परमाणु संरचना Railway MCQ

 

Results

#1. परमाणु की संरचना का पहला मॉडल था:
(RPF Constable 2024 : 17 Mar, 2025 Shift 3)

सही उत्तर: जे जे थॉमसन द्वारा परमाणु का प्लम पुडिंग मॉडल

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • थॉमसन का मॉडल (1904): यह परमाणु की संरचना का पहला मॉडल था, जिसे वैज्ञानिक जे. जे. थॉमसन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
  • इस मॉडल के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन ठीक वैसे ही धंसे (Embedded) होते हैं जैसे तरबूज में बीज होते हैं, इसलिए इसे ‘प्लम पुडिंग’ या ‘वाटरमेलन मॉडल’ भी कहा जाता है।
  • इस मॉडल की मुख्य सफलता यह थी कि इसने परमाणु के विद्युत उदासीन (Electrically Neutral) होने की व्याख्या की।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु का रदरफोर्ड का ग्रहीय मॉडल: इसे 1911 में अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के आधार पर प्रस्तुत किया गया था, जो थॉमसन के मॉडल के बाद आया।
  • परमाणु का बोर मॉडल: इसे नील्स बोर द्वारा 1913 में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें ऊर्जा स्तरों या कक्षाओं (Orbits) की अवधारणा दी गई।
  • परमाणु का श्रोडिंगर तरंग मॉडल: यह एक आधुनिक क्वांटम यांत्रिकीय मॉडल है जिसे 1926 में इरविन श्रोडिंगर द्वारा विकसित किया गया था।

#2. पदार्थ की वह मात्रा, जिसमें उतने ही निर्दिष्ट मूल कण शामिल होते हैं, जितने कार्बन – 12 समस्थानिक के 12 ग्राम में परमाणुओ की संख्या होती है, ________ कहलाते हैं
। (RRB JE 29 May 2019 Shift 2 CBT 1)

सही उत्तर: मोल

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • मोल (Mole): यह पदार्थ की मात्रा की एसआई (SI) इकाई है। एक मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने ही मूल कण (परमाणु, अणु या आयन) होते हैं, जितने कार्बन-12 समस्थानिक के ठीक 12 ग्राम में परमाणु होते हैं।
  • इस निश्चित संख्या को अवागाद्रो संख्या (Avogadro Number) कहा जाता है, जिसका मान 6.022 × 10²³ होता है।
  • केमिस्ट्री और भौतिकी में रासायनिक गणनाओं को सरल बनाने के लिए ‘मोल’ अवधारणा का उपयोग किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • अणु संख्या: यह किसी पदार्थ में मौजूद अणुओं की कुल संख्या को प्रदर्शित करती है, न कि पदार्थ की मात्रा की मानक माप इकाई को।
  • आयन: यह किसी परमाणु या अणुओं का समूह होता है जिस पर धनात्मक या ऋणात्मक आवेश (Charge) होता है।
  • समस्थानिक (Isotope): यह एक ही तत्व के वे परमाणु हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है (जैसे कार्बन-12 और कार्बन-14)।

#3. किसी तत्व की द्रव्यमान संख्या को किस रूप में परिभाषित किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )

सही उत्तर: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या का योग

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्रव्यमान संख्या (Mass Number): किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या और न्यूट्रॉनों की संख्या के कुल योग को उस तत्व की द्रव्यमान संख्या कहा जाता है। इसे अक्षर ‘A’ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
  • चूँकि परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान उसके नाभिक (न्यूक्लियस) में केंद्रित होता है, और नाभिक में प्रोटॉन व न्यूट्रॉन रहते हैं (जिन्हें संयुक्त रूप से न्यूक्लियॉन कहा जाता है), इसलिए इन्हें द्रव्यमान संख्या का आधार माना जाता है।
  • सूत्र रूप में: द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉनों की संख्या (Z) + न्यूट्रॉनों की संख्या (n)

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • प्रोटॉन की संख्या: यह केवल किसी तत्व के परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z) को दर्शाती है, न कि द्रव्यमान संख्या को।
  • इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की संख्या का योग: यह गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान नगण्य (बहुत कम) होता है और द्रव्यमान संख्या के निर्धारण में इलेक्ट्रॉनों को शामिल नहीं किया जाता।
  • न्यूट्रॉन की संख्या: यह केवल नाभिक में उपस्थित उदासीन कणों की संख्या है, अकेले इसके द्वारा द्रव्यमान संख्या निर्धारित नहीं होती।

#4. मष्तिष्क के ट्यूमर को हटाने और कैंसर के उपचार के लिए प्रयुक्त समस्थानिक कौन सा है?
(RRB JE 28 May 2019 Shift 2 CBT 1)

सही उत्तर: Co – 60

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कोबाल्ट-60 (Co-60): यह कोबाल्ट का एक प्रमुख रेडियोधर्मी समस्थानिक है, जिसका उपयोग ब्रेन ट्यूमर (मस्तिष्क के ट्यूमर) और विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में विकिरण चिकित्सा (Radiation Therapy) के लिए किया जाता है।
  • Co-60 से उच्च-ऊर्जा वाली गामा किरणें (Gamma Rays) निकलती हैं, जो शरीर के ऊतकों में गहराई तक प्रवेश करके कैंसर कोशिकाओं या ट्यूमर को लक्षित कर नष्ट कर देती हैं।
  • चिकित्सा विज्ञान में ट्यूमर को नियंत्रित करने वाली इस प्रक्रिया को अक्सर ‘कोबाल्ट थेरेपी’ कहा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • Na – 24 (सोडियम-24): इसका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में मानव शरीर के भीतर रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) में किसी प्रकार की रुकावट का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  • C – 12 (कार्बन-12): यह कार्बन का एक सामान्य, स्थिर और गैर-रेडियोधर्मी समस्थानिक है, जिसका उपयोग परमाणु द्रव्यमान की मानक इकाई (amu) तय करने में किया जाता है।
  • U – 235 (यूरेनियम-235): यह एक भारी रेडियोधर्मी समस्थानिक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (Nuclear Reactors) में बिजली बनाने और परमाणु हथियारों में किया जाता है।

#5. समान द्रव्यमान संख्या लेकिन भिन्न परमाणु क्रमांक वाले परमाणुओ को क्या कहा जाता है?
(RRB JE CBT I :- 2 June 2019 Shift 1)

सही उत्तर: समभारिक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिक (Isobars): ऐसे विभिन्न तत्वों के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) समान होती है लेकिन परमाणु क्रमांक (Atomic Number) भिन्न होते हैं, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
  • चूँकि इनके परमाणु क्रमांक अलग-अलग होते हैं, इसलिए ये अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं (जैसे रासायनिक गुण भी भिन्न होते हैं)।
  • उदाहरण: आर्गन ($_{18}\text{Ar}^{40}$), पोटैशियम ($_{19}\text{K}^{40}$) और कैल्सीयम ($_{20}\text{Ca}^{40}$), इन तीनों की द्रव्यमान संख्या समान (40) है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • सम न्यूट्रॉनिक (Isotones): वे परमाणु जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें सम न्यूट्रॉनिक कहा जाता है (जैसे $_{6}\text{C}^{14}$ और $_{8}\text{O}^{16}$).
  • समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के वे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है (जैसे $_{1}\text{H}^1$, $_{1}\text{H}^2$, $_{1}\text{H}^3$).
  • न्यूक्लीऑनों: यह परमाणु के नाभिक में उपस्थित कणों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) का संयुक्त नाम है, न कि किसी विशिष्ट प्रकार के परमाणुओं का युग्म।



#6. आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों के अभिलक्षण किसके आवधिक फलन होते हैं:
(RRB NTPC UG CBT-I : 08 Sept, 2025 Shift 3)

सही उत्तर: परमाणु क्रमांक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आधुनिक आवर्त नियम (Modern Periodic Law): सन् 1913 में हेनरी मोज़ले (Henry Moseley) द्वारा प्रतिपादित इस नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के आवर्ती फलन (Periodic Function) होते हैं।
  • यह नियम मेंडलीफ के उस पुराने नियम में सुधार करके लाया गया था जो परमाणु द्रव्यमान पर आधारित था, क्योंकि परमाणु क्रमांक किसी तत्व का अधिक मौलिक और सटीक गुण है।
  • आधुनिक आवर्त सारणी इसी नियम पर आधारित है, जिसमें तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु भार / परमाणु द्रव्यमान: यह मेंडलीफ के मूल आवर्त नियम का आधार था, जिसके अनुसार तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन होते हैं (जो आधुनिक नियम के लिए सही नहीं माना गया)।
  • समस्थानिक द्रव्यमान: यह किसी विशिष्ट समस्थानिक के द्रव्यमान को दर्शाता है, जिसे आवर्त सारणी के वर्गीकरण का मुख्य आधार नहीं बनाया गया है।

#7. संयोजि इलेक्ट्रॉन मौजूद होते हैं:
(RRB NTPC CBT-I : 4 Feb 2021 Shift 1)

सही उत्तर: किसी परमाणु का सबसे बाहरी कोश

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons): किसी भी परमाणु के सबसे बाहरी ऊर्जा स्तर या कोश (Valence Shell) में उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या को संयोजी इलेक्ट्रॉन कहा जाता है।
  • ये इलेक्ट्रॉन किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में मुख्य रूप से भाग लेते हैं और यही इलेक्ट्रॉन तत्व की रासायनिक प्रकृति, संयोजकता (Valency) तथा बंध बनाने की क्षमता को निर्धारित करते हैं।
  • उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) का परमाणु क्रमांक 11 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 होता है, अतः इसके सबसे बाहरी कोश में 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • किसी परमाणु का सबसे भीतरी कोश: सबसे भीतरी कोश (जैसे K-कोश) के इलेक्ट्रॉन नाभिक से सबसे अधिक मजबूती से बंधे होते हैं और वे रासायनिक क्रियाओं में हिस्सा नहीं लेते।
  • एक परमाणु के ठीक बाहर: इलेक्ट्रॉन परमाणु के नाभिक के चारों ओर निर्धारित ऊर्जा कक्षाओं (कोशों) के अंदर ही चक्कर लगाते हैं, परमाणु के बाहर स्वतंत्र रूप से नहीं होते।
  • किसी परमाणु का सबसे भीतरी और सबसे बाहरी कोश: यह गलत है क्योंकि केवल सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों को ही ‘संयोजी इलेक्ट्रॉन’ कहा जाता है, भीतरी कोश के इलेक्ट्रॉनों को ‘कोर इलेक्ट्रॉन’ (Core Electrons) कहते हैं।

#8. यदि वायु, जल और क्राउन काँच के अपवर्तनांक क्रमशः n 1,n 2 और n 3 हैं, तो ________ ।
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 1)

सही उत्तर: n 1 < n 2 < n 3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अपवर्तनांक (Refractive Index): किसी माध्यम का अपवर्तनांक यह बताता है कि उसमें प्रकाश की चाल निर्वात (या वायु) की तुलना में कितनी कम हो जाती है। माध्यम जितना सघन होता है, उसका अपवर्तनांक उतना ही अधिक होता है।
  • दी गई सामग्री के अनुसार:
    • वायु ($n_1$): यह सबसे विरल माध्यम है, इसलिए इसका अपवर्तनांक सबसे कम होता है ($n_1 \approx 1.0003$)।
    • जल ($n_2$): यह वायु से अधिक सघन होता है, इसलिए इसका अपवर्तनांक वायु से अधिक होता है ($n_2 \approx 1.33$)।
    • क्राउन काँच ($n_3$): यह जल और वायु दोनों की तुलना में सबसे अधिक सघन माध्यम है, अतः इसका अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है ($n_3 \approx 1.52$)।
  • इसलिए सही संबंध $n_1 < n_2 < n_3$ है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • $n_1 > n_2 > n_3$: यह विकल्प उल्टा है, क्योंकि इसमें वायु के अपवर्तनांक को सबसे अधिक और काँच के अपवर्तनांक को सबसे कम बताया गया है, जो कि भौतिक रूप से असंभव है।
  • $n_1 = n_2 < n_3$: यह गलत है क्योंकि वायु और जल दोनों के घनत्व और प्रकाशीय गुण अलग-अलग होते हैं, इसलिए उनके अपवर्तनांक समान नहीं हो सकते।
  • $n_1 < n_2 = n_3$: यह भी गलत है क्योंकि जल और काँच दोनों की प्रकाशीय सघनता में अंतर होता है, अतः उनके अपवर्तनांक भी भिन्न (क्रमशः ~1.33 और ~1.52) होते हैं।

#9. वायुमंडल के उच्च स्तर पर ओजोन ________ अणु का एक उत्पाद है।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 1)

सही उत्तर: ऑक्सीजन पर कार्यकारी यूवी विकिरण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ओजोन का निर्माण: वायुमंडल के उच्च स्तर (विशेषकर समताप मंडल या स्ट्रेटोस्फीयर) में, सूर्य की उच्च ऊर्जा वाली पराबैंगनी (UV) विकिरणें आणविक ऑक्सीजन (O₂) पर कार्य करती हैं।
  • ये UV किरणें ऑक्सीजन के द्वि-परमाणुक अणुओं (O₂) को तोड़कर स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु (O) में विभाजित कर देती हैं।
  • ये स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु फिर ऑक्सीजन के अन्य अणु (O₂) के साथ मिलकर ओजोन (O₃) का निर्माण करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • हाइड्रोजन/हीलियम/नाइट्रोजन पर कार्यकारी यूवी विकिरण: ये विकल्प गलत हैं क्योंकि वायुमंडल में ओजोन परत के निर्माण की रासायनिक प्रक्रिया मुख्य रूप से केवल ऑक्सीजन गैस और UV किरणों की परस्पर क्रिया पर आधारित होती है।

#10. ‘ सूत्र इकाई द्रव्यमान’ पद का क्या अर्थ है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )

सही उत्तर: यौगिक के सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): किसी आयनिक यौगिक या पदार्थ के रासायनिक सूत्र में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के कुल योग को ‘सूत्र इकाई द्रव्यमान’ कहा जाता है।
  • चूँकि आयनिक यौगिक (जैसे NaCl) स्वतंत्र अणुओं के रूप में नहीं बल्कि आयनों के जालक (Lattice) के रूप में होते हैं, इसलिए इनके लिए ‘आणविक द्रव्यमान’ शब्द के स्थान पर ‘सूत्र इकाई द्रव्यमान’ पद का प्रयोग किया जाता है।
  • इसे भी परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) में ही मापा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • एक सहसंयोजक यौगिक के एक अणु का द्रव्यमान: इसे आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass) कहा जाता है, जिसका उपयोग सहसंयोजक अणुओं (जैसे H₂O, CO₂) के लिए होता है।
  • यौगिक के एक मोल में परमाणुओं का कुल द्रव्यमान: इसे पदार्थ का मोलर द्रव्यमान (Molar Mass) कहा जाता है, जिसे ग्राम प्रति मोल (g/mol) में व्यक्त किया जाता है।
  • एक परमाणु में एकल प्रोटॉन का द्रव्यमान: यह परमाणु के भीतर मौजूद एक अतिसूक्ष्म उप-परमाणु कण (प्रोटॉन) का व्यक्तिगत द्रव्यमान है, न कि किसी यौगिक की सूत्र इकाई का द्रव्यमान।



#11. किसी अणु का आपेक्षिक द्रव्यमान किस रूप में व्यक्त किया जाता है?
(RPF Constable 2018 09 Feb 2019)

सही उत्तर: अणु द्रव्यमान इकाई

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आपेक्षिक आणविक द्रव्यमान (Relative Molecular Mass): किसी पदार्थ का आपेक्षिक आणविक द्रव्यमान उसके अणु में उपस्थित सभी घटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है।
  • इसे कार्बन-12 (¹²C) समस्थानिक के एक परमाणु के द्रव्यमान के 1/12वें भाग के सापेक्ष मापा जाता है।
  • इस मान को व्यक्त करने के लिए अणु द्रव्यमान इकाई (Atomic Mass Unit – amu या u) का प्रयोग किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • द्रव्यमान संख्या: यह किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या होती है, न कि अणु के आपेक्षिक द्रव्यमान को व्यक्त करने की इकाई।
  • परमाणु संख्या: यह किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाती है, न कि द्रव्यमान मापने की इकाई।
  • परमाण्विक भार इकाई: हालांकि यह अवधारणा परमाणु भार से संबंधित है, लेकिन अणुओं के द्रव्यमान के संदर्भ में सही और मानक पद ‘अणु द्रव्यमान इकाई’ है।

#12. ” स्वर्ण पत्र प्रयोग के माध्यम से नाभिक की खोज का श्रेय किसे दिया जाता है?”
(RRB NTPC UG CBT-I : 13 Aug, 2025 Shift 1)

सही उत्तर: अर्नेस्ट रदरफोर्ड

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • रदरफोर्ड का अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): वैज्ञानिक अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने सहयोगियों के साथ सोने की अत्यंत पतली पन्नी (Gold Foil) पर तेज़ गति वाले अल्फा कणों (He²⁺) की बौछार की थी।
  • इस प्रयोग से यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु के भीतर का अधिकांश भाग खाली है, और उसके केंद्र में एक अत्यंत छोटा, सघन तथा धनावेशित भाग होता है जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है।
  • नाभिक की खोज परमाणु भौतिकी के इतिहास में एक क्रांतिकारी खोज थी।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • बोर (नील्स बोर): इन्होंने 1913 में रदरफोर्ड के मॉडल की कमियों को दूर करते हुए परमाणु का ऊर्जा-स्तर (Orbit) मॉडल प्रस्तुत किया था।
  • जॉन डाल्टन: इन्होंने 1808 में ‘डाल्टन का परमाणु सिद्धांत’ प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार परमाणु अविभाज्य (Indivisible) होता है।
  • लवॉजिए: इन्हें ‘आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक’ कहा जाता है, जिन्होंने रासायनिक संयोजन के नियमों और दहन की प्रक्रिया पर कार्य किया।

#13. ऋणात्मक आवेशित आयन को ________ के रूप में जाना जाता है।
(RRB JE 26 May 2019 Shift 3 CBT 1)

सही उत्तर: ऋणायन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ऋणायन (Anion): जब कोई परमाणु या परमाणुओं का समूह एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है, तब उस पर ऋणात्मक आवेश आ जाता है। ऐसे ऋणावेशित आयन को ‘ऋणायन’ कहा जाता है।
  • विद्युत क्षेत्र (Electrolysis) के दौरान ऋणायन हमेशा धनात्मक इलेक्ट्रोड यानी एनोड (Anode) की तरफ आकर्षित होते हैं।
  • उदाहरण: क्लोराइड आयन (Cl⁻), ऑक्साइड आयन (O²⁻) आदि।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • धनायन (Cation): यह एक धनावेशित आयन होता है जो इलेक्ट्रॉनों के त्याग (Loss) के कारण बनता है (जैसे Na⁺, Ca²⁺)।
  • एनोड (Anode): यह किसी विद्युत सेल या इलेक्ट्रोलाइटिक सेल का धनात्मक टर्मिनल (Positive Electrode) होता है, न कि स्वयं कोई आयन।
  • कैथोड (Cathode): यह किसी सेल का ऋणात्मक टर्मिनल (Negative Electrode) होता है, जिसकी ओर विद्युत अपघटन के दौरान धनायन आकर्षित होते हैं।

#14. किसी आवर्त में बाएं दाएं जाने पर निम्नलिखित में से कौन-सा घटता है?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1)

सही उत्तर: परमाणु त्रिज्या

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius): आधुनिक आवर्त सारणी में किसी आवर्त (Period) में जब हम बाएं से दाएं (Left to Right) जाते हैं, तो परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या बढ़ती है, जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) बढ़ता है।
  • यह बढ़ता हुआ नाभिकीय आवेश बाहरी कक्ष के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर अधिक मजबूती से खींचता है, जिसके कारण परमाणु का आकार सिकुड़ जाता है और परमाणु त्रिज्या घटती है

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉन बन्धुता (Electron Affinity): आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु का आकार छोटा होने के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती है, अतः इलेक्ट्रॉन बन्धुता बढ़ती है
  • वैद्युतऋणात्मकता (Electronegativity): नाभिकीय आकर्षण बढ़ने के कारण आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता भी बढ़ती है (जैसे फ्लोरीन की सबसे अधिक होती है)।
  • आयनीकरण ऊर्जा (Ionization Energy): आकार छोटा होने और नाभिक का प्रभाव बढ़ने के कारण बाहरी कक्षा से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए आयनीकरण ऊर्जा भी बढ़ती है

#15. आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों के ________ पर आधारित है
। (RRB JE CBT I :- 22 Jan 2021 Shift 1)

सही उत्तर: परमाणु संख्या

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table): यह सारणी इस नियम पर आधारित है कि तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number / परमाणु संख्या) के आवर्ती फलन होते हैं।
  • इसे 1913 में वैज्ञानिक हेनरी मोज़ले द्वारा विकसित किया गया था। इस सारणी में तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में व्यवस्थित किया गया है, जिससे मेंडलीफ की आवर्त सारणी की कई विसंगतियाँ दूर हो गईं।
  • परमाणु क्रमांक किसी तत्व के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाता है, जो उसका एक अत्यंत मौलिक गुण है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु द्रव्यमान: यह दिमित्री मेंडलीफ की मूल आवर्त सारणी का आधार था (परमाणु भार), जिसे आधुनिक आवर्त सारणी में बदल दिया गया क्योंकि यह समस्थानिकों की स्थिति को स्पष्ट नहीं कर पाता था।
  • संयोजकता: यह किसी तत्व की संयोजन क्षमता को दर्शाती है, जो एक ही समूह (Group) के तत्वों में समान हो सकती है, लेकिन पूरी आवर्त सारणी का मुख्य वर्गीकरण आधार परमाणु संख्या है।
  • तुल्यांकी भार: यह रासायनिक यौगिकों में प्रतिक्रिया करने वाले द्रव्यमान का अनुपात है, जिसका उपयोग आवर्त सारणी के निर्माण में नहीं किया जाता।



#16. विभिन्न तत्वों के परमाणु जिनके ________ क्रमांक भिन्न-भिन्न होते हैं लेकिन ________ संख्या समान होती है, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )

सही उत्तर: परमाणु, द्रव्यमान

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिक (Isobars): ऐसे विभिन्न तत्वों के परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) भिन्न-भिन्न होते हैं, लेकिन उनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) समान होती है, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
  • वाक्य के रिक्त स्थानों के अनुसार: पहला रिक्त स्थान ‘परमाणु’ (परमाणु क्रमांक) और दूसरा रिक्त स्थान ‘द्रव्यमान’ (द्रव्यमान संख्या) को दर्शाता है।
  • उदाहरण: आर्गन ($_{18}\text{Ar}^{40}$), पोटैशियम ($_{19}\text{K}^{40}$) और कैल्शियम ($_{20}\text{Ca}^{40}$) समभारिक के प्रमुख उदाहरण हैं, क्योंकि इन सबका द्रव्यमान समान (40) है लेकिन परमाणु क्रमांक अलग-अलग हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • द्रव्यमान, द्रव्यमान / द्रव्यमान, परमाणु / परमाणु, परमाणु: ये सभी संयोजन समभारिक की परिभाषा को गलत रूप से पूरा करते हैं, क्योंकि समभारिकों में भिन्न परमाणु क्रमांक और समान द्रव्यमान संख्या का होना आवश्यक है।

#17. समस्थानिक एक ही तत्व के परमाणु होते हैं, जिनमें ________ होती/होते हैं।
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

सही उत्तर: समान परमाणु संख्या लेकिन भिन्न द्रव्यमान संख्या

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के ऐसे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) समान होता है, लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या अलग होने के कारण उनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न होती है।
  • चूँकि रासायनिक गुण इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या (यानी परमाणु क्रमांक) पर निर्भर करते हैं, इसलिए एक ही तत्व के सभी समस्थानिकों के रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं, लेकिन उनके भौतिक गुणधर्म थोड़े भिन्न हो सकते हैं।
  • उदाहरण: हाइड्रोजन के तीन प्रमुख समस्थानिक हैं — प्रोटियम ($_{1}\text{H}^1$), ड्यूटेरियम ($_{1}\text{H}^2$) और ट्रिटियम ($_{1}\text{H}^3$), इन सभी में प्रोटॉन की संख्या 1 है, लेकिन द्रव्यमान संख्या क्रमशः 1, 2 और 3 है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • समान द्रव्यमान संख्या लेकिन भिन्न परमाणु संख्या: इसे समभारिक (Isobars) कहा जाता है, जो अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं।
  • प्रोटॉन की अलग-अलग संख्या: यह विकल्प गलत है क्योंकि एक ही तत्व के सभी परमाणुओं और उनके समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या हमेशा समान होती है।
  • अलग-अलग रासायनिक गुणधर्म: चूंकि समस्थानिक एक ही तत्व के होते हैं और उनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए उनके रासायनिक गुणधर्म मूल रूप से समान होते हैं।

#18. किसी गतिशील वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य सामान्यतः ________ होता है।
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )

सही उत्तर: ऋणात्मक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य (Work done by Friction): घर्षण बल हमेशा किसी गतिशील वस्तु की गति की दिशा के विपरीत दिशा में कार्य करता है।
  • चूँकि कार्य का सूत्र $W = F \cdot s \cdot \cos\theta$ होता है, यहाँ बल ($F$) और विस्थापन ($s$) के बीच का कोण ($\theta$) $180^\circ$ होता है, और $\cos(180^\circ) = -1$ होता है।
  • इसलिए, घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य हमेशा ऋणात्मक (Negative) होता है, क्योंकि यह वस्तु की गति का विरोध करता है और उसकी ऊर्जा को कम करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • धनात्मक: धनात्मक कार्य तब होता है जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों, जबकि घर्षण हमेशा विपरीत दिशा में लगता है।
  • शून्य: कार्य शून्य तब होता है जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत हों ($90^\circ$), जो कि घर्षण के मामले में नहीं होता।
  • धनात्मक और ऋणात्मक दोनों: गति की दिशा के विपरीत होने के कारण घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य सदैव ऋणात्मक ही होता है।

#19. परमाणु के नाभिक में उपस्थित न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या का योग ________ कहलाता है।
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 2)

सही उत्तर: द्रव्यमान संख्या

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्रव्यमान संख्या (Mass Number): किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या और न्यूट्रॉनों की संख्या के कुल योग को उस तत्व की द्रव्यमान संख्या कहा जाता है। इसे अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘A’ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
  • चूँकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों ही परमाणु के नाभिक के भीतर निवास करते हैं, इसलिए इन्हें संयुक्त रूप से न्यूक्लिऑन (Nucleons) भी कहा जाता है। परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान इसी नाभिक में केंद्रित होता है।
  • सूत्र रूप में: द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉनों की संख्या (Z) + न्यूट्रॉनों की संख्या (n)

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु क्रमांक (Atomic Number): यह केवल किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या (या उदासीन परमाणु के इलेक्ट्रॉनों की संख्या) को दर्शाता है, न कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के योग को।
  • समानता और कनेक्टिविटी: ये दोनों भौतिकी या रसायन विज्ञान में परमाणु की संरचना या द्रव्यमान को परिभाषित करने वाले वैज्ञानिक पद नहीं हैं, बल्कि यहाँ विकल्पों को भ्रमित करने के लिए दिए गए हैं।

#20. मेटास्टेटिक अस्थि कैंसर के उपचार के लिए किस रेडियोआइसोटोप ( radioisotope) का उपयोग किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 15 Feb 2021 Shift 1)

सही उत्तर: स्ट्रोंटियम – 89 (Strontium – 89)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • स्ट्रोंटियम-89 (Strontium-89): यह एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है जिसका उपयोग मुख्य रूप से मेटास्टेटिक अस्थि कैंसर (Metastatic Bone Cancer) से पीड़ित रोगियों में हड्डियों के दर्द को कम करने और उपचार के लिए किया जाता है।
  • चूँकि स्ट्रोंटियम रासायनिक रूप से कैल्शियम के समान होता है, इसलिए यह शरीर में जाने के बाद सीधे हड्डी के उन हिस्सों में जमा हो जाता है जहाँ कैंसर या ट्यूमर के कारण नई हड्डी का तेजी से निर्माण हो रहा होता है।
  • यहाँ यह स्थानीय रूप से बीटा किरणें (Beta Radiation) उत्सर्जित करके ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करता है और दर्द से राहत दिलाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • कार्बन – 14 (Carbon-14): इसका उपयोग मुख्य रूप से पुरातत्व और जीवाश्मों की आयु का पता लगाने के लिए ‘कार्बन डेटिंग’ (Radiocarbon Dating) तकनीक में किया जाता है।
  • आयोडीन – 131 (Iodine-131): इसका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में मुख्य रूप से थाइराइड ग्रंथि के विकारों (जैसे हाइपरथाइराइडिज्म और थाइराइड कैंसर) के उपचार के लिए किया जाता है।
  • फॉस्फोरस – 32 (Phosphorous-32): इसका उपयोग कुछ प्रकार के रक्त विकारों (जैसे पॉलीसिथिमिया वेरा) और ल्यूकेमिया के उपचार में किया जाता है, न कि विशेष रूप से मेटास्टेटिक अस्थि कैंसर के लिए।



#21. आयन क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )

सही उत्तर: एक परमाणु या परमाणुओं का समूह, जिसमें धनात्मक या ऋणात्मक आवेश हो

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आयन (Ion): जब किसी परमाणु या परमाणुओं के समूह द्वारा इलेक्ट्रॉनों का त्याग या ग्रहण किया जाता है, तब उस पर विद्युत आवेश (Charge) उत्पन्न हो जाता है। ऐसे आवेशित कण को ही आयन कहा जाता है।
  • आयन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
    • धनायन (Cation): इलेक्ट्रॉनों के त्याग से बनने वाला धनावेशित आयन (जैसे Na⁺, Mg²⁺)।
    • ऋणायन (Anion): इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने से बनने वाला ऋणावेशित आयन (जैसे Cl⁻, O²⁻)।
  • आयनिक यौगिकों का निर्माण इन्हीं धनायनों और ऋणायनों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic Force) के कारण होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • एक प्रोटॉन: यह परमाणु के नाभिक में मौजूद एक उप-परमाणु कण है जिस पर धनात्मक आवेश होता है, लेकिन यह स्वयं एक ‘आयन’ नहीं है।
  • एक उदासीन परमाणु: जिस परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है और कुल आवेश शून्य होता है, उसे ‘उदासीन परमाणु’ कहते हैं, आयन नहीं।
  • एक अणु: यह दो या दो से अधिक परमाणुओं का एक रासायनिक रूप से बंधा हुआ उदासीन समूह होता है (जैसे H₂O), जिस पर कोई नेट आवेश नहीं होता है।

#22. एक तत्व X के दो समस्थानिक : 6X12 और 6X14 हैं। दोनों विद्युत रूप से उदासीन और रासायनिक रूप से समरूप हैं, लेकिन उनमें से एक अस्थायी और रेडियोसक्रिय है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वोत्तम रूप से व्याख्या करता है कि 6X14 रेडियोसक्रिय क्यों है, जबकि दोनों समस्थानिकों में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

सही उत्तर: क्योंकि 6X14 में आधिक्य न्यूट्रॉन होते हैं, जिससे परमाणु बलों में असंतुलन होता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समस्थानिकों में रेडियोधर्मिता का कारण: सामान्य कार्बन ($_{6}\text{X}^{12}$) में 6 प्रोटॉन और 6 न्यूट्रॉन होते हैं, जो एक स्थायी अनुपात है। इसके विपरीत, रेडियोकार्बन ($_{6}\text{X}^{14}$) में प्रोटॉनों की तुलना में न्यूट्रॉनों की संख्या अधिक (8 न्यूट्रॉन) होती है।
  • न्यूट्रॉन और प्रोटॉन का यह असंतुलित अनुपात नाभिक के भीतर के बलों (Nuclear Forces) में अस्थिरता पैदा करता है, जिससे नाभिक स्वतः क्षय (Radioactive Decay) होने लगता है।
  • चूँकि रासायनिक गुण केवल इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या पर निर्भर करते हैं, इसलिए दोनों समस्थानिक रासायनिक रूप से समान होने के बावजूद नाभिकीय स्तर पर अस्थिरता के कारण भिन्न व्यवहार दर्शाते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • नाभिक का छोटा आकार: आकार छोटा होने या न्यूट्रॉन को दृढ़ता से न बांध पाने के कारण यह अस्थिर नहीं होता, बल्कि मुख्य कारण न्यूट्रॉनों का आधिक्य (Neutron-to-Proton Ratio) है।
  • प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या बराबर होना: $_{6}\text{X}^{12}$ में प्रोटॉन (6) और न्यूट्रॉन (6) बराबर होते हैं और वह पूर्णतः स्थायी होता है, न कि अस्थिर।
  • प्रोटॉन की तुलना में इलेक्ट्रॉन अधिक होना: प्रश्न में स्पष्ट है कि दोनों विद्युत रूप से उदासीन हैं (यानी प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन दोनों में समान हैं), इसलिए इलेक्ट्रॉनों का अधिक होना तथ्यात्मक रूप से गलत है।

#23. निम्नलिखित में से कौन NaCl का सूत्र इकाई द्रव्यमान है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 3)

सही उत्तर: 58.5 u

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • NaCl का सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): सोडियम क्लोराइड (NaCl) एक आयनिक यौगिक है। इसका सूत्र इकाई द्रव्यमान इसके घटक तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है।
  • सोडियम (Na) का परमाणु द्रव्यमान = 23 u
  • क्लोरीन (Cl) का परमाणु द्रव्यमान = 35.5 u
  • गणना: 23 + 35.5 = 58.5 u

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • 71 u, 46.5 u और 94 u: ये मान सोडियम क्लोराइड के परमाणु या आयनिक द्रव्यमान की सही गणना से मेल नहीं खाते हैं, इसलिए ये गलत विकल्प हैं।

#24. द्विविस्थापन अभिक्रिया में आमतौर पर किसका आदान-प्रदान होता है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)

सही उत्तर: आयनों का

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है और नए यौगिकों का निर्माण होता है, उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रिया कहा जाता है।
  • इस प्रकार की अभिक्रियाओं में अक्सर एक अवक्षेप (Precipitate) का निर्माण होता है, इसलिए इन्हें अवक्षेपण अभिक्रियाएँ भी कहा जाता है।
  • उदाहरण: जब सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) और बेरियम क्लोराइड (BaCl₂) के विलयनों को मिलाया जाता है, तो बेरियम आयन (Ba²⁺) और सल्फेट आयन (SO₄²⁻) आपस में मिलकर बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप बनाते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान: इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण या आदान-प्रदान मुख्य रूप से **रेडॉक्स (ऑक्सीकरण-अपचयन) अभिक्रियाओं** में होता है, न कि सामान्य द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में।
  • प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों का आदान-प्रदान: ये उप-परमाणु कण परमाणु के नाभिक के भीतर स्थित होते हैं और सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान इनका आदान-प्रदान नहीं होता है।

#25. किसी तत्व का सबसे छोटा कण जो उसके गुणों को बरकरार रखता है, उसे क्या कहते हैं?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3)

सही उत्तर: परमाणु

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • परमाणु (Atom): किसी भी रासायनिक तत्व का वह सूक्ष्मतम (सबसे छोटा) कण है जो उस तत्व के सभी रासायनिक गुणों को बरकरार रखता है और रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है।
  • यह स्वतंत्र रूप से रासायनिक रूप से क्रियाशील हो सकता है या अणुओं का निर्माण कर सकता है।
  • प्रत्येक तत्व का परमाणु उसके नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) द्वारा विशिष्ट रूप से पहचाना जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन: ये परमाणु के भीतर पाए जाने वाले उप-परमाणु कण (Subatomic Particles) हैं, न कि स्वतंत्र रूप से किसी तत्व के संपूर्ण गुणों को बरकरार रखने वाला कण।
  • मिश्रण: यह दो या दो से अधिक पदार्थों का किसी भी अनुपात में मिलाया गया एक भौतिक रूप है, न कि किसी तत्व का सबसे छोटा कण।



#26. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, इसको अच्छी तरह से स्पष्ट करता है कि किसी तत्व के समस्थानिकों के रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं लेकिन भौतिक गुणधर्म भिन्न होते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )

सही उत्तर: समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है, लेकिन उनके न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है, जो द्रव्यमान जैसे भौतिक गुणों को प्रभावित करती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • रासायनिक गुणधर्मों की समानता: किसी तत्व के सभी समस्थानिकों में परमाणु संख्या (यानी प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की संख्या) समान होती है। चूँकि रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्य रूप से बाहरी इलेक्ट्रॉनों के विन्यास पर निर्भर करती हैं, इसलिए इनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
  • भौतिक गुणधर्मों की भिन्नता: न्यूट्रॉनों की संख्या अलग-अलग होने के कारण समस्थानिकों के द्रव्यमान (Mass) में अंतर आ जाता है। द्रव्यमान में यह भिन्नता उनके घनत्व, क्वथनांक, गलनांक और अन्य भौतिक गुणों को प्रभावित करती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • प्रोटॉन की संख्या भिन्न होना: यह गलत है, क्योंकि एक ही तत्व के समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या हमेशा समान होती है।
  • परमाणु संरचना का पूरी तरह भिन्न होना: समस्थानिकों की परमाणु संरचना में केवल न्यूट्रॉनों की संख्या का अंतर होता है, बाकी मूल संरचना समान होती है।
  • इलेक्ट्रॉनों की संख्या भिन्न होना: समस्थानिक विद्युत रूप से उदासीन होते हैं और उनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी समान होती है, भिन्न नहीं।

#27. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, सूत्र इकाई को परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )

सही उत्तर: किसी आयनिक यौगिक की सूत्र इकाई में सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): इस शब्दावली का प्रयोग विशेष रूप से आयनिक यौगिकों (जैसे NaCl, CaCl₂ आदि) के द्रव्यमान को दर्शाने के लिए किया जाता है।
  • चूँकि आयनिक यौगिक स्वतंत्र अणुओं के रूप में नहीं बल्कि विपरीत आवेशित आयनों के त्रिविमीय जालक (Lattice) के रूप में व्यवस्थित होते हैं, इसलिए इनके रासायनिक सूत्र द्वारा प्रदर्शित इकाई में उपस्थित सभी आयनों/परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग को ‘सूत्र इकाई’ कहा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • एक अणु का द्रव्यमान: इसे आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass) कहा जाता है, जिसका उपयोग सहसंयोजक अणुओं (जैसे H₂O, CO₂) के लिए किया जाता है।
  • किसी यौगिक के एक मोल का द्रव्यमान: इसे पदार्थ का मोलर द्रव्यमान (Molar Mass) कहा जाता है।
  • एक परमाणु का द्रव्यमान: इसे संबंधित तत्व का परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) कहा जाता है।

#28. थॉमसन के मॉडल को प्रायः ‘प्लम पुडिंग मॉडल ( plum pudding model)’ कहा जाता है। इस एनालॉग में, ‘प्लम (plum)’ किसे निरूपित करता है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

सही उत्तर: इलेक्ट्रॉन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • थॉमसन का प्लम पुडिंग मॉडल: जे. जे. थॉमसन द्वारा 1904 में प्रस्तुत परमाणु मॉडल के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसमें ऋण आवेशित कण धंसे होते हैं।
  • इस एनालॉग (समानता) में:
    • प्लम (Plum) या तरबूज के बीज: यह इलेक्ट्रॉनों को निरूपित करते हैं जो धनावेशित गोले के भीतर बिखरे या धंसे रहते हैं।
    • पुडिंग या तरबूज का लाल खाने योग्य भाग: यह पूरे परमाणु में फैले हुए धनावेश (Positive Charge) को निरूपित करता है।
  • चूँकि कुल धनावेश और ऋणावेश परिमाण में समान होते हैं, इसलिए परमाणु समग्र रूप से विद्युत रूप से उदासीन (Electrically Neutral) होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • प्रोटॉन: थॉमसन के इस मॉडल में धनावेश को समग्र रूप से पुडिंग या गोले के रूप में माना गया था, जबकि ‘प्रोटॉन’ शब्द बाद में रदरफोर्ड द्वारा दिया गया।
  • न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन की खोज जेम्स चैंडविक द्वारा 1932 में की गई थी, और थॉमसन के 1904 के मॉडल में इसकी कोई अवधारणा नहीं थी।
  • अल्फा कण: इनका उपयोग बाद में रदरफोर्ड द्वारा अपने प्रकीर्णन प्रयोग में परमाणु के नाभिक की खोज के लिए किया गया था।

#29. इलेक्ट्रॉनिक शेल के साथ उच्चतम मुख्य क्वांटम संख्या के साथ संबंधित इलेक्ट्रॉनों को ________ कहा जाता है।
(RPF SI 2018 : 11 Jan 2019 Shift 1)

सही उत्तर: संयोजी इलेक्ट्रॉन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons): किसी परमाणु के सबसे बाहरी ऊर्जा स्तर या कोश, जिसकी मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) उच्चतम होती है, में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजी इलेक्ट्रॉन कहा जाता है।
  • ये इलेक्ट्रॉन परमाणु के सबसे बाहरी भाग में स्थित होते हैं और रासायनिक बंध (Chemical Bonds) बनाने तथा तत्व की संयोजकता (Valency) निर्धारित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • कोर इलेक्ट्रॉन (Core Electrons): ये वे आंतरिक इलेक्ट्रॉन होते हैं जो उच्चतम मुख्य क्वांटम संख्या वाले सबसे बाहरी कोश के नीचे के भीतरी कोशों में पाए जाते हैं।
  • प्रभावी इलेक्ट्रॉन और बैंड इलेक्ट्रॉन: ये इस संदर्भ में परमाणु की आंतरिक संरचना या क्वांटम संख्या को परिभाषित करने वाले मानक पद नहीं हैं।

#30. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म, एक ही तत्व को निरूपित करता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )

सही उत्तर: समान परमाणु संख्या, भिन्न द्रव्यमान संख्या

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • एक ही तत्व के परमाणु (समस्थानिक / Isotopes): किसी भी रासायनिक तत्व के सभी परमाणुओं में प्रोटॉनों की संख्या (यानी परमाणु संख्या / Atomic Number) हमेशा समान होती है।
  • यदि ऐसे परमाणुओं में न्यूट्रॉनों की संख्या अलग-अलग होती है, तो उनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न हो जाती है। चूंकि किसी तत्व की पहचान उसके परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन संख्या) से होती है, इसलिए ऐसे युग्म एक ही तत्व को निरूपित करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • समान द्रव्यमान संख्या, भिन्न परमाणु संख्या: इन्हें समभारिक (Isobars) कहा जाता है, जो अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं।
  • न्यूट्रॉन की समान संख्या, भिन्न परमाणु संख्या: इन्हें समन्यूट्रॉनिक (Isotones) कहा जाता है, जो विभिन्न तत्वों से संबंधित हैं।
  • प्रोटॉन की भिन्न संख्या, न्यूट्रॉन की समान संख्या: यह किसी भी मानक वर्गीकरण (जैसे समस्थानिक या समभारिक) को परिभाषित नहीं करता और यह अलग-अलग तत्वों को दर्शाता है।



#31. किसी धातु के निष्कर्षण की विधि ________ पर निर्भर करती है।
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )

सही उत्तर: अभिक्रियाशीलता श्रेणी में उसकी स्थिति

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals): अयस्कों से धातुओं को प्राप्त करने की विधि इस बात पर निर्भर करती है कि वह धातु अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) में कहाँ स्थित है।
  • विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग विधियाँ अपनाई जाती हैं:
    • अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे Na, Mg, Ca): इनका निष्कर्षण गलित क्लोराइडों के विद्युत अपघटन (Electrolytic Reduction) द्वारा किया जाता है।
    • मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे Zn, Fe, Pb): इनके सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों को पहले भूनने (Roasting) या निस्थापन (Calcination) द्वारा ऑक्साइड में बदला जाता है, फिर कार्बन द्वारा अपचयन किया जाता है।
    • कम अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे Cu, Ag, Hg): इन्हें केवल उनके अयस्कों को गर्म करके प्राप्त किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • उसके परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या: ये किसी तत्व के आंतरिक परमाणु गुणधर्म हैं, जिनका सीधे तौर पर धातुओं के रासायनिक निष्कर्षण की औद्योगिक विधि से संबंध नहीं होता है।
  • उसके रंग: धातु का बाहरी रंग उसके भौतिक गुणों में आता है, जिससे धातु के रासायनिक निष्कर्षण की तकनीक तय नहीं होती है।

#32. कौन-सा कथन, एक परमाणु में प्रोटॉन के अभिलक्षणों का सटीक वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )

सही उत्तर: वे एक परमाणु के नाभिक में स्थित होते हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • प्रोटॉन (Proton): यह एक धनावेशित उप-परमाणु कण है जो परमाणु के केंद्र यानी नाभिक (Nucleus) में न्यूट्रॉन के साथ मिलकर निवास करता है।
  • प्रोटॉन की खोज का श्रेय अर्नेस्ट रदरफोर्ड को जाता है।
  • इसका द्रव्यमान लगभग 1.672 × 10⁻²⁷ kg (लगभग 1 u) होता है, जो इलेक्ट्रॉनों की तुलना में काफी अधिक होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • वे ऋणावेशित कण हैं: यह गलत है क्योंकि प्रोटॉन एक धनावेशित कण है, जबकि ऋणावेशित कण इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनों की तुलना में उनका द्रव्यमान नगण्य होता है: यह कथन इलेक्ट्रॉनों के लिए सही है (प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से लगभग 1836 गुना अधिक होता है)।
  • वे नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में परिक्रमण करते हैं: यह विशेषता इलेक्ट्रॉनों की होती है, न कि नाभिक के भीतर स्थिर रहने वाले प्रोटॉनों की।

#33. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की मुख्य विशेषता क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )

सही उत्तर: परमाणु के केंद्र में एक सघन धनात्मक नाभिक होता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (1911): अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के आधार पर अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का संपूर्ण धनावेश और उसका लगभग समस्त द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म स्थान पर केंद्रित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है।
  • इस मॉडल के अनुसार, परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है और इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर उच्च गति से वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • नाभिक में केवल ऋणात्मक आवेश वाले इलेक्ट्रॉन होते हैं: यह गलत है, क्योंकि नाभिक के भीतर धनावेशित प्रोटॉन (और न्यूट्रॉन) होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर चक्कर लगाते हैं।
  • इलेक्ट्रॉन, नाभिक के परितः कोशों में बद्ध रहते हैं: यह बाद के नील्स बोर के परमाणु मॉडल की विशेषता है, न कि रदरफोर्ड के मूल मॉडल की।
  • परमाणु पूर्ण रूप से एकसमान धनात्मक गोला है: यह जे. जे. थॉमसन के ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ का कथन है, जिसे रदरफोर्ड के प्रयोग ने गलत साबित कर दिया था।

#34. किसी तत्व की परमाणु संख्या किसकी संख्या से निर्धारित होती है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1)

सही उत्तर: प्रोटॉन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • परमाणु क्रमांक (Atomic Number): किसी भी रासायनिक तत्व की पहचान उसके परमाणु क्रमांक द्वारा होती है, जो उस तत्व के परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या के ठीक बराबर होता है। इसे अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘Z’ से प्रदर्शित किया जाता है।
  • एक उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों (परमाणु क्रमांक) के बराबर होती है, लेकिन तत्व की मूल परिभाषा उसके नाभिक के प्रोटॉनों की संख्या से ही तय होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का कुल योग परमाणु की द्रव्यमान संख्या (Mass Number) को निर्धारित करता है, न कि परमाणु क्रमांक को।
  • न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉनों की संख्या अलग-अलग होने पर समस्थानिक (Isotopes) बनते हैं, लेकिन यह परमाणु संख्या को निर्धारित नहीं करती।
  • इलेक्ट्रॉन: हालांकि उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन संख्या प्रोटॉन के बराबर होती है, परंतु रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन घट या बढ़ सकते हैं, इसलिए मौलिक आधार प्रोटॉनों की संख्या ही है।

#35. इलेक्ट्रॉन की खोज ________ द्वारा की गई थी।
(RRB JE CE 28 Aug 2019 Shift 2 CBT 2)

सही उत्तर: जे.जे. थॉमसन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • इलेक्ट्रॉन की खोज (Discovery of Electron): वर्ष 1897 में ब्रिटिश भौतिकবিদ वैज्ञानिक सर जोसफ जॉन थॉमसन (J. J. Thomson) द्वारा कैथोड किरण विसर्जन नली (Cathode Ray Tube) प्रयोग के माध्यम से इलेक्ट्रॉन की खोज की गई थी।
  • इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित उप-परमाणु कण है, जिसका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग 1/1836 वाँ भाग होता है।
  • इस महत्वपूर्ण खोज के लिए उन्हें 1906 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • नील्स बोर (Niels Bohr): इन्होंने 1913 में क्वांटम सिद्धांत के आधार पर परमाणु का ऊर्जा-स्तर (Bohr Model) प्रस्तुत किया था।
  • गोल्डस्टीन (E. Goldstein): इन्होंने 1886 में एनोड किरणों (कैनाल किरणों) की खोज की थी, जिससे आगे चलकर प्रोटॉन की खोज का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • जे. चैडविक (James Chadwick): इन्होंने वर्ष 1932 में परमाणु के नाभिक में उदासीन कण यानी न्यूट्रॉन की खोज की थी।



#36. पदार्थ की प्रकृति के बारे में मूल सिद्धांत किसने प्रदान किया?
(RRB NTPC CBT-I : 13 Jan 2021 Shift 1)

सही उत्तर: जॉन डाल्टन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton’s Atomic Theory): वर्ष 1808 में ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉन डाल्टन (John Dalton) ने पदार्थ की प्रकृति और संरचना के बारे में अपना प्रसिद्ध परमाणु सिद्धांत प्रतिपादित किया।
  • इस सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म और अविभाज्य कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें परमाणु (Atoms) कहा जाता है।
  • डाल्टन का यह सिद्धांत रासायनिक संयोजन के नियमों (जैसे द्रव्यमान संरक्षण का नियम और निश्चित अनुपात का नियम) को स्पष्ट करने वाला पहला वैज्ञानिक आधार बना।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • लेवोझियर (Antoine Lavoisier): इन्हें ‘आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक’ कहा जाता है, जिन्होंने रासायनिक संयोजन और दहन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया था।
  • जॉन मिल्टन: यह एक प्रसिद्ध अंग्रेजी कवि और लेखक हैं, जिनका विज्ञान या परमाणु सिद्धांत से कोई संबंध नहीं है।
  • मेंडल (Gregor Mendel): इन्हें ‘आनुवंशिकी का जनक’ (Father of Genetics) कहा जाता है, जिन्होंने जीव विज्ञान में आनुवंशिकता के नियम दिए।

#37. द्रव्यमान संरक्षण का नियम किसके द्वारा दिया गया था?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )

सही उत्तर: एंटोनी लावोज़ियर ( Antoine Lavoisier)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): यह नियम वर्ष 1789 में फ्रांसीसी रसायनशास्त्री एंटोनी लावोज़ियर द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
  • इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन (Creation) किया जा सकता है और न ही विनाश (Destruction)।
  • अर्थात, रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों (Reactants) का कुल द्रव्यमान, उत्पादों (Products) के कुल द्रव्यमान के ठीक बराबर होता है। इसी कारण इन्हें ‘आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक’ भी कहा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust): इन्होंने 1799 में ‘निश्चित अनुपात का नियम’ (Law of Definite Proportions) प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार किसी यौगिक में तत्व हमेशा एक निश्चित द्रव्यमान के अनुपात में मौजूद होते हैं।
  • अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने 1911 में अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के माध्यम से परमाणु के नाभिक की खोज की थी।
  • जॉन डाल्टन (John Dalton): इन्होंने 1808 में पदार्थ की प्रकृति को समझाने के लिए ‘डाल्टन का परमाणु सिद्धांत’ दिया था।

#38. गोलाकार गोलक के भीतर एक कण पर गुरुत्वाकर्षण बल कितना होता है?
(RPF SI Previous Paper : 5 Jan 2019 Shift 3)

सही उत्तर: शून्य

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गोलाकार गोलक के भीतर गुरुत्वाकर्षण बल: न्यूटन के शैल प्रमेय (Shell Theorem) के अनुसार, किसी समरूप खोखले गोलाकार गोलक (Spherical Shell) के भीतर स्थित किसी कण पर कार्यरत कुल गुरुत्वाकर्षण बल शून्य होता है।
  • इसका कारण यह है कि गोलक के विभिन्न भागों द्वारा कण पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल विपरीत दिशाओं में कार्य करते हैं और एक-दूसरे के प्रभाव को पूरी तरह से निरस्त (Cancel) कर देते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • ऋणात्मक, एक और अनंत: ये मान भौतिक रूप से इस स्थिति के अनुकूल नहीं हैं, क्योंकि खोखले गोले के भीतर गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की तीव्रता और बल हमेशा शून्य होते हैं।

#39. दो तत्वों को समभारिक के रूप में क्या परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )

सही उत्तर: समान द्रव्यमान संख्या लेकिन भिन्न परमाणु क्रमांक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिक (Isobars): भिन्न-भिन्न तत्वों के वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number – प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का कुल योग) समान होती है, लेकिन उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number – प्रोटॉनों की संख्या) अलग-अलग होते हैं, समभारिक कहलाते हैं।
  • चूँकि इनके परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं, इसलिए ये अलग-अलग तत्वों को निरूपित करते हैं और इनके रासायनिक गुण भी भिन्न होते हैं।
  • उदाहरण: आर्गन ($_{18}\text{Ar}^{40}$), पोटैशियम ($_{19}\text{K}^{40}$) और कैल्शियम ($_{20}\text{Ca}^{40}$) समभारिकों के प्रसिद्ध उदाहरण हैं, क्योंकि इन सभी की द्रव्यमान संख्या 40 है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • समान परमाणु क्रमांक: यह विशेषता समस्थानिकों (Isotopes) की होती है, जो एक ही तत्व के परमाणु होते हैं।
  • न्यूट्रॉन की समान संख्या: यह विशेषता समन्यूट्रॉनिक (Isotones) को परिभाषित करती है।
  • इलेक्ट्रॉनों की समान संख्या: यह समइलेक्ट्रॉनी (Isoelectronic) प्रजातियों को दर्शाती है, न कि समभारिकों को।

#40. निम्नलिखित में से किसे न्यूक्लीऑन कहा जाता है?
(RPF Constable 2018 25 Jan 2019 Shift 3)

सही उत्तर: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • न्यूक्लीऑन (Nucleons): परमाणु के नाभिक (Nucleus) के भीतर पाए जाने वाले उप-परमाणु कणों—यानी प्रोटॉन और न्यूट्रॉन—के संयुक्त समूह को सामूहिक रूप से न्यूक्लीऑन कहा जाता है।
  • किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या (Mass Number) उसके नाभिक में उपस्थित कुल न्यूक्लीऑन (प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या) के योग के बराबर होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • केवल इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, इसलिए इन्हें न्यूक्लीऑन नहीं कहा जाता है।
  • संयोजक इलेक्ट्रॉन: ये परमाणु के सबसे बाहरी कोश में स्थित होते हैं और रासायनिक बंध बनाने में भाग लेते हैं।
  • नाभिक और प्रोटॉन: यह संयोजन तार्किक रूप से गलत है क्योंकि प्रोटॉन स्वयं नाभिक का ही एक घटक है।



#41. किसी तत्व के किस प्रकार के अणु में केवल एक ही प्रकार का परमाणु पाया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )

सही उत्तर: एकपरमाणुक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • तत्वों के अणु (Molecules of Elements): किसी तत्व के अणु एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं।
  • एकपरमाणुक (Monoatomic) अणु: कई तत्वों (विशेषकर उत्कृष्ट गैसों जैसे हीलियम He, नियॉन Ne, आर्गन Ar आदि) के अणु में केवल एक ही परमाणु होता है, और वे स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकते हैं।
  • इसके विपरीत, यौगिकों के अणुओं में भिन्न-भिन्न प्रकार के परमाणु पाए जाते हैं (जैसे जल H₂O में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • द्विपरमाणुक (Diatomic): इसमें एक ही तत्व के दो परमाणु होते हैं (जैसे O₂, N₂)। प्रश्न में यह नहीं पूछा गया है कि कितने परमाणु हैं, बल्कि मुख्य बात यह है कि सभी श्रेणियों (एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक आदि) में एक ही तत्व के अणु एक ही प्रकार के परमाणुओं से बनते हैं, लेकिन ‘एकपरमाणुक’ विकल्प इस श्रेणी के मूल स्वरूप को सबसे सटीक रूप से इंगित करता है।
  • त्रिपरमाणुक और बहुपरमाणुक: इनमें क्रमशः तीन या तीन से अधिक परमाणु होते हैं (जैसे ओजोन O₃ त्रिपरमाणुक है)।

#42. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, आयन को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )

सही उत्तर: एक परमाणु या परमाणुओं का समूह जिसमें धनात्मक या ऋणात्मक आवेश होता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आयन (Ion): जब कोई परमाणु या परमाणुओं का समूह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है या उनका त्याग करता है, तब उस पर विद्युत आवेश (Electric Charge) आ जाता है। ऐसे आवेशित कण को आयन कहा जाता है।
  • आयन दो प्रकार के होते हैं:
    • धनायन (Cation): इलेक्ट्रॉनों के त्याग से बनने वाला धनावेशित आयन (जैसे Na⁺, Ca²⁺)।
    • ऋणायन (Anion): इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने से बनने वाला ऋणावेशित आयन (जैसे Cl⁻, O²⁻)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • प्रोटॉनों की तुलना में न्यूट्रॉनों की अधिक संख्या: यह स्थिति नाभिकीय स्थिरता या समस्थानिकों से संबंधित है, न कि आयन के आवेश से।
  • परमाणुओं के संयोजन से बना उदासीन कण: यह एक सामान्य उदासीन अणु या यौगिक को परिभाषित करता है, जिस पर कोई शुद्ध आवेश नहीं होता।
  • प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की समान संख्या वाला परमाणु: यह एक उदासीन परमाणु (Neutral Atom) को दर्शाता है, जबकि आयन में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की संख्या असमान होती है।

#43. पानी का सापेक्ष आणविक द्रव्यमान क्या है?
(RRB NTPC CBT-I : 21 Mar 2021 Shift 1)

सही उत्तर: 18 u

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • पानी का आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass of Water): जल का रासायनिक सूत्र H₂O होता है। इसका सापेक्ष आणविक द्रव्यमान इसके सभी घटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है।
  • हाइड्रोजन (H) का परमाणु द्रव्यमान = 1 u (चूँकि 2 हाइड्रोजन परमाणु हैं, तो 2 × 1 = 2 u)
  • ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान = 16 u
  • कुल आणविक द्रव्यमान = 2 + 16 = 18 u

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • 16 u: यह केवल ऑक्सीजन परमाणु का परमाणु द्रव्यमान है, न कि संपूर्ण जल के अणु का।
  • 20 u और 22 u: ये मान जल के रासायनिक संगठन और परमाणु द्रव्यमानों की सही गणना से मेल नहीं खाते हैं।

#44. विद्युत ऋणात्मकता किसी परमाणु की ________ की क्षमता की माप है।
(RRB JE CBT I :- 2 June 2019 Shift 3)

सही उत्तर: इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • विद्युतऋणात्मकता (Electronegativity): किसी सहसंयोजक बंध (Covalent Bond) द्वारा जुड़े हुए दो परमाणुओं में से किसी एक परमाणु की साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्म (Shared Electron Pair) को अपनी ओर खींचने या आकर्षित करने की क्षमता को विद्युतऋणात्मकता कहा जाता है।
  • आवर्त सारणी में फ्लोरीन (Fluorine – F) सबसे अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है।
  • यह एक आयामहीन (Dimensionless) गुण है जो मुख्य रूप से परमाणु के आकार और उसके नाभिक के प्रभावी आवेश पर निर्भर करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉनों को प्रतिकर्षित करने: यह विद्युतऋणात्मकता के ठीक विपरीत है; इलेक्ट्रॉन आकर्षण की क्षमता ही विद्युतऋणात्मकता कहलाती है न कि प्रतिकर्षण।
  • प्रोटॉनों को आकर्षित या प्रतिकर्षित करने: प्रोटॉन परमाणु के नाभिक के भीतर दृढ़ता से बंधे होते हैं और रासायनिक बंध निर्माण या इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी में सीधे तौर पर भाग नहीं लेते हैं।

#45. मोनाजाइट मृदा में कौन-सा खनिज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है?
(RPF SI Previous Paper : 5 Jan 2019 Shift 3)

सही उत्तर: थोरीयम

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • मोनाजाइट मृदा (Monazite Sand/Soil): मोनाजाइट मुख्य रूप से दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) और फॉस्फेट का एक खनिज है, जिसमें थोरीयम (Thorium) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों की रेत (मृदा) में मोनाजाइट के विशाल भंडार मौजूद हैं, जो थोरीयम का एक प्रमुख स्रोत हैं।
  • थोरीयम एक रेडियोसक्रिय तत्व है जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में भविष्य के ईंधन के विकल्प के रूप में किया जाता है (विशेषकर भारत के त्रि-चरण नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम में)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • यूरेनियम: हालांकि यूरेनियम भी एक रेडियोसक्रिय ईंधन है, लेकिन यह मुख्य रूप से पिचब्लेंड (Pitchblende) और यूरेनिनिट जैसे खनिजों से प्राप्त होता है, न कि मोनाजाइट मृदा की मुख्य विशेषता के रूप में।
  • प्लूटोनियम: यह एक कृत्रिम (Man-made) या संश्लेषित रेडियोसक्रिय तत्व है जो मुख्य रूप से परमाणु रिएक्टरों में बनता है, और प्रकृति में मोनाजाइट मृदा में प्रचुर मात्रा में नहीं पाया जाता।
  • इरीडियम: यह प्लेटिनम समूह की एक अत्यंत दुर्लभ धातु है, जो उल्कापिंडों के अवशेषों या पृथ्वी की पपड़ी में विशिष्ट परतों में मिलती है, इसका मोनाजाइट से संबंध नहीं है।



#46. यदि एक परमाणु दो इलेक्ट्रॉन खो देता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा परिवर्तन होगा?
(RRB JE 19/02/2026 )

सही उत्तर: परमाणु + 2 आवेश वाला धनायन बन जाएगा।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • इलेक्ट्रॉनों का त्याग और धनायन का निर्माण: जब कोई उदासीन परमाणु इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है, तो उसके नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या से अधिक हो जाती है।
  • चूँकि प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर एक ऋणावेश होता है, इसलिए 2 इलेक्ट्रॉनों के बाहर निकलने पर परमाणु पर +2 (द्वि-धनावेश) का आवेश आ जाता है और वह एक द्विसंयोगी धनायन (Divalent Cation, जैसे Mg²⁺ या Ca²⁺) बन जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु संख्या घटना या बढ़ना: परमाणु संख्या (Atomic Number) नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या पर निर्भर करती है। इलेक्ट्रॉनों के आने या जाने से प्रोटॉन या न्यूट्रॉन की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • न्यूट्रॉन संख्या घटना: न्यूट्रॉन नाभिक के भीतर स्थित होते हैं और रासायनिक आयनीकरण या इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान से इनका कोई लेना-देना नहीं होता।

#47. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, किसी तत्व की द्रव्यमान संख्या को सही रूप में निरूपित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 06/02/2026 )

सही उत्तर: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्रव्यमान संख्या (Mass Number): किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की कुल संख्या और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को उस तत्व की द्रव्यमान संख्या कहा जाता है। इसे प्रायः अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘A’ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
  • सूत्र रूप में: $\text{द्रव्यमान संख्या } (A) = \text{प्रोटॉनों की संख्या } (Z) + \text{न्यूट्रॉनों की संख्या } (N)$
  • चूँकि परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान उसके नाभिक (यानी प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) में ही केंद्रित होता है, इसलिए इन्हें सामूहिक रूप से ‘न्यूक्लीऑन’ भी कहा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉनों की संख्या: इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान बहुत कम (नगण्य) होता है, और यह संख्या परमाणु के कुल द्रव्यमान या द्रव्यमान संख्या को निर्धारित नहीं करती।
  • केवल प्रोटॉनों की संख्या: यह किसी तत्व के परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z) को दर्शाती है, न कि द्रव्यमान संख्या को।
  • प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के बीच का अंतर: यह मान द्रव्यमान संख्या को नहीं बल्कि न्यूट्रॉन आधिक्य को प्रदर्शित करता है, जो द्रव्यमान संख्या की सही परिभाषा नहीं है।

#48. जब कोई परमाणु एक इलेक्ट्रॉन खो देता है तो क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )

सही उत्तर: यह धनायन बन जाता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • धनायन का निर्माण (Formation of Cation): जब कोई उदासीन परमाणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है, तो उसके नाभिक में मौजूद धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या, ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से अधिक हो जाती है।
  • परिणामस्वरूप, परमाणु पर एक शुद्ध धनात्मक आवेश आ जाता है और इस धनावेशित आयन को धनायन (Cation) कहा जाता है (जैसे Na⁺)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • यह ऋणायन बन जाता है: ऋणायन (Anion) तब बनता है जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करता है, न कि त्याग करने पर।
  • यह उदासीन हो जाता है: इलेक्ट्रॉनों के हटने से परमाणु पर आवेश आ जाता है, इसलिए वह उदासीन नहीं रहता बल्कि आवेशित हो जाता है।
  • यह अणु बन जाता है: इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान से आयन का निर्माण होता है, जरूरी नहीं कि वह सीधे एक नया अणु ही बन जाए।

#49. ________ कोशिका में एक गहरी, गोलाकार संरचना है, जो पदार्थ विनिमय के लिए छिद्रों वाली ________ झिल्ली से घिरी होती है/घिरा होता है।
(RRB Level 01 Stage I 30/12/2025 )

सही उत्तर: केंद्रक; दोहरी

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कोशिका केंद्रक (Nucleus): यूकैरियोटिक कोशिकाओं के भीतर केंद्रक एक प्रमुख, सघन और गोलाकार संरचना होती है, जो कोशिका की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करती है और आनुवंशिक पदार्थ (DNA) को संचित रखती है।
  • दोहरी झिल्ली और छिद्र: केंद्रक एक दोहरी झिल्ली (Nuclear Membrane) से घिरा होता है। इस झिल्ली पर सूक्ष्म छिद्र (Nuclear Pores) पाए जाते हैं, जिनके माध्यम से केंद्रक और कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) के बीच प्रोटीन और आरएनए (RNA) जैसे पदार्थों का विनिमय होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • केंद्रकाभ (Nucleoid): यह प्रोकैरियोटिक (अविकसित) कोशिकाओं में पाया जाने वाला बिना झिल्ली का क्षेत्र होता है, इसलिए यह इस परिभाषा पर फिट नहीं बैठता।
  • रसधानी (Vacuole): यह कोशिका में जल और अपशिष्ट पदार्थों को संचित करने वाली संरचना है जो ‘एकल झिल्ली’ (टोनोप्लास्ट) से घिरी होती है, लेकिन यह गहरी गोलाकार मुख्य नियंत्रण संरचना नहीं है।

#50. समान द्रव्यमान संख्या वाले न्यूक्लाइड्स ________ कहलाते हैं।
(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)

सही उत्तर: समभारिक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिक (Isobars): वे न्यूक्लाइड्स या विभिन्न तत्वों के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number – प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों का कुल योग) समान होती है, लेकिन उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) भिन्न-भिन्न होते हैं, समभारिक कहलाते हैं।
  • चूँकि इनके परमाणु क्रमांक अलग होते हैं, अतः ये अलग-अलग रासायनिक तत्वों को निरूपित करते हैं (जैसे $_{18}\text{Ar}^{40}$ और $_{20}\text{Ca}^{40}$).

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • समन्यूट्रानिक (Isotones): वे परमाणु जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, समन्यूट्रानिक कहलाते हैं।
  • समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
  • समावयवी (Isomers): यह कार्बनिक रसायन या नाभिकीय भौतिकी में समान संघटन वाले लेकिन अलग गुणों/ऊर्जा अवस्थाओं वाले यौगिकों/नाभिकों के लिए प्रयुक्त होता है।



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