परमाणु संरचना प्रश्न उत्तर

 

Results

#1. DNA अणु के समग्र ऋणात्मक आवेश में फॉस्फोडाइस्टर बंध की कौन सी विशेषता सर्वाधिक योगदान देती है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 11 Jun, 2025 Shift 2)

सही उत्तर: फॉस्फेट समूह के आयनकारी ऑक्सीजन परमाणु

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • फॉस्फोडाइस्टर बंध और डीएनए की संरचना: डीएनए (DNA) की रीढ़ (Backbone) डीऑक्सीराइबोझ शर्करा और फॉस्फेट समूहों के वैकल्पिक क्रम से बनी होती है, जो आपस में फॉस्फोडाइस्टर बंध द्वारा जुड़े रहते हैं।
  • शारीरिक या जैविक pH (physiological pH) की स्थिति में, फॉस्फोडाइस्टर बंध बनाने वाले फॉस्फेट समूह के ऑक्सीजन परमाणु आयनित हो जाते हैं और अपने प्रोटॉन का त्याग कर देते हैं।
  • प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड इकाई के फॉस्फेट पर मौजूद इस आयनीकरण के कारण ही संपूर्ण डीएनए अणु पर एक समान और स्थायी ऋणात्मक आवेश (Negative charge) उत्पन्न होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • थाइमिन का मेथिल समूह: यह एक तटस्थ (Neutral) कार्बनिक घटक है जो डीएनए के आवेश को प्रभावित नहीं करता।
  • प्यूरीन में नाइट्रोजन: नाइट्रोजन क्षारक हाइड्रोजन आबंध द्वारा बेस-पेयरिंग में भाग लेते हैं, किंतु रीढ़ के नियमित ऋणात्मक आवेश के लिए ये मुख्य रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।
  • राइबोझ शर्करा: शर्करा अणु रासायनिक रूप से उदासीन होते हैं और उन पर कोई स्थायी आयनिक आवेश नहीं होता।

#2. निम्नलिखित में से किसे न्यूक्लिऑन कहा जाता है?
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 1)

सही उत्तर: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • न्यूक्लिऑन (Nucleons): परमाणु के नाभिक (Nucleus) के भीतर पाए जाने वाले सभी मूल कणों को सामूहिक रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ कहा जाता है।
  • चूंकि परमाणु का नाभिक मुख्य रूप से दो प्रकार के कणों—धनावेशित प्रोटॉन और उदासीन न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है, इसलिए इन दोनों को संयुक्त रूप से न्यूक्लिऑन कहा जाता है।
  • किसी तत्व की द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A) वास्तव में उसके नाभिक में उपस्थित कुल न्यूक्लिऑन (प्रोटॉनों और न्यूट्रอนों की कुल संख्या) के योग के बराबर होती है ($A = Z + N$).

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • केवल इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर विभिन्न कक्षाओं या कक्षकों (Orbitals) में चक्कर लगाते हैं, वे नाभिक के भीतर नहीं रहते, इसलिए उन्हें न्यूक्लिऑन नहीं कहा जाता।
  • केवल प्रोटॉन या केवल न्यूट्रॉन: नाभिक में इन दोनों में से केवल एक नहीं बल्कि दोनों कण एक साथ मौजूद होते हैं, इसलिए इनमें से किसी एक को चुनना अधूरा उत्तर होगा।

#3. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म, समभारिक परमाणु ( Isobar) को दर्शाता है?
(RRB Level 01 Stage I 19/12/2025 )

सही उत्तर: $^{40}_{19}\text{K}$ और $^{40}_{18}\text{Ar}$

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिक (Isobars): ऐसे विभिन्न तत्वों के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (ऊपरी संख्या / Mass Number) समान होती है, लेकिन परमाणु क्रमांक (निचली संख्या / Atomic Number) भिन्न होते हैं, समभारिक कहलाते हैं।
  • दिए गए युग्म में पोटैशियम ($^{40}_{19}\text{K}$) का परमाणु क्रमांक 19 है और आर्गन ($^{40}_{18}\text{Ar}$) का परमाणु क्रमांक 18 है (दोनों अलग-अलग तत्व हैं), किंतु दोनों की ही द्रव्यमान संख्या 40 है।
  • चूँकि इनके नाभिकों में कुल न्यूक्लिऑनों की संख्या समान होती है, इसलिए यह समभारिक का सबसे सटीक और प्रसिद्ध उदाहरण है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • $^{235}_{92}\text{U}$ और $^{238}_{92}\text{U}$: इनमें परमाणु क्रमांक समान (92) है और द्रव्यमान संख्या भिन्न है, इसलिए यह समस्थानिक (Isotopes) हैं।
  • $^{15}_{8}\text{O}$ और $^{16}_{8}\text{O}$: इनमें भी परमाणु क्रमांक समान (8) है, अतः यह भी ऑक्सीजन के समस्थानिक हैं।
  • $^{15}_{7}\text{N}$ और $^{16}_{8}\text{O}$: न तो इनके परमाणु क्रमांक समान हैं और न ही द्रव्यमान संख्या समान है, इसलिए यह न तो समस्थानिक हैं और न ही समभारिक।

#4. समभारिकों का कौन-सा गुणधर्म, सदैव भिन्न होता है?
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )

सही उत्तर: परमाणु क्रमांक (Atomic Number)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिकों की विशेषता: समभारिक (Isobars) ऐसे भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass Number) तो समान होती है, परंतु उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) हमेशा अलग-अलग होते हैं।
  • चूंकि वे अलग-अलग तत्वों (जैसे आर्गन और कैल्शियम) से संबंधित होते हैं, इसलिए उनके नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या भिन्न होती है, जिसके फलस्वरूप उनका परमाणु क्रमांक भी सदैव भिन्न ही रहता है।
  • इसके विपरीत, उनकी द्रव्यमान संख्या (न्यूक्लिऑनों की कुल संख्या) समान होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • द्रव्यमान संख्या / न्यूक्लिऑनों की कुल संख्या: यह समभारिकों में समान होती है, भिन्न नहीं होती (यही इनकी मुख्य पहचान है)।
  • इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या: उदासीन परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या उनके परमाणु क्रमांक के बराबर होती है; चूंकि परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं, इसलिए इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी भिन्न हो सकती है, किंतु रासायनिक और भौतिक वर्गीकरण का मूल आधार ‘परमाणु क्रमांक’ माना जाता है।

#5. निम्नलिखित में से किस प्रेक्षण की व्याख्या रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल द्वारा नहीं की जा सकी?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )

सही उत्तर: त्वरित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के बावजूद परमाणु के स्थायित्व (Stability of the atom)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • रदरफोर्ड के मॉडल की मुख्य सीमा (Drawback): चिरसम्मत भौतिकी (Classical Electrodynamics) और मैक्सवेल के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) वृत्तीय पथ पर त्वरित गति करता है, तो वह लगातार ऊर्जा का विकिरण (Radiation) करता है।
  • यदि ऐसा होता, तो नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाता हुआ इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा खोकर अंततः सर्पिल पथ पर चलते हुए नाभिक में गिर जाता (Collapse हो जाता), जिससे परमाणु का अस्तित्व समाप्त हो जाता।
  • किंतु वास्तविकता में परमाणु अत्यंत स्थायी होते हैं। रदरफोर्ड का मॉडल इस बात को स्पष्ट करने में पूरी तरह असफल रहा था। इस दोष को बाद में 1913 में **नील बोर** ने अपने परमाणु मॉडल द्वारा सुधारा।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों नहीं हैं?):
  • परमाणु में धनावेशित नाभिक की उपस्थिति & अल्फा कणों का बड़े कोणों पर विक्षेप: इन दोनों तथ्यों की सफल और सटीक व्याख्या स्वयं रदरफोर्ड ने अपने अल्फा-कण प्रकीर्णन (Gold Foil Experiment) के आधार पर की थी।
  • नाभिक के परितः इलेक्ट्रॉनों का वितरण: रदरफोर्ड ने यह सुझाव दिया था कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हैं, हालांकि वे इसका सटीक क्वांटम वितरण नहीं समझा पाए थे, लेकिन मुख्य सैद्धांतिक विफलता ‘स्थायित्व’ की थी।



#6. अमोनियम सल्फेट ( NH 4) 2 SO 4 का सूत्र इकाई द्रव्यमान क्या है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )

सही उत्तर: 132 u

💡 विस्तृत नोट्स एवं गणना (Detailed Notes & Calculation):
  • सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना: अमोनियम सल्फेट का रासायनिक सूत्रीय संगठन $(\text{NH}_4)_2\text{SO}_4$ है। इसमें नाइट्रोजन के 2 परमाणु, हाइड्रोजन के 8 परमाणु, सल्फर का 1 परमाणु और ऑक्सीजन के 4 परमाणु शामिल हैं।
  • प्रत्येक घटक का परमाणु द्रव्यमान और कुल योगदान:

    • नाइट्रोजन ($\text{N}$) = $14\text{ u} \times 2 = 28\text{ u}$

    • हाइड्रोजन ($\text{H}$) = $1\text{ u} \times 8 = 8\text{ u}$

    • सल्फर ($\text{S}$) = $32\text{ u} \times 1 = 32\text{ u}$

    • ऑक्सीजन ($\text{O}$) = $16\text{ u} \times 4 = 64\text{ u}$

  • कुल सूत्र इकाई द्रव्यमान:

    $$\text{कुल द्रव्यमान} = 28 + 8 + 32 + 64 = 132\text{ u}$$

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • 98 u: यह सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) का आणविक द्रव्यमान है ($2 + 32 + 64 = 98\text{ u}$)।
  • 146 u और 114 u: ये मान गलत गणना या परमाणुओं के द्रव्यमान में जोड़ने की त्रुटि के कारण प्राप्त होते हैं, जो सही योग (132 u) से मेल नहीं खाते।

#7. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन हमेशा 1:8 के निश्चित द्रव्यमान अनुपात में मिलकर पानी बनाते हैं, यह तथ्य रसायन विज्ञान के किस मूलभूत नियम को दर्शाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 21 Aug, 2025 Shift 3)

सही उत्तर: स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant / Definite Proportions)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • स्थिर अनुपात का नियम: इस नियम को फ्रांसीसी रसायन विज्ञानी जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक निश्चित (नियत) अनुपात में आपस में जुड़े होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो।
  • पानी ($\text{H}_2\text{O}$) का उदाहरण:

    • हाइड्रोजन के 2 परमाणु का द्रव्यमान = $2 \times 1 = 2\text{ u}$

    • ऑक्सीजन के 1 परमाणु का द्रव्यमान = $1 \times 16 = 16\text{ u}$

    • द्रव्यमान अनुपात = $2 : 16$ या सरल करने पर $1 : 8$

  • अतः पानी चाहे किसी भी स्थान का हो, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात हमेशा $1:8$ ही रहता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • ऊर्जा संरक्षण का नियम: इसके अनुसार ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, यह रासायनिक यौगिकों के द्रव्यमान अनुपात से संबंधित नहीं है।
  • गुणित अनुपात का नियम: इसे जॉन डाल्टन ने प्रतिपादित किया था। इसके अनुसार जब दो तत्व आपस में मिलकर एक से अधिक यौगिक बनाते हैं, तब एक तत्व के साथ मिलने वाले दूसरे तत्व के द्रव्यमान सरल पूर्णांक अनुपात में होते हैं।
  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत: यह रासायनिक संयोजन के नियमों (जैसे द्रव्यमान संरक्षण और स्थिर अनुपात) की सैद्धांतिक व्याख्या करने वाला एक मॉडल/सिद्धांत है, स्वयं कोई विशिष्ट अनुपात नियम नहीं।

#8. सूर्य का परमाणु ईधन है-
(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)

सही उत्तर: हाइड्रोजन (Hydrogen)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion): सूर्य और अन्य तारों की अपार ऊर्जा का मुख्य स्रोत उनके क्रोड (Core) में होने वाली नाभिकीय संलयन अभिक्रिया है।
  • सूर्य के क्रोड में अत्यधिक उच्च तापमान और दाब के कारण हाइड्रोजन के हल्के नाभिक आपस में संलयित होकर भारी हीरियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊष्मा व प्रकाश ऊर्जा निकलती है।
  • इस प्रकार, सूर्य के लिए प्राथमिक परमाणु ईंधन (Nuclear fuel) के रूप में हाइड्रोजन कार्य करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • हीलीयम: हीलियम हाइड्रोजन संलयन की प्रक्रिया का उत्पाद (Product) है, ईंधन नहीं।
  • यूरेनियम: यह नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) पर आधारित पृथ्वी के परमाणु रिएक्टरों और बमों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, तारों में नहीं।
  • अल्फा कण: यह द्वि-धनावेशित हीलियम आयन ($^4_2\text{He}^{2+}$) होता है, जो प्राकृतिक रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान निकलता है, न कि तारों का ईंधन।

#9. द्रव्यमान संख्या के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )

सही उत्तर (गलत कथन): प्रोटियम और ड्यूटेरियम की द्रव्यमान संख्या समान होती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्रव्यमान संख्या (Mass Number, $A$): किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को उस परमाणु की द्रव्यमान संख्या कहा जाता है। ($A = Z + N$)
  • प्रोटियम और ड्यूटेरियम का विश्लेषण:

    • हाइड्रोजन के पहले समस्थानिक—प्रोटियम ($^1_1\text{H}$) की द्रव्यमान संख्या **1** होती है (इसमें केवल 1 प्रोटॉन होता है, न्यूट्रॉन नहीं)।

    • हाइड्रोजन के दूसरे समस्थानिक—ड्यूटेरियम ($^2_1\text{H}$) की द्रव्यमान संख्या **2** होती है (इसमें 1 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन होता है)।

  • चूँकि दोनों की द्रव्यमान संख्याएँ क्रमशः 1 और 2 हैं (अर्थात भिन्न हैं), यह कथन कि “इनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है” पूरी तरह से **असत्य (गलत)** है। और चूंकि प्रश्न में गलत कथन ही पूछा गया है, इसलिए यही विकल्प सही होगा।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सभी कथन सत्य हैं):
  • न्यूक्लिऑन्स की संख्या द्रव्यमान संख्या के समान होती है: यह बिल्कुल सही है, क्योंकि नाभिकीय कणों (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) को ही संयुक्त रूप से न्यूक्लिऑन और द्रव्यमान संख्या कहा जाता है।
  • द्रव्यमान संख्या, न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों के योगफल के बराबर होती है: यह भी सत्य है ($A = \text{Protons} + \text{Neutrons}$)।
  • आइसोबार की द्रव्यमान संख्या समान होती है: यह समभारिकों (Isobars) की मूल परिभाषा है (जैसे $^{40}\text{Ar}$ और $^{40}\text{Ca}$ की द्रव्यमान संख्या 40 होती है)।

#10. समभारिक परमाणु वे परमाणु होते हैं, जिनमें ________ ।
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )

सही उत्तर: द्रव्यमान संख्या समान होती है, तथा तत्व भिन्न होते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिक (Isobars) की परिभाषा: ऐसे विभिन्न (अलग-अलग) तत्वों के परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या ($A$) समान होती है, परंतु उनके परमाणु क्रमांक ($Z$) भिन्न होते हैं, उन्हें समभारिक कहा जाता है।
  • चूँकि इनके परमाणु क्रमांक अलग होते हैं, इसलिए ये अलग-अलग तत्वों को निरूपित करते हैं और इनके रासायनिक गुण भी पूर्ण रूप से भिन्न होते हैं।
  • उत्कृष्ट उदाहरण: आर्गन ($^{40}_{18}\text{Ar}$) और कैल्शियम ($^{40}_{20}\text{Ca}$) दोनों की द्रव्यमान संख्या **40** है, किंतु आर्गन एक अक्रिय गैस है और कैल्शियम एक क्षारीय मृदा धातु है (दोनों अलग तत्व हैं)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या समान होती है: यदि परमाणु क्रमांक समान हो जाए, तो वे समस्थानिक (Isotopes) बन जाते हैं, समभारिक नहीं।
  • केवल न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है: जिन परमाणुओं में न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें समटन (Isotones) कहा जाता है।
  • केवल इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है: यह स्थिति समइलेक्ट्रॉनी (Isoelectronic) स्पीशीज के लिए लागू होती है।



#11. प्रत्येक तत्व का एक नाम और ________ होता है।
(RRB NTPC CBT-I : 11 Jan 2021 Shift 2)

सही उत्तर: एक अद्वितीय रासायनिक प्रतीक (A unique chemical symbol)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • रासायनिक प्रतीक (Chemical Symbol): रसायन विज्ञान में प्रत्येक रासायनिक तत्व को एक संक्षिप्त और विशिष्ट नाम या अक्षर द्वारा दर्शाया जाता है, जिसे उसका ‘रासायनिक प्रतीक’ कहा जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IUPAC (इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री) द्वारा स्वीकृत होता है।
  • प्रतीक या तो तत्व के अंग्रेजी नाम के पहले अक्षर (जैसे हाइड्रोजन के लिए **H**, कार्बन के लिए **C**) से बनता है, या फिर दो अक्षरों से (जैसे सोडियम के लिए **Na**, जो उसके लैटिन नाम ‘नैट्रियम’ से लिया गया है)।
  • दुनिया के किसी भी कोने में उस प्रतीक का उपयोग उसी विशेष तत्व को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो इसे पूरी तरह से अद्वितीय (Unique) बनाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • एक अद्वितीय भौतिक प्रतीक / एक अद्वितीय रंग / एक अद्वितीय आकार: रासायनिक तत्वों का कोई ‘भौतिक प्रतीक’ नहीं होता। इसके अलावा, कई तत्वों के रंग (जैसे कई धातुएँ चांदी जैसी सफेद या धूसर होती हैं) या परमाणु आकार आपस में समान हो सकते हैं, इसलिए रंग या आकार प्रत्येक तत्व के लिए अद्वितीय नहीं होते।

#12. जेम्स चैडविक ने किस उप-परमाणु कण की खोज की थी?
(RRB NTPC CBT-I : 19 Jan 2021 Shift 2)

सही उत्तर: न्यूट्रॉन (Neutron)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • न्यूट्रॉन की खोज: वर्ष 1932 में ब्रिटिश भौतिकবিদ जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने बेरिलियम की पतली शीट पर अल्फा कणों की बौछार करके एक उदासीन (Neutral) उप-परमाणु कण की खोज की थी, जिसे ‘न्यूट्रॉन’ नाम दिया गया।
  • न्यूट्रॉन एक ऐसा मूल कण है जिस पर कोई विद्युत आवेश (Electric charge) नहीं होता (यह आवेशहीन होता है), किंतु इसका द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के द्रव्यमान के बराबर होता है।
  • हाइड्रोजन को छोड़कर यह लगभग सभी तत्वों के परमाणु नाभिक का एक अनिवार्य घटक होता है। इस महत्वपूर्ण खोज के लिए जेम्स चैडविक को 1935 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉन: इसकी खोज जे.जे. थॉमसन (J.J. Thomson) द्वारा 1897 में की गई थी।
  • प्रोटॉन: इसकी खोज का श्रेय अर्नेस्ट रदरफोर्ड (या गोल्डस्टीन) को जाता है।
  • न्यूरॉन: यह मानव शरीर के तंत्रिका तंत्र (Nervous system) की एक कोशिका है, न कि परमाणु का कोई उप-परमाणु कण।

#13. जब दो या दो से अधिक यौगिकों का आणविक सूत्र समान होता है, लेकिन उनके भौतिक या रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं, तो इस घटना को क्या कहते हैं?
(RPF Constable 2024 : 12 Mar, 2025 Shift 1)

सही उत्तर: समावयवता (Isomerism)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समावयवता (Isomerism): जब दो या दो से अधिक यौगिकों का आणविक सूत्र (Molecular Formula) समान होता है, किंतु उनके परमाणुओं की अंतरिक्ष में व्यवस्था (Structural Arrangement) या संरचनात्मक सूत्र भिन्न होने के कारण उनके भौतिक और रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं, तो ऐसे यौगिकों को ‘समावयवी’ (Isomers) और इस परिघटना को समावयवता कहा जाता है।
  • कार्बनिक रसायन में यह घटना बहुत आम है, क्योंकि कार्बन में श्रृंखला बनाने (Catenation) की अपार क्षमता होती है।
  • उदाहरण: एथिल अल्कोहल ($\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$) और डाइमेथिल ईथर ($\text{CH}_3\text{OCH}_3$) दोनों का रासायनिक सूत्र $\text{C}_2\text{H}_6\text{O}$ एक ही है, किंतु इनके गुण और संरचना पूरी तरह भिन्न हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • समस्थानिक (Isotopes): यह एक ही तत्व के ऐसे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
  • समरूपता (Homology / Symmetry): यह किसी संरचना में ज्यामितीय समरूपता या समान श्रेणी (जैसे समांगी श्रेणी) से संबंधित है, यौगिकों के इस विशिष्ट गुण को नहीं दर्शाता।
  • बहुलकीकरण (Polymerization): यह वह प्रक्रिया है जिसमें छोटे अणु (मोनोमर्स) आपस में जुड़कर एक बड़ी श्रृंखला वाला बहुलक (Polymer) बनाते हैं।

#14. यदि वस्तु अवतल लेंस के प्रकाशिक केंद्र O और अनंत के बीच रखी गई है तो अपवर्तन के बाद प्रतिबिंब कैसा बनेगा?
(RRB JE 22 May 2019 Shift 1 CBT 1)

सही उत्तर: छोटा (Diminished / Smaller than the object)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवतल लेंस (Concave Lens) द्वारा प्रतिबिंब निर्माण: अवतल लेंस को अपसारी लेंस (Diverging lens) भी कहा जाता है। जब वस्तु प्रकाशिक केंद्र ($O$) और अनंत ($ \infty $) के बीच कहीं भी रखी जाती है, तो अपवर्तन के बाद बनने वाला प्रतिबिंब हमेशा:

    • लेंस के उसी ओर (वस्तु की तरफ) बनता है,

    • **आभासी (Virtual) और सीधा (Erect)** होता है, तथा

    • वस्तु के आकार से हमेशा **छोटा (Diminished)** होता है।

  • यह स्थिति वस्तु की दूरी बदलने पर भी नहीं बदलती; प्रतिबिंब हमेशा आकार में छोटा ही बनता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • बिंदु आकार का (Point-sized): यह स्थिति केवल तब होती है जब वस्तु अनंत ($\infty$) पर रखी हो (फोकस पर बिंदुवत प्रतिबिंब बनता है)।
  • समान आकार का: अवतल लेंस कभी भी वस्तु के समान आकार का प्रतिबिंब नहीं बनाता (यह उत्तल लेंस में तब संभव है जब वस्तु 2F पर हो)।
  • अविवर्धित: यहाँ प्रतिबिंब आकार में छोटा (अर्थात संकुचित/घटा हुआ) होता है, इसलिए सटीक भौतिक गुण ‘छोटा’ है।

#15. सूत्र इकाई द्रव्यमान ________ होता है।
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )

सही उत्तर: किसी यौगिक के सूत्र इकाई में सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योगफल

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): किसी भी आयनिक यौगिक (जैसे सोडियम क्लोराइड, $\text{NaCl}$) के एक सूत्र इकाई में मौजूद सभी घटक परमाणुओं या आयनों के अलग-अलग परमाणु द्रव्यमानों (Atomic Masses) के कुल योग को ही उस यौगिक का सूत्र इकाई द्रव्यमान कहा जाता है।
  • इसकी गणना ठीक वैसे ही की जाती है जैसे सहसंयोजक यौगिकों के लिए ‘आणविक द्रव्यमान’ निकाला जाता है, बस अंतर यह है कि यह शब्द विशेष रूप से उन आयनिक पदार्थों के लिए प्रयोग किया जाता है जो क्रिस्टल जालक के रूप में व्यवस्थित होते हैं।
  • इसे एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई ($\text{u}$) में व्यक्त किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु क्रमांक, प्रोटॉनों की संख्या या इलेक्ट्रॉनों की संख्या का योगफल: द्रव्यमान और इन संख्याओं (Atomic number, Protons, Electrons) का कोई सीधा योग द्रव्यमान नहीं कहलाता; द्रव्यमान हमेशा व्यक्तिगत परमाण्विक द्रव्यमानों के योग से ही निर्धारित होता है।



#16. कैंसर के उपचार में, बाह्य विकिरण चिकित्सा में निम्नलिखित में से किसका उपयोग किया जाता है?
(RPF SI 2018 : 12 Jan 2019 Shift 1)

सही उत्तर: कोबाल्ट 60 (Cobalt-60)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कोबाल्ट-60 ($^{60}\text{Co}$): यह कोबाल्ट का एक रेडियोएक्टिव समस्थानिक है। यह क्षय के दौरान अत्यधिक उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणें ($\gamma$-rays) उत्सर्जित करता है।
  • इन गामा किरणों की वेधन क्षमता बहुत अधिक होती है, जिसके कारण इनका उपयोग कैंसर के उपचार में बाह्य विकिरण चिकित्सा (External Beam Radiation Therapy / Teletherapy) के तहत शरीर के भीतर स्थित malignant (कैंसरयुक्त) ट्यूमर और कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
  • यह चिकित्सा पद्धति ट्यूमर की वृद्धि को रोकने और स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुँचाने में प्रभावी होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • आयोडीन 131: इसका उपयोग मुख्य रूप से थायराइड ग्रंथि के विकारों और थायराइड कैंसर के आंतरिक उपचार (Internal Radiotherapy) में किया जाता है, बाह्य विकिरण चिकित्सा में नहीं।
  • प्लूटोनियम 238: यह एक सिंथेटिक रेडियोएक्टिव तत्व है जिसका उपयोग अंतरिक्ष अभियानों में परमाणु बैटरी या रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTG) के रूप में ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
  • हाइड्रोजन-3 (ट्रिटियम): यह हाइड्रोजन का रेडियोधर्मी समस्थानिक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से परमाणु संलयन अनुसंधान और स्व-प्रकाशित प्रकाश स्रोतों (Self-powered lighting) में होता है।

#17. फॉस्फोरस की परमाणुिकता क्या है?
(RRB NTPC CBT-I : 31 July 2021 Shift 1)

सही उत्तर: चतुष्परमाणुक (Tetra-atomic)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • परमाणुिकता (Atomicity): किसी भी तत्व के एक अणु में उपस्थित कुल परमाणुओं की संख्या को उसकी परमाणुिकता कहा जाता है।
  • फॉस्फोरस ($P_4$): फॉस्फोरस का साधारण और स्थायी रूप एक अणु के रूप में चार परमाणुओं से मिलकर बना होता है। इसलिए इसका रासायनिक सूत्र $\text{P}_4$ लिखा जाता है और इसकी परमाणुिकता **4 (चतुष्परमाणुक)** होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • एकपरमाणुक (Monoatomic): यह अक्रिय गैसों (जैसे हीलियम, नियॉन, आर्गन) की विशेषता है, जिनके अणु एकल परमाणु के रूप में रहते हैं।
  • द्विपरमाणुक (Diatomic): यह गैसों जैसे हाइड्रोजन ($\text{H}_2$), ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) और नाइट्रोजन ($\text{N}_2$) के लिए होती है।
  • बहु-परमाणुक (Polyatomic): यह सामान्यतः सल्फर ($\text{S}_8$) जैसे तत्वों के लिए लागू होता है जिसमें 4 से अधिक परमाणु होते हैं।

#18. गुरुत्वीय त्वरण को कैसे दर्शाया जाता है?
(RRB JE 23 May 2019 Shift 3)

सही उत्तर: छोटा अक्षर g (Lowercase g)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity): पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर लगाए जाने वाले गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न होने वाले त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी वर्णमाला के छोटे अक्षर $g$ से दर्शाया जाता है।
  • पृथ्वी की सतह पर इसका मानक मान लगभग $9.8\text{ m/s}^2$ होता है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा हमेशा पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • बड़ा अक्षर G: इसका उपयोग ‘सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक’ (Universal Gravitational Constant) को दर्शाने के लिए किया जाता है, जिसका मान $6.67 \times 10^{-11}\text{ N}\cdot\text{m}^2/\text{kg}^2$ होता है।
  • ग्रीक अक्षर g या इप््सिलॉन ($\varepsilon$): ये मानक संकेत नहीं हैं; इप््सिलॉन का उपयोग भौतिकी में पारगम्यता (Permittivity) या विकृति (Strain) आदि के लिए किया जाता है।

#19. हाइड्रोजन के समस्थानिक ________ हैं।
(RRB JE EE 1 Sept 2019 Shift 1 CBT 2)

सही उत्तर: $1\text{H}1, 1\text{H}2, 1\text{H}3$ (अर्थात् प्रोटियम, ड्यूटेरियम और ट्रिटियम)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes of Hydrogen): हाइड्रोजन के तीन प्रमुख प्राकृतिक समस्थानिक होते हैं, जिनका परमाणु क्रमांक समान (1) होता है, किंतु द्रव्यमान संख्या क्रमशः 1, 2 और 3 होती है:

    1. प्रोटियम ($^1_1\text{H}$): इसमें 1 प्रोटॉन और 0 न्यूट्रॉन होता है (यह सबसे सामान्य और प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला समस्थानिक है).

    2. ड्यूटेरियम ($^2_1\text{H}$): इसे भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं; इसमें 1 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन होता है.

    3. ट्रिटियम ($^3_1\text{H}$): यह हाइड्रोजन का एकमात्र रेडियोएक्टिव समस्थानिक है जिसमें 1 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं.

  • इन तीनों का रासायनिक गुण समान होता है क्योंकि इनके परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान (1) होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • अन्य सभी विकल्पों में परमाणुओं के द्रव्यमान संख्या और परमाणु क्रमांक के मान या तो गलत तरीके से व्यवस्थित किए गए हैं या ऐसे संयोजन दिए गए हैं जो हाइड्रोजन के वास्तविक समस्थानिकों (1, 2, 3 द्रव्यमान वाले) को सही रूप में नहीं दर्शाते।

#20. समभारिक और समस्थानिकों में मुख्य अंतर क्या है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

सही उत्तर: समभारिक की द्रव्यमान संख्या समान होती है, लेकिन परमाणु संख्या भिन्न-भिन्न होती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समभारिक (Isobars) बनाम समस्थानिक (Isotopes): रसायन विज्ञान में इन दोनों की परिभाषाएं एक-दूसरे के विपरीत होती हैं:

    • **समभारिक (Isobars):** ये भिन्न-भिन्न तत्वों के ऐसे परमाणु होते हैं जिनकी **द्रव्यमान संख्या (Mass Number) समान** होती है, किंतु **परमाणु क्रमांक (Atomic Number) भिन्न** होते हैं (जैसे $^{40}_{18}\text{Ar}$ और $^{40}_{20}\text{Ca}$)।

    • **समस्थानिक (Isotopes):** ये एक ही तत्व के ऐसे परमाणु होते हैं जिनका **परमाणु क्रमांक समान** होता है, किंतु **द्रव्यमान संख्या भिन्न** होती है (जैसे $^{1}_{1}\text{H}, ^{2}_{1}\text{H}, ^{3}_{1}\text{H}$)।

  • अतः समभारिकों में द्रव्यमान संख्या समान और परमाणु संख्या भिन्न होना इनका सबसे मुख्य और बुनियादी अंतर है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • समभारिक में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है: यह गलत है; समभारिक अलग-अलग तत्वों के होते हैं, इसलिए उनके परमाणु क्रमांक और इलेक्ट्रॉन अलग होते हैं।
  • समभारिक की परमाणु संख्या समान होती है: यदि परमाणु संख्या समान हो जाए, तो वह समस्थानिक बन जाएगा, समभारिक नहीं।
  • समभारिक एक ही तत्व के परमाणु होते हैं: यह कथन उल्टा लिखा गया है; एक ही तत्व के परमाणु ‘समस्थानिक’ होते हैं, जबकि समभारिक ‘भिन्न-भिन्न तत्वों’ के परमाणु होते हैं।



#21. ओजोन के एक अणु में ________ होता है/होते हैं।
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )

सही उत्तर: 3 ऑक्सीजन परमाणु

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ओजोन ($\text{O}_3$): ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप (Allotrope) है। इसका रासायनिक सूत्र $\text{O}_3$ होता है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रत्येक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु आपस में सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े होते हैं।
  • चूँकि इसके एक अणु में तीन परमाणु होते हैं, इसलिए ओजोन की परमाणुिकता (Atomicity) **3 (त्रिपरमाणुक / Triatomic)** होती है।
  • यह वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में ओजोन परत के रूप में सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • 2 ऑक्सीजन परमाणु: यह सामान्य ऑक्सीजन गैस ($\text{O}_2$) के एक अणु में होते हैं (द्विपरमाणुक)।
  • 1 या 4 ऑक्सीजन परमाणु: एकल ऑक्सीजन परमाणु ($\text{O}$) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील मुक्त मूलक (Free radical) होता है, और 4 परमाणुओं वाला रूप ओजोन के लिए मान्य नहीं है।

#22. निम्नलिखित में से कौन सा कथन परमाणु के संबंध में सही है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 3)

सही उत्तर: संपूर्ण परमाणु विधुत रूप से उदासीन होते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • परमाणु की विद्युतीय उदासीनता (Electrical Neutrality of Atom): किसी भी सामान्य या उदासीन परमाणु में धन आवेशित कणों (प्रोटॉनों) की संख्या, ऋण आवेशित कणों (इलेक्ट्रॉनों) की संख्या के ठीक बराबर होती है।
  • चूँकि प्रोटॉन पर धनात्मक आवेश और इलेक्ट्रॉन पर उतना ही ऋणात्मक आवेश होता है, इसलिए दोनों के आवेश एक-दूसरे के प्रभाव को पूरी तरह संतुलित (Cancel) कर देते हैं।
  • परिणामस्वरूप, संपूर्ण परमाणु पर कुल नेट आवेश शून्य होता है और वह विद्युत रूप से उदासीन (Electrically neutral) होता है (हालांकि नाभिक स्वयं धनावेशित होता है, लेकिन पूरे परमाणु की बात करें तो वह उदासीन होता है)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु विद्युत रूप से उदासीन नहीं होते हैं: यह कथन बिल्कुल गलत है क्योंकि एक सामान्य परमाणु हमेशा उदासीन ही होता है।
  • एक परमाणु में कोई धनात्मक आवेश नहीं होता है: यह गलत है, क्योंकि परमाणु के केंद्र (नाभिक) में प्रोटॉन उपस्थित होते हैं जो धनावेशित होते हैं।
  • परमाणु आंशिक रूप से विद्युत रूप से उदासीन होते हैं: उदासीनता ‘पूर्ण’ होती है, आंशिक नहीं; जब आवेश असंतुलित होते हैं तब वे आयन (Ions) बन जाते हैं।

#23. इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की?
(RPF Constable 2018 11 Feb 2019)

सही उत्तर: जे. जे. थॉमसन (J. J. Thomson)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • इलेक्ट्रॉन की खोज: वर्ष 1897 में ब्रिटिश भौतिकविद् सर जे. जे. थॉमसन ने कैथोड किरण विसर्जन नली (Cathode Ray Tube) प्रयोग के दौरान ऋणावेशित कणों की खोज की थी, जिन्हें शुरुआत में ‘कॉर्पसल्स’ (Corpuscles) कहा गया था और बाद में इनका नाम इलेक्ट्रॉन रखा गया।
  • इलेक्ट्रॉन एक अत्यंत हल्का उप-परमाणु कण है जिस पर इकाई ऋणावेश (Unit negative charge) होता है।
  • इस क्रांतिकारी खोज के लिए जे. जे. थॉमसन को 1906 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • जेम्स चैडविक: इन्होंने वर्ष 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की थी।
  • यूजेन गोल्डस्टीन: इन्होंने एनोड किरणों (कैनाल रेज़) के माध्यम से प्रोटॉन की उपस्थिति का पता लगाया था।
  • फिलिप वॉरिन एंडरसन: यह एक प्रसिद्ध भौतिकविद् थे जिन्हें ठोस अवस्था भौतिकी (जैसे लोकलाइजेशन थ्योरी) में उनके योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था, इनका इलेक्ट्रॉन की मूल खोज से संबंध नहीं है।

#24. उस ब्रिटिश रसायनज्ञ का नाम बताइए जिसने 1808 में द्रव्यमान के संरक्षण और निश्चित अनुपात के नियम पर अपना परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया, जो पदार्थ के अध्ययन में एक क्रांतिकारी परिवर्तन था।
(RRB NTPC CBT-I : 20 Jan 2021 Shift 2)

सही उत्तर: जॉन डाल्टन (John Dalton)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton’s Atomic Theory): वर्ष 1808 में ब्रिटिश रसायनज्ञ और भौतिकविद् जॉन डाल्टन ने रासायनिक संयोजन के दो महत्वपूर्ण नियमों—द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) और स्थिर अनुपात के नियम (Law of Constant Proportions)—के आधार पर पदार्थ की प्रकृति पर अपना प्रसिद्ध परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  • उनके इस सिद्धांत ने रसायन विज्ञान के अध्ययन में एक क्रांतिकारी मोड़ दिया। इसके अनुसार, सभी पदार्थ सूक्ष्म, अविभाज्य कणों से बने होते हैं जिन्हें ‘परमाणु’ (Atoms) कहा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • लेवोज़ियर (Antoine Lavoisier): इन्हें ‘आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक’ कहा जाता है और इन्होंने द्रव्यमान संरक्षण के नियम को प्रतिपादित किया था, न कि संपूर्ण परमाणु सिद्धांत को।
  • प्रॉस्ट (Joseph Proust): इन्होंने ‘स्थिर अनुपात का नियम’ (Law of Definite Proportions) दिया था।
  • अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने बाद में (1911 में) परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज की थी, न कि 1808 का परमाणु सिद्धांत।

#25. वह प्रक्रिया, जिसमें सजीव का शरीर दो एकसमान भागों में विभाजित हो जाता है, उसे ________ कहा जाता है।
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )

सही उत्तर: द्वि-खंडन (Binary Fission)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्वि-खंडन (Binary Fission): यह अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) की एक प्रमुख विधि है। इस प्रक्रिया में एक परिपक्व जीव या कोशिका विभाजित होकर ठीक दो एकसमान संतति (Daughter) कोशिकाओं या भागों का निर्माण करती है।
  • इसमें सबसे पहले केंद्रक (Nucleus) का विभाजन होता है, जिसके बाद कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) का विभाजन होता है।
  • प्रमुख उदाहरण: अमीबा (Amoeba), पैरामीशियम (Paramecium) और लीशमैनिया आदि।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • मुकुलन (Budding): इसमें जनक शरीर पर एक छोटा सा उभार (Bud) बनता है जो विकसित होकर नया जीव बनता है (जैसे—हाइड्रा और यीस्ट)।
  • विखंडन (Fission): यह एक व्यापक शब्द है जिसके अंतर्गत द्वि-खंडन और बहु खंडन दोनों शामिल होते हैं, किंतु ‘दो एकसमान भागों’ के लिए विशिष्ट शब्द ‘द्वि-खंडन’ है।
  • बहु खंडन (Multiple Fission): इसमें एक ही जीव एक साथ विभाजित होकर अनेक संतति कोशिकाओं का निर्माण करता है (जैसे—प्लाज्मोडियम)।



#26. परमाणु हथियार में प्रयुक्त होने वाले सबसे आम समस्थानिक हैं:
(RRB NTPC CBT-I : 8 Mar 2021 Shift 1)

v

सही उत्तर: यूरेनियम और प्लूटोनियम

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • नाभिकीय हथियार सामग्री: परमाणु हथियारों (जैसे परमाणु बम) में ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए विखंडनीय (Fissile) पदार्थों के रूप में मुख्य रूप से यूरेनियम-235 ($^{235}\text{U}$) और प्लूटोनियम-239 ($^{239}\text{Pu}$) जैसे समस्थानिकों का उपयोग किया जाता है.
  • इन भारी तत्वों के नाभिक पर जब न्यूट्रॉन की बौछार की जाती है, तो ये नियंत्रित या अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) श्रृंखला अभिक्रिया के माध्यम से टूटते हैं और भारी मात्रा में विस्फोटक ऊर्जा मुक्त करते हैं.
  • अतः परमाणु हथियारों में सबसे सामान्य और प्रमुख रूप से प्रयुक्त होने वाले समस्थानिक यूरेनियम और प्लूटोनियम हैं.

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • यूरेनियम और लिथियम / ड्यूटेरियम और लिथियम / ड्यूटेरियम और प्लूटोनियम: हालांकि लिथियम और ड्यूटेरियम का उपयोग थर्मोन्यूक्लियर (हाइड्रोजन) बमों में संलयन ईंधन (जैसे लिथियम ड्यूटेराइड) के रूप में किया जाता है, किंतु पारंपरिक व व्यापक रूप से परमाणु हथियारों के प्राथमिक विखंडन घटकों के रूप में ‘यूरेनियम और प्लूटोनियम’ सबसे आम और मुख्य समस्थानिक हैं।

#27. कौन-सा कथन, थॉमसन के परमाणु मॉडल में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था का सटीक वर्णन करता है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )

सही उत्तर: इलेक्ट्रॉन धनात्मक आवेश वाले गोले में अंतःस्थापित होते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Atomic Model): वर्ष 1898 में जे. जे. थॉमसन ने परमाणु का पहला मॉडल प्रस्तुत किया था, जिसे ‘प्लम पुडिंग’ (Plum Pudding) या आमतौर पर ‘तरबूज मॉडल’ (Watermelon Model) भी कहा जाता है।
  • इस मॉडल के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसका द्रव्यमान पूरे गोले में समान रूप से वितरित रहता है, और ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन उस धनात्मक गोले में ठीक उसी तरह अंतःस्थापित (Embedded) रहते हैं जैसे तरबूज के अंदर उसके बीज धंसे होते हैं।
  • चूँकि कुल धनावेश, कुल ऋणावेश के बराबर होता है, इसलिए यह मॉडल परमाणु की विद्युतीय उदासीनता को सफलताપૂર્વક स्पष्ट करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं: यह रदरफोर्ड और बोर के परमाणु मॉडल की विशेषता है, थॉमसन की नहीं (थॉमसन के समय नाभिक की खोज नहीं हुई थी)।
  • इलेक्ट्रॉन केवल परमाणु के पृष्ठ पर या केंद्र में स्थित होते हैं: यह कथन वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत है; थॉमसन के अनुसार इलेक्ट्रॉन पूरे गोले के भीतर बिखरे/अंतःस्थापित होते हैं।

#28. किसी तत्व के समस्थानिकों में ________ की संख्या समान होती है।
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )

सही उत्तर: प्रोटॉन (Protons)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के ऐसे परमाणु होते हैं जिनमें प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) समान होती है, किंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने के कारण इनकी द्रव्यमान संख्या अलग-अलग होती है।
  • चूंकि प्रोटॉनों की संख्या समान होती है (और उदासीन अवस्था में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों के बराबर होती है), इसलिए इनके रासायनिक गुण लगभग एक समान होते हैं।
  • परंतु नाभिकीय स्तर पर इनकी मूल पहचान इनके प्रोटॉनों की निश्चित संख्या से ही तय होती है, जो उस तत्व का परमाणु क्रमांक दर्शाती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • न्यूट्रॉन: समस्थानिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है (यही कारण है कि उनकी द्रव्यमान संख्या बदल जाती है)।
  • नाभिक: नाभिक स्वयं प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का समुच्चय है, जो समस्थानिकों में अलग-अलग द्रव्यमान रखता है।
  • (नोट: उदासीन परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन समान होते हैं, किंतु विज्ञान और परीक्षा की दृष्टि से मूल परिभाषित कारक ‘प्रोटॉनों की संख्या’ है)।

#29. निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक ने ‘नियत अनुपात का नियम’ प्रतिपादित किया?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)

सही उत्तर: जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • नियत अनुपात का नियम (Law of Constant / Definite Proportions): इस नियम का प्रतिपादन फ्रांसीसी रसायनज्ञ जोसेफ प्राउस्ट द्वारा वर्ष 1799 में किया गया था।
  • इस नियम के अनुसार, “किसी भी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित (नियत) अनुपात में मौजूद होते हैं”, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या उसे किसी भी विधि से बनाया गया हो।
  • उदाहरण: जल ($\text{H}_2\text{O}$) चाहे आप किसी भी नदी, नल या समुद्र का लें, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा $1:8$ ही रहता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • अर्नेस्ट रदरफोर्ड: इन्होंने परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज की थी और अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किया था।
  • ई. गोल्डस्टीन: इन्होंने विसर्जन नली में कैनाल किरणों की खोज की थी जिससे आगे चलकर ‘प्रोटॉन’ की पहचान हुई।
  • जे. जे. थॉमसन: इन्होंने ‘इलेक्ट्रॉन’ की खोज की और परमाणु का प्लम-पुडिंग मॉडल प्रस्तुत किया था।

#30. आवर्त सारणी में, निम्नलिखित में से कौन सा गुण आमतौर पर एक अवधि में (बाएं से दाएं) बढ़ता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 29 Aug, 2025 Shift 2)

सही उत्तर: आयनिकीकरण एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आयनिकीकरण एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy / Ionization Energy): आवर्त सारणी में किसी आवर्त (Period) में जब हम बाएं से दाएं जाते हैं, तो परमाणु का आकार घटता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) बढ़ता है।
  • नाभिक का आकर्षण बल बढ़ने के कारण बाहरी कक्षा के इलेक्ट्रॉन को निकालना अधिक कठिन हो जाता है, जिसके लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर आयनिकीकरण एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • परमाणु त्रिज्या (Atomic radius): नाभिकीय खिंचाव बढ़ने के कारण बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है।
  • धात्विक लक्षण (Metallic character): तत्वों के धात्विक गुण बाएं से दाएं जाने पर घटते हैं (अधात्विक गुण बढ़ते हैं)।
  • अपचयन / अपचायक गुण (Reducing property): इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति कम होने के कारण अपचायक गुण बाएं से दाएं जाने पर घटता है (ऑक्सीकारक गुण बढ़ता है)।



#31. ________ की संख्या परमाणु के द्रव्यमान संख्या और परमाणु संख्या के अंतर के बराबर है।
(RRB JE 24 May 2019 Shift 1 CBT 1)

सही उत्तर: न्यूट्रॉन (Neutrons)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • न्यूट्रॉन (Neutrons): किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या (Mass Number) उसके नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या और न्यूट्रॉनों की संख्या के कुल योग के बराबर होती है।
  • चूँकि परमाणु संख्या (Atomic Number) प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है, इसलिए जब हम द्रव्यमान संख्या में से परमाणु संख्या को घटाते हैं, तो परिणाम स्वरूप हमें न्यूट्रॉनों की संख्या प्राप्त होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • प्रोटॉन (Protons): प्रोटॉनों की संख्या सीधे तौर पर परमाणु संख्या के बराबर होती है, न कि द्रव्यमान संख्या और परमाणु संख्या के अंतर के।
  • इलेक्ट्रॉन (Electrons): एक सामान्य (उदासीन) परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी उसकी परमाणु संख्या के बराबर होती है।
  • प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन दोनों: यह विकल्प गलत है क्योंकि द्रव्यमान संख्या और परमाणु संख्या का अंतर केवल न्यूट्रॉनों की संख्या को दर्शाता है।

#32. विलयन में एक प्रबल अम्ल ________ है।
(RRB JE CBT-I : 28 June 2019 Shift 3)

सही उत्तर: अधिकतर आयन (Mostly ions)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • प्रबल अम्ल (Strong Acid): वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूरी तरह से (या लगभग 100%) वियोजित (dissociate) होकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) और संगत ऋणायन बनाते हैं, प्रबल अम्ल कहलाते हैं।
  • पूर्ण आयनीकरण के कारण विलयन में मूल अम्ल के अणु बहुत कम बचते हैं और इसके स्थान पर अधिकतर आयन ही मौजूद होते हैं (जैसे $\text{HCl}$ का पानी में पूरी तरह $\text{H}^+$ और $\text{Cl}^-$ में टूट जाना)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • अधिकतर अणु (Mostly molecules): यह स्थिति दुर्बल अम्लों (Weak Acids) में होती है, जो जल में आंशिक रूप से आयनित होते हैं और अधिकतर अणु के रूप में ही बने रहते हैं।
  • अणु और आयन दोनों: यह भी दुर्बल अम्लों की विशेषता है जहाँ विलयन में अणु और आयन दोनों पर्याप्त मात्रा में उपस्थित होते हैं।
  • अधिकतर जल: यह विकल्प विलयन के विलायक (Water) को दर्शाता है, न कि विलीन किए गए प्रबल अम्ल की आंतरिक संरचना को।

#33. निम्नलिखित में से कौन सा भौतिक विज्ञानी प्राकृतिक रेडियोधर्मिता पर अपने अभूतपूर्व शोध के लिए प्रसिद्ध है?
(RPF Constable 2024 02 Mar, 2025 Shift 3)

सही उत्तर: मैरी क्यूरी (Marie Curie)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • मैरी क्यूरी (Marie Curie): मैरी क्यूरी एक प्रसिद्ध भौतिकी और रसायन विज्ञानी थीं, जिन्हें प्राकृतिक रेडियोधर्मिता (Natural Radioactivity) पर उनके अभूतपूर्व शोध के लिए जाना जाता है।
  • उन्होंने ही ‘रेडियोधर्मिता’ (Radioactivity) शब्द को प्रतिपादित किया और अपने पति पियरे क्यूरी के साथ मिलकर पोलोनियम तथा रेडियम जैसे रेडियोधर्मी तत्वों की खोज की। इस क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें दो बार (भौतिकी और रसायन विज्ञान में) नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • नील्स बोर (Niels Bohr): यह परमाणु की संरचना और क्वांटम थ्योरी पर आधारित ‘बोर परमाणु मॉडल’ (Bohr Model of Atom) के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • जे जे थॉमसन (J.J. Thomson): इन्हें इलेक्ट्रॉन की खोज (Discovery of Electron) और परमाणु के ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ के लिए जाना जाता है।
  • एनरिको फर्मी (Enrico Fermi): इन्हें पहले परमाणु रिएक्टर के निर्माण और न्यूट्रॉन बमबारी द्वारा कृत्रिम रेडियोधर्मिता पर कार्य करने के लिए जाना जाता है।

#34. जब किसी तत्व का बाह्यतम कोश लगभग भरा हो, तो उस तत्व की संयोजकता कैसे निर्धारित की जाती है?
(RRB ALP CBT 1 11/03/2026 )

सही उत्तर: अष्टक को पूरा करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की संख्या से

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संयोजकता (Valency) और बाह्यतम कोश: जब किसी तत्व के बाह्यतम (valence) कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 4 से अधिक होती है (यानी कोश लगभग भरा होता है जैसे 5, 6 या 7 इलेक्ट्रॉन), तब उसकी संयोजकता निकालने के लिए 8 में से बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या को घटाया जाता है।
  • यानी, अपने अष्टक (Octet) को पूरा करने के लिए परमाणु जितने इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण या साझा करता है, वही उसकी संयोजकता कहलाती है (जैसे हैलोजन तत्वों के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, तो उनका अष्टक पूरा करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉन = $8 – 7 = 1$)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • नाभिक में मौजूद न्यूट्रॉनों की कुल संख्या से: न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में होते हैं और इनका रासायनिक बंधन या संयोजकता से सीधा संबंध नहीं होता।
  • परमाणु के कुल द्रव्यमान से: परमाणु द्रव्यमान (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) रासायनिक प्रतिक्रियाओं और संयोजकता को निर्धारित नहीं करता।
  • नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की कुल संख्या से: प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) से इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का पता चलता है, लेकिन जब बाह्यतम कोश लगभग भरा होता है, तो संयोजकता सीधे तौर पर अष्टक पूरा करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित की जाती है।

#35. निम्नलिखित में से कौन-सा, प्रोटॉन के गुणों का सही वर्णन करता है?
(RRB ALP CBT 1 18/02/2026 )

सही उत्तर: यह धनात्मक रूप से आवेशित होता है और इसका द्रव्यमान, इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का लगभग 2000 गुना होता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • प्रोटॉन (Proton) के गुण: प्रोटॉन एक धनात्मक रूप से आवेशित (Positively charged) कण है, जो परमाणु के नाभिक के अंदर न्यूट्रॉन के साथ रहता है।
  • प्रोटॉन का द्रव्यमान लगभग $1.673 \times 10^{-27}$ किग्रा होता है, जो कि एक इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का लगभग 1836 गुना (या व्यावहारिक रूप से लगभग 2000 गुना) अधिक होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इसका कोई आवेश नहीं होता है और यह नाभिक में उपस्थित होता है: यह विशेषता ‘न्यूट्रॉन’ की है, प्रोटॉन की नहीं।
  • यह ऋणात्मक रूप से आवेशित होता है और नाभिक के अंदर स्थित होता है: ऋणात्मक आवेशित कण इलेक्ट्रॉन होता है, और वह नाभिक के बाहर कक्षाओं में चक्कर लगाता है।
  • इसका धनात्मक आवेश होता है और इसका द्रव्यमान, इलेक्ट्रॉन के बराबर होता है: प्रोटॉन पर धनात्मक आवेश तो होता है, लेकिन इसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के बराबर नहीं बल्कि उससे लगभग 2000 गुना अधिक होता है।



#36. यदि थॉमसन के मॉडल को बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओ के स्थायित्व की व्याख्या करने के लिए लागू किया जाता है, तो कौन-सा प्रमुख भ्रंश ( flaw) उत्पन्न होता है?
(Not found 11/03/2026 4 )

सही उत्तर: परमाणु स्थायित्व और रेखा वर्णक्रम की व्याख्या करने में विफल रहता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Model): जे.जे. थॉमसन के प्लम पुडिंग मॉडल के अनुसार, परमाणु एक धनात्मक गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन धंसे होते हैं।
  • जब इस मॉडल को बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं पर लागू किया गया, तो यह स्थिर वैद्युत बलों के आधार पर परमाणु के वास्तविक स्थायित्व और उत्सर्जित होने वाले रेखा वर्णक्रम (Line Spectrum) की सही और सटीक व्याख्या करने में पूरी तरह विफल रहा।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉन निश्चित वृतीय कक्षाओं में घूमते हैं: यह अवधारणा रदरफोर्ड और बोर के मॉडल से संबंधित है, थॉमसन के मॉडल में इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में नहीं घूमते थे।
  • इलेक्ट्रॉन घूर्णन करते समय सतत रूप से ऊर्जा खोते हैं: यह रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल का मुख्य दोष (Flaw) था, न कि थॉमसन के मॉडल का।
  • धनात्मक आवेश नाभिक पर संकेंद्रित होता है: यह रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा खोजा गया था, जबकि थॉमसन के अनुसार धनात्मक आवेश पूरे गोले में समान रूप से फैला होता है।

#37. ग्रेफाइट में, कार्बन परमाणु ________ के साथ जुड़ा होता है?
(RRB JE 19/02/2026 )

सही उत्तर: तीन अन्य कार्बन परमाणु (Three other carbon atoms)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ग्रेफाइट की संरचना (Structure of Graphite): ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित (hybridised) होता है।
  • इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु सहसंयोजक बंध (covalent bond) द्वारा अपने ही तल के तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे षट्कोणीय (hexagonal) वलय की परतें बनती हैं। इसका चौथा इलेक्ट्रॉन मुक्त (free electron) रहता है, जो इसे विद्युत का सुचालक बनाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • चार अन्य कार्बन परमाणु: यह हीरे (Diamond) की संरचना की विशेषता है, जहाँ प्रत्येक कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरण के तहत 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से tetrahedral रूप से जुड़ा होता है।
  • एक या दो अन्य कार्बन परमाणु: यह विकल्प गलत है क्योंकि ग्रेफाइट में कार्बन की ज्यामितीय व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक कार्बन ठीक 3 अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है।

#38. किसी तत्व के अणुओं के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )

सही उत्तर: किसी तत्व के अणु में केवल एक ही प्रकार के परमाणु आपस में आबंधित होते हैं।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • तत्व का अणु (Molecule of an Element): किसी तत्व का अणु एक ही प्रकार के परमाणुओं (Same type of atoms) से मिलकर बना होता है। उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन का अणु ($\text{O}_2$) केवल ऑक्सीजन के दो परमाणुओं से मिलकर बनता है।
  • इन्हें समपरमाणुक (Homoatomic) अणु भी कहा जाता है, क्योंकि इनमें अलग-अलग तत्वों के परमाणु आपस में नहीं जुड़े होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • किसी तत्व के अणु में हमेशा दो या दो से अधिक भिन्न प्रकार के परमाणु होते हैं: यह कथन ‘यौगिक (Compound)’ के अणु के लिए सही है (जैसे $\text{H}_2\text{O}$ में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों भिन्न परमाणु होते हैं), तत्व के लिए नहीं।
  • सभी तत्व अपनी प्राकृतिक अवस्था में एकपरमाणुक अणु के रूप में मौजूद होते हैं: यह गलत है क्योंकि कई तत्व द्विपरमाणुक ($\text{H}_2, \text{O}_2, \text{N}_2$) या बहुपरमाणुक ($\text{P}_4, \text{S}_8$) रूप में पाए जाते हैं।
  • तत्व अणु नहीं बनाते, केवल यौगिक अणु बनाते हैं: यह कथन पूरी तरह गलत है, क्योंकि अधिकांश अधातु तत्व अपनी प्राकृतिक अवस्था में अणुओं के रूप में ही अस्तित्व में रहते हैं।

#39. उत्तल दर्पण में, प्रतिबिंब दूरी सदैव ________ होती है।
(Not found 11/03/2026 )

सही उत्तर: धनात्मक (Positive)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • उत्तल दर्पण (Convex Mirror): उत्तल दर्पण द्वारा हमेशा आभासी (virtual) और सीधा (erect) प्रतिबिंब बनता है, जो कि दर्पण के पीछे (ध्रुव और फोकस के बीच) स्थित होता है।
  • गोलीय दर्पण की चिन्ह परिपाटी (Sign Convention) के अनुसार, आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ (यानी दर्पण के पीछे की ओर) धनात्मक (+ve) होती हैं। चूँकि उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे बनता है, इसलिए प्रतिबिंब दूरी ($v$) सदैव धनात्मक होती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • ऋणात्मक (Negative): वस्तु की दूरी ($u$) और अवतल दर्पण के वास्तविक प्रतिबिंब की दूरी ऋणात्मक होती है, न कि उत्तल दर्पण के प्रतिबिंब की।
  • शून्य (Zero): प्रतिबिंब दूरी शून्य नहीं हो सकती क्योंकि वस्तु दर्पण के सामने रखी जाती है और प्रतिबिंब पीछे बनता है।
  • अनंत (Infinite): अनंत तब होता है जब वस्तु की स्थिति के आधार पर प्रतिबिंब फोकस पर बने, न कि संपूर्ण प्रतिबिंब दूरी सदैव अनंत हो।

#40. कौन-सी गणना नाइट्रिक अम्ल ( HNO 3) के आणविक द्रव्यमान को सही से बताती है?
(RRB JE 19/02/2026 )

सही उत्तर: (A) 1 + 14 + 48

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आणविक द्रव्यमान की गणना (Molecular Mass Calculation): नाइट्रिक अम्ल का रासायनिक सूत्र $\text{HNO}_3$ होता है। इसमें तीन अलग-अलग तत्व (हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन) शामिल हैं।
  • विभिन्न तत्वों के परमाणु द्रव्यमान इस प्रकार हैं:

    • हाइड्रोजन (H) का परमाणु द्रव्यमान = $1$ (यहाँ 1 परमाणु है $\rightarrow 1 \times 1 = 1$)
    • नाइट्रोजन (N) का परमाणु द्रव्यमान = $14$ (यहाँ 1 परमाणु है $\rightarrow 1 \times 14 = 14$)
    • ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान = $16$ (यहाँ 3 परमाणु हैं $\rightarrow 3 \times 16 = 48$)
  • अतः कुल आणविक द्रव्यमान की सही गणना $1 + 14 + 48 = 63 \text{ u}$ होगी।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) 1 + 14 + 3: इसमें ऑक्सीजन के परमाणु द्रव्यमान (16) से गुणा करने के बजाय केवल परमाणुओं की संख्या (3) को जोड़ दिया गया है, जो गलत है।
  • (C) 2 + 14 + 48: इसमें हाइड्रोजन के परमाणुओं की संख्या 2 मान ली गई है, जबकि $\text{HNO}_3$ में केवल 1 हाइड्रोजन परमाणु होता है।
  • (D) 1 + 14 + 16: इसमें ऑक्सीजन के केवल एक ही परमाणु का द्रव्यमान जोड़ा गया है, जबकि सूत्र में ऑक्सीजन के 3 परमाणु ($\text{O}_3$) मौजूद हैं।



#41. रसायन विज्ञान में आयन क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )

सही उत्तर: एक आवेशित परमाणु या अणु (A charged atom or molecule)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आयन (Ion): जब कोई परमाणु या परमाणुओं का समूह (अणु) इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है या उनका त्याग करता है, तब उस पर नेट विद्युत आवेश (Net electrical charge) आ जाता है। ऐसे आवेशित कण को ही आयन कहा जाता है।
  • आयन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

    • धनायन (Cation): इलेक्ट्रॉन के त्याग से बनने वाला धनात्मक आवेशित आयन (जैसे $\text{Na}^+$)।
    • ऋणायन (Anion): इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करने से बनने वाला ऋणात्मक आवेशित आयन (जैसे $\text{Cl}^-$)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • केवल न्यूट्रॉन वाला एक परमाणु: न्यूट्रॉन आवेशहीन कण हैं और केवल न्यूट्रॉन से बने परमाणु का कोई अस्तित्व नहीं होता।
  • एक रेडियोसक्रिय स्थिर कण: आयन का रेडियोधर्मिता या स्थिरता से कोई सीधा अनिवार्य संबंध नहीं है; यह एक सामान्य रासायनिक रूप से आवेशित प्रजाति है।
  • परमाणु का एक उदासीन अणु: उदासीन कण पर कोई आवेश नहीं होता, जबकि आयन की मुख्य विशेषता ही उसका ‘आवेशित’ होना है।

#42. थॉमसन के परमाणु मॉडल के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )

सही उत्तर: इलेक्ट्रॉन धनात्मक आवेशित गोले में यादृच्छिक रूप से प्रसारित होते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Atomic Model): जे.जे. थॉमसन द्वारा प्रस्तुत इस मॉडल को ‘प्लम पुडिंग’ या ‘तरबूज मॉडल’ (Watermelon Model) भी कहा जाता है।
  • इस मॉडल के अनुसार, परमाणु एक धनात्मक आवेशित गोला होता है जिसमें ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन ठीक उसी तरह धंसे या प्रसारित होते हैं जैसे तरबूज के अंदर लाल भाग में बीज धंसे होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • इलेक्ट्रॉन नाभिक में संकेंद्रित होते हैं: थॉमसन के मॉडल में ‘नाभिक’ (Nucleus) की कोई अवधारणा नहीं थी; नाभिक की खोज बाद में रदरफोर्ड ने की थी।
  • इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉनों से संलग्न होते हैं: न्यूट्रॉन की खोज बहुत बाद में हुई थी और थॉमसन के समय इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
  • इलेक्ट्रॉन कक्षाओं में स्थिर होते हैं: निश्चित कक्षाओं में घूमने की अवधारणा रदरफोर्ड और बोर के परमाणु मॉडल से संबंधित है।

#43. एक आवेश वाले तीन से अधिक परमाणुओं के समूह को ________ आयन के रूप में जाना जाता है।
(RRB JE 25 May 2019 Shift 3 CBT 1)

सही उत्तर: बहुपरमाणुक (Polyatomic)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • बहुपरमाणुक आयन (Polyatomic Ion): जब दो या दो से अधिक (या तीन से अधिक) परमाणु आपस में बंध बनाकर एक साथ रहते हैं और पूरे समूह पर एक निश्चित नेट आवेश (Charge) होता है, तो ऐसे रासायनिक समूह को बहुपरमाणुक आयन कहा जाता है।
  • इसके प्रमुख उदाहरण अमोनियम आयन ($\text{NH}_4^+$), नाइट्रेट आयन ($\text{NO}_3^-$) और कार्बोनेट आयन ($\text{CO}_3^{2-}$) हैं, जिनमें कई परमाणु मिलकर एक एकल आवेशित इकाई की तरह व्यवहार करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • त्रिपरमाणुक (Triatomic): यह उन अणुओं या स्पीशीज को कहते हैं जिनमें केवल 3 परमाणु होते हैं (जैसे $\text{H}_2\text{O}, \text{CO}_2$)।
  • एकपरमाणुक (Monoatomic): यह केवल एक ही परमाणु से बने कण होते हैं (जैसे $\text{Na}^+, \text{He}$)।
  • द्विपरमाणुक (Diatomic): यह दो परमाणुओं से मिलकर बने अणु या आयन होते हैं (जैसे $\text{O}_2, \text{HCl}$)।

सही उत्तर: बहुपरमाणुक (Polyatomic)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • बहुपरमाणुक आयन (Polyatomic Ion): जब दो या दो से अधिक (या तीन से अधिक) परमाणु आपस में बंध बनाकर एक साथ रहते हैं और पूरे समूह पर एक निश्चित नेट आवेश (Charge) होता है, तो ऐसे रासायनिक समूह को बहुपरमाणुक आयन कहा जाता है।
  • इसके प्रमुख उदाहरण अमोनियम आयन ($\text{NH}_4^+$), नाइट्रेट आयन ($\text{NO}_3^-$) और कार्बोनेट आयन ($\text{CO}_3^{2-}$) हैं, जिनमें कई परमाणु मिलकर एक एकल आवेशित इकाई की तरह व्यवहार करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • त्रिपरमाणुक (Triatomic): यह उन अणुओं या स्पीशीज को कहते हैं जिनमें केवल 3 परमाणु होते हैं (जैसे $\text{H}_2\text{O}, \text{CO}_2$)।
  • एकपरमाणुक (Monoatomic): यह केवल एक ही परमाणु से बने कण होते हैं (जैसे $\text{Na}^+, \text{He}$)।
  • द्विपरमाणुक (Diatomic): यह दो परमाणुओं से मिलकर बने अणु या आयन होते हैं (जैसे $\text{O}_2, \text{HCl}$)।

#44. डाल्टन के परमाणुवाद की कौन सी अभिधारणा द्रव्यमान संरक्षण के नियम का परिणाम है?
(RRB JE 28 May 2019 Shift 2 CBT 1)

सही उत्तर: परमाणु अविभाज्य कण हैं, जिन्हें रासायनिक प्रतिक्रिया में बनाया या नष्ट नहीं किया जा सकता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत और द्रव्यमान संरक्षण: जॉन डाल्टन ने अपने परमाणु सिद्धांत में यह बताया कि परमाणु अविभाज्य कण होते हैं और किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में इन्हें न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  • यही अभिधारणा सीधे तौर पर द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) का परिणाम है, क्योंकि रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान कुल द्रव्यमान संरक्षित रहता है क्योंकि परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित (rearrange) होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • सभी पदार्थ परमाणु नामक बहुत छोटे कणों से बने होते हैं…: यह कथन पदार्थ की मूलभूत संरचना को बताता है, लेकिन यह सीधे तौर पर द्रव्यमान संरक्षण के नियम की व्याख्या नहीं करता।
  • किसी दिए गए तत्व के परमाणु, द्रव्यमान और रासायनिक गुणों में समान होते हैं: यह एक ही तत्व के परमाणुओं की समानता को दर्शाता है।
  • विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान और रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं: यह विभिन्न तत्वों के बीच के गुणों के अंतर को स्पष्ट करता है, न कि द्रव्यमान संरक्षण के नियम को।

#45. रदरफोर्ड स्वर्ण पन्नी प्रयोग ने ________ की उपस्थिति स्थापित की।
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )

सही उत्तर: नाभिक (Nucleus)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • रदरफोर्ड का स्वर्ण पन्नी प्रयोग (Gold Foil Experiment): अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा ($\alpha$) कणों की बौछार की थी। इस प्रयोग में अधिकांश कण सीधे निकल गए, कुछ छोटे कोणों पर विक्षेपित हुए और बहुत कम कण (लगभग 12,000 में से 1) अपने मार्ग पर वापस लौट आए।
  • इस अवलोकन के आधार पर रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला होता है और इसके केंद्र में एक बहुत ही छोटा, सघन तथा धनात्मक आवेशित भाग उपस्थित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • न्यूट्रॉन (Neutron): न्यूट्रॉन की खोज बाद में वर्ष 1932 में जेम्स चैडविक (James Chadwick) द्वारा की गई थी।
  • इलेक्ट्रॉन (Electron): इलेक्ट्रॉन की खोज जे.जे. थॉमसन (J.J. Thomson) द्वारा कैथोड किरणों पर अध्ययन के दौरान की गई थी।
  • प्रोटॉन (Proton): हालांकि प्रोटॉन की खोज और नामकरण में रदरफोर्ड का योगदान रहा है, लेकिन ‘स्वर्ण पन्नी प्रयोग’ मुख्य रूप से परमाणु के केंद्र में नाभिक के अस्तित्व को स्थापित करने के लिए किया गया था।



#46. गोटिर के उपचार में किसका प्रयोग किया जाता है?
(RPF Constable 2018 04 Feb 2019)

सही उत्तर: आयोडीन समस्थानिक (Iodine isotope)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गोटिर (घेंघा रोग) और आयोडीन: गोटिर थायरॉयड ग्रंथि से जुड़ी एक बीमारी है जो शरीर में आयोडीन की कमी के कारण होती है।
  • थायरॉयड ग्रंथि के विकारों, गोटिर और थायरॉयड कैंसर के उपचार में आयोडीन के रेडियोएक्टिव समस्थानिक (मुख्य रूप से आयोडीन-131 / $\text{I-131}$) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि थायरॉयड ग्रंथि स्वाभाविक रूप से आयोडीन को अवशोषित करती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • कोबाल्ट समस्थानिक: कोबाल्ट-60 ($\text{Co-60}$) का उपयोग कैंसर (ट्यूमर) के इलाज के लिए रेडियोथेरेपी में किया जाता है।
  • यूरेनियम के समस्थानिक: यूरेनियम-235 का उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (Nuclear Reactors) में ईंधन के रूप में किया जाता है।
  • प्लूटोनियम के समस्थानिक: प्लूटोनियम-239 का उपयोग मुख्य रूप से परमाणु हथियारों और अंतरिक्ष अनुसंधान में ऊर्जा स्रोत के रूप में होता है।

#47. CaCl 2 का सूत्र इकाई द्रव्यमान है:
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 2)

सही उत्तर: 111u

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सूत्र इकाई द्रव्यमान ($\text{CaCl}_2$): कैल्शियम क्लोराइड ($\text{CaCl}_2$) का सूत्र इकाई द्रव्यमान निकालने के लिए इसमें उपस्थित प्रत्येक घटक आयन या परमाणु के द्रव्यमान को जोड़ा जाता है।
  • विभिन्न तत्वों के परमाणु द्रव्यमान इस प्रकार हैं:

    • कैल्शियम (Ca) का परमाणु द्रव्यमान = $40 \text{ u}$
    • क्लोरीन (Cl) का परमाणु द्रव्यमान = $35.5 \text{ u}$ (चूँकि सूत्र में 2 क्लोरीन परमाणु हैं, अतः $2 \times 35.5 = 71 \text{ u}$)
  • अतः कुल सूत्र इकाई द्रव्यमान = $40 + 71 =$ $111 \text{ u}$ होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • 110u, 114u और 115u: ये सभी मान गलत गणना, जोड़ या परमाणु भार के गलत मान (जैसे क्लोरीन का भार 35 या अन्य मानने) के कारण आते हैं, इसलिए ये विकल्प अमान्य हैं।

#48. निम्नलिखित में से सोडियम का सही परमाणु द्रव्यमान इकाई क्या है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 3)

सही उत्तर: 23 u

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सोडियम का परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass of Sodium): सोडियम (Na) एक क्षार धातु है जिसका प्रतीक Na होता है। इसका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 11 है।
  • इसके परमाणु में 11 प्रोटॉन और सामान्यतः 12 न्यूट्रॉन होते हैं, जिससे इसका कुल परमाणु द्रव्यमान लगभग 23 u (एटोमिक मास यूनिट) होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • 11 u: यह सोडियम का परमाणु क्रमांक (Atomic Number) यानी प्रोटॉनों की संख्या है, न कि इसका परमाणु द्रव्यमान।
  • 18 u और 20 u: ये मान सोडियम के लिए गलत हैं (जैसे 20 के करीब कैल्शियम का परमाणु भार होता है)।

#49. बोर-वेल पद्धति के अनुसार, एक परमाणु में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं?
(RPF Constable 2018 22 Jan 2019 Shift 2)

सही उत्तर: अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन (Maximum 8 electrons)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • बोर-बरी योजना (Bohr-Bury Scheme): बोर और बरी के नियमों के अनुसार, किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश (Valence Shell) में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, भले ही उस कोश की सैद्धांतिक या ज्यामितीय क्षमता (सूत्र $2n^2$ के अनुसार) उससे अधिक क्यों न हो।
  • इसे अष्टक नियम (Octet Rule) भी कहा जाता है, जिसके तहत परमाणु अपने बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन पूरा करके स्थायित्व (Stability) प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन: यह केवल पहले कोश (K-कोश) की अधिकतम क्षमता है, न कि सबसे बाहरी कोश का सामान्य नियम (डुप्लेट नियम केवल हीलियम/हाइड्रोजन तक सीमित है)।
  • अधिकतम 4 और 12 इलेक्ट्रॉन: बोर-बरी योजना या $2n^2$ के नियमों के अनुसार किसी भी मुख्य ऊर्जा स्तर की क्षमता के रूप में 4 या 12 की संख्या मान्य नहीं है (कोशों की क्षमताएँ 2, 8, 18, 32 होती हैं और बाहरी कोश की सीमा अधिकतम 8 होती है)।

#50. निम्नलिखित में से वैज्ञानिकों में से किसे आधुनिक आवर्त नियम के विकास का श्रेय दिया जाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 03 Sept, 2025 Shift 3)

सही उत्तर: दिमित्री मेंडीलीव (Dmitri Mendeleev)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • दिमित्री मेंडीलीव (Dmitri Mendeleev): रूसी रसायन विज्ञानी दिमित्री मेंडीलीव को आवर्त सारणी और आवर्त नियम के विकास का प्रमुख श्रेय दिया जाता है। उन्होंने तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन के रूप में व्यवस्थित करते हुए पहली व्यापक आवर्त सारणी प्रस्तुत की थी।
  • हालाँकि आधुनिक आवर्त नियम बाद में हेनरी मोजले द्वारा परमाणु क्रमांक पर आधारित प्रतिपादित किया गया था, लेकिन दिए गए विकल्पों में आवर्त नियम की नींव रखने और इसके प्रारंभिक विकास का श्रेय मेंडीलीव को जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford): इन्हें परमाणु के नाभिक (Nucleus) की खोज और अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के लिए जाना जाता है।
  • जॉन डाल्टन (John Dalton): इन्हें रासायनिक संयोजन के नियमों और आधुनिक परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) के प्रतिपादन के लिए जाना जाता है।
  • जे.जे. थॉमसन (J.J. Thomson): इन्हें इलेक्ट्रॉन की खोज और परमाणु के ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ के लिए जाना जाता है।



#51. आणविक द्रव्यमान की गणना कैसे की जाती है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )

सही उत्तर: अणु में परमाणुओं के सभी परमाणु द्रव्यमानों को जोड़कर

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass): किसी पदार्थ का आणविक द्रव्यमान उस अणु में उपस्थित सभी घटक परमाणुओं के व्यक्तिगत परमाणु द्रव्यमानों (Atomic Masses) के कुल योग के बराबर होता है।
  • इसे परमाणु द्रव्यमान इकाई ($\text{u}$) में मापा जाता है। उदाहरण के लिए, जल ($\text{H}_2\text{O}$) का आणविक द्रव्यमान निकालने के लिए दो हाइड्रोजन परमाणुओं और एक ऑक्सीजन परमाणु के द्रव्यमान को आपस में जोड़ा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • उपस्थित परमाणुओं के सभी परमाणु आयनों को जोड़कर: आणविक द्रव्यमान की गणना आयनों के आवेश या योग से नहीं बल्कि उनके परमाणु द्रव्यमान से की जाती है।
  • सभी तत्वों के परमाणु क्रमांकों का वर्ग करके: परमाणु क्रमांकों के वर्ग का आणविक द्रव्यमान की गणना से कोई संबंध नहीं है।
  • घटक तत्वों की परमाणु त्रिज्याओं को गुणा करके: परमाणु त्रिज्याओं का उपयोग द्रव्यमान निकालने के लिए नहीं किया जाता है।
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⚛️ परमाणु संरचना — Railway Quiz

परमाणु संरचना प्रश्न उत्तर