Contribution of Rajasthan Swatantrata Senani
#1. राजस्थान सरकार के द्वारा प्रकाशित पुस्तक कौनसी है जिसमें राज्य के स्वतंत्रता सेनानियों की कीर्ति कथाएँ है- [पटवारी परीक्षा 2011]
राजस्थान सरकार ने राज्य के 51 प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और उनके संघर्ष की कहानियों को आम जन तक पहुँचाने के लिए ‘देश के दीवाने’ नामक पुस्तक का प्रकाशन किया था।
#2. स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद सागरमल गोपा कहाँ के निवासी थे? [कृषि पर्यवेक्षक- 18.09.2021] [Lab Assistent (Home Sci.) -30.06.2022] [कनिष्ठ अनुदेशक -4.1.2025]
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विस्तृत व्याख्या: सागरमल गोपा जैसलमेर के निवासी थे। उन्होंने जैसलमेर के तत्कालीन महारावल जवाहर सिंह की निरंकुश नीतियों और अत्याचारों का कड़ा विरोध किया था।
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इस कारण उन पर राजद्रोह का झूठा मुकदमा लगाकर 25 मई, 1941 को 6 वर्ष की कठोर सजा सुनाई गई। जेल में उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं और अंततः 4 अप्रैल, 1946 को उन पर मिट्टी का तेल (Kerosene) छिड़ककर उन्हें जिंदा जला दिया गया।
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प्रमुख पुस्तकें: इन्होंने जन जागरूकता के लिए ‘आजादी के दीवाने’, ‘जैसलमेर में गुण्डाराज’ और ‘रघुनाथ सिंह का मुक़दमा’ नामक प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं।
#3. एक स्वतंत्रता सेनानी द्वारा एक काव्य पाठ ‘नी रत्नों के पंजों से बचो भूप जवाहर तुम, जैसान के किले पे तिरंगा पाओगे’ एक राजा के दरबार में किया गया। यहाँ जैसान का अर्थ है? [छात्रावास अधीक्षक परीक्षा, 2008]
विस्तृत व्याख्या: राजस्थानी लोक साहित्य, कविताओं और आम बोलचाल में जैसलमेर दुर्ग और जैसलमेर रियासत को प्यार से ‘जैसाण’ या ‘जैसाण गढ़’ कहा जाता है।
#4. जेल में अन्याय के खिलाफ भूख हड़ताल के कारण मारवाड़ लोक परिषद के किस नेता की मृत्यु 19 जून, 1942 को हुई? [II Grade – 30.07.2023 (S-I)] [CET : 8.1.2023 (I)][स्कूल व्याख्याता (Phy.Edu.)-21.10.2022] (
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विस्तृत व्याख्या: बालमुकुन्द बिस्सा का जन्म 1908 में पीलवा (डीडवाना, नागौर) में हुआ था। प्रजामंडल आंदोलन के दौरान जोधपुर जेल में बंद राजनैतिक कैदियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और खराब भोजन (अव्यवस्था) के खिलाफ इन्होंने लंबी भूख हड़ताल की। इसी हड़ताल के कारण 19 जून, 1942 को उनका स्वास्थ्य बिगड़ा और वे शहीद हो गए।
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जतिन दास की उपाधि क्यों? क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर क्रांतिकारी ‘जतिन दास’ ने भी लाहौर जेल में 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद अपने प्राण त्यागे थे, उसी तर्ज पर बिस्सा जी को “राजस्थान का जतिन दास” कहा जाता है।
#5. राजस्थान के किस क्रांतिकारी को तिहाड़ जेल में रखा गया था- [REET L-II, 26.09.2021]
विस्तृत व्याख्या: राव गोपाल सिंह खरवा (अजमेर) ने विजय सिंह पथिक के साथ मिलकर 1915 के सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई थी। योजना विफल होने पर उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर पहले तिहाड़ जेल और बाद में टोडगढ़ दुर्ग (अजमेर) में नजरबंद रखा गया था।
जेल व क्रांतिकारी (सुमेलन याद रखें): * गोपाल सिंह खरवा -> तिहाड़ / टोडगढ़ जेल
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अर्जुनलाल सेठी -> वेल्लोर जेल
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केसरी सिंह बारहठ -> हजारीबाग जेल
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प्रताप सिंह बारहठ -> बरेली जेल
#6. निम्न में से किसने राव गोपाल सिंह खारवा को प्रभावित किया था?[राज. पुलिस कांस्टेबल-13.5.2022 (I)]
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विस्तृत व्याख्या: अजमेर-मेरवाड़ा के खरवा ठिकाने के जागीरदार राव गोपाल सिंह खरवा ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। वे महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज के सिद्धांतों (स्वदेशी, स्वधर्म, और राष्ट्रवाद) से अत्यधिक प्रभावित थे।
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अन्य विकल्पों की जानकारी:
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ब्रह्म समाज: इसकी स्थापना राजा राममोहन राय ने की थी (सामाजिक सुधारों के लिए)।
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रामकृष्ण मिशन: इसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद ने की थी।
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#7. राजस्थान के जयपुर में राजनीतिक चेतना को सर्वप्रथम जन्म देने वाले थे?[R.A.S. Pre Exam, 1993]
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प्रारंभिक जीवन व नौकरी का त्याग: इनका जन्म 1880 में जयपुर के जैन परिवार में हुआ। जब इन्हें जयपुर रियासत में उच्च पद (नौकरी) का प्रस्ताव मिला, तो इन्होने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि, “अगर अर्जुन लाल नौकरी करेगा, तो अंग्रेजों को भारत से बाहर कौन निकालेगा!” *
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वर्धमान विद्यालय (1908): इन्होने जयपुर में ‘जैन वर्धमान पाठशाला’ (विद्यालय) और एक छात्रावास की स्थापना की। इसका मुख्य उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं था, बल्कि क्रांतिकारी नौजवान तैयार करना और उन्हें प्रशिक्षण देना था।
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राजस्थान सेवा संघ: सेठी जी ने महात्मा गाँधी की सलाह पर ‘राजस्थान सेवा संघ’ के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
#8. अर्जुन लाल सेठी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है? [कॉलेज व्याख्याता (इतिहास) -2016]
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अर्जुन लाल सेठी (जयपुर के दधीचि): जयपुर में राजनीतिक चेतना के जनक।
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प्रसिद्ध कथन: “अर्जुन लाल नौकरी करेगा तो अंग्रेजों को कौन निकालेगा।”
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वर्धमान विद्यालय (1908): सेठी जी द्वारा जयपुर में स्थापित, जिसका असली उद्देश्य क्रांतिकारी तैयार करना था।
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जेल: निमेज हत्याकांड के शक में सेठी जी को वेल्लोर जेल (मद्रास) में 5 साल तक नजरबंद रखा गया था, बरेली में नहीं।
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मार्गदर्शन: इन्होने महात्मा गांधी की सलाह पर काम किया और शिक्षण के रूप में चौमूं ठाकुर के निजी सचिव तथा मथुरा में अध्यापक का कार्य भी किया था।
#9. आरा (नीमेज) षडयंत्र काण्ड में निम्नलिखित में से कौन-कौन से क्रांतिकारी सम्मिलित थे? [स्कूल व्याख्याता (Physical Edu.)-21.10.2022] 1 मोती चन्द 2. अमीर चन्द माणक चन्द 4. जयचन्द
सही उत्तर: (3) 1, 3 एवं 4 (मोती चन्द, माणक चन्द, और जयचन्द)
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विस्तृत व्याख्या: 1913 में क्रांतिकारियों को अपने अभियानों के लिए धन की आवश्यकता थी। इसके लिए अर्जुन लाल सेठी के निर्देशन में बिहार के आरा (नीमेज) में एक धनी महंत की हत्या कर धन लूटने की योजना बनी। इस काम के लिए मोती चंद, माणक चंद, और जयचंद आदि को भेजा गया था। अमीर चंद इसमें शामिल नहीं थे।
#10. निम्न में से किस षडयंत्र केस में प्रताप सिंह बारहठ को कारावास दिया गया? [CET : 07.01.2023 (S-I)]
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विस्तृत व्याख्या: प्रताप सिंह बारहठ का जन्म शाहपुरा (वर्तमान भीलवाड़ा/शाहपुरा जिला) में हुआ था। ये केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। इन्हें ‘बनारस षड्यंत्र केस’ में गिरफ्तार कर 5 साल की कठोर सजा देकर उत्तर प्रदेश की बरेली जेल भेज दिया गया।
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ऐतिहासिक प्रसंग: बरेली जेल में अंग्रेज अधिकारी चार्ल्स क्लीवलैंड ने उन्हें रासबिहारी बोस की जानकारी उगलवाने के लिए प्रलोभन दिया और कहा, “तुम्हारी माँ तुम्हारे लिए बहुत रोती है।” इस पर प्रताप सिंह का ऐतिहासिक जवाब था: “मेरी माँ को रोने दो जिससे किसी अन्य माँ को न रोना पड़े। अपनी माँ को हँसाने के लिए मैं हजारों माताओं को रुलाना नहीं चाहता।” भयंकर यातनाओं के कारण 24 मई 1918 को मात्र 25 वर्ष की आयु में ये शहीद हो गए।
#11. निम्नलिखित में से किस जेल में प्रतापसिंह बारहठ की मृत्यु हुई?
#12. स्वतंत्रता सेनानी श्री केसरीसिंह बारहठ की जन्म स्थली है-
QUIZ 1 I QUIZ 2 I QUIZ 3 I QUIZ 4 I QUIZ 5 I


