रासायनिक बंधन के महत्वपूर्ण प्रश्न
#1. एथेनॉल किस प्रकाऱ्यात्मक समूह की उपस्थिति के कारण जल के साथ मिश्रणीय है?
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) हाइड्रोक्सिल समूह
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मिश्रणीयता का कारण: एथेनॉल ($text{C}_2text{H}_5\text{OH}$) में उपस्थित हाइड्रोक्सिल समूह ($-\text{OH}$) जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध (Hydrogen Bonding) बनाने की क्षमता रखता है, जिसके कारण यह जल में पूरी तरह घुलनशील होता है।
- रासायनिक संरचना: एथेनॉल एक अल्कोहल है जिसका क्रियात्मक समूह (Functional Group) $-OH$ (हाइड्रोक्सिल) होता है।
- ध्रुवीय प्रकृति: $-OH$ समूह की ध्रुवीय प्रकृति इसे पानी के अणुओं के साथ आसानी से मिश्रित होने में मदद करती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) द्विक आबंध: यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे एल्कीन) में पाया जाता है और जल के साथ मिश्रणीयता का प्रमुख कारण नहीं है।
- विकल्प (C) कार्बन श्रृंखला: एल्काइल या कार्बन श्रृंखला हाइड्रोफोबिक (जल-विरोधी) प्रकृति की होती है, जो पानी में घुलनशीलता को कम करती है।
- विकल्प (D) कार्बोक्सिल समूह: यह समूह कार्बोक्जिलिक अम्ल ($-\text{COOH}$) का कार्यात्मक समूह है, न कि एथेनॉल का।
#2. क्लोरोफ्लोरोकार्बन से निकलने वाली ________ गैस, ओजोन परत के लिए हानिकारक है।
(RRB NTPC CBT-I : 31 Jan 2021 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) क्लोरीन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोरीन की भूमिका: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जब वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में पहुँचते हैं, तो सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के प्रभाव से विघटित होकर स्वतंत्र क्लोरीन परमाणु ($\text{Cl}$) मुक्त करते हैं।
- ओजोन क्षरण: यह मुक्त क्लोरीन परमाणु ओजोन ($\text{O}_3$) के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करके उन्हें ऑक्सीजन में बदल देता है, जिससे ओजोन परत पतली (क्षीण) होने लगती है।
- उत्प्रेरक प्रभाव: एक अकेला क्लोरीन परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया के माध्यम से हजारों ओजोन अणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) हाइड्रोजन: यह ओजोन परत के क्षरण के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी मुख्य घटक नहीं है।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन सल्फाइड: यह सड़े हुए अंडे की गंध वाली एक जहरीली गैस है जो प्राकृतिक स्रोतों और सड़ते पदार्थों से निकलती है, इसका CFCs से संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड: यह मुख्य रूप से वाहनों के धुएं और औद्योगिक प्रदूषण से उत्पन्न होती है, जबकि प्रश्न में विशेष रूप से CFCs से निकलने वाली गैस के बारे में पूछा गया है।
#3. एथेन, का अणु सूत्र C 2 H 6 है और इसमें ________ होते हैं
।(RRB JE CBT-I : 30 May 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) 7 सहसंयोज्य आबंध
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आबंधों की गणना: एथेन (C2H6) के एक अणु में 1 कार्बन-कार्बन (C-C) एकल आबंध और 6 कार्बन-हाइड्रोजन (C-H) एकल आबंध होते हैं।
- कुल सहसंयोज्य आबंध: इन सभी एकल आबंधों को मिलाने पर कुल सहसंयोज्य आबंधों की संख्या 1 + 6 = 7 होती है।
- सहसंयोज्य आबंध: यह परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी से बनता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) 9 सहसंयोज्य आबंध: यह संख्या एथेन के लिए सही नहीं है (यह प्रोपेन जैसे बड़े यौगिकों में होती है)।
- विकल्प (B) 8 सहसंयोज्य आबंध: यह गलत गणना पर आधारित है, क्योंकि एथेन में कुल 7 सहसंयोज्य आबंध होते हैं।
- विकल्प (D) 6 सहसंयोज्य आबंध: यह केवल C-H आबंधों की संख्या है, इसमें केंद्रीय C-C आबंध को शामिल नहीं किया गया है।
#4. किसी पदार्थ की दर्पण छवि पर अत्यधिक व्यसनी न होने का गुण क्या है?
(RPF SI 2018 : 06 Jan 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) चिरलिटी
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चिरलिटी (Chirality): जब किसी अणु या वस्तु की दर्पण छवि (Mirror Image) उसके ऊपर पूरी तरह से अध्यारोपित (Superimposable) नहीं होती है, तो इस गुण को चिरलिटी कहा जाता है। ऐसे अणु अपने दर्पण प्रतिबिंब पर संपाती नहीं होते (जैसे हमारे दोनों हाथ)।
- किरल केंद्र: इस प्रकार के यौगिकों में आमतौर पर एक किरल कार्बन (Asymmetric Carbon) उपस्थित होता है, जिससे चारों अलग-अलग समूह जुड़े होते हैं।
- प्रकाशिक सक्रियता: किरल अणु प्रकाशिक रूप से सक्रिय (Optically Active) होते हैं और समतल ध्रुवित प्रकाश को घुमा देते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) विषमता: यह समरूपता की अनुपस्थिति को दर्शाता है, लेकिन ‘अध्यारोपित न होने का विशिष्ट गुण’ चिरलिटी कहलाता है।
- विकल्प (C) अचिरलिटी (Achirality): यह चिरलिटी का ठीक विपरीत गुण है, जिसमें अणु या वस्तु अपनी दर्पण छवि पर पूरी तरह से अध्यारोपित (Superimposable) हो जाती है।
- विकल्प (D) समरूपता: यह वह विशेषता है जो किसी वस्तु को उसकी दर्पण छवि पर पूरी तरह से मेल खाने (अध्यारोपित होने) योग्य बनाती है।
#5. ग्लूकोज का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RPF Constable 2018 10 Feb 2019)
✨ सही उत्तर: (B) C6H12O6
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक संरचना: ग्लूकोज एक सरल शर्करा (Monosaccharide carbohydrate) है जिसका रासायनिक सूत्र $\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6$ होता है। इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणु 6:12:6 (या 1:2:1) के सरल अनुपात में मौजूद होते हैं।
- ऊर्जा का स्त्रोत: यह जीवों की कोशिकाओं में कोशिकीय श्वसन के दौरान ऊर्जा (ATP) प्रदान करने वाला मुख्य ईंधन है।
- प्राकृतिक प्राप्ति: यह मुख्य रूप से पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया के दौरान बनाया जाता है और अंगूर, शहद आदि में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) C3H5O: यह ग्लूकोज का सूत्र नहीं है (यह रासायनिक रूप से मान्य कार्बोहाइड्रेट अणु नहीं है)।
- विकल्प (C) C6H12O: इस सूत्र में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या गलत दी गई है, जबकि सही सूत्र में 6 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
- विकल्प (D) C5H12O3: यह ग्लूकोज का नहीं, बल्कि अन्य कार्बनिक यौगिकों या एल्कोहल-ईथर व्युत्पन्नों का अनुपात प्रतीत होता है।
#6. कार्बन में अन्य कार्बन परमाणुकों के साथ बंध बनाने की अनोखी क्षमता होती है। इस गुण को ________ के रूप में जाना जाता है।
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) शृंखलन (catenation)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में सहसंयोजक आबंध (Covalent bond) बनाकर लंबी सीधी श्रृंखलाएं, शाखित श्रृंखलाएं या वलय (Rings) बनाने की जो अद्वितीय क्षमता होती है, उसे शृंखलन कहते हैं।
- कारण: कार्बन की इस विशेषता का मुख्य कारण इसकी छोटी परमाणु त्रिज्या और इसकी चतुःसंयोजकता (Tetravalency) है, जिसके कारण कार्बन-कार्बन बंध बहुत मजबूत होते हैं।
- विशाल यौगिक: इसी गुण के कारण कार्बन प्रकृति में लाखों कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) क्रिस्टलीकरण: यह किसी घोल से शुद्ध ठोस क्रिस्टल प्राप्त करने की एक भौतिक प्रक्रिया है, न कि आबंध बनाने का गुण।
- विकल्प (C) समावयवता (Isomerisation): यह वह गुण है जिसमें यौगिकों के अणु सूत्र समान होते हैं लेकिन उनकी संरचनात्मक व्यवस्था भिन्न होती है।
- विकल्प (D) चक्रीकरण (Cyclisation): यह खुली श्रृंखला वाले यौगिकों को चक्रीय (Ring) संरचना में बदलने की प्रक्रिया है, जो शृंखलन का ही एक भाग है लेकिन संपूर्ण गुण को परिभाषित नहीं करती।
#7. मीथेन के लिए प्रतीक क्या है?
(RRB NTPC CBT-I : 30 Dec 2020 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) CH4
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक सूत्र: मीथेन सबसे सरल हाइड्रोकार्बन (अल्केन श्रेणी का पहला सदस्य) है, जिसका अणु सूत्र $\text{CH}_4$ होता है। इसमें एक कार्बन परमाणु और चार हाइड्रोजन परमाणु सहसंयोजक बंध (Covalent bond) द्वारा जुड़े होते हैं।
- संरचना: इसकी आणविक ज्यामिति चतुष्फलकीय (Tetrahedral) होती है और इसमें कार्बन की संयोजकता पूर्ण होती है।
- प्राकृतिक प्राप्ति: इसे ‘मार्स गैस’ (Marsh Gas) भी कहा जाता है, क्योंकि यह दलदली इलाकों, गोबर गैस (बायोगैस) और प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक होती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CH3: यह मिथाइल मूलक (Methyl free radical या group) का सूत्र है, जो एक अधूरा या जुड़ा हुआ समूह है, स्वतंत्र स्थिर अणु नहीं।
- विकल्प (B) CH1: यह रासायनिक रूप से अमान्य और गलत सूत्र है।
- विकल्प (D) CH2: यह मिथाइलीन (Methylene) का सूत्र है, जो अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और अस्थिर मध्यवर्ती (intermediate) है।
#8. एककोशिकीय जीव अमीबा की आकृति ________ होती है।
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) परिवर्तनीय
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आकृति की विशेषता: अमीबा एक सूक्ष्म, एककोशिकीय (Unicellular) जीव है जिसकी कोई निश्चित आकृति (Fixed Shape) नहीं होती है। इसकी आकृति लगातार बदलती रहती है।
- पादप (Pseudopodia): यह गति करने और भोजन पकड़ने के लिए अपनी अंग जैसी अस्थायी प्रवर्ध संरचनाओं का उपयोग करता है जिन्हें कूटपाद (Pseudopodia / कनक-पाद) कहते हैं, जिनके बनने और बिगड़ने से इसका आकार बदलता रहता है।
- प्रकार: यह प्रोटोजोआ जगत का जीव है जो आमतौर पर तालाबों और ठहरे हुए पानी में पाया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) निश्चित: अमीबा का आकार अनिश्चित (Irregular) होता है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- विकल्प (B) स्टार जैसी: स्टार जैसी आकृति स्टारफिश (Starfish) की होती है, अमीबा की नहीं।
- विकल्प (C) चप्पल (स्लीपर) जैसी: चप्पल के आकार का जीव पैरामीशियम (Paramecium) होता है, जिसका आकार निश्चित होता है।
#9. एमाइलोपेक्टिन एक शाखित-शृंखला पॉलिसैकराइड है जो मुख्य रूप से ग्लूकोज इकाइयों से बना होता है जो ________ द्वारा जुड़े होते हैं।
(RRB NTPC UG CBT-I : 11 Aug, 2025 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) ($\alpha$)-1,4- ग्लाइकोसिडिक बंधन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संरचना और बंधन: एमाइलोपेक्टिन (Amylopectin) स्टार्च (Starch) का एक प्रमुख और अत्यधिक शाखित घटक है। इसमें ग्लूकोज इकाइयां मुख्य रूप से सीधी श्रृंखला में ($\alpha$)-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ी होती हैं, जबकि इसकी शाखाएं (Branches) ($\alpha$)-1,6-ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा बनती हैं।
- मुख्य घटक: चूँकि विकल्पों में प्राथमिक और मुख्य रैखिक श्रृंखला बनाने वाले बंधन $(\alpha)$-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंधन का उल्लेख है, इसलिए यह इसका सबसे उपयुक्त और सही उत्तर है।
- ऊर्जा संग्रहण: यह पौधों में ग्लूकोज को संचित करने का एक अत्यंत प्रभावी रूप है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) ($\beta$)-1,4- ग्लाइकोसिडिक बंधन: यह बंधन सेल्युलोज (Cellulose) में पाया जाता है, एमाइलोपेक्टिन में नहीं।
- विकल्प (C) ($\beta$)-1,6- ग्लाइकोसिडिक बंधन: एमाइलोपेक्टिन में हमेशा अल्फा ($\alpha$) विन्यास होता है, बीटा ($\beta$) विन्यास नहीं।
- विकल्प (D) ($\alpha$)-1,2- ग्लाइकोसिडिक बंधन: यह सामान्य स्टार्च या एमाइलोपेक्टिन की मुख्य श्रृंखला में नहीं पाया जाता है।
#10. धावन सोडा का सूत्र क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: धावन सोडा (Washing Soda) का रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट है, जिसका अणु सूत्र $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$ होता है। इसमें सोडियम कार्बोनेट के एक सूत्र इकाई के साथ जल के 10 निश्चित अणु जुड़े होते हैं।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से कांच, साबुन और कागज उद्योगों में तथा घरों में पानी की स्थायी कठोरता (Permanent Hardness) को दूर करने के लिए किया जाता है।
- नमक के घोल पर सॉल्वे प्रक्रिया (Solvay process) और पुनः क्रिस्टलीकरण द्वारा इसे बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{Na}_2\text{CO}_3$: यह निर्जल सोडियम कार्बोनेट (Anhydrous Sodium Carbonate या सोडा ऐश) है, जिसमें क्रिस्टलन का जल शामिल नहीं होता है।
- विकल्प (B) $\text{NaHCO}_3$: यह सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा / खाने का सोडा) का रासायनिक सूत्र है।
- विकल्प (C) $\text{NaOH}$: यह सोडियम हाइड्रोक्साइड (कास्टिक सोडा) का सूत्र है, जो एक तीव्र क्षार है।
#11. निम्नलिखित में से समजातीय श्रेणी की सही परिभाषा कौन-सी है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) समान प्रकाऱ्यात्मक समूह और समान रासायनिक गुणों वाली यौगिकों की एक श्रेणी
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- समजातीय श्रेणी (Homologous Series): यह कार्बनिक यौगिकों की एक ऐसी श्रृंखला है जिसमें सभी सदस्यों का समान क्रियात्मक (प्रकारात्मक) समूह होता है और रासायनिक गुण समान होते हैं, लेकिन लगातार दो सदस्यों के बीच $-\text{CH}_2-$ (मेथलीन समूह) का अंतर होता है।
- रासायनिक व भौतिक गुण: इस श्रेणी के सभी सदस्यों के रासायनिक गुण लगभग समान (समान कार्यात्मक समूह के कारण) होते हैं, जबकि आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ इनके भौतिक गुणों (जैसे क्वथनांक और गलनांक) में क्रमिक परिवर्तन देखा जाता है।
- द्रव्यमान अंतर: समजातीय श्रेणी में किन्हीं भी दो क्रमागत (Consecutive) सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में 14 u का अंतर होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) विभिन्न प्रकार्यात्मक समूह: समजातीय श्रेणी के सभी सदस्यों में प्रकार्यात्मक समूह हमेशा एक समान होता है, भिन्न नहीं।
- विकल्प (C) समान भौतिक गुणों वाली श्रेणी: आणविक भार बढ़ने के साथ भौतिक गुणों में क्रमिक बदलाव (Gradation) आता है, वे पूरी तरह समान नहीं होते।
- विकल्प (D) समान आणविक द्रव्यमान: श्रेणी के प्रत्येक अगले सदस्य का आणविक द्रव्यमान पिछले सदस्य से 14 u अधिक होता है, इसलिए सभी का द्रव्यमान समान नहीं हो सकता।
#12. श्वेत प्रकाश के सात रंगों में से कौन सा कांच के प्रिज्म द्वारा प्रकाश के परिक्षपण के बाद सबसे कम विचलित होता है?
(RRB JE CBT-I : 1 June 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) लाल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- परिक्षपण और विचलन: जब श्वेत प्रकाश किसी कांच के प्रिज्म से गुजरता है, तो यह अपने अवयवी सात रंगों (VIBGYOR) में विभाजित हो जाता है (परिक्षपण)। इस दौरान प्रकाश का विचलन (Deviation) उसकी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) पर निर्भर करता है।
- तरंगदैर्ध्य का प्रभाव: लाल रंग की तरंगदैर्ध्य (Wavelength) सबसे अधिक होती है, जिसके कारण इसका अपवर्तनांक (Refractive Index) सबसे कम होता है और यह प्रिज्म से गुजरने पर सबसे कम विचलित (Bend) होता है।
- इसके विपरीत, बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होने के कारण वह सबसे अधिक विचलित होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) नीला: नीले रंग की तरंगदैर्ध्य लाल और नारंगी की तुलना में कम होती है, इसलिए इसका विचलन लाल रंग से अधिक होता है।
- विकल्प (C) नारंगी: यह लाल रंग के बाद आता है, लेकिन लाल रंग की तुलना में इसकी तरंगदैर्ध्य कम और विचलन थोड़ा अधिक होता है।
- विकल्प (D) बैंगनी: बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है, इसलिए यह प्रिज्म से गुजरने पर सबसे अधिक विचलित होता है, न कि सबसे कम।
#13. दूध में ठोस-वसा रहित ( SNF ) की मात्रा बढ़ाने और डेयरी उत्पादों की पैदावार बढ़ाने के लिए कौन-सा मिलावटी पदार्थ मिलाया जाता है?
(RPF SI CBT-I 2024 : 12 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) माल्टोडेक्सट्रिन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मिलावट का कारण: दूध में पानी मिलाने पर उसके ठोस-वसा रहित (SNF – Solids-Not-Fat) की मात्रा कम हो जाती है। इस कमी को पूरा करने, दूध का गाढ़ापन बनाए रखने और डेयरी उत्पादों की पैदावार बढ़ाने के लिए अवैध रूप से माल्टोडेक्सट्रिन (Maltodextrin) मिलाया जाता है।
- माल्टोडेक्सट्रिन क्या है: यह स्टार्च के आंशिक जलअपघटन (Hydrolysis) से प्राप्त होने वाला एक पॉलिसैकराइड (Polysaccharide) है, जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों में गाढ़ापन या फिलर के रूप में किया जाता है।
- इससे दूध के घनत्व और SNF रीडिंग को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है ताकि प्राथमिक जांच में मिलावट पकड़ में न आए।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) हाइड्रोजन पेरोक्साइड: इसका उपयोग मुख्य रूप से दूध की शेल्फ लाइफ (Shelf life) बढ़ाने के लिए एक कीटाणुनाशक या परिरक्षक (Preservative) के रूप में किया जाता है, न कि SNF बढ़ाने के लिए।
- विकल्प (C) पोटैशियम बाइकार्बोनेट: यह एक न्यूट्रलाइज़र है जिसका उपयोग मुख्य रूप से दूध की अम्लता (Acidity) को नियंत्रित करने और उसे फटने से बचाने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (D) मेलामाइन: इसका उपयोग मुख्य रूप से नाइट्रोजन परीक्षण को धोखा देकर कृत्रिम रूप से प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है, हालांकि यह मुख्य रूप से प्लास्टिक निर्माण में प्रयुक्त रसायन है।
#14. थर्माइट अभिक्रिया में ऐलुमिनियम के साथ प्रयुक्त होने वाला विशिष्ट ऑक्साइड कौन-सा है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) आयरन (III) ऑक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- थर्माइट अभिक्रिया (Thermite Reaction): इस प्रक्रिया में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग फेरिक ऑक्साइड यानी आ आयरन (III) ऑक्साइड ($\text{Fe}_2\text{O}_3$) के साथ किया जाता है। यह एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) विस्थापन अभिक्रिया है।
- रासायनिक समीकरण: $2\text{Al} + \text{Fe}_2\text{O}_3 \rightarrow \text{Al}_2\text{O}_3 + 2\text{Fe} + \text{Heat}$
- उपयोग: इस अभिक्रिया से इतनी अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है कि पिघला हुआ लोहा प्राप्त होता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से रेलवे की पटरियों (Railway tracks) या टूटी हुई मशीनी दरों को जोड़ने (Welding) के लिए किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) मैग्नीशियम ऑक्साइड: मैग्नीशियम खुद एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातु है और इसका ऑक्साइड थर्माइट वेल्डिंग में मुख्य अभिकारक के रूप में उपयोग नहीं होता।
- विकल्प (B) जिंक ऑक्साइड: जिंक ऑक्साइड का उपयोग जिंक धातु के निष्कर्षण में होता है, लेकिन पारंपरिक थर्माइट वेल्डिंग प्रक्रिया में मुख्य रूप से आयरन ऑक्साइड का उपयोग किया जाता है।
- विकल्प (C) कॉपर ऑक्साइड: यह तांबे के निर्माण में प्रयुक्त होता है, न कि मानक थर्माइट वेल्डिंग प्रक्रिया का मुख्य घटक है।
#15. ग्रेफाइट विद्युत का अच्छा सुचालक क्यों है?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (C) इसमें मुक्त गतिमान इलेक्ट्रॉन होते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संरचना और संयोजकता: ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन परमाणु अपने ही तल के तीन अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है, जिससे षट्कोणीय (Hexagonal) परतें बनती हैं। कार्बन की कुल संयोजकता 4 होती है, जिसमें से केवल 3 इलेक्ट्रॉन आबंध में भाग लेते हैं।
- मुक्त इलेक्ट्रॉन: प्रत्येक कार्बन परमाणु का चौथा इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र यानी मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free electron) के रूप में बचा रहता है, जो परतों के बीच आसानी से घूम सकता है।
- विद्युत चालन: इन्हीं मुक्त और गतिशील इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण ग्रेफाइट अधातु होने के बावजूद विद्युत और ऊष्मा का एक अच्छा सुचालक होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) मजबूत आयनिक आबंध: ग्रेफाइट के परमाणुओं के बीच मजबूत सहसंयोजक आबंध (Covalent bonds) होते हैं, न कि आयनिक आबंध।
- विकल्प (B) पानी को आसानी से सोख लेना: जल का अवशोषण करना विद्युत चालन से संबंधित नहीं है।
- विकल्प (D) कम तापमान पर पिघल जाना: ग्रेफाइट का गलनांक (Melting point) अत्यधिक उच्च होता है, यह कम तापमान पर नहीं पिघलता।
#16. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इस कारण की सही व्याख्या करता है कि कार्बन, कार्बनिक यौगिकों में सहसंयोजक आबंध क्यों बनाता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) कार्बन के बाह्य कोष में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं और वह अपना अष्टक पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉन साझा करता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 होता है, जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इसके बाह्यतम कोष (Valence shell) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- अष्टक प्राप्त करने की स्थिति: अपना स्थायित्व प्राप्त करने और अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए कार्बन को या तो 4 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने होते हैं या 4 इलेक्ट्रॉन त्यागने होते हैं। चूंकि चार इलेक्ट्रॉन खोना या पाना अत्यधिक ऊर्जावान रूप से कठिन है, इसलिए यह इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके सहसंयोजक आबंध (Covalent Bonds) बनाता है।
- सहसंयोजकता के इसी गुण के कारण कार्बन यौगिकों में आयनिक बंध की जगह सहसंयोजक बंध पाए जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) धनात्मक आयन बनाने की प्रवृत्ति: कार्बन न तो आसानी से $\text{C}^{4+}$ आयन और न ही $\text{C}^{4-}$ आयन बनाता है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (B) बाह्य कक्षा पूर्ण होना: कार्बन की बाह्य कक्षा पूर्ण नहीं होती (इसमें 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं), इसलिए यह अत्यधिक अभिक्रियाशील होकर यौगिक बनाता है।
- विकल्प (C) इलेक्ट्रॉन दान करना: कार्बन न तो इलेक्ट्रॉन दान करता है और न ही पूरी तरह ग्रहण करता है, बल्कि वह केवल इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करता है।
#17. साइक्लोहेक्ससेन को किस प्रकार के कार्बनिक यौगिक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) एक संतृप्त एलिसैक्लिक यौगिक जो एक वलय में छह कार्बन परमाणुओं से बना होता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संरचना और गुण: साइक्लोहेक्सेन ($\text{C}_6\text{H}_{12}$) एक चक्रीय हाइड्रोकार्बन है जिसमें छह कार्बन परमाणु एकल आबंधों (Single bonds) द्वारा आपस में जुड़कर एक बंद वलय (Ring) का निर्माण करते हैं।
- संतृप्त प्रकृति: चूंकि इसमें सभी कार्बन-कार्बन बंध केवल एकल (Single) होते हैं, इसलिए यह एक संतृप्त (Saturated) हाइड्रोकार्बन है।
- एलिसैक्लिक यौगिक: यह चक्रीय संरचना होने के बावजूद एलिफेटिक (Aliphatic) गुणों को प्रदर्शित करता है, इसीलिए इन्हें एलिसैक्लिक (Alicyclic) यौगिक कहा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): साइक्लोहेक्सेन में कोई असंतृप्त (द्विक या त्रिक) बंध नहीं होता है और यह शाखित नहीं बल्कि चक्रीय वलय है।
- विकल्प (C): यह कोई एल्डिहाइड नहीं है, बल्कि एक शुद्ध हाइड्रोकार्बन (साइक्लोअल्केन) है।
- विकल्प (D): यह सुगंधित (Aromatic जैसे बेंजीन) यौगिक नहीं है, क्योंकि इसमें एकांतर (Alternate) द्विबंध और विस्थानीकृत $\pi$-इलेक्ट्रॉनों की वलय प्रणाली नहीं पाई जाती।
#18. साबुन के विलयन में मिसेल का निर्माण निम्नलिखित में से किन कारणों से होता है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) जल में जलविरागी और जलरागी अन्योन्यक्रिया
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मिसेल (Micelle) का निर्माण: साबुन के अणुओं में दो मुख्य भाग होते हैं—एक लंबा हाइड्रोकार्बन सिरा जो जलविरागी (Hydrophobic / जल-विरोधी) होता है और आयनिक सिरा जो जलरागी (Hydrophilic / जल-स्नेही) होता है।
- अन्योन्यक्रिया (Interaction): जब साबुन को पानी में घोला जाता है, तो जलरागी सिरा पानी की ओर आकर्षित होता है जबकि जलविरागी सिरे पानी से दूर हटकर तेल या मैल के कणों के चारों ओर एक गोलाकार संरचना बना लेते हैं, जिसे मिसेल कहते हैं।
- इसी दोहरी प्रकृति और अन्योन्यक्रिया के कारण कपड़े की सफाई आसानी से हो जाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) स्थिरवैद्युत आकर्षण: यह आयनिक क्रिस्टल या लवणों के निर्माण का मुख्य कारण है, न कि मिसेल बनने का प्राथमिक कारण।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन आबंधन: यह मुख्य रूप से जल के अणुओं या अल्कोहल में होता है, जो मिसेल बनने की मूल हाइड्रोफोबिक/हाइड्रोफिलिक प्रक्रिया को पूर्ण रूप से परिभाषित नहीं करता।
- विकल्प (D) केवल प्रक्षेपण बल: यह अणुओं के बीच कमजोर अंतराआणविक बल हैं, जो मिसेल गठन के मुख्य संचालक नहीं हैं।
#19. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सहसंयोजक यौगिक है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (D) CH4
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सहसंयोजक यौगिक (Covalent Compound): मीथेन ($\text{CH}_4$) एक सहसंयोजक यौगिक है क्योंकि इसमें कार्बन और हाइड्रोजन परमाणु अपने इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके आबंध बनाते हैं।
- विशेषताएँ: सहसंयोजक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक आम तौर पर आयनिक यौगिकों की तुलना में कम होते हैं और ये आमतौर पर विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि इनमें मुक्त आयन नहीं पाए जाते हैं।
- यह कार्बनिक रसायन का सबसे सरल हाइड्रोकार्बन है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड): यह एक आयनिक (Electrovalent) यौगिक है जो $\text{Mg}^{2+}$ और $\text{O}^{2-}$ आयनों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण से बनता है।
- विकल्प (B) MgCl2 (मैग्नीशियम क्लोराइड): यह भी एक आयनिक यौगिक है जो इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनता है।
- विकल्प (C) NaCl (सोडियम क्लोराइड): यह साधारण नमक है जो एक मजबूत आयनिक यौगिक है।
#20. निम्नलिखित में से कौन-सा क्लोरीनयुक्त हाइड्रोकार्बन कीटनाशक का उदाहरण है?
(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (C) टॉक्सॉफीन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोरीनयुक्त हाइड्रोकार्बन (Organochlorine Insecticide): टॉक्सॉफीन (Toxaphene) एक प्रमुख क्लोरीनयुक्त हाइड्रोकार्बन कीटनाशक है, जो कैंपफीन के क्लोरीनीकरण द्वारा निर्मित होता है। इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और उच्च मात्रा में क्लोरीन पाई जाती है।
- कृषि में उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से कपास और अन्य फसलों में कीटों और मकोड़ों की रोकथाम के लिए किया जाता था।
- यह पर्यावरण और खाद्य श्रृंखला में लंबे समय तक बने रहने (Persistent) वाले यौगिकों की श्रेणी में आता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) ऑक्सामिल: यह एक ऑक्सिम कार्बोमेट (Carbamate) कीटनाशक है, न कि क्लोरीनयुक्त हाइड्रोकार्बन।
- विकल्प (B) फेनथियान: यह एक ऑर्गनोफॉस्फेट (Organophosphate) श्रेणी का कीटनाशक है।
- विकल्प (D) अलिध्रिन (Allethrin): यह एक सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड (Pyrethroid) कीटनाशक है जो कीटों के खिलाफ काम करता है, लेकिन यह क्लोरीनयुक्त हाइड्रोकार्बन नहीं है।
#21. विद्युत परिपथ में, एमीटर को जोड़ने का सही तरीका क्या है?
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (C) घटक के श्रेणीक्रम संयोजन में
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एमीटर (Ammeter) का कार्य: एमीटर एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग किसी विद्युत परिपथ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (Electric Current) को मापने के लिए किया जाता है।
- श्रेणीक्रम संयोजन: एमीटर का प्रतिरोध (Resistance) बहुत कम (आदर्श रूप से शून्य) होता है, इसलिए इसे हमेशा उस घटक या परिपथ के श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है जिससे होकर बहने वाली धारा को मापना होता है।
- इससे परिपथ की संपूर्ण धारा एमीटर से होकर गुजरती है, जिससे सटीक माप प्राप्त होती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) श्रेणीक्रम या समानांतरक्रम संयोजन में: एमीटर को कभी भी समानांतर क्रम में नहीं जोड़ा जा सकता, इसलिए यह विकल्प गलत है।
- विकल्प (B) घटक के समानांतर संयोजन में: समानांतर क्रम में हमेशा वोल्टमीटर (Voltmeter) को जोड़ा जाता है, एमीटर को नहीं।
- विकल्प (D) स्रोत के समानांतर संयोजन में: यदि एमीटर को स्रोत के साथ समानांतर क्रम में जोड़ दिया जाए, तो बहुत अधिक धारा इसके अंदर से प्रवाहित होगी जिससे एमीटर जल या क्षतिग्रस्त हो सकता है।
#22. धावन सोडा का रासायनिक संघटन क्या है?
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (A) $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: धावन सोडा (Washing Soda) का रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट है, जिसका सही रासायनिक संघटन $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$ होता है।
- क्रिस्टलन का जल: इसके एक अणु के साथ जल के 10 निश्चित अणु (क्रिस्टलन जल) जुड़े होते हैं, जो इसके क्रिस्टलीय रूप को निर्धारित करते हैं।
- प्रमुख उपयोग: इसका मुख्य उपयोग जल की स्थायी कठोरता (Permanent hardness) को दूर करने तथा कांच, साबुन एवं कागज उद्योगों में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) $\text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$: यह एल्युमिनियम सल्फेट का जलयुक्त रूप है, जिसका उपयोग जल शोधन में होता है, लेकिन यह धावन सोडा नहीं है।
- विकल्प (C) $\text{Na}_2\text{SO}_4 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$: यह सोडियम सल्फेट डेकाहाइड्रेट (जिसे ग्लाबेर सॉल्ट / Glauber’s salt कहा जाता है) का सूत्र है।
- विकल्प (D) $\text{Al}_2(\text{CO}_3)_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$: यह रासायनिक रूप से मान्य या स्थिर यौगिक नहीं है जो धावन सोडा के रूप में पाया जाए।
#23. कार्बन के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) कार्बन चतुर्संयोजोी है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 होता है, जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इसके बाह्यतम कोष (Valence shell) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिसके कारण इसकी संयोजकता 4 होती है। इसे चतुर्संयोजोी (Tetravalent) कहा जाता है।
- आबंध निर्माण: अपने अष्टक (Octet) को पूरा करने के लिए कार्बन अन्य परमाणुओं के साथ चार सहसंयोजक आबंध (Covalent bonds) बनाता है।
- यही चतुःसंयोजकता और शृंखलन (Catenation) का गुण कार्बन को प्रकृति में भारी संख्या में यौगिक बनाने की अनुमति देता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) त्रिसंयोजोी (Trivalent): नाइट्रोजन जैसे तत्व त्रिसंयोजोी होते हैं, कार्बन नहीं।
- विकल्प (C) द्विसंयोजोी (Divalent): ऑक्सीजन जैसे तत्व द्विसंयोजोी होते हैं, जिनकी संयोजकता 2 होती है।
- विकल्प (D) एकसंयोजोी (Monovalent): हाइड्रोजन, क्लोरीन आदि एकसंयोजोी तत्व हैं।
#24. निम्नलिखित में से कौन सा/से दाब वैद्युत सामग्री का उदाहरण है/हैं?
(RRB JE CE 28 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (D) उपरोक्त सभी
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- दाब वैद्युत प्रभाव (Piezoelectric Effect): यह कुछ विशेष प्रकार की सामग्रियों (जैसे क्रिस्टल और सिरेमिक) का एक गुण है, जिसमें यांत्रिक दबाव (Mechanical stress) या बल डालने पर उनके सिरों के बीच विद्युत आवेश (Electric charge) उत्पन्न होता है।
- प्रमुख सामग्रियां: दिए गए विकल्प — लेड जिरकोनेट टाइटेनेट (PZT), लिथियम नाइओबेट, और बैरियम टाइटेनेट — सभी बेहतरीन और बहुउपयोगी दाब वैद्युत (Piezoelectric) सामग्रियां हैं।
- इनका उपयोग विभिन्न प्रकार के सेंसर, ट्रांसड्यूसर, माइक्रोफोन और अल्ट्रासोनिक उपकरणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये अकेले क्यों अपर्याप्त हैं?):
- विकल्प (A), (B) और (C): लेड जिरकोनेट टाइटेनेट, लिथियम नाइओबेट और बैरियम टाइटेनेट—तीनों ही व्यक्तिगत रूप से दाब वैद्युत सामग्रियां हैं। चूँकि विकल्प (A), (B) और (C) तीनों ही सही हैं, इसलिए केवल किसी एक को चुनना सही नहीं होगा और सही उत्तर ‘उपरोक्त सभी’ होगा।
#25. कार्बनिक यौगिकों में, गैर-चक्रीय या खुली श्रृंखला संरचना वाले यौगिकों को ________ भी कहा जाता है।
(RPF SI 2018 : 06 Jan 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (C) एलैफेटिक यौगिक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एलैफेटिक यौगिक (Aliphatic Compounds): कार्बनिक रसायन में वे यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं की खुली श्रृंखला (Straight or Branched open-chain) होती है, उन्हें एलैफेटिक या अचक्रीय (Acyclic) यौगिक कहा जाता है।
- श्रेणियां: इसके अंतर्गत मुख्य रूप से संतृप्त हाइड्रोकार्बन (अल्केन) और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (अल्कीन और अल्काइन) आते हैं।
- ‘एलैफेटिक’ शब्द ग्रीक शब्द ‘ऐलिफार’ (Aleiphar) से आया है जिसका अर्थ वसा (Fat) होता है, क्योंकि इस श्रेणी के शुरुआती यौगिक वसा से प्राप्त होते थे।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) होमो चक्रीय यौगिक (Homocyclic): यह वे चक्रीय यौगिक होते हैं जिनकी वलय (Ring) केवल कार्बन परमाणुओं से मिलकर बनी होती है।
- विकल्प (B) सुगंधित यौगिक (Aromatic): ये विशेष गंध वाले चक्रीय (যেমন बेंजीन रिंग वाले) यौगिक होते हैं जिनमें एकांतर द्विबंध पाए जाते हैं।
- विकल्प (D) विषमचक्रीय यौगिक (Heterocyclic): इन चक्रीय यौगिकों की वलय में कार्बन के अलावा नाइट्रोजन, ऑक्सीजन या सल्फर जैसे अन्य परमाणु भी शामिल होते हैं।
#26. जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी से होकर प्रवाहित किया जाता है, तो ________ अवक्षेपित होता है।
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) $\text{CaCO}_3$
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस को चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, $\text{Ca(OH)}_2$) से प्रवाहित किया जाता है, तो कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) का निर्माण होता है, जिससे विलयन दूधिया (Milky) हो जाता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{Ca(OH)}_2(aq) + \text{CO}_2(g) \rightarrow \text{CaCO}_3(s) \text{ (अवक्षेप)} + \text{H}_2\text{O}(l)$
- अतिरिक्त $\text{CO}_2$ प्रवाहित करने पर: यदि इस घोल में अत्यधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित की जाए, तो कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{Ca(HCO}_3\text{)_2}$) बनने के कारण दूधियापन गायब हो जाता है (घुल जाता है)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) $\text{Ca(HCO}_3\text{)_2}$: यह जल में घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट है, जो अत्यधिक $\text{CO}_2$ मिलाने पर बनता है, न कि प्राथमिक अवक्षेप।
- विकल्प (C) $\text{CaSO}_4$: यह कैल्शियम सल्फेट (जिप्सम का घटक) है, जिसका इस कार्बन डाइऑक्साइड परीक्षण से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) $\text{Ca(OH)}_2$: यह स्वयं चूने के पानी का रासायनिक सूत्र है, जिसमें $\text{CO}_2$ प्रवाहित की जाती है।
#27. जब कोई धातु किसी अधातु के साथ अभिक्रिया करती है तो किस प्रकार का आबंध बनता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) आयनी आबंध
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आयनी आबंध (Ionic Bond): जब कोई धातु (जो इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती है) किसी अधातु (जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती है) के साथ अभिक्रिया करती है, तो इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण (Transfer) के द्वारा आयनी या विद्युतसंयोजक आबंध का निर्माण होता है।
- स्थिरवैद्युत आकर्षण: विपरीत आवेशित आयनों ($\text{Na}^+$ और $\text{Cl}^-$ आदि) के बीच मजबूत स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force of attraction) के कारण ये यौगिक बहुत मजबूत होते हैं।
- इन यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं और ये गलित या जलीय अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सहसंयोजक आबंध: यह आमतौर पर दो या दो से अधिक अधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है।
- विकल्प (C) धात्विक आबंध: यह केवल धातु परमाणुओं के बीच उनके मुक्त इलेक्ट्रॉनों के समुद्र (Sea of electrons) के साथ बनता है।
- विकल्प (D) हाइड्रोजन आबंध: यह अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्वों (जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फ्लोरीन) और हाइड्रोजन के बीच बनने वाला एक विशिष्ट अंतराआणविक आकर्षण बल है।
#28. किन दो रसायनज्ञों को 1864 में द्रव्यमान क्रिया के नियम को विकसित करने का श्रेय दिया जाता है, जिसमें कहा गया है कि अभिकारकों की सांद्रता यह निर्धारित करती है कि रासायनिक परिवर्तन कितनी जल्दी होता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 11 Aug, 2025 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) केटो एम गुल्डबर्ग और पीटर वागे
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- द्रव्यमान क्रिया का नियम (Law of Mass Action): इस महत्वपूर्ण नियम को वर्ष 1864 में नॉर्वे के दो रसायनज्ञों—केटो माक्सिमिलियन गुल्डबर्ग (Cato Maximilian Guldberg) और उनके बहनोई पीटर वागे (Peter Waage) ने विकसित किया था।
- नियम का सार: इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सक्रिय सांद्रता (Active masses) के समानुपाती होती है।
- यह रासायनिक संतुलन (Chemical Equilibrium) और गतिशीलता को समझने की नींव साबित हुआ।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) फ्रिट्ज़ हेबर और कार्ल बॉश: इन्होंने अमोनिया के औद्योगिक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध ‘हेबर-बॉश प्रक्रिया’ (Haber-Bosch process) विकसित की थी।
- विकल्प (B) कार्ल विल्हेम शेले और हम्फ्री डेवी: शेले और डेवी ने विभिन्न तत्वों (जैसे क्लोरीन और ऑक्सीजन) की खोज और उनके गुणों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
- विकल्प (D) जॉर्ज ब्राइट और टॉर्मन बर्गमैन: इनका संबंध द्रव्यमान क्रिया के नियम के प्रतिपादन से नहीं है।
#29. निम्नलिखित में से कौन सा उत्पाद स्पिरिट लैंप से मैग्नीशियम रिबन को जलाने के कारण बनता है?
(RRB NTPC CBT-I : 12 Mar 2021 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) मैग्नीशियम ऑक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक प्रक्रिया: जब मैग्नीशियम रिबन को स्पिरिट लैंप या हवा में जलाया जाता है, तो यह हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ तेजी से अभिक्रिया करके सफेद रंग का चूर्ण बनाता है जिसे मैग्नीशियम ऑक्साइड ($\text{MgO}$) कहते हैं।
- रासायनिक समीकरण: $2\text{Mg} + \text{O}_2 \xrightarrow{\text{Heat}} 2\text{MgO}$
- इस दौरान एक चमकदार श्वेत (Dazzling white) लौ उत्पन्न होती है और मैग्नीशियम का ऑक्सीकरण होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) मैग्नीशियम डाइऑक्साइड: यह रासायनिक रूप से एक अमान्य या गलत यौगिक है (मैग्नीशियम केवल $\text{MgO}$ बनाता है)।
- विकल्प (C) मैग्नीशियम सल्फेट: यह सल्फ्यूरिक एसिड और मैग्नीशियम की प्रतिक्रिया से बनता है, न कि हवा में जलाने से।
- विकल्प (D) मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड: यह मैग्नीशियम ऑक्साइड को जल में घोलने पर बनता है (जिसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया कहते हैं), डायरेक्ट जलाने पर नहीं।
#30. विद्युतीकरण के माध्यम से किसी भी वांछित सामग्री की परत को किसी अन्य सामग्री पर जमा करने की प्रक्रिया क्या है?
(RPF Constable 2018 16 Feb 2019)
✨ सही उत्तर: (B) विद्युत आवरण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विद्युत आवरण (Electroplating): यह एक ऐसी रासायनिक एवं भौतिक प्रक्रिया है जिसमें विद्युत धारा (Electricity) का उपयोग करके किसी वस्तु की सतह पर किसी अन्य वांछित धातु की एक पतली और सुंदर परत जमा की जाती है।
- कार्य प्रणाली: इस प्रक्रिया में जिस वस्तु पर लेप करना होता है उसे कैथोड (ऋण ध्रुव) बनाया जाता है और जिस धातु की परत चढ़ानी होती है उसे एनोड (धन ध्रुव) के रूप में एक उपयुक्त विद्युत अपघट्य (Electrolyte) विलयन में रखा जाता है।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से धातुओं को जंग (Corrosion) से बचाने और उन्हें आकर्षक रूप देने के लिए किया जाता है (जैसे साइकिल के हैंडल, नल और ऑटोमोबाइल के पुर्जों पर क्रोमियम की परत चढ़ाना)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) विद्युत उत्प्रेरक: यह रासायनिक प्रतिक्रियाओं की गति को प्रभावित करने वाले कारकों से संबंधित है, न कि धातु की परत चढ़ाने से।
- विकल्प (C) इलेक्ट्रॉन बाइंडिंग: यह परमाणुओं के भीतर इलेक्ट्रॉनों और नाभिक के बीच के आकर्षण या ऊर्जा स्तर से संबंधित है।
- विकल्प (D) इलेक्ट्रो-समाधान: यह इस तकनीकी प्रक्रिया का मानक और सही वैज्ञानिक नाम नहीं है।
#31. निम्नलिखित में से कौन-सा एस्टर है?
(RRB NTPC CBT-I : 21 Jan 2021 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) CH3COOC2H5
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एस्टर (Ester): यह कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग है जिनमें एस्टर क्रियात्मक समूह (-COO-) पाया जाता है। इनका सामान्य रासायनिक सूत्र RCOOR’ होता है।
- संरचना: दिया गया विकल्प CH3COOC2H5 (एथिल एथेनोएट या एथिल एसिटेट) एक प्रसिद्ध एस्टर है, जो कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल की परस्पर अभिक्रिया (एस्टरीकरण) से बनता है।
- विशेषता: अधिकांश एस्टर अपनी मीठी, फलों जैसी सुगंध (Fruity smell) के लिए जाने जाते हैं, और इनका उपयोग इत्र, फ्लेवरिंग एजेंट तथा कृत्रिम स्वादों को तैयार करने में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) CH3COOH: यह एसिटिक अम्ल (Acetic acid) है, जिसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH) क्रियात्मक समूह होता है।
- विकल्प (C) CH3CHO: यह एसिटेल्डिहाइड (Acetaldehyde) है, जो एक एल्डिहाइड यौगिक है (-CHO समूह युक्त)।
- विकल्प (D) CH3COCH3: यह एसीटोन या प्रोपेनोन (Acetone) है, जो एक कीटोन (>C=O समूह युक्त) यौगिक है।
#32. निम्नलिखित में से कौन सा मेल गलत है?
(RRB JE CBT I :- 30 May 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) कैल्शिय़म कार्बोनेट – बुझा हुआ चूना
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- गलत मिलान की पहचान: विकल्प (B) गलत सुमेलित है क्योंकि कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) को चूना पत्थर (Limestone) या संगमरमर कहा जाता है, न कि बुझा हुआ चूना।
- बुझा हुआ चूना क्या है: बुझे हुए चूने का रासायनिक नाम कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{Ca(OH)}_2$) है, जो बिना बुझे चूने ($\text{CaO}$) में पानी मिलाने पर प्राप्त होता है।
- अन्य सभी विकल्प अपने रासायनिक नाम और सामान्य नाम के साथ बिल्कुल सही सुमेलित हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही मेल हैं, इसलिए उत्तर नहीं हैं):
- विकल्प (A) सोडियम कार्बोनेट – धावन सोडा: यह बिल्कुल सही मिलान है ($\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$).
- विकल्प (C) सोडियम हाइड्रोक्साइड – कास्टिक सोड़ा: $\text{NaOH}$ को कास्टिक सोडा ही कहा जाता है, यह भी सही है।
- विकल्प (D) सोडियम क्लोराइड – साधारण नमक: $\text{NaCl}$ साधारण खाने वाला नमक होता है, जो सही मिलान है।
#33. प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र क्या है?
(RPF SI Previous Paper : 6 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) CaSO4·1/2H2O
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris – POP) का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट है, जिसका सही रासायनिक सूत्र CaSO4·1/2H2O (या 2CaSO4·H2O) होता है।
- निर्माण: इसे जिप्सम ($\text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O}$) को लगभग $373\text{ K}$ पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है, जिससे यह अपने क्रिस्टलन जल के कुछ अंश को त्यागकर प्लास्टर ऑफ पेरिस में बदल जाता है।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में स्थिर रखने (Plastering), मूर्तियां, खिलौने और सजावटी सामान बनाने तथा दीवारों को चिकना करने के लिए किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CH3COOH: यह एसिटिक अम्ल (Acetic acid) का सूत्र है, जो सिरके का मुख्य घटक है।
- विकल्प (B) (NH4)2SO4: यह अमोनियम सल्फेट का सूत्र है, जिसका उपयोग कृषि में नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक के रूप में किया जाता है।
- विकल्प (D) CaSO4: यह निर्जल कैल्शियम सल्फेट (Anhydrous calcium sulfate) है, जिसमें जल का कोई अणु नहीं होता।
#34. किसी विलयन में H⁺ आयनों की सांद्रता मुख्यत: उसके ________ को निर्धारित करती है।
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) जलीय अवस्था में अम्लता की डिग्री
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- हाइड्रोजन आयन और अम्लता: किसी भी जलीय विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयनों ($\text{H}^+$) की सांद्रता सीधे तौर पर उस विलयन की अम्लता की डिग्री (Degree of acidity) या उसके pH मान को निर्धारित करती है।
- pH मान का संबंध: विलयन में जितने अधिक $\text{H}^+$ आयन होंगे, विलयन उतना ही अधिक अम्लीय होगा और उसका pH मान उतना ही कम होगा ($pH = -\log[\text{H}^+]$)।
- इसके विपरीत, हाइड्रॉक्साइड आयन ($\text{OH}^-$) की सांद्रता विलयन की क्षारीयता (Basicity) को निर्धारित करती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) गैस संपीड्यता गुणांक के स्तर: यह गैसों के व्यवहार और उनके दाब-आयतन संबंधों से संबंधित है, जिसका जलीय आयनों से कोई लेना-देना नहीं है।
- विकल्प (C) धात्विक आबंध की सीमा: धात्विक आबंध धातुओं के परमाणु जाल और मुक्त इलेक्ट्रॉनों के बीच बनता है, न कि आयनिक विलयन की अम्लता से।
- विकल्प (D) ठोस क्रिस्टल निर्माण की दर: यह क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया और विलयन की संतृप्ति (Saturation) से जुड़ी भौतिक प्रक्रिया है।
#35. जब एक बीकर में मौजूद थोड़ी मात्रा में कॉपर ऑक्साइड में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है, तो कौन सा यौगिक बनता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) कॉपर ( II ) क्लोराइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब कॉपर (II) ऑक्साइड ($\text{CuO}$) में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) मिलाया जाता है, तो कॉपर ऑक्साइड और अम्ल के बीच उदासीनता (Neutralization) अभिक्रिया होती है जिससे लवण और जल बनते हैं।
- रासायनिक समीकरण: $\text{CuO} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{CuCl}_2 + \text{H}_2\text{O}$
- रंग परिवर्तन: इस अभिक्रिया के दौरान विलयन का रंग बदलकर नीला-हरा (Blue-green) हो जाता है, जो कॉपर (II) क्लोराइड ($\text{CuCl}_2$) के निर्माण के कारण होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कॉपर (IV) क्लोराइड: कॉपर इस उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में सामान्य परिस्थितियों में स्थायी क्लोराइड यौगिक नहीं बनाता।
- विकल्प (C) कॉपर (III) क्लोराइड: यह इस मानक अम्ल-धातु ऑक्साइड अभिक्रिया का उत्पाद नहीं है।
- विकल्प (D) कॉपर (I) क्लोराइड: कप्रस क्लोराइड ($\text{CuCl}$) एक अलग विधि से बनता है, जबकि मानक कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) की प्रतिक्रिया से हमेशा कॉपर (II) यौगिक ही प्राप्त होते हैं।
#36. निम्नलिखित में से कौन सा कार्बनिक यौगिक है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) C2H6
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बनिक यौगिक (Organic Compound): सामान्यतः वे यौगिक जिनमें कार्बन और हाइड्रोजन (या उनके व्युत्पन्न) आपस में सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़े होते हैं, कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं।
- एथेन ($\text{C}_2\text{H}_6$): यह अल्केन श्रेणी का दूसरा सदस्य है, जो एक विशुद्ध हाइड्रोकार्बन है और इसे कार्बनिक रसायन के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है।
- कार्बन की शृंखलन (Catenation) और चतुःसंयोजकता के गुण के कारण ऐसे यौगिकों की संख्या लाखों में है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) $\text{Na}_2\text{CO}_3$ (सोडियम कार्बोनेट): हालांकि इसमें कार्बन मौजूद है, लेकिन कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट जैसे यौगिक पारंपरिक रूप से अकार्बनिक यौगिकों (Inorganic compounds) की श्रेणी में आते हैं।
- विकल्प (C) $\text{CaCO}_3$ (कैल्शियम कार्बोनेट): यह एक खनिज (चूना पत्थर/संगमरमर) है जिसे अकार्बनिक लवण माना जाता है।
- विकल्प (D) $\text{NaCl}$ (सोडियम क्लोराइड): यह साधारण नमक है जो एक आयनिक और अकार्बनिक यौगिक है।
#37. साबुन में मिसेल के सही गुण का चयन कीजिए जो उन्हें जल के साथ अंतःक्रिया करने में सहायता करता है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) जलरागी शीर्ष और जलविरागी पुच्छ दोनों ( both hydrophilic head and hydrophobic tail)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- साबुन के अणु की संरचना: साबुन के प्रत्येक अणु में दो मुख्य भाग होते हैं—एक आयनिक जलरागी शीर्ष (Hydrophilic head) जो पानी से स्नेह रखता है, और एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाला जलविरागी पुच्छ (Hydrophobic tail) जो पानी से दूर रहता है और तेल/मैल की ओर आकर्षित होता है।
- मिसेल निर्माण में भूमिका: जब साबुन को पानी में घोला जाता है, तो इसके दोनों भाग अपनी विशिष्ट प्रकृति के कारण एक गोलाकार संरचना (मिसेल) बनाते हैं। इसमें जलरागी शीर्ष बाहर पानी की ओर और जलविरागी पुच्छ अंदर की ओर व्यवस्थित होते हैं।
- इस प्रकार, पानी के साथ प्रभावी अंतःक्रिया और सफाई प्रक्रिया को संभव बनाने के लिए दोनों भाग (शीर्ष और पुच्छ) मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) जलविरागी पुच्छ: यह केवल पानी से दूर हटकर मैल से चिपकता है, अकेले जल के साथ संपूर्ण अंतःक्रिया को नियंत्रित नहीं करता।
- विकल्प (B) हाइड्रोकार्बन: यह केवल पुच्छ का रासायनिक हिस्सा है, जो अकेले मिसेल की दोहरी कार्यप्रणाली को पूरा नहीं करता।
- विकल्प (D) जलरागी शीर्ष: यह पानी की ओर रहता है, लेकिन मिसेल के भीतर मैल को घेरने के लिए जलविरागी पुच्छ का होना भी उतना ही आवश्यक है।
#38. निम्नलिखित में से किस घटना में ठोस पदार्थ द्रव पदार्थ में बदल जाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 27 Nov, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) संगलन (संकलन)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संगलन (Fusion / Melting): यह वह भौतिक प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ ऊष्मा को अवशोषित करके अपनी अवस्था बदलता है और सीधे द्रव (Liquid) अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। यह प्रक्रिया उसके गलनांक (Melting point) पर होती है।
- गतिज ऊर्जा में वृद्धि: संगलन के दौरान मिलने वाली ऊष्मा ऊर्जा अणुओं के बीच के अंतराआणविक आकर्षण बलों को कमजोर करती है और उनकी गतिज ऊर्जा को बढ़ाती है, जिससे वे अधिक स्वतंत्रता से गति करने लगते हैं।
- इसका सबसे आम उदाहरण बर्फ का पिघलकर पानी में बदलना है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) पिंडन (Freezing): यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई द्रव ठंडा होकर ठोस में बदल जाता है (जैसे पानी का बर्फ बनना)।
- विकल्प (C) ऊर्ध्वपातन (Sublimation): इसमें कोई ठोस पदार्थ बिना द्रव अवस्था में आए सीधे गैस में बदल जाता है।
- विकल्प (D) निक्षेपण (Deposition): इसमें गैस सीधे ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाती है।
#39. निम्नलिखित यौगिक का IUPAC नाम क्या है?CH3 CHBrCH 2 CH 2 CH 3
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) 2-ब्रोमोपेन्टेन (2-Bromopentane)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संरचना और अंकन (Numbering): दिए गए यौगिक CH3CHBrCH2CH2CH3 में कुल 5 कार्बन परमाणुओं की सबसे लंबी श्रृंखला (Pentane) है।
- नियम: IUPAC नामकरण के नियमानुसार, श्रृंखला का अंकन उस छोर से किया जाना चाहिए जिधर से प्रतिस्थापी (Substituent) यानी ब्रोमीन ($\text{-Br}$) समूह को कम से कम (Lowest locant number) स्थान मिले।
- बाएँ छोर से गिनती करने पर ब्रोमीन दूसरे कार्बन ($\text{C-2}$) पर जुड़ा है, इसलिए इसका सही नाम 2-ब्रोमोपेन्टेन होगा।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) 2-ब्रोमोपेन्टेन (2-Bromopentene): इसमें अंत में ‘-ene’ लिखा है जो द्विआबंध (Double bond) के लिए होता है, जबकि इस यौगिक में सभी कार्बन एकल आबंध से जुड़े हैं।
- विकल्प (C) 3-ब्रोमोपेन्टेन (3-Bromopentane): यदि दाईं या बाईं दोनों तरफ से अंकन सही बैठता है तो कम अंक वाला नियम लागू होता है (यहाँ 2 सही है, 3 नहीं)।
- विकल्प (D) 1-ब्रोमोपेन्टेन (1-Bromopentane): यदि ब्रोमीन पहले कार्बन पर होता, तो यह नाम होता, लेकिन यहाँ ब्रोमीन दूसरे कार्बन पर स्थित है।
#40. अमीनोबेन्जीन का सामान्य नाम क्या है?
(RPF SI 2018 : 16 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) एनिलीन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक पहचान: अमीनोबेन्जीन ($\text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2$) का सबसे प्रसिद्ध और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला सामान्य नाम एनिलीन (Aniline) है। यह सबसे सरल और सबसे महत्वपूर्ण एरोमैटिक एमीन (Aromatic amine) में से एक है।
- संरचना: इसमें एक बेंजीन वलय के साथ सीधे अमीनो समूह ($\text{-NH}_2$) जुड़ा होता है।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से विभिन्न रंगों (Dyes), औषधियों (Pharmaceuticals), और बहुलकों के निर्माण में कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) ब्रोमोबेन्जीन: यह वह यौगिक है जिसमें बेंजीन रिंग पर एमीन के स्थान पर ब्रोमीन परमाणु जुड़ा होता है ($\text{C}_6\text{H}_5\text{Br}$).
- विकल्प (B) टॉलूईन: यह मेथिलबेन्जीन ($\text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_3$) का सामान्य नाम है, जिसमें मिथाइल समूह होता है।
- विकल्प (C) एथिलअमीन: यह एक एलिफेटिक एमीन ($\text{CH}_3\text{CH}_2\text{NH}_2$) है, न कि एरोमैटिक अमीनोबेन्जीन।
#41. सोडियम और कैल्शियम जैसी धातुओं को कार्बन के साथ गर्म करने के बजाय वैद्युतअपघटनी अपचयन द्वारा निष्कर्षित क्यों किया जाता है?
(RRB JE 25/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) कार्बन की अपेक्षा इनकी ऑक्सीजन के प्रति बंधुता अधिक होती है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सक्रियता श्रेणी में स्थिति: सोडियम ($\text{Na}$), कैल्शियम ($\text{Ca}$), मैग्नीशियम ($\text{Mg}$) और एल्युमिनियम ($\text{Al}$) जैसी धातुएँ अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं और सक्रियता श्रेणी (Reactivity series) में सबसे ऊपर आती हैं।
- ऑक्सीเจน के प्रति बंधुता (Affinity for Oxygen): इन धातुओं की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता कार्बन की तुलना में बहुत अधिक होती है। यही कारण है कि कार्बन इन धातुओं के ऑक्साइडों से ऑक्सीजन को विस्थापित (Reduce) नहीं कर पाता है।
- विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction): इसलिए, इन धातुओं को प्राप्त करने के लिए इनके गलित क्लोराइड या ऑक्साइडों का विद्युत अपघटन किया जाता है, जिससे कैथोड पर शुद्ध धातु जमा हो जाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कार्बन के साथ गर्म होने पर वे विघटित हो जाते हैं: मुख्य समस्या विघटन की नहीं, बल्कि कार्बन द्वारा उनके ऑक्साइडों का अपचयन (Reduction) न हो पाना है।
- विकल्प (C) वे प्रकृति में केवल पिघले हुए क्लोराइड के रूप में उपस्थित हैं: ये प्रकृति में ठोस अयस्कों (जैसे क्लोराइड या कार्बोनेट) के रूप में पाए जाते हैं, न कि हमेशा प्राकृतिक रूप से पिघली हुई अवस्था में।
- विकल्प (D) वे उच्च तापमान पर अस्थिर ऑक्साइड बनाते हैं: इसके विपरीत, ये धातुएँ बहुत स्थायी और मजबूत ऑक्साइड बनाती हैं, जिन्हें तोड़ना बहुत कठिन होता है।
#42. जब लेड नाइट्रेट पोटैशियम आयोड़ाइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो यौगिक ‘X’ का एक पीला अवक्षेप बनता है। यौगिक X की पहचान कीजिए।
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) लेड ( II ) आयोड़ाइड ($\text{PbI}_2$)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब लेड (II) नाइट्रेट विलयन ($\text{Pb(NO}_3)_2$) को पोटैशियम आयोडाइड विलयन ($\text{KI}$) के साथ मिलाया जाता है, तो एक द्विविस्थापन (Double displacement / Precipitation) अभिक्रिया होती है।
- पीला अवक्षेप: इस अभिक्रिया के फलस्वरूप लेड (II) आयोडाइड ($\text{PbI}_2$) का एक चमकीला पीला अवक्षेप (Yellow precipitate) प्राप्त होता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{Pb(NO}_3)_2(aq) + 2\text{KI}(aq) \rightarrow \text{PbI}_2(s)\downarrow + 2\text{KNO}_3(aq)$
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) लेड (II) नाइट्रेट: यह स्वयं अभिक्रिया में उपयोग किया जाने वाला एक अभिकारक (Reactant) है, उत्पाद या अवक्षेप नहीं।
- विकल्प (B) पोटैशियम नाइट्रेट ($\text{KNO}_3$): यह इस अभिक्रिया में बनने वाला एक घुलनशील उप-उत्पाद है, जो विलयन में घुला रहता है (अवक्षेप नहीं बनाता)।
- विकल्प (C) लेड (II) नाइट्राइट: यह एक अलग यौगिक है ($\text{Pb(NO}_2)_2$), जो इस प्रक्रिया में उत्पाद के रूप में नहीं बनता।
#43. चिह्न परिपाटी के अनुसार, उत्तल लेंस की फोकस दूरी ________ होती है और अवतल लेंस की फोकस दूरी ________ होती है।
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (D) धनात्मक; ऋणात्मक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उत्तल लेंस (Convex Lens): नई कार्तिकेय चिह्न परिपाटी (New Cartesian Sign Convention) के अनुसार, उत्तल लेंस का मुख्य फोकस उसके दाईं ओर स्थित होता है, इसलिए इसकी फोकस दूरी हमेशा धनात्मक (+ve) होती है।
- अवतल लेंस (Concave Lens): अवतल लेंस प्रकाश की किरणों को अपसारित (Diverge) करता है और इसका मुख्य फोकस बाईं ओर होता है, जिसके कारण इसकी फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक (-ve) होती है।
- यही नियम गोलीय दर्पणों (गोलीय दर्पणों में यह स्थिति ठीक उलट होती है—अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक और उत्तल की धनात्मक होती है) के बिल्कुल विपरीत लेंसों पर लागू होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) धनात्मक; धनात्मक: दोनों लेंसों की फोकस दूरियाँ एक जैसी प्रकृति की नहीं होतीं।
- विकल्प (B) ऋणात्मक; ऋणात्मक: यह भी गलत है क्योंकि उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
- विकल्प (C) ऋणात्मक; धनात्मक: यह विकल्प उत्तल और अवतल के क्रम को बिल्कुल उल्टा दर्शाता है (यह अवतल और उत्तल के लिए सही होता, न कि उत्तल और अवतल के लिए)।
#44. निम्नलिखित में से पाइराइट किस प्रकार का अयस्क है?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) सल्फाइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- पाइराइट की पहचान: आयरन पाइराइट ($\text{FeS}_2$), जिसे अक्सर “मूर्खों का सोना” (Fool’s gold) भी कहा जाता है, आयरन का एक प्रमुख खनिज है।
- सल्फाइड अयस्क (Sulfide Ore): चूँकि इसमें धातु (आयरन) सीधे सल्फर ($\text{S}^{2-}$) के साथ जुड़ी होती है, इसलिए इसे सल्फाइड अयस्क की श्रेणी में रखा जाता है।
- सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण आमतौर पर फेन प्लवन विधि (Froth flotation process) के माध्यम से किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) हैलाइड: हैलाइड अयस्क वे होते हैं जिनमें धातुएं हैलोजन (जैसे क्लोरीन, फ्लोरीन) के साथ जुड़ी होती हैं (उदाहरण: क्रायोलाइट, रॉक साल्ट)।
- विकल्प (B) नाइट्रेट: नाइट्रेट अयस्कों में $\text{NO}_3^-$ समूह होता है (जैसे चिली साल्टपेटर), जो पाइराइट में नहीं पाया जाता।
- विकल्प (C) ऑक्साइड: ऑक्साइड अयस्कों में ऑक्सीजन परमाणु जुड़े होते हैं (जैसे हेमेटाइट, बॉक्साइट), जबकि पाइराइट सल्फर आधारित यौगिक है।
#45. निम्नलिखित में से कौन सा मिश्रण और यौगिकों के बीच सही अंतर बताता है?
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (D) विकल्प C ( गुण ) सही है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मिश्रण (Mixture): इसमें दो या दो से अधिक पदार्थ केवल आपस में मिलते हैं और उनके अपने मूल गुण (Properties) और पहचान बनी रहती है (जैसे- पानी और चीनी का घोल)।
- यौगिक (Compound): इसमें घटक रासायनिक रूप से संयुक्त होते हैं और बनने वाले नए पदार्थ के गुण उसके मूल घटकों से पूरी तरह भिन्न होते हैं (जैसे- हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर जल बनाते हैं, जिसके गुण दोनों से अलग होते हैं)।
- इस प्रकार, गुणों में भिन्नता मिश्रण और यौगिक के बीच सबसे प्रमुख और बुनियादी अंतर को दर्शाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- विकल्प (A), (B) और (C): परीक्षा में दी गई सारणी (Table) के आधार पर अन्य विकल्प या तो आंशिक रूप से मेल खाते हैं या गलत मिलान दर्शाते हैं, जबकि रासायनिक गुणों के आधार पर अंतर सबसे सटीक बैठता है।
#46. सूत्र Ca(OH) 2 में कोष्ठक का उपयोग क्यों किया जाता है?
(RRB JE 25/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (C) दो हाइड्रॉक्साइड समूहों को इंगित करने के लिए
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कोष्ठक (Brackets) का उपयोग: रासायनिक सूत्रों में जब किसी बहुपरमाणुक आयन (Polyatomic ion, जैसे हाइड्रॉक्साइड $\text{OH}^-$) की संख्या एक से अधिक होती है, तो उसे कोष्ठक में लिखकर बाहर उसकी संख्या (Subscript) दर्शाई जाती है।
- अर्थ: $\text{Ca(OH)}_2$ में कोष्ठक यह बताता है कि कैल्शियम के एक आयन ($\text{Ca}^{2+}$) के साथ हाइड्रॉक्साइड ($\text{OH}^-$) के दो समूह जुड़े हुए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कोष्ठक के अंदर मौजूद ऑक्सीजन और हाइड्रोजन दोनों की संख्या 2-2 है।
- यह नियम रासायनिक यौगिकों में परमाणुओं के सही अनुपात और संयोजकता को स्पष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आयनिक प्रकृति दर्शाने के लिए: यौगिक की आयनिक प्रकृति उसके तत्वों (धातु और अधातु) की प्रकृति से तय होती है, न कि विशेष रूप से कोष्ठक लगाने से।
- विकल्प (B) ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए: कोष्ठक लगाने का उद्देश्य केवल ऑक्सीजन को संतुलित करना नहीं, बल्कि पूरे बहुपरमाणुक हाइड्रॉक्साइड समूह की संख्या को दर्शाना है।
- विकल्प (D) आणविक आबन्धन दर्शाने के लिए: कोष्ठक आबंदन (Bonding) के प्रकार को नहीं बल्कि परमाणुओं की संख्या और समूहीकरण को दर्शाते हैं।
#47. कार्बन के एक अनोखे गुण को परिभाषित करने के लिए ‘शृंखलन’ (Catenation) शब्द का प्रयोग किया जाता है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन शृंखलन की सही परिभाषा देता है?
(RRB Level 01 Stage I 30 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (A) कार्बन के अन्य परमाणुओं के साथ बंध बनाने की अनोखी क्षमता।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- शृंखलन (Catenation): यह कार्बन का एक बेहद विशिष्ट और अनोखा गुण है, जिसके तहत कार्बन परमाणु अपने ही जैसे अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध (Covalent bonds) बनाकर लंबी श्रृंखलाएं (Long chains), शाखित श्रृंखलाएं (Branched chains) या वलय (Rings) का निर्माण करते हैं।
- कारण: कार्बन परमाणु का आकार छोटा होने के कारण इसके नाभिक और साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों के बीच का आकर्षण मजबूत होता है, जिससे कार्बन-कार्बन आबंध अत्यधिक स्थायी (Stable) होते हैं।
- इसी गुण के कारण प्रकृति में लाखों की संख्या में कार्बनिक यौगिक पाए जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) हाइड्रोजन के अन्य परमाणुओं के साथ: हाइड्रोजन के परमाणु आपस में मिलकर ऐसी लंबी श्रृंखलाएं नहीं बना सकते।
- विकल्प (C) नाइट्रोजन के अन्य परमाणुओं के साथ: नाइट्रोजन में भी शृंखलन का गुण बहुत सीमित होता है, कार्बन जैसा व्यापक गुण नहीं।
- विकल्प (D) ऑक्सीजन के अन्य परमाणुओं के साथ: ऑक्सीजन परमाणु लंबी श्रृंखला बनाने के बजाय मुख्य रूप से द्वि-परमाणुक ($\text{O}_2$) या ओजोन ($\text{O}_3$) के रूप में पाए जाते हैं।
#48. DNA में मानक क्षार युग्मन किस प्रकार के आबंधन के कारण होता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 10 Jun, 2025 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) हाइड्रोजन आबंधन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- हाइड्रोजन आबंध (Hydrogen Bonding): डीएनए (DNA) की द्विकुंडलिनी (Double helix) संरचना में नाइट्रोजनयुक्त क्षारकों के बीच होने वाला मानक क्षार युग्मन (Base pairing) मुख्य रूप से हाइड्रोजन आबंधों के कारण होता है।
- क्षार युग्मन नियम (Base Pairing Rules): एडेनिन (A) हमेशा थाइमिन (T) के साथ दो हाइड्रोजन आबंधों द्वारा और साइटोसिन (C) हमेशा ग्वानिन (G) के साथ तीन हाइड्रोजन आबंधों द्वारा जुड़ा होता है।
- यह विशिष्ट बंधन डीएनए की संरचना को स्थिरता प्रदान करता है और आनुवंशिक जानकारी के सटीक प्रतिकृति (Replication) को संभव बनाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आयनिक आबंधन: यह विपरीत आवेशित आयनों के बीच बनता है, जबकि डीएनए के क्षार आपस में सहसंयोजक और हाइड्रोजन बंधों से जुड़े होते हैं।
- विकल्प (B) वानर वाल्स अन्योन्यक्रियाएँ: ये बल डीएनए की सीढ़ियों जैसे क्षार युग्मों के ऊर्ध्वाधर संचयन (Base stacking) में सहायता करते हैं, लेकिन विशिष्ट क्षार युग्मन का कारण हाइड्रोजन बंध हैं।
- विकल्प (C) सहसंयोजक आबंधन: यह डीएनए की शुगर-फॉस्फेट बैकबोर्न (Reet/Backbone) को आपस में जोड़ने का काम करता है, न कि दो पूरक क्षारकों के बीच युग्मन के लिए जिम्मेदार होता है।
#49. निम्न में से कौन-सा रक्त समूह’ सार्वभौमिक दाता’ के रूप में जाना जाता है?
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (C) O – (O नेगेटिव)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सार्वभौमिक दाता (Universal Donor): रक्त समूह O-गेटिव ($\text{O}^-$) को सार्वभौमिक लाल रक्त कोशिका दाता माना जाता है क्योंकि इसकी लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) पर A, B या Rh कोई भी मुख्य एंटीजन (Antigen) मौजूद नहीं होता है।
- एंटीबॉडी की उपस्थिति: इस रक्त समूह के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों एंटीबॉडी होते हैं, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में जाने पर इसकी RBC किसी भी प्राप्तकर्ता के एंटीबॉडी द्वारा आक्षेपित (Agglutinate) नहीं होती हैं।
- यही कारण है कि आपातकालीन स्थिति में O- रक्त किसी भी अन्य रक्त समूह वाले व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) AB: रक्त समूह AB को सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता (Universal Recipient) कहा जाता है, न कि दाता, क्योंकि यह सभी से रक्त ले सकता है।
- विकल्प (B) B और (D) A: ये दोनों विशिष्ट रक्त समूह हैं जो केवल अपने ही जैसे या सुसंगत (Compatible) रक्त समूहों को ही रक्त दे सकते हैं।
#50. कार्बन एक स्थायी यौगिक क्यों बनाता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) कार्बन के छोटे आकार के कारण यह प्रबल आबंध बनाता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- छोटा आकार और मजबूती: कार्बन परमाणु का आकार बहुत छोटा होता है। इस छोटे आकार के कारण इसके नाभिक और साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्म के बीच का आकर्षण बल बहुत मजबूत होता है।
- प्रबल सहसंयोजक आबंध: छोटे आकार की वजह से कार्बन अन्य कार्बन परमाणुओं तथा हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन जैसे अन्य तत्वों के साथ बेहद मजबूत और स्थायी सहसंयोजक आबंध (Strong Covalent Bonds) बनाता है।
- यही कारण है कि कार्बन द्वारा बनाए गए यौगिक अत्यधिक स्थायी होते हैं और प्रकृति में इनकी विशाल श्रृंखला पाई जाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) बड़े आकार के कारण: कार्बन का आकार बड़ा नहीं बल्कि छोटा होता है, और बड़े आकार के परमाणु इतने मजबूत आबंध नहीं बना पाते।
- विकल्प (C) उच्च विद्युत्ऋणात्मकता: हालांकि कार्बन की विद्युत्ऋणात्मकता मध्यम होती है, लेकिन यौगिकों के अत्यधिक स्थायी होने का मुख्य कारण इसका छोटा आकार और मजबूत अंतराआणविक आबंदन है।
- विकल्प (D) उच्च ऐंथैल्पी: यह इस विशिष्ट स्थायित्व का प्राथमिक वैज्ञानिक कारण नहीं है।
#51. भोपाल त्रासदी के दौरान किस गैस का रिसाव हुआ था?
(RRB JE CE 29 Aug 2019 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (D) मेथिल आइसोसाइनेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy): यह भयानक औद्योगिक दुर्घटना 2-3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल (मध्य प्रदेश) स्थित यूनियन कार्बाइड की कीटनाशक फैक्ट्री में हुई थी।
- गैस का नाम: इस दुर्घटना के दौरान कारखाने से अत्यधिक विषैली गैस मेथिल आइसोसाइनेट ($\text{MIC}$ – Methyl Isocyanate, सूत्र: $\text{CH}_3\text{NCO}$) का रिसाव हुआ था।
- पानी के साथ इस रसायन की खतरनाक प्रतिक्रिया के कारण भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न हुई और गैस हवा में फैल गई, जिससे हजारों बेकसूर लोगों की जान चली गई थी।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A), (B) और (C) आइसोथियोसाइनेट यौगिक: ये सभी अलग रासायनिक यौगिक हैं जिनका भोपाल गैस त्रासदी के रिसाव से कोई संबंध नहीं है।
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