रासायनिक बंधन Railway MCQ

 

Results

#1. धावन सोडा किस यौगिक को गर्म करके बनाया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • निर्माण प्रक्रिया: धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट, $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा, $\text{NaHCO}_3$) को गर्म किया जाता है, जिससे सोडियम कार्बोनेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3$), जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्राप्त होती है।
  • रासायनिक समीकरण: $2\text{NaHCO}_3 \xrightarrow{\Delta} \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2$
  • पुनः क्रिस्टलीकरण: इसके बाद इस सोडियम कार्बोनेट का पुनः क्रिस्टलीकरण (Recrystallization) करने पर धावन सोडा ($\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) का निर्माण होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) कैल्शियम ऑक्साइड: इसे बिना बुझा हुआ चूना ($\text{CaO}$) कहते हैं, जिसका उपयोग सीमेंट, कांच और निर्माण कार्यों में होता है।
  • विकल्प (C) सोडियम क्लोराइड: यह साधारण नमक ($\text{NaCl}$) है जो सॉल्वे विधि में सोडियम कार्बोनेट बनाने के लिए कच्चा माल प्रदान करता है, न कि इसे सीधे गर्म करके धावन सोडा बनाया जाता है।
  • विकल्प (D) कैल्शियम कार्बोनेट: यह चूना पत्थर ($\text{CaCO}_3$) है, जिसे गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$) प्राप्त होता है।

#2. कार्बनिक रसायन में समावयवों का कौन-सा गुण है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) उनका आणविक सूत्र समान होता है लेकिन संरचनात्मक व्यवस्था अलग होती है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • समावयवता (Isomerism): कार्बनिक रसायन में वे यौगिक जिनका आणविक सूत्र (Molecular formula) समान होता है लेकिन उनके परमाणुओं की संरचनात्मक व्यवस्था या अंतरिक्षीय विन्यास (Spatial arrangement) अलग-अलग होने के कारण उनके भौतिक और रासायनिक गुण भिन्न होते हैं, **समावयवी (Isomers)** कहलाते हैं।
  • उदाहरण: उदाहरण के लिए, ब्यूटेन ($\text{C}_4\text{H}_{10}$) के दो समावयवी होते हैं – नॉर्मल ब्यूटेन और आइसोब्यूटेन। दोनों का सूत्र $\text{C}_4\text{H}_{10}$ ही है, लेकिन उनकी श्रृंखला की बनावट अलग होती है।
  • प्रमुख प्रकार: संरचनात्मक समावयवता (Structural isomerism) और त्रिविम समावयवता (Stereoisomerism) इसके मुख्य प्रकार हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A): समावयवियों के आणविक सूत्र अलग-अलग नहीं बल्कि **समान** होते हैं।
  • विकल्प (B): कार्बनिक रसायन के यौगिकों और उनके समावयवियों में मुख्य रूप से कार्बन परमाणु उपस्थित होते हैं।
  • विकल्प (D): यदि आणविक सूत्र और संरचनात्मक व्यवस्था दोनों ही समान हों, तो वे अलग-अलग समावयवी नहीं बल्कि **एक ही यौगिक** होंगे।

#3. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, इलेक्ट्रॉनिक संचार में डिजिटल हस्ताक्षर का प्राथमिक कार्य का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) यह प्रेषक की पहचान सत्यापित करता है और संदेश की अखंडता सुनिश्चित करता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature): यह इलेक्ट्रॉनिक संचार में उपयोग होने वाली एक गणितीय तकनीक है जिसका मुख्य कार्य **प्रेषक की पहचान प्रमाणित (Authentication)** करना और यह सुनिश्चित करना है कि डेटा या संदेश में रास्ते में कोई छेड़छाड़ (Tampering) नहीं की गई है (यानी **अखंडता / Integrity** बनी रहना)।
  • नॉन-रिप्यूडिएशन (Non-repudiation): इसके माध्यम से प्रेषक बाद में संदेश भेजने से मुकर नहीं सकता, क्योंकि हस्ताक्षर उसी की यूनिक प्राइवेट की (Private Key) से जुड़े होते हैं।
  • तकनीक: यह पब्लिक की इन्फ्रास्ट्रक्चर (PKI) और एन्क्रिप्शन तकनीकों पर आधारित होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A): दस्तावेजों का स्वचालित भंडारण क्लाउड स्टोरेज या डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम का काम है, डिजिटल हस्ताक्षर का प्राथमिक कार्य नहीं।
  • विकल्प (B): संपूर्ण संदेश को एन्क्रिप्ट करना सामान्य डेटा एन्क्रिप्शन (जैसे SSL/TLS) का कार्य है; डिजिटल हस्ताक्षर मुख्य रूप से ऑथेंटिकेशन और इंटीग्रिटी के लिए होता है।
  • विकल्प (D): डिजिटल हस्ताक्षर प्राप्तकर्ता या किसी को भी हस्ताक्षर होने के बाद डॉक्यूमेंट को एडिट करने की अनुमति नहीं देता, बल्कि यह दस्तावेज़ को लॉक (सुरक्षित) कर देता है ताकि बदलाव का पता चल सके।

#4. आणविक सूत्र C 2 H 4 O वाला यौगिक, निम्नलिखित में से किस क्रियात्मक समूह से संबंधित हो सकता है, और इसका IUPAC नाम क्या है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (B) ऐल्डिहाइड, एथेनल (Aldehyde, ethanal)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संरचना और क्रियात्मक समूह: आणविक सूत्र $\text{C}_2\text{H}_4\text{O}$ में दो कार्बन परमाणु, चार हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन परमाणु होता है। यह ऐल्डिहाइड ($-\text{CHO}$ समूह) क्रियात्मक समूह से संबंधित है। इसका सामान्य रासायनिक नाम एसिटल्डिहाइड है।
  • IUPAC नामकरण: चूंकि इसमें कुल 2 कार्बन परमाणु हैं, इसलिए रूट वर्ड ‘इथ-‘ (Eth) होगा और ऐल्डिहाइड के लिए प्रत्यय ‘-अल’ (al) लगेगा, जिससे इसका IUPAC नाम एथेनल (Ethanal / $\text{CH}_3\text{CHO}$) बनता है।
  • सामान्य गुण: यह एक रंगहीन और तीव्र गंध वाला कार्बनिक यौगिक है जिसका उपयोग विभिन्न रसायनों के निर्माण में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A): इसमें क्रियात्मक समूह तो सही (ऐल्डिहाइड) है, लेकिन IUPAC नाम ‘एथेनॉल’ गलत दिया गया है क्योंकि एथेनॉल अल्कोहल का नाम है, ऐल्डिहाइड का नहीं।
  • विकल्प (C): ईथर और एथेन का यह आणविक सूत्र नहीं है (एथेन का सूत्र $\text{C}_2\text{H}_6$ होता है)।
  • विकल्प (D): एथेनॉल (अल्कोहल) का रासायनिक सूत्र $\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$ (या $\text{C}_2\text{H}_6\text{O}$) होता है, जो दिए गए सूत्र से मेल नहीं खाता।

#5. एक यौगिक का आणविक सूत्र C 2 H 6 O है। उस यौगिक का नाम है-
(RRB JE 22 May 2019 Shift 1 CBT 1)

✨ सही उत्तर: (B) डाइमेथिल ईथर और एथेनॉल दोनों

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • क्रियात्मक समूह समावयवता (Functional Group Isomerism): आणविक सूत्र C2H6O वाले यौगिक समावयवता प्रदर्शित करते हैं, जिसका अर्थ है कि इस एक ही सूत्र से दो अलग-अलग कार्बनिक यौगिक संभव हैं।
  • एथेनॉल (Ethanol): इसका संरचनात्मक सूत्र $\text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{OH}$ है, जिसमें क्रियात्मक समूह अल्कोहल (-OH) होता है।
  • डाइमेथिल ईथर (Dimethyl Ether): इसका संरचनात्मक सूत्र $\text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}_3$ है, जिसमें क्रियात्मक समूह ईथर (-O-) होता है। चूँकि दोनों का आणविक सूत्र समान है, इसलिए दोनों इसके वैध नाम हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये अकेले क्यों अपूर्ण हैं?):
  • विकल्प (A) एथेनॉल: यह सही है कि यह C2H6O का यौगिक है, लेकिन केवल यही एकमात्र विकल्प नहीं है क्योंकि डाइमेथिल ईथर भी इसी सूत्र का समावयवी है।
  • विकल्प (C) ईथैनोइक अम्ल: इसका रासायनिक सूत्र $\text{CH}_3\text{COOH}$ (या C2H4O2) होता है, जो दिए गए सूत्र से मेल नहीं खाता।
  • विकल्प (D) डाइमेथिल ईथर: यह भी सही है, लेकिन एथेनॉल को अकेला छोड़ने के कारण यह अधूरा विकल्प है; दोनों सही होने के कारण विकल्प (B) सबसे सटीक है।



#6. कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति निम्नलिखित में से किस प्रकार के यौगिकों के निर्माण के लिए उत्तरदायी है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) कार्बनिक यौगिक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon): कार्बन की चतुःसंयोजकता (Tetravalency) और शृंखलन (Catenation) की अद्वितीय क्षमता के कारण यह अन्य तत्वों के साथ मिलकर लाखों यौगिकों का निर्माण करता है, जिन्हें मुख्य रूप से कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds) कहा जाता है।
  • शृंखलन और आबंध: कार्बन परमाणु आपस में मिलकर लंबी श्रृंखलाएं, शाखित श्रृंखलाएं या वलय बनाते हैं तथा हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन जैसे तत्वों के साथ प्रबल सहसंयोजक बंध बनाते हैं।
  • विशालता: यही सर्वतोमुखी प्रकृति प्रकृति में मिलने वाले सभी अन्य तत्वों के यौगिकों की तुलना में कार्बनिक यौगिकों की संख्या को सबसे अधिक बनाती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) अकार्बनिक यौगिक: अकार्बनिक यौगिक मुख्य रूप से कार्बन के अलावा अन्य तत्वों से बनते हैं (हालांकि कुछ सरल कार्बन यौगिक जैसे $\text{CO}_2$, कार्बोनेट आदि इसमें गिने जाते हैं, लेकिन कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति मुख्य रूप से कार्बनिक रसायन से जुड़ी है)।
  • विकल्प (C) थालिक यौगिक: रसायन विज्ञान में ‘थालिक’ (Phthalic) एक विशिष्ट समूह या अम्ल (जैसे Phthalic acid) से संबंधित है, यह कोई व्यापक यौगिक श्रेणी नहीं है।
  • विकल्प (D) आयनिक यौगिक: कार्बन परमाणु इलेक्ट्रॉनों का त्याग या ग्रहण नहीं करते बल्कि साझा करके सहसंयोजक यौगिक बनाते हैं, इसलिए यह आयनिक यौगिकों का निर्माण नहीं करते।

#7. _________ श्वसन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जीव ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ऊर्जा उत्पन्न करते हैं
。(RPF SI Previous Paper : 5 Jan 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) अवायवीय

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration): यह वह श्वसन प्रक्रिया है जिसमें जीव ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) की अनुपस्थिति में ग्लूकोज का विघटन करके ऊर्जा (ATP) उत्पन्न करते हैं। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज पूरी तरह से ऑक्सीकृत नहीं होता है।
  • उत्पाद: इस प्रकार के श्वसन के परिणामस्वरूप इथाइल अल्कोहल (यीस्ट में), लैक्टिक अम्ल (हमारी मांसपेशियों में भारी व्यायाम के दौरान), या कार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा का निर्माण होता है।
  • उदाहरण: यीस्ट, कुछ बैक्टीरिया और ऑक्सीजन की कमी होने पर मांसपेशियों की कोशिकाएं अवायवीय श्वसन करती हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) अल्प-भार: यह श्वसन या जीव विज्ञान से संबंधित कोई मानक वैज्ञानिक शब्द नहीं है।
  • विकल्प (B) स्वपोषी (Autotrophic): यह जीवों द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाने की पोषण विधि है (जैसे हरे पौधे), न कि श्वसन का प्रकार।
  • विकल्प (C) ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration): यह ऑक्सीजन की **उपस्थिति** में होने वाली श्वसन प्रक्रिया है, जबकि प्रश्न में ‘अनुपस्थिति’ पूछा गया है।

#8. चांदी की वस्तुएं लंबे समय तक हवा के संपर्क में रहने पर काली हो जाती हैं। निम्नलिखित में से कौन एक परत की तरह उसपर जम जाता है?
(RRB JE EE 19 Sept 2019 Shift 2 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (B) Ag2S

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • चांदी का काला पड़ना (Tarnishing of Silver): जब चांदी (Silver) की वस्तुएं लंबे समय तक हवा में खुली रहती हैं, तो हवा में मौजूद सल्फर या हाइड्रोजन सल्फाइड ($\text{H}_2\text{S}$) गैस के साथ अभिक्रिया करके चांदी की सतह पर सिल्वर सल्फाइड ($\text{Ag}_2\text{S}$) की एक काली परत बना लेती हैं।
  • रासायनिक अभिक्रिया: $4\text{Ag} + 2\text{H}_2\text{S} + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{Ag}_2\text{S} + 2\text{H}_2\text{O}$
  • संक्षारण (Corrosion): यह धातुओं के संक्षारण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके कारण चांदी के गहने और बर्तन समय के साथ अपनी चमक खो देते हैं और काले पड़ जाते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) Ag3N: यह सिल्वर नाइट्राइड का सूत्र है, जो एक संवेदनशील विस्फोटक यौगिक है और इसका हवा में चांदी के काले होने से कोई संबंध नहीं है।
  • विकल्प (C) Ag2O: यह सिल्वर ऑक्साइड का सूत्र है। वायुमंडल में चांदी के काले होने का मुख्य कारण ऑक्सीजन से ऑक्साइड बनना नहीं, बल्कि सल्फर यौगिकों से $\text{Ag}_2\text{S}$ बनना है।
  • विकल्प (D) Ag2SO3: यह सिल्वर सल्फाइट का सूत्र है, जो सामान्य वायुमंडलीय संक्षारण के दौरान चांदी की सतह पर नहीं जमता।

#9. सहसंयोजक बंध किसके द्वारा बनते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सहसंयोजक बंध (Covalent Bond): जब दो या दो से अधिक परमाणु (सामान्यतः अधातुएं) अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों का आपसी साझाकरण (Mutual sharing) करते हैं, तब उनके बीच बनने वाले रासायनिक बंध को सहसंयोजक बंध कहा जाता है।
  • उदाहरण: हाइड्रोजन अणु ($\text{H}_2$), ऑक्सीजन अणु ($\text{O}_2$), और मीथेन ($\text{CH}_4$) इसके प्रमुख उदाहरण हैं, जहाँ इलेक्ट्रॉन जोड़े साझा होते हैं।
  • अष्टक नियम: इस साझाकरण के माध्यम से परमाणु अपने निकटतम उत्कृष्ट गैस (Noble Gas) जैसा स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) न्यूट्रॉनों की हानि: न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक के भीतर होते हैं और रासायनिक आबन्धन (Chemical bonding) में भाग नहीं लेते।
  • विकल्प (C) इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण: इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण (Transfer) से आयनिक बंध बनते हैं, न कि सहसंयोजक बंध।
  • विकल्प (D) प्रोटॉनों की लब्धि: रासायनिक अभिक्रियाओं और आबन्धन में प्रोटॉनों का आदान-प्रदान नहीं होता, क्योंकि प्रोटॉन नाभिक के भीतर दृढ़ता से बंधे होते हैं।

#10. चूने का पानी में से कार्बन डाइऑक्साइड गैस गुजारने से चूने का पानी दूधिया हो जाता इस प्रक्रिया में कौन-सा पदार्थ बनता है?
(RRB NTPC CBT-I : 19 Jan 2021 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (D) CaCO3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • दूधिया रंग का कारण: जब चूने के पानी [कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, $\text{Ca(OH)}_2$] में से कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस गुजारी जाती है, तो यह अभिक्रिया करके अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) का श्वेत अवक्षेप बनाती है, जिसके कारण चूने का पानी दूधिया (Milky) हो जाता है।
  • रासायनिक समीकरण: $\text{Ca(OH)}_2 \text{ (aq)} + \text{CO}_2 \text{ (g)} \rightarrow \text{CaCO}_3 \text{ (s)} \downarrow + \text{H}_2\text{O} \text{ (l)}$
  • अतिरिक्त प्रभाव: यदि इस विलयन में लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में $\text{CO}_2$ गैस प्रवाहित की जाए, तो कैल्शियम कार्बोनेट, घुलनशील कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{Ca(HCO}_3)_2$) में बदल जाता है जिससे दूधियापन गायब हो जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) Ca(HCO3)2: यह कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट का सूत्र है, जो तब बनता है जब चूने के पानी में बहुत अधिक मात्रा में $\text{CO}_2$ प्रवाहित की जाती है (और इससे दूधियापन समाप्त हो जाता है)।
  • विकल्प (B) CaO: यह बिना बुझा हुआ चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) है, जो इस रासायनिक प्रक्रिया में नया उत्पाद नहीं बनता।
  • विकल्प (C) Ca(OH)2: यह चूने का पानी (अभिकारक) है, जिसमें $\text{CO}_2$ गैस प्रवाहित की जाती है, न कि यह इस प्रतिक्रिया में बनने वाला मुख्य उत्पाद है जो दूधियापन के लिए जिम्मेदार हो।



#11. किस यौगिक को ‘लेड शुगर’ कहा जाता है?
(RPF Constable 2018 11 Feb 2019)

✨ सही उत्तर: (D) लेड एसीटेट

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • लेड शुगर (Lead Sugar): लेड एसीटेट ($\text{Pb(CH}_3\text{COO)}_2 \cdot 3\text{H}_2\text{O}$) को ऐतिहासिक रूप से ‘लेड शुगर’ कहा जाता है क्योंकि इसका स्वाद मीठा होता है।
  • ऐतिहासिक उपयोग: प्राचीन काल में और रोमन साम्राज्य के दौरान इसका उपयोग शराब और भोजन को मीठा करने या संरक्षित करने के लिए एक स्वीटटेनर (Sweetener) के रूप में किया जाता था, हालांकि यह अत्यधिक विषैला (Toxic) होता है।
  • रासायनिक प्रकृति: यह सफेद क्रिस्टलीय ठोस होता है जो पानी में आसानी से घुलनशील है। लेड की विषाक्तता (Lead poisoning) के कारण इसका उपयोग अब प्रतिबंधित है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) लेड कार्बोनेट: इसे ‘सफेद सीसा’ (White lead) कहा जाता है, जिसका उपयोग पेंट में पिगमेंट के रूप में होता है।
  • विकल्प (B) लेड डाइऑक्साइड: यह लेड का एक ऑक्साइड ($\text{PbO}_2$) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से लेड-एसिड बैटरी की प्लेटों में किया जाता है।
  • विकल्प (C) लेड ऑक्साइड: इसे लिथार्ज ($\text{PbO}$) भी कहा जाता है, जिसका उपयोग कांच, रबर और सिरेमिक उद्योग में होता है।

#12. कौन सा युग्म संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म के रूप में कार्य करता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 09 Sept, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) NH4+ और NH3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate Acid-Base Pair): ब्रॉन्स्टेड-लोरी अवधारणा के अनुसार, अम्ल-क्षार का ऐसा युग्म जो केवल एक प्रोटॉन ($\text{H}^+$) के अंतर से भिन्न होता है, उसे संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म कहा जाता है। जब कोई अम्ल प्रोटॉन का त्याग करता है, तो उसके बाद जो बचता है वह उसका संयुग्मी क्षार होता है।
  • विश्लेषण: अमोनियम आयन ($\text{NH}_4^+$) एक प्रोटॉन का त्याग करके अमोनिया ($\text{NH}_3$) बनाता है। इसलिए, $\text{NH}_4^+$ एक अम्ल है और $\text{NH}_3$ इसका संयुग्मी क्षार (Conjugate base) है।
  • समीकरण: $\text{NH}_4^+ \rightleftharpoons \text{NH}_3 + \text{H}^+$

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) Cl2 और Cl–: यह प्रोटॉन के आदान-प्रदान पर आधारित संयुग्मी युग्म नहीं है, क्योंकि क्लोरीन अणु में हाइड्रोजन ही उपस्थित नहीं है।
  • विकल्प (B) NaOH और OH–: सोडियम हाइड्रोक्साइड एक मजबूत क्षार है और $\text{OH}^-$ इसका आयन है, यह ब्रॉन्स्टेड-लोरी संयुग्मी युग्म नहीं बनाते।
  • विकल्प (C) H2O और HCl: दोनों ही अलग-अलग यौगिक हैं; $\text{HCl}$ एक प्रबल अम्ल है और $\text{H}_2\text{O}$ एक विलायक/उभयधर्मी यौगिक है, यह आपस में संयुग्मी युग्म नहीं बनाते।

#13. निम्नलिखित में से कौन कार्बन मोनोऑक्साइड का आणविक सूत्र दर्शाता है?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) CO

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide): कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन, गंधहीन और अत्यंत विषैली गैस है जिसका रासायनिक सूत्र CO होता है। इसमें कार्बन और ऑक्सीजन का एक-एक परमाणु आपस में जुड़ा होता है।
  • निर्माण और प्रकृति: यह कार्बन युक्त ईंधनों के अपूर्ण दहन (Incomplete combustion) के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है।
  • विषाक्तता: यह रक्त में हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है और व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) CO3: यह कार्बोनेट आयन ($\text{CO}_3^{2-}$) का संकेत देता है, जो अपने आप में स्वतंत्र रूप से स्थिर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस नहीं है।
  • विकल्प (B) CO2: यह कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) का रासायनिक सूत्र है, जिसमें एक कार्बन और दो ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
  • विकल्प (C) C2O: यह रसायन विज्ञान में कार्बन मोनोऑक्साइड का मानक आणविक सूत्र नहीं है।

#14. खालीलपैकी कोणती जोडी योग्य उदाहरण आहे, जी संयुगाची संख्या 2 दर्शवते?
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) अमोनियम आणि सल्फेट

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संयुजा (Valency) संकल्पना: रासायनिक यौगिकों के निर्माण में आयनों की संयोजकता (Combining capacity) महत्वपूर्ण होती है। अमोनियम आयन ($\text{NH}_4^+$) की संयोजकता 1 होती है और सल्फेट आयन ($\text{SO}_4^{2-}$) की संयोजकता 2 होती है।
  • रासायनिक सूत्र का निर्माण: जब अमोनियम और सल्फेट आपस में मिलते हैं, तो क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन (Cross-multiplication) पद्धति के अनुसार अमोनियम की संख्या 2 हो जाती है और सल्फेट की संख्या 1 रहती है, जिससे अमोनियम सल्फेट ($\text{(NH}_4)_2\text{SO}_4$) यौगिक बनता है।
  • संयुगाची संख्या 2 (आयनों की संख्या या संयोजकता संतुलन): यहाँ अमोनियम मूलक की संख्या 2 होने के कारण यह इस युग्म को सही रूप से दर्शाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) सल्फेट आणि सल्फाइट: ये दोनों ही ऋणायन (Anions) हैं, और दो ऋणायन आपस में मिलकर स्थिर यौगिक का निर्माण नहीं कर सकते।
  • विकल्प (C) सोडियम आणि सल्फेट: सोडियम की संयोजकता 1 और सल्फेट की 2 होती है, जिससे सूत्र $\text{Na}_2\text{SO}_4$ बनता है (जहाँ सोडियम की संख्या 2 होती है, अमोनियम की नहीं)।
  • विकल्प (D) फॉस्फेट आणि नायट्राइड: ये दोनों भी ऋणायन ($\text{PO}_4^{3-}$ और $\text{N}^{3-}$) हैं, जो आपस में आयनिक यौगिक नहीं बनाते।

#15. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ गर्म करने पर विघटित होकर बिना बुझा चूना देता है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) CaCO3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ऊष्मीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) यानी चूना पत्थर को उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, तो यह विघटित होकर बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड, $\text{CaO}$) और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस देता है।
  • रासायनिक समीकरण: $\text{CaCO}_3 \text{ (s)} \xrightarrow{\Delta} \text{CaO} \text{ (s)} + \text{CO}_2 \text{ (g)}$
  • औद्योगिक उपयोग: इस प्रक्रिया का उपयोग बड़े पैमाने पर सीमेंट उद्योग और धातु कर्म में बिना बुझा चूना प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) CaCl: यह रासायनिक रूप से मानक या स्थिर यौगिक का सही सूत्र नहीं है (कैल्शियम क्लोराइड का सही सूत्र $\text{CaCl}_2$ होता है)।
  • विकल्प (C) KClO3: यह पोटेशियम क्लोरेट का सूत्र है, जिसे गर्म करने पर पोटेशियम क्लोराइड और ऑक्सीजन गैस ($\text{O}_2$) प्राप्त होती है, बिना बुझा चूना नहीं।
  • विकल्प (D) NaOH: यह सोडियम हाइड्रोक्साइड (कॉस्टिक सोडा) है, जो गर्म करने पर बिना बुझे चूने में विघटित नहीं होता।



#16. रासायनिक रूप से, जंग क्या है?
(RRB JE CBT I :- 1 June 2019 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • जंग (Rust): रासायनिक रूप से लोहे पर लगने वाली जंग हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड ($\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$) होती है। यह लोहे के संक्षारण (Corrosion) का परिणाम है।
  • रासायनिक प्रक्रिया: जब लोहा (Iron) वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) और नमी या जल वाष्प ($\text{H}_2\text{O}$) के संपर्क में आता है, तो ऑक्सीकरण के कारण भूरे रंग की परत (जंग) बनने लगती है।
  • रासायनिक समीकरण: $4\text{Fe} + 3\text{O}_2 + 2x\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) फेरिक क्लोराइड ($\text{FeCl}_3$): यह आयरन का एक क्लोराइड लवण है, जिसका उपयोग जल शोधन और नक़्क़ाशी (Etching) में किया जाता है, यह लोहे की जंग नहीं है।
  • विकल्प (B) फेरिक ब्रोमाइड ($\text{FeBr}_3$): यह ब्रोमीन और आयरन का यौगिक है, जो सामान्य वायुमंडलीय संक्षारण या जंग से संबंधित नहीं है।
  • विकल्प (C) फेरिक सल्फाइड ($\text{Fe}_2\text{S}_3$): यह आयरन और सल्फर का यौगिक है, जबकि लोहे की जंग में सल्फर नहीं बल्कि ऑक्सीजन और जल के अणु होते हैं।

#17. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करने के लिए तापीय अपघटन से गुजरता है?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) कैल्शियम कार्बोनेट

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • तापीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब किसी यौगिक को ऊष्मा (Heat) दी जाती है, और वह टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है, तो उसे तापीय अपघटन अभिक्रिया कहते हैं।
  • कैल्शियम कार्बोनेट का अपघटन: चूना पत्थर या कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) को गर्म करने पर यह विघटित होकर बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड, $\text{CaO}$) और कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस उत्पन्न करता है।
  • रासायनिक समीकरण: $\text{CaCO}_3 \text{ (s)} \xrightarrow{\Delta} \text{CaO} \text{ (s)} + \text{CO}_2 \text{ (g)}$

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) कैल्शियम क्लोराइड ($\text{CaCl}_2$): इसे गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड प्राप्त नहीं होते।
  • विकल्प (B) कैल्शियम नाइट्रेट [Ca(NO3)2]: इसको गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($\text{NO}_2$) और ऑक्सीजन गैस ($\text{O}_2$) प्राप्त होती है, न कि कार्बन डाइऑक्साइड।
  • विकल्प (C) कैल्शियम सल्फेट ($\text{CaSO}_4$): यह जिप्सम या प्लास्टर ऑफ पेरिस के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, लेकिन तापीय अपघटन से यह $\text{CaO}$ और $\text{CO}_2$ उत्पन्न नहीं करता।

#18. खाने के सोडा का सूत्र क्या है?
(RPF SI Previous Paper : 5 Jan 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) NaHCO3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • रासायनिक नाम और सूत्र: खाने के सोडे (बेकिंग सोडा) का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट या सोडियम बाइकार्बोनेट है और इसका रासायनिक सूत्र NaHCO3 होता है।
  • निर्माण विधि: इसे सोल्वे विधि द्वारा सोडियम क्लोराइड, जल, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया की सहायता से उत्पादित किया जाता है।
  • प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग बेकरी उत्पादों (ब्रेड, केक आदि) को फुलाने के लिए बेकिंग पाउडर बनाने में, पेट की अम्लता (Acidity) को कम करने के लिए एंटासिड (Antacid) के रूप में, और अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) NaHCO2: यह सोडियम फॉर्मेट का सूत्र है, जो खाने का सोडा नहीं है।
  • विकल्प (B) Na2CO4: यह सोडियम परकार्बोनेट या अमानक यौगिक का संकेत देता है, जो बेकिंग सोडा नहीं है।
  • विकल्प (C) Na2CO3: यह सोडियम कार्बोनेट (धोवन सोडा / Washing Soda) का सूत्र है, जिसमें क्रिस्टलन जल के अणु भी जुड़े होते हैं ($\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$)।

#19. सहसंयोजक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः कम क्यों होते हैं?
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (D) इनमें दुर्बल अंतराअणु क बल होते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सहसंयोजक यौगिकों के गुण: सहसंयोजक यौगिकों (जैसे ग्लूकोज, एल्कोहल, मीथेन आदि) में अणुओं के बीच के आकर्षण बल (अंतराअणु बल / Intermolecular forces जैसे वंडर वाल बल) बहुत दुर्बल (Weak) होते हैं।
  • कम गलनांक और क्वथनांक: इन दुर्बल बलों को तोड़ने के लिए बहुत कम ऊمیय ऊर्जा (Thermal energy) की आवश्यकता होती है, यही कारण है कि सहसंयोजक यौगिकों के गलनांक (Melting points) और क्वथनांक (Boiling points) सामान्यतः कम होते हैं।
  • विद्युत चालकता: इनमें स्वतंत्र आयन या इलेक्ट्रॉन नहीं होते, इसलिए ये सामान्यतः विद्युत के कुचालक भी होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) धात्विक आबंध: धात्विक आबंध धातुओं में पाए जाते हैं, सहसंयोजक यौगिकों में नहीं।
  • विकल्प (B) प्रबल स्थिरवैद्युत बल: प्रबल स्थिरवैद्युत (Electrostatic) बल आयनिक यौगिकों में पाए जाते हैं, जिनके कारण उनके गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।
  • विकल्प (C) दृढ़ जालक संरचना: दृढ़ और मजबूत क्रिस्टलीय जालक संरचना भी मुख्य रूप से आयनिक यौगिकों की विशेषता है, जो उनके उच्च melting point का कारण बनती है।

#20. संगमरमर का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RPF Constable 2018 : 06 Feb 2019)

✨ सही उत्तर: (A) CaCO3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संगमरमर (Marble): संगमरमर, चूना पत्थर (Limestone) का ही कायांतरित (Metamorphic) रूप है। रासायनिक रूप से यह कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) होता है।
  • प्राकृतिक रूप: यह प्रकृति में चूना पत्थर, खड़िया (Chalk) और संगमरमर के रूप में पाया जाता है और यह एक अघुलनशील लवण है।
  • उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से मूर्तिकला, भवनों के निर्माण और फर्श की सजावट में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) SiO2: यह सिलिकॉन डाइऑक्साइड (सिलिका / रेत / क्वार्ट्ज) का रासायनिक सूत्र है।
  • विकल्प (C) FeSO4: यह फेरस सल्फेट (हरा कसीस) का सूत्र है, जो जल में घुलनशील हरा लवण है।
  • विकल्प (D) CaO: यह कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा हुआ चूना) है, जो $\text{CaCO}_3$ को गर्म करने पर प्राप्त होता है।



#21. निम्नलिखित में से किस लवण का जल में घुलने पर pH मान 7 के निकट होगा?
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) NaCl

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • उदासीन लवण (Neutral Salt): जब कोई लवण एक प्रबल अम्ल ($\text{HCl}$) और एक प्रबल क्षार ($\text{NaOH}$) की उदासीनीकरण अभिक्रिया से बनता है, तो वह जल में पूरी तरह उदासीन रहता है।
  • सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$): यह साधारण नमक प्रबल अम्ल हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और प्रबल क्षार सोडियम हाइड्रोक्साइड से बनता है। जल में घुलने पर यह जल का pH परिवर्तित नहीं करता और इसका pH मान ठीक 7 (या उसके अत्यंत निकट) होता है।
  • अन्य प्रकार के लवणों में जल अपघटन (Hydrolysis) के कारण विलयन अम्लीय या क्षारीय हो जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) $\text{CH}_3\text{COONa}$ (सोडियम एसीटेट): यह दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार का लवण है, जिसका जलीय विलयन क्षारीय होता है (pH मान 7 से अधिक होता है)।
  • विकल्प (C) $\text{NH}_4\text{Cl}$ (अमोनियम क्लोराइड): यह प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार का लवण है, जिसका जलीय विलयन अम्लीय होता है (pH मान 7 से कम होता है)।
  • विकल्प (D) $\text{Na}_2\text{CO}_3$ (सोडियम कार्बोनेट): यह भी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बना लवण है, जिसका जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है (pH > 7)।

#22. सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन में विद्युत प्रवाहित करके सोडियम हाइड्रोक्साइड तैयार किया जाता है। इस प्रक्रम को _________ कहा जाता है।
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (C) क्लोर-अल्कली (Chlor-alkali)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • क्लोर-अल्कली प्रक्रम (Chlor-alkali Process): जब साधारण नमक के जलीय विलयन (जिसे ‘ब्राइन’ या Brine कहा जाता है) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह विघटित होकर सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$), क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) बनाता है।
  • नाम का कारण: इस प्रक्रिया को ‘क्लोर-अल्कली’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें उत्पाद के रूप में **क्लोरीन** (Chlor) और एक क्षार/अल्कली (**सोडियम हाइड्रोक्साइड**) प्राप्त होते हैं।
  • रासायनिक समीकरण: $2\text{NaCl (aq)} + 2\text{H}_2\text{O (l)} \xrightarrow{\text{विद्युत धारा}} 2\text{NaOH (aq)} + \text{Cl}_2\text{ (g)} + \text{H}_2\text{ (g)}$

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) डाउ प्रक्रम (Dow’s process): यह क्लोरोबेंजीन से फिनोल बनाने या मैग्नीशियम के निष्कर्षण से संबंधित विधि है।
  • विकल्प (B) बोर्न-हाबर चक्र (Born-Haber cycle): यह आयनिक यौगिकों की जालक ऊर्जा (Lattice energy) की गणना से संबंधित ऊष्मारसायन का हिस्सा है।
  • विकल्प (D) हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process): यह एल्युमिनियम धातु के निष्कर्षण (Extraction of Aluminium) की एक प्रमुख औद्योगिक विधि है।

#23. निम्न में से कौन-सा वृkkaस्म (गुर्दे की पथरी) बनाने वाला सबसे सामान्य यौगिक है?
(RRB NTPC Tier I : 2 Apr 2016 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) कैल्शियम ऑक्सालेट

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गुर्दे की पथरी (Kidney Stone / Nephrolithiasis): वृक्काश्म या गुर्दे की पथरी का सबसे आम कारण कैल्शियम ऑक्सालेट ($\text{CaC}_2\text{O}_4$) के क्रिस्टल का मूत्रमार्ग में जमना है। लगभग 80% पथरियाँ इसी यौगिक से बनती हैं।
  • कारण: जब मूत्र में कैल्शियम और ऑक्सालेट की मात्रा बढ़ जाती है और पानी की कमी (निर्जलीकरण) होती है, तो यह यौगिक अघुलनशील ठोस कणों या पथरी के रूप में एकत्र होने लगता है।
  • रोकथाम: पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों (जैसे टमाटर, पालक आदि) के अत्यधिक सेवन से बचने से इससे बचाव किया जा सकता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) मैग्नीशियम ऑक्साइड: यह एंटासिड और मैग्नीशियम की खुराक के रूप में उपयोग किया जाता है, सामान्य गुर्दे की पथरी बनाने वाला मुख्य यौगिक नहीं है।
  • विकल्प (C) सोडियम बाइकार्बोनेट: यह खाने का सोडा है, जिसका उपयोग एसिडिटी और पेट की समस्याओं के उपचार में होता है।
  • विकल्प (D) मैग्नीशियम साइट्रेट: यह आंतों की सफाई के लिए जुलाब (Laxative) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, यह पथरी का सामान्य प्रकार नहीं है।

#24. ग्लिसरॉल को _________ के साथ मिलाने पर लिपिड बनते हैं।
(RRB JE CBT I :- 2 June 2019 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (B) वसीय अम्ल

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • लिपिड और वसा (Lipids / Fats): सामान्य लिपिड या वसा मुख्य रूप से ग्लिसरॉल (Glycerol) और वसीय अम्लों (Fatty Acids) के एस्टर होते हैं। एक ग्लिसरॉल अणु के साथ तीन वसीय अम्ल अणु मिलकर ट्राइग्लिसराइड (Triglyceride) बनाते हैं।
  • रासायनिक बंध: ग्लिसरॉल और वसीय अम्लों के बीच बनने वाले इस बंध को एस्टर बंध (Ester bond) कहा जाता है।
  • कार्य: लिपिड हमारे शरीर में ऊर्जा के मुख्य स्रोत, कोशिकाओं की झिल्ली (Cell membrane) के निर्माण और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) डाइसैकेराइड: यह कार्बोहाइड्रेट का एक प्रकार है (जैसे सुक्रोज, लैक्टोज), जो शर्करा इकाइयों से मिलकर बनता है, लिपिड से नहीं।
  • विकल्प (C) पेप्टाइड: पेप्टाइड बंध अमीनो अम्लों को आपस में जोड़कर प्रोटीन का निर्माण करते हैं।
  • विकल्प (D) ओलिगोसैकेराइड: यह भी कार्बोहाइड्रेट का एक प्रकार है जिसमें कुछ मोनोसैकेराइड इकाइ जुड़ी होती हैं।

#25. कार्बन में पाए जाने वाले कौन-से दो गुणधर्म, बड़ी संख्या में कार्बन यौगिकों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) चतुर्दशोजकता और शृंखलन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • चतुःसंयोजकता या चतुर्दशोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिसका अर्थ है कि यह एक साथ चार अन्य कार्बन परमाणुओं या अन्य एकसंयोजक परमाणुओं (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन आदि) के साथ सहसंयोजक बंध बना सकता है।
  • शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएं, शाखित (branched) श्रृंखलाएं और वलय (rings) बनाने की एक अद्वितीय क्षमता होती है, जिसे शृंखलन कहा जाता है।
  • परिणाम: इन दोनों गुणों के संयोजन के कारण ही कार्बन अन्य सभी तत्वों की तुलना में सबसे अधिक संख्या में कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A): कार्बन आयनिक आबंध नहीं बनाता बल्कि सहसंयोजक आबंध बनाता है और इलेक्ट्रונים का साझा करता है, त्याग नहीं।
  • विकल्प (C): कार्बन का परमाणु आकार बहुत छोटा और परमाणु द्रव्यमान कम होता है, बड़ा आकार नहीं।
  • विकल्प (D): कार्बन एक अधातु है, इसलिए इसमें धात्विक लक्षण या सामान्य धात्विक चालकता नहीं पाई जाती (ग्रेफाइट इसका अपवाद है जो विद्युत का चालन करता है, लेकिन धात्विक लक्षण नहीं दर्शाता)।



#26. बहुतेक कार्बन संयुगात सामान्यतः कोणत्या प्रकारचे बंध आढळतात?
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) सहसंयुजी बंध (सहसंयोजक बंध / Covalent Bond)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सहसंयोजक बंध (Covalent Bond): अधिकांश कार्बनिक यौगिकों में कार्बन परमाणु अन्य कार्बन या हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन जैसे तत्वों के साथ इलेक्ट्रॉनों के आपसी साझाकरण (Sharing) द्वारा बंध बनाते हैं, जिन्हें सहसंयोजक बंध कहा जाता है।
  • कारण: कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इसे अष्टक पूरा करने के लिए या तो 4 इलेक्ट्रॉन त्यागने होते हैं (जो अत्यधिक ऊर्जावान होने के कारण असंभव है) या 4 ग्रहण करने होते हैं। इसलिए यह इलेक्ट्रॉनों का साझा करके सहसंयोजक बंध बनाता है।
  • विशेषताएँ: इन यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं और ये विद्युत के कुचालक होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) आयनिक बंध: आयनिक बंध इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनते हैं (जैसे $\text{NaCl}$ में), जो अधिकांश कार्बनिक यौगिकों में नहीं पाए जाते।
  • विकल्प (C) सहबद्ध बंध: यह रसायन विज्ञान में कोई मानक या मुख्य रासायनिक आबंध प्रकार नहीं है।
  • विकल्प (D) हाइड्रोजन बंध: यह अणुओं के बीच लगने वाला एक विशिष्ट अंतर-आणविक आकर्षण बल है (जैसे पानी या अमोनिया में), न कि अधिकांश कार्बन यौगिकों का मुख्य प्राथमिक रासायनिक बंध।

#27. निम्नलिखित में से कौन-सा एल्कीन का सामान्य सूत्र है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (D) CnH2n

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • एल्कीन (Alkenes): ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated hydrocarbons) होते हैं जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्विबंध (Double bond) पाया जाता है।
  • सामान्य सूत्र: एल्कीन श्रेणी का सामान्य रासायनिक सूत्र $\text{C}_n\text{H}_{2n}$ होता है (जहाँ $n$ कार्बन परमाणुओं की संख्या है और $n \ge 2$ होता है)।
  • उदाहरण: एथेन ($\text{C}_2\text{H}_4$), प्रोपेन ($\text{C}_3\text{H}_6$), और ब्यूटेन ($\text{C}_4\text{H}_8$) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) $\text{C}_n\text{H}_{2n+1}$: यह ऐल्किल समूह (Alkyl group / Radical) का सामान्य सूत्र है (जैसे मेथिल, एथिल), न कि एल्कीन का।
  • विकल्प (B) $\text{C}_{2n}\text{H}_{2n}$: यह हाइड्रोकार्बन के लिए कोई मानक या प्रचलित सामान्य सूत्र नहीं है (यह अनुपात के रूप में $\text{C}_n\text{H}_n$ जैसा दिख सकता है, जो गलत है)।
  • विकल्प (C) $\text{C}_n\text{H}_n$: यह एर्नायन्स या विशिष्ट यौगिकों (जैसे एसिटिलीन का सरल अनुपात या बेंजीन का मूलानुपाती सूत्र) से संबंधित है, लेकिन यह एल्कीन का सामान्य सूत्र नहीं है। (नोट: एल्केन का सूत्र $\text{C}_n\text{H}_{2n+2}$ और एल्काइन का $\text{C}_n\text{H}_{2n-2}$ होता है)।

#28. CH 3 COCH 3 का सही IUPAC नाम __________________ है。
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (C) प्रोपेनोन है, जो एक कीटोन है जिसके मध्य कार्बन पर कार्बोनिल होता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संरचना और क्रियात्मक समूह: यौगिक $\text{CH}_3\text{COCH}_3$ में बीच वाले कार्बन पर कीटोन ($\text{C=O}$) क्रियात्मक समूह जुड़ा हुआ है। इसे सामान्य बोलचाल में एसीटोन (Acetone) कहा जाता है।
  • IUPAC नामकरण: इसमें कुल 3 कार्बन परमाणु हैं, इसलिए रूट वर्ड ‘प्रोप-‘ (Prop) होगा। कीटोन समूह के लिए प्रत्यय ‘-ओन’ (one) लगता है, जिससे इसका IUPAC नाम प्रोपेनोन (Propanone) बनता है।
  • विशेषता: यह सबसे सरल कीटोन है जो जल और कई कार्बनिक विलायकों में पूरी तरह घुलनशील होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A): प्रोपेनाल एक ऐल्डिहाइड है ($\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHO}$), जिसका सूत्र दिए गए यौगिक से भिन्न होता है।
  • विकल्प (B): प्रोपेनॉइक अम्ल एक कार्बोक्सिलिक एसिड है ($\text{CH}_3\text{CH}_2\text{COOH}$), जो कीटोन नहीं है।
  • विकल्प (D): प्रोपीन एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन) है, जिसमें ऑक्सीजन परमाणु नहीं होता।

#29. निम्नलिखित में से किसे’ शुष्क बर्फ’ के नाम से जाना जाता है?
(RRB JE 28 May 2019 Shift 1 CBT 1)

✨ सही उत्तर: (B) ठोस कार्बन डाइऑक्साइड

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • शुष्क बर्फ (Dry Ice): ठोस अवस्था में पाई जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) को ‘शुष्क बर्फ’ कहा जाता है।
  • उत्पातन (Sublimation): सामान्य बर्फ की तरह यह पिघलने पर तरल अवस्था में नहीं बदलती, बल्कि सीधे गैस में परिवर्तित (उर्ध्वपातनित) हो जाती है, इसीलिए इसे ‘शुष्क’ बर्फ कहा जाता है।
  • उपयोग: इसका मुख्य उपयोग खाद्य पदार्थों, दवाओं और जैविक नमूनों को ठंडी अवस्था में सुरक्षित रखने तथा परिवहन के दौरान प्रशीतक (Refrigerant) के रूप में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) पोटाश: यह पोटेशियम यौगिकों (जैसे पोटेशियम कार्बोनेट) से संबंधित उर्वरक या रसायन है, शुष्क बर्फ नहीं।
  • विकल्प (C) एप्सम: यह मैग्नीशियम सल्फेट सप्तजला ($\text{MgSO}_4 \cdot 7\text{H}_2\text{O}$) का सामान्य नाम है, जिसे एप्सम लवण कहा जाता है।
  • विकल्प (D) पारद: यह पारा (Mercury / $\text{Hg}$) धातु का हिंदी नाम है, जो सामान्य तापमान पर द्रव अवस्था में रहने वाली धातु है।

#30. कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करके निम्नलिखित में से किस पदार्थ की एक पतली परत बनाता है जिसका उपयोग सफेदी करने के लिए किया जा सकता है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) CaCO3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सफेदी (White-washing) की प्रक्रिया: दीवारों पर सफेदी करने के लिए बुझे हुए चूने यानी कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2] के विलयन का उपयोग किया जाता है।
  • रासायनिक अभिक्रिया: यह हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करके दीवारों पर कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) की एक पतली और चमकदार परत बना लेता है।
  • रासायनिक समीकरण: $\text{Ca(OH)}_2 \text{ (aq)} + \text{CO}_2 \text{ (g)} \rightarrow \text{CaCO}_3 \text{ (s)} + \text{H}_2\text{O \text{ (l)}}$
    (ध्यान दें कि दीवारों पर चमक दो से तीन दिन बाद आती है क्योंकि कैल्शियम कार्बोनेट का निर्माण पूरी तरह पूरा होता है)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) CaO: यह बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) है, जिसका उपयोग पानी में मिलाने पर बुझा हुआ चूना बनाने के लिए किया जाता है, न कि दीवारों पर परत के रूप में।
  • विकल्प (C) $\text{Ca(HCO}_3)_2$: यह कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (या कैल्शियम बाइकार्बोनेट) है, जो जल की स्थायी/अस्थायी कठोरता से संबंधित है, सफेदी की परत नहीं है।
  • विकल्प (D) $\text{CaSO}_4$ (या इसके जलीय रूप): यह कैल्शियम सल्फेट (जिप्सम या प्लास्टर ऑफ पेरिस से संबंधित) है, जो दीवारों की सफेदी की इस रासायनिक प्रक्रिया में नहीं बनता।



#31. यदि किसी प्रतिबिम्ब की ऊंचाई ( h’ ) को मुख्य अक्ष के लंबवत और नीचे (-y-अक्ष के अनुदिश) मापा जाता है, तो परिपाटी के अनुसार उसके मान को कौन-सा चिह्न दिया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) ऋणात्मक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गोलीय दर्पणों के लिए परिपाटी (Sign Convention): नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी के अनुसार, मुख्य अक्ष ($\text{X-अक्ष}$) से ऊपर की लंबवत् दूरियाँ हमेशा धनात्मक (+) मापी जाती हैं और मुख्य अक्ष से नीचे की ओर की लंबवत् दूरियाँ हमेशा ऋणात्मक (-) मापी जाती हैं।
  • प्रतिबिंब की स्थिति: चूँकि प्रतिबिंब की ऊँचाई ($h’$) मुख्य अक्ष के लंबवत नीचे ($-y$-अक्ष के अनुदिश) मापी गई है, इसलिए परिपाटी के नियमों के अनुसार इसका मान ऋणात्मक होगा।
  • महत्व: यह ऋणात्मक चिह्न यह भी दर्शाता है कि बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा (Real and Inverted) है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (D) धनात्मक: मुख्य अक्ष से ऊपर की ओर ($-y$ के विपरीत $+y$ अक्ष के अनुदिश) मापी गई ऊँचाइयाँ धनात्मक होती हैं, नीचे की ओर नहीं।
  • विकल्प (B) उदासीन: चिन्ह परिपाटी में दूरियों या ऊँचाइयों के लिए ‘उदासीन’ जैसा कोई मानक चिह्न नहीं होता।
  • विकल्प (C) आवर्धन पर निर्भर करता है: चिन्ह निर्देशांक ज्यामिति के अक्षों की दिशा (-अक्ष) के अनुसार तय होता है, न कि आवर्धन के मान पर।

#32. इनमें से कौन-सा एक रक्त समूह नहीं है?
(RRB JE 26 May 2019 Shift 3 CBT 1)

✨ सही उत्तर: (D) C

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • एबीओ रक्त समूह प्रणाली (ABO Blood Group System): मानव रक्त समूहों की खोज कार्ल लैंडस्टीनर (Karl Landsteiner) ने की थी। इस प्रणाली के अनुसार मुख्य रूप से चार प्रकार के रक्त समूह होते हैं: A, B, AB, और O।
  • ‘C’ रक्त समूह: ‘C’ नाम का कोई मानक मुख्य रक्त समूह मानव शरीर में नहीं पाया जाता (हालांकि ‘C’ एंटीजन आरएच (Rh) फैक्टर प्रणाली में जरूर मौजूद होता है, लेकिन मुख्य ABO रक्त समूह के रूप में ‘C’ नहीं होता)।
  • प्रमुख रक्त समूह: A, B, AB (सर्वग्राही – Universal Recipient) और O (सर्वदाता – Universal Donor) ही मुख्य चार रक्त समूह हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) O: यह एक वैध और सार्वभौमिक दाता (Universal donor) रक्त समूह है।
  • विकल्प (B) A: यह रक्त समूह A प्रकार के एंटीजन को दर्शाता है, जो एक मान्य रक्त समूह है।
  • विकल्प (C) AB: यह रक्त समूह AB प्रकार का है, जो सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता (Universal recipient) कहलाता है।

#33. जब कैल्शियम ऑक्साइड जल के साथ अभिक्रिया करता है, तो कौन-सा उत्पाद निर्मित होता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (B) कैल्सियम हाइड्रोक्साइड

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): जब बिना बुझे चूने यानी कैल्शियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$) को जल ($\text{H}_2\text{O}$) के साथ मिलाया जाता है, तो यह तीव्रता से अभिक्रिया करके बुझा हुआ चूना यानी कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2] बनाता है।
  • रासायनिक समीकरण: $\text{CaO (s)} + \text{H}_2\text{O (l)} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2\text{ (aq)} + \text{ऊष्मा (Heat)}$
  • विशेषता: इस प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है, जिससे विलयन उबलने लगता है। इस बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग दीवारों की सफेदी (White-washing) के लिए किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) कैल्सियम क्लोराइड ($\text{CaCl}_2$): यह कैल्शियम और क्लोरीन का यौगिक है, जो पानी के साथ इस सामान्य संयोजन अभिक्रिया से नहीं बनता।
  • विकल्प (C) कैल्सियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$): यह तब बनता है जब कैल्शियम हाइड्रोक्साइड हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया करता है, सीधे जल और $\text{CaO}$ की अभिक्रिया से नहीं।
  • विकल्प (D) कैल्सियम सल्फेट ($\text{CaSO}_4$): यह सल्फर युक्त यौगिक है, जिसका इस अभिक्रिया से कोई संबंध नहीं है।

#34. मैग्नीशियम क्लोराइड का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) MgCl2

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संयुजा (Valency) और सूत्र निर्माण: मैग्नीशियम ($\text{Mg}$) की संयोजकता 2 होती है और क्लोरीन ($\text{Cl}$) की संयोजकता 1 होती है।
  • क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन विधि: जब इनकी संयोजकता का क्रॉस-गुणा किया जाता है, तो मैग्नीशियम के साथ 1 और क्लोरीन के साथ 2 आता है, जिससे रासायनिक सूत्र $\text{MgCl}_2$ बनता है।
  • गुण और उपयोग: मैग्नीशियम क्लोराइड एक आयनिक यौगिक है जो जल में अत्यधिक घुलनशील होता है। इसका उपयोग विभिन्न उद्योगों, चिकित्सा और डी-आइसिंग (बर्फ पिघलाने) में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) $\text{Mg}_2\text{Cl}$: यह रासायनिक रूप से गलत सूत्र है, क्योंकि मैग्नीशियम अपनी 2 संयोजकता को पूरा करने के लिए दो क्लोरीन परमाणुओं के साथ बंध बनाता है, न कि दो मैग्नीशियम एक क्लोरीन के साथ।
  • विकल्प (C) $\text{MgCl}_3$: चूँकि मैग्नीशियम की संयोजकता केवल 2 होती है, इसलिए यह तीन क्लोरीन परमाणुओं को नहीं जोड़ सकता।
  • विकल्प (D) $\text{MgCl}$: यह सूत्र भी गलत है क्योंकि इसमें मैग्नीशियम की संयोजकता का संतुलन (संतोषजनक अष्टक या आवेश संतुलन) नहीं होता है।

#35. निम्नलिखित में से कौन HCl का संयुग्मी क्षार है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 02 Sept, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) Cl–

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ब्रॉन्स्टेड-लाउरी संकल्पना (Brønsted-Lowry Concept): इस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ($\text{H}^+$) दान करता है, और जब कोई अम्ल एक प्रोटॉन त्याग देता है, तो जो स्पीशीज (Species) बचती है, उसे उस अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate Base) कहते हैं।
  • रासायनिक अभिक्रिया: जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) एक प्रोटॉन ($\text{H}^+$) दान करता है, तो क्लोराइड आयन ($\text{Cl}^-$) शेष रहता है।
  • समीकरण: $\text{HCl} \rightleftharpoons \text{H}^+ + \text{Cl}^-$
    अतः $\text{HCl}$ का संयुग्मी क्षार $\text{Cl}^-$ है। (नोट: प्रबल अम्लों के संयुग्मी क्षार बहुत दुर्बल होते हैं)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) $\text{CH}^-$: यह कार्बन-हाइड्रोजन से संबंधित असामान्य ऋणायन है, जिसका $\text{HCl}$ से कोई सीधा संबंध नहीं है।
  • विकल्प (B) $\text{H}_2\text{O}^-$: यह जल या हाइड्रॉक्साइड का अमानक आयनिक रूप है, जो $\text{HCl}$ का संयुग्मी क्षार नहीं है।
  • विकल्प (D) $\text{Cl}^+$: यह धनात्मक क्लोरीन आयन है, जबकि अम्ल द्वारा प्रोटॉन त्यागने पर ऋणात्मक आयन ($\text{Cl}^-$) बनता है, न कि धनात्मक।



#36. अयस्क से अपअयस्क ( gangue ) को हटाने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रक्रियाएं, अपअयस्क और अयस्क के किन गुणों के बीच अंतर पर आधारित हैं?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) रासायनिक या भौतिक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अयस्क और अपअयस्क (Gangue): पृथ्वी से खनन करके निकाले गए अयस्कों में मिट्टी, रेत, अवांछित चट्टानी पदार्थ और अशुद्धियाँ मिली होती हैं, जिन्हें ‘अपअयस्क’ या गैंग (Gangue) कहते हैं।
  • सांद्रता / पृथक्करण प्रक्रियाएँ (Concentration / Beneficiation): अयस्क से गैंग को अलग करने के लिए धातु कर्म (Metallurgical) प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। ये प्रक्रियाएँ अयस्क और गैंग के भौतिक (Physical) गुणों (जैसे चुम्बकीय गुण, घनत्व, गीलापन) या रासायनिक (Chemical) गुणों (जैसे निक्षालन या लीचिंग) में अंतर पर आधारित होती हैं।
  • प्रमुख विधियाँ: हाइड्रोलिक धुलाई (गुरुत्वीय पृथक्करण), फेन प्लवन विधि (Froth Flotation), और चुंबकीय पृथक्करण भौतिक गुणों पर आधारित हैं, जबकि रासायनिक विधियाँ (जैसे बेयर प्रक्रम या सायनाइड प्रक्रम) रासायनिक अंतर का उपयोग करती हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) केवल रासायनिक: यह गलत है क्योंकि कई महत्वपूर्ण पृथक्करण विधियाँ पूरी तरह से भौतिक गुणों (जैसे चुंबकत्व या घनत्व) पर आधारित होती हैं।
  • विकल्प (C) अपवर्तनांक (Refractive Index): यह प्रकाश के अपवर्तन से संबंधित प्रकाशीय गुण है, जिसका खनिज सांद्रता या गैंग को हटाने से कोई संबंध नहीं है।
  • विकल्प (D) केवल भौतिक: यह भी अधूरा है क्योंकि कई अयस्कों के सांद्रण में रासायनिक अभिक्रियाओं (जैसे लीचिंग) का उपयोग किया जाता है, इसलिए केवल भौतिक कहना गलत है।

#37. CH 3 COCH 3 और C 2 H 5 OH यौगिकों के लिए क्रमशः सही IUPAC नाम चुनें。
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) प्रोपेनोन और एथेनॉल

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • पहला यौगिक ($\text{CH}_3\text{COCH}_3$): इसमें कुल 3 कार्बन परमाणु हैं और बीच वाले कार्बन पर कीटोन ($\text{C=O}$) क्रियात्मक समूह उपस्थित है। IUPAC नामकरण के अनुसार 3 कार्बन वाले कीटोन को प्रोपेनोन (Propanone) कहा जाता है (इसे सामान्यतः एसीटोन भी कहते हैं)।
  • दूसरा यौगिक ($\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$): इसमें 2 कार्बन परमाणु हैं और हाइड्रोक्सी ($\text{-OH}$) क्रियात्मक समूह जुड़ा हुआ है। 2 कार्बन वाले एल्कोहल को एथेनॉल (Ethanol) कहा जाता है।
  • अतः दोनों यौगिकों के सही क्रम में IUPAC नाम क्रमशः प्रोपेनोन और एथेनॉल हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) प्रोपेनोन और मेथेनॉल: इसमें मेथेनॉल दिया गया है, जबकि $\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$ में 2 कार्बन होने के कारण यह एथेनॉल है, मेथेनॉल ($\text{CH}_3\text{OH}$) नहीं।
  • विकल्प (B) प्रोपेनॉइक अम्ल और एथेनॉल: पहला यौगिक कीटोन है, कार्बोक्सिलिक एसिड (प्रोपेनॉइक अम्ल) नहीं।
  • विकल्प (D) एथेनॉल और प्रोपेनोन: इसमें यौगिकों के नाम का क्रम उलट (पहले एथेनॉल और बाद में प्रोपेनोन) दिया गया है, जबकि प्रश्न में पहले $\text{CH}_3\text{COCH}_3$ पूछा गया है।

#38. मीथेन के लिए सूत्र क्या है?
(RPF SI 2018 : 10 Jan 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) CH4

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • मीथेन (Methane): मीथेन सबसे सरल हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन श्रेणी का पहला सदस्य) है। इसका रासायनिक सूत्र $\text{CH}_4$ होता है, जिसमें एक कार्बन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है।
  • प्राकृतिक स्रोत: इसे ‘मार्श गैस’ (Marsh gas) भी कहा जाता है क्योंकि यह दलदली स्थानों, धान के खेतों और प्राकृतिक गैस के मुख्य घटक के रूप में पाई जाती है।
  • गुण: यह एक रंगहीन, गंधहीन और ज्वलनशील गैस है, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) $\text{MH}_4$ और (C) $\text{M}_2\text{H}_4$: रसायन विज्ञान में ‘M’ किसी रासायनिक तत्व का प्रतीक नहीं है (यह आमतौर पर धातु या अज्ञात चर के लिए उपयोग किया जाता है), इसलिए ये सूत्र रासायनिक रूप से अमान्य हैं।
  • विकल्प (D) $\text{C}_2\text{H}_4$: यह एथीन ($\text{C}_2\text{H}_4$) का रासायनिक सूत्र है, जो एक एल्कीन (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) है, मीथेन नहीं।

#39. कार्बनिक यौगिकों में, बंधों की लंबाई और बंधों की तापन क्षमता निम्नलिखित में से क्या है?
(RPF SI 2018 : 12 Jan 2019 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) संकरण (Hybridization)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संकरण (Hybridization): कार्बनिक यौगिकों में रासायनिक बंधों की लंबाई (Bond length), बंध सामर्थ्य/ऊर्जा (Bond dissociation energy) और बंध कोण (Bond angle) सीधे तौर पर केंद्रीय परमाणु के संकरण पर निर्भर करते हैं।
  • विभिन्न संकरण और गुण:
    • $sp^3$ संकरण (जैसे एल्केन): इसमें s-लक्षण कम (25%) होता है, बंध लंबाई सबसे अधिक और बंध सामर्थ्य अपेक्षाकृत कम होती है।
    • $sp^2$ संकरण (जैसे एल्कीन): इसमें मध्यम बंध लंबाई और सामर्थ्य होती है।
    • $sp$ संकरण (जैसे एल्काइन): इसमें s-लक्षण अधिक (50%) होता है, जिसके कारण बंध सबसे छोटा, अधिक मजबूत और उच्च तापन/वियोजन ऊर्जा वाला होता है।
  • अतः बंधों की लंबाई और उनकी ऊर्जा/तापन क्षमता को निर्धारित करने वाली मुख्य रासायनिक अवधारणा संकरण है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) परिक्रमण (Rotation): यह अणुओं की घूर्णन गति से संबंधित है, जो एकल बंध के चारों ओर हो सकती है, लेकिन यह सीधे बंधों की लंबाई और तापन क्षमता तय नहीं करती।
  • विकल्प (B) परिवर्तन (Transformation): यह एक सामान्य भौतिक या रासायनिक बदलाव की प्रक्रिया है, कोई विशेष रासायनिक सिद्धांत नहीं है।
  • विकल्प (D) क्रिस्टलीकरण (Crystallization): यह पदार्थों को क्रिस्टल के रूप में शुद्ध करने या अलग करने की भौतिक विधि है।

#40. आंतरिक कैप्सूल, पनडुब्बियों और श्वसन मास्क में ऑक्सीजन उत्पन्न करने और कार्बन-डाई-ऑक्साइड को बाहर निकालने के लिए किसका उपयोग किया जाता है?
(RPF Constable 2018 19 Feb 2019 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) पोटैशियम सुपरऑक्साइड

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • पोटैशियम सुपरऑक्साइड ($\text{KO}_2$): इसका उपयोग अंतरिक्ष कैप्सूल, पनडुब्बी (Submarines) और आपातकालीन श्वसन मास्क (Respirators) में हवा को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।
  • कार्यप्रणाली: यह साँس के साथ छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) और नमी ($\text{H}_2\text{O}$) के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) गैस उत्पन्न करता है और साथ ही विषैली कार्बन डाइऑक्साइड को पोटैशियम कार्बोनेट के रूप में अवशोषित कर लेता है।
  • रासायनिक अभिक्रिया: $4\text{KO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 4\text{CO}_2 \rightarrow 4\text{KHCO}_3 + 3\text{O}_2$ (या अन्य कार्बोनेट यौगिक)। यह बंद स्थानों में जीवन रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) पोटैशियम कार्बोनेट ($\text{K}_2\text{CO}_3$): यह कांच और साबुन उद्योग में प्रयुक्त होने वाला क्षारीय यौगिक है, जो ऑक्सीजन उत्पन्न नहीं कर सकता।
  • विकल्प (B) पोटैशियम क्लोराइड ($\text{KCl}$): यह एक सामान्य लवण (फर्टिलाइजर) है, जिसका श्वसन प्रणालियों में ऑक्सीजन उत्पादन से कोई संबंध नहीं है।
  • विकल्प (D) पोटैशियम थायोसल्फेट: यह फोटोग्राफी और कृषि में उपयोग होने वाला रासायनिक यौगिक है, जो श्वसन मास्क में प्रयुक्त नहीं होता।



#41. कृषि उपज में संग्रहण हानि के लिए उत्तरदायी कारकों की दो मुख्य श्रेणियां कौन-सी हैं?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (A) जैविक और अजैविक

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • संग्रहण हानि (Storage Losses): कृषि उपज को कटाई के बाद गोदामों या भंडारों में सुरक्षित रखने के दौरान होने वाली क्षति के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के कारक उत्तरदायी होते हैं: जैविक कारक और अजैविक कारक।
  • जैविक कारक (Biotic Factors): इसके अंतर्गत जीवित जीव आते हैं जैसे कीट, कवक (Fungi), बैक्टीरिया, चूहे, पक्षी और माइट्स (Mites), जो अनाज को खाते हैं या उसकी गुणवत्ता नष्ट करते हैं।
  • अजैविक कारक (Abiotic Factors): इसके अंतर्गत पर्यावरणीय परिस्थितियाँ आती हैं जैसे नमी (Moisture) और तापमान (Temperature), जिनकी अधिकता से अनाज में फंगस लगने या अंकुरित होने का खतरा बढ़ जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) यांत्रिक और तापीय: यह भंडारण हानि के मुख्य वैज्ञानिक वर्गीकरण (जैविक-अजैविक) के अंतर्गत नहीं आते।
  • विकल्प (C) कटाई और प्रसंस्करण: कटाई और प्रसंस्करण कृषि प्रबंधन के अलग चरण हैं, न कि भंडारण हानि के मूल कारक।
  • विकल्प (D) रासायनिक और विद्युत: इनका भंडारण हानियों के मुख्य प्राकृतिक कारणों से सीधा संबंध नहीं है।

#42. निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ तंबाकू में विद्यमान होता है?
(RRB JE 22 May 2019 Shift 1 CBT 1)

✨ सही उत्तर: (C) निकोटिन

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • निकोटिन (Nicotine): तंबाकू के पौधों की पत्तियों में पाया जाने वाला एक प्रमुख और प्राकृतिक रूप से सक्रिय नाइट्रोजनयुक्त अल्कलॉइड (Alkaloid) निकोटिन है।
  • प्रभाव: यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) को उत्तेजित करता है और इसकी लत (Addiction) लगने की क्षमता बहुत अधिक होती है। तंबाकू के सेवन (धूम्रपानादि) से यह शरीर में प्रवेश करता है।
  • इसके अलावा तंबाकू के धुएं में कई अन्य हानिकारक रसायन और कार्सिनोजेन (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) भी मौजूद होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) कैफीन: यह मुख्य रूप से कॉफी बीन्स, चाय की पत्तियों और कोको में पाया जाने वाला उत्तेजक पदार्थ है, तंबाकू में नहीं।
  • विकल्प (B) हशीश: यह कैनबिस (Cannabis / भांग) के पौधों से प्राप्त होने वाला एक नशीला पदार्थ है।
  • विकल्प (D) मोर्फीन: यह अफीम (Opium poppy / Papaver somniferum) से प्राप्त होने वाला एक शक्तिशाली एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) और स्वापक (Opiate) पदार्थ है।

#43. निम्नलिखित में से कौन-सा एल्यूमीनियम और सल्फेट आयनों द्वारा निर्मित यौगिक के रासायनिक सूत्र का सही प्रतिनिधित्व करता है?
(RRB JE CE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)

✨ सही उत्तर: (C) Al2(SO4)3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आयन और उनकी संयोजकता (Valency): एल्युमिनियम आयन ($\text{Al}^{3+}$) की संयोजकता 3 होती है और सल्फेट आयन ($\text{SO}_4^{2-}$) की संयोजकता 2 होती है।
  • क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन विधि: रासायनिक सूत्र बनाने के लिए दोनों आयनों की संयोजकता का आपस में क्रॉस-गुणा किया जाता है। एल्युमिनियम के साथ सल्फेट की संयोजकता (2) और सल्फेट समूह के साथ एल्युमिनियम की संयोजकता (3) आती है।
  • अंतिम सूत्र: इस प्रकार सही रासायनिक सूत्र $\text{Al}_2(\text{SO}_4)_3$ (एल्युमिनियम सल्फेट) बनता है, जो जल शोधन और कागज उद्योग में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) $\text{Al(SO}_4)_3$: यह आवेश संतुलन (Charge balance) के नियमों के अनुसार गलत है, क्योंकि इसमें एल्युमिनियम की संयोजकता का सही उपयोग नहीं किया गया है।
  • विकल्प (B) $\text{Al}_2\text{SO}_4$: इसमें सल्फेट की संयोजकता (2-) को ध्यान में नहीं रखा गया है, जिससे यौगिक का कुल आवेश शून्य नहीं होता।
  • विकल्प (D) $\text{Al}_3(\text{SO}_4)_2$: यह आयनों के क्रॉस-संयोजन के विपरीत है, इसलिए यह रासायनिक रूप से अमान्य है।

#44. अमीनो अम्लों में कौन से क्रियात्मक समूह पेप्टाइड बंध बनाने में सीधे तौर पर शामिल होते हैं?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 06 Jun, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) कार्बोक्सिल और एमीनो समूह

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • पेप्टाइड बंध (Peptide Bond): दो अमीनो अम्लों के बीच प्रोटीन या पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला बनाते समय संघनन (Condensation) अभिक्रिया होती है, जिसके परिणामस्वरूप पेप्टाइड बंध ($\text{-CO-NH-}$) का निर्माण होता है।
  • शामिल क्रियात्मक समूह: इसमें एक अमीनो अम्ल का कार्बोक्सिल समूह ($\text{-COOH}$) और दूसरे अमीनो अम्ल का एमीनो समूह ($\text{-NH}_2$) सीधे तौर पर आपस में जुड़ते हैं और एक जल का अणु ($\text{H}_2\text{O}$) बाहर निकलता है।
  • प्रोटीन इसी प्रकार के अनगिनत पेप्टाइड बंधों से मिलकर बने जटिल जैव-बहुलक (Biopolymers) होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A): कार्बोनिल और फॉस्फेट समूह न्यूक्लिक अम्ल (DNA/RNA) या ऊर्जा वाहक अणुओं (जैसे ATP) से जुड़े होते हैं, पेप्टाइड बंध से नहीं।
  • विकल्प (B): मिथाइल और एसिटाइल समूह प्रोटीन के पोस्ट-ट्रांसलेशनल मोडिफिकेशन (रूपांतरण) में भाग लेते हैं, मुख्य पेप्टाइड रीढ़ की हड्डी नहीं बनाते।
  • विकल्प (C): हाइड्रॉक्सिल ($\text{-OH}$) और सल्फहाइड्रिल ($\text{-SH}$) समूह (जैसे सिस्टीन अमीनो अम्ल में) डाइसल्फ़ाइड बॉन्ड या अन्य संरचनात्मक स्थिरता में मदद करते हैं, लेकिन मुख्य पेप्टाइड बंध निर्माण कार्बोक्सिल और एमीनो समूहों के बीच होता है।

#45. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म अम्ल-क्षार संयुग्मी युग्म है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 18 Jun, 2025 Shift 3)

✨ सही उत्तर: (D) NH4+ और NH3

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्ल-क्षार संयुग्मी युग्म (Conjugate Acid-Base Pair): ब्रॉन्स्टेड-लाउरी सिद्धांत के अनुसार, ऐसे दो रासायनिक स्पीशीज़ जो केवल एक प्रोटॉन ($\text{H}^+$) के आदान-प्रदान से एक-दूसरे में बदलते हैं, उन्हें संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म कहा जाता है।
  • विश्लेषण: अमोनियम आयन ($\text{NH}_4^+$) एक प्रोटॉन त्यागकर अमोनिया ($\text{NH}_3$) बनाता है।

    समीकरण: $\text{NH}_4^+ \rightleftharpoons \text{H}^+ + \text{NH}_3$

  • यहाँ $\text{NH}_4^+$ अम्ल है और इसका संयुग्मी क्षार $\text{NH}_3$ है। अतः यह सही युग्म है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) $\text{H}^+$ और $\text{O}^{2-}$: ये केवल आयन हैं, इनमें प्रोटॉन त्यागने/ग्रहण करने का सीधा संयुग्मी संबंध नहीं है।
  • विकल्प (B) $\text{H}_2\text{O}$ और $\text{H}_2\text{O}_2$: हाइड्रोजन पेरोक्साइड ($\text{H}_2\text{O}_2$) और जल ($\text{H}_2\text{O}$) के बीच ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या का अंतर है, न कि केवल एक प्रोटॉन का।
  • विकल्प (C) $\text{HCl}$ और $\text{Cl}_2$: $\text{HCl}$ का संयुग्मी क्षार क्लोराइड आयन ($\text{Cl}^-$) होता है, न कि क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$)।



#46. यौगिकों के अणु ___________________।
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )

✨ सही उत्तर: (D) विभिन्न तत्वों के एक साथ रासायनिक आबंधन से बनते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • यौगिक (Compound): जब दो या दो से अधिक भिन्न तत्व रासायनिक रूप से एक निश्चित अनुपात में आपस में संयोजित होते हैं, तो बनने वाले पदार्थ को यौगिक कहते हैं और इनके अणुओं का निर्माण विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के बीच रासायनिक आबंधन (Chemical bonding) द्वारा होता है।
  • उदाहरण: जल ($\text{H}_2\text{O}$) एक यौगिक है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रासायनिक संयोजन से बनता है। इसी तरह कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) भी एक यौगिक है।
  • यौगिक के गुणधर्म उसके घटक तत्वों के मूल गुणों से पूरी तरह भिन्न होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A): रासायनिक आबंध बनाए बिना आयनों का मिश्रण ‘मिश्रण’ (Mixture) या विलयन बनाता है, यौगिक नहीं।
  • विकल्प (B): केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बनने वाले अणु ‘तत्त्व’ (Element जैसे $\text{O}_2, \text{N}_2$) के अणु होते हैं, यौगिक के नहीं।
  • विकल्प (C): ‘थालिक आबंध’ (या धात्विक आबंध) धातुओं के परमाणुओं के बीच पाया जाता है, जो यौगिकों के अणुओं के निर्माण की सामान्य परिभाषा नहीं है।

#47. निम्नलिखित में से किस यौगिक युग्म में प्रति अणु परमाणुओं की कुल संख्या समान है?
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (B) H2SO4 और N2O5

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • परमाणु गणना विधि: किसी यौगिक के एक अणु में उपस्थित कुल परमाणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए उसके रासायनिक सूत्र में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या को जोड़ा जाता है।
  • विकल्प (B) का विश्लेषण:
    • $\text{H}_2\text{SO}_4$ (सल्फ्यूरिक अम्ल): 2 (Hydrogen) + 1 (Sulphur) + 4 (Oxygen) = 7 परमाणु
    • $\text{N}_2\text{O}_5$ (डाइनाइट्रोजन पेंटाक्साइड): 2 (Nitrogen) + 5 (Oxygen) = 7 परमाणु

    चूँकि दोनों यौगिकों के प्रति अणु में परमाणुओं की कुल संख्या समान (7) है, इसलिए यह विकल्प सही है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) $\text{NH}_3$ और $\text{CH}_4$: $\text{NH}_3$ में 1+3 = 4 परमाणु हैं, जबकि $\text{CH}_4$ में 1+4 = 5 परमाणु हैं (संख्या समान नहीं है)।
  • विकल्प (C) $\text{CO}_2$ और $\text{H}_2\text{O}_2$: $\text{CO}_2$ में 1+2 = 3 परमाणु हैं, जबकि $\text{H}_2\text{O}_2$ में 2+2 = 4 परमाणु हैं।
  • विकल्प (D) $\text{C}_2\text{H}_6\text{O}$ और $\text{PCl}_3$: $\text{C}_2\text{H}_6\text{O}$ में 2+6+1 = 9 परमाणु हैं, जबकि $\text{PCl}_3$ में 1+3 = 4 परमाणु हैं।

#48. कौन-सा कथन, कार्बनिक यौगिकों की सजातीय श्रेणी का सर्वोत्तम रूप से वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )

✨ सही उत्तर: (A) समान सामान्य सूत्र, समान रासायनिक गुणों और -CH2– समूह द्वारा भिन्न क्रमागत सदस्यों वाले यौगिकों की एक श्रेणी

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें एक ही प्रकार का क्रियात्मक समूह होता है और सभी सदस्यों को एक ही सामान्य सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है, उसे सजातीय श्रेणी कहते हैं।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • श्रेणी के दो क्रमिक (क्रमागत) सदस्यों के आणविक सूत्रों के बीच हमेशा $-\text{CH}_2-$ (मेथिलीन समूह) का अंतर होता है।
    • आणविक द्रव्यमान में 14u का अंतर होता है।
    • समान क्रियात्मक समूह होने के कारण इनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, जबकि भौतिक गुणों (जैसे क्वथनांक और घनत्व) में आणविक भार बढ़ने के साथ क्रमिक परिवर्तन (ग्रेडेशन) देखा जाता है।
  • उदाहरण: एल्केन श्रेणी ($\text{CH}_4, \text{C}_2\text{H}_6, \text{C}_3\text{H}_8$) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B): शाखित श्रृंखलाएँ होना सजातीय श्रेणी की अनिवार्य शर्त नहीं है, सीधी और शाखित दोनों श्रृंखलाएँ हो सकती हैं।
  • विकल्प (C): विभिन्न प्रकार्यात्मक समूहों लेकिन समान आणविक सूत्र वाले यौगिक ‘समावयवी’ (Isomers) कहलाते हैं, सजातीय श्रेणी के सदस्य नहीं।
  • विकल्प (D): सजातीय श्रेणी के सदस्यों के भौतिक गुण समान नहीं होते बल्कि अणुभार बढ़ने के साथ धीरे-धीरे बदलते (बढ़ते) हैं।

#49. ब्रॉस्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन एक अम्ल को परिभाषित करता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 08 Aug, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (A) एक प्रोटॉन दान करता है।

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ब्रॉस्टेड-लॉरी सिद्धांत (Brønsted-Lowry Theory): वर्ष 1923 में जोहान्स निकोलास ब्रॉस्टेड और थॉमस मार्टिन लॉरी द्वारा दिए गए इस सिद्धांत के अनुसार:
    • अम्ल (Acid): वह रासायनिक स्पीशीज है जो किसी अन्य पदार्थ को प्रोटॉन ($\text{H}^+$ आयन) दान (Donate) करती है (यानी प्रोटॉन दाता होती है)।
    • क्षार (Base): वह स्पीशीज है जो प्रोटॉन को स्वीकार (Accept) करती है।
  • अतः इस परिभाषा के आधार पर अम्ल हमेशा प्रोटॉन त्यागने का कार्य करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (B) एक हाइड्रोक्साइड आयन दान करता है: यह अर्हेनियस (Arrhenius) सिद्धांत के अनुसार क्षार (Base) की परिभाषा है, ब्रॉस्टेड-लॉरी अम्ल की नहीं।
  • विकल्प (C) एक प्रोटॉन स्वीकार करता है: प्रोटॉन स्वीकार करने वाले पदार्थ ब्रॉस्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार ‘क्षार’ कहलाते हैं, अम्ल नहीं।
  • विकल्प (D) एक इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करता है: इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करने वाले पदार्थ ‘लुईस अम्ल’ (Lewis Acid) कहलाते हैं, ब्रॉस्टेड-लॉरी अम्ल नहीं।

#50. प्राचीन भारत में, शोरे का उपयोग आतिशबाजी के लिए किया जाता था; वास्तव में क्या है?
(RPF Constable 2024 04 Mar, 2025 Shift 2)

✨ सही उत्तर: (C) पोटैशियम नाइट्रेट

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • शोरा (Saltpetre / Indian Saltpetre): प्राचीन काल से ही ‘शोरे’ का उपयोग बारूद (Gunpowder) और आतिशबाजी के निर्माण में मुख्य घटक के रूप में किया जाता रहा है। रासायनिक रूप से इसे पोटैशियम नाइट्रेट ($\text{KNO}_3$) कहा जाता है।
  • विशेषता: यह एक प्रबल ऑक्सीकारक (Strong Oxidizing Agent) है, जो ज्वलनशील पदार्थों को तेजी से ऑक्सीजन प्रदान करके विस्फोट या आग जलाने में मदद करता है।
  • इसका उपयोग उर्वरक, ग्लास निर्माण और चिकित्सा के क्षेत्र में भी किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) सोडियम नाइट्रेट ($\text{NaNO}_3$): इसे ‘चिली साल्टपेट्र’ (Chile saltpetre) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से चिली में पाया जाता है, जबकि भारतीय शोरा पोटैशियम नाइट्रेट होता है।
  • विकल्प (B) लिथियम नाइट्रेट ($\text{LiNO}_3$): इसका उपयोग मुख्य रूप से लाल आतिशबाजी में रंगों के लिए या विशेष रासायनिक अनुसंधानों में किया जाता है, पारंपरिक ‘शोरा’ यह नहीं है।
  • विकल्प (D) कैल्शियम नाइट्रेट ($\text{Ca(NO}_3)_2$): यह मुख्य रूप से कृषि में उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है।



#51. कौन सी गैस औद्योगिक उत्पादन का एक प्रमुख उत्पाद है जिसका उपयोग एरोसोल प्रनोडक और वातानुकूलन प्रणालियों में किया जाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 17 Jun, 2025 Shift 1)

✨ सही उत्तर: (C) फ्रीऑन-12

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs / Freon): फ्रीऑन-12 ($\text{CCl}_2\text{F}_2$) एक क्लोरोफ्लोरोकार्बन है, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर रेफ्रिजरेटर, वातानुकूलन (Air Conditioning) प्रणालियों और एरोसोल स्प्रे प्रनोडकों (Aerosol Propellants) में शीतलक (Refrigerant) के रूप में किया जाता रहा है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: ये यौगिक अत्यधिक स्थिर होते हैं और वायुमंडल में ऊपर जाकर ओजोन परत ($\text{O}_3$) के क्षरण (Ozone Depletion) का मुख्य कारण बनते हैं। इसी वजह से मोंट्रियल प्रोटोकॉल के तहत इनके उत्पादन और उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) ऑक्सीजन: यह श्वसन और दहन के लिए आवश्यक गैस है, न कि एरोसोल प्रनोडक या वातानुकूलन का कृत्रिम शीतलक।
  • विकल्प (B) मीथेन: यह एक प्राकृतिक हाइड्रोकार्बन (ईंधन) है, जिसका उपयोग एसी या एरोसोल प्रनोडक के रूप में नहीं किया जाता।
  • विकल्प (D) कार्बन मोनोऑक्साइड: यह एक विषैली और दहन उपोत्पाद गैस है, जिसका वातानुकूलन में कोई उपयोग नहीं है।

#52. आर्द वायु के संपर्क में आने वाली आयरन की वस्तुओं पर बनने वाले रक्ताभ-भूरे विलेपन का प्राथमिक घटक कौन-सा पदार्थ है?
(RRB NTPC GRADUATE CBT 1 17/03/2026 )

✨ सही उत्तर: (D) हाइड्रेटेड आयरन ( III ) ऑक्साइड ($\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • लोहे पर जंग लगना (Rusting of Iron): जब लोहे की वस्तुएं आर्द्र (नम) वायु के संपर्क में लंबे समय तक रहती हैं, तो ऑक्सीजन और नमी के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके उनकी सतह पर एक भूरे रंग की परत जमा हो जाती है, जिसे ‘जंग’ (Rust) कहते हैं।
  • रासायनिक संगठन: इस रक्ताभ-भूरे विलेपन का प्राथमिक घटक हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड होता है, जिसका रासायनिक सूत्र $\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot x\text{H}_2\text{O}$ है (जहाँ $x$ पानी के अणुओं की अनिश्चित संख्या को दर्शाता है)।
  • यह एक धीमी ऑक्सीकरण (Oxidation) प्रक्रिया है जिससे लोहे की मजबूती धीरे-धीरे कम होने लगती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • विकल्प (A) आयरन सल्फेट ($\text{FeSO}_4$): यह लोहे और सल्फ्यूरिक अम्ल की प्रतिक्रिया से बनता है, सामान्य वातावरणीय जंग का प्राथमिक घटक नहीं है।
  • विकल्प (B) आयरन (II) ऑक्साइड ($\text{FeO}$): यह ऑक्सीजन की सीमित मात्रा में बनने वाला यौगिक है, खुली हवा में लोहे पर बनने वाली भूरी जंग जलयोजित फेरिक ऑक्साइड ($\text{Fe}_2\text{O}_3$) होती है।
  • विकल्प (C) आयरन (III) हाइड्रोक्साइड ($\text{Fe(OH)}_3$): हालांकि यह जंग निर्माण की मध्यवर्ती अवस्था में हो सकता है, लेकिन अंतिम और मुख्य स्थायी भूरी परत हाइड्रेटेड ऑक्साइड के रूप में होती है।
Previous
Finish

 

⚛️ रासायनिक बंधन — Railway Quiz

रासायनिक बंधन Railway MCQ