DECE 2026 Exam
#1. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ई. सी. सी. ई.) में खेल-गीत (प्ले-सांग्स) और प्ले-गिफ्ट्स के उपयोग का श्रेय किसे दिया जाता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- फ्रोबेल (Froebel): इन्होंने किंडरगार्टन (Kindergarten) पद्धति की शुरुआत की थी, जिसमें बच्चों को खेल, खेल-गीतों (Play-songs) और विशेष प्रकार की उपहार सामग्री (Play-gifts) के माध्यम से शिक्षा देने पर जोर दिया गया।
- अन्य विकल्प: मोंटेसरी, कोमेनियस और ताराबाई मोदक ने भी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, लेकिन ‘प्ले-सांग्स’ और ‘प्ले-गिफ्ट्स’ की अवधारणा फ्रोबेल से जुड़ी हुई है।
- निष्कर्ष: प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा में इन खेल सामग्रियों और गीतों के प्रयोग की शुरुआत फ्रोबेल द्वारा की गई थी।
#2. मोंटेसरी शिक्षा की एक प्रमुख विशेषता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- मोंटेसरी पद्धति (Montessori Method): डॉ. मारिया मोंटेसरी द्वारा विकसित इस पद्धति में बच्चों की ज्ञानेंद्रियों के विकास के लिए विभिन्न प्रकार की स्पर्श, दृष्टि और श्रवण संबंधी विशेष शिक्षण सामग्रियों और उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
- अन्य विकल्प: परी कथाओं का प्रयोग, सामूहिक गतिविधियाँ और शिक्षक-केन्द्रित व्याख्यान इस पद्धति के मुख्य आधार नहीं हैं; यहाँ बाल-केन्द्रित शिक्षा और स्व-अधिगम पर जोर दिया जाता है।
- निष्कर्ष: मोंटेसरी शिक्षा में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए विशेष शैक्षणिक सामग्री और उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
#3. निम्नलिखित में से कौन-सी गांधी जी द्वारा प्रकाशित पुस्तक है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- मीडियम ऑफ़ इंस्ट्रक्शन (Medium of Instruction): यह महात्मा गांधी के शिक्षा संबंधी लेखों और विचारों का संग्रह है, जो शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा की महता को स्पष्ट करता है।
- अन्य विकल्प: ‘डिस्कवरी ऑफ़ द चाइल्ड’ डॉ. मारिया मोंटेसरी की प्रसिद्ध पुस्तक है, जबकि अन्य विकल्प इस संदर्भ में सही नहीं हैं।
- निष्कर्ष: महात्मा गांधी द्वारा प्रकाशित शिक्षा से जुड़ी पुस्तकों में ‘मीडियम ऑफ़ इंस्ट्रक्शन’ प्रमुख है।
#4. गांधी जी की पूर्व बुनियादी शिक्षा किस आयु के बच्चों पर केन्द्रित है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- पूर्व बुनियादी शिक्षा: गांधी जी ने बुनियादी तालीम के अंतर्गत प्रारंभिक बाल्यावस्था की शिक्षा पर जोर दिया था, जिसमें 2½ से 7 वर्ष की आयु के बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए खेल और गतिविधियों को शामिल किया गया है।
- अन्य विकल्प: जन्म से 7 वर्ष, 4 वर्ष से 7 वर्ष और जन्म से 10 वर्ष इस आयु सीमा के अंतर्गत सही नहीं माने जाते हैं।
- निष्कर्ष: गांधी जी की पूर्व बुनियादी शिक्षा प्रणाली विशेष रूप से 2½ वर्ष से 7 वर्ष के बच्चों के लिए निर्धारित की गई थी।
#5. आई. सी. डी. एस. कार्यक्रम में चाइल्ड डवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर (सी. डी. पी. ओ.) किसको रिपोर्ट करता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- सी.डी.पी.ओ. (CDPO) की भूमिका: यह बाल विकास परियोजना अधिकारी अपने प्रोजेक्ट क्षेत्र (ब्लॉक स्तर) के सभी कार्यों का प्रबंधन करता है और प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी के प्रति उत्तरदायी होता है।
- अन्य विकल्प: सुपरवाइजर और आँगनबाड़ी कार्यकर्त्ता सी.डी.पी.ओ. के अंतर्गत कार्य करते हैं और उसे रिपोर्ट करते हैं, जबकि ANM स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आती है।
- निष्कर्ष: प्रशासनिक पदानुक्रम में सी.डी.पी.ओ. अपने जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) के निर्देशन में काम करता है और उन्हें रिपोर्ट करता है।
#6. विकलांग (अपंग) बच्चे के सन्दर्भ में ‘पुनर्वास’ (पुनः स्थापन) शब्द की सबसे उचित परिभाषा है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- पुनर्वास की अवधारणा: इसमें केवल बच्चे के शारीरिक या मानसिक सुधार (उसे ढालने) पर ही जोर नहीं दिया जाता, बल्कि उसके भौतिक और सामाजिक परिवेश में भी जरूरी बदलाव (जैसे रैंप बनाना, अनुकूलित शिक्षण सामग्री देना) किए जाते हैं ताकि समावेशन संभव हो सके।
- अन्य विकल्प: केवल बच्चे को ढालना या केवल परिवेश बदलना या केवल विकलांगता का इलाज करना पुनर्वास का अधूरा पहलू है; समग्र पुनर्वास में दोनों पक्षों का समावेश होता है।
- निष्कर्ष: बच्चे के विकास और समावेशन के लिए उसके अनुकूलन और परिवेशगत संशोधन दोनों का समन्वय ही उचित पुनर्वास कहलाता है।
#7. भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम, 1992 (आर. सी. आई. एक्ट, 1992) का मुख्य उद्देश्य है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- आर.सी.आई. अधिनियम (RCI Act): यह परिषद देश भर में विशेष शिक्षा, पुनर्वास और थेरेपी से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों के मानकों और प्रशिक्षण को नियंत्रित करती है ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
- अन्य विकल्प: वित्तीय सहायता, रोजगार की गारंटी या राष्ट्रीय न्यास (National Trust Act के तहत) इस अधिनियम के मुख्य दायरे में नहीं आते हैं; इसका मुख्य फोकस पेशेवर प्रशिक्षण और शिक्षा का नियमन है।
- निष्कर्ष: RCI अधिनियम 1992 का मुख्य उद्देश्य पुनर्वास पेशेवरों और कर्मियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मानकीकरण और विनियमन करना है।
#8. जब किसी बच्चे में विकलांगता (अपंगता) का पता चलता है, तो माता-पिता की पहली (प्रारंभिक/प्रतिक्रिया होती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया: बच्चे में विकलांगता का पता चलने पर माता-पिता सदमे, आघात, और अस्वीकार (Denial) के दौर से गुजरते हैं, जो कि इस स्थिति में एक सामान्य शुरुआती मानसिक रक्षा तंत्र (Defense Mechanism) है।
- अन्य विकल्प: गर्व महसूस करना या तुरंत स्वीकार कर लेना प्रारंभिक प्रतिक्रिया नहीं होती है; बल्कि शुरुआती चरण में सदमे और अस्वीकार की स्थिति उत्पन्न होती है।
- निष्कर्ष: विकलांगता का सामना करने पर माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया आमतौर पर वास्तविकता को न स्वीकार करना (अस्वीकार करना) होती है।
#9. आई. सी. डी. एस. कार्यक्रम में एक सुपरवाइजर (पर्यवेक्षक) लगभग कितनी ऑँगनबाड़ियों का निरीक्षण करता/करती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- सुपरवाइजर की भूमिका: आँगनबाड़ी सुपरवाइजर अपने क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लगभग 20-25 आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन, पोषण वितरण, रिकॉर्ड रखरखाव और स्वास्थ्य गतिविधियों की निगरानी करती है।
- अन्य विकल्प: 5-10, 10-15 या 15-20 आँगनबाड़ियों की संख्या सामान्य प्रशासनिक मानदंडों के अनुसार प्रति सुपरवाइजर कम है; मानक दिशा-निर्देशों में आमतौर पर यह संख्या 20 से 25 के बीच निर्धारित होती है।
- निष्कर्ष: प्रशासनिक सुविधा और प्रभावी निगरानी के लिए एक सुपरवाइजर के जिम्मे औसतन 20-25 आँगनबाड़ी केंद्र होते हैं।
#10. माता-पिता का अपने विकलांग बच्चे को समाज से छिपाने का मुख्य कारण है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- सामाजिक दृष्टिकोण: समाज में संकीर्ण मानसिकता और संवेदनशीलता की कमी के कारण कई बार माता-पिता हीनता की भावना या सामाजिक उपहास (Mockery) के भय से अपने विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को दुनिया से छिपाकर रखते हैं।
- अन्य विकल्प: बच्चे का विध्वंसक व्यवहार, माता-पिता के पास समय की कमी या उनका शर्मीला स्वभाव इसके मुख्य और प्राथमिक कारण नहीं होते हैं, बल्कि सामाजिक भय और लांछन मुख्य कारण बनते हैं।
- निष्कर्ष: सामाजिक डर और रूढ़िवादी सोच के चलते माता-पिता अक्सर ऐसे बच्चों को समाज के सामने लाने से बचते हैं।
#11. माता-पिता को विकलांग बच्चे को आवश्यकता से अधिक सुरक्षा देने से बचना चाहिए क्योंकि :3june26
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- अति-संरक्षण (Overprotection) के दुष्प्रभाव: जब बच्चों को हर काम में जरूरत से ज्यादा मदद दी जाती है और उन्हें खुद प्रयास करने का मौका नहीं मिलता, तो उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की भावना कमजोर हो जाती है।
- अन्य विकल्प: आत्मनिर्भर या आत्म-विश्वासी बनाना सकारात्मक परिणाम हैं, जबकि बच्चा कौशल विकसित नहीं कर पाता है – यह अति-संरक्षण का नकारात्मक प्रभाव है।
- निष्कर्ष: बच्चों के पूर्ण विकास के लिए उन्हें अति-संरक्षण की बजाय आत्मनिर्भर बनने के अवसर देना आवश्यक है।
#12. मोबाइल क्रेच केन्द्र में बच्चे के ठहरने की औसत अवधि है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- कार्य की प्रकृति: निर्माण स्थलों और प्रोजेक्ट्स पर श्रमिकों की आवाजाही और कार्य अवधि के अनुसार यह औसत समय तय किया जाता है।
- अन्य विकल्प: तीन महीने, एक वर्ष या दो वर्ष इस विशेष संदर्भ (मोबाइल क्रेच) के लिए मानक औसत अवधि के रूप में सटीक नहीं बैठते।
- निष्कर्ष: प्रवासी या निर्माण श्रमिकों की अस्थायी कार्यशैली के कारण इन क्रेच में बच्चों के रहने का औसत समय छः महीने का होता है।
#13. निम्नलिखित में से कौन-सा ई. सी. सी. ई. केन्द्र की दैनिक गतिविधियों में स्वास्थ्य, पोषण और खेल आधारित सीखने के अनुभव का एकीकरण दर्शाता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- समग्र दृष्टिकोण (Holistic Approach): प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा में बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण पर भी एक साथ ध्यान दिया जाता है, जिससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित होता है।
- अन्य विकल्प: खण्डित दृष्टिकोण, प्रशासनिक सुविधा या अस्थायी प्रायोगिक मॉडल इसके नकारात्मक या गैर-शैक्षणिक पहलुओं को दर्शाते हैं, जबकि यह एक सुनियोजित समग्र व्यवस्था है।
- निष्कर्ष: खेल-खेल में सीखना, पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य की देखभाल सभी मिलकर बच्चे के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
#14. समन्वित (एकीकृत) बाल विकास सेवा (आई. सी. डी. एस.) कार्यक्रम के तहत प्रदान की जाने वाली सेवाओं में क्या शामिल नहीं है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- ICDS की मुख्य सेवाएं: इसमें पूरक पोषण, स्वास्थ्य जाँच, टीकाकरण, संदर्भ सेवाएं (Referral Services), पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा और 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए अनौपचारिक प्री-स्कूल शिक्षा शामिल है।
- अन्य विकल्प: पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा और टीकाकरण सीधे तौर पर आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से ICDS योजना के अंतर्गत प्रदान किए जाते हैं।
- निष्कर्ष: मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) योजना स्कूली शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में संचालित की जाती है, अतः यह ICDS कार्यक्रम के तहत शामिल नहीं है।
#15. मोबाइल क्रेच के बालवाड़ी अनुभाग में बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को कैसे को बढ़ावा दिया जाता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- बाल-केंद्रित शिक्षा: प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों पर औपचारिक शिक्षा या होमवर्क का बोझ नहीं डाला जाता, बल्कि खेल-खेल में सीखने (Play-way method) पर जोर दिया जाता है।
- अन्य विकल्प: औपचारिक शिक्षा, पाठ रटाना या होमवर्क देना इस आयु वर्ग (3-6 वर्ष) के बच्चों के मानसिक विकास के अनुकूल नहीं है और यह बालवाड़ी के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
- निष्कर्ष: रचनात्मक और आनंददायक गतिविधियों (जैसे गीत, कहानी और मुक्त खेल) से बच्चों का सामाजिक, भाषाई और संज्ञानात्मक विकास बेहतर तरीके से होता है।
#16. ई. सी. सी. ई. कार्यकर्त्ताओं को एन. सी. ई. आर. टी. से सम्पर्क करना चाहिए ताकि वे प्राप्त कर सकें ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- NCERT की भूमिका: एनसीईआरटी प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम रूपरेखा, मार्गदर्शिकाएँ और बच्चों की आयु के अनुकूल शिक्षण सामग्री विकसित करने का प्रमुख संस्थान है।
- अन्य विकल्प: टीकाकरण अभियान स्वास्थ्य विभाग से, पूरक आहार आंगनवाड़ी/ICDS योजनाओं से तथा वृद्धि चार्ट स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास मंत्रालय के माध्यम से मिलते हैं।
- निष्कर्ष: ईसीसीई शिक्षकों को बच्चों के संज्ञानात्मक और रचनात्मक विकास के लिए एनसीईआरटी के शैक्षणिक संसाधनों और शिक्षण-अधिगम सामग्री का उपयोग करना चाहिए।
#17. सोनू स्कूल में शांत रहता है (किसी से बात नहीं करता) लेकिन घर पर बात करता और खेलता है। यह किस प्रकार की कठिनाई का संकेत है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- व्यवहार में अंतर: बच्चे का घर पर सक्रिय होना यह साबित करता है कि उसकी शारीरिक क्षमताएं (दृष्टि, श्रवण और चलना-फिरना) पूरी तरह सामान्य हैं, इसलिए समस्या शारीरिक न होकर सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समायोजन से जुड़ी है।
- अन्य विकल्प: दृष्टि, श्रवण या चलने-फिरने से जुड़ी कठिनाइयाँ होने पर उनका प्रभाव घर और स्कूल दोनों जगहों के व्यवहार पर नजर आता है।
- निष्कर्ष: नए या बाहरी परिवेश में बच्चों का संकोच करना या संवाद न कर पाना उनके सामाजिक और भावनात्मक समायोजन में आने वाली बाधाओं को दर्शाता है।
#18. जो बच्चा किसी भी उपयोगी (सार्थक) ध्वनि को बिल्कुल नहीं सुन सकता, उसे आवश्यकता होगी ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- वैकल्पिक संचार: श्रवण बाधित बच्चों के लिए इशारों की भाषा (Sign Language) और दृश्य माध्यमों का उपयोग प्रभावी संवाद स्थापित करने का मुख्य साधन बनता है।
- अन्य विकल्प: खेल प्रशिक्षण, बड़ी छपाई वाली किताबें (जो दृष्टिबाधित बच्चों के लिए होती हैं) या अधिक खेल का समय इस विशेष आवश्यकता (श्रवण अक्षमता) का समाधान नहीं हैं।
- निष्कर्ष: श्रवण अक्षमता से ग्रस्त बच्चों को अपनी बात कहने और दूसरों को समझने के लिए वैकल्पिक और दृश्य संचार पद्धतियों की सख्त जरूरत होती है।
#19. पाठ्य सामग्री के आधार पर, निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र सामान्य कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक नहीं है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- अनिवार्य कार्यक्षमता: देखना, सुनना और चलना-फिरना (गतिशीलता) बुनियादी शारीरिक जरूरतें हैं जिनके बिना सामान्य जीवन कार्य प्रभावित होते हैं।
- अन्य विकल्प: दृष्टि, श्रवण और गतिशीलता शारीरिक और संवेदी विकास के ऐसे मुख्य स्तंभ हैं जो स्वतंत्र जीवनयापन के लिए जरूरी हैं।
- निष्कर्ष: सृजनात्मकता व्यक्तित्व का एक विशेष और सराहनीय पहलू है, परंतु यह बुनियादी शारीरिक कार्यप्रणाली का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।
#20. वे बच्चे जिन्हें सरल निर्देशों या रोजमर्रा की अवधारणाओं को समझने में कठिनाई होती हैं, उनमें किस बात की सबसे अधिक सम्भावना होती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development): सीखने की गति, तर्क करने की क्षमता और निर्देशों को समझकर उनका पालन करने का संबंध सीधे बच्चे की बौद्धिक क्षमता से होता है।
- अन्य विकल्प: चलने-फिरने, दृष्टि या कमजोर सामाजिक-भावात्मक कार्यक्षमता का संबंध मुख्य रूप से गतिशीलता, संवेदी अंगों या भावनात्मक समायोजन से है, न कि सीधे सरल निर्देशों को समझने की मानसिक क्षमता से।
- निष्कर्ष: यदि कोई बच्चा सामान्य निर्देश और दैनिक जीवन की बातें आसानी से नहीं समझ पा रहा है, तो यह उसकी बौद्धिक व संज्ञानात्मक विकास में देरी का संकेत हो सकता है।
#21. आर्थिक रूप से वंचित परिवारों के बच्चे ‘विशेष बच्चे’ माने जाते हैं क्योंकि इनमें से अधिकांश बच्चे ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- बाल श्रम और गरीबी: आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव के कारण इन बच्चों के सामने बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ शिक्षा का संकट भी खड़ा हो जाता है।
- अन्य विकल्प: कमजोर दृष्टि, आक्रामक व्यवहार या अत्यधिक बुद्धिमत्ता का आर्थिक स्थिति से कोई सीधा और अनिवार्य संबंध नहीं होता है।
- निष्कर्ष: सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के कारण बच्चों का शिक्षा से वंचित होना और श्रम कार्यों में लिप्त होना उनके विकास में एक बड़ी बाधा है।
#22. बौद्धिक विकलांगता (मानसिक मंदता) से हमेशा जुड़ा हुआ लक्षण है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- विकास में देरी (Developmental Delay): बौद्धिक विकलांगता का प्रत्यक्ष संबंध बच्चे की बौद्धिक और मानसिक परिपक्वता से होता है, जिससे उसके विकास के चरण विलंब से आते हैं।
- अन्य विकल्प: श्रवण दोष, चुप रहना या निर्देशों का तेजी से पालन करना बौद्धिक विकलांगता का अनिवार्य या सर्वमान्य लक्षण नहीं है।
- निष्कर्ष: विकासात्मक चरणों (माइलस्टोन्स) का अपने तय समय से काफी पीछे रहना बौद्धिक और मानसिक विकास में बाधा का मुख्य संकेतक है।
#23. ‘मानसिक आयु’ शब्द का अर्थ है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- मानसिक आयु (MA) vs वास्तविक आयु (CA): मानसिक आयु बच्चे की बौद्धिक परिपक्वता को मापती है, जबकि वास्तविक आयु उसके जन्म से लेकर अब तक के समय को दर्शाती है।
- अन्य विकल्प: बच्चे की वास्तविक आयु, शारीरिक क्षमता या मस्तिष्क का वजन मानसिक आयु के सटीक और मान्य अर्थ को परिभाषित नहीं करते हैं।
- निष्कर्ष: मानसिक आयु किसी व्यक्ति की बौद्धिक विकास की गति और स्तर को समझने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
#24. निम्नलिखित में से कौन-सा डाउंस (Down’s) सिंड्रोम का कारण है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- आनुवंशिक कारण: यह स्थिति किसी माता-पिता की जीवनशैली, शराब के सेवन, धूम्रपान या दुर्घटना के कारण नहीं होती, बल्कि यह कोशिका विभाजन के दौरान प्राकृतिक रूप से होने वाली आनुवंशिक त्रुटि है।
- अन्य विकल्प: शराब, धूम्रपान या चोट लगना डाउंस सिंड्रोम के प्रत्यक्ष कारण नहीं हैं।
- निष्कर्ष: गुणसूत्रों (Chromosomes) की संख्या में असंतुलन या त्रुटि ही डाउंस सिंड्रोम का मुख्य वैज्ञानिक कारण है।
#25. बच्चों में होने वाले दौरे को कहा जाता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- दौरे की स्थिति: मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें बार-बार दौरे पड़ने की समस्या हो सकती है।
- अन्य विकल्प: पोलियो एक वायरल संक्रमण है जो लकवा का कारण बनता है, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मांसपेशियों की कमजोरी से जुड़ा है, और अस्थमा सांस की नली से संबंधित बीमारी है।
- निष्कर्ष: बार-बार और अचानक दौरे आना मिर्गी (एपिलेप्सी) की मुख्य विशेषता है।
#26. एक शिक्षिका प्रमस्तिष्क घात (सेरेब्रल पाल्सी) वाले बच्चों की सहायता कैसे कर सकती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- समावेशी शिक्षा (Inclusive Education): बच्चों को अलग-थलग करने या उनके सभी कार्य स्वयं करने के बजाय उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार अनुकूलित वातावरण और अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।
- अन्य विकल्प: बच्ची को अन्य बच्चों से दूर रखना, उसके सारे काम स्वयं करना या बिना सोचे-समझे हर गतिविधि को अत्यधिक सरल बना देना उसकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा नहीं देता है।
- निष्कर्ष: गतिविधियों में उचित संशोधन और अनुकूलन (Adaptation) करके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा और गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है।
#27. वह व्यक्ति जो क्रियात्मक समन्वय सुधारने में सहयोग करता है, वह कहलाता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- भौतिक चिकित्सा (Physiotherapy): यह चिकित्सा पद्धति विशेष रूप से शारीरिक गतिविधियों, मांसपेशियों के नियंत्रण और चलने-फिरने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए जानी जाती है।
- अन्य विकल्प: वाक् चिकित्सक (Speech Therapist) बोलने और भाषा से जुड़ी समस्याओं में, सर्जन शल्यक्रिया में, और सामाजिक कार्यकर्ता सामाजिक-आर्थिक सहायता में मदद करते हैं।
- निष्कर्ष: बच्चों के शारीरिक और गत्यात्मक विकास (Motor Development) को सही दिशा देने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
#28. गर्भवती माता में कौन-सा संक्रमण होने पर बच्चे में मस्तिष्क क्षति हो सकती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- टेराटोजेनिक प्रभाव (Teratogenic Effect): रूबेला वायरस प्लेसेंटा को पार करके भ्रूण के विकास को बुरी तरह प्रभावित करता है।
- अन्य विकल्प: डिप्थीरिया, पेचिश (डिसेंट्री) और टिटनेस अन्य प्रकार के संक्रमण या बीमारियां हैं, जो सीधे तौर पर भ्रूण के मस्तिष्क की क्षति का मुख्य कारण नहीं बनतीं जितना कि रूबेला का संक्रमण।
- निष्कर्ष: गर्भवती महिलाओं को रूबेला जैसे संक्रामक रोगों से बचाव और समय पर टीकाकरण (Vaccination) की अत्यंत आवश्यकता होती है ताकि होने वाले बच्चे को बचाया जा सके।
#29. बच्चे को दौरा पड़ने पर उसके जबड़ों के बीच रूमाल रखने का उद्देश्य है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- दौरे के समय सुरक्षा: दौरे के वक्त मरीज को सुरक्षित स्थिति में लिटाना और उसके वायुमार्ग (Airway) को सुरक्षित रखना जरूरी होता है।
- अन्य विकल्प: सिर की हरकत रोकना, खाना खाने से रोकना या उल्टी रोकना इस उपाय का उद्देश्य नहीं होता है। (ध्यान रखें कि जबड़ों के बीच जबरन कोई सख्त चीज डालने से बचना चाहिए, लेकिन प्राथमिक सुरक्षा के लिहाज से जीभ को बचाने के लिए मुलायम कपड़ा या पैड इस्तेमाल किया जाता है।)
- निष्कर्ष: दौरे के दौरान जीभ और दांतों को सुरक्षित रखना प्राथमिक देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
#30. दम्पत्तियों को वंशागत चिकित्सा समस्याओं के बारे में परामर्श देना कहलाता है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- जेनेटिक काउंसलिंग: इसके अंतर्गत परिवार के इतिहास का अध्ययन करके गुणसूत्रों या जीन से जुड़ी बीमारियों के जोखिम का आकलन किया जाता है।
- अन्य विकल्प: पारिवारिक, शैक्षणिक या पेशेवर परामर्श का संबंध आनुवंशिक चिकित्सा समस्याओं के निदान और वंशागत विकारों के आकलन से नहीं है।
- निष्कर्ष: वंशागत बीमारियों से जुड़े जोखिमों को समझने और सही चिकित्सीय निर्णय लेने के लिए आनुवंशिक परामर्श अत्यधिक उपयोगी होता है।
#31. डी. बी. श्रवण हानि वाले बच्चे किस श्रेणी में आते हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- डिफ़-ब्लाइंडनेस (Deaf-Blindness): जब किसी बच्चे को श्रवण और दृष्टि दोनों अक्षमताएं एक साथ होती हैं, तो उसके विकास और सीखने की प्रक्रिया पर इसका सबसे गहरा प्रभाव पड़ता है।
- अन्य विकल्प: हल्की, मध्यम या सामान्य गंभीर हानि केवल एक संवेदी अंग (जैसे केवल कम सुनना या कम देखना) से जुड़ी हो सकती है, जबकि दोनों का एक साथ होना अति गंभीर श्रेणी में आता है।
- निष्कर्ष: दोहरे संवेदी नुकसान (दृष्टि और श्रवण दोनों का अभाव) वाले बच्चों की विशेष आवश्यकताएं अत्यंत जटिल होती हैं, जिन्हें अति गंभीर श्रेणी माना जाता है।
#32. कौन-सा संचार माध्यम तत्काल प्रतिक्रिया प्रदान करता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- तत्काल प्रतिक्रिया: आमने-सामने बातचीत करने पर तुरंत पता चल जाता है कि सामने वाले ने बात को किस रूप में समझा है।
- अन्य विकल्प: अखबार में लेख, टेलीविजन और रेडियो प्रसारण जनसंचार (Mass Communication) के साधन हैं, जिनमें फीडबैक मिलने में समय लगता है या यह प्रत्यक्ष नहीं होता।
- निष्कर्ष: व्यक्तिगत संवाद या आमने-सामने की बातचीत संप्रेषण का सबसे त्वरित और प्रभावी माध्यम है जिसमें तुरंत प्रतिक्रिया मिलती है।
#33. समुदाय को मौखिक पुनर्लीकरण घोल (ओ. आर. एस. अथवा जीवन रक्षक घोल) की तैयारी समझाने का सबसे अच्छा तरीका है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- प्रायोगिक शिक्षण (Demonstration): स्वास्थ्य शिक्षा में ओ.आर.एस. घोल की सही मात्रा (जैसे पानी और नमक-चीनी का अनुपात) को व्यावहारिक रूप से करके दिखाना सबसे ज्यादा असरदार होता है।
- अन्य विकल्प: केवल मौखिक वर्णन, कहानी या केस स्टडी से ग्रामीण या आम समुदाय को सटीक माप और प्रक्रिया समझने में कठिनाई हो सकती है।
- निष्कर्ष: बोलकर समझाने के साथ-साथ सामने लाइव प्रदर्शन करने से समुदाय के लोगों में गलतियों की गुंजाइश नहीं रहती और वे सही ढंग से जीवन रक्षक घोल बनाना सीख जाते हैं।
#34. श्रवण बाधित बच्चे को प्रारंभिक श्रवण संबंधी प्रशिक्षण न प्रदान करने से होने वाली एक बड़ी हानि है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention): शुरुआती वर्षों में श्रवण प्रशिक्षण देने से बच्चों को ध्वनियों को पहचानने और मौखिक भाषा सीखने में बहुत मदद मिलती है।
- अन्य विकल्प: हियरिंग एड का उपयोग करना पूरी तरह बंद हो जाएगा, अवशिष्ट श्रवण अचानक हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा, या वयस्क होने पर सामाजिक अलगाव – ये सभी इसके अतिशयोक्तिपूर्ण या अप्रत्यक्ष परिणाम हैं, जबकि मुख्य व्यावहारिक और विकासात्मक हानि ओष्ठ पठन और संकेतों पर अत्यधिक निर्भरता बनना है।
- निष्कर्ष: समय पर श्रवण प्रशिक्षण न मिलने से बच्चे की प्राकृतिक श्रवण और मौखिक संप्रेषण क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता है।
#35. संचार में प्रतिक्रिया (फीडबैक) के बारे में कौन-सा कथन सही है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- फीडबैक का महत्व: यह संचार को एकतरफा (One-way) होने से बचाकर उसे दोतरफा (Two-way) और सफल बनाती है।
- अन्य विकल्प: प्रतिक्रिया संचार के प्रवाह को बाधित नहीं करती बल्कि उसे सुचारू बनाती है; यह वैकल्पिक नहीं बल्कि अत्यंत आवश्यक है; और यह केवल आमने-सामने ही नहीं बल्कि जनसंचार, डिजिटल मीडिया और अन्य सभी प्रकार के संचार में भी संभव है।
- निष्कर्ष: बिना फीडबैक के संचार की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है, क्योंकि यह यह सुनिश्चित करती है कि संदेश सही रूप में समझा गया है या नहीं।
#36. जानकारी-आधारित (सूचना मूलक) संदेशों का मुख्य उद्देश्य होता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- सूचना का प्रसार: इस प्रकार के संदेशों का उद्देश्य किसी विषय के बारे में केवल शिक्षित करना या तथ्य बताना होता है, न कि तुरंत कोई व्यवहार बदलना या कार्रवाई कराना।
- अन्य विकल्प: व्यवहार बदलना (प्रेरणात्मक संदेश), कार्रवाई के लिए प्रेरित करना (प्रचार या कार्रवाई मूलक संदेश), और मनोरंजन करना (मनोरंजन मूलक संदेश) अलग-अलग उद्देश्यों वाले संचार के प्रकार हैं।
- निष्कर्ष: सूचनात्मक संदेशों का केंद्रीय फोकस सटीक और स्पष्ट तथ्य प्रदान करना होता है।
#37. संचार प्रक्रिया में व्याख्यान की विधि (तरीका) सबसे अधिक उपयोगी है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- व्याख्यान विधि की विशेषता: यह एक शिक्षक-केंद्रित (Teacher-centered) और एकतरफा प्रवाह वाली पद्धति है, जो तथ्यात्मक जानकारी और सैद्धांतिक अवधारणाओं को तेजी से साझा करने में प्रभावी होती है।
- अन्य विकल्प: छात्रों की समझ का परीक्षण (मूल्यांकन द्वारा), हाथ-कौशल सिखाना (प्रायोगिक/प्रदर्शन विधि द्वारा), और दृष्टिकोण विकसित करना (चर्चा या समूह संवाद द्वारा) अन्य शिक्षण पद्धतियों के अंतर्गत आते हैं।
- निष्कर्ष: सैद्धांतिक विषयों में कम समय में व्यापक पाठ्यक्रम या सूचनाओं को संप्रेषित करने के लिए व्याख्यान विधि सबसे अधिक उपयोगी मानी जाती है।
#38. संचार प्रक्रिया में सामूहिक विचार-विमर्श (चर्चा) किस उद्देश्य के लिए सबसे उपयोगी है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- समूह चर्चा की महत्ता: यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है और विभिन्न दृष्टिकोणों से समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने में सहायक होती है।
- अन्य विकल्प: मनोरंजन करना (मनोरंजन माध्यमों का काम है), तकनीकी कौशल सिखाना (प्रदर्शन विधि का काम है), और लंबा व्याख्यान देना (एकतरफा व्याख्यान विधि का हिस्सा है) – ये सभी सामूहिक चर्चा के मुख्य उद्देश्य नहीं हैं।
- निष्कर्ष: सामुदायिक सहभागिता और जटिल समस्याओं के सर्वमान्य समाधान के लिए सामूहिक विचार-विमर्श सबसे सशक्त माध्यम है।
#39. संचार प्रक्रिया में भूमिका अभिनय (टोल प्ले) विशेष रूप से तब उपयोगी है जब?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- भूमिका अभिनय का महत्व: यह विधि लोगों के मन का डर और झिझक दूर करने, सहानुभूति विकसित करने तथा व्यावहारिक परिस्थितियों को आसानी से समझने में मदद करती है।
- अन्य विकल्प: सटीक माप, तथ्यात्मक संदेश या बड़े दर्शक समूह के लिए रोल प्ले की तुलना में अन्य संचार माध्यम या विधियां अधिक उपयुक्त होती हैं।
- निष्कर्ष: झिझक को तोड़ने और व्यावहारिक कौशल या दृष्टिकोण को बदलने के लिए भूमिका अभिनय एक बहुत ही प्रभावशाली शिक्षण व संचार तकनीक है।
#40. संचार प्रक्रिया में कहानी-सुनाने का उपयोग किया जा सकता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- कहानी की शक्ति: कहानियाँ इंसानी भावनाओं से जुड़ी होती हैं, जिससे वे जटिल संदेशों या सामाजिक मुद्दों को बहुत ही सहजता और प्रभावशीलता के साथ लोगों के मन तक पहुँचाती हैं।
- अन्य विकल्प: अन्य सभी शिक्षण विधियों को बदलना, केवल मनोरंजन करना या अंतःक्रिया से बचना कहानी-सुनाने के उद्देश्य नहीं हैं; यह बल्कि अंतःक्रिया और जुड़ाव को बढ़ावा देती है।
- निष्कर्ष: लोगों के विचारों को झकझोरने और किसी विशेष विषय पर नया दृष्टिकोण विकसित करने के लिए कहानी-सुनाना एक प्राचीन और अत्यंत प्रभावी संचार तकनीक है।
#41. कार्यवाही को सक्षम बनाने के लिए बैठकों (मीटिंग) का उद्देश्य होना चाहिए ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- बैठक का उद्देश्य: एक उत्पादक बैठक का लक्ष्य स्पष्ट निर्णय लेना और कार्ययोजना बनाना होता है।
- अन्य विकल्प: अंतहीन बहस करना, चर्चाओं से बचना या केवल व्यक्तिगत लाभ पर ध्यान केंद्रित करना एक अच्छी और उद्देश्यपूर्ण बैठक के नकारात्मक लक्षण हैं।
- निष्कर्ष: सामूहिक निर्णयों को लागू करने के लिए सभी सदस्यों की सहमति और सहयोग बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम होता है।
#42. निम्नलिखित में से कौन-सा व्यक्तिगत संचार की कार्यनीति (रणनीति) नहीं है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- व्यक्तिगत संचार: इसमें चुनिंदा व्यक्तियों या छोटे समूहों से सीधे व्यक्तिगत संपर्क किया जाता है।
- अन्य विकल्प: महिला-से-महिला, बच्चा-से-बच्चा और बच्चे-से-माता-पिता रणनीतियाँ व्यक्तिगत और अंतर्सम्बंधों पर आधारित संप्रेषण के रूप हैं।
- निष्कर्ष: अभियान बड़े समूहों को लक्षित करता है, इसलिए इसे व्यक्तिगत संचार की श्रेणी में नहीं रखा जाता है।
#43. लोग अक्सर बदलाव का विरोध करते हैं क्योंकि ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- परिवर्तन का प्रतिरोध (Resistance to Change): यह एक स्वाभाविक मानवीय प्रवृत्ति है जहाँ लोग अपनी स्थापित दिनचर्या और सुरक्षा क्षेत्र (Comfort Zone) से बाहर निकलने में हिचकिचाते हैं।
- अन्य विकल्प: लोग स्वभाव से आलसी होते हैं, शारीरिक क्षमता की कमी होती है, या मीडिया के संपर्क में न होना – ये बदलाव के विरोध के मुख्य या वैज्ञानिक कारण नहीं हैं।
- निष्कर्ष: असुरक्षा की भावना और परिणामों का भय ही अधिकांश लोगों को किसी भी नए बदलाव को अपनाने से रोकता है।
#44. बच्चे से माता-पिता की संचार कार्यनीति (रणनीति) प्रभावी है क्योंकि ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- परिवर्तन के वाहक: बच्चे अक्सर अपने माता-पिता के लिए उत्प्रेरक (Catalyst) का काम करते हैं, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर घर के बड़े लोगों की सोच में बदलाव आता है।
- अन्य विकल्प: माता-पिता का बच्चों की सलाह न मानना, काम का बोझ कम होना, या माता-पिता का पहले से सब कुछ जानना – इस रणनीति की प्रभावशीलता के सही कारण नहीं हैं।
- निष्कर्ष: बच्चों के माध्यम से संदेश परिवार के हर कोने तक आसानी से पहुँचते हैं क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों की बातों और सीख पर विशेष ध्यान देते हैं।
#45. केस अध्ययन (स्टडी) विशेष रूप से उपयोगी होती है जब ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- केस स्टडी की विशेषता: यह किसी वास्तविक या काल्पनिक परिस्थिति का विस्तृत विवरण होता है जो शिक्षार्थियों को व्यावहारिक रूप से सोचने और निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।
- अन्य विकल्प: बहुत बड़ी संख्या में श्रोताओं के लिए व्याख्यान या जनसंचार, तथ्यात्मक संदेश के लिए सूचनात्मक माध्यम, और झिझक दूर करने के लिए भूमिका अभिनय (रोल प्ले) अधिक उपयुक्त होते हैं।
- निष्कर्ष: व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से गहरी समझ विकसित करने के लिए केस अध्ययन एक अत्यंत प्रभावी शिक्षण और संचार उपकरण है।
#46. संगठननात्मक संरचना से तात्पर्य है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- संरचना का स्वरूप: यह संगठन के भीतर पदानुक्रम (Hierarchy), कार्य-विभाजन और संप्रेषण के मार्गों को स्पष्ट करती है।
- अन्य विकल्प: वित्त का प्रबंधन (वित्तीय प्रबंधन), कर्मचारियों की संख्या (कार्यबल आकार), और संगठन के लक्ष्य (विजन/मिशन) संगठननात्मक संरचना के हिस्से नहीं बल्कि इसके अन्य पहलू हैं।
- निष्कर्ष: एक स्पष्ट संगठननात्मक संरचना किसी भी संस्था या समुदाय में कार्यकुशलता और उत्तरदायित्व को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
#47. वह अधिनियम जिसके अन्तर्गत एक स्वैच्छिक संगठन को क्रेच सेवाओं के लिए सरकारी सहायता प्राप्त करने हेतु पंजीकृत होना आवश्यक है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- पंजीकरण की आवश्यकता: सरकारी अनुदान और मान्यता प्राप्त करने के लिए संगठन का वैधानिक रूप से पंजीकृत होना जरूरी है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
- अन्य विकल्प: कम्पनी अधिनियम (कंपनियों के लिए), सहकारी अधिनियम (सहकारिता समितियों के लिए), और श्रम कल्याण अधिनियम (औद्योगिक श्रमिकों के कल्याण से जुड़े प्रावधानों के लिए) क्रेच अनुदान हेतु प्राथमिक पंजीकरण अधिनियम नहीं हैं।
- निष्कर्ष: स्वैच्छिक संगठनों द्वारा क्रेच और बाल देखभाल सेवाएं शुरू करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकरण आवश्यक शर्त है।
#48. प्रबन्धन में ‘नियंत्रण’ प्रक्रिया को तैयार करने का पहला चरण है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- नियंत्रण प्रक्रिया के चरण: इसमें सबसे पहले मानक स्थापित किए जाते हैं, फिर कार्य निष्पादन को आँका जाता है, दोनों की तुलना की जाती है, और अंत में विचलन पाए जाने पर सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।
- अन्य विकल्प: कार्य निष्पादन को आँकना, सुधारात्मक कार्रवाई करना और कर्तव्यों का आवंटन करना इसके बाद के या अन्य प्रबंधकीय कार्य (जैसे आयोजन) के हिस्से हैं।
- निष्कर्ष: बिना पूर्व निर्धारित मानदंडों या लक्ष्यों के नियंत्रण की प्रक्रिया को शुरू नहीं किया जा सकता, इसलिए मानदंडों की स्थापना इसका पहला चरण है।
#49. एक आई. सी. डी. एस. परियोजना में होते हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- आई.सी.डी.एस. परियोजना: यह बच्चों (0-6 वर्ष), गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक विकास के लिए चलाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है।
- अन्य विकल्प: 25, 50 या 200 आँगनबाड़ी केंद्र मानक ICDS परियोजना की प्रशासनिक संरचना के प्राथमिक मानदंड नहीं हैं; मानक ग्रामीण/शहरी परियोजनाओं के लिए सामान्य संख्या 100 आँगनबाड़ी होती है (यद्यपि पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्रों में यह संख्या कम हो सकती है)।
- निष्कर्ष: प्रशासनिक और मैदानी स्तर पर सुचारू संचालन के लिए एक मानक आईसीडीएस परियोजना में लगभग 100 आँगनबाड़ी केंद्र शामिल होते हैं।
#50. जब विकलांग (अपंग) बच्चा अन्य बच्चों से भिन्न व्यवहार करता है और माता-पिता इसके लिए कोई अन्य कारण बताते हैं, तो उनकी इस प्रतिक्रिया को कहा जाता है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- खंडन (Denial): इस अवस्था में व्यक्ति वास्तविकता का सामना करने से बचने के लिए सच को स्वीकार ही नहीं करता है।
- अन्य विकल्प: मानसिक आघात (सद्मा) इस स्थिति का शुरुआती मानसिक धक्का है, क्रोध बाद की प्रतिक्रिया है, और लेन-देन का नजरिया मोल-भाव की अवस्था को दर्शाता है।
- निष्कर्ष: वास्तविकता को स्वीकार करने में असमर्थता के कारण माता-पिता शुरुआत में खंडन की स्थिति में रहते हैं।
#51. बौद्धिक विकलांगता (मानसिक मंदता) वाले बच्चे में निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता नहीं पायी जाती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- बौद्धिक विकलांगता के लक्षण: ऐसे बच्चों की एकाग्रता अवधि (Attention span) बहुत कम होती है, उनकी याददाश्त (विशेषकर शॉर्ट-टर्म मेमोरी) कमजोर होती है, और उन्हें कोई भी नई बात या कौशल सीखने के लिए बार-बार अभ्यास और दोहराव (Repetition) की आवश्यकता होती है।
- अन्य विकल्प: एकाग्रता की कमी, पिछली बातों को भूलना और सीखने के लिए किसी क्रिया को बार-बार दोहराना – ये तीनों ही मानसिक मंदता या बौद्धिक अक्षमता की स्पष्ट विशेषताएं हैं।
- निष्कर्ष: कल्पनाशील और रचनात्मक खेल उच्च मानसिक क्षमता और संज्ञानात्मक विकास का संकेत है, जो आमतौर पर बौद्धिक विकलांगता वाले बच्चों में नहीं पाया जाता है।
#52. किसमें प्रतिक्रिया की सबसे कम सम्भावना होती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- कम प्रतिक्रिया वाले माध्यम: बड़े सम्मेलनों या सभाओं में व्याख्यान के दौरान श्रोताओं की संख्या अधिक होने के कारण व्यक्तिगत स्तर पर तुरंत फीडबैक देना कठिन होता है।
- अन्य विकल्प: टेलीविजन पर होने वाली बातचीत (चर्चा शो/पैनल), भूमिका अभिनय (रोल प्ले), और रसोई में रेसिपी का प्रदर्शन – इन सभी में श्रोताओं या प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता और तत्काल प्रतिक्रिया की संभावना बहुत अधिक होती है।
- निष्कर्ष: बड़े व्याख्यानों या सम्मेलनों में संवाद का प्रवाह मुख्य रूप से वक्ता से श्रोता की ओर एकतरफा होता है, जिससे वहां प्रतिक्रिया की गुंजाइश सबसे कम बचती है।
#53. जब वक्ता किसी भी विषय की क्रमवार जानकारी श्रोतागण को देना चाहती है, तो इसके लिए सबसे उपयुक्त संचार सहायक सामग्री है?:
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- फ्लिप चार्ट की उपयोगिता: यह शिक्षण और प्रशिक्षण के दौरान विचारों के क्रमिक प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है, और इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।
- अन्य विकल्प: मॉडल (त्रि-आयामी प्रदर्शन के लिए), चित्र (स्थिर और एकल दृश्य के लिए), और पाई चार्ट (डेटा या प्रतिशत दर्शाने के लिए) क्रमवार जानकारी देने की तुलना में अन्य विशिष्ट उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
- निष्कर्ष: सिलसिलेवार और क्रमबद्ध बिंदुओं को समझाने के लिए फ्लिप चार्ट एक बेहतरीन पारंपरिक शिक्षण उपकरण है।
#54. किंडरगार्टन के संस्थापक थे ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- किंडरगार्टन अवधारणा: इसका शाब्दिक अर्थ बच्चों का बगीचा होता है, जहाँ बच्चों को प्राकृतिक वातावरण में खेल-खेल के माध्यम से शिक्षा दी जाती है।
- अन्य विकल्प: मारिया मोंटेसरी ने ‘मोंटेसरी पद्धति’, पेस्टालॉजी ने आधुनिक शिक्षा के मनोवैज्ञानिक आधार, और रबीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘शांतिनिकेतन’ की स्थापना की थी।
- निष्कर्ष: प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (Early Childhood Education) के विकास में फ्रोबेल के किंडरगार्टन मॉडल का ऐतिहासिक योगदान है।
#55. निम्नलिखित में से कौन-सा टैगोर की शिक्षा पद्धति का हिस्सा नहीं था ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- टैगोर की शिक्षा दर्शन: उनका मानना था कि बच्चों को चार दीवारों के बंधन से मुक्त रखकर खुली प्रकृति, पेड़ों और प्राकृतिक वातावरण के बीच शिक्षा दी जानी चाहिए।
- अन्य विकल्प: प्रकृति भ्रमण, गतिविधि आधारित शिक्षा और पर्यावरण के माध्यम से सीखना – ये सभी टैगोर की शांतिनिकेतन और विश्वभारती की शिक्षा प्रणाली के मुख्य स्तंभ थे।
- निष्कर्ष: ‘प्ले-गिफ्ट्स’ और ‘प्ले-सांग्स’ किंडरगार्टन पद्धति से जुड़े हैं, इसलिए यह टैगोर की शिक्षा पद्धति का हिस्सा नहीं है।
#56. अभिभावकों का कौन-सा व्यवहार यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने विकलांग (अपंग) बच्चे को स्वीकार नहीं किया है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- अस्वीकृति के लक्षण: स्वीकार न करने की स्थिति में माता-पिता या तो बच्चे को छिपाने की कोशिश करते हैं या अत्यधिक सुरक्षा के नाम पर उसे आत्मनिर्भर बनने से रोकते हैं।
- अन्य विकल्प: बच्चे को चुनौतीपूर्ण गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना, रिश्तेदारों से मिलने ले जाना, तथा अपनी रुचियों का ध्यान रखते हुए बच्चे को पूरा समय देना – ये सभी एक सकारात्मक, स्वस्थ और पूर्ण स्वीकृति (Acceptance) वाले अभिभावकीय व्यवहार को दर्शाते हैं।
- निष्कर्ष: बच्चे को चुनौतियों से दूर रखना और उसकी क्षमता पर अविश्वास करना बच्चे की स्वीकार्यता में कमी का संकेत होता है।
#57. जब माता-पिता को बच्चे में कोई रुचि नहीं होती, तो शिक्षिका के प्रति उनका व्यवहार प्रायः कैसा होता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- माता-पिता की उदासीनता: उपेक्षा की भावना के कारण ऐसे अभिभावक शिक्षक-अभिभावक बैठकों से दूर रहते हैं या बच्चे की कमियों को सुनने में रुचि नहीं दिखाते।
- अन्य विकल्प: बच्चे के संबंध में अत्यधिक रुचि लेना, अत्यधिक संरक्षण (Over-protection) दिखाना, या पूर्णतावादी व्यवहार होना- ये सभी बच्चे के प्रति जुड़ाव, चिंता या अत्यधिक लगाव को दर्शाते हैं, न कि रुचि का अभाव।
- निष्कर्ष: भावनात्मक जुड़ाव की कमी होने पर माता-पिता का रवैया अक्सर विद्यालय और शिक्षकों के प्रति नकारात्मक या असहयोगी हो जाता है।
#58. मोंटेसरी पद्धति की एक आलोचना है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- मोंटेसरी पद्धति की विशेषताएँ: यह बाल-केंद्रित (Child-centric) है, इसमें व्यक्तिगत शिक्षण (Individualized learning) पर जोर दिया जाता है, और इसकी शुरुआत मारिया मोंटेसरी द्वारा बौद्धिक विकलांग बच्चों के साथ किए गए कार्यों और अनुभवों के आधार पर हुई थी।
- अन्य विकल्प: बाल-केंद्रित होना, व्यक्तिगत शिक्षण की आवश्यकता और बौद्धिक विकलांग बच्चों पर किए गए कार्य से विकास – ये इस पद्धति की विशेषताएँ या सकारात्मक पहलू हैं, न कि इसकी आलोचना।
- निष्कर्ष: उच्च लागत और महंगे उपकरणों की अनिवार्यता ही मोंटेसरी प्रणाली की मुख्य सीमा या आलोचना मानी जाती है।
#59. बच्चों के लिए पहली चित्र-पुस्तक किसने विकसित की थी ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- कोमेनियस का योगदान: उन्होंने शिक्षा में दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) और चित्रों के माध्यम से पढ़ाने की अभिनव पद्धति की शुरुआत की, ताकि बच्चों को आसानी से ज्ञान मिल सके।
- अन्य विकल्प: टैगोर, फ्रोबेल और अनुताई वाघ ने आधुनिक बाल शिक्षा, प्रकृति-आधारित शिक्षण और किंडरगार्टन पद्धतियों में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, लेकिन पहली चित्र-पुस्तक विकसित करने का ऐतिहासिक श्रेय कोमेनियस को जाता है।
- निष्कर्ष: बाल साहित्य और शिक्षा के इतिहास में चित्रों से सुसज्जित पहली किताब तैयार करने वाले पहले शिक्षाविद् कोमेनियस थे।
#60. आई. सी. डी. एस. कार्यक्रम का विकास किसके कार्य से प्रेरित हुआ ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- ताराबाई मोदक का योगदान: उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी बच्चों के लिए ‘ग्राम बाल शिक्षा केंद्र’ और मोबाइल क्रेच जैसे अभिनव मॉडल चलाए, जिनका व्यापक अध्ययन करके बाद में राष्ट्रीय स्तर पर ICDS योजना की रूपरेखा तैयार की गई।
- अन्य विकल्प: महात्मा गांधी, रबीन्द्रनाथ टैगोर और मारिया मोंटेसरी के शिक्षा दर्शन का भी भारतीय शिक्षा प्रणाली पर व्यापक प्रभाव रहा है, किंतु ICDS कार्यक्रम की मैदानी संरचना विशेष रूप से मोदक जी के कार्यों से प्रेरित रही है।
- निष्कर्ष: ग्रामीण और आदिवासी बच्चों के विकास के लिए ताराबाई मोदक द्वारा स्थापित मॉडल आधुनिक ICDS योजना की नींव बने।
#61. चारागाह स्कूल (मीडो स्कूल) का विचार किसने शुरू किया था ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- मीडो स्कूल की अवधारणा: फ्रोबेल का मानना था कि बच्चे प्राकृतिक परिवेश (जैसे घास के मैदान या खुले बगीचे) में सबसे बेहतर सीखते हैं, जो कि उनके किंडरगार्टन दर्शन का भी एक प्रमुख हिस्सा था।
- अन्य विकल्प: ताराबाई मोदक ने भारत में आंगनबाड़ी और बालवाड़ी के क्षेत्र में कार्य किया, महात्मा गांधी ने बेसिक शिक्षा (वर्धा योजना) दी, और मारिया मोंटेसरी ने वैज्ञानिक शिक्षण प्रणालियों का विकास किया।
- निष्कर्ष: प्रकृति और खेल आधारित प्राथमिक शिक्षा के अंतर्गत चारागाह स्कूल का विचार फ्रोबेल की देन है।
#62. मोंटेसरी सामग्री का भारतीयकरण किसने किया ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- ताराबाई मोदक का योगदान: इन्हें भारत में ‘मोंटेसरी मदर’ भी कहा जाता है। उन्होंने विदेशी मोंटेसरी उपकरणों के विकल्प के रूप में भारतीय परिवेश के अनुकूल सस्ती और सुलभ शिक्षण सामग्रियां तैयार कीं।
- अन्य विकल्प: अनुताई वाघ उनकी प्रमुख सहकर्मी थीं, जबकि टैगोर और गांधी के अपने स्वतंत्र शिक्षा दर्शन थे।
- निष्कर्ष: मोंटेसरी शिक्षा प्रणाली को भारतीय समाज और गरीबों की पहुंच के भीतर लाने का श्रेय ताराबाई मोदक और उनके सहयोगियों को जाता है।
#63. किस शिक्षण दार्शनिक ने छोटे बच्चों को आध्यात्मिक और धर्मनिरपेक्ष कहानियाँ सुनाने पर जोर दिया ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- पेस्टालॉजी का दृष्टिकोण: उन्होंने शिक्षा के मनोवैज्ञानिकरण (Psychologization of Education) पर काम किया और बच्चों के नैतिक विकास में कहानियों और मौखिक शिक्षा को महत्वपूर्ण माना।
- अन्य विकल्प: कोमेनियस (चित्रमय पुस्तकों के लिए जाने जाते हैं), टैगोर (प्रकृति और स्वतंत्रता आधारित शिक्षा), और गांधी (बुनियादी तालीम) ने भी शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिए, लेकिन छोटे बच्चों को आध्यात्मिक और धर्मनिरपेक्ष कहानियों से जोड़ने पर विशेष बल पेस्टालॉजी के दर्शन में मिलता है।
- निष्कर्ष: बाल विकास और प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में नैतिक एवं आध्यात्मिक कहानियों को शामिल करने वाले प्रमुख शिक्षाविद् पेस्टालॉजी थे।
#64. बच्चे बार-बार क्रोधावेश (टेम्पर टेंट्रम) तब दिखाते हैं जब ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- व्यवहार का सुदृढीकरण (Reinforcement): बच्चे का गुस्सा तब और अधिक बढ़ जाता है जब उन्हें यह पता चल जाए कि नखरे दिखाने से उनके माता-पिता हथियार डाल देंगे।
- अन्य विकल्प: लगातार नजरअंदाज करना (शुरुआत में गुस्सा बढ़ सकता है लेकिन बाद में व्यवहार सुधर जाता है), माता-पिता का शांत रहना, या शिक्षक द्वारा अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करना – ये सभी टेम्पर टेंट्रम को कम करने या हतोत्साहित करने वाले उपाय हैं, न कि इसे बढ़ाने वाले।
- निष्कर्ष: बच्चों के अवांछित व्यवहार पर नकारात्मक प्रतिक्रिया या तुरंत समर्पण करने से उनका यह रवैया और पक्का हो जाता है।
#65. पाँच वर्ष की उम्र के बाद असंतमूत्रता बिस्तर गीला करना ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- विकासात्मक संदर्भ: यदि 5 वर्ष की आयु के बाद भी यह समस्या बनी रहती है, तो इसे मनोवैज्ञानिक दबाव, भावनात्मक असुरक्षा या शारीरिक कारणों से जुड़ा व्यवहारिक मुद्दा माना जाता है जिसके लिए परामर्श की आवश्यकता हो सकती है।
- अन्य विकल्प: यह कोई ऐसी सामान्य स्थिति नहीं है जो “अधिकतर” बच्चों में पाई जाए (बल्कि अधिकांश बच्चे इस उम्र तक नियंत्रण पा लेते हैं), और इसका कोई विशिष्ट संबंध केवल शहरी बच्चों या केवल लड़कियों से नहीं होता है।
- निष्कर्ष: 5 वर्ष के पश्चात बिस्तर गीला करना बच्चों में एक असामान्य व्यवहारिक या चिकित्सीय कठिनाई के रूप में देखा जाता है।
#66. जो बच्चे बिना किसी कारण दूसरों को चुटकी काटने का प्रतिकूल व्यवहार दिखाते हैं, उन्हें आवश्यकता होती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- संवेगात्मक आवश्यकता: बच्चे इस प्रकार के आक्रामक व्यवहार के जरिए अपनी किसी अनकही परेशानी या कुंठा को बाहर निकालते हैं, जिसे एक समझदार शिक्षक प्यार, धैर्य और उचित मार्गदर्शन से दूर कर सकता है।
- अन्य विकल्प: सख्त दंड देने से बच्चे में आक्रामकता और बढ़ सकती है; साथियों द्वारा अस्वीकार किए जाने से उसकी हीन भावना और गहरी होगी; और अन्य बच्चों द्वारा उसे चुटकी कटवाने से समस्या का समाधान होने के बजाय नकारात्मक माहौल उत्पन्न होगा।
- निष्कर्ष: प्रतिकूल व्यवहार करने वाले बच्चों को दंडित करने के बजाय उनकी समस्या को समझकर उन्हें उपचारात्मक सहायता (Support) प्रदान की जानी चाहिए।
#67. जब माता-पिता बच्चे को उसके आक्रामक व्यवहार के लिए शारीरिक दण्ड देते हैं, तो इससे ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- दंड का नकारात्मक प्रभाव: शारीरिक दंड से बच्चे में डर, विद्रोह या और अधिक आक्रामक रवैया पैदा होता है, न कि सुधार। वे बड़ों की नकल करके समस्याओं के समाधान के रूप में हिंसा को सही मानने लगते हैं।
- अन्य विकल्प: शारीरिक दंड से बच्चा अहिंसा नहीं बल्कि हिंसा सीखता है; इससे दूसरों के प्रति प्रतिकूल व्यवहार कम होने के बजाय और अधिक बढ़ जाता है; और बच्चे का गुस्सा शांत होने के बजाय और अधिक तीव्र हो जाता है।
- निष्कर्ष: बाल विकास और मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से शारीरिक दंड बच्चों में सकारात्मक बदलाव लाने में असफल रहता है और उनके आक्रामक स्वभाव को और अधिक सुदृढ़ कर देता है।
#68. प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान बच्चे का कुछ चीज चोरी करना किस रूप में समझा जाना चाहिए ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- बाल मनोविज्ञान का दृष्टिकोण: इस आयु वर्ग के बच्चों में सही और गलत का स्पष्ट नैतिक अंतर करने की क्षमता का क्रमिक विकास हो रहा होता है। बड़ों को उन्हें प्यार से सही और गलत का फर्क समझाना चाहिए।
- अन्य विकल्प: इसे कोई गंभीर अपराध मानना, जन्मजात प्रवृत्ति कहना, या केवल माता-पिता के पालन-पोषण की विफलता समझना उचित नहीं है, क्योंकि यह उस उम्र की एक आम विकासात्मक अवस्था का हिस्सा हो सकता है जिसे उचित मार्गदर्शन से सुधारा जा सकता है।
- निष्कर्ष: शुरुआती वर्षों में बच्चों के ऐसे व्यवहार को दंडात्मक दृष्टि से देखने के बजाय उनके विकासात्मक परिपक्वता के स्तर से जोड़कर देखना चाहिए।
#69. जब विनिर्वर्तित व्यवहार दिखाने वाले (अकेले और अपने में रहने वाले) बच्चे की ‘शांत’ और ‘अच्छा’ कहकर प्रशंसा की जाती है, तो इससे?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- सकारात्मक सुदृढीकरण का गलत प्रभाव: जब अवांछित या सामाजिक रूप से असहज व्यवहार (जैसे अत्यधिक अकेले रहना) की प्रशंसा की जाती है, तो वह आदत के रूप में पक्का हो जाता है। ऐसे बच्चों को समाजशील बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता होती है, न कि उनके अकेलेपन को बढ़ावा देने की।
- अन्य विकल्प: प्रशंसा करने से विनिर्वर्तित व्यवहार कम होने के बजाय बढ़ता है; व्यवहार पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है (अतः ‘कोई फर्क नहीं पड़ता’ गलत है); और इससे साथियों से मेलजोल बढ़ने के बजाय और कम हो जाता है।
- निष्कर्ष: बच्चों के अलगाववादी या विनिर्वर्तित स्वभाव को ‘अच्छा’ बताकर प्रोत्साहित करने से उनकी सामाजिकता प्रभावित होती है और वह व्यवहार और पक्का हो जाता है।
#70. कानूनी रूप से नेत्रहीन व्यक्ति वह है जिसकी दृष्टि तीक्ष्णता होती है?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- मानक परिभाषा: Snellen chart के अनुसार 20/200 का अर्थ है कि जो वस्तु एक सामान्य व्यक्ति 200 फीट की दूरी से स्पष्ट देख सकता है, उसे देखने के लिए नेत्रहीन व्यक्ति को 20 फीट की दूरी पर आना पड़ता है (चश्मे के साथ भी दृष्टि में यह सीमा बनी रहती है)।
- अन्य विकल्प: 20/50 या 20/100 जैसी दृष्टि आंशिक दृष्टिबाधा या सामान्य कमजोरी के अंतर्गत आती है, न कि कानूनी रूप से पूर्ण नेत्रहीनता की श्रेणी में।
- निष्कर्ष: विशेष शिक्षा और विकलांगता के संदर्भ में कानूनी रूप से नेत्रहीनता तय करने का यह एक सर्वमान्य चिकित्सा मानक है।
#71. जो बच्चा देख नहीं सकता, उसमें किस क्षेत्र में देरी हो सकती है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- विकास पर प्रभाव: दृष्टिबाधित बच्चों को पर्यावरण से दृश्य संकेत नहीं मिलने के कारण अंतरिक्ष और दूरी का अंदाजा लगाने में अधिक समय लगता है, जिससे वे थोड़ा देर से चलना शुरू कर सकते हैं। हालांकि, उचित प्रशिक्षण और स्पर्श-आधारित उत्तेजना से इस अंतर को पाटा जा सकता है।
- अन्य विकल्प: सोने की प्रक्रिया, प्राकृतिक रूप से सांस लेने की क्षमता, या जन्मजात सुनने की क्षमता पर दृष्टिहीनता का सीधा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है (बल्कि उनके अन्य संवेदी अंग जैसे श्रवण शक्ति और अधिक तीव्र हो जाते हैं)।
- निष्कर्ष: दृष्टिबाधित बच्चों में शुरुआती शारीरिक गतिकीय विकास (जैसे घुटनों के बल चलना) में हल्की देरी होना एक सामान्य मनोवैज्ञानिक और विकासात्मक अवलोकन है।
#72. पेशी-कंकाली (मस्कुलोस्केलेटल) विकलांगता का उदाहरण है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- अन्य विकल्पों का वर्गीकरण:
- पोलियो: यह एक वायरल संक्रमण है जो तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को प्रभावित करता है।
- प्रमस्तिष्क घात (Cerebral Palsy): यह मस्तिष्क क्षति के कारण होने वाला न्यूरोलॉजिकल विकार है जो मांसपेशियों के नियंत्रण को प्रभावित करता है।
- दमा (Asthma): यह श्वसन तंत्र (Respiratory System) से संबंधित चिकित्सीय स्थिति है।
- अन्य विकल्पों का वर्गीकरण:
- निष्कर्ष: कंकाल और मांसपेशियों की संरचना से सीधे जुड़े होने के कारण ‘क्लब फुट’ पेशी-कंकाली विकलांगता का सटीक उदाहरण है।
#73. मोबाइल क्रेच के ‘लोक दूत’ नाट्य मंडली का कार्य है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- लोक दूत का कार्य: यह मंडली कला और सांस्कृतिक माध्यमों का उपयोग करके आम जनता तक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संदेश आसानी से पहुँचाती है।
- अन्य विकल्प: निर्माण मजदूरों को रोजगार देना, बच्चों को टीकाकरण प्रदान करना, या किशोर लड़कियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देना – ये अन्य प्रशासनिक या स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाओं या योजनाओं के कार्य हैं, जबकि ‘लोक दूत’ विशेष रूप से सामुदायिक जागरूकता और संवाद के लिए बनाई गई नाट्य इकाई है।
- निष्कर्ष: जन-जागरूकता फैलाने और बच्चों के स्वास्थ्य-स्वच्छता के संदेश को प्रभावी ढंग से समझाने में इस नाट्य मंडली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
#74. बधिर बच्चे ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- ध्वनि और श्रवण का संबंध: भाषा और वाणी के विकास के लिए श्रवण शक्ति का होना अनिवार्य है। बहरेपन के कारण बच्चे ध्वनियों की नकल नहीं कर पाते, जिससे आगे चलकर मौखिक भाषा का विकास बाधित हो जाता है।
- अन्य विकल्प: बधिर बच्चे बबलाना शुरू ही नहीं करते – यह धारणा गलत है क्योंकि शुरुआती बबलाना जन्मजात और सहज होता है; और सही उम्र में शुरू होकर बबलाना बढ़ना या देर से शुरू होना बधिरता के संदर्भ में सही नहीं है।
- निष्कर्ष: श्रवणबाधित बच्चों में शुरुआती बबलाना सामान्य होता है, लेकिन फीडबैक के अभाव में वह क्रमिक रूप से क्षीण हो जाता है।
#75. वह अंतर्राष्ट्रीय संगठन जो बच्चों के लिए स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा प्रदान करके कार्यक्रमों का समर्थन करता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- अन्य प्रमुख संगठनों के कार्य:
- डब्ल्यू.एच.ओ. (WHO): यह वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के लिए काम करने वाली संस्था है।
- यूनेस्को (UNESCO): यह शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
- यू.एन.डी.पी. (UNDP): यह वैश्विक विकास और गरीबी उन्मूलन से जुड़े कार्यक्रम चलाता है।
- अन्य प्रमुख संगठनों के कार्य:
- निष्कर्ष: बाल स्वास्थ्य, पोषण और बच्चों की शिक्षा को विशेष रूप से प्राथमिकता देने वाला वैश्विक संगठन यूनिसेफ है।
#76. भारत आई. सी. डी. एस. कार्यक्रम के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करता है
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- निपसेड (NIPCCD): यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक प्रमुख संस्थान है जो बाल विकास, महिला कल्याण और स्वैच्छिक संगठनों के क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण आयोजित करता है।
- अन्य विकल्प:
- एन.सी.ई.आर.टी. (NCERT): स्कूली शिक्षा और पाठ्यक्रम विकास से जुड़ा है।
- सी.एस.डब्ल्यू.बी. (CSWB): महिला और बाल कल्याण से जुड़ी स्वैच्छिक संस्थाओं को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
- निष्कर्ष: ICDS कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता संवर्द्धन का कार्य मुख्य रूप से निपसेड (NIPCCD) द्वारा किया जाता है।
#77. निम्नलिखित में से विशेष शिक्षा की एक विशेषता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- विशेष शिक्षा का स्वरूप: इसमें प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट अक्षमता या क्षमता को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत शिक्षण योजना (IEP – Individualized Education Program) तैयार की जाती है।
- अन्य विकल्प:
- “सभी के लिए शिक्षा के समान विषय” और “सभी के लिए एक ही शिक्षण रणनीति” सामान्य या पारंपरिक शिक्षा की विशेषताएँ हैं, जो विशेष शिक्षा की व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर खरी नहीं उतरतीं।
- “शिक्षण सहायक सामग्री और उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाना” बिल्कुल गलत है, क्योंकि विशेष शिक्षा में तो उपकरणों और सहायक सामग्रियों का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।
- निष्कर्ष: विशेष शिक्षा पूरी तरह से बच्चे की विशिष्ट और व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर केंद्रित होती है।
#78. समुदाय आधारित पुन:स्थापन (पुनर्वास) की अवधारणा किसने विकसित की ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- CBR का उद्देश्य: यह दृष्टिकोण इस बात पर जोर देता है कि विकलांगता से ग्रस्त लोगों का पुनर्वास केवल विशेष संस्थानों तक सीमित न रहकर समुदाय स्तर पर होना चाहिए, ताकि समाज की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- अन्य विकल्प: यूनिसेफ बच्चों के कल्याण और अधिकारों पर कार्य करता है, जबकि भारत सरकार और भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) राष्ट्रीय स्तर पर नीतियाँ और मानक तय करते हैं, लेकिन CBR अवधारणा को वैश्विक रूप से विकसित करने का श्रेय WHO को जाता है।
- निष्कर्ष: विकलांग व्यक्तियों के समुदाय-आधारित पुनर्वास की वैश्विक अवधारणा का सूत्रपात विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किया गया था।
#79. देश में विकलांगता (अपंगता) की दर कम करने की पहली रणनीति क्या है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- निवारक दृष्टिकोण (Preventive Approach): इसके अंतर्गत प्राथमिक रोकथाम (Primary Prevention) पर जोर दिया जाता है, जैसे कि गर्भवती माताओं का उचित पोषण, टीकाकरण (जैसे पोलियो, खसरा आदि), समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ, और जन्मजात या संक्रामक रोगों की शुरुआती अवस्था में ही रोक थाम करना ताकि विकलांगता उत्पन्न ही न हो।
- अन्य विकल्प: क्षति कम करना, अपंगता कम करना या विकलांग व्यक्तियों का पुनर्वास करना – ये सभी द्वितीयक या तृतीयक स्तर की रणनीतियाँ हैं (जो विकलांगता उत्पन्न होने के बाद शुरू होती हैं), जबकि मूल रूप से दर घटाने की पहली और प्राथमिक रणनीति ‘रोकथाम’ ही है।
- निष्कर्ष: किसी भी स्वास्थ्य या कल्याण प्रणाली में किसी समस्या के उत्पन्न होने से पहले ही कारणों को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
#80. एक परिवार द्वारा विभिन्न खाद्य पदार्थों पर किए गए व्यय को प्रतिशत में दिखाने के लिए सबसे अच्छी संचार सहायक सामग्री है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- पाई चार्ट की विशेषता: यह प्रतिशत या आनुपातिक डेटा की तुलना करने और समग्र बजट में प्रत्येक मद के योगदान को एक नजर में देखने के लिए सबसे प्रभावी ग्राफिक टूल है।
- अन्य विकल्प:
- प्रवाह चार्ट (Flow Chart): यह किसी प्रक्रिया, कार्यप्रणाली या चरणों के क्रम को दिखाने के लिए होता है।
- वृक्ष चार्ट (Tree Chart): यह पदानुक्रम (Hierarchy) या वर्गीकरण को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है।
- फ्लिप चार्ट (Flip Chart): यह शिक्षण या प्रस्तुतीकरण के दौरान क्रमिक बिंदुओं को लिखकर समझाने के काम आने वाला कागजी पैड होता है।
- निष्कर्ष: प्रतिशत के रूप में व्यय के वितरण को दर्शाने के लिए पाई चार्ट सबसे सटीक विकल्प है।
#81. किसी वास्तविक वस्तु के एक हिस्से की आंतरिक संरचना को दिखाने के लिए, सबसे उपयुक्त सहायक सामग्री है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- उपयोगिता: इसका उपयोग जीव विज्ञान (जैसे शरीर के अंगों की आंतरिक बनावट) और इंजीनियरिंग (जैसे इंजन के भीतर के पुर्जे) में गहराई से अध्ययन करने के लिए किया जाता है।
- अन्य विकल्प:
- स्केल मॉडल (Scale Model): यह किसी वस्तु का आनुपातिक छोटा या बड़ा रूप होता है (बाहरी बनावट दिखाने के लिए)।
- सरलरूप मॉडल (Simplified Model): यह जटिलता को कम करके मूल अवधारणा को समझाने के लिए होता है।
- कार्यरूप मॉडल (Working Model): यह वस्तु की कार्यप्रणाली (Working mechanism) को दिखाने के लिए उपयोग किया जाता है।
- निष्कर्ष: आंतरिक भागों को प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए क्रॉस-सेक्शनल मॉडल सबसे सटीक दृश्य शिक्षण सामग्री है।
#82. प्रबन्ध प्रक्रिया में योजनाओं की प्रगति की जाँच करना और किसी भी विचलन को सुधारना किस क्रिया को दर्शाता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- प्रमुख विवरण:
- प्रबंध के चरण: प्रबंधन एक सतत प्रक्रिया है जिसमें योजना बनाना (Planning), संगठन करना (Organizing), निर्देशन करना (Directing), और नियंत्रण करना (Controlling) प्रमुख चरण शामिल होते हैं। नियंत्रण का कार्य यह देखना है कि वास्तविक प्रदर्शन, निर्धारित योजनाओं से कितना मेल खाता है।
- अन्य विकल्प:
- योजना बनाना: यह भविष्य के कार्यों की रूपरेखा तैयार करना है।
- संगठन करना: यह संसाधनों और कार्यों को व्यवस्थित करने से संबंधित है।
- निर्णय लेना: यह विभिन्न विकल्पों में से सर्वोत्तम विकल्प का चुनाव करने की प्रक्रिया है।
- निष्कर्ष: प्रगति की निगरानी करना और विचलन को सुधारना प्रबंधन के ‘नियंत्रण’ कार्य के अंतर्गत आता है।
#83. निम्नलिखित में से ई. सी. सी. ई. (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) के क्या लाभ हैं ?(A) स्कूल उपस्थिति में सुधार(B) ड्रॉपआउट बढ़ाना(C) स्कूल के लिए बेहतर तैयारी(D) गरीबी के चक्र को तोड़नाकूट ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- (A) स्कूल उपस्थिति में सुधार: सही है, क्योंकि ECCE से जुड़े बच्चे पूर्व-विद्यालयीन माहौल के आदी हो जाते हैं, जिससे आगे चलकर उनकी स्कूल में नियमितता और उपस्थिति बेहतर होती है।
- (B) ड्रॉपआउट बढ़ाना: गलत है, क्योंकि ECCE वास्तव में स्कूल छोड़ने की दर (Dropout Rate) को घटाता है, न कि बढ़ाता है।
- (C) स्कूल के लिए बेहतर तैयारी: सही है, यह बच्चों में संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक कौशल विकसित करता है जिससे वे औपचारिक स्कूली शिक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं।
- (D) गरीबी के चक्र को तोड़ना: सही है, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा बच्चों को बेहतर भविष्य और आर्थिक अवसरों की ओर ले जाती है, जो अंतर-पीढ़ीगत गरीबी के चक्र को तोड़ने में मददगार है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार कथन (A), (C) और (D) सही हैं, अतः सही कूट विकल्प दूसरा वाला होगा।
(A) बच्चे की विकलांगता की गंभीरता
(B) पड़ोसियों और मित्रों का रवैया
(C) माता-पिता की आर्थिक स्थितिकूट
#84. निम्नलिखित में से कौन-से कारक माता-पिता की अपने बच्चे की विकलांगता के प्रति भावना और प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- (A) बच्चे की विकलांगता की गंभीरता: यह प्राथमिक कारक है। विकलांगता जितनी गंभीर होती है, माता-पिता की आरंभिक प्रतिक्रिया (जैसे आघात, चिंता या इनकार) उतनी ही गहरी या भिन्न हो सकती है।
- (B) पड़ोसियों और मित्रों का रवैया: समाज, रिश्तेदारों और मित्रों का सामाजिक दृष्टिकोण तथा उनका सहयोग या उपेक्षापूर्ण व्यवहार माता-पिता की मानसिक स्थिति और बच्चे के प्रति उनकी प्रतिक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
- (C) माता-पिता की आर्थिक स्थिति: आर्थिक स्थिति यह तय करने में मदद करती है कि वे बच्चे के लिए बेहतर चिकित्सा, विशेष शिक्षा और थेरेपी का खर्च उठाने में कितने सक्षम हैं, जिससे उनका तनाव और दृष्टिकोण प्रभावित होता है।
- निष्कर्ष: चूंकि बच्चे की विकलांगता की गंभीरता, सामाजिक परिवेश (पड़ोसी/मित्र) और आर्थिक स्थिति—तीनों ही माता-पिता की मनोदशा और प्रतिक्रिया को आकार देते हैं, इसलिए सही कूट सभी तीनों विकल्पों (A), (B) और (C) को सही मानता है।
(A) माता-पिता के क्रोध को व्यक्तिगत रूप से न लेना
(B) माता-पिता से तर्क करना और उन्हें स्थिति समझाने में मदद करना
(C) उतने ही गुस्से में स्वयं आना और माता-पिता को गलत साबित करनाकूट
#85. जब विकलांग बच्चे के माता-पिता क्रोधित हों, तो एक शिक्षिका को क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- (A) माता-पिता के क्रोध को व्यक्तिगत रूप से न लेना: बिल्कुल सही। माता-पिता का गुस्सा शिक्षक पर व्यक्तिगत रूप से नहीं होता, बल्कि यह उनकी लाचारी, चिंता, भय और परिस्थितियों के प्रति उनके आंतरिक संघर्ष का परिणाम होता है। शिक्षक को इसे पेशेवर रूप से समझना चाहिए।
- (B) माता-पिता से तर्क करना और उन्हें स्थिति समझाने में मदद करना: सही है। शिक्षक का यह दायित्व है कि वह धैर्यपूर्वक उनकी बात सुने, उन्हें शांत करे और वैज्ञानिक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण से बच्चे की वास्तविक स्थिति व आगे की संभावनाओं को समझाने में उनकी सहायता करे।
- (C) उतने ही गुस्से में स्वयं आना और माता-पिता को गलत साबित करना: गलत है। शिक्षक का आक्रामक होना या माता-पिता को गलत ठहराना स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकता है और उनके बीच का विश्वास टूट सकता है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार कथन (A) और (B) सही हैं, जबकि (C) पूरी तरह अनुचित है। अतः सही कूट विकल्प पहला वाला होगा।
(A) लम्बे समय तक चलने वाला गम्भीर अवसाद
(B) नींद न आना या डरावने सपने आना
(C) वे बच्चे को स्वीकार कर रहे हैंकूट
#86. कौन-से व्यवहार यह संकेत देते हैं कि विकलांग बच्चे के माता-पिता को पेशेवर परामर्शदाता की आवश्यकता है ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- (A) लम्बे समय तक चलने वाला गम्भीर अवसाद (Severe Depression): सही है। यदि माता-पिता लंबे समय तक अत्यधिक निराशा, अवसाद या मानसिक शून्यता में रहते हैं, तो उन्हें इस आघात से बाहर निकालने के लिए पेशेवर मनोवैज्ञानिक मदद की सख्त जरूरत होती है।
- (B) नींद न आना या डरावने सपने आना (Insomnia or Nightmares): सही है। ये तीव्र चिंता, तनाव और मानसिक अस्वस्थता के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षण हैं, जो यह दर्शाते हैं कि माता-पिता की मानसिक स्थिति सामान्य रूप से संभाल पाने की क्षमता से बाहर हो रही है।
- (C) वे बच्चे को स्वीकार कर रहे हैं: गलत है। जब माता-पिता बच्चे को सहज रूप से स्वीकार (Acceptance) करने लगते हैं, तो यह सकारात्मक और अनुकूलन (Adjustment) का संकेत है; ऐसी स्थिति में उन्हें किसी पेशेवर परामर्शदाता की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह मानसिक स्थिरता को दर्शाता है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार केवल कथन (A) और (B) नकारात्मक और अत्यधिक मानसिक दबाव को दर्शाते हैं जिसके लिए परामर्श आवश्यक है। अतः सही कूट पहला विकल्प है।
(A) वे समाज की गतिविधियों में शामिल होते हैं।
(B) वे भेदभाव का अनुभव करते हैं।
(C) लोग उनका उपहास करते हैं।कूट
#87. विकलांग बच्चों में अक्सर आत्म-सम्मान कम होता है क्योंकि ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- (A) वे समाज की गतिविधियों में शामिल होते हैं: गलत है। समाज की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होना और मुख्यधारा से जुड़ना उनके आत्म-सम्मान को बढ़ाता है, न कि उसे कम करता है।
- (B) वे भेदभाव का अनुभव करते हैं: सही है। जब बच्चों को उनके परिवेश, स्कूलों या सार्वजनिक स्थानों पर अन्य बच्चों की तुलना में असमानता या भेदभाव का सामना करना पड़ता है, तो उनके मन में हीन भावना उत्पन्न होने लगती है।
- (C) लोग उनका उपहास करते हैं: सही है। कई बार संवेदनशीलता की कमी के कारण लोग या साथी उनका मजाक उड़ाते हैं (उपहास करते हैं), जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार केवल कथन (B) और (C) सही हैं जो विकलांग बच्चों में कम आत्म-सम्मान के वास्तविक कारणों को दर्शाते हैं। अतः सही कूट दूसरा विकल्प है।
कथन (A) : शारीरिक क्षति भारत में बच्चों में विकलांगता का मुख्य कारण हैं।
कथन (B) : अधिकांश मामलों में, शारीरिक विकलांगता बौद्धिक विकलांगता (मानसिक मंदता) का कारण नहीं बनती।
#88. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – शारीरिक क्षति भारत में बच्चों में विकलांगता का मुख्य कारण हैं: गलत है। भारत या विकासशील देशों में बच्चों में विकलांगता का मुख्य कारण शारीरिक क्षति (Physical injury) अकेले नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुपोषण (Malnutrition), जन्मजात बीमारियाँ, संक्रामक रोग, प्रसव के दौरान ऑक्सीजन की कमी (Birth asphyxia), और आयोडीन व विटामिन की कमी जैसे कारक प्रमुख रूप से जिम्मेदार होते हैं।
- कथन (B) – अधिकांश मामलों में, शारीरिक विकलांगता बौद्धिक विकलांगता (मानसिक मंदता) का कारण नहीं बनती: सही है। शारीरिक विकलांगता (जैसे लोकोमोटर डिसेबिलिटी, हाथ-पैर या मस्कुलोस्केलेटल से जुड़ी समस्याएँ) मुख्य रूप से शारीरिक गतिशीलता को प्रभावित करती हैं। अधिकांश मामलों में इसका सीधा असर बच्चे की बौद्धिक क्षमता या मानसिक विकास पर नहीं पड़ता, और बच्चे की बुद्धि सामान्य हो सकती है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार केवल कथन (B) सही है, जबकि कथन (A) तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। अतः सही उत्तर दूसरा विकल्प है।
कथन (A) : ताराबाई मोदक ने उच्च आय वर्ग के बच्चों के साथ काम किया।
कथन (B) : ताराबाई मोदक ने शालापूर्व शिक्षा प्रदान करने के लिए उच्च लागत वाली खेल सामग्री का उपयोग किया।
#89. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – ताराबाई मोदक ने उच्च आय वर्ग के बच्चों के साथ काम किया: गलत है। ताराबाई मोदक ने मुख्य रूप से ग्रामीण, आदिवासी (कोसाबा, महाराष्ट्र) और वंचित वर्ग के बच्चों तथा समाज के उपेक्षित तबके के उत्थान के लिए कार्य किया था।
- कथन (B) – ताराबाई मोदक ने शालापूर्व शिक्षा प्रदान करने के लिए उच्च लागत वाली खेल सामग्री का उपयोग किया: गलत है। उन्होंने शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए ‘निसर्गोपचार’ और स्थानीय रूप से उपलब्ध अत्यंत कम लागत वाली या बिना लागत वाली (Low-cost / No-cost local materials) वस्तुओं और स्वदेशी खेल सामग्रियों का उपयोग किया था, न कि उच्च लागत वाली सामग्री का।
- निष्कर्ष: चूंकि दोनों कथन तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, इसलिए सही उत्तर चौथा विकल्प होगा जिसमें कहा गया है कि (A) और (B) दोनों गलत हैं।
कथन (A) : जिस बच्चे को दौरे पड़ते हों, उसमें हमेशा बौद्धिक विकलांगता (मानसिक मंदता) होती है।
कथन (B) : दौरे संक्रामक होते हैं (यानि एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं।)
#90. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – जिस बच्चे को दौरे पड़ते हों, उसमें हमेशा बौद्धिक विकलांगता (मानसिक मंदता) होती है: गलत है। यह एक आम गलतफहमी है। हालांकि कुछ प्रकार के दौरे (जैसे गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार) बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन अधिकांश बच्चों या व्यक्तियों जिन्हें दौरे (मिर्गी आदि) की समस्या होती है, उनकी बौद्धिक क्षमता पूरी तरह सामान्य होती है और वे सामान्य जीवन जी सकते हैं।
- कथन (B) – दौरे संक्रामक होते हैं (यानि एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं): गलत है। दौरे किसी भी प्रकार की संक्रामक बीमारी (Infectious disease) नहीं हैं। यह मस्तिष्क में अचानक होने वाली विद्युत गतिविधि (Electrical activity) की असामान्यता के कारण होते हैं, और यह छूने, पास बैठने या हवा से एक व्यक्ति से दूसरे में बिल्कुल नहीं फैलते।
- निष्कर्ष: चूंकि दोनों कथन तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, इसलिए सही उत्तर चौथा विकल्प होगा जिसमें कहा गया है कि (A) और (B) दोनों गलत हैं।
कथन (A) : सेरेब्रल पाल्सी (प्रमस्तिष्क घात) के अधिकांश मामले रोके जा सकते हैं।
कथन (B) : अस्पताल में प्रसव कराने से सेरेब्रल पाल्सी की घटनाएँ कम की जा सकती हैं।
#91. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – सेरेब्रल पाल्सी (प्रमस्तिष्क घात) के अधिकांश मामले रोके जा सकते हैं: सही है। सेरेब्रल पाल्सी के कई कारण प्रसव पूर्व (Prenatal) या प्रसव के दौरान (Perinatal) होने वाली जटिलताओं से जुड़े होते हैं, जिन्हें उचित चिकित्सा देखभाल, टीकाकरण और समय पर उपचार के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है।
- कथन (B) – अस्पताल में प्रसव कराने से सेरेब्रल पाल्सी की घटनाएँ कम की जा सकती हैं: सही है। संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) यानी अस्पताल में प्रशिक्षित चिकित्सीय देखरेख में प्रसव कराने से जन्म के समय बच्चे के मस्तिष्क को ऑक्सीजन की कमी (Birth asphyxia) या चोट लगने के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है, जो कि सेरेब्रल पाल्सी के प्रमुख कारणों में से एक है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार दोनों कथन (A) और (B) तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह सही हैं। अतः सही उत्तर तीसरा विकल्प है।
कथन (A) : समुदाय की भागीदारी से प्रारंभिक बाल्यावस्था कार्यक्रम की पहुँच और स्थिरता बढ़ती है।
कथन (B) : जब स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो वे जिम्मेदारी साझा करते हैं और सेवाओं की निगरानी प्रभावी ढंग से करते हैं।
#92. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – समुदाय की भागीदारी से प्रारंभिक बाल्यावस्था कार्यक्रम की पहुँच और स्थिरता बढ़ती है: सही है। जब स्थानीय समुदाय कार्यक्रम से जुड़ता है, तो अधिक से अधिक बच्चों तक इसकी पहुँच आसान हो जाती है और कार्यक्रम लंबे समय तक सुचारू रूप से (स्थिरता के साथ) चल पाता है।
- कथन (B) – जब स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो वे जिम्मेदारी साझा करते हैं और सेवाओं की निगरानी प्रभावी ढंग से करते हैं: सही है। स्थानीय लोगों की सहभागिता से सामुदायिक स्वामित्व (Community Ownership) की भावना विकसित होती है, जिससे वे कार्यक्रमों की देखरेख और गुणवत्ता की प्रभावी निगरानी जिम्मेदारी के साथ करते हैं।
- निष्कर्ष: इस प्रकार दोनों कथन (A) और (B) तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह सही हैं। अतः सही उत्तर तीसरा विकल्प है।
कथन (A) : शारीरिक क्षति हमेशा अपंगता का कारण बनती है।
कथन (B) : अपंग व्यक्ति जीवन के सभी कार्य-क्षेत्रों में अक्षम होता है।
#93. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – शारीरिक क्षति हमेशा अपंगता का कारण बनती है: गलत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वर्गीकरण के अनुसार, ‘क्षति’ (Impairment – अंगों की संरचना या कार्य में असामान्यता) हमेशा ‘अपंगता’ या विकलांगता (Disability) में नहीं बदलती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को किस प्रकार का वातावरणीय, चिकित्सीय और सामाजिक सहयोग मिल रहा है।
- कथन (B) – अपंग व्यक्ति जीवन के सभी कार्य-क्षेत्रों में अक्षम होता है: गलत है। यह एक बहुत बड़ी सामाजिक भ्रांति है। विकलांग या विशेष आवश्यकता वाले व्यक्ति अपने जीवन के कई क्षेत्रों में पूरी तरह सक्षम होते हैं और उचित प्रशिक्षण, शिक्षा तथा अवसरों के मिलने पर वे शिक्षा, खेल, कला, रोजगार और प्रशासनिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि दोनों कथन तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, इसलिए सही उत्तर चौथा विकल्प होगा जिसमें कहा गया है कि (A) और (B) दोनों गलत हैं।
कथन (A) : संचार सहायक सामग्री बनाने में प्राप्तकर्ता (श्रोता) को शामिल करें।
कथन (B) : वास्तविक वस्तुओं का उपयोग संचार साधनों के रूप में नहीं करना चाहिए।
#94. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – संचार सहायक सामग्री बनाने में प्राप्तकर्ता (श्रोता) को शामिल करें: सही है। जब हम कोई शिक्षण या संचार सामग्री तैयार करते हैं, यदि उसमें लक्षित समूह या प्राप्तकर्ताओं (श्रोताओं/समुदाय) की भागीदारी और सुझावों को शामिल किया जाता है, तो वह सामग्री अधिक प्रासंगिक, समझ में आने वाली और प्रभावी बनती है।
- कथन (B) – वास्तविक वस्तुओं का उपयोग संचार साधनों के रूप में नहीं करना चाहिए: गलत है। वास्तविक वस्तुएँ (Real objects / Specimens) शिक्षा और संचार के सबसे प्रभावी और जीवंत साधन मानी जाती हैं। इनका उपयोग करने से संदेश अधिक स्पष्ट और लंबे समय तक याद रहने वाला बनता है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार केवल कथन (A) सही है, जबकि कथन (B) गलत है। अतः सही उत्तर पहला विकल्प है।
कथन (A) : हर बच्चे का अधिकार है कि वह अपनी संपूर्ण क्षमता तक बढ़ने के अवसर मिलें।कथन
(B) : ई. सी. सी. ई. (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) सेवाएँ माताओं को कार्यबल में शामिल होने के लिए स्वतंत्र करती है।
#95. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – हर बच्चे का अधिकार है कि वह अपनी संपूर्ण क्षमता तक बढ़ने के अवसर मिलें: सही है। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन और बाल विकास के सार्वभौमिक सिद्धांतों के अनुसार, प्रत्येक बच्चे को अपनी शारीरिक, मानसिक, और बौद्धिक क्षमता का पूर्ण विकास करने का समान अधिकार प्राप्त है।
- कथन (B) – ई.सी.सी.ए. (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) सेवाएँ माताओं को कार्यबल में शामिल होने के लिए स्वतंत्र करती है: सही है। जब छोटे बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण डे-केयर, क्रेच और पूर्व-विद्यालय जैसी ECCE सेवाएँ उपलब्ध होती हैं, तो माताओं पर से बच्चों की पूरे दिन की देखभाल का अत्यधिक दबाव कम होता है, जिससे वे अपनी आजीविका कमाने और कार्यबल (Workforce) में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हो पाती हैं।
- निष्कर्ष: इस प्रकार दोनों कथन (A) और (B) तथ्यात्मक और सामाजिक रूप से पूरी तरह सही हैं। अतः सही उत्तर तीसरा विकल्प है।
कथन (A) : मस्तिष्क की क्षति व्यवहार सम्बन्धी कठिनाइयों का कारण नहीं है।
कथन (B) : जिन बच्चों में व्यवहार-सम्बन्धी कठिनाइयाँ होती हैं, उन्हें हमेशा चिकित्सीय उपचार की आवश्यकता होती है।
#96. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – मस्तिष्क की क्षति व्यवहार सम्बन्धी कठिनाइयों का कारण नहीं है: गलत है। मस्तिष्क की क्षति (Brain injury/damage) सीधे तौर पर संज्ञानात्मक, संवेगात्मक और व्यवहार संबंधी कठिनाइयों का एक बहुत बड़ा कारण होती है। मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से व्यवहार, आवेग नियंत्रण (Impulse control) और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं।
- कथन (B) – जिन बच्चों में व्यवहार-सम्बन्धी कठिनाइयाँ होती हैं, उन्हें हमेशा चिकित्सीय उपचार की आवश्यकता होती है: गलत है। हर व्यवहार संबंधी कठिनाई के लिए हमेशा ‘चिकित्सीय उपचार’ (Medical treatment) की जरूरत नहीं पड़ती। इनमें से कई समस्याएँ उचित परामर्श (Counseling), व्यवहार संशोधन तकनीकों (Behavior modification techniques), पारिवारिक मार्गदर्शन और सकारात्मक शैक्षिक वातावरण के माध्यम से ठीक की जा सकती हैं।
- निष्कर्ष: चूंकि दोनों कथन तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, इसलिए सही उत्तर चौथा विकल्प होगा जिसमें कहा गया है कि (A) और (B) दोनों गलत हैं।
कथन (A) : बच्चे को डाँटना कि उसने बिस्तर और कपड़े गीले कर दिए हैं, असयत मूत्रता (बिस्तर गीला करने) को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
कथन (B) : बच्चे को शौचालय ले जाना, भले ही वह न जाना चाहे, असयत मूत्रता को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।
#97. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – बच्चे को डाँटना कि उसने बिस्तर और कपड़े गीले कर दिए हैं, असयत मूत्रता (बिस्तर गीला करने) को नियंत्रित करने में मदद करेगा: गलत है। बच्चे को डाँटने, शर्मिंदा करने या सजा देने से यह समस्या कम होने के बजाय और अधिक बढ़ जाती है। इससे बच्चे में तनाव, हीन भावना और चिंता उत्पन्न होती है, जो बिस्तर गीला करने की समस्या को और गंभीर बना सकती है।
- कथन (B) – बच्चे को शौचालय ले जाना, भले ही वह न जाना चाहे, असयत मूत्रता को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है: सही है। नियमित अंतराल पर (विशेषकर सोने से पहले या रात में तय समय पर) बच्चे को शौचालय ले जाने की आदत डालने से ब्लैडर की ट्रेनिंग होती है और यह बिस्तर गीला करने की आदत को नियंत्रित करने में काफी मददगार साबित होता है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार केवल कथन (B) सही है, जबकि कथन (A) पूरी तरह अनुचित है। अतः सही उत्तर दूसरा विकल्प है।
कथन (A) : दृष्टि दोष वाले बच्चों को बाहर नहीं ले जाना चाहिए क्योंकि वे गिर सकते हैं।
कथन (B) : दृष्टि दोष वाले बच्चों को घुटनों के बल चलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए भले ही वे यह न देख सकें कि वे कहाँ जा रहे हैं।
#98. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – दृष्टि दोष वाले बच्चों को बाहर नहीं ले जाना चाहिए क्योंकि वे गिर सकते हैं: गलत है। बच्चों को अति-संरक्षित (Over-protected) रखना उनके विकास में बाधा बनता है। दृष्टिबाधित बच्चों को भी बाहरी वातावरण का अनुभव करने, अन्य बच्चों के साथ खेलने और अपनी अन्य इंद्रियों (स्पर्श, सुनने आदि) का उपयोग कर दुनिया को समझने के लिए बाहर ले जाना और सुरक्षित रूप से अवसर देना आवश्यक है।
- कथन (B) – दृष्टि दोष वाले बच्चों को घुटनों के बल चलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए भले ही वे यह न देख सकें कि वे कहाँ जा रहे हैं: गलत है। यह एक भ्रामक और जोखिम भरा कथन है। दृष्टिबाधित बच्चों को बिना सुरक्षा या मार्गदर्शन के इस प्रकार से अन्वेषण करने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता जिससे उन्हें चोट लगने का गंभीर खतरा हो। उनके आवागमन और गतिशीलता (Mobility and Orientation) के लिए विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षित तरीकों की आवश्यकता होती है।
- निष्कर्ष: चूंकि दोनों कथन तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, इसलिए सही उत्तर चौथा विकल्प होगा जिसमें कहा गया है कि (A) और (B) दोनों गलत हैं।
कथन (A) : भूमिका अभिनय (रोल प्ले) में अत्यधिक लचीलापन होता है।
कथन (B) : भूमिका अभिनय का कोई पूर्व-निर्धारित अंत नहीं होता।
#99. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
<div id=”model-response-message-content_question” class=”markdown markdown-main-panel md-content enable-luminous-fast-follows enable-updated-hr-color stronger tutor-markdown-rendering” dir=”ltr” aria-live=”polite”>
<div class=”attachment-container unknown”>
<div class=”gen-ui-html-container ng-star-inserted”>
<div>
<h3>📌 स्पष्टीकरण (Explanation)</h3>
<div>✅ सही उत्तर: (A) और (B) दोनों सही हैं।</div>
<div></div>
<div>भूमिका अभिनय (Role Play) एक अत्यंत प्रभावी शिक्षण और प्रशिक्षण विधि है, जिसके संदर्भ में दोनों कथनों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:</div>
<div></div>
<ul>
<li><strong>कथनों का विश्लेषण:</strong>
<ul>
<li><strong>कथन (A) – भूमिका अभिनय (रोल प्ले) में अत्यधिक लचीलापन होता है:</strong> <strong>सही है।</strong> रोल प्ले के दौरान कोई सख्त या निश्चित पटकथा (Script) नहीं होती; भाग लेने वाले प्रतिभागी स्थिति और अपनी समझ के अनुसार इसमें बदलाव कर सकते हैं, जिससे इसमें उच्च स्तर का लचीलापन होता है।</li>
<li><strong>कथन (B) – भूमिका अभिनय का कोई पूर्व-निर्धारित अंत नहीं होता:</strong> <strong>सही है।</strong> चूंकि यह प्रतिभागियों की तात्कालिक प्रतिक्रियाओं, संवादों और आपसी बातचीत पर निर्भर करता है, इसलिए इसका कोई फिक्स या पूर्व-निर्धारित अंत नहीं होता; यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतिभागी उस परिस्थिति को कैसे आगे बढ़ाते हैं और उसका समाधान कैसे निकालते हैं।</li>
</ul>
</li>
<li><strong>निष्कर्ष:</strong> इस प्रकार दोनों कथन (A) और (B) तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह सही हैं। अतः सही उत्तर तीसरा विकल्प है।</li>
</ul>
</div>
</div>
</div>
</div>
कथन (A) : ई. सी. सी. ई. सेवाएँ उपलब्ध कराने से बच्चे में आगे चलकर नशे की लत लगने की सम्भावना बढ़ जाती है।
कथन (B) : ई. सी. सी. ई. उपलब्ध कराने से बड़े बच्चों की स्कूल उपस्थिति बढ़ती है।
#100. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
📌 स्पष्टीकरण (Explanation)
- कथनों का विश्लेषण:
- कथन (A) – ई.सी.सी.ई. सेवाएँ उपलब्ध कराने से बच्चे में आगे चलकर नशे की लत लगने की सम्भावना बढ़ जाती है: गलत है। यह पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत कथन है। इसके विपरीत, गुणवत्तापूर्ण ECCE सेवाएँ बच्चों में सकारात्मक सामाजिक कौशल, आत्म-नियंत्रण, भावनात्मक स्थिरता और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य का विकास करती हैं, जो भविष्य में किसी भी प्रकार की बुरी आदतों या नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने में मदद करती हैं।
- कथन (B) – ई.सी.सी.ई. उपलब्ध कराने से बड़े बच्चों की स्कूल उपस्थिति बढ़ती है: सही है। जब छोटे बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण पूर्व-विद्यालयीन सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं, तो बड़े बच्चों (जैसे स्कूल जाने वाले भाई-बहन) पर घर पर छोटे बच्चों की देखभाल करने की जिम्मेदारी नहीं रहती। इसके अलावा, इससे पूरे परिवार का शैक्षिक माहौल बेहतर होता है, जिससे बड़े बच्चों की स्कूल में नियमितता और उपस्थिति में भी सुधार होता है।
- निष्कर्ष: इस प्रकार केवल कथन (B) सही है, जबकि कथन (A) पूरी तरह गलत है। अतः सही उत्तर दूसरा विकल्प है।


