Sandhi important question and answer
गलत संधि: सत् शास्त्र = सशास्त्र (यह अशुद्ध है) सही संधि: सत् शास्त्र = सच्छास्त्र नियम (व्यंजन संधि): यदि ‘त्’ या ‘द्’ के बाद ‘श्’ आए, तो ‘त्/द्’ का ‘च्’ और ‘श्’ का ‘छ्’ हो जाता है। त् श् = च्छ् इसलिए, सत् शास्त्र = सच्छास्त्र बनेगा। सही उत्तर – विसर्ग संधि व्याख्या – विसर्ग के बाद यदि ‘इ’ या ‘उ’ हो और बाद में कोई घोष व्यंजन हो, तो विसर्ग का ‘र’ हो जाता है , जैसे प्रादुर्भाव = प्रादु : भाव (3) जगन्नाथ = जगत् + नाथ नियम: यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (यहाँ ‘त्’) के बाद कोई अनुनासिक वर्ण (जैसे ‘न्’ या ‘म्’) आए, तो वह पहला वर्ण अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण (पंचमाक्षर) में बदल जाता है। यहाँ ‘त’ वर्ग का पाँचवाँ वर्ण ‘न्’ होता है, इसलिए ‘त्’ बदलकर ‘न्’ हो गया। त् + न = न्न (जगत् + नाथ = जगन्नाथ) (1) नाविक = नौ + इक संधि का नाम: अयादि स्वर संधि नियम: यदि ‘औ’ के बाद कोई असमान स्वर आए, तो ‘औ’ का ‘आव्’ हो जाता है। यहाँ औ + इ = आवि होने से ‘नाविक’ बना। (2) परोपकार = पर + उपकार संधि का नाम: गुण स्वर संधि नियम: यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘उ’ या ‘ऊ’ आए, तो दोनों मिलकर ‘ओ’ हो जाते हैं। यहाँ र का ‘अ’ + ‘उ’ मिलकर ‘ओ’ बन गए (अ + उ = ओ)। (4) सदैव = सदा + एव संधि का नाम: वृद्धि स्वर संधि नियम: यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘ए’ या ‘ऐ’ आए, तो दोनों के स्थान पर ‘ऐ’ हो जाता है। यहाँ ‘आ’ + ‘ए’ मिलकर ‘ऐ’ बन गए (आ + ए = ऐ)। सही उत्तर – यश: इच्छा व्याख्या – यदि विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और विसर्ग के बाद भी स्वर हो, केवल ‘अ’ को छोड़कर तो विसर्ग का लोप हो जाता है इसे सत्व विसर्ग संधि कहते है जैसे – ततएव – तत: एव अशुद्ध शब्द: छत्रछाया शुद्ध शब्द: छत्रच्छाया (यहाँ ‘छ’ से पहले ‘च्’ का आगमन होना अनिवार्य है)। जब किसी ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) या ‘आ’ स्वर के बाद ‘छ’ वर्ण आता है, तो ‘छ’ से पहले ‘च्’ वर्ण आधा जुड़ जाता है। यानी यह ‘च्छ’ हो जाता है। नियम सूत्र: {स्वर} + छ = च्छ यहाँ संधि-विच्छेद: छत्र + छाया ‘छत्र’ के अंत में ‘अ’ स्वर है (त्र = त् + र् + अ)। बाद में ‘छाया’ का ‘छा’ आया है। नियम के अनुसार अ + छा = च्छा हो जाएगा। इसलिए शुद्ध शब्द ‘छत्रच्छाया’ बनेगा। सही उत्तर – सम् धि व्याख्या – संधि का विच्छेद = सम् धि = संधि/सन्धि (व्यंजन संधि) यह उदाहरण व्यंजन संधि के ‘छ-त्व विधान’ (च-आगम संधि) नियम के अंतर्गत आता है। नियम: यदि किसी स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) के बाद ‘छ’ वर्ण आता है, तो संधि करते समय ‘छ’ से पहले आधा ‘च्’ जुड़ जाता है। सूत्र: {स्वर} + छ = च्छ संधि-विच्छेद: वृक्ष + छाया स्पष्टीकरण: यहाँ ‘वृक्ष’ शब्द के अंतिम वर्ण ‘क्ष’ में ‘अ’ स्वर छुपा हुआ है (क् + ष् + अ) और उत्तर पद का पहला वर्ण ‘छा’ है। नियम के अनुसार, स्वर (अ) के बाद ‘छ’ आने के कारण दोनों के बीच में ‘च्’ का आगम (जुड़ाव) हो जाएगा। अ + छा = च्छा इस प्रकार संधि होने पर शब्द ‘वृक्षच्छाया’ बनता है। स्व + छंद = स्वच्छंद परि + छेद = परिच्छेद अनु + छेद = अनुच्छेद वि + छेद = विच्छेद सही उत्तर – वधू उत्सव = वधूत्सव व्याख्या – यदि उ/ऊ के बाद समान स्वर ‘उ/ऊ’ ही आ जाए तो दीर्घ ‘ऊ’ हो जाता है, यह दीर्घ संधि का उदाहरण है सही उत्तर – विसर्ग संधि व्याख्या – तप: उत्तम = तपउत्तम (सत्व विसर्ग संधि) सही उत्तर – निश्चल व्याख्या – नि: चल = निश्चल (सत्व विसर्ग संधि) सत्व विसर्ग संधि नियमानुसार – यदि विसर्ग के बाद ‘च/छ/श’ वर्ण आ जाएं तो विसर्ग का ‘श’ हो जाता है सही उत्तर – सम् गठन = संगठन व्याख्या – सम् गठन = संगठन (सङ्गठन) व्यंजन संधि सही उत्तर – मनोनुकूल व्याख्या – सही उत्तर – बहू ऊर्जा व्याख्या – बहु ऊर्जा = बहूर्जा (दीर्घ सन्धि) सही उत्तर – कारक व्याख्या – शब्द संरचना की महत्त्वपूर्ण इकाइयाँ – 1. सन्धि, 2. समास 3. उपसर्ग 4. प्रत्यय सही उत्तर – व्यंजन संधि व्याख्या – तत् हित = तद्धित/ तद्धित व्यंजन संधि ___ व्यंजन संधि नियमानुसार:- यदि त् / द् के बाद ‘ह’ वर्ण आ जाए तो त् / द् का ‘द्’ हो जाता हैं- जैसे:- पद्धति(पत् (पद्) हति) आदि। इस प्रश्न का सही उत्तर (4) जगत् + नाथ है। यह स्वर संधि का नहीं, बल्कि व्यंजन संधि का उदाहरण है। आइए सभी विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं: (4) जगत् + नाथ = जगन्नाथ संधि का प्रकार: व्यंजन संधि नियम: यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (जैसे ‘त्’) के बाद कोई अनुनासिक वर्ण (जैसे ‘न्’ या ‘म्’) आए, तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण (पंचमाक्षर) में बदल जाता है। यहाँ ‘त’ वर्ग का पाँचवाँ वर्ण ‘न्’ होता है, इसलिए ‘त्’ बदलकर ‘न्’ हो गया। (त् + न = न्न) (1) विद्या + आलय = विद्यालय संधि का प्रकार: दीर्घ स्वर संधि नियम: जब ‘आ’ के बाद ‘आ’ स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ ‘आ’ हो जाते हैं। (आ + आ = आ) (2) वार्ता + आलाप = वार्तालाप संधि का प्रकार: दीर्घ स्वर संधि नियम: यहाँ भी पूर्व पद के अंत में ‘आ’ है और उत्तर पद के प्रारंभ में ‘आ’ है, जो मिलकर दीर्घ ‘आ’ बनते हैं। (आ + आ = आ) (3) रजनी + ईश = रजनीश संधि का प्रकार: दीर्घ स्वर संधि नियम: जब ‘ई’ के बाद ‘ई’ स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ ‘ई’ हो जाते हैं। (ई + ई = ई) सही उत्तर – व्यंजन संधि व्याख्या – ‘जगत् अम्बा’ से जगदम्बा शब्द बना है। सही उत्तर – भावौचित्य व्याख्या – भाव औचित्य = भावौचित्य वृद्धि संधि जबकि उत् डीन = उड्डीन = यदि त् / द् के बाद ‘ड’ वर्ण आ जाए तो त् / द् का ‘ड्’ हो जाता हैं। उत् लंघन = उल्लंघन = यदि त् / द् के बाद ‘ल’ वर्ण आ जाए तो त् / द् का ‘ल’ हो जाता हैं। उत् शृंखला उच्छृखला = यदि त् / द् के बाद ‘श’ वर्ण आ जाए तो त् | द् का ‘च’ और ‘श’ का ‘छ’ हो जाता हैं। तीनों शब्द व्यंजन संधि के उदाहरण हैं। सही उत्तर – चित् मय व्याख्या – चित् मय = चिन्मय में व्यंजन संधि का प्रयोग किया गया है। सही उत्तर – तट्टीका व्याख्या – तत् टीका = तट्टीका/ तट्टीका व्यंजन संधि व्यंजन संधि नियमानुसार:- यदि त् / द् के बाद ‘ट’ वर्ण आ जाए तो त् / द् का ‘ट्’ हो जाता हैं- जैसे:- बृहट्टीका (बृहत् टीका ) आदि। इस प्रश्न का सही उत्तर सम् + कृत है। ‘संस्कृत’ शब्द का सही संधि-विच्छेद ‘सम् + कृत’ होता है। आइए इसका नियम और कारण विस्तार से समझते हैं: यह व्यंजन संधि के एक विशेष नियम के अंतर्गत आता है। नियम: यदि ‘सम्’ उपसर्ग के बाद ‘कृ’ धातु से बना कोई भी शब्द (जैसे- कृत, कार, करण, कर्ता, कृति आदि) आए, तो दो मुख्य बदलाव होते हैं: ‘सम्’ के ‘म्’ का अनुस्वार (ं) बन जाता है। दोनों शब्दों के बीच में दन्त्य ‘स्’ (आधा ‘स’) का आगम (नया जुड़ाव) हो जाता है। सूत्र: {सम्} + {कृ} {धातु से बना शब्द}) = {सं} + {स्} + {शब्द} सम् + कार = संस्कार सम् + करण = संस्करण सम् + कर्ता = संस्कर्ता सम् + कृति = संस्कृति सही उत्तर – घृणा आस्पद व्याख्या – घृणा आस्पद में दीर्घ स्वर संधि का प्रयोग किया गया है। सही उत्तर – महत् झंकार व्याख्या – महत् झंकार = महज्झंकार व्यंजन संधि व्यंजन संधि नियमानुसार:- यदि त् / द् के बाद ‘ज / झ’ वर्ण आ जाए तो त् / द् का ‘ज्’ हो जाता हैं- जैसे:- बृहज्जन (बृहत् जन) आदि। सही उत्तर – विसर्ग व्याख्या – निस्सीम का संधि-विच्छेद निः सीम होगा अतः इसमें विसर्ग संधि का प्रयोग हुआ है। सही उत्तर – व्यंजन संधि व्याख्या – सत् चेष्टा = सच्चेष्टा व्यंजन संधि व्यंजन संधि नियमानुसार:- यदि त् / द् के बाद ‘च / छ’ वर्ण आ जाए तो त् / द् का ‘च’ हो जाता हैं- जैसे:- सच्चरित्र (सत् चरित्र) आदि। सही उत्तर – तत् हित व्याख्या – ‘तत् हित’ में व्यंजन संधि का प्रयोग किया गया है। सही उत्तर – दीर्घ संधि व्याख्या – प्र आंगन = प्रांगण (दीर्घ संधि) सही उत्तर – उत् विग्न व्याख्या – उक्त शब्द में व्यंजन संधि है। यदि ‘क’, ‘च’, ‘ट’,’त’, ‘प’ के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए या य, र, ल, व या कोई स्वर आए तो क, च, ट, त, प के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है। सही उत्तर – मर् अन = मरण व्याख्या – मर न-मरण (व्यंजन संधि) व्यंजन संधि नियमानुसार – ‘ऋ/र/ष’ वर्गों के बाद कहीं भी ‘न’ आ जाए तो ‘न’ का ‘ण’ हो जाता हैजैसे – उष् न = उष्ण आदि। प्र नीत = प्रणीत प्र यान = प्रयाण परि नाय = परिणाय तीनों व्यंजन संधि के उदाहरण है। सही उत्तर – ऋक् वेद व्याख्या – ऋग्वेद = ऋक् वेद में व्यंजन संधि है। सही उत्तर – अहन् रश्मि = अहोरश्मि व्याख्या – अहन रश्मि = अहोरश्मि व्यंजन संधि व्यंजन संधि नियमानुसार – यदि अहन के बाद ‘र’ वर्ण आ जाए तो ‘अहन्’ का ‘अहो’ हो जाता है और यदि ‘अहन्’ के बाद ‘र’ से भिन्न वर्ण आ जाए तो ‘अहन्’ का ‘अहर्’ हो जाता है – जैसे – अहन् (अहो) रूप = अहोरूपअहन् (अहर्) अहन् = अहरह, अहन् (अहर्) मुख = अहर्मुख, अहन् (अहो) रात्रि = अहोरात्र सही उत्तर – विसर्ग संधि व्याख्या – तमोगुण ‘तमः गुण’ से मिलकर बना है इस प्रकार इसमें विसर्ग संधि का प्रयोग हुआ है। विसर्ग संधि-विसर्ग संधि का किसी स्वर या व्यंजन से मेल होने पर विसर्ग में जो विकार (परिवर्तन) होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। सही उत्तर – तरु छाया व्याख्या – तरु छाया = तरुच्छाया व्यंजन संधि व्यंजन संधि नियमानुसार – यदि किसी स्वर के बाद ‘छ’ वर्ण आ जाए तो स्वर और छ के बीच ‘च’ का आगम हो जाता है -जैसे – स्वच्छन्द (स्व छन्द) सही उत्तर – भारतेन्दु व्याख्या – ‘भारतेन्दु’ शब्द ‘भारत इन्दु’ से मिलकर बना है। सही उत्तर – व्यंजन संधि व्याख्या – प्र छन्न = प्रच्छन व्यंजन संधि व्यंजन संधि नियमानुसार – यदि किसी स्वर के बाद ‘छ’ वर्ण आ जाए तो स्वर और छ के बीच ‘च’ का आगम हो जाता है – जैसे – आच्छन्न (आ छन्न) आदि। यह विसर्ग संधि के ‘विसर्ग लोप और पूर्व स्वर दीर्घीकरण’ नियम के अंतर्गत आता है। नियम: यदि विसर्ग ($\small :$) के बाद ‘र’ वर्ण आए, तो संधि करते समय दो मुख्य बदलाव होते हैं: विसर्ग का पूरी तरह से लोप (गायब) हो जाता है। विसर्ग से पहले का जो भी ह्रस्व स्वर (छोटी ई ‘इ’ या छोटा ऊ ‘उ’) होता है, वह दीर्घ स्वर (बड़ी ‘ई’ या बड़े ‘ऊ’) में बदल जाता है।
अशुद्ध संधि-विच्छेद: जगत + गुरु शुद्ध संधि-विच्छेद: जगत् + गुरु = जगद्गुरु नियम (व्यंजन संधि): यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई घोष वर्ण (किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण, य, र, ल, व, ह या कोई स्वर) आए, तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण में बदल जाता है। यहाँ ‘जगत्’ शब्द के अंत में हलन्त वाला ‘त्’ आना चाहिए, न कि पूरा ‘त’। ‘त्’ के बाद ‘गु’ (ग वर्ग का तीसरा वर्ण) आने के कारण ‘त्’ अपने वर्ग के तीसरे वर्ण ‘द्’ में बदल जाता है ($त् + गु = द्गु$)। (2) वार्तालाप = वार्ता + आलाप (सही) नियम (दीर्घ स्वर संधि): जब ‘आ’ स्वर के बाद दोबारा ‘आ’ स्वर आता है, तो दोनों मिलकर दीर्घ ‘आ’ हो जाते हैं। यहाँ वार्ता (आ) + आलाप (आ) मिलकर ‘वार्तालाप’ बनता है (आ + आ = आ)। (3) मतैक्य = मत + ऐक्य (सही) नियम (वृद्धि स्वर संधि): यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘ए’ या ‘ऐ’ आए, तो दोनों के स्थान पर ‘ऐ’ हो जाता है। यहाँ मत (त में ‘अ’) + ऐक्य (‘ऐ’) मिलकर ‘मतैक्य’ बनता है (अ + ऐ = ऐ)। (4) पित्रिच्छा = पितृ + इच्छा (सही) नियम (यण स्वर संधि): यदि ‘ऋ’ के बाद कोई असमान स्वर (जैसे ‘इ’) आए, तो ‘ऋ’ का ‘र्’ हो जाता है। यहाँ पितृ (ऋ) + इच्छा (इ) मिलकर ‘पित्रिच्छा’ बनता है (त् + र् + इ = त्रि)। इस प्रश्न का सही उत्तर (1) परि + छेद है। ‘परिच्छेद’ शब्द का सही संधि-विच्छेद ‘परि + छेद’ होता है। आइए इसका नियम और कारण विस्तार से समझते हैं: यह उदाहरण व्यंजन संधि के ‘छ-त्व विधान’ नियम के अंतर्गत आता है, जिसे ‘च-आगम संधि’ भी कहा जाता है। नियम: यदि किसी भी स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) के बाद ‘छ’ वर्ण आता है, तो संधि करते समय दोनों के बीच में आधा ‘च्’ वर्ण जुड़ जाता है। सूत्र: {स्वर} + छ = च्छ संधि-विच्छेद: परि + छेद स्पष्टीकरण: यहाँ ‘परि’ उपसर्ग के अंत में ‘इ’ (ह्रस्व स्वर) है और उसके बाद ‘छेद’ का ‘छे’ आया है। नियम के अनुसार, इ + छे के बीच में आधे ‘च्’ का आगमन हो जाएगा। इ + छे = च्छे इस प्रकार सभी को मिलाने पर शुद्ध शब्द ‘परिच्छेद’ बनता है। अनु + छेद = अनुच्छेद वि + छेद = विच्छेद प्रति + छाया = प्रतिच्छाया आ + छादन = आच्छादन यह व्यंजन संधि के एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण नियम के अंतर्गत आता है। नियम: यदि ‘त्’ या ‘द्’ के बाद ‘श्’ (तालव्य श) वर्ण आए, तो संधि करते समय दो परिवर्तन होते हैं: ‘त्’ या ‘द्’ के स्थान पर आधा ‘च्’ हो जाता है। ‘श्’ के स्थान पर ‘छ्’ हो जाता है। सूत्र: $त् + श् = च्छ्$ महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य यह बिल्कुल सही संधि विच्छेद है। यहाँ वृद्धि स्वर संधि का नियम लागू हो रहा है: (1) रीत्यानुसार = रीत अनुसारः सही रूप: रीति + अनुसार = रीत्यानुसार (यण स्वर संधि – इ + अ = य) (2) वृहट्टिट्टिभ = वृहः टिट्टभ सही रूप: वृहत् + टिट्टिभ = वृहट्टिट्टिभ (व्यंजन संधि – ‘त्’ का ‘ट्’ हो जाना) (3) यशोभिलाषी = यशः + अभिलाष सही रूप: यशः + अभिलाषी = यशोभिलाषी (विसर्ग संधि – विसर्ग का ‘ओ’ हो जाना और ‘अ’ का लोप/अवग्रह होना) सही उत्तर (4) उन्नति है। ‘उन्नत’ या ‘उन्नति’ में विसर्ग संधि नहीं बल्कि व्यंजन संधि है। संधि विच्छेद: उत् + नति = उन्नति नियम: जब ‘त्’ या ‘द्’ के बाद कोई अनुनासिक वर्ण (जैसे ‘न’ या ‘म’) आता है, तो ‘त्/द्’ अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण (अनुनासिक) अर्थात् ‘न्’ में बदल जाता है। (1) नीरस: निः + रस = नीरस (नियम: विसर्ग के बाद ‘र’ होने पर विसर्ग का लोप हो जाता है और उससे पहले का ह्रस्व स्वर दीर्घ ‘नी’ हो जाता है) (2) निश्चय: निः + चय = निश्चय (नियम: विसर्ग के बाद ‘च’ या ‘छ’ होने पर विसर्ग का ‘श्’ हो जाता है) (3) दुष्कर: दुः + कर = दुष्कर (नियम: विसर्ग से पहले ‘इ’ या ‘उ’ हो और बाद में ‘क, ख, ट, ठ, प, फ’ में से कोई वर्ण हो, तो विसर्ग का ‘ष्’ हो जाता है) सही उत्तर (2) निः + अर्थक है। ‘निरर्थक’ शब्द में विसर्ग संधि है। नियम: जब विसर्ग {ः} से पहले ‘इ’ या ‘उ’ स्वर हो और बाद में कोई स्वर, किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण, या य, र, ल, व, ह में से कोई वर्ण हो, तो विसर्ग का ‘र्’ (हलन्त र) हो जाता है। (1) निर + अर्थक: ‘निर’ एक उपसर्ग है, लेकिन संस्कृत व्याकरण के संधि नियमों के अनुसार मूल विच्छेद विसर्ग {ः}) के साथ ‘निः’ माना जाता है। (3) नी: + अर्थक: यहाँ ‘नी’ (बड़ी ई) का प्रयोग गलत है, मूल शब्द ‘निः’ (छोटी इ) होता है। (4) निरा + अर्थक: यह पूरी तरह अशुद्ध रूप है।
#1. किस विकल्प में गलत संधि है? [PRO 22.10.2019]
गलत संधि का विश्लेषण (विकल्प 4)
#2. प्रादुर्भाव में कौन-सी संधि है ?
#3. निम्नलिखित में से कौनसा शब्द व्यंजन संधि का है? [Highcourt LDC परीक्षा-23.07.2017]
व्यंजन संधि का सही विकल्प:
अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सभी स्वर संधि के उदाहरण हैं):
#4. ‘यशइच्छा’ शब्द का सही संधि-विच्छेद है –
#5. ‘छत्रछाया’ शब्द में अशुद्धि का कारण है? [आर.पी.एस.सी. लिपिक परीक्षा 2011]
अशुद्धि का कारण और सही रूप:
संधि का नियम (व्यंजन संधि):
#6. संधि शब्द का सही संधि-विच्छेद शब्द है ?
#7. वृक्षच्छाया का संधि विच्छेद होगा? [आरटेट द्वितीय स्तर परीक्षा 2011]
संधि का नियम (व्यंजन संधि):
विकल्प का विश्लेषण:
इसी नियम के कुछ अन्य प्रसिद्ध उदाहरण:
#8. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है?
#9. ‘तपउत्तम’ शब्द में संधि है –
#10. ‘नि: + चल’ संधि-विच्छेद शब्द का सही संधि रूप होगा –
#11. निम्नलिखित में से किस विकल्प में संधि रूप व संधि-विच्छेद सही है?
#12. निम्नलिखित में से कौनसे शब्द में विसर्ग संधि है?
#13. ‘बहूर्जा’ का सही सन्धि-विच्छेद होगा ?
#14. शब्द संरचना की महत्त्वपूर्ण इकाई नहीं है ?
#15. ‘तद्धित’ शब्द में कौन-सी संधि हैं ?
#16. स्वर संधि का उदाहरण नहीं है- [स्टेनोग्राफर-21.3.2021]
व्यंजन संधि का उदाहरण (सही उत्तर):
अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सभी स्वर संधि के उदाहरण हैं):
#17. जगदम्बा शब्द में कौनसी संधि है ?
#18. निम्नलिखित में से किस विकल्प में व्यंजन संधि नहीं हैं ?
#19. ‘चिन्मय’ शब्द का संधि विच्छेद है ?
#20. तत् + टीका संधि-विच्छेद का सही संधि रूप होगा ?
#21. संस्कृत’ शब्द का संधि विच्छेद होगा- [आर.पी.एस.सी. लिपिक परीक्षा 2011]
संधि का नियम (व्यंजन संधि – ‘म’ का अनुस्वार और ‘स’ का आगम):
इसी नियम के अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण:
#22. ‘घृणास्पद्’ का संधि-विच्छेद होगा ?
#23. ‘महज्झंकार’ संधि रूप का संधि-विच्छेद होगा ?
#24. ‘निस्सीम’ शब्द में कौन सी संधि है ?
#25. ‘सच्चेष्टा’ शब्द में कौन-सी संधि हैं ?
#26. ‘तद्धित’ का सन्धि-विच्छेद क्या है ?
#27. प्रांगण शब्द में संधि है ?
#28. ‘उद्विग्न’ का सन्धि-विच्छेद क्या है ?
#29. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प गलत है ?
#30. ‘ऋग्वेद’ का संधि-विच्छेद क्या है ?
#31. निम्नलिखित में से किस विकल्प में संधि रूप व संधि-विच्छेद सही है ?
#32. ‘तमोगुण’ में किस संधि का प्रयोग हुआ है ?
#33. ‘तरूच्छाय’ शब्द का सही सन्धि-विच्छेद होगा ?
#34. गुण संधि का उदाहरण है ?
#35. ‘प्रच्छन्न’ शब्द में संधि है ? .
#36. ‘निः+रस’ की संधि होगी- [CET (10+2)-24.10.2024 (11)]
#37. गलत संधि विच्छेद है- [II Grade (Hindi) – 22.12.2022]
गलत संधि-विच्छेद का विश्लेषण (विकल्प 1)
अन्य सही विकल्पों का स्पष्टीकरण:
#38. ‘परिच्छेद’ शब्द का संधि विच्छेद क्या है? [पटवार भर्ती परीक्षा-2011]
संधि का नियम (व्यंजन संधि – च-आगम संधि):
विकल्प का विश्लेषण:
इसी नियम के अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण:
#39. ‘उच्छिष्ट’ शब्द का विच्छेद है? [PSI परीक्षा 2011]
संधि का नियम (व्यंजन संधि – ‘त्’ और ‘श्’ का नियम):
#40. निम्न मे से सही संधि विच्छेद है- [पटवारी 23-10-2021 shift-1]
स्पष्टीकरण
अन्य विकल्पों में कमियाँ (गलत क्यों हैं?):
#41. इनमें से कौनसा विसर्ग संधि का उदाहरण नहीं है? [CET (Gra.)-28.09.2024 (S-II)]
स्पष्टीकरण
अन्य विकल्प विसर्ग संधि के उदाहरण कैसे हैं?
#42. ‘निरर्थक’ का संधि विच्छेद है- [CET (10+2)-24.10.2024]
स्पष्टीकरण
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?


