रासायनिक बंधन Railway PYQ
#1. असंतृप्त कार्बन यौगिक, संतृप्त कार्बन यौगिकों की तुलना में सामान्यतः अधिक अभिक्रियाशील क्यों होते हैं? इस कथन की सर्वोत्तम व्याख्या क्या है?
(RRB JE 19/02/2026 b)
✨ सही उत्तर: (D) असंतृप्त यौगिकों के कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि- या त्रि-आबंध होते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- असंतृप्त कार्बन यौगिक: जिन हाइड्रोकार्बन में कार्बन-कार्बन के बीच द्वि-आबंध (Double bond, जैसे- एल्कीन) या त्रि-आबंध (Triple bond, जैसे- एल्काइन) होते हैं, उन्हें असंतृप्त यौगिक कहा जाता है।
- अधिक अभिक्रियाशीलता का कारण: इन बहुआबंधों में कमजोर π (पाई) आबंध उपस्थित होते हैं, जो आसानी से टूट जाते हैं। इस वजह से ये संतृप्त यौगिकों (एल्केन) की तुलना में अधिक क्रियाशील होते हैं और आसानी से योगात्मक अभिक्रिया (Addition reaction) देते हैं।
- उदाहरण: एथीन (C2H4) और एथाइन (C2H2) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): हाइड्रोजन परमाणुओं की कम संख्या असंतृप्तता को दर्शाती है, लेकिन यह अभिक्रियाशीलता की सर्वोत्तम वैज्ञानिक व्याख्या (कमजोर आबंध की उपस्थिति) नहीं है।
- विकल्प (B): असंतृप्त यौगिक केवल सीधी श्रृंखलाएँ नहीं बनाते, बल्कि ये शाखित (Branched) और चक्रीय (Cyclic) भी हो सकते हैं।
- विकल्प (C): एकल आबंध (Single bond) संतृप्त यौगिकों (जैसे एल्केन) में पाया जाता है, न कि असंतृप्त यौगिकों में।
#2. कार्बन परमाणुओं का कौन-सा अद्वितीय गुण, उन्हें अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ लंबी और स्थिर श्रृंखला बनाने में सक्षम बनाता है?
(RRB Level 01 Stage I 03/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) शृंखलन (Catenation)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणु में यह एक अनोखा गुण होता है कि वह आपस में जुड़कर लंबी सीधी श्रृंखलाएँ (Straight chains), शाखित श्रृंखलाएँ (Branched chains) और वलय (Rings) जैसी संरचनाएँ बना सकता है।
- कारण: कार्बन-कार्बन के बीच बनने वाला सहसंयोजक आबंध (Covalent bond) बहुत प्रबल (Strong) होता है, जिसके कारण कार्बन इतनी बड़ी संख्या में यौगिकों का निर्माण कर पाता है।
- कार्बन की संयोजकता: कार्बन की चतुःसंयोजकता (Tetravalency) भी इसे अन्य परमाणुओं (जैसे- H, O, N, Cl) के साथ जुड़ने में मदद करती है, लेकिन लंबी श्रृंखला बनाने का मुख्य गुण ‘शृंखलन’ ही है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) समवयवता (Isomerism): यह एक ही आणविक सूत्र वाले भिन्न यौगिकों के होने का गुण है, लंबी श्रृंखला बनाने का नहीं।
- विकल्प (B) अपररूपता (Allotropy): इसके अंतर्गत एक ही तत्व भिन्न रूपों में पाया जाता है (जैसे- हीरा, ग्रेफाइट और फुलरीन), न कि श्रृंखला निर्माण से संबंधित है।
- विकल्प (C) चतुःसंयोजकता (Tetravalency): इसके चार संयोजी इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह अन्य चार परमाणुओं से जुड़ सकता है, लेकिन लंबी श्रृंखला बनाने की अद्वितीय क्षमता ‘शृंखलन’ कहलाती है।
#3. अमोनियम सल्फेट का रासायनिक सूत्र _______ है।
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) (NH4)2SO4
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अमोनियम सल्फेट (Ammonium Sulfate): इसका रासायनिक सूत्र (NH4)2SO4 होता है। यह एक महत्वपूर्ण अकार्बनिक लवण (Inorganic salt) है।
- निर्माण और संरचना: यह अमोनियम आयन (NH4+, जिसकी संयोजकता +1 होती है) और सल्फेट आयन (SO42-, जिसकी संयोजकता -2 होती है) के मिलने से बनता है। रासायनिक सूत्र लिखते समय इनकी संयोजकता का क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन किया जाता है।
- प्रमुख उपयोग: इसका सबसे बड़ा उपयोग कृषि में एक नाइट्रोजन और सल्फर युक्त उर्वरक (Fertilizer) के रूप में क्षारीय मिट्टियों को उपजाऊ बनाने के लिए किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) Ca2SO4: यह रासायनिक रूप से अमान्य है; कैल्शियम की संयोजकता +2 और सल्फेट की -2 होने के कारण कैल्शियम सल्फेट का सही सूत्र CaSO4 होता है।
- विकल्प (B) (NH4)SO4: इस सूत्र में आवेश (Charges) संतुलित नहीं हैं, क्योंकि अमोनियम पर +1 और सल्फेट पर -2 आवेश होता है।
- विकल्प (D) Na2SO4: यह सोडियम सल्फेट (Sodium sulfate) का रासायनिक सूत्र है, अमोनियम सल्फेट का नहीं।
#4. साधारण नमक/सोडियम क्लोराइड ( NaCl ) में, किस तत्व के आयन क्रमशः धनात्मक आवेशित और ऋणात्मक आवेशित होते हैं?
(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) Na आयन धनात्मक आवेशित होते हैं, और Cl आयन ऋणात्मक आवेशित होते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सोडियम क्लोराइड (NaCl): साधारण नमक एक आयनिक यौगिक (Ionic compound) है जो सोडियम (Na) और क्लोरीन (Cl) के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनता है।
- धनात्मक आयन (धनायन / Cation): सोडियम परमाणु (Na) अपना एक संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनात्मक आयन (Na+) बनाता है।
- ऋणात्मक आयन (ऋणायन / Anion): क्लोरीन परमाणु (Cl) उस इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करके ऋणात्मक आयन (Cl–) बनाता है।
- आयनिक बंध: ये दोनों विपरीत आवेशित आयन (Na+ और Cl–) एक-दूसरे को प्रबल स्थिरवैद्युत बल (Electrostatic force) द्वारा आकर्षित करके सोडियम क्लोराइड का निर्माण करते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) और (B): ये दोनों विकल्प गलत हैं क्योंकि एक ही यौगिक में दोनों तत्व या तो एक समान आवेश (धनात्मक या ऋणात्मक) नहीं रख सकते, अन्यथा उनके बीच आयनिक बंध का बनना असंभव होता है।
- विकल्प (D): यह कथन बिल्कुल विपरीत है; सोडियम कभी ऋणायन (Na–) सामान्य स्थिति में नहीं बनाता और क्लोरीन कभी धनायन (Cl+) नहीं बनता क्योंकि क्लोरीन एक अत्यधिक ऋणविद्युत (Electronegative) तत्व है।
#5. _______ के बनने के कारण कुछ दिनों के लिए खुले में रखे जाने पर चांदी की वस्तु काली हो जाती है।
(RRB JE 22 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (D) Ag2S
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चांदी का काला पड़ना (Tarnishing of Silver): जब चांदी (Silver) की वस्तुओं को वायु में कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ दिया जाता है, तो वायुमंडल में मौजूद सल्फर यौगिकों (विशेषकर हाइड्रोजन सल्फाइड गैस, H2S) के साथ यह अभिक्रिया करती है।
- रासायनिक यौगिक: इस रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप चांदी की सतह पर सिल्वर सल्फाइड (Ag2S) की एक काली परत जम जाती है, जिससे चांदी काली दिखाई देने लगती है।
- यह रासायनिक संक्षारण (Corrosion) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, ठीक उसी तरह जैसे लोहे पर जंग लगना।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) AgS: चांदी की संयोजकता +1 और सल्फर की -2 होती है, इसलिए रासायनिक सूत्र के नियमों के अनुसार सही सूत्र Ag2S बनता है, न कि AgS।
- विकल्प (B) H4S: यह हाइड्रोजन और सल्फर का कोई मान्य या स्थिर रासायनिक सूत्र नहीं है।
- विकल्प (C) AgSO4: सल्फेट (SO42-) आयन के साथ चांदी का ऐसा यौगिक सामान्य परिस्थितियों में चांदी के संक्षारण से निर्मित नहीं होता है।
#6. कमरे के तापमान पर निम्नलिखित में से कौन सी हरी-पीली गैस होती है जिसमें एक विशिष्ट गंध होती है?
(RRB NTPC CBT-I : 9 Mar 2021 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) क्लोरीन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोरीन गैस (Chlorine Gas, Cl2): कमरे के तापमान पर क्लोरीन एक तीक्ष्ण (Pungent), दमघोटू गंध वाली **हरे-पीले रंग (Greenish-yellow)** की जहरीली गैस होती है।
- भौतिक गुण: यह हवा से भारी होती है और पानी में आसानी से घुल जाती है। इसका उपयोग पानी को शुद्ध करने (Disinfection), ब्लीचिंग पाउडर बनाने और विभिन्न रासायनिक यौगिकों के निर्माण में किया जाता है।
- यह आवर्त सारणी (Periodic Table) के 17वें समूह (हैलोजन परिवार) का एक प्रमुख तत्व है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आयोडीन: यह कमरे के तापमान पर एक ठोस (Solid) पदार्थ है, जो गहरे बैंगनी-काले रंग का होता है और गर्म करने पर आसानी से ऊर्ध्वपातन (Sublimation) द्वारा बैंगनी वाष्प बनाता है।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S): यह एक रंगहीन (Colorless) गैस है जिसकी गंध सड़े हुए अंडे जैसी होती है।
- विकल्प (D) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): यह एक रंगहीन, गंधहीन (Odorless) और अत्यंत जहरीली गैस है जो ईंधन के अपूर्ण दहन से बनती है।
#7. जब तांबे को हवा की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो निम्नलिखित में से क्या बनता है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (C) काले रंग का कॉपर ( II ) ऑक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कॉपर का ऑक्सीकरण: जब तांबे (Copper) के चूर्ण को हवा की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो यह ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कॉपर (II) ऑक्साइड बनाता है।
- रासायनिक समीकरण: $2Cu + O_2 \xrightarrow{\Delta} 2CuO$ (कॉपर ऑक्साइड)
- रंग परिवर्तन: चूँकि कॉपर (II) ऑक्साइड का रंग **काला** होता है, इसलिए भूरे रंग की तांबे की सतह पर काले रंग की परत चढ़ जाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): कॉपर (I) ऑक्साइड ($Cu_2O$) लाल या भूरे रंग का होता है, और सामान्य रूप से वायु में गर्म करने पर मुख्य उत्पाद कॉपर (II) ऑक्साइड ($CuO$) बनता है।
- विकल्प (B): कॉपर (II) ऑक्साइड भूरे रंग का नहीं बल्कि काले रंग का होता है।
- विकल्प (D): कॉपर ऑक्साइड नीले रंग का नहीं होता (नीले रंग के कॉपर लवण जलीय विलयन में कॉपर सल्फेट जैसे यौगिकों के रूप में होते हैं)।
#8. ऐल्केन की सजातीय श्रेणी का प्रत्येक अगला सदस्य पिछले सदस्य से एक इकाई द्वारा भिन्न होता है, जिसमें _______ होते हैं।
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) एक कार्बन और दो हाइड्रोजन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बन यौगिकों की वह श्रृंखला जिसमें समान क्रियात्मक समूह होते हैं और दो क्रमिक (Consecutive) सदस्यों के आणविक सूत्र के बीच हमेशा -CH2– (मेथिलीन समूह) का अंतर होता है।
- -CH2– इकाई: इस समूह में एक कार्बन परमाणु (C) और दो हाइड्रोजन परमाणु (H2) होते हैं।
- उदाहरण: एल्केन श्रेणी के पहले सदस्य मीथेन ($CH_4$) और दूसरे सदस्य एथेन ($C_2H_6$) के बीच $CH_2$ का अंतर होता है, और इनके आणविक द्रव्यमान में 14u का अंतर होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) दो कार्बन और दो हाइड्रोजन: यह किसी भी क्रमिक हाइड्रोकार्बन सदस्यों के बीच का अंतर नहीं होता है, क्योंकि इससे श्रृंखला की संयोजकता और सूत्र बिगड़ जाएगा।
- विकल्प (C) और (D): ये संयोजन (जैसे $C_2H_3$ या $CH_3$) एल्केन की सजातीय श्रेणी के क्रमिक सदस्यों के बीच का अंतर नहीं दर्शाते हैं (जैसे $CH_3$ एक एल्किल समूह हो सकता है, लेकिन सजातीय अंतर नहीं)।
#9. फिनोल का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RPF SI 2018 : 13 Jan 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (A) C6H5OH
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- फिनोल (Phenol): इसका रासायनिक सूत्र C6H5OH होता है। इसे ‘कार्बोलिक एसिड’ (Carbolic acid) के नाम से भी जाना जाता है।
- संरचना: इसमें एक फेनिल समूह (Phenyl group, C6H5) सीधे एक हाइड्रॉक्सी समूह (-OH) से जुड़ा होता है। यह एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन का एक महत्वपूर्ण यौगिक है।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग रेजिन, कीटाणुनाशक (Antiseptics), और विभिन्न औषधियों (जैसे एस्पिरिन) के निर्माण में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) C2H5OH: यह एथेनॉल (Ethanol) या सामान्य अल्कोहल का रासायनिक सूत्र है, फिनोल का नहीं।
- विकल्प (C) और (D): C4H6OH या C4H5OH रसायन विज्ञान में फिनोल के मान्य या संतुलित सूत्र नहीं हैं।
#10. चूने के पानी का रासायनिक सूत्र _______ है।
(RRB NTPC CBT-I : 29 Dec 2020 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) Ca(OH)2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चूने का पानी (Lime Water): इसे बुझा हुआ चूना (Slaked lime) भी कहते हैं, जिसका रासायनिक नाम कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2] है।
- निर्माण: जब बिना बुझे चूने (Calcium oxide, CaO) में पानी मिलाया जाता है, तो तीव्र ऊष्मा के साथ कैल्शियम हाइड्रोक्साइड का जलीय विलयन बनता है जिसे चूने का पानी कहा जाता है।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस की पहचान करने के लिए किया जाता है, क्योंकि CO2 प्रवाहित करने पर चूने का पानी दूधिया हो जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) CaCl2: यह कैल्शियम क्लोराइड (Calcium chloride) का सूत्र है, जो एक लवण है।
- विकल्प (C) CaCO3: यह कैल्सियम कार्बोनेट (Calcium carbonate) का सूत्र है, जो संगमरमर या खड़िया (Chalk) का मुख्य घटक होता है।
- विकल्प (D) CaOH: यह रासायनिक रूप से अमान्य सूत्र है क्योंकि कैल्शियम की संयोजकता +2 होने के कारण हाइड्रॉक्साइड आयन के साथ इसका सही सूत्र Ca(OH)2 बनता है।
#11. वायु द्रव्यमान में मौजूद जल वाष्प की मात्रा को _______ कहा जाता है।
(RPF Constable 2018 20 Jan 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (A) आर्द्रता
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आर्द्रता (Humidity): वायुमंडल या वायु द्रव्यमान (Air mass) में अदृश्य रूप से मौजूद जल वाष्प (Water vapor) की मात्रा को आर्द्रता कहा जाता है।
- मापन: इसे आमतौर पर निरपेक्ष आर्द्रता या सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) के रूप में व्यक्त किया जाता है। इसे मापने के लिए **हाइग्रोमीटर (Hygrometer)** यंत्र का उपयोग किया जाता है।
- यह मौसम, वर्षा और जलवायु को निर्धारित करने वाला एक मुख्य कारक है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) चपलता: यह किसी वस्तु या व्यक्ति की फुर्ती या गतिशीलता (Agility) से संबंधित है, वायु की नमी से नहीं।
- विकल्प (C) विलंब: इसका अर्थ देरी (Delay) होता है, जिसका मौसम विज्ञान या जल वाष्प से कोई लेना-देना नहीं है।
- विकल्प (D) संयोजकता: यह रसायन विज्ञान में किसी तत्व के परमाणुओं की संयोजन क्षमता (Valency) को दर्शाती है।
#12. निम्नलिखित में से कौन सा विलयन जल-अपघटन के कारण थोड़ा अम्लीय है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 05 Jun, 2025 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) NH4Cl
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अम्लीय विलयन और जल-अपघटन: अमोनियम क्लोराइड ($\text{NH}_4\text{Cl}$) एक प्रबल अम्ल ($\text{HCl}$) और दुर्बल क्षारक ($\text{NH}_4\text{OH}$) से मिलकर बना लवण है।
- कारण: जब इसे पानी में घोला जाता है, तो इसके धनायन ($\text{NH}_4^+$) का जल-अपघटन होता है, जिससे विलयन में हाइड्रोजन आयन ($\text{H}^+$) मुक्त होते हैं और विलयन की प्रकृति थोड़ी **अम्लीय** हो जाती है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{NH}_4^+ + \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{NH}_4\text{OH} + \text{H}^+$
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{Na}_2\text{CO}_3$: यह प्रबल क्षारक ($\text{NaOH}$) और दुर्बल अम्ल ($\text{H}_2\text{CO}_3$) का लवण है, इसलिए इसका जलीय विलयन क्षारीय (Basic) होता है।
- विकल्प (C) $\text{NH}_4\text{CH}_3\text{COO}$: यह दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षारक का लवण है, जिसका जलीय विलयन लगभग उदासीन (Neutral) होता है।
- विकल्प (D) $\text{CH}_3\text{COONa}$: सोडियम एसीटेट भी प्रबल क्षारक और दुर्बल अम्ल का लवण होने के कारण क्षारीय विलयन बनाता है।
#13. जलीय सोडियम सल्फेट और जलीय बेरियम क्लोराइड की अभिक्रिया में, कौन सा यौगिक सफेद अवक्षेप बनाता है?
(RRB Level 01 Stage I 23/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) बेरियम सल्फेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): जब जलीय सोडियम सल्फेट और जलीय बेरियम क्लोराइड को मिलाया जाता है, तो यह एक द्वि-विस्थापन (Double displacement) अभिक्रिया होती है।
- सफेद अवक्षेप: इस अभिक्रिया में बेरियम आयन ($\text{Ba}^{2+}$) और सल्फेट आयन ($\text{SO}_4^{2-}$ मिलकर अघुलनशील **बेरियम सल्फेट ($\text{BaSO}_4$)** का निर्माण करते हैं, जो एक **सफेद अवक्षेप (White precipitate)** के रूप में नीचे बैठ जाता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{Na}_2\text{SO}_4(aq) + \text{BaCl}_2(aq) \rightarrow \text{BaSO}_4(s)\downarrow + 2\text{NaCl}(aq)$
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$): यह जल में पूरी तरह घुलनशील होता है और विलयन में ही रहता है, यह अवक्षेप नहीं बनाता।
- विकल्प (B) और (C): सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड इस रासायनिक अभिक्रिया के **अभिकारक (Reactants)** हैं, न कि उत्पाद या अवक्षेप।
#14. एसिटिक एसिड का रासायनिक सूत्र _______ है
(RPF Constable 2018 18 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) CH3COOH
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एसिटिक एसिड (Acetic Acid): इसका रासायनिक नाम **एथनोइक एसिड (Ethanoic acid)** है और इसका रासायनिक सूत्र CH3COOH होता है।
- सिरका (Vinegar): एसिटिक एसिड का 5% से 8% जलीय विलयन सिरका कहलाता है, जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों के परीक्षण (Preservation) और आचार आदि में किया जाता है।
- यह कार्बोक्जिलिक एसिड ($\text{-COOH}$) श्रेणी का एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध सदस्य है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CHCOOH2 और (D) CH3COOH2: ये रासायनिक रूप से अमान्य और असंतुलित सूत्र हैं, क्योंकि कार्बन की संयोजकता (Tetravalency) यहाँ संतुष्ट नहीं होती है।
- विकल्प (C) CH2COOH: यह एक मुक्त मूलक (Free radical) या कार्बोक्ज़िमिथाइल समूह हो सकता है, लेकिन पूर्ण और स्थिर एसिटिक एसिड का अणु नहीं है।
#15. एथेनॉल और एसिटिक अम्ल के बीच अभिक्रिया का उत्पाद क्या है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) एस्टर
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एस्टरिफिकेशन (Esterification Reaction): जब एथेनॉल ($\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$) की अभिक्रिया अम्ल (जैसे सांद्र $\text{H}_2\text{SO}_4$) की उपस्थिति में एसिटिक अम्ल ($\text{CH}_3\text{COOH}$) के साथ कराई जाती है, तो **एस्टर (Ester)** का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{CH}_3\text{COOH} + \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \xrightarrow{\text{Acid}} \text{CH}_3\text{COOC}_2\text{H}_5 \text{ (एथिल एसिटेट)} + \text{H}_2\text{O}$
- प्रमुख गुण: एस्टर मीठी सुगंध (Sweet-smelling substances) वाले यौगिक होते हैं, जिनका उपयोग इत्र (Perfumes) और स्वाद बढ़ाने वाले एजेंट (Flavouring agents) के रूप में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एसिटेट: यह एक ऋणायन ($\text{CH}_3\text{COO}^-$) या लवण का हिस्सा है, केवल ‘एसिटेट’ मुख्य संपूर्ण उत्पाद (एस्टर) नहीं कहलाता।
- विकल्प (B) एथेनल: यह एथेनॉल के ऑक्सीकरण से बनने वाला एक ऐल्डिहाइड है, एस्ट्रीकरण का उत्पाद नहीं।
- विकल्प (C) मेथेनॉल: यह एक अलग अल्कोहल है, जिसका इस अभिक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
#16. एल्यूमीनियम और सल्फेट आयनों द्वारा निर्मित यौगिक का रासायनिक सूत्र निम्नलिखित में से से कौन सही ढंग से दर्शाता है?
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (C) Al2(SO4)3
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक सूत्र का निर्माण: एल्यूमीनियम सल्फेट के निर्माण में एल्यूमीनियम आयन ($\text{Al}^{3+}$) पर **+3** आवेश (संयोजकता) होता है और सल्फेट आयन ($\text{SO}_4^{2-}$) पर **-2** आवेश होता है।
- क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन विधि: आयनों की संयोजकता का क्रॉसमॉस (Cross-multiplication) करने पर एल्यूमीनियम के साथ सल्फेट की संख्या (3) और सल्फेट के साथ एल्यूमीनियम की संख्या (2) आती है, जिससे सही सूत्र Al2(SO4)3 बनता है।
- प्रमुख उपयोग: एल्यूमीनियम सल्फेट का उपयोग मुख्य रूप से जल शुद्धिकरण (Water treatment), कागज उद्योग और रंगाई में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{Al(SO}_4)_3$: इस सूत्र में आवेश संतुलित नहीं हैं (यहाँ एल्यूमीनियम का +3 और सल्फेट का कुल -6 आवेश मेल नहीं खाता)।
- विकल्प (B) $\text{Al}_2\text{SO}_4$: इसमें भी आवेशों का संतुलन गलत है (+6 और -2)।
- विकल्प (D) $\text{Al}_3\text{(SO}_4)_2$: यह रासायनिक रूप से एल्यूमीनियम और सल्फेट के लिए एक अमान्य और असंतुलित संयोजन है।
#17. एक गियर में अन्तराल वृत्त से दांतों अन्तराल के नीचे तक की दूरी _______ है।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) विधुतक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विधुतक (Dedendum / वियुक्तक): गियर में अन्तराल वृत्त (Pitch Circle) से दांतों के मूल या निचले अंतराल (Root / bottom of tooth space) तक की त्रिज्य (Radial) दूरी को विधुतक कहा जाता है।
- युक्तक (Addendum): इसके विपरीत, अन्तराल वृत्त से गियर के दांत के ऊपरी सिरे (Tip/Top) तक की लंबवत दूरी को युक्तक कहा जाता है।
- ये दोनों गियर की शब्दावली (Gear terminology) के बहुत महत्वपूर्ण पद हैं, जिनका उपयोग गियर की कटाई और डिजाइनिंग में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) हब (Hub): यह गियर का वह मोटा केंद्रीय भाग होता है जिसके माध्यम से गियर को मशीन की शाफ्ट (Shaft) पर मजबूती से फिट किया जाता है।
- विकल्प (B) युक्तक (Addendum): यह पिच वृत्त से ऊपर की ओर दांत की नोक तक की दूरी होती है, नीचे के अंतराल तक की नहीं।
- विकल्प (D) बोर (Bore): यह गियर के ठीक केंद्र में बना वह छिद्र (Hole) होता है जिसके अंदर शाफ्ट को डाला जाता है।
#18. किस बहुपरमाणुक आयन का ‘n’ मान 3 के बराबर होता है?
(RRB Level 01 Stage I 15/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) PO4-n (जहाँ n = 3 है)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- फॉस्फेट आयन (Phosphate Ion): फॉस्फेट एक बहुपरमाणुक आयन (Polyatomic ion) है जिसका रासायनिक सूत्र PO43- होता है।
- ‘n’ का मान: दिए गए विकल्पों में से यदि हम PO4-n से तुलना करें, तो फॉस्फेट पर 3 ऋण आवेश होने के कारण यहाँ n = 3 के बराबर होता है।
- यह एक त्रिसंयोजी (Trivalent) ऋणायन है जो विभिन्न प्रकार के लवणों (जैसे कैल्शियम फॉस्फेट) के निर्माण में भाग लेता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) SO4-n: सल्फेट आयन का सूत्र SO42- होता है, इसलिए यहाँ n का मान 2 होता है।
- विकल्प (B) CO3-n: कार्बोनेट आयन का सूत्र CO32- होता है, इसलिए यहाँ भी n का मान 2 होता है।
- विकल्प (D) HCO3-n: बाइकार्बोनेट आयन का सूत्र HCO3– होता है, इसलिए यहाँ n का मान 1 होता है।
#19. शुष्क बुझे चूने पर क्लोरीन की क्रिया से निम्नलिखित में से क्या बनता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 25 Nov, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) ब्लीचिंग पाउडर
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विरंजक चूर्ण / ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder): इसका रासायनिक नाम **कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड ($\text{CaOCl}_2$)** है।
- निर्माण की प्रक्रिया: जब शुष्क बुझे हुए चूने [$\text{Ca(OH)}_2$] पर **क्लोरिन गैस ($\text{Cl}_2$)** की क्रिया कराई जाती है, तो ब्लीचिंग पाउडर का निर्माण होता है।
- रासायनिक समीकरण: $\text{Ca(OH)}_2 + \text{Cl}_2 \rightarrow \text{CaOCl}_2 + \text{H}_2\text{O}$
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कैल्सियम ऑक्साइड ($\text{CaO}$): इसे बिना बुझा हुआ चूना (Quick lime) कहते हैं, जो चूना पत्थर को गर्म करने पर प्राप्त होता है।
- विकल्प (B) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$): यह हाइड्रोजन और क्लोरीन गैस के सीधे संयोजन से बनता है, न कि बुझे चूने पर क्लोरीन की क्रिया से।
- विकल्प (C) कैल्सियम क्लोराइड ($\text{CaCl}_2$): यह कैल्शियम हाइड्रोक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के बीच उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया का उत्पाद है।
#20. कार्बन अपने दो विशिष्ट गुणों के कारण बहुत बड़ी संख्या में यौगिक बनाता है। निम्नलिखित में से कौन इन गुणों की सही पहचान करता है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) शृंखलन और चतुःसंयोजकता
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बन के यौगिकों की अधिकता का कारण: कार्बन प्रकृति में लाखों यौगिकों का निर्माण करता है, जिसके पीछे इसके मुख्य रूप से दो ही विशिष्ट गुण होते हैं:
- 1. शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखित श्रृंखलाएँ या वलय (Rings) बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है।
- 2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिसके कारण यह एक साथ चार अन्य कार्बन परमाणुओं या एक-संयोजकता वाले अन्य तत्वों (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन आदि) के साथ प्रबल सहसंयोजक आबंध बना सकता है।
- इन्हीं दो गुणों के कारण कार्बन के यौगिकों की संख्या अन्य सभी तत्वों के यौगिकों से बहुत अधिक है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) उच्च गलनांक और तन्यता: तन्यता (Ductility) धातुओं का गुण है, और ये कार्बन द्वारा बड़ी संख्या में यौगिक बनने का मुख्य कारण नहीं हैं।
- विकल्प (B) अच्छी चालकता और ध्वानिक प्रकृति: ध्वानिक (Sonorous) होना धातुओं की विशेषता है, कार्बन यौगिकों की संख्या से इसका कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (C) अपररूपता और समवयवता: यद्यपि कार्बन अपररूपता और समवयवता प्रदर्शित करता है, लेकिन इतनी विशाल संख्या में यौगिक बनने के मूल और मुख्य कारण ‘शृंखलन’ और ‘चतुःसंयोजकता’ ही हैं।
#21. दो कार्बन परमाणुओं और एक हाइड्रॉक्सील (− OH) प्रकाऱ्यात्मक समूह वाले कार्बनिक यौगिक का IUPAC नाम क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) एथेनॉल (Ethanol)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एथेनॉल (Ethanol): इस कार्बनिक यौगिक का रासायनिक सूत्र CH3CH2OH (या C2H5OH) होता है।
- नामकरण का आधार: चूँकि इस यौगिक में **दो कार्बन परमाणु** हैं, इसलिए मूल शब्द ‘एथ-‘ (Eth) का उपयोग किया जाता है। इसमें **हाइड्रॉक्सील समूह (-OH)** जुड़ा होता है, जो अल्कोहल परिवार को दर्शाता है और इसके लिए अनुलग्नक (Suffix) ‘ऑल’ (-ol) जोड़ा जाता है, जिससे यह ‘एथेनॉल’ बनता है।
- इसे सामान्य बोलचाल में **एथिल अल्कोहल** भी कहा जाता है, जिसका उपयोग शराब, टिंचर आयोडीन और विभिन्न औषधियों के निर्माण में होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) प्रोपेनोन: यह तीन कार्बन वाला कीटोन ($\text{CH}_3\text{COCH}_3$) है, जिसे सामान्यतः एसीटोन कहा जाता है।
- विकल्प (B) एथेनॉइक अम्ल: इसमें दो कार्बन परमाणु तो होते हैं, लेकिन क्रियात्मक समूह हाइड्रॉक्सील न होकर कार्बोक्जिलिक अम्ल ($\text{-COOH}$) होता है।
- विकल्प (C) मेथेनल: यह केवल एक कार्बन वाला ऐल्डिहाइड ($\text{HCHO}$) है, जिसे फॉर्मेल्डिहाइड भी कहते हैं।
#22. Mg 2+ और PO 4 3- आयनों के बीच बनने वाले यौगिक का सही सूत्र पहचानें
。(RRB JE CE 22 Apr 2025 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: Mg3(PO4)2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक सूत्र का निर्माण: मैग्नीशियम आयन ($\text{Mg}^{2+}$) पर **+2** आवेश होता है और फॉस्फेट आयन ($\text{PO}_4^{3-}$) पर **-3** आवेश होता है।
- क्रॉस-मल्टीप्लिकेशन विधि: जब इनकी संयोजकता का आपस में क्रॉस गुणा किया जाता है, तो मैग्नीशियम के साथ फॉस्फेट की संख्या (3) और फॉस्फेट के साथ मैग्नीशियम की संख्या (2) आती है, जिससे सही सूत्र Mg3(PO4)2 (मैग्नीशियम फॉस्फेट) बनता है।
- यह एक आयनिक यौगिक है जो कुल धनावेश और ऋणावेश को संतुलित करके तटस्थ (Neutral) अणु बनाता है ($3 \times (+2) = +6$ और $2 \times (-3) = -6$).
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प $\text{MgPO}_4$: इस सूत्र में आवेश संतुलित नहीं हैं (+2 और -3 का योग शून्य नहीं होता)।
- विकल्प $\text{Mg}_3\text{(PO}_4)_3$: इसमें कुल धनावेश (+6) और कुल ऋणावेश (-9) असमान हैं, जो रासायनिक रूप से अमान्य है।
- विकल्प $\text{Mg(PO}_4)_3$: यह भी आवेश संतुलन के नियम के विरुद्ध एक गलत सूत्र संयोजन है।
#23. कौन सा नियम बताता है कि एक यौगिक में हमेशा समान तत्व समान द्रव्यमान अनुपात में होते हैं?
(RRB NTPC UG CBT-I : 03 Sept, 2025 Shift 1)
✨ सही उत्तर: निश्चित अनुपात का नियम
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- निश्चित अनुपात का नियम (Law of Definite Proportions): इस नियम को जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने प्रतिपादित किया था। इसके अनुसार, किसी भी रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के हिसाब से एक **निश्चित अनुपात** में मौजूद होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी ने भी बनाया हो।
- उदाहरण: पानी ($\text{H}_2\text{O}$) चाहे नल का हो, नदी का हो या प्रयोगशाला में बनाया गया हो; इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात हमेशा $1:8$ होता है।
- यह रसायन विज्ञान के मूलभूत रासायनिक संयोजन के नियमों (Laws of Chemical Combination) में से एक है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): इसे एंटोनी लव्वाजियेश द्वारा दिया गया था, जिसके अनुसार रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन होता है और न ही विनाश।
- गुणित अनुपात का नियम (Law of Multiple Proportions): इसे जॉन डाल्टन ने प्रतिपादित किया था; यह तब लागू होता है जब दो तत्व मिलकर एक से अधिक यौगिक बनाते हैं।
- एवोगाड्रो का नियम (Avogadro’s Law): इसके अनुसार समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।
#24. कौन-सी गैस सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया करके सोडियम बाइकार्बोनेट और सोडियम कार्बोनेट बनाती है?
(RRB Level 01 Stage I 17/12/2025 )
✨ सही उत्तर: CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बन डाइऑक्साइड और सोडियम हाइड्रोक्साइड की अभिक्रिया: जब सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$) के विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस प्रवाहित की जाती है, तो पहले सोडियम कार्बोनेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3$) बनता है।
- अधिकता में अभिक्रिया: यदि $\text{CO}_2$ गैस को अधिक मात्रा में प्रवाहित किया जाए, तो यह सोडियम कार्बोनेट के साथ आगे अभिक्रिया करके सोडियम बाइकार्बोनेट ($\text{NaHCO}_3$) का निर्माण करती है।
- रासायनिक समीकरण:
1) $2NaOH + CO_2 \rightarrow Na_2CO_3 + H_2O$
2) $Na_2CO_3 + H_2O + CO_2 \rightarrow 2NaHCO_3$
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प $\text{SO}_2$ (सल्फर डाइऑक्साइड): यह एक अम्लीय गैस है जो $\text{NaOH}$ के साथ अभिक्रिया करके सोडियम सल्फाइट ($\text{Na}_2\text{SO}_3$) बनाती है, न कि कार्बोनेट या बाइकार्बोनेट।
- विकल्प $\text{CO}$ (कार्बन मोनोऑक्साइड): यह एक उदासीन गैस (Neutral gas) है और सामान्य परिस्थितियों में $\text{NaOH}$ के साथ अभिक्रिया नहीं करती है।
- विकल्प $\text{NO}_2$ (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड): यह क्षार के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रेट और नाइट्राइट लवण बनाती है।
#25. ऑक्सीकरण पर, चांदी का रंग _________ और तांबे का रंग _________ में बदल जाता है。
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: काले; हरे
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चांदी का काला पड़ना: जब चांदी (Silver) की वस्तुओं को हवा में खुला छोड़ा जाता है, तो यह वायुमंडल में मौजूद सल्फर यौगिकों या हाइड्रोजन सल्फाइड ($\text{H}_2\text{S}$) के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर सल्फाइड ($\text{Ag}_2\text{S}$) बनाती है, जिससे चांदी का रंग काला हो जाता है।
- तांबे का हरा होना: जब तांबे (Copper) के बर्तन या वस्तु को लंबे समय तक हवा में रखा जाता है, तो यह नम हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) और नमी के साथ अभिक्रिया करके बेसिक कॉपर कार्बोनेट $[\text{CuCO}_3 \cdot \text{Cu(OH)}_2]$ की परत बनाती है, जिससे तांबे का रंग हरा हो जाता है।
- यह दोनों प्रक्रियाएँ धातुओं के **संक्षारण (Corrosion)** का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- ग्रे; हरे: चांदी के संक्षारण के बाद ग्रे (धूसर) रंग की परत नहीं बल्कि सिल्वर सल्फाइड के कारण काले रंग की परत जमती है।
- काले; नीले: तांबे के ऑक्सीकरण या संक्षारण से नीले रंग की नहीं बल्कि हरे रंग की परत (पेटिना) बनती है।
- ग्रे; नीले: यह संयोजन रासायनिक रूप से चांदी और तांबे की संक्षारण क्रिया के तथ्यों से मेल नहीं खाता है।
#26. जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधों को परस्पर लगातार जोड़ा जाता है, तो उन्हें इन्हें _________ जुड़ा हुआ कहा जाता है।
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) श्रेणीक्रम संयोजन में
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination): जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधकों (Resistors) को एक के बाद एक लगातार (End-to-end) जोड़ा जाता है, ताकि प्रत्येक से समान विद्युत धारा प्रवाहित हो, तो उसे श्रेणीक्रम संयोजन कहा जाता है।
- समतुल्य प्रतिरोध: इस संयोजन में कुल या समतुल्य प्रतिरोध सभी व्यक्तिगत प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है ($R = R_1 + R_2 + R_3 \dots$)।
- मुख्य विशेषता: इस संयोजन में परिपथ का कुल प्रतिरोध बढ़ जाता है, और यदि बीच में कोई एक उपकरण या प्रतिरोधक खराब हो जाता है, तो पूरा विद्युत परिपथ टूट जाता है (धारा प्रवाहित होना बंद हो जाती है)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- समानांतरक्रम संयोजन (Parallel Combination): इसमें प्रतिरोधों को लगातार (एक के बाद एक) नहीं, बल्कि समान दो बिंदुओं के बीच पार्श्व (Side-by-side) में जोड़ा जाता है।
- प्रत्यक्ष संयोजन: यह भौतिकी या विद्युत परिपथों में प्रतिरोधों के संयोजन के लिए उपयोग होने वाला कोई वैज्ञानिक या औपचारिक शब्द नहीं है।
- रेखिक संयोजन: यह भी प्रतिरोधों के क्रम को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाने वाला मानक भौतिकी पद नहीं है।
#27. धातुओं और अधातुओं के बीच आयनिक यौगिक कैसे बनते हैं?
(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) धातु परमाणुओं से अधातु परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आयनिक यौगिक (Ionic Compounds): धातुओं और अधातुओं के बीच बनने वाले यौगिकों को आयनिक या वैद्युतसंयोजक यौगिक कहा जाता है।
- निर्माण की प्रक्रिया: धातु परमाणु अपने बाह्यतम कोष से इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनात्मक आयन (धनायन / Cation) बनाते हैं, जबकि अधातु परमाणु उन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके ऋणात्मक आयन (ऋणायन / Anion) बनाते हैं। इस प्रकार इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण (Transfer of electrons) से ये यौगिक बनते हैं।
- स्थिरवैद्युत आकर्षण: इसके पश्चात दोनों विपरीत आवेशित आयन प्रबल स्थिरवैद्युत बल (Electrostatic force of attraction) द्वारा एक-दूसरे से बंध जाते हैं (जैसे- $\text{NaCl}$).
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण द्वारा: परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से **सहसंयोजक यौगिक (Covalent compounds)** बनते हैं, आयनिक यौगिक नहीं।
- विकल्प (C) विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉनों के समुद्र के निर्माण द्वारा: यह **धात्विक आबंध (Metallic bonding)** की विशेषता है जो शुद्ध धातुओं में पाई जाती है।
- विकल्प (D): धनात्मक आवेशित नाभिकों के बीच पारस्परिक आकर्षण आयनिक बंध के निर्माण की वैज्ञानिक व्याख्या नहीं है (क्योंकि नाभिकों में समान धन आवेश होने के कारण प्रतिकर्षक बल होता है)।
#28. विटामिन- E का रासायनिक नाम क्या है?
(RPF Constable 2018 19 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) टोकोफेरोल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विटामिन-E (Vitamin E): इसका रासायनिक नाम टोकोफेरोल (Tocopherol) है। यह वसा में घुलनशील (Fat-soluble) विटामिन है।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: इसे **’सौंदर्य विटामिन’ (Beauty Vitamin)** या एंटी-एजिंग विटामिन भी कहा जाता है क्योंकि यह त्वचा और कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसकी कमी से जनन क्षमता (Reproductive capacity) प्रभावित हो सकती है और मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।
- मुख्य स्रोत: वनस्पति तेल, बादाम, बीज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और अंकुरित अनाज इसके प्रमुख स्रोत हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- कैलिफर (कैल्सीफेरॉल): यह विटामिन-D का रासायनिक नाम है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक है।
- एस्कॉर्बिक अम्ल (Ascorbic Acid): यह विटामिन-C का रासायनिक नाम है, जिसकी कमी से स्कर्वी रोग होता है।
- फाइलकुर्किंस (फिलोक्विनान / Phylloquinone): यह विटामिन-K का रासायनिक नाम है जो रक्त का थक्का जमने में मदद करता है।
#29. संतृप्त हाइड्रोकार्बनों में कार्बन परमाणुओं के मध्य किस प्रकार का आबंध पाया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 24/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) एकल आबंध
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons): वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल **एकल सहसंयोजक आबंध (Single covalent bond)** पाया जाता है, संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
- ऐल्केन श्रेणी: इन्हें सामान्यतः **ऐल्केन (Alkanes)** कहा जाता है, जिनका सामान्य सूत्र $\text{C}_n\text{H}_{2n+2}$ होता है। इसका सबसे सरल उदाहरण मेथेन ($\text{CH}_4$) और एथेन ($\text{C}_2\text{H}_6$) है।
- ये यौगिक रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत कम क्रियाशील (Unreactive) होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) द्वि और त्रिक दोनों आबंध: यह विशेषता असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों (Unsaturated hydrocarbons) से संबंधित है, संतृप्त से नहीं।
- विकल्प (C) द्वि आबंध: कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि आबंध (Double bond) वाले यौगिकों को **ऐल्कीन (Alkenes)** कहा जाता है, जो असंतृप्त होते हैं।
- विकल्प (D) त्रिक आबंध: कार्बन परमाणुओं के बीच त्रिक आबंध (Triple bond) वाले यौगिकों को **ऐल्काइन (Alkynes)** कहा जाता है, जो भी असंतृप्त श्रेणी में आते हैं।
#30. आयनिक यौगिकों के संदर्भ में प्रयुक्त पद’ सूत्र इकाई द्रव्यमान ( formula unit mass )’ को कौन-सा कथन सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) यह एक आयनिक यौगिक की सूत्र इकाई में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणविक द्रव्यमानों का योग है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass): चूंकि आयनिक यौगिक (जैसे $\text{NaCl}$) स्वतंत्र अणुओं के रूप में अस्तित्व में नहीं होते, बल्कि विपरीत आवेशित आयनों के त्रिविम संकुल (Crystal lattice) के रूप में होते हैं, इसलिए इनके लिए ‘अणु द्रव्यमान’ शब्द के बजाय ‘सूत्र इकाई द्रव्यमान’ पद का उपयोग किया जाता है।
- गणना का तरीका: यह किसी आयनिक यौगिक की सूत्र इकाई में मौजूद सभी व्यक्तिगत परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के कुल **योग (Sum)** के बराबर होता है।
- इसे परमाणु द्रव्यमान इकाई ($\text{u}$) में व्यक्त किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): सहसंयोजक यौगिकों के लिए ‘अणु द्रव्यमान’ (Molecular mass) का प्रयोग होता है, न कि आयनिक यौगिकों की सूत्र इकाई द्रव्यमान का।
- विकल्प (B): किसी पदार्थ के एक मोल के द्रव्यमान को **मोलर द्रव्यमान (Molar mass)** कहा जाता है।
- विकल्प (C): सूत्र इकाई द्रव्यमान तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों का **योग** होता है, उनका गुणनफल नहीं।
#31. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सभी संतृप्त हाइड्रोकार्बन के लिए सही है?
(RRB JE 20/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) वे योगज अभिक्रियाओं की अपेक्षा प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons): इनमें सभी कार्बन परमाणु केवल एकल सहसंयोजक आबंधों द्वारा जुड़े होते हैं, जिसके कारण ये रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत कम क्रियाशील (Unreactive/Paraffins) होते हैं।
- प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction): चूंकि इनके पास जुड़ने के लिए कोई रिक्त या असंतृप्त बंध नहीं होता, इसलिए सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ये क्लोरीन जैसे तत्वों के साथ मुख्य रूप से **प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ** दर्शाते हैं (जैसे- मेथेन का क्लोरीनीकरण)।
- इनमें कार्बन-कार्बन या कार्बन-हाइड्रोजन के मजबूत एकल आबंध आसानी से नहीं टूटते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) और (C): त्रि-आबंध या द्वि-आबंध होना असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों (ऐल्कीन और ऐल्काइन) की विशेषता है, संतृप्त हाइड्रोकार्बनों की नहीं।
- विकल्प (B): सरलतापूर्वक योगज (Addition) अभिक्रियाएँ केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन दर्शाते हैं, संतृप्त हाइड्रोकार्बन नहीं।
#32. कार्बनिक यौगिकों को परिभाषित करने वाली प्राथमिक विशेषता क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026)
✨ सही उत्तर: (C) इनमें मुख्यतः कार्बन और हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, जो सहसंयोजक बंध बनाते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds): आधुनिक रसायन विज्ञान में कार्बनिक यौगिक मुख्य रूप से हाइड्रोकार्बन और उनके व्युत्पन्न होते हैं, जिनमें कार्बन और हाइड्रोजन अनिवार्य रूप से **सहसंयोजक बंध (Covalent bonds)** के माध्यम से जुड़े होते हैं।
- अन्य तत्व: कार्बन और हाइड्रोजन के अलावा इनमें ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन, सल्फर और फॉस्फोरस जैसे अन्य तत्व भी सहसंयोजक रूप से जुड़े हो सकते हैं।
- इनकी मुख्य विशेषता इनका कम गलनांक/कथनांक और विद्युत का कुचालक होना है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): शुरुआती समय में ‘जीवन शक्ति सिद्धांत’ के तहत ऐसा माना जाता था, लेकिन बर्जिलियास के सिद्धांत के गलत साबित होने के बाद प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से यूरिया (कार्बनिक यौगिक) बनाकर इसे खारिज कर दिया गया।
- विकल्प (B): पिघली हुई अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत का चालन करना **आयनिक यौगिकों** की विशेषता है, कार्बनिक यौगिकों की नहीं।
- विकल्प (D): सभी कार्बनिक यौगिकों में ऑक्सीजन होना आवश्यक नहीं है (जैसे शुद्ध हाइड्रोकार्बन जैसे मीथेन, एथेन में ऑक्सीजन नहीं होती)।
#33. निम्नलिखित में से किस घटना में ठोस अवस्था द्रव अवस्था में बदले बिना सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाती है
?(RRB Technician Grade III : 24 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) ऊर्ध्वपातन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऊर्ध्वपातन (Sublimation): वह प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ठोस अवस्था से सीधे बिना द्रव अवस्था में बदले गैसीय अवस्था में (या गैस से सीधे ठोस में) परिवर्तित हो जाता है, ऊर्ध्वपातन कहलाती है।
- प्रमुख उदाहरण: कपूर (Camphor), अमोनियम क्लोराइड ($\text{NH}_4\text{Cl}$), नेफ्थलीन की गोलियाँ (Naphthalene balls) और शुष्क बर्फ (Solid $\text{CO}_2$) इस प्रक्रिया के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
- यह अवस्था परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण भौतिक प्रक्रम है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) संलयन (Fusion/Melting): इसमें ठोस पदार्थ गर्म करने पर द्रव (लिखित) अवस्था में परिवर्तित होता है।
- विकल्प (B) निक्षेपण (Deposition): यह ऊर्ध्वपातन की उल्टी प्रक्रिया है, जिसमें गैस सीधे ठोस अवस्था में बदलती है।
- विकल्प (C) पिंडन (Condensation): इसमें गैस या वाष्प ठंडी होकर द्रव अवस्था में परिवर्तित होती है।
#34. जीवाश्म ईंधन को जलाने पर निकलने वाले कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर के ऑक्साइड _________ हैं
।(RRB ALP CBT 2 Electrician Previous Paper : 22 Jan 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (D) अम्लीय ऑक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अम्लीय ऑक्साइड (Acidic Oxides): कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर सभी **अधातुएँ (Non-metals)** हैं। रासायनिक रूप से, अधातुओं के ऑक्साइड प्रकृति में अम्लीय होते हैं।
- जल के साथ अभिक्रिया: जब जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, पेट्रोल) को जलाया जाता है, तो इनसे निकलने वाले $\text{CO}_2$, $\text{SO}_2$ और $\text{NO}_2$ जैसे ऑक्साइड पानी मेंुलकर अम्ल बनाते हैं ($\text{SO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{H}_2\text{SO}_3$)।
- ये ऑक्साइड वायु प्रदूषण और **अम्ल वर्षा (Acid Rain)** के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कॉपर ऑक्साइड और (B) सिल्वर ऑक्साइड: ये धातुओं के ऑक्साइड हैं, जिनका जीवाश्म ईंधन के दहन से निकलने वाले गैसों से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (C) क्षारीय ऑक्साइड: क्षारीय ऑक्साइड आमतौर पर धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम) द्वारा बनाए जाते हैं, न कि कार्बन, नाइट्रोजन या सल्फर जैसी अधातुओं द्वारा।
#35. संतृप्त हाइड्रोकार्बन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB Level 01 Stage I 22/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) इनमें कार्बन-कार्बन बंध के केवल एकल बंध होता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons): वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल **एकल सहसंयोजक आबंध (Single covalent bond)** पाए जाते हैं, संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
- ऐल्केन श्रेणी: इस श्रेणी के यौगिकों को **ऐल्केन (Alkanes)** कहा जाता है, जिनका सामान्य सूत्र $\text{C}_n\text{H}_{2n+2}$ होता है (जैसे- मेथेन $\text{CH}_4$, एथेन $\text{C}_2\text{H}_6$)।
- ये यौगिक रासायनिक रूप से स्थिर होते हैं और मुख्य रूप से प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Substitution reactions) दर्शाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) और (C): कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक दोहरा बंध (Double bond) या त्रि-आबंध होने वाले यौगिक **असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated hydrocarbons)** कहलाते हैं, जैसे ऐल्कीन और ऐल्काइन।
- विकल्प (D): त्रि-आबंध होना असंतृप्त श्रेणी (ऐल्काइन) की विशेषता है, संतृप्त हाइड्रोकार्बन की नहीं।
#36. निम्नलिखित में से किस मिश्रण का उपयोग सोने को शुद्ध करने के लिए किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 8 April 2021 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) एक्वारेजिया
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- एक्वारेजिया (Aqua Regia / अम्लराज): यह सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल ($\text{HNO}_3$) का **3:1** के अनुपात में ताजा तैयार किया गया एक प्रबल मिश्रण होता है।
- स्वर्ण शोधन: एक्वारेजिया एक अत्यधिक संक्षारक (Corrosive) और धूम्रयुक्त तरल है, जिसमें सोना ($\text{Au}$) और प्लेटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुएँ घुलने की क्षमता रखती हैं, जबकि अकेले ये अम्ल इन धातुओं को नहीं गला सकते।
- इसका उपयोग मुख्य रूप से सोने को शुद्ध करने (Gold refining) और सोने के आभूषणों की सफाई करने में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) एरोसोल: यह गैस में ठोस या द्रव के कणों का एक कोलाइडल मिश्रण होता है (जैसे कोहरा या धुआं), इसका सोने के शोधन से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (B) नेस्लर अभिकर्मक: यह पोटेशियम टेट्राआयोडोमरक्यूरेट($II$) का क्षारीय विलयन है, जिसका उपयोग अमोनिया ($\text{NH}_3$) गैस की पहचान के लिए किया जाता है।
- विकल्प (C) लिकर अमोनिया: यह अमोनिया गैस का सांद्र जलीय विलयन होता है, जिसका उपयोग प्रयोगशाला अभिकर्मक और शीतलन में होता है।
#37. अमोनियम सल्फेट का सूत्र क्या है?
(RRB JE CE 28 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (D) (NH4)2SO4
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अमोनियम सल्फेट (Ammonium Sulfate): इसका सही रासायनिक सूत्र (NH4)2SO4 होता है। यह एक अकार्बनिक लवण है।
- संरचना और आवेश: इसमें अमोनियम आयन ($\text{NH}_4^+$) पर +1 आवेश होता है और सल्फेट आयन ($\text{SO}_4^{2-}$) पर -2 आवेश होता है। आवेशों को संतुलित करने के लिए 2 अमोनियम आयनों की आवश्यकता होती है।
- प्रमुख उपयोग: इसका सबसे बड़ा उपयोग कृषि में **नाइट्रोजन और सल्फर युक्त उर्वरक** के रूप में किया जाता है, जो क्षारीय मिट्टी को सुधारने में मददगार है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{NH}_4\text{SO}_3$: यह सल्फाइट ($\text{SO}_3^{2-}$) का सूत्र है और इसमें आवेश भी संतुलित नहीं हैं (+1 और -2)।
- विकल्प (B) $\text{NH}_3\text{SO}_4$: अमोनिया का सही मूल आयन $\text{NH}_3$ नहीं बल्कि $\text{NH}_4^+$ (अमोनियम) होता है, इसलिए यह सूत्र गलत है।
- विकल्प (C) $\text{NH}_4\text{SO}_4$: इसमें धनावेश (+1) और ऋणावेश (-2) का संतुलन नहीं है, इसलिए यह रासायनिक रूप से अमान्य है।
#38. एक रेडॉक्स अभिक्रिया में, अपचयन को किस प्रकार वर्णित किया जा सकता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) हाइड्रोजन का संयोग
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अपचयन (Reduction): रासायनिक अभिक्रियाओं के संदर्भ में, किसी पदार्थ में **हाइड्रोजन का जुड़ना**, ऑक्सीजन का हटना, या इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करना (Gain of electrons) ‘अपचयन’ कहलाता है।
- रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction): ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऑक्सीकरण (Oxidation) और अपचयन (Reduction) दोनों साथ-साथ घटित होते हैं, उन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहा जाता है।
- इसमें एक अभिकारक ऑक्सीकृत होता है जबकि दूसरा अपचयित होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) इलेक्ट्रॉनों का क्षय: रासायनिक अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉनों की हानि (Loss of electrons) **ऑक्सीकरण** कहलाती है, अपचयन नहीं।
- विकल्प (B) एक ऋणात्मक तत्व का संयोग: किसी विद्युत-ऋणात्मक तत्व या घटक का जुड़ना ऑक्सीकरण की श्रेणी में आता है।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन का संयोग: किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का जुड़ना **ऑक्सीकरण (Oxidation)** कहलाता है।
#39. निम्नलिखित में से कौन-सा, क्लोर-क्षार ( chlor-alkali ) प्रक्रिया में निर्मित नहीं होता है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) सोडियम कार्बोनेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali Process): जब सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन/Brine) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसका विद्युत अपघटन होता है। इस प्रक्रिया को ‘क्लोर-क्षार’ कहा जाता है क्योंकि इसमें क्लोरीन (Chlor) और क्षार ($\text{NaOH}$) का निर्माण होता है।
- मुख्य उत्पाद: इस प्रक्रिया के दौरान तीन प्रमुख उत्पाद बनते हैं—क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) (एनोड पर), हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) (कैथोड पर) और सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$) विलयन।
- रासायनिक समीकरण: $2\text{NaCl (aq)} + 2\text{H}_2\text{O (l)} \rightarrow 2\text{NaOH (aq)} + \text{Cl}_2\text{ (g)} + \text{H}_2\text{ (g)}$
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) क्लोरीन गैस: यह इस प्रक्रिया का एक मुख्य उत्पाद है जो एनोड पर प्राप्त होती है।
- विकल्प (B) सोडियम हाइड्रोक्साइड: यह एक प्रबल क्षार है जो इस प्रक्रिया के नाम का दूसरा हिस्सा (क्षार/Alkali) है।
- विकल्प (C) हाइड्रोजन गैस: यह भी इस विद्युत अपघटन प्रक्रिया में कैथोड पर मुक्त होने वाला उत्पाद है।
#40. असंतृप्त कार्बन, संतृप्त कार्बन यौगिकों की तुलना में _________ होते हैं
。(RRB Level 01 Stage I 08/01/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) अधिक अभिक्रियाशील
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons): जिन कार्बन यौगिकों में कार्बन-कार्बन के बीच द्वि-आबंध (Double bond) या त्रि-आबंध (Triple bond) पाए जाते हैं, उन्हें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे- ऐल्कीन और ऐल्काइन) कहा जाता है।
- अभिक्रियाशीलता का कारण: इन बहुआबंधों में मजबूत सिग्मा ($\sigma$) बंध के साथ-साथ कमजोर पाई ($\pi$) बंध भी होते हैं। कमजोर $\pi$ बंधों की उपस्थिति के कारण ये संतृप्त हाइड्रोकार्बनों (ऐल्केन) की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील (More reactive) होते हैं और आसानी से योगज अभिक्रिया (Addition reaction) दर्शाते हैं।
- इसके विपरीत, संतृप्त हाइड्रोकार्बन केवल मजबूत एकल बंधों से बने होने के कारण अपेक्षाकृत निष्क्रिय (Parraffin) होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) अधिक संतृप्त: यह शब्द रासायनिक रूप से इस संदर्भ में गलत है क्योंकि वे पहले से ही असंतृप्त हैं।
- विकल्प (C) बराबर अभिक्रियाशील: एकल बंध और बहुआबंध वाले यौगिकों की रासायनिक सक्रियता में स्पष्ट अंतर होता है, इसलिए वे समान रूप से अभिक्रियाशील नहीं होते।
- विकल्प (D) कम अभिक्रियाशील: असंतृप्त यौगिक कम नहीं बल्कि अधिक क्रियाशील होते हैं; संतृप्त यौगिक कम अभिक्रियाशील होते हैं।
#41. निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों में से कौन-सा संतृप्त है?
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) ब्रोमोप्रोपेन (Bromopropane)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संतृप्त कार्बनिक यौगिक: वे यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल सहसंयोजक आबंध (Single covalent bonds) पाए जाते हैं, संतृप्त यौगिक कहलाते हैं।
- ब्रोमोप्रोपेन की संरचना: यह संतृप्त हाइड्रोकार्बन ‘प्रोपेन’ ($\text{C}_3\text{H}_8$) का ही एक व्युत्पन्न (Haloalkane) है, जिसमें एक हाइड्रोजन परमाणु को ब्रोमीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। इसके कार्बन-कार्बन आबंध में कोई द्वि या त्रि-आबंध नहीं होता, इसलिए यह संतृप्त श्रेणी में आता है.
- इसमें कार्यात्मक समूह ($\text{-Br}$) की उपस्थिति होने के बावजूद इसका कार्बन बैकबोन पूरी तरह संतृप्त होता है.
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) प्रोपाइन: यह एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्काइन) है जिसमें कार्बन परमाणुओं के बीच त्रि-आबंध (Triple bond) पाया जाता है.
- विकल्प (C) 2-ब्रोमोप्रोपीन: इसके नाम में ‘प्रोपीन’ जुड़ा है, जो एक असंतृप्त यौगिक है और इसमें कार्बन-कार्बन के बीच द्वि-आबंध (Double bond) होता है.
- विकल्प (D) प्रोपीन: यह एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन) है जिसका सामान्य सूत्र $\text{C}_3\text{H}_6$ है और इसमें भी द्वि-आबंध उपस्थित होता है.
#42. निम्नलिखित में से कौन-सा, सभी कार्बनिक यौगिकों का एक विशिष्ट अभिलक्षण है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) इनमें सदैव कार्बन होता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बन की अनिवार्यता: कार्बनिक यौगिकों (Organic compounds) की सबसे प्राथमिक और अनिवार्य विशेषता यह है कि उनमें सदैव कार्बन (Carbon) परमाणु मौजूद होता है।
- परिभाषा: रसायन विज्ञान में कार्बन और हाइड्रोजन के यौगिकों (हाइड्रोजन एवं उनके व्युत्पन्नों) को ही कार्बनिक यौगिक कहा जाता है, जहाँ कार्बन अपनी चतुःसंयोजकता (Tetravalency) और श्रृंखला बनाने के विशिष्ट गुण (Catenation) के कारण लाखों यौगिकों का निर्माण करता है।
- इनमें मुख्य रूप से सहसंयोजक बंध (Covalent bonds) पाए जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आयनिक आबंध: कार्बनिक यौगिकों में मुख्य रूप से सहसंयोजक बंध बनते हैं, आयनिक आबंध नहीं।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन: सभी कार्बनिक यौगिकों में ऑक्सीजन होना आवश्यक नहीं है (उदाहरण के लिए- मेथेन $\text{CH}_4$ और एथेन $\text{C}_2\text{H}_6$ जैसे शुद्ध हाइड्रोकार्बनों में ऑक्सीजन नहीं होती)।
- विकल्प (D) नाइट्रोजन: नाइट्रोजन भी सभी कार्बनिक यौगिकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित नहीं होता (यह केवल कुछ विशिष्ट यौगिकों जैसे ऐमीन आदि में पाया जाता है)।
#43. धावन सोडा का आणविक सूत्र क्या है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) Na2CO3·10H2O
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- धावन सोडा (Washing Soda): इसका रासायनिक नाम **सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट** है और इसका आणविक सूत्र Na2CO3·10H2O होता है।
- क्रिस्टलन जल: इसके एक सूत्र इकाई में सोडियम कार्बोनेट के साथ जल के **10 अणु** जुड़े होते हैं, जिन्हें क्रिस्टलन का जल (Water of crystallization) कहा जाता है।
- इसका उपयोग मुख्य रूप से कठोर जल को मृदु करने (Water softening), घरेलू सफाई और काँच, साबुन एवं कागज उद्योगों में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{NaHCO}_3$: यह **बेकिंग सोडा** (खाने का सोडा / सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) का रासायनिक सूत्र है।
- विकल्प (C) $\text{Na}_2\text{CO}_3$: यह निर्जल सोडियम कार्बोनेट (डाइसोडियम कार्बोनेट) है, जिसमें क्रिस्टलन का जल नहीं होता (इसे सोडा ऐश भी कहते हैं)।
- विकल्प (D) $\text{NaCl}$: यह साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड) का रासायनिक सूत्र है।
#44. अभिकथन ( A ) और कारण ( R ) से लेबल किए गए निम्नलिखित दो कथनों के संबंध में सत्य विकल्प का चयन कीजिए。अभिकथन ( A ): पौधों में कई पीढ़ियों तक प्रजातियों के सांतत्य बनाए रखने के लिए लैंगिक प्रजनन आवश्यक है।कारण ( R ): लैंगिक प्रजनन आनुवंशिक विविधता को जन्म देता है जो अनुकूलशीलता और विकासीय स्वस्थता को बढ़ाता है
。(RRB Level 01 Stage I 09/01/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- लैंगिक प्रजनन और प्रजाति सांतत्य: पौधों और अन्य जीवों में लैंगिक प्रजनन के दौरान युग्मकों का संलयन होता है, जो आनुवंशिक संयोजनों में बदलाव लाता है। यह प्रक्रिया प्रजातियों को बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों में टिके रहने और कई पीढ़ियों तक अपनी निरंतरता (Continuity) बनाए रखने में सक्षम बनाती है।
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): लैंगिक जनन के दौरान क्रॉसिंग ओवर और निषेचन के कारण संतति में विविधता उत्पन्न होती है। यह विविधता पौधों की अनुकूलन क्षमता (Adaptability) और विकासीय स्वस्थता (Evolutionary fitness) को बढ़ाती है, जिससे वे प्राकृतिक चयन का सामना सरलता से कर पाते हैं।
- अतः स्पष्ट है कि आनुवंशिक विविधता और अनुकूलशीलता ही वह मुख्य वजह है जिसके कारण लैंगिक प्रजनन प्रजातियों के सांतत्य के लिए आवश्यक है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): यह कहना गलत है कि कारण (R) सही व्याख्या नहीं है, क्योंकि आनुवंशिक विविधता और अनुकूलन ही वह जैविक आधार है जो अभिकथन (A) को सही साबित करता है।
- विकल्प (B) और (C): चूँकि जीव विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार दोनों कथन (A और R) पूर्णतः सत्य हैं, इसलिए इनमें से किसी एक को असत्य मानना तार्किक रूप से त्रुटिपूर्ण है।
#45. जब लिटमस को बोरेक्स के एक विलयन में मिलाया जाता है, तो यह _________ हो जाता है
。(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (D) नीला
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- बोरेक्स विलयन की प्रकृति: बोरेक्स ($\text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) एक दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार का लवण होता है, जिसके कारण इसका जलीय विलयन जल-अपघटन (Hydrolysis) के पश्चात प्रकृति में **क्षारीय (Alkaline)** होता है और इसका pH मान लगभग 9 के आसपास (यानी 7 से अधिक) होता है।
- लिटमस परीक्षण: क्षारीय विलयन लाल लिटमस पत्र या विलयन को **नीला** कर देते हैं। इसलिए, जब लिटमस को बोरेक्स के विलयन में मिलाया जाता है, तो उसका रंग बदलकर नीला हो जाता है।
- यह सूचक (Indicators) के गुणों पर आधारित एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामान्य विज्ञान का प्रश्न है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) गुलाबी और (B) नारंगी: लिटमस विलयन अम्लीय माध्यम में लाल और क्षारीय में नीला रंग देता है, ये दोनों रंग मानक लिटमस परीक्षण के परिणाम नहीं हैं।
- विकल्प (C) लाल: लिटमस माध्यम के अम्लीय होने पर लाल रंग में बदलता है, जबकि बोरेक्स का विलयन क्षारीय होता है।
#46. वायुमंडल में वायु के अणुओं द्वारा बिखरे हुए सूर्य के प्रकाश का रंग क्या होता है?
(RRB JE CBT I :- 2 June 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) नीला
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light): जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से गुजरता है, तो वायु के सूक्ष्म कण (जैसे गैस के अणु और धूलकण) छोटे तरंगदैर्ध्य (Wavelength) वाले प्रकाश को अधिक प्रकीर्णित करते हैं।
- रैले का प्रकीर्णन नियम: इस नियम के अनुसार प्रकीर्णन की मात्रा तरंगदैर्ध्य की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($I \propto \frac{1}{\lambda^4}$). चूंकि नीले और बैंगनी रंग का तरंगदैर्ध्य बहुत कम होता है, इसलिए वे सबसे अधिक बिखरते हैं।
- मानव आँख की संवेदनशीलता: हालांकि बैंगनी रंग का प्रकीर्णन नीले से भी अधिक होता है, लेकिन हमारी आँखें नीले रंग के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं और सूर्य के प्रकाश में नीले रंग की मात्रा अधिक होती है, इसलिए वायुमंडल द्वारा बिखरा हुआ मुख्य रंग **नीला** दिखाई देता है (यही कारण है कि आकाश का रंग नीला होता है)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सफेद: सूर्य का वास्तविक प्रकाश सफेद (या श्वेत प्रकाश) होता है, लेकिन प्रकीर्णन के बाद कणों द्वारा बिखराया गया प्रकाश नीला हो जाता है।
- विकल्प (C) लाल: लाल रंग का तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होता है, जिसके कारण इसका प्रकीर्णन सबसे कम होता है (यह खतरे के सिग्नल और सूर्यास्त/सूर्योदय के समय दिखता है)।
- विकल्प (D) विबग्योर (VIBGYOR): यह श्वेत प्रकाश के सातों रंगों का संयुक्त स्पेक्ट्रम है, न कि वायुमंडल द्वारा विशेष रूप से बिखराया गया रंग।
#47. समजातीय श्रेणी CH 4 , C 2 H 6 , और C 3 H 8 के क्रमागत सदस्यों में किस इकाई से अंतर होता है?
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (A) CH2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- समजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें समान क्रियात्मक समूह और समान सामान्य सूत्र होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है।
- अंतर का आधार: इस श्रेणी के किन्हीं भी दो क्रमिक (Consecutive) सदस्यों के बीच हमेशा एक कार्बन और दो हाइड्रोजन परमाणुओं यानी $-\text{CH}_2-$ इकाई का अंतर होता है।
- आणविक द्रव्यमान में अंतर: चूँकि $-\text{CH}_2-$ का आणविक द्रव्यमान $14\text{ u}$ ($12 + 2$) होता है, इसलिए क्रमिक सदस्यों के द्रव्यमान में भी $14\text{ u}$ का अंतर पाया जाता है (जैसे- मेथेन $\text{CH}_4$ और एथेन $\text{C}_2\text{H}_6$ के बीच एक ‘C’ और दो ‘H’ का अंतर है)।
- यद्यपि इनके भौतिक गुणों में भिन्नता होती है, लेकिन रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) $\text{CH}_4$: $\text{CH}_4$ (मेथेन) स्वयं एक पूरा यौगिक है, न कि क्रमिक सदस्यों के बीच का अंतर।
- विकल्प (C) $\text{CH}$ और (D) $\text{CH}_3$: यह रासायनिक रूप से गलत संयोजन है क्योंकि दो क्रमिक ऐल्केनों के बीच हमेशा एक कार्बन और दो हाइड्रोजन ($\text{CH}_2$) का ही अंतराल होता है।
#48. मिसल ( micelle ) में, कौन-सा भाग बाहर की तरफ जल की ओर होता है?
(RRB JE 25/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) आयनिक सिरा
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मिसल (Micelle) की संरचना: साबुन के अणु लंबे श्रृंखला वाले कार्बोक्जिलिक अम्लों के सोडियम या पोटेशियम लवण होते हैं। इनमें दो मुख्य भाग होते हैं—एक जल-रागी (Hydrophilic) आयनिक सिरा और दूसरा जल-विरागी (Hydrophobic) हाइड्रोकार्बन पूंछ।
- आयनिक सिरे की स्थिति: जब साबुन को पानी में घोला जाता है, तो इसका ध्रुवीय/आयनिक सिरा ($\text{-COO}^- \text{Na}^+$) जल की ओर (बाहਰ की तरफ) आकर्षित होता है क्योंकि यह जल-रागी (Water-loving) होता है।
- इसके विपरीत, हाइड्रोकार्बन पूंछ अंदर की ओर तेल या ग्रीस के मैल की तरफ केंद्रित होती है, जो गंदगी को साफ करने में मदद करती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) हाइड्रोकार्बन पूंछ: यह भाग जल-विरागी (Hydrophobic) होता है और यह पानी से दूर अंदर की तरफ (मैल या ग्रीस की ओर) रहता है, बाहर जल की ओर नहीं।
- विकल्प (C) अध्रुवीय छोर: हाइड्रोकार्बन पूंछ ही अध्रुवीय छोर होती है, जो पानी में घुलने के बजाय तेल की ओर आकर्षित होती है।
- विकल्प (D) ग्रीस अणु: ग्रीस अणु मिसल के बिल्कुल केंद्र में फँसे होते हैं, न कि बाहर की तरफ जल की ओर।
#49. कार्बन का कौन-सा गुण उसे लंबी श्रृंखलाएं और वलय बनाने की अनुमति देता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) बहु आबंध बनाने की क्षमता
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- बहु आबंध बनाने की क्षमता (Ability to form multiple bonds): कार्बन परमाणु अपने छोटे आकार के कारण अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ-साथ ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के साथ एकल, द्वि (Double) और त्रि (Triple) आबंध यानी बहु आबंध बनाने में पूरी तरह सक्षम होते हैं।
- श्रृंखलाएँ और वलय निर्माण: कार्बन की यह बहु आबंध बनाने की प्रवृत्ति और इसकी चतुःसंयोजकता (Tetravalency) इसे सीधी श्रृंखलाओं, शाखित (Branched) श्रृंखलाओं और बेंजीन जैसे चक्रीय वलयों (Ring structures) का निर्माण करने की अनुमति देती है।
- कार्बन के इसी अद्वितीय गुण (श्रृंखलन और बहु-आबंधन) के कारण ही प्रकृति में लाखों कार्बनिक यौगिकों का अस्तित्व संभव हो पाया है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) अन्य तत्वों के साथ स्थिर आबंध बनाने की क्षमता: हालांकि कार्बन स्थिर आबंध बनाता है, लेकिन यह वलय और जटिल श्रृंखलाओं की विविधता को विशिष्ट रूप से परिभाषित नहीं करता।
- विकल्प (B) एकल आबंध बनाने की प्रवृत्ति: कार्बन केवल एकल आबंध ही नहीं, बल्कि द्वि और त्रि आबंध भी बनाता है जो वलय संरचनाओं के लिए अति आवश्यक हैं।
- विकल्प (D) सहसंयोजक आबंध बनाने की क्षमता: यह कार्बन का एक सामान्य गुण है जो अधिकांश कार्बनिक यौगिकों में पाया जाता है, लेकिन विशिष्ट रूप से वलयों और लंबी श्रृंखलाओं के विविध विन्यास के लिए बहु-आबंधन और श्रृंखलन मुख्य भूमिका निभाते हैं।
#50. जब नियंत्रित परिस्थितियों में क्लोरीन गैस में सोडियम धातु का एक छोटा टुकड़ा मिलाने पर तीव्र अभिक्रिया होती है और सोडियम क्लोराइड बनता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन निर्मित उत्पाद के स्थायित्व के सर्वोत्तम कारण को स्पष्ट करता है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) सोडियम, क्लोरीन को एक इलेक्ट्रॉन दान करता है, जिससे विपरीत आवेश वाले आयन निर्मित होते हैं जो प्रबल स्थिरवैद्युत बलों द्वारा एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आयनिक बंध का निर्माण: सोडियम ($\text{Na}$) एक धातु है जिसके पास संयोजी कोश में 1 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन होता है, जबकि क्लोरीन ($\text{Cl}$) एक अधातु है जिसे अपना अष्टक पूरा करने के लिए 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
- इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण: सोडियम अपना एक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को दान कर देता है, जिससे धनआयन ($\text{Na}^+$) और ऋणआयन ($\text{Cl}^-$) बनते हैं।
- स्थिरवैद्युत आकर्षण (Electrostatic Force): ये दोनों विपरीत आवेशित आयन एक-दूसरे को तीव्र **स्थिरवैद्युत बलों** द्वारा आकर्षित करते हैं और सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$) का एक अत्यंत स्थायी आयनिक क्रिस्टल जालक (Crystal lattice) बनाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B): विस्थापित इलेक्ट्रॉनों के साथ धात्विक जालक (Metallic lattice) का निर्माण शुद्ध धातुओं के गुणों को दर्शाता है, न कि आयनिक यौगिक $\text{NaCl}$ को।
- विकल्प (C): इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण **सहसंयोजक बंध (Covalent bond)** में होता है, जबकि सोडियम क्लोराइड एक आयनिक यौगिक है।
- विकल्प (D): सोडियम क्लोरीन से इलेक्ट्रॉन ग्रहण नहीं करता बल्कि इलेक्ट्रॉन का **त्याग (दान)** करता है, और यहाँ पारस्परिक साझाकरण नहीं बल्कि पूर्ण स्थानांतरण होता है।
#51. कौन-सा कथन एक आयन का सही वर्णन करता है?
(RRB JE 19/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) एक आवेशित परमाणु या परमाणुओं का समूह
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आयन की परिभाषा: एक आयन वह आवेशित परमाणु या परमाणुओं का समूह होता है जिसके पास इलेक्ट्रॉनों की कमी या अधिकता के कारण कुल नेट आवेश (धन आवेश या ऋण आवेश) होता है।
- धनआयन और ऋणआयन: इलेक्ट्रॉन त्यागने वाले परमाणु धनआयन (Cation) बनाते हैं और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाले परमाणु ऋणआयन (Anion) बनाते हैं।
- विद्युत आवेश: आयन कभी भी उदासीन नहीं होते, उनपर हमेशा कोई न कोई विद्युत आवेश (Electric charge) उपस्थित होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): समान परमाणुओं से बना अणु (जैसे $\text{O}_2$ या $\text{H}_2$) एक उदासीन अणु होता है, न कि आयन।
- विकल्प (C): सहसंयोजक आबंधों से बने यौगिक इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण से बनते हैं और ये सामान्यतः उदासीन अणु होते हैं।
- विकल्प (D): रासायनिक आबन्धन से बने परमाणु या यौगिक उदासीन हो सकते हैं, लेकिन आयन कभी भी उदासीन नहीं होते बल्कि वे आवेशित कण होते हैं।
#52. एसिटिलीन गैस का रासायनिक प्रतीक क्या है?
(RRB JE ME 31 Aug 2019 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (A) C2H2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: एसिटिलीन का रासायनिक नाम एथाइन (Ethyne) है और इसका रासायनिक सूत्र C2H2 होता है। यह सबसे सरल एल्काइन (Alkyne) श्रेणी का हाइड्रोकार्बन है।
- संरचना: इसमें दो कार्बन परमाणु आपस में एक त्रिविध सहसंयोजक बंध (Triple covalent bond) द्वारा जुड़े होते हैं, और दोनों तरफ एक-एक हाइड्रोजन परमाणु जुड़ा होता है (H-C≡C-H)।
- प्रमुख उपयोग: यह एक अत्यंत ज्वलनशील गैस है जिसका मुख्य उपयोग धातुओं की वेल्डिंग और कटिंग के लिए ऑक्सी-एसिटिलीन टॉर्च में ईंधन के रूप में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) CH3: यह मेथिल मूलक (Methyl radical/group) का सूत्र है, जो एक स्वतंत्र स्थिर गैस नहीं है।
- विकल्प (C) C3H2: यह रासायनिक रूप से एसिटिलीन का सही आणविक सूत्र नहीं है।
- विकल्प (D) CH2: यह मेथिलीन (Methylene) को दर्शाता है, जो स्वतंत्र एसिटिलीन गैस का रासायनिक प्रतीक नहीं है।
#53. CaO का रासायनिक नाम क्या है?
(RRB JE CBT I :- 2 June 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (C) कैल्शियम ऑक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: $\text{CaO}$ का रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्साइड (Calcium Oxide) है। इसे सामान्य बोलचाल की भाषा में **बिना बुझा हुआ चूना (Quicklime)** भी कहा जाता है।
- निर्माण: इसे आमतौर पर चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट, $\text{CaCO}_3$) को उच्च तापमान पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस निकल जाती है।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग सीमेंट, कांच, उर्वरक और कागज के निर्माण के साथ-साथ जल शोधन और निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कैल्शियम मोनोऑक्साइड: हालांकि इसमें कैल्शियम और ऑक्सीजन का एक-एक परमाणु है, लेकिन इसका मानक और स्वीकृत रासायनिक नाम केवल ‘कैल्शियम ऑक्साइड’ है।
- विकल्प (B) कैल्शियम डाईऑक्साइड: यह रासायनिक रूप से गलत है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन के दो परमाणु नहीं बल्कि केवल एक परमाणु है ($\text{CaO}$)।
- विकल्प (D) कैल्शियम सल्फेट: इसका रासायनिक सूत्र $\text{CaSO}_4$ होता है (जैसे जिप्सम या प्लास्टर ऑफ पेरिस का मुख्य घटक), जो $\text{CaO}$ से बिल्कुल भिन्न है।
#54. रासायनिक सूत्र K 2 SO 4 किसको दर्शाता है?
(RRB JE 28 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (A) पोटैशियम सल्फेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: रासायनिक सूत्र $\text{K}_2\text{SO}_4$ पोटैशियम सल्फेट (Potassium Sulfate) को दर्शाता है। इसे ‘अर्केनाइट’ (Arcanite) के नाम से भी जाना जाता है।
- घटक: यह एक आयनिक यौगिक है जो पोटैशियम आयनों ($\text{K}^+$) और सल्फेट आयनों ($\text{SO}_4^{2-}$) के मिलने से बनता है।
- प्रमुख उपयोग: इसका सबसे बड़ा उपयोग कृषि में उर्वरक (Fertilizer) के रूप में किया जाता है, विशेष रूप से उन फसलों के लिए जो क्लोराइड के प्रति संवेदनशील होती हैं (जैसे तंबाकू और कुछ फल)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) पोटैशियम क्लोराइड: इसका रासायनिक सूत्र $\text{KCl}$ होता है, जिसमें सल्फेट आयन मौजूद नहीं होता।
- विकल्प (C) पोटैशियम नाइट्रेट: इसका रासायनिक सूत्र $\text{KNO}_3$ होता है, जो एक अलग यौगिक है।
- विकल्प (D) एल्युमीनियम सल्फेट: इसका रासायनिक सूत्र $\text{Al}_2(\text{SO}_4)_3$ होता है, जिसमें पोटैशियम की जगह एल्युमीनियम धातु होती है।
#55. फेरस सल्फेट के अपघटन से निम्नलिखित में से कौन-से पदार्थ बनते हैं?
(RRB Technician Grade III : 23 Dec, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO3)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया (Thermal Decomposition): जब हरे रंग के फेरस सल्फेट क्रिस्टल को गर्म किया जाता है, तो यह जल के अणु खोकर निर्जल बनता है और फिर तीव्र ताप पर अपघटित होकर फेरिक ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड गैसें बनाता है।
- संतुलित रासायनिक समीकरण: 2FeSO4 (s) $\xrightarrow{\Delta}$ Fe2O3 (s) + SO2 (g) + SO3 (g)
- रंग और गंध परिवर्तन: इस ऊष्मीय अपघटन अभिक्रिया में हरे रंग का फेरस सल्फेट भूरे-लाल रंग के फेरिक ऑक्साइड में बदल जाता है और सल्फर गैसों की विशिष्ट दमघोंटू (जलते हुए सल्फर जैसी) गंध आती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B): इसमें केवल सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$) को उत्पाद बताया गया है जबकि सल्फर ट्राइऑक्साइड ($\text{SO}_3$) का निर्माण भी साथ में होता है।
- विकल्प (C): यह विकल्प तकनीकी रूप से अधूरा और अशुद्ध है, क्योंकि इसमें उत्पादों का सही मिश्रण नहीं दिया गया है।
- विकल्प (D): इसमें केवल सल्फर ट्राइऑक्साइड का जिक्र है जबकि $\text{SO}_2$ और $\text{SO}_3$ दोनों गैसें निकलती हैं।
#56. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘कार्बन यौगिक की प्रकृति’ के बारे में गलत है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 28 Nov, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर (गलत कथन): (C) कार्बन के यौगिक केवल ऑक्सीजन के साथ बनते हैं।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बन के अन्य तत्व: कार्बन केवल ऑक्सीजन के साथ ही नहीं, बल्कि हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फर, क्लोरीन और कई अन्य तत्वों के साथ मजबूत सहसंयोजक आबंध (Covalent bonds) बनाकर बहुतायत में यौगिकों (जैसे हाइड्रोकार्बन आदि) का निर्माण करता है।
- शृंखलन (Catenation): कार्बन में अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ मिलकर लंबी श्रृंखलाएं, शाखित श्रृंखलाएं या वलय बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है, जिसे शृंखलन कहते हैं।
- संतृप्त व असंतृप्त यौगिक: एकल आबंध वाले कार्बन यौगिक **संतृप्त (Saturated)** (जैसे एल्केन) और द्वि/त्रि आबंध वाले यौगिक **असंतृप्त (Unsaturated)** (जैसे एल्कीन और एल्काइन) कहलाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही कथन क्यों हैं?):
- विकल्प (A): यह कथन बिल्कुल सत्य है; कार्बन की शृंखलन (Catenation) की क्षमता ही कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या का मुख्य कारण है।
- विकल्प (B): यह कथन भी सत्य है कि द्विआबंध (Double bond) या त्रिआबंध (Triple bond) वाले कार्बन यौगिक असंतृप्त यौगिक कहलाते हैं।
- विकल्प (D): यह कथन भी सत्य है कि केवल एकल आबंध (Single bond) से जुड़े कार्बन यौगिक संतृप्त यौगिक (जैसे मीथेन, एथेन आदि) होते हैं।
#57. तत्व के प्रतीकों ( element symbols ) को लिखने का IUPAC नियम क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) (दो अक्षरों के केस में) पहला अक्षर अपरकेस, दूसरा लोवरकेस होता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- IUPAC प्रतीक नियम: IUPAC (इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री) के नियमों के अनुसार किसी तत्व के प्रतीक में यदि एक अक्षर है तो वह हमेशा कैपिटल (Uppercase) होता है। यदि दो अक्षर हैं, तो **पहला अक्षर कैपिटल (Uppercase)** और **दूसरा अक्षर स्मॉल (Lowercase)** लिखा जाता है।
- उदाहरण: उदाहरण के लिए, कोबाल्ट का प्रतीक Co लिखा जाता है (न कि CO, क्योंकि CO कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का सूत्र बन जाएगा)। इसी तरह सोडियम का Na और कैल्सीयम का Ca लिखा जाता है।
- एक-अक्षर प्रतीक: हाइड्रोजन के लिए ‘H’ और कार्बन के लिए ‘C’ जैसे तत्वों के प्रतीक केवल एक बड़े अक्षर में लिखे जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B): दोनों लोवरकेस (छोटे) अक्षरों का उपयोग करना IUPAC नियमों के विरुद्ध है।
- विकल्प (C): रासायनिक तत्वों के मानक प्रतीकों को लिखने के लिए वर्णमाला के अक्षरों का प्रयोग होता है, संख्यात्मक कूटों (Numerical codes) का नहीं।
- विकल्प (D): दोनों अक्षर सदैव अपरकेस (बड़े) होने पर वह दो अलग-अलग तत्वों का संयोजन या यौगिक प्रतीत हो सकता है (जैसे CO कार्बन और ऑक्सीजन का मिश्रण)।
#58. पौधों के तनों में वलयों के निर्माण और जड़ों की वृद्धि में कौन से ऊतक सहायक होते हैं?
(RPF Constable 2018 24 Jan 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (A) पार्श्व विभज्योतक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem): यह ऊतक पौधों के तनों और जड़ों के पार्श्व (किनारों या परिधि) में पाया जाता है। इसके विभाजन से पौधे की मोटाई या गोलाई (द्वितीयक वृद्धि / Secondary Growth) बढ़ती है और तनों में संवहन वलयों का निर्माण होता है।
- कैम्बियम की भूमिका: संवहन कैम्बियम (Vascular Cambium) और कॉर्क कैम्बियम (Cork Cambium) पार्श्व विभज्योतक के प्रमुख उदाहरण हैं जो तने और जड़ की मोटाई में वृद्धि करते हैं।
- अन्य विभज्योतक: शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem) लंबाई बढ़ाता है, जबकि अंतःविभज्योतक (Intercalary Meristem) पर्वों (Internodes) की लंबाई में वृद्धि के लिए उत्तरदायी होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) पेरिसाइकिल (Pericycle): यह जड़ या तने के संवहन बंडलों के बाहर की एक परत है जो पार्श्व जड़ों के विकास में मदद करती है, लेकिन तने के वलय निर्माण और मोटाई के लिए मुख्य रूप से पार्श्व विभज्योतक जिम्मेदार होता है।
- विकल्प (C) शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ों और तनों के शीर्ष (Agex) पर पाया जाता है और पौधे की लंबाई (प्राथमिक वृद्धि) को बढ़ाता है, मोटाई को नहीं।
- विकल्प (D) अंतःविभज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार पर या पर्वों के बीच पाया जाता है जो घास आदि की लंबाई बढ़ाने में सहायक है।
#59. क्लोर-क्षार प्रक्रिया में कौन-सा उत्पाद बनता है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) सोडियम हाइड्रोक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali Process): जब सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन / Brine) से विद्युत प्रवाहित की जाती है, तो यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$) बनाता है।
- उत्पादित गैसें: इस प्रक्रिया में एनोड पर क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) मुक्त होती है।
- नाम का कारण: इस प्रक्रिया का नाम ‘क्लोर-क्षार’ इसलिए पड़ा है क्योंकि इसमें बनने वाले मुख्य उत्पाद क्लोरीन (‘क्लोर’) और सोडियम हाइड्रोक्साइड (‘क्षार/Alkali’) हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) खाने का सोडा: इसे सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{NaHCO}_3$) कहते हैं, जिसका निर्माण सॉल्वे विधि द्वारा होता है, न कि क्लोर-क्षार प्रक्रिया से।
- विकल्प (B) धावन सोडा: इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) है, जो अलग विधि से बनता है।
- विकल्प (D) सोडियम क्लोराइड: यह क्लोर-क्षार प्रक्रिया का मुख्य **अभिकारक (Reactant या कच्चा माल)** है, न कि इस प्रक्रिया में बनने वाला उत्पाद।
#60. हीरे और ग्रेफाइट की विद्युत चालकता में अंतर इसलिए उत्पन्न होता है क्योंकि _________ ।
(RRB Technician Grade III 10/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) ग्रेफाइट में इलेक्ट्रॉन स्थानीयकृत होते हैं; हीरे में नहीं
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संरचना और इलेक्ट्रॉन: ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध बनाता है, जिससे इसका चौथा इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र या विस्थापित (Delocalized) रूप में परतों के बीच गति करने के लिए फ्री रहता है। इसके विपरीत, हीरे में कार्बन के चारों संयोजी इलेक्ट्रॉन मजबूत बंधों में पूरी तरह बंधे होते हैं।
- विद्युत चालकता: मुक्त या गतिशील इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है, जबकि हीरे में कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन न होने के कारण यह विद्युत का कुचालक होता है।
- अपररूपता (Allotropy): हीरा और ग्रेफाइट दोनों कार्बन के क्रिस्टलीय अपररूप हैं, जिनकी अलग-अलग त्रि-आयामी व परतदार संरचनाओं के कारण उनके भौतिक और विद्युत गुणों में भिन्नता होती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B): हीरे या ग्रेफाइट में किसी भी प्रकार का धात्विक आबंध (Metallic bond) नहीं पाया जाता, बल्कि दोनों में सहसंयोजक आबंध होते हैं।
- विकल्प (C): हीरे की संरचना में आयन नहीं बल्कि सहसंयोजक रूप से जुड़े उदासीन कार्बन परमाणु होते हैं।
- विकल्प (D): यह कथन गलत है क्योंकि हीरे में कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं पाया जाता है, जबकि ग्रेफाइट में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं।
#61. कार्बन के यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध होते हैं, उन्हें _________ कहा जाता है。
(RRB Technician Grade III : 26 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) संतृप्त यौगिक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संतृप्त यौगिक (Saturated Compounds): वे कार्बन यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल **एकल आबंध (Single bonds)** पाए जाते हैं, उन्हें संतृप्त हाइड्रोकार्बन या यौगिक कहा जाता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण **एल्केन (Alkanes)** श्रेणी है (जैसे मीथेन $\text{CH}_4$, एथेन $\text{C}_2\text{H}_6$ आदि)।
- रासायनिक स्थिरता: एकल आबंध वाले ये यौगिक सामान्य परिस्थितियों में अपेक्षाकृत कम क्रियाशील (More stable) होते हैं क्योंकि इनकी संयोजकता पूरी तरह संतुष्ट होती है।
- असंतृप्त यौगिक: इसके विपरीत, जिन कार्बन यौगिकों में कार्बन-कार्बन के बीच द्विआबंध (Double bond) या त्रिआबंध (Triple bond) होते हैं, उन्हें **असंतृप्त यौगिक** (जैसे एल्कीन और एल्काइन) कहा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) आयनिक यौगिक: कार्बन यौगिक मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण से **सहसंयोजक बंध (Covalent bonds)** बनाते हैं, न कि आयनिक बंध।
- विकल्प (B) असंतृप्त यौगिक: असंतृप्त यौगिक वे होते हैं जिनमें द्वि या त्रि आबंध (Double/Triple bonds) पाए जाते हैं, एकल आबंध वाले नहीं।
- विकल्प (C) आयनिक और संतृप्त दोनों यौगिक: यह विकल्प पूरी तरह गलत है क्योंकि कार्बन यौगिक आयनिक नहीं बल्कि सहसंयोजक प्रकृति के होते हैं।
#62. वह कौन सा पदार्थ है जो उत्प्रेरक की प्रतिक्रिया को बढ़ाता है?
(RPF SI 2018 : 16 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) प्रवर्धक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उत्प्रेरक प्रवर्धक (Catalytic Promoter): वे पदार्थ जो स्वयं तो उत्प्रेरक नहीं होते, लेकिन किसी रासायनिक अभिक्रिया में **उत्प्रेरक की कार्यक्षमता (प्रतिक्रिया या सक्रियता) को बढ़ा देते हैं**, उन्हें ‘प्रवर्धक’ या ‘उत्प्रेरक वर्धक’ (Promoter) कहा जाता है।
- उदाहरण: जैसे – हैबर विधि (Haber’s process) द्वारा अमोनिया के निर्माण में **लोहा (Fe)** उत्प्रेरक का कार्य करता है, और **मोलिब्डेनम (Mo)** उस उत्प्रेरक की क्षमता को बढ़ाने वाले प्रवर्धक के रूप में कार्य करता है।
- उत्प्रेरक (Catalyst): उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया के वेग को परिवर्तित कर देता है लेकिन स्वयं अभिक्रिया में अपरिवर्तित रहता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) प्रोत्साहन: यह रसायन विज्ञान में कोई मानक वैज्ञानिक परिभाषा या तकनीकी शब्द नहीं है।
- विकल्प (C) विष (Catalytic Poison): यह वह पदार्थ है जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को **घटा या समाप्त** कर देता है, न कि बढ़ाता है।
- विकल्प (D) अवशोषक (Absorbent): यह गैसों या द्रवों को अपने अंदर सोखने वाला पदार्थ है, जिसका उत्प्रेरक की प्रतिक्रिया बढ़ाने से सीधा संबंध नहीं है।
#63. गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा को संयुक्त रूप से ऊर्जा का कौन-सा रूप कहा जाता है?
(RRB ALP CBT-II Fitter : 02 May, 2025 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) यांत्रिक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy): किसी वस्तु में उसकी गति (गतिज ऊर्जा / Kinetic Energy) तथा उसकी स्थिति या विन्यास (स्थितिज ऊर्जा / Potential Energy) के कारण संचित कुल ऊर्जा को संयुक्त रूप से यांत्रिक ऊर्जा कहा जाता है।
- सूत्र: $E_{\text{mechanical}} = KE + PE$ (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग)।
- संरक्षण का नियम: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, यदि किसी निकाय पर केवल conservative forces कार्य कर रहे हों, तो उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत (Constant) रहती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) रासायनिक ऊर्जा: यह पदार्थों के रासायनिक बंधों में संचित ऊर्जा होती है, न कि गतिज और स्थितिज ऊर्जा का संयोजन।
- विकल्प (C) आयनिक ऊर्जा: यह भौतिकी में ऊर्जा का कोई मुख्य यांत्रिक प्रकार नहीं है, बल्कि यह रसायन विज्ञान से संबंधित शब्द है।
- विकल्प (D) नाभिकीय ऊर्जा: यह परमाणु के नाभिक के भीतर न्यूक्लियॉन्स के बीच के बलों से संबंधित ऊर्जा होती है।
#64. लंबे समय तक हवा के संपर्क में रहने पर चांदी की बनी वस्तुएं काली हो जाती हैं। यह घटना _________ के बनने के कारण होती है
。(RRB JE ME 19 Sep 2019 Shift 2 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (B) Ag2S
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- चांदी का काला पड़ना (Tarnishing of Silver): जब चांदी (Silver) की वस्तुएं लंबे समय तक हवा के संपर्क में रहती हैं, तो हवा में मौजूद सल्फर यौगिकों (जैसे हाइड्रोजन सल्फाइड गैस $\text{H}_2\text{S}$) के साथ अभिक्रिया करके चांदी की सतह पर सिल्वर सल्फाइड ($\text{Ag}_2\text{S}$) की एक काली परत बना लेती हैं।
- रासायनिक अभिक्रिया: $4\text{Ag} + 2\text{H}_2\text{S} + \text{O}_2 \rightarrow 2\text{Ag}_2\text{S} + 2\text{H}_2\text{O}$
- संक्षारण का उदाहरण: यह धातुओं के संक्षारण (Corrosion) का एक सामान्य उदाहरण है, ठीक वैसे ही जैसे लोहे पर जंग लगना या तांबे पर हरे रंग की परत चढ़ना।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) Ag2SO3: यह सिल्वर सल्फाइट का सूत्र है, जो हवा में चांदी के काले होने के लिए उत्तरदायी नहीं है।
- विकल्प (C) Ag2O: यह सिल्वर ऑक्साइड का सूत्र है। सामान्य वायुमंडल में चांदी के काले होने का मुख्य कारण सिल्वर ऑक्साइड नहीं बल्कि सल्फर के साथ क्रिया करके $\text{Ag}_2\text{S}$ बनना है।
- विकल्प (D) Ag3N: यह सिल्वर नाइट्राइड का सूत्र है, जो एक विस्फोटक यौगिक है और इसका हवा में चांदी के संक्षारण से कोई संबंध नहीं है।
#65. ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक सूत्र क्या होता है?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 3 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) CaOCl2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) का रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड (Calcium oxychloride) है और इसका रासायनिक सूत्र CaOCl2 होता है।
- निर्माण विधि: इसे शुष्क बुझे हुए चूने [Ca(OH)2] पर क्लोरीन गैस की क्रिया कराकर बनाया जाता है। समीकरण: $\text{Ca(OH)}_2 + \text{Cl}_2 \rightarrow \text{CaOCl}_2 + \text{H}_2\text{O}$
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग वस्त्र उद्योग में कपास व लीनेन के विरंजन के लिए, कागज कारखानों में लकड़ी की लुगदी के विरंजन के लिए, और पीने वाले पानी को रोगाणुमुक्त (Disinfectant) करने में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CaCl2: यह कैल्शियम क्लोराइड का सूत्र है, जो ब्लीचिंग पाउडर नहीं है।
- विकल्प (C) CCl4: यह कार्बन टेट्राक्लोराइड का सूत्र है, जो एक कार्बनिक विलायक (Solvent) है।
- विकल्प (D) Ca(OH)2: यह कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (बुझा हुआ चूना / Slaked lime) का सूत्र है, जिसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
#66. दी गई अभिक्रिया में, निम्नलिखित में से किस अभिकारक का ऑक्सीकरण होता है?PbO + H 2 → Pb + H 2 O
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) H2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऑक्सीकरण (Oxidation): रासायनिक अभिक्रियाओं में जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का योग होता है (या हाइड्रोजन का निष्कासन होता है), तो उसे ऑक्सीकरण कहते हैं।
- अभिक्रिया का विश्लेषण: दी गई अभिक्रिया ($\text{PbO} + \text{H}_2 \rightarrow \text{Pb} + \text{H}_2\text{O}$) में, हाइड्रोजन ($\text{H}_2$) ऑक्सीजन को ग्रहण करके जल ($\text{H}_2\text{O}$) में बदल जाता है, इसलिए $\text{H}_2$ का ऑक्सीकरण होता है।
- अपचयन (Reduction): इस प्रक्रिया में लेड ऑक्साइड ($\text{PbO}$) ऑक्सीजन का त्याग करके लेड ($\text{Pb}$) में अपचित (Reduce) हो जाता है। ऐसी अभिक्रियाओं को रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) Pb: यह अभिक्रिया का उत्पाद है, अभिकारक नहीं जिसका ऑक्सीकरण हुआ हो।
- विकल्प (B) PbO: लेड ऑक्साइड का ऑक्सीकरण नहीं बल्कि अपचयन होता है क्योंकि यह ऑक्सीजन खोता है।
- विकल्प (C) H2O: यह ऑक्सीकरण के परिणामस्वरूप बनने वाला उत्पाद है, न कि अभिकारक।
#67. निम्नलिखित में से कौन-सा अन्य की तुलना में समजात यौगिक नहीं है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) C6H5OH
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- समजात श्रेणी (Homologous Series): यौगिकों की ऐसी श्रृंखला जिसमें सभी सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह (-OH) होता है और लगातार दो सदस्यों के बीच $-\text{CH}_2-$ समूह का अंतर होता है, उन्हें समजात यौगिक कहते हैं।
- विकल्पों का विश्लेषण: $\text{CH}_3\text{OH}$ (मेथेनॉल), $\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}$ (एथेनॉल) और $\text{C}_3\text{H}_7\text{OH}$ (प्रोपेनॉल) एलिफैटिक अल्कोहल की एक ही समजात श्रेणी के सदस्य हैं, जिनका सामान्य सूत्र $\text{C}_n\text{H}_{2n+1}\text{OH}$ है।
- फीनॉल ($\text{C}_6\text{H}_5\text{OH}$): यह एक एरोमैटिक यौगिक (बेन्जीन रिंग से जुड़ा $-\text{OH}$ समूह) है, इसलिए यह इस एलिफैटिक समजात श्रेणी का हिस्सा नहीं है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सही क्यों हैं?):
- विकल्प (A) CH3OH: यह इस समजात श्रेणी का पहला सदस्य (मेथेनॉल) है।
- विकल्प (B) C2H5OH: यह श्रेणी का दूसरा सदस्य (एथेनॉल) है, जो पहले सदस्य से $-\text{CH}_2-$ इकाई से भिन्न है।
- विकल्प (C) C3H7OH: यह श्रेणी का तीसरा सदस्य (प्रोपेनॉल) है, जो इसी समजात श्रेणी का भाग है।
#68. पिता से X गुणसूत्र ले जाने वाले शुक्राणु से पैदा होने वाले बच्चे का आनुवंशिक संगठन होगा
:(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) 44+XX
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मानव गुणसूत्र संरचना: सामान्य मनुष्य की प्रत्येक कोशिका में कुल 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं, जिनमें 44 ऑटोसोम (कायिक गुणसूत्र) और 2 लिंग गुणसूत्र (Sex chromosomes) शामिल होते हैं।
- युग्मन और निषेचन: माता का अंडाणु हमेशा ($22 + \text{X}$) गुणसूत्र प्रदान करता है। यदि पिता से आने वाले शुक्राणु में भी $\text{X}$ गुणसूत्र ($22 + \text{X}$) हो, तो दोनों के मिलने से बनने वाले बच्चे का आनुवंशिक संगठन $44 + \text{XX}$ (कुल 46) होगा।
- लिंग निर्धारण: यह $44 + \text{XX}$ संयोजन एक बालिका (Female) के जन्म को सुनिश्चित करता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) 46+XY: यह संख्या और लिंग गुणसूत्रों दोनों के आधार पर गलत है, क्योंकि इसमें ऑटोसोम की संख्या गलत दी गई है।
- विकल्प (C) 46+XX: इसमें 46 ऑटोसोम दर्शाए गए हैं, जिससे कुल गुणसूत्र 48 हो जाएंगे जो मानव आनुवंशिकी के अनुसार गलत है।
- विकल्प (D) 44+XY: यह एक बालक (Male) का आनुवंशिक संगठन है, जो तब बनता है जब पिता से $\text{Y}$ गुणसूत्र वाला शुक्राणु आता है।
#69. _________ अयस्क को वर्जन की प्रक्रिया द्वारा उनके संबंधित ऑक्साइडों में परिवर्तित किया जाता है。
(RRB Level 01 Stage I 02/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) सल्फाइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- वर्जन (Roasting): वर्जन वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें सल्फाइड अयस्क को वायु (ऑक्सीजन) की प्रचुर मात्रा में उसके गलनांक बिंदु से कम तापमान पर तीव्रता से गर्म किया जाता है, जिससे वह धातु ऑक्साइड में बदल जाता है।
- रासायनिक समीकरण का उदाहरण: $2\text{ZnS} + 3\text{O}_2 \xrightarrow{\Delta} 2\text{ZnO} + 2\text{SO}_2$ (यहाँ जिंक ब्लेंड/सल्फाइड अयस्क से जिंक ऑक्साइड बनता है)।
- अन्य प्रक्रिया (निस्थापन/Calcination): इसके विपरीत, कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए सीमित वायु में गर्म किया जाता है, जिसे निस्थापन (Calcination) कहते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कार्बोनेट: कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए ‘निस्थापन’ (Calcination) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है, वर्जन का नहीं।
- विकल्प (B) सल्फाइट: यह धातु निष्कर्षण में मुख्य अयस्क का प्रकार नहीं है, बल्कि धातु विज्ञान में सल्फाइड ($\text{S}^{2-}$) अयस्कों का वर्जन किया जाता है।
- विकल्प (C) क्लोराइड: क्लोराइड अयस्कों को आमतौर पर ऑक्साइड में बदलने के लिए वर्जन या निस्थापन के बजाय सीधे विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा अपचित किया जाता है।
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