अम्ल क्षार और लवण के महत्वपूर्ण प्रश्न

 

Results

#1. जब CO 2, कैल्सियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया करती है, तो कैल्सियम कार्बोनेट और जल देती है। इस अभिक्रिया में CO 2 का कौन-सा गुण दिखाई देता है?
(RRB Level 01 Stage I 02/02/2026 )

सही उत्तर: (B) अम्लीय गुण (Acidic property)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अधात्विक ऑक्साइड की प्रकृति: कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) एक अधातु का ऑक्साइड है। सामान्यतः सभी अधात्विक ऑक्साइड प्रकृति में अम्लीय (Acidic) होते हैं।
  • जब कार्बन डाइऑक्साइड गैस को चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, Ca(OH)2, जो कि एक क्षार है) में प्रवाहित किया जाता है, तो यह अभिक्रिया करके सफेद अवक्षेप के रूप में कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) और जल (H2O) बनाती है।
  • यह एक प्रकार की उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया है, जो यह सिद्ध करती है कि CO2 एक अम्लीय ऑक्साइड है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) क्षारीय गुण: क्षारीय गुण सामान्यतः धात्विक ऑक्साइडों (जैसे MgO, CaO) में पाए जाते हैं, न कि CO2 जैसे अधात्विक ऑक्साइडों में।
  • (C) ऑक्सीकारक गुण: यद्यपि कुछ संदर्भों में यह ऑक्सीकारक के रूप में व्यवहार कर सकता है, लेकिन इस विशिष्ट अम्ल-क्षार प्रतिक्रिया में इसका अम्लीय स्वभाव प्रदर्शित होता है।
  • (D) उदासीन गुण: CO2 जल में घुलकर कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) बनाती है, अतः यह उदासीन नहीं बल्कि अम्लीय होती है।

#2. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक फेरस सल्फेट को गर्म करने पर नहीं बनता है?
(RRB Technician Grade III : 27 Dec, 2024 Shift 1)

सही उत्तर: (A) सल्फ्यूरिक अम्ल (Sulfuric acid)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • फेरस सल्फेट का उष्मीय अपघटन (Thermal Decomposition of Ferrous Sulfate): हरे रंग के फेरस सल्फेट क्रिस्टल (FeSO4·7H2O) को गर्म करने पर पहले क्रिस्टल जल बाहर निकलता है, और तेज गर्म करने पर यह अपघटित होकर फेरिक ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड गैसें बनाता है।
  • रासायनिक समीकरण: 2FeSO4 (s) → Fe2O3 (s) + SO2 (g) + SO3 (g)
  • इस अभिक्रिया में फेरस सल्फेट का हरा रंग बदलकर लाल-भूरे रंग के फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3) में बदल जाता है तथा सल्फर के जलने की विशिष्ट घुटन पैदा करने वाली गंध (SO2 और SO3 के कारण) आती है। अतः इस प्रक्रिया में सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) का निर्माण नहीं होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये इस अभिक्रिया में बनते हैं, अतः यहाँ सही विकल्प हैं):
  • (B) फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3): यह ठोस अवशेष के रूप में प्राप्त होता है (लाल-भूरा)।
  • (C) सल्फर डाइऑक्साइड (SO2): यह अपघटन के दौरान निकलने वाली मुख्य गैस है।
  • (D) सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO3): यह भी सल्फर डाइऑक्साइड के साथ उत्सर्जित होने वाली गैसीय उत्पाद है।

#3. प्रयोगशालातील एक प्रात्यक्षिकत, एक विद्यार्थी सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेटमध्ये हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिसळतो आणि वायू संचयित करतो. तो कार्बन डाइऑक्साइड आहे याची खात्री विद्यार्थी कशी करू शकतो?
(Not found 12/03/2026 )

सही उत्तर: (C) ते चुन्याच्या निवळीला दुधाळ रूप देते (यह चूने के पानी को दूधिया कर देती है)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की पहचान: जब सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO3) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया करता है, तो सोडियम क्लोराइड, जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस मुक्त होती है।
  • इस उत्पन्न गैस की पुष्टि करने के लिए जब इसे ताजे तैयार चूने के पानी [कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, Ca(OH)2] में प्रवाहित किया जाता है, तो यह चूने के पानी को कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3) के श्वेत अवक्षेप के कारण दूधिया (Milky) कर देती है।
  • यह कार्बन डाइऑक्साइड गैस की उपस्थिति की एक अचूक और मानक प्रयोगशाला परीक्षण विधि है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) यामुळे जलती हुई पेटी काडी विझते: यद्यपि CO2 आग बुझाती है, लेकिन यह विशिष्ट रूप से इसकी पुष्टि नहीं करती क्योंकि नाइट्रोजन या अन्य अक्रिय गैसें भी जलती हुई तीली को बुझा सकती हैं।
  • (B) तो एक निळा अवक्षेप तयार करतो: यह कार्बन डाइऑक्साइड के परीक्षण से संबंधित नहीं है।
  • (D) ते ज्वलनाला समर्थन देते: कार्बन डाइऑक्साइड ज्वलनाला समर्थन नहीं देती, बल्कि यह दहन को रोकती है (ऑक्सीजन ज्वलन में सहायक होती है)।

#4. कौन सा अम्ल सामान्यतः एसिटिक अम्ल कहलाता है और कार्बोक्सिलिक अम्ल नामक समूह से संबंधित है?
(RPF Constable 2018 : 02 Feb 2019)

सही उत्तर: (B) एथेनोइक एसिड (Ethanoic acid)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • आईयूपीएसी नामकरण (IUPAC Nomenclature): एसिटिक अम्ल का रासायनिक सूत्र CH3COOH है। आईयूपीएसी (IUPAC) पद्धति के अनुसार, दो कार्बन atoms वाले इस कार्बोक्जिलिक अम्ल को एथेनोइक एसिड कहा जाता है।
  • यह कार्बोक्जिलिक एसिड (-COOH कार्यात्मक समूह वाले यौगिक) परिवार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सामान्य सदस्य है।
  • इसका 5% से 8% जलीय घोल ‘सिरका’ (Vinegar) कहलाता है, जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों के परिरक्षण और स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) फॉर्मिक एसिड: इसका आईयूपीएसी नाम ‘मेथेनोइक एसिड’ (HCOOH) है, जो चींटी के डंक में पाया जाता है (इसमें केवल एक कार्बन होता है)।
  • (C) ब्यूटेनिक एसिड: यह चार कार्बन परमाणुओं वाला कार्बोक्जिलिक अम्ल है (C3H7COOH), जो मक्खन जैसी गंध वाले यौगिकों में पाया जाता है।
  • (D) प्रोपेनोइक एसिड: यह तीन कार्बन परमाणुओं वाला कार्बोक्जिलिक अम्ल है (C2H5COOH), जो एसिटिक अम्ल नहीं है।

#5. जब वसा और तेल ऑक्सीकृत होते हैं, तो वे _______ बन जाते हैं और उनकी गंध और स्वाद बदल जाते हैं
।(RPF Constable 2018 05 Feb 2019)

सही उत्तर: (C) बासीपन (Rancidity)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • विकृतगंधिता (Rancidity / बासीपन): जब वसा (Fats) और तेल (Oils) वायु या ऑक्सीजन के संपर्क में आकर ऑक्सीकृत (Oxidized) हो जाते हैं, तो उनके गुण बदल जाते हैं।
  • इस प्रक्रिया के कारण खाद्य पदार्थों की गंध (Smell) और स्वाद (Taste) अप्रिय हो जाते हैं, जिसे बासीपन या विकृतगंधिता कहा जाता है।
  • चिप्स या अन्य तैलीय खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनमें ऑक्सीजन के स्थान पर नाइट्रोजन जैसी अक्रिय गैस (Nitrogen gas) भरी जाती है ताकि उनका ऑक्सीकरण रोका जा सके।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) अम्लीय और (B) बुनियादी (क्षारीय): वसा और तेलों के ऑक्सीकरण का मुख्य प्रभाव उनके स्वाद और गंध का बदलना (बासी होना) है, न कि उनका विशुद्ध रूप से अम्लीय या क्षारीय हो जाना।
  • (D) कड़वा: यद्यपि स्वाद खराब हो जाता है, लेकिन इस संपूर्ण रासायनिक एवं संवेदी परिवर्तन के लिए वैज्ञानिक एवं मानक शब्द ‘बासीपन’ (Rancidity) है।



#6. किस अम्ल के सोडियम या पोटैशियम लवणों को साबुन के रूप में परिभाषित किया जाता है?
(RRB Technician Grade III : 29 Dec, 2024 Shift 3)

सही उत्तर: (A) कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic acid / उच्च वसीय अम्ल)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • साबुन की परिभाषा: साबुन उच्च आणविक द्रव्यमान वाले उच्च कार्बोक्सिलिक अम्लों (जिन्हें सामान्यतः वसीय अम्ल या Fatty Acids कहा जाता है, जैसे स्टीयरिक अम्ल, पामिटिक अम्ल आदि) के सोडियम (Na+) या पोटैशियम (K+) लवण होते हैं।
  • साबुनीकरण (Saponification): जब वसा या तेलों को सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) या पोटैशियम हाइड्रोक्साइड (KOH) के साथ गर्म किया जाता है, तो साबुन और ग्लिसरोल का निर्माण होता है।
  • सोडियम लवण वाले साबुन कठोर (Hard soaps) होते हैं, जबकि पोटैशियम लवण वाले साबुन मुलायम (Soft soaps) होते हैं जिनका उपयोग शैम्पू या शेविंग क्रीम में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) सल्फ्यूरिक अम्ल: इसका उपयोग सिंथेटिक डिटर्जेंट (Apamajak) के निर्माण में किया जाता है, न कि पारंपरिक साबुन के सोडियम/पोटैशियम लवणों को बनाने में।
  • (C) नाइट्रिक अम्ल और (D) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल: ये खनिज अम्ल हैं और इनके लवणों से साबुन का निर्माण नहीं होता है।

#7. एथेनॉल द्वारा कौन-सा गुणधर्म प्रदर्शित किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )

सही उत्तर: (D) इसकी गंध मीठी होती है और यह वाष्पशील होता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • एथेनॉल के भौतिक गुण (C2H5OH): एथेनॉल, जिसे सामान्यतः एथिल अल्कोहल कहा जाता है, एक रंगहीन तरल है जिसकी गंध विशिष्ट रूप से सुखद, मीठी (sweetish/pleasant odor) और स्वाद तीखा होता है।
  • यह एक अत्यधिक वाष्पशील (volatile) द्रव है जिसका क्वथनांक अपेक्षाकृत कम (लगभग 78.3°C या 351 K) होता है, जिसके कारण यह सामान्य तापमान पर आसानी से वाष्पित हो जाता है।
  • यह जल में हर अनुपात में घुलनशील (مिसणीय) होता है और प्रकृति में उदासीन होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) यह क्षारीय प्रकृति का होता है: एथेनॉल प्रकृति में उदासीन होता है, यह लिटमस पत्र के प्रति उदासीन है और OH आयन नहीं छोड़ता।
  • (B) यह कठोर जल के साथ मिलकर पृष्ठमल बनाता है: स्कम या अघुलनशील अवक्षेप (पृष्ठमल) कठोर जल के साथ केवल साबुन की अभिक्रिया से बनता है, एथेनॉल से नहीं।
  • (C) यह कक्ष तापमान पर ठोस होता है: एथेनॉल कमरे के तापमान पर एक तरल अवस्था में पाया जाने वाला पदार्थ है, ठोस नहीं।

#8. निम्नलिखित में से कौन सा द्वितीयक वायु प्रदूषक है?
(RRB JE CBT-II Electronics : 31 Aug, 2019 Shift 1)

सही उत्तर: (B) ओजोन (Ozone / O3)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्वितीयक वायु प्रदूषक (Secondary Air Pollutants): वे प्रदूषक जो सीधे स्रोतों (जैसे वाहनों या कारखानों की चिमनियों) से उत्सर्जित नहीं होते, बल्कि वायुमंडल में पहले से मौजूद प्राथमिक प्रदूषकों के बीच सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में रासायनिक अभिक्रिया (Photochemical reactions) के फलस्वरूप बनते हैं, उन्हें द्वितीयक प्रदूषक कहा जाता है।
  • क्षोभमंडलीय ओजोन (O3): भू-तल के पास पाई जाने वाली ओजोन एक प्रमुख द्वितीयक प्रदूषक है, जो नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) के सूर्य के प्रकाश के साथ photochemical reaction से बनती है। (नोट: समतापमंडल की ओजोन परत पृथ्वी को पराबैंगनी किरणों से बचाती है, लेकिन निचले वायुमंडल में यह एक हानिकारक प्रदूषक है)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये प्राथमिक प्रदूषक क्यों हैं?):
  • (A) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): यह जीवाश्म ईंधन के दहन से सीधे वायुमंडल में छोड़ा जाता है, अतः यह एक प्राथमिक (Primary) प्रदूषक है।
  • (C) कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): यह अधूरे दहन के कारण सीधे वाहनों और उद्योगों से बाहर निकलता है (प्राथमिक प्रदूषक)।
  • (D) सल्फर डाइऑक्साइड (SO2): यह कोयला और पेट्रोलियम के जलने से सीधे उत्पन्न होने वाली गैस है (प्राथमिक प्रदूषक)।

#9. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सोडियम कार्बोनेट के बारे में गलत है?
(RRB ALP CBT-1 2024 : 26 Nov, 2024 Shift 3)

सही उत्तर (गलत कथन): (C) सोडियम कार्बोनेट का उपयोग पेट में अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करने के लिए किया जाता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सोडियम कार्बोनेट (Sodium Carbonate / धावन सोडा): इसका रासायनिक सूत्र Na2CO3·10H2O (डेकाहाइड्रेट) होता है। यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक यौगिक है।
  • पेट की अम्लता (Acidity) को दूर करने या अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करने के लिए सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3 यानी बेकिंग सोडा) का उपयोग किया जाता है, न कि सोडियम कार्बोनेट का। सोडियम कार्बोनेट का जलीय विलयन अत्यधिक क्षारीय और संक्षारक होता है, इसलिए इसका उपयोग प्रतिअम्ल (Antacid) के रूप में नहीं किया जा सकता।
  • अतः विकल्प (C) में दिया गया कथन गलत है और यही इस प्रश्न का सही उत्तर है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये सत्य कथन हैं):
  • (A) काँच, साबुन और कागज उद्योग: सोडियम कार्बोनेट का उपयोग बड़े पैमाने पर काँच (Glass), साबुन (Soap) और कागज (Paper) उद्योगों में किया जाता है।
  • (B) बोरेक्स का निर्माण: इसका उपयोग बोरेक्स (Na2B4O7·10H2O) जैसे अन्य उपयोगी सोडियम यौगिकों के उत्पादन में होता है।
  • (D) घरेलू शोधन अभिकर्मक: धावन सोडा का उपयोग घरों में साफ-सफाई के लिए और पानी की स्थायी कठोरता (Permanent hardness) को दूर करने के लिए शोधन अभिकर्मक के रूप में किया जाता है।

#10. जब सोडियम कार्बोनेट (Na 2 CO 3) को जल में घोला जाता है, तो परिणामी विलयन बन जाता है:
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 2)

सही उत्तर: (B) क्षारीय (Alkaline / Basic)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सोडियम कार्बोनेट का जल-अपघटन (Hydrolysis): सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) एक प्रबल क्षार (Sodium hydroxide, NaOH) और दुर्बल अम्ल (Carbonic acid, H2CO3) से मिलकर बना लवण है।
  • जब इसे जल में घोला जाता है, तो इसका जल-अपघटन होता है और यह एक प्रबल क्षार (NaOH) तथा कार्बोनिक अम्ल बनाता है।
  • चूँकि इस विलयन में प्रबल क्षार के कारण हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) की अधिकता हो जाती है, इसलिए परिणामी विलयन प्रकृति में क्षारीय (Basic) हो जाता है और इसका pH मान 7 से अधिक होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) उदासीन: उदासीन विलयन वे होते हैं जो प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार से बनते हैं (जैसे NaCl का जलीय विलयन), न कि सोडियम कार्बोनेट जैसा लवण।
  • (C) अम्लीय: यह लवण प्रबल क्षार से निर्मित है, अतः इसका विलयन अम्लीय नहीं हो सकता।
  • (D) सोडियम क्लोराइड के साथ अत्यधिक अभिक्रियाशील: यह इस संदर्भ में कोई उपयुक्त या सही रासायनिक परिणाम नहीं है।



#11. निम्नलिखित में से कौन-सा, जल में घुलने पर अम्ल और क्षार दोनों का एक उभयनिष्ठ लक्षण है?
(RRB Level 01 Stage I 11/12/2025 )

सही उत्तर: (D) दोनों ही आयन उत्पन्न करते हैं जो जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्ल और क्षार का उभयनिष्ठ गुण (Common Characteristic): जब अम्लों को जल में घोला जाता है, तो वे हाइड्रोजन आयन (H+) उत्पन्न करते हैं और जब क्षारकों को घोला जाता है, तो वे हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) उत्पन्न करते हैं।
  • चूँकि दोनों प्रकार के यौगिक जलीय माध्यम में वियोजित होकर स्वतंत्र आयन (Ions) बनाते हैं, इसलिए उनके ये जलीय विलयन विद्युत आवेश के वाहक बन जाते हैं और इनमें से विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित हो सकती है (यानी ये विद्युत के सुचालक या इलेक्ट्रोलाइट होते हैं)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) धातु कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया: यह गुण केवल अम्लों का है, क्षार धातु कार्बोनेट के साथ क्रिया करके CO2 उत्पन्न नहीं करते।
  • (B) जिंक जैसी धातुओं के साथ हाइड्रोजन गैस: धातु के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करना मुख्य रूप से अम्लों का गुण है (यद्यपि कुछ प्रबल क्षार भी कुछ विशेष धातुओं जैसे जिंक से क्रिया कर सकते हैं, लेकिन यह सभी क्षारकों का सामान्य उभयनिष्ठ लक्षण नहीं है)।
  • (C) नीले लिटमस को लाल करना: यह केवल अम्लों का गुण है, जबकि क्षार लाल लिटमस को नीला करते हैं।

#12. नींबू, सिरका और दही जैसे खाद्य पदार्थों में खट्टे स्वाद का मुख्य कारण क्या है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 06 Jun, 2025 Shift 2)

सही उत्तर: (B) अम्ल (Acids)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्लों का गुण (Properties of Acids): रासायनिक रूप से, सभी अम्ल स्वाद में खट्टे (Sour) होते हैं।
  • विभिन्न खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से अलग-अलग अम्ल पाए जाते हैं जो उनके खट्टेपन के लिए उत्तरदायी हैं:
    • नींबू (Lemon): साइट्रिक अम्ल (Citric acid)
    • सिरका (Vinegar): एसिटिक अम्ल (Acetic acid)
    • दही (Curd): लैक्टिक अम्ल (Lactic acid)
  • ये सभी प्राकृतिक कार्बनिक अम्ल हैं जो हमारे खान-पान का हिस्सा होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) क्षारक (Bases): क्षारक स्वाद में कड़वे होते हैं और छूने पर साबुन जैसे चिकने महसूस होते हैं।
  • (C) क्षाराभ (Alkaloids): ये नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक यौगिक होते हैं जो प्रायः कड़वे या औषधीय प्रकृति के होते हैं, खट्टे स्वाद का कारण नहीं।
  • (D) लवण (Salts): लवणों का स्वाद मुख्य रूप से नमकीन (Salty) होता है (जैसे साधारण नमक)।

#13. pH मान 7 से बढ़कर 14 हो जाता है, यह _______ को दर्शाता है।
(RRB JE CBT I : – 30 May 2019 Shift 2)

सही उत्तर: (D) क्षारीय विलयन (Alkaline / Basic solution)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • pH स्केल (pH Scale): pH स्केल पर 0 से 14 तक के अंक होते हैं जो किसी विलयन की अम्लता या क्षारीयता को मापते हैं।
  • ठीक 7 का मान उदासीन (Neutral) विलयन को दर्शाता है (जैसे शुद्ध जल)।
  • जब pH मान 7 से बढ़कर 14 की ओर जाता है, तो यह विलयन की क्षारीय प्रकृति (Alkaline nature) में वृद्धि को दर्शाता है। जैसे-जैसे pH मान 7 से 14 की तरफ बढ़ता है, विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) की सांद्रता बढ़ती जाती है और क्षारक उतना ही प्रबल होता जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) अम्लीय और उदासीन विलयन दोनों: pH 7 से ऊपर का परिसर केवल क्षारीय क्षेत्र को दर्शाता है, इसमें अम्लीय या उदासीन विलयन शामिल नहीं होते।
  • (B) अम्लीय विलयन: 0 से 7 से कम (0 to <7) का pH मान अम्लीय विलयन को प्रदर्शित करता है, न कि 7 से 14 तक का मान।
  • (C) उदासीन विलयन: उदासीनता केवल ठीक 7 pH मान पर होती है, 7 से 14 तक का पूरा परिसर उदासीन नहीं होता।

#14. ब्लीचिंग पाउडर तैयार करने के लिए किस यौगिक का उपयोग किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 14/12/2025 )

सही उत्तर: (B) कैल्शियम हाइड्रोक्साइड (Calcium Hydroxide)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) का निर्माण: विरंजक चूर्ण (रासायनिक नाम: कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड, सूत्र: CaOCl2) का निर्माण शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस की क्रिया द्वारा किया जाता है।
  • बुझे हुए चूने का रासायनिक नाम कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2] है।
  • रासायनिक समीकरण: Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O
  • इस प्रक्रिया में क्लोर-क्षार प्रक्रिया से प्राप्त क्लोरीन गैस का उपयोग किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) अमोनियम हाइड्रोक्साइड: यह एक दुर्बल क्षारक है (NH4OH) जिसका उपयोग अभिकर्मक और उर्वरक उद्योग में होता है, ब्लीचिंग पाउडर बनाने में नहीं।
  • (C) सोडियम कार्बोनेट: यह धावन सोडा है (Na2CO3), जिसका उपयोग काँच और साबुन उद्योग तथा जल की कठोरता दूर करने में होता है।
  • (D) कैल्सियम क्लोराइड: यह एक लवण (CaCl2) है, जिसका उपयोग नमी हटाने (desiccant) या बर्फ पिघलाने में किया जाता है, न कि ब्लीचिंग पाउडर के निर्माण में कच्चे माल के रूप में।

#15. निम्नलिखित में से कौन नीले लिटमस को लाल कर देगा?
(RRB JE 27 May 2019 Shift 2 CBT 1)

सही उत्तर: (A) सिरका (Vinegar)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्लों का लिटमस पर प्रभाव: रासायनिक रूप से, सभी अम्ल (Acids) नीले लिटमस पत्र को लाल (Blue to Red) कर देते हैं।
  • सिरका (Vinegar): सिरका एथेनोइक अम्ल (एसिटिक अम्ल, CH3COOH) का 5% से 8% जलीय घोल होता है। चूँकि यह एक अम्ल है, इसलिए यह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है।
  • इसके विपरीत, क्षारक (Bases) लाल लिटमस पत्र को नीला करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) वाशिंग सोडा विलयन (धावन सोडा): यह सोडियम कार्बोनेट का जलीय विलयन है जो प्रकृति में क्षारीय होता है, अतः यह लाल लिटमस को नीला करता है, नीले को लाल नहीं।
  • (C) चूने का पानी: यह कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2] का क्षारीय विलयन है, जो लाल लिटमस को नीला करता है।
  • (D) बेकिंग सोडा विलयन: यह सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO3) का हल्का क्षारीय विलयन है, जो लाल लिटमस को नीला बनाता है।



#16. बोरेक्स जैसे सोडियम घटकों के निर्माण में निम्नलिखित में से किसका उपयोग किया जाता है?
(RPF Constable 2018 08 Feb 2019 Shift 2)

सही उत्तर: (A) वॉशिंग सोड़ा (Washing Soda)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • वॉशिंग सोडा (धावन सोडा): इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Na2CO3·10H2O) है।
  • सोडियम कार्बोनेट का उपयोग विभिन्न महत्वपूर्ण सोडियम यौगिकों, जैसे कि बोरेक्स (Na2B4O7·10H2O) के निर्माण में कच्चे माल के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
  • इसके अलावा, इसका उपयोग काँच, साबुन और कागज उद्योगों में तथा घरों में जल की कठोरता दूर करने के लिए भी किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) फिनोल: यह एक कार्बनिक यौगिक (Carbolic acid) है जिसका उपयोग एंटीसेप्टिक और रेजिन के निर्माण में होता है, बोरेक्स बनाने में नहीं।
  • (C) ट्रुपेशन फॉस्फेट (Trisodium phosphate): यह एक सफाई एजेंट और डिटर्जेंट योजक है, जिसका उपयोग बोरेक्स के निर्माण में नहीं होता।
  • (D) ब्लीचिंग पाउडर: यह कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड (CaOCl2) है, जो कैल्शियम आधारित यौगिक है और सोडियम यौगिकों के निर्माण में प्रयुक्त नहीं होता।

#17. अम्ल, स्वाद में _______ होते हैं
।(RRB JE 29 May 2019 Shift 3 CBT 1)

सही उत्तर: (B) खट्टे (Sour)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्लों का मूल गुण: रासायनिक रूप से, सभी अम्ल (Acids) स्वाद में खट्टे होते हैं। अंग्रेजी का शब्द ‘Acid’ लैटिन शब्द ‘Acere’ से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘खट्टा’ होता है।
  • प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले खट्टे खाद्य पदार्थों में विभिन्न प्रकार के अम्ल मौजूद होते हैं, जैसे:
    • नींबू और संतरा: साइट्रिक अम्ल
    • इमली और अंगूर: टार्टरिक अम्ल
    • सिरका: एसिटिक अम्ल
  • ये नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं और जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H+) मुक्त करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) नमकीन: नमकीन स्वाद मुख्य रूप से लवणों (Salts, जैसे सोडियम क्लोराइड) का विशिष्ट गुण होता है।
  • (C) मीठे: मीठा स्वाद शर्करा (Sugars) या कार्बोहाइड्रेट यौगिकों से संबंधित है।
  • (D) कड़वे: क्षारक (Bases) और क्षाराभ (Alkaloids) स्वाद में कड़वे होते हैं और छूने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं।

#18. पानी की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए क्या उपयोग किया जाता है?
(RRB ALP CBT-1 2024 : 29 Nov, 2024 Shift 3)

सही उत्तर: (C) धोने का सोडा (Washing Soda)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • धोने का सोडा (Washing Soda): इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Na2CO3·10H2O) है।
  • जल की स्थायी कठोरता (Permanent hardness) मुख्य रूप से कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड तथा सल्फates की उपस्थिति के कारण होती है।
  • धोने का सोडा जल में मौजूद इन अवांछित कैल्शियम और मैग्नीशियम लवणों के साथ अभिक्रिया करके उन्हें अघुलनशील कार्बोनेट के रूप में अवक्षेपित (precipitate) कर देता है, जिससे पानी की स्थायी कठोरता दूर हो जाती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) खाने का सोडा: यह सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3) है, जिसका उपयोग बेकिंग और प्रतिअम्ल के रूप में होता है, पानी की कठोरता हटाने में नहीं।
  • (B) ब्लीचिंग पाउडर: यह कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड (CaOCl2) है, जो रोगाणुनाशक और विरंजन के काम आता है।
  • (D) सोडियम हाइड्रोक्साइड: यह कास्टिक सोडा (NaOH) है, जो एक प्रबल क्षार है और इसका उपयोग साबुन तथा कागज उद्योग में होता है, कठोरता दूर करने के लिए विशिष्ट रूप से प्रयुक्त नहीं होता।

#19. सक्रियता श्रेणी में नीचे वाली धातुएं, जैसे सोना और चांदी, सामान्यतः प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं, क्योंकि _______ ।
(RRB Level 01 Stage I 26/12/2025 12:45 PM – 2:15 PM)

सही उत्तर: (D) ये अत्यधिक अनभिक्रियाशील होती हैं (These are highly unreactive / noble metals)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • धातुओं की सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series): सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे आने वाली धातुएं (जैसे सोना – Au, चांदी – Ag, और प्लेटिनम – Pt) बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं। इन्हें ‘उत्कृष्ट धातुएं’ (Noble metals) भी कहा जाता है।
  • कम रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता के कारण ये सामान्य तापमान पर वायु, नमी, ऑक्सीजन या विभिन्न अम्लों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करती हैं।
  • यही कारण है कि ये प्रकृति में किसी अन्य तत्व के साथ यौगिक (जैसे ऑक्साइड या सल्फाइड) बनाने के बजाय शुद्ध या मुक्त अवस्था (Free state) में पाई जाती हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) ये अम्लों के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करती हैं: यदि ये अम्लों से तीव्रता से अभिक्रिया करतीं, तो ये स्वतंत्र अवस्था में न रहकर लवण के रूप में मिलतीं (सोना सामान्य अम्लों से क्रिया नहीं करता)।
  • (B) ये ऑक्सीजन और जल के साथ अत्यंत अभिक्रियाशील होती हैं: अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएं (जैसे सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम) ऑक्सीजन और जल से तीव्रता से क्रिया करती हैं और संयुक्त रूप से पाई जाती हैं।
  • (C) इनका गलनांक अत्यधिक निम्न होता है: गलनांक का प्रकृति में मुक्त या संयुक्त रूप से पाए जाने से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

#20. जलीय विलयन में क्षार के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )

सही उत्तर: (D) ये जल में OH- आयन उत्पन्न करते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • क्षारकों की परिभाषा (Arrhenius Concept of Bases): वे क्षारक जो जल में घुलनशील होते हैं, उन्हें ‘क्षार’ (Alkalies) कहा जाता है। आर्हेनियस सिद्धांत के अनुसार, जलीय विलयन में घुलने पर सभी क्षार वियोजित होकर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) उत्पन्न करते हैं।
  • यही हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) क्षारकों के रासायनिक गुणों, जैसे कि उनकी क्षारीय प्रकृति और विद्युत चालन के लिए उत्तरदायी होते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) धातुओं के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करना: यह गुण मुख्य रूप से अम्लों का है (यद्यपि कुछ विशेष प्रबल क्षार जैसे NaOH गर्म अवस्था में जिंक जैसी कुछ धातुओं से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस बनाते हैं, लेकिन यह सभी क्षारकों का सामान्य और मुख्य लक्षण नहीं है)।
  • (B) स्वाद में खट्टा होना: क्षारक स्वाद में कड़वे होते हैं, खट्टे नहीं (खट्टे पदार्थ अम्ल होते हैं)।
  • (C) नीले लिटमस को लाल करना: नीले लिटमस को लाल करना अम्लों का गुण है, जबकि क्षारक लाल लिटमस को नीला करते हैं।



#21. लौह संक्षारण को सामान्यतः जंग लगना कहा जाता है, और इसके लिए _______ की आवश्यकता होती है।
(RRB Level 01 Stage I 09/02/2026 )

सही उत्तर: (B) जल और वायुमंडलीय ऑक्सीजन (Water and atmospheric oxygen)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • लोहे पर जंग लगना (Rusting of Iron): लोहे का संक्षारण एक ऑक्सीकरण रासायनिक प्रक्रिया है। इसके लिए दो सबसे मुख्य और अनिवार्य घटक oxygen (O2) और moisture/water (H2O) हैं।
  • जब लोहा लंबे समय तक नमी (जल) और हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में रहता है, तो उस पर हाइड्रेटेड आयरन (III) ऑक्साइड (Fe2O3·xH2O) की एक भूरे रंग की परत जम जाती है, जिसे ‘जंग’ कहा जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) लवण और प्रबल अम्ल की उपस्थिति: यद्यपि लवण (जैसे समुद्री पानी) जंग लगने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं, लेकिन वे इसके प्राथमिक कारण या अनिवार्य आवश्यकता नहीं हैं (साधारण पानी और ऑक्सीजन से भी जंग लग सकती है)।
  • (C) नमी और उच्च अम्लता: जंग लगने के लिए अम्लता अनिवार्य नहीं है; सामान्य या हल्की क्षारीय/उदासीन नमी और ऑक्सीजन से भी यह क्रिया हो जाती है।
  • (D) लोहा और अत्यधिक निम्न ताप: कम तापमान का होना जंग लगने की कोई आवश्यक शर्त नहीं है।

#22. 25 डिग्री सेल्सियस पर एक उदासीन विलयन के pH के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 3)

सही उत्तर: (D) pH, 7 के बराबर है (pH is equal to 7)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • उदासीन विलयन का pH मान: मानक ताप और दाब (विशेषकर 25°C या कमरे के तापमान) पर किसी भी उदासीन विलयन (जैसे शुद्ध जल) का pH मान ठीक 7 के बराबर होता है।
  • इस स्थिति में हाइड्रोजन आयनों (H+ या H3O+) की सांद्रता और हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) की सांद्रता एक-दूसरे के बिल्कुल बराबर होती है (10-7 mol/L), जिसके परिणामस्वरूप विलयन न तो अम्लीय होता है और न ही क्षारीय।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) pH, 7 से कम है: 7 से कम pH मान अम्लीय विलयन को दर्शाता है।
  • (B) pH, 7 से अधिक है: 7 से अधिक pH मान क्षारीय (या बुनियादी) विलयन को दर्शाता है।
  • (C) pH, 7 के बराबर नहीं है: यह कथन उदासीन विलयन के संबंध में गलत है क्योंकि उदासीनता केवल 7 मान पर ही होती है।

#23. निम्नलिखित में से कौन सा तत्व खट्टे स्वाद का होता है और नीले लिटमस को लाल कर देता है?
(RPF Constable 2018 : 03 Feb, 2019 Shift 2)

सही उत्तर: (C) अम्ल (Acid)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्लों के रासायनिक एवं भौतिक गुण: रासायनिक रूप से सभी अम्ल स्वाद में खट्टे (Sour) होते हैं।
  • इनका एक सर्वविदित सूचक परीक्षण यह है कि ये नीले लिटमस पत्र को लाल (Blue to Red) रंग में परिवर्तित कर देते हैं।
  • इसके अलावा, जलीय विलयन में घुलने पर ये हाइड्रोजन आयन (H+) या हाइड्रोनियम आयन (H3O+) मुक्त करते हैं और विद्युत का चालन करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) क्षार और (B) एल्क्लाइ (Alkali): ये दोनों स्वाद में कड़वे होते हैं, छूने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं, और लाल लिटमस पत्र को नीला करते हैं।
  • (D) लवण (Salt): लवण उदासीन या विशिष्ट स्वाद (मुख्यतः नमकीन) वाले होते हैं और सामान्यतः लिटमस पत्र के रंग पर कोई प्रभावी बुनियादी परिवर्तन नहीं करते हैं (यदि वे प्रबल अम्ल-प्रबल क्षार से बने हों)।

#24. यदि किसी विलयन का pH मान 13 है, तो इसका अर्थ है कि यह _______ है।
(RRB JE Electronics 01 Sep 2019 Shift 2)

सही उत्तर: (D) प्रबल क्षारीย (Strongly basic)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • pH स्केल और क्षारीयता: pH स्केल पर 7 से अधिक मान क्षारीय प्रकृति को दर्शाता है। जैसे-जैसे pH मान 7 से बढ़कर 14 की ओर जाता है, विलयन की क्षारीयता में तीव्र वृद्धि होती है।
  • यदि किसी विलयन का pH मान 13 है, तो यह इस बात को प्रदर्शित करता है कि उस विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) की सांद्रता अत्यंत अधिक है, जो इसे एक प्रबल क्षारीय (Strongly basic) विलयन बनाता है (जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड का सांद्र घोल)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) प्रबल अम्लीय: प्रबल अम्लीय विलयनों का pH मान बहुत कम होता है (सामान्यतः 0 से 3 के बीच)।
  • (B) दुर्बल अम्लीय: दुर्बल अम्लीय विलयनों का pH मान 7 से कम लेकिन 4 से 6 के आसपास होता है।
  • (C) दुर्बल क्षारीय: दुर्बल क्षारीय विलयनों का pH मान 7 से थोड़ा अधिक होता है (जैसे 8 से 10 के बीच), न कि 13।

#25. निम्नलिखित में से किसे, कार्बनिक यौगिक नहीं माना जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )

सही उत्तर: (D) सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds): सामान्यतः वे रासायनिक यौगिक जिनमें कार्बन परमाणु मुख्य रूप से हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन या अन्य तत्वों के साथ सहसंयोजक बंध (Covalent bonds) द्वारा जुड़े होते हैं, कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं।
  • यद्यपि सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) के रासायनिक सूत्र में कार्बन मौजूद है, लेकिन कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, कार्बन के ऑक्साइड (CO, CO2) और साइनाइड जैसे यौगिकों को उनकी खनिज प्रकृति और विशिष्ट गुणों के कारण पारंपरिक रूप से अकार्बनिक यौगिक (Inorganic compounds) माना जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये कार्बनिक यौगिक क्यों हैं?):
  • (A) ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH): यह एक कार्बोक्सिलिक अम्ल है जिसमें कार्बन और हाइड्रोजन के बीच सीधे बंध होते हैं, अतः यह एक कार्बनिक यौगिक है।
  • (B) मेथेन (CH4): यह सबसे सरल हाइड्रोकार्बन (एल्केन) है और पूर्ण रूप से एक कार्बनिक यौगिक है।
  • (C) एथेनॉल (C2H5OH): यह एक कार्बनिक अल्कोहल है जो कार्बन श्रृंखला और क्रियात्मक समूह से मिलकर बना है।



#26. निम्नलिखित में से कौन-सा एथेनॉल के सेवन के प्रभाव का सही वर्णन करता है?
(RRB ALP CBT 1 18/02/2026 )

सही उत्तर: (B) कम मात्रा में तनु एथेनॉल भी मत्ता का कारण बनता है, जबकि परिशुद्ध एथेनॉल घातक हो सकता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • एथेनॉल का सेवन और प्रभाव: एथेनॉल (C2H5OH) का उपयोग विभिन्न प्रकार के मादक पेयों में किया जाता है। कम मात्रा में भी तनु एथेनॉल का सेवन व्यक्ति में मत्ता (Intoxication / नशा) और मानसिक शिथिलता का कारण बनता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • परिशुद्ध एथेनॉल (Absolute Alcohol): लगभग 100% शुद्ध एथेनॉल को परिशुद्ध एथेनॉल कहा जाता है। यह अत्यंत संक्षारक और विषैला होता है। इसकी बहुत कम मात्रा का सेवन करना भी मानव शरीर के लिए अत्यधिक घातक (Fatal) सिद्ध हो सकता है, जिससे गंभीर आंतरिक क्षति या मृत्यु हो सकती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) परिशुद्ध एथेनॉल की कम मात्रा सुरक्षित होती है: यह कथन पूरी तरह गलत है, क्योंकि शुद्ध एथेनॉल बेहद जहरीला होता है और इसकी थोड़ी सी मात्रा भी सुरक्षित नहीं है।
  • (C) तनुकृत एथेनॉल के दीर्घकालिक सेवन से कोई प्रभाव नहीं पड़ता: तनु एथेनॉल का लंबे समय तक सेवन करने से यकृत (Liver) खराब होना, व्यसन (Addiction) और स्वास्थ्य पर गंभीर व घातक दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
  • (D) परिशुद्ध एथेनॉल से मामूली मादकता होती है: परिशुद्ध एथेनॉल मामूली नशा करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका सेवन जानलेवा हो सकता है।

#27. अधिकांश कार्बन यौगिकों के पूर्ण दहन के दौरान बनने वाले प्राथमिक उत्पाद कौन-से हैं?
(RRB Level 01 Stage I 05/02/2026 )

सही उत्तर: (C) कार्बन डाइऑक्साइड, जल, और ऊर्जा (Carbon dioxide, water, and energy)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • कार्बन यौगिकों का दहन (Combustion of Carbon Compounds): कार्बन और उसके अधिकांश यौगिक ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर प्रचुर मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करते हैं, जिसे दहन अभिक्रिया कहा जाता है।
  • संतृप्त हाइड्रोकार्बन (या अधिकांश कार्बन यौगिकों) के पूर्ण दहन (Complete combustion) पर मुख्य रूप से तीन उत्पाद बनते हैं:
    1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
    2. जल वाष्प (H2O)
    3. ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा (Heat and Light)

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) कज्जल और कार्बन डाइऑक्साइड: कज्जल (Soot या काला धुआँ) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के अपूर्ण दहन (Incomplete combustion) के दौरान बनता है, पूर्ण दहन पर नहीं।
  • (B) कार्बन मोनोऑक्साइड और जल: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का बनना भी अपूर्ण दहन का लक्षण है।
  • (D) एथेनॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल: ये दहन के उत्पाद नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग कार्बनिक रासायनिक यौगिक हैं।

#28. पेयजल कीटाणुरहित करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग क्यों किया जाता है?
(RRB JE CBT-I 2024 16 Dec 2024 Shift 1)

सही उत्तर: (A) यह क्लोरीन विमोचित करता है, जो कीटाणुओं को मारता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ब्लीचिंग पाउडर का कार्य (Disinfecting Action): ब्लीचिंग पाउडर (कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड, CaOCl2) का उपयोग मुख्य रूप से पीने के पानी को रोगाणुमुक्त (Disinfectant) बनाने के लिए किया जाता है ताकि यह जलजनित रोगों (Water-borne diseases) से सुरक्षित हो सके।
  • जब ब्लीचिंग पाउडर को पानी में मिलाया जाता है या यह वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में आता है, तो यह प्रतिक्रिया करके मुक्त क्लोरीन गैस (Cl2) विमोचित (release) करता है।
  • यही सक्रिय क्लोरीन पानी में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों, बैक्टीरिया और रोगजनकों (Pathogens) को प्रभावी ढंग से नष्ट कर देती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) यह पानी को उदासीन करता है: ब्लीचिंग पाउडर का मुख्य उद्देश्य पानी को उदासीन करना नहीं है, बल्कि कीटाणुओं को मारना है।
  • (C) यह पानी की कठोरता को कम करता है: पानी की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए ‘धावन सोडा’ (सोडियम कार्बोनेट) का उपयोग किया जाता है, ब्लीचिंग पाउडर का नहीं।
  • (D) यह एक अम्लीय माध्यम प्रदान करता है: ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग अम्लीय माध्यम देने के लिए नहीं किया जाता; इसका मुख्य गुण इसकी ऑक्सीकरण और कीटाणुनाशक क्षमता है।

#29. गंधीच सूचकों (olfactory indicators) के उपयोग का मुख्य लाभ क्या है?
(RRB Technician Grade III 09/03/2026)

सही उत्तर: (D) ये दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए उपयोगी होते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • गंधीय या गंधीच सूचक (Olfactory Indicators): वे पदार्थ जिनकी गंध (Smell) अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है, गंधीय सूचक कहलाते हैं। इसके प्रमुख उदाहरण प्याज (Onion), वैनिला अर्क (Vanilla extract), और लौंग का तेल (Clove oil) हैं।
  • मुख्य लाभ: चूंकि ये सूचक रंग परिवर्तन के बजाय गंध के आधार पर अम्ल और क्षार की पहचान करते हैं, इसलिए इनका उपयोग प्रयोगशाला में दृष्टिबाधित (Visually impaired) छात्रों या व्यक्तियों द्वारा अम्लीय और क्षारीय विलयनों की जाँच करने के लिए विशेष रूप से किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) ये सटीक pH मान देते हैं: गंधीय सूचक केवल माध्यम (अम्लीय या क्षारीय) की प्रकृति बताते हैं, कोई सटीक संख्यात्मक pH मान नहीं देते।
  • (B) ये शीघ्रता से रंग बदलते हैं: ये रंग नहीं बदलते, बल्कि अपनी विशिष्ट गंध बदलते या गायब करते हैं।
  • (C) इनका उपयोग सभी विलयनों के लिए किया जा सकता है: इनका उपयोग विशेष परीक्षणों के लिए किया जाता है, हर प्रकार के रासायनिक विलयन के लिए सार्वभौमिक रूप से नहीं।

#30. जब सोडियम सल्फेट विलयन को बेरियम क्लोराइड विलयन में मिलाया जाता है, तो _______ का अवक्षेप बनता है।
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 3)

सही उत्तर: (D) बेरियम सल्फेट (BaSO4)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • द्वि-विस्थापन एवं अवक्षेपण अभिक्रिया (Double Displacement / Precipitation Reaction): जब सोडियम सल्फेट (Na2SO4) के विलयन को बेरियम क्लोराइड (BaCl2) के विलयन में मिलाया जाता है, तो आयनों का आदान-प्रदान होता है।
  • रासायनिक समीकरण:
    Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s)↓ + 2NaCl(aq)
  • इस अभिक्रिया में बेरियम सल्फेट (BaSO4) का एक सफेद रंग का अघुलनशील अवक्षेप (White precipitate) बनता है, जो नीचे बैठ जाता है। सोडियम क्लोराइड विलयन में घुला रहता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) सोडियम क्लोराइड: यह जल में पूरी तरह घुलनशील होता है (साधारण नमक) और अवक्षेप के रूप में अलग नहीं होता।
  • (B) बेरियम हाइड्रोजन सल्फेट और (C) सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट: दी गई रासायनिक प्रतिक्रिया में इन लवणों का निर्माण नहीं होता है।



#31. दही में मुख्यत: _______ अम्ल पाया जाता है।
(RRB NTPC Tier I : 27 Apr 2016 Shift 2)

सही उत्तर: (C) लैक्टिक (Lactic acid)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • दही में पाया जाने वाला अम्ल: दूध के दही में परिवर्तन के दौरान लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (जैसे लैक्टोबैसिलस) दूध की शर्करा (लैक्टोज) को किण्वित (ferment) करके लैक्टिक अम्ल (C3H6O3) में बदल देते हैं।
  • यही लैक्टिक अम्ल दही को उसका विशिष्ट खट्टा स्वाद प्रदान करता है और दूध के प्रोटीन को स्कंधित (coagulate) करके उसे दही का रूप देता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) बेंजोइक अम्ल: यह एक कार्बनिक अम्ल है जिसका उपयोग मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों (जैसे अचार, जैम) के परिरक्षण (preservation) में संरक्षक के रूप में किया जाता है, न कि दही में।
  • (B) फुमडिस (Fumaric acid): यह एक डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल है जो विभिन्न पौधों और उप-उत्पाद के रूप में पाया जाता है, दही में प्रमुखता से नहीं होता।
  • (D) मैलिक अम्ल: यह मुख्य रूप से कच्चे सेब (Apple) और अन्य फलों में पाया जाने वाला प्राकृतिक अम्ल है।

#32. जब किसी विलयन में H+ और OH- आयनों की संख्या समान होती है, तो विलयन का pH क्या होता है?
(RRB JE CBT-I 2024 18 Dec 2024 Shift 2)

सही उत्तर: (C) pH = 7

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • उदासीन विलयन और आयनों की सांद्रता: जब किसी जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयनों (H+ या H3O+) की संख्या और हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) की संख्या बिल्कुल समान होती है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित कर देते हैं।
  • इस अवस्था में विलयन प्रकृति में उदासीन (Neutral) होता है और मानक तापमान (25°C) पर इसका pH मान ठीक 7 होता है (जैसे शुद्ध जल)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) pH < 3: यह मान अत्यधिक अम्लीय विलयन को दर्शाता है, जहाँ H+ आयनों की संख्या OH की तुलना में बहुत अधिक होती है।
  • (B) pH > 3 लेकिन < 5: यह परिसर भी अम्लीय विलयनों के क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
  • (D) pH > 12: यह मान प्रबल क्षारीय विलयन को प्रदर्शित करता है, जहाँ OH आयनों की सांद्रता H+ की तुलना में अत्यधिक अधिक होती है।

#33. स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए कौन सा विटामिन सबसे आवश्यक है?
(RRB JE 29 May 2019 Shift 2 CBT 1)

सही उत्तर: (D) C (विटामिन सी / एस्कॉर्बिक अम्ल)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • विटामिन सी (Vitamin C / Ascorbic Acid): यह एक जल-विलेय (water-soluble) विटामिन है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) को मजबूत बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • यह सफेद रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) के उत्पादन और कार्यप्रणाली को बढ़ावा देता है, जिससे शरीर संक्रमण और बीमारियों से लड़ पाता है। इसके अलावा, यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है।
  • यह खट्टे फलों (जैसे नींबू, संतरा, आँवला, मौसमी) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसकी कमी से ‘स्कर्वी’ रोग हो जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) फोलिक अम्ल (विटामिन B9): यह मुख्य रूप से डीएनए संश्लेषण और लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण के लिए आवश्यक है, विशेषकर गर्भावस्था के दौरान।
  • (B) विटामिन A: यह मुख्य रूप से आँखों की दृष्टि (Vision) और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है।
  • (C) विटामिन K: यह रक्त का थक्का जमने (Blood clotting) की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

#34. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प बेकिंग सोडा के रासायनिक नाम (IUPAC) का सही प्रतिनिधित्व करता है?(
RPF Constable 2024 : 09 Mar, 2025 Shift 1)

सही उत्तर: (C) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (Sodium Hydrogen Carbonate / Sodium Bicarbonate)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • बेकिंग सोडा (खाने का सोडा): इसका रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (या सोडियम बाइकार्बोनेट) है और इसका रासायनिक सूत्र NaHCO3 है।
  • इसे सोल्वे प्रक्रिया (Solvay process) द्वारा सोडियम क्लोराइड, जल, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया का उपयोग करके बनाया जाता है।
  • इसका उपयोग बेकिंग उद्योग में केक या ब्रेड को स्पंजी और मुलायम बनाने (बेकिंग पाउडर के घटक के रूप में) तथा पेट की अम्लता (Acidity) को कम करने के लिए प्रतिअम्ल (Antacid) के रूप में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) सोडियम क्लोराइड: यह साधारण खाने का नमक (NaCl) है।
  • (B) कैल्सियम कार्बोनेट: यह चूना पत्थर, संगमरमर या चाक (CaCO3) का रासायनिक नाम है।
  • (D) पोटेशियम बाइकार्बोनेट: यह एक अलग यौगिक (KHCO3) है, जिसका उपयोग सोडियम-मुक्त बेकिंग या अग्निशामक यंत्रों में होता है, न कि बेकिंग सोडा के रूप में।

#35. लवंग तेल का उपयोग घ्राण सूचक (olfactory indicator) के रूप में क्यों किया जाता है?
(RRB Level 01 Stage I 16/12/2025 )

सही उत्तर: (A) यह अम्लीय और क्षारीय माध्यम में अलग-अलग गंध उत्पन्न करता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • घ्राण सूचक (Olfactory Indicators): वे पदार्थ जिनकी विशिष्ट गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम के संपर्क में आने पर बदल जाती है या समाप्त हो जाती है, उन्हें घ्राण सूचक कहा जाता है। लौंग का तेल (Clove oil) इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
  • लौंग के तेल की अपनी एक तेज और विशिष्ट गंध होती है। जब इसे किसी अम्ल (जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) के साथ मिलाया जाता है, तो इसकी गंध बनी रहती है; लेकिन जब इसे किसी क्षार (जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड) के संपर्क में लाया जाता है, तो इसकी विशिष्ट गंध पहचान में नहीं आती (गायब हो जाती है)।
  • इस प्रकार, यह गंध के बदलाव के आधार पर माध्यम की पहचान करने में सहायता करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B), (C) और (D) रंग या बुलबुले से संबंधित विकल्प: घ्राण सूचक रंग परिवर्तन या बुलबुले बनाने के सिद्धांत पर काम नहीं करते, बल्कि इनका मुख्य आधार ‘गंध’ (Smell) का परिवर्तन होता है। इसलिए रंग परिवर्तन वाले विकल्प गलत हैं।



#36. बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम क्या है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )

सही उत्तर: (D) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (Sodium hydrogen carbonate)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • बेकिंग सोडा (खाने का सोडा): इसका रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (या सोडियम बाइकार्बोनेट) है और इसका रासायनिक सूत्र NaHCO3 है।
  • इसे सोल्वे विधि (Solvay process) द्वारा उत्पादित किया जाता है।
  • यह एक हल्का, गैर-संक्षारक क्षारीय लवण है जिसका उपयोग रसोई में खाद्य पदार्थों को जल्दी पकाने, केक को स्पंजी बनाने तथा पेट की अम्लता को दूर करने के लिए प्रतिअम्ल (Antacid) के रूप में किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) सोडियम हाइड्रोक्साइड: यह कास्टिक सोडा (NaOH) का रासायनिक नाम है, जो एक अत्यंत प्रबल क्षार है।
  • (B) सोडियम सल्फेट: यह एक अलग यौगिक (Na2SO4) है जिसका उपयोग डिटर्जेंट और कांच उद्योग में होता है।
  • (C) सोडियम कार्बोनेट: यह धोने के सोडे (Na2CO3·10H2O) का रासायनिक नाम है, न कि बेकिंग सोडा का।

#37. अम्ल-क्षारक अभिक्रियाओं में निम्नलिखित में से क्या घ्राण सूचक (olfactory indicator) के रूप में कार्य करता है?
(RRB Level 01 Stage I 10/02/2026 )

सही उत्तर: (D) प्याज का अर्क (extract) क्षारककों में गंध बदल देता है

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • घ्राण सूचक (Olfactory Indicators): वे पदार्थ जिनकी विशिष्ट गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम के संपर्क में आने पर परिवर्तित हो जाती है या गायब हो जाती है, उन्हें घ्राण सूचक कहा जाता है।
  • प्याज का अर्क (Onion extract): प्याज एक प्राकृतिक घ्राण सूचक है। इसकी अपनी एक खास तेज गंध होती है। जब इसे किसी अम्ल में मिलाया जाता है, तो इसकी गंध बनी रहती है; लेकिन जब इसे किसी क्षारक (जैसे NaOH) के संपर्क में लाया जाता है, तो इसकी विशिष्ट गंध महसूस नहीं होती (समाप्त हो जाती है)।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) हल्दी क्षारकों में नीली हो जाती है: हल्दी क्षारकों के संपर्क में आने पर लाल-भूरे (Reddish-brown) रंग की हो जाती है, नीली नहीं (और यह रंग-परिवर्तन सूचक है, घ्राण सूचक नहीं)।
  • (B) फिनॉलफ्थेलिन अम्लों में गुलाबी हो जाता है: फिनॉलफ्थेलिन अम्लीय माध्यम में रंगहीन (Colorless) रहता है और क्षारीय माध्यम में गुलाबी होता है।
  • (C) मेथिल ऑरेंज क्षारकों में गंध उत्पन्न करता है: मेथिल ऑरेंज एक संश्लेषित (Synthetic) रंग-परिवर्तन वाला सूचक है, न कि गंध या घ्राण सूचक।

#38. जब कोई धातु किसी अम्ल के साथ अभिक्रिया करती है, तो सामान्यतः क्या उत्पादित होता है?
(RRB Level 01 Stage I 27/12/2025 )

सही उत्तर: (D) लवण और हाइड्रोजन गैस (Salt and hydrogen gas)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • धातुओं की अम्लों के साथ अभिक्रिया: जब कोई सक्रिय धातु (जैसे जिंक, आयरन, एल्युमिनियम आदि) किसी तनु अम्ल (HCl या H2SO4) के साथ अभिक्रिया करती है, तो संगत लवण (Salt) और हाइड्रोजन गैस (H2) का निर्माण होता है।
  • सामान्य रासायनिक समीकरण:
    धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
  • उत्सर्जित होने वाली हाइड्रोजन गैस की पहचान के लिए जब इसके पास जलती हुई मोमबत्ती लाई जाती है, तो यह ‘पॉप’ (Pop) की ध्वनि के साथ जलती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) केवल लवण: यह अधूरा है क्योंकि अभिक्रिया के दौरान हाइड्रोजन गैस भी मुख्य रूप से निकलती है।
  • (B) लवण और ऑक्सीजन: धातु और अम्ल की अभिक्रिया में ऑक्सीजन गैस का उत्पादन नहीं होता है।
  • (C) लवण और जल: ‘लवण और जल’ का बनना उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization reaction) का उत्पाद है, जो अम्ल और क्षार के मिलने पर होता है, न कि धातु और अम्ल के मिलने पर।

#39. ऑक्सेलिक अम्ल का IUPAC नाम क्या है?
(RPF SI 2018 : 19 Dec, 2018 Shift 1)

सही उत्तर: (D) एथेनेडीओइक अम्ल (Ethanedioic acid)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ऑक्सेलिक अम्ल (Oxalic Acid): यह सबसे सरल डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल है, जिसका रासायनिक सूत्र (COOH)2 या HOOC-COOH होता है।
  • IUPAC नामकरण: चूंकि इसमें 2 कार्बन परमाणु होते हैं (अतः ‘एथेन’) और दो कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह (-COOH) जुड़े होते हैं (अतः ‘डिएोइक अम्ल’), इसलिए इसका आधिकारिक IUPAC नाम एथेनेडीओइक अम्ल है।
  • यह प्राकृतिक रूप से टमाटर, पालक और चौलाई जैसे पौधों में पाया जाता है, तथा कपड़ों से जंग के धब्बे हटाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) ब्यूटेनोइक अम्ल: यह 4 कार्बन परमाणुओं वाला एक मोनोकार्बोक्सिलिक अम्ल है (C3H7COOH), जो मक्खन में पाया जाता है।
  • (B) मेथेनोइक अम्ल: यह 1 कार्बन वाला सबसे सरल कार्बोक्सिलिक अम्ल है, जिसे सामान्यतः ‘फॉर्मिक अम्ल’ (HCOOH) कहा जाता है (चींटियों के डंक में मौजूद)।
  • (C) हेक्सेनेडीओइक अम्ल: इसे सामान्य रूप से ‘एडिपिक अम्ल’ ((CH2)4(COOH)2) कहा जाता है, जिसमें 6 कार्बन परमाणु होते हैं और इसका उपयोग नायलॉन-6,6 बनाने में होता है।

#40. अम्लों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
(RRB JE CBT I : – 2 June 2019 Shift 3)

सही उत्तर: (D) खट्टे होते हैं और नीले लिटमस को लाल रंग में बदल देते हैं

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्लों के गुण (Properties of Acids): भौतिक और रासायनिक रूप से सभी अम्ल स्वाद में खट्टे (Sour) होते हैं।
  • सूचक परीक्षणों के अनुसार, अम्ल नीले लिटमस पत्र (Blue litmus paper) के रंग को परिवर्तित करके उसे लाल (Red) कर देते हैं।
  • इसके अतिरिक्त, जलीय विलयन में ये आयनित होकर हाइड्रोजन आयन (H+) या हाइड्रोनियम आयन (H3O+) प्रदान करते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) और (B) कड़वे होने वाले विकल्प: कड़वा स्वाद और लाल लिटमस को नीला करना क्षारकों (Bases) का गुण है, अम्लों का नहीं।
  • (C) खट्टे होते हैं और लाल लिटमस को नीले रंग में बदलते हैं: खट्टे होना सही है, लेकिन लाल लिटमस को नीला करना क्षारकों का काम है, अम्ल लाल लिटमस को नीला नहीं करते।



#41. निम्नलिखित में से किस विलयन में हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता सबसे अधिक है?
(RRB NTPC CBT-I : 11 Mar 2021 Shift 1)

सही उत्तर: (D) pH = 4

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • pH और हाइड्रोजन आयन सांद्रता का संबंध: pH मान, विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयनों (H+) की सांद्रता के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional) होता है। इसका अर्थ है कि जितना कम pH मान होगा, हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता उतनी ही अधिक होगी
  • दिए गए विकल्पों में pH मान 4 सबसे कम है, अतः इस विलयन में H+ आयनों की सांद्रता सबसे अधिक होगी और यह सबसे अधिक अम्लीय होगा।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) pH = 5: इसमें pH मान 4 से अधिक है, इसलिए इसमें हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता (pH = 4 की तुलना में) कम होगी।
  • (B) pH = 10 और (C) pH = 8: ये दोनों मान 7 से अधिक हैं, जो क्षारीय विलयनों को दर्शाते हैं। इनमें हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) अधिक होते हैं और हाइड्रोजन आयन (H+) बहुत कम होते हैं।

#42. संयुग्मित अपकर्षी बेंजोकेन के निर्माण के लिए फिनोल को किस अम्ल के साथ ऑक्सीकृत किया जाता है?
(RPF SI 2018 : 11 Jan 2019 Shift 3)

सही उत्तर: (D) सल्फ्यूरिक अम्ल (या क्रोमिक अम्ल / सांद्र ऑक्सीकारक माध्यम)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • फिनोल का ऑक्सीकरण: कार्बनिक रसायन विज्ञान में, जब फिनोल या उसके व्युत्पन्न यौगिकों का ऑक्सीकरण किया जाता है, तो तीव्र ऑक्सीकारकों (जैसे सोडियम डाइक्रोमेट और सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण यानी क्रोमिक अम्ल, या अन्य प्रबल अम्लीय माध्यम) का उपयोग किया जाता है।
  • इस प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से एरोमैटिक वलय में विशिष्ट क्रियात्मक समूहों का प्रतिस्थापन और संरचनात्मक रूपांतरण किया जाता है, जो औषधीय यौगिकों और उनके precursors के संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) कार्बोक्सिलिक अम्ल: यह एक सामान्य क्रियात्मक समूह (-COOH) है, न कि विशिष्ट ऑक्सीकारक अभिकर्मक।
  • (C) बेंजोइक अम्ल: यह स्वयं एक एरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल है जिसका उपयोग ऑक्सीकरण के लिए अभिकर्मक के रूप में नहीं किया जाता।
  • अन्य विकल्प (जैसे (B) क्रोमेटिक/क्रोमिक अम्ल और (D) सल्फ्यूरिक अम्ल) ऑक्सीकरण प्रक्रिया में उत्प्रेरक या माध्यम की भूमिका निभाते हैं, जिनमें सल्फ्यूरिक अम्ल अम्लीय माध्यम प्रदान करता है।

#43. क्षार का रंग क्या है?
(RRB JE 24 May 2019 Shift 2 CBT 1)

सही उत्तर: (A) फिनोफ्थेलिन के साथ गुलाबी और मिथाइल ऑरेंज के साथ पीला

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • सूचकों (Indicators) का क्षारीय माध्यम में रंग परिवर्तन: अम्ल और क्षार की पहचान के लिए रासायनिक सूचकों का उपयोग किया जाता है।
  • फिनोफ्थेलिन (Phenolphthalein): यह एक संश्लेषित सूचक है जो अम्लीय माध्यम में रंगहीन (Colorless) रहता है, लेकिन क्षारीय माध्यम में यह गहरा गुलाबी (Pink) रंग देता है।
  • मिथाइल ऑरेंज (Methyl Orange): यह अम्लीय माध्यम में लाल रंग देता है, जबकि क्षारीय माध्यम में यह पीला (Yellow) रंग प्रदर्शित करता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) फिनोफ्थेलिन के साथ नीला: फिनोफ्थेलिन क्षार के साथ नीला रंग नहीं, बल्कि गुलाबी रंग देता है।
  • (C) और (D) वाले विकल्प: इनमें फिनोफ्थेलिन के साथ पीले या नीले रंग का उल्लेख है जो वैज्ञानिक रूप से गलत है, क्योंकि फिनोफ्थेलिन केवल गुलाबी रंग देता है।

#44. जब अम्ल को जल में मिलाया जाता है, तो क्या होता है?
(RRB Level 01 Stage I 28/11/2024 Shift 1)

सही उत्तर: (A) यह प्रति इकाई आयतन में हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता को बढ़ा देगा

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • अम्ल का जलीय विलयन में व्यवहार (Dilution of Acid): जब किसी अम्ल (जैसे HCl) को जल में घोला जाता है, तो यह वियोजित होकर हाइड्रोजन आयन (H+) उत्पन्न करता है।
  • ये मुक्त हाइड्रोजन आयन अकेले नहीं रह सकते, इसलिए ये तुरंत जल के अणुओं (H2O) के साथ संयोजित होकर हाइड्रोनियम आयन (H3O+) का निर्माण करते हैं।
  • रासायनिक समीकरण: HCl + H2O → H3O+ + Cl
  • परिणामस्वरूप, जल में अम्ल मिलाने पर प्रति इकाई आयतन में हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता में वृद्धि हो जाती है, जिससे विलयन अम्लीय हो जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) हाइड्रॉक्सील आयनों (OH) की सांद्रता बढ़ा देगा: हाइड्रॉक्सील आयन क्षारकों द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं, अम्लों द्वारा नहीं।
  • (C) आयनों की सांद्रता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा: अम्ल मिलाने से आयनों (विशेषकर H3O+) की सांद्रता में भारी वृद्धि होती है।
  • (D) हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता को घटा देगा: अम्ल जल में घुलकर H3O+ को बढ़ाते हैं, घटाते नहीं।

#45. साधारण नमक का रासायनिक सूत्र क्या है?
(RRB NTPC CBT-I : 28 Jan 2021 Shift 1)

सही उत्तर: (D) NaCl (सोडियम क्लोराइड)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • साधारण नमक (Common Salt): हमारे द्वारा दैनिक भोजन में उपयोग किए जाने वाले साधारण नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड है और इसका रासायनिक सूत्र NaCl होता है।
  • यह एक उदासीन आयनिक यौगिक है जो एक प्रबल अम्ल (HCl) और एक प्रबल क्षार (NaOH) की उदासीनीकरण अभिक्रिया द्वारा बनता है।
  • समुद्री जल इसका मुख्य प्राकृतिक स्रोत है। इसके अलावा, इसका उपयोग विभिन्न रासायनिक यौगिकों (जैसे धावन सोडा, बेकिंग सोडा, और कास्टिक सोडा) के निर्माण में कच्चे माल के रूप में भी किया जाता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) NaOH: यह सोडियम हाइड्रोक्साइड (कास्टिक सोडा) का रासायनिक सूत्र है, जो एक प्रबल क्षार है।
  • (B) KOH: यह पोटेशियम हाइड्रोक्साइड (कास्टिक पोटाश) का रासायनिक सूत्र है।
  • (C) HCl: यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का रासायनिक सूत्र है, जो एक प्रबल अम्ल है।



#46. दांतों की सफाई के लिए अतिरिक्त अम्ल को बेअसर करने और दांतों के क्षय को रोकने के लिए, निम्नलिखित में से कौन सा घटक टूथपेस्ट में एक सामान्य घटक है?
(RRB NTPC Graduate Level CBT-I : 09 Jun, 2025 Shift 2)

सही उत्तर: (D) क्षार (Base / Alkaline)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • दंत क्षय और pH का संबंध: मुँह के भीतर का pH मान जब 5.5 से कम हो जाता है, तब दाँतों का क्षय (Tooth decay) शुरू होता है। मुँह में मौजूद बैक्टीरिया भोजन के बाद बचे शर्करा और खाद्य कणों का अपघटन करके अम्ल बनाते हैं।
  • इस अतिरिक्त और हानिकारक अम्ल को बेअसर (Neutralize) करने के लिए टूथपेस्ट प्रकृति में सामान्यतः क्षारीय (Basic) होते हैं। ये मुँह की अम्लता को neutral करके दाँतों के इनेमल (कैल्शियम फॉस्फेट) को सुरक्षित रखते हैं।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) लवण (Salt): हालांकि कुछ टूथपेस्टों में स्वाद या मसूड़ों के लिए लवण मिलाए जाते हैं, लेकिन अम्ल को बेअसर करने का मुख्य रासायनिक कार्य क्षार का होता है।
  • (B) हैलोजन: हैलोजन (जैसे फ्लोरीन/फ्लोराइड) कैविटी रोकने में मदद करता है, लेकिन यहाँ अम्लता को उदासीन करने वाले बुनियादी घटक के रूप में ‘क्षार’ सबसे सटीक विकल्प है।
  • (C) अम्ल (Acid): यदि टूथपेस्ट में अम्ल मिलाया जाएगा, तो यह मुँह के pH को और अधिक गिरा देगा, जिससे दाँतों का क्षय तेजी से बढ़ जाएगा।

#47. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, उदासीनीकरण अभिक्रिया को सर्वोत्तम रूप से वर्णित करता है?
(RRB Level 01 Stage I 01/12/2025 )

सही उत्तर: (A) अम्ल + क्षार → लवण + जल (Acid + Base → Salt + Water)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): जब किसी अम्ल (Acid) और किसी क्षार (Base) की आपस में रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को उदासीन (Neutralize) कर देते हैं।
  • इस प्रक्रिया के फलस्वरूप मुख्य रूप से लवण (Salt) और जल (H2O) का निर्माण होता है, तथा ऊष्मा उत्पन्न होती है।
  • रासायनिक उदाहरण: HCl (अम्ल) + NaOH (क्षार) → NaCl (लवण) + H2O (जल)

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) क्षार + ऑक्साइड → लवण + जल: हालांकि धात्विक या अधात्विक ऑक्साइडों की क्षारीय/अम्लीय प्रतिक्रियाओं से लवण और जल बन सकते हैं, लेकिन यह ‘उदासीनीकरण’ की मानक और सर्वोत्तम परिभाषा नहीं है।
  • (C) अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन: यह धातु और अम्ल की अभिक्रिया (विस्थापन अभिक्रिया) है, जिससे हाइड्रोजन गैस निकलती है, न कि उदासीनीकरण।
  • (D) अम्ल + लवण → जल: यह रासायनिक रूप से एक अमान्य या गलत समीकरण है।

#48. निम्नलिखित में से किस यौगिक का जल में विलीन करने पर pH मान सबसे अधिक होगा?
(RRB Level 01 Stage I 03/02/2026 )

सही उत्तर: (A) सोडियम हाइड्रोक्साइड (Sodium hydroxide)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • pH मान और विलयन की प्रकृति: pH स्केल पर 7 से अधिक मान वाले विलयन क्षारीय होते हैं, और pH मान जितना अधिक होगा, विलयन की क्षारीयता तथा हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH) की सांद्रता उतनी ही अधिक होगी।
  • सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH): यह एक प्रबल क्षार (Strong base) है। जब इसे जल में घोला जाता है, तो यह पूरी तरह से वियोजित होकर अत्यधिक मात्रा में OH आयन देता है, जिसके कारण इसका pH मान बहुत उच्च (लगभग 13 या 14 के करीब) होता है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (B) सिरका विलयन (Vinegar): इसमें एसिटिक अम्ल होता है, जो प्रकृति में अम्लीय है (pH मान लगभग 2.5 से 3 होता है)।
  • (C) नींबू का रस (Lemon juice): इसमें साइट्रिक अम्ल होता है, जो अम्लीय होने के कारण कम pH (लगभग 2.2) दर्शाता है।
  • (D) हाइड्रोजन क्लोराइड गैस (HCl): जल में घुलने पर यह एक प्रबल अम्ल बनाता है, जिसका pH मान बहुत कम (0 या 1 के करीब) होता है।

#49. ऐनोडीकरण (Anodising) प्रक्रम में किस अम्ल का उपयोग किया जाता है?
(RRB NTPC CBT-I : 30 Jan 2021 Shift 2)

सही उत्तर: (D) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (Dilute sulphuric acid)

💡 विस्तृत नोट्स (Detailed Notes):
  • ऐनोडीकरण (Anodising): यह एल्युमिनियम या अन्य धातुओं पर ऑक्साइड की एक मोटी, सुरक्षात्मक परत बनाने की एक इलेक्ट्रोडैमिक प्रक्रिया है ताकि उन्हें संक्षारण (Corrosion) से बचाया जा सके।
  • इस प्रक्रिया में साफ किए गए एल्युमिनियम लेख को एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) बनाया जाता है और इलेक्ट्रोलाइट के रूप में तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के विलयन का उपयोग किया जाता है।
  • विद्युत धारा प्रवाहित होने पर एनोड पर ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है, जो एल्युमिनियम के साथ अभिक्रिया करके उसकी सतह पर एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) की मजबूत परत बना देती है।

🔍 अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये गलत क्यों हैं?):
  • (A) तनु एसिटिक अम्ल: यह एक दुर्बल कार्बनिक अम्ल है, जो एनोडाइजिंग के लिए आवश्यक विद्युत अपघट्य (electrolyte) के रूप में उपयुक्त नहीं है।
  • (B) तनु नाइट्रिक अम्ल और (C) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल: ये अम्ल एल्युमिनियम सतह पर ऑक्साइड की एकसमान और सुरक्षात्मक मोटी परत बनने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं या धातु के साथ अवांछित प्रतिक्रिया करते हैं।
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अम्ल क्षार और लवण के महत्वपूर्ण प्रश्न