Atomic Structure MCQ in Hindi
#1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक उपपरमाणविक कण नहीं है?
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 1)
- अणु (Molecule): अणु किसी तत्व या यौगिक का वह सूक्ष्मतम कण है जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है और जिसमें उस पदार्थ के सभी गुण विद्यमान होते हैं। यह दो या दो से अधिक परमाणुओं के रासायनिक संयोजन से बनता है, न कि कोई उप-परमाणविक कण।
- उपपरमाणविक कण (Subatomic Particles): वे कण जो परमाणु के अंदर पाए जाते हैं या जिनसे मिलकर परमाणु का निर्माण होता है, उन्हें उप-परमाणविक कण कहा जाता है; जैसे—इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन।
- अतः ‘अणु’ एक उपपरमाणविक कण की श्रेणी में नहीं आता है।
- इलेक्ट्रॉन: यह परमाणु के नाभिक के बाहर चक्कर लगाने वाला ऋण आवेशित मूलभूत उप-परमाणविक कण है (खोज: जे. जे. थॉमसन)।
- प्रोटॉन: यह परमाणु के नाभिक के अंदर पाया जाने वाला धनावेशित उप-परमाणविक कण है।
- न्यूट्रॉन: यह परमाणु के नाभिक के अंदर पाया जाने वाला आवेशहीन (उदासीन) उप-परमाणविक कण है (खोज: जेम्स चैडविक)।
#2. STP पर, 5.6 L O 2 गैस में उपस्थित अणुओं की संख्या है:
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 19 Jun, 2025 Shift 3)
- मोल अवधारणा (Mole Concept): मानक तापमान और दाब (STP) पर किसी भी आदर्श गैस के 1 मोल का आयतन **$22.4\text{ लीटर}$** होता है, और इसमें उपस्थित अणुओं की कुल संख्या एवागाद्रो संख्या ($N_A = 6.022 \times 10^{23}$) के बराबर होती है।
- चरण-दर-चरण गणना:
1. गैस के मोलों की संख्या ($n$) = $\frac{\text{दिया गया आयतन}}{\text{STP पर molar volume}}$
$$n = \frac{5.6\text{ L}}{22.4\text{ L/mol}} = 0.25\text{ मोल}$$
- 2. अणुओं की संख्या = मोलों की संख्या $\times$ एवागाद्रो संख्या ($6.022 \times 10^{23}$)
$$\text{अणुओं की संख्या} = 0.25 \times 6.022 \times 10^{23} = \frac{6.022 \times 10^{23}}{4} = 1.5055 \times 10^{23}$$
- अतः $5.6\text{ L O}_2$ गैस में अणुओं की कुल संख्या **$1.5055 \times 10^{23}$** होगी।
- $6.022 \times 10^{23}$: यह STP पर पूरे 1 मोल ($22.4\text{ L}$) गैस में उपस्थित अणुओं की संख्या है, न कि $5.6\text{ L}$ में।
- $3.011 \times 10^{23}$: यह $11.2\text{ L}$ (अर्थात आधे मोल) गैस में उपस्थित अणुओं की संख्या होती है।
- $2.24 \times 10^{23}$: यह विकल्प केवल गणना के भ्रम के लिए दिया गया एक गलत मान है।
#3. किसी परमाणु का परमाणु द्रव्यमान मुख्य रूप से किसकी संख्या से निर्धारित होता है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)
- परमाणु का द्रव्यमान और न्यूक्लिऑन: किसी भी परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान मुख्य रूप से उसके केंद्र यानी नाभिक में निहित होता है। नाभिक के अंदर पाए जाने वाले कणों—प्रोटॉन और न्यूट्रॉन—को संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ (Nucleons) कहा जाता है।
- चूँकि एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन या न्यूट्रॉन की तुलना में नगण्य (लगभग $1836$ वां हिस्सा) होता है, इसलिए परमाणु के कुल द्रव्यमान में इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान को लगभग शून्य माना जाता है।
- अतः परमाणु का परमाणु द्रव्यमान अनिवार्य रूप से नाभिक में उपस्थित न्यूक्लिऑन (प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या) द्वारा निर्धारित होता है।
- प्रोटॉन / न्यूट्रॉन: हालांकि ये दोनों व्यक्तिगत रूप से द्रव्यमान में योगदान देते हैं, लेकिन इनमें से केवल एक (जैसे केवल प्रोटॉन या केवल न्यूट्रॉन) कहना अधूरा है क्योंकि कुल द्रव्यमान इन दोनों के संयुक्त योग (न्यूक्लिऑन) पर निर्भर करता है।
- इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन बहुत हल्के होते हैं और परमाणु के कुल द्रव्यमान में इनका योगदान लगभग नगण्य होता है।
#4. किसी तत्व के अणु ____________ बने होते हैं।
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 9 )
- तत्व के अणु (Molecules of an Element): किसी शुद्ध तत्व के अणु एक ही प्रकार (समान) के परमाणुओं के आपस में रासायनिक संयोजन से बनते हैं। इन्हें समपरमाणुक (Homoatomic) अणु भी कहा जाता है।
- उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन गैस का अणु ($\text{O}_2$) ऑक्सीजन के दो समान परमाणुओं से मिलकर बनता है, हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) हाइड्रोजन के दो समान परमाणुओं से और ओजोन ($\text{O}_3$) ऑक्सीजन के तीन समान परमाणुओं से बनती है।
- इसके विपरीत, जब दो या दो से अधिक अलग-अलग तत्वों के परमाणु निश्चित अनुपात में मिलते हैं, तब वे यौगिकों के अणु बनाते हैं (जैसे जल $\text{H}_2\text{O}$ में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के विभिन्न परमाणु होते हैं)।
- विभिन्न प्रकार के परमाणुओं से: यह विशेषता ‘यौगिकों के अणुओं’ (Molecules of Compounds) की होती है, न कि किसी अकेले तत्व के अणुओं की।
- कठिन प्रकार के परमाणुओं से / जटिल प्रकार के परमाणुओं से: ये वैज्ञानिक रूप से अमान्य और भ्रामक शब्द हैं, जिनका रासायनिक वर्गीकरण से कोई संबंध नहीं है।
#5. परमाणविक या आणविक पैमाने पर माप की मानक इकाई क्या है?
(RPF SI 2018 : 12 Jan 2019 Shift 3)
- एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई (Unified Atomic Mass Unit – u): परमाणविक और आणविक पैमाने पर बेहद सूक्ष्म कणों (जैसे परमाणु और अणुओं) के द्रव्यमान को मापने के लिए जिस मानक इकाई का उपयोग किया जाता है, उसे ‘एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई’ (प्रतीक: u या पहले amu) कहा जाता है।
- इसे कार्बन-12 ($^{12}\text{C}$) समस्थानिक के एक उदासीन परमाणु के द्रव्यमान के ठीक $\frac{1}{12}$वें भाग के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- इसका उपयोग रासायनिक गणनाओं में परमाणुओं और अणुओं के सापेक्ष द्रव्यमान को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
- एकीकृत किलोग्राम: किलोग्राम द्रव्यमान की एसआई (SI) इकाई है, जो स्थूल (macroscopic) वस्तुओं के लिए उपयोग की जाती है; यह परमाणविक पैमाने के लिए बहुत बड़ी इकाई है।
- एकीकृत घनत्व और एकीकृत तत्व द्रव्यमान इकाई: ये वैज्ञानिक रूप से अमान्य या भ्रामक शब्दावली हैं, जिनका इस संदर्भ से कोई संबंध नहीं है।
#6. यदि किसी तत्व ‘X’ के दो समस्थानिक X-35 और X-37 हैं, तो क्लोरीन (यदि X-35 = 25% और X-37 = 75%) का औसत परमाणु द्रव्यमान ________ होगा।
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- औसत परमाणु द्रव्यमान (Average Atomic Mass): जब किसी तत्व के एक से अधिक समस्थानिक प्राकृतिक रूप से अलग-अलग प्रतिशत (प्रचुरता) में पाए जाते हैं, तो उस तत्व का औसत परमाणु द्रव्यमान उनके व्यक्तिगत द्रव्यमान और उनकी प्रतिशत मात्रा के गुणनफल के योग को 100 से भाग देकर निकाला जाता है।
- दी गई मानों के अनुसार गणना:
$$\text{औसत द्रव्यमान} = \frac{(m_1 \times p_1) + (m_2 \times p_2)}{100}$$
$$\text{औसत द्रव्यमान} = \frac{(35 \times 25) + (37 \times 75)}{100}$$
$$\text{औसत द्रव्यमान} = \frac{875 + 2775}{100} = \frac{3650}{100} = 36.5\text{ u}$$
- अतः इस विशिष्ट डेटा के अनुसार तत्व का औसत परमाणु द्रव्यमान **36.5 u** होगा। *(नोट: वास्तविक क्लोरीन के लिए प्राकृतिक प्रचुरता उल्टी यानी 75% और 25% होती है जिससे 35.5 u आता है, किंतु इस प्रश्न में दिए गए प्रतिशत आंकड़ों के आधार पर गणना करने पर उत्तर 36.5 u प्राप्त होता है।)*
- 35.5 u: यह वास्तविक क्लोरीन का मानक औसत परमाणु द्रव्यमान है (जो 75% $\text{Cl-35}$ और 25% $\text{Cl-37}$ के अनुपात पर आधारित होता है), लेकिन यहाँ प्रश्न में दिए गए प्रतिशत आंकड़े इसके विपरीत हैं।
- 36.0 u और 34.5 u: ये मान गणितीय गणना के बाद प्राप्त सही औसत मूल्य से मेल नहीं खाते हैं।
#7. एक और कार्बन परमाणुओं के साथ कार्बन द्वारा सहसंयोजक बंध बनाने की विशेषता क्या है?
(RPF SI Previous Paper : 5 Jan 2019 Shift 1)
- श्रृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणु की यह एक अद्वितीय और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसके तहत कार्बन अपने ही अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध (Covalent Bonds) बनाकर लंबी सीधी श्रृंखलाओं, शाखित (Branched) श्रृंखलाओं या वलय (Ring) संरचनाओं का निर्माण करता है।
- कार्बन परमाणु का आकार छोटा होने के कारण इसके बीच बनने वाले कार्बन-कार्बन ($text{C-C}$) बंध बहुत मजबूत और स्थायी होते हैं, यही कारण है कि कार्बन यौगिकों (कार्बनिक रसायन) की संख्या अन्य सभी तत्वों के यौगिकों से कहीं अधिक होती है।
- इस गुण के कारण ही कार्बन असीमित संख्या में विभिन्न यौगिकों का निर्माण कर सकता है।
- आयनीकरण (Ionization): यह किसी उदासीन परमाणु या अणु द्वारा इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करने या त्यागने से आयन (धनायन या ऋणायन) बनने की प्रक्रिया है।
- इलेक्ट्रॉनीकरण (Electronation): यह रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों के जुड़ने (अपचयन) की प्रक्रिया से संबंधित है।
- विद्युतघटन (Electrolysis): यह किसी विद्युत अपघट्य के विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करके रासायनिक अपघटन कराने की प्रक्रिया है।
#8. थॉमसन ने अपने परमाणु मॉडल का वर्णन करने के लिए निम्नलिखित में से किस सादृश्य (analogy) का उपयोग किया?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- थॉमसन का परमाणु मॉडल (1904): जे. जे. थॉमसन द्वारा प्रस्तुत परमाणु मॉडल को ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ (Plum Pudding Model) या ‘क्रिसमस पुडिंग मॉडल’ भी कहा जाता है।
- इस सादृश्य के अनुसार, परमाणु को एक धनावेशित गोले के रूप में माना गया था (जैसे क्रिसमस पुडिंग या तरबूज का लाल गूदा), जिसमें ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन (जैसे पुडिंग में सूखे मेवे या तरबूज के बीज) धंसे हुए होते हैं।
- इस मॉडल की यह विशेषता थी कि इसमें परमाणु के भीतर धनावेश और ऋणावेश का कुल परिमाण समान होता है, जिससे परमाणु समग्र रूप से विद्युत रूप से उदासीन (Neutral) रहता है।
- सौर परिवार / ग्रह प्रणाली: इस सादृश्य (Planetary model) का उपयोग अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने नाभिकीय परमाणु मॉडल को समझाने के लिए किया था, जिसमें इलेक्ट्रॉनों को सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले ग्रहों की तरह माना गया था।
- परमाणु कोर-शेल: यह मॉडल या अवधारणा बाद की क्वांटम और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास संरचनाओं से जुड़ी है, न कि थॉमसन के शुरुआती मॉडल से।
#9. निम्नलिखित में से कौन-सा, परमाणु का आकार निर्धारित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
- परमाणु का आकार और इलेक्ट्रॉन अभ्र: परमाणु का केंद्र यानी नाभिक अत्यंत सूक्ष्म होता है (नाभिक की त्रिज्या लगभग $10^{-15}\text{ m}$ होती है), जबकि पूरे परमाणु की त्रिज्या लगभग $10^{-10}\text{ m}$ होती है।
- नाभिक के चारों ओर का वह विशाल क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉनों के पाए जाने की प्रायिकता (Probability) सबसे अधिक होती है, उसे ‘इलेक्ट्रॉन अभ्र’ (Electron Cloud) कहा जाता है।
- चूँकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर दूर-दूर तक कक्षाओं या कक्षकों में फैले रहते हैं, इसलिए परमाणु का समग्र आयतन और आकार मूल रूप से इसी इलेक्ट्रॉन अभ्र द्वारा निर्धारित होता है।
- नाभिक (Nucleus): हालांकि परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान नाभिक में होता है, लेकिन इसका आकार परमाणु के कुल आकार की तुलना में बहुत ही छोटा (लगभग 10,000 वां हिस्सा) होता है, इसलिए यह परमाणु का ‘आकार’ निर्धारित नहीं करता।
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन: ये दोनों कण नाभिक के भीतर स्थित होते हैं और परमाणु के द्रव्यमान संख्या व आवेश को तय करते हैं, न कि उसके बाहरी भौतिक आकार को।
#10. किस अपरमाणविक कण की खोज ने थॉमसन के मॉडल का विकास किया?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- इलेक्ट्रॉन की खोज और थॉमसन का मॉडल: वैज्ञानिक जे. जे. थॉमसन ने 1897 में जब **इलेक्ट्रॉन** (एक ऋणावेशित उपपरमाणविक कण) की खोज की, तब यह सिद्ध हो गया कि परमाणु अविभाज्य नहीं है, बल्कि इसके अंदर और भी छोटे कण मौजूद हैं।
- चूँकि परमाणु कुल मिलाकर विद्युत रूप से उदासीन (Neutral) होता है, इसलिए थॉमसन ने यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु के भीतर ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए धनावेश भी होना चाहिए।
- इसी आधार पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ (या थॉमसन का परमाणु मॉडल) प्रस्तुत किया।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज बाद में हुई, जिसके आधार पर रदरफोर्ड और अन्य वैज्ञानिकों ने नाभिकीय मॉडल का विकास किया।
- न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन की खोज सबसे अंत में (1932 में जेम्स चैडविक द्वारा) की गई थी।
- पॉज़िट्रॉन: यह इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण (Antimatter particle) है, जिसकी खोज कार्ल एंडरसन ने की थी और इसका थॉमसन के शुरुआती परमाणु मॉडल के विकास से कोई संबंध नहीं है।
#11. किसी तत्व के परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या इसके ________ के बराबर होती है।
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 1)
- परमाणु क्रमांक ($Z$): किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित कुल प्रोटॉनों की संख्या को ही उस तत्व का परमाणु क्रमांक कहा जाता है। यह किसी तत्व की सबसे मौलिक पहचान है।
- एक सामान्य (उदासीन) परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या आपस में बराबर होती है, इसलिए परमाणु क्रमांक इलेक्ट्रॉनों की संख्या को भी निरूपित करता है।
- आवर्त सारणी में तत्वों को उनके इसी परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया गया है।
- परमाणु भार / द्रव्यमान: यह प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के कुल योग (न्यूक्लिऑन) पर आधारित होता है, न कि केवल प्रोटॉनों की संख्या के बराबर।
- इलेक्ट्रॉन बन्धुता (Electron Affinity): यह किसी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऊर्जा परिवर्तन (मुक्त होने वाली ऊर्जा) से संबंधित है।
- तुल्यांकी भार (Equivalent Weight): यह किसी तत्व या यौगिक के द्रव्यमान से संबंधित रासायनिक माप है जो हाइड्रोजन, ऑक्सीजन या क्लोरीन के निश्चित भाग से संयोग करता है।
#12. সমাঙী श्रेणी के सदस्य एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न होते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- समांगी या सजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें सभी सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह (Functional Group) होता है और जिनके रासायनिक गुण समान होते हैं, उन्हें समांगी श्रेणी कहा जाता है।
- इस श्रेणी के दो क्रमिक (Successive) सदस्य अणुसूत्र में हमेशा एक कार्बन परमाणु और दो हाइड्रोजन परमाणु ($-\text{CH}_2-$ समूह) के अंतर से भिन्न होते हैं।
- उदाहरण के लिए, एल्केन श्रेणी में मेथेन ($\text{CH}_4$) और एथेन ($\text{C}_2\text{H}_6$) के बीच $-\text{CH}_2-$ का अंतर होता है। इसके अलावा, इनके आणविक द्रव्यमान में हमेशा **14 u** का अंतर होता है।
- केवल एक कार्बन या केवल दो हाइड्रोजन परमाणु से: यदि केवल एक कार्बन या केवल दो हाइड्रोजन का अंतर होगा, तो वह हाइड्रोकार्बन की संयोजकता (Valency) को संतुष्ट नहीं करेगा और यौगिक का रासायनिक ढांचा बिगड़ जाएगा।
- एक ऑक्सीजन परमाणु से: ऑक्सीजन का अंतर समांगी श्रेणी के सदस्यों में नहीं, बल्कि अलग-अलग क्रियात्मक समूहों (जैसे एल्कोहल और ईथर आदि) के बीच देखा जा सकता है।
#13. निम्नलिखित में से कौन समस्थानिक नहीं हैं?
(RPF Constable 2018 22 Jan 2019 Shift 3)
- समस्थानिक (Isotopes) क्या होते हैं?: एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Proton count) समान होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या (Mass number) भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहा जाता है। (इनका रासायनिक गुण समान होता है)।
- कैल्शियम ($\text{Ca}$, परमाणु क्रमांक 20) और आर्गन ($\text{Ar}$, परमाणु क्रमांक 18) दो अलग-अलग तत्व हैं। इनका परमाणु क्रमांक अलग होने के कारण ये समस्थानिक नहीं हो सकते।
- वास्तव में, कैल्शियम और आर्गन (दोनों का द्रव्यमान लगभग 40 होता है) संभारिक (Isobars) के उदाहरण हैं, जिनमें द्रव्यमान संख्या समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं।
- H – 1, H – 2 और H – 3: ये हाइड्रोजन के तीन प्रसिद्ध समस्थानिक हैं—क्रमशः प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम (इन सबका परमाणु क्रमांक 1 है)।
- Cl – 35 और Cl – 37: ये क्लोरीन तत्व के दो मुख्य समस्थानिक हैं (इन दोनों का परमाणु क्रमांक 17 है)।
- C – 12 और C – 14: ये कार्बन के समस्थानिक हैं, जिनमें कार्बन-14 का उपयोग रेडियोकार्बन डेटिंग में किया जाता है (इन दोनों का परमाणु क्रमांक 6 है)।
#14. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, ‘ सूत्र इकाई द्रव्यमान ( formula unit mass)’ पद की सर्वोत्तम रूप से व्याख्या करता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): ऐसे आयनिक यौगिक (जैसे सोडियम क्लोराइड, $\text{NaCl}$) जो अणुओं के रूप में स्वतंत्र रूप से मौजूद नहीं होते, बल्कि विपरीत आवेशित आयनों की त्रि-विमीय संरचना (Crystal Lattice) बनाते हैं, उनके द्रव्यमान को दर्शाने के लिए ‘आणविक द्रव्यमान’ शब्द के स्थान पर सूत्र इकाई द्रव्यमान का उपयोग किया जाता है।
- यह किसी यौगिक के रासायनिक सूत्र में उपस्थित सभी घटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का कुल योग होता है (जैसे $\text{NaCl}$ का सूत्र इकाई द्रव्यमान $\text{Na}$ और $\text{Cl}$ के परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है)।
- इसे भी एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई ($\text{u}$) में ही व्यक्त किया जाता है।
- किसी तत्व के एकल परमाणु का द्रव्यमान: इसे ‘परमाणु द्रव्यमान’ (Atomic mass) कहा जाता है।
- किसी तत्व के एकल अणु का द्रव्यमान: इसे ‘आणविक द्रव्यमान’ (Molecular mass) कहा जाता है जो सहसंयोजक यौगिकों के लिए प्रयुक्त होता है।
- किसी पदार्थ के एक मोल का द्रव्यमान: इसे ‘मोलर द्रव्यमान’ (Molar mass) कहा जाता है, जिसकी इकाई ग्राम प्रति मोल ($\text{g/mol}$) होती है।
#15. सोने की पन्नी (स्वर्ण पत्र) से सीधे गुजरने वाले अल्फा कण क्या दर्शाते हैं?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग: जब अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने उच्च ऊर्जा वाले अल्फा ($\alpha$) कणों को सोने की अत्यंत पतلی पन्नी पर डाला, तो उन्होंने देखा कि अधिकांश अल्फा कण बिना किसी रुकावट या विक्षेपण के सीधे पन्नी को पार करके निकल गए।
- इस महत्वपूर्ण प्रेक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि परमाणु का अधिकांश भाग पूरी तरह से रिक्त (खाली स्थान) होता है, जिसके कारण अल्फा कण बिना किसी टक्कर के सीधे गुजर जाते हैं।
- यह खोज परमाणु संरचना के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि इससे पहले थॉमसन के मॉडल में परमाणु को एक ठोस गोला माना गया था।
- नाभिक ऋणावेशित है: यह वैज्ञानिक रूप से गलत है; परमाणु का नाभिक अत्यधिक धनावेशित (Positively charged) होता है।
- नाभिक विशाल है: यह कथन विपरीत है; नाभिक परमाणु के कुल आकार की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म होता है (लगभग 10,000 वां हिस्सा)।
- परमाणु पर धनात्मक आवेश है: समग्र रूप से एक सामान्य परमाणु विद्युत रूप से उदासीन (Neutral) होता है, हालांकि उसका केंद्र (नाभिक) धनावेशित होता है, किंतु सीधे गुजरने वाले कण मुख्य रूप से ‘रिक्त स्थान’ की उपस्थिति दर्शाते हैं।
#16. ________ का एक युग्म हैं।
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
- समस्थानिक (Isotopes): ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic Number / Protons) समान होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न होती है (जैसे—हाइड्रोजन के समस्थानिक $^1_1\text{H}, ^2_1\text{H}, ^3_1\text{H}$).
- समभारिक (Isobars): ऐसे अलग-अलग तत्वों के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं (जैसे—$^{40}_{20}\text{Ca}$ और $^{40}_{18}\text{Ar}$).
- समन्यूट्रॉनी (Isotones): ऐसे परमाणु जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या ($N = A – Z$) समान होती है (जैसे—$^{14}_{\ 6}\text{C}$ और $^{15}_{\ 7}\text{N}$ में न्यूट्रॉन संख्या = $8$).
- समइलेक्ट्रॉनी (Isoelectronic): ऐसे आयन या परमाणु जिनमें इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या समान होती है (जैसे—$\text{O}^{2-}, \text{F}^{-}, \text{Ne}, \text{Na}^{+}$ में प्रत्येक के पास 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं)।
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#17. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक, मुख्य रूप से परमाणु के आमाप को निर्धारित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- परमाणु का आमाप (Atomic Size/Radius): किसी तत्व के परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या (अर्थात उसका परमाणु क्रमांक या नाभिकीय आवेश) प्रत्यक्ष रूप से यह निर्धारित करती है कि नाभिक इलेक्ट्रॉनों को कितनी प्रबलता से अपनी ओर आकर्षित करेगा।
- जैसे-जैसे आवर्त सारणी में किसी आवर्त (Period) में बाएं से दाएं जाते हैं, प्रोटॉनों की संख्या बढ़ने के साथ नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक निकट खिंचते जाते हैं और परमाणु का आकार बदलता है। इस प्रकार रेलवे बोर्ड (RRB) की आधिकारिक परीक्षा पद्धति के अनुसार प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु के आमाप को नियंत्रित व निर्धारित करने वाला प्रमुख मूल कारक माना गया है।
- हालांकि बाहरी आवरण के इलेक्ट्रॉन अभ्र (Electron cloud) से आमाप का प्रत्यक्ष विस्तार तय होता है, किंतु इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या व उनकी कक्षाएँ सीधे तौर पर नाभिक में मौजूद **प्रोटॉनों की संख्या** (परमाणु क्रमांक) पर ही निर्भर करती हैं।
- नाभिक का द्रव्यमान / न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉन और नाभिकीय द्रव्यमान परमाणु के भार (Mass) को तय करते हैं, न कि उसके भौतिक आमाप (Radius/Size) को।
- इलेक्ट्रॉनों की संख्या: उदासीन परमाणु में यह प्रोटॉनों के बराबर होती है, लेकिन विभिन्न रासायनिक संदर्भों (आयनों, समस्थानिकों आदि) में केवल इलेक्ट्रॉनों से मूल प्रवृत्तियों का निर्धारण नहीं होता, जबकि आधिकारिक बोर्ड उत्तर कुंजी में ‘प्रोटॉनों की संख्या’ को प्राथमिकता दी गई है।
#18. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )
- कणों का तुलनात्मक द्रव्यमान: एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान लगभग $9.109 \times 10^{-31}\text{ kg}$ होता है, जबकि एक प्रोटॉन या न्यूट्रॉन का द्रव्यमान लगभग $1.67 \times 10^{-27}\text{ kg}$ होता है।
- इसका अर्थ यह है कि एक प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से लगभग **1836 गुना** अधिक होता है।
- यही कारण है कि परमाणु के कुल द्रव्यमान में इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान को नगण्य (लगभग शून्य) माना जाता है और परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान उसके नाभिक (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) पर निर्भर करता है।
- परमाणु के आकार की तुलना में नाभिक का आकार बड़ा होता है: यह कथन बिल्कुल विपरीत है; नाभिक परमाणु के कुल आकार का लगभग $10,000$वां हिस्सा होता है (यानी नाभिक अत्यंत सूक्ष्म होता है)।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर त्रिकोणीय पथों में परिक्रमण करते हैं: यह वैज्ञानिक रूप से गलत है; इलेक्ट्रॉन निश्चित त्रिकोणीय पथों में नहीं घूमते।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्तीय पथों में परिक्रमण नहीं करते हैं: यद्यपि आधुनिक क्वांटम मॉडल में इलेक्ट्रॉन निश्चित वृत्तीय कक्षाओं के बजाय ‘इलेक्ट्रॉन अभ्र’ (Orbitals) के रूप में पाए जाते हैं, फिर भी रदरफोर्ड और बोर के प्रारंभिक मॉडलों में वृत्तीय पथों की परिकल्पना की गई थी, और अन्य विकल्पों की तुलना में द्रव्यमान वाला कथन पूरी तरह से अकाट्य व सत्य है।
#19. थॉमसन के परमाणु मॉडल के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, परमाणु की संरचना का सर्वोत्तम रूप से वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
- थॉमसन का परमाणु मॉडल (1904): जे. जे. थॉमसन द्वारा प्रस्तुत इस मॉडल (जिसे प्लम पुडिंग या तरबूज मॉडल भी कहा जाता है) के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसमें ऋण आवेशित **इलेक्ट्रॉन धंसे हुए या अंतर्निहित (embedded)** होते हैं।
- इस मॉडल की मुख्य विशेषता यह थी कि गोले के भीतर कुल धनावेश, इलेक्ट्रॉनों के कुल ऋणावेश के बराबर होता है, जिससे पूरा परमाणु विद्युत रूप से उदासीन (Neutral) बना रहता है।
- यह परमाणु संरचना को समझाने वाला सबसे पहला मॉडल था, हालांकि बाद में रदरफोर्ड के प्रयोग द्वारा इसे संशोधित किया गया।
- इलेक्ट्रॉन एक केंद्रीय नाभिक के परितः निश्चित कक्षाओं में परिक्रमण करते हैं: यह बोर के परमाणु मॉडल की विशेषता है, जबकि थॉमसन के मॉडल में किसी केंद्रीय नाभिक की परिकल्पना नहीं की गई थी।
- परमाणु में इलेक्ट्रॉनों से घिरा एक सघन नाभिक होता है: यह रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल का वर्णन करता है।
- परमाणु में केवल न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन होते हैं: यह वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत है क्योंकि थॉमसन के मॉडल में मुख्य रूप से धनावेशित द्रव्यमान और इलेक्ट्रॉन शामिल थे, और न्यूट्रॉन की खोज बहुत बाद में हुई थी।
#20. सहसंयोजक आबंध वाले यौगिकों का क्वथनांक कम क्यों होता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 1)
- सहसंयोजक यौगिकों के गुण: सहसंयोजक यौगिकों के अणुओं के भीतर के परमाणु आपस में मजबूत सहसंयोजक बंधों (Covalent bonds) द्वारा जुड़े होते हैं, लेकिन विभिन्न अलग-अलग अणुओं के बीच लगने वाले आकर्षण बल (यानी अंतराआणविक बल / Intermolecular forces जैसे वान डेर वाल्स बल) बहुत कमजोर होते हैं।
- जब इन यौगिकों को गर्म किया जाता है (गलनांक या क्वथनांक पर), तो उनके अणुओं को अलग करने के लिए केवल इन कमजोर अंतराआणविक बलों को तोड़ना पड़ता है, जिसके लिए बहुत कम ऊष्मा (ऊर्जा) की आवश्यकता होती है।
- यही कारण है कि सहसंयोजक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक आमतौर पर कम होते हैं।
- अणुओं के अंदर दुर्बल सहसंयोजक आबंध…: सहसंयोजक आबंध स्वयं बहुत मजबूत (प्रबल) होते हैं, कमजोर नहीं।
- प्रबल अंतराआणविक बल…: यदि अंतराआणविक बल प्रबल होते, तो यौगिकों के क्वथनांक उच्च (जैसे आयनिक यौगिकों की तरह) होते, न कि कम।
#21. डोबेराइनर ने तीन समान तत्वों के समूह को क्या नाम दिया?
(RRB NTPC UG CBT-I : 14 Aug, 2025 Shift 1)
- डोबेराइनर के त्रिक (Dobereiner’s Triads): जर्मन रसायन विज्ञानी जॉन वोल्फगैंग डोबेराइनर ने 1817 में समान गुणधर्म वाले तत्वों को तीन-तीन के समूहों में व्यवस्थित किया था, जिन्हें ‘त्रिक’ (Triads) कहा गया।
- उनके नियम के अनुसार, जब एक त्रिक के तीनों तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो बीच वाले तत्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमान के लगभग औसत (Arithmetic mean) के बराबर होता है।
- उदाहरण के लिए, लिथियम ($\text{Li}$), सोडियम ($\text{Na}$) और पोटैशियम ($\text{K}$) का त्रिक।
- त्रिभुज / त्रिगुण / ट्रायोड3: ये रासायनिक वर्गीकरण या आवर्त सारणी के इतिहास से संबंधित वैज्ञानिक शब्दावली नहीं हैं; इन्हें केवल भ्रमित करने के लिए विकल्प के रूप में रखा गया है।
#22. रदरफोर्ड के स्वर्ण पन्नी प्रयोग द्वारा निम्नलिखित में से क्या खोजा गया था?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)
- रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): अर्नेस्ट रदरफोर्ड और उनके सहयोगियों ने जब सोने की पतلی पन्नी पर अल्फा कणों की बौछार की, तो उन्होंने देखा कि अधिकांश कण सीधे निकल गए, कुछ कण छोटे कोणों से विक्षेपित हुए, और बहुत कम (लगभग 20,000 में से 1) कण वापस अपनी ही दिशा में लौट आए।
- इस आश्चर्यजनक परिणाम से यह सिद्ध हुआ कि परमाणु के भीतर एक अत्यंत सघन, भारी और धनावेशित केंद्र मौजूद है, जिसे रदरफोर्ड ने ‘नाभिक’ (Nucleus) नाम दिया।
- इस खोज ने परमाणु के प्लम पुडिंग मॉडल को पूरी तरह खारिज कर दिया और आधुनिक परमाणु मॉडल की नींव रखी।
- इलेक्ट्रॉन: इसकी खोज जे. जे. थॉमसन (1897) ने कैथोड किरणों के अध्ययन के दौरान की थी।
- प्रोटॉन: इसकी खोज ई. गोल्डस्टीन (एनोड किरणों द्वारा) ने की थी और इसका नामकरण रदरफोर्ड ने किया था।
- न्यूट्रॉन: इसकी खोज सबसे अंत में जेम्स चैडविक (1932) द्वारा की गई थी।
#23. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म समस्थानिक है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- समस्थानिक (Isotopes): ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) समान होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहा जाता है। चूंकि इनका परमाणु क्रमांक समान होता है, इसलिए ये एक ही तत्व के विभिन्न रूप होते हैं और इनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
- यहाँ दिए गए विकल्प में **¹H (प्रोटियम)** और **²H (ड्यूटीरियम)** दोनों हाइड्रोजन तत्व के ही समस्थानिक हैं (इन दोनों का परमाणु क्रमांक 1 है, किंतु द्रव्यमान क्रमशः 1 और 2 है)।
- हाइड्रोजन का तीसरा समस्थानिक ट्राइटियम ($^3\text{H}$) है।
- ¹⁶O और ¹⁹F: ऑक्सीजन ($Z=8$) और फ़्लोरिन ($Z=9$) पूरी तरह से दो अलग-अलग तत्व हैं, इसलिए इनके परमाणु क्रमांक समान नहीं हो सकते।
- ¹²C और ¹⁴N: कार्बन ($Z=6$) और नाइट्रोजन ($Z=7$) भी अलग-अलग तत्व हैं।
- ⁴⁰Ca और ⁴⁰Ar: कैल्शियम ($Z=20$) और आर्गन ($Z=18$) के परमाणु क्रमांक अलग हैं लेकिन इनकी द्रव्यमान संख्या समान (40) है; इसलिए ये समस्थानिक नहीं बल्कि संभारिक (Isobars) हैं।
#24. जब सोडियम का एक परमाणु क्लोरीन के एक परमाणु के साथ मिलकर सोडियम क्लोराइड बनाता है, तो प्रत्येक सोडियम परमाणु ________ ।
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 3)
- आयनिक बंध का निर्माण (Formation of Ionic Bond): सोडियम ($\text{Na}$, परमाणु क्रमांक 11) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $2, 8, 1$ होता है। इसके बाह्यतम कोष में 1 इलेक्ट्रॉन होता है जिसे यह आसानी से त्याग सकता है।
- जब सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$) बनता है, तो प्रत्येक सोडियम परमाणु अपने बाह्यतम कोष का 1 इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनआयन ($\text{Na}^+$) बनाता है और अपनी निकटतम अक्रिय गैस (नियन) जैसा स्थायी अष्टक प्राप्त करता है।
- त्यागा गया यह इलेक्ट्रॉन क्लोरीन परमाणु द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है, जिससे दोनों के बीच स्थिर विद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force) द्वारा आयनिक बंध बनता है।
- एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है: यह कार्य क्लोरीन परमाणु द्वारा किया जाता है (वह 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणआयन $\text{Cl}^-$ बनाता है)।
- प्रोटॉन प्राप्त करना या खोना: रासायनिक अभिक्रियाओं में नाभिक के भीतर स्थित प्रोटॉन का आदान-प्रदान कभी नहीं होता; प्रोटॉन बदलने से तत्व की पहचान ही बदल जाएगी (यह केवल नाभिकीय अभिक्रियाओं में होता है)।
#25. हाइड्रोजन के समस्थानिक ड्यूटेरियम में निम्न में से क्या होता है?
(RRB JE 25 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- ड्यूटीरियम ($^2_1\text{H}$): यह हाइड्रोजन का दूसरा समस्थानिक है, जिसे भारी हाइड्रोजन भी कहा जाता है।
- इसके नाभिकीय घटक की गणना:
• परमाणु क्रमांक ($Z$) = 1 (अर्थात **1 प्रोटॉन**)
• द्रव्यमान संख्या ($A$) = 2
• न्यूट्रॉन संख्या ($N = A – Z$) = $2 – 1 =$ **1 न्यूट्रॉन**
- अतः ड्यूटीरियम के एक परमाणु में 1 प्रोटॉन, 1 न्यूट्रॉन और 1 इलेक्ट्रॉन होता है। इसके ऑक्साइड ($\text{D}_2\text{O}$) को भारी जल (Heavy water) कहा जाता है जिसका उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में मंदक (Moderator) के रूप में किया जाता है।
- कोई न्यूट्रॉन नहीं और एक प्रोटॉन: यह हाइड्रोजन के पहले और सबसे सामान्य समस्थानिक—प्रोटियम ($^1_1\text{H}$) की विशेषता है।
- एक इलेक्ट्रॉन और दो न्यूट्रॉन / एक न्यूट्रॉन और दो प्रोटॉन: यह संयोजन हाइड्रोजन के तीसरे समस्थानिक—ट्राइटियम ($^3_1\text{H}$) (जिसमें 1 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं) या अन्य गलत आनुपातिक मानों को दर्शाता है।
#26. HNO 3 के आणविक द्रव्यमान की गणना करें।
(RRB JE CE 29 Aug 2019 Shift 2 CBT 2)
- आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass): किसी अणु में उपस्थित सभी घटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का कुल योग उस अणु का आणविक द्रव्यमान कहलाता है। इसे एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई ($\text{u}$) में व्यक्त किया जाता है।
- नाइट्रिक एसिड ($\text{HNO}_3$) के प्रत्येक घटक का परमाणु द्रव्यमान:
• हाइड्रोजन ($\text{H}$) का परमाणु द्रव्यमान = $1\text{ u}$ (1 परमाणु)
• नाइट्रोजन ($\text{N}$) का परमाणु द्रव्यमान = $14\text{ u}$ (1 परमाणु)
• ऑक्सीजन ($\text{O}$) का परमाणु द्रव्यमान = $16\text{ u}$ (3 परमाणु)
- कुल आणविक द्रव्यमान की गणना:
$$\text{आणविक द्रव्यमान} = (1 \times 1) + (1 \times 14) + (3 \times 16)$$
$$\text{आणविक द्रव्यमान} = 1 + 14 + 48 = 63\text{ u}$$
- 64 u, 65 u और 70 u: ये मान गलत गणना (जैसे ऑक्सीजन या नाइट्रोजन के द्रव्यमान में जोड़ने या गुणा करने की त्रुटि) के कारण प्राप्त होते हैं, जो सही योग (63 u) से मेल नहीं खाते।
#27. बोर की कक्षाओं को स्थिर कहा जाता है, क्योंकि ________ ।
(RRB JE 26 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- बोर की स्थिर कक्षाएँ (Stationary Orbits): नील बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित वृत्तीय पथों में चक्कर लगा सकते हैं जिन्हें ‘स्थिर कक्षाएँ’ (Stationary Orbits) या ऊर्जा स्तर कहा जाता है।
- यहाँ ‘स्थिर’ (Stationary) शब्द का अर्थ इलेक्ट्रॉन या कक्षा का स्थिर (गतिहीन) होना नहीं है, बल्कि इसका तात्पर्य यह है कि जब तक इलेक्ट्रॉन किसी विशिष्ट कक्षा में रहता है, उसकी ऊर्जा का मान निश्चित (नियत/कांस्टेंट) रहता है।
- यह कक्षाएँ समय के साथ अपनी ऊर्जा में परिवर्तन नहीं करती हैं। इलेक्ट्रॉन न तो ऊर्जा का विकिरण (Radiation) करते हैं और न ही ऊर्जा अवशोषित करते हैं, जब तक वे उसी कक्षा में बने रहते हैं।
- उनमें इलेक्ट्रॉन स्थिर होते हैं: यह वैज्ञानिक रूप से गलत है; बोर मॉडल के अनुसार भी इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर अत्यंत तीव्र गति से परिक्रमण करते हैं, वे गतिहीन नहीं होते।
- प्रोटॉन नाभिक में स्थिर हैं…: हालांकि प्रोटॉन नाभिक के भीतर होते हैं, किंतु बोर की कक्षाओं के ‘स्थिर’ कहलाने का संबंध नाभिकीय प्रोटॉनों से नहीं, बल्कि कक्षाओं से जुड़े ऊर्जा स्तरों से है।
- उनकी कक्षाओं की त्रिज्या निर्धारित होती है: यद्यपि त्रिज्या निश्चित होती है, किंतु ‘स्थिर’ (Stationary states) शब्द का मुख्य भौतिक आधार उनकी निश्चित ऊर्जा और विकिरणहीनता से जुड़ा हुआ है।
#28. समभारिकों ( isobars) में कौन-सा गुण समान होता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- समभारिक (Isobars): ऐसे अलग-अलग तत्वों के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number / न्यूक्लिऑनों की कुल संख्या) समान होती है, लेकिन परमाणु क्रमांक (Atomic Number) भिन्न होते हैं, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
- चूंकि ये अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं (यानी इनमें प्रोटॉनों की संख्या अलग-अलग होती है), इसलिए इनके रासायनिक गुणधर्म भी भिन्न होते हैं।
- उत्कृष्ट उदाहरण: आर्गन ($^{40}_{18}\text{Ar}$) और कैल्शियम ($^{40}_{20}\text{Ca}$) दोनों की द्रव्यमान संख्या 40 है, किंतु इनके परमाणु क्रमांक क्रमशः 18 और 20 हैं।
- समान परमाणु क्रमांक / प्रोटॉनों की समान संख्या / समान रासायनिक गुणधर्म: ये सभी विशेषताएँ समस्थानिकों (Isotopes) से संबंधित हैं, न कि समभारिकों से। समभारिकों के परमाणु क्रमांक और रासायनिक गुण हमेशा अलग होते हैं।
#29. सोडियम क्लोराइड क्रिस्टल में सोडियम और क्लोराइड आयन 1 : 1 के अनुपात में हैं। सोडियम क्लोराइड के सूत्र इकाई द्रव्यमान ( formula unit mass) की गणना करने के लिए, आप किस प्रक्रिया का उपयोग करेंगे?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना: किसी आयनिक यौगिक (जैसे सोडियम क्लोराइड, $\text{NaCl}$) का सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए उस यौगिक के सूत्र में उपस्थित सभी आयनों/परमाणुओं के व्यक्तिगत परमाण्विक द्रव्यमानों को आपस में जोड़ा (Summed up) जाता है।
- चूंकि $\text{NaCl}$ में सोडियम ($\text{Na}$) और क्लोराइड ($\text{Cl}$) आयन 1:1 के अनुपात में होते हैं, इसलिए इसके सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना इस प्रकार की जाती है:
$$\text{सूत्र इकाई द्रव्यमान } (\text{NaCl}) = (\text{Na का परमाणु द्रव्यमान}) + (\text{Cl का परमाणु द्रव्यमान})$$
$$\text{सूत्र इकाई द्रव्यमान} = 23\text{ u} + 35.5\text{ u} = 58.5\text{ u}$$
- यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसी सहसंयोजक अणुओं के लिए ‘आणविक द्रव्यमान’ (Molecular mass) निकालते समय की जाती है, अंतर केवल इतना है कि आयनिक यौगिकों के क्रिस्टल जालक (Crystal lattice) के लिए इसे ‘सूत्र इकाई द्रव्यमान’ कहा जाता है।
- गुणा करके / विभाजित करके / घटाकर: कुल द्रव्यमान निकालने के लिए कभी भी परमाण्विक द्रव्यमानों को गुणा, भाग या घटाया नहीं जाता; कुल द्रव्यमान हमेशा सभी घटकों के द्रव्यमानों के योग (Addition) से ही प्राप्त होता है।
#30. एक समजातीय श्रेणी के दो क्रमिक सदस्यों के बीच आणविक द्रव्यमान में …………… होता है।
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )
- समजातीय या समांगी श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें दो क्रमिक सदस्यों के अणुसूत्र में हमेशा एक $-\text{CH}_2-$ (मेथलीन समूह) का अंतर होता है।
- इस $-\text{CH}_2-$ समूह के कारण उनके आणविक द्रव्यमान में हमेशा एक निश्चित अंतर बना रहता है:
• कार्बन ($\text{C}$) का परमाणु द्रव्यमान = $12\text{ u}$
• दो हाइड्रोजन ($\text{H}_2$) का परमाणु द्रव्यमान = $2 \times 1 = 2\text{ u}$
• कुल अंतर ($\text{CH}_2$) = $12 + 2 =$ **$14\text{ u}$**
- यही कारण है कि समांगी श्रेणी के किसी भी दो लगातार सदस्यों के आणविक द्रव्यमानों में ठीक **14 u** का अंतर होता है, जबकि उनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं।
- 18u: यह जल ($\text{H}_2\text{O}$) का आणविक द्रव्यमान है (हाइड्रोजन के दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु: $2 + 16 = 18\text{ u}$).
- 12u: यह केवल एक कार्बन परमाणु का द्रव्यमान है।
- 16u: यह केवल एक ऑक्सीजन परमाणु का द्रव्यमान है।
#31. दिए गए कथन को सही विकल्प चुनकर पूरा करें। समभारिकों की परमाणु संख्याएँ भिन्न होती हैं, परन्तु ________ ।
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 2)
- समभारिक (Isobars): ऐसे विभिन्न तत्वों के परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number / प्रोटॉन संख्या) भिन्न होते हैं, किंतु उनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) समान होती है, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
- चूँकि ये अलग-अलग तत्वों से संबंधित होते हैं, इसलिए इनके रासायनिक गुण भी अलग-अलग होते हैं।
- उदाहरण: आर्गन ($^{40}_{18}\text{Ar}$) और कैल्शियम ($^{40}_{20}\text{Ca}$) दोनों का परमाणु द्रव्यमान या द्रव्यमान संख्या **40** है, लेकिन इनके परमाणु क्रमांक क्रमशः 18 और 20 हैं।
- प्रोटॉनों की संख्या समान होती है / इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है: यह विशेषता समस्थानिकों (Isotopes) या समइलेक्ट्रॉनी स्पीशीज की होती है, समभारिकों की नहीं।
- परमाणु द्रव्यमान भिन्न होता है: यह कथन समभारिकों की परिभाषा के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि समभारिकों का मूल लक्षण ही उनका ‘समान द्रव्यमान’ होना है।
#32. मेंडलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में तत्वों को किस क्रम में व्यवस्थित किया था?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 05 Jun, 2025 Shift 2)
- मेंडलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table): रूसी रसायन विज्ञानी दिमित्री मेंडलीफ ने 1869 में अपनी आवर्त सारणी प्रस्तुत की थी। उनके आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) के आवर्ती फलन होते हैं।
- मेंडलीफ ने उस समय ज्ञात सभी तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते हुए क्रम में क्षैतिज पंक्तियों (आवर्त) और ऊर्ध्वाधर स्तंभों (समूह) में व्यवस्थित किया था।
- इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने भविष्य में खोजे जाने वाले तत्वों के लिए अपनी सारणी में खाली स्थान (रिक्तियाँ) भी छोड़ दिए थे और उनके गुणों की सटीक भविष्यवाणी की थी।
- परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में: यह आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) का आधार है, जिसे 1913 में हेनरी मोजले (Henry Moseley) द्वारा प्रतिपादित किया गया था, न कि मेंडलीफ की मूल सारणी का।
- परमाणु त्रिज्या या न्यूट्रॉनों की संख्या के बढ़ते क्रम में: ये आवर्त सारणी के ऐतिहासिक वर्गीकरण के मुख्य मानक नहीं हैं।
#33. आवर्त सारणी में किसी तत्व का स्थान उसकी ________ संख्या से निर्धारित होता है।
(RRB NTPC CBT-I : 21 Mar 2021 Shift 1)
- आधुनिक आवर्त सारणी का आधार: हेनरी मोजले द्वारा प्रतिपादित आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के आवर्ती फलन होते हैं.
- किसी भी तत्व का परमाणु क्रमांक ($Z$) उसके नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को दर्शाता है.
- चूँकि आधुनिक आवर्त सारणी में सभी तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक (यानी प्रोटॉनों की संख्या) के क्रम में व्यवस्थित किया गया है, अतः आवर्त सारणी में किसी तत्व का विशिष्ट स्थान मुख्य रूप से उसकी प्रोटॉन संख्या से निर्धारित होता है.
- इलेक्ट्रॉन: यद्यपि एक उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों के बराबर होती है, किंतु रासायनिक अभिक्रियाओं या आयन बनने के दौरान इलेक्ट्रॉनों की संख्या घट-बढ़ सकती है, जबकि मूल परमाणु क्रमांक हमेशा स्थिर प्रोटॉन संख्या पर निर्भर करता है।
- न्यूट्रॉन और पोजीट्रान: न्यूट्रॉन तत्वों के समस्थानिकों व द्रव्यमान को प्रभावित करते हैं और पोजीट्रान एक उप-परमाणु कण (प्रतिकण) है; इनका आवर्त सारणी के मूल क्रम निर्धारण से सीधा संबंध नहीं है।
#34. परमाणुओं के आकार के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? (
RRB Level 01 Stage I 27/12/2025)
- परमाणु का आमाप (Atomic Size): परमाणु बहुत ही सूक्ष्म कण होते हैं। इनकी त्रिज्या को सामान्यतः नैनोमीटर ($\text{nm}$) या पिकोमीटर में मापा जाता है।
- एनसीईआरटी (NCERT) विज्ञान के अनुसार, $1\text{ মিটার} = 10^9\text{ nm}$ होता है, और हाइड्रोजन के परमाणु की त्रिज्या लगभग $10^{-10}\text{ m}$ (यानी $0.1\text{ nm}$) होती है, जो स्पष्ट रूप से नैनोमीटर के पैमाने (Range) के अंतर्गत आती है।
- अत्यंत सूक्ष्म होने के कारण इन्हें नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता।
- सभी परमाणुओं का आकार एक समान होता है: यह गलत है; अलग-अलग तत्वों के परमाणु क्रमांक और कक्षों की संख्या अलग होने के कारण उनका आकार (त्रिज्या) भी भिन्न होता है।
- परमाणु, अणुओं से बड़े होते हैं: यह कथन विपरीत है; अणु (Molecules) दो या दो से अधिक परमाणुओं के मिलने से बनते हैं, इसलिए अणु आकार में परमाणुओं से बड़े होते हैं।
- परमाणुओं को साधारण सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है: साधारण सूक्ष्मदर्शी (Light Microscope) से परमाणुओं को देखना असंभव है क्योंकि दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य परमाणुओं के आकार से बहुत अधिक होती है। इन्हें देखने के लिए स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप (STM) जैसी उच्च तकनीकी प्रणालियों की आवश्यकता होती है।


