Chemical Bonding MCQ in Hindi
#1. वह प्रकाऱ्यात्मक समूह जिसमें ऑक्सीजन विषम परमाणु ( oxygen hetero atom) नहीं होता है, ________ है।
(RRB Level 01 Stage I 27/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (C) हैलो ऐल्केन ( halo alkane)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- विषम परमाणु (Heteroatom) की परिभाषा: कार्बन और हाइड्रोजन के अलावा अन्य किसी भी परमाणु (जैसे- ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हैलोजन आदि) को कार्बनिक रसायन में विषम परमाणु कहा जाता है।
- हैलोऐल्केन की संरचना: हैलोऐल्केन ($-X$, जहाँ $X = F, Cl, Br, I$) में विषम परमाणु के रूप में हैलोजन उपस्थित होता है, न कि ऑक्सीजन।
- अन्य विकल्पों में ऑक्सीजन की उपस्थिति: कीटोन ($\text{>C=O}$), ऐल्कोहॉल ($\text{-OH}$) और कार्बोक्सिलिक अम्ल ($\text{-COOH}$) तीनों में ही मुख्य क्रियात्मक समूह के रूप में ऑक्सीजन विषम परमाणु अनिवार्य रूप से मौजूद होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कीटोन: इसमें कार्बोनिल समूह ($\text{>C=O}$) होता है, जिसमें ऑक्सीजन परमाणु उपस्थित होता है।
- विकल्प (B) ऐल्कोहॉल: इसमें हाइड्रॉक्सिल समूह ($\text{-OH}$) होता है, जिसमें ऑक्सीजन परमाणु उपस्थित होता है।
- विकल्प (D) कार्बोक्सिलिक अम्ल: इसमें कार्बोक्सिल समूह ($\text{-COOH}$) होता है, जिसमें दो ऑक्सीजन परमाणु उपस्थित होते हैं।
#2. असंतृप्त कार्बन यौगिक का सुस्पष्ट अभिलक्षण क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) इसमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि या त्रि-आबंध होता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- असंतृप्त यौगिकों की परिभाषा: वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन-कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक द्वि-आबंध (Double Bond) या त्रि-आबंध (Triple Bond) उपस्थित होता है, असंतृप्त कार्बन यौगिक (जैसे एल्कीन और एल्काइन) कहलाते हैं।
- रासायनिक सक्रियता: बहुआबंध (Multiple bonds) की उपस्थिति के कारण ये यौगिक संतृप्त यौगिकों की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील (Reactive) होते हैं और आसानी से योगात्मक अभिक्रियाएँ (Addition reactions) देते हैं।
- प्रमुख उदाहरण: एथीन ($\text{C}_2\text{H}_4$) और एथाइन ($\text{C}_2\text{H}_2$) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के बेहतरीन उदाहरण हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B): असंतृप्त यौगिकों में ऑक्सीजन का होना अनिवार्य नहीं है; हाइड्रोकार्बन (जैसे एथीन) में केवल कार्बन और हाइड्रोजन होते हैं।
- विकल्प (C): सभी कार्बन परमाणुओं का केवल एकल आबंधों (Single bonds) द्वारा जुड़े होना संतृप्त कार्बन यौगिकों (जैसे एल्केन) का प्रमुख लक्षण है।
- विकल्प (D): असंतृप्त यौगिक केवल चक्रीय (Cyclic) ही नहीं, बल्कि सीधी या शाखित खुली श्रृंखला (Open-chain) वाले भी हो सकते हैं।
#3. जब कॉपर ऑक्साइड युक्त बीकर में थोड़ी मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है, तो कौन सा यौगिक बनता है?
(RRB Technician Grade III : 28 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) कॉपर ( II ) क्लोराइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) मिलाया जाता है, तो कॉपर (II) क्लोराइड ($\text{CuCl}_2$) और जल बनते हैं। रासायनिक समीकरण: $\text{CuO} + 2\text{HCl} \rightarrow \text{CuCl}_2 + \text{H}_2\text{O}$
- विलयन का रंग: इस अभिक्रिया के दौरान बीकर में विलयन का रंग बदलकर नीला-हरा (Blue-Green) हो जाता है, जो $\text{Cu}^{2+}$ आयनों की उपस्थिति के कारण होता है।
- ऑक्सीकरण अवस्था: इस यौगिक में कॉपर $+2$ ऑक्सीकरण अवस्था में रहता है, इसलिए आईयूपीएसी (IUPAC) नामकरण के अनुसार इसे कॉपर (II) क्लोराइड कहा जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कॉपर ( III ) क्लोराइड: कॉपर की सामान्य और स्थिर संयोजकता $+1$ और $+2$ होती है, $+3$ अवस्था का यह यौगिक सामान्य परिस्थितियों में नहीं बनता।
- विकल्प (C) कॉपर ( IV ) क्लोराइड: यह एक अमान्य और रासायनिक रूप से इस अभिक्रिया में अनुपयुक्त यौगिक है।
- विकल्प (D) कॉपर ( I ) क्लोराइड: इसे कप्रस क्लोराइड ($\text{CuCl}$) कहते हैं, जो कॉपर (I) ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया से बनता है, जबकि मानक कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) कॉपर (II) लवण का निर्माण करता है।
#4. निम्नलिखित में से किस युग्म की संयोजकता समान है?
(Not found 11/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) सोडियम और क्लोरीन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संयोजकता (Valency) की परिभाषा: किसी तत्व की संयोजकता उसके परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की त्यागने, ग्रहण करने या साझा करने की क्षमता को दर्शाती है।
- सोडियम और क्लोरीन की संयोजकता: सोडियम (Na) का परमाणु क्रमांक 11 है (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1) और यह 1 इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है, अतः इसकी संयोजकता 1 होती है। वहीं, क्लोरीन (Cl) का परमाणु क्रमांक 17 है (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7) और इसे अष्टक पूरा करने के लिए 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है, अतः इसकी भी संयोजकता 1 होती है।
- यौगिक निर्माण: समान संयोजकता होने के कारण ये दोनों आपस में 1:1 के अनुपात में मिलकर सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण करते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन: हाइड्रोजन की संयोजकता 1 होती है, जबकि ऑक्सीजन की संयोजकता 2 होती है।
- विकल्प (C) ऑक्सीजन और एल्यूमीनियम: ऑक्सीजन की संयोजकता 2 होती है, जबकि एल्यूमीनियम (Al) की संयोजकता 3 होती है।
- विकल्प (D) कार्बन और नाइट्रोजन: कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जबकि सामान्यतः नाइट्रोजन की संयोजकता 3 होती है।
#5. प्रतिस्थापन अभिक्रिया में ________________ शामिल होता है।
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) एक परमाणु या परमाणुओं के समूह को दूसरे से प्रतिस्थापित किया जाना
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्रतिस्थापन अभिक्रिया की परिभाषा: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी यौगिक (विशेषकर संतृप्त हाइड्रोकार्बन) का एक परमाणु या परमाणुओं का समूह किसी अन्य परमाणु या समूह द्वारा हटाकर उसकी जगह ले लेता है, प्रतिस्थापन (Substitution) अभिक्रिया कहलाती है।
- प्रमुख उदाहरण: सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में मेथेन ($\text{CH}_4$) और क्लोरीन ($\text{Cl}_2$) की अभिक्रिया, जिसमें मेथेन का हाइड्रोजन परमाणु क्लोरीन द्वारा प्रतिस्थापित होकर क्लोरोमेथेन ($\text{CH}_3\text{Cl}$) बनाता है:
$\text{CH}_4 + \text{Cl}_2 \xrightarrow{\text{प्रकाश}} \text{CH}_3\text{Cl} + \text{HCl}$ - संतृप्त यौगिकों का गुण: यह संतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे एल्केन) का मुख्य रासायनिक गुण है, क्योंकि एकल आबंध वाले इन यौगिकों में सीधे योग संभव नहीं होता।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) दोहरे आबंध वाले अणुओं में परमाणुओं का जुड़ना: यह योगात्मक (Addition) अभिक्रिया का लक्षण है, जो असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन/एल्काइन) में होती है।
- विकल्प (C) कार्बन परमाणु का हाइड्रोजन परमाणु से प्रतिस्थापन: कार्बन श्रृंखला का मुख्य कार्बन परमाणु इस तरह सामान्य परिस्थितियों में विस्थापित नहीं होता।
- विकल्प (D) सरल अणुओं के निर्माण के लिए परमाणुओं को हटाना: यह विलोपन (Elimination) अभिक्रिया का लक्षण है।
#6. निम्नलिखित में से कौन एक कीटनाशक है?
(RRB JE 23 May 2019 Shift 1 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (A) DDT
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- DDT का परिचय: DDT का पूरा नाम डाइक्लोरोडाइफेनिलट्राइक्लोरोएथेन (Dichlorodiphenyltrichloroethane) है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक यौगिक है जिसका उपयोग मुख्य रूप से कृषि में कीटों को नियंत्रित करने और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को रोकने के लिए एक शक्तिशाली कीटनाशक (Insecticide) के रूप में किया जाता था।
- ऐतिहासिक महत्व: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसका बड़े पैमाने पर उपयोग टाइफाइड और मलेरिया जैसी बीमारियों को रोकने के लिए किया गया था।
- पर्यावरणीय प्रभाव: यह एक जैव-अनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) रसायन है, जो खाद्य श्रृंखला में जमा (Biomagnification) होकर पर्यावरण और जीवों को नुकसान पहुँचाता है, जिसके कारण कई देशों में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) TNT: इसका पूरा नाम ट्राइनाइट्रोटॉलूइन (Trinitrotoluene) है, जो एक प्रसिद्ध विस्फोटक (Explosive) है।
- विकल्प (C) HCL: यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Hydrochloric Acid) है, जो एक तीव्र अकार्बनिक अम्ल है।
- विकल्प (D) VCR: यह कैंसर के उपचार में काम आने वाली एक औषधि (Vincristine) या वीडियो कैसेट रिकॉर्डर (VCR) से संबंधित है, यह कीटनाशक नहीं है।
#7. निम्नलिखित में से कौन-सा, कार्बन के सर्वतोमुखी गुण ( versatility) का एक कारण नहीं है?
(RRB Technician Grade III 06/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) आयनिक आबंधों का निर्माण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (Versatility): कार्बन के अत्यधिक यौगिकों के निर्माण का मुख्य कारण उसकी विशिष्ट रासायनिक विशेषताएँ हैं, जो इसे प्रकृति में अनोखा बनाती हैं।
- सहसंयोजक आबंध (Covalent Bonding): कार्बन मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके मजबूत सहसंयोजक आबंध बनाता है, न कि आयनिक आबंध। आयनिक आबंधों का निर्माण कार्बन की प्रकृति नहीं है।
- प्रमुख कारण: शृंखलन (Catenation – लंबी श्रृंखला बनाने का गुण), चतुःसंयोजकता (Tetravalency – संयोजकता 4 होना) और एकल, द्वि व त्रि आबंध बनाने की क्षमता कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति के मुख्य कारण हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं? – यानी ये सर्वतोमुखी गुण के कारण हैं):
- विकल्प (A) शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं में आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखला, शाखित श्रृंखला या वलय बनाने का अद्भुत गुण होता है, जो इसके सर्वतोमुखी होने का एक प्रमुख कारण है।
- विकल्प (B) एकल, द्वि और त्रि आबंध बनाने की क्षमता: कार्बन ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन आदि के साथ एकल, द्वि और त्रि आबंध बनाकर विभिन्न प्रकार के यौगिक बना सकता है।
- विकल्प (C) चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिससे यह एक साथ चार अन्य परमाणु (या कार्बन) से जुड़ सकता है।
#8. कॉपर के वैद्युतअपघटनी परिष्करण के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला सबसे सामान्य वैद्युतअपघट्य, अम्लीकृत ________ का विलयन होगा।
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) कॉपर सल्फेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- वैद्युतअपघटनी परिष्करण (Electrolytic Refining): कॉपर (ताँबे) के शुद्धिकरण की इस प्रक्रिया में, अशुद्ध ताँबे को एनोड (Anode) और शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी को कैथोड (Cathode) बनाया जाता है।
- वैद्युतअपघट्य (Electrolyte): इस प्रक्रिया में वैद्युतअपघट्य के रूप में अम्लीकृत कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$) के जलीय विलयन का उपयोग किया जाता है, जिसमें थोड़ी मात्रा में तनु सल्फ्यूरिक अम्ल मिलाया जाता है ताकि चालकता बढ़ सके।
- अभिक्रिया की क्रियाविधि: विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से कॉपर आयन ($\text{Cu}^{2+}$) वैद्युतअपघट्य से होते हुए कैथोड पर जाकर जमा हो जाते हैं, जिससे शुद्ध कॉपर प्राप्त होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कॉपर ऑक्साइड: यह जल में अघुलनशील होता है और वैद्युतअपघटनी परिष्करण में वैद्युतअपघट्य के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता।
- विकल्प (B) कॉपर कार्बोनेट: यह भी पानी में व्यावहारिक रूप से अघुलनशील होता है, इसलिए इसका उपयोग मानक औद्योगिक परिष्करण में नहीं होता।
- विकल्प (C) कॉपर क्लोराइड: हालांकि यह घुलनशील है, लेकिन मानक और व्यावसायिक कॉपर परिष्करण प्रक्रियाओं में अम्लीकृत कॉपर सल्फेट का ही उपयोग सर्वमान्य रूप से किया जाता है।
#9. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ बनता है जब कार्बन डाइऑक्साइड कैल्शियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है?
(RRB ALP CBT-I 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) कैल्शियम कार्बोनेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) को चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, $\text{Ca(OH)}_2$) में प्रवाहित किया जाता है, तो यह अभिक्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) का श्वेत अवक्षेप बनाता है, जिससे विलयन का रंग दूधिया हो जाता है।
- रासायनिक समीकरण:
$\text{Ca(OH)}_2\text{ (aq)} + \text{CO}_2\text{ (g)} \rightarrow \text{CaCO}_3\text{ (s)} \downarrow + \text{H}_2\text{O}\text{ (l)}$ - परीक्षण (Test): यह अभिक्रिया प्रयोगशाला में कार्बन डाइऑक्साइड गैस की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए एक मानक परीक्षण के रूप में उपयोग की जाती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) कार्बन मोनोऑक्साइड: यह कार्बन का एक अन्य ऑक्साइड ($\text{CO}$) है, जो इस सामान्य कार्बोनीकरण अभिक्रिया में नहीं बनता।
- विकल्प (B) मीथेन: यह एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन ($\text{CH}_4$) है, जिसका इस अकार्बनिक अम्ल-क्षार जैसी अभिक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
- विकल्प (C) कैल्शियम ऑक्साइड: इसे बिना बुझा चूना ($\text{CaO}$) कहते हैं, जो इसके विपरीत कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म करने पर प्राप्त होता है, न कि इस अभिक्रिया से।
#10. जब मैग्नीशियम, ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(RRB JE 20/02/2026 )
✨ सही उत्तर (जो कथन सही नहीं है): (B) मैग्नीशियम इलेक्ट्रॉन त्यागकर Mg3+ आयन बनाता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मैग्नीशियम की संयोजकता: मैग्नीशियम (Mg) का परमाणु क्रमांक 12 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $2, 8, 2$ होता है। अपने बाह्यतम कोश का अष्टक पूरा करने के लिए यह 2 इलेक्ट्रॉन त्यागता है, जिससे इस पर $+2$ आवेश आता है और यह $\text{Mg}^{2+}$ आयन बनाता है।
- आयनिक यौगिक का निर्माण: मैग्नीशियम द्वारा त्यागे गए दो इलेक्ट्रॉनों को ऑक्सीजन परमाणु ग्रहण करके $\text{O}^{2-}$ आयन बनाता है। इसके बाद विपरीत आवेशित आयनों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल के कारण आयनिक आबंध ($\text{MgO}$) बनता है।
- अतः कथन (B) गलत है: मैग्नीशियम कभी भी $\text{Mg}^{3+}$ आयन नहीं बनाता क्योंकि इसकी संयोजकता $+3$ नहीं होती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये कथन सही हैं, इसलिए उत्तर नहीं हैं):
- विकल्प (A): मैग्नीशियम दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर $\text{Mg}^{2+}$ बनाता है, जो कि बिल्कुल सही कथन है।
- विकल्प (C): मैग्नीशियम ऑक्साइड ($\text{MgO}$) एक आयनिक यौगिक है जिसमें आयनिक आबंध होते हैं, यह भी सही है।
- विकल्प (D): ऑक्सीजन परमाणु दो इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके $\text{O}^{2-}$ ऑक्साइड आयन बनाता है, यह भी सत्य कथन है।
#11. दी गई समीकरण में किस पद का अपचयन होता है? ZnO + C → Zn + CO
(RRB Technician Grade III : 30 Dec, 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (A) ZnO
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अपचयन (Reduction) की परिभाषा: किसी रासायनिक अभिक्रिया में ऑक्सीजन का ह्रास (Loss of oxygen) या हाइड्रोजन का जुड़ना अपचयन कहलाता है।
- अभियांत्रिकी विश्लेषण: दी गई समीकरण $\text{ZnO} + \text{C} \rightarrow \text{Zn} + \text{CO}$ में जिंक ऑक्साइड ($\text{ZnO}$) से ऑक्सीजन निकलकर वह केवल जिंक ($\text{Zn}$) में बदल जाता है, जिसका अर्थ है कि $\text{ZnO}$ का अपचयन (Reduction) हुआ है।
- ऑक्सीकरण: इस अभिक्रिया में कार्बन ($\text{C}$) के साथ ऑक्सीजन जुड़कर कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) बनाता है, अतः कार्बन का ऑक्सीकरण हुआ है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) CO: यह उत्पाद के रूप में बनता है, इसका अपचयन नहीं होता बल्कि यह ऑक्सीकरण के फलस्वरूप बनता है।
- विकल्प (C) Zn: जिंक उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है, यह वह तत्व है जिसमें $\text{ZnO}$ के अपचयन के बाद धातु प्राप्त होती है।
- विकल्प (D) C: कार्बन ($\text{C}$) का इस अभिक्रिया में ऑक्सीकरण होता है क्योंकि इसके साथ ऑक्सीजन जुड़ती है।
#12. कौन-सा रासायनिक सूत्र ब्लीचिंग पाउडर को निरूपित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) Ca(ClO)2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक नाम और सूत्र: ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) का रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड ($\text{CaOCl}_2$) या कैल्शियम हाइपोक्लोराइड ($\text{Ca(ClO)}_2$) है।
- निर्माण की विधि: इसे शुष्क बुझे हुए चूने ($\text{Ca(OH)}_2$) पर क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) की प्रतिक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है।
- प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग वस्त्र उद्योग में सूती कपड़ों के विरंजन, कागज कारखानों में लकड़ी के मज्जा के विरंजन तथा पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करने (कीटाणुनाशक के रूप में) के लिए किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{Ca}_2(\text{ClO})_2$: यह संयोजकता के नियमों के अनुसार एक अमान्य रासायनिक सूत्र है।
- विकल्प (C) $\text{Ca(ClO}_2)_2$: यह कैल्शियम क्लोराइट ($\text{Calcium chlorite}$) का सूत्र है, जो विरंजक चूर्ण नहीं है।
- विकल्प (D) $\text{Ca(ClO}_2$): यह सूत्र रासायनिक रूप से संतुलित या मान्य यौगिक को नहीं दर्शाता है।
#13. निम्नलिखित में से कौन सी घटना तब होती है, जब जल में थोड़ी मात्रा में अम्ल मिलाया जाता है?
(RRB JE 23 May 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) आयनन और तनुकरण दोनों
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आयनन (Ionization): जब किसी अम्ल को जल में घोला जाता है, तो वह अपने घटक आयनों ($\text{H}^+$ या हाइड्रोनियम आयन $\text{H}_3\text{O}^+$ और ऋणायन) में विभाजित हो जाता है, जिसे आयनन कहते हैं।
- तनुकरण (Dilution): जल में अम्ल मिलाने पर प्रति इकाई आयतन में हाइड्रोनियम या हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता में कमी आ जाती है, जिसे तनुकरण कहा जाता है।
- ऊष्माक्षेपी प्रकृति: अम्ल का जल में मिलाया जाना एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है, जिसमें सुरक्षा की दृष्टि से हमेशा अम्ल को धीरे-धीरे पानी में मिलाया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये अकेले क्यों पूर्ण नहीं हैं?):
- विकल्प (A) तनुकरण: केवल तनुकरण मानना सही है लेकिन यह प्रक्रिया का केवल एक पहलू बताता है, क्योंकि आयनन भी साथ-साथ होता है।
- विकल्प (C) उदासीनीकरण: यह अम्ल और क्षार की परस्पर अभिक्रिया है जिससे लवण और जल बनते हैं, न कि केवल जल में अम्ल मिलाने की घटना।
- विकल्प (D) आयनन: केवल आयनन भी सही घटना है, किंतु तनुकरण भी इसके साथ अनिवार्य रूप से घटित होता है, इसलिए दोनों का संयोजन वाला विकल्प सबसे सटीक है।
#14. उत्क्रम परासरण ________ का एक प्रकार है।
(RRB JE CE 28 Aug 2019 Shift 1 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (C) अनुप्रस्थ प्रवाह निस्यंदन प्रणाली
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- अनुप्रस्थ प्रवाह निस्यंदन (Cross-Flow Filtration): उत्क्रम परासरण (Reverse Osmosis – RO) एक विशिष्ट प्रकार की अनुप्रस्थ प्रवाह निस्यंदन प्रणाली है। इस विधि में पानी झिल्ली (Membrane) की सतह के समांतर बहता है, जिससे झिल्ली पर अशुद्धियों की परत नहीं जम पाती।
- कार्यप्रणाली: इसमें परासरण दाब से अधिक बाहरी दाब का उपयोग करके अर्धपारगम्य झिल्ली (Semi-permeable membrane) के माध्यम से विलायक (जल) को गुजारा जाता है, जबकि घुले हुए ठोस पदार्थ और दूषित कण पीछे छूट जाते हैं और बहकर बाहर निकल जाते हैं।
- निरंतर संचालन: क्रॉस-फ्लो प्रणाली होने के कारण यह झिल्ली को अवरुद्ध (Clog) होने से बचाती है और लंबे समय तक निरंतर रूप से जल शोधन का कार्य करती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सूक्ष्म निस्यंदन (Microfiltration): यह बड़े कणों और बैक्टीरिया को हटाने के लिए बड़े छिद्रों वाली झिल्ली का उपयोग करता है, जबकि RO अतिसूक्ष्म आयनों और अणुओं को अलग करता है।
- विकल्प (B) अंध अंत निस्यंदन प्रणाली (Dead-end filtration): इस प्रणाली में कण सीधे फिल्टर पर जमा होते हैं जो अंततः इसे ब्लॉक कर देते हैं, जबकि RO में निरंतर प्रवाह से ऐसा नहीं होता।
- विकल्प (D) आयन विनिमय विधि: यह रासायनिक रूप से राल (Resin) के माध्यम से आयनों का आदान-प्रदान करती है, जो कि दाब आधारित झिल्ली प्रक्रिया (RO) से भिन्न है।
#15. ________ जीवित कोशिकाओं में परमाणुओं को प्रभावित करता है और इस तरह उनके आनुवंशिक पदार्थ ( DNA) को नुकसान पहुँचाता है।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) आयनकारी विकिरण
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आयनकारी विकिरण (Ionizing Radiation): एक्स-रे ($\text{X-rays}$), गामा किरणें ($\text{Gamma rays}$) और अल्फा/बीटा कण जैसे आयनकारी विकिरण उच्च ऊर्जा वाले होते हैं। ये जीवित कोशिकाओं के संपर्क में आने पर परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन बाहर निकालकर उन्हें आयनित कर देते हैं।
- DNA पर प्रभाव: यह विकिरण कोशिकाओं के सबसे संवेदनशील आनुवंशिक पदार्थ—DNA (डिएक्सीराइबोक्लिक एसिड) के अणुओं पर सीधा आघात करता है या पानी के अणुओं के आयनीकरण से मुक्त मूलक (Free radicals) बनाकर DNA श्रृंखला को गंभीर क्षति पहुँचाता है।
- जैविक परिणाम: इस प्रकार की क्षति से कोशिकाओं में उत्परिवर्तन (Mutation), कैंसर या कोशिका मृत्यु (Cell death) जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) क्लोरीनयुक्त जल: यह मुख्य रूप से पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है, जो DNA को इस प्रकार सीधे आयनित नहीं करता।
- विकल्प (B) क्लोरोफॉर्म: यह एक कार्बनिक विलायक और निश्चेतक है, जिसका उच्च सांद्रता में यकृत या तंत्रिका तंत्र पर दुष्प्रभाव पड़ता है, लेकिन यह विकिरण की तरह परमाणुओं को सीधे प्रभावित नहीं करता।
- विकल्प (C) बेंजीन वाष्प: यह एक विषैला रसायन और संभावित कार्सिनोजन (कैंसरकारक) है, किंतु यह विकिरण आधारित आयनीकरण प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं आता।
#16. योगज अभिक्रिया में सामान्यतः क्या शामिल होता है?
(RRB Level 01 Stage I 04/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (C) परमाणु असंतृप्त आबंधों में जुड़ जाते हैं
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- योगज या योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction): यह असंतृप्त हाइड्रोਕਾਰ्बनों (जैसे एल्कीन और एल्काइन) का एक मुख्य गुण है। इसमें द्वि या त्रि-आबंध (Multiple bonds) वाले असंतृप्त यौगिकों में परमाणु या परमाणुओं का समूह जुड़कर उन्हें संतृप्त यौगिक में बदल देता है।
- प्रमुख उदाहरण: निकेल ($\text{Ni}$) या पैलेडियम ($\text{Pd}$) उत्प्रेरक की उपस्थिति में वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण, जिसमें हाइड्रोजन परमाणु असंतृप्त आबंधों में जुड़ जाते हैं।
- संतृप्तिकरण: इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बहुआबंध टूट जाते हैं और सभी कार्बन परमाणु केवल एकल आबंधों (Single bonds) द्वारा जुड़ जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): प्रकार्यात्मक समूहों का प्रतिस्थापन होना प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution reaction) का लक्षण है।
- विकल्प (B): अणुओं से परमाणुओं को हटाना विलोपन अभिक्रिया (Elimination reaction) कहलाता है।
- विकल्प (D): यह कथन रासायनिक योगज प्रक्रिया के वैज्ञानिक अर्थ से मेल नहीं खाता।
#17. कार्बन यौगिकों के वर्ग, जिन्हें डाइजोनियम यौगिकों या डाइजोनियम लवण के रूप में जाना जाता है, की विशेषता कौन सी सामान्य आणविक संरचना है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 11 Aug, 2025 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) R-N2 + X –
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ड라이언트 (Diazonium) यौगिकों की संरचना: डाइजोनियम लवण कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग है जिनका सामान्य सूत्र $\text{R-N}_2^+\text{X}^-$ होता है (जहाँ $\text{R}$ एक ऐरिल या ऐल्काइल समूह है और $\text{X}^-$ एक ऋणायन जैसे $\text{Cl}^-, \text{Br}^-, \text{HSO}_4^-$ आदि है)।
- डाइएजोटीकरण (Diazotisation): प्राथमिक ऐरोमैटिक एमीन (जैसे एनिलाइन) की नाइट्रस अम्ल के साथ कम तापमान ($0^\circ\text{C}$ से $5^\circ\text{C}$) पर अभिक्रिया कराने पर ये लवण बनते हैं।
- रासायनिक महत्व: ये यौगिक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होते हैं और विभिन्न प्रकार के芳 (Aromatic) यौगिकों, रंगों और औषधियों के संश्लेषण में मध्यवर्ती (Intermediate) के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{R-CEN}$ (या $\text{R-CN}$): यह साइनाइड या नाइट्राइल समूह की सामान्य संरचना है।
- विकल्प (C) $\text{R-C=NR’}$: यह इमीन (Imine) वर्ग के यौगिकों की संरचना को दर्शाता है।
- विकल्प (D) $\text{R-CO-NR’R”}$: यह एमाइड (Amide) समूह की सामान्य आणविक संरचना है।
#18. द्रव और ठोस पदार्थों का संपीड़न कठिन क्यों होता है? यह किस प्रकार के अंतराअणुक बलों के कारण होता है?
(RPF Constable 2024 : 12 Mar, 2025 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (D) प्रतिकर्षी बल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्रतिकर्षी बलों की भूमिका: द्रव और ठोस पदार्थों के कण (अणु या परमाणु) पहले से ही एक-दूसरे के बहुत पास और संकुलित (Packed) होते हैं। जब इन्हें और अधिक संपीड़ित (Compress) करने का प्रयास किया जाता है, तो इनके इलेक्ट्रॉन बादलों (Electron clouds) के बीच अतिव्यापन (Overlap) होने लगता है, जिससे एक मजबूत प्रतिकर्षी बल (Repulsive force) उत्पन्न होता है।
- आयतन का संरक्षण: यही शक्तिशाली प्रतिकर्षी अंतःक्रियाएँ पदार्थों को उनके निश्चित आयतन को बनाए रखने में मदद करती हैं और अत्यधिक संपीड़न का विरोध करती हैं।
- भौतिक गुण: यह बल किसी पदार्थ के घनत्व, लोच (Elasticity) और संपीड़्यता जैसे महत्वपूर्ण यांत्रिक गुणों को निर्धारित करता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) प्रकीर्णन बल / (B) लंदन बल: ये कमजोर आकर्षण बल होते हैं जो सभी अणुओं में मौजूद होते हैं, लेकिन ये ठोसों और द्रवों के संपीड़न का प्रतिरोध करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
- विकल्प (C) वानर वाल्स बल (Van der Waals forces): ये अणु के बीच आकर्षण के सामान्य और अपेक्षाकृत कमजोर बल होते हैं जो आसंजन या संसंजन में भूमिका निभाते हैं, न कि संपीड़न को रोकने में।
#19. समजातीय श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का एक ऐसा समूह है जिसमें होता है:
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (B) समान क्रियात्मक समूह लेकिन CH2 समूह से भिन्न
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- समजातीय श्रेणी (Homologous Series): कार्बनिक यौगिकों का वह समूह जिसमें एक ही जैसा क्रियात्मक समूह (Functional Group) होता है और लगातार दो सदस्यों के बीच $-\text{CH}_2-$ (मेथलीन) समूह का अंतर होता है, समजातीय श्रेणी कहलाता है।
- भौतिक और रासायनिक गुण: इस श्रेणी के सभी सदस्यों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं क्योंकि उनका क्रियात्मक समूह एक ही होता है, जबकि आणविक द्रव्यमान बढ़ने के साथ उनके भौतिक गुणों (जैसे क्वथनांक और घनत्व) में क्रमिक परिवर्तन देखा जाता है।
- प्रमुख उदाहरण: एल्कोहॉल श्रेणी ($\text{CH}_3\text{OH}, \text{C}_2\text{H}_5\text{OH}, \text{C}_3\text{H}_7\text{OH}$) इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ प्रत्येक क्रमिक सदस्य के बीच 14 u आणविक द्रव्यमान का अंतर होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) समान संरचनात्मक सूत्र: समजातीय श्रेणी के सदस्यों की श्रृंखला की लंबाई अलग-अलग होती है, इसलिए उनके संरचनात्मक सूत्र पूर्णतः समान नहीं होते।
- विकल्प (C) समान आणविक सूत्र: समान आणविक सूत्र वाले यौगिक समावयवी (Isomers) होते हैं, न कि समजातीय श्रेणी के अलग-अलग सदस्य।
- विकल्प (D) एक दूसरे से कोई संबंध नहीं: यह कथन पूरी तरह गलत है क्योंकि समजातीय श्रेणी के सभी सदस्य एक ही सामान्य सूत्र और समान रासायनिक गुणों से आपस में संबंधित होते हैं।
#20. कार्बन, आयनिक आबंधों के स्थान पर सहसंयोजक आबंध क्यों बनाता है?
(RRB Level 01 Stage I 08/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) यह 4 इलेक्ट्रॉनों का त्याग करने या ग्रहण करने के लिए ऊर्जावान रूप से प्रतिकूल होता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है, जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $2, 4$ होता है। अपना अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए इसे 4 इलेक्ट्रॉन या तो प्राप्त करने होंगे या त्यागने होंगे।
- ऊर्जा संबंधी बाधा (Energetic Unfavourability): यदि कार्बन 4 इलेक्ट्रॉन त्याग दे तो इसके नाभिक के लिए 6 प्रोटॉनों द्वारा केवल 2 इलेक्ट्रॉनों को संभालना अत्यधिक कठिन होगा (बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी)। वहीं, 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके $\text{C}^{4-}$ आयन बनाना भी 6 प्रोटॉनों के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को संभाल पाना असंभव बना देता है।
- सहसंयोजक आबंध (Covalent Bonding): इस ऊर्जाीय समस्या से बचने के लिए कार्बन अन्य परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) करके सहसंयोजक आबंध का निर्माण करता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B): कार्बन आसानी से 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण या त्याग नहीं सकता, यही कारण है कि यह आयनिक आबंध नहीं बनाता।
- विकल्प (C): कार्बन की परमाणु त्रिज्या बहुत छोटी होती है, न कि बड़ी।
- विकल्प (D): कार्बन के बाह्यतम कोश में 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं, न कि 8।
#21. निम्नलिखित में से कौन-सा, कैल्शिय़म फॉस्फेट यौगिक का सही सूत्र है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026 )
✨ सही उत्तर: (B) Ca3(PO4)2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक सूत्र का निर्धारण (Cross-Valency Method): कैल्शियम फॉस्फेट के निर्माण के दौरान, कैल्शियम आयन ($\text{Ca}^{2+}$) की संयोजकता $+2$ होती है और फॉस्फेट आयन ($\text{PO}_4^{3-}$) की संयोजकता $-3$ होती है।
- आवेश संतुलन: रासायनिक रूप से उदासीन यौगिक बनाने के लिए, संयोजकता की अदला-बदली (Cross-multiplication) की जाती है। इसके अनुसार 3 कैल्शियम आयन ($\text{Ca}^{2+}$) और 2 फॉस्फेट आयन ($\text{PO}_4^{3-}$ मिलकर कुल आवेश को संतुलित करते हैं, जिससे सही सूत्र $\text{Ca}_3(\text{PO}_4)_2$ बनता है।
- प्राकृतिक उपस्थिति: यह यौगिक हड्डियों और दांतों का एक मुख्य अकार्बनिक घटक होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{Ca}_4(\text{PO}_4)_3$: यह रासायनिक संयोजकता के नियमों और आयनिक संतुलन के अनुसार एक अमान्य सूत्र है।
- विकल्प (C) $\text{CaPO}_4$: इसमें कैल्शियम और फॉस्फेट के आवेश संतुलित नहीं हैं ($\text{Ca}^{2+}$ और $\text{PO}_4^{3-}$ का अनुपात गलत है)।
- विकल्प (D) $\text{Ca}_2(\text{PO}_4)_3$: यह भी गलत अनुपात वाला रासायनिक सूत्र है जो सही आवेश विनिमय से नहीं बनता।
#22. सहसंयोजक यौगिक-
(RRB JE 27 May 2019 Shift 2 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) सभी विकल्प
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सहसंयोजक यौगिकों के गुण: सहसंयोजक यौगिक (Covalent Compounds) वे यौगिक होते हैं जिनका निर्माण परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी (Sharing) द्वारा होता है।
- कम गलनांक और क्वथनांक: इन यौगिकों के अणुओं के बीच अंतराअणुक बल (Intermolecular forces) कमजोर होते हैं, जिसके कारण इनके गलनांक (Melting points) और क्वथनांक (Boiling points) कम होते हैं।
- विद्युत कुचालकता: इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन या आयन उपस्थित नहीं होते, इसलिए ये सामान्यतः विद्युत के कुचालक (Bad conductors of electricity) होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सभी कथन क्यों सही हैं?):
- विकल्प (A): सहसंयोजक यौगिकों का गलनांक और क्वथनांक कम होता है (यह कथन सत्य है)।
- विकल्प (C): ये विद्युत के कुचालक होते हैं (यह कथन भी सत्य है)।
- विकल्प (D): ये आबंध परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण से बनते हैं (यह भी पूर्णतः सत्य है)। इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) ‘सभी विकल्प’ होगा।
#23. निम्नलिखित में से कौन सा एक उभयधर्मी ऑक्साइड है?
(RRB NTPC CBT-I : 11 Mar 2021 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (D) जिंक ऑक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxide) की परिभाषा: वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल प्रदान करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।
- जिंक ऑक्साइड ($\text{ZnO}$) की प्रकृति: जिंक ऑक्साइड एक प्रमुख उभयधर्मी ऑक्साइड है। यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) जैसे अम्लों के साथ-साथ सोडियम हाइड्रोक्साइड ($\text{NaOH}$) जैसे क्षारों के साथ भी अभिक्रिया कर सकता है।
- अन्य प्रमुख उदाहरण: एल्युमिनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$) और जिंक ऑक्साइड ($\text{ZnO}$) रसायन विज्ञान में सबसेよく पूछे जाने वाले उभयधर्मी ऑक्साइड हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सल्फर डाइऑक्साइड ($\text{SO}_2$): यह एक अधातु ऑक्साइड है जो प्रकृति में अम्लीय (Acidic) होता है।
- विकल्प (B) मैग्नीशियम ऑक्साइड ($\text{MgO}$): यह एक धातु ऑक्साइड है जो सामान्यतः क्षारीय (Basic) प्रकृति का होता है।
- विकल्प (C) फॉस्फोरस पेंटॉक्साइड ($\text{P}_2\text{O}_5$): यह भी एक अधातु ऑक्साइड है जो तीव्र अम्लीय प्रकृति का होता है।
#24. एक विद्यार्थी एक अज्ञात विलयन में लेड ( II ) नाइट्रेट [ Pb(NO 3 ) 2 ] मिलाता है। एक पीला अवक्षेप बनता है। अज्ञात विलयन क्या हो सकता है?
(RRB JE 20/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (A) पोटैशियम आयोड़ाइड ( KI )
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: जब लेड (II) नाइट्रेट विलयन ($\text{Pb(NO}_3)_2$) में पोटैशियम आयोडाइड विलयन ($\text{KI}$) मिलाया जाता है, तो द्विविस्थापन (Double displacement) अभिक्रिया के फलस्वरूप लेड आयोडाइड ($\text{PbI}_2$) का एक चमकीला पीला अवक्षेप (Yellow precipitate) बनता है।
- संतुलित समीकरण:
$\text{Pb(NO}_3)_2\text{ (aq)} + 2\text{KI}\text{ (aq)} \rightarrow \text{PbI}_2\text{ (s)} \downarrow + 2\text{KNO}_3\text{ (aq)}$ - अवक्षेप का रंग: इस अभिक्रिया में बनने वाला लेड आयोडाइड ($\text{PbI}_2$) अपने विशिष्ट पीले रंग के कारण रसायन विज्ञान में द्वि-विस्थापन और अवक्षेपण अभिक्रियाओं के उदाहरण के रूप में बहुत प्रसिद्ध है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) कॉपर सल्फेट ($\text{CuSO}_4$): लेड नाइट्रेट के साथ कॉपर सल्फेट मिलाने पर कोई पीला अवक्षेप नहीं बनता (लेड सल्फेट श्वेत रंग का होता है)।
- विकल्प (C) सोडियम क्लोराइड ($\text{NaCl}$): इसके साथ अभिक्रिया करने पर लेड क्लोराइड ($\text{PbCl}_2$) का सफेद अवक्षेप बनता है, पीला नहीं।
- विकल्प (D) बेरियम सल्फेट ($\text{BaSO}_4$): यह स्वयं एक यौगिक है, अज्ञात विलयन के रूप में इसका उपयोग इस प्रकार की अवक्षेपण पहचान में नहीं किया जाता।
#25. द्वि-विस्थापन अभिक्रिया में अभिकारकों के बीच किस प्रकार के आयनों का विनिमय होता है?
(RRB Level 01 Stage I 21/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) धनात्मक – ऋणात्मक आयन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of ions) होता है, द्वि-विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
- आयनों का विनिमय: इस प्रक्रिया में एक अभिकारक का धनायन (Positive ion) दूसरे अभिकारक के ऋणायन (Negative ion) के साथ और पहले का ऋणायन दूसरे के धनायन के साथ जुड़कर नए यौगिकों का निर्माण करता है।
- प्रमुख उदाहरण: सोडियम सल्फेट ($\text{Na}_2\text{SO}_4$) और बेरियम क्लोराइड ($\text{BaCl}_2$) की अभिक्रिया में $\text{Ba}^{2+}$ (धनायन) और $\text{SO}_4^{2-}$ (ऋणायन) आपस में विनिमय करके बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A, B, C): रासायनिक रूप से समान आवेश वाले आयन (धनात्मक-धनात्मक या ऋणात्मक-ऋणात्मक) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, इसलिए उनका सीधा विनिमय संभव नहीं है; यौगिक निर्माण के लिए हमेशा विपरीत आवेशित आयनों (धनात्मक और ऋणात्मक) का आदान-प्रदान होता है।
#26. निम्न में से कौन-सी संरचनात्मक विशेषता असंतृप्त कार्बन यौगिकों की उच्च अभिक्रियाशीलता में योगदान करती है?
(RRB Level 01 Stage I 29/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि-आबंध या त्रि-आबंध का अस्तित्व
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- उच्च अभिक्रियाशीलता का कारण: असंतृप्त कार्बन यौगिकों (जैसे एल्कीन और एल्काइन) में कार्बन-कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि-आबंध ($\text{>C=C<}$) या त्रि-आबंध ($\text{-C}\equiv\text{C-}$) उपस्थित होते हैं, जिनमें दुर्बल $\pi$ (पाई) आबंध पाए जाते हैं।
- आसानी से योग: इन बहुआबंधों के कारण ये यौगिक संतृप्त यौगिकों (एल्केन) की तुलना में रासायनिक रूप से बहुत अधिक सक्रिय होते हैं और आसानी से योगात्मक अभिक्रियाएँ (Addition reactions) प्रदर्शित करते हैं।
- स्थायित्व में अंतर: संतृप्त यौगिकों में केवल मजबूत $\sigma$ (सिग्मा) आबंध होते हैं, जबकि असंतृप्त यौगिकों में पाई आबंध अपेक्षाकृत कम स्थायी और अधिक प्रतिक्रियाशील होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): हैलोजन परमाणुओं की उपस्थिति से प्रतिस्थापन या अन्य विशिष्ट क्रियाशीलता आती है, लेकिन यह असंतृप्तता का मूल अभिलक्षण नहीं है।
- विकल्प (B): कार्बन की संरचना पूर्ण होती है, अपूर्ण निर्माण जैसी कोई बात नहीं होती।
- विकल्प (C): असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित होते हैं (जैसे एथीन $\text{C}_2\text{H}_4$ में), पूर्ण अनुपस्थिति का यह कथन गलत है।
#27. केवल एक ही संयोजक बंध वाले कार्बनिक यौगिक को क्या कहते हैं?
(RPF Constable 2018 14 Feb 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) संतृप्त यौगिक
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- संतृप्त यौगिक (Saturated Compounds): वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल आबंध (Single covalent bonds) पाए जाते हैं, संतृप्त यौगिक (जैसे एल्केन) कहलाते हैं।
- संरचनात्मक विशेषता: इन यौगिकों में कार्बन की चारों संयोजकताएँ अलग-अलग एकल सहसंयोजक आबंधों द्वारा संतुष्ट होती हैं।
- रासायनिक निष्क्रियता: एकल आबंध काफी मजबूत ($\sigma$ आबंध) होते हैं, जिसके कारण ये यौगिक सामान्य परिस्थितियों में कम अभिक्रियाशील होते हैं और मुख्य रूप से प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Substitution reactions) दर्शाते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सह-संयोजोी यौगिक: यह इन यौगिकों के आबंध निर्माण का प्रकार है, लेकिन ‘केवल एक ही संयोजक बंध’ (यानि एकल आबंध) वाले यौगिकों के लिए विशेष रूप से ‘संतृप्त यौगिक’ शब्द का प्रयोग होता है।
- विकल्प (B) असंतृप्त यौगिक: इनमें द्वि-आबंध या त्रि-आबंध होते हैं, केवल एकल आबंध नहीं।
- विकल्प (C) विद्युत रासायनिक यौगिक: यह आयनिक यौगिकों से संबंधित है, सहसंयोजक यौगिकों से नहीं।
#28. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प मीथेन ( CH 4) के लिए सही लुईस संरचना को दर्शाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) एक कार्बन परमाणु जो चार हाइड्रोजन परमाणुओं से एकल आबंध द्वारा आबंधित है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मीथेन की संरचना: मीथेन ($\text{CH}_4$) एक सबसे सरल संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) है। इसकी लुईस संरचना और त्रि-विमीय संरचना में एक केंद्रीय कार्बन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ चार अलग-अलग एकल सहसंयोजक आबंधों (Single covalent bonds) द्वारा जुड़ा होता है।
- अष्टक पूर्णता: इसमें कार्बन अपने 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी चार हाइड्रोजन परमाणुओं के 1-1 इलेक्ट्रॉन के साथ करके अपना अष्टक (Octet) पूरा करता है और प्रत्येक हाइड्रोजन अपना द्विक (Duet) पूरा करता है।
- ज्यामितीय आकृति: मीथेन की आणविक ज्यामिति चतुष्फलकीय (Tetrahedral) होती है, जिसमें आबंध कोण $109.5^\circ$ होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) और (C): द्वि-आबंध (Double bond) वाले यौगिक असंतृप्त (जैसे एल्कीन) होते हैं, जबकि मीथेन में केवल एकल आबंध होते हैं।
- विकल्प (D): त्रि-आबंध (Triple bond) एल्काइन श्रेणी की विशेषता है, और मीथेन में चार हाइड्रोजन होने के कारण त्रि-आबंध संभव नहीं है।
#29. अभिक्रिया MgO + CO → Mg + CO 2 में, किस पदार्थ का ऑक्सीकरण होता है?
(RRB JE 27 May 2019 Shift 2 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (B) कार्बन मोनोऑक्साइड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- ऑक्सीकरण (Oxidation) की परिभाषा: किसी रासायनिक अभिक्रिया में ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का ह्रास होना ऑक्सीकरण कहलाता है।
- अभिक्रिया का विश्लेषण: दी गई समीकरण $\text{MgO} + \text{CO} \rightarrow \text{Mg} + \text{CO}_2$ में, कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) के साथ ऑक्सीजन जुड़कर कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) बनाती है, जिसका अर्थ है कि यहाँ **कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$)** का ऑक्सीकरण हुआ है।
- अपचयन: इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम ऑक्साइड ($\text{MgO}$) से ऑक्सीजन निकल जाती है, इसलिए $\text{MgO}$ का अपचयन होकर मैग्नीशियम ($\text{Mg}$) प्राप्त होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) मैग्नीशियम: मैग्नीशियम ($\text{Mg}$) उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है, जो $\text{MgO}$ के अपचयन से बनता है।
- विकल्प (C) मैग्नीशियम ऑक्साइड: $\text{MgO}$ का इस अभिक्रिया में ऑक्सीजन के ह्रास के कारण अपचयन होता है, ऑक्सीकरण नहीं।
- विकल्प (D) कार्बन डाइऑक्साइड: यह ऑक्सीकरण के फलस्वरूप बनने वाला उत्पाद है, न कि वह पदार्थ जिसका ऑक्सीकरण हुआ है।
#30. सिंथेसिस गैस (सिंघास) मुख्य रूप से किसका मिश्रण होता है?
(RRB NTPC CBT-I : 9 Mar 2021 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (C) कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सिंथेसिस गैस (Synthesis Gas / Syngas): सिंघास या सिंथेसिस गैस मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड ($\text{CO}$) और हाइड्रोजन ($\text{H}_2$) का एक गैसीय मिश्रण होता है।
- निर्माण की प्रक्रिया: इसे सामान्यतः उच्च तापमान पर भाप की उपस्थिति में कोयले या हाइड्रोकार्बन (जैसे मीथेन) के साथ अभिक्रिया (जिसे स्टीम-मीथेन रीफॉर्मिंग कहा जाता है) द्वारा उत्पादित किया जाता है:
$\text{CH}_4 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{CO} + 3\text{H}_2$
- औद्योगिक उपयोग: इसका उपयोग रासायनिक उद्योग में अमोनिया, मेथनॉल और अन्य सिंथेटिक पेट्रोलियम उत्पादों के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण फीडस्टॉक (कच्चे माल) के रूप में किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) ब्यूटेन और प्रोपेन: यह मिश्रण मुख्य रूप से एलपीजी (LPG – द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस) का होता है, सिंघास का नहीं।
- विकल्प (B) कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन: यद्यपि इसमें हाइड्रोजन होती है, लेकिन मुख्य घटक कार्बन मोनोऑक्साइड होता है न कि कार्बन डाइऑक्साइड।
- विकल्प (D) कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर: यह किसी भी सामान्य औद्योगिक सिंथेसिस गैस का मिश्रण नहीं है।
#31. बड़े अणु बनाने के लिए अन्य परमाणुओं के साथ बंध बनाने के कार्बन के अद्वितीय गुण को क्या कहा जाता है?
(RRB JE CBT-I :- 2 June 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) शृंखलन ( Catenation)
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- शृंखलन (Catenation) क्या है? कार्बन परमाणुओं में आपस में सहसंयोजक आबंध बनाकर लंबी श्रृंखलाओं (Chains), शाखित श्रृंखलाओं (Branched chains) या वलय (Rings) वाली संरचनाएँ बनाने का एक अद्वितीय गुण होता है, जिसे शृंखलन कहा जाता है।
- कारण: कार्बन की संयोजकता 4 (चतुःसंयोजकता) होती है और इसका आकार बहुत छोटा होता है, जिसके कारण कार्बन-कार्बन आबंध अत्यंत मजबूत और स्थायी होते हैं।
- विशाल विविधता: इसी अद्वितीय गुण के कारण कार्बन लाखों की संख्या में यौगिकों (कार्बनिक यौगिक) का निर्माण करता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) तननशीलता (Ductility): यह धातुओं का वह गुण है जिससे उन्हें खींचकर पतले तारों में बदला जा सकता है।
- विकल्प (B) प्रेरण (Induction): यह कार्बनिक रसायन में सिग्मा इलेक्ट्रॉनों के विस्थापन से संबंधित एक इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव (Inductive effect) है।
- विकल्प (C) आघातवर्धनीयता (Malleability): यह भी धातुओं का एक भौतिक गुण है जिसके कारण उन्हें पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है।
#32. यदि लंबा ( T), छोटे ( t) पर प्रभावी है, और गोल बीज ( R), झुर्रीदार ( r) पर प्रभावी हैं, तो उस पौधे के जीनोटाइप की पहचान कीजिए जो छोटी ऊंचाई और गोल बीज दर्शाता है।
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) ttRR
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्रभावी और अप्रभावी लक्षण: प्रश्न के अनुसार, लंबा कद ($T$) छोटे कद ($t$) पर प्रभावी है और गोल बीज ($R$) झुर्रीदार बीज ($r$) पर प्रभावी है।
- छोटी ऊंचाई (बौनापन): पौधे की छोटी ऊंचाई (अप्रभावित लक्षण) केवल तभी प्रकट हो सकती है जब इसका जीनोटाइप समयुग्मजी अप्रभावी यानी $tt$ हो।
- गोल बीज: गोल बीज का फेनोटाइप प्रभावी है, जो समयुग्मजी ($RR$) या विषमयुग्मजी ($Rr$) दोनों स्थितियों में हो सकता है। यहाँ मानक विकल्प के रूप में समयुग्मजी प्रभावी $RR$ को चुना गया है, जिससे सही संयोजन $ttRR$ बनता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) TtRr: यह लंबे कद और गोल बीज को दर्शाता है क्योंकि यहाँ प्रभावी एलील $T$ उपस्थित है।
- विकल्प (C) Ttrr: यह लंबे कद और झुर्रीदार बीज को दर्शाता है।
- विकल्प (D) ttRr: यद्यपि $tt$ छोटी ऊंचाई को और $Rr$ गोल बीज को दर्शाता है, लेकिन मानक आनुवंशिक संयोजनों और विकल्पों की प्राथमिकता में शुद्ध प्रभावी युग्म $ttRR$ सबसे सटीक उत्तर माना जाता है।
#33. कार्बन यौगिकों के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1)
✨ सही उत्तर: (D) दोनों ही विधुत के कुचालक हैं और उनके अणुओं के बीच प्रबल आकर्षण बल नहीं होता
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सहसंयोजक प्रकृति: कार्बन यौगिक मुख्य रूप से सहसंयोजक यौगिक (Covalent compounds) होते हैं, जिनका निर्माण इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing) द्वारा होता है।
- विद्युत कुचालकता: इन यौगिकों में आवेशित कण (मुक्त आयन या इलेक्ट्रॉन) उपस्थित नहीं होते हैं, जिसके कारण ये विद्युत और ऊष्मा के कुचालक (Bad conductors) होते हैं।
- कमजोर अंतराअणुक बल: इनके अणुओं के बीच का आकर्षण बल बहुत कमजोर होता है, जिस वजह से इनके गलनांक और क्वथनांक निम्न होते हैं और इनमें प्रबल आकर्षण बल नहीं पाया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये अकेले क्यों पूर्ण नहीं हैं?):
- विकल्प (A) विद्युत के सुचालक: यह कथन बिल्कुल गलत है क्योंकि अधिकांश कार्बन यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते हैं।
- विकल्प (B) और (C): ये दोनों कथन अपनी जगह पर सही हैं, लेकिन ये केवल आधे सच को दर्शाते हैं। चूंकि कार्बन यौगिकों में ये दोनों विशेषताएँ (कुचालकता और कमजोर आकर्षण बल) एक साथ पाई जाती हैं, इसलिए विकल्प (D) सबसे उपयुक्त और पूर्ण उत्तर है।
#34. कौन-सा कथन कार्बन की विविधता युक्त प्रकृति से संबंधित नहीं है?
(RRB Level 01 Stage I 05/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (D) यह आयनिक रूप से बंध बना सकता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सहसंयोजक बंध (Covalent Bonding): कार्बन के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं और यह इलेक्ट्रॉनों का त्याग या ग्रहण करने के बजाय उनकी साझेदारी (Sharing) करके मुख्य रूप से सहसंयोजक बंध बनाता है, न कि आयनिक बंध।
- कार्बन की विविधता के कारण: कार्बन की विशाल विविधता और बहुसंख्या में यौगिक बनाने की क्षमता के मुख्य कारण इसकी चतुःसंयोजकता (Tetravalency) और शृंखलन (Catenation) का गुण है, साथ ही इसमें एकल, द्वि और त्रिबंध बनाने की क्षमता भी होती है।
- आयनिक बंध का अभाव: ऊर्जावान रूप से प्रतिकूल होने के कारण कार्बन आयनिक रूप से बंध नहीं बनाता है, इसलिए यह कथन कार्बन की विविधता युक्त प्रकृति से संबंधित नहीं है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये कथन क्यों सत्य हैं?):
- विकल्प (A): कार्बन परमाणु आपस में एकल, द्वि और त्रिबंध बना सकते हैं (यह कथन कार्बन की विविधता से संबंधित है)।
- विकल्प (B): कार्बन की संयोजकता 4 होती है यानी यह चतुःसंयोजी है (यह भी सत्य है)।
- विकल्प (C): कार्बन में लंबी श्रृंखलाएँ और वलय बनाने का शृंखलन गुण होता है (यह भी कार्बन की विशेषता है)।
#35. निम्नलिखित में से किस यौगिक का सूत्र इकाई द्रव्यमान 100 u है?
(RRB JE 20/02/2026 )
✨ सही उत्तर: (D) CaCO3
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कैल्शियम कार्बोनेट ($\text{CaCO}_3$) का मोलर द्रव्यमान: किसी यौगिक का सूत्र इकाई द्रव्यमान उसमें उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों के योग के बराबर होता है।
- गणना:
$\text{CaCO}_3$ के लिए:
कैल्शियम ($\text{Ca}$) का परमाणु द्रव्यमान = $40\text{ u}$
कार्बन ($\text{C}$) का परमाणु द्रव्यमान = $12\text{ u}$
ऑक्सीเจน ($\text{O}$) का परमाणु द्रव्यमान = $16\text{ u}$ (चूँकि 3 ऑक्सीजन परमाणु हैं, अतः $3 \times 16 = 48\text{ u}$)
कुल सूत्र द्रव्यमान = $40 + 12 + 48 = 100\text{ u}$।
- अन्य नाम: कैल्शियम कार्बोनेट को चूना पत्थर (Limestone), संगमरमर (Marble) और चाक के रूप में भी जाना जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (इनका द्रव्यमान कितना है?):
- विकल्प (A) $\text{MgO}$: $\text{Mg} (24) + \text{O} (16) = 40\text{ u}$
- विकल्प (B) $\text{CaCl}_2$: $\text{Ca} (40) + 2 \times \text{Cl} (35.5) = 40 + 71 = 111\text{ u}$
- विकल्प (C) $\text{Na}_2\text{CO}_3$: $2 \times \text{Na} (23) + \text{C} (12) + 3 \times \text{O} (16) = 46 + 12 + 48 = 106\text{ u}$
#36. DNA के संदर्भ में ‘पूरक’ शब्द निम्नलिखित में से किस गुण को संदर्भित करता है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 05 Jun, 2025 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (A) आधार विशिष्टता के आधार पर हाइड्रोजन बंधन क्षमता
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- DNA में पूरकता (Complementarity): DNA की द्विरज्जुकी (Double helix) संरचना में ‘पूरक’ शब्द नाइट्रोजन क्षारों (Nitrogenous bases) के बीच विशिष्ट युग्मन (Specific pairing) को संदर्भित करता है।
- हाइड्रोजन बंधन और बेस पेयरिंग: एडेनिन ($\text{A}$) हमेशा थाइमिन ($\text{T}$) के साथ दो हाइड्रोजन बंधों द्वारा और ग्वानिन ($\text{G}$) हमेशा साइटोसिन ($\text{C}$) के साथ तीन हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़ता है, जिसे वाटसन-क्रिक बेस पेयरिंग नियम कहा जाता है।
- आनुवंशिक स्थिरता: यह हाइड्रोजन बंधन क्षमता और आधार विशिष्टता DNA प्रतिकृतियन (Replication) के दौरान सूचना की सटीक नकल सुनिश्चित करती है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) दोनों किस्मों की समान रासायनिक संरचना: DNA के दोनों रज्जुकों की संरचना पूरी तरह समान नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक (प्रतिलोम/विपरीत) होती है।
- विकल्प (C) चीनी-फॉस्फेट इकाइयों की मिलान संख्या: यह DNA के बैकबोन (अस्थि पंजर) के निर्माण से जुड़ा है, न कि क्षारकों की पूरकता के विशिष्ट गुण से।
- विकल्प (D) न्यूक्लियोटाइड्स श्रृंखलाओं का समानांतर अभिविन्यास: DNA रज्जुवक प्रति-समानांतर (Anti-parallel, $5′ \rightarrow 3’$ और $3′ \rightarrow 5’$) होते हैं, न कि साधारण समानांतर।
#37. निम्नलिखित में से कौन पारा क्लोराइड खनिज है?
(RPF SI 2018 : 16 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (C) कैलोमेल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कैलोमेल (Calomel): कैलोमेल एक प्रमुख खनिज है जिसका रासायनिक नाम मर्क्युस क्लोराइड या मरकरी (I) क्लोराइड ($\text{Hg}_2\text{Cl}_2$) है।
- रासायनिक संरचना: यह एक अकार्बनिक यौगिक है जो प्रकृति में खनिज के रूप में पाया जाता है। इसका उपयोग ऐतिहासिक रूप से चिकित्सा में और विद्युत रसायन विज्ञान में कैलोमेल इलेक्ट्रोड (संदर्भ इलेक्ट्रोड) के निर्माण में किया जाता है।
- भौतिक रूप से यह एक सफेद या हल्के पीले रंग का घना ठोस पदार्थ होता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) फिनोल ($\text{C}_6\text{H}_5\text{OH}$): यह एक कार्बनिक यौगिक (कार्बोलिक अम्ल) है, जो पारा क्लोराइड खनिज नहीं है।
- विकल्प (B) बेंजीन ($\text{C}_6\text{H}_6$): यह एक सुगंधित (Aromatic) हाइड्रोकार्बन विलायक है।
- विकल्प (D) क्लोरैमाइन: यह एक रोगाणुनाशक और जल शोधन में प्रयुक्त होने वाला यौगिक है ($\text{NH}_2\text{Cl}$), न कि पारा क्लोराइड खनिज।
#38. Mg 2+ और PO 4 3- आयनों के बीच बनने वाले यौगिक का सही सूत्र पहचानें।
(RRB JE ECE 22 Apr 2025 Shift 1 CBT 2)
✨ सही उत्तर: (B) Mg 3 (PO 4) 2
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक सूत्र का निर्धारण: मैग्नीशियम आयन ($\text{Mg}^{2+}$) पर $+2$ आवेश होता है और फॉस्फेट आयन ($\text{PO}_4^{3-}$) पर $-3$ आवेश होता है।
- क्रॉस-वैलेंसी विधि (Cross-Valency Method): उदासीन यौगिक बनाने के लिए आवेशों या संयोजकता की अदला-बदली की जाती है। इसके अनुसार 3 मैग्नीशियम आयन ($\text{Mg}^{2+}$) और 2 फॉस्फेट आयन ($\text{PO}_4^{3-}$) मिलकर कुल धनात्मक और ऋणात्मक आवेश को संतुलित करते हैं, जिससे सही रासायनिक सूत्र $\text{Mg}_3(\text{PO}_4)_2$ बनता है।
- यौगिक का प्रकार: यह मैग्नीशियम फॉस्फेट का एक स्थिर अकार्बनिक लवण है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{Mg(PO}_4)_3$: इसमें आयनों का आवेश संतुलित नहीं है ($+2$ और $-3$ का गलत संयोजन)।
- विकल्प (C) $\text{Mg}_2(\text{PO}_4)_3$: यह रासायनिक रूप से अमान्य अनुपात है।
- विकल्प (D) $\text{MgPO}_4$: इसमें मैग्नीशियम और फॉस्फेट के आवेश एक-दूसरे को संतुलित नहीं करते हैं ($\text{Mg}^{2+}$ और $\text{PO}_4^{3-}$ के लिए यह सूत्र गलत है)।
#39. किसी यौगिक में परमाणुओं की संख्या का बहुत सरल अनुपात ज्ञात करने के लिए किस सूत्र का उपयोग किया जाता है?
(RPF SI Previous Paper : 6 Jan 2019 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) मूलानुपाती सूत्र
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- मूलानुपाती सूत्र (Empirical Formula): किसी यौगिक का मूलानुपाती सूत्र वह रासायनिक सूत्र होता है जो उसमें उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या का सबसे सरल पूर्ण संख्या अनुपात (Simplest whole-number ratio) प्रदर्शित करता है।
- आणविक सूत्र से अंतर: आणविक सूत्र (Molecular formula) यौगिक के अणु में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की वास्तविक संख्या को दर्शाता है, जबकि मूलानुपाती सूत्र केवल उनके सरलतम अनुपात को व्यक्त करता है।
- उदाहरण: ग्लूकोज का आणविक सूत्र $\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6$ है, लेकिन इसका मूलानुपाती सूत्र $\text{CH}_2\text{O}$ होता है (जहाँ कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का सरल अनुपात $1:2:1$ है)।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) रासायनिक सूत्र: यह एक व्यापक शब्द है जिसके अंतर्गत आणविक और संरचनात्मक दोनों सूत्र आते हैं, लेकिन यह विशेष रूप से ‘सबसे सरल अनुपात’ को निर्दिष्ट नहीं करता।
- विकल्प (B) औपचारिक सूत्र: यह इस संदर्भ में रसायन विज्ञान का कोई मानक या सही पद नहीं है।
- विकल्प (C) संरचनात्मक सूत्र: यह यौगिक में परमाणुओं की त्रिविम या आबंध व्यवस्था (Connectivity) को दर्शाता है, न कि सरल अनुपात को।
#40. DNA एक ऐसा अणु है जो जीवित जीवों की कोशिकाओं में आनुवंशिक सूचना रखता है। DNA का पूर्ण रूप ________ है।
(RPF Constable 2024 : 17 Mar, 2025 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- DNA का पूर्ण रूप (Full Form): DNA का पूरा नाम Deoxyribonucleic Acid (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) है।
- मुख्य कार्य: यह एक जटिल अणु है जो सभी सजीव कोशिकाओं के भीतर जैविक विकास, आनुवंशिक लक्षणों के संचरण (Inheritance) और शरीर की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक सभी आनुवंशिक निर्देश (Genetic instructions) संग्रहीत करता है।
- रासायनिक घटक: यह न्यूक्लियोटाइड इकाइयों से बना होता है, जिसमें डीऑक्सीराइबोज शर्करा, फॉस्फेट समूह और नाइट्रोजनयुक्त क्षारक शामिल होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B), (C) और (D): ‘डाइनाइट्रिक एसिड’, ‘डाईऑक्साइड नाइट्रोजन एसीटेट’ और ‘डाइसल्फेट नाइट्रिक एसिड’ जैविक आनुवंशिक अणुओं के पूर्ण रूप नहीं हैं, बल्कि ये अकार्बनिक या कार्बनिक यौगिकों के अमान्य/गलत नाम हैं।
#41. निम्नलिखित में से किसका उपयोग कांच, साबुन और कागज उद्योग में किया जाता है?
(RPF Constable 2018 19 Jan 2019 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (A) सोडियम कार्बोनेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- सोडियम कार्बोनेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3$): इसे सामान्यतः धोने का सोडा (Washing Soda) या सोडा ऐश कहा जाता है। यह रसायन विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण यौगिक है।
- औद्योगिक उपयोग: इसका व्यापक उपयोग कांच (Glass), साबुन (Soap) और कागज (Paper) उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
- अन्य प्रमुख उपयोग: इसका उपयोग बोरेक्स ($\text{Na}_2\text{B}_4\text{O}_7$) के उत्पादन में तथा जल की स्थायी कठोरता (Permanent hardness) को दूर करने के लिए भी किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B) कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$): इसका उपयोग अग्निशामक यंत्रों और शीतल पेय पदार्थों (सोडा वाटर) में किया जाता है, कांच या साबुन निर्माण में नहीं।
- विकल्प (C) मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया ($\text{Mg(OH)}_2$): यह एक एंटासिड (प्रतिअम्ल) है जिसका उपयोग पेट की अम्लता (Acidity) को दूर करने के लिए औषधि के रूप में होता है।
- विकल्प (D) पोटैशियम नाइट्रेट ($\text{KNO}_3$): इसका उपयोग मुख्य रूप से कृषि में उर्वरक के रूप में और आतिशबाजी व बारूद बनाने में किया जाता है।
#42. निम्नलिखित में से कौन-सा, आयन (ion) का सही वर्णन करता है?
(RRB Level 01 Stage I 12/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) वह परमाणु या परमाणुओं का समूह, जिस पर शुद्ध (net) विद्युत आवेश हो
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- आयन (Ion) की परिभाषा: जब किसी उदासीन परमाणु या परमाणुओं के समूह द्वारा इलेक्ट्रॉनों का त्याग (Loss) या ग्रहण (Gain) किया जाता है, तब उस पर एक शुद्ध विद्युत आवेश उत्पन्न हो जाता है। ऐसे आवेशित कण को आयन कहते हैं।
- प्रकार: आयन दो प्रकार के होते हैं—
1. धनायन (Cation): इलेक्ट्रॉनों के त्याग से बनने वाला धनावेशित आयन (जैसे $\text{Na}^+, \text{Mg}^{2+}$)।
2. ऋणायन (Anion): इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने से बनने वाला ऋणावेशित आयन (जैसे $\text{Cl}^-, \text{PO}_4^{3-}$)।
- विद्युत चालकता: आयनित अवस्था में विलयन या गलित रूप में ये कण विद्युत का चालन करने में सक्षम होते हैं।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A): उदासीन अणु पर कोई शुद्ध आवेश नहीं होता, जबकि आयन हमेशा आवेशित कण होते हैं।
- विकल्प (C) और (D): आयनों का निर्माण इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान (ग्रहण या त्याग) के कारण होता है, प्रोटॉनों या न्यूट्रॉनों के परिवर्तन से नहीं (प्रोटॉन या न्यूट्रॉन नाभिक के भीतर होते हैं और सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में नहीं बदलते)।
#43. एक ________ कोण दो तलों के बीच का कोण है।
(RRB ALP Fitter 21 Jan 2019 Shift 3)
✨ सही उत्तर: (D) द्वितल
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- द्वितल कोण (Dihedral Angle): ज्यामिति और इंजीनियरिंग ड्राइंग (विशेषकर फिटर ट्रेड) में, दो प्रतिच्छेदी तलों (Intersecting planes) या सतहों के बीच के कोण को द्वितल कोण कहा जाता है।
- माप और उपयोग: यह उस कोण को मापता है जिस पर दो समतल सतहें एक दूसरे से झुकी होती हैं। इसका उपयोग विमान के पंखों के डिज़ाइन, क्रिस्टलोग्राफी और विभिन्न यांत्रिक घटकों के निर्माण में किया जाता है।
- यह एक त्रि-विमीय (3D) ज्यामितीय माप है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) स्पलाइन (Spline): यह एक चिकनी वक्र रेखा (Curve) खींचने की विधि या मशीनरी में शाफ्ट पर बने खांचों (Grooves) से संबंधित है।
- विकल्प (B) ओफ्सेट (Offset): यह किसी निश्चित रेखा या सतह से दूरी या विस्थापन (Shift) को दर्शाता है।
- विकल्प (C) ध्रुवीय (Polar): यह ध्रुवीय निर्देशांक प्रणाली (Polar coordinates) या किसी केंद्रीय ध्रुव से बनने वाले कोण से संबंधित है।
#44. ऐल्केन वाली प्रतिस्थापन अभिक्रिया में, ऐल्केन अणु के हाइड्रोजन परमाणुओं का क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (A) उन्हें अन्य परमाणुओं या परमाणुओं के समूहों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction): संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) बहुत अधिक निष्क्रिय होते हैं क्योंकि इनमें सभी कार्बन-कार्बन और कार्बन-हाइड्रोजन एकल आबंध मजबूत ($\sigma$) होते हैं। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ये क्लोरीन जैसे अभिकर्मकों के साथ प्रतिस्थापन अभिक्रिया दर्शाते हैं।
- हाइड्रोजन का विस्थापन: इस प्रक्रिया के दौरान, ऐल्केन अणु के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को अन्य परमाणुओं या समूहों (जैसे क्लोरीन या हैलोजन) द्वारा एक-एक करके हटा दिया (प्रतिस्थापित कर दिया) जाता है।
- उदाहरण: मीथेन ($\text{CH}_4$) की क्लोरीन ($\text{Cl}_2$) के साथ सूर्य के प्रकाश में अभिक्रिया होने पर क्लोромеथेन ($\text{CH}_3\text{Cl}$) और हाइड्रोजन क्लोराइड ($\text{HCl}$) बनता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (B): ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके जल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाना दहन (Combustion) अभिक्रिया है, प्रतिस्थापन नहीं।
- विकल्प (C): द्वि-आबंध बनाने के लिए हाइड्रोजन का हटना विलोपन (Elimination) या असंतृप्ति से संबंधित है।
- विकल्प (D): अणु में जोड़कर बड़ी श्रृंखला बनाना संकलन या बहुलकीकरण जैसी प्रक्रियाओं में होता है, प्रतिस्थापन में हाइड्रोजन का आदान-प्रदान होता है।
#45. एक विलयन चाक पाउडर के साथ अभिक्रिया करके एक गैस देता है जो चूने-पानी को दूषित कर देता है। समाधान में शामिल हैं:
(RRB NTPC CBT-I : 30 Dec 2020 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (D) HCl
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- रासायनिक अभिक्रिया: चाक पाउडर (कैल्शियम कार्बोनेट, $\text{CaCO}_3$) जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया करता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) गैस उत्पन्न होती है।
- समीकरण:
$\text{CaCO}_3\text{ (s)} + 2\text{HCl}\text{ (aq)} \rightarrow \text{CaCl}_2\text{ (aq)} + \text{H}_2\text{O}\text{ (l)} + \text{CO}_2\text{ (g)}\uparrow$ - चूने का पानी दूधिया होना: उत्पन्न होने वाली $\text{CO}_2$ गैस जब चूने के पानी ($\text{Ca(OH)}_2$) से प्रवाहित की जाती है, तो अघुलनशील कैल्सियम कार्बोनेट के बनने के कारण चूने का पानी दूधिया (milky) हो जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) $\text{AlCl}_3$: एल्युमिनियम क्लोराइड एक लवण विलयन है, जो सामान्यतः चाक पाउडर के साथ ऐसी कार्बोनेट-आधारित गैस विस्थापन अभिक्रिया नहीं करता जिससे $\text{CO}_2$ उत्पन्न हो।
- विकल्प (B) $\text{MgCl}_2$: मैग्नीशियम क्लोराइड भी एक उदासीन लवण विलयन है, जो कैल्शियम कार्बोनेट से क्रिया करके $\text{CO}_2$ गैस मुक्त नहीं करता।
- विकल्प (C) $\text{NaCl}$: सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक का विलयन) चाक के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया करके गैस उत्पन्न नहीं करता क्योंकि यह अम्लीय नहीं है।
#46. निम्नलिखित में से कौन सा कथन कार्बन की बहुमुखी प्रकृति का कारण नहीं है?
(RRB JE CBT-I 2024 17 Dec 2024 Shift 1)
✨ सही उत्तर: (B) कार्बन स्वयं के साथ आयनिक आबंध बना सकता है
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- कार्बन की बहुमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon): कार्बन द्वारा बड़ी संख्या में यौगिक बनाने की क्षमता के पीछे मुख्य कारण इसकी अनूठी विशेषताएँ हैं—जैसे शृंखलन (Catenation), चतुःसंयोजकता (Tetravalency) और बहुआबंध बनाने की क्षमता।
- सहसंयोजक बंध (Covalent Bonding): कार्बन के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। ऊर्जावान रूप से यह न तो 4 इलेक्ट्रॉन आसानी से त्याग सकता है और न ही ग्रहण कर सकता है; इसलिए यह हमेशा इलेक्ट्रונים की साझा (Sharing) करके सहसंयोजक आबंध बनाता है।
- आयनिक आबंध का अभाव: कार्बन कभी भी आयनिक रूप से बंध नहीं बनाता है, अतः यह कथन गलत है और कार्बन की विविधतापूर्ण प्रकृति का कारण नहीं है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये कथन सत्य क्यों हैं?):
- विकल्प (A) और (C) शृंखलन व चतुःसंयोजकता: कार्बन में लंबी श्रृंखलाएँ बनाने का गुण (Catenation) और इसकी 4 संयोजकता (Tetravalency) इसकी विविधता के प्रमुख कारण हैं।
- विकल्प (D) एकल, द्वि और त्रिआबंध: कार्बन परमाणु आपस में तथा अन्य तत्वों के साथ एकल, द्वि और त्रि-आबंध बनाने में सक्षम होते हैं, जो इसकी बहुमुखी प्रकृति में योगदान देते हैं।
#47. बेकिंग सोडा रासायनिक रूप से किस नाम से जाना जाता है?
(RRB NTPC UG CBT-I : 12 Aug, 2025 Shift 2)
✨ सही उत्तर: (B) सोडियम बाइकार्बोनेट
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- बेकिंग सोडा (Baking Soda): इसका रासायनिक नाम सोडियम बाइकार्बोनेट (या सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट, $\text{NaHCO}_3$) है।
- गुण एवं उपयोग: यह एक हल्के संक्षारक क्षारीय लवण के रूप में कार्य करता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से बेकिंग पाउडर बनाने, खाद्य पदार्थों को मुलायम व स्पंजी बनाने, पेट की अम्लता (Acidity) को दूर करने के लिए एंटासिड के रूप में, तथा अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।
- निर्माण: इसे आमतौर पर साल्वे विधि द्वारा सोडियम क्लोराइड, जल, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया का उपयोग करके बनाया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) सोडियम कार्बोनेट: यह ‘धोने का सोडा’ (Washing Soda, $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$) का रासायनिक नाम है।
- विकल्प (C) कैल्सियम कार्बोनेट: यह चूना पत्थर, संगमरमर ($\text{CaCO}_3$) का रासायनिक नाम है।
- विकल्प (D) मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड: इसे ‘मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया’ ($\text{Mg(OH)}_2$) कहा जाता है, जिसका उपयोग पेट की अम्लता कम करने के लिए होता है।
#48. फॉर्मिक अम्ल का सूत्र क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )
✨ सही उत्तर: (B) HCOOH
💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
- फॉर्मिक अम्ल (Formic Acid): इसका आईयूपीएसी (IUPAC) नाम मेथेनोइक अम्ल (Methanoic acid) है और इसका रासायनिक सूत्र HCOOH होता है। यह सबसे सरल कार्बोक्जिलिक अम्ल (Carboxylic acid) है।
- प्राकृतिक स्रोत: यह प्राकृतिक रूप से चींटियों, मधुमक्खियों और बिच्छुओं के डंक में पाया जाता है, जिसके कारण उनके काटने पर जलन या दर्द महसूस होता है।
- उपयोग: इसका उपयोग रबर, वस्त्र, रंगाई और चमड़ा उद्योगों के साथ-साथ जीवाणुनाशक के रूप में भी किया जाता है।
🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
- विकल्प (A) C2H4O2: यह एसिटिक अम्ल (Ethanoic acid / सिरका) का सूत्र है।
- विकल्प (C) C2H5OH: यह एथिल अल्कोहल (Ethanol) का रासायनिक सूत्र है।
- विकल्प (D) C2H6O: यह अणु सूत्र एथेनॉल या डाइमेथिल ईथर जैसे कार्बनिक यौगिकों की समवयवी (Isomeric) संरचनाओं को दर्शाता है।
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