परमाणु संरचना Railway PYQ
#1. Na2SO4 का परिकलित सूत्र एकांक द्रव्यमान ( calculated formula unit mass) कितना होता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
- सूत्र एकांक द्रव्यमान (Formula Unit Mass): किसी भी यौगिक का सूत्र एकांक द्रव्यमान उसके रासायनिक सूत्र में मौजूद सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों (Atomic masses) का कुल योग होता है।
- Na₂SO₄ (सोडियम सल्फेट) की गणना:
• सोडियम (Na) का परमाणु द्रव्यमान = 23 u (यौगिक में 2 परमाणु हैं)
• सल्फर (S) का परमाणु द्रव्यमान = 32 u (यौगिक में 1 परमाणु है)
• ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान = 16 u (यौगिक में 4 परमाणु हैं)कुल द्रव्यमान = (2 × 23) + (1 × 32) + (4 × 16)
= 46 + 32 + 64
= 142 u
- 140 u, 146 u, 148 u: चूँकि यह एक संख्यात्मक (Numerical) गणना पर आधारित प्रश्न है, इसलिए बाकी सभी विकल्प केवल भ्रमित (Distract) करने के लिए दिए गए गलत मान हैं। परमाणुओं के द्रव्यमान निश्चित होते हैं, इसलिए सही उत्तर केवल 142 u ही हो सकता है।
#2. समदाबीय (Isobars), वे परमाणु होते हैं जिनका ________ ।
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- समदाबीय / समभारिक (Isobars): अलग-अलग तत्वों के वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या (Mass number) समान होती है, लेकिन उनका परमाणु क्रमांक (Atomic number) भिन्न होता है, समभारिक या समदाबीय कहलाते हैं।
- उदाहरण: आर्गन (₁₈Ar⁴⁰) और कैल्शियम (₂₀Ca⁴⁰)। यहाँ आर्गन का परमाणु क्रमांक 18 और कैल्शियम का 20 है, लेकिन दोनों का द्रव्यमान 40 है। इसलिए ये एक-दूसरे के समभारिक हैं।
- परमाणु क्रमांक समान होता है लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होता है: यह परिभाषा समस्थानिकों (Isotopes) की है। जैसे- कार्बन-12 और कार्बन-14 समस्थानिक हैं, समदाबीय नहीं।
- गलनांक (Melting point) और अपवर्तनांक (Refractive index) वाले विकल्प: ये भौतिक गुण हैं। समभारिक या समस्थानिक की परिभाषा पूरी तरह से परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या पर आधारित होती है, भौतिक गुणों पर नहीं। इसलिए ये विकल्प असंगत हैं।
#3. निम्नलिखित में से किस वैज्ञानिक ने स्वर्ण पत्री प्रयोग के परिणामों के आधार पर परमाणु के नाभिकीय मॉडल का प्रस्ताव रखा था?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 18/03/2026 )
- स्वर्ण पत्री प्रयोग (Gold Foil Experiment): अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने 1911 में अपने प्रसिद्ध ‘अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग’ (Alpha particle scattering experiment) में सोने की एक बहुत पतली पन्नी पर उच्च ऊर्जा वाले अल्फा कणों की बौछार की थी।
- नाभिकीय मॉडल (Nuclear Model): इस प्रयोग के परिणामों के आधार पर रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है और इसका संपूर्ण धनावेश (positive charge) तथा लगभग पूरा द्रव्यमान इसके केंद्र में एक बहुत छोटे से हिस्से में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है। इसलिए रदरफोर्ड को ‘नाभिकीय भौतिकी का जनक’ भी माना जाता है।
- जॉन डाल्टन (John Dalton): इन्होंने 1808 में ‘परमाणु सिद्धांत’ (Atomic Theory) दिया था, जिसके अनुसार सभी पदार्थ छोटे-छोटे अविभाज्य कणों से बने होते हैं जिन्हें परमाणु कहते हैं।
- नील्स बोर (Niels Bohr): इन्होंने 1913 में रदरफोर्ड के मॉडल की कमियों को दूर करते हुए यह बताया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित कक्षाओं (Discrete Energy Orbits) में ही चक्कर लगाते हैं।
- जे. जे. थॉमसन (J.J. Thomson): इन्होंने 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की थी और परमाणु का ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ (तरबूज मॉडल) प्रस्तुत किया था, जिसे बाद में रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्री प्रयोग ने गलत साबित कर दिया था।
#4. स्पाइरोगायरा में प्रजनन की विधि बताइए।
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2)
- स्पाइरोगायरा (Spirogyra): यह एक प्रकार का हरा शैवाल (Green Algae) है जो मुख्य रूप से ताजे पानी (तालाबों, झीलों) में पाया जाता है। इसकी संरचना धागेनुमा (Filamentous) होती है।
- विखंडन (Fragmentation): स्पाइरोगायरा में अलैंगिक प्रजनन मुख्य रूप से विखंडन विधि द्वारा होता है। जब यह जीव पूर्ण रूप से परिपक्व (mature) हो जाता है, तो इसका धागेनुमा शरीर दो या दो से अधिक टुकड़ों (खंडों) में टूट जाता है।
- टूटने के बाद, प्रत्येक नया टुकड़ा कोशिका विभाजन द्वारा वृद्धि करता है और एक स्वतंत्र एवं पूर्ण स्पाइरोगायरा के रूप में विकसित हो जाता है।
- मुकुलन (Budding): इस प्रजनन विधि में जीव के शरीर से एक उभार (Bud) निकलता है जो बाद में मूल शरीर से अलग होकर नया जीव बन जाता है। इसका मुख्य उदाहरण यीस्ट (Yeast) और हाइड्रा (Hydra) हैं।
- द्वि खंडन (Binary Fission): इसमें एक कोशिका विभाजित होकर दो समान भागों (संतति कोशिकाओं) में बंट जाती है। यह मुख्य रूप से अमीबा (Amoeba) और पैरामीशियम (Paramecium) में होता है।
- बहु खंडन (Multiple Fission): इसमें एक कोशिका एक ही समय में कई संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है। यह प्लाज्मोडियम (Plasmodium – मलेरिया परजीवी) में देखा जाता है।
#5. ऑक्सीजन अणु एक ________ है।
(RRB ALP CBT-I 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 2)
- ऑक्सीजन अणु (Oxygen Molecule): प्रकृति में ऑक्सीजन गैस मुख्य रूप से दो ऑक्सीजन परमाणुओं (O) के आपस में रासायनिक रूप से जुड़ने से बनती है। इसका रासायनिक सूत्र O₂ होता है।
- द्विपरमाणुक (Diatomic): ऐसे अणु जो एक ही या अलग-अलग तत्वों के केवल दो परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं, उन्हें द्विपरमाणुक अणु कहा जाता है। चूँकि O₂ में दो परमाणु होते हैं, इसलिए यह एक द्विपरमाणुक अणु है।
- अन्य उदाहरण: हाइड्रोजन (H₂), नाइट्रोजन (N₂), और क्लोरीन (Cl₂) भी द्विपरमाणुक गैसों के ही उदाहरण हैं।
- त्रिपरमाणुक अणु (Triatomic molecule): ये तीन परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं। उदाहरण: ओजोन (O₃) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)।
- चतुष्परमाणुक अणु (Tetratomic molecule): ये चार परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं। उदाहरण: फॉस्फोरस (P₄)। (सल्फर S₈ बहुपरमाणुक का उदाहरण है)।
- एकपरमाणुक अणु (Monoatomic molecule): ये वे तत्व होते हैं जो स्वतंत्र अवस्था में केवल एक परमाणु के रूप में रहते हैं। सभी अक्रिय गैसें (Noble gases) जैसे हीलियम (He), नियॉन (Ne), और आर्गन (Ar) इसके उदाहरण हैं।
#6. अपचयन अभिक्रिया क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
- अपचयन (Reduction): आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत के अनुसार, वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें कोई परमाणु, आयन या अणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (लब्धि होती है), उसे अपचयन अभिक्रिया कहते हैं।
- याद रखने की ट्रिक: इसे अंग्रेजी में RIG (Reduction Is Gain) के रूप में याद रखा जा सकता है, जिसका अर्थ है इलेक्ट्रॉनों का जुड़ना।
- अन्य परिभाषाएँ: पुरानी अवधारणा के अनुसार, किसी पदार्थ में हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का बाहर निकलना भी अपचयन कहलाता है।
- इलेक्ट्रॉनों की हानि (Loss of electrons): यह उपचयन या ऑक्सीकरण (Oxidation) की परिभाषा है। इसे OIL (Oxidation Is Loss) से याद रखा जा सकता है।
- प्रोटॉनों की लब्धि: सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में प्रोटॉनों का सीधा लेन-देन नहीं होता (सिवाय अम्ल-क्षार अभिक्रियाओं के, जहाँ H⁺ आयन का स्थानांतरण होता है)। रेडॉक्स (Redox) अभिक्रियाओं का मुख्य आधार केवल इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- न्यूट्रॉनों की हानि: न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में होते हैं। किसी भी सामान्य रासायनिक अभिक्रिया में नाभिक अप्रभावित रहता है, इसलिए न्यूट्रॉनों की हानि या लाभ केवल नाभिकीय अभिक्रियाओं (Nuclear reactions) में होता है।
#7. डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का कौन सा अवधारणा द्रव्यमान संरक्षण के नियम को दर्शाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 12 Aug, 2025 Shift 3)
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): एंटोनी लेवोज़ियर (Antoine Lavoisier) द्वारा दिए गए इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान द्रव्यमान (mass) न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है (अर्थात अभिकारकों और उत्पादों का कुल द्रव्यमान समान रहता है)।
- डाल्टन का सिद्धांत: जॉन डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का यह बिंदु कि “परमाणु अविभाज्य कण हैं, जिन्हें किसी रासायनिक अभिक्रिया में न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है”, सीधे तौर पर द्रव्यमान संरक्षण के नियम की पुष्टि करता है।
- परमाणु सरल पूर्ण-संख्या अनुपात में मिलकर यौगिक बनाते हैं: यह अवधारणा ‘निश्चित अनुपात के नियम’ (Law of Definite / Constant Proportions) की व्याख्या करती है जिसे जोसेफ प्राउस्ट ने दिया था। यह द्रव्यमान संरक्षण को नहीं दर्शाता।
- विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान और गुण अलग-अलग होते हैं: यह कथन केवल यह स्पष्ट करता है कि अलग-अलग तत्वों (जैसे सोना और तांबा) की रासायनिक प्रकृति एक-दूसरे से भिन्न क्यों होती है।
- सभी पदार्थ अविभाज्य कणों से बने होते हैं जिन्हें परमाणु कहा जाता है: यह कथन पदार्थ की मूल संरचना (प्रकृति) को परिभाषित करता है, लेकिन यह द्रव्यमान के संरक्षण के नियम से संबंधित नहीं है।
#8. निम्नलिखित में से किसका उपयोग कैंसर के उपचार में किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 6 April 2021 Shift 1)
- कोबाल्ट-60 (Cobalt-60): कैंसर के उपचार (विशेषकर रेडियोथेरेपी/Radiotherapy) में कोबाल्ट के रेडियोधर्मी समस्थानिक (Radioactive isotope) ‘कोबाल्ट-60’ का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- कार्यप्रणाली: कोबाल्ट-60 से अत्यंत उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणें (Gamma rays) उत्सर्जित होती हैं। जब इन किरणों को ट्यूमर पर केंद्रित किया जाता है, तो ये कैंसर कोशिकाओं के DNA को नष्ट कर देती हैं, जिससे वे आगे नहीं बढ़ पातीं और खत्म हो जाती हैं।
- आयोडीन का एक समस्थानिक: आयोडीन-131 (Iodine-131) का उपयोग मुख्य रूप से थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid gland) की बीमारियों, जैसे- घेंघा (Goiter) रोग के उपचार में किया जाता है।
- यूरेनियम का एक समस्थानिक: यूरेनियम-235 (U-235) का उपयोग मुख्य रूप से नाभिकीय रिएक्टरों (Nuclear reactors) में ईंधन के रूप में विद्युत उत्पादन और परमाणु हथियार बनाने में किया जाता है, चिकित्सा में नहीं। (यूरेनियम-238 का उपयोग पृथ्वी/चट्टानों की आयु ज्ञात करने में होता है)।
- तांबे का एक समस्थानिक: तांबे के समस्थानिकों (जैसे Cu-64) का उपयोग चिकित्सा में कुछ विशेष प्रकार की इमेजिंग (PET Scan) या शोध कार्यों में किया जाता है, लेकिन सामान्य कैंसर उपचार के लिए यह मानक नहीं है।
#9. सूत्र इकाई द्रव्यमान की इकाई क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
- u (एकीकृत द्रव्यमान – Unified Mass): किसी भी परमाणु (Atom), अणु (Molecule) या सूत्र इकाई (Formula unit) के द्रव्यमान को मापने की मानक इकाई ‘u’ होती है। इसे पहले ‘amu’ (Atomic Mass Unit) कहा जाता था, लेकिन अब IUPAC के अनुसार इसे केवल ‘u’ (Unified mass) लिखा जाता है।
- सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): यह किसी यौगिक के सूत्र में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का कुल योग होता है। (जैसे NaCl का सूत्र द्रव्यमान = Na(23 u) + Cl(35.5 u) = 58.5 u)
- g (ग्राम – Gram): यह सामान्य द्रव्यमान की इकाई है। यदि हम सूत्र द्रव्यमान को ग्राम में व्यक्त करते हैं (जैसे 58.5 g), तो वह उस पदार्थ का ‘मोलर द्रव्यमान’ (Molar Mass) कहलाएगा, न कि केवल सूत्र इकाई द्रव्यमान।
- kg (किलोग्राम – Kilogram): यह द्रव्यमान की अंतर्राष्ट्रीय मानक (SI) इकाई है, जिसका उपयोग स्थूल (बड़े) पिंडों का वजन मापने के लिए किया जाता है, सूक्ष्म परमाणुओं के लिए नहीं।
- mole (मोल – Mole): यह ‘पदार्थ की मात्रा’ (Amount of substance) मापने की SI इकाई है। यह कणों की संख्या (6.022 × 10²³) को दर्शाती है, द्रव्यमान को नहीं।
#10. समस्थानिक वे परमाणु होते हैं जिनमें ________ होता है।
(RRB NTPC CBT-I : 12 Feb 2021 Shift 1)
- समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के वे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक (Atomic number – प्रोटॉनों की संख्या) समान होता है, लेकिन परमाणु द्रव्यमान (Mass number – प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) भिन्न होता है, समस्थानिक कहलाते हैं।
- कारण: समस्थानिकों में द्रव्यमान का यह अंतर उनके नाभिक में मौजूद न्यूट्रॉनों की अलग-अलग संख्या के कारण होता है।
- उदाहरण: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं – प्रोटियम (₁H¹), ड्यूटेरियम (₁H²), और ट्राइटियम (₁H³)। इन सभी में परमाणु क्रमांक 1 है, लेकिन द्रव्यमान क्रमशः 1, 2 और 3 है। इसी तरह कार्बन के समस्थानिक (C-12, C-13, C-14) होते हैं।
- समान परमाणु द्रव्यमान लेकिन भिन्न परमाणु क्रमांक: यह परिभाषा समभारिक (Isobars) की है। जैसे आर्गन (₁₈Ar⁴⁰) और कैल्शियम (₂₀Ca⁴⁰), जिनका द्रव्यमान (40) समान है लेकिन क्रमांक अलग-अलग हैं।
- भिन्न परमाणु क्रमांक और परमाणु द्रव्यमान: ये बस अलग-अलग तत्वों के सामान्य परमाणु होते हैं। यदि इनमें न्यूट्रॉनों की संख्या समान हो जाए, तो इन्हें समन्यूट्रॉनिक (Isotones) कहा जाता है।
- समान परमाणु क्रमांक और परमाणु द्रव्यमान: यह विकल्प एक ही प्रकार के परमाणुओं (Identical atoms) को दर्शाता है, यह किसी विशिष्ट श्रेणी (जैसे समस्थानिक या समभारिक) को परिभाषित नहीं करता है।
#11. रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किसकी खोज के लिए जिम्मेदार था?
(RRB JE EE 19 Sept 2019 Shift 2 CBT 2)
- अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग: 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) ने सोने की एक बहुत पतली पन्नी पर उच्च ऊर्जा वाले अल्फा (α) कणों की बौछार की।
- निष्कर्ष: इस प्रयोग में अधिकांश अल्फा कण पन्नी के आर-पार सीधे निकल गए, लेकिन कुछ कण अपने मार्ग से विक्षेपित (deflect) हो गए और बहुत ही कम कण टकराकर वापस लौट आए।
- नाभिक की खोज: इससे रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है और इसका सम्पूर्ण धनावेश (Positive charge) तथा द्रव्यमान केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म स्थान पर केंद्रित होता है, जिसे उन्होंने परमाणु नाभिक (Atomic Nucleus) कहा।
- इलेक्ट्रान (Electron): इसकी खोज 1897 में जे. जे. थॉमसन (J.J. Thomson) ने कैथोड किरण (Cathode ray) प्रयोग के दौरान की थी। यह एक ऋणावेशित (Negative) कण है।
- न्यूट्रॉन (Neutron): इसकी खोज 1932 में जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने की थी। यह नाभिक में पाया जाने वाला अनावेशित (Neutral) कण है।
- प्रोटॉन (Proton): प्रोटॉन (धनावेशित कण) की खोज मुख्य रूप से 1886 में ई. गोल्डस्टीन (E. Goldstein) द्वारा कैनाल किरणों के रूप में की गई थी। हालांकि, बाद में रदरफोर्ड ने इसे प्रोटॉन नाम दिया, लेकिन उनके ‘स्वर्ण पत्री प्रयोग’ का मुख्य और सबसे क्रांतिकारी परिणाम ‘नाभिक’ की खोज ही था।
#12. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वोत्तम रूप से इसकी व्याख्या करता है कि क्यों किसी तत्व के सभी परमाणुओ को एक ही प्रतीक द्वारा दर्शाया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )
- तत्व की पहचान (Identity of an Element): आधुनिक रसायन विज्ञान के अनुसार, किसी भी तत्व की मूल पहचान उसका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) होता है। परमाणु क्रमांक उस तत्व के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाता है।
- प्रतीक का कारण: एक ही तत्व के सभी परमाणुओं में प्रोटॉनों की संख्या हमेशा अचूक रूप से समान होती है। इसलिए, उन सभी को आवर्त सारणी (Periodic Table) में एक ही स्थान पर रखा जाता है और एक ही रासायनिक प्रतीक (जैसे कार्बन के लिए ‘C’, ऑक्सीजन के लिए ‘O’) द्वारा दर्शाया जाता है।
- द्रव्यमान संख्याएँ सदैव समान होती हैं / न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है: ये दोनों विकल्प गलत हैं क्योंकि एक ही तत्व के समस्थानिकों (Isotopes) में न्यूट्रॉनों की संख्या अलग-अलग होती है, जिसके कारण उनकी द्रव्यमान संख्या भी बदल जाती है (जैसे कार्बन-12 और कार्बन-14)। फिर भी उन्हें ‘C’ से ही दर्शाया जाता है।
- भौतिक गुणधर्म समान होते हैं: यह हमेशा सत्य नहीं होता। समस्थानिकों (Isotopes) और अपररूपों (Allotropes – जैसे हीरा और ग्रेफाइट) के भौतिक गुण (द्रव्यमान, घनत्व, कठोरता) एक-दूसरे से काफी अलग हो सकते हैं, भले ही वे एक ही तत्व के परमाणु हों।
#13. एक रासायनिक समीकरण को संतुलित कहा जाता है यदि संख्या ________ ।
(RRB JE 26 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation): एक रासायनिक समीकरण को तब संतुलित कहा जाता है जब समीकरण के दोनों ओर (अभिकारक और उत्पाद की तरफ) प्रत्येक तत्व के परमाणुओं (Atoms) की संख्या बिलकुल समान होती है।
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम: समीकरण को संतुलित करना ‘द्रव्यमान संरक्षण के नियम’ (Law of Conservation of Mass) पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी रासायनिक अभिक्रिया में न तो द्रव्यमान का निर्माण होता है और न ही विनाश। इसलिए दोनों तरफ परमाणुओं का बराबर होना अनिवार्य है।
- उदाहरण: 2H₂ + O₂ → 2H₂O
यहाँ बाईं ओर (Reactants): हाइड्रोजन के 4 और ऑक्सीजन के 2 परमाणु हैं। दाईं ओर (Products): हाइड्रोजन के 4 और ऑक्सीजन के 2 परमाणु हैं। इसलिए यह संतुलित है।
- अणु दोनों तरफ समान हैं (Molecules are equal): यह गलत है क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया में अणुओं की संख्या बदल सकती है। उदाहरण के लिए: N₂ + 3H₂ → 2NH₃ (यहाँ बाईं ओर 1+3=4 अणु हैं, लेकिन दाईं ओर केवल 2 अणु हैं, फिर भी समीकरण संतुलित है)।
- यौगिक दोनों तरफ समान हैं (Compounds are equal): रासायनिक अभिक्रिया का अर्थ ही यह है कि पुराने यौगिक टूटकर नए यौगिक बनाते हैं। इसलिए अभिकारक और उत्पाद कभी समान यौगिक नहीं हो सकते।
- इलेक्ट्रॉनों दोनों तरफ समान हैं: यद्यपि रेडॉक्स (Redox) अभिक्रियाओं को संतुलित करते समय कुल आवेश (Charge) या इलेक्ट्रॉनों का ध्यान रखा जाता है, लेकिन सामान्य रासायनिक समीकरण के संतुलन की मूल और सार्वभौमिक परिभाषा परमाणुओं की संख्या के आधार पर ही दी जाती है।
#14. सभी अक्रिय गैस अणु ________ होते हैं।
(RRB JE CBT I :- 30 May 2019 Shift 2)
- अक्रिय गैसें (Noble Gases): आवर्त सारणी के समूह 18 (Group 18) के तत्वों को अक्रिय गैसें कहा जाता है। इनमें हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टन (Kr), जेनॉन (Xe) और रेडॉन (Rn) शामिल हैं।
- एकपरमाणुक होने का कारण: इन गैसों के परमाणुओं का सबसे बाहरी कक्ष (Outermost shell) इलेक्ट्रॉनों से पूर्ण रूप से भरा होता है (हीलियम में 2, और बाकी सभी में 8 इलेक्ट्रॉन यानी अष्टक पूर्ण होता है)।
- इस स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Stable electronic configuration) के कारण, ये रासायनिक रूप से अत्यंत निष्क्रिय (Inert) होती हैं। ये न तो किसी अन्य तत्व के साथ और न ही अपने ही परमाणुओं के साथ रासायनिक बंध (Bond) बनाती हैं। इसलिए ये प्रकृति में हमेशा स्वतंत्र और एकपरमाणुक (एक ही परमाणु वाले अणु) के रूप में पाई जाती हैं।
- द्विपरमाणुक (Diatomic): ये अणु दो परमाणुओं के आपस में जुड़ने से बनते हैं (क्योंकि उनका अष्टक पूर्ण नहीं होता)। उदाहरण: ऑक्सीजन (O₂), नाइट्रोजन (N₂), हाइड्रोजन (H₂), और क्लोरीन (Cl₂)।
- त्रिपरमाणुक (Triatomic): ये तीन परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं। उदाहरण: ओजोन (O₃) और जल (H₂O)।
- बहुपरमाणुक (Polyatomic): ये अणु तीन से अधिक परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं। उदाहरण: फॉस्फोरस (P₄) और सल्फर (S₈)।
#15. परमाणु द्रव्यमान की वर्तमान प्रणाली किसको मानक के रूप में आधार मानती है?
(RPF Constable 2024 : 07 Mar, 2025 Shift 1)
- कार्बन-12 (Carbon-12): वर्ष 1961 में IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) ने कार्बन के समस्थानिक कार्बन-12 (C-12) को परमाणु द्रव्यमान (Atomic mass) मापने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक के रूप में स्वीकार किया। वर्तमान में यही प्रणाली लागू है।
- परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu / u): 1 परमाणु द्रव्यमान इकाई (1 amu या 1 u) का मान कार्बन-12 के एक परमाणु के द्रव्यमान के ठीक 1/12वें भाग (One-twelfth) के बराबर होता है।
- कार्बन-12 को ही क्यों चुना गया? क्योंकि यह प्रकृति में प्रचुर मात्रा में (लगभग 99%) उपलब्ध है, अत्यधिक स्थिर है, और इसके आधार पर अधिकांश अन्य तत्वों के परमाणु द्रव्यमान लगभग पूर्णांक (Whole numbers) में प्राप्त होते हैं।
- ऑक्सीजन- 16: 1961 से पहले ऑक्सीजन को मानक माना जाता था। लेकिन रसायनज्ञ (Chemists) प्राकृतिक ऑक्सीजन के मिश्रण को मानक मानते थे, जबकि भौतिकविद (Physicists) केवल O-16 समस्थानिक को। इस भ्रम को दूर करने के लिए इसे बदलकर C-12 कर दिया गया।
- हाइड्रोजन- 1: 19वीं सदी की शुरुआत में जॉन डाल्टन ने सबसे हल्के तत्व हाइड्रोजन (द्रव्यमान = 1) को मानक माना था। लेकिन इसके आधार पर कई अन्य तत्वों के द्रव्यमान भिन्न (fractions/दशमलव) में आते थे, इसलिए इसे छोड़ दिया गया।
- नाइट्रोजन- 14: नाइट्रोजन का उपयोग विज्ञान के इतिहास में कभी भी परमाणु द्रव्यमान मापने के लिए सार्वभौमिक मानक (Universal reference) के रूप में नहीं किया गया है।
#16. कार्बनिक यौगिक में सदैव निम्नलिखित में से क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
- कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds): रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसमें कार्बन के यौगिकों का अध्ययन किया जाता है, कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry) कहलाती है। इसलिए, किसी भी यौगिक को ‘कार्बनिक’ कहलाने के लिए उसमें कम से कम एक कार्बन परमाणु (Carbon atom) का होना अनिवार्य है।
- कार्बन की विशेषता: कार्बन में श्रृंखलन (Catenation) और चतुष्संयोजकता (Tetravalency) का एक बहुत ही विशिष्ट गुण पाया जाता है। इसी कारण यह अपने ही जैसे अन्य कार्बन परमाणुओं और अन्य तत्वों के साथ मिलकर लंबी श्रृंखलाएं और लाखों यौगिक बना सकता है।
- नोट: कुछ यौगिकों में कार्बन होता है लेकिन वे अकार्बनिक (Inorganic) माने जाते हैं, जैसे- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), कार्बोनेट (CO₃²⁻) आदि। परंतु यह तय है कि कार्बनिक यौगिक का मुख्य आधार हमेशा कार्बन ही होता है।
- हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन: यद्यपि अधिकांश कार्बनिक यौगिकों (जैसे हाइड्रोकार्बन) में कार्बन के साथ हाइड्रोजन जुड़ा होता है, और ऑक्सीजन व नाइट्रोजन भी अक्सर मौजूद होते हैं (जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन में), लेकिन ये हर कार्बनिक यौगिक में अनिवार्य नहीं हैं। उदाहरण के लिए, CCl₄ (कार्बन टेट्राक्लोराइड) एक कार्बनिक यौगिक है, जिसमें H, O या N नहीं है।
- हैलोजन और उत्कृष्ट गैसें: हैलोजन (क्लोरीन, ब्रोमीन आदि) कुछ कार्बनिक यौगिकों में हो सकते हैं, लेकिन अनिवार्य नहीं हैं। उत्कृष्ट (अक्रिय) गैसें तो रासायनिक रूप से लगभग निष्क्रिय होती हैं और यौगिक नहीं बनातीं।
- सिलिकॉन और फॉस्फोरस परमाणु: ये तत्व कुछ विशेष यौगिकों में मौजूद हो सकते हैं, लेकिन ये सामान्यतः कार्बनिक यौगिकों का अनिवार्य या मूल हिस्सा बिल्कुल नहीं होते हैं।
#17. किसी तत्व की परमाणु संख्या क्या दर्शाती है?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )
- परमाणु संख्या (Atomic Number, Z): किसी तत्व के परमाणु के नाभिक (Nucleus) में उपस्थित धनावेशित कणों यानी प्रोटॉनों की कुल संख्या को उस तत्व की परमाणु संख्या कहते हैं। इसे अंग्रेजी के अक्षर ‘Z’ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
- तत्व की मौलिक पहचान: 1913 में हेनरी मोज़ले (Henry Moseley) ने यह सिद्ध किया था कि किसी तत्व के मौलिक गुणधर्म उसके परमाणु द्रव्यमान के बजाय उसकी परमाणु संख्या (प्रोटॉनों की संख्या) पर निर्भर करते हैं।
- उदासीन परमाणु (Neutral Atom): एक विद्युत-उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है, लेकिन यदि परमाणु आयन (Ion) बन जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या बदल जाती है जबकि प्रोटॉनों की संख्या हमेशा स्थिर रहती है। इसलिए परमाणु संख्या की सार्वभौमिक परिभाषा हमेशा प्रोटॉनों की संख्या पर आधारित होती है।
- परमाणु की द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): द्रव्यमान संख्या नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या (A = p + n) को दर्शाती है, केवल परमाणु क्रमांक को नहीं।
- इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की कुल संख्या: यह किसी मानक वैज्ञानिक राशि को नहीं दर्शाता। परमाणु संख्या केवल प्रोटॉनों की संख्या होती है, दोनों का योग नहीं।
- परमाणु में न्यूरॉन्स की संख्या: ‘न्यूरॉन’ (Neuron) तंत्रिका तंत्र की कोशिका होती है, यह परमाणु का घटक नहीं है। परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन (Neutron) होते हैं, और केवल न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए द्रव्यमान संख्या में से परमाणु संख्या घटाई जाती है (n = A – Z)।
#18. परमाणु भौतिकी के जनक कौन हैं?
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 3)
- अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford): इन्हें ‘परमाणु भौतिकी का जनक’ (Father of Nuclear Physics) कहा जाता है।
- नाभिक की खोज: 1911 में उन्होंने अपने प्रसिद्ध ‘स्वर्ण पत्री प्रयोग’ (Gold Foil / Alpha Particle Scattering Experiment) के माध्यम से यह साबित किया कि परमाणु के केंद्र में एक छोटा, सघन और धनावेशित हिस्सा होता है, जिसे उन्होंने नाभिक (Nucleus) नाम दिया।
- बाद में 1919 में उन्होंने नाइट्रोजन पर अल्फा कणों की बमबारी करके कृत्रिम नाभिकीय प्रतिक्रिया का भी प्रदर्शन किया था और प्रोटॉन का नामकरण भी किया था।
- नील्स बोर (Niels Bohr): इन्होंने 1913 में रदरफोर्ड के मॉडल की कमियों को दूर करते हुए यह सिद्धांत दिया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित, स्थिर कक्षाओं (Discrete Orbits) में ही चक्कर लगाते हैं।
- जे.जे. थॉमसन (J.J. Thomson): इन्होंने 1897 में कैथोड किरणों के अध्ययन से ऋणावेशित कण ‘इलेक्ट्रॉन’ (Electron) की खोज की थी।
- जेम्स चैडविक (James Chadwick): इन्होंने 1932 में परमाणु के नाभिक में मौजूद एक अनावेशित (Neutral) कण ‘न्यूट्रॉन’ (Neutron) की खोज की थी।
#19. किसी परमाणु की सबसे बाहरी परत में उपस्थित इलेक्ट्रॉन को क्या कहा जाता है?
(RPF Constable 2018 19 Jan 2019 Shift 3)
- संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valence Electrons): किसी परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा (Outermost shell) को ‘संयोजकता कक्षा’ कहा जाता है, और उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को ‘संयोजकता इलेक्ट्रॉन’ (Valence electrons) कहते हैं।
- रासायनिक अभिक्रिया में भूमिका: किसी भी तत्व के रासायनिक गुण और उसकी प्रतिक्रियाशीलता (Reactivity) मुख्य रूप से इन्हीं संयोजकता इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करती है। रासायनिक बंध (Chemical bonds) बनाते समय केवल यही इलेक्ट्रॉन साझा (share) किए जाते हैं, या इनका आदान-प्रदान (transfer) होता है।
- उत्तेजित इलेक्ट्रॉन (Excited electron): जब कोई इलेक्ट्रॉन बाहर से ऊर्जा (Energy) अवशोषित कर लेता है और अपनी मूल कक्षा (Ground state) से कूदकर किसी उच्च ऊर्जा वाली बाहरी कक्षा में चला जाता है, तो उसे ‘उत्तेजित इलेक्ट्रॉन’ कहा जाता है।
- इलेक्ट्रॉन बमबारी (Electron bombardment): यह कोई कण नहीं बल्कि एक प्रक्रिया है। इसमें किसी लक्ष्य (जैसे भारी धातु) पर उच्च गति वाले इलेक्ट्रॉनों की बौछार की जाती है। इसका उपयोग एक्स-रे (X-rays) उत्पन्न करने या द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमेट्री में किया जाता है।
- स्थायी इलेक्ट्रॉन (Stable electron): यह रसायन विज्ञान का कोई विशिष्ट तकनीकी शब्द नहीं है। सबसे बाहरी कक्षा के अंदर वाली कक्षाओं में मौजूद इलेक्ट्रॉनों को कोर इलेक्ट्रॉन (Core electrons) कहा जाता है, जो नाभिक से दृढ़तापूर्वक बंधे होते हैं और रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग नहीं लेते।
#20. परमाणु में प्रोटॉन कहाँ पाए जाते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
- नाभिक (Nucleus): परमाणु के बिल्कुल मध्य (केंद्र) में एक बहुत ही छोटा, सघन और धनावेशित हिस्सा होता है, जिसे नाभिक कहते हैं। इसकी खोज रदरफोर्ड ने की थी।
- प्रोटॉन की स्थिति: धनावेशित कण ‘प्रोटॉन’ और अनावेशित कण ‘न्यूट्रॉन’ इसी नाभिक के भीतर मजबूत नाभिकीय बल द्वारा आपस में बंधे होते हैं। इन दोनों को सम्मिलित रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ (Nucleons) भी कहा जाता है। परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान इसी नाभिक में केंद्रित होता है।
- ऊर्जा स्तरों (Energy levels) / कक्षकों (Orbitals): ये नाभिक के बाहर के वे निश्चित वृत्ताकार मार्ग या 3D क्षेत्र हैं, जहाँ ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन (Electrons) चक्कर लगाते हैं। यहाँ प्रोटॉन नहीं पाए जाते।
- इलेक्ट्रॉन अभ्र (Electron cloud): आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी मॉडल (Quantum Mechanical Model) के अनुसार, यह नाभिक के चारों ओर का वह धुंधला सा त्रिविमीय (3D) क्षेत्र है जहाँ किसी इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना सबसे अधिक होती है (इसे ऑर्बिटल भी कहते हैं)। नाम से ही स्पष्ट है कि इसका संबंध केवल इलेक्ट्रॉनों से है, प्रोटॉनों से नहीं।
#21. किसी परमाणु की परमाणु संख्या किसके बराबर होती है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 1)
- परमाणु संख्या (Atomic Number, Z): किसी तत्व की परमाणु संख्या उसके परमाणु के नाभिक (Nucleus) में मौजूद प्रोटॉनों (Protons) की कुल संख्या के ठीक बराबर होती है। इसे ‘Z’ अक्षर द्वारा दर्शाया जाता है।
- तत्व की पहचान: परमाणु संख्या ही किसी तत्व की वास्तविक और मौलिक पहचान होती है। आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) में तत्वों को उनकी परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में ही व्यवस्थित किया गया है।
- उदासीन परमाणु (Neutral Atom): एक विद्युत-उदासीन (जिस पर कोई आवेश न हो) परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या और इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर होती है (Z = p = e)। लेकिन चूंकि रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन निकल या जुड़ सकते हैं, इसलिए परमाणु संख्या की स्थिर परिभाषा हमेशा प्रोटॉनों की संख्या पर ही आधारित होती है।
- प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या का योग: नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के कुल योग को द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A) कहा जाता है, परमाणु संख्या नहीं।
- परमाणु के नाभिक में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का आधा: यह कथन वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉन कभी भी नाभिक के अंदर नहीं होते, वे नाभिक के बाहर विभिन्न कक्षाओं (Orbits) में चक्कर लगाते हैं।
- इलेक्ट्रॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या का योग: परमाणु भौतिकी या रसायन विज्ञान में यह कोई मानक या परिभाषित राशि नहीं है। यह विकल्प केवल भ्रमित (distract) करने के लिए दिया गया है।
#22. परमाणु द्रव्यमान मापने के लिए मानक संदर्भ के रूप में किस समस्थानिक को चुना गया था?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- कार्बन-12 (Carbon-12): वर्ष 1961 में IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) ने कार्बन-12 (C-12) को परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) मापने के लिए सार्वभौमिक मानक (Universal reference) के रूप में स्वीकार किया।
- परमाणु द्रव्यमान इकाई (u / amu): 1 परमाणु द्रव्यमान इकाई (1 amu या 1 u) को कार्बन-12 के एक परमाणु के द्रव्यमान के ठीक 1/12वें (One-twelfth) भाग के रूप में परिभाषित किया गया है।
- कारण: कार्बन-12 को इसलिए चुना गया क्योंकि यह प्रकृति में बहुत प्रचुर मात्रा में (लगभग 98.9%) पाया जाता है, यह अत्यधिक स्थिर है, और इसके संदर्भ में अधिकांश तत्वों के परमाणु द्रव्यमान लगभग पूर्णांक (Whole numbers) में प्राप्त होते हैं।
- कार्बन – 14 (Carbon-14): यह कार्बन का एक रेडियोधर्मी (Radioactive) समस्थानिक है। इसका उपयोग रेडियोकार्बन डेटिंग (Carbon dating) तकनीक में जीवाश्मों और पुरानी पुरातात्विक वस्तुओं की आयु ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
- कार्बन – 13 (Carbon-13): यह एक स्थिर समस्थानिक है, लेकिन प्रकृति में इसकी प्रचुरता बहुत कम (केवल 1.1%) है। इसका उपयोग मुख्य रूप से NMR (Nuclear Magnetic Resonance) स्पेक्ट्रोस्कोपी में किया जाता है, द्रव्यमान के मानक के रूप में नहीं।
- कार्बन – 11 (Carbon-11): यह कार्बन का एक कृत्रिम और रेडियोधर्मी समस्थानिक है जिसकी अर्ध-आयु (Half-life) बहुत कम (लगभग 20 मिनट) होती है। इसका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में PET (Positron Emission Tomography) स्कैनिंग के लिए किया जाता है।
#23. परमाणु में कौन-सा आवेशित कण, नाभिक के चारों ओर घूमता है?
(Not found 11/03/2026 )
- इलेक्ट्रॉन (Electron): इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित (Negatively charged) उप-परमाण्विक कण है। परमाणु मॉडल (जैसे बोर मॉडल) के अनुसार, इलेक्ट्रॉन परमाणु के केंद्र (नाभिक) के बाहर निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं (Orbits या Shells) में बहुत तेजी से चक्कर लगाते हैं।
- आकर्षण बल: इलेक्ट्रॉन पर ऋणावेश और नाभिक (प्रोटॉनों के कारण) पर धनावेश होता है। इन दोनों के बीच लगने वाले स्थिर-वैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force of attraction) के कारण ही इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर बंधे रहते हैं और परिक्रमा करते हैं।
- खोज: इलेक्ट्रॉन की खोज 1897 में जे. जे. थॉमसन (J.J. Thomson) द्वारा की गई थी।
- प्रोटॉन (Proton): यह एक धनावेशित (Positive) कण है, लेकिन यह नाभिक के अंदर स्थिर रहता है, यह नाभिक के चारों ओर चक्कर नहीं लगाता है।
- न्यूट्रॉन (Neutron): यह एक अनावेशित (Neutral) कण है (इस पर कोई आवेश नहीं होता)। प्रोटॉन की तरह यह भी नाभिक के अंदर ही पाया जाता है।
- पॉजिट्रॉन (Positron): यह इलेक्ट्रॉन का ‘प्रतिकण’ (Antiparticle) है। इसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के बराबर होता है लेकिन इस पर धनावेश (Positive charge) होता है। यह एक सामान्य परमाणु की संरचना का हिस्सा नहीं है और नाभिक के चारों ओर नहीं घूमता।
#24. निम्नलिखित में से कौन सा कथन किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?
(RPF Constable 2024 : 18 Mar, 2025 Shift 2)
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या उसके नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों (p) और न्यूट्रॉनों (n) की कुल संख्या का योग होती है। इसे सूत्र A = p + n द्वारा दर्शाया जाता है।
- न्यूक्लिऑन (Nucleons): क्योंकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों परमाणु के नाभिक (Nucleus) में एक साथ रहते हैं, इसलिए इन्हें सम्मिलित रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ कहा जाता है। अतः हम यह भी कह सकते हैं कि द्रव्यमान संख्या कुल न्यूक्लिऑनों की संख्या है।
- द्रव्यमान का कारण: परमाणु में इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान लगभग नगण्य (शून्य के बराबर) होता है, इसलिए किसी भी परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान मुख्य रूप से उसके नाभिक (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) पर ही निर्भर करता है।
- नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या: इसे तत्व की ‘परमाणु संख्या’ (Atomic Number, Z) कहा जाता है, द्रव्यमान संख्या नहीं।
- तत्व के सभी समस्थानिकों का औसत द्रव्यमान: इसे ‘औसत परमाणु द्रव्यमान’ (Average Atomic Mass) कहते हैं (जैसे क्लोरीन का 35.5 u)। जबकि द्रव्यमान संख्या (Mass Number) हमेशा एक पूर्णांक (Whole number) होती है, दशमलव में नहीं।
- एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या: एक उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) के बराबर होती है। द्रव्यमान संख्या से इलेक्ट्रॉनों की संख्या का सीधा कोई लेना-देना नहीं है।
#25. निश्चित अनुपात का नियम किसके द्वारा दिया गया था?
(RRB JE CBT I :- 31 May 2019 Shift 3)
- निश्चित अनुपात का नियम (Law of Constant / Definite Proportions): यह नियम 1797 में फ्रांसीसी रसायनज्ञ जोसेफ एल. प्राउस्ट (Joseph L. Proust) द्वारा दिया गया था।
- सिद्धांत: इस नियम के अनुसार, “किसी भी रासायनिक यौगिक में उसके अवयवी तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात (Definite proportion by mass) में ही मौजूद होते हैं,” चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि द्वारा बनाया गया हो।
- उदाहरण: शुद्ध जल (H₂O) चाहे नदी का हो, कुएँ का हो, वर्षा का हो या प्रयोगशाला में बनाया गया हो, उसमें हमेशा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात 1:8 ही रहता है (हाइड्रोजन 2u : ऑक्सीजन 16u)।
- एंतोयन लेवोजीयर (Antoine Lavoisier): इन्होंने 1789 में ‘द्रव्यमान संरक्षण का नियम’ (Law of Conservation of Mass) दिया था। इन्हें ‘आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक’ (Father of Modern Chemistry) भी माना जाता है।
- जॉन डाल्टन (John Dalton): इन्होंने 1808 में अपना प्रसिद्ध ‘परमाणु सिद्धांत’ (Atomic Theory) प्रस्तुत किया था और ‘गुणित अनुपात का नियम’ (Law of Multiple Proportions) भी इन्हीं के द्वारा दिया गया था।
- जोन्स जैकब बर्जेलियस (Jöns Jacob Berzelius): इन्होंने तत्वों के नामकरण की आधुनिक प्रणाली विकसित की थी, जिसमें तत्वों को उनके अंग्रेजी या लैटिन नाम के एक या दो अक्षरों (Symbols) से दर्शाया जाता है (जैसे कार्बन के लिए ‘C’, सोडियम के लिए ‘Na’)।
#26. किसी यौगिक का आणविक द्रव्यमान 63 u है। यदि इसमें एक हाइड्रोजन परमाणु और तीन ऑक्सीजन परमाणु हैं, तो शेष तत्व का परमाणु द्रव्यमान ________ है।
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
- आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass): किसी यौगिक का आणविक द्रव्यमान उसमें उपस्थित सभी तत्वों के परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का कुल योग होता है।
- दिए गए यौगिक की गणना (Calculation):
• यौगिक का कुल आणविक द्रव्यमान = 63 u
• 1 हाइड्रोजन (H) परमाणु का द्रव्यमान = 1 u
• 3 ऑक्सीजन (O) परमाणुओं का द्रव्यमान = 3 × 16 u = 48 u
• माना शेष (अज्ञात) तत्व का परमाणु द्रव्यमान = x uप्रश्नानुसार, (सभी का योग कुल द्रव्यमान के बराबर होगा):
H का द्रव्यमान + x + O₃ का द्रव्यमान = 63
1 + x + 48 = 63
49 + x = 63
x = 63 – 49 = 14 u - निष्कर्ष (Conclusion): चूँकि 14 u परमाणु द्रव्यमान नाइट्रोजन (Nitrogen – N) का होता है, अतः यह यौगिक 1 हाइड्रोजन (H), 1 नाइट्रोजन (N) और 3 ऑक्सीजन (O) से मिलकर बना नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) है।
- 12 u: यह कार्बन (Carbon) का परमाणु द्रव्यमान है। यदि अज्ञात तत्व कार्बन होता, तो यौगिक का कुल द्रव्यमान (1 + 12 + 48) = 61 u होता।
- 32 u: यह सल्फर (Sulfur) का परमाणु द्रव्यमान है। यदि अज्ञात तत्व सल्फर होता, तो कुल द्रव्यमान (1 + 32 + 48) = 81 u हो जाता।
- 16 u: यह ऑक्सीजन (Oxygen) का परमाणु द्रव्यमान है।
#27. रसायन विज्ञान में समावयवता का सबसे अच्छा वर्णन करने वाला कथन कौन सा है?
(RPF Constable 2024 : 09 Mar, 2025 Shift 2)
- समावयवता (Isomerism): रसायन विज्ञान में, जब दो या दो से अधिक यौगिकों का अणुसूत्र (Molecular Formula) एक समान होता है, लेकिन उनकी संरचना (Structural formula) या परमाणुओं की व्यवस्था अलग-अलग होती है, तो इस घटना को समावयवता कहते हैं। ऐसे यौगिकों को एक-दूसरे का समावयवी (Isomers) कहा जाता है।
- गुणधर्मों में भिन्नता: चूँकि परमाणुओं के जुड़ने का तरीका (संरचना) अलग होता है, इसलिए इन यौगिकों के भौतिक (Physical) और रासायनिक (Chemical) गुण भी एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।
- उदाहरण: एथिल अल्कोहल (C₂H₅OH) और डाई-मेथिल ईथर (CH₃-O-CH₃)। इन दोनों का आणविक सूत्र C₂H₆O है, लेकिन संरचना अलग होने के कारण इनके रासायनिक गुण बिल्कुल अलग-अलग होते हैं।
- समान रासायनिक गुण लेकिन भिन्न रासायनिक सूत्र…: यह बिल्कुल उल्टा और गलत है। समावयवता की पहली और अनिवार्य शर्त ही यह है कि यौगिकों का ‘रासायनिक (आणविक) सूत्र’ 100% समान होना चाहिए।
- वह प्रक्रिया जिससे कोई यौगिक अपनी अवस्था बदलता है: यह अवस्था परिवर्तन (Phase transition) की परिभाषा है, जैसे बर्फ का पानी में पिघलना (गलन) या पानी का भाप बनना (वाष्पीकरण)। यह भौतिक विज्ञान की घटना है, समावयवता नहीं।
- वह घटना जहाँ विभिन्न तत्वों में समान संख्या में प्रोटॉन होते हैं: यह कथन वैज्ञानिक रूप से असंभव है। किन्हीं भी दो ‘विभिन्न तत्वों’ में प्रोटॉनों की संख्या कभी समान नहीं हो सकती। यदि एक ही तत्व के परमाणुओं में ऐसा हो (समान प्रोटॉन, भिन्न न्यूट्रॉन), तो उसे समस्थानिक (Isotopes) कहते हैं।
#28. रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार, परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान कहाँ केंद्रित होता है?
(Not found 11/03/2026 )
- नाभिक (Nucleus): अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने प्रसिद्ध अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (Gold Foil Experiment) के आधार पर परमाणु का मॉडल प्रस्तुत किया था।
- निष्कर्ष: उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग खोखला होता है, और इसका संपूर्ण धनावेश (Positive charge) तथा लगभग संपूर्ण द्रव्यमान (Total Mass) इसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म स्थान पर केंद्रित होता है, जिसे ‘नाभिक’ (Nucleus) कहा जाता है।
- द्रव्यमान का कारण: परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक में मौजूद भारी कणों यानी प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों (जिन्हें न्यूक्लिऑन कहा जाता है) के कारण होता है।
- इलेक्ट्रॉन अभ्र (Electron cloud) और कक्षक (Orbital): ये नाभिक के बाहर के वे स्थान हैं जहाँ ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते हैं। एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान का लगभग 1/1836 (यानी शून्य के बराबर/नगण्य) होता है, इसलिए इन बाहरी क्षेत्रों में परमाणु का द्रव्यमान न के बराबर होता है।
- प्रोटॉन कोष (Proton shell): परमाणु की संरचना में ‘प्रोटॉन कोष’ जैसा कोई शब्द या अवधारणा नहीं होती है। कोष (Shells) केवल इलेक्ट्रॉनों के लिए होते हैं (K, L, M, N), जबकि प्रोटॉन हमेशा नाभिक के भीतर स्थिर रहते हैं।
#29. निम्नलिखित में से किसे ‘नूक्लीऑन’ के रूप में जाना जाता है?
(RRB JE CBT I :- 30 May 2019 Shift 2)
- न्यूक्लीऑन (Nucleon): किसी परमाणु के केंद्र (नाभिक या Nucleus) में मौजूद कणों को सामूहिक रूप से ‘न्यूक्लीऑन’ (Nucleon) कहा जाता है।
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन: हम जानते हैं कि परमाणु का नाभिक धनावेशित प्रोटॉनों (Protons) और अनावेशित न्यूट्रॉनों (Neutrons) से मिलकर बना होता है। चूंकि ये दोनों कण नाभिक के अंदर एक साथ बंधे रहते हैं, इसलिए इन दोनों को संयुक्त रूप से न्यूक्लीऑन कहा जाता है।
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number): किसी परमाणु में उपस्थित कुल न्यूक्लीऑनों (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) की संख्या ही उस परमाणु की द्रव्यमान संख्या कहलाती है।
- प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन / न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन (Electron) कभी भी नाभिक के अंदर नहीं होते हैं। वे नाभिक के बाहर विभिन्न कक्षाओं (Orbits) में चक्कर लगाते हैं। चूँकि वे नाभिक (Nucleus) का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उन्हें न्यूक्लीऑन नहीं कहा जा सकता।
- केवल प्रोटॉन: यद्यपि प्रोटॉन एक न्यूक्लीऑन है, लेकिन सामान्य हाइड्रोजन (प्रोटियम) को छोड़कर ब्रह्मांड के सभी तत्वों के नाभिक में न्यूट्रॉन भी पाए जाते हैं। इसलिए ‘केवल प्रोटॉन’ कहना अपूर्ण है। न्यूक्लीऑन शब्द प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों के लिए प्रयोग होता है।
#30. परमाणु द्रव्यमान की सही परिभाषा क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
- सापेक्षिक द्रव्यमान (Relative Atomic Mass): किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान वास्तव में एक ‘सापेक्षिक’ (Relative) संख्या है। यह बताता है कि उस तत्व का एक परमाणु, कार्बन-12 (C-12) के एक परमाणु के 1/12वें भाग से कितना गुना भारी है।
- मानक (Standard): 1961 में IUPAC (इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री) ने कार्बन-12 समस्थानिक को परमाणु द्रव्यमान मापने का सार्वभौमिक मानक स्वीकार किया था।
- इकाई (Unit): इसे ‘परमाणु द्रव्यमान इकाई’ (amu) या आधुनिक रूप में ‘एकीकृत द्रव्यमान’ (u – unified mass) द्वारा दर्शाया जाता है।
- यह एक हाइड्रोजन अणु का द्रव्यमान होता है: यह गलत है। रसायन विज्ञान के शुरुआती दिनों में जॉन डाल्टन ने हाइड्रोजन ‘परमाणु’ (अणु नहीं) को मानक माना था, लेकिन इसके कारण अन्य तत्वों के द्रव्यमान दशमलव में आते थे, इसलिए इसे C-12 से बदल दिया गया।
- यह किसी परमाणु का द्रव्यमान (ग्राम) में होता है: जब किसी तत्व के परमाणु द्रव्यमान को ग्राम (grams) में व्यक्त किया जाता है, तो उसे ‘ग्राम परमाणु द्रव्यमान’ (Gram Atomic Mass) या 1 मोल का द्रव्यमान कहा जाता है। यह एक अकेले परमाणु का द्रव्यमान नहीं होता।
- यह एक परमाणु का द्रव्यमान (किलोग्राम) में होता है: परमाणु इतने सूक्ष्म होते हैं कि उनका वास्तविक द्रव्यमान किलोग्राम (kg) में मापना अव्यावहारिक है (जैसे कार्बन के एक परमाणु का द्रव्यमान लगभग 1.99 × 10⁻²⁶ kg होता है)। इसलिए अध्ययन को सरल बनाने के लिए ‘सापेक्षिक’ (u) पैमाने का उपयोग किया जाता है।
#31. निम्नलिखित में से कौन-सा समस्थानिक कैंसर के उपचार में उपयोग किया जाता है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- कोबाल्ट-60 (Cobalt-60): कैंसर जैसी घातक बीमारी के उपचार (Radiotherapy/रेडियोथेरेपी) में कोबाल्ट के समस्थानिक ‘कोबाल्ट-60’ का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
- कार्यप्रणाली: यह एक कृत्रिम रेडियोधर्मी (Radioactive) समस्थानिक है जो क्षय होने पर उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणें (Gamma rays) उत्सर्जित करता है। ये किरणें बहुत ही भेदक होती हैं और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं (Cancer cells) और ट्यूमर को नष्ट करने में अत्यधिक प्रभावी होती हैं।
- आयोडीन का समस्थानिक (Iodine-131): इसका उपयोग थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid gland) के विकारों और विशेषकर घेंघा रोग (Goiter) के निदान तथा उपचार में किया जाता है।
- यूरेनियम का समस्थानिक (Uranium-235): इसका उपयोग परमाणु भट्ठियों (Nuclear Reactors) में ईंधन (Fuel) के रूप में विद्युत उत्पादन और परमाणु ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
- कार्बन का समस्थानिक (Carbon-14): इसका उपयोग कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) तकनीक में किया जाता है, जिससे मृत जीवों, पुराने जीवाश्मों (Fossils) और पुरातात्विक अवशेषों की आयु का पता लगाया जाता है।
#32. जब एक धनावेशित अल्फा कण को पतली स्वर्ण पत्री से गुजारा जाता है, तो अधिकांश कण बिना विक्षेपण के सीधे गुजर जाते हैं। थॉमसन के परमाणु मॉडल के आधार पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस प्रेक्षण की सर्वोत्तम व्याख्या करता है?
(RRB ALP CBT 1 16/02/2026 )
- थॉमसन का मॉडल (Plum Pudding Model): जे. जे. थॉमसन (1898) के अनुसार, परमाणु एक समान रूप से फैला हुआ धनावेशित गोला (Positive sphere) है, जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन बीच-बीच में उसी प्रकार धंसे होते हैं जैसे तरबूज में बीज।
- अल्फा कणों का सीधा गुजरना (थॉमसन के अनुसार): यदि थॉमसन का मॉडल सही था, तो धनावेश और द्रव्यमान पूरे परमाणु में बहुत हल्के और समान रूप से फैले होने चाहिए थे। इस स्थिति में, जब भारी और उच्च गति वाले अल्फा कण परमाणु से गुजरते, तो उन्हें रोकने या विक्षेपित करने के लिए कोई सघन केंद्र नहीं होता। इसलिए थॉमसन के मॉडल के आधार पर अधिकांश कणों का सीधे निकल जाना अपेक्षित था।
- मॉडल की विफलता: रदरफोर्ड के प्रयोग में कुछ अल्फा कण बड़े कोणों से विक्षेपित हो गए (यहाँ तक कि कुछ 180° पर वापस लौट आए)। थॉमसन का यह ‘समान वितरण’ वाला मॉडल इन बड़े विक्षेपणों (Large deflections) की व्याख्या करने में पूरी तरह विफल रहा, जिससे रदरफोर्ड को ‘नाभिक’ की खोज करनी पड़ी।
- धन आवेश और द्रव्यमान परमाणु के केंद्र में संकेंद्रित होते हैं: यह निष्कर्ष रदरफोर्ड (Rutherford) ने अपने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के बाद दिया था, थॉमसन ने नहीं।
- परमाणु में एक छोटा, सघन नाभिक होता है जो अल्फा कणों को प्रतिकर्षित करता है: यह भी रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की प्रमुख खोज है, जिसने समझाया कि अल्फा कण वापस क्यों लौटते हैं (समान धनावेशों के बीच प्रतिकर्षण)।
- इलेक्ट्रॉन स्थिर कक्षाओं में नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हैं: यह नील्स बोर (Niels Bohr) का परमाणु मॉडल है, जिसे उन्होंने 1913 में रदरफोर्ड के मॉडल की स्थिरता संबंधी कमियों को दूर करने के लिए प्रस्तुत किया था।
#33. ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक 8 है। इसका क्या अभिप्राय है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z): किसी भी तत्व का परमाणु क्रमांक उसके नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की कुल संख्या के ठीक बराबर होता है (Z = p)।
- उदासीन परमाणु (Neutral Atom): सामान्य अवस्था में (जब परमाणु पर कोई आयनिक आवेश न हो), एक परमाणु विद्युत रूप से उदासीन होता है। इसका मतलब है कि उसमें धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या, ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है (p = e)।
- निष्कर्ष: चूँकि ऑक्सीजन का परमाणु क्रमांक 8 है, इसलिए इसके नाभिक में निश्चित रूप से 8 प्रोटॉन हैं और संतुलन बनाए रखने के लिए इसकी बाहरी कक्षाओं में 8 इलेक्ट्रॉन चक्कर लगा रहे हैं।
- ऑक्सीजन के नाभिक में 8 न्यूट्रॉन होते हैं: हालांकि ऑक्सीजन के सबसे आम समस्थानिक (O-16) में 8 न्यूट्रॉन होते हैं, लेकिन ‘परमाणु क्रमांक 8’ होने की मूल परिभाषा प्रोटॉनों की संख्या से जुड़ी है, न्यूट्रॉनों से नहीं। (O-17 और O-18 समस्थानिकों में न्यूट्रॉन अलग होते हैं, फिर भी उनका परमाणु क्रमांक 8 ही रहता है)।
- ऑक्सीजन की कक्षा में 8 प्रोटॉन होते हैं: यह कथन वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह गलत है। प्रोटॉन कभी भी कक्षाओं (Orbits) में नहीं होते; वे हमेशा परमाणु के केंद्र (नाभिक) के अंदर मजबूती से बंधे होते हैं। कक्षाओं में केवल इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते हैं।
- ऑक्सीजन के प्रत्येक अणु में 8 परमाणु होते हैं: ऑक्सीजन एक द्विपरमाणुक (Diatomic) गैस है, जिसका अणुसूत्र O₂ होता है। अतः इसके एक अणु में केवल 2 परमाणु होते हैं, 8 नहीं (सल्फर के अणु S₈ में 8 परमाणु होते हैं)।
#34. सूत्र इकाई द्रव्यमान को ________ के रूप में परिभाषित किया जाता है।
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
- सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): आयनिक यौगिकों (जैसे सोडियम क्लोराइड – NaCl) के लिए ‘आणविक द्रव्यमान’ शब्द का प्रयोग सटीक नहीं होता, क्योंकि आयनिक यौगिक स्वतंत्र अणुओं के रूप में अस्तित्व में नहीं होते, बल्कि वे विपरीत आवेशित आयनों के एक त्रि-विमीय जालक (Lattice) के रूप में जुड़े होते हैं।
- परिभाषा: ऐसे यौगिकों के कुल द्रव्यमान को दर्शाने के लिए ‘सूत्र इकाई द्रव्यमान’ पद का उपयोग किया जाता है, जो किसी आयनिक यौगिक की सूत्र इकाई में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का कुल योग होता है (इसकी गणना भी आणविक द्रव्यमान की तरह ही की जाती है)।
- यौगिक के आणविक द्रव्यमान / एक अणु के द्रव्यमान: यह उन सहसंयोजक (Covalent) यौगिकों के लिए प्रयोग किया जाता है जो प्रकृति में स्वतंत्र अणुओं (जैसे H₂O, CO₂) के रूप में पाए जाते हैं, न कि आयनिक यौगिकों के लिए।
- सबसे हल्के तत्व के परमाणु द्रव्यमान: यह परमाणु द्रव्यमान के शुरुआती ऐतिहासिक मानकों (जैसे डाल्टन द्वारा हाइड्रोजन को मानना) से संबंधित है, इसका सूत्र इकाई द्रव्यमान की परिभाषा से कोई संबंध नहीं है।
#35. परमाणु का रदरफोर्ड मॉडल ________ का वर्णन नहीं करता है।
(RRB JE 26 May 2019 Shift 2 CBT 1)
- रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल और उसकी सीमा: अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने 1911 में परमाणु का सौरमंडल जैसा मॉडल प्रस्तुत किया था, जिसके अनुसार ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
- स्थिरता की समस्या (Maxwell’s Theory): मैक्सवेल के विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत (Electromagnetic theory) के अनुसार, जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) वृत्ताकार मार्ग पर त्वरित गति करता है, तो वह लगातार ऊर्जा विकीर्ण (radiate) करता है।
- इस सिद्धांत के अनुसार, ऊर्जा खोने के कारण इलेक्ट्रॉन अंततः spiraling करते हुए नाभिक में गिर जाने चाहिए थे, जिससे परमाणु नष्ट हो जाता। परंतु परमाणु स्थायी (Stable) होते हैं। रदरफोर्ड का मॉडल इस परमाणु की स्थिरता (Stability of atom) को समझाने में पूरी तरह असफल रहा था। बाद में नील्स बोर ने इसे स्पष्ट किया।
- नाभिक की उपस्थिति: रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग का मुख्य उद्देश्य और सबसे बड़ी खोज ही ‘नाभिक’ (Nucleus) की उपस्थिति का पता लगाना था। अतः यह मॉडल इसका वर्णन करता है।
- परमाणु का आवेश: इस मॉडल ने बताया कि परमाणु का संपूर्ण धनावेश उसके केंद्र (नाभिक) में केंद्रित होता है और कुल आवेश शून्य (उदासीन) होता है।
- इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति: रदरफोर्ड के मॉडल में यह स्पष्ट रूप से बताया गया था कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर चारों तरफ मौजूद होते हैं और चक्कर लगाते हैं।
#36. CaCl 2 के सूत्र इकाई द्रव्यमान को कौन-सा परिकलन सही ढंग से निर्धारित करता है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
- सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना (Formula Unit Mass Calculation): कैल्शयम क्लोराइड (CaCl₂) एक आयनिक यौगिक है। इसका सूत्र इकाई द्रव्यमान इसमें उपस्थित सभी आयनों/परमाणुओं के व्यक्तिगत परमाणु द्रव्यमानों के योग के बराबर होता है।
- कैल्शियम (Ca) का परमाणु द्रव्यमान = 40 u
- क्लोरीन (Cl) का परमाणु द्रव्यमान = 35.5 u
- चूँकि इस यौगिक के एक सूत्र में क्लोरीन के 2 परमाणु हैं, इसलिए क्लोरीन का कुल द्रव्यमान = 2 × 35.5 = 71 u
- अतः कुल सूत्र इकाई द्रव्यमान = 40 + 71 = 111 u
- Ca का परमाणविक द्रव्यमान + Cl का परमाणविक द्रव्यमान = 40 + 35.5 = 75.5 u: यह विकल्प इसलिए गलत है क्योंकि इसमें क्लोरीन (Cl) की संख्या 2 से गुणा नहीं की गई है, जबकि सूत्र (CaCl₂) के अनुसार क्लोरीन के दो परमाणु उपस्थित हैं।
- Ca का परमाणविक द्रव्यमान + (Cl का परमाणविक द्रव्यमान ÷ 2) = 57.75 u: यह परिकलन गलत है क्योंकि क्लोरीन के द्रव्यमान को 2 से भाग दे दिया गया है, जबकि यौगिक में क्लोरीन की संख्या दो होने के कारण उसका द्रव्यमान जुड़ना (गुणा होना) चाहिए, भाग नहीं।
- Ca का परमाणविक द्रव्यमान × Cl का परमाणविक द्रव्यमान = 1420 u: आणविक या सूत्र इकाई द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए हमेशा सभी परमाणुओं के द्रव्यमानों को **जोड़ा (Add)** जाता है, उनका **गुणा (Multiply)** नहीं किया जाता है।
#37. ओजोन परत किससे बनी है?
(RRB NTPC CBT-I : 11 Mar 2021 Shift 2)
- ओजोन (Ozone, O₃): ओजोन ऑक्सीजन का एक महत्वपूर्ण अपररूप (Allotrope) है। इसके एक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु आपस में सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े होते हैं, इसलिए रासायनिक रूप से इसे ‘ट्राई-ऑक्सीजन’ कहा जाता है।
- वायुमंडल में स्थिति: यह पृथ्वी के वायुमंडल की समताप मंडल (Stratosphere) परत में ओजोन परत के रूप में सांद्रित रहती है।
- महत्वपूर्ण कार्य: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet / UV) किरणों को अवशोषित कर लेती है और उन्हें पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रोकती है, जिससे जीव-जंतुओं और मनुष्यों की त्वचा के कैंसर आदि से रक्षा होती है।
- डाई-ऑक्सीजन (Di-oxygen, O₂): यह सामान्य वायुमंडलीय ऑक्सीजन गैस है जिसके एक अणु में ऑक्सीजन के दो परमाणु होते हैं। यह सभी जीवधारी श्वसन के लिए उपयोग करते हैं, न कि ओजोन परत के रूप में।
- मोनो-ऑक्सीजन (Mono-oxygen, O): यह ऑक्सीजन का स्वतंत्र परमाणु (Atomic oxygen) है, जो अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और अल्पकालिक (short-lived) होता है।
- टेट्रा-ऑक्सीजन (Tetra-oxygen, O₄): यह उच्च दाब की स्थिति में पाया जाने वाला ऑक्सीजन का एक metastable चरण (अस्थिर आणविक समूह) है, जो ओजोन परत का मुख्य या सामान्य घटक नहीं है।
#38. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की विशेषता का सटीक वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
- इलेक्ट्रॉन (Electron): इलेक्ट्रॉन परमाणु का एक अत्यंत हल्का और ऋणावेशित (Negatively charged) उप-परमाण्विक कण है।
- कक्षाओं में परिक्रमण: परमाणु के आधुनिक मॉडलों के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के अंदर नहीं रहते, बल्कि वे नाभिक के बाहर निश्चित ऊर्जा स्तरों, कक्षाओं (Orbits) या कक्षकों (Orbitals) में निरंतर चक्कर लगाते हैं।
- खोज: इसकी खोज 1897 में जे. जे. थॉमसन (J.J. Thomson) द्वारा की गई थी।
- ये नाभिक में स्थित होते हैं: यह गलत है क्योंकि नाभिक के भीतर केवल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन (न्यूक्लिऑन) पाए जाते हैं; इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर होते हैं।
- ये धनावेशित होते हैं: यह गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित (Negative charge) कण है, जबकि धनावेशित कण प्रोटॉन होता है।
- इनका द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के बराबर होता है: यह पूरी तरह गलत है। एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान का लगभग 1/1836 वाँ हिस्सा होता है, जो कि व्यावहारिक रूप से नगण्य (Negligible) माना जाता है।
#39. 1995 में, भौतिकविदों एरिक कॉर्नल और कार्ल वीमन ने किस आइसोटोप का उपयोग करके पहला बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BECs) बनाया?
(RRB NTPC UG CBT-I : 13 Aug, 2025 Shift 3)
- पहला बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC): वर्ष 1995 में भौतिकविदों एरिक कॉर्नल (Eric Cornell) और कार्ल वीमन (Carl Wieman) ने जिलैंट और कोलोराडो विश्वविद्यालय में रूबी़डियम-87 (Rb-87) गैस के परमाणुओं को अत्यंत कम तापमान (परम शून्य के बहुत निकट) पर ठंडा करके पहली बार प्रायोगिक रूप से ‘बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट’ (पदार्थ की पाँचवीं अवस्था) का निर्माण किया था। इस उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें 2001 का भौतिकي का नोबेल पुरस्कार भी मिला था।
- बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC): यह पदार्थ की वह अवस्था है जो तब बनती है जब बोसॉन (Bosons) कणों के एक अत्यंत तनु गैस को निरपेक्ष शून्य (Absolute zero, 0 K या -273.15 °C) के करीब ठंडा किया जाता है, जिससे सभी परमाणु एक ही क्वांटम अवस्था में आ जाते हैं।
- सीज़ियम-133 (Cs-133): यह सीज़ियम का एकमात्र प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला स्थिर समस्थानिक है। इसका उपयोग वर्तमान में समय की मानक परिभाषा (Atomic Clock) और सेकंड (Second) की अंतरराष्ट्रीय इकाई को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, न कि प्रथम बीईसी (BEC) बनाने में।
- सोडियम-23 (Na-23) और थोरियम-232 (Th-232): सोडियम-23 सोडियम का एक स्थिर समस्थानिक है और थोरियम-232 एक रेडियोधर्मी actinide है (जिसका उपयोग परमाणु ईंधन के रूप में किया जाता है)। इनमें से किसी का भी उपयोग 1995 के मूल बीईसी प्रयोग में नहीं किया गया था।
#40. निम्नलिखित में से कौन-सा कण, द्रव्यमान संख्या में योगदान देता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या उसके नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों (Protons) और न्यूट्रॉनों (Neutrons) की कुल संख्या का योग होती है। इसे सूत्र A = p + n द्वारा दर्शाया जाता है।
- न्यूक्लिऑन (Nucleons): प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों नाभिक के भीतर स्थित भारी कण हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ कहा जाता है। किसी भी परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान मुख्य रूप से इन्हीं दोनों कणों के कारण होता है।
- केवल इलेक्ट्रॉन / इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत ही कम (प्रोटॉन का लगभग 1/1836 वाँ हिस्सा) होता है, जो कि व्यावहारिक रूप से नगण्य (Negligible) माना जाता है। इसलिए इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान संख्या में कोई महत्वपूर्ण योगदान नहीं देते हैं।
- केवल प्रोटॉन: हालांकि प्रोटॉन द्रव्यमान संख्या में योगदान देता है, लेकिन सामान्य हाइड्रोजन को छोड़कर अधिकांश तत्वों के नाभिक में न्यूट्रॉन भी मौजूद होते हैं। इसलिए केवल प्रोटॉन कहना अपूर्ण है; द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों के योग पर निर्भर करती है।
#41. जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों, तो किया गया कार्य होगा:
(RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 3)
- कार्य का सूत्र (Formula of Work): किया गया कार्य ($W$) बल ($F$), विस्थापन ($s$) और उनके बीच के कोण ($\theta$) के कोसाइन के गुणनफल के बराबर होता है:
$W = F \cdot s \cdot \cos(\theta)$ - सकारात्मक कार्य (Positive Work): जब बल और विस्थापन दोनों एक ही दिशा में होते हैं, तो उनके बीच का कोण $\theta = 0^\circ$ होता है। चूँकि $\cos(0^\circ) = +1$ होता है, इसलिए किया गया कार्य धनात्मक या सकारात्मक (Positive) होता है ($W = F \cdot s$)।
- उदाहरण: जब किसी वस्तु को जमीन से ऊपर उठाया जाता है या किसी चलती हुई गाड़ी पर उसी की दिशा में बल लगाया जाता है, तो किया गया कार्य सकारात्मक होता है।
- नकारात्मक (Negative): कार्य तब नकारात्मक होता है जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के विपरीत दिशा में (यानी $180^\circ$ के कोण पर) कार्य करते हैं (जैसे घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य)।
- शून्य (Zero): कार्य तब शून्य होता है जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत (Perpendicular, यानी $90^\circ$ के कोण पर) होते हैं (जैसे कुली द्वारा सिर पर सामान रखकर चलने पर गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य)।
- सकारात्मक या नकारात्मक: यह विकल्प तब सही होता जब दिशाएं अनिश्चित होतीं, लेकिन चूँकि प्रश्न में स्पष्ट रूप से ‘एक ही दिशा’ में कहा गया है, इसलिए परिणाम निश्चित रूप से केवल सकारात्मक ही होगा।
#42. निम्नलिखित में से HNO 3 का आणविक द्रव्यमान कितना है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 1)
- आणविक द्रव्यमान की गणना (Calculation of Molecular Mass): नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) का आणविक द्रव्यमान निकालने के लिए इसमें उपस्थित सभी अलग-अलग तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों को उनके परमाणु की संख्या से गुणा करके जोड़ा जाता है:
- हाइड्रोजन (H) का परमाणु द्रव्यमान = 1 u (1 परमाणु × 1 u = 1 u)
- नाइट्रोजन (N) का परमाणु द्रव्यमान = 14 u (1 परमाणु × 14 u = 14 u)
- ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान = 16 u (3 परमाणु × 16 u = 48 u)
- अतः कुल आणविक द्रव्यमान = 1 + 14 + 48 = 63 u
- 64 u, 67 u और 60 u: ये मान नाइट्रिक अम्ल के सही परमाणु द्रव्यमान योग (1 + 14 + 48 = 63) से मेल नहीं खाते हैं। ये गलत जोड़ या गुणा के परिणामस्वरूप आए विकल्प हैं।
#43. मैंडेलीफ का आवर्त नियम किस पर आधारित है?
(RRB JE CBT I :- 2 June 2019 Shift 1)
- मैंडेलीफ का आवर्त नियम (Mendeleev’s Periodic Law): रूसी रसायनज्ञ दमित्री मैंडेलीफ (Dmitri Mendeleev) ने 1869 में अपनी आवर्त सारणी प्रस्तुत की थी। उनके मूल आवर्त नियम के अनुसार, “तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) के आवर्ती फलन (Periodic function) होते हैं।”
- व्यवस्था: मैंडेलीफ ने उस समय ज्ञात सभी तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार (Atomic Weight/Mass) के क्रम में क्षैतिज पंक्तियों (आवर्त) और ऊर्ध्वाधर स्तंभों (समूह) में व्यवस्थित किया था।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: चूंकि उस कालखंड में उप-परमाण्विक कणों और परमाणु क्रमांक (Atomic number) की खोज नहीं हुई थी, इसलिए परमाणु द्रव्यमान ही तत्वों के वर्गीकरण का मुख्य आधार था।
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number): यह आधुनिक आवर्त नियम (Modern Periodic Law) का आधार है, जिसे 1913 में हेनरी मोजले (Henry Moseley) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। मोजले के अनुसार आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक पर आधारित है, न कि परमाणु द्रव्यमान पर।
- न्यूट्रॉनों की संख्या और परमाणु त्रिज्या: इनका मैंडेलीफ के मूल आवर्त नियम या आवर्त सारणी के वर्गीकरण के मूल आधार से कोई संबंध नहीं है।
#44. क्लोरीन का आंशिक परमाणु द्रव्यमान ( fractional atomic mass) निम्नलिखित में से किसके कारण होता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
- आंशिक या भिन्नात्मक परमाणु द्रव्यमान (Fractional Atomic Mass): जब किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान पूर्णांक (Whole number) में न होकर दशमलव (Fraction/Decimal) में प्राप्त होता है, तो उसका मुख्य कारण प्रकृति में उस तत्व के समस्थानिकों (Isotopes) का अलग-अलग प्रतिशत मात्रा (Abundance) में पाया जाना होता है।
- क्लोरीन का उदाहरण: क्लोरीन प्रकृति में मुख्य रूप से दो स्थिर समस्थानिकों के रूप में पाया जाता है:
• Cl-35 (लगभग 75% मात्रा)
• Cl-37 (लगभग 25% मात्रा) - औसत द्रव्यमान गणना: जब इन दोनों समस्थानिकों की प्राकृतिक उपलब्धता (प्रतिशतता) को ध्यान में रखकर इनका औसत परमाणु द्रव्यमान निकाला जाता है, तो यह मान लगभग 35.5 u प्राप्त होता है। यही कारण है कि क्लोरीन का परमाणु द्रव्यमान भिन्नात्मक होता है।
- प्रायोगिक त्रुटि (Experimental error): आधुनिक विज्ञान में परमाणु द्रव्यमान उच्च-शुद्धता वाले मास स्पेक्ट्रॉमिटर (Mass Spectrometer) द्वारा अत्यंत सटीक रूप से मापे जाते हैं; अतः भिन्नात्मक मान किसी प्रयोगशाला या प्रायोगिक त्रुटि के कारण नहीं होता।
- आयनों की उपस्थिति और इसकी यौगिक प्रकृति: तत्वों का परमाणु द्रव्यमान उनके स्वतंत्र परमाणु स्तर पर समस्थानिकों के मिश्रण पर निर्भर करता है, न कि उनके आयनों बनने या यौगिक बनाने की प्रकृति पर।
#45. निम्नलिखित में से कौन-सा कण, द्रव्यमान संख्या में योगदान देता है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या उसके नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों (Protons) और न्यूट्रॉनों (Neutrons) की कुल संख्या का योग होती है। इसे सूत्र A = p + n द्वारा दर्शाया जाता है।
- न्यूक्लिऑन (Nucleons): प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों नाभिक के भीतर स्थित भारी कण हैं, जिन्हें संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ कहा जाता है। किसी भी परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान मुख्य रूप से इन्हीं दोनों कणों के कारण होता है।
- इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन / केवल इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत ही कम (प्रोटॉन के द्रव्यमान का लगभग 1/1836 वाँ हिस्सा) होता है, जिसे व्यावहारिक रूप से नगण्य (Negligible) माना जाता है। इसलिए इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान संख्या में कोई महत्वपूर्ण योगदान नहीं देते हैं।
- केवल प्रोटॉन: हालांकि प्रोटॉन द्रव्यमान संख्या में योगदान देता है, लेकिन सामान्य हाइड्रोजन (प्रोटियम) को छोड़कर ब्रह्मांड के लगभग सभी तत्वों के नाभिक में न्यूट्रॉन भी मौजूद होते हैं। इसलिए केवल प्रोटॉन कहना अपूर्ण है; द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों के योग पर निर्भर करती है।
#46. पॉइंसन समीकरण, जिसका उपयोग अक्सर किसी पदार्थ के प्रत्यास्थ गुणों का वर्णन करने के लिए किया जाता है, किस ग्रीक अक्षर द्वारा दर्शाया जाता है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 13 Dec, 2024 Shift 1)
- पॉइंसन अनुपात (Poisson’s Ratio): यह सामग्री विज्ञान और ठोस यांत्रिकी (Solid mechanics) में किसी पदार्थ के प्रत्यास्थ गुणों (Elastic properties) को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण गुणांक है। इसे फ्रांसीसी भौतिकবিদ सिमोन डेनिस पॉइंसन के नाम पर रखा गया है।
- प्रतीक: इसे ग्रीक अक्षर नू ($\nu$ – Nu) द्वारा दर्शाया जाता है।
- परिभाषा: यह अनुप्रस्थ विकृति (Transverse strain) और अनुदैर्ध्य विकृति (Axial/Longitudinal strain) का ऋणात्मक अनुपात होता है। सामान्य पदार्थों (जैसे धातुएँ, रबर) के लिए इसका मान 0 से 0.5 के बीच होता है।
- टाँ (Tau – $\tau$): इसका उपयोग आमतौर पर भौतिकी और इंजीनियरिंग में ‘कर्तन प्रतिबल’ (Shear stress) को दर्शाने के लिए किया जाता है।
- एप्सिलॉन (Epsilon – $\epsilon$): इसका उपयोग यांत्रिकी में ‘विकृति’ (Strain) को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
- कैपा (Kappa – $\kappa$): इसका उपयोग विभिन्न संदर्भों में जैसे कि तापीय चालकता, संपीड्यता या स्प्रिंग नियतांक आदि के लिए किया जाता है, न कि पॉइंसन अनुपात के लिए।
#47. कार्बन डाइऑक्साइड का आणविक द्रव्यमान ________ है।
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
- आणविक द्रव्यमान की गणना (Calculation of Molecular Mass): कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के एक अणु का आणविक द्रव्यमान उसमें उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग के बराबर होता है:
- कार्बन (C) का परमाणु द्रव्यमान = 12 u (1 परमाणु × 12 u = 12 u)
- ऑक्सीजन (O) का परमाणु द्रव्यमान = 16 u (2 परमाणु × 16 u = 32 u)
- अतः कुल आणविक द्रव्यमान = 12 + 32 = 44 u (या 44 amu)
- 32 amu: यह केवल ऑक्सीजन के एक अणु (O₂) का आणविक द्रव्यमान है (16 × 2 = 32), न कि कार्बन डाइऑक्साइड का।
- 28 amu: यह कार्बन मोनोऑक्साइड (CO: 12 + 16 = 28) या नाइट्रोजन गैस (N₂: 14 × 2 = 28) का आणविक द्रव्यमान है।
- 50 amu: यह मान कार्बन डाइऑक्साइड के सही परमाणु द्रव्यमान योग (12 + 32 = 44) से मेल नहीं खाता है और एक गलत परिकलन परिणाम है।
#48. जल की अपघटन अभिक्रिया में ________ और ________ का निर्माण होता है।
(RPF Constable 2018 08 Feb 2019)
- जल का विद्युत अपघटन (Electrolysis of Water): जब अम्लीय जल में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो जल (H₂O) विघटित होकर अपने मूल तत्वों में टूट जाता है। इस रासायनिक अभिक्रिया के दौरान कैथोड पर हाइड्रोजन गैस (H₂) और एनोड पर ऑक्सीजन गैस (O₂) मुक्त होती है।
- रासायनिक समीकरण:
$2H_2O (l) \xrightarrow{\text{विद्युत धारा}} 2H_2 (g) + O_2 (g)$ - आयतन का अनुपात: इस प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों के आयतन का अनुपात हमेशा 2:1 होता है (अर्थात हाइड्रोजन गैस की मात्रा ऑक्सीजन से दोगुनी होती है)।
- ऑक्सीजन, ओजोन: जल के विद्युत अपघटन से ओजोन गैस का निर्माण नहीं होता है; ओजोन मुख्य रूप से समताप मंडल में पराबैंगनी किरणों की क्रिया द्वारा ऑक्सीजन से बनती है।
- इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और हाइड्रोजन, न्यूट्रॉन: जल के रासायनिक अपघटन (रासायनिक प्रतिक्रिया) में परमाणु के उप-परमाण्विक कण (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन या न्यूट्रॉन) अलग नहीं होते हैं, बल्कि परमाणु और अणु ही टूटकर नई गैसों का निर्माण करते हैं।
#49. नूक्लीऑन, परमाणु में पाए जाने वाले अवरमाणविक कण होते हैं। इनमें ________ शामिल होते हैं।
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )
- न्यूक्लिऑन (Nucleons): परमाणु के केंद्र यानी नाभिक (Nucleus) के अंदर पाए जाने वाले उप-परमाण्विक कणों को संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ कहा जाता है।
- घटक: इसमें धनावेशित प्रोटॉन (Protons) और आवेशहीन या उदासीन न्यूट्रॉन (Neutrons) दोनों शामिल होते हैं। परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान इन्हीं कणों के योग (द्रव्यमान संख्या) के कारण होता है।
- इलेक्ट्रॉन: इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर निश्चित ऊर्जा स्तरों या कक्षाओं (Orbits) में चक्कर लगाते हैं। वे नाभिक के भीतर स्थित नहीं होते, इसलिए उन्हें न्यूक्लिऑन नहीं माना जाता।
- केवल न्यूट्रॉन / केवल प्रोटॉन: नाभिक में केवल एक प्रकार के कण नहीं होते हैं (सामान्य हाइड्रोजन के समस्थानिक प्रोटियम को छोड़कर, जिसमें केवल एक प्रोटॉन होता है और न्यूट्रॉन नहीं होता)। सामान्यतः परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों एक साथ मौजूद होते हैं, इसलिए केवल एक का विकल्प अधूरा है।
#50. जल का ________ बनाने के लिए, दो हाइड्रोजन अणु ऑक्सीजन के एक अणु से मिलते हैं।
(RPF Constable 2018 18 Jan 2019 Shift 3)
- रासायनिक समीकरण (Chemical Equation): जल के निर्माण की संतुलित रासायनिक समीकरण के अनुसार, जब हाइड्रोजन के दो अणु (2H₂) ऑक्सीजन के एक अणु (O₂) के साथ संयोग करते हैं, तो जल (H₂O) के कुल दो अणु बनते हैं।
- समीकरण:
$2H_2 + O_2 \rightarrow 2H_2O$ - इस संतुलित समीकरण से स्पष्ट है कि अभिकारकों (Reactants) और उत्पादों (Products) दोनों तरफ परमाणुओं की संख्या समान रहती है (द्रव्यमान संरक्षण का नियम)।
- एक अणु: यदि केवल एक अणु बनता, तो समीकरण $2H_2 + O_2 \rightarrow H_2O$ होती, जो कि रासायनिक रूप से संतुलित नहीं है (क्योंकि दाईं ओर ऑक्सीजन के दो परमाणु हैं और बाईं ओर भी दो होने चाहिए)। संतुलित करने पर दो अणु ही प्राप्त होते हैं।
- तीन अणु और चार अणु: ये संख्याएं संतुलित रासायनिक समीकरण के stoichiometric गुणांकों से मेल नहीं खाती हैं, अतः ये गलत हैं।
#51. किसी तत्व के इलेक्ट्रॉन द्वारा क्षय की प्रवृत्ति का मात्रात्मक माप क्या है?
(RPF SI 2018 : 16 Jan 2019 Shift 3)
- आयनीकरण तापीय धारिता (Ionization Enthalpy / Ionization Energy): किसी विलगित गैसीय परमाणु के सबसे बाहरी कोश से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने (यानी इलेक्ट्रॉन के क्षय/त्याग) के लिए जितनी न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे आयनीकरण एंथैल्पी या आयनन विभव कहा जाता है।
- मात्रात्मक माप: यह किसी तत्व के परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति का एक सटीक मात्रात्मक माप (Quantitative measure) है। जिस तत्व की आयनीकरण ऊर्जा जितनी कम होती है, उसके लिए इलेक्ट्रॉन का त्याग करना उतना ही आसान होता है (यानी उसकी धात्विक प्रवृत्ति उतनी ही अधिक होती है)।
- वैद्युती ऋणात्मकता (Electronegativity): यह किसी सहसंयोजक आबंध में साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता का माप है, न कि इलेक्ट्रॉन त्यागने या क्षय करने का।
- परमाणु त्रिज्या और आयन की त्रिज्या (Atomic and Ionic Radius): ये परमाणु या आयन के आकार (Size) को दर्शाती हैं, जो इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति को प्रभावित तो करती हैं, परंतु यह सीधे तौर पर उसका मात्रात्मक माप नहीं हैं।
#52. एक परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या के रूप में जाना जाता है-
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित कुल प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या के योग को उस परमाणु की द्रव्यमान संख्या कहा जाता है। इसे प्रतीक A से दर्शाया जाता है।
- सूत्र: $\text{द्रव्यमान संख्या (A)} = \text{प्रोटॉनों की संख्या (p)} + \text{न्यूट्रॉनों की संख्या (n)}$
- चूँकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों नाभिक के भीतर स्थित होते हैं और परमाणु के लगभग संपूर्ण द्रव्यमान का निर्माण करते हैं, इन्हें संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ (Nucleons) भी कहा जाता है।
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z): यह केवल किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की कुल संख्या (या उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या) को दर्शाता है, न कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के योग को।
- आवोगाद्रो संख्या (Avogadro Number): यह पदार्थ की मात्रा (मोल) से संबंधित एक स्थिर संख्या है ($6.022 \times 10^{23}$ प्रति मोल), जो किसी एक परमाणु के नाभिकीय कणों से संबंधित नहीं है।
- गोस संख्या (Gauss Number): यह भौतिकी और गणित में विद्युत क्षेत्र या अन्य क्षेत्रों से जुड़ी अवधारणा (जैसे गॉस का नियम) है, जिसका परमाणु के नाभिकीय कणों से कोई संबंध नहीं है।
#53. CaCl 2 के सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना कीजिए।
(RRB JE Electronics 01 Sep 2019 Shift 2)
- सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना (Formula Unit Mass Calculation): कैल्सियम क्लोराइड (CaCl₂) एक आयनिक यौगिक है। इसका सूत्र इकाई द्रव्यमान इसमें उपस्थित सभी आयनों/परमाणुओं के व्यक्तिगत परमाणु द्रव्यमानों के योग के बराबर होता है।
- कैल्शियम (Ca) का परमाणु द्रव्यमान = 40 u
- क्लोरीन (Cl) का परमाणु द्रव्यमान = 35.5 u
- चूँकि इस यौगिक के एक सूत्र में क्लोरीन के 2 परमाणु हैं, इसलिए क्लोरीन का कुल द्रव्यमान = $2 \times 35.5 = \mathbf{71\ u}$
- अतः कुल सूत्र इकाई द्रव्यमान = $40 + 71 = \mathbf{111\ U}$ (या 111 u)
- 112 U, 110 U और 100 U: ये मान सही गणना (40 + 71 = 111) से मेल नहीं खाते हैं। ये परिकलन के दौरान हुई मामूली गणनात्मक त्रुटियों या गलत विकल्पों के उदाहरण हैं।
#54. रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्री प्रयोग ने परमाणु की संरचना के बारे में क्या निष्कर्ष निकाला?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 2)
- रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्री प्रयोग (Rutherford’s Gold Foil Experiment): 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अपने सहयोगियों (गीगर और मार्सडाइन) के साथ सोने की बहुत पतلي पन्नी पर तीव्रगामी अल्फा ($\alpha$) कणों की बौछार की थी।
- मुख्य निष्कर्ष:
1. पन्नी से अधिकांश अल्फा कण बिना किसी विक्षेपण के सीधे निकल गए, जिससे यह साबित हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है।
2. कुछ कण बहुत छोटे कोणों पर विक्षेपित हुए, जिससे यह पता चला कि परमाणु का धनावेश बहुत कम आयतन में केंद्रित है।
3. बहुत कम (लगभग 12000 में से 1) अल्फा कण वापस अपने ही मार्ग पर लौट आए, जिससे यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु के केंद्र में एक अति सघन, कठोर और धनावेशित भाग होता है जिसे ‘नाभिक’ (Nucleus) कहा जाता है, और इसके चारों ओर ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते हैं।
- परमाणु अविभाज्य और ठोस गोले हैं: यह जॉन डाल्टन के परमाणु सिद्धांत (Dalton’s Atomic Theory) का कथन है, जिसे बाद में उप-परमाण्विक कणों की खोज के बाद गलत साबित कर दिया गया था।
- परमाणुओं में एक समान धनात्मक आवेश होता है जो उनके पूरे आयतन में फैला होता है: यह जे. जे. थॉमसन के ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ (Thomson’s Atomic Model) का विवरण है, जिसे रदरफोर्ड के प्रयोग ने गलत साबित कर दिया था।
- परमाणु प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉनों से बने होते हैं जो एक यादृच्छिक व्यवस्था में होते हैं: कणों की व्यवस्था यादृच्छिक (Random) नहीं होती; बल्कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर निश्चित कक्षाओं में व्यवस्थित होते हैं।
#55. ऑक्सीकरण को किस रूप में परिभाषित किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
- ऑक्सीकरण (Oxidation): आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा के अनुसार, ऑक्सीकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें किसी परमाणु, आयन या अणु द्वारा इलेक्ट्रॉनों का त्याग (Loss of electrons) किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state) में वृद्धि होती है।
- अन्य प्रमुख परिभाषाएँ:
• ऑक्सीजन का जुड़ना (Addition of oxygen)
• हाइड्रोजन का हटना (Removal of hydrogen)
• धनावेश में वृद्धि या ऋनावेश में कमी।
- याद रखने की लोकप्रिय ट्रिक: “OIL RIG” ➔ Oxidation Is Loss (इलेक्ट्रॉनों का छूटना/हानि = ऑक्सीकरण) और Reduction Is Gain (इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण = अपचयन)।
- इलेक्ट्रॉनों के लाभ (Gain of electrons): इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने या लाभ की प्रक्रिया को **अपचयन (Reduction)** कहा जाता है, न कि ऑक्सीकरण।
- प्रोटॉनों की हानि और न्यूट्रॉनों के लाभ: सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं (रेडॉक्स अभिक्रियाओं) में परमाणु के नाभिकीय कण यानी प्रोटॉन और न्यूट्रॉन अपनी जगह से विस्थापित नहीं होते हैं; रासायनिक अभिक्रियाओं में केवल बाहरी कक्षीय इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान होता है।
#56. ‘बोर के परमाणु मॉडल’ के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )
- बोर का परमाणु मॉडल (Bohr’s Atomic Model): नील्स बोर ने 1913 में रदरफोर्ड मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए यह मॉडल प्रस्तुत किया था। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- विविक्त कक्षाएँ (Discrete Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित और अनुमत ऊर्जा स्तरों या कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें विविक्त कक्षाएँ या कोश (K, L, M, N…) कहा जाता है।
- ऊर्जा का गैर-विकिरण: जब तक इलेक्ट्रॉन इन निश्चित विविक्त कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, तब तक उनकी ऊर्जा का ह्रास या विकिरण (Radiation) नहीं होता है, जिससे परमाणु का स्थायित्व बना रहता है।
- विविक्त कक्षाओं में घूमते समय, इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकीर्ण करते हैं: यह कथन गलत है; बोर मॉडल के अनुसार विविक्त (स्थिर) कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं।
- विविक्त कक्षाओं में घूमते समय, इलेक्ट्रॉन अस्तित्व में नहीं होते हैं: यह पूरी तरह तर्कहीन और गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉन कक्षाओं में चक्कर लगाते हुए भी अपना भौतिक अस्तित्व बनाए रखते हैं।
- अन्य विकल्प भ्रामक शब्दाوبियों पर आधारित हैं जो बोर के मुख्य सिद्धांतों से मेल नहीं खाते।
#57. अवरमाणुक ( subatomic) कणों की खोज से डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की कौन-सी अवधारणा ( postulate) गलत सिद्ध हुई?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 16/03/2026 )
- डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton’s Atomic Theory): जॉन डाल्टन ने 1808 में अपना प्रसिद्ध परमाणु सिद्धांत प्रतिपादित किया था। इस सिद्धांत की एक मुख्य अवधारणा यह थी कि “प्रत्येक पदार्थ (द्रव्य) अत्यंत सूक्ष्म और अविभाज्य कणों (परमाणुओं) से मिलकर बना होता है, जिन्हें आगे विभाजित नहीं किया जा सकता।” (Atoms are indivisible).
- उप-परमाण्विक कणों की खोज: बाद में 19वीं और 20वीं शताब्दी के आरंभ में इलेक्ट्रॉन (थॉमसन), प्रोटॉन (गोल्डस्टीन/रदरफोर्ड) और न्यूट्रॉन (चैडविक) जैसे उप-परमाण्विक (Subatomic) कणों की खोज हुई।
- निष्कर्ष: इन कणों की खोज ने यह साबित कर दिया कि परमाणु वास्तव में अविभाज्य नहीं है, बल्कि यह स्वयं छोटे-छोटे उप-परमाण्विक कणों से मिलकर बना है। इस प्रकार डाल्टन की “परमाणु के अविभाज्य होने” की अवधारणा गलत सिद्ध हो गई।
- समान तत्व के समस्थानिकों का द्रव्यमान भिन्न-भिन्न होता है / विभिन्न तत्वों के परमाणुओं का द्रव्यमान भिन्न-भिन्न होता है: डाल्टन के सिद्धांत के अनुसार एक ही तत्व के सभी परमाणु सभी प्रकार से (द्रव्यमान में भी) समान होते हैं। समस्थानिकों (Isotopes) की खोज से यह पहलू संशोधित हुआ कि एक ही तत्व के परमाणु अलग-अलग द्रव्यमान (न्यूट्रॉनों की अलग संख्या के कारण) के हो सकते हैं, लेकिन यह उप-परमाण्विक कणों की खोज से सीधे तौर पर जुड़ी ‘अविभाज्य’ अवधारणा से अलग बात है।
- रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु अपनी पहचान बनाए रखते हैं: यह अवधारणा रासायनिक परिवर्तनों के संदर्भ में आज भी काफी हद तक मान्य है, क्योंकि अभिक्रियाओं में परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं, नष्ट नहीं होते।
#58. किसी पदार्थ के 1 मोल का द्रव्यमान कहलाता है
– (RPF Constable 2018 17 Feb 2019)
- मोलर द्रव्यमान (Molar Mass / दाढ़ जन): किसी पदार्थ के एक मोल (1 Mole) मात्रा के कुल द्रव्यमान को उसका मोलर द्रव्यमान कहा जाता है।
- कणों की संख्या: किसी भी पदार्थ के एक मोल में उसके ठीक $6.022 \times 10^{23}$ कण (परमाणु, अणु या आयन) मौजूद होते हैं (आवोगाद्रो संख्या)।
- इकाई: इसे सामान्यतः ग्राम प्रति मोल (g/mol) में व्यक्त किया जाता है। (नोट: रेलवे परीक्षाओं के कुछ डिजिटल प्रश्नपत्रों में ‘Molar mass’ का मशीनी अनुवाद त्रुटिवश ‘दाढ़ जन’ छप जाता है)।
- परमाण्विक भार और परमाणु भार (Atomic Weight / Atomic Mass): यह किसी तत्व के केवल एक एकल परमाणु का द्रव्यमान होता है (जिसे ‘u’ या ‘amu’ में दर्शाया जाता है), न कि पूरे एक मोल (असंख्य कणों) का द्रव्यमान।
- सहसंयोजक द्रव्यमान (Covalent Mass): यह सहसंयोजक बंधों से बने यौगिकों के अणुओं के द्रव्यमान से संबंधित एक संदर्भगत शब्द है, जो मोल की मूल परिभाषा को पूर्ण नहीं करता।
#59. सोडियम क्लोराइड ( NaCl) का सूत्र इकाई द्रव्यमान कितना होता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
- सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना (Formula Unit Mass Calculation): सोडियम क्लोराइड (NaCl) एक आयनिक यौगिक है। इसका सूत्र इकाई द्रव्यमान इसमें उपस्थित सोडियम (Na) और क्लोरीन (Cl) के व्यक्तिगत परमाणु द्रव्यमानों के योग के बराबर होता है।
- सोडियम (Na) का परमाणु द्रव्यमान = 23 u
- क्लोरीन (Cl) का परमाणु द्रव्यमान = 35.5 u
- अतः कुल सूत्र इकाई द्रव्यमान = $23 + 35.5 = \mathbf{58.5\ u}$
- 23 u: यह केवल सोडियम (Na) परमाणु का परमाणु द्रव्यमान है, न कि पूरे यौगिक का।
- 35.5 u: यह केवल क्लोरीन (Cl) परमाणु का परमाणु द्रव्यमान है।
- 57 u: यह मान सही जोड़ (23 + 35.5 = 58.5) से मेल नहीं खाता है और एक गलत परिकलन परिणाम है।
#60. थॉमसन के परमाणु मॉडल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)
- थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Atomic Model): जे. जे. थॉमसन ने 1898 में परमाणु की संरचना को समझाने के लिए अपना मॉडल प्रस्तुत किया था, जिसे अक्सर ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ (Plum Pudding Model) या ‘तरबूज मॉडल’ (Watermelon Model) भी कहा जाता है।
- मुख्य विशेषताएँ:
1. परमाणु एक धनावेशित गोला होता है जिसका कुल धनात्मक आवेश उसके पूरे आयतन में एकसमान रूप से फैला होता है।
2. ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन इस धनावेशित गोले में इस प्रकार जड़े (Embedded) रहते हैं जैसे तरबूज के अंदर काले बीज धंसे होते हैं।
3. विद्युत उदासीनता: थॉमसन के अनुसार, परमाणु में ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में बिल्कुल समान होते हैं, जिसके कारण परमाणु समग्र रूप से (As a whole) विद्युत उदासीन (Electrically neutral) होता है।
- अतः विकल्प जिसमें कहा गया है कि आवेश समान नहीं हैं और परमाणु उदासीन नहीं है, वह इस मॉडल के संबंध में असत्य (गलत) कथन है।
- परमाणु में धनात्मक आवेश तरबूज के खाने योग्य भाग की तरह फैला हुआ है…: यह थॉमसन मॉडल की मानक और सही तुलना है, इसलिए यह कथन सत्य है।
- ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में समान हैं। इसलिए, परमाणु समग्र रूप से विधुत उदासीन है: यह थॉमसन के मॉडल का एक मूल और सही सिद्धांत है।
- एक परमाणु में एक धनात्मक आवेशित गोला होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें अंतर्निहित होते हैं: यह भी थॉमसन के मॉडल का बिल्कुल सही वर्णन है।
#61. सहसंयोजक आबंध किसके द्वारा बनते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )
- सहसंयोजक आबंध (Covalent Bond): जब दो या दो से अधिक परमाणु अपने बाहरी कोश (Valence shell) के इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी (Sharing) करके अपना अष्टक (Octet) या द्विक पूरा करते हैं और रासायनिक आबंध बनाते हैं, तो उसे सहसंयोजक आबंध कहा जाता है।
- उदाहरण: हाइड्रोजन ($H_2$), ऑक्सीजन ($O_2$), नाइट्रोजन ($N_2$), जल ($H_2O$) और मीथेन ($CH_4$) आदि अणुओं में सहसंयोजक आबंध पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, जल के अणु में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है।
- इलेक्ट्रॉनों के अंतरण (Transfer of electrons): इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण (दान और ग्रहण) के द्वारा आयनिक आबंध या वैद्युत संयोजी आबंध (Ionic/Electrovalent Bond) का निर्माण होता है (जैसे $NaCl$ में), न कि सहसंयोजक आबंध का।
- प्रोटॉनों के त्याग और न्यूट्रॉनों के ग्रहण: रासायनिक अभिक्रियाओं और आबंध निर्माण में परमाणु के नाभिकीय कणों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) का कोई सीधा आदान-प्रदान या भागीदारी नहीं होती है; आबंध निर्माण पूरी तरह से बाहरी कक्षीय इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करता है।
#62. किसी तत्व की परमाणु संख्या नाभिक में ________ की संख्या के बराबर होती है।
(RRB JE 24 May 2019 Shift 3 CBT 1)
- परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z): किसी तत्व के एक परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को उस तत्व का परमाणु क्रमांक (या परमाणु संख्या) कहा जाता है। इसे अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘Z’ द्वारा दर्शाया जाता है।
- उदासीन परमाणु में स्थिति: चूँकि एक सामान्य और उदासीन (Neutral) परमाणु में धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बिल्कुल बराबर होती है, इसलिए परमाणु क्रमांक इलेक्ट्रॉनों की संख्या के भी बराबर माना जाता है; परंतु मूलभूत परिभाषा के अनुसार यह नाभिक में मौजूद प्रोटॉनों की संख्या ही होती है।
- न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन आवेशहीन कण होते हैं और इनकी संख्या भिन्न-भिन्न हो सकती है (समस्थानिकों में), जिससे परमाणु क्रमांक तय नहीं होता; न्यूट्रॉन और प्रोटॉन का योग द्रव्यमान संख्या बनाता है।
- इलेक्ट्रॉन: हालांकि उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन के बराबर होते हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉन रासायनिक बंध बनने के दौरान बाहर जा सकते हैं या ग्रहण हो सकते हैं (आयन बन सकते हैं), जिससे इलेक्ट्रॉनों की संख्या बदल जाती है। इसलिए परमाणु की पहचान और उसका निश्चित ‘परमाणु क्रमांक’ हमेशा अपरिवर्तनीय नाभिकीय प्रोटॉनों की संख्या पर ही निर्भर करता है।
- इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन: दोनों का योग परमाणु क्रमांक नहीं, बल्कि द्रव्यमान संख्या के निर्धारण में योगदान देता है (जहाँ इलेक्ट्रॉन नगण्य माने जाते हैं)।
#63. किसी परमाणु की द्रव्यमान संख्या की गणना कैसे की जाती है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
- द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A): किसी भी परमाणु की द्रव्यमान संख्या की गणना उसके नाभिक के भीतर मौजूद प्रोटॉनों (Protons) और न्यूट्रॉनों (Neutrons) की कुल संख्या को आपस में जोड़कर की जाती है।
- सूत्र: $\text{द्रव्यमान संख्या (A)} = \text{प्रोटॉनों की संख्या (p)} + \text{न्यूट्रॉनों की संख्या (n)}$
- चूँकि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों ही परमाणु के केंद्र (नाभिक) में स्थित होते हैं और परमाणु के अधिकांश द्रव्यमान का निर्माण करते हैं, इन्हें संयुक्त रूप से ‘न्यूक्लिऑन’ (Nucleons) भी कहा जाता है।
- परमाणु में कुल प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों को जोड़कर: इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान अत्यंत नगण्य (लगभग शून्य) होता है, इसलिए द्रव्यमान संख्या की गणना में इलेक्ट्रॉनों को शामिल नहीं किया जाता।
- परमाणु में कुल इलेक्ट्रॉनों और न्यूक्लीऑनों को जोड़कर: न्यूक्लिऑन स्वयं प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग होते हैं, और इसमें इलेक्ट्रॉनों को जोड़ना वैज्ञानिक रूप से गलत है।
- आकलन के रूप में परमाणु संख्या को 3 से गुणा करके: परमाणु द्रव्यमान या द्रव्यमान संख्या की गणना का कोई ऐसा मनमाना गणितीय नियम नहीं है; यह पूरी तरह नाभिकीय कणों (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) की वास्तविक संख्या पर निर्भर करता है।
#64. गंधक का परमाणु द्रव्यमान 32 u है, और गंधक S8 अणुओं के रूप में विद्यमान है। गंधक का आणविक द्रव्यमान क्या है?
(RRB JE CE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)
- आणविक द्रव्यमान की गणना (Calculation of Molecular Mass): किसी बहुपरमाणुक तत्व के आणविक द्रव्यमान की गणना उसके एक परमाणु के द्रव्यमान को अणु में उपस्थित परमाणुओं की कुल संख्या (परमाणुकता / Atomicity) से गुणा करके की जाती है।
- गंधक (Sulfur) के एक एकल परमाणु का द्रव्यमान = 32 u
- गंधक का अणु सूत्र = S₈ (अर्थात इसके एक अणु में गंधक के 8 परमाणु आपस में जुड़े होते हैं)।
- अतः गंधक (S₈) का आणविक द्रव्यमान = $8 \times 32\text{ u} = \mathbf{256\ u}$
- 32 u: यह केवल गंधक के एक परमाणु का परमाणु द्रव्यमान है, न कि पूरे S₈ अणु का आणविक द्रव्यमान।
- 64 u और 128 u: ये मान क्रमशः $2 \times 32$ और $4 \times 32$ के परिणाम हैं, जो गलत परमाणुकता (Atomicity) पर आधारित गणनाओं के कारण प्राप्त होते हैं। सही अणु S₈ के लिए 8 से गुणा करना अनिवार्य है।
#65. खालीलपैकी कोणते थॉमसनच्या अणू प्रारूपाचे उत्तम वर्णन आहे?
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )
- थॉमसनचे अणू प्रारूप (Thomson’s Atomic Model): जे. जे. थॉमसन यांनी १८९८ मध्ये अणूच्या संरचनेचे हे प्रारूप मांडले होते. या प्रारूपाला सामान्यतः ‘प्लम पुडिंग मॉडेल’ (Plum Pudding Model) किंवा ‘कलिंगड प्रारूप’ (Watermelon Model) म्हटले जाते.
- मुख्य वैशिष्ट्ये:
1. अणू हा धन प्रभारित (Positive charge) एक गोलाकार भाग असतो, ज्यामध्ये संपूर्ण धन प्रभार एकसमान पसरलेला असतो.
2. ऋण प्रभारित इलेक्ट्रॉन्स त्या धन प्रभारित गोलामध्ये अशा प्रकारे जडलेले (Embedded) असतात, जसे कलिंगडामध्ये त्याचे काळे बीज विखुरलेले असतात.
3. अणूमध्ये धन आणि ऋण प्रभार परिमाणात समान असतात, ज्यामुळे अणू समग्रपणे विद्युत उदासीन (Electrically neutral) असतो.
- अणूत एक धन प्रभारित केंद्रक असते आणि त्याच्या बाहेर इलेक्ट्रॉन्स असतात: हे अर्नेस्ट रदरफोर्ड यांच्या अणू प्रारूपाचे वर्णन आहे.
- केंद्रकाभोवती इलेक्ट्रॉन्स स्थिर कक्षात भ्रमण करत असतात: हे नील्स बोर यांच्या अणू प्रारूपाचे मुख्य वैशिष्ट्य आहे.
- अणू हा बहुतांश सघन केंद्रक असलेली विरळ जागा असते: हे रदरफोर्डच्या अल्फा कण प्रयोगानंतर अणूच्या पोकळपणा आणि केंद्रकाची घनता स्पष्ट करणारे विधान आहे.
#66. परमाणु संख्या को परमाणु के नाभिक में उपस्थित ________ की कुल संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है।
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
- परमाणु संख्या (Atomic Number, Z): किसी तत्व की परमाणु संख्या या परमाणु क्रमांक उसके नाभिक के भीतर उपस्थित केवल प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है। इसे अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘Z’ से दर्शाया जाता है।
- तत्व की पहचान: प्रत्येक तत्व की परमाणु संख्या अद्वितीय (Unique) होती है। प्रोटॉनों की संख्या ही तय करती है कि वह तत्व कौन सा है (जैसे- हाइड्रोजन के लिए 1, कार्बन के लिए 6, ऑक्सीजन के लिए 8)।
- केवल न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉनों की संख्या से परमाणु क्रमांक निर्धारित नहीं होता; अलग-अलग समस्थानिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न हो सकती है जबकि परमाणु संख्या समान रहती है।
- प्रोटॉन और न्यूट्रॉन: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के योग को द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A) कहा जाता है, न कि परमाणु संख्या।
- न्यूट्रॉन और आधे प्रोटॉन: यह एक पूरी तरह से काल्पनिक और वैज्ञानिक रूप से गलत विकल्प है।
#67. बोर के मॉडल ( Bohr’s model) के अनुसार, परमाणु में इलेक्ट्रॉन कहाँ पाए जाते हैं?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
- बोर का परमाणु मॉडल (Bohr’s Model): नील्स बोर के अनुसार, परमाणु के भीतर इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित, विविक्त (discrete) और स्थिर वृत्ताकार पथों में ही चक्कर लगाते हैं, जिन्हें कक्षाओं (Orbits) या ऊर्जा स्तर (Energy levels) कहा जाता है।
- इन निश्चित कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण (Radiation) नहीं करते हैं, जिसके कारण परमाणु का स्थायित्व बना रहता है। इन कक्षाओं को K, L, M, N आदि अक्षरों या n = 1, 2, 3… संख्याओं द्वारा दर्शाया जाता है।
- नाभिक के अंदर स्थिर स्थानों पर: इलेक्ट्रॉन कभी भी नाभिक के अंदर नहीं पाए जाते; नाभिक के भीतर केवल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
- परमाणु के अंदर यादृच्छिक रूप से फैले हुए: बोर मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉनों की गति या स्थिति यादृच्छिक (Random) नहीं होती, बल्कि वे बहुत ही व्यवस्थित और निश्चित ऊर्जा कक्षाओं में गति करते हैं।
- परमाणु के बाहर मुक्त आकाश (स्थान) में स्थिर: इलेक्ट्रॉन परमाणु के भीतर नाभिक के आकर्षण बल से बंधे होते हैं और गतिमान होते हैं, न कि परमाणु के बाहर मुक्त स्थान में स्थिर रहते हैं।
#68. किसी तत्व की परमाणु संख्या निम्नलिखित में से किसके बराबर होती है?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
- परमाणु संख्या (Atomic Number, Z): किसी तत्व की परमाणु संख्या या परमाणु क्रमांक उसके नाभिक के भीतर उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या के बिल्कुल बराबर होती है। इसे अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर ‘Z’ से दर्शाया जाता है।
- तत्व की पहचान: प्रोटॉनों की संख्या ही यह तय करती है कि वह तत्व कौन सा है (जैसे- हाइड्रोजन के लिए 1, कार्बन के लिए 6)। यह कभी नहीं बदलती और तत्व की मूलभूत पहचान होती है।
- इलेक्ट्रॉनों की संख्या: हालांकि एक सामान्य और उदासीन (Neutral) परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों के बराबर होती है, लेकिन आयन (Ions) बनने की स्थिति में इलेक्ट्रॉन कम या ज्यादा हो सकते हैं। इसलिए इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिवर्तनशील हो सकती है, जबकि परमाणु क्रमांक हमेशा प्रोटॉनों की निश्चित संख्या से ही परिभाषित होता है।
- न्यूट्रॉनों की संख्या: न्यूट्रॉनों की संख्या अलग-अलग समस्थानिकों (Isotopes) में भिन्न हो सकती है, जिससे परमाणु संख्या तय नहीं होती।
- न्यूट्रॉनों की संख्या + प्रोटॉनों की संख्या: प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों का यह योग परमाणु संख्या नहीं, बल्कि द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A) कहलाता है।
#69. जे. जे. थॉमसन ने किस कण की खोज की?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
- इलेक्ट्रॉन की खोज (Discovery of Electron): ब्रिटिश भौतिकবিদ सर जे. जे. थॉमसन (J.J. Thomson) ने सन 1897 में कैथोड रे ट्यूब (Cathode Ray Tube) प्रयोग के माध्यम से इलेक्ट्रॉन की खोज की थी।
- यह एक ऋणावेशित (Negatively charged) उप-परमाण्विक कण है। इस महत्वपूर्ण खोज के लिए जे. जे. थॉमसन को 1906 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- प्रोटॉन: प्रोटॉन की खोज का श्रेय गोल्डस्टीन (या रदरफोर्ड, जिन्होंने इसका नामकरण किया) को जाता है।
- न्यूट्रॉन: न्यूट्रॉन की खोज 1932 में वैज्ञानिक जेम्स चैडविक (James Chadwick) द्वारा की गई थी।
- नाभिक: परमाणु के नाभिक की खोज 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा अपने प्रसिद्ध स्वर्ण पत्री (Gold Foil) प्रयोग के दौरान की गई थी।
#70. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, ‘सूत्र इकाई द्रव्यमान ( formula unit mass)’ शब्द को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
- सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): इस शब्दावली का प्रयोग विशेष रूप से आयनिक यौगिकों (जैसे NaCl, CaCl₂ आदि) के द्रव्यमान को दर्शाने के लिए किया जाता है।
< चूकि आयनिक यौगिक स्वतंत्र अणुओं के रूप में नहीं बल्कि विपरीत आवेशित आयनों के त्रिविमीय जालक (Lattice) के रूप में व्यवस्थित होते हैं, इसलिए इनके रासायनिक सूत्र द्वारा प्रदर्शित इकाई में उपस्थित सभी आयनों के परमाणु द्रव्यमानों के योग को 'सूत्र इकाई द्रव्यमान' कहा जाता है।
- किसी अणु में सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों का योग: इसे आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass) कहा जाता है, जिसका उपयोग सहसंयोजक अणुओं (जैसे H₂O, CO₂) के लिए किया जाता है।
- किसी यौगिक के एक मोल का द्रव्यमान: इसे पदार्थ का मोलर द्रव्यमान (Molar Mass) कहा जाता है।
- किसी तत्व के एक परमाणु का द्रव्यमान: इसे संबंधित तत्व का परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) कहा जाता है।


