ध होने के कारण होती है, इसलिए सही विकल्प ‘साँस बाहर छोड़ते समय’ है।
#68. महिला को प्रसवपूर्व देखभाल (ए.एन.सी.) सेवाएँ, गर्भावस्था के समय …………. प्रदान की जानी चाहिए?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रसवपूर्व देखभाल (ANC Visits) के मानक:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक सामान्य गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को कम से कम चार प्रसवपूर्व जाँच (4 ANC Visits) अवश्य करवानी चाहिए।
- ये चार मुलाकातें गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में निर्धारित होती हैं: पहली जाँच गर्भावस्था का पता चलते ही (पहली तिमाही में), दूसरी (6-7 महीने पर), तीसरी (8वें महीने में), और चौथी (9वें महीने के दौरान)।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- केवल दो बार या केवल अंतिम त्रिमास की देखभाल पर्याप्त नहीं मानी जाती है, क्योंकि सुरक्षित मातृत्व और जच्चा-बच्चा की नियमित निगरानी के लिए कम से कम चार ANC मुलाकातों का होना अनिवार्य है।
- निष्कर्ष: चूंकि मानक स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों के तहत कम से कम चार बार प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएं देने की संस्तुति की जाती है, इसलिए सही विकल्प ‘कम से कम चार बार’ है।
#69. उँगलियों के बीच घाव या खुजली के दाने (विक्षत) दर्शाते हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- स्कैबीज़ (Scabies) और इसके लक्षण:
- स्कैबीज़ एक प्रकार का संक्रामक त्वचा रोग है जो सूक्ष्म घुन (Sarcoptes scabiei) के कारण होता है।
- इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसके दाने, चकत्ते और तीव्र खुजली मुख्य रूप से शरीर के उन हिस्सों पर होती है जहाँ त्वचा पतली होती है, जैसे कि उँगुलियों के बीच (Between the fingers), कलाई की सिलवटों, बगल और कमर के आसपास।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- एलर्जी: यह किसी बाहरी तत्व के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया है, लेकिन उँगलियों के बीच विशिष्ट रूप से सुरंगनुमा दाने होना स्कैबीज़ का क्लासिक लक्षण है।
- खसरा और मम्प्स: खसरा मुख्य रूप से पूरे शरीर पर लाल चकत्ते और बुखार का वायरल संक्रमण है, जबकि मम्प्स (गलसुत्वा) लार ग्रंथियों की सूजन से जुड़ा है।
- निष्कर्ष: चूंकि उँगलियों के बीच घाव और असहनीय खुजली होना स्कैबीज़ (खुजली का रोग) का मुख्य नैदानिक लक्षण है, इसलिए सही विकल्प ‘स्कैबीज़’ है।
#70. पूर्व-गर्भावस्था की अवस्था में, यदि किसी महिला का भार, 50-55 किग्रा हो तो, गर्भावस्था के दौरान लगभग कितना भार बढ़ना चाहिए ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना (Gestational Weight Gain):
- यदि गर्भावस्था से पहले महिला का वजन सामान्य श्रेणी में है (जैसे 50-55 किग्रा, जो भारतीय महिलाओं के लिए स्वस्थ बीएमआई के अंतर्गत आता है), तो चिकित्सक और पोषण विशेषज्ञ सामान्यतः कुल 10 से 12 किलोग्राम (या औसतन लगभग 11-16 किग्रा तक, बीएमआई के आधार पर) वजन बढ़ने को सामान्य और स्वस्थ मानते हैं।
- दिए गए विकल्पों में से 12 किग्रा इस स्वस्थ वजन वृद्धि के मानक दायरे के बिल्कुल करीब और सटीक बैठता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- 5 किग्रा या 8 किग्रा: यह वजन वृद्धि बहुत कम मानी जाती है, जिससे भ्रूण के विकास पर विपरीत प्रभाव (जैसे कम वजन का बच्चा) पड़ सकता है।
- 10 किग्रा: हालांकि यह भी स्वीकार्य सीमा के पास है, लेकिन मानक पोषण चार्ट के अनुसार सामान्य वजन वाली महिलाओं में यह वृद्धि लगभग 10-12 किग्रा या उससे अधिक (लगभग 11-16 किग्रा) तक अनुशंसित होती है, जिससे 12 किग्रा सबसे उपयुक्त विकल्प बनता है।
- निष्कर्ष: चूंकि पूर्व-गर्भावस्था के सामान्य भार वाली महिला के लिए गर्भावस्था के दौरान लगभग 12 किग्रा तक वजन बढ़ना शिशु और माता के स्वास्थ्य के लिए उचित माना जाता है, इसलिए सही विकल्प ’12 किग्रा’ है।
#71. किस उम्र के दौरान ऊपरी भुजा के मध्य भाग का घेरा, ज्यों का त्यों ही रहता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- ऊपरी भुजा के मध्य भाग का घेरा (MUAC – Mid-Upper Arm Circumference):
- शिशु अवस्था यानी जन्म से 1 वर्ष की उम्र तक बच्चे की शारीरिक संरचना और मांसपेशियों में तेजी से बदलाव होता है।
- इसके विपरीत, 1 वर्ष से लेकर 5 वर्ष की आयु तक बच्चों में ऊपरी भुजा के मध्य भाग (MUAC) का घेरा लगभग स्थिर रहता है या इसमें बहुत कम बदलाव होता है। यही कारण है कि कुपोषण (SAM/MAM) की जाँच के लिए 1 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए MUAC टेप का मानक उपयोग किया जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- जन्म से 5 वर्ष तक की अवधि में शुरुआती एक वर्ष में तेजी से वृद्धि होती है। वहीं 5 वर्ष के बाद बच्चों की हड्डियों और मांसपेशियों का विकास फिर से तेजी से होने लगता है, जिससे घेरे में बदलाव आता है।
- निष्कर्ष: चूंकि बच्चों में 1 वर्ष से 5 वर्ष की आयु के बीच ऊपरी भुजा के मध्य भाग का घेरा लगभग एक जैसा (ज्यों का त्यों) बना रहता है, इसलिए सही विकल्प ‘एक से पाँच वर्ष की आयु तक’ है।
#72. ऊपरी भुजा के मध्य भाग का घेरा यदि 11.5 सेमी. से कम हो तो यह दर्शाता है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- एम.यू.ए.सी. (MUAC) और कुपोषण के मानक:
- 12.5 सेमी से अधिक: सामान्य पोषण स्थिति को दर्शाता है।
- 11.5 सेमी से 12.5 सेमी के बीच: मध्यम कुपोषण (Moderate Acute Malnutrition – MAM) को दर्शाता है।
- 11.5 सेमी से कम (< 11.5 सेमी): यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार गंभीर कुपोषण (Severe Acute Malnutrition – SAM) का स्पष्ट और खतरनाक सूचक माना जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- सामान्य वृद्धि, हल्का कुपोषण या मध्यम कुपोषण के माप इससे अधिक मानों पर आधारित होते हैं। 11.5 सेमी से कम का माप सीधे तौर पर गंभीर कुपोषण (SAM) को इंगित करता है।
- निष्कर्ष: चूंकि ऊपरी भुजा के मध्य भाग का घेरा 11.5 सेमी से कम होने पर बच्चे में गंभीर कुपोषण की पुष्टि होती है, इसलिए सही विकल्प ‘गंभीर कुपोषण’ है।
#73. बिटोट बिंदु (स्पॉट) किसका सूचक है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- बिटोट बिंदु (Bitot’s Spots):
- बिटोट स्पॉट आँख के कंजंक्टिवा (Conjunctiva) पर बनने वाले सूखे, झागदार और सफेद त्रिकोणीय धब्बे होते हैं।
- यह लक्षण विशेष रूप से शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी (Vitamin A Deficiency) को दर्शाता है, जो अक्सर छोटे बच्चों में xerophthalmia (शुष्कक्षिपाक) की शुरुआती अवस्था का संकेत होता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- रिकेट्स: यह विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से होता है।
- क्वाशियोकोर: यह प्रोटीन की गंभीर कमी से होने वाला रोग है।
- आयोडीन की कमी: इससे घेंघा (Goitre) या मानसिक विकास में बाधा (क्रे)।
- निष्कर्ष: चूंकि बिटोट बिंदु विटामिन ‘ए’ की कमी का एक प्रमुख नैदानिक लक्षण है, इसलिए सही विकल्प ‘विटामिन ए की कमी’ है।
#74. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आर. एम. एन. सी. एच. + ए. का मुख्य लक्ष्य है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- आर.एम.एन.सी.एच. + ए (RMNCH+A – Reproductive, Maternal, Newborn, Child, Adolescent Health + Health):
- इस व्यापक रणनीतिक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक मातृ, नवजात, शिशु, बाल और किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है।
- इसका प्राथमिक और सर्वोपरि लक्ष्य मातृ मृत्यु दर (MMR), शिशु मृत्यु दर (IMR) तथा बाल मृत्यु दर (U5MR) में निरंतर और प्रभावी गिरावट लाना तथा स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार करना है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- आबादी में वृद्धि पर जोर देना इस कार्यक्रम का उद्देश्य नहीं है (बल्कि यह परिवार नियोजन और जनसंख्या स्थिरीकरण से जुड़ा है)।
- निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना या माँ की आमदनी बढ़ाना स्वास्थ्य मंत्रालय के इस विशेष चिकित्सीय एवं स्वास्थ्य मिशन के दायरे में नहीं आता।
- निष्कर्ष: चूंकि RMNCH+A का मुख्य फोकस स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से महिलाओं और बच्चों की मृत्यु दर को कम करना है, इसलिए सही विकल्प ‘महिलाओं और बच्चों की मृत्यु दर में गिरावट लाना’ है।
#75. आई. सी. डी. एस. कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को दिए जाने वाले पूरक आहार से, उन्हें प्राप्त होता है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- आई.सी.डी.एस. (ICDS) के तहत पूरक आहार के मानक:
- समेकित बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत 6 महीने से 6 वर्ष (72 महीने) तक के सामान्य बच्चों को दिए जाने वाले दैनिक पूरक आहार (Supplementary Nutrition) में ऊर्जा का मानक 500 किलोकैलोरी (500 Kcal) और प्रोटीन 12-15 ग्राम निर्धारित किया गया है।
- (नोट: गंभीर रूप से कुपोषित / SAM बच्चों के लिए यह मात्रा 800 किलोकैलोरी और 20-25 ग्राम प्रोटीन होती है, तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं के लिए 600 किलोकैलोरी होती है।)
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- 600 किलोकैलोरी गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए निर्धारित है। 700 या 800 किलोकैलोरी सामान्य बच्चों के मानक आहार में शामिल नहीं है (800 किलोकैलोरी केवल गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए है)।
- निष्कर्ष: चूंकि सामान्य बच्चों को ICDS कार्यक्रम के तहत मिलने वाले पूरक आहार से 500 किलोकैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, इसलिए सही विकल्प ‘500 किलोकैलोरी’ है।
#76. विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम जिसके अंतर्गत बच्चों को स्कूल में पूरक आहार दिया जाता है, वह है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme / PM-POSHAN):
- यह दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल फीडिंग कार्यक्रम है, जिसके तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को दोपहर का गर्म पका हुआ भोजन (पूरक आहार) प्रदान किया जाता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में पोषण स्तर में सुधार करना, स्कूल में बच्चों की उपस्थिति (Enrolment & Attendance) बढ़ाना और भूख के कारण पढ़ाई से ध्यान भटकने से रोकना है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- आई.सी.डी.एस. (ICDS): यह मुख्य रूप से 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित होता है, न कि सीधे तौर पर स्कूली बच्चों के लिए।
- आयरन प्लस प्रोग्राम: यह एनीमिया (खून की कमी) को रोकने के लिए आयरन और फोलिक एसिड की गोलियाँ देने से संबंधित है।
- निष्कर्ष: चूंकि स्कूली बच्चों को पूरक आहार देने वाला दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम ‘मध्याह्न भोजन योजना’ है, इसलिए सही विकल्प यही है।
#77. दमा, काली खाँसी और तपेदिक जैसे रोगों से मुख्य रूप से प्रभावित तंत्र है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रभावित तंत्र और रोग:
- दमा (Asthma): यह फेफड़ों और वायुमार्ग (Airways) की पुरानी बीमारी है, जिससे साँस लेने में कठिनाई होती है।
- काली खाँसी (Pertussis): यह एक अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण है जो श्वसन मार्ग और फेफड़ों को प्रभावित करता है।
- तपेदिक (Tuberculosis / TB): यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु के कारण होने वाला रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों (Lungs) पर हमला करता है।
- चूंकि ये तीनों ही रोग सीधे तौर पर नाक, श्वास नली और फेफड़ों से जुड़े हुए हैं, इसलिए ये श्वसन तंत्र (Respiratory System) को मुख्य रूप से प्रभावित करते हैं।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- परिसंचरण तंत्र: यह हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ा है।
- आहार तंत्र: यह पाचन क्रिया से संबंधित है।
- तंत्रिका तंत्र: यह मस्तिष्क और तंत्रिकाओं से जुड़ा है।
- निष्कर्ष: चूंकि दमा, काली खाँसी और टीबी श्वसन अंगों को प्रभावित करते हैं, इसलिए सही विकल्प ‘श्वसन तंत्र’ है।
#78. प्रसव के बाद के पहले माह में माँ द्वारा स्रावित दुग्ध की मात्रा होती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रसव के बाद दुग्ध स्राव (Breast Milk Production):
- प्रसव के तुरंत बाद शुरुआती दिनों में गाढ़ा पीला दूध (कोलेस्ट्रॉल / Colostrum) निकलता है, जिसकी मात्रा कम होती है।
- जैसे-जैसे हॉर्मोन्स (प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन) और शिशु की मांग बढ़ती है, प्रसव के बाद के पहले महीने के दौरान स्तनपान कराने वाली माता द्वारा प्रतिदिन स्रावित होने वाले दूध की औसत मात्रा लगभग 500 मिलीलीटर (0.5 लीटर) प्रति दिन तक पहुँच जाती है (जो आगे चलकर शिशु की आवश्यकतानुसार बढ़कर 700-800 मिलीलीटर या उससे अधिक भी हो सकती है)।
- मानक गृह विज्ञान एवं पोषण पाठ्यक्रमों (Home Science / Nutrition exams) के अनुसार प्रसव के पहले माह में दूध की औसत मात्रा 500 मिलीलीटर मानी जाती है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- 200 मिलीलीटर मात्रा बहुत कम है (यह शुरुआती एक-दो दिनों की हो सकती है)। 700 मिलीलीटर या 1 लीटर की मात्रा आमतौर पर पूर्ण स्तनपान के चरम चरण (जैसे 3 से 6 महीने के बीच जब बच्चा बड़ा होता है) में उत्पादित होती है।
- निष्कर्ष: चूंकि प्रसव के बाद के पहले माह में औसत दुग्ध उत्पादन लगभग 500 मिलीलीटर होता है, इसलिए सही विकल्प ‘500 मिलीलीटर’ है।
#79. सेप्टीसेमिया होता है जब?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- सेप्टीसेमिया (Septicemia):
- इसे रक्त विषाक्तता (Blood poisoning) भी कहा जाता है। यह एक अत्यंत गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब शरीर के किसी हिस्से (जैसे त्वचा, फेफड़े या मूत्र मार्ग आदि) का कोई स्थानीय जीवाणु या संक्रमण फैलकर सीधे रक्त प्रवाह (Bloodstream) में प्रवेश कर जाता है और पूरे शरीर में फैलने लगता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- संदूषित आहार का सेवन करने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण (जैसे दस्त या पेचिश) हो सकता है।
- हड्डी टूटने से फ्रैक्चर होता है और सर्दी-जुकाम श्वसन तंत्र का सामान्य वायरल संक्रमण है, जो सेप्टीसेमिया नहीं है।
- निष्कर्ष: चूंकि सेप्टीसेमिया मुख्य रूप से तब होता है जब त्वचा या किसी अन्य अंग का संक्रमण रक्त प्रवाह में फैल जाता है, इसलिए सही विकल्प ‘त्वचा से संक्रमण रक्त प्रवाह में प्रवेश करता हो’ है।
#80. 6 से 10 माह के शिशु के आहार में, फल और सब्जियों का छिलका उतारना आवश्यक होता है क्योंकि?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- छिलका उतारने का कारण:
- 6 से 10 महीने के शिशु का पाचन तंत्र (Digestive System) अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता है।
- फल और सब्जियों के छिलकों में अघुलनशील डाइटरी फाइबर (Dietary Fiber / रेशा) प्रचुर मात्रा में होता है, जिसे इस उम्र के शिशु की कोमल आंतें और पाचन तंत्र आसानी से पचा नहीं पाते हैं। इससे पेट में भारीपन, गैस या अपच हो सकती है। इसलिए छिलका उतारकर और मेश करके आहार देना सुरक्षित माना जाता है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- जीवाणु संक्रमण से बचने के लिए छिलका उतारना नहीं बल्कि फलों-सब्जियों को अच्छी तरह धोना और उबालना आवश्यक होता है। छिलका आकर्षक न लगना या साफ करने में कठिनाई होना इसका मुख्य चिकित्सीय या पोषण संबंधी कारण नहीं है।
- निष्कर्ष: चूंकि छोटे शिशुओं का पाचन तंत्र रेशे (Fiber) को आसानी से पचाने में असमर्थ होता है, इसलिए फल और सब्जियों का छिलका उतारना आवश्यक माना गया है।
#81. एग़्जिमा के चकते?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- एग़्जिमा के चकत्ते और उनकी प्रकृति:
- एग़्जिमा एक सूजन संबंधी त्वचा विकार है, जिसमें आमतौर पर चकत्ते, लालिमा, सूखापन और तीव्र खुजली की समस्या होती है।
- चिकित्सीय रूप से, एग़्जिमा या एटोपिक डर्मेटाइटिस के चकत्ते शरीर की समरूपता (Symmetry) को दर्शाते हैं; यानी यह आमतौर पर शरीर के दोनों तरफ एक समान (Symmetrical distribution) रूप से उभरते हैं (जैसे दोनों हाथों की कोहनी के अंदरूनी हिस्सों पर, दोनों घुटनों के पीछे, या दोनों गालों पर)।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- कुछ विशेष त्वचा रोग (जैसे हर्पीस जोस्टर या कुछ प्रकार के संक्रमण) शरीर के केवल एक तरफ (एकतरफा/Unilateral) होते हैं, लेकिन क्लासिक एग़्जिमा द्विपक्षी (Bilateral) और सममित रूप से दोनों तरफ एक समान दिखाई देता है।
- निष्कर्ष: चूंकि एग़्जिमा के चकत्ते आमतौर पर शरीर के दोनों तरफ सममित रूप से एक समान उभरते हैं, इसलिए सही विकल्प ‘शरीर के दोनों तरफ एक समान उभरते हैं’ है।
#82. बच्चे में प्रति मिनट 40 से अधिक श्वास लेने की श्वसन दर दर्शाती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- बच्चों में श्वसन दर के मानक (WHO Guidelines):
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आईएमआईसीआई (IMNCI) दिशा-निर्देशों के अनुसार, अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों में तीव्र श्वसन (Tachypnea / Rapid Breathing) की सीमा तय होती है:
- 2 महीने से 12 महीने तक के शिशु में: प्रति मिनट 50 या उससे अधिक साँसें लेना।
- 1 वर्ष से 5 वर्ष तक के बच्चे में: प्रति मिनट 40 या उससे अधिक साँसें लेना।
- अतः 40 से अधिक श्वास प्रति मिनट होना विशेष रूप से छोटे बच्चों में तीव्र श्वसन क्रिया (Tachypnea / Rapid Breathing) को दर्शाता है, जो अक्सर श्वसन नली के संक्रमण (जैसे निमोनिया) का शुरुआती संकेत होता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आईएमआईसीआई (IMNCI) दिशा-निर्देशों के अनुसार, अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों में तीव्र श्वसन (Tachypnea / Rapid Breathing) की सीमा तय होती है:
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- सामान्य श्वसन क्रिया: सामान्य अवस्था में आराम कर रहे बच्चे की श्वसन दर इससे कम होती है (जैसे 1-5 वर्ष के बच्चों में सामान्यतः 30-40 प्रति मिनट से कम)।
- मंद श्वसन क्रिया (Bradypnea): इसका अर्थ धीमी साँसें लेना है।
- श्वसन संकट (Respiratory Distress): इसमें पसलियों का धंसना, नाक का फूलना जैसे गंभीर लक्षण शामिल होते हैं; जबकि केवल 40 से अधिक साँसें होना ‘तीव्र श्वसन क्रिया’ (Tachypnea) की श्रेणी में आता है।
- निष्कर्ष: चूंकि बच्चों में प्रति मिनट 40 से अधिक श्वास लेना तेज या तीव्र गति से साँস लेने की स्थिति को स्पष्ट करता है, इसलिए सही विकल्प ‘तीव्र श्वसन क्रिया’ है।
#83. आहार में लौह तत्वों के स्रोत हैं :(A) हरी पत्तेदार सब्जियाँ(B) गुड़(C) मांस(D) दूधसही उत्तर का चयन कीजिए?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- लौह तत्वों (Iron) के स्रोत:
- (A) हरी पत्तेदार सब्जियाँ: पालक, बथुआ, मेथी आदि आयरन के बेहतरीन शाकाहारी स्रोत हैं।
- (B) गुड़: गुड़ में भी प्राकृतिक रूप से आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है (विशेषकर लोहे के बर्तनों में पकाने पर)।
- (C) मांस: कलेजी, रेड मीट और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों में ‘हेम आयरन’ (Heme Iron) पाया जाता है, जो शरीर में सबसे आसानी से अवशोषित होता है।
- दूध (D) की स्थिति:
- दूध कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन का बहुत अच्छा स्रोत है, लेकिन इसमें लौह तत्व (Iron) की मात्रा नगण्य होती है। यहाँ तक कि केवल दूध पर पलने वाले शिशुओं में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया (Milk anemia) भी हो सकता है। इसलिए दूध लौह तत्व का स्रोत नहीं है।
- निष्कर्ष: चूंकि हरी पत्तेदार सब्जियाँ (A), गुड़ (B), और मांस (C) आयरन के अच्छे स्रोत हैं जबकि दूध (D) नहीं है, इसलिए सही विकल्प ‘केवल (A), (B) और (C)’ है।
(A) विटामिन ‘ए’
(B) विटामिन ‘सी’
(C) विटामिन ‘ई’
(D) विटामिन
#84. दालों को अंकुरित करने से, इनमें विटामिन …………. की मात्रा बढ़ जाती है‘? नीचे दिए गए विकल्पों से सही उत्तर का चयन कीजिए ।
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- अंकुरण का प्रभाव (Sprouting Benefits):
- विटामिन ‘सी’ (Vitamin C): सूखी दालों या अनाजों में विटामिन सी की मात्रा नगण्य या बहुत कम होती है, लेकिन जब उन्हें अंकुरित किया जाता है (जैसे मूंग या चना), तो बायो-केमिकल प्रतिक्रियाओं के कारण उनमें विटामिन सी का स्तर नाटकीय रूप से बहुत अधिक बढ़ जाता है।
- विटामिन ‘बी’ (Vitamin B – B Complex): अंकुरण की प्रक्रिया के दौरान बी-कॉम्प्लेक्स समूह के विटामिन (विशेषकर थियामिन $B_1$, राइबोफ्लेविन $B_2$, और नियासिन $B_3$) की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति:
- अंकुरण से मुख्य रूप से पानी में घुलनशील विटामिन (B और C) तथा पाचक एंजाइमों में वृद्धि होती है, और एंटी-न्यूट्रिएंट्स (जैसे फाइटेट्स) कम होते हैं। विटामिन ‘ए’ और ‘ई’ का मुख्य संबंध अंकुरण से नहीं है।
- निष्कर्ष: चूंकि दालों और अनाजों को अंकुरित करने पर उनमें मुख्य रूप से विटामिन ‘सी’ और विटामिन ‘बी’ की मात्रा में वृद्धि होती है, इसलिए सही विकल्प ‘केवल (B) और (D)’ है।
(A) तेज बुखार के साथ दौरे पड़ना
(B) बच्चे के शरीर में तरल का निकास होना
(C) कुपोषण और बुखार से ग्रस्त बच्चा
(D) बिना किसी ज्ञात कारण के बच्चे को 2 से अधिक दिन तक बुखार होनाविकल्प
#85. निम्नलिखित में से किस मामले में, डॉक्टर को दिखाना आवश्यक है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- (A) तेज बुखार के साथ दौरे पड़ना: यह बच्चों में एक अत्यंत गंभीर और आपातकालीन स्थिति है (तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी या तीव्र संक्रमण का संकेत), जिसके लिए तुरंत डॉक्टर के पास जाना आवश्यक है।
- (B) बच्चे के शरीर में तरल का निकास होना: अत्यधिक दस्त, उल्टी या डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में तरल की गंभीर कमी या अस्वाभाविक रिसाव खतरनाक हो सकता है।
- (C) कुपोषण और बुखार से ग्रस्त बच्चा: कुपोषित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बहुत कम होती है, और उनके लिए बुखार जैसी सामान्य स्थिति भी जानलेवा बन सकती है, अतः चिकित्सक की देखरेख अनिवार्य है।
- (D) बिना किसी ज्ञात कारण के बच्चे को 2 से अधिक दिन तक बुखार होना: यदि बुखार सामान्य दवाओं से ठीक न हो और 48 घंटे (2 दिन) से अधिक समय तक बना रहे, तो किसी अंदरूनी संक्रमण की आशंका के कारण डॉक्टर को दिखाना आवश्यक होता है।
(A) राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल
(B) राष्ट्रीय विटामिन ए प्रोफिलैक्सिस कार्यक्रम
(C) समेकित (एकीकृत) बाल विकास सेवाएँ कार्यक्रम
(D) मध्याह्न भोजन योजनाविकल्प
#86. निम्नलिखित में से कौन-से पूरक आहार कार्यक्रम हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- पूरक आहार कार्यक्रम (Supplementary Feeding Programmes):
- (C) समेकित (एकीकृत) बाल विकास सेवाएँ कार्यक्रम (ICDS): यह छोटे बच्चों (0-6 वर्ष), गर्भवती और धात्री माताओं को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से नियमित रूप से पूरक आहार (भोजन/ऊर्जा) प्रदान करने वाला मुख्य कार्यक्रम है।
- (D) मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme / PM-POSHAN): यह स्कूली बच्चों को स्कूल में दोपहर का पका हुआ पूरक आहार प्रदान करने वाला विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम है।
- अन्य विकल्पों की स्थिति (सूक्ष्म पोषक तत्व / प्रोफिलैक्सिस कार्यक्रम):
- (A) राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल और (B) राष्ट्रीय विटामिन ए प्रोफिलैक्सिस कार्यक्रम: ये दोनों कार्यक्रम विशिष्ट सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे आयरन-फोलिक एसिड की गोलियाँ और विटामिन ‘ए’ की खुराक) के अनुपूरण (Supplementation) और रोकथाम से संबंधित हैं, न कि सीधे तौर पर दैनिक ‘पूरक आहार’ (भोजन वितरण) कार्यक्रम के अंतर्गत आते हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि ICDS और मध्याह्न भोजन योजना सीधे तौर पर भोजन या पोषण आहार उपलब्ध कराने वाले प्रमुख ‘पूरक आहार कार्यक्रम’ हैं, इसलिए सही विकल्प ‘केवल (C) और (D)’ है।
कथन A : विटामिन ‘ए’ रतौंधी (रात्रि में अंधापन) से बचाता है।
कथन B : विटामिन ‘ए’ केवल विटामिन ‘ए’ की कमी के लक्षण दर्शाने वाले बच्चों को ही दिया जाता है।
#87. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (सही): विटामिन ‘ए’ की कमी से आँखों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, और इसका सबसे पहला व प्रमुख लक्षण रतौंधी (Night Blindness) है। पर्याप्त मात्रा में विटामिन ‘ए’ का सेवन बच्चों और वयסकों को इस दृष्टि दोष से बचाता है। इसलिए कथन A बिल्कुल सही है।
- कथन B का विश्लेषण (गलत): राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों (जैसे राष्ट्रीय विटामिन ए प्रोफिलैक्सिस कार्यक्रम) के तहत विटामिन ‘ए’ की खुराक केवल उन बच्चों को नहीं दी जाती जिनमें कमी के लक्षण दिखाई दें, बल्कि इसे 9 महीने से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को एक निवारक (Prophylactic) उपाय के तौर पर नियमित अंतराल पर दिया जाता है ताकि वे विटामिन ‘ए’ की कमी और उससे होने वाले नेत्र रोगों से सुरक्षित रहें। अतः कथन B गलत है।
कथन A : हमारे शरीर में रेशा (फाइबर) कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता है।
कथन B : फाइबर हमारे शरीर में रासायनिक रूप से भी पच नहीं सकता अर्थात् बिना पचे मल से बाहर निकल जाता है।
#88. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (गलत): फाइबर (रेशा) हमारे शरीर में ऊर्जा भले ही प्रदान न करता हो, लेकिन यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने, कब्ज से बचाने, मल त्याग को नियमित करने और आंतों की बीमारियों के खतरे को कम करने में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए कथन A गलत है।
- कथन B का विश्लेषण (सही): आहार में मौजूद डाइटरी फाइबर मानव शरीर के पाचक एंजाइमों द्वारा रासायनिक रूप से पच नहीं पाता है। यह अपरिवर्तित रूप से पाचन नली से गुजरता है और मल के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है। यही अघुलनशील प्रकृति मल को आयतन प्रदान करती है, जिससे पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है। अतः कथन B बिल्कुल सही है।
कथन A : पूरक आहार कार्यक्रम, भोजन की दैनिक मात्रा में ऊर्जा और प्रोटीन की कमी को पूरा करने पर लक्षित हैं।
कथन B : पूरक आहार कार्यक्रम के अन्तर्गत पौष्टिक पदार्थ खरीदने की दृष्टि से लोगों को पैसे दिए जाते हैं।
#89. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (सही): पूरक आहार कार्यक्रम (जैसे ICDS या मिड-डे मील) का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य लक्षित समूहों के नियमित आहार में होने वाली ऊर्जा (Calories) और प्रोटीन की कमी को पूरा करना है, ताकि कुपोषण से बचा जा सके। इसलिए कथन A बिल्कुल सही है।
- कथन B का विश्लेषण (गलत): पूरक आहार कार्यक्रमों के अंतर्गत लाभार्थियों को पौष्टिक पदार्थ खरीदने के लिए सीधे नकद पैसे (Cash transfer) नहीं दिए जाते हैं, बल्कि इसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों या स्कूलों के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से पका हुआ भोजन, टेक-होम राशन (Take-Home Ration) या खाद्य सामग्री वितरित की जाती है। अतः कथन B गलत है।
कथन A : बुखार से ग्रस्त बच्चों को सामान्य मात्रा में आहार नहीं दिया जाना चाहिए।
कथन B : बुखार से ग्रस्त शिशुओं को स्तनपान कराना निरंतर जारी रखना चाहिए।
#90. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (गलत): बुखार के दौरान बच्चों का मेटाबॉलिज्म (उपापचय) बढ़ जाता है और शरीर को अधिक ऊर्जा व पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसलिए बुखार से ग्रस्त बच्चों को सामान्य या उनकी आवश्यकतानुसार पौष्टिक आहार देना बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि छोटे-छोटे अंतराल पर आसानी से पचने वाला तरल और नरम आहार देना जारी रखना चाहिए। अतः कथन A गलत है।
- कथन B का विश्लेषण (सही): बुखार या किसी भी बीमारी से ग्रस्त शिशुओं के लिए माँ का दूध सबसे उत्तम और सुरक्षित आहार है। स्तनपान कराने से शिशु को न केवल पोषण मिलता है बल्कि डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से भी बचाव होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसलिए बुखार की स्थिति में भी स्तनपान निरंतर जारी रखना चाहिए। अतः कथन B बिल्कुल सही है।
कथन A : अंकुश कृमि (हुकवर्म) के कारण शरीर में खून की कमी होती है।
कथन B : अंकुश कृमि आंत की दीवार से खून चूसते हैं।
#91. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (सही): अंकुश कृमि (Hookworm) संक्रमण का सबसे प्रमुख परिणाम शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी यानी एनीमिया (खून की कमी) होना है। इसलिए कथन A बिल्कुल सही है।
- कथन B का विश्लेषण (सही): हुकवर्म छोटी आंत की दीवार से चिपक जाते हैं और वहाँ से सीधे रक्त चूसते हैं, जिसके कारण लगातार आंतरिक रक्तस्राव होता है और शरीर में खून व आयरन की भारी कमी हो जाती है। इसलिए कथन B भी बिल्कुल सही है।
कथन A : बच्चों के साथ दुर्घटनाएँ होनी ही हैं और इन दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा सकता।
कथन B : बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं और अपने आस-पास के परिवेश की छानबीन करते रहते हैं।
#92. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (गलत): यह धारणा पूरी तरह से गलत है कि बच्चों के साथ दुर्घटनाएँ होना अनिवार्य है और उन्हें रोका नहीं जा सकता। उचित देखरेख, सुरक्षात्मक उपायों (Childproofing) और बड़ों की सतर्कता से बच्चों के साथ होने वाली अधिकांश दुर्घटनाओं को आसानी से टाला जा सकता है। इसलिए कथन A गलत है।
- कथन B का विश्लेषण (सही): छोटे बच्चे स्वभाव से बहुत जिज्ञासु (Curious) होते हैं। वे अपने आसपास के परिवेश, वस्तुओं और खिलौनों को छूकर, मुंह में रखकर या खोजबीन करके सीखने का प्रयास करते हैं, जिसके कारण कई बार वे अनजाने में जोखिम भरी स्थिति में पहुँच जाते हैं। अतः कथन B बिल्कुल सही है।
कथन A : आयोडीन की कमी से बचाव के लिए नमक को आयोडीनयुक्त बनाया जा सकता है।
कथन B : नमक में आयोडीन मिलाने से इसका स्वाद और रंग बदल जाता है।
#93. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (सही): शरीर में आयोडीन की कमी (जैसे घेंघा या गॉइटर) से बचाव के लिए आम खाने वाले नमक में पोटेशियम आयोडेट या पोटेशियम आयोडाइड मिलाया जाता है (जिसे आयोडीनयुक्त नमक कहा जाता है)। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर आयोडीन की कमी को दूर करने का सबसे प्रभावी और स्वीकृत तरीका है। इसलिए कथन A बिल्कुल सही है।
- कथन B का विश्लेषण (गलत): नमक में वैज्ञानिक और निर्धारित मात्रा में आयोडीन मिलाने से उसके प्राकृतिक स्वाद (Taste), रंग (Color) या गंध में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं आता है। नमक पूरी तरह से सामान्य बना रहता है। अतः कथन B गलत है।
कथन A : टायफॉइड, श्वसन तंत्र का एक रोग है।
कथन B : आहार तंत्र की अधिकांश बीमारियों की कीटाणुरहित स्वच्छ जल, स्वच्छ भोजन और स्वच्छता के रखरखाव से रोकथाम की जा सकती है।
#94. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (गलत): टायफॉइड (Typhoid) श्वसन तंत्र का नहीं, बल्कि आंतों (Intestine) का एक संक्रामक रोग है। यह साल्मोनेला टायफी (Salmonella typhi) नामक जीवाणु के कारण होता है और मुख्य रूप से दूषित जल तथा भोजन से फैलता है। इसलिए कथन A गलत है।
- कथन B का विश्लेषण (सही): दस्त, हैजा, टायफॉइड जैसी आहार तंत्र (Digestive system) से जुड़ी अधिकांश बीमारियों की रोकथाम कीटाणुरहित स्वच्छ जल, स्वच्छ भोजन और व्यक्तिगत व पर्यावरणीय स्वच्छता के रखरखाव से आसानी से की जा सकती है। इसलिए कथन B बिल्कुल सही है।
कथन A : भोजन में रेशे की अपर्याप्त मात्रा के कारण शरीर में कब्ज़ की समस्या उत्पन्न होती है।
कथन B : दूध, मांस और चॉकलेट में रेशे की उच्च मात्रा पाई जाती है।
#95. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (सही): भोजन में आहार फाइबर या रेशे (Dietary Fiber / Roughage) की अपर्याप्त मात्रा होने पर पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता है, जिससे मलत्याग में कठिनाई होती है और शरीर में कब्ज (Constipation) की समस्या उत्पन्न होती है। इसलिए कथन A बिल्कुल सही है।
- कथन B का विश्लेषण (गलत): रेशे (Fiber) मुख्य रूप से पादप आधारित खाद्य पदार्थों (जैसे साबुत अनाज, दालें, फल और कच्ची सब्जियां) में पाए जाते हैं। इसके विपरीत दूध, मांस और चॉकलेट जैसे जंतु जनित या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में रेशे नहीं (या नगण्य मात्रा में) पाए जाते हैं। इसलिए कथन B गलत है।
कथन A : यदि कोई गर्भवती महिला विशेष रूप से पहले त्रिमास में रुबेला से संक्रमित हो तो इससे गर्भस्थ शिशु के असामान्य विकास की संभावना हो सकती है।
कथन B : गर्भवती महिला को रुबेला से बचाव की वैक्सीन दी जा सकती है
#96. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (सही): यदि कोई गर्भवती महिला विशेष रूप से गर्भावस्था के पहले त्रिमास (First Trimester) में रुबेला (Rubella) वायरस से संक्रमित हो जाती है, तो यह गर्भस्थ शिशु तक पहुंचकर उसके विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे जन्मजात विकलांगता या असामान्य विकास की संभावना काफी बढ़ जाती है (जिसे जन्मजात रुबेला सिंड्रोम कहा जाता है)। इसलिए कथन A बिल्कुल सही है।
- कथन B का विश्लेषण (गलत): रुबेला का टीका (जैसे MMR वैक्सीन) एक जीवित क्षीणकृत (live-attenuated) वैक्सीन है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी लाइव वैक्सीन को देने की अनुमति नहीं होती है क्योंकि यह भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान रुबेला की वैक्सीन नहीं दी जा सकती (यह गर्भावस्था से पहले या प्रसव के बाद दी जाती है)। इसलिए कथन B गलत है।
कथन A : प्रस्तावित दैनिक मात्रा (आर. डी. ए.) पोषक तत्वों की न्यूनतम आवश्यकता को व्यक्त करता है।
कथन B : आर. डी. ए. में न्यूनतम मात्रा से अधिक और अतिरिक्त पोषक तत्वों की मात्रा (सुरक्षा मार्जिन) सम्मिलित हैं।
#97. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (गलत): आर.डी.ए. (RDA) केवल पोषक तत्वों की ‘न्यूनतम आवश्यकता’ को व्यक्त नहीं करता है, क्योंकि न्यूनतम आवश्यकता पूरी होने पर भी शरीर में कुछ लोगों की व्यक्तिगत भिन्नताओं या आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए कथन A गलत है।
- कथन B का विश्लेषण (सही): आर.डी.ए. (RDA) में अधिकांश स्वस्थ व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए न्यूनतम आवश्यकता से अधिक मात्रा यानी ‘सुरक्षा मार्जिन’ (Margin of Safety) को शामिल किया जाता है, ताकि जनसंख्या के लगभग सभी स्वस्थ लोगों की पोषक तत्वों की मांग सुरक्षित रूप से पूरी हो सके। इसलिए कथन B बिल्कुल सही है।
कथन A : एक गर्भवती किशोरी की पोषणीय आवश्यकताएँ, एक वयस्क गर्भवती महिला से अधिक होती हैं।
कथन B : एक किशोरी को गर्भावस्था के कारण बढ़ती हुई पोषणीय आवश्यकताओं के साथ अपनी शारीरिक वृद्धि के लिए भी अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है।
#98. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथन A का विश्लेषण (सही): एक गर्भवती किशोरी का शरीर अभी खुद भी विकास की अवस्था (Growth phase) में होता है, इसलिए उसकी पोषणीय आवश्यकताएँ एक वयस्क गर्भवती महिला की तुलना में अधिक होती हैं। इसलिए कथन A बिल्कुल सही है।
- कथन B का विश्लेषण (सही): एक किशोरी को गर्भस्थ शिशु के पोषण और गर्भावस्था के कारण बढ़ने वाली आवश्यकताओं के साथ-साथ अपने स्वयं के शरीर की रुकी हुई या जारी शारीरिक वृद्धि (Physical growth) के लिए भी अतिरिक्त पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसलिए कथन B बिल्कुल सही है।
(A) कसकर पट्टी बाँधना
(B) एंटीसेप्टिक क्रीम लगाना
(C) कीटाणुरहित जल से साफ करना
(D) टौरनिकेत लगाएँ, यदि घाव गहरा हो या रक्तस्राव अधिक हो।सही विकल्प का चयन कीजिए :
#99. शरीर पर घाव होने/कट पड़ने की स्थिति में प्राथमिक सहायता के चरणों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- चरण 1 – (D) टौरनिकेत लगाएँ: यदि घाव बहुत गहरा है या रक्तस्राव अत्यधिक हो रहा है, तो जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सबसे पहले रक्त के अत्यधिक बहाव को रोकने के लिए टौरनिकेत (Tourniquet) या दबाव डालना जरूरी होता है।
- चरण 2 – (C) कीटाणुरहित जल से साफ करना: रक्तस्राव को नियंत्रित करने या कम करने के बाद, संक्रमण से बचाने के लिए घाव को कीटाणुरहित या स्वच्छ पानी से धोकर साफ किया जाता है।
- चरण 3 – (B) एंटीसेप्टिक क्रीम लगाना: घाव की सफाई के बाद उस पर रोगाणुरोधी या एंटीसेप्टिक क्रीम लगाई जाती है ताकि बैक्टीरिया या कीटाणु पनप न सकें।
- चरण 4 – (A) कसकर पट्टी बाँधना: अंत में, घाव को सुरक्षित रखने और पूरी तरह ढकने के लिए उस पर कसकर पट्टी बाँध दी जाती है।
#100. सूची-I और सूची-II का मिलान कीजिए :सूची-I (पोषक तत्वों से भरपूर आहार) सूची-II (उदाहरण)(A) कैल्सियम से भरपूर खाद्य पदार्थ (I) वसा और तेल(B) आयरन (लौह तत्व) से भरपूर खाद्य पदार्थ (II) दुग्ध उत्पाद(C) ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थ (III) अंडे(D) प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ (IV) हरी पत्तेदार सब्जियाँनीचे दिए गए विकल्पों से सही उत्तर का चयन कीजिए?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- (A) कैल्सियम से भरपूर खाद्य पदार्थ -> (II) दुग्ध उत्पाद: दूध, दही, पनीर जैसे दुग्ध उत्पाद कैल्सियम के मुख्य और सबसे अच्छे स्रोत माने जाते हैं जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं।
- (B) आयरन (लौह तत्व) से भरपूर खाद्य पदार्थ -> (IV) हरी पत्तेदार सब्जियाँ: पालक, मेथी, बथुआ जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो खून में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आवश्यक है।
- (C) ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थ -> (I) वसा और तेल: वसा (Fats) और तेल शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले सबसे सघन (Concentrated) स्रोत होते हैं।
- (D) प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ -> (III) अंडे: अंडे, मांस, मछली और दालें शरीर की वृद्धि और मरम्मत के लिए प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं।


