Major incidents during Rajasthan 1857 rebellion
#1. 1857 के विद्रोह के दौरान निम्नलिखित में से किस ठिकानेदार ने तांत्या टोपे की सहायता की थी- [कॉलेज व्याख्याता (इतिहास) -2016]
1857 की क्रांति के दौरान जब तांत्या टोपे राजस्थान (मेवाड़) आए थे, तब सलुम्बर (उदयपुर रियासत का प्रथम श्रेणी का ठिकाना) के रावत केसरी सिंह ने उनकी काफी मदद की थी।
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आऊवा के खुशाल सिंह चम्पावत: इन्होंने मारवाड़ (जोधपुर) में क्रांति का नेतृत्व किया था और बिठौड़ा व चेलावास के युद्धों में अंग्रेजों को हराया था।
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बागोर के शिवदान सिंह: ये मेवाड़ के अन्य सामंत थे, इनकी तांत्या टोपे की सहायता में कोई प्रमुख भूमिका नहीं रही।
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असीन्द के दुले सिंह: ये भी मेवाड़ के सामंत थे,
#2. निम्नलिखित किस ब्रिटिश अधिकारी ने तांत्या टोपे को फाँसी देने के लिए ब्रिटिश सरकार की आलोचना की थी? [II Grade-30.07.2023 (S-II)] [Asst. Statistical Off.-8.7.2022]
मेवाड़ के पॉलिटिकल एजेंट कैप्टन शॉवर्स ने तांत्या टोपे को फांसी दिए जाने को ‘ब्रिटिश सरकार का अपराध’ बताया था और इसकी कड़ी आलोचना की थी।
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जेम्स आउट्रम: ये अवध (लखनऊ) में नियुक्त ब्रिटिश अधिकारी थे, इनका राजस्थान से सीधा संबंध नहीं था।
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कर्नल होम्स: इसी अधिकारी के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने आऊवा (पाली) के किले पर आक्रमण कर उस पर अधिकार किया था।
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आई.टी. रिचार्ड: यह केवल कन्फ्यूज करने वाला विकल्प है।
#3. 1857 की क्रांति के समय धौलपुर का शासक था- [Asst. Jailer Exam-15.03.2016] [VDO Mains-09.07.2022]
857 की क्रांति के समय धौलपुर के शासक महाराजा भगवंत सिंह थे। धौलपुर की क्रांति पूरे राजस्थान में सबसे अलग थी क्योंकि यहाँ विद्रोह करने वाले भी बाहर के थे (ग्वालियर और इंदौर के क्रांतिकारी – राव रामचन्द्र और हीरालाल के नेतृत्व में) और विद्रोह को दबाने वाली सेना भी बाहर से आई थी (पटियाला, पंजाब की सेना)।
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रामसिंह: 1857 में जयपुर और कोटा के शासकों का नाम रामसिंह द्वितीय था।
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उदयभान सिंह: ये धौलपुर के अंतिम शासक थे (1947 में एकीकरण के समय)।
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कीरत सिंह: ये 19वीं सदी की शुरुआत में धौलपुर के शासक रहे थे।
#4. भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में जो भोजन सामग्री क्रांतिकारी सन्देश के साथ गाँवों में वितरित की जाती थी, वह थी? [पटवार परीक्षा – 2008]
1857 की क्रांति के प्रतीक चिह्न ‘कमल का फूल और रोटी’ थे। गाँवों में आम जनता तक क्रांति का संदेश पहुँचाने के लिए ‘रोटी’ बाँटी जाती थी।
#5. 1857 के दौरान लिखित पुस्तक ‘माझा प्रवास’ के लेखक हैं- [RTET-2011]
‘माझा प्रवास’ (My Journey) मराठी भाषा में लिखी गई एक बहुत ही प्रसिद्ध पुस्तक है, जिसके लेखक विष्णुभट्ट गोडसे (Vishnubhat Godse) हैं। यह किताब 1857 की क्रांति का आँखों देखा हाल बयान करती है।
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सीताराम पाण्डे: इन्होंने ‘सिपाही से सूबेदार तक’ (From Sepoy to Subedar) नामक संस्मरण लिखा था।
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मंगल पाण्डे: ये बैरकपुर छावनी के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे, जिन्हें 1857 की क्रांति में सबसे पहले फाँसी दी गई थी, ये कोई लेखक नहीं थे।
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नॉरगेट: जेम्स नॉरगेट ने सीताराम पाण्डे की पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद किया था।
#6. ‘राजस्थान्स रोल इन द स्ट्रगल्स ऑफ 1857’ किसने लिखी? [JEN (Agri.) 10.09.2022]
यह पुस्तक राजस्थान सरकार द्वारा 1857 की क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने पर (1957 में) प्रकाशित करवाई गई थी।
#7. डूंगरजी व जवाहरजी किस जिले के थे? [वनरक्षक-12.12.2022(S-I)] [II Grade (Urdu) Exam. 2011]
डूंगरजी व जवाहरजी सीकर जिले के बाठोठ-पाटोदा के रहने वाले थे। शेखावाटी के ये लोकदेवता अमीरों को लूटकर धन गरीबों में बाँटते थे।
#8. डूंगरजी व जवाहरजी ने किस राज्यों की सेना के विरुद्ध संघर्ष किया- [REET L-II, 26.09.2021]
डूंगरजी और जवाहरजी की लूटपाट (खासकर 1847 में नसीराबाद छावनी की लूट) से अंग्रेज बहुत परेशान हो गए थे। जब अंग्रेज अधिकारी इनका पीछा कर रहे थे, तब अंग्रेजों के कहने पर बीकानेर के महाराजा रतन सिंह और जोधपुर (मारवाड़) के महाराजा तख्त सिंह की सेनाओं ने मिलकर इन्हें घेर लिया था।
अंततः बीकानेर की सेना ने जवाहरजी को और जोधपुर की सेना ने डूंगरजी को गिरफ्तार कर लिया था।
#9. 1857 ई. के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तांत्या टोपे को अपनी सेनाओं के वेतन और रसद हेतु धन किसने उपलब्ध कराया- [वनरक्षक परीक्षा-2013] [II Grade (Sans.)-12.2.2023 (S-I)]
बीकानेर के अमरचंद बांठिया ने रानी लक्ष्मीबाई और तांत्या टोपे को आर्थिक सहायता (धन) दी थी। इसलिए इन्हें ‘1857 की क्रांति का भामाशाह’ कहा जाता है।
#10. राजस्थान के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें 1857 के स्वतंत्रता आन्दोलन में अंग्रेजों ने फाँसी पर लटकाया था- [JEN (Mechanical) Degree – 20.05.2022]
अमरचंद बांठिया 1857 की क्रांति में फाँसी चढ़ने वाले राजस्थान के पहले व्यक्ति थे। इसी कारण इन्हें ‘राजस्थान का मंगल पांडे’ भी कहा जाता है।
#11. 1857 की क्रांति के दौरान, निम्न में से किसके द्वारा मुगल बादशाह को निष्ठा का प्रतीक, नजर, भेंट की गई? [स्कूल व्याख्याता (Coach)-20.10.2022]
जयपुर के सामोद ठिकाने के रावल शिवसिंह ने अपने शासक की नीतियों के खिलाफ जाकर दिल्ली के मुगल बादशाह (बहादुरशाह जफर) को अपनी निष्ठा के प्रतीक स्वरूप ‘नज़र’ (भेंट) भेजी थी।


