रासायनिक बंधन प्रश्न उत्तर
#1. एक यौगिक का आण्विक द्रव्यमान ’60’ है। यदि इसमें 40% कार्बन, 6.7% हाइड्रोजन, और 53.3% ऑक्सीजन है, तो इसका आण्विक सूत्र क्या होगा?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) C2H4O2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- तत्वों के मोलों की संख्या: प्रतिशत को परमाणु भार से भाग देने पर — कार्बन (C) = 40/12 = 3.33, हाइड्रोजन (H) = 6.7/1 = 6.7, और ऑक्सीजन (O) = 53.3/16 = 3.33
- सरलतम अनुपात और मूलानुपाती सूत्र: 3.33 (सबसे छोटी संख्या) से भाग देने पर, C:H:O का अनुपात 1:2:1 आता है। अतः मूलानुपाती सूत्र (Empirical formula) CH2O होगा।
- मूलानुपाती सूत्र का द्रव्यमान: C (12) + H (1×2=2) + O (16) = 30
- आण्विक सूत्र (Molecular Formula): दिया गया आण्विक द्रव्यमान 60 है। n = (आण्विक द्रव्यमान / मूलानुपाती सूत्र का द्रव्यमान) = 60 / 30 = 2। इसलिए आण्विक सूत्र = 2 × (CH2O) = C2H4O2 होगा। (यह एसिटिक अम्ल है)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) C3H6O3: इसका आण्विक द्रव्यमान (3×12 + 6×1 + 3×16) = 90 है, जो कि दिए गए द्रव्यमान (60) से अधिक है।
- विकल्प (C) CH2O: इसका आण्विक द्रव्यमान 30 है। यह यौगिक का केवल मूलानुपाती (Empirical) सूत्र है, प्रश्न में पूछा गया वास्तविक आण्विक सूत्र नहीं।
- विकल्प (D) C4H8O4: इसका आण्विक द्रव्यमान (4×12 + 8×1 + 4×16) = 120 है, जो कि दिए गए 60 द्रव्यमान से बिल्कुल अलग है।
#2. कार्बन कई यौगिकों का निर्माण करता है, इसका कारण निम्नलिखित में से क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) कैटॅनेशन और चतुःसंयोजकता (Catenation and Tetravalency)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कैटॅनेशन (श्रृंखलन): कार्बन परमाणुओं में आपस में सहसंयोजक बंध (Covalent bond) बनाकर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखायुक्त (Branched) श्रृंखलाएँ या वलय (Rings) बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है।
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिसके कारण यह एक साथ चार अन्य कार्बन परमाणुओं या अन्य एकसंयोजक परमाणुओं (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन आदि) के साथ मजबूत बंध बना सकता है।
- कार्बन का छोटा आकार: कार्बन परमाणु का आकार छोटा होने के कारण इसके द्वारा बनाए गए सहसंयोजक बंध अत्यधिक मजबूत और स्थायी होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) उच्च परमाणु द्रव्यमान और बड़ा आकार: कार्बन का परमाणु द्रव्यमान कम और आकार छोटा होता है; बड़ा आकार होने पर इतने स्थिर और मजबूत बंध नहीं बन पाते।
- विकल्प (B) उत्कृष्ट गैसों के साथ अभिक्रियाशीलता: कार्बन उत्कृष्ट (अक्रिय) गैसों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करता है।
- विकल्प (D) आयनिक क्रिस्टल बनाने की क्षमता: कार्बन मुख्य रूप से सहसंयोजक (Covalent) यौगिकों का निर्माण करता है, आयनिक यौगिकों या क्रिस्टलों का नहीं।
#3. निम्नलिखित में से कौन-सा सूत्र कैल्सियम ऑक्साइड के लिए सही है?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) CaO
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संयोजकता (Valency): कैल्सियम (Ca) की संयोजकता +2 होती है और ऑक्सीजन (O) की संयोजकता -2 होती है।
- रासायनिक सूत्र का निर्माण: दोनों तत्वों की संयोजकताएँ समान होने के कारण यह सरल अनुपात में मिलकर CaO का निर्माण करते हैं।
- व्यावसायिक नाम: कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) को सामान्य बोलचाल में ‘बिना बुझा हुआ चूना’ (Quicklime) कहा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) Ca2O: यह रासायनिक संयोजकता के नियमों (क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन) के विपरीत है, क्योंकि इसमें तत्वों का अनुपात सही नहीं है।
- विकल्प (C) CaO2: यह ‘कैल्सियम पेरोक्साइड’ (Calcium peroxide) का सूत्र है, न कि साधारण कैल्सियम ऑक्साइड का।
- विकल्प (D) Ca2O3: यह कैल्सियम का कोई मान्य या स्थिर रासायनिक यौगिक नहीं है।
#4. किसी पदार्थ का क्या होता है जब वह किसी अभिक्रिया में अपचयित होता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अपचयन (Reduction) की इलेक्ट्रॉनिक अवधारणा: रासायनिक अभिक्रियाओं में जब कोई परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो उसे अपचयित (Reduced) होना कहा जाता है।
- ऑक्सीकरण संख्या: अपचयन की प्रक्रिया के दौरान तत्व की ऑक्सीकरण संख्या में कमी (Decrease) आती है।
- याद रखने की ट्रिक (GER): “Gain of Electrons is Reduction” यानी इलेक्ट्रॉन का ग्रहण होना ही अपचयन है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) यह अधिक अभिक्रियाशील हो जाता है: यह अपचयन (Reduction) की परिभाषा या उसका अनिवार्य गुण नहीं है।
- विकल्प (C) यह प्रोटॉन त्यागता है: प्रोटॉन का त्याग या ग्रहण अम्ल-क्षार (Acid-Base) अवधारणा से संबंधित है, रेडॉक्स अभिक्रियाओं से नहीं।
- विकल्प (D) यह इलेक्ट्रॉन त्यागता है: इलेक्ट्रॉन का त्याग करना ऑक्सीकरण (Oxidation) कहलाता है, न कि अपचयन।
#5. जब एथीन, ब्रोमीन के साथ अभिक्रिया करता है, तो किस उत्पाद का निर्माण होता है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) 1,2-डाइब्रोमोएथेन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- योगशील अभिक्रिया (Addition Reaction): एथीन ($CH_2=CH_2$) एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन) है, जो ब्रोमीन के साथ आसानी से योगशील अभिक्रिया करती है।
- उत्पाद का निर्माण: जब एथीन पर ब्रोमीन ($Br_2$) की क्रिया होती है, तो द्विआबंध टूट जाता है और दोनों कार्बन परमाणुओं पर एक-एक ब्रोमीन परमाणु जुड़कर 1,2-डाइब्रोमोएथेन बनाता है।
- रंग परिवर्तन (परीक्षण): इस अभिक्रिया के दौरान ब्रोमीन जल का लाल-भूरा (Reddish-brown) रंग गायब होकर विलयन रंगहीन हो जाता है, जिसका उपयोग असंतृप्तता (Unsaturation) की पहचान के लिए किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) एथेनॉल: यह एक ऐल्कोहॉल है, जो एथीन के जल-योजन (Hydration) से बनता है, न कि ब्रोमीन की अभिक्रिया से।
- विकल्प (C) एथीन: यह स्वयं अभिकारक (Reactant) है, उत्पाद नहीं।
- विकल्प (D) ब्रोमोएथेन: यह तब बनता है जब एथीन की अभिक्रिया हाइड्रोजन ब्रोमाइड ($HBr$) के साथ कराई जाती है, न कि शुद्ध ब्रोमीन ($Br_2$) के साथ।
#6. निम्नलिखित में से कौन-सा सबसे अच्छा वर्णन करता है कि आयनिक यौगिक जैसे पोटैशियम ब्रोमाइड (KBr) ठोस रूप में विद्युत का चालन क्यों नहीं करते हैं, लेकिन गलित रूप में करते हैं?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) आयनिक आबंध ठोस KBr में आयन गति को रोकते हैं
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ठोस अवस्था में विद्युत चालन का अभाव: ठोस अवस्था में पोटैशियम ब्रोमाइड (KBr) जैसे आयनिक यौगिकों के आयन मजबूत स्थिर वैद्युत आकर्षण बलों (Electrostatic forces) के कारण क्रिस्टल जालक में अपनी निश्चित स्थिति पर बंधे रहते हैं, जिससे वे गति नहीं कर पाते।
- गलित अवस्था (Molten State): जब इस यौगिक को गलाया जाता है, तो उष्मीय ऊर्जा के कारण ये मजबूत आबंध कमजोर पड़ जाते हैं और आयन अपनी जगह छोड़ने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
- विद्युत का चालन: गलित या जलीय अवस्था में इन्हीं स्वतंत्र और गतिशील आयनों की उपस्थिति के कारण विद्युत धारा का प्रवाह संभव होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) ठोस KBr में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के बिना उदासीन परमाणु होते हैं: आयनिक यौगिकों में उदासीन परमाणु नहीं बल्कि पूर्ण रूप से आवेशित आयन (K+ और Br–) होते हैं।
- विकल्प (B) ठोस KBr में दुर्बल आयन होते हैं जो विद्युत का चालन नहीं करते हैं: आयन दुर्बल नहीं होते, बल्कि उनके बीच का आकर्षण बल अत्यंत प्रबल होता है।
- विकल्प (D) गलित रूप में, KBr गैसीय परमाणुड़ों में विघटित हो जाता है: गलने (Melting) की प्रक्रिया में पदार्थ ठोस से द्रव अवस्था में बदलता है, न कि गैसीय अवस्था में।
#7. ग्रेफाइट में, प्रत्येक कार्बन परमाणु एक ही तल में तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से आबंधित होता है, जिससे एक _______ व्यूह बनता है।
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) षट्कोणीय (Hexagonal)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संरचना और संकरण ($sp^2$): ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन परमाणु $sp^2$ संकित (hybridised) होता है और एक ही तल में तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध बनाता है।
- षट्कोणीय वलय (Hexagonal Rings): इस प्रकार के आबंधन से ग्रेफाइट में षट्कोणीय (Hexagonal) परतों या जालियों का एक व्यूह (array) बनता है।
- परतदार संरचना (Layered Structure): ये षट्कोणीय परतें एक-दूसरे के ऊपर व्यवस्थित होती हैं और कमजोर वानर वाल बलों (van der Waals forces) द्वारा जुड़ी रहती हैं, जिससे यह बहुत मुलायम और चिकना होता है (एक अच्छे स्नेहक के रूप में कार्य करता है)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) वर्ग पिरामिडी: यह ग्रेफाइट की संरचना नहीं है।
- विकल्प (C) पंचभुजीय: ग्रेफाइट में पाँच भुजाओं वाली वलय नहीं पाई जाती हैं।
- विकल्प (D) त्रिसमलंबाक्ष: यह क्रिस्टलीय प्रणालियों (crystal systems) से संबंधित शब्द है, कार्बन के ऐलट्रोप की जालीय संरचना के संदर्भ में यहाँ सही नहीं है।
#8. क्लोरीन युक्त उस एंटीबायोटिक का क्या नाम है जो मिट्टी में सूक्ष्मजीवों द्वारा निर्मित होता है और टाइफाइड बुखार के उपचार के लिए प्रभावी है?
(RPF SI Previous Paper : 5 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) क्लोरैम्फेनिकोल (Chloramphenicol)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्राकृतिक स्रोत: क्लोरैम्फेनिकोल एक व्यापक स्पेक्ट्रम (broad-spectrum) एंटीबायोटिक है, जिसे मूल रूप से मृदा (मिट्टी) में पाए जाने वाले जीवाणु Streptomyces venezuelae से प्राप्त किया जाता था।
- रासायनिक संरचना: इसके अणु में क्लोरीन ($Cl$) परमाणु जुड़ा होता है, जो इसे विशिष्ट औषधीय गुण प्रदान करता है।
- टाइफाइड का उपचार: यह विशेष रूप से टाइफाइड बुखार (Typhoid fever) के उपचार में बेहद असरदार एंटीबायोटिक मानी जाती है, हालांकि वर्तमान में इसके साइड इफेक्ट्स के कारण अन्य विकल्पों का भी उपयोग किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) क्लोरोक्सिन: यह एक स्थानीय एंटीमाइक्रोबियल एजेंट है, जो त्वचा या आंतों के कुछ संक्रमणों के लिए उपयोग होता है, टाइफाइड के लिए प्रमुख एंटीबायोटिक नहीं है।
- विकल्प (C) क्लोरोजेन: यह इस संदर्भ में कोई मान्यता प्राप्त या प्रासंगिक एंटीबायोटिक नहीं है।
- विकल्प (D) क्लोरोएथेनाल: यह एक कार्बनिक यौगिक (हैलोऐल्कोहॉल) है, कोई चिकित्सीय एंटीबायोटिक नहीं।
#9. ऐलिफेटिक कार्बन यौगिकों में बनने वाले आबंध की प्रकृति कैसी होती है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) सहसंयोजक (Covalent)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऐलिफेटिक यौगिक (Aliphatic Compounds): ये खुली श्रृंखला (Open-chain) वाले कार्बन यौगिक होते हैं (जैसे—ऐल्केन, ऐल्कीन, और ऐल्काइन)।
- सहसंयोजक आबंध (Covalent Bond): कार्बन परमाणु अन्य कार्बन या हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके आबंध बनाते हैं, जिसे सहसंयोजक आबंध कहा जाता है।
- भौतिक गुण: सहसंयोजक बंधों की उपस्थिति के कारण ही इन यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक आम तौर पर कम होते हैं और ये विद्युत के कुचालक होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) हाइड्रोजन: हाइड्रोजन आबंध एक अंतर-आणविक आकर्षण बल है, जो मुख्य यौगिक की मुख्य रीढ़ (Backbone) का रासायनिक आबंध नहीं होता।
- विकल्प (C) आयनिक: आयनिक आबंध इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनते हैं, जो कार्बनिक यौगिकों में नहीं पाए जाते।
- विकल्प (D) उपसहसंयोजक: यह एक विशेष प्रकार का सहसंयोजक आबंध है जिसमें इलेक्ट्रॉन युग्म केवल एक ही परमाणु द्वारा साझा किया जाता है, सामान्य ऐलिफेटिक यौगिकों में मुख्य रूप से सामान्य सहसंयोजक आबंध ही होते हैं।
#10. निम्नलिखित में से कौन क्लोरीनीटेड हाइड्रोकार्बन कीटनाशक का उदाहरण है?
(RRB JE EE 19 Sept 2019 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (C) टोक्साफीन (Toxaphene)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोरीनीटेड हाइड्रोकार्बन (Chlorinated Hydrocarbon): यह ऐसे कीटनाशक (Pesticides) होते हैं जिनमें कार्बन, हाइड्रोजन और क्लोरीन परमाणु होते हैं (जैसे—DDT, BHC, और टोक्साफीन)।
- टोक्साफीन (Camphechlor): यह एक प्रसिद्ध क्लोरीनीटेड कीटिनाशक है जिसे कैंपफीन के क्लोरीनीकरण द्वारा बनाया जाता था। इसका उपयोग मुख्य रूप से फसलों में कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता था।
- पर्यावरणीय प्रभाव: ये यौगिक पर्यावरण में अत्यधिक स्थिर (Persistent) होते हैं और खाद्य श्रृंखला में जैविक आवर्धन (Biological magnification) पैदा करते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एलेग्थ्रिन: यह एक सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड (Pyrethroid) कीटनाशक है, न कि क्लोरीनीटेड हाइड्रोकार्बन।
- विकल्प (B) फेन्येथ्रिन: यह भी पाइरेथ्रॉइड वर्ग का एक कीटनाशक है।
- विकल्प (D) ऑक्सैमिल: यह एक कार्बोमेट (Carbamate) कीटनाशक और नेमाटीसाइड है।
#11. निम्नलिखित में से कौन-सा आबंध बड़ी संख्या में कार्बनिक यौगिकों से बना होता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) सहसंयोजक आबंध (Covalent bond)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बनिक यौगिकों का आधार: सभी कार्बनिक यौगिकों (Organic compounds) में कार्बन मुख्य तत्व होता है, जो अन्य कार्बन परमाणुओं या हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके सहसंयोजक आबंध बनाता है।
- कैटॅनेशन और बंध की मजबूती: कार्बन के छोटे आकार और उच्च श्रृंखलन (Catenation) गुण के कारण इसके द्वारा बनाए गए सहसंयोजक आबंध अत्यधिक मजबूत और स्थायी होते हैं, जिससे लाखों प्रकार के यौगिकों का निर्माण संभव होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आयनिक आबंध: यह मुख्य रूप से अकार्बनिक लवणों और यौगिकों (जैसे NaCl) में पाया जाता है, कार्बनिक यौगिकों में नहीं।
- विकल्प (C) द्विध्रुवीय आबंध: यह स्थायी ध्रुवों के बीच का आकर्षण है, कोई मुख्य रासायनिक आबंध वर्ग नहीं जो बड़ी संख्या में यौगिक बनाए।
- विकल्प (D) धात्विक आबंध: यह धातुओं (जैसे लोहा, तांबा आदि) के परमाणुओं के बीच पाया जाता है।
#12. त्वरित चूने का रासायनिक नाम क्या है?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 2 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (C) कैल्सियम ऑक्साइड (Calcium oxide)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: त्वरित चूने (जिसे सामान्य बोलचाल में ‘बिना बुझा हुआ चूना’ या Quicklime कहा जाता है) का रासायनिक नाम कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) है।
- निर्माण: इसे चूना पत्थर (कैल्सियम कार्बोनेट, $CaCO_3$) को उच्च तापमान पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर निकल जाती है।
- जल के साथ अभिक्रिया: जब इसमें पानी मिलाया जाता है, तो तीव्र ऊष्मा के साथ ‘बुझा हुआ चूना’ (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड, $Ca(OH)_2$) बनता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कैल्सियम कार्बोनेट: यह चूना पत्थर (Limestone) या संगमरमर का रासायनिक नाम ($CaCO_3$) है।
- विकल्प (B) हाइड्रोजन सल्फाइड: यह सड़े हुए अंडे जैसी गंध वाली एक जहरीली गैस ($H_2S$) है।
- विकल्प (D) सोडियम कार्बोनेट: यह कपड़े धोने के सोडे ($Na_2CO_3$) का रासायनिक नाम है।
#13. निम्नलिखित में से कौन-सा ऐल्केन का सामान्य सूत्र है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) CnH2n+2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऐल्केन (Alkanes): ये संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated hydrocarbons) होते हैं जिनमें कार्बन-कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध (Single bond) पाया जाता है।
- सामान्य सूत्र: इनका सामान्य सूत्र CnH2n+2 होता है (जहाँ $n$ कार्बन परमाणुओं की संख्या है)। उदाहरण के लिए, मीथेन ($CH_4$), एथेन ($C_2H_6$) आदि।
- इनकी प्रकृति अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील होती है, इसीलिए इन्हें ‘पैराफिन’ (Paraffins) भी कहा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) C2nH2n: यह ऐल्केन के संदर्भ में कोई मान्य या मानक सामान्य सूत्र नहीं है।
- विकल्प (C) CnHn: यह कुछ विशिष्ट芳 aromatic या असंतृप्त यौगिकों का सरल अनुपात हो सकता है, लेकिन यह ऐल्केन का सूत्र नहीं है।
- विकल्प (D) CnH2n: यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन श्रेणी यानी ऐल्कीन (Alkenes) का सामान्य सूत्र है, जिसमें कार्बन-कार्बन के बीच द्विआबंध (Double bond) होता है।
#14. अभिकारकों की सांद्रता के संदर्भ में, अभिक्रिया दर को कहा जाता है:
(RPF SI 2018 : 11 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) दर नियम (Rate Law)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- दर नियम (Rate Law / Rate Equation): यह किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर और अभिकारकों की मोलर सांद्रता के बीच का गणितीय संबंध है।
- व्यंजक: इसके अनुसार, अभिक्रिया की दर अभिकारकों की सांद्रता के गुणनफल के समानुपाती होती है, जहाँ प्रत्येक सांद्रता पद की घात अभिक्रिया की कोटि (Order of reaction) के बराबर हो सकती है।
- यह पूरी तरह से प्रयोगात्मक रूप से निर्धारित किया जाने वाला संबंध है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) तत्काल दर (Instantaneous rate): यह किसी विशेष क्षण (instant) पर अभिक्रिया की गति को दर्शाता है, सांद्रता के साथ इसके व्यंजक के रूप को ‘दर नियम’ कहा जाता है।
- विकल्प (C) दर निर्धारक (Rate determining step): यह बहु-चरणीय (multi-step) अभिक्रिया में सबसे धीमे चरण को कहा जाता है जो कुल दर तय करता है।
- विकल्प (D) मोलर नियम: यह रसायन विज्ञान में कोई मानक या लोकप्रिय नाम नहीं है।
#15. किस आवृत्ति सीमा का प्रयोग टी.वी. के लिए किया जाता है?
(RRB ALP Electronics Mechanic 21 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) UHF (अल्ट्रा-उच्च आवृत्ति)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- टी.वी. प्रसारण (TV Broadcasting): टेलीविजन प्रसारण और संकेतों के संप्रेषण के लिए मुख्य रूप से VHF (Very High Frequency) और UHF (Ultra High Frequency) दोनों आवृत्ति बैंडों का उपयोग किया जाता है, जिसमें UHF बैंड (300 MHz से 3000 MHz तक की सीमा) व्यापक रूप से आधुनिक टी.वी. चैनलों के लिए प्रयुक्त होता है।
- तरंग संचरण: टी.वी. सिग्नल अंतरिक्ष तरंग संचरण (Space wave propagation) के माध्यम से प्रसारित किए जाते हैं, जिन्हें लंबी दूरी या दीवारों को पार कराने के लिए उच्च आवृत्तियों की आवश्यकता होती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) HF (उच्च आवृत्ति): इसका उपयोग मुख्य रूप से शॉर्टवेव रेडियो प्रसारण और दीर्घ-दूरी के संचार के लिए किया जाता है, टी.वी. के लिए नहीं।
- विकल्प (B) ULF (अति निम्न आवृत्ति): इसका उपयोग पनडुब्बी संचार और भू-भौतिकीय अनुसंधानों में किया जाता है।
- विकल्प (C) VLF (बहुत निम्न आवृत्ति): यह रेडियो नेविगेशन और सैन्य संचार के लिए उपयुक्त है, टेलीविजन प्रसारण के लिए नहीं।
#16. निम्नलिखित में से किस लवण को जल में विलीन करने पर उदासीन विलयन निर्मित करेगा?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) सोडियम क्लोराइड (NaCl)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उदासीन लवण (Neutral Salt): जब एक प्रबल अम्ल (Strong Acid) और एक प्रबल क्षार (Strong Base) की आपस में उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया होती है, तब बनने वाला लवण और उसका जलीय विलयन पूरी तरह से उदासीन (pH = 7) होता है।
- सोडियम क्लोराइड ($NaCl$): यह प्रबल अम्ल ($HCl$) और प्रबल क्षार ($NaOH$) से मिलकर बनता है, इसलिए पानी में घुलने पर यह न तो अम्लीय गुण दिखाता है और न ही क्षारीय, बल्कि इसका विलयन उदासीन होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) सोडियम एसीटेट ($CH_3COONa$): यह दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) और प्रबल क्षार ($NaOH$) का लवण है, इसलिए इसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
- विकल्प (C) अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$): यह प्रबल अम्ल ($HCl$) और दुर्बल क्षार ($NH_4OH$) का लवण है, इसलिए इसका जलीय विलयन अम्लीय होता है।
- विकल्प (D) पोटैशियम हाइड्रोक्साइड ($KOH$): यह कोई लवण नहीं है, बल्कि एक प्रबल क्षार (Strong Base) है, जिसका विलयन अत्यधिक क्षारीय होता है।
#17. एल्कीनों में कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा संबंध सही है?
(RRB JE 19/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) CnH2n
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऐल्कीन (Alkenes): ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated hydrocarbons) होते हैं जिनमें कार्बन-कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्विआबंध (Double bond) पाया जाता है।
- सामान्य सूत्र: ऐल्कीनों का सामान्य सूत्र CnH2n होता है (जहाँ $n$ कार्बन परमाणुओं की संख्या है)। इसका मतलब है कि हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कार्बन परमाणुओं की संख्या से ठीक दोगुनी होती है।
- उदाहरण: एथीन ($C_2H_4$), प्रोपीन ($C_3H_6$) आदि।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CnH2n+4: यह हाइड्रोकार्बन की किसी भी मानक समजात श्रेणी का सामान्य सूत्र नहीं है।
- विकल्प (B) CnH2n+2: यह संतृप्त हाइड्रोकार्बन यानी ऐल्केन (Alkanes) का सामान्य सूत्र है, जिसमें एकल आबंध होता है।
- विकल्प (C) CnH2n-2: यह त्रिआबंध (Triple bond) वाले असंतृप्त हाइड्रोकार्बन यानी ऐल्काइन (Alkynes) का सामान्य सूत्र है।
#18. कार्बन में कार्बन के अन्य परमाणुं के साथ आबंध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है, जिससे बड़े अणु बनते हैं। इस गुण को क्या कहते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) शृंखलन (Catenation)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं की आपस में सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखला (Straight chains), शाखायुक्त श्रृंखला (Branched chains) या वलय (Rings) रूपी बड़े अणु बनाने की इस अद्वितीय क्षमता को ‘शृंखलन’ कहा जाता है।
- मुख्य कारण: कार्बन का छोटा आकार और इसकी चतुःसंयोजकता (Tetravalency) इस गुण को सबसे अधिक समर्थन देती है, जिसके कारण कार्बन द्वारा बनाए गए बंध अत्यंत मजबूत और स्थायी होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एकीकरण (Unification): यह कार्बन के इस विशिष्ट गुण का वैज्ञानिक नाम नहीं है।
- विकल्प (B) योगज (Addition): यह रासायनिक अभिक्रियाओं का एक प्रकार है (जैसे योगशील अभिक्रिया), परमाणु के आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखला बनाने का गुण नहीं।
- विकल्प (C) संयुमन (Conjugation): यह एकांतर (alternate) द्विबंधों या एकल बंधों की प्रणाली से संबंधित रासायनिक अवधारणा है, शृंखलन से नहीं।
#19. एक प्रकाऱ्यात्मक समूह का सही उदाहरण चुनें जो अपनी संरचना में किसी भी दोहरे आबंध को निरूपित नहीं करता है।
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
✨ सही उत्तर: (C) प्रोपेनॉल (Propanol)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्रोपेनॉल की संरचना: प्रोपेनॉल ($CH_3CH_2CH_2OH$) एक ऐल्कोहॉल है जिसमें हाइड्रॉक्सिल समूह ($-OH$) जुड़ा होता है।
- एकल आबंध (Single Bonds): इसकी पूरी संरचना में कार्बन-कार्बन ($C-C$), कार्बन-हाइड्रोजन ($C-H$), कार्बन-ऑक्सीजन ($C-O$) और ऑक्सीजन-हाइड्रोजन ($O-H$) सभी आबंध केवल एकल आबंध (Single bonds) होते हैं। इसमें किसी भी प्रकार का दोहरा आबंध (Double bond) नहीं पाया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) प्रोपेनॉइक अम्ल: इसमें कार्बोक्सिल समूह ($-\text{COOH}$) होता है, जिसमें कार्बन और ऑक्सीजन के बीच एक दोहरा आबंध ($C=O$) उपस्थित होता है।
- विकल्प (B) प्रोपेनोन: यह एक कीटोन है जिसमें कार्बोनिल समूह ($>C=O$) होता है, जिसमें ऑक्सीजन के साथ दोहरा आबंध होता है।
- विकल्प (D) प्रोपेनल: यह एक ऐल्डिहाइड है जिसमें $C=O$ (कार्बोनिल) समूह का दोहरा आबंध मौजूद होता है।
#20. निम्नलिखित में से कौन-सा रसायन फोटोग्राफी में प्रयोग किया जाता है?
(RPF ConstableAnciliary 2018 31 Mar 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) सिल्वर ब्रोमाइड (Silver Bromide)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- फोटोग्राफी में उपयोग: सिल्वर ब्रोमाइड ($AgBr$) एक प्रकाश-संवेदनशील (photosensitive) रासायनिक यौगिक है। इसका उपयोग पारंपरिक ब्लैक-एंड-व्हाइट फोटोग्राफी की फिल्मों और फोटोग्राफिक पेपर पर लेप चढ़ाने के लिए किया जाता है।
- प्रकाश अपघटन (Photolytic Decomposition): जब इस पर प्रकाश की किरणें पड़ती हैं, तो यह सिल्वर ($Ag$) और ब्रोमीन ($Br_2$) में अपघटित हो जाता है, जिससे फोटोग्राफिक फिल्म पर चित्र का निर्माण होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एल्युमीनियम हाइड्रोक्साइड: इसका उपयोग मुख्य रूप से एंटासिड (पेट की अम्लता कम करने की दवा) और अग्निरोधक पदार्थों में किया जाता है।
- विकल्प (B) पोटैशियम नाइट्रेट: यह एक उर्वरक और गनपाउडर (बारूद) का मुख्य घटक है।
- विकल्प (C) सोडियम क्लोराइड: यह साधारण नमक ($NaCl$) है, जिसका उपयोग भोजन और रासायनिक उद्योगों में होता है, फोटोग्राफी में नहीं।
#21. क्लोरोफॉर्म का आण्विक सूत्र क्या है?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) CHCl3
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: क्लोरोफॉर्म का रासायनिक नाम ट्राइक्लोरोमेथेन (Trichloromethane) है और इसका आण्विक सूत्र CHCl3 होता है।
- गुण और उपयोग: यह एक भारी, रंगहीन और मीठी गंध वाला द्रव है। ऐतिहासिक रूप से इसका उपयोग चिकित्सा में निश्चेतक (Anaesthetic) के रूप में किया जाता था, हालांकि इसके दुष्प्रभावों के कारण अब इसका उपयोग बंद कर दिया गया है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CH4: यह प्राकृतिक गैस या मार्श गैस यानी मीथेन (Methane) का सूत्र है।
- विकल्प (C) CCl4: यह कार्बन टेट्राक्लोराइड (Carbon tetrachloride) का सूत्र है, जिसमें मीथेन के सभी चारों हाइड्रोजन क्लोरीन द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं।
- विकल्प (D) C2H6: यह संतृप्त हाइड्रोकार्बन एथेन (Ethane) का आण्विक सूत्र है।
#22. जब कोई धातु किसी अधातु के साथ अभिक्रिया करती है, तो सामान्यतः किस प्रकार का रासायनिक आबंध बनता है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) आयनिक आबंध (Ionic bond)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण: धातुएँ (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) अपने संयोजी इलेक्ट्रॉनों का त्याग करके धनायन बनाती हैं, जबकि अधातुएँ (जैसे क्लोरीन, ऑक्सीजन) उन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं।
- आयनिक आबंध (Electrovalent / Ionic Bond): इन विपरीत आवेशित आयनों के बीच लगने वाले प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force of attraction) के कारण बनने वाले बंध को आयनिक आबंध कहा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) धात्विक आबंध: यह केवल शुद्ध धातुओं के परमाणुओं के बीच पाया जाता है।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन आबंध: यह हाइड्रोजन और उच्च विद्युत ऋणात्मक तत्वों (जैसे F, O, N) के बीच का अंतर-आणविक आकर्षण बल है।
- विकल्प (D) सहसंयोजक आबंध: यह सामान्यतः दो अधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है, न कि धातु और अधातु के बीच।
#23. कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट के निर्माण में क्या उपयोग किया जाता है?(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) जिप्सम (Gypsum)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट: इसे सामान्य बोलचाल में ‘प्लास्टर ऑफ पेरिस’ (Plaster of Paris) कहा जाता है, जिसका रासायनिक सूत्र CaSO4·½H2O होता है।
- निर्माण की प्रक्रिया: इसे बनाने के लिए मुख्य कच्चे माल के रूप में जिप्सम (CaSO4·2H2O) का उपयोग किया जाता है। जब जिप्सम को 373 K (100°C) तापमान पर गर्म किया जाता है, तो यह जल के अणुओं को त्यागकर प्लास्टर ऑफ पेरिस में बदल जाता है।
- उपयोग: इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में स्थिर रखने (प्लास्टर चढ़ाने), खिलौने, मूर्तियाँ और सतहों को चिकना करने वाले निर्माण सामग्री के रूप में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सोडियम कार्बोनेट: यह धोने के सोडे (Na2CO3·10H2O) का मुख्य घटक है, प्लास्टर ऑफ पेरिस के निर्माण से इसका कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (C) कॉपर सल्फेट: इसे नीला थोथा (CuSO4·5H_2O) कहा जाता है, जिसका उपयोग कवकनाशक और रंगों में होता है।
- विकल्प (D) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट: यह बेकिंग सोडा (NaHCO3) का रासायनिक नाम है, जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों और अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।
#24. जब तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, कैल्सियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करता है, तो मुक्त होने वाली गैस चूने के जल के माध्यम से पारित होती है। गैस को अधिक मात्रा में पारित करने पर, किस कारण से दूधीयापन गायब हो जाता है?
(RRB JE 25/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (Calcium hydrogen carbonate)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- गैस का निष्कासन: जब तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) कैल्सियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के साथ अभिक्रिया करता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस मुक्त होती है:
$CaCO_3 + 2HCl \rightarrow CaCl_2 + H_2O + CO_2\uparrow$
- दूधियापन का कारण: जब इस $\text{CO}_2$ गैस को चूने के पानी [Ca(OH)2] में प्रवाहित किया जाता है, तो अघुलनशील कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3) बनने के कारण विलयन दूधिया हो जाता है।
- दूधियापन का गायब होना: जब कार्बन डाइऑक्साइड गैस को अधिक मात्रा (Excess) में प्रवाहित किया जाता है, तो यह अघुलनशील कैल्सियम कार्बोनेट पानी और अतिरिक्त $\text{CO}_2$ के साथ अभिक्रिया करके घुलनशील कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट [Ca(HCO3)2] बना लेता है, जिससे दूधियापन गायब हो जाता है:
$CaCO_3 + H_2O + CO_2 \rightarrow Ca(HCO_3)_2$ (घुलनशील)
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कैल्सियम ऑक्साइड: यह बिना बुझा हुआ चूना ($CaO$) है, जो इस अभिक्रिया के दौरान नहीं बनता है।
- विकल्प (C) कैल्सियम कार्बोनेट: इसके बनने से ही तो विलयन में दूधियापन उत्पन्न होता है, गायब नहीं होता।
- विकल्प (D) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड: यह स्वयं चूने का पानी है जिसमें गैस प्रवाहित की जाती है, न कि वह उत्पाद जिसके कारण दूधियापन समाप्त होता है।
#25. रसायन में PAN शब्द का तात्पर्य _______ है।
(RRB JE EE 19 Sept 2019 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (A) पेरोक्सीएसिटिल नाइट्रेट (Peroxyacetyl nitrate) [नोट: विकल्पों में ‘पेरोक्सीसिल’ मुद्रण त्रुटि (Typo) के कारण लिखा गया है]
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- PAN का पूरा नाम: रसायन विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान में PAN का पूर्ण रूप पेरोक्सीएसिटिल नाइट्रेट (Peroxyacetyl Nitrate) होता है। इसका रासायनिक सूत्र CH3COOONO2 है।
- प्रदूषक के रूप में भूमिका: यह एक द्वितीयक वायु प्रदूषक (Secondary air pollutant) है जो फोटोकैमिकल स्मॉग (प्रकाशीय धूमुकोहरा) का एक प्रमुख घटक है।
- प्रभाव: यह आंखों में तेज जलन पैदा करने वाला (lachrymator) होता है और पौधों की पत्तियों को नुकसान पहुँचाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B), (C) और (D): ‘नाइट्रोजन’, ‘नाइट्रोलिक’ या ‘नाइट्राइट’ शब्द PAN के पूर्ण रूप में रासायनिक रूप से सही नहीं हैं, सही शब्द ‘नाइट्रेट’ (Nitrate) और ‘एसिटिल’ (Acetyl) होता है।
#26. एल्यूमीनियम पर एक मोटी ऑक्साइड परत बनाने की प्रक्रिया को _______ कहते हैं।
(RRB NTPC CBT-I : 23 July 2021 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) एनोडाइजिंग (Anodising)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एनोडाइजिंग (Anodising): एल्यूमीनियम पर हवा के संपर्क में आने से स्वाभाविक रूप से एक पतली ऑक्साइड परत बन जाती है, जो इसे और अधिक संक्षारण (Corrosion) से बचाती है। इस परत को और अधिक मोटा बनाने के लिए एल्यूमीनियम की एक साफ वस्तु को एनोड बनाकर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ विद्युत अपघटन (Electrolysis) किया जाता है, जिसे एनोडाइजिंग कहते हैं।
- लाभ: एनोडाइज्ड एल्यूमीनियम पर आसानी से रंग (Dyes) चढ़ाए जा सकते हैं, जिससे आकर्षक वस्तुएँ (जैसे कुकवेयर, खिड़की के फ्रेम आदि) बनाई जाती हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कोटिंग: यह किसी भी सतह पर किसी अन्य पदार्थ की परत चढ़ाने की एक सामान्य प्रक्रिया है, विशेष रूप से ऑक्साइड परत बनाने की प्रक्रिया को यह नहीं दर्शाता।
- विकल्प (B) शीटिंग: यह धातुओं को चादरों के रूप में ढालने से संबंधित है।
- विकल्प (D) शील्डिंग: यह सुरक्षा प्रदान करने या अवरोधक स्थापित करने की विधि है, रासायनिक ऑक्साइड परत निर्माण से संबंधित नहीं है।
#27. जब किसी बीकर में रखे कॉपर ऑक्साइड में तनु HCl मिलाया जाता है, तो निम्नलिखित में से क्या प्राप्त होता है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) कॉपर ( II ) क्लोराइड का नीला-हरा रंग
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब काले रंग के कॉपर (II) ऑक्साइड ($CuO$) में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) मिलाया जाता है, तो यह अभिक्रिया करके लवण और जल बनाता है:
$CuO + 2HCl \rightarrow CuCl_2 + H_2O$
- विलयन का रंग: इस अभिक्रिया में बनने वाले कॉपर (II) क्लोराइड ($CuCl_2$) की उपस्थिति के कारण बीकर के विलयन का रंग बदलकर नीला-हरा (Blue-green) हो जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कॉपर ( II ) क्लोराइड का लाल रंग: कॉपर क्लोराइड का विलयन लाल रंग का नहीं होता, बल्कि नीला-हरा होता है।
- विकल्प (C) कॉपर ( III ) क्लोराइड का नीला-हरा रंग: कॉपर सामान्यतः (II) संयोजकता प्रदर्शित करता है, यहाँ (III) रसायन की दृष्टि से गलत है।
- विकल्प (D) कॉपर ( II ) क्लोराइड का रंगहीन विलयन: विलयन रंगहीन नहीं होता बल्कि $Cu^{2+}$ आयनों के कारण स्पष्ट रूप से नीला-हरा रंग प्रदर्शित करता है।
#28. जब एथेनॉल सांद्र H 2 SO 4 की उपस्थिति में एथेनॉइक एसिड के साथ अभिक्रिया करता है तो _______ उत्पन्न होता है।
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) एस्टर (Ester)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एस्टरीकरण (Esterification) अभिक्रिया: जब एथेनॉल (CH3CH2OH) सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (Conc. H2SO4) की उपस्थिति में एथेनॉइक एसिड (CH3COOH) के साथ अभिक्रिया करता है, तो मुख्य उत्पाद के रूप में एस्टर (एथिल एथेनोएट) का निर्माण होता है:
$CH_3COOH + CH_3CH_2OH \xrightarrow{H_2SO_4} CH_3COOCH_2CH_3 + H_2O$
- विशेषता: एस्टर की गंध बहुत मीठी और फलों जैसी (fruity) होती है, इसलिए इनका उपयोग इत्र (perfumes) और स्वाद लाने वाले एजेंटों (flavouring agents) के रूप में किया जाता है। यहाँ सांद्र H2SO4 एक निर्जलीकरण कर्मक (dehydrating agent) के रूप में कार्य करता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एल्डिहाइड: यह एथेनॉल के हल्के ऑक्सीकरण से बनता है, अम्ल के साथ संघनन से नहीं।
- विकल्प (B) कीटोन: यह द्वितीयक ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण से प्राप्त होता है।
- विकल्प (D) ऐल्कोहॉल: यह तो स्वयं इस अभिक्रिया में भाग लेने वाला अभिकारक (Reactant) है, न कि उत्पाद।
#29. ऐलुमिनियम ऑक्साइड का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) Al2O3
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संयोजकता (Valency): एल्युमीनियम ($Al$) की संयोजकता +3 होती है और ऑक्सीजन ($O$) की संयोजकता -2 होती है।
- रासायनिक सूत्र का निर्माण: क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन विधि द्वारा, एल्युमीनियम की संयोजकता ऑक्सीजन के साथ और ऑक्सीजन की संयोजकता एल्युमीनियम के साथ जाने पर सही रासायनिक सूत्र Al2O3 बनता है।
- प्रकृति: एल्युमीनियम ऑक्साइड एक उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric oxide) है, जिसका अर्थ है कि यह अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया कर सकता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) AlO3: यह तत्वों की संयोजकता के नियमों के विपरीत एक अमान्य अनुपात है।
- विकल्प (B) Al2O: यह भी रासायनिक संयोजकता को संतुष्ट नहीं करता।
- विकल्प (C) AlO: यह एल्युमीनियम और ऑक्सीजन का सही स्थिर यौगिक सूत्र नहीं है।
#30. जिंक धातु सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया करके _______ उत्पादित करता है।
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) सोडियम जिंकेट (Sodium zincate)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब जिंक (Zn) धातु किसी प्रबल क्षार जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड ($NaOH$) के घोल के साथ गर्म की जाती है, तो यह अभिक्रिया करके सोडियम जिंकेट [Na2ZnO2] बनाती है और साथ में हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) मुक्त होती है:
$Zn + 2NaOH \rightarrow Na_2ZnO_2 + H_2\uparrow$
- धातुओं की क्षारों के साथ अभिक्रिया: सामान्यतः सभी धातुएँ क्षारों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस नहीं बनाती हैं, लेकिन जिंक जैसी कुछ उभयधर्मी (amphoteric) प्रकृति वाली धातुएँ क्षार के साथ मिलकर लवण (जिंकेट) और हाइड्रोजन गैस का निर्माण करती हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) जिंक ऑक्साइड: यह जिंक के हवा में जलने या अन्य विधियों से बनता है, सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ सीधी प्रतिक्रिया का मुख्य उत्पाद सोडियम जिंकेट होता है।
- विकल्प (C) जिंक हाइड्रॉक्साइड: यह एक अवक्षेपण उत्पाद है, इस विशिष्ट अभिक्रिया का परिणाम नहीं।
- विकल्प (D) सोडियम हाइड्राइड: यह सोडियम और हाइड्रोजन के सीधे संयोग से उच्च तापमान पर बनता है, जिंक के साथ अभिक्रिया में उत्पादित नहीं होता।
#31. कार्बन श्रृंखला में हाइड्रोजन के स्थान पर समान क्रियात्मक समूह के प्रतिस्थापन से बनने वाले यौगिकों के क्रम को क्या कहते हैं?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) समजातीय श्रेणी (Homologous series)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- समजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें समान रासायनिक गुण और एक ही क्रियात्मक समूह होता है, तथा श्रेणी के किन्हीं भी दो क्रमिक सदस्यों के बीच $-CH_2-$ (मेथलीन समूह) का अंतर होता है, उसे ‘समजातीय श्रेणी’ कहते हैं।
- विशेषताएँ: इस श्रेणी के दो क्रमिक सदस्यों के आण्विक द्रव्यमान में हमेशा 14u का अंतर होता है और इनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, जबकि भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन देखा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) शृंखलन (Catenation): यह कार्बन परमाणुओं की आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखला या वलय बनाने की अद्वितीय क्षमता है।
- विकल्प (B) समवयवी (Isomers): यह उन यौगिकों को कहा जाता है जिनका आण्विक सूत्र समान होता है लेकिन उनकी संरचनाएँ या विन्यास भिन्न होते हैं।
- विकल्प (C) विषमजातीय श्रेणी: यह रसायन विज्ञान में कार्बनिक यौगिकों के वर्गीकरण की कोई मानक या स्वीकृत श्रेणी नहीं है।
#32. लिपिड बायोकेमिस्ट्री में, कमरे के तापमान पर असंतृप्त वसीय अम्ल द्रव क्यों होते हैं?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 19 Jun, 2025 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) सिस-द्विबंध झुकाव लाते हैं, वैन डेर वाल्स अन्योन्यक्रियाओं को कम करते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संरचनात्मक प्रभाव (Structural Effect): प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले असंतृप्त वसीय अम्लों (Unsaturated fatty acids) में कार्बन श्रृंखला के बीच द्विआबंध आमतौर पर ‘सिस’ (cis) विन्यास में होते हैं।
- झुकाव या मोड़ (Kinks): ये ‘सिस’ द्विबंध वसीय अम्ल की लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में एक कठोर मोड़ या झुकाव (kink) उत्पन्न कर देते हैं।
- वैन डेर वाल्स बल में कमी: इन मोड़ों के कारण अणु आपस में एक-दूसरे के बहुत पास सटकर (tightly pack) नहीं बैठ पाते हैं। परिणामस्वरूप, अणुओं के बीच लगने वाले अंतराआणविक वैन डेर वाल्स आकर्षण बल (Van der Waals interactions) कमजोर हो जाते हैं, जिससे वे कमरे के तापमान पर तरल अवस्था (जैसे तेल) में बने रहते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आयनिक बंध: वसीय अम्लों के अणुओं के बीच आयनिक बंध नहीं बल्कि सहसंयोजक और दुर्बल वैन डेर वाल्स बल पाए जाते हैं।
- विकल्प (C) आणविक समरूपता: द्विबंध आणविक समरूपता को बढ़ाते नहीं हैं, बल्कि इसके विपरीत समरूपता को कम करके अणुओं को क्रिस्टल के रूप में व्यवस्थित होने से रोकते हैं।
- विकल्प (D) आणविक भार: केवल आणविक भार कम होना इसका मुख्य कारण नहीं है; उच्च आणविक भार वाले असंतृप्त वसीय अम्ल भी अपनी विशिष्ट संरचना (झुकाव) के कारण कमरे के तापमान पर द्रव ही रहते हैं।
#33. उस नीले-फ्लोरोसेंट रंग का नाम बताइए जिसका उपयोग जीवित या स्थिर कोशिकाओं को रंगने के लिए किया जा सकता है।
(RPF SI CBT-I 2024 : 02 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) डैपी (DAPI)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- डैपी (DAPI – 4′,6-diamidino-2-phenylindole): यह एक शक्तिशाली नीले-फ्लोरोसेंट (blue-fluorescent) रंगक या अभिरंजक (stain) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से आणविक जीव विज्ञान और कोशिका विज्ञान में कोशिकाओं के केंद्रक (Nucleus) या डीएनए (DNA) को रंगने के लिए किया जाता है।
- कार्य करने का तरीका: यह डीएनए के एडेनिन-थाइमिन (A-T) समृद्ध क्षेत्रों के साथ मजबूती से जुड़ता है। पराबैंगनी (UV) प्रकाश के संपर्क में आने पर यह तेज नीला प्रतिदीप्ति (fluorescence) उत्सर्जित करता है।
- उपयोग: इसे निश्चित (fixed) कोशिकाओं और कुछ विशेष परिस्थितियों में जीवित कोशिकाओं के अध्ययन के लिए भी प्रयोग किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) फुक्सिन (Fuchsin): यह एक लाल/मैजेंटा रंग का रंजक है जिसका उपयोग हिस्टोलॉजी में ऊतकों और जीवाणुओं (जैसे Mycobacterium tuberculosis) को रंगने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (B) बोडीपी (BODIPY): यह एक फ्लोरोसेंट डाई परिवार है जो मुख्य रूप से लिपिड, झिल्लियों और अन्य hydrophobic जैव-अणुओं को लेबल करने के काम आता है, न कि विशिष्ट रूप से नीला डीएनए केंद्रक रंजक।
- विकल्प (D) फैलोइडिन (Phalloidin): यह एक पेप्टाइड आधारित अभिरंजक है जो कोशिकाओं के साइटोसkeleton में ‘एक्टिन फिलामेंट्स’ (Actin filaments) को रंगने के लिए उपयोग किया जाता है, नीले फ्लोरोसेंट डीएनए स्टेन के रूप में नहीं।
#34. भूपर्पटी में धात्विक अयस्क किस रूप में पाए जाते हैं?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) ऑक्साइड, सल्फाइड और कार्बोनेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अयस्क की उपस्थिति: पृथ्वी की भूपर्पटी (Earth’s crust) में धातुएँ अत्यधिक अभिक्रियाशील होने के कारण स्वतंत्र रूप से न मिलकर विभिन्न यौगिकों के रूप में मिलती हैं। प्राकृतिक रूप से मिलने वाले इन खनिजों को अयस्क (Ores) कहते हैं जिनसे आसानी से और कम खर्च में धातु का निष्कर्षण किया जा सकता है।
- प्रमुख रासायनिक रूप: भूपर्पटी में धात्विक अयस्क मुख्य रूप से ऑक्साइड (जैसे- बॉक्साइट $Al_2O_3 \cdot 2H_2O$, हेमाटाइट $Fe_2O_3$), सल्फाइड (जैसे- कॉपर पाइराइट $CuFeS_2$, जिंक ब्लेंड $ZnS$) तथा कार्बोनेट (जैसे- चूना पत्थर $CaCO_3$, कैलामाइन $ZnCO_3$) के रूपों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) केवल कार्बोनेट: यह आंशिक सत्य है क्योंकि कुछ धातुएँ कार्बोनेट के रूप में होती हैं, लेकिन सभी अयस्क केवल कार्बोनेट नहीं होते।
- विकल्प (B) केवल सल्फाइड: यह भी अपर्याप्त है क्योंकि सल्फाइड के साथ-साथ ऑक्साइड और कार्बोनेट अयस्क भी बड़े पैमाने पर मौजूद होते हैं।
- विकल्प (D) केवल ऑक्साइड: यह भी गलत है क्योंकि कई महत्वपूर्ण धातुएँ (जैसे कॉपर, जिंक, लेड आदि) प्रकृति में सल्फाइड या कार्बोनेट अयस्कों के रूप में भी पाई जाती हैं।
#35. जब सोडियम क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करता है, तो किस प्रकार के यौगिक का निर्माण होता है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) आयनिक यौगिक (Ionic compound)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण: सोडियम ($Na$) एक धातु है जो अपना एक संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनआयन ($Na^+$) बनाती है, जबकि क्लोरीन ($Cl$) एक अधातु है जो उस इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करके ऋणआयन ($Cl^-$) बनाती है।
- आयनिक आबंध (Ionic Bond): इन विपरीत आवेशित आयनों (धनायन और ऋणआयन) के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force of attraction) के कारण जिस यौगिक का निर्माण होता है, उसे आयनिक यौगिक (जैसे सोडियम क्लोराइड, $NaCl$) कहते हैं।
- विशेषताएँ: आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं और ये जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) धात्विक यौगिक: यह धातुओं के आपासी मिश्रण या धात्विक बंधों से संबंधित है, जबकि सोडियम और क्लोरीन की प्रतिक्रिया से पूर्ण आयनिक लवण बनता है।
- विकल्प (C) उपसहसंयोजयी यौगिक: यह तब बनता है जब इलेक्ट्रॉनों का साझा युग्म केवल एक ही परमाणु द्वारा दिया जाता है, जो यहाँ लागू नहीं होता।
- विकल्प (D) सहसंयोजक यौगिक: यह सामान्यतः दो अधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी से बनता है, जबकि सोडियम एक धातु है।
#36. निम्नलिखित में से कौन अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों से संबंधित नहीं है?
(RRB NTPC CBT-I : 31 July 2021 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) अमोनिया (Ammonia)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक (SLCPs – Short-Lived Climate Pollutants): ये ऐसे वायु प्रदूषक और ग्रीनहाउस गैसें हैं, जिनका वायुमंडल में जीवनकाल अपेक्षाकृत बहुत कम (कुछ दिनों से लेकर कुछ दशकों तक) होता है, लेकिन इनका जलवायु तापन (Global Warming) पर तीव्र प्रभाव पड़ता है।
- मुख्य SLCPs: इसके अंतर्गत मुख्य रूप से मीथेन ($CH_4$), काला कार्बन (Black Carbon), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) और क्षोभमंडलीय ओजोन (Tropospheric Ozone) शामिल किए जाते हैं।
- अमोनिया ($NH_3$): यह एक महत्वपूर्ण वायु प्रदूषक और उर्वरक उद्योगों से जुड़ा यौगिक है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से प्राथमिक ‘अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक’ (SLCP) श्रेणी में नहीं रखा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) मीथेन: यह एक प्रमुख और शक्तिशाली अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक (SLCP) है।
- विकल्प (C) काला कार्बन: यह सूक्ष्म कणों (PM2.5) का घटक है जो बर्फ पर जमा होकर ग्लोबल वार्मिंग को तेजी से बढ़ाता है, अतः यह भी एक SLCP है।
- विकल्प (D) हाइड्रोफ्लोरोकार्बन: ये कृत्रिम ग्रीनहाउस गैसें हैं जो ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती हैं और इन्हें SLCP माना जाता है।
#37. फॉस्फोरिक अम्ल ( H 3 PO 4) निम्नलिखित में से किन आयनों से बना होता है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) H+, PO43-
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- फॉस्फोरिक अम्ल ($H_3PO_4$): यह एक त्रिप्रोटिक (Triprotic) अम्ल है, जिसका अर्थ है कि इसका प्रत्येक अणु जलीय विलयन में वियोजित होने पर अधिकतम तीन हाइड्रोजन आयन प्रदान कर सकता है।
- आयनिक संयोजन: जब यह पूरी तरह वियोजित होता है, तो यह तीन हाइड्रोजन आयनों ($3H^+$) और एक फॉस्फेट आयन ($PO_4^{3-}$) में विभाजित होता है। यहाँ आवेश संतुलन के लिए तीन धन आवेश और एक तीन-ऋण आवेश ($\text{-3}$) आपस में मिलकर उदासीन यौगिक बनाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) H+, PO44-: फॉस्फेट आयन पर $-4$ का आवेश नहीं होता, बल्कि इसकी संयोजकता $-3$ होती है।
- विकल्प (B) H2+, PO43-: हाइड्रोजन हमेशा एकल धनावेशित आयन ($H^+$) के रूप में रहता है, $H_2^+$ के रूप में नहीं।
- विकल्प (C) H+, PO42-: फॉस्फेट आयन का आवेश $-2$ नहीं होता है ($-2$ आवेश हाइड्रोजन फॉस्फेट $HPO_4^{2-}$ आयन का होता है)।
#38. कार्बन लंबी श्रृंखलाएं बना सकता है, क्योंकि यह _______ प्रदर्शित करता है तथा _______ दर्शाता है।
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) चतुःसंयोजकता; शृंखलन (Tetravalency; Catenation)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिसका अर्थ है कि यह एक साथ चार अन्य परमाणुओं (जैसे कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि) के साथ सहसंयोजक बंध बना सकता है।
- शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखला (Straight chains), शाखायुक्त श्रृंखला (Branched chains) या चक्रीय वलय (Rings) बनाने की एक अद्वितीय क्षमता होती है, जिसे ‘शृंखलन’ कहा जाता है।
- इन दोनों गुणों (चतुःसंयोजकता और शृंखलन) के संयुक्त प्रभाव के कारण ही प्रकृति में लाखों कार्बनिक यौगिकों का अस्तित्व संभव हो पाया है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) विधुत्ऋणात्मकता; चतुःसंयोजकता: विद्युतऋणात्मकता लंबी श्रृंखलाएँ बनाने का मुख्य कारण नहीं है।
- विकल्प (B) त्रिसंयोजकता; शृंखलन: कार्बन की संयोजकता तीन नहीं बल्कि चार (चतुःसंयोजक) होती है।
- विकल्प (C) द्विआबंध; त्रिआबंध: ये आबंधों के प्रकार हैं, कार्बन की श्रृंखला निर्माण की मूल प्रवृत्तियों (गुणों) के नाम नहीं।
#39. दी गई अभिक्रिया में निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ ठोस अवस्था में है?सोडियम सल्फेट + बेरियम क्लोराइड → सोडियम क्लोराइड + बेरियम सल्फेट
(RRB Technician Grade III : 20 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) बेरियम सल्फेट (Barium sulphate)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: यह एक द्वि-विस्थापन (Double displacement) और अवक्षेपण (Precipitation) अभिक्रिया है, जिसका संतुलित समीकरण इस प्रकार है:
$Na_2SO_4(aq) + BaCl_2(aq) \rightarrow 2NaCl(aq) + BaSO_4(s)\downarrow$
- ठोस अवस्था (अवक्षेप): इस अभिक्रिया में बनने वाला बेरियम सल्फेट ($BaSO_4$) एक सफेद रंग का अघुलनशील ठोस होता है जो विलयन में नीचे अवक्षेप (Precipitate) के रूप में बैठ जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सोडियम क्लोराइड: यह अभिक्रिया के दौरान जलीय विलयन ($NaCl(aq)$) के रूप में घुला रहता है, ठोस अवस्था में अवक्षेपित नहीं होता।
- विकल्प (C) बेरियम क्लोराइड: यह अभिकारक (Reactant) है जिसे जल में घोलकर जलीय विलयन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
- विकल्प (D) सोडियम सल्फेट: यह भी एक अभिकारक है जो जलीय विलयन के रूप में प्रतिक्रिया में भाग लेता है।
#40. एल्काइन हाइड्रोकार्बन में एक या एक से अधिक _______ होते हैं।
(RRB JE CBT-I : 1 June 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) त्रि-बंध (Triple bond)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एल्काइन (Alkyne): ये असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated hydrocarbons) होते हैं जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक त्रि-बंध (Triple bond) उपस्थित होता है।
- सामान्य सूत्र: इनका सामान्य रासायनिक सूत्र CnH2n-2 होता है। इसका सबसे सरल सदस्य एथाइन (एसिटिलीन, C2H2) है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एकल बंध: यह संतृप्त हाइड्रोकार्बन यानी एल्केन (Alkanes) की विशेषता है।
- विकल्प (B) चार से अधिक बंध: कार्बन की संयोजकता 4 होती है, इसलिए एक कार्बन परमाणु अधिकतम चार ही बंध बना सकता है, चार से अधिक बंध संभव नहीं हैं।
- विकल्प (C) द्वि-बंध: यह असंतृप्त हाइड्रोकार्बन की श्रेणी एल्कीन (Alkenes) में पाया जाता है।
#41. अधिकांश कार्बनिक यौगिकों में किस प्रकार का आबंधन पाया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) सहसंयोजक (Covalent)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सहसंयोजक आबंधन (Covalent Bonding): अधिकांश कार्बनिक यौगिक (जैसे मीथेन, एथेन, एथेनॉल आदि) कार्बन और अन्य अधातुओं (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन) के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing of electrons) के माध्यम से बनते हैं।
- विशेषताएँ: इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान के बजाय इनकी साझेदारी से बनने वाले सहसंयोजक यौगिकों के बीच अंतराआणविक बल कमजोर होते हैं, जिसके कारण इनके गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं और ये विद्युत के कुचालक होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) आयनिक: यह मुख्य रूप से धातुओं और अधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनता है (जैसे $NaCl$), अधिकांश कार्बनिक यौगिकों में नहीं।
- विकल्प (C) निर्देशांक (Coordinate): यह सहसंयोजक बंध का ही एक विशिष्ट प्रकार है जिसमें साझा किए जाने वाले दोनों इलेक्ट्रॉन केवल एक ही परमाणु द्वारा दिए जाते हैं, जो सामान्य कार्बनिक यौगिकों में प्रमुखता से नहीं पाया जाता।
- विकल्प (D) धात्विक: यह केवल शुद्ध धातुओं और मिश्रधातुओं के परमाणुओं के बीच पाया जाता है।
#42. जब केरल में स्वास्थ्य सम्बन्धित मुद्दे सार्वजनिक हुए, तब निम्न में से कौन से कीटनाशक का नुकसानदायी प्रभाव मीडिया का ध्यान केन्द्र बना?
(RRB NTPC Tier I : 2 Apr 2016 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) एंडोसल्फान (Endosulfan)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एंडोसल्फान विवाद: केरल के कासरगोड (Kasaragod) जिले में काजू के बागानों में कीटों की रोकथाम के लिए कई वर्षों तक एंडोसल्फान नामक कीटनाशक का हेलीकॉप्टर से हवाई छिड़काव किया गया था।
- स्वास्थ्य प्रभाव: इसके अत्यधिक और लंबे समय तक जहरीले प्रभाव के कारण स्थानीय लोगों में जन्मजात विकृतियां (Congenital deformities), मानसिक और शारीरिक विकलांगता, कैंसर और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ सामने आईं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का मुख्य केंद्र बन गया था।
- प्रतिबंध: इस मानवी और पर्यावरणीय आपदा के बाद केरल सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाया और बाद में वर्ष 2011 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इसके उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर देशव्यापी रोक लगा दी।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) लेथल (Lethal): यह इस विशेष स्वास्थ्य आपदा या केरल के कासरगोड प्रकरण से संबंधित कीटनाशक नहीं है।
- विकल्प (C) थिमेट (Thimet): यह एक अन्य कीटनाशक (फॉर्लोथियोएट समूह) है, लेकिन केरल के बहुचर्चित मीडिया प्रकरण से इसका संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) मोनोसिल (Monocil): यह मोनोक्रोटोफॉस आधारित कीटनाशक है, जिसका उपयोग फसलों में होता है परंतु केरल के इस विशिष्ट ऐतिहासिक स्वास्थ्य संकट के केंद्र में एंडोसल्फान था।
#43. मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RPF Constable 2018 19 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) Mg(OH)2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक सूत्र और संयोजकता: मैग्नीशियम ($Mg$) की संयोजकता $+2$ होती है और हाइड्रॉक्साइड समूह ($OH^-$) की संयोजकता $-1$ होती है। क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन नियम के अनुसार, सही सूत्र Mg(OH)2 बनता है।
- व्यावसायिक नाम: इसे सामान्य बोलचाल में ‘मिल्क ऑफ मैग्नीशिया’ (Milk of Magnesia) कहा जाता है।
- उपयोग: यह एक दुर्बल क्षारक (mild base) है जिसका उपयोग पेट की अम्लता (Acidity) या अपच को दूर करने के लिए एंटासिड (Antacid) के रूप में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) MgOH: यह रासायनिक रूप से गलत है क्योंकि मैग्नीशियम के $+2$ आवेश को संतुलित करने के लिए दो $OH^-$ आयनों की आवश्यकता होती है।
- विकल्प (C) MgOH3: यह तत्वों की संयोजकता के नियमों के विरुद्ध एक अमान्य सूत्र है।
- विकल्प (D) Mg2OH: यह भी आवेश संतुलन के नियमों के विपरीत है।
#44. आर्गन गरमागरम प्रकाश बल्बों को भरने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली गैस है क्योंकि आर्गन _______ है।
(RRB NTPC CBT-I : 31 July 2021 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) निष्क्रिय (Inert)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- बल्ब में आर्गन का उपयोग: गरमागरम प्रकाश बल्बों (Incandescent light bulbs) के भीतर टंगस्टन (Tungsten) का फिलामेंट होता है जो अत्यधिक उच्च तापमान पर चमकता है। यदि इस फिलामेंट के संपर्क में ऑक्सीजन आ जाए, तो वह तुरंत जलकर नष्ट (ऑक्सीकृत) हो जाएगा।
- निष्क्रिय प्रकृति: आर्गन एक उत्कृष्ट गैस (Noble gas) या अक्रिय/निष्क्रिय गैस है, जो उच्च तापमान पर भी टंगस्टन फिलामेंट के साथ रासायनिक अभिक्रिया नहीं करती है। इससे फिलामेंट की आयु काफी बढ़ जाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) क्रियाशील: यदि आर्गन क्रियाशील होती, तो वह गर्म फिलामेंट के साथ अभिक्रिया करके बल्ब को तुरंत खराब कर देती।
- विकल्प (B) सबसे हल्का: आर्गन सबसे हल्की गैस नहीं है (हाइड्रोजन और हीलियम इससे हल्की गैसें हैं); बल्ब में इसके प्रयोग का मुख्य कारण इसका भारी और अक्रिय होना है।
- विकल्प (C) प्रचुर मात्रा में: हालांकि वायुमंडल में यह तीसरी सबसे प्रचुर गैस है, लेकिन इसे बल्ब में भरने का मुख्य तकनीकी कारण इसकी रासायनिक निष्क्रियता है, न कि केवल इसकी उपलब्धता।
#45. कैल्सियम हाइड्रोक्साइड वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करके किस यौगिक की एक पतली परत बनाता है जिसका उपयोग सफेदी करने के लिए किया जा सकता है?
(RRB Level 01 Stage I 09/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) $\text{CaCO}_3$ (कैल्सियम कार्बोनेट)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सफेदी (White-washing) की प्रक्रिया: दीवारों पर सफेदी करने के लिए कैल्सियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2] यानी बुझे हुए चूने के विलयन का उपयोग किया जाता है।
- रासायनिक अभिक्रिया: दीवारों पर चूना लगाने के बाद, यह वायु में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करता है और 2 से 3 दिनों के भीतर दीवारों पर कैल्सियम कार्बोनेट [CaCO3] की एक चमकदार और ठोस पतली परत बना लेता है:
$Ca(OH)_2(aq) + CO_2(g) \rightarrow CaCO_3(s) + H_2O(l)$
- कैल्सियम कार्बोनेट के निर्माण के कारण ही दीवारों पर दो-तीन दिन बाद चमक (Glossy finish) आ जाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{CaSO}_4$: यह कैल्सियम सल्फेट है (जैसे जिप्सम या प्लास्टर ऑफ पेरिस), जो वायुमंडलीय $\text{CO}_2$ और चूने की प्रतिक्रिया से नहीं बनता।
- विकल्प (B) $\text{CaO}$: यह बिना बुझा हुआ चूना है, जिसका उपयोग पानी में मिलाकर बुझा हुआ चूना बनाने के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) $\text{Ca(HCO}_3\text{)_2}$: यह कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट है, जो तब बनता है जब $\text{CO}_2$ को अतिरिक्त मात्रा में चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, न कि दीवारों पर सफेदी की परत के रूप में।
#46. PAN शब्द का क्या अभिप्राय है?
(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (D) पेरोक्सीसाइल नाइट्रेट (Peroxyacetyl Nitrate)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- PAN का पूर्ण रूप: रसायन और पर्यावरण विज्ञान में PAN का तात्पर्य पेरोक्सीएसिटिल नाइट्रेट (Peroxyacetyl Nitrate) से है, जिसे परीक्षा के विकल्पों में ‘पेरोक्सीसाइल नाइट्रेट’ लिखा गया है। इसका रासायनिक सूत्र CH3COOONO2 होता है।
- प्रदूषक के रूप में: यह एक प्रमुख द्वितीयक वायु प्रदूषक (Secondary air pollutant) है जो प्रकाशीय धूमकोहरा (Photochemical smog) के निर्माण के दौरान हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड की सूर्य के प्रकाश में प्रतिक्रिया से बनता है।
- प्रभाव: यह आँखों में तेज जलन पैदा करने वाला (Lachrymator) कारक होता है और वनस्पति को भी गंभीर नुकसान पहुँचाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) पेरोक्सीसाइल नाइट्रोजन: PAN के अंत में ‘नाइट्रोजन’ नहीं बल्कि ‘नाइट्रेट’ समूह होता है।
- विकल्प (B) पेरोक्सीसाइल नाइट्रोलिक: ‘नाइट्रोलिक’ शब्द इस यौगिक के नाम का हिस्सा नहीं है।
- विकल्प (C) पेरोक्सीसाइल नाइट्राइट: यहाँ ‘नाइट्राइट’ ($NO_2^-$) दिया गया है जबकि सही रासायनिक संरचना में ‘नाइट्रेट’ ($NO_3^-$) होता है।
#47. निम्नलिखित में से कौन-सा, किसी यौगिक का अणु नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) O3 (ओजोन)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- यौगिक का अणु (Molecule of a Compound): जब दो या दो से अधिक विभिन्न प्रकार के तत्व (Elements) एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित होते हैं, तो उसे यौगिक का अणु कहते हैं।
- ओजोन ($O_3$): यह ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बना एक अणु है, लेकिन इसमें केवल एक ही तत्व (ऑक्सीजन) के परमाणु शामिल होते हैं। इसलिए यह किसी यौगिक का अणु न होकर एक तत्व का अणु (Molecule of an element) या ऑक्सीजन का अपरूप (Allotrope) है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये यौगिक क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CH4 (मीथेन): यह कार्बन और हाइड्रोजन दो अलग-अलग तत्वों से मिलकर बना एक निश्चित यौगिक है।
- विकल्प (B) NH3 (अमोनिया): यह नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के रासायनिक संयोजन से बना एक यौगिक अणु है।
- विकल्प (D) HCl (हाइड्रोजन क्लोराइड): यह हाइड्रोजन और क्लोरीन तत्वों के मिलने से बना एक यौगिक है।
#48. आयन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) नेट आवेश वाले परमाणुओं के समूह को बहुपरमाणुक आयन (polyatomic ion) कहा जाता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- बहुपरमाणुक आयन (Polyatomic Ion): जब दो या दो से अधिक परमाणु आपस में बंधकर एक साथ रहते हैं और पूरे समूह पर एक निश्चित नेट आवेश (धन या ऋण आवेश) होता है, तो उसे बहुपरमाणुक आयन कहते हैं; उदाहरण के लिए—अमोनियम आयन (NH4+), हाइड्रॉक्साइड आयन (OH–), सल्फेट आयन (SO42-) आदि।
- यह कथन रासायनिक परिभाषा के अनुसार पूर्णतः सत्य है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) धनायन एक ऋण आवेशित स्पीशीज है: यह गलत है, क्योंकि धनायन (Cation) हमेशा धन आवेशित (Positively charged) स्पीशीज होता है (जैसे $Na^+$), जबकि ऋण आवेशित को ऋणायन (Anion) कहते हैं।
- विकल्प (C) आयन केवल अधात्विक परमाणुओं से बनते हैं: यह गलत है क्योंकि धातुएँ भी इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम आदि)।
- विकल्प (D) सोडियम क्लोराइड में उदासीन सोडियम और क्लोराइड परमाणु होते हैं: यह गलत है; सोडियम क्लोराइड ($NaCl$) में उदासीन परमाणु नहीं बल्कि विपरीत आवेशित आयन (Na+ और Cl–) होते हैं।
#49. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन स्थिर अनुपात के नियम को सही ढंग से परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) किसी यौगिक में तत्व सदैव द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित अनुपात में होते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant / Definite Proportions): इस नियम का प्रतिपादन जोसफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने किया था। इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित (नियत) अनुपात में मौजूद होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो।
- उदाहरण: उदाहरण के लिए, जल ($H_2O$) चाहे किसी भी स्रोत (नल, नदी, समुद्र या प्रयोगशाला) से लिया जाए, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा $1:8$ होता है (चूँकि 2g हाइड्रोजन और 16g ऑक्सीजन)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) यौगिकों की संरचना तापमान के आधार पर बदल सकती है: रासायनिक यौगिकों की निश्चित संरचना और अनुपात तापमान से स्वतंत्र होते हैं।
- विकल्प (B) तत्व यादृच्छिक अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं: यदि तत्व यादृच्छिक (random) अनुपात में जुड़ते, तो वे मिश्रण (Mixture) कहलाते, निश्चित यौगिक नहीं।
- विकल्प (C) किसी यौगिक का द्रव्यमान सदैव उसके तत्वों के योग से अधिक होता है: यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम के विरुद्ध है; रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान संरक्षित रहता है (न तो बढ़ता है और न घटता है)।
#50. क्रिस्टलीय पदार्थ में परमाणु का अनियमित रूप से उपयुक्त चरण किस रूप में जाना जाता है?
(RPF SI 2018 : 13 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) बिंदु दोष (Point defect)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- बिंदु दोष (Point Defect): किसी क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline solid) में किसी परमाणु, आयन या जालक बिंदु के चारों ओर की आदर्श व्यवस्था में उत्पन्न होने वाली अनियमितता या विचलन को बिंदु दोष कहा जाता है।
- यह दोष तब उत्पन्न होता है जब क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया के दौरान परमाणु अपनी नियमित स्थिति से हट जाते हैं या रिक्तिका (Vacancy) व अंतराकाशी (Interstitial) स्थान बना लेते हैं।
- इसके प्रमुख प्रकारों में रससमीकरणमितीय दोष (जैसे- शॉट्की और फ्रेंकेल दोष), अशुद्धि दोष और अरससमीकरणमितीय दोष शामिल हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) उत्प्रेरक परिभाषा: यह रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को प्रभावित करने वाले पदार्थों (उत्प्रेरक) से संबंधित तकनीकी शब्द है, क्रिस्टल दोष से नहीं।
- विकल्प (B) स्थानीय दोष: यह क्रिस्टल रसायन में उपयोग होने वाला मानक वैज्ञानिक पद नहीं है।
- विकल्प (C) लेबल दोष: यह किसी क्रिस्टलीय संरचना की अनियमितता का वैज्ञानिक या स्वीकृत नाम नहीं है।
#51. कार्बन में अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ आबंध बनाने की अनुठी क्षमता होती है, जिससे बड़े अणु बनते हैं। इस गुण को _______ कहा जाता है।
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) शृंखलन (Catenation)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में प्रबल सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी सीधी श्रृंखला (Straight chains), शाखायुक्त श्रृंखला (Branched chains) या चक्रीय वलय (Rings) रूपी बड़े अणु बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है। कार्बन की इस विशिष्ट प्रवृत्ति को ही ‘शृंखलन’ कहा जाता है।
- कार्बन की छोटी परमाणु त्रिज्या और उच्च कार्बन-कार्बन आबंध ऊर्जा (Bond energy) इसके इस गुण को अत्यधिक प्रभावी बनाती है, जिसके कारण प्रकृति में लाखों कार्बनिक यौगिक पाए जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) चक्रीकरण (Cyclisation): यह वलय संरचना बनाने की एक प्रक्रिया है, लेकिन कार्बन द्वारा आपस में जुड़कर लंबी और विविध श्रृंखलाएँ बनाने के मूल गुण को समग्र रूप से ‘शृंखलन’ कहा जाता है।
- विकल्प (B) बहुलीकरण (Polymerisation): यह छोटी एकल इकाइयों (Monomers) को जोड़कर बड़े बहुलक (Polymers) बनाने की रासायनिक विधि है।
- विकल्प (C) धात्विक आबंधन (Metallic bonding): यह धातुओं के परमाणुओं के बीच पाया जाने वाला आबंध है, न कि कार्बन परमाणुओं के आपासी आबंधन की विशेषता।
#52. कार्बन के दो मुख्य गुणधर्म क्या हैं जो इसकी ‘विविधतायुक्त प्रकृति’ और बड़ी संख्या में यौगिक बनाने की क्षमता में योगदान करते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) शृंखलन और चतुःसंयोजकता (Catenation and Tetravalency)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विविधतायुक्त प्रकृति (Versatile Nature of Carbon): कार्बन द्वारा इतनी विशाल संख्या में यौगिकों (कार्बनिक यौगिकों) के निर्माण का मुख्य श्रेय उसके दो विशिष्ट गुणों को जाता है:
- शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में प्रबल सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखलाओं, शाखायुक्त श्रृंखलाओं या वलयों के रूप में जुड़ने की अद्वितीय क्षमता होती है।
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिसके कारण यह एक साथ चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बना सकता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) सुचालकता और ध्वानिक प्रकृति: ये भौतिक गुण मुख्य रूप से धातुओं से संबंधित हैं, न कि कार्बन की विविधतापूर्ण यौगिक निर्माण क्षमता से।
- विकल्प (C) उच्च गलनांक और त्यता: त्यता (Ductility) धातुओं का गुण है और अधिकांश कार्बनिक यौगिकों के गलनांक कम होते हैं।
- विकल्प (D) समवयवता और अपररूपता: समवयवता और अपररूपता कार्बन के गुण हैं, लेकिन वे कार्बन की ‘शृंखलन’ और ‘चतुःसंयोजकता’ जैसे मूल कारणों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं, न कि इसके प्राथमिक मूलभूत गुण जो यौगिकों की विशाल संख्या बनाते हैं।
#53. कार्बन बड़ी संख्या में यौगिक बनाने में सक्षम क्यों है?
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) यह श्रृंखला (शृंखलन) और चतुःसंयोजकता दर्शाता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विविधतापूर्ण प्रकृति: कार्बन द्वारा इतनी विशाल संख्या में यौगिकों के निर्माण का प्रमुख कारण इसके दो अद्वितीय गुण हैं:
- शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में प्रबल सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखलाओं, शाखायुक्त श्रृंखलाओं या चक्रीय वलयों के रूप में जुड़ने की विशिष्ट क्षमता होती है।
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिसके कारण यह एक साथ चार अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक आबंध बना सकता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) यह प्रबल आयनिक बंध बनाता है: कार्बन आयनिक बंध नहीं बल्कि मुख्यतः सहसंयोजक (Covalent) बंध बनाता है।
- विकल्प (B) इसका घनत्व उच्च है: घनत्व का कार्बनिक यौगिकों की विशाल संख्या या विविधता से कोई सीधा संबंध नहीं है।
- विकल्प (D) यह अत्यधिक अभिक्रियाशील है: कार्बन सामान्य परिस्थितियों में अत्यधिक अभिक्रियाशील नहीं होता, बल्कि इसके यौगिक काफी स्थिर (Stable) होते हैं।
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