परमाणु संरचना के महत्वपूर्ण प्रश्न
#1. इलेक्ट्रॉन की खोज का श्रेय किसे दिया जाता है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 18/03/2026 )
- इलेक्ट्रॉन की खोज (1897): इलेक्ट्रॉन की खोज का श्रेय ब्रिटिश भौतिकविद् सर जे. जे. थॉमसन (Sir J. J. Thomson) को दिया जाता है।
- उन्होंने कैथोड किरण (Cathode Ray) प्रयोग के दौरान ऋणावेशित कणों (इलेक्ट्रॉन) की पहचान की थी, जिसके लिए उन्हें 1906 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
- इलेक्ट्रॉन परमाणु का एक उप-परमाणु कण (Subatomic Particle) है जिस पर ऋणावेश (Negative Charge) होता है।
- अल्बर्ट आइंस्टीन: इन्हें ‘सापेक्षता का सिद्धांत’ (Theory of Relativity) और प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) के लिए जाना जाता है।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्हें परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज और अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के लिए जाना जाता है।
- मेरी क्यूरी: इन्हें रेडियोधर्मिता (Radioactivity) पर शोध के लिए जाना जाता है, जिसके लिए उन्होंने दो नोबेल पुरस्कार जीते।
#2. ईंची कुरोसावा द्वारा जिबरेलिक अम्ल की खोज किस वर्ष में की गई थी, जो बीज के अंकुरण और कोशिका प्रसार को उत्तेजित करने के लिए जाना जाता है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 03 Dec, 2024 Shift 1)
- जिबरेलिक अम्ल की खोज (1926): जापानी वैज्ञानिक ईइची कुरोसावा (Eiichi Kurosawa) द्वारा 1926 में धान के पौधों में ‘बकाने’ (Bakanae) या ‘मूर्ख पौधे’ (Foolish seedling) रोग का अध्ययन करते समय जिबरेलिक अम्ल की खोज की गई थी।
- यह एक महत्वपूर्ण पादप हार्मोन (Phytohormone / Gibberellin) है जो तने की लंबाई बढ़ाने, बीज के अंकुरण (Seed Germination) और कोशिका प्रसार (Cell Elongation) को उत्तेजित करता है।
- यह कवक Gibberella fujikuroi से प्राप्त किया जाता है।
- 1950: इस दशक के आसपास जिबरेलिन के शुद्ध रासायनिक स्वरूप और उसके अन्य रूपों पर गहन शोध कार्य हुए, लेकिन खोज 1926 में ही हो चुकी थी।
- 1910: इस वर्ष पादप हार्मोन्स (जैसे ऑक्जिन की प्रारंभिक परिकल्पना) के क्षेत्र में अन्य वैज्ञानिकों द्वारा कार्य किए गए थे, जिबरेलिक अम्ल से इसका संबंध नहीं है।
- 1975: यह वर्ष जिबरेलिक अम्ल की खोज का नहीं है, बल्कि इस समय तक पादप हार्मोन विज्ञान काफी उन्नत हो चुका था।
#3. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 2)
- रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (1911): अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने अल्फा कण प्रकीर्णन (Alpha Particle Scattering) प्रयोग के आधार पर परमाणु का सौरमंडल जैसा मॉडल प्रस्तुत किया था।
- इस मॉडल के अनुसार, परमाणु का संपूर्ण धन आवेश और अधिकांश द्रव्यमान उसके केंद्र में केंद्रित होता है जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
- रदरफोर्ड के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार पथों (Circular Orbits) में चक्कर लगाते हैं, न कि दीर्घवृत्ताकार पथों में (दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं की बात बाद में सोमरफिल्ड या अन्य संशोधनों में आई)।
- परमाणु के आकार की तुलना में नाभिक का आकार बहुत छोटा होता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार पथों में घूमते हैं: यह रदरफोर्ड के मॉडल का एक मुख्य postulate (प्रत्यादेश) था, इसलिए यह कथन सही है (और प्रश्न के अनुसार गलत विकल्प नहीं है)।
- परमाणु में एक धनावेशित केंद्र होता है, जिसे नाभिक कहते हैं: रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रयोग से ही नाभिक की खोज हुई थी, अतः यह कथन बिल्कुल सत्य है।
- परमाणु की तुलना में नाभिक का आकार बहुत छोटा होता है: रदरफोर्ड के निष्कर्षों के अनुसार परमाणु की त्रिज्या लगभग $10^{-10}$ m होती है जबकि नाभिक की त्रिज्या लगभग $10^{-15}$ m होती है, जो कि बहुत कम है।
#4. एक तत्व के समस्थानिकों ________ होते हैं।
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 2)
- समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) समान लेकिन द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहते हैं।
- चूंकि इनमें प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या (यानी परमाणु क्रमांक) समान होती है, अतः इनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
- लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग होने के कारण इनमें न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है, और इनके भौतिक गुण भी थोड़े भिन्न हो सकते हैं।
- भौतिक गुण समान: यह गलत है क्योंकि द्रव्यमान में अंतर के कारण समस्थानिकों के भौतिक गुण (जैसे घनत्व, क्वथनांक आदि) अलग-अलग होते हैं।
- रासायनिक गुण भिन्न: यह गलत है क्योंकि रासायनिक व्यवहार मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है जो कि समान होती है, अतः रासायनिक गुण समान होते हैं।
- अलग-अलग परमाणु क्रमांक: यह गलत है, समस्थानिकों की मूल विशेषता ही यह है कि उनका परमाणु क्रमांक हमेशा समान होता है।
#5. यदि कोई तत्व – 2 आवेश वाले आयन का निर्माण करता है, तो यह उसकी संयोजकता के बारे में क्या संकेत देता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- ऋणावेशित आयन (-2 आवेश): जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो उस पर ऋण आवेश (Negative Charge) आता है। -2 आवेश का अर्थ है कि उस तत्व ने अपने बाहरी कक्ष या अष्टक को पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉन प्राप्त (gain) किए हैं।
- इस प्रकार के दो-ऋण आवेश वाले आयनों को द्व-ऋणायन (Divalent Anion) कहा जाता है (उदाहरण के लिए: ऑक्सीजन आयन O²⁻ या सल्फर आयन S²⁻)।
- इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने की यह प्रवृत्ति उस तत्व की रासायनिक संयोजकता (Valency) को दर्शाती है।
- तत्व ने 2 इलेक्ट्रॉन खो दिए हैं: इलेक्ट्रॉन त्यागने या खोने वाले परमाणुओं पर धन आवेश (Positive Charge, जैसे +2) आता है, ऋण आवेश नहीं।
- तत्व के नाभिक में 2 इलेक्ट्रॉन हैं: यह वैज्ञानिक रूप से गलत है क्योंकि नाभिक के भीतर केवल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं; इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
- तत्व ने 2 प्रोटॉन प्राप्त किए हैं: रासायनिक परिवर्तनों या आयन निर्माण में नाभिक के अंदर मौजूद प्रोटॉनों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होता, केवल इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान होता है।
#6. किसी तत्व के समस्थानिक का निर्धारण करने के लिए, निम्नलिखित में से कौन-सा कण आवश्यक है?
(Not found 11/03/2026 )
- समस्थानिक (Isotopes): किसी एक ही तत्व के विभिन्न समस्थानिकों में प्रोटॉनों (यानी परमाणु क्रमांक) की संख्या तो बिल्कुल समान होती है, लेकिन उनके नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है।
- चूंकि प्रोटॉन तत्व की मूल पहचान (परमाणु क्रमांक) तय करते हैं, इसलिए एक ही तत्व के अलग-अलग समस्थानिकों (जैसे कार्बन-12 और कार्बन-14) के बीच अंतर करने या उनका निर्धारण करने के लिए न्यूट्रॉनों की संख्या उत्तरदायी होती है।
- न्यूट्रॉनों की संख्या बदलने से परमाणु का द्रव्यमान बदल जाता है, जिससे विशिष्ट समस्थानिक की पहचान होती है।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की संख्या किसी तत्व का परमाणु क्रमांक निर्धारित करती है, लेकिन चूंकि सभी समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए यह समस्थानिकों में भेद नहीं करती।
- पॉज़िट्रॉन: यह एक एंटी-पार्टिकल (धनावेशित इलेक्ट्रॉन) है, जिसका परमाणु के समस्थानिकों के निर्धारण या वर्गीकरण से कोई संबंध नहीं है।
- इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन रासायनिक गुण और संयोजकता निर्धारित करते हैं, और एक ही तत्व के समस्थानिकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, अतः इनसे समस्थानिकों का निर्धारण नहीं होता।
#7. ऑक्सीजन का परमाण्विक द्रव्यमान कितना है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
- ऑक्सीजन का परमाण्विक द्रव्यमान (16 u): ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 8 है, जिसका अर्थ है कि इसके नाभिक में 8 प्रोटॉन होते हैं।
- इसके सबसे सामान्य समस्थानिक (Oxygen-16) का परमाणु द्रव्यमान लगभग 16 एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) होता है, जिसमें 8 प्रोटॉन और 8 न्यूट्रॉन शामिल होते हैं।
- यह आवर्त सारणी (Periodic Table) का एक बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है जो पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है।
- 12 u: यह कार्बन-12 (Carbon-12) समस्थानिक का परमाण्विक द्रव्यमान है, जिसके आधार पर अन्य तत्वों के परमाणु द्रव्यमान मापे जाते हैं।
- 18 u: यह ऑक्सीजन के एक भारी समस्थानिक (Oxygen-18) का द्रव्यमान है, लेकिन मानक परमाणु द्रव्यमान 16 u माना जाता है।
- 8 u: यह ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) यानी प्रोटॉनों की संख्या है, न कि उसका द्रव्यमान।
#8. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, किसी तत्व के परमाणु क्रमांक को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number): किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को उस तत्व का परमाणु क्रमांक (Atomic Number, प्रतीक ‘Z’) कहा जाता है।
- एक सामान्य और उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या, उसमें मौजूद इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बिल्कुल बराबर होती है।
- यह किसी तत्व की मौलिक पहचान है जो आवर्त सारणी में उसके स्थान और उसके रासायनिक गुणों को निर्धारित करती है।
- किसी परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने पर समस्थानिक (Isotopes) बनते हैं, यह परमाणु क्रमांक को परिभाषित नहीं करती।
- नाभिक में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या: इसे परमाणु की द्रव्यमान संख्या (Mass Number) कहा जाता है, परमाणु क्रमांक नहीं।
- किसी परमाणु के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या: यह किसी तत्व की संयोजकता (Valency) या रासायनिक प्रकृति को निर्धारित करती है।
#9. एक गाड़ी एक समान वेग से गतिमान है और उसे रोकने के लिए विपरीत दिशा में एक मन्दक बल F लगाया जाता है। बल द्वारा किया गया कार्य है:
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- कार्य और बल की दिशा: जब किसी गतिमान वस्तु को रोकने के लिए उसकी गति की विपरीत दिशा में बल (मन्दक बल / Retarding Force) लगाया जाता है, तो बल (Force) और विस्थापन (Displacement) की दिशाएं एक-दूसरे के विपरीत होती हैं।
- इस स्थिति में बल और विस्थापन के बीच का कोण 180° होता है।
- कार्य के सूत्र $W = F \cdot s \cdot \cos(\theta)$ के अनुसार, $\cos(180^\circ) = -1$ होता है, इसलिए मन्दक बल द्वारा किया गया कार्य हमेशा ऋणात्मक (Negative) होता है।
- अनिधारित: यह गलत है क्योंकि भौतिकी के नियमों के अनुसार बल, विस्थापन और उनके बीच का कोण स्पष्ट होने पर कार्य की गणना निश्चित रूप से की जा सकती है।
- शून्य: कार्य शून्य तब होता है जब बल और विस्थापन की दिशाएं एक-दूसरे के लंबवत (90° पर) हों या वस्तु का कोई विस्थापन न हो।
- धनात्मक: कार्य धनात्मक तब होता है जब बल और विस्थापन दोनों एक ही दिशा में (गति की दिशा में) कार्य कर रहे हों।
#10. मुक्त अवस्था में बिंदुओं के बीच सामान्य त्रिविम विभाजन क्या है?
(RPF SI 2018 : 12 Jan 2019 Shift 3)
- क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice): यह क्रिस्टलीय ठोस पदार्थों में परमाणुओं, आयनों या अणुओं की एक नियमित, त्रि-आयामी (3D) व्यवस्था होती है।
- क्रिस्टल जालक में प्रत्येक बिंदु (Lattice Point) घटक कणों की स्थिति को दर्शाता है। इन बिंदुओं की ज्यामितीय व्यवस्था ही उस क्रिस्टल की आंतरिक संरचना को परिभाषित करती है।
- यह संरचना तीनों स्थानिक आयामों (Three Spatial Dimensions) में बार-बार दोहराई जाती है और ठोस अवस्था भौतिकी में बहुत महत्वपूर्ण है।
- केंद्रीय जालक: यह क्रिस्टल संरचनाओं के वर्गीकरण में कोई मानक या सामान्य त्रिविम विभाजन का नाम नहीं है।
- ब्रिज जालक: यह भौतिकी या रसायन विज्ञान में क्रिस्टल जालक के संदर्भ में उपयोग होने वाला वैध तकनीकी पद नहीं है।
- प्रिमिटीव जालक (Primitive Lattice): यह ब्रैवाइस जालकों का एक प्रकार (आद्य एकक कोष्ठिका) है, जिसमें जालक बिंदु केवल कोने पर होते हैं, लेकिन संपूर्ण त्रिविम विभाजन को ‘क्रिस्टल जालक’ कहा जाता है।
#11. परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को क्या कहते हैं?
(RPF Constable 2018 09 Feb 2019 Shift 2)
- परमाणु संख्या (Atomic Number): किसी भी तत्व के परमाणु के नाभिक में मौजूद कुल प्रोटॉनों की संख्या को उस तत्व की **परमाणु संख्या (या परमाणु क्रमांक, ‘Z’)** कहा जाता है।
- एक सामान्य और उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की यह संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बिल्कुल बराबर होती है।
- यह किसी तत्व की विशिष्ट पहचान होती है, जो आवर्त सारणी (Periodic Table) में उसके स्थान को निर्धारित करती है।
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number): यह नाभिक के भीतर मौजूद प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या का योग होती है।
- समावयवी संख्या: यह रसायन विज्ञान में यौगिकों या समावयवों (Isomers) की संख्या से संबंधित है, परमाणु के मूल कणों से नहीं।
- आणविक संख्या: यह किसी अणु में परमाणुओं की संख्या या अणुओं की कुल मात्रा को दर्शाने के लिए उपयोग होने वाला सामान्य शब्द है, न कि प्रोटॉनों की संख्या।
#12. समदाब रेखाओं के संदर्भ में कौन-सा कथन गलत है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- समभारिक या समदाब रेखाएं (Isobars): भिन्न-भिन्न तत्वों के ऐसे परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number / प्रोटॉनों की संख्या) अलग-अलग होते हैं, लेकिन जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) समान होती है, उन्हें समभारिक कहते हैं।
- चूंकि ये अलग-अलग तत्वों (जैसे ऑर्गन और कैल्शियम) के परमाणु होते हैं, इसलिए इनके प्रोटॉनों की संख्या भिन्न होती है, न कि समान। अतः दिया गया यह कथन गलत है।
- अलग-अलग तत्व होने के कारण इनके रासायनिक गुण भी भिन्न होते हैं।
- इनमें न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है: यह कथन सत्य है क्योंकि द्रव्यमान संख्या समान होने के बावजूद परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन) अलग होने के कारण न्यूट्रॉनों की संख्या में अंतर होता है।
- इनका द्रव्यमान क्रमांक समान होता है: यह समभारिकों की मुख्य परिभाषा और विशेषता है, अतः यह कथन सही है।
- इनके रासायनिक गुण भिन्न होते हैं: चूँकि समभारिक अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं (जिनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अलग होता है), उनके रासायनिक गुण भी भिन्न होते हैं (यह कथन भी सत्य है)।
#13. पदार्थ का मूल रूप, जिसे रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता है, कहलाता है –
(RPF Constable 2018 24 Jan 2019 Shift 3)
- तत्व (Element): रसायन शास्त्र के अनुसार, तत्व पदार्थ का वह मूल या शुद्ध रूप होता है जिसे किसी भी रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) द्वारा भौतिक या रासायनिक विधियों से दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता है।
- प्रत्येक तत्व एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन, सोना आदि)।
- यह रसायन विज्ञान में पदार्थों के वर्गीकरण की एक बुनियादी और मौलिक इकाई है।
- सिद्धात (Principle/Theory): यह विज्ञान या नियमों की एक वैचारिक व्याख्या है, कोई रासायनिक पदार्थ नहीं।
- माध्य (Medium): यह भौतिकी या रसायन में किसी प्रक्रिया के लिए उपयोग होने वाला माध्यम या वातावरण होता है, पदार्थ का मूल रूप नहीं।
- समस्थानिक (Isotope): यह एक ही तत्व के परमाणु होते हैं जिनके द्रव्यमान भिन्न होते हैं, लेकिन यह स्वयं पदार्थ का मूल अप्रतिबंधित रूप नहीं है।
#14. रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किसकी खोज के लिए उत्तरदायी था?
(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)
- रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने दो सहयोगियों (गाइगर और मार्सडन) के साथ मिलकर सोने की बहुत पतली पन्नी पर तीव्रगामी अल्फा ($\alpha$) कणों की बौछार की थी।
- इस प्रयोग के दौरान अधिकांश अल्फा कण सीधे निकल गए, कुछ विक्षेपित हुए, और बहुत कम कण (लगभग 20,000 में से एक) वापस लौट आए। इससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु के भीतर एक अति सूक्ष्म, सघन और धनावेशित भाग होता है जिसे परमाणु नाभिक (Atomic Nucleus) कहा जाता है।
- इस खोज ने परमाणु की आधुनिक संरचना को समझने की दिशा में एक नया मोड़ दिया।
- न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन की खोज वर्ष 1932 में वैज्ञानिक जेम्स चैडविक (James Chadwick) द्वारा बेरिलियम पर अल्फा कणों की बौछार करके की गई थी।
- इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन की खोज वर्ष 1897 में जे. जे. थॉमसन (J. J. Thomson) द्वारा कैथोड किरणों के अध्ययन के दौरान की गई थी।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज का श्रेय मुख्य रूप से गोल्डस्टीन (एनोड किरणों के प्रयोग) को जाता है, और इसका नामकरण रदरफोर्ड ने किया था, लेकिन यह अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग से खोजा नहीं गया था।
#15. रेडियोधर्मी तत्व रेडियम और पोलोनियम की खोज किसने की थी?
(RRB Constable 2024 : 12 Mar, 2025 Shift 1)
- रेडियम और पोलोनियम की खोज: रेडियोधर्मी तत्वों रेडियम (Radium) और पोलोनियम (Polonium) की खोज प्रसिद्ध वैज्ञानिक मैडम मेरी क्यूरी (Marie Curie) और उनके पति पियरे क्यूरी द्वारा 1898 में की गई थी।
- मेरी क्यूरी को रेडियोधर्मिता (Radioactivity) के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए जाना जाता है।
- वह दो अलग-अलग विज्ञानों (भौतिकी और रसायन विज्ञान) में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली दुनिया की पहली महिला थीं।
- जॉन डाल्टन: इन्हें परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) के प्रतिपादन के लिए जाना जाता है।
- आयरन जॉलियट-क्यूरी: यह मेरी क्यूरी की पुत्री थीं, जिन्होंने कृत्रिम रेडियोधर्मिता (Artificial Radioactivity) की खोज की थी।
- एवोगार्डो: इन्हें गैसों के अणुओं से संबंधित ‘एवोगार्डो नियम’ (Avogadro’s Law) के लिए जाना जाता है।
#16. निम्नलिखित में से कौन सा HCP क्रिस्टल के लिए एक निविड संकुलित तल है?
(RRB JE-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1)
- HCP क्रिस्टल और निविड संकुलित तल (Close-Packed Plane): षट्कोणीय निविड संकुलित (Hexagonal Close-Packed – HCP) संरचना में आधार तल (Basal plane) सबसे सघन या निविड संकुलित तल होता है।
- मुलर-ब्रेवाइस (Miller-Bravais) या मुलर सूचकांक (Miller indices) पद्धति में इस आधार तल को चार-अंकीय संकेतन में (0001) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
- यह तल हेक्सागोनल प्रिज्म के शीर्ष और तल (Top and Bottom faces) पर स्थित होता है, जहाँ परमाणुओं की पैकिंग घनत्व क्षमता अधिकतम (74%) होती है।
- (1011): यह हेक्सागोनल संरचना में एक पिरामिड तल (Pyramidal plane) को दर्शाता है, न कि आधार निविड संकुलित तल।
- (1010): यह प्रिस्म तल (Prism plane) को निरूपित करता है, जो c-अक्ष के समांतर होता है।
- (1101): यह भी एक अन्य प्रकार का पिरामिड तल है, जो संकुलित आधार तल से भिन्न है।
#17. कार्बनिक यौगिक के रासायनिक गुणों का निर्धारण कौन करता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 3)
- प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group): कार्बनिक यौगिकों में वह विशिष्ट परमाणु या परमाणुओं का समूह जो उस यौगिक के रासायनिक गुणों (Chemical Properties) का मुख्य रूप से निर्धारण करता है, प्रकार्यात्मक समूह कहलाता है।
- उदाहरण के लिए, एल्कोहॉल (-OH), कार्बोक्जिलिक अम्ल (-COOH), और एल्डिहाइड (-CHO) अलग-अलग रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं।
- जबकि कार्बन श्रृंखला की लंबाई और आणविक द्रव्यमान मुख्य रूप से यौगिक के भौतिक गुणों को प्रभावित करते हैं।
- आणविक द्रव्यमान: यह मुख्य रूप से यौगिक के भौतिक गुणों (जैसे घनत्व, गलनांक और क्वथनांक) को प्रभावित करता है, रासायनिक अभिक्रियाओं के विशिष्ट गुणों को नहीं।
- हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या: यह हाइड्रोकार्बन की संतृप्तता (Saturation) निर्धारित करती है, लेकिन संपूर्ण रासायनिक गुणों का निर्धारण सक्रिय प्रकार्यात्मक समूह द्वारा होता है।
- कार्बन श्रृंखला की लंबाई: कार्बन श्रृंखला की लंबाई मुख्य रूप से यौगिक के भौतिक गुणों (जैसे घुलनशीलता और क्वथनांक) को निर्धारित करती है।
#18. Na 2 SO 4 सूत्र, अणु के संबंध में क्या इंगित करता है?
(Not found 11/03/2026 )
- रासायनिक सूत्र की व्याख्या (Na₂SO₄): सोडियम सल्फेट के इस रासायनिक सूत्र में, प्रतीक ‘Na’ के आगे लगा सबस्क्रिप्ट (subscript) ‘2’ यह दर्शाता है कि इस यौगिक के एक अणु में सोडियम के दो परमाणु मौजूद हैं।
- इस सूत्र में सल्फर (S) का 1 परमाणु और ऑक्सीजन (O) के 4 परमाणु शामिल होते हैं।
- यह एक आयनिक यौगिक है जो सोडियम और सल्फेट आयनों से मिलकर बनता है।
- इसमें दो ऑक्सीजन परमाणु होते हैं: यह गलत है क्योंकि ऑक्सीजन के आगे ‘4’ लिखा है, जो यह बताता है कि इसमें 4 ऑक्सीजन परमाणु हैं।
- इसमें दो सल्फर परमाणु होते हैं: यह गलत है क्योंकि सल्फर (S) के साथ कोई सबस्क्रिप्ट नहीं है, जिसका अर्थ है कि इसमें सल्फर का केवल 1 परमाणु है।
- इसमें चार सोडियम परमाणु होते हैं: यह गलत है, सोडियम के साथ ‘2’ अंक है जो दो परमाणुओं को इंगित करता है, चार को नहीं।
#19. एक छात्र कैल्शियम फ्लोराइड ( CaF 2) का सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना करता है। यदि Ca और F के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 40 u और 19 u हैं, तो सही सूत्र इकाई द्रव्यमान क्या है?
(RRB JE CBT 2 Electronics Engineering ReExam : 04 Jun, 2025)
- कैल्शियम फ्लोराइड (CaF₂) का सूत्र इकाई द्रव्यमान: किसी आयनिक यौगिक के सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना उसके सभी संघटक परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग द्वारा की जाती है।
- यहाँ CaF₂ के एक सूत्र में कैल्शियम (Ca) का 1 परमाणु और फ्लोरीन (F) के 2 परमाणु शामिल होते हैं।
- गणना:
कैल्शियम का द्रव्यमान = 40 u
फ्लोरीन के 2 परमाणुओं का द्रव्यमान = 2 × 19 = 38 u
कुल सूत्र इकाई द्रव्यमान = 40 u + 38 u = 78 u
- 97 u: यह गणितीय रूप से गलत योग है, सही गणना करने पर मान 78 u प्राप्त होता है।
- 100 u: यह अन्य यौगिकों (जैसे कैल्शियम कार्बोनेट CaCO₃) का द्रव्यमान होता है, कैल्शियम फ्लोराइड का नहीं।
- 59 u: यह मान केवल एक फ्लोरीन परमाणु (19 u) को कैल्शियम (40 u) में सीधे जोड़ने से आता है (40 + 19 = 59), जबकि सूत्र में फ्लोरीन के 2 परमाणु हैं।
#20. संतुलित रासायनिक समीकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों (Reactants) और उत्पादों (Products) दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या समान होनी चाहिए।
- इसी सिद्धांत के आधार पर रासायनिक समीकरण को संतुलित किया जाता है ताकि समीकरण के दोनों तरफ द्रव्यमान भी पूरी तरह संरक्षित रहे।
- यह रसायन विज्ञान की एक बहुत ही बुनियादी और महत्वपूर्ण अवधारणा है।
- अणुओं का कुल द्रव्यमान दोनों ओर असमान है: यह गलत है क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान हमेशा संरक्षित रहता है, इसलिए दोनों ओर कुल द्रव्यमान समान होता है।
- दोनों ओर अणुओं की कुल संख्या समान है: यह आवश्यक नहीं है कि संतुलित समीकरण में अभिकारकों और उत्पादों के अणुओं की कुल संख्या समान हो (जैसे $N_2 + 3H_2 \rightarrow 2NH_3$ में अभिकारकों के कुल 4 अणु हैं जबकि उत्पाद के 2 अणु हैं)।
- दोनों तरफ मोलों की कुल संख्या समान है: यह भी आवश्यक नहीं है कि समीकरण के दोनों पक्षों में गैसीय मोलों या कुल मोलों की संख्या समान हो, यह अभिक्रिया के स्टोइकोमेट्री गुणांकों पर निर्भर करता है।
#21. परमाणु का आकार मुख्यतः किस पर निर्भर करता है?
(Not found 12/03/2026 )
- परमाणु का आकार (Atomic Size): किसी परमाणु का कुल आकार और आयतन मुख्य रूप से उसके नाभिक के केंद्र से बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की दूरी (यानी इलेक्ट्रॉन मेघ की सीमा) पर निर्भर करता है।
- परमाणु की त्रिज्या (Atomic Radius) को नाभिक के केंद्र से सबसे बाहरी शेल के इलेक्ट्रॉनों के बीच की औसत दूरी के रूप में मापा जाता है।
- चूंकि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान नाभिक में होता है, लेकिन उसका आयतन और आकार बाहरी इलेक्ट्रॉनों के वितरण से तय होता है।
- न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉन परमाणु के द्रव्यमान को बढ़ाते हैं, लेकिन वे परमाणु के भौतिक आकार या त्रिज्या को सीधे निर्धारित नहीं करते।
- प्रोटॉनों की संख्या: यह परमाणु क्रमांक तय करती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश के माध्यम से आकार को आंशिक रूप से प्रभावित करती है, लेकिन आकार की प्रत्यक्ष माप नाभिक से बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों की दूरी से होती है।
- समस्थानिकों की संख्या: समस्थानिकों की संख्या का परमाणु के बुनियादी भौतिक आकार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता है।
#22. किसी तत्व की एक दूसरे से संयोजन क्षमता मुख्यतः निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करती है?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- संयोजकता या संयोजन क्षमता (Combining Capacity / Valency): किसी तत्व के परमाणु की अन्य परमाणुओं के साथ संयोग करने या रासायनिक आबंध (Chemical Bond) बनाने की क्षमता को उसकी संयोजकता कहा जाता है।
- यह मुख्य रूप से परमाणु के बाह्यतम कोश (Outermost Shell) में उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या (Number of Valence Electrons) पर निर्भर करती है।
- स्थायित्व प्राप्त करने के लिए परमाणु अपने बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक नियम) पूरा करने हेतु इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान या साझा करते हैं।
- प्रोटॉनों की संख्या: प्रोटॉनों की संख्या परमाणु क्रमांक (Atomic Number) तय करती है जो तत्व की पहचान है, लेकिन रासायनिक संयोजन सीधे बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों से नियंत्रित होता है।
- ऊर्जा स्तर की संख्या: यह कोर्सेस (Shells) की संख्या को दर्शाती है जो परमाणु के आकार और आवर्त सारणी में उसके आवर्त को निर्धारित करती है।
- न्यूट्रॉन की संख्या: न्यूट्रॉन नाभिक का हिस्सा होते हैं और द्रव्यमान को प्रभावित करते हैं, इनका रासायनिक संयोजन क्षमता से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
#23. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प थॉमसन के परमाणु मॉडल में पाए जाने वाले उप-परमाणु कणों को दर्शाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 2)
- थॉमसन का परमाणु मॉडल (1904): जे. जे. थॉमसन द्वारा प्रस्तुत इस प्लम पुडिंग मॉडल के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन (ऋणावेशित कण) धंसे होते हैं।
- पूरे परमाणु को विद्युत रूप से उदासीन (Electrically Neutral) बनाने के लिए, उस धनावेशित गोले के भीतर कुल धनात्मक आवेश (जिसे बाद में प्रोटॉन के रूप में समझा गया) का मान ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों के कुल आवेश के बराबर होता है।
- इस प्रकार, इस मॉडल में धनावेश और ऋणावेश दोनों प्रकार के कणों (प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन) की उपस्थिति की परिकल्पना की गई थी।
- केवल इलेक्ट्रॉन: यदि परमाणु में केवल इलेक्ट्रॉन होते और कोई धनावेशित भाग न होता, तो परमाणु कभी भी विद्युत उदासीन नहीं हो सकता था।
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों: न्यूट्रॉन की खोज बहुत बाद में (1932 में चैडविक द्वारा) हुई थी, और थॉमसन के मॉडल में न्यूट्रॉन का कोई जिक्र नहीं था।
- केवल प्रोटॉन: थॉमसन के मॉडल में ऋणावेशित कणों के रूप में इलेक्ट्रॉनों की विशेष रूप से पहचान की गई थी, इसलिए केवल प्रोटॉन वाला विकल्प गलत है।
#24. प्रोटॉन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- प्रोटॉन की विशेषताएं: प्रोटॉन एक धनावेशित उप-परमाणु कण (Positively Charged Subatomic Particle) है जो परमाणु के नाभिक में स्थित होता है।
- इसका सापेक्ष आवेश +1 और इसका लगभग द्रव्यमान $1.673 \times 10^{-27}$ kg होता है, जिसे परमाणु द्रव्यमान इकाइयों में लगभग **1 इकाई (1 u)** के रूप में माना जाता है।
- एक हाइड्रोजन आयन ($H^+$) में मूल रूप से एक अकेला प्रोटॉन ही होता है।
- एक प्रोटॉन ऋणात्मक रूप से आवेशित होता है और इसका द्रव्यमान बहुत कम होता है: ऋणात्मक आवेश और बहुत कम द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन की विशेषताएं हैं, प्रोटॉन की नहीं।
- एक प्रोटॉन धनात्मक रूप से आवेशित होता है और इसका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का 1/2000 होता है: हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग 1/2000 हिस्सा एक **इलेक्ट्रॉन** का द्रव्यमान होता है, न कि प्रोटॉन का।
- एक प्रोटॉन आवेश में उदासीन होता है और इसका द्रव्यमान एक इलेक्ट्रॉन के बराबर होता है: आवेश में उदासीन कण न्यूट्रॉन होता है, और प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से लगभग 1836 गुना अधिक होता है, बराबर नहीं।
#25. जाली के अंदर संकुलित किये गए घटक कणों द्वारा संपूरित स्थान के प्रतिशत के रूप में को क्या कहा जाता है?
(RPF SI Previous Paper : 6 Jan 2019 Shift 2)
- संकुलन क्षमता (Packing Efficiency): क्रिस्टल जालक या एकक कोष्ठिका (Unit Cell) के कुल आयतन का वह प्रतिशत जो उसमें उपस्थित घटक कणों (परमाणुओं, अणुओं या आयनों) द्वारा वास्तव में घेरा या संपूरित किया जाता है, उसे संकुलन क्षमता कहते हैं।
- विभिन्न प्रकार की संरचनाओं में यह क्षमता अलग-अलग होती है; उदाहरण के लिए, सरल घनीय जालक (SC) में यह 52.4%, अंतः केंद्रित घनीय जालक (BCC) में 68%, और फलक केंद्रित (FCC / HCP) संरचनाओं में यह अधिकतम 74% होती है।
- यह किसी क्रिस्टल की सघनता और उसकी पैकिंग को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
- संरचनात्मक प्रकार्यवाद: यह क्रिस्टल भौतिकी या ठोस अवस्था रसायन विज्ञान में प्रयुक्त होने वाला वैज्ञानिक पद नहीं है।
- लेटी प्रकार्यवाद: यह किसी भी क्रिस्टलीय जालक या उसके आयतन प्रतिशत से संबंधित मान्य शब्दावली नहीं है।
- ठोस प्रकार्यवाद: यह ठोस पदार्थों की संकुलन क्षमता को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाने वाला तकनीकी शब्द नहीं है।
#26. ‘ यौगिकों के अणु’ की अवधारणा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )
- यौगिक का अणु (Molecule of a Compound): जब दो या दो से अधिक अलग-अलग तत्वों के परमाणु एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से आपस में संयुक्त होते हैं, तब यौगिक के अणु का निर्माण होता है।
- उदाहरण के लिए, पानी ($H_2O$) एक यौगिक है जिसका अणु हाइड्रोजन और ऑक्सीजन (दो भिन्न तत्वों) के परमाणुओं के संयोजन से बनता है।
- यौगिक के अणु में उसके घटक तत्वों के गुण मौजूद होते हैं, जो अपनी रासायनिक पहचान बनाए रखते हैं।
- किसी यौगिक का अणु विभिन्न तत्वों के परमाणुओ के पृथक्करण से बनता है: पृथक्करण (तोड़ना) से अणु का निर्माण नहीं होता, बल्कि रासायनिक संयोजन से नए अणु बनते हैं।
- किसी यौगिक का अणु एक ही तत्व के परमाणुओ के संयोजन से बनता है: एक ही तत्व के परमाणुओं के मिलने से ‘तत्व का अणु’ (जैसे $O_2, N_2$) बनता है, यौगिक का नहीं।
- किसी यौगिक का अणु एक ही तत्व के परमाणुओ के पृथक्करण से बनता है: यह कथन भी वैज्ञानिक रूप से गलत है क्योंकि यौगिक हमेशा दो या दो से अधिक भिन्न तत्वों से मिलकर बनता है।
#27. ‘समस्थानिक’ शब्द किसको संदर्भित करता है?
(RRB NTPC CBT-I : 3 April 2021 Shift 1)
- समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic Number / प्रोटॉनों की संख्या) समान होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहा जाता है।
- चूंकि इनमें प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए इनके रासायनिक गुण समान होते हैं, लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने के कारण इनके भौतिक गुण भिन्न हो सकते हैं।
- उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन के तीन प्रमुख समस्थानिक हैं: प्रोटियम ($^1_1H$), ड्यूटेरियम ($^2_1H$), और ट्राइटियम ($^3_1H$)।
- समान बंध संरचना वाले तत्व: यह रासायनिक आबंधन और आणविक संरचना से संबंधित है, समस्थानिकों की मूल परिभाषा से नहीं।
- भिन्न परमाणु क्रमांक लेकिन समान द्रव्यमान संख्या वाले तत्व: भिन्न परमाणु क्रमांक और समान द्रव्यमान संख्या वाले तत्वों को समभारिक (Isobars) कहा जाता है, समस्थानिक नहीं।
- समान भौतिक और रासायनिक गुण वाले तत्व: समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं परंतु द्रव्यमान में अंतर के कारण उनके भौतिक गुण (जैसे घनत्व, क्वथनांक आदि) भिन्न होते हैं।
#28. रदरफोर्ड के α- कण प्रकीर्णन प्रयोग से निम्नलिखित में से किसकी खोज हुई?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
- रदरफोर्ड का अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कणों की बौछार करके यह सिद्ध किया कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है और उसका संपूर्ण धन आवेश तथा द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अति सूक्ष्म स्थान पर केंद्रित रहता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है।
- इस प्रयोग के परिणामों ने थॉमसन के प्लम पुडिंग मॉडल को असत्य साबित किया और आधुनिक परमाणु मॉडल की नींव रखी।
- नाभिक के भीतर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन (न्युक्लियॉन) स्थित होते हैं।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज और नामकरण से रदरफोर्ड का नाम जुड़ा है, लेकिन अल्फा प्रकीर्णन प्रयोग विशेष रूप से परमाणु के नाभिक की खोज के लिए प्रसिद्ध है।
- न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन की खोज वर्ष 1932 में वैज्ञानिक जेम्स चैडविक द्वारा की गई थी, न कि रदरफोर्ड के इस मूल प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा।
- इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन की खोज वर्ष 1897 में जे. जे. थॉमसन द्वारा कैथोड किरणों के अध्ययन के दौरान की गई थी।
#29. निम्नलिखित में से कौन त्रिपरामनुक् अणु है?
(RPF Constable 2018 12 Feb 2019)
- त्रिपरामनुक् अणु (Triatomic Molecule): ऐसा अणु जिसके एक ही अणु में किसी तत्व या यौगिक के कुल तीन परमाणु आपस में जुड़े होते हैं, उसे त्रिपरामनुक् अणु कहा जाता है।
- ओजोन ($O_3$): यह ऑक्सीजन का एक अपररूप (Allotrope) है, जिसके प्रत्येक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं, इसलिए यह एक त्रिपरामनुक् अणु है।
- ओजोन परत पृथ्वी के समताप मंडल (Stratosphere) में पाई जाती है जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करती है।
- हाइड्रोजन ($H_2$): यह एक द्विपरमाणुक (Diatomic) अणु है क्योंकि इसके एक अणु में हाइड्रोजन के दो परमाणु होते हैं।
- हीलियम (He): यह एक उत्कृष्ट (अक्रिय) गैस है जो स्वतंत्र रूप से एकपरमाणुक (Monoatomic) रूप में पाई जाती है।
- नियॉन (Ne): हीलियम की तरह नियॉन भी एक एकपरमाणुक अक्रिय गैस है, जिसके अणु में केवल एक ही परमाणु होता है।
#30. किसी पदार्थ के एक मोल में उपस्थित परमाणुओं या अणुओं या आयनों की संख्या को क्या कहा जाता है?
(RRB JE 27 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- अवोग्राहो संख्या या स्थिरांक (Avogadro’s Number / Constant): किसी भी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के ठीक एक मोल (1 Mole) में उपस्थित कणों (जैसे परमाणु, अणु या आयन) की कुल संख्या निश्चित होती है, जिसे अवोग्राहो संख्या कहा जाता है।
- इसका मान लगभग $6.022 \times 10^{23}$ प्रति मोल होता है। इसे प्रतीक $N_A$ या $L$ द्वारा दर्शाया जाता है।
- यह रसायन विज्ञान में मोल संकल्पना (Mole Concept) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण मूल इकाई है।
- प्रसामान्यता (Normality): यह विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने की एक इकाई है (प्रति लीटर विलयन में विलेय के ग्राम-तुल्यांकों की संख्या)।
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number): यह किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या का योग होती है।
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number): यह किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को दर्शाता है।
#31. जिन न्यूक्लाइडों की द्रव्यमान संख्या समान होती है, उन्हें क्या कहा जाता है?
(RRB JE EE 19 Sept 2019 Shift 2 CBT 2)
- समभारिक (Isobars): ऐसे न्यूक्लाइड या विभिन्न तत्वों के परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) भिन्न-भिन्न होते हैं, लेकिन जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number – प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का कुल योग) समान होती है, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
- चूंकि ये अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं, इसलिए इनके रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
- इसका एक क्लासिक उदाहरण ऑर्गन ($_{18}^{40}\text{Ar}$), पोटैशियम ($_{19}^{40}\text{K}$), और कैल्शियम ($_{20}^{40}\text{Ca}$) का युग्म है, जिनकी द्रव्यमान संख्या समान (40) है।
- समन्यूट्रॉनिक (Isotones): ऐसे परमाणु जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें समन्यूट्रॉनिक कहा जाता है।
- समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक), उन्हें समस्थानिक कहते हैं।
- समावयवी (Isomers): यह रसायन विज्ञान में समान आणविक सूत्र लेकिन भिन्न संरचनात्मक गुणों वाले यौगिकों के लिए प्रयुक्त होने वाला शब्द है।
#32. कैथोड किरण का प्रयोग पहली बार किसके द्वारा किया गया था?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- कैथोड किरण प्रयोग: ब्रिटिश भौतिकविद् जे. जे. थॉमसन (J. J. Thomson) ने वर्ष 1897 में कैथोड किरणों (Cathode Rays) पर व्यवस्थित और व्यापक प्रयोग किए।
- उन्होंने अपने प्रयोगों से यह सिद्ध किया कि कैथोड किरणें उच्च गति वाले ऋणावेशित कणों की धारा हैं, जिन्हें उन्होंने ‘कॉर्पसकल’ नाम दिया था और जिन्हें बाद में इलेक्ट्रॉन कहा गया।
- इस क्रांतिकारी खोज के लिए उन्हें वर्ष 1906 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्हें अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के माध्यम से परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज करने के लिए जाना जाता है।
- जॉन डाल्टन: इन्होंने पदार्थों के अध्ययन के लिए ‘आधुनिक परमाणु सिद्धांत’ (Atomic Theory) प्रतिपादित किया था।
- गोल्डस्टीन: इन्हें विसर्जन नलिका में एनोड किरणों (धनात्मक किरणों) की खोज का श्रेय दिया जाता है।
#33. निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक ने परमाण्विक द्रव्यमान की अवधारणा दी?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 16/03/2026 )
- परमाणु द्रव्यमान की अवधारणा: ब्रिटिश रसायनविद् और भौतिकविद् जॉन डाल्टन ने वर्ष 1808 में अपना प्रसिद्ध परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) प्रतिपादित किया था।
- उन्होंने ही सबसे पहले रासायनिक तत्वों के लिए परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass / Atomic Weight) की अवधारणा दी और विभिन्न तत्वों के सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान की पहली सारणी तैयार की।
- डाल्टन के इस सिद्धांत ने आधुनिक रसायन विज्ञान की नींव रखने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्हें अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज करने के लिए जाना जाता है।
- जे. जे. थॉमसन: इन्होंने कैथोड किरणों के अध्ययन द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज की और परमाणु का ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ दिया था।
- नील्स बोर: इन्होंने परमाणु का क्वांटम मॉडल (Bohr’s Model of Atom) प्रस्तुत किया, जिसमें स्थिर कक्षाओं और ऊर्जा स्तरों की परिकल्पना की गई थी।
#34. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार, परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान कहाँ स्थित होता है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)
- रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल: रदरफोर्ड के अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग से यह स्पष्ट हुआ कि परमाणु का समस्त धनावेश और उसका अधिकांश द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म, सघन क्षेत्र में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है।
- नाभिक के भीतर भारी कण यानी प्रोटॉन और न्यूट्रॉन (जिन्हें संयुक्त रूप से न्यूक्लियॉन कहते हैं) स्थित होते हैं, जो परमाणु के कुल द्रव्यमान का लगभग संपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।
- इसके विपरीत, परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है और बाहर घूमने वाले इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान बेहद नगण्य होता है।
- इलेक्ट्रॉनों के कोशों में: इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान प्रोटॉन या न्यूट्रॉन की तुलना में बहुत कम (लगभग 1/1836 गुना) होता है, इसलिए कोशों में परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान नहीं होता।
- इलेक्ट्रॉन क्लाउड में: यह क्षेत्र मुख्य रूप से हल्के इलेक्ट्रॉनों के पाए जाने की प्रायिकता को दर्शाता है, जहाँ परमाणु का भारी द्रव्यमान नहीं होता।
- यह समान रूप से वितरित है: परमाणु का द्रव्यमान पूरे परमाणु में समान रूप से वितरित नहीं होता; यह थॉमसन के प्लम पुडिंग मॉडल की परिकल्पना थी, जिसे रदरफोर्ड के प्रयोग ने गलत साबित कर दिया था।
#35. धनात्मक आवेश आयन को ________ कहा जाता है:
(RRB NTPC CBT-I : 7 Jan 2021 Shift 1)
- धनायन (Cation): जब कोई उदासीन परमाणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है, तो उसके प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों से अधिक हो जाती है, जिससे उस पर धनात्मक आवेश आ जाता है। ऐसे धनावेशित आयन को धनायन कहा जाता है।
- उदाहरण के लिए, सोडियम परमाणु ($Na$) एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर सोडियम धनायन ($Na^+$) का निर्माण करता है।
- सामान्यतः धातुएं (Metals) इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति रखती हैं।
- अणु (Molecule): यह दो या दो से अधिक परमाणुओं का रासायनिक रूप से बंधा हुआ समूह होता है, जो जरूरी नहीं कि आवेशित हो।
- परमाणु (Atom): यह किसी तत्व का सूक्ष्मतम कण है जो आमतौर पर विद्युत रूप से उदासीन होता है (यानी उस पर कोई नेट आवेश नहीं होता)।
- ऋणायन (Anion): यह ऋणावेशित आयन होता है जो किसी परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने (इलेक्ट्रॉनों की वृद्धि) से बनता है।
#36. नाइट्रस एसिड ( HNO 2) का मोलर द्रव्यमान कितना है?
(RPF SI 2018 : 10 Jan 2019 Shift 3)
- मोलर द्रव्यमान की गणना ($HNO_2$): किसी यौगिक का मोलर द्रव्यमान उसके सभी घटक परमाणुओं के कुल परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है.
- नाइट्रस एसिड ($HNO_2$) में हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु शामिल होते हैं:
• हाइड्रोजन (H) का परमाणु द्रव्यमान = $1.01\text{ u}$
• नाइट्रोजन (N) का परमाणु द्रव्यमान = $14.01\text{ u}$
• ऑक्सीजन ($O_2$) के 2 परमाणुओं का द्रव्यमान = $2 \times 16.00 = 32.00\text{ u}$
- कुल मोलर द्रव्यमान: $1.01 + 14.01 + 32.00 = 47.02\text{ g/mol}$ (यह मान लगभग **47.013 ग्राम/मोल** होता है, परीक्षा विकल्पों के अनुसार इस प्रश्न में मुद्रण त्रुटि के कारण 63.01 u नाइट्रिक एसिड [$HNO_3$] का मोलर द्रव्यमान दिया गया है, जबकि $HNO_2$ का सही मान लगभग 47 g/mol है)।
- 44.01 ग्राम/मोल: यह कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) का मोलर द्रव्यमान होता है।
- 36.46 ग्राम/मोल: यह हाइड्रोक्लोरिक एसिड ($HCl$) का आणविक द्रव्यमान है।
- 47.013 ग्राम/मोल: यह नाइट्रस एसिड ($HNO_2$) का वास्तविक और सटीक मोलर द्रव्यमान है (यदि प्रतियोगी परीक्षा की आधिकारिक उत्तर कुंजी के संदर्भ में देखा जाए तो विकल्प मुद्रण संबंधी भिन्नता दिखा सकते हैं, किंतु वैज्ञानिक गणना 47 g/mol ही दर्शाती है)।
#37. रासायनिक सूत्र में सबस्क्रिप्ट क्या दर्शाता है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)
- रासायनिक सूत्र में सबस्क्रिप्ट (Subscript): किसी रासायनिक सूत्र में रासायनिक प्रतीक के नीचे या दाईं ओर लिखी जाने वाली छोटी संख्या को सबस्क्रिप्ट कहते हैं।
- यह सबस्क्रिप्ट यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि उस यौगिक के एक अणु या सूत्र इकाई में संबंधित तत्व के कितने परमाणु उपस्थित हैं।
- उदाहरण के लिए, ग्लूकोज ($C_6H_{12}O_6$) के सूत्र में कार्बन के साथ ‘6’, हाइड्रोजन के साथ ’12’ और ऑक्सीजन के साथ ‘6’ सबस्क्रिप्ट यह बताते हैं कि इसके एक अणु में इन तत्वों के कितने परमाणु हैं।
- तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था: यह रासायनिक यौगिकों में इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान या साझा करने की स्थिति को दर्शाती है, न कि सबस्क्रिप्ट को।
- यौगिक का द्रव्यमान: यह सभी घटक परमाणुओं के कुल परमाणु द्रव्यमान के योग से तय होता है, सबस्क्रिप्ट स्वयं द्रव्यमान नहीं है।
- आयन का आवेश: किसी आयन पर मौजूद आवेश को हमेशा ‘सुपरस्क्रिप्ट’ (ऊपर की तरफ, जैसे $SO_4^{2-}$ में $2-$) द्वारा दर्शाया जाता है, सबस्क्रिप्ट द्वारा नहीं।
#38. हंस गीगर ( Hans Geiger) और अर्नेस्ट मार्सडेन ( Ernest Marsden) ने ________ के पर्यवेक्षण में प्रसिद्ध α- कण प्रकीर्णन प्रयोग किया।
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 25/03/2026 )
- अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): हंस गीगर और अर्नेस्ट मार्सडेन ने प्रसिद्ध भौतिकविद् अर्नेस्ट रदरफोर्ड के निर्देशन और पर्यवेक्षण में यह ऐतिहासिक प्रयोग किया था।
- इस प्रयोग में उन्होंने सोने की बेहद पतली पन्नी पर तीव्र गति वाले अल्फा कणों की बौछार की, जिसके परिणामों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज की घोषणा की।
- इसी कारण इस प्रयोग को अक्सर ‘रदरफोर्ड का प्रकीर्णन प्रयोग’ या ‘गीगर-मार्सडन प्रयोग’ भी कहा जाता है।
- नील्स बोहर: इन्होंने रदरफोर्ड के मॉडल में सुधार करते हुए परमाणु का क्वांटम मॉडल प्रस्तुत किया था।
- जॉन डाल्टन: इन्होंने आधुनिक परमाणु सिद्धांत और परमाणु द्रव्यमान की अवधारणा दी थी।
- विलियम हेनरी: इनका संबंध क्रिस्टलोग्राफी और एक्स-रे विवर्तन (Bragg’s law) के क्षेत्र से है।
#39. न्यूट्रॉन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
- न्यूट्रॉन (Neutron): न्यूट्रॉन एक आवेशहीन (विद्युत रूप से उदासीन) उप-परमाणु कण है जिसका द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर (लगभग 1 u) होता है।
- हाइड्रोजन (प्रोटियम) को छोड़कर, यह ब्रह्मांड के सभी तत्वों के परमाणुओं के केंद्र यानी नाभिक (Nucleus) में प्रोटॉनों के साथ दृढ़ता से बंधा रहता है।
- इसकी खोज वर्ष 1932 में वैज्ञानिक जेम्स चैडविक द्वारा की गई थी।
- इनमें धनावेश होता है: धनावेशित कण प्रोटॉन होते हैं, जबकि न्यूट्रॉन पूरी तरह से उदासीन होते हैं।
- ये परमाणु के रासायनिक गुणों को निर्धारित करते हैं: परमाणु के रासायनिक गुण मुख्य रूप से उसके बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या और विन्यास पर निर्भर करते हैं, न्यूट्रॉनों पर नहीं।
- ये नियत कक्षाओं में नाभिक के परितः परिक्रमण करते हैं: नाभिक के चारों ओर नियत कक्षाओं में चक्कर लगाने वाले कण इलेक्ट्रॉन होते हैं, न्यूट्रॉन नहीं।
#40. एक परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन की उपस्थिति की खोज निम्नलिखित में से किसने की है?
(RRB JE 26 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- न्यूट्रॉन की खोज (1932): ब्रिटिश भौतिकविद् जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने वर्ष 1932 में हल्के तत्वों (जैसे बेरिलियम) पर अल्फा कणों की बौछार करके एक विद्युत रूप से उदासीन (आवेशहीन) और लगभग प्रोटॉन के समान द्रव्यमान वाले उप-परमाणु कण की खोज की, जिसे न्यूट्रॉन नाम दिया गया।
- यह कण हाइड्रोजन को छोड़कर सभी तत्वों के परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों के साथ उपस्थित होता है।
- इस महत्वपूर्ण खोज के लिए उन्हें वर्ष 1935 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- ई. रदरफोर्ड: इन्हें अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के माध्यम से परमाणु के केंद्र यानी ‘नाभिक’ की खोज करने के लिए जाना जाता है।
- जे.जे. थॉमसन: इन्होंने कैथोड किरणों के अध्ययन द्वारा ‘इलेक्ट्रॉन’ की खोज की थी।
- ई. गोल्डस्टीन: इन्होंने विसर्जन नलिका में एनोड किरणों (धनात्मक किरणों) का अध्ययन किया था, जिससे प्रोटॉन की खोज का मार्ग प्रशस्त हुआ।
#41. रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामस्वरूप ________ की खोज हुई।
(RRB JE 27 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- रदरफोर्ड का अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग: वर्ष 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा किए गए इस प्रयोग ने यह साबित किया कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और उसका समस्त धन आवेश उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म, सघन क्षेत्र में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है।
- अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी से सीधे पार निकल गए, जिससे यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है।
- बहुत कम कण अपने मार्ग से विक्षेपित हुए या वापस लौटे, जिससे नाभिक के अत्यधिक सघन और धनावेशित होने का पता चला।
- इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन की खोज वर्ष 1897 में जे. जे. थॉमसन द्वारा कैथोड किरणों के माध्यम से की गई थी।
- न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन की खोज वर्ष 1932 में वैज्ञानिक जेम्स चैडविक द्वारा की गई थी।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज और नामकरण से रदरफोर्ड का संबंध है, किंतु यह विशिष्ट प्रकीर्णन प्रयोग विशेष रूप से ‘परमाणु के नाभिक’ की खोज के लिए मील का पत्थर माना जाता है।
#42. यदि ग्लूकोज :: छह-कार्बन अणु, तो पाइरूवेट :: ________ ।
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- ग्लाइकोसिलीन (Glycolysis) प्रक्रिया: जीवों में श्वसन प्रक्रिया के पहले चरण (ग्लाइकोलिसिस) के दौरान, कोशिका के साइटोप्लाज्म में 6-कार्बन वाला ग्लूकोज अणु टूटकर 3-कार्बन वाले पाइरूवेट (पाइरुविक अम्ल) के दो अणुओं में विभाजित होता है।
- ग्लूकोज का रासायनिक सूत्र $C_6H_{12}O_6$ होता है (जिसमें कार्बन के 6 परमाणु होते हैं)।
- पाइरूवेट का रासायनिक सूत्र $C_3H_4O_3$ होता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाइरूवेट एक तीन-कार्बन अणु है।
- चार-कार्बन अणु: श्वसन चक्र (जैसे क्रेब्स चक्र) में कुछ मध्यवर्ती यौगिक 4-कार्बन वाले होते हैं, किंतु पाइरूवेट स्वयं 4-कार्बन का नहीं होता।
- पाँच-कार्बन अणु: पेंटोज शर्करा (जैसे राइबोज) 5-कार्बन वाली होती है, पाइरूवेट नहीं।
- दो-कार्बन अणु: पाइरूवेट जब माइटोकॉन्ड्रिया में प्रवेश करता है, तो ऑक्सीकरण के दौरान वह एसिटाइल-कोएंजाइम A ($C_2$ यौगिक) में बदल जाता है, लेकिन पाइरूवेट स्वयं 3-कार्बन अणु होता है।
#43. मेंडलीफ के आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों को ________ के क्रम में आवर्त सारणी में व्यवस्थित किया गया था।
(RRB JE 26 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- मेंडलीफ का आवर्त नियम (Mendeleev’s Periodic Law): रूसी रसायनविद् दमित्री मेंडलीफ (Dmitri Mendeleev) ने वर्ष 1869 में अपनी आवर्त सारणी प्रस्तुत की थी।
- उनके मूल आवर्त नियम के अनुसार, “तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन (Periodic Function) होते हैं।”
- इसी आधार पर उन्होंने उस समय ज्ञात सभी तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान (Increasing Atomic Mass) के क्रम में क्षैतिज पंक्तियों (आवर्त) और ऊर्ध्वाधर स्तंभों (समूह) में व्यवस्थित किया था।
- बढ़ती परमाणु संख्या: तत्वों को बढ़ती हुई परमाणु संख्या के क्रम में व्यवस्थित करने का कार्य हेनरी मोसले द्वारा ‘आधुनिक आवर्त सारणी’ में किया गया था, न कि मेंडलीफ द्वारा।
- घटते परमाणु द्रव्यमान: तत्वों को घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर आवर्ती गुणधर्म नियमित रूप से पुनरावृत्ति नहीं दर्शाते, इसलिए तत्वों को हमेशा बढ़ते क्रम में रखा गया।
- घटती परमाणु संख्या: यह किसी भी वैज्ञानिक आवर्त सारणी के निर्माण का मानक नियम नहीं है।
#44. पदार्थ के एक अणु में सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमान का योग –
(RRB JE CBT-I : 22 May, 2019 Shift 2)
- आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass): किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के एक अणु में उपस्थित सभी घटक परमाणुओं के व्यक्तिगत परमाणु द्रव्यमानों के कुल योग को उस पदार्थ का आणविक द्रव्यमान कहा जाता है।
- इसे परमाणु द्रव्यमान इकाई ($u$ या $\text{amu}$) में व्यक्त किया जाता है।
- उदाहरण के लिए, जल ($H_2O$) का आणविक द्रव्यमान निकालने के लिए हाइड्रोजन के 2 परमाणुओं और ऑक्सीजन के 1 परमाणु के द्रव्यमान को जोड़ा जाता है ($2 \times 1 + 16 = 18\text{ u}$)।
- सूत्र द्रव्यमान (Formula Mass): यह विशेष रूप से आयनिक यौगिकों (जैसे सोडियम क्लोराइड, $NaCl$) के लिए उपयोग किया जाता है, जिनके अणु वास्तविक रूप से स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में नहीं होते बल्कि आयनिक जालक बनाते हैं।
- मोल (Mole): यह पदार्थ की मात्रा की एसआई (SI) इकाई है, जिसमें निश्चित संख्या में कण ($6.022 \times 10^{23}$) होते हैं।
- परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass): यह किसी एकल परमाणु का द्रव्यमान होता है, न कि पूरे अणु में शामिल सभी परमाणुओं के द्रव्यमानों का योग।
#45. निम्नलिखित में से कौन-सा, हाइड्रोजन परमाणु का समस्थानिक नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes of Hydrogen): हाइड्रोजन के कुल तीन प्राकृतिक समस्थानिक होते हैं, जिनका परमाणु क्रमांक 1 होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है:
1. प्रोटियम ($^1_1H$): यह हाइड्रोजन का सबसे सामान्य समस्थानिक है (इसमें न्यूट्रॉन नहीं होता)।
2. ड्यूटीरियम ($^2_1H$ या D): इसे भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं, जिसका उपयोग ‘भारी जल’ ($D_2O$) बनाने में होता है।
3. ट्राइटियम ($^3_1H$ या T): यह हाइड्रोजन का एक रेडियोएक्टिव समस्थानिक है।
- हीलियम (Helium): हीलियम एक अलग रासायनिक तत्व है (परमाणु क्रमांक 2 और द्रव्यमान संख्या 4), जो अक्रिय गैसों (Noble Gases) की श्रेणी में आता है, इसलिए यह हाइड्रोजन का समस्थानिक नहीं है।
- ड्यूटीरियम: यह हाइड्रोजन का वैध और महत्वपूर्ण समस्थानिक है।
- ट्राइटियम: यह भी हाइड्रोजन का एक ज्ञात रेडियोएक्टिव समस्थानिक है।
- प्रोटियम: यह हाइड्रोजन का सबसे प्रमुख और बहुतायत में पाया जाने वाला समस्थानिक है।
#46. कौन-सा कथन किसी तत्व की परमाणु संख्या का सही से वर्णन करता है?
(RRB JE 19/02/2026 )
- परमाणु क्रमांक या परमाणु संख्या (Atomic Number): किसी भी तत्व के परमाणु के नाभिक के भीतर उपस्थित कुल धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या (Number of Protons) को उस तत्व का परमाणु क्रमांक कहा जाता है। इसे अक्षर ‘Z’ से प्रदर्शित किया जाता है।
- एक उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या उसके चारों ओर चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के भी बराबर होती है।
- यह किसी तत्व की पहचान का मुख्य आधार है; प्रत्येक तत्व का परमाणु क्रमांक अद्वितीय (Unique) होता है।
- परमाणु में न्यूक्लियॉन की कुल संख्या: नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉन की कुल संख्या को ‘द्रव्यमान संख्या’ (Mass Number) कहा जाता है, परमाणु संख्या नहीं।
- नाभिक में उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉनों की संख्या से समन्यूट्रॉनिक (Isotones) या समस्थानिकों के द्रव्यमान में अंतर तय होता है, यह सीधे परमाणु क्रमांक को परिभाषित नहीं करती।
- सभी उपपरमाणविक कणों का कुल द्रव्यमान: यह परमाणु के कुल मोलर या आणविक द्रव्यमान से संबंधित है, न कि परमाणु संख्या से।
#47. चिन्ह परिपाटी के अनुसार, दर्पण द्वारा निर्मित सीधे प्रतिबिंब की ऊंचाई ________ रूप से ली जाती है।
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- गोलीय दर्पणों के लिए नई कॉर्टेजीय चिन्ह परिपाटी (New Cartesian Sign Convention):
• मुख्य अक्ष (Principal Axis) के लंबवत और इसके ऊपर की ओर मापी जाने वाली दूरियां या ऊँचाइयाँ हमेशा धनात्मक (+ve) ली जाती हैं।
• मुख्य अक्ष के लंबवत और इसके नीचे की ओर मापी जाने वाली ऊँचाइयाँ हमेशा ऋणात्मक (-ve) ली जाती हैं।
- चूंकि दर्पण द्वारा निर्मित **सीधा (Erect)** प्रतिबिंब हमेशा मुख्य अक्ष के ऊपर बनता है (जैसे आभासी प्रतिबिंब के मामले में), इसलिए ऐसे सीधे प्रतिबिंब की ऊँचाई को हमेशा धनात्मक रूप में लिया जाता है।
- यह नियम उत्तल और अवतल दोनों प्रकार के दर्पणों पर लागू होता है।
- ऋणात्मक: यह मान मुख्य अक्ष के नीचे बनने वाले उल्ट (Inverted) और वास्तविक प्रतिबिंबों की ऊँचाई के लिए लिया जाता है।
- शून्य: किसी भी वास्तविक बने हुए प्रतिबिंब की ऊँचाई शून्य नहीं हो सकती, शून्य मान केवल वस्तु की स्थिति (बिंदु आकार) के लिए हो सकता है।
- काल्पनिक: यह प्रतिबिंब की एक ‘प्रकृति’ (Nature) को दर्शाता है, न कि चिन्ह परिपाटी के अनुसार ऊँचाई का कोई सांख्यिकीय/गणितीय चिन्ह मान।
#48. डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का कौन सा अवधारणा निश्चित अनुपात के नियम ( Law of Definite Proportions) की व्याख्या करता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 29 Aug, 2025 Shift 2)
- निश्चित अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions): इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित और स्थिर अनुपात में मौजूद होते हैं (चाहे उसे किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो)।
- डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की व्याख्या: जॉन डाल्टन ने अपने सिद्धांत में यह स्पष्ट किया कि जब अलग-अलग तत्वों के परमाणु आपस में जुड़कर यौगिक बनाते हैं, तो वे हमेशा एक निश्चित और सरल पूर्ण-संख्या अनुपात (Simple Whole-Number Ratio) में ही संयुक्त होते हैं।
- यह अवधारणा सीधे तौर पर निश्चित अनुपात के नियम और गुणित अनुपात के नियम की सफलतापूर्ण व्याख्या करती है।
- परमाणु अविभाज्य और अविनाशी होते हैं: यह डाल्टन की वह अवधारणा है जो ‘द्रव्यमान संरक्षण के नियम’ (Law of Conservation of Mass) की व्याख्या करती है।
- एक ही तत्व के परमाणुओं का द्रव्यमान और आकार समान होता है: यह किसी दिए गए तत्व के परमाणुओं की समरूपता को स्पष्ट करता है, न कि यौगिकों के निश्चित अनुपात को।
- विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान और गुण अलग-अलग होते हैं: यह विभिन्न तत्वों के बीच भिन्नता को दर्शाता है, जो अनुपात नियम से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं है।
#49. परमाणु क्रमांक परमाणु केन्द्र पर ________ की कुल संख्या है।
(RPF Constable 2018 17 Jan 2019 Shift 3)
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number): किसी भी तत्व के परमाणु के केंद्र यानी नाभिक में उपस्थित कुल धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या को उस तत्व का परमाणु क्रमांक कहा जाता है। इसे अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘Z’ से प्रदर्शित किया जाता है।
- एक विद्युत रूप से उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या उसके चारों ओर चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या के ठीक बराबर होती है।
- यह किसी भी रासायनिक तत्व की विशिष्ट पहचान का मुख्य आधार है।
- फोटॉनों: फोटॉन प्रकाश या विद्युतचुंबकीय विकिरण के ऊर्जा पैकेट (क्वांटम) होते हैं, जिनका परमाणु केंद्र के द्रव्यमान या क्रमांक से सीधा संबंध नहीं होता।
- न्यूट्रॉन: नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या का योग ‘द्रव्यमान संख्या’ (Mass Number) कहलाता है।
- प्लाज्मा: यह पदार्थ की चौथी अवस्था है, जिसमें उच्च तापमान पर गैसें आयनित हो जाती हैं और स्वतंत्र आयनों तथा इलेक्ट्रॉनों का मिश्रण बनाती हैं।
#50. द्रव्यमान संख्या के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number – $A$): किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को द्रव्यमान संख्या कहा जाता है। चूंकि यह सभी तत्वों के लिए परमाणु संख्या ($Z$) के दोगुने के बराबर होना आवश्यक नहीं है, इसलिए दिया गया तीसरा कथन असत्य है।
- उदाहरण के लिए, सामान्य हाइड्रोजन (प्रोटियम) का परमाणु क्रमांक 1 होता है और इसकी द्रव्यमान संख्या भी 1 ही होती है ($1 \neq 2 \times 1$)। इसी तरह, अधिकांश भारी तत्वों में न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या से अधिक होती है, जिससे उनका द्रव्यमान परमाणु संख्या के दोगुने से काफी अधिक होता है।
- अतः यह नियम सभी तत्वों पर सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं होता।
- यह परमाणु में कुल न्यूक्लिऑन को निरूपित करती है: यह बिल्कुल सत्य है क्योंकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों को संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ कहा जाता है।
- यह हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है: यह सत्य है क्योंकि द्रव्यमान संख्या उप-परमाणु कणों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) की सीधी गिनती होती है, जो हमेशा एक पूर्ण संख्या (Integer) के रूप में होती है।
- यह एक ही तत्व के समस्थानिक के लिए भिन्न हो सकती है: यह बिल्कुल सत्य है; जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिकों (प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम) में द्रव्यमान संख्या क्रमशः 1, 2 और 3 होती है।
#51. रदरफोर्ड के स्वर्ण-पत्री प्रयोग से परमाणु मॉडल में एक बड़ा संशोधन हुआ। प्रयोग के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा प्रेक्षण और निष्कर्ष सबसे यथार्थ है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
- रदरफोर्ड का अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): इस प्रयोग के मुख्य प्रेक्षण और निष्कर्ष निम्नलिखित थे:
1. अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी को पार करके सीधे निकल गए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त (Empty Space) होता है।
2. बहुत कम कण अपने मार्ग से विक्षेपित (Deflect) हुए, जिससे यह पता चला कि परमाणु का धनावेश बहुत कम आयतन घेरता है।
3. बहुत ही कम (लगभग 10,000 में से 1) कण वापस अपने रास्ते पर लौट आए, जिससे यह साबित हुआ कि परमाणु का समस्त धनावेश और द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत छोटे क्षेत्र (नाभिक) में केंद्रित है।
- यह प्रयोग थॉमसन के ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ को खारिज करने और आधुनिक परमाणु मॉडल की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित हुआ।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक में मौजूद होते हैं और परमाणु के द्रव्यमान के लिए जिम्मेदार होते हैं: यह गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं और उनका द्रव्यमान बहुत कम होता है।
- अल्फा कण विक्षेपित होते हैं क्योंकि वे इलेक्ट्रॉनों से टकराते हैं और पूरे परमाणु में समान रूप से फैल जाते हैं: यह थॉमसन मॉडल की परिकल्पना से मिलता-जुलता है, जबकि रदरफोर्ड ने साबित किया कि विक्षेपण भारी धनावेशित नाभिक के कारण होता है, इलेक्ट्रॉनों के कारण नहीं।
- नाभिक धनावेशित होता है और परमाणु का अधिकांश आयतन घेरता है: यह कथन आधा सही है (नाभिक धनावेशित होता है), किंतु नाभिक परमाणु का ‘अधिकांश आयतन’ नहीं घेरता, बल्कि वह परमाणु के कुल आयतन की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म होता है (परमाणु का अधिकांश आयतन रिक्त होता है)।
#52. इलेक्ट्रॉन मूलभूत कण हैं जो पदार्थ बनाते हैं। निम्नलिखित में से किसे इस खोज का श्रेय दिया जाता है?
(RPF Constable 2024 : 10 Mar, 2025 Shift 2)
- इलेक्ट्रॉन की खोज (1897): ब्रिटिश भौतिकविद् जे. जे. थॉमसन ने वर्ष 1897 में कैथोड रे ट्यूब (विसर्जन नलिका) के प्रयोगों के माध्यम से परमाणु के भीतर पाए जाने वाले ऋण आवेशित उप-परमाणु कण यानी इलेक्ट्रॉन की खोज की थी।
- इलेक्ट्रॉन पदार्थ का एक अत्यंत मूलभूत कण है, जो परमाणु के नाभिक के बाहर विभिन्न निश्चित कक्षाओं या ऊर्जा स्तरों में चक्कर लगाता है।
- इस ऐतिहासिक खोज के लिए जे. जे. थॉमसन को वर्ष 1906 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- नील्स बोहर: इन्होंने परमाणु का क्वांटम मॉडल प्रस्तुत किया था, जिसमें इलेक्ट्रॉनों के लिए स्थिर कक्षाओं (Orbits) और ऊर्जा स्तरों की परिकल्पना की गई थी।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के द्वारा परमाणु के केंद्र में स्थित ‘नाभिक’ (Nucleus) की खोज की थी।
- मेरी क्यूरी: इनका संबंध रेडियोधर्मिता (Radioactivity) के क्षेत्र में अभूतपूर्व अनुसंधान तथा रेडियम और पोलोनियम तत्वों की खोज से है।
#53. रदरफोर्ड का परमाणु का ग्रहीय मॉडल ________ भी कहलाता है।
(RPF Constable 2024 : 18 Mar, 2025 Shift 2)
- रदरफोर्ड का ग्रहीय मॉडल (Planetary Model): अर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा प्रस्तुत परमाणु मॉडल को ‘ग्रहीय मॉडल’ के साथ-साथ परमाणु का नाभिकीय मॉडल (Nuclear Model of the Atom) भी कहा जाता है।
- इस मॉडल के अनुसार, जिस प्रकार सौरमंडल में सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं, ठीक उसी प्रकार परमाणु के भीतर ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन अत्यंत तीव्र गति से सघन धनावेशित केंद्र यानी नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं।
- चूंकि इस मॉडल में पहली बार परमाणु के केंद्र में ‘नाभिक’ की खोज और उसकी मुख्य भूमिका को स्पष्ट किया गया था, इसलिए इसे नाभिकीय मॉडल के रूप में जाना जाता है।
- परमाणु का असंतत ऊर्जा कक्षा मॉडल: यह नील्स बोहर के परमाणु मॉडल से संबंधित है, जिसमें इलेक्ट्रॉनों के लिए विशिष्ट और निश्चित ऊर्जा स्तरों (Orbits) की बात कही गई थी।
- परमाणु का प्लम पुडिंग मॉडल: यह जे. जे. थॉमसन द्वारा दिया गया मॉडल था, जिसमें परमाणु को धनावेशित गोले के रूप में और इलेक्ट्रॉनों को उसमें तरबूज के बीज की तरह धंसा हुआ बताया गया था।
- परमाणु का तरंग मॉडल: यह आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) पर आधारित मॉडल है (जैसे श्रोडिंगर का तरंग समीकरण), जो इलेक्ट्रॉनों के तरंग प्रकृति और इलेक्ट्रॉन मेघ (Electron Cloud) को समझाता है।
#54. इलेक्ट्रॉन की खोज का श्रेय किसे दिया जाता है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 18/03/2026)
- इलेक्ट्रॉन की खोज: ब्रिटिश भौतिकविद् जे. जे. थॉमसन ने वर्ष 1897 में कैथोड रे ट्यूब (विसर्जन नलिका) प्रयोग के दौरान परमाणु के भीतर पाए जाने वाले ऋण आवेशित उप-परमाणु कण यानी इलेक्ट्रॉन की खोज की थी।
- यह परमाणु का एक मूलभूत कण है, जिसका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग $1/1836$ वां भाग होता है।
- इस महान खोज के लिए उन्हें वर्ष 1906 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- अल्बर्ट आइंस्टीन: इन्हें उनके प्रसिद्ध ‘सापेक्षता के सिद्धांत’ (Theory of Relativity) और प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) की व्याख्या के लिए जाना जाता है।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा परमाणु के केंद्र में ‘नाभिक’ (Nucleus) की खोज की थी।
- मेरी क्यूरी: इनका संबंध रेडियोधर्मिता (Radioactivity) के क्षेत्र में अभूतपूर्व अनुसंधान और रेडियम तथा पोलोनियम की खोज से है।
#55. ईंची कुरोसावा द्वारा जिबरेलिक अम्ल की खोज किस वर्ष में की गई थी, जो बीज के अंकुरण और कोशिका प्रसार को उत्तेजित करने के लिए जाना जाता है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 03 Dec, 2024 Shift 1)
- जिबरेलिक अम्ल (Gibberellic Acid) की खोज: जापानी वैज्ञानिक और वनस्पतिशास्त्री ईंची कुरोसावा (Eiichi Kurosawa) ने वर्ष 1926 में चावल के पौधों में होने वाली “बाकानाए” (Bakanae / फूलिश सीडिंग) नामक बीमारी का अध्ययन करते हुए इसकी खोज की थी.
- उन्होंने पाया कि यह बीमारी जिबरेला फ्यूजिकुरोई (Gibberella fujikuroi) नामक कवक (Fungus) द्वारा स्रावित एक सक्रिय पदार्थ के कारण होती है, जो पौधों में अत्यधिक वृद्धि को प्रेरित करता है.
- यह एक महत्वपूर्ण पादप हार्मोन (Phytohormone) है, जो पौधों में कोशिका प्रसार (Cell elongation), बीज के अंकुरण, तने की लंबाई में वृद्धि और पुष्पन जैसी प्रक्रियाओं को उत्तेजित करता है.
- 1950: इस वर्ष के आसपास पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका और ब्रिटेन) के वैज्ञानिकों ने जापानी शोधों से प्रेरणा लेकर जिबरेलिंस पर व्यापक शोध और किण्वन (Fermentation) तकनीक का विकास किया था.
- 1910: यह वर्ष जिबरेलिक अम्ल की खोज से संबंधित नहीं है, हालांकि इस दौरान पादप हार्मोन्स (जैसे ऑक्सिन) पर प्रारंभिक अध्ययन शुरू हुए थे।
- 1975: यह पादप शरीर क्रिया विज्ञान के आधुनिक विकास और उन्नत जैव रासायनिक अनुसंधानों का काल है, न कि इस हार्मोन की मूल खोज का वर्ष।
#56. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 2)
- रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल: अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने मॉडल में यह बताया था कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार पथों (Circular Paths) में चक्कर लगाते हैं, न कि दीर्घवृत्ताकार पथों में।
- दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षाओं की अवधारणा का संबंध बाद में सोमरफेल्ड के परमाणु मॉडल (Sommerfeld’s Model) से है, जिन्होंने बोर के मॉडल में सुधार करते हुए दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं को जोड़ा था।
- अतः रदरफोर्ड के संदर्भ में दीर्घवृत्ताकार पथ वाला कथन गलत है, जबकि शेष तीनों कथन उनके मॉडल की सही विशेषताओं का वर्णन करते हैं।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार पथों में घूमते हैं: यह रदरफोर्ड के ग्रहीय मॉडल (Planetary Model) का एक मूल बिंदु है।
- परमाणु में एक धनावेशित केंद्र होता है, जिसे नाभिक कहते हैं: अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग का यह सबसे प्रमुख निष्कर्ष था।
- परमाणु की तुलना में नाभिक का आकार बहुत छोटा होता है: अधिकांश कणों के सीधे निकल जाने से यह सिद्ध हुआ था कि नाभिक का आयतन परमाणु के कुल आयतन की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म होता है।
#57. एक तत्व के समस्थानिकों ________ होते हैं।
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 2)
- समस्थानिक (Isotopes): किसी एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic Number / प्रोटॉनों की संख्या) समान होता है, किंतु द्रव्यमान संख्या (Mass Number) भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहा जाता है।
- चूँकि परमाणु क्रमांक समान होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग होती है, इसलिए इनके नाभिक में उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है।
- उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों (प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम) में न्यूट्रॉनों की संख्या क्रमशः 0, 1 और 2 होती है।
- भौतिक गुण समान: समस्थानिकों के द्रव्यमान अलग होने के कारण उनके भौतिक गुण (जैसे घनत्व, क्वथनांक आदि) भिन्न होते हैं, समान नहीं।
- रासायनिक गुण भिन्न: चूँकि समस्थानिकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या और उनका विन्यास समान होता है, इसलिए उनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, भिन्न नहीं।
- अलग-अलग परमाणु क्रमांक: एक ही तत्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक हमेशा समान होता है (यही समस्थानिक की मूल परिभाषा है)।
#58. यदि कोई तत्व – 2 आवेश वाले आयन का निर्माण करता है, तो यह उसकी संयोजकता के बारे में क्या संकेत देता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- ऋणायन और आवेश ($ -2 $): जब कोई उदासीन परमाणु अपना अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए बाहरी कक्ष में एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से अधिक हो जाती है, जिससे उस पर ऋणावेश आ जाता है।
- यदि किसी आयन पर **$-2$ (द्विऋणायन)** आवेश है, तो इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि उस परमाणु ने अपनी संयोजकता को संतुष्ट करने के लिए बाहर से **2 इलेक्ट्रॉन प्राप्त (Gain)** किए हैं (उदाहरण के लिए: ऑक्सीजन $O^{2-}$ या सल्फर $S^{2-}$ आयन)।
- इसकी संयोजकता का मान 2 होता है क्योंकि यह दो इलेक्ट्रॉनों का साझा या ग्रहण कर सकता है।
- तत्व ने 2 इलेक्ट्रॉन खो दिए हैं: इलेक्ट्रॉन त्यागने (खोने) से परमाणु पर धनात्मक आवेश यानी धनायन (जैसे $+2$) बनता है, न कि ऋणावेश।
- तत्व के नाभिक में 2 इलेक्ट्रॉन हैं: इलेक्ट्रॉन कभी भी नाभिक के भीतर नहीं पाए जाते; वे नाभिक के बाहर निश्चित कक्षाओं या ऊर्जा स्तरों में चक्कर लगाते हैं।
- तत्व ने 2 प्रोटॉन प्राप्त किए हैं: रासायनिक अभिक्रियाओं या आयन बनने की प्रक्रिया में प्रोटॉनों का आदान-प्रदान नहीं होता (प्रोटॉन नाभिक के अंदर दृढ़ता से बंधे होते हैं)। प्रोटॉन बदलना यानी पूरे तत्व का ही बदल जाना।
#59. किसी तत्व के समस्थानिक का निर्धारण करने के लिए, निम्नलिखित में से कौन-सा कण आवश्यक है?
(Not found 11/03/2026 )
- समस्थानिक का निर्धारण: किसी भी तत्व के सभी समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) बिल्कुल समान होती है, जो उस तत्व की मूल पहचान निर्धारित करती है।
- एक ही तत्व के विभिन्न समस्थानिकों (Isotopes) के बीच केवल उनके नाभिक में उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या में भिन्नता होती है।
- अतः यह स्पष्ट है कि किसी विशिष्ट समस्थानिक (जैसे कार्बन-12 और कार्बन-14 या हाइड्रोजन के समस्थानिक) का निर्धारण या अंतर करने के लिए न्यूट्रॉनों की संख्या मुख्य कारक होती है।
- प्रोटॉन: प्रोटॉनों की संख्या किसी तत्व के ‘परमाणु क्रमांक’ (Atomic Number) को निर्धारित करती है, न कि विशिष्ट समस्थानिक को (क्योंकि एक ही तत्व के सभी समस्थानिकों में प्रोटॉन समान होते हैं)।
- इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉनों की संख्या उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों के बराबर होती है, जिससे रासायनिक गुण तय होते हैं, लेकिन यह समस्थानिकों के द्रव्यमान अंतर को स्पष्ट नहीं करती।
- पॉज़िट्रॉन: यह इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण (Antiparticle) है, जिसका सामान्य परमाणु संरचना या समस्थानिकों के निर्धारण से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
#60. ऑक्सीजन का परमाण्विक द्रव्यमान कितना है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
- ऑक्सीजन का परमाण्विक द्रव्यमान: प्रकृति में पाए जाने वाले ऑक्सीजन ($O$) का मानक परमाण्विक द्रव्यमान लगभग 16 u (परमाणु द्रव्यमान इकाई / amu) होता है।
- इसके सबसे सामान्य समस्थानिक ($^{16}_8O$) के नाभिक में 8 प्रोटॉन और 8 न्यूट्रॉन होते हैं, जिससे इसका कुल द्रव्यमान 16 amu बनता है।
- रसायन विज्ञान में गणनाओं और stoichiometry के लिए इसे मानक रूप से 16 u उपयोग किया जाता है।
- 12 u: यह कार्बन ($^{12}C$) का परमाण्विक द्रव्यमान है, जिसे परमाणु द्रव्यमान मापने के मानक संदर्भ के रूप में भी लिया जाता है।
- 18 u: यह जल ($H_2O$) अणु का कुल आणविक द्रव्यमान है ($2 \times 1 + 16 = 18$), न कि अकेले ऑक्सीजन का परमाण्विक द्रव्यमान।
- 8 u: यह ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) यानी प्रोटॉनों की संख्या है, उसका द्रव्यमान नहीं।
#61. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, किसी तत्व के परमाणु क्रमांक को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number): किसी भी रासायनिक तत्व के परमाणु के नाभिक के भीतर उपस्थित कुल धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या को उस तत्व का परमाणु क्रमांक (Z) कहा जाता है।
- यह प्रत्येक तत्व के लिए एक अद्वितीय (Unique) मान होता है; उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन का परमाणु क्रमांक 1 है क्योंकि इसके नाभिक में 1 प्रोटॉन होता है, और कार्बन का 6 है क्योंकि इसमें 6 प्रोटॉन होते हैं।
- एक उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है, किंतु मूल परिभाषा हमेशा नाभिक के प्रोटॉनों पर आधारित होती है।
- किसी परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉनों की संख्या से समस्थानिकों (Isotopes) का अंतर स्पष्ट होता है, यह परमाणु क्रमांक को परिभाषित नहीं करती।
- नाभिक में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या: इसे ‘द्रव्यमान संख्या’ (Mass Number / A) कहा जाता है।
- किसी परमाणु के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या: यह किसी तत्व की संयोजकता (Valency) और रासायनिक व्यवहार (समूह) को निर्धारित करने में मदद करती है, न कि परमाणु क्रमांक को।
#62. एक गाड़ी एक समान वेग से गतिमान है और उसे रोकने के लिए विपरीत दिशा में एक मन्दक बल F लगाया जाता है। बल द्वारा किया गया कार्य है:
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)
- कार्य (Work) का सूत्र: $W = F \cdot s \cdot \cos\theta$, जहाँ $F$ बल, $s$ विस्थापन और $\theta$ बल तथा विस्थापन के बीच का कोण है।
- चूँकि मन्दक बल (Retarding Force / ब्रेकिंग बल) गाड़ी की गति की विपरीत दिशा में लगाया जाता है और गाड़ी का विस्थापन आगे की दिशा में होता है, इसलिए बल और विस्थापन के बीच का कोण $180^\circ$ होता है।
- चूँकि $\cos(180^\circ) = -1$ होता है, इसलिए बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक ($W = -Fs$) होगा। यह इस बात को दर्शाता है कि बल गाड़ी की गति का विरोध कर रहा है और उसकी गतिज ऊर्जा को कम कर रहा है।
- धनात्मक: कार्य तब धनात्मक होता है जब लगाया गया बल और विस्थापन दोनों एक ही दिशा में हों ($\theta = 0^\circ$, जैसे गाड़ी को आगे धकेलने पर)।
- शून्य: कार्य तब शून्य होता है जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत हों ($\theta = 90^\circ$, जैसे कुली द्वारा सिर पर सामान रखकर चलना)।
- अनिधारित: यहाँ बल और विस्थापन की दिशाएँ और उनके बीच का कोण पूरी तरह स्पष्ट है, इसलिए कार्य को आसानी से निर्धारित किया जा सकता है।
#63. मुक्त अवस्था में बिंदुओं के बीच सामान्य त्रिविम विभाजन क्या है?
(RPF SI 2018 : 12 Jan 2019 Shift 3)
- क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice): क्रिस्टलीय ठोस पदार्थों में उनके अवययी कणों (परमाणुओं, आयनों या अणुओं) की त्रिविम (3D) अंतरिक्ष में एक नियमित और पुनरावृत्ति व्यवस्था (Periodic Arrangement) को क्रिस्टल जालक या आकाशीय जालक कहा जाता है।
- इस त्रि-आयामी विन्यास में प्रत्येक बिंदु एक निश्चित अवययी कण की स्थिति को दर्शाता है, जिसे जालक बिंदु (Lattice Point) कहा जाता है।
- यह संरचना ठोस पदार्थों की ज्यामितीय निश्चितता और उनके भौतिक गुणों को निर्धारित करने में मुख्य भूमिका निभाती है।
- प्रिमिटीव जालक (Primitive Lattice): यह क्रिस्टल जालक का एक विशिष्ट प्रकार (आदि एकक कोष्ठिका) होता है, जिसमें जालक बिंदु केवल कोने पर उपस्थित होते हैं, संपूर्ण त्रिविम विभाजन का सामान्य नाम नहीं।
- केंद्रीय जालक और ब्रिज जालक: ये क्रिस्टल विज्ञान में सामान्य त्रिविम बिंदुओं के विभाजन को व्यापक रूप से परिभाषित करने वाले मानक पद नहीं हैं।
#64. परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को क्या कहते हैं?
(RPF Constable 2018 09 Feb 2019 Shift 2)
- परमाणु संख्या या परमाणु क्रमांक (Atomic Number – $Z$): किसी भी रासायनिक तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित कुल धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या को उस तत्व की परमाणु संख्या कहा जाता है।
- एक सामान्य और विद्युत रूप से उदासीन परमाणु में यह संख्या नाभिक के बाहर चक्कर लगाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या के भी बराबर होती है।
- यह प्रत्येक तत्व के लिए एक अद्वितीय पहचान है (जैसे: हाइड्रोजन के लिए 1, कार्बन के लिए 6)।
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number): नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को द्रव्यमान संख्या कहा जाता है।
- समावयवी संख्या (Isomeric number): यह नाभिकीय समावयवता (Nuclear Isomerism) से संबंधित है, जिसका प्रोटॉनों की सीधी गिनती से सीधा संबंध नहीं है।
- आणविक संख्या (Molecular number): यह रसायन विज्ञान में कोई मानक या प्रचलित भौतिक राशि नहीं है।
#65. समदाब रेखाओं के संदर्भ में कौन-सा कथन गलत है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- समभारिक या समदाब रेखाएं (Isobars): अलग-अलग रासायनिक तत्वों के ऐसे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number – $A$) समान होती है, किंतु परमाणु क्रमांक (Atomic Number – $Z$) भिन्न होता है, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
- चूँकि इनके परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं, इसलिए इनके नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या भी अलग-अलग होती है। अतः “इनमें प्रोटॉनों की संख्या समान होती है” वाला कथन पूरी तरह असत्य है (प्रोटॉनों की संख्या समान होना ‘समस्थानिकों’ की विशेषता है)।
- उदाहरण के लिए, आर्गन ($^{40}_{18}\text{Ar}$), पोटैशियम ($^{40}_{19}\text{K}$) और कैल्शियम ($^{40}_{20}\text{Ca}$) समभारिक हैं, क्योंकि इन सभी का द्रव्यमान क्रमांक 40 है, किंतु इनके प्रोटॉन क्रमशः 18, 19 और 20 हैं।
- इनमें न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है: यह सत्य है, क्योंकि द्रव्यमान संख्या समान होने के बावजूद प्रोटॉनों की संख्या अलग होने के कारण न्यूट्रॉन ($N = A – Z$) भिन्न होते हैं।
- इनका द्रव्यमान क्रमांक समान होता है: यह समभारिकों की मूल परिभाषा है।
- इनके रासायनिक गुण भिन्न होते हैं: यह सत्य है, क्योंकि ये अलग-अलग तत्व होते हैं और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास) पर निर्भर करते हैं।
#66. पदार्थ का मूल रूप, जिसे रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता है, कहलाता है –
(RPF Constable 2018 24 Jan 2019 Shift 3)
- तत्व (Element): रसायन विज्ञान के अनुसार, तत्व पदार्थ का वह शुद्ध और मूल रूप है जिसे किसी भी भौतिक या रासायनिक विधि (जैसे ऊष्मा, प्रकाश या रासायनिक अभिक्रियाओं) द्वारा किसी अन्य सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता है।
- प्रत्येक तत्व एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, सोना, लोहा आदि)।
- वर्तमान में कुल 118 ज्ञात तत्व हैं, जिन्हें आवर्त सारणी (Periodic Table) में व्यवस्थित किया गया है।
- सिद्धात (Principle/Theory): यह वैज्ञानिक नियमों या अवधारणाओं की व्याख्या करने वाला वैचारिक नियम होता है, कोई भौतिक पदार्थ नहीं।
- माध्यम (Medium): यह तरंगों के संचरण या किसी रासायनिक प्रक्रिया के लिए उपयोग होने वाला बाहरी कारक या माध्यम होता है।
- समस्थानिक (Isotope): यह एक ही तत्व के वे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
#67. रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किसकी खोज के लिए उत्तरदायी था?
(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)
- रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा ($ \alpha $) कणों की बौछार की थी। इस प्रयोग के दौरान उन्होंने देखा कि अधिकांश कण सीधे निकल गए, कुछ विक्षेपित हुए, और लगभग 10,000 कणों में से 1 कण वापस अपने मार्ग पर लौट आया।
- इस आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु के केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म, सघन और धनावेशित भाग होता है, जिसे ‘नाभिक’ (Nucleus) कहा जाता है।
- यह खोज आधुनिक परमाणु भौतिकी में एक मील का पत्थर साबित हुई, जिसने परमाणु के आंतरिक ढांचे को समझने का मार्ग प्रशस्त किया।
- न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन की खोज वर्ष 1932 में वैज्ञानिक जेम्स चैडविक (James Chadwick) द्वारा की गई थी।
- इलेक्ट्रॉन: ऋण आवेशित कण ‘इलेक्ट्रॉन’ की खोज वर्ष 1897 में जे. जे. थॉमसन ने कैथोड किरणों के अध्ययन के दौरान की थी।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज का श्रेय मुख्य रूप से गोल्डस्टीन (एनोड किरणों के प्रयोग द्वारा) को जाता है, हालांकि ‘प्रोटॉन’ नाम रदरफोर्ड द्वारा दिया गया था।
#68. रेडियोधर्मी तत्व रेडियम और पोलोनियम की खोज किसने की थी?
(RRB Constable 2024 : 12 Mar, 2025 Shift 1)
- रेडियम और पोलोनियम की खोज: महान वैज्ञानिक मेरी क्यूरी (Marie Curie) और उनके पति पियर क्यूरी ने वर्ष 1898 में पिचब्लेंड (Pitchblende) अयस्क से रेडियोधर्मी तत्वों—पोलोनियम (मेरी क्यूरी के गृह देश पोलैंड के नाम पर) और रेडियम की खोज की थी।
- मेरी क्यूरी रेडियोधर्मिता (Radioactivity) के क्षेत्र में अनुसंधान करने वाली पहली महिला थीं। वह इतिहास की एकमात्र ऐसी वैज्ञानिक हैं जिन्हें भौतिकी और रसायन विज्ञान—दोनों अलग-अलग क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- रेडियम का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में कैंसर के उपचार (रेडियोथेरेपी) में भी किया जाता है।
- जॉन डाल्टन: इन्होंने आधुनिक परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) प्रतिपादित किया था।
- आयरन जॉलियट-क्यूरी: यह मेरी क्यूरी की पुत्री थीं, जिन्होंने कृत्रिम रेडियोधर्मिता (Artificial Radioactivity) के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया था।
- एवोगार्डो: इन्हें गैसों के अणुओं से संबंधित प्रसिद्ध ‘एवोगार्डो नियम’ और एवोगार्डो संख्या ($6.022 \times 10^{23}$) के लिए जाना जाता है।
#69. निम्नलिखित में से कौन सा HCP क्रिस्टल के लिए एक निविड संकुलित तल है?
(RRB JE-2 2024 CMA : 22 Apr, 2025 Shift 1)
- हेक्सागोनल क्लोज-पैक्ड (HCP) क्रिस्टल और निविड संकुलित तल (Close-Packed Plane): HCP संरचना में षट्कोणीय इकाई सेल (Hexagonal Prism) का आधारीय तल (Basal Plane) सबसे अधिक घनत्व वाला और निविड संकुलित तल होता है।
- मुलर-ब्रैवाइस (Miller-Bravais) चार-सूचकांक संकेतन $(hkil)$ पद्धति में इस आधारीय तल को (0001) के रूप में दर्शाया जाता है।
- इस तल में परमाणु एक-दूसरे के सबसे निकट होते हैं और यह HCP संरचना में प्राथमिक सर्पण तल (Primary Slip Plane) के रूप में भी कार्य करता है।
- (1010): यह HCP संरचना में प्रिज्म तल (Prism Plane) को निरूपित करता है, जो $c$-अक्ष के समानांतर होते हैं।
- (1011) और (1101): ये दोनों पिरामिडियल तल (Pyramidal Planes) के अंतर्गत आते हैं, जो आधारीय तल के तिरछे या झुके हुए तल होते हैं।
#70. कार्बनिक यौगिक के रासायनिक गुणों का निर्धारण कौन करता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 3)
- प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group): कार्बनिक यौगिकों में परमाणुओं का वह विशिष्ट समूह या विशिष्ट आबंध जो उस यौगिक के रासायनिक गुणों (Chemical Properties) का निर्धारण करता है, प्रकार्यात्मक समूह कहलाता है।
- यौगिक की कार्बन श्रृंखला (Carbon Chain) चाहे जितनी लंबी हो, यदि उसमें समान प्रकार्यात्मक समूह जुड़ा है (जैसे एल्कोहल $-\text{OH}$, कार्बोक्सिलिक एसिड $-\text{COOH}$, या एल्डिहाइड $-\text{CHO}$), तो उनके रासायनिक गुण लगभग एक समान होते हैं।
- यह कार्बनिक रसायन विज्ञान का एक मूलभूत सिद्धांत है जो विभिन्न यौगिकों के रासायनिक व्यवहार को समझने में मदद करता है।
- आणविक द्रव्यमान, कार्बन श्रृंखला की लंबाई और हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या: ये सभी कारक मुख्य रूप से किसी यौगिक के भौतिक गुणों (Physical Properties) जैसे क्वथनांक (Boiling point), गलनांक (Melting point) और घुलनशीलता को प्रभावित करते हैं, न कि उनके मुख्य रासायनिक गुणों को।
#71. Na 2 SO 4 सूत्र, अणु के संबंध में क्या इंगित करता है?
(Not found 11/03/2026 )
- रासायनिक सूत्र $\text{Na}_2\text{SO}_4$ (सोडियम सल्फेट): यह यौगिक रासायनिक रूप से सोडियम सल्फेट को दर्शाता है। इसके एक सूत्र इकाई (Formula Unit) में विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या इस प्रकार होती है:
• सोडियम ($\text{Na}$) = 2 परमाणु
• सल्फर ($\text{S}$) = 1 परमाणु
• ऑक्सीजन ($\text{O}$) = 4 परमाणु
- अतः रासायनिक सूत्र में ‘Na’ के नीचे लिखा अंक ‘2’ यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि इस यौगिक के एक अणु में सोडियम के दो परमाणु मौजूद हैं।
- इसमें दो ऑक्सीजन परमाणु होते हैं: यह गलत है, क्योंकि सूत्र ($\text{Na}_2\text{SO}_4$) में ऑक्सीजन के आगे ‘4’ लिखा है, जो यह बताता है कि इसमें ऑक्सीजन के 4 परमाणु होते हैं।
- इसमें दो सल्फर परमाणु होते हैं: यह गलत है, क्योंकि सल्फर (S) के साथ कोई अंक नहीं लिखा है, जिसका अर्थ है कि इसमें सल्फर का केवल 1 परमाणु है।
- इसमें चार सोडियम परमाणु होते हैं: यह गलत है, क्योंकि सोडियम (Na) के साथ ‘2’ लिखा हुआ है, न कि ‘4’।
#72. एक छात्र कैल्शियम फ्लोराइड ( CaF 2) का सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना करता है। यदि Ca और F के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 40 u और 19 u हैं, तो सही सूत्र इकाई द्रव्यमान क्या है?
(RRB JE CBT 2 Electronics Engineering ReExam : 04 Jun, 2025)
- कैल्शियम फ्लोराइड ($\text{CaF}_2$) का सूत्र इकाई द्रव्यमान: किसी आयनिक यौगिक के सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना उसके सभी constituent परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग द्वारा की जाती है।
- दिए गए मान:
• कैल्शियम ($\text{Ca}$) का परमाणु द्रव्यमान = $40\text{ u}$
• फ्लोरीन ($\text{F}$) का परमाणु द्रव्यमान = $19\text{ u}$
- गणना:
$$\text{सूत्र इकाई द्रव्यमान} = (\text{Ca का द्रव्यमान}) + 2 \times (\text{F का द्रव्यमान})$$
$$\text{सूत्र इकाई द्रव्यमान} = 40 + 2 \times 19 = 40 + 38 = 78\text{ u}$$
- अतः कैल्शियम फ्लोराइड का सही सूत्र इकाई द्रव्यमान 78 u है।
- 59 u: यह मान तब प्राप्त होगा जब फ्लोरीन के द्रव्यमान को 2 से गुणा न किया गया हो ($40 + 19 = 59$), जो कि रासायनिक सूत्र $\text{CaF}_2$ (दो फ्लोरीन परमाणु) के अनुसार गलत है।
- 97 u और 100 u: ये मान गलत गणना या गलत परमाणु द्रव्यमान जोड़ने के कारण प्राप्त होते हैं, जिनका सही रासायनिक संयोजन से कोई संबंध नहीं है।
#73. संतुलित रासायनिक समीकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): यह समीकरण द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) का पालन करता है, जिसके अनुसार रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन होता है और न ही विनाश।
- इसी नियम को संतुष्ट करने के लिए समीकरण के दोनों पक्षों (अभिकारक पक्ष यानी reactants और उत्पाद पक्ष यानी products) में प्रत्येक तत्व के कुल परमाणुओं की संख्या बिल्कुल समान होनी चाहिए।
- उदाहरण के लिए, $2H_2 + O_2 \rightarrow 2H_2O$ में हाइड्रोजन के 4 और ऑक्सीजन के 2 परमाणु दोनों तरफ समान हैं।
- अणुओं का कुल द्रव्यमान दोनों ओर असमान है: द्रव्यमान असमान नहीं बल्कि दोनों तरफ हमेशा समान (संरक्षित) रहता है।
- दोनों ओर अणुओं की कुल संख्या समान है: यह आवश्यक नहीं है; रासायनिक अभिक्रियाओं में अणुओं की कुल संख्या घट या बढ़ सकती है (जैसे $N_2 + 3H_2 \rightarrow 2NH_3$ में अभिकारक के 4 अणु मिलकर उत्पाद के 2 अणु बनाते हैं)।
- दोनों तरफ मोलों की कुल संख्या समान है: अणुओं की तरह ही रासायनिक अभिक्रिया में मोलों की कुल संख्या भी समान होना अनिवार्य नहीं है।
#74. परमाणु का आकार मुख्यतः किस पर निर्भर करता है?
(Not found 12/03/2026 )
- परमाणु का आकार (Atomic Size / Radius): किसी परमाणु का आकार मुख्य रूप से उसके नाभिक के केंद्र से लेकर बाह्यतम कोश (Outermost shell) में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के बीच की दूरी (या इलेक्ट्रॉन मेघ के विस्तार) पर निर्भर करता है।
- यद्यपि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान उसके केंद्र (नाभिक) में केंद्रित होता है, लेकिन उसका आयतन और भौतिक आकार उसके चारों ओर चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉनों के मार्ग और कक्षाओं की संख्या द्वारा निर्धारित होता है।
- जैसे-जैसे कक्षों (Shells) की संख्या बढ़ती है, नाभिक से बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों की दूरी बढ़ती है और परमाणु का आकार भी बढ़ता जाता है।
- न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉन नाभिक के भीतर द्रव्यमान और समस्थानिकों को प्रभावित करते हैं, लेकिन यह परमाणु के भौतिक आकार को प्रत्यक्ष रूप से निर्धारित नहीं करते।
- प्रोटॉनों की संख्या: यह परमाणु क्रमांक (Atomic Number) को तय करती है। हालांकि यह नाभिकीय आकर्षण बल के माध्यम से आकार को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है, किंतु आकार की सटीक और प्रत्यक्ष परिभाषा “नाभिक से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन की दूरी” से जुड़ी है।
- समस्थानिकों की संख्या: इसका परमाणु के भौतिक आकार या त्रिज्या से कोई सीधा संबंध नहीं है।
#75. किसी तत्व की एक दूसरे से संयोजन क्षमता मुख्यतः निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करती है?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- संयोजन क्षमता (Valency / संयोजकता): किसी भी तत्व के परमाणु की अन्य परमाणुओं के साथ सहयोग करने या बंध बनाने की क्षमता को उसकी संयोजकता कहते हैं। यह मुख्य रूप से उसके बाह्यतम कोश (Valence Shell) में उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) की संख्या पर निर्भर करती है।
- परमाणु अपने बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक नियम) पूरा करने के लिए जितने इलेक्ट्रॉनों का त्याग, ग्रहण या साझा करते हैं, वही उनकी संयोजन क्षमता निर्धारित करती है।
- उदाहरण के लिए, सोडियम के बाह्यतम कोश में 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए इसकी संयोजकता 1 होती है।
- प्रोटॉनों की संख्या: यह परमाणु क्रमांक ($Z$) को तय करती है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बनता है, लेकिन संयोजन क्षमता सीधे बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों से जुड़ी होती है।
- ऊर्जा स्तर की संख्या: यह कक्षाओं (Shells) की संख्या को दर्शाती है जो परमाणु के आकार और आवर्त (Period) को प्रभावित करती है, न कि प्रत्यक्ष संयोजन क्षमता को।
- न्यूट्रॉन की संख्या: न्यूट्रॉन नाभिक के भीतर द्रव्यमान और समस्थानिकों को निर्धारित करते हैं, इनका रासायनिक संयोजन या संयोजकता से सीधा संबंध नहीं होता।
#76. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प थॉमसन के परमाणु मॉडल में पाए जाने वाले उप-परमाणु कणों को दर्शाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 2)
- थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Atomic Model): जे. जे. थॉमसन द्वारा वर्ष 1904 में प्रस्तुत इस मॉडल को ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ या ‘तरबूज मॉडल’ भी कहा जाता है।
- इस मॉडल के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है (जिसे धनावेश/प्रोटॉनों का क्षेत्र माना गया) और उसमें ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन ठीक उसी तरह धंसे होते हैं जैसे तरबूज में बीज धंसे होते हैं।
- चूँकि परमाणु विद्युत रूप से उदासीन होता है, इसलिए इस मॉडल में धनावेशित भाग (प्रोटॉन/धनावेश) और ऋणावेशित कण (इलेक्ट्रॉन) दोनों की उपस्थिति को दर्शाया गया था।
- केवल इलेक्ट्रॉन / केवल प्रोटॉन: थॉमसन के मॉडल में केवल एक कण की कल्पना नहीं की गई थी, बल्कि परमाणु की उदासीनता समझाने के लिए धनावेश और ऋणावेश (इलेक्ट्रॉन) दोनों का होना आवश्यक माना गया था।
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों: थॉमसन के समय (1904) तक ‘न्यूट्रॉन’ की खोज नहीं हुई थी (न्यूट्रॉन की खोज 1932 में चैडविक द्वारा की गई थी), इसलिए उनके मॉडल में न्यूट्रॉन शामिल नहीं था।
#77. प्रोटॉन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- प्रोटॉन (Proton): प्रोटॉन एक धनावेशित (+1) उप-परमाणु कण है, जो परमाणु के केंद्र यानी नाभिक के भीतर न्यूट्रॉन के साथ दृढ़ता से बंधा होता है।
- इसका वास्तविक द्रव्यमान लगभग $1.673 \times 10^{-27}\text{ kg}$ होता है, जिसे परमाणु द्रव्यमान की गणना के लिए मानक रूप से एक इकाई (1 u या 1 amu) माना जाता है।
- यह किसी तत्व के परमाणु क्रमांक (Atomic Number) को निर्धारित करता है।
- विकल्प 1: “ऋणात्मक रूप से आवेशित और बहुत कम द्रव्यमान” वाला यह कथन प्रोटॉन का नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉन का वर्णन करता है।
- विकल्प 3: “हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का 1/2000 भाग” होना इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की विशेषता है (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से लगभग 1836 गुना कम होता है)।
- विकल्प 4: आवेश में उदासीन कण ‘न्यूट्रॉन’ होता है, और प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के बराबर न होकर उससे बहुत अधिक (लगभग 1836 गुना) होता है।
#78. जाली के अंदर संकुलित किये गए घटक कणों द्वारा संपूरित स्थान के प्रतिशत के रूप में को क्या कहा जाता है?
(RPF SI Previous Paper : 6 Jan 2019 Shift 2)
- संकुलन क्षमता (Packing Efficiency): किसी क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) या एकक कोष्ठिका (Unit Cell) के कुल आयतन का वह प्रतिशत भाग जो उसके अवययी कणों (परमाणुओं, आयनों या अणुओं) द्वारा वास्तव में भरा या अधिकृत किया जाता है, संकुलन क्षमता कहलाता है।
- विभिन्न क्रिस्टलीय संरचनाओं में यह क्षमता अलग-अलग होती है; उदाहरण के लिए, सरल घनीय जालक (Simple Cubic) में यह लगभग 52.4%, काय-केंद्रित घनीय (BCC) में 68% और फलक-केंद्रित घनीय (FCC / CCP / HCP) में यह उच्चतम 74% होती है।
- यह किसी ठोस पदार्थ के घनत्व और उसके परमाणुओं के व्यवस्थापन के घनत्व को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- संरचनात्मक प्रकार्यवाद: यह मुख्य रूप से समाजशास्त्र (Sociology) और मानव विज्ञान (Anthropology) का एक प्रसिद्ध सिद्धांत है, जिसका क्रिस्टल विज्ञान या भौतिकी से कोई संबंध नहीं है।
- लेटी प्रकार्यवाद और ठोस प्रकार्यवाद: ये विज्ञान या क्रिस्टलोग्राफी में उपयोग होने वाले मानक और वास्तविक वैज्ञानिक पद (Terms) नहीं हैं, बल्कि भ्रामक विकल्प हैं।
#79. ‘ यौगिकों के अणु’ की अवधारणा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )
- यौगिक का अणु (Molecule of a Compound): जब दो या दो से अधिक अलग-अलग तत्वों के परमाणु एक निश्चित अनुपात में रासायनिक बंध द्वारा आपस में संयुक्त (Combined) होते हैं, तब किसी यौगिक के अणु का निर्माण होता है।
- उदाहरण के लिए, जल ($H_2O$) एक यौगिक है जिसका अणु हाइड्रोजन और ऑक्सीजन—इन दो विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के संयोजन से बनता है। इसी प्रकार कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) में कार्बन और ऑक्सीजन के परमाणु होते हैं।
- यह शुद्ध पदार्थों और रासायनिक संयोग के नियमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- किसी यौगिक का अणु विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के पृथक्करण से बनता है: पृथक्करण (Separation) से अणु टूटते हैं या विघटित होते हैं, नए यौगिक के अणुओं का निर्माण संयोजन से होता है, पृथक्करण से नहीं।
- किसी यौगिक का अणु एक ही तत्व के परमाणुओं के संयोजन से बनता है: एक ही तत्व के परमाणुओं के मिलने से ‘तत्व का अणु’ (जैसे $O_2, N_2$) बनता है, यौगिक का नहीं।
- किसी यौगिक का अणु एक ही तत्व के परमाणुओं के पृथक्करण से बनता है: यह कथन वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
#80. ‘समस्थानिक’ शब्द किसको संदर्भित करता है?
(RRB NTPC CBT-I : 3 April 2021 Shift 1)
- समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के वे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic Number – $Z$) समान होता है, किंतु न्यूट्रॉनों की संख्या अलग होने के कारण जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number – $A$) भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहा जाता है।
- चूँकि इनका परमाणु क्रमांक समान होता है, इसलिए आवर्त सारणी में इनका स्थान भी एक ही होता है।
- उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन के तीन प्रसिद्ध समस्थानिक हैं: प्रोटियम ($^1_1\text{H}$), ड्यूटेरियम ($^2_1\text{H}$), और ट्रिटियम ($^3_1\text{H}$)।
- भिन्न परमाणु क्रमांक लेकिन समान द्रव्यमान संख्या वाले तत्व: यह परिभाषा समभारिक (Isobars) की होती है, न कि समस्थानिकों की।
- समान भौतिक और रासायनिक गुण वाले तत्व: समस्थानिकों के रासायनिक गुण तो लगभग समान होते हैं, लेकिन द्रव्यमान अलग होने के कारण उनके भौतिक गुण भिन्न होते हैं।
- समान बंध संरचना वाले तत्व: इसका समस्थानिकों की मूल वैज्ञानिक परिभाषा से कोई संबंध नहीं है।
#81. रदरफोर्ड के α- कण प्रकीर्णन प्रयोग से निम्नलिखित में से किसकी खोज हुई?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025)
- रदरफोर्ड का अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): इस प्रसिद्ध प्रयोग में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने सोने की अत्यंत पतली पन्नी पर तेज गति वाले अल्फा कणों की बौछार की थी।
- प्रयोग के दौरान अधिकांश कण पन्नी को पार करके सीधे निकल गए, कुछ कोणों पर विक्षेपित हुए, और लगभग 10,000 कणों में से 1 कण वापस अपने मार्ग पर लौट आया।
- इस आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का समस्त धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म स्थान पर केंद्रित रहता है, जिसे ‘परमाणु नाभिक’ (Atomic Nucleus) कहा जाता है।
- इलेक्ट्रॉन: ऋण आवेशित कण ‘इलेक्ट्रॉन’ की खोज वर्ष 1897 में जे. जे. थॉमसन द्वारा कैथोड किरणों के अध्ययन के दौरान की गई थी।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज से जुड़े प्रारंभिक प्रयोग गोल्डस्टीन के एनोड किरण प्रयोग माने जाते हैं, हालांकि ‘प्रोटॉन’ नाम रदरफोर्ड द्वारा दिया गया था।
- न्यूट्रॉन: उदासीन कण ‘न्यूट्रॉन’ की खोज वर्ष 1932 में जेम्स चैडविक ने बेरिलियम पर अल्फा कणों की बौछार करके की थी।
#82. निम्नलिखित में से कौन त्रिपरामनुक् अणु है?
(RPF Constable 2018 12 Feb 2019)
- त्रिपरमाणुक अणु (Triatomic Molecule): ऐसा अणु जो कुल तीन परमाणुओं (चाहे वे एक ही तत्व के हों या अलग-अलग तत्वों के) से मिलकर बना होता है, उसे त्रिपरमाणुक अणु कहा जाता है।
- ओजोन ($O_3$): ओजोन ऑक्सीजन का एक अपरूप (Allotrope) है जिसके प्रत्येक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु आपस में जुड़े होते हैं ($O_3$)। इसलिए यह एक स्पष्ट त्रिपरमाणुक अणु है।
- यह पृथ्वी के वायुमंडल को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- हाइड्रोजन ($H_2$): यह एक द्विपरमाणुक (Diatomic) अणु है क्योंकि इसके एक अणु में हाइड्रोजन के 2 परमाणु होते हैं।
- हीलियम ($He$) और नियॉन ($Ne$): ये दोनों उत्कृष्ट गैसें (Noble Gases) हैं जो स्वतंत्र रूप से एक ही परमाणु के रूप में अस्तित्व में रहती हैं, इसलिए इन्हें एकपरमाणुक (Monoatomic) कहा जाता है।
#83. किसी पदार्थ के एक मोल में उपस्थित परमाणुओं या अणुओं या आयनों की संख्या को क्या कहा जाता है?
(RRB JE 27 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- अवोग्राडो संख्या या अवोग्राडो स्थिरांक ($N_A$): किसी भी पदार्थ (তत्व या यौगिक) के ठीक 1 मोल में उपस्थित परमाणुओं, अणुओं या आयनों जैसे मूल कणों की कुल संख्या को अवोग्राडो संख्या कहा जाता है।
- इसका मानक मान लगभग $6.022 \times 10^{23}$ होता है। इसका नामकरण प्रसिद्ध वैज्ञानिक अमेयोडो अवोग्राडो (Amedeo Avogadro) के सम्मान में किया गया था।
- यह रसायन विज्ञान में सूक्ष्म कणों की मात्रा और स्थूल मात्रा (Macroscopic quantities) के बीच संबंध स्थापित करने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण इकाई है।
- प्रसामान्यता (Normality): यह विलयन की सांद्रता को मापने की एक विधि है, जो प्रति लीटर विलयन में घुले हुए विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या को दर्शाती है।
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number): यह किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या का योग होती है।
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number): यह किसी तत्व के नाभिक के भीतर मौजूद केवल प्रोटॉनों की संख्या को व्यक्त करता है।
#84. जिन न्यूक्लाइडों की द्रव्यमान संख्या समान होती है, उन्हें क्या कहा जाता है?
(RRB JE EE 19 Sept 2019 Shift 2 CBT 2)
- समभारिक (Isobars): वे न्यूक्लाइड या परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number – A) समान होती है, किंतु परमाणु क्रमांक (Atomic Number – Z) भिन्न होता है, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
- चूँकि इनके परमाणु क्रमांक अलग-अलग होते हैं, इसलिए ये भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु होते हैं और इनके रासायनिक गुण भी अलग होते हैं।
- उदाहरण के लिए, आर्गन ($^{40}_{18}\text{Ar}$), पोटैशियम ($^{40}_{19}\text{K}$) और कैल्शियम ($^{40}_{20}\text{Ca}$) समभारिक हैं, क्योंकि इन सभी की द्रव्यमान संख्या 40 है।
- समन्यूट्रॉनिक (Isotones): वे परमाणु जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें समन्यूट्रॉनिक कहा जाता है।
- समस्थानिक (Isotopes): यह एक ही तत्व के वे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
- समावयवी (Isomers): यह यौगिकों से संबंधित पद है, जिनके आणविक सूत्र समान होते हैं लेकिन उनकी संरचनात्मक व्यवस्था भिन्न होती है।
#85. कैथोड किरण का प्रयोग पहली बार किसके द्वारा किया गया था?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- कैथोड किरण प्रयोग (Cathode Ray Experiment): ब्रिटिश भौतिकविद् सर जे. जे. थॉमसन ने वर्ष 1897 में कैथोड किरण नलिका (Cathode Ray Tube) का उपयोग करके ऐतिहासिक प्रयोग किए थे।
- इन प्रयोगों के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि कैथोड किरणें ऋणावेशित कणों की धारा होती हैं, जिन्हें बाद में ‘इलेक्ट्रॉन’ (Electron) नाम दिया गया। इस क्रांतिकारी खोज के लिए उन्हें 1906 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।
- यद्यपि कैथोड नलिका से जुड़े शुरुआती अध्ययन अन्य वैज्ञानिकों (जैसे जूलियन प्लूकर या विलियम क्रुक्स) द्वारा किए गए थे, लेकिन व्यापक और निर्णायक प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज का श्रेय जे. जे. थॉमसन को ही दिया जाता है।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने वर्ष 1911 में अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के जरिए परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज की थी।
- जॉन डाल्टन: इन्होंने वर्ष 1808 में आधुनिक परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) प्रतिपादित किया था।
- गोल्डस्टीन: इन्होंने विसर्जन नलिका में एनोड किरणों (या प्रोटॉन से जुड़े प्रारंभिक प्रयोगों) की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, न कि कैथोड किरण प्रयोग के लिए इन्हें मुख्य रूप से जाना जाता है।
#86. निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक ने परमाण्विक द्रव्यमान की अवधारणा दी?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 16/03/2026 )
- परमाण्विक द्रव्यमान और परमाणु सिद्धांत: वर्ष 1808 में ब्रिटिश रसायनशास्त्री और भौतिकविद् जॉन डाल्टन (John Dalton) ने अपना प्रसिद्ध ‘परमाणु सिद्धांत’ (Atomic Theory) प्रस्तुत किया था।
- इस सिद्धांत के अनुसार, सभी पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म, अविभाज्य कणों (परमाणुओं) से बने होते हैं। उन्होंने ही सबसे पहले यह अवधारणा दी कि एक ही तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान (Atomic Mass) और आकार समान होता है, जबकि विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान और आकार भिन्न-भिन्न होते हैं।
- डाल्टन के इस कार्य ने आधुनिक रसायन विज्ञान की नींव रखी और पहली बार विभिन्न तत्वों के सापेक्ष परमाण्विक द्रव्यमान (Relative Atomic Masses) को निर्धारित करने का मार्ग प्रशस्त किया।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने वर्ष 1911 में अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के माध्यम से परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज की थी।
- जे. जे. थॉमसन: इन्होंने वर्ष 1897 में कैथोड किरणों के अध्ययन द्वारा ऋण आवेशित कण यानी इलेक्ट्रॉन की खोज की थी और परमाणु का ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ दिया था।
- नील्स बोर: इन्होंने वर्ष 1913 में क्वांटम सिद्धांत पर आधारित बोर का परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें ऊर्जा स्तरों (Orbits) की अवधारणा दी गई थी।
#87. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार, परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान कहाँ स्थित होता है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)
- रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (1911): अपने अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग के आधार पर अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का संपूर्ण धनावेश और उसका लगभग सारा द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म, सघन और कठोर क्षेत्र में केंद्रित रहता है, जिसे ‘नाभिक’ (Nucleus) कहा जाता है।
- चूँकि परमाणु के अधिकांश भाग में केवल इलेक्ट्रॉन होते हैं और उनका द्रव्यमान प्रोटॉन व न्यूट्रॉन की तुलना में नगण्य होता है, इसलिए परमाणु का व्यावहारिक रूप से पूरा द्रव्यमान उसके नाभिक में ही निहित होता है।
- नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन बहुत अधिक खाली स्थान में वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
- इलेक्ट्रॉनों के कोशों में / इलेक्ट्रॉन क्लाउड में: इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान बहुत कम होता है (प्रोटॉन का लगभग $1/1836$ वां भाग), इसलिए कोशों या इलेक्ट्रॉन मेघ में परमाणु का मुख्य द्रव्यमान नहीं होता।
- यह समान रूप से वितरित है: यह थॉमसन के ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ की अवधारणा थी, जिसे रदरफोर्ड के प्रयोग ने गलत साबित कर दिया था। रदरफोर्ड के अनुसार द्रव्यमान असमान रूप से केंद्रित होता है।
#88. धनात्मक आवेश आयन को ________ कहा जाता है:
(RRB NTPC CBT-I : 7 Jan 2021 Shift 1)
- धनायन (Cation): जब कोई उदासीन परमाणु या परमाणुओं का समूह एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग (Loss of electrons) करता है, तब उस पर धनात्मक आवेश आ जाता है। ऐसे धनावेशित आयन को धनायन कहा जाता है।
- चूँकि इलेक्ट्रॉन के निकलने से प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों से अधिक हो जाती है, इसलिए इस पर शुद्ध रूप से धन आवेश होता है (जैसे $\text{Na}^+, \text{Ca}^{2+}, \text{Mg}^{2+}$ आदि)।
- रासायनिक बंध बनाते समय धातुएं आमतौर पर इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन का निर्माण करती हैं।
- ऋणायन (Anion): जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो उस पर ऋणात्मक आवेश उत्पन्न होता है, जिसे ऋणायन कहते हैं।
- अणु और परमाणु: ये मूल कण या पदार्थ की संरचनात्मक इकाइयाँ हैं, जिन पर आवश्यक रूप से कोई शुद्ध आवेश (चार्ज) होना अनिवार्य नहीं है; ये उदासीन भी हो सकते हैं।
#89. नाइट्रस एसिड ( HNO 2) का मोलर द्रव्यमान कितना है?
(RPF SI 2018 : 10 Jan 2019 Shift 3)
- नाइट्रस एसिड ($\text{HNO}_2$) का मोलर द्रव्यमान: किसी यौगिक का मोलर द्रव्यमान उसके सभी घटक परमाणुओं के मानक परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है।
- प्रत्येक तत्व का परमाणु द्रव्यमान:
• हाइड्रोजन ($\text{H}$) $\approx 1.008\text{ g/mol}$ (1 परमाणु)
• नाइट्रोजन ($\text{N}$) $\approx 14.007\text{ g/mol}$ (1 परमाणु)
• ऑक्सीजन ($\text{O}$) $\approx 15.999\text{ g/mol}$ (2 परमाणु)
- गणना:
$$\text{मोलर द्रव्यमान} = (1 \times 1.008) + (1 \times 14.007) + (2 \times 15.999)$$
$$\text{मोलर द्रव्यमान} = 1.008 + 14.007 + 31.998 = 47.013\text{ g/mol}$$
- अतः नाइट्रस एसिड का सही मोलर द्रव्यमान 47.013 ग्राम/मोल है।
- 44.01 ग्राम/मोल: यह कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) का मोलर द्रव्यमान है।
- 63.01 ग्राम/मोल: यह नाइट्रिक एसिड ($\text{HNO}_3$, जिसमें ऑक्सीजन के 3 परमाणु होते हैं) का लगभग मोलर द्रव्यमान है।
- 36.46 ग्राम/मोल: यह हाइड्रोक्लोरिक एसिड ($\text{HCl}$) का मोलर द्रव्यमान है।
#90. रासायनिक सूत्र में सबस्क्रिप्ट क्या दर्शाता है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 2)
- रासायनिक सूत्र में सबस्क्रिप्ट (Subscript): किसी रासायनिक सूत्र में किसी तत्व के प्रतीक के ठीक नीचे दाईं ओर लिखी जाने वाली छोटी संख्या (Subscript) यह दर्शाती है कि उस यौगिक या अणु के एक निश्चित संयोजन में उस विशिष्ट तत्व के कितने परमाणु उपस्थित हैं।
- उदाहरण के लिए, जल के रासायनिक सूत्र $\text{H}_2\text{O}$ में हाइड्रोजन ($\text{H}$) के नीचे लिखा ‘2’ यह बताता है कि इसके एक अणु में हाइड्रोजन के 2 परमाणु हैं, जबकि ऑक्सीजन के साथ कोई संख्या न होने का अर्थ है कि ऑक्सीजन का 1 परमाणु है।
- यह रासायनिक यौगिकों के सटीक संगठन और संरचनात्मक अनुपात को प्रदर्शित करने का एक सार्वभौमिक तरीका है।
- आयन का आवेश: किसी आयन पर मौजूद धनात्मक या ऋणात्मक आवेश को हमेशा प्रतीक के ऊपर दाईं ओर सुपरस्क्रिप्ट (Superscript) के रूप में दर्शाया जाता है (जैसे $\text{Na}^+$ या $\text{SO}_4^{2-}$), नीचे सबस्क्रिप्ट के रूप में नहीं।
- तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था: इसे आमतौर पर यौगिक के नाम के साथ कोष्ठक में रोमन अंकों द्वारा या ऊपर सुपरस्क्रिप्ट के रूप में दर्शाया जाता है।
- यौगिक का द्रव्यमान: यह परमाणुओं के द्रव्यमानों के योग की गणितीय गणना से प्राप्त होता है, जिसे केवल सबस्क्रिप्ट से सीधे नहीं मापा जाता।
#91. हंस गीगर ( Hans Geiger) और अर्नेस्ट मार्सडेन ( Ernest Marsden) ने ________ के पर्यवेक्षण में प्रसिद्ध α- कण प्रकीर्णन प्रयोग किया।
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 25/03/2026 )
- गेजर-मार्सडेन प्रयोग (Geiger-Marsden Experiment): वर्ष 1909 में वैज्ञानिकों हंस गीगर (Hans Geiger) और अर्नेस्ट मार्सडेन (Ernest Marsden) ने मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में भौतिकविद् अर्नेस्ट रदरफोर्ड के निर्देशन और पर्यवेक्षण में यह प्रसिद्ध अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग किया था।
- इस प्रयोग के दौरान सोने की पन्नी पर अल्फा कणों की बौछार की गई, जिसके परिणामों ने रदरफोर्ड को परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज करने का आधार प्रदान किया। इसी कारण इसे अक्सर ‘रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग’ भी कहा जाता है।
- यह आधुनिक परमाणु भौतिकी के इतिहास के सबसे मील के पत्थर वाले प्रयोगों में से एक है।
- नील्स बोर: इन्होंने वर्ष 1913 में क्वांटम अवधारणा के आधार पर रदरफोर्ड के मॉडल में सुधार करके ‘बोर का परमाणु मॉडल’ प्रस्तुत किया था, न कि इस प्रयोग का निर्देशन किया था।
- जॉन डाल्टन: इन्होंने वर्ष 1808 में प्रारंभिक परमाणु सिद्धांत दिया था, जो इस प्रयोग से बहुत पहले का है।
- विलियम हेनरी: इनका इस विशिष्ट नाभिकीय प्रयोग से कोई सीधा संबंध नहीं है।
#92. न्यूट्रॉन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
- न्यूट्रॉन (Neutron): न्यूट्रॉन एक आवेशहीन (Neutral) उप-परमाणु कण है, जिसकी खोज वर्ष 1932 में वैज्ञानिक जेम्स चैडविक ने की थी।
- सामान्य हाइड्रोजन (प्रोटियम) को छोड़कर, यह ब्रह्मांड के सभी तत्वों के परमाणुओं के केंद्र यानी नाभिक (Nucleus) में प्रोटॉन के साथ दृढ़ता से बंधा हुआ पाया जाता है।
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लियॉन’ (Nucleons) कहा जाता है, क्योंकि ये दोनों मिलकर परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान बनाते हैं।
- इनमें धनावेश होता है: यह कथन गलत है, क्योंकि न्यूट्रॉन पूरी तरह से उदासीन होता है (इस पर कोई आवेश नहीं होता)। धनावेश प्रोटॉन पर होता है।
- ये परमाणु के रासायनिक गुणों को निर्धारित करते हैं: यह गलत है; किसी तत्व के रासायनिक गुण मुख्य रूप से उसके इलेक्ट्रॉनों (विशेषकर संयोजी इलेक्ट्रॉनों) और परमाणु क्रमांक (प्रोटॉनों की संख्या) द्वारा तय होते हैं।
- ये नियत कक्षाओं में नाभिक के परितः परिक्रमण करते हैं: नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में चक्कर लगाने वाले कण इलेक्ट्रॉन होते हैं, न्यूट्रॉन नहीं।
#93. एक परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन की उपस्थिति की खोज निम्नलिखित में से किसने की है?
(RRB JE 26 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- न्यूट्रॉन की खोज (1932): ब्रिटिश भौतिकविद् जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने वर्ष 1932 में बेरिलियम जैसे हल्के तत्वों पर अल्फा कणों की बौछार करके एक आवेशहीन (Neutral) और उच्च वेधन क्षमता वाले कण की खोज की, जिसे ‘न्यूट्रॉन’ नाम दिया गया।
- इस महत्वपूर्ण खोज के लिए उन्हें वर्ष 1935 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।
- न्यूट्रॉन प्रोटॉन के साथ मिलकर परमाणु के केंद्र यानी नाभिक में स्थित होता है और इसका द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर (लगभग $1.675 \times 10^{-27}\text{ kg}$) होता है।
- ई. रदरफोर्ड: इन्होंने वर्ष 1911 में अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के माध्यम से परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज की थी।
- जे.जे. थॉमसन: इन्होंने वर्ष 1897 में कैथोड किरणों के अध्ययन द्वारा ऋण आवेशित कण यानी इलेक्ट्रॉन की खोज की थी।
- ई. गोल्डस्टीन: इन्होंने विसर्जन नलिका में एनोड किरणों के अध्ययन द्वारा प्रोटॉन से जुड़े शुरुआती प्रारंभिक प्रयोग किए थे।
#94. रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामस्वरूप ________ की खोज हुई।
(RRB JE 27 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- रदरफोर्ड का अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): अर्नेस्ट रदरफोर्ड और उनके सहयोगियों (हंस गीगर और अर्नेस्ट मार्सडेन) द्वारा किए गए इस प्रयोग में सोने की पतली पन्नी पर तेज गति वाले अल्फा कणों की बौछार की गई थी।
- इस प्रयोग के दौरान अधिकांश कण सीधे निकल गए, कुछ विक्षेपित हुए, और बहुत ही कम कण (लगभग 10,000 में से 1) वापस लौट आए। इससे यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु के भीतर एक अत्यंत सघन, भारी और धनावेशित केंद्र होता है, जिसे ‘परमाणु नाभिक’ (Atomic Nucleus) कहा जाता है।
- इस ऐतिहासिक खोज ने परमाणु संरचना के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी और आधुनिक परमाणु मॉडल का मार्ग प्रशस्त किया।
- इलेक्ट्रॉन: ऋण आवेशित कण ‘इलेक्ट्रॉन’ की खोज वर्ष 1897 में जे. जे. थॉमसन द्वारा कैथोड किरण नलिका के प्रयोग से की गई थी।
- न्यूट्रॉन: आवेशहीन कण ‘न्यूट्रॉन’ की खोज वर्ष 1932 में जेम्स चैडविक द्वारा बेरिलियम पर अल्फा कणों की बौछार करके की गई थी।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज से जुड़े शुरुआती प्रारंभिक प्रयोग गोल्डस्टीन के एनोड किरण प्रयोग से संबंधित हैं।
#95. यदि ग्लूकोज :: छह-कार्बन अणु, तो पाइरूवेट :: ________ ।
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
- ग्लूकोज और पाइरूवेट: श्वसन प्रक्रिया (Respiration) के दौरान, ग्लूकोज ($\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6$) जो कि एक छह-कार्बन अणु है, कोशिका के साइटोप्लाज्मा (कोशिका द्रव्य) में ग्लाइकोलिसिस (Glycolysis) प्रक्रिया से गुजरता है।
- इस प्रक्रिया के फलस्वरूप ग्लूकोज का एक अणु टूटकर पाइरुविक एसिड या पाइरूवेट ($\text{C}_3\text{H}_4\text{O}_3$) के दो अणुओं का निर्माण करता है।
- चूँकि पाइरूवेट के प्रत्येक अणु में कार्बन के 3 परमाणु होते हैं, इसलिए इसे एक तीन-कार्बन अणु कहा जाता है।
- चार-कार्बन अणु, पाँच-कार्बन अणु और दो-कार्बन अणु: ये विकल्प ग्लाइकोलिसिस के दौरान बनने वाले पाइरूवेट की रासायनिक संरचना (3 कार्बन परमाणुओं) के दृष्टिकोण से अशुद्ध और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
#96. मेंडलीफ के आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों को ________ के क्रम में आवर्त सारणी में व्यवस्थित किया गया था।
(RRB JE 26 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- मेंडलीफ का आवर्त नियम (Mendeleev’s Periodic Law): रूसी रसायनशास्त्री दमित्री मेंडलीफ द्वारा प्रतिपादित मूल आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमान (Atomic Masses) के आवर्ती फलन होते हैं।
- उन्होंने अपने समय के ज्ञात तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में क्षैतिज पंक्तियों (आवर्त) और ऊर्ध्वाधर स्तंभों (समूह) में व्यवस्थित किया था।
- इस व्यवस्था से यह लाभ हुआ कि समान गुणों वाले तत्व एक ही समूह में आ गए और उस समय अज्ञात तत्वों के लिए रिक्त स्थान भी छोड़े गए।
- बढ़ती परमाणु संख्या / घटती परमाणु संख्या: परमाणु संख्या (Atomic Number) के आधार पर तत्वों का वर्गीकरण आधुनिक आवर्त सारणी में हेनरी मोजले द्वारा किया गया था, न कि मेंडलीफ की मूल आवर्त सारणी में।
- घटते परमाणु द्रव्यमान: मेंडलीफ ने तत्वों को उनके द्रव्यमान के बढ़ते क्रम में सजाया था, घटते क्रम में नहीं।
#97. पदार्थ के एक अणु में सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमान का योग –
(RRB JE CBT-I : 22 May, 2019 Shift 2)
- आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass): किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के एक अणु में उपस्थित सभी घटक परमाणुओं के व्यक्तिगत परमाणु द्रव्यमानों के योग को उस पदार्थ का आणविक द्रव्यमान कहा जाता है।
- इसे मानक परमाणु द्रव्यमान इकाई (u या amu) में व्यक्त किया जाता है।
- उदाहरण के लिए, जल ($\text{H}_2\text{O}$) के एक अणु का आणविक द्रव्यमान हाइड्रोजन के 2 परमाणुओं और ऑक्सीजन के 1 परमाणु के द्रव्यमानों को जोड़कर निकाला जाता है: $(2 \times 1) + 16 = 18\text{ u}$।
- सूत्र द्रव्यमान (Formula Mass): यह आयनिक यौगिकों (जैसे सोडियम क्लोराइड, $\text{NaCl}$) के लिए उपयोग किया जाता है, जहाँ स्पष्ट एकल अणु नहीं होते बल्कि आयनों का एक निश्चित सूत्र अनुपात होता है।
- परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass): यह किसी एकल तत्व के केवल एक अकेले परमाणु का द्रव्यमान होता है, न कि पूरे अणु का।
- मोल (Mole): यह पदार्थ की मात्रा (Amount of substance) की एसआई (SI) इकाई है, जो $6.022 \times 10^{23}$ कणों की संख्या को दर्शाती है।
#98. निम्नलिखित में से कौन-सा, हाइड्रोजन परमाणु का समस्थानिक नहीं है? (RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes of Hydrogen): हाइड्रोजन एक ऐसा तत्व है जिसके तीन प्रमुख प्राकृतिक समस्थानिक पाए जाते हैं—प्रोटियम ($^1_1\text{H}$), ड्यूटीरियम ($^2_1\text{H}$), और ट्राइटियम ($^3_1\text{H}$)। इन सभी का परमाणु क्रमांक 1 होता है, लेकिन द्रव्यमान संख्या क्रमशः 1, 2 और 3 होती है।
- हीलियम (Helium): हीलियम एक पूरी तरह से अलग तत्व है, जिसका परमाणु क्रमांक 2 ($^4_2\text{He}$) है। यह एक उत्कृष्ट गैस (Noble Gas) है और इसका हाइड्रोजन के समस्थानिकों से कोई संबंध नहीं है।
- अतः हीलियम हाइड्रोजन का समस्थानिक नहीं है।
- ड्यूटीरियम: यह हाइड्रोजन का भारी समस्थानिक है, जिसे भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं और इसका उपयोग भारी जल ($\text{D}_2\text{O}$) बनाने में किया जाता है।
- ट्राइटियम: यह हाइड्रोजन का एक रेडियोएक्टिव समस्थानिक है, जिसके नाभिक में 2 न्यूट्रॉन होते हैं।
- प्रोटियम: यह हाइड्रोजन का सबसे सामान्य और सबसे हल्का समस्थानिक है, जिसके नाभिक में केवल एक प्रोटॉन होता है और कोई न्यूट्रॉन नहीं होता।
#99. कौन-सा कथन किसी तत्व की परमाणु संख्या का सही से वर्णन करता है?
(RRB JE 19/02/2026 9: )
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number – Z): किसी तत्व के परमाणु की पहचान उसका परमाणु क्रमांक करता है। यह किसी भी तत्व के परमाणु के नाभिक के भीतर मौजूद कुल प्रोटॉनों की संख्या के बिल्कुल बराबर होता है।
- चूँकि एक उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए परमाणु क्रमांक इलेक्ट्रॉनों की संख्या को भी दर्शाता है।
- यह आवर्त सारणी में तत्वों के निर्धारण और उनके रासायनिक गुणों की आधारशिला है।
- परमाणु में न्यूक्लियॉन की कुल संख्या: प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के योग (न्यूक्लियॉनों की कुल संख्या) को परमाणु की द्रव्यमान संख्या (Mass Number – A) कहा जाता है।
- नाभिक में उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या: यह समन्यूट्रॉनिक (Isotones) या न्यूट्रॉन की गणना से संबंधित है, न कि परमाणु क्रमांक।
- सभी उपपरमाणविक कणों का कुल द्रव्यमान: यह परमाणु के कुल द्रव्यमान (Atomic Mass) को निरूपित करता है, परमाणु क्रमांक को नहीं।
#100. चिन्ह परिपाटी के अनुसार, दर्पण द्वारा निर्मित सीधे प्रतिबिंब की ऊंचाई ________ रूप से ली जाती है।
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- गोलीय दर्पणों के लिए नई चिन्ह परिपाटी (New Cartesian Sign Convention): प्रकाशिकी में दूरियों और ऊंचाइयों को मापने के लिए निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry) के नियमों का पालन किया जाता है।
- इसके अनुसार, मुख्य अक्ष (Principal Axis) के लंबवत ऊपर की ओर (ऊर्ध्वाधर रूप से) मापी जाने वाली सभी दूरियाँ या प्रतिबिंब की ऊँचाइयाँ धनात्मक (+ve) ली जाती हैं।
- चूँकि किसी दर्पण द्वारा बना सीधा (Erect) प्रतिबिंब हमेशा मुख्य अक्ष के ऊपर बनता है, इसलिए उसकी ऊंचाई धनात्मक रूप से ली जाती है (यह आभासी/काल्पनिक प्रतिबिंबों के साथ भी होता है)।
- ऋणात्मक (Negative): मुख्य अक्ष के नीचे की ओर मापी जाने वाली दूरियाँ या उल्टे (Inverted) और वास्तविक प्रतिबिंबों की ऊँचाइयाँ ऋणात्मक ली जाती हैं, सीधे प्रतिबिंब की नहीं।
- शून्य (Zero): प्रतिबिंब की ऊंचाई शून्य होने का अर्थ है कि प्रतिबिंब का कोई अस्तित्व ही नहीं है, जो कि यहाँ लागू नहीं होता।
- काल्पनिक (Imaginary): यह प्रतिबिंब की ‘प्रकृति’ (Nature) को दर्शाता है, न कि चिन्ह परिपाटी के तहत उसकी ऊंचाई का गणितीय चिन्ह।
#101. डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का कौन सा अवधारणा निश्चित अनुपात के नियम ( Law of Definite Proportions) की व्याख्या करता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 29 Aug, 2025 Shift 2)
- निश्चित अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions): इस नियम का प्रतिपादन जोसफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने किया था, जिसके अनुसार किसी भी यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के हिसाब से एक निश्चित अनुपात में मौजूद होते हैं।
- डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का संबंध: जॉन डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अनुसार, किसी दिए गए यौगिक में परमाणुओं के सापेक्ष प्रकार और उनकी संख्या हमेशा निश्चित होती है, और वेस आपस में सरल पूर्ण-संख्या अनुपात (Simple whole-number ratios) में मिलकर यौगिक का निर्माण करते हैं।
- यही अवधारणा रासायनिक संयोजन के ‘स्थिर या निश्चित अनुपात के नियम’ और ‘गुणित अनुपात के नियम’ दोनों की सैद्धांतिक व्याख्या सफलतापूर्वक प्रदान करती है।
- परमाणु अविभाज्य और अविनाशी होते हैं: यह अवधारणा रासायनिक संयोजन के द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) की व्याख्या करती है (क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न तो सृजित होते हैं और न ही नष्ट)।
- एक ही तत्व के परमाणुओं का द्रव्यमान और आकार समान होता है / विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के गुण अलग होते हैं: ये बिंदु तत्वों की मौलिक पहचान और उनके वर्गीकरण को स्पष्ट करते हैं, न कि सीधे तौर पर यौगिकों के निश्चित अनुपात को।
#102. परमाणु क्रमांक परमाणु केन्द्र पर ________ की कुल संख्या है।
(RPF Constable 2018 17 Jan 2019 Shift 3)
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number – Z): किसी भी तत्व के परमाणु के केंद्र यानी नाभिक में मौजूद कुल प्रोटॉनों की संख्या को उस तत्व का परमाणु क्रमांक कहा जाता है।
- यह किसी तत्व की मौलिक पहचान तय करता है; उदाहरण के लिए, जिस परमाणु के नाभिक में 1 प्रोटॉन होता है, वह हमेशा हाइड्रोजन होता है, और जिसके नाभिक में 6 प्रोटॉन होते हैं, वह कार्बन होता है।
- एक सामान्य (उदासीन) परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों (यानी परमाणु क्रमांक) के बराबर होती है।
- न्यूट्रॉन: नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को परमाणु की द्रव्यमान संख्या (Mass Number) कहा जाता है, न कि परमाणु क्रमांक।
- फोटॉनों: फोटॉन प्रकाश या विद्युतचुंबकीय विकिरण के ऊर्जा पैकेट (क्वांटम) होते हैं, जिनका परमाणु के नाभिकीय क्रमांक से कोई संबंध नहीं है।
- प्लाज्मा: यह पदार्थ की चौथी अवस्था (आयनित गैस) है, जो अत्यधिक उच्च तापमान पर बनती है।
#103. द्रव्यमान संख्या के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- यह कथन अस क्यों है?: द्रव्यमान संख्या ($A$) परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों का कुल योग होती है। यह आवश्यक नहीं है कि सभी तत्वों में न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या के बराबर (अर्थात परमाणु संख्या की दोगुनी) हो।
- उदाहरण के लिए, सोडियम ($\text{Na}$) का परमाणु क्रमांक ($Z$) 11 है, लेकिन इसकी द्रव्यमान संख्या 23 होती है (जो $11 \times 2 = 22$ नहीं बल्कि $11 + 12 = 23$ है)। इसी प्रकार क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 है, लेकिन इसका औसत परमाणु द्रव्यमान/द्रव्यमान संख्या लगभग 35.5 होती है। भारी तत्वों में तो न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से काफी अधिक होती है।
- यह परमाणु में कुल न्यूक्लिऑन को निरूपित करती है: (सत्य) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को संयुक्त रूप से न्यूक्लिऑन कहा जाता है, और इनका योग ही द्रव्यमान संख्या है।
- यह हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है: (सत्य) चूंकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या हमेशा पूर्ण संख्या (Whole number) में होती है, इसलिए किसी विशिष्ट समस्थानिक की द्रव्यमान संख्या भी हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है।
- यह एक ही तत्व के समस्थानिक के लिए भिन्न हो सकती है: (सत्य) समस्थानिकों (जैसे हाइड्रोजन के प्रोटियम, ड्यूटीरियम, ट्राइटियम) में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने के कारण उनकी द्रव्यमान संख्या अलग-अलग होती है।
#104. रदरफोर्ड के स्वर्ण-पत्री प्रयोग से परमाणु मॉडल में एक बड़ा संशोधन हुआ। प्रयोग के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा प्रेक्षण और निष्कर्ष सबसे यथार्थ है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
- रदरफोर्ड का अल्फा ($\alpha$) कण प्रकीर्णन प्रयोग (1911): इस प्रसिद्ध प्रयोग के मुख्य प्रेक्षण और उनके आधार पर निकाले गए निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:
- 1. अधिकांश कण सीधे निकल गए: सोने की पन्नी पर डाले गए अधिकांश अल्फा कण बिना किसी विक्षेपण (Deflection) के सीधे पार निकल गए। इससे यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश भाग पूरी तरह से खाली (रिक्त स्थान) होता है।
- 2. कुछ कणों का विक्षेपण: बहुत कम कण अपने मार्ग से विक्षेपित हुए, जिससे यह पता चला कि परमाणु के भीतर धन आवेश बहुत ही कम आयतन में केंद्रित है।
- 3. बहुत कम कणों का वापस लौटना: लगभग 10,000 में से 1 कण वापस लौट आया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का पूरा धनावेश और द्रव्यमान उसके केंद्र में एक अत्यंत छोटे क्षेत्र (नाभिक) में निहित है।
- नाभिक धनावेशित होता है और परमाणु का अधिकांश आयतन घेरता है: यह कथन आधा सही है कि नाभिक धनावेशित होता है, किंतु यह परमाणु का अधिकांश आयतन नहीं घेरता; बल्कि नाभिक का आकार परमाणु के कुल आकार की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म होता है।
- अल्फा कण विक्षेपित होते हैं क्योंकि वे इलेक्ट्रॉनों से टकराते हैं: अल्फा कण बहुत भारी और धनावेशित होते हैं, इसलिए हल्के इलेक्ट्रॉन उन्हें महत्वपूर्ण रूप से विक्षेपित नहीं कर सकते। विक्षेपण का कारण नाभिक का प्रबल धनावेश होता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक में मौजूद होते हैं: यह वैज्ञानिक रूप से गलत है; इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर निश्चित कक्षाओं या क्षेत्रों में चक्कर लगाते हैं, जबकि नाभिक के अंदर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं।
#105. इलेक्ट्रॉन मूलभूत कण हैं जो पदार्थ बनाते हैं। निम्नलिखित में से किसे इस खोज का श्रेय दिया जाता है?
(RPF Constable 2024 : 10 Mar, 2025 Shift 2)
- इलेक्ट्रॉन की खोज (1897): ब्रिटिश भौतिकविद् सर जे. जे. थॉमसन ने वर्ष 1897 में कैथोड किरण नलिका (Cathode Ray Tube) का उपयोग करके यह सिद्ध किया कि सभी परमाणुओं में ऋणावेशित कण होते हैं, जिन्हें शुरुआत में ‘कॉर्पसल्स’ (Corpuscles) और बाद में इलेक्ट्रॉन (Electron) नाम दिया गया।
- इस क्रांतिकारी खोज के लिए उन्हें वर्ष 1906 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- इलेक्ट्रॉन परमाणु का एक अत्यंत हल्का और मूलभूत उप-परमाणु कण है, जिस पर इकाई ऋण आवेश होता है।
- नील्स बोहर: इन्होंने वर्ष 1913 में क्वांटम सिद्धांत के आधार पर परमाणु का ‘बोर मॉडल’ प्रस्तुत किया था, जिसमें ऊर्जा स्तरों की कक्षाओं को समझाया गया।
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने वर्ष 1911 में अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के माध्यम से परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज की थी।
- मेरी क्यूरी: इन्हें रेडियोधर्मिता (Radioactivity) और पोलोनियम व रेडियम तत्वों की खोज के लिए जाना जाता है।
#106. रदरफोर्ड का परमाणु का ग्रहीय मॉडल ________ भी कहलाता है।
(RPF Constable 2024 : 18 Mar, 2025 Shift 2)
- रदरफोर्ड का ग्रहीय एवं नाभिकीय मॉडल (1911): अर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा दिए गए परमाणु मॉडल में इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के चारों ओर उसी प्रकार चक्कर लगाते हुए दिखाया गया जैसे सौर मंडल में ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं, इसलिए इसे ‘ग्रहीय मॉडल’ (Planetary Model) कहा जाता है।
- चूँकि इस मॉडल ने सबसे पहले परमाणु के केंद्र में एक सघन, भारी और धनावेशित ‘नाभिक’ (Nucleus) के अस्तित्व को पूरी तरह से स्थापित किया, इसलिए इसे परमाणु का नाभिकीय मॉडल भी कहा जाता है।
- यह मॉडल परमाणु संरचना के अध्ययन में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ।
- परमाणु का असंतत ऊर्जा कक्षा मॉडल: यह नील्स बोर के मॉडल से संबंधित है, जिसमें ऊर्जा स्तरों (Orbits) के क्वांटमीकरण की बात कही गई थी।
- परमाणु का प्लम पुडिंग मॉडल: यह जे. जे. थॉमसन द्वारा दिया गया मॉडल था, जिसमें परमाणु को तरबूज या प्लम पुडिंग की तरह धनावेशित गोले के रूप में माना गया था।
- परमाणु का तरंग मॉडल: यह आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) पर आधारित है, जिसे इरविन श्रोडिंगर और हाइजेनबर्ग जैसे वैज्ञानिकों ने विकसित किया।


