राजस्थान में 1857 की क्रांति से महत्वपूर्ण प्रश्न 3

Causes behind Rajasthan 1857 rebellion

 

Results

#1. आउवा के युद्ध में किस ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट की हत्या कर दी गई थी? [जेल प्रहरी 29-10-2018, S-I] [R.A.S., 2007] [II Grade (Sans.) -12.02.2023 (S-II)] [Asst. Agri. Off : 29.01.2013] [Librarian GR-III – 19.09.2020]

1857 की क्रांति: आउवा और चेलावास का युद्ध

  • मुख्य नेतृत्व: 1857 की क्रांति में आउवा (पाली) के ठाकुर कुशाल सिंह चम्पावत ने क्रांतिकारियों का कुशल नेतृत्व किया।

  • प्रमुख घटना: 18 सितंबर 1857 को क्रांतिकारियों और जोधपुर-अंग्रेजों की संयुक्त सेना के मध्य ऐतिहासिक ‘चेलावास का युद्ध’ लड़ा गया।

  • अन्य नाम: इस युद्ध को इतिहास में ‘काले-गोरों का युद्ध’ के नाम से भी जाना जाता है।

  • पॉलिटिकल एजेंट की भूमिका: उस समय मारवाड़ (जोधपुर) रियासत के पॉलिटिकल एजेंट मॉक मेसन थे।

  • निर्णायक मोड़: इस युद्ध में क्रांतिकारियों ने विजय प्राप्त की और पॉलिटिकल एजेंट मॉक मेसन को मार गिराया।

  • सांकेतिक विद्रोह: अपनी जीत और अंग्रेजों के प्रति आक्रोश प्रदर्शित करने के लिए क्रांतिकारियों ने मॉक मेसन का सिर काटकर आउवा किले के मुख्य द्वार पर लटका दिया था

#2. 1857 के विद्रोह के समय आउवा के ठाकुर कुशालसिंह को मेवाड़ के किस स्थान के सामंत ने अपने यहाँ शरण दी? [I Grade Teacher Exam, 2012] [कॉलेज व्याख्याता (सारंगी) परीक्षा 30.05.2019]

आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह को संकट के समय मेवाड़ के कोठारिया ठिकाने के रावत जोध सिंह ने अपने यहाँ शरण और सहायता दी थी।

#3. 20 जनवरी, 1858 को किस अंग्रेज शासक ने आउवा पर आक्रमण किया? [जेल प्रहरी 27-10-2018, Shift -III]

20 जनवरी 1858 को कर्नल होम्स के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने आउवा पर आक्रमण कर किला जीत लिया था और वे सुगाली माता की मूर्ति को अपने साथ अजमेर ले गए थे।

Options ki Jankari:

  • पी.टी. फेंच: ये नसीराबाद छावनी में विद्रोह के समय मारे गए अंग्रेज अधिकारी थे।

  • केप्टिन लुडलो: ये जयपुर के पूर्व पॉलिटिकल एजेंट थे, जिन्होंने सामाजिक सुधारों में योगदान दिया था।

  • चार्ल्स मैटकॉफ: इन्होंने 1818 की राजपूत-ब्रिटिश संधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

#4. 1857 के विद्रोह के समय भीमजी चारण को किस राव ( सामंत ) ने शरण दी थी?[CET -4.2.2023 (S-II)]

क्रांतिकारी भीमजी चारण को मेवाड़ के कोठारिया ठिकाने के रावत जोध सिंह ने अंग्रेजों से बचाते हुए अपने यहाँ शरण दी थी।

Options ki Jankari:

  • केसरीसिंह: ये सलुम्बर के रावत थे, इन्होंने तांत्या टोपे की मदद की थी।

  • रणजीतसिंह: ये गुूलर ठिकाने के सामंत थे, जिन्होंने जोधपुर महाराजा के खिलाफ विद्रोहियों का साथ दिया था।

#5. 1857 की क्रांति के समय बडलू का युद्ध किनके बीच हुआ था? [ARO (Entomology) 28.8.2022]

बडलू का युद्ध 10 अक्टूबर 1857 को जोधपुर राज्य (मारवाड़) की सेना और आसोप ठिकाने के विद्रोही ठाकुर शिवनाथ सिंह के बीच हुआ था।

Options ki Jankari:

  • मारवाड़ एवं आउवा: इनके बीच बिठौड़ा और चेलावास के युद्ध हुए थे।

  • मारवाड़ एवं आलनियावास / कोठारिया: ये विकल्प भ्रमित करने के लिए दिए गए हैं, बडलू का मुख्य संघर्ष आसोप के ठाकुर से जुड़ा है।



#6. किस छावनी के सैनिक दस्तों ने 21 अगस्त, 1857 को ‘चलो दिल्ली-मारो फिरंगी’ नारे के साथ बगावत की ? [पटवार-23.10.2021 (Shift -I)] [पटवार- 2011]

एरिनपुरा छावनी के सैनिकों ने 21 अगस्त 1857 को विद्रोह किया था और दिल्ली की ओर बढ़ते हुए “चलो दिल्ली, मारो फिरंगी” का ऐतिहासिक नारा दिया था।

Options ki Jankari:

  • नसीराबाद: यहाँ राजस्थान में सबसे पहले (28 मई 1857 को) क्रांति की शुरुआत हुई थी।

  • नीमच: यहाँ 3 जून 1857 को मोहम्मद अली बेग और हीरासिंह के नेतृत्व में विद्रोह हुआ था।

  • मेरठ: यहाँ 10 मई 1857 को भारत में क्रांति की मुख्य शुरुआत हुई थी

#7. मेवात में 1857 की क्रान्ति के दौरान किसने नेतृत्व प्रदान किया?[I Grade (History)-18.10.2022]

मेवात (अलवर-भरतपुर क्षेत्र) में 1857 की क्रांति का सफल नेतृत्व सदरुद्दीन मेव द्वारा किया गया था, जिन्होंने स्थानीय जनता को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा किया।

 

#8. राजस्थान के राजाओं में वह कौन शासक था, जो अपनी सेना के साथ 1857 के संग्राम की सहायता हेतु राज्य से बाहर गया- [जेल प्रहरी परीक्षा -2017] [Police Constable Exam-2006-07]

बीकानेर के महाराजा सरदार सिंह राजपूताना के एकमात्र ऐसे शासक थे, जो 1857 की क्रांति में अंग्रेजों की मदद के लिए अपनी सेना लेकर राज्य से बाहर (पंजाब/हरियाणा) गए थे।

अंग्रेजों ने उन्हें बदले में 41 गाँव उपहार में दिए थे।

#9. किस शासक ने 1857 के युद्ध में सेना का नेतृत्व स्वयं किया- [JEN (यांत्रिकी/विद्युत) डिप्लोमा -26.12.2020]

बीकानेर के महाराजा सरदार सिंह ने 1857 के विद्रोह के समय युद्ध में अपनी सेना का नेतृत्व स्वयं किया था और राजा होते हुए भी खुद युद्ध मैदान में उतरे थे।

Options ki Jankari:

  • कुशालसिंह – आउवा: इन्होंने भी अपनी सेना का नेतृत्व स्वयं किया था और अंग्रेजों को हराया था, लेकिन वे आउवा के ‘ठाकुर’ (सामंत) थे, किसी स्वतंत्र रियासत के ‘शासक’ या राजा नहीं थे।

  • दलपतसिंह (प्रतापगढ़) / रणजीतसिंह भाटी (जैसलमेर): इन शासकों ने क्रांति में कोई सक्रिय सैन्य नेतृत्व नहीं किया था।

#10. तांत्या टोपे ने 1857 की क्रांति में राजस्थान के किस नगर पर अधिकार करने में सफलता प्राप्त की थी? [जेल प्रहरी परीक्षा – 2017]

अगस्त 1858 में उन्होंने झालावाड़ के शासक महाराजा पृथ्वी सिंह की सेना को हराया और झालावाड़ के प्रसिद्ध किले तथा नगर पर सफलतापूर्वक अधिकार कर लिया था



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